Samarthya srot

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Samarthya srot

  1. 1. प्रात् स्भयणीम ऩूज्मऩाद वॊत श्री आवायाभजी फाऩू के वत्वॊग-प्रलचन वाभर्थमय स्रोत ननलेदन ऩूज्म फाऩू की वशज फोरचार भईऄ अनुबल वॊऩन्न गीतासान की भाधमता इव प्रकाय ननखय ु य आती शै कक वलद्रान इवभईऄ तत्त्ल-अभत ननशाय वकते शैं, वाधक काभ-वॊकल्ऩ क काॉटों को चनकय ृ े ु पक वकते शैं। वॊवायी जीलन जीने लारे वत्म की वाधना ऩय अग्रवय शोने को उत्वुक शो वकते ईऄ शैं। वमभनत ने ऩूज्म फाऩू की वशज फोरचार की धाया को वॊग्रशीत कयक ऩुस्तक क रूऩ भईऄ े े आऩक कयकभरों तक ऩशुॉचाने का फारमत्न ककमा शै । गुणग्राशी दृवद्श वे इवका राब उठाने की े कृऩा कयईऄ । वनातन धभय क उच्च मळखयों क अनुबल वॊऩन्न इन वॊत की अभतलाणी औयों तक े े ृ ऩशुॉचाकय ऩुण्म क बागी फनईऄ । े वलनीत, श्री मोग लेदान्त वेला वमभनत अभदालाद आश्रभ ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ अनुक्रभ ननलेदन............................................................................................................................................... 2 वाभर्थमय स्रोत....................................................................................................................................... 3 बऴणों का बूऴण् ळीर ......................................................................................................................... 9 ू वत्वॊग-वधा ...................................................................................................................................... 24 ु ळीर का दान ................................................................................................................................ 24 चतुयाई चूल्शे ऩडी........ .................................................................................................................. 27 गीता वे आत्भसान ऩामा ................................................................................................................ 31 ऩाॉच आद्ळमय .................................................................................................................................. 34 आठ ऩाऩों का घडा......................................................................................................................... 37 वत्वॊग-भहशभा ............................................................................................................................... 37 वलधेमात्भक जीलनदृवद्श.................................................................................................................... 40
  2. 2. तीन दरब चीजईऄ ................................................................................................................................ 41 ु य गीता भईऄ भधुय जीलन का भागय ............................................................................................................ 49 वख का स्रोत अऩने आऩ भईऄ ............................................................................................................... 81 ु ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ वाभर्थमय स्रोत यालण क जभाने भईऄ एक फडे वदाचायी, ळीर को धायण कयने लारे याजा चक्ललेण शुए। े फडा वादा जीलन था उनका। याजऩाट शोते शुए बी मोगी का जीलन जीते थे। प्रजा वे जो कय आता था, उवको प्रजा का खन-वा वभझते थे। उवका उऩमोग व्मक्तिगत वुख, ऐद्वमय, स्लाथय मा ू वलराव भईऄ बफल्कर नशीॊ शोने दे ते थे। याजभशर क ऩीछे खरी जभीन थी, उवभईऄ खेती कयक ु े ु े अऩना गुजाया कय रेते थे। शर जोतने क मरए फैर कशाॉ वे रामईऄ ? खजाना तो याज्म का था, े अऩना नशीॊ था। उवभईऄ वे तो खचय नशीॊ कयना चाहशए। .....