Aquatic ecosystems_August 2010

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This presentation gives details about the aquatic ecosystem in a pictorial form useful to teach school students

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  • जलीय पारिस्थितिक तंत्रों को मीठे पानी के पारिस्थितिक तंत्रों और समुद्री तंत्रों में वर्गीकृत किया जा सकता है। मीठे पानी के पारिस्थितिक तंत्रों को पुन: दो वर्गों में बाँटा जा सकता है, लोटिक (बहता पानी) पारिस्थितिक तंत्र और लैंटिक (स्थिर पानी) पारिस्थितिक तंत्र।
  • महासागर के पारिस्थितिक तंत्रों को खुले समुद्र, तटीय, और खाड़ी के पारिस्थितिक तंत्रों साथ ही मूँगे की चट्टानों और मैंग्रोव की श्रेणियों में बाँटा जा सकता है। इनमें से प्रत्येक जटिल पारिस्थितिक तंत्र है और इस प्रस्तुति में इन्हें विस्तार से नहीं बताया गया है।स्रोत- विकीपिडिया और http://www.epa.gov/watertrain/pdf/limnology.pdf 
  • महासागर के पारिस्थितिक तंत्रों को खुले समुद्र, तटीय, और खाड़ी के पारिस्थितिक तंत्रों साथ ही मूँगे की चट्टानों और मैंग्रोव की श्रेणियों में बाँटा जा सकता है। इनमें से प्रत्येक जटिल पारिस्थितिक तंत्र है और इस प्रस्तुति में इन्हें विस्तार से नहीं बताया गया है।स्रोत- विकीपिडिया और http://www.epa.gov/watertrain/pdf/limnology.pdf
  • Aquatic ecosystems_August 2010

    1. 1. जलीय पारिस्थितिक तंत्र<br />
    2. 2. जलीय पारिस्थितिक तंत्र<br />जल निकायों में स्थित पारिस्थितिक तंत्र<br />नदियाँ, धारायें और झरनें<br />मीठे पानी के पारिस्थितिक तंत्र<br />बहता पानी (नदियाँ, धारायें और झरनें)<br />स्थिर / धीमी गति से बहता पानी (तालाब, झीलें, पोखर/ दलदल)<br />lझीलें<br />तालाब<br />खुले समुद्र<br />समुद्री पारिस्थितिक तंत्र<br />खुले समुद्र<br />तटीय<br />खाड़ी और लवणीय दलदल<br />मूँगे की चट्टानें<br />मैनग्रोव्स<br />खाड़ी और लवणीय दलदल<br />मूँगें की चट्टानें और मैनग्रोव्स<br />
    3. 3. मीठे पानी के पारिस्थितिक तंत्र<br />पृथ्वी की सतह का 0.8% भाग मीठे पानी से ढंका है और उसमें पृथ्वी के कुल पानी का 0.009% भाग रहता है।<br />मीठे पानी के पारिस्थितिक तंत्रों में संसार की मछलियों की ज्ञात प्रजातियों में से 41% पाई जाती हैं।<br />मीठे पानी के पारिस्थितिक तंत्र के दो प्रकार हैं :<br />लोटिक : तेज़ बहते पानीवाले (नदियाँ, धारायें और झरनें)<br />लैंटिक: स्थिर / धीमी गति से बहते पानीवाले (तालाब, झीलें, पोखर)<br />
    4. 4. लोटिक पारिस्थितिक तंत्र<br />निरंतर बहते हुये पानी में रहनेवाली प्रजातियाँ उन परिस्थितियों<br />के अनुसार ढल गई होती हैं।<br />लोटिक पारिस्थितिक तंत्रों में (एक ही नदी या धारा के भीतर भी) बहुत परिवर्तन होता रहता है और वह इन कारकों द्वारा निर्धारित होता है :<br /><ul><li>धारा/ नदी के आधारतल का आकार (सूक्ष्म आवासतंत्र निर्मित कर सकता है)
    5. 5. धारा / नदी के आधारतल की ढाल
    6. 6. जल की मात्रा
    7. 7. धार का वेग
    8. 8. तेज़ बहते पानी में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है और इसलिये वह अधिक जैवविविधता को सहारा देता है
    9. 9. प्रकाश
    10. 10. तापमान
    11. 11. अधिकांश लोटिक प्रजातियाँ पॉइकिलोथर्म होती हैं, जिनका आंतरिक तापमान आसपास के बाहरी तापमान के साथ परिवर्तित होता है
    12. 12. जल की रासायनिक संरचना (जो बड़ी नदियों में बदल जाती है)</li></li></ul><li>लोटिक पारिस्थितिक तंत्र<br />सरीसृप(कछुए, मगरमच्छ, साँप)<br />उभयचर(सलामेंडर)<br />स्तनधारी(डॉल्फिन, समुद्री ऊदबिलाव)<br />सरीसृप<br />उभयचर<br />मछली<br />मछली<br />बड़े अकशेरूकीय<br />कीड़े<br />मॉलस्क (घोंघे, सीपी, बड़ी सीपी, छोटी सीपी) <br />क्रस्टेशियन्स (केंकड़े)<br />मेंढक<br />बड़े अकशेरूकीय<br />प्राथमिक उत्पादक<br />शैवाल, मॉसेस, लिवरवर्ट, डकवीड,<br />वॉटर हेसिन्थ<br />अपघटक<br />प्राथमिक उत्पादक<br />बैक्टीरिया<br />नदीतटीय<br />सूर्य के प्रकाश से<br />मिलनेवाले पोषक तत्व <br />
    13. 13. लेंटिक पारिस्थितिक तंत्र<br />झीलों में आंतरिक विषमता होती हैं और उनकी जलराशि सब दूर एक समान नहीं होती <br />झील के भीतर की जैव विविधता भी परिवर्तनशील होती है और इन कारकों पर निर्भर करती है<br />भौतिक परिस्थितियाँ<br />प्रकाश<br />तापमान<br />जल धाराएं<br />रासायनिक परिस्थितियाँ<br />पोषक तत्व<br />प्रदूषक<br />
    14. 14. झील के क्षेत्र<br />लिटोरल क्षेत्र<br />लिमनेटिक क्षेत्र (खुला पानी)<br />स्थलीय पौधे<br />बाहर निकले हुये पौधे<br />तैरनेवाले पौधे<br />जलमग्न<br />पौधे<br />यूफोटिक क्षेत्र<br />बेंथिक क्षेत्र<br />
    15. 15. झील के जीव-जंतु<br />ऐसे प्राणी जो जहाँ चाहे वहाँ जा सकते हैं<br />बड़े जीवप्लवक<br />मछली<br />उभयचर<br />ऐसे प्राणी जो जहाँ भी पानी उन्हें ले जाए वहाँ चले जाते हैं<br />जीवित प्राणी – प्लवक<br />पशु : जीवप्लवक<br />शैवाल : पादपप्लवक<br />जीवाणु : जीवाणुप्लवक<br />मृत प्राणी – मृत प्राणियों का अवशिष्ट<br />आंतरिक : झील के भीतर उत्पन्न<br />बाह्य : संग्रहण क्षेत्र से बह कर आने वाला <br />ऐसे प्राणी जो झील के तल पर रहते हैं<br />पशु<br />जलीय कीड़े, सीपी, घोंघे, इल्लियाँ, क्रे मछली<br />जीवाणु और फफूंद<br />नालियों से आई अपशिष्ट तलछट<br />पौधे<br />मैक्रोफाइट<br />पेरीफाइटॉन<br />
    16. 16. मत्सयभक्षी <br />मछली<br />खाते हैं<br />प्लवकभक्षी <br />मछली<br />खाते हैं<br />प्राणीप्लवक<br />खाते हैं<br />शैवाल<br />उपयोग करते हैं<br />पोषक तत्व<br />लीय<br />पुनर्चक्रण<br />बैंथिक (तलीय) <br />जीवI<br />झील की खाद्य-श्रृंखला<br />
    17. 17. झील में खाद्य और ऊर्जा का संजाल<br />बाहरी पोषक<br />सौर ऊर्जा<br />पुनर्चक्रित पोषक<br />प्राथमिक उत्पादक<br />प्राथमिक उपभोक्ता<br />उपघटक<br />द्वितीयक उपभोक्ता<br />पनुर्चक्रित पोषक तत्व<br />तृतीयक उपभोक्ता<br />बहिर्प्रवाह के <br />द्वारा क्षति<br />तलछट के द्वारा क्षति<br />
    18. 18. पेलेजिक<br />समुद्रीय<br />नेरिटिक<br />पानी का उच्च स्तर<br />एपीपेलेजिक<br />फोटिक<br />200m<br />पानी का निचला स्तर<br />मेसोपेलेजिक<br />सहलिटोरल या शैल्फ<br />10 डिग्री सेंटीग्रेड<br />700 to 1,000m<br />लिटोरल<br />बाथीयल<br />बेथीपेलेजिक<br />4 डिग्री सेंटीग्रेड<br />2000 to 1,000m<br />एफोटिक<br />बेन्थिक<br />एबीसलपेलजिक<br />एबीसल<br />6,000m<br />महासागर के क्षेत्र<br />हेडल<br />हेडापेलेजिक<br />10,000m<br />
    19. 19. समुद्री पारिस्थितिक तंत्र<br />पृथ्वी की सतह के 71% भाग पर फैले हुये हैं<br />खुले समुद्र<br />तटीय<br />खाड़ी और लवणीय दलदल<br />मूँगे की खाड़ियाँ और मैंग्रोव्स<br />प्रत्येक एक जटिल पारिस्थितिकीय तंत्र है<br />अन्य पारिस्थितिक तंत्रों के समान ही इनमें भी उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक होते हैं<br />http://www.minresco.com/australia<br />http://www.nu.ac.za<br />http://www.learnnc.org/<br />http://www.earthhistory.org.uk/<br />http://www.geocities.com<br />

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