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हििंदी साहित्य मार्गदर्गन
March 18, 2014
Authored by: Nisheeth Ranjan
मधुर्ाऱा - िररविंर्राय बच्चन
हििंदी साहित्य मार्गदर्...
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भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014
मधुर्ाऱा - िररविंर्राय बच्चन
हहॊदी ...
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भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014
उठा कल्ऩना के हाथों से स्वमॊ उसे ऩी...
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भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014
डाॉट डऩट भधुप्रवक्रे ता की ध्वननत ऩ...
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ऩॊडडत, भोलभन, ऩाहदयमों के पॊ दों को...
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भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014
छैर छफीरा, यलसमा साकी, अरफेरा ऩीनेव...
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भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014
फनी यहे वह भहदय प्रऩऩासा तृप्त न जो...
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भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014
झूभ झऩक भद-झॊप्रऩत होते, उऩवन क्मा ...
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भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014
फकसी ओय भैं आॉखें पे रूॉ , हदखराई द...
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भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014
ऩीकय खेत खड़े रहयाते, बायत ऩावन भधु...
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फैय फढ़ाते भल्स्जद भल्न्द्दय भेर क...
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फकसभें फकतना दभ खभ, इसको खूफ सभझती...
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एक फाय ही तो लभरनी है जीवन की मह भ...
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लसॊधॉ ु-तृषा दी फकसने यचकय बफॊदु-फ...
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जगती के ऩहरे साकी से जूझ यही है भध...
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ऩथथक, प्माय से ऩीना इसको फपय न लभर...
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फकन्द्तु न बूरा भयकय के बी ऩीनेवार...
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आॉणखभचौरी खेर यही है भुझसे भेयी भध...
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फकस्भत भें था अवघट भयघट, ढूॉढ़ यहा...
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भद, भहदया, भधु, हारा सुन-सुन कय ही...
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जरा हृदम की बट्टी खीॊची भैंने आॉसू...
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फकतने होठों को यक्खेगी माद बरा भाद...
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भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014
भहदयारम के द्वाय ठोकता फकस्भत का छ...
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ल्जन अधयों को छु ए, फना दे भस्त उन...
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भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014
फड़े-फड़े नाज़ों से भैंने ऩारी है ...
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मधुशाला - हरिवंशराय बच्चन | Madhushala In Hindi

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A masterpiece poem by the great hindi author Mr.Harivansh Rai Bachchan. One of the best motivational poems of all time in hindi literature.

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मधुशाला - हरिवंशराय बच्चन | Madhushala In Hindi

  1. 1. हििंदी साहित्य मार्गदर्गन March 18, 2014 Authored by: Nisheeth Ranjan मधुर्ाऱा - िररविंर्राय बच्चन हििंदी साहित्य मार्गदर्गन
  2. 2. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 1 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 मधुर्ाऱा - िररविंर्राय बच्चन हहॊदी साहहत्म भागगदशगन भृदु बावों के अॊगूयों की आज फना रामा हारा, प्रिमतभ, अऩने ही हाथों से आज प्रऩराऊॉ गा प्मारा, ऩहरे बोग रगा रूॉ तेया फपय िसाद जग ऩाएगा, सफसे ऩहरे तेया स्वागत कयती भेयी भधुशारा।।१। प्मास तुझे तो, प्रवश्व तऩाकय ऩूणग ननकारूॉगा हारा, एक ऩाॉव से साकी फनकय नाचूॉगा रेकय प्मारा, जीवन की भधुता तो तेये ऊऩय कफ का वाय चुका, आज ननछावय कय दूॉगा भैं तुझ ऩय जग की भधुशारा।।२। प्रिमतभ, तू भेयी हारा है, भैं तेया प्मासा प्मारा, अऩने को भुझभें बयकय तू फनता है ऩीनेवारा, भैं तुझको छक छरका कयता, भस्त भुझे ऩी तू होता, एक दूसये की हभ दोनों आज ऩयस्ऩय भधुशारा।।३। बावुकता अॊगूय रता से खीॊच कल्ऩना की हारा, कप्रव साकी फनकय आमा है बयकय कप्रवता का प्मारा, कबी न कण-बय खारी होगा राख प्रऩएॉ, दो राख प्रऩएॉ! ऩाठकगण हैं ऩीनेवारे, ऩुस्तक भेयी भधुशारा।।४। भधुय बावनाओॊ की सुभधुय ननत्म फनाता हूॉ हारा, बयता हूॉ इस भधु से अऩने अॊतय का प्मासा प्मारा,