तो याजा स्लमॊ फैर की जगश जत जाते ु थे औय उनकी ऩत्नी ककवान की जगश। इव प्रकाय ऩनत ऩत्नी खेती कयते औय जो पवर शोती उववे गजाया कयते। कऩाव फो दे ते। कपय घय भईऄ ताना-फनी कयक कऩडे फना रेते, खद्दय वे बी ु ु े भोटे । चक्ललेण याजा क याज्म भईऄ ककवी की अकार भत्मु नशीॊ शोती थी, अकार नशीॊ ऩडता था, े ृ प्रजा भईऄ ईभानदायी थी, वख-ळान्न्त थी। प्रजा अऩने याजा-यानी को वाषात ् मळल-ऩालयती का ु अलताय भानती थी। ऩलय त्मौशाय क हदनों भईऄ नगय क रोग इनक दळयन कयने आते थे। े े े ऩलय क हदन थे। कछ धनाढ्म भहशरामईऄ वज धजकय याजभशर भईऄ गईं। यानी वे मभरीॊ। े ु यानी क लस्त्र तो वादे , घय की ताना-फुनी कयक फनामे शुए भोटे -भोटे । अॊग ऩय कोई शीये - े े जलाशयात, वुलणय-अरॊकाय आहद कछ नशीॊ। कीभती लस्त्र-आबूऴणों वे, वलणय-अरॊकायों वे वजीधजी ु ु फडे घयाने की भहशराएॉ कशने रगीॊ- "अये यानी वाहशफा ! आऩ तो शभायी रक्ष्भी जी शैं। शभाये याज्म की भशायानी ऩलय क हदनों भईऄ ऐवे कऩडे ऩशनईऄ ? शभईऄ फडा द्ख शोता शै । आऩ इतनी भशान े ु वलबूनत की धभयऩत्नी ! .....औय इतने वादे , चचथडे जैवे कऩडे ! ऐवे कऩडे तो शभ नौकयानी को बी ऩशनने को नशीॊ दे ते। आऩ ऐवा जीलन बफताती शो ? शभईऄ तो आऩकी न्जन्दगी ऩय फशुत द्ख ु शोता शै ।" आदभी जैवा वुनता शै , दे य वलेय उवका प्रबाल चचत्त ऩय ऩडता शी शै । अगय वालधान न यशे तो कवॊग का यॊ ग रग शी जाता शै । शल्क वॊग का यॊ ग जल्दी रगता शै । अत् वालधान यशईऄ । ु े कवॊग वत्ऩथ वे वलचमरत कय दे ता शै । ु
  3. 3. दवयी भहशरा ने कशा् "दे खो जी ! शभाये मे शीये कवे चभक यशे शैं ! .... औय शभ तो ू ै आऩकी प्रजा शैं। आऩ शभायी यानी वाहशफा शैं। आऩक ऩाव तो शभवे बी ज्मादा कीभती े लस्त्रारॊकाय शोने चाहशए ?" तीवयी ने अऩनी अॊगूठी हदखामी। चौथी ने अऩने जेलय हदखामे। चक्ललेण की ऩत्नी तो एक औय उवको फशकाने लारी अनेक। उनक द्वावोच्छालाव, उनक वलरावी लामब्रेळन वे यानी हशर े े गई। ले न्स्त्रमाॉ तो चरी गईं रेककन चक्ललेण क घय भईऄ आग रग गई। े यानी ने फार खोर हदमे औय स्त्रीचरयत्र भईऄ उतय आई। याजा याज-दयफाय वे रौटे । दे खा तो दे ली जी का रूद्र स्लरूऩ ! ऩछा् ू "क्मा फात शै दे ली ?" "आऩ भझे भखय फना यशे शैं। भैं आऩकी यानी कवी ? आऩ ऐवे भशान ् वम्राट औय भैं आऩ ु ू ै जैवे वम्राट की ऩत्नी ऐवी दरयद्र ? भेये मे शार ?" "तुझे क्मा चाहशए ?" "ऩशरे लचन दो।" "शाॉ, लचन दे ता शूॉ। भाॉग।" "वुलणय-अरॊकाय, शीये जलाशयात, कीभती लस्त्र-आबूऴण..... जैवे भशायाननमों क ऩाव शोते शैं, े लैवी शी भेयी व्मलस्था शोनी चाहशए।" याजा लस्तुन्स्थनत वे सात शुए। ले वभझ गमे कक् "लस्त्रारॊकाय औय पळन की गुराभ ै भहशराओॊ ने इवभईऄ अऩनी वलरामवता का कचया बय हदमा शै । अऩना अन्त्कयण वजाने क फजाम े शाड-भाॊव को वजाने लारी अल्ऩभनत भाइमों ने इवे प्रबावलत कय हदमा शै । भेया उऩदे ळ भानेगी नशीॊ। इवक मरमे शीये -जलाशयात, गशने-कऩडे कशाॉ वे राऊ ? याज्म का खजाना तो प्रजा का खन े ॉ ू शै । प्रजा क खन का ळोऴण कयक, स्त्री का गुराभ शोकय, उववे उवको गशने ऩशनाऊ ? इतना े ू े ॉ नारामक भझे शोना नशीॊ शै । प्रजा का ळोऴण कयक औयत को आबूऴण दॉ ू ? धन कशाॉ वे राऊ ? ु े ॉ नीनत क्मा कशती शै ? नीनत कशती शै कक अऩने वे जो फरलान ् शो, धनलान शो औय दद्श शो तो उवका धन रे ु रेने वे कोई ऩाऩ नशीॊ रगता। धन तो भुझे चाहशए। नीनतमुि धन शोना चाहशए।' याजा वोचने रगे् "धनलान औय दद्श रोग तो भेये याज्म भईऄ बी शोंगे रेककन ले भुझवे ु फरलान नशीॊ शैं। ले भेये याज्म क आचश्रत शैं। दफर का धन छीनना ठीक नशीॊ।" े ु य वलचाय कयते-कयते अडोव-ऩडोव क याजाओॊ ऩय नजय गई। ले धनलान तो शोंगे, फेईभान े बी शोंगे रेककन फरलान बी नशीॊ थे। आखखय माद आमा कक यालण ऐवा शै । धनलान बी शै , फरलान बी शै औय दद्श बी शो गमा शै । उवका धन रेना नीनतमुि शै । ु
  4. 4. अऩने वे फरलान ् औय उवका धन ? माचना कयक नशीॊ, भाॉगकय नशीॊ, उधाय नशीॊ, दान े नशीॊ, चोयी कयक नशीॊ, मुक्ति वे औय शुक्भ वे रेना शै । े याजा ने एक चतुय लजीय को फुरामा औय कशा् "जाकय याजा यालण को कश दो कक दो भन वोना दे दे । दान-धभय क रूऩ भईऄ नशीॊ, ऋण क रूऩ भईऄ नशीॊ। याजा चक्ललेण का शुक्भ शै कक े े 'कय' क रूऩ भईऄ दो भन वोना दे दे ।" े लजीय गमा यालण की वबा भईऄ औय फोरा् "रॊकळ ! याजा चक्ललेण का आदे ळ शै , ध्मान े वे वनो।" ु यालण् "दे ल, दानल, भानल, मष, ककन्नय, गन्धलय आहद वफ ऩय रॊकाऩनत यालण का आदे ळ चरता शै औय उव यालण ऩय याजा चक्ललेण का आदे ळ ! शूॉऽऽऽ...." यालण गयज उठा। वलबीऴण आहद ने कशा् "याजन ! कछ बी शो, लश वन्दे ळलाशक शै , दत शै । उवकी फात ु ू वननी चाहशए।" ु यालण् "शाॉ, क्मा फोरते शो ?" यालण ने स्लीकृनत दी। लजीय् "दान क रूऩ भईऄ नशीॊ, ऋण क रूऩ भईऄ नशीॊ, रेककन याजा चक्ललेण का आदे ळ शै े े कक 'कय' क रूऩ भईऄ दो भन वोना दो, नशीॊ तो ठीक नशीॊ यशे गा। रॊका का याज्म खतये भईऄ ऩड े जामेगा।" चक्ललेण क लजीय ने अऩने स्लाभी का आदे ळ वुना हदमा। े यालण् "अये भच्छय ! इव यालण वे फडे-फडे चक्रलती डयते शैं औय लश जया वा चक्ललेण याजा ! भुझ ऩय 'कय' ? शूॉऽऽऽ..... अये ! इवको फाॉध दो, कद भईऄ डार दो।" यालण आगफफूरा शो ै गमा। वफने वराश दी् "भशायाज ! मश तो फेचाया अनुचय शै , चचट्ठी का चाकय। इवको कद ै कयना नीनत क वलरूद्ध शै । आऩ वोना न दईऄ , कोई शजय नशीॊ ककन्तु इवको छोड दईऄ । शभने याजा े चक्ललेण का नाभ वुना शै । लश फडा ळीरवम्ऩन्न याजा शै । फडा वज्जन, वदाचायी शै । उवक ऩाव े मोग-वाभर्थमय, वूक्ष्भ जगत का वाभर्थमय फशुत शै ।" "तो यालण क्मा कभ शै ?" "रॊकळ ! आऩ बी कभ नशी शै । रेककन लश याजा ळीर का ऩारन कयता शै ।" े "वफकी क्मा याम शै ?" ऩूये भॊबत्रभण्डर ऩय यालण ने नजय डारते शुए ऩूछा। "मा तो दो भन वोना दे दईऄ ......" "भैं वोना दे दॉ ू ?" वराशकायों की फात फीच वे शी काटते शुए यालण गयज उठा। "माचक बीख भाॉगने आमे तो दे दॉ ू रेककन भेये ऊऩय 'कय' ? भेये ऊऩय आदे ळ ? मश नशीॊ शोगा।" मवय धनकय यालण फोरा। ु "अच्छा, तो दत को फाशय ननकार दो।" ू चक्ललेण क लजीय को फाशय ननकार हदमा गमा। यालण भशर भईऄ गमा तो लात्तायराऩ कयता े शुआ भन्दोदयी वे फोरा्
  5. 5. "वप्रमे ! दननमाॉ भईऄ ऐवे भूखय बी याज्म कयते शैं। दे ल, दानल, भानल, मष, ककन्नय, गन्धलय ु आहद वफक वफ न्जववे बम खाते शैं , उव रॊकाऩनत यालण को ककवी भूखय चक्ललेण ने आदे ळ े बेज हदमा कक 'कय' क रूऩ भईऄ दो भन वोना दे दो। 'अये भन्दोदयी ! कवे कवे ऩागर याजा शैं े ै ै दननमाॉ भईऄ !" ु "नाथ ! चक्ललेण याजा फडे वदाचायी आदभी शैं। ळीरलान ् नये ळ शैं। आऩने क्मा ककमा ? दो भन वोना नशीॊ बेजा उनको ?" भन्दोदयी वलनीत बाल वे फोरी। "क्मा 'कय' क रूऩ भईऄ वोना दे दॉ ू ? रॊकळ वे ऊचा लश शोगा ?" यालण का क्रोध बबक े े ॉ उठा। "स्लाभी ! दे दे ते तो अच्छा शोता। उनका याज्म बरे छोटा शै , आऩक ऩाव वलळार े वाम्राज्म शै , फाह्य ळक्तिमाॉ शैं, रेककन उनक ऩाव ईद्वयीम ळक्तिमाॉ शैं, आत्भ-वलश्रान्न्त वे प्राद्ऱ े अदबत वाभर्थमय शै ।" ु "अये भखय स्त्री ! यालण क वाथ यशकय बी यालण का वाभर्थमय वभझने की अक्र नशीॊ आई ू े ? ऩागर कशीॊ की !" यालण ने भन्दोदयी की फात उडा दी। कशानी कशती शै कक दवये हदन वुफश भन्दोदयी ने यालण को छोटा वा चभत्काय हदखामा। ू योज वफश कफूतयों को ज्लाय क दाने डारने क मरए याजभशर की छत ऩय जाती थी। उव हदन ु े े यालण को बी वाथ रे गई औय फोरी् "भशायाज ! दे ल, दानल, भानल, मष, गॊधलय, ककन्नय आहद वफ आऩकी आसा भानते शैं तो अऩने प्रबाल का आज जया अनुबल कय रो। दे खो, इन ऩक्षषमों ऩय आऩका ककतना प्रबाल शै ?" ऩक्षषमों को दाने डारकय भन्दोदयी उन्शईऄ कशने रगी् "शे वलशॊ ग ! याजा रॊकळ की दशाई शै कक जो दाने खामेगा, उवकी गयदन झक जामेगी े ु ु औय लश भय जामेगा।" वफ ऩषी दाने खाते यशे । उन्शईऄ कछ नशीॊ शुआ। भन्दोदयी फोरी् ु "प्राणेळ ! आऩकी दशाई का प्रबाल ऩक्षषमों ऩय कछ नशीॊ ऩडा।" ु ु "भूखय औयत ! ऩक्षषमों को क्मा ऩता कक भैं रॊकळ शूॉ ?" े "स्लाभी ! ऐवा नशीॊ शै । अफ दे खखए।" कपय वे दाने डारकय यानी ऩक्षषमों वे फोरी् "याजा चक्ललेण की दशाई शै । दाने चगने फन्द कय दो। जो दाने चगेगा, याजा चक्ललेण की दशाई वे ु ु ु ु उवकी गयदन टे ढी शो जाएगी औय लश भय जाएगा।" ऩक्षषमों ने दाना चगना फन्द कय हदमा। ऩाऴाण की भूनतयलत ् ले न्स्थय शो गमे। एक फशये ु कफूतय ने वुना नशीॊ था। लश दाने चगता यशा तो उवकी गयदन टे ढी शो गई, लश भय गमा। यालण ु दे खता शी यश गमा ! अऩनी स्त्री क द्राया अऩने शी वाभर्थमय की अलशे रना वश न वका। उवको े डाॉटते शुए लश कशने रगा। "इवभईऄ तेया कोई स्त्रीचरयत्र शोगा। शभ ऐवे अन्धवलद्वाव को नशीॊ भानते। न्जवक घय भईऄ े स्लमॊ लरूणदे ल ऩानी बय यशे शैं, ऩलनदे ल ऩॊखा झर यशे शैं, अन्ननदे ल यवोई ऩका यशे शैं, ग्रश नषत्र
