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मुंशी प्रेमचंद

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मुंशी प्रेमचंद

  1. 1. जन्म प्रेमचन्द का जन्म ३१ जलुाई सन ्१८८० को बनारस शहर से चार मील दूर समही गााँव में हुआ था। आपके पपता का नाम अजायब राय था। वह डाकखाने में मामूली नौकर के तौर पर काम करते थे।
  2. 2. शिक्षा  अपनी गरीबी से लड़ते हुए प्रेमचन्द ने अपनी पढाई मैट्रिक तक पहुुंचाई। जीवन के आरुंभ में आप अपने गााँव से दूर बनारस पढने के ललए नुंगे पााँव जाया करते थे। इसी बीच पपता का देहान्त हो गया। पढने का शौक था, आगे चलकर वकील बनना चाहते थे। मगर गरीबी ने तोड़ ट्रदया। स्कूल आने - जाने के झुंझट से बचने के ललए एक वकील साहब के यहााँ ट्यूशन पकड़ ललया और उसी के घर एक कमरा लेकर रहने लगे। ट्यूशन का पााँच रुपया लमलता था। पााँच रुपये में से तीन रुपये घर वालों को और दो रुपये से अपनी जजन्दगी की गाड़ी को आगे बढाते रहे। इस दो रुपये से क्या होता महीना भर तुंगी और अभाव का जीवन बबताते थे। इन्हीुं जीवन की प्रततकूल पररजस्थततयों में मैट्रिक पास ककया।
  3. 3. प्रेमचन्द ने अपने कथा - साट्रहत्य में ऐसे अनेक पवषयों को प्रस्तुत ककया है जजनका सम्बन्ध आम जनता से ट्रदखता है। आपके लेखन में प्रगततशील चचन्तन व्यापक रुप से पाया जाता है। कुछ पवषयों का सुंक्षिप्त पववरण : सामाजजकता, प्रेमचन्द और मानवतावाद, बाल – वववाह, ववधवा - वववाह, नारी : राजनीततक चेतना, नारी शिक्षा, पुरुष - नारी समानता/
  4. 4. िादी  आपके पपता ने केवल १५ साल की आयू में आपका पववाह करा ट्रदया। पत्नी उम्र में आपसे बड़ी और बदसूरत थी। पत्नी की सूरत और उसके जबान ने आपके जले पर नमक का काम ककया। आप स्वयुं ललखते हैं, "उम्र में वह मुझसे ज्यादा थी। जब मैंने उसकी सूरत देखी तो मेरा खून सूख गया।......." उसके साथ - साथ जबान की भी मीठी न थी। आपने अपनी शादी के फैसले पर पपता के बारे में ललखा है "पपताजी ने जीवन के अजन्तम सालों में एक ठोकर खाई और स्वयुं तो चगरे ही, साथ में मुझे भी डुबो ट्रदया: मेरी शादी बबना सोंचे समझे कर डाली।" हालाुंकक आपके पपताजी को भी बाद में इसका एहसास हुआ और काफी अफसोस ककया।
  5. 5. मृत्यु  सन ्१९३६ ई० में प्रेमचन्द बीमार रहने लगे। अपने इस बीमार काल में ही आपने "प्रगततशील लेखक सुंघ" की स्थापना में सहयोग ट्रदया। आचथिक कष्टों तथा इलाज ठीक से न कराये जाने के कारण ८ अक्टूबर १९३६ में आपका देहान्त हो गया। और इस तरह वह दीप सदा के ललए बुझ गया जजसने अपनी जीवन की बत्ती को कण-कण जलाकर भारतीयों का पथ आलोककत ककया।
  6. 6. प्रेमचंद की रचनाओंका संसार उपन्यास: वरदान, प्रततज्ञा, सेवा-सदन, प्रेमाश्रम, तनमिला, रुंगभूलम, कायाकल्प, गबन, कमिभूलम, गोदान, मनोरमा, मुंगल-सूत्र(अपूणि).

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