  3. 3. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 2 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 उठा कल्ऩना के हाथों से स्वमॊ उसे ऩी जाता हूॉ, अऩने ही भें हूॉ भैं साकी, ऩीनेवारा, भधुशारा।।५। भहदयारम जाने को घय से चरता है ऩीनेवारा, 'फकस ऩथ से जाऊॉ ?' असभॊजस भें है वह बोराबारा, अरग-अरग ऩथ फतराते सफ ऩय भैं मह फतराता हूॉ - 'याह ऩकड़ तू एक चरा चर, ऩा जाएगा भधुशारा।'। ६। चरने ही चरने भें फकतना जीवन, हाम, बफता डारा! 'दूय अबी है', ऩय, कहता है हय ऩथ फतरानेवारा, हहम्भत है न फढूॉ आगे को साहस है न फपरॉ ऩीछे, फकॊ कतगव्मप्रवभूढ़ भुझे कय दूय खड़ी है भधुशारा।।७। भुख से तू अप्रवयत कहता जा भधु, भहदया, भादक हारा, हाथों भें अनुबव कयता जा एक रलरत कल्ल्ऩत प्मारा, ध्मान फकए जा भन भें सुभधुय सुखकय, सुॊदय साकी का, औय फढ़ा चर, ऩथथक, न तुझको दूय रगेगी भधुशारा।।८। भहदया ऩीने की अलबराषा ही फन जाए जफ हारा, अधयों की आतुयता भें ही जफ आबालसत हो प्मारा, फने ध्मान ही कयते-कयते जफ साकी साकाय, सखे, यहे न हारा, प्मारा, साकी, तुझे लभरेगी भधुशारा।।९। सुन, करकल़ , छरछल़ भधुघट से थगयती प्मारों भें हारा, सुन, रूनझुन रूनझुन चर प्रवतयण कयती भधु साकीफारा, फस आ ऩहुॊचे, दुय नहीॊ कु छ, चाय कदभ अफ चरना है, चहक यहे, सुन, ऩीनेवारे, भहक यही, रे, भधुशारा।।१०। जरतयॊग फजता, जफ चुॊफन कयता प्मारे को प्मारा, वीणा झॊकृ त होती, चरती जफ रूनझुन साकीफारा,
  4. 4. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 3 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 डाॉट डऩट भधुप्रवक्रे ता की ध्वननत ऩखावज कयती है, भधुयव से भधु की भादकता औय फढ़ाती भधुशारा।।११। भेहॊदी यॊल्जत भृदुर हथेरी ऩय भाणणक भधु का प्मारा, अॊगूयी अवगुॊठन डारे स्वणग वणग साकीफारा, ऩाग फैंजनी, जाभा नीरा डाट डटे ऩीनेवारे, इन्द्रधनुष से होड़ रगाती आज यॊगीरी भधुशारा।।१२। हाथों भें आने से ऩहरे नाज़ हदखाएगा प्मारा, अधयों ऩय आने से ऩहरे अदा हदखाएगी हारा, फहुतेये इनकाय कयेगा साकी आने से ऩहरे, ऩथथक, न घफया जाना, ऩहरे भान कयेगी भधुशारा।।१३। रार सुया की धाय रऩट सी कह न इसे देना ज्वारा, पे ननर भहदया है, भत इसको कह देना उय का छारा, ददग नशा है इस भहदया का प्रवगत स्भृनतमाॉ साकी हैं, ऩीड़ा भें आनॊद ल्जसे हो, आए भेयी भधुशारा।।१४। जगती की शीतर हारा सी ऩथथक, नहीॊ भेयी हारा, जगती के ठॊडे प्मारे सा ऩथथक, नहीॊ भेया प्मारा, ज्वार सुया जरते प्मारे भें दग्ध हृदम की कप्रवता है, जरने से बमबीत न जो हो, आए भेयी भधुशारा।।१५। फहती हारा देखी, देखो रऩट उठाती अफ हारा, देखो प्मारा अफ छू ते ही होंठ जरा देनेवारा, 'होंठ नहीॊ, सफ देह दहे, ऩय ऩीने को दो फूॊद लभरे' ऐसे भधु के दीवानों को आज फुराती भधुशारा।।१६। धभगग्रन्द्थ सफ जरा चुकी है, ल्जसके अॊतय की ज्वारा, भॊहदय, भसल्जद, थगरयजे, सफ को तोड़ चुका जो भतवारा,
  5. 5. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 4 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 ऩॊडडत, भोलभन, ऩाहदयमों के पॊ दों को जो काट चुका, कय सकती है आज उसी का स्वागत भेयी भधुशारा।।१७। रारानमत अधयों से ल्जसने, हाम, नहीॊ चूभी हारा, हषग-प्रवकॊ प्रऩत कय से ल्जसने, हा, न छु आ भधु का प्मारा, हाथ ऩकड़ रल्ज्जत साकी को ऩास नहीॊ ल्जसने खीॊचा, व्मथग सुखा डारी जीवन की उसने भधुभम भधुशारा।।१८। फने ऩुजायी िेभी साकी, गॊगाजर ऩावन हारा, यहे पे यता अप्रवयत गनत से भधु के प्मारों की भारा' 'औय लरमे जा, औय ऩीमे जा', इसी भॊत्र का जाऩ कये' भैं लशव की िनतभा फन फैठूॊ, भॊहदय हो मह भधुशारा।।१९। फजी न भॊहदय भें घडड़मारी, चढ़ी न िनतभा ऩय भारा, फैठा अऩने बवन भुअल्ज्ज़न देकय भल्स्जद भें तारा, रुटे ख़जाने नयप्रऩतमों के थगयीॊ गढ़ों की दीवायें, यहें भुफायक ऩीनेवारे, खुरी यहे मह भधुशारा।।२०। फड़े फड़े ऩरयवाय लभटें मों, एक न हो योनेवारा, हो जाएॉ सुनसान भहर वे, जहाॉ थथयकतीॊ सुयफारा, याज्म उरट जाएॉ, बूऩों की बाग्म सुरक्ष्भी सो जाए, जभे यहेंगे ऩीनेवारे, जगा कयेगी भधुशारा।।२१। सफ लभट जाएॉ, फना यहेगा सुन्द्दय साकी, मभ कारा, सूखें सफ यस, फने यहेंगे, फकन्द्तु, हराहर औ' हारा, धूभधाभ औ' चहर ऩहर के स्थान सबी सुनसान फनें, जगा कयेगा अप्रवयत भयघट, जगा कयेगी भधुशारा।।२२। फुया सदा कहरामेगा जग भें फाॉका, चॊचर प्मारा,