  6. 6. चौकी कय यशे शैं उव भशाफरी बत्रबुलन क वलजेता यालण को तू क्मा मवखा यशी शै ?" क्रद्ध शोकय े ु यालण लशाॉ वे चर हदमा। इधय, याजा चक्ललेण क भॊत्री ने वभुद्र क ककनाये एक नकरी रॊका की यचना की। काजर े े क वभान अत्मन्त भशीन मभट्टी को वभुद्र क जर भईऄ घोरकय यफडी की तयश फना मरमा तथा तट े े की जगश को चौयव फनाकय उव ऩय उव मभट्टी वे एक छोटे आकाय भईऄ रॊका नगयी की यचना की। घुरी शुई मभट्टी की फॉूदों को टऩका-टऩकाकय उवी वे रॊका क ऩयकोटे , फुजय औय दयलाजों े आहद की यचना की। ऩयकोटों क चायों ओय कगये बी काटे एलॊ उव ऩयकोटे क बीतय रॊका की े ॊ ू े याजधानी औय नगय क प्रमवद्ध फडे-फडे भकानों को बी छोटे आकाय भईऄ यचना कयक हदखामा। मश े े वफ कयने क फाद लश ऩन् यालण की वबा भईऄ गमा। उवे दे खकय यालण चौंक उठा औय फोरा् े ु "क्मों जी ! तभ कपय मशाॉ ककवमरमे आमे शो ?" ु "भैं आऩको एक कौतशर हदखराना चाशता शूॉ।" ू "क्मा कौतशर हदखामेगा ये ? अबी-अबी एक कौतशर भन्दोदयी ने भझे हदखामा शै । वफ ू ू ु भूखों की कशाननमाॉ शैं। उऩशाव कयते शुए यालण फोरा। "भैंने वभुद्रतट ऩय आऩकी ऩूयी रॊका नगयी वजामी शै । आऩ चरकय तो दे खखमे !" यालण उवक वाथ वभुद्रतट ऩय गमा। लजीय ने अऩनी कायीगयी हदखामी् े "दे खखमे, मश ठीक-ठीक आऩकी रॊका की नकर शै न ?" यालण ने उवकी अदबुत कायीगयी दे खी औय कशा् "शाॉ ठीक शै । मशी हदखाने क मरए भुझे े मशाॉ रामा शै क्मा ?" "याजन ! धैमय यखो। इव छोटी वी रॊका वे भैं आऩको एक कौतूशर हदखाता शूॉ। दे खखमे, रॊका क ऩूलय का ऩयकोटा, दयलाजा, फुजय औय कगूये वाप-वाप ज्मों-क-त्मों हदख यशे शैं न ?" े ॊ े "शाॉ हदख यशे शैं।" "भेयी यची शुई रॊका क ऩूलय द्राय क कगूयों को भैं याजा चक्ललेण की दशाई दे कय जया वा े े ॊ ु हशराता शूॉ, इवक वाथ शी आऩ अऩनी रॊका क ऩूलय द्राय क कगूये हशरते शुए ऩामईऄगे।" े े े ॊ इतना कशकय भॊत्री ने याजा चक्ललेण की दशाई दे कय अऩनी यची शुई रॊका क ऩूलय द्राय क ु े े कगये हशरामे तो उवक वाथ-शी-वाथ अवरी रॊका क कगूये बी डोरामभान शोते हदखाई हदमे। मश ॊ ू े े ॊ दे खकय यालण को फडा आद्ळमय शुआ। उवे भन्दोदयी की फात माद आ गई। चक्ललेण क लजीय ने े फायी-फायी वे औय बी कगूये, ऩयकोटे क द्राय, फुजय आहद हशराकय हदखामा। इवे दे खकय यालण दॊ ग ॊ े यश गमा। आखखय लजीय ने कशा् "याजन ! अबी दो भन वोना दे कय जान छडा रो तो ठीक शै । भैं तो अऩने स्लाभी याजा ु चक्ललेण का छोटा वा लजीय शूॉ। उनकी दशाई वे इन छोटे रूऩ भईऄ फनी शुई रॊका को उजाडूॉगा तो ु तुम्शायी रॊका भईऄ बी उजाड शोने रगेगा। वलद्वाव न आता शो तो अबी हदखा दॉ ।" ू
  7. 7. आखखय यालण बी फडा वलद्रान था। अगभ अगोचय जगत वलऴमक ळास्त्रों ऩरयचचत था। वभझ गमा फात। लजीय वे फोरा् "चर, दो भन वोना रे जा। ककवी वे कशना भत।" दो भन वोना रेकय लजीय याजा क ऩाव ऩशुॉचा। चक्ललेण ने कशा् "रॊकळ जैवे शठी औय े े भशा अशॊ कायी ने 'कय' क रूऩ भईऄ दो भन वोना दे हदमा ? तने माचना तो नशीॊ की ?" े ू "नशीॊ, नशीॊ प्रबु ! भेये वम्राट की ओय वे माचना ? कदावऩ नशीॊ शो वकती।" लजीय गौयल वे भस्तक ऊचा कयक फोरा। ॉ े "कपय कवे वोना रामा ?" याजा ने ऩछा। यानी बी ध्मानऩलक वन यशी थी। ै ू ू य ु "भशायाज ! आऩकी दशाई का प्रबाल हदखामा। ऩशरे तो भझे कद भईऄ बेज यशा था, कपय ु ु ै भॊबत्रमों ने वभझामा तो भझे दत वभझकय छोड हदमा। भैंने यातबय भईऄ छोटे -छोटे घयौंदे वागय क ु ू े तट ऩय फनामे.... ककरा, झयोखे, प्रलेळद्राय आहद वफ। उवकी रॊका की प्रनतभनतय खडी कय दी। ू कपय उवको रे जाकय वफ हदखामा। आऩकी दशाई दे कय खखरौने की रॊका का भख्म प्रलेळद्राय ु ु जया-वा हशरामा तो उवकी अवरी रॊका का द्राय डोरामभान शो गमा। थोडे भईऄ शी यालण आऩकी दशाई का औय आऩक वाभर्थमय का प्रबाल वभझ गमा एलॊ चऩचाऩ दो भन वोना दे हदमा। दमा- ु े ु धभय कयक नशीॊ हदमा लयन ् जफ दे खा कक मशाॉ का डण्डा भजफूत शै , तबी हदमा।" े यानी वफ फात एकाग्र शोकय वुन यशी थी। उवको आद्ळमय शुआ कक् "रॊकळ जैवा भशाफरी े ! भशा उद्दण्ड ! दे लयाज इन्द्र वहशत वफ दे लता, मभ, कफेय, लरूण, अन्नन, लाम, मष, ककन्नय, ु ु गन्धलय, दानल, भानल, नाग आहद वफ न्जववे काॉऩते शैं , ऐवे यालण ऩय बी भेये ऩनतदे ल क ळीर- े वदाचाय का इतना प्रबाल औय भैं ऐवे ऩनत की फात न भानकय वलरावी न्स्त्रमों की फातों भईऄ आ गई ? पळनेफर फनने