  6. 6. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 5 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 छैर छफीरा, यलसमा साकी, अरफेरा ऩीनेवारा, ऩटे कहाॉ से, भधुशारा औ' जग की जोड़ी ठीक नहीॊ, जग जजगय िनतदन, िनतऺण, ऩय ननत्म नवेरी भधुशारा।।२३। बफना प्रऩमे जो भधुशारा को फुया कहे, वह भतवारा, ऩी रेने ऩय तो उसके भुॉह ऩय ऩड़ जाएगा तारा, दास रोहहमों दोनों भें है जीत सुया की, प्मारे की, प्रवश्वप्रवजनमनी फनकय जग भें आई भेयी भधुशारा।।२४। हया बया यहता भहदयारम, जग ऩय ऩड़ जाए ऩारा, वहाॉ भुहयगभ का तभ छाए, महाॉ होलरका की ज्वारा, स्वगग रोक से सीधी उतयी वसुधा ऩय, दुख क्मा जाने, ऩढ़े भलसगमा दुननमा सायी, ईद भनाती भधुशारा।।२५। एक फयस भें, एक फाय ही जगती होरी की ज्वारा, एक फाय ही रगती फाज़ी, जरती दीऩों की भारा, दुननमावारों, फकन्द्तु, फकसी हदन आ भहदयारम भें देखो, हदन को होरी, यात हदवारी, योज़ भनाती भधुशारा।।२६। नहीॊ जानता कौन, भनुज आमा फनकय ऩीनेवारा, कौन अप्रऩरयचत उस साकी से, ल्जसने दूध प्रऩरा ऩारा, जीवन ऩाकय भानव ऩीकय भस्त यहे, इस कायण ही, जग भें आकय सफसे ऩहरे ऩाई उसने भधुशारा।।२७। फनी यहें अॊगूय रताएॉ ल्जनसे लभरती है हारा, फनी यहे वह लभटटी ल्जससे फनता है भधु का प्मारा,
  7. 7. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 6 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 फनी यहे वह भहदय प्रऩऩासा तृप्त न जो होना जाने, फनें यहें मे ऩीने वारे, फनी यहे मह भधुशारा।।२८। सकु शर सभझो भुझको, सकु शर यहती महद साकीफारा, भॊगर औय अभॊगर सभझे भस्ती भें क्मा भतवारा, लभत्रों, भेयी ऺेभ न ऩूछो आकय, ऩय भधुशारा की, कहा कयो 'जम याभ' न लभरकय, कहा कयो 'जम भधुशारा'।।२९। सूमग फने भधु का प्रवक्रे ता, लसॊधु फने घट, जर, हारा, फादर फन-फन आए साकी, बूलभ फने भधु का प्मारा, झड़ी रगाकय फयसे भहदया रयभणझभ, रयभणझभ, रयभणझभ कय, फेलर, प्रवटऩ, तृण फन भैं ऩीऊॉ , वषाग ऋतु हो भधुशारा।।३०। तायक भणणमों से सल्ज्जत नब फन जाए भधु का प्मारा, सीधा कयके बय दी जाए उसभें सागयजर हारा, भऻल्तऌा सभीयण साकी फनकय अधयों ऩय छरका जाए, पै रे हों जो सागय तट से प्रवश्व फने मह भधुशारा।।३१। अधयों ऩय हो कोई बी यस ल्जह्वा ऩय रगती हारा, बाजन हो कोई हाथों भें रगता यक्खा है प्मारा, हय सूयत साकी की सूयत भें ऩरयवनतगत हो जाती, आॉखों के आगे हो कु छ बी, आॉखों भें है भधुशारा।।३२। ऩौधे आज फने हैं साकी रे रे पू रों का प्मारा, बयी हुई है ल्जसके अॊदय ऩरयभर-भधु-सुरयबत हारा, भाॉग भाॉगकय भ्रभयों के दर यस की भहदया ऩीते हैं,
  8. 8. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 7 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 झूभ झऩक भद-झॊप्रऩत होते, उऩवन क्मा है भधुशारा!।३३। िनत यसार तरू साकी सा है, िनत भॊजरयका है प्मारा, छरक यही है ल्जसके फाहय भादक सौयब की हारा, छक ल्जसको भतवारी कोमर कू क यही डारी डारी हय भधुऋतु भें अभयाई भें जग उठती है भधुशारा।।३४। भॊद झकोयों के प्मारों भें भधुऋतु सौयब की हारा बय बयकय है अननर प्रऩराता फनकय भधु-भद-भतवारा, हये हये नव ऩल्रव, तरूगण, नूतन डारें, वल्ररयमाॉ, छक छक, झुक झुक झूभ यही हैं, भधुफन भें है भधुशारा।।३५। साकी फन आती है िात् जफ अरणा ऊषा फारा, तायक-भणण-भॊडडत चादय दे भोर धया रेती हारा, अगणणत कय-फकयणों से ल्जसको ऩी, खग ऩागर हो गाते, िनत िबात भें ऩूणग िकृ नत भें भुणखयत होती भधुशारा।।३६। उतय नशा जफ उसका जाता, आती है सॊध्मा फारा, फड़ी ऩुयानी, फड़ी नशीरी ननत्म ढरा जाती हारा, जीवन के सॊताऩ शोक सफ इसको ऩीकय लभट जाते सुया-सुप्त होते भद-रोबी जागृत यहती भधुशारा।।३७। अॊधकाय है भधुप्रवक्रे ता, सुन्द्दय साकी शलशफारा फकयण फकयण भें जो छरकाती जाभ जुम्हाई का हारा, ऩीकय ल्जसको चेतनता खो रेने रगते हैं झऩकी तायकदर से ऩीनेवारे, यात नहीॊ है, भधुशारा।।३८।
  9. 9. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 8 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 फकसी ओय भैं आॉखें पे रूॉ , हदखराई देती हारा फकसी ओय भैं आॉखें पे रूॉ , हदखराई देता प्मारा, फकसी ओय भैं देखूॊ, भुझको हदखराई देता साकी फकसी ओय देखूॊ, हदखराई ऩड़ती भुझको भधुशारा।।३९। साकी फन भुयरी आई साथ लरए कय भें प्मारा, ल्जनभें वह छरकाती राई अधय-सुधा-यस की हारा, मोथगयाज कय सॊगत उसकी नटवय नागय कहराए, देखो कै सों-कै सों को है नाच नचाती भधुशारा।।४०। वादक फन भधु का प्रवक्रे ता रामा सुय-सुभधुय-हारा, याथगननमाॉ फन साकी आई बयकय तायों का प्मारा, प्रवक्रे ता के सॊके तों ऩय दौड़ रमों, आराऩों भें, ऩान कयाती श्रोतागण को, झॊकृ त वीणा भधुशारा।।४१। थचत्रकाय फन साकी आता रेकय तूरी का प्मारा, ल्जसभें बयकय ऩान कयाता वह फहु यस-यॊगी हारा, भन के थचत्र ल्जसे ऩी-ऩीकय यॊग-बफयॊगे हो जाते, थचत्रऩटी ऩय नाच यही है एक भनोहय भधुशारा।।४२। घन श्माभर अॊगूय रता से णखॊच णखॊच मह आती हारा, अरूण-कभर-कोभर कलरमों की प्मारी, पू रों का प्मारा, रोर हहरोयें साकी फन फन भाणणक भधु से बय जातीॊ, हॊस भऻल्तऌा होते ऩी ऩीकय भानसयोवय भधुशारा।।४३। हहभ श्रेणी अॊगूय रता-सी पै री, हहभ जर है हारा, चॊचर नहदमाॉ साकी फनकय, बयकय रहयों का प्मारा, कोभर कू य-कयों भें अऩने छरकाती ननलशहदन चरतीॊ,
  10. 10. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 9 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 ऩीकय खेत खड़े रहयाते, बायत ऩावन भधुशारा।।४४। धीय सुतों के हृदम यक्त की आज फना यल्क्तभ हारा, वीय सुतों के वय शीशों का हाथों भें रेकय प्मारा, अनत उदाय दानी साकी है आज फनी बायतभाता, स्वतॊत्रता है तृप्रषत कालरका फलरवेदी है भधुशारा।।४५। दुतकाया भल्स्जद ने भुझको कहकय है ऩीनेवारा, ठु कयामा ठाकु यद्वाये ने देख हथेरी ऩय प्मारा, कहाॉ हठकाना लभरता जग भें बरा अबागे काफपय को? शयणस्थर फनकय न भुझे महद अऩना रेती भधुशारा।।४६। ऩथथक फना भैं घूभ यहा हूॉ, सबी जगह लभरती हारा, सबी जगह लभर जाता साकी, सबी जगह लभरता प्मारा, भुझे ठहयने का, हे लभत्रों, कष्ट नहीॊ कु छ बी होता, लभरे न भॊहदय, लभरे न भल्स्जद, लभर जाती है भधुशारा।।४७। सजें न भल्स्जद औय नभाज़ी कहता है अल्रातारा, सजधजकय, ऩय, साकी आता, फन ठनकय, ऩीनेवारा, शेख, कहाॉ तुरना हो सकती भल्स्जद की भहदयारम से थचय प्रवधवा है भल्स्जद तेयी, सदा सुहाथगन भधुशारा।।४८। फजी नफीयी औय नभाज़ी बूर गमा अल्रातारा, गाज थगयी, ऩय ध्मान सुया भें भग्न यहा ऩीनेवारा, शेख, फुया भत भानो इसको, साफ कहूॉ तो भल्स्जद को अबी मुगों तक लसखराएगी ध्मान रगाना भधुशारा!।४९। भुसरभान औ' हहन्द्दू है दो, एक, भगय, उनका प्मारा, एक, भगय, उनका भहदयारम, एक, भगय, उनकी हारा, दोनों यहते एक न जफ तक भल्स्जद भल्न्द्दय भें जाते,
  11. 11. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 10 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 फैय फढ़ाते भल्स्जद भल्न्द्दय भेर कयाती भधुशारा!।५०। कोई बी हो शेख नभाज़ी मा ऩॊडडत जऩता भारा, फैय बाव चाहे ल्जतना हो भहदया से यखनेवारा, एक फाय फस भधुशारा के आगे से होकय ननकरे, देखूॉ कै से थाभ न रेती दाभन उसका भधुशारा!।५१। औय यसों भें स्वाद तबी तक, दूय जबी तक है हारा, इतया रें सफ ऩात्र न जफ तक, आगे आता है प्मारा, कय रें ऩूजा शेख, ऩुजायी तफ तक भल्स्जद भल्न्द्दय भें घूॉघट का ऩट खोर न जफ तक झाॉक यही है भधुशारा।।५२। आज कये ऩयहेज़ जगत, ऩय, कर ऩीनी होगी हारा, आज कये इन्द्काय जगत ऩय कर ऩीना होगा प्मारा, होने दो ऩैदा भद का भहभूद जगत भें कोई, फपय जहाॉ अबी हैं भन ्ल् दय भल्स्जद वहाॉ फनेगी भधुशारा।।५३। मऻ अल्ग्न सी धधक यही है भधु की बटठी की ज्वारा, ऋप्रष सा ध्मान रगा फैठा है हय भहदया ऩीने वारा, भुनन कन्द्माओॊ सी भधुघट रे फपयतीॊ साकीफाराएॉ, फकसी तऩोवन से क्मा कभ है भेयी ऩावन भधुशारा।।५४। सोभ सुया ऩुयखे ऩीते थे, हभ कहते उसको हारा, रोणकरश ल्जसको कहते थे, आज वही भधुघट आरा, वेहदवहहत मह यस्भ न छोड़ो वेदों के ठेके दायों, मुग मुग से है ऩुजती आई नई नहीॊ है भधुशारा।।५५। वही वारूणी जो थी सागय भथकय ननकरी अफ हारा, यॊबा की सॊतान जगत भें कहराती 'साकीफारा', देव अदेव ल्जसे रे आए, सॊत भहॊत लभटा देंगे!
  12. 12. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 11 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 फकसभें फकतना दभ खभ, इसको खूफ सभझती भधुशारा।।५६। कबी न सुन ऩड़ता, 'इसने, हा, छू दी भेयी हारा', कबी न कोई कहता, 'उसने जूठा कय डारा प्मारा', सबी जानत के रोग महाॉ ऩय साथ फैठकय ऩीते हैं, सौ सुधायकों का कयती है काभ अके रे भधुशारा।।५७। श्रभ, सॊकट, सॊताऩ, सबी तुभ बूरा कयते ऩी हारा, सफक फड़ा तुभ सीख चुके महद सीखा यहना भतवारा, व्मथग फने जाते हो हहयजन, तुभ तो भधुजन ही अच्छे, ठु कयाते हहय भॊल् दयवारे, ऩरक बफछाती भधुशारा।।५८। एक तयह से सफका स्वागत कयती है साकीफारा, अऻ प्रवऻ भें है क्मा अॊतय हो जाने ऩय भतवारा, यॊक याव भें बेद हुआ है कबी नहीॊ भहदयारम भें, साम्मवाद की िथभ िचायक है मह भेयी भधुशारा।।५९। फाय फाय भैंने आगे फढ़ आज नहीॊ भाॉगी हारा, सभझ न रेना इससे भुझको साधायण ऩीने वारा, हो तो रेने दो ऐ साकी दूय िथभ सॊकोचों को, भेये ही स्वय से फपय सायी गूॉज उठेगी भधुशारा।।६०। कर? कर ऩय प्रवश्वास फकमा कफ कयता है ऩीनेवारा, हो सकते कर कय जड़ ल्जनसे फपय फपय आज उठा प्मारा, आज हाथ भें था, वह खोमा, कर का कौन बयोसा है, कर की हो न भुझे भधुशारा कार कु हटर की भधुशारा।।६१। आज लभरा अवसय, तफ फपय क्मों भैं न छकूॉ जी-बय हारा आज लभरा भौका, तफ फपय क्मों ढार न रूॉ जी-बय प्मारा, छेड़छाड़ अऩने साकी से आज न क्मों जी-बय कय रूॉ,
  13. 13. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 12 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 एक फाय ही तो लभरनी है जीवन की मह भधुशारा।।६२। आज सजीव फना रो, िेमसी, अऩने अधयों का प्मारा, बय रो, बय रो, बय रो इसभें, मौवन भधुयस की हारा, औय रगा भेये होठों से बूर हटाना तुभ जाओ, अथक फनू भैं ऩीनेवारा, खुरे िणम की भधुशारा।।६३। सुभुखी तुम्हाया, सुन्द्दय भुख ही, भुझको कन्द्चन का प्मारा छरक यही है ल्जसभॊ े भाणणक रूऩ भधुय भादक हारा, भैं ही साकी फनता, भैं ही ऩीने वारा फनता हूॉ जहाॉ कहीॊ लभर फैठे हभ तुम़ वहीॊ गमी हो भधुशारा।।६४। दो हदन ही भधु भुझे प्रऩराकय ऊफ उठी साकीफारा, बयकय अफ णखसका देती है वह भेये आगे प्मारा, नाज़, अदा, अॊदाजों से अफ, हाम प्रऩराना दूय हुआ, अफ तो कय देती है के वर फज़ग -अदाई भधुशारा।।६५। छोटे-से जीवन भें फकतना प्माय करॉ, ऩी रूॉ हारा, आने के ही साथ जगत भें कहरामा 'जानेवारा', स्वागत के ही साथ प्रवदा की होती देखी तैमायी, फॊद रगी होने खुरते ही भेयी जीवन-भधुशारा।।६६। क्मा ऩीना, ननद्गवन्द्द न जफ तक ढारा प्मारों ऩय प्मारा, क्मा जीना, ननयॊल् चत न जफ तक साथ यहे साकीफारा, खोने का बम, हाम, रगा है ऩाने के सुख के ऩीछे, लभरने का आनॊद न देती लभरकय के बी भधुशारा।।६७। भुझे प्रऩराने को राए हो इतनी थोड़ी-सी हारा! भुझे हदखाने को राए हो एक मही नछछरा प्मारा! इतनी ऩी जीने से अच्छा सागय की रे प्मास भरॉ,
  14. 14. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 13 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 लसॊधॉ ु-तृषा दी फकसने यचकय बफॊदु-फयाफय भधुशारा।।६८। क्मा कहता है, यह न गई अफ तेये बाजन भें हारा, क्मा कहता है, अफ न चरेगी भादक प्मारों की भारा, थोड़ी ऩीकय प्मास फढ़ी तो शेष नहीॊ कु छ ऩीने को, प्मास फुझाने को फुरवाकय प्मास फढ़ाती भधुशारा।।६९। लरखी बाग्म भें ल्जतनी फस उतनी ही ऩाएगा हारा, लरखा बाग्म भें जैसा फस वैसा ही ऩाएगा प्मारा, राख ऩटक तू हाथ ऩाॉव, ऩय इससे कफ कु छ होने का, लरखी बाग्म भें जो तेये फस वही लभरेगी भधुशारा।।७०। कय रे, कय रे कॊ जूसी तू भुझको देने भें हारा, दे रे, दे रे तू भुझको फस मह टूटा पू टा प्मारा, भैं तो सब्र इसी ऩय कयता, तू ऩीछे ऩछताएगी, जफ न यहूॉगा भैं, तफ भेयी माद कयेगी भधुशारा।।७१। ध्मान भान का, अऩभानों का छोड़ हदमा जफ ऩी हारा, गौयव बूरा, आमा कय भें जफ से लभट्टी का प्मारा, साकी की अॊदाज़ बयी णझड़की भें क्मा अऩभान धया, दुननमा बय की ठोकय खाकय ऩाई भैंने भधुशारा।।७२। ऺीण, ऺुर, ऺणबॊगुय, दुफगर भानव लभटटी का प्मारा, बयी हुई है ल्जसके अॊदय कटु-भधु जीवन की हारा, भृत्मु फनी है ननदगम साकी अऩने शत-शत कय पै रा, कार िफर है ऩीनेवारा, सॊसृनत है मह भधुशारा।।७३। प्मारे सा गढ़ हभें फकसी ने बय दी जीवन की हारा, नशा न बामा, ढारा हभने रे रेकय भधु का प्मारा, जफ जीवन का ददग उबयता उसे दफाते प्मारे से,
  15. 15. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 14 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 जगती के ऩहरे साकी से जूझ यही है भधुशारा।।७४। अऩने अॊगूयों से तन भें हभने बय री है हारा, क्मा कहते हो, शेख, नयक भें हभें तऩाएगी ज्वारा, तफ तो भहदया खूफ णखॊचेगी औय प्रऩएगा बी कोई, हभें नभक की ज्वारा भें बी दीख ऩड़ेगी भधुशारा।।७५। मभ आएगा रेने जफ, तफ खूफ चरूॉगा ऩी हारा, ऩीड़ा, सॊकट, कष्ट नयक के क्मा सभझेगा भतवारा, क्रू य, कठोय, कु हटर, कु प्रवचायी, अन्द्मामी मभयाजों के डॊडों की जफ भाय ऩड़ेगी, आड़ कयेगी भधुशारा।।७६। महद इन अधयों से दो फातें िेभ बयी कयती हारा, महद इन खारी हाथों का जी ऩर बय फहराता प्मारा, हानन फता, जग, तेयी क्मा है, व्मथग भुझे फदनाभ न कय, भेये टूटे हदर का है फस एक णखरौना भधुशारा।।७७। माद न आए दूखभम जीवन इससे ऩी रेता हारा, जग थचॊताओॊ से यहने को भुक्त, उठा रेता प्मारा, शौक, साध के औय स्वाद के हेतु प्रऩमा जग कयता है, ऩय भै वह योगी हूॉ ल्जसकी एक दवा है भधुशारा।।७८। थगयती जाती है हदन िनतदन िणमनी िाणों की हारा बग्न हुआ जाता हदन िनतदन सुबगे भेया तन प्मारा, रूठ यहा है भुझसे रूऩसी, हदन हदन मौवन का साकी सूख यही है हदन हदन सुन्द्दयी, भेयी जीवन भधुशारा।।७९। मभ आमेगा साकी फनकय साथ लरए कारी हारा, ऩी न होश भें फपय आएगा सुया-प्रवसुध मह भतवारा, मह अॊल् तभ फेहोशी, अॊनतभ साकी, अॊनतभ प्मारा है,