क चक्कय भईऄ ऩड गई ? चधक्काय शै भुझे औय भेयी षुद्र माचना को ! ऐवे ै े हदव्म ऩनत को भैंने तॊग ककमा !" यानी का रृदम ऩद्ळाताऩ वे बय गमा। स्लाभी क चयणों भईऄ चगय ऩडी् "प्राणनाथ ! भुझे े षभा कीन्जए। भैं याश चक गई थी। आऩक ळीर-वदाचाय क भागय की भहशभा बूर गई थी ू े े इवीमरए नादानी कय फैठी। भुझे भाप कय दीन्जए। अऩना मोग भुझे मवखाइमे, अऩना ध्मान भुझे मवखाइमे, अऩना आत्भशीया भुझे बी प्राद्ऱ कयाइमे। भुझे फाशय क शीये जलाशयात कछ नशीॊ चाहशए। े ु जर जाने लारे इव ळयीय को वजाने का भेया भोश दय शो गमा।" ू "तो इतनी वायी खटऩट कयलामी ?" "नशीॊ.... नशीॊ... भुझे यालण क वोने का गशना ऩशनकय वुखी नशीॊ शोना शै । आऩने जो े ळीर का गशना ऩशना शै , आत्भ-ळाॊनत का, मोग की वलश्राॊनत का जो गशना ऩशना शै , लशी भुझे दीन्जए।" "अच्छा..... तो लजीय ! जाओ। मश वोना यालण को लाऩव दे आओ। उवको फता दे ना कक यानी को गशना ऩशनने की लावना शो आई थी, इवमरए आदभी बेजा था। अफ लावना ननलत्त शो ृ गई शै । अत् वोना लाऩव रे रो।"
  8. 8. लावनालारे को शी ऩये ळानी शोती शै । जो ळीर का ऩारन कयता शै , उवकी लावनाएॉ ननमॊबत्रत शोकय ननलत्त शोती शैं। न्जवकी लावनाएॉ ननलत्त शो जाती शैं लश वाषात ् नायामण का अॊग ृ ृ शो जाता शै । ळीर का ऩारन कयते शुए याजा चक्ललेण नायामणस्लरूऩ भईऄ न्स्थय शुए। उनकी अधाांचगनी बी उनक ऩवलत्र ऩदचचह्नों ऩय चरकय वदगनत को प्राद्ऱ शुई। े ळीरलान ् बोग भईऄ बी मोग फना रेता शै । मशी नशीॊ, नद्वय वॊवाय भईऄ ळाद्वत ् स्लरूऩ का वाषात्काय बी कय वकता शै । अनक्रभ ु ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ बूऴणों का बूऴण् ळीर ककॊ बूऴणाद् बूऴणभन्स्त ळीरभ ् तीथां ऩयॊ ककॊ स्लभनो वलळुद्धभ ्। ककभत्र शे मॊ कनक च कान्ता ॊ श्राव्मॊ वदा ककॊ गुरूलेदलाक्मभ ्।। 'उत्तभ-वे-उत्तभ बूऴण क्मा शै ? ळीर। उत्तभ तीथय क्मा शै ? अऩना ननभयर भन शी ऩयभ तीथय शै । इव जगत भईऄ त्मागने मोनम क्मा शै ? कनक औय कान्ता (वुलणय औय स्त्री)। शभेळा वुनने मोनम क्मा शै ? वदगुरू औय लेद क लचन।' े श्री ळॊकयाचामयवलयचचत 'भखणयत्नभारा' का मश आठलाॉ द्ऴोक शै । फाशय की वफ वॊऩवत्त ऩाकय बी आदभी लश वुख, लश चैन, लश ळाॊनत, लश कल्माण नशीॊ ऩा वकता, जो ळीर वे ऩा वकता शै । इन्द्र को स्लगय क याज-लैबल, नन्दनलन आहद शोते शुए बी े लश आनन्द, लश प्रवन्नता न थी, जो प्रशराद क ऩाव थी। इन्द्र ने अऩने गुरू फशस्ऩनत वे मश े ृ फात ऩूछी थी। प्रह्लाद क जीलन भईऄ ळीर था इवमरए लश वाधनों क नशीॊ शोने क फालजद बी वुखी यश े े े ू वका। न्जवक ऩाव ळीर शै उवक ऩाव वाधन न शों तो बी लश वुखी यश वकता शै । न्जवक े े े जीलन भईऄ ळीर नशीॊ शै लश वाधन शोते शुए बी ऩये ळान शै । ....तो बूऴणों का बूऴण क्मा शै ? ळीर। कई रोग वोने-चाॉदी क गशने ऩशनते शैं , गरे भईऄ े वलणय की जॊजीय, ऩग भईऄ झाॉझन, कण्ठ भईऄ चन्दनशाय, शाथ-ऩैयों भईऄ कडे, कानों भईऄ कणयपर, उॉ गरी ु ू भईऄ अॉगठी, नाक भईऄ नथ इत्माहद ऩशनते शैं औय वभझते शैं कक गशने-आबऴण ऩशनने वे शभ ू ू वळोमबत शोते शैं। रेककन ळास्त्रकायों का कशना शै , फवद्धभानों का अनबल शै कक गशने ऩशनने वे ु ु ु शभ वळोमबत नशीॊ शोते। गशने आबऴण वे शभाया शाड-भाॊव-चाभलारा दे श थोडा वा वळोमबत शो ु ू ु वकता शै , रेककन शभायी ळोबा इनभईऄ नशीॊ शै । इन अरॊकायों वे तो शभायी ळोबा दफ जाती शै ।
  9. 9. शभायी अवरी ळोबा जो ननखयनी चाहशए, लश दे श का रारन-ऩारन औय फाशयी हटऩ-टॉऩ कयने की लवत्त वे दफ जाती शै । फाशयी बूऴणों वे शाड-चाभलारे दे श की कृबत्रभ चभक-दभक हदखती शै । ृ शभायी ळोबा बूऴणों वे नशीॊ शै , शभायी ळोबा शै ळीर वे। ळीरलान ् ऩुरूऴ शो मा स्त्री, उवका प्रकाळ कटुम्फ, भोशल्रे, जानत आहद भईऄ जैवा ऩडता शै , लैवा प्रकाळ वोने-चाॊदी क आबूऴणों का नशीॊ ु े ऩडता। ककवी ने चाशे उऩयोि वफ आबूऴणों को धायण ककमा शो, महद ळीर न शो तो ले वफ व्मथय शैं। भन, लचन औय कभय वे अमोनम कक्रमा न कयना, दे ळ-कार क अनवाय मोनमता वे, े ु वयरता वे वलचायऩलक फतयना-इव आचयण को ळास्त्र भईऄ 'ळीरव्रत' कशा गमा शै । उन्ननत का भागय ू य ळीर शी शै । गीता भईऄ फतामे शुए दै ली वॊऩवत्त क रषण ळीरलारे व्मक्ति भईऄ शोते शैं। महद े आत्भसान न बी शो औय ळीर शो तो भनष्म नीच गनत को प्राद्ऱ नशीॊ शोता। ळीरलान शी ु आत्भफोध प्राद्ऱ कयक भि शो वकता शै । ळीरयहशत ऩरूऴ को कडा, कण्डर आहद गशने ऊऩय की े ु ु ु ळोबा बरे शी दे ते शों, ऩयन्तु वज्जन ऩरूऴों का तो ळीर शी बऴण शै । ु ू ळीरयहशत भूखय को कडा, कण्डर आहद फोझरूऩ शैं। मे बूऴण जील को जोखखभ भईऄ डारने ु लारे औय बम क कायण शै , जफकक ळीररूऩी बूऴण रोक औय ऩयरोक भईऄ उत्तभ प्रकाय का वुख े दे ने लारा शै , इव रोक भईऄ ळोबा औय कीनतय फढानेलारा शै , ऩयरोक भईऄ अषम वुख को प्राद्ऱ कयाता शै । भूखय ऩशने शुए गशनों को बी रजा दे ता शै जफकक ळीरलान ् ऩशने शुए बूऴणों को ळोबा दे ता शै । एक याजऩुत्र ने अऩने वऩता की इच्छा क वलरूद्ध एक स्त्री क वाथ वललाश कय मरमा था े े औय गुद्ऱ स्थान भईऄ उवक वाथ यशा कयता था। याजा को जफ मश वभाचाय मभरा कक भेया ऩुत्र भेये े ळत्रु की ऩुत्री क वाथ वललाश कयक गुभ शो गमा शै तो लश फशुत द्खी शुआ। ऩुत्र की मश े े ु कामयलाशी उवे मोनम न रगी इवमरए द्खी शोते शुए भयण क वभीऩ आ गमा। उवको एक शी ु े ऩुत्र था। भयने क वभम उवने कलय को फुराने क मरए आदभी बेजे औय अऩनी ऩरयन्स्थनत क े ॉु े े वभाचाय कशरलामे। कलय ने अऩनी ऩत्नी वे कशा् "वऩता जी भयने की तैमायी भईऄ शैं। भुझे उन्शोंने अऩने ऩाव ॉु फुरामा शै । इव वभम भुझे जाना शी चाहशए। भेये जाने वे ले स्लस्थ शो जामईऄगे तो भुझ ऩय प्रवन्न शोंगे। अगय ले चर फवईऄगे तो भैं याजा फन जाऊगा।" ॉ ऩत्नी फोरी् "तुभ याजा फन जाओगे तो भेया क्मा शोगा ?" "भैं तुझे लशाॉ फुरा रॉ ूगा औय ऩटयानी फनाऊगा।" मश कशकय याजकभाय ने अऩनी ॉ ु नाभलारी अॉगूठी अऩनी उॉ गरी वे उतायक ऩत्नी को ऩशनाई औय स्लमॊ याजधानी को चर हदमा। लशाॉ आकय दे खा तो याजा भत्मुळैय्मा ऩय ऩडा था। कलय को दे खकय याजा प्रवन्न शुआ ृ ॉु औय फोरा् "भैं तुझवे एक फात कशना चाशता शूॉ। महद तू भेयी फात भान रेगा तो भेये प्राण वुख
  10. 10. वे ननकरईऄगे। वऩता क लचन ऩुत्र को भानने चाहशए। श्रीयाभ, दे लव्रत बीष्भ आहद ऩुत्रों ने भाने शैं। े महद तू भानना स्लीकाय कये तो कशूॉ।" "वऩताजी ! भैं आऩकी अन्त वभम की आसा का ऩारन करूगा।" कलय ने स्लीकृनत दी। ॉ ॉु याजा ने कशा् "शे वुऩुत्र ! तू भेये मभत्र गॊधलययाज की कन्मा वे वललाश कयना स्लीकाय कय।" कलय ने फात भान री। याजा का प्राणाॊत शो गमा। कलय ने गॊधलययाज की कन्मा वे वललाश ॉु ॉु कय मरमा। लश याजा शोकय याज्म कयने रगा औय अऩनी ऩलय ऩत्नी वे जो फात कशकय आमा था, ू उवको अत्मन्त वख भईऄ बर गमा। ु ू प्रथभलारी याजकन्मा ने वना कक भेये द्ववय का दे शान्त शो गमा शै , भेया ऩनत याजा शो ु ु गमा शै औय उवने एक दवयी याजकन्मा वे वललाश कय मरमा शै । इव याजकन्मा क ऩाव एक ू े फशुत चतय दावी थी। याजकलय की भराकात क मरए लश तीन औय कन्माओॊ को रे आई औय ु ॉु ु े उवने याजकन्मा वहशत चायों को ऩरूऴ की ऩोळाक ऩशनाकय याजकलय क ऩाव नौकयी कयने को ु ॉु े बेजा। कलय चायों मुलान ऩुरूऴों को दे खकय प्रवन्न शुआ औय चायों को अऩने यषकों की नौकयी ॉु ऩय यख मरमा। कलय को दे खकय याजकन्मा क फाय-फाय आॉवू चगया कयते थे। कलय ने कई फाय ऩूछा, ॉु े ॉु ऩयन्तु उवने कछ उत्तय न हदमा। ु एक हदन कलय अकरा उद्यान भईऄ फैठा था तो लश अॊगयषक उदावी वे शाथ जोडकय उवक ॉु े े वाभने जा फैठा। कभाय ने उवकी उॉ गरी ऩय अऩने नाभलारी अॉगूठी दे खी तो वलस्भम वे ऩूछा् ु "शे मभत्र ! मश अॉगूठी तुझे कशाॉ वे प्राद्ऱ शुई ?" "आऩक ऩाव वे।" े "भैंने मश अॉगूठी तुझे कफ दी थी ?" याजकभाय का आद्ळमय फढ गमा। ु "जफ तुभ भुझे छोडकय आमे औय याजा फने तफ।" यशस्म खर गमा। लश वभझ गमा कक मश भेयी प्राणेद्वयी याजकन्मा शै । वप्रमा वे षभा ु भाॉगते शुए उवने अऩने वऩता की अन्न्तभ वभम की आसा की वायी फात कशी। तफ याजकन्मा फोरी् "आऩने वऩता की आसानुवाय जो वललाश ककमा शै , उववे भैं प्रवन्न शूॉ। ऩयन्तु आऩ भेया त्माग न कीन्जए। अऩने ननलाव भईऄ दावी क वभान यशने दीन्जए न्जववे भैं ननत्म आऩक दळयन े े कय वक।" कलय ने स्लीकाय कय मरमा औय अन्म तीनों को ऩुयस्काय दे कय वलदा ककमा। ॉू ॉु गॊधलययाज की कन्मा मश वललाश वलऴमक फात वुनकय कलय वे फोरी् "आऩने न्जवक वाथ ॉु े ऩूलय भईऄ वललाश ककमा शै , उवका शक भाया जामे मश भैं नशीॊ चाशती। लशी आऩकी ऩटयानी शोने की अचधकारयणी शै । भैं उवकी छोटी फशन क वभान यशूॉगी।" े