  16. 16. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 15 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 ऩथथक, प्माय से ऩीना इसको फपय न लभरेगी भधुशारा।८०। ढरक यही है तन के घट से, सॊथगनी जफ जीवन हारा, ऩत्र गयर का रे जफ अॊनतभ साकी है आनेवारा, हाथ स्ऩशग बूरे प्मारे का, स्वाद सुया जीव्हा बूरे कानो भें तुभ कहती यहना, भधु का प्मारा भधुशारा।।८१। भेये अधयों ऩय हो अॊनतभ वस्तु न तुरसीदर प्मारा भेयी जीव्हा ऩय हो अॊनतभ वस्तु न गॊगाजर हारा, भेये शव के ऩीछे चरने वारों माद इसे यखना याभ नाभ है सत्म न कहना, कहना सच्ची भधुशारा।।८२। भेये शव ऩय वह योमे, हो ल्जसके आॊसू भें हारा आह बये वो, जो हो सुरयबत भहदया ऩी कय भतवारा, दे भुझको वो काॊधा ल्जनके ऩग भद डगभग होते हों औय जरूॊ उस ठौय जहाॊ ऩय कबी यही हो भधुशारा।।८३। औय थचता ऩय जामे उॊढेरा ऩत्र न नित का, ऩय प्मारा कॊ ठ फॊधे अॊगूय रता भें भध्म न जर हो, ऩय हारा, िाण प्रिमे महद श्राध कयो तुभ भेया तो ऐसे कयना ऩीने वारों को फुरवा कय खुरवा देना भधुशारा।।८४। नाभ अगय कोई ऩूछे तो, कहना फस ऩीनेवारा काभ ढारना, औय ढारना सफको भहदया का प्मारा, जानत प्रिमे, ऩूछे महद कोई कह देना दीवानों की धभग फताना प्मारों की रे भारा जऩना भधुशारा।।८५। ऻात हुआ मभ आने को है रे अऩनी कारी हारा, ऩॊडडत अऩनी ऩोथी बूरा, साधू बूर गमा भारा, औय ऩुजायी बूरा ऩूजा, ऻान सबी ऻानी बूरा,
  17. 17. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 16 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 फकन्द्तु न बूरा भयकय के बी ऩीनेवारा भधुशारा।।८६। मभ रे चरता है भुझको तो, चरने दे रेकय हारा, चरने दे साकी को भेये साथ लरए कय भें प्मारा, स्वगग, नयक मा जहाॉ कहीॊ बी तेया जी हो रेकय चर, ठौय सबी हैं एक तयह के साथ यहे महद भधुशारा।।८७। ऩाऩ अगय ऩीना, सभदोषी तो तीनों - साकी फारा, ननत्म प्रऩरानेवारा प्मारा, ऩी जानेवारी हारा, साथ इन्द्हें बी रे चर भेये न्द्माम मही फतराता है, कै द जहाॉ भैं हूॉ, की जाए कै द वहीॊ ऩय भधुशारा।।८८। शाॊत सकी हो अफ तक, साकी, ऩीकय फकस उय की ज्वारा, 'औय, औय' की यटन रगाता जाता हय ऩीनेवारा, फकतनी इच्छाएॉ हय जानेवारा छोड़ महाॉ जाता! फकतने अयभानों की फनकय कब्र खड़ी है भधुशारा।।८९। जो हारा भैं चाह यहा था, वह न लभरी भुझको हारा, जो प्मारा भैं भाॉग यहा था, वह न लभरा भुझको प्मारा, ल्जस साकी के ऩीछे भैं था दीवाना, न लभरा साकी, ल्जसके ऩीछे था भैं ऩागर, हा न लभरी वह भधुशारा!।९०। देख यहा हूॉ अऩने आगे कफ से भाणणक-सी हारा, देख यहा हूॉ अऩने आगे कफ से कॊ चन का प्मारा, 'फस अफ ऩामा!'- कह-कह कफ से दौड़ यहा इसके ऩीछे, फकॊ तु यही है दूय क्षऺनतज-सी भुझसे भेयी भधुशारा।।९१। कबी ननयाशा का तभ नघयता, नछऩ जाता भधु का प्मारा, नछऩ जाती भहदया की आबा, नछऩ जाती साकीफारा, कबी उजारा आशा कयके प्मारा फपय चभका जाती,
  18. 18. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 17 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 आॉणखभचौरी खेर यही है भुझसे भेयी भधुशारा।।९२। 'आ आगे' कहकय कय ऩीछे कय रेती साकीफारा, होंठ रगाने को कहकय हय फाय हटा रेती प्मारा, नहीॊ भुझे भारूभ कहाॉ तक मह भुझको रे जाएगी, फढ़ा फढ़ाकय भुझको आगे, ऩीछे हटती भधुशारा।।९३। हाथों भें आने-आने भें, हाम, फपसर जाता प्मारा, अधयों ऩय आने-आने भें हाम, ढुरक जाती हारा, दुननमावारो, आकय भेयी फकस्भत की ख़ूफी देखो, यह-यह जाती है फस भुझको लभरते-लभरते भधुशारा।।९४। िाप्म नही है तो, हो जाती रुप्त नहीॊ फपय क्मों हारा, िाप्म नही है तो, हो जाता रुप्त नहीॊ फपय क्मों प्मारा, दूय न इतनी हहम्भत हारॉ, ऩास न इतनी ऩा जाऊॉ , व्मथग भुझे दौड़ाती भर भें भृगजर फनकय भधुशारा।।९५। लभरे न, ऩय, ररचा ररचा क्मों आकु र कयती है हारा, लभरे न, ऩय, तयसा तयसाकय क्मों तड़ऩाता है प्मारा, हाम, ननमनत की प्रवषभ रेखनी भस्तक ऩय मह खोद गई 'दूय यहेगी भधु की धाया, ऩास यहेगी भधुशारा!'।९६। भहदयारम भें कफ से फैठा, ऩी न सका अफ तक हारा, मत्न सहहत बयता हूॉ, कोई फकॊ तु उरट देता प्मारा, भानव-फर के आगे ननफगर बाग्म, सुना प्रवद्मारम भें, 'बाग्म िफर, भानव ननफगर' का ऩाठ ऩढ़ाती भधुशारा।।९७। फकस्भत भें था खारी खप्ऩय, खोज यहा था भैं प्मारा, ढूॉढ़ यहा था भैं भृगनमनी, फकस्भत भें थी भृगछारा, फकसने अऩना बाग्म सभझने भें भुझसा धोखा खामा,
  19. 19. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 18 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 फकस्भत भें था अवघट भयघट, ढूॉढ़ यहा था भधुशारा।।९८। उस प्मारे से प्माय भुझे जो दूय हथेरी से प्मारा, उस हारा से चाव भुझे जो दूय अधय से है हारा, प्माय नहीॊ ऩा जाने भें है, ऩाने के अयभानों भें! ऩा जाता तफ, हाम, न इतनी प्मायी रगती भधुशारा।।९९। साकी के ऩास है नतनक सी श्री, सुख, सॊप्रऩत की हारा, सफ जग है ऩीने को आतुय रे रे फकस्भत का प्मारा, येर ठेर कु छ आगे फढ़ते, फहुतेये दफकय भयते, जीवन का सॊघषग नहीॊ है, बीड़ बयी है भधुशारा।।१००। साकी, जफ है ऩास तुम्हाये इतनी थोड़ी सी हारा, क्मों ऩीने की अलबराषा से, कयते सफको भतवारा, हभ प्रऩस प्रऩसकय भयते हैं, तुभ नछऩ नछऩकय भुसकाते हो, हाम, हभायी ऩीड़ा से है क्रीड़ा कयती भधुशारा।।१०१। साकी, भय खऩकय महद कोई आगे कय ऩामा प्मारा, ऩी ऩामा के वर दो फूॊदों से न अथधक तेयी हारा, जीवन बय का, हाम, ऩरयश्रभ रूट लरमा दो फूॊदों ने, बोरे भानव को ठगने के हेतु फनी है भधुशारा।।१०२। ल्जसने भुझको प्मासा यक्खा फनी यहे वह बी हारा, ल्जसने जीवन बय दौड़ामा फना यहे वह बी प्मारा, भतवारों की ल्जहवा से हैं कबी ननकरते शाऩ नहीॊ, दुखी फनामा ल्जसने भुझको सुखी यहे वह भधुशारा!।१०३। नहीॊ चाहता, आगे फढ़कय छीनूॉ औयों की हारा, नहीॊ चाहता, धक्के देकय, छीनूॉ औयों का प्मारा, साकी, भेयी ओय न देखो भुझको तननक भरार नहीॊ, इतना ही क्मा कभ आॉखों से देख यहा हूॉ भधुशारा।।१०४।