  11. 11. इव प्रकाय दोनों ऩमत्नमाॉ प्रेभऩूलक फशनों क वभान यशने रगीॊ। इन दोनों ने शी ळीर का य े अनुवयण ककमा इवमरए दोनों शी वुखी शुईं। एक दवये का आदय कयक वाभने लारे क अचधकाय ू े े की यषा कयने रगीॊ। जैवे बयतजी कशते थे कक याज्म फडे बाई श्रीयाभ का शै औय याभजी कशते थे कक वऩता की आसानुवाय याज्म का अचधकाय बयत का शै । मश शै ळीर। वाव वोचे की फशू को वुख कवे मभरे, उवका कल्माण कवे शो औय फशू चाशे कक भाता ै ै जी का रृदम प्रवन्न यशे .... तो मश ळीर शै । अगय वाव चाशे कक घय भईऄ भेया कशना शी शो औय फशू चाशे कक भेया कशना शी शो, दे लयानी चाशे भेया कशना शी शो औय जेठानी चाशे भेया कशना शी शो – ऐवा लातालयण शोगा तो दे श ऩय चाशे ककतने शी गशने रदे शों, कपय बी जीलन भईऄ वच्चा यव नशीॊ मभरेगा। वच्चा गशना तो ळीर शै । वत्म फोरना, वप्रम फोरना, भधय फोरना, हशतालश फोरना औय कभ फोरना, जीलन भईऄ व्रत ु यखना, ऩयहशत क कामय कयना इववे ळुद्ध अन्त्कयण का ननभायण शोता शै । न्जवक ळुद्ध े े अन्त्कयण का ननभायण नशीॊ शुआ लश चाशे अऩनी स्थर कामा को ककतने शी ऩप-ऩाऊडय-रारी ू औय लस्त्रारॊकायों वे वुवन्ज्जत कय दे , रेककन बीतय की तनद्ऱ नशीॊ मभरेगी, रृदम का आनन्द नशीॊ ृ मभरेगा। स्लाभी याभतीथय अभेरयका गमे थे। उनक प्रलचन वुनने क मरए रोग इकट्ठे शो जाते। एक े े फाय एक भहशरा आई। उवक अॊग ऩय राखों रूऩमे क शीये जक्तडत अरॊकाय रदे थे। कपय बी लश े े भहशरा फडी द्खी थी। प्रलचन ऩूया शोते शी लश स्लाभी याभतीथय क ऩाव ऩशुॉची औय चयणों भईऄ ु े चगय ऩडी। फोरी् "भुझे ळान्न्त दो..... भैं फशुत द्खी शूॉ। कृऩा कयो।" ु स्लाभी याभतीथय ने ऩूछा् "इतने भूल्मलान, वुन्दय तेये गशने, लस्त्र-आबूऴण ! तू इतनी धनलान ! कपय तू द्खी कवे ?" ु ै "स्लाभी जी ! मे गशने तो जैवे गधी ऩय फोझ रदा शो ऐवे भुझ ऩय रदे शैं। भुझे बीतय वे ळाॊनत नशीॊ शै ।" अगय ळीररूऩी बूऴण शभाये ऩाव नशीॊ शै तो फाशय क लस्त्रारॊकाय, कोट-ऩैन्ट-टाई आहद वफ े पाॉवी जैवे काभ कयते शैं। चचत्त भईऄ आत्भ-प्रवाद शै , बीतय प्रवन्नता शै तो लश ळीर वे, वदगुणों वे। ऩयहशत क मरए ककमा शुआ थोडा वा वॊकल्ऩ, ऩयोऩकायाथय ककमा शुआ थोडा-वा काभ रृदम भईऄ े ळान्न्त, आनन्द औय वाशव रे आता शै । अगय अनत उत्तभ वाधक शै तो उवे तीन हदन भईऄ आत्भ-वाषात्काय शो वकता शै । तीन हदन क बीतय शी ऩयभात्भ तत्त्ल की अनुबूनत शो वकती शै । जन्भ-भत्मु क चक्कय को तोडकय े ृ े
  12. 12. पक वकता शै । ऩर्थली जैवी वशनळीरता उवभईऄ शोनी चाहशए। ऐवा नशीॊ कक इधय-उधय की थोडी ईऄ ृ वी फात वुनकय बागता कपये । ऩर्थली जैवी वशनळक्ति औय वुभन जैवा वौयब, वूमय जैवा प्रकाळ औय मवॊश जैवी ृ ननबीकता, गुरूओॊ जैवी उदायता औय आकाळ जैवी व्माऩकता। ऩानी भईऄ ककवी का गरा घोंटकय दफामे यखे औय उवे फाशय आने की जैवी तडऩ शोती शै ऐवी न्जवकी वॊवाय वे फाशय ननकरने की तीव्र तडऩ शो, उवको जफ वदगुरू मभर जाम तो तीन हदन भईऄ काभ फन जाम। ऐवी तैमायी न शो तो कपय उऩावना, वाधना कयते-कयते ळद्ध अन्त्कयण का ननभायण कयना शोगा। ु लेद क दो वलबाग शै - प्रभाण वलबाग औय ननभायण वलबाग। जीलात्भा का लास्तवलक स्लरूऩ े क्मा शै ? इवका जो सान शै उवे 'लेदान्त' कशते शैं। मश शै प्रभाण वलबाग। दमा, भैत्री, करूणा, भहदता, दान, मस, तऩ, स्भयण, ऩयहशत, स्लाध्माम, आचामय-उऩावना, इद्श-उऩावना आहद जो कभय ु शैं मे ळद्ध अन्त्कयण का ननभायण कयते शैं। न्जवक ळद्ध अन्त्कयण का ननभायण नशीॊ शुआ लश ु े ु प्रभाण वलबाग का आनन्द नशीॊ रे ऩाता। वत्कभय, वाधन, आचामोऩावना आहद कयते-कयते वाधक प्रभाण वलबाग का अचधकायी फन जाता शै । आज कर शभ रोग प्राम् ननभायण वलबाग क अचधकायी शैं। कीतयनाहद वे ळुद्ध अन्त्कयण े का ननभायण शोता शै , वदबाल बाल का ननभायण शोता शै । वदबाल कशाॉ वे शोता शै ? ळुद्ध अन्त्कयण वे। वोने-चाॉदी क गशनों वे दे श की वजालट शोती शै औय कीतयन आहद वे ळुद्ध े अन्त्कयण का ननभायण शोता शै । दे श की अऩेषा अन्त्कयण शभाये ज्मादा नजदीक शै । फाशय के गशने खतया ऩैदा कय दे ते शैं जफकक कीतयन, ध्मानरूऩी गशने खतयों को बी खतया ऩशुॉचा दे ते शैं। अत् ळुद्ध अन्त्कयण का ननभायण कयने लारा ळीर शी वच्चा आबूऴण शै । ळीर भईऄ क्मा आता शै ? वत्म, तऩ, व्रत, वहशष्णता, उदायता आहद वदगुण। ु आऩ जैवा अऩने मरए चाशते शैं , लैवा दवयों क वाथ व्मलशाय कयईऄ । अऩना अऩभान नशीॊ ू े चाशते तो दवयों का अऩभान