  20. 20. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 19 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 भद, भहदया, भधु, हारा सुन-सुन कय ही जफ हूॉ भतवारा, क्मा गनत होगी अधयों के जफ नीचे आएगा प्मारा, साकी, भेये ऩास न आना भैं ऩागर हो जाऊॉ गा, प्मासा ही भैं भस्त, भुफायक हो तुभको ही भधुशारा।।१०५। क्मा भुझको आवश्मकता है साकी से भाॉगूॉ हारा, क्मा भुझको आवश्मकता है साकी से चाहूॉ प्मारा, ऩीकय भहदया भस्त हुआ तो प्माय फकमा क्मा भहदया से! भैं तो ऩागर हो उठता हूॉ सुन रेता महद भधुशारा।।१०६। देने को जो भुझे कहा था दे न सकी भुझको हारा, देने को जो भुझे कहा था दे न सका भुझको प्मारा, सभझ भनुज की दुफगरता भैं कहा नहीॊ कु छ बी कयता, फकन्द्तु स्वमॊ ही देख भुझे अफ शयभा जाती भधुशारा।।१०७। एक सभम सॊतुष्ट फहुत था ऩा भैं थोड़ी-सी हारा, बोरा-सा था भेया साकी, छोटा-सा भेया प्मारा, छोटे-से इस जग की भेये स्वगग फराएॉ रेता था, प्रवस्तृत जग भें, हाम, गई खो भेयी नन्द्ही भधुशारा!।१०८। फहुतेये भहदयारम देखे, फहुतेयी देखी हारा, बाॉत बाॉत का आमा भेये हाथों भें भधु का प्मारा, एक एक से फढ़कय, सुन्द्दय साकी ने सत्काय फकमा, जॉची न आॉखों भें, ऩय, कोई ऩहरी जैसी भधुशारा।।१०९। एक सभम छरका कयती थी भेये अधयों ऩय हारा, एक सभम झूभा कयता था भेये हाथों ऩय प्मारा, एक सभम ऩीनेवारे, साकी आलरॊगन कयते थे, आज फनी हूॉ ननजगन भयघट, एक सभम थी भधुशारा।।११०।
  21. 21. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 20 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 जरा हृदम की बट्टी खीॊची भैंने आॉसू की हारा, छरछर छरका कयता इससे ऩर ऩर ऩरकों का प्मारा, आॉखें आज फनी हैं साकी, गार गुराफी ऩी होते, कहो न प्रवयही भुझको, भैं हूॉ चरती फपयती भधुशारा!।१११। फकतनी जल्दी यॊग फदरती है अऩना चॊचर हारा, फकतनी जल्दी नघसने रगता हाथों भें आकय प्मारा, फकतनी जल्दी साकी का आकषगण घटने रगता है, िात नहीॊ थी वैसी, जैसी यात रगी थी भधुशारा।।११२। फूॉद फूॉद के हेतु कबी तुझको तयसाएगी हारा, कबी हाथ से नछन जाएगा तेया मह भादक प्मारा, ऩीनेवारे, साकी की भीठी फातों भें भत आना, भेये बी गुण मों ही गाती एक हदवस थी भधुशारा।।११३। छोड़ा भैंने ऩॊथ भतों को तफ कहरामा भतवारा, चरी सुया भेया ऩग धोने तोड़ा जफ भैंने प्मारा, अफ भानी भधुशारा भेये ऩीछे ऩीछे फपयती है, क्मा कायण? अफ छोड़ हदमा है भैंने जाना भधुशारा।।११४। मह न सभझना, प्रऩमा हराहर भैंने, जफ न लभरी हारा, तफ भैंने खप्ऩय अऩनामा रे सकता था जफ प्मारा, जरे हृदम को औय जराना सूझा, भैंने भयघट को अऩनामा जफ इन चयणों भें रोट यही थी भधुशारा।।११५। फकतनी आई औय गई ऩी इस भहदयारम भें हारा, टूट चुकी अफ तक फकतने ही भादक प्मारों की भारा, फकतने साकी अऩना अऩना काभ खतभ कय दूय गए, फकतने ऩीनेवारे आए, फकन्द्तु वही है भधुशारा।।११६।
  22. 22. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 21 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 फकतने होठों को यक्खेगी माद बरा भादक हारा, फकतने हाथों को यक्खेगा माद बरा ऩागर प्मारा, फकतनी शक्रों को यक्खेगा माद बरा बोरा साकी, फकतने ऩीनेवारों भें है एक अके री भधुशारा।।११७। दय दय घूभ यहा था जफ भैं थचल्राता - हारा! हारा! भुझे न लभरता था भहदयारम, भुझे न लभरता था प्मारा, लभरन हुआ, ऩय नहीॊ लभरनसुख लरखा हुआ था फकस्भत भें, भैं अफ जभकय फैठ गमा हूॉ, घूभ यही है भधुशारा।।११८। भैं भहदयारम के अॊदय हूॉ, भेये हाथों भें प्मारा, प्मारे भें भहदयारम बफॊबफत कयनेवारी है हारा, इस उधेड़-फुन भें ही भेया साया जीवन फीत गमा - भैं भधुशारा के अॊदय मा भेये अॊदय भधुशारा!।११९। फकसे नहीॊ ऩीने से नाता, फकसे नहीॊ बाता प्मारा, इस जगती के भहदयारम भें तयह-तयह की है हारा, अऩनी-अऩनी इच्छा के अनुसाय सबी ऩी भदभाते, एक सबी का भादक साकी, एक सबी की भधुशारा।।१२०। वह हारा, कय शाॊत सके जो भेये अॊतय की ज्वारा, ल्जसभें भैं बफॊबफत-िनतबफॊफत िनतऩर, वह भेया प्मारा, भधुशारा वह नहीॊ जहाॉ ऩय भहदया फेची जाती है, बेंट जहाॉ भस्ती की लभरती भेयी तो वह भधुशारा।।१२१। भतवाराऩन हारा से रेकय भैंने तज दी है हारा, ऩागरऩन रेकय प्मारे से, भैंने त्माग हदमा प्मारा, साकी से लभर, साकी भें लभर, अऩनाऩन भैं बूर गमा, लभर भधुशारा की भधुता भें बूर गमा भैं भधुशारा।।१२२।
  23. 23. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 22 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 भहदयारम के द्वाय ठोकता फकस्भत का छूॊछा प्मारा, गहयी, ठॊडी साॊसें बय बय कहता था हय भतवारा, फकतनी थोड़ी सी मौवन की हारा, हा, भैं ऩी ऩामा! फॊद हो गई फकतनी जल्दी भेयी जीवन भधुशारा।।१२३। कहाॉ गमा वह स्वथगगक साकी, कहाॉ गमी सुरयबत हारा, कहाॉ गमा स्वप्रऩनर भहदयारम, कहाॉ गमा स्वणणगभ प्मारा! ऩीनेवारों ने भहदया का भूल्म, हाम, कफ ऩहचाना? पू ट चुका जफ भधु का प्मारा, टूट चुकी जफ भधुशारा।।१२४। अऩने मुग भें सफको अनुऩभ ऻात हुई अऩनी हारा, अऩने मुग भें सफको अदबुत ऻात हुआ अऩना प्मारा, फपय बी वृद्धों से जफ ऩूछा एक मही उत्तय ऩामा - अफ न यहे वे ऩीनेवारे, अफ न यही वह भधुशारा!।१२५। 'भम' को कयके शुद्ध हदमा अफ नाभ गमा उसको, 'हारा' 'भीना' को 'भधुऩात्र' हदमा 'सागय' को नाभ गमा 'प्मारा', क्मों न भौरवी चौंकें , बफचकें नतरक-बत्रऩुॊडी ऩॊडडत जी 'भम-भहहपर' अफ अऩना री है भैंने कयके 'भधुशारा'।।१२६। फकतने भभग जता जाती है फाय-फाय आकय हारा, फकतने बेद फता जाता है फाय-फाय आकय प्मारा, फकतने अथों को सॊके तों से फतरा जाता साकी, फपय बी ऩीनेवारों को है एक ऩहेरी भधुशारा।।१२७। ल्जतनी हदर की गहयाई हो उतना गहया है प्मारा, ल्जतनी भन की भादकता हो उतनी भादक है हारा, ल्जतनी उय की बावुकता हो उतना सुन्द्दय साकी है, ल्जतना हो जो रयसक, उसे है उतनी यसभम भधुशारा।।१२८।
  24. 24. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 23 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 ल्जन अधयों को छु ए, फना दे भस्त उन्द्हें भेयी हारा, ल्जस कय को छू दे, कय दे प्रवक्षऺप्त उसे भेया प्मारा, आॉख चाय हों ल्जसकी भेये साकी से दीवाना हो, ऩागर फनकय नाचे वह जो आए भेयी भधुशारा।।१२९। हय ल्जहवा ऩय देखी जाएगी भेयी भादक हारा हय कय भें देखा जाएगा भेये साकी का प्मारा हय घय भें चचाग अफ होगी भेये भधुप्रवक्रे ता की हय आॊगन भें गभक उठेगी भेयी सुरयबत भधुशारा।।१३०। भेयी हारा भें सफने ऩाई अऩनी-अऩनी हारा, भेये प्मारे भें सफने ऩामा अऩना-अऩना प्मारा, भेये साकी भें सफने अऩना प्माया साकी देखा, ल्जसकी जैसी रथच थी उसने वैसी देखी भधुशारा।।१३१। मह भहदयारम के आॉसू हैं, नहीॊ-नहीॊ भादक हारा, मह भहदयारम की आॉखें हैं, नहीॊ-नहीॊ भधु का प्मारा, फकसी सभम की सुखदस्भृनत है साकी फनकय नाच यही, नहीॊ-नहीॊ फकव का हृदमाॊगण, मह प्रवयहाकु र भधुशारा।।१३२। कु चर हसयतें फकतनी अऩनी, हाम, फना ऩामा हारा, फकतने अयभानों को कयके ख़ाक फना ऩामा प्मारा! ऩी ऩीनेवारे चर देंगे, हाम, न कोई जानेगा, फकतने भन के भहर ढहे तफ खड़ी हुई मह भधुशारा!।१३३। प्रवश्व तुम्हाये प्रवषभम जीवन भें रा ऩाएगी हारा महद थोड़ी-सी बी मह भेयी भदभाती साकीफारा, शून्द्म तुम्हायी घडड़माॉ कु छ बी महद मह गुॊल्जत कय ऩाई, जन्द्भ सपर सभझेगी जग भें अऩना भेयी भधुशारा।।१३४।
  25. 25. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 24 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 फड़े-फड़े नाज़ों से भैंने ऩारी है साकीफारा, कलरत कल्ऩना का ही इसने सदा उठामा है प्मारा, भान-दुरायों से ही यखना इस भेयी सुकु भायी को, प्रवश्व, तुम्हाये हाथों भें अफ सौंऩ यहा हूॉ भधुशारा।।१३५। प्रऩरयशष्ट से स्वमॊ नहीॊ ऩीता, औयों को, फकन्द्तु प्रऩरा देता हारा, स्वमॊ नहीॊ छू ता, औयों को, ऩय ऩकड़ा देता प्मारा, ऩय उऩदेश कु शर फहुतेयों से भैंने मह सीखा है, स्वमॊ नहीॊ जाता, औयों को ऩहुॊचा देता भधुशारा। भैं कामस्थ कु रोदबव भेये ऩुयखों ने इतना ढ़ारा, भेये तन के रोहू भें है ऩचहऻल्तऌाय िनतशत हारा, ऩुश्तैनी अथधकाय भुझे है भहदयारम के आॉगन ऩय, भेये दादों ऩयदादों के हाथ बफकी थी भधुशारा। फहुतों के लसय चाय हदनों तक चढ़कय उतय गई हारा, फहुतों के हाथों भें दो हदन छरक झरक यीता प्मारा, ऩय फढ़ती तासीय सुया की साथ सभम के , इससे ही औय ऩुयानी होकय भेयी औय नशीरी भधुशारा। प्रऩत्र ऩऺ भें ऩुत्र उठाना अध्मग न कय भें, ऩय प्मारा फैठ कहीॊ ऩय जाना,गॊगा सागय भें बयकय हारा फकसी जगह की लभटटी बीगे, तृल्प्त भुझे लभर जाएगी तऩगण अऩगण कयना भुझको,ऩढ़ ऩढ़ कय के भधुशारा। -- िररविंर्राय बच्चन
  26. 26. ह िंदी साह त्य मार्गदर्गन www.hindisahityadarpan.in 25 भधुशारा-हरयवॊशयामफच्चन|3/18/2014 To read fabulous hindi stories, hindi quotations, Chanakya Neeti In hindi, Chanakya Sutra in Hindi, Great Hindi Inspirational Poems and many fabulous hindi articles visit: हििंदी साहित्य मार्गदर्गन

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