कयने का वोचईऄ तक नशीॊ। आऩको कोई ठग रे, ऐवा नशीॊ चाशते तो ू दवयों को ठगने का वलचाय नशीॊ कयईऄ । आऩ ककवी वे द्खी शोना नशीॊ चाशते तो अऩने भन, लचन, ू ु कभय वे दवया द्खी न शो इवका ख्मार यखईऄ । ू ु प्राखणभात्र भईऄ ऩयभात्भा को ननशायने का अभ्माव कयक ळुद्ध अन्त्कयण का ननभायण कयना े मश ळीर शै । मश भशा धन शै । स्लगय की वॊऩवत्त मभर जाम, स्लगय भईऄ यशने को मभर जाम रेककन लशाॉ ईष्माय शै , ऩुण्मषीणता शै , बम शै । न्जवको जीलन भईऄ ळीर शोता शै उवको ईष्माय ऩुण्मषीणता , मा बम नशीॊ शोता। ळीर आबूऴणों का बी आबूऴण शै । भीया क ऩाव कौन-वे फाह्य आबूऴण थे ? ळफयी ने ककतने गशने ऩशने शोंगे ? लनलाव क े वभम द्रोऩदी ने कौन-वे गशने वजामे शोंगे ? ळीर क कायण शी आज ले इनतशाव को जगभगा े यशी शैं।
  13. 13. उदायता दे खनी शो तो यॊ नतदे ल की दे खो। दान कयते-कयते अककॊचन शो गमे। जॊगर भईऄ ऩडे शैं बूख-प्मावे। कापी वभम क फाद कछ बोजन मभरा औय ज्मों शी ग्राव भुख तक ऩशुॉचा कक े े ु बूखा अनतचथ आ गमा। स्लमॊ बूखे यशकय उवे तद्ऱ ककमा। दवयों की षुधाननलवत्त क मरए अऩने ृ ू ृ े ळयीय का भाॊव बी काट-काटकय दे ने रगे। कवी अदबुत दानलीयता औय उदायता ! ै वाधक भईऄ यॊ नतदे ल जैवी दानलीयता औय उदायता शोनी चाहशए। उदायता ऩदाथों की बी शोती शै औय वलचायों की बी शोती शै । ककवी ने कछ कश हदमा, ु अऩभान कय हदमा तो फात को ऩकड भत यखखमे। जो फीत गई वो फीत गई। उववे छटकाया नशीॊ ु ऩाएॉगे तो अऩने को शी द्खी शोना ऩडेगा। जगत को वधायने का ठे का शभने-आऩने नशीॊ मरमा ु ु शै । अऩने को शी वधायने क मरए शभाया आऩका जन्भ शुआ शै । भाॉ क ऩेट वे जन्भ मरमा, गरू ु े े ु क चयणों भईऄ गमा औय ऩया वधय गमा ऐवा नशीॊ शोता। जीलन क अनबलों वे गजयते-गजयते े ू ु े ु ु ु आदभी वधयता शै , ऩायॊ गत शोता शै औय वॊवाय-वागय वे ऩाय शो जाता शै । व्मक्ति भईऄ अगय कोई ु दोऴ न यशे तो उवे अबी ननवलयकल्ऩ वभाचध रग जाम औय लश ब्रह्मरीन शो जाम। याभकृष्ण ऩयभशॊ व फाय-फाय वत्वॊग वे उठकय यवोईघय भईऄ चरे जाते औय फने शुए व्मॊजन ऩकलानों क फाये भईऄ ऩूछताछ कयते। ळायदा भाॉ कशतीॊ- े "आऩ तत्त्लचचन्तन की ऊची फात कयते शैं औय कपय तुयन्त दार, वब्जी, चटनी की खफय ॉ रेने आ जाते शैं ! रोग क्मा कशईऄ गे ?" याभकृष्ण फोरे् "मश भाॉ की कोई रीरा शै । भेयी जीलन-नाल तो ब्रह्मानॊद-वागय की ऐवी भझधाय भईऄ शै कक कोई उवभईऄ फैठ न वक। इवीमरए भाॉ ने भेये चचत्त को न्जह्वा क यव भईऄ ळामद े े रगा हदमा शै । न्जह्वायव क जरयमे भैं फाशय क जगत भईऄ आ जाता शूॉ। न्जव हदन मश न्जह्वायव े े छटा तो वभझ रेना... उवी हदन शभायी जीलन-नाल ककनाया छोडकय वागय की भझधाय भईऄ ऩशुॉच ू जाएगी। कपय मश दे श हटकगी नशीॊ।" े ....औय शुआ बी ऐवा शी। एक हदन ळायदाभखण दे ली बोजन की थारी वजाकय याभकृष्ण दे ल क वभष रामी। थारी को दे खकय ऩयभशॊ व जी ने भॉुश पय मरमा। ळायदा भाॉ को उनकी फात े े माद आ गमी.... शाथ वे थारी चगय ऩडी। ढाई-तीन हदन भईऄ शी उव भशान ् वलबूनत ने अऩनी जीलनरीरा वभेट री। शभ रोगों भईऄ कोई-न-कोई दोऴ यशता शै , आवक्ति यशती शै । दोऴों वे दे श जकडा यशता शै । अगय दोऴ अनेक शोंगे तो अनेक जन्भों की मात्रा कयलामईऄगे। दोऴों क वाथ न्जतना तादात्म्म े शोगा, उतने शभ दोऴों वे प्रबावलत शोंगे। ईद्वय क वाथ शभाया न्जतना तादात्म्म शोगा, आत्भदे ल े क वाथ न्जतना तादात्म्म शोगा, ळीर क स्लबाल वे न्जतना तादात्म्म शोगा, इतने मे दोऴ े े ननदोवऴता भईऄ फदरते जाएॉगे। धन का रोब, वत्ता का रोब, मळ का रोब, काभ का वलकाय मे वफ शैं तो कलर लवत्त.... े ृ कलर वॊवलत ्। धन क प्रनत काभना जगती शै तो लश रोब फनती शै , व्मक्ति क प्रनत काभना े े े
  14. 14. जगती शै तो लश काभ फनती शै । शै लश एक शी वॊवलत ्। लश वॊवलत ् अगय चैतन्मघन ऩयभात्भा के चचन्तन भईऄ रग जाम तो फेडा ऩाय कय दे । कपय काभ, क्रोध, रोब का प्रबाल तुम्शईऄ प्रबावलत नशीॊ कय वकगा। कपय खाते शुए बी बोजन क स्लाद भईऄ फॉधोगे नशीॊ। रेते-दे ते शुए बी रेन-दे न क े े े कत्तत्ल अमबभान भईऄ फॉधोगे नशीॊ। तुम्शाये ळुद्ध अन्त्कयण का ननभायण शोता जाएगा। ऐवा कयते- यृ कयते आत्भस्लरूऩ का फोध शो गमा तो अन्त्कयण फाचधत शो जामेगा। खा यशे शैं कपय बी नशीॊ खाते, रेन-दे न कय यशे शैं कपय बी कछ नशीॊ कयते। ु ळीर आहद वदगणों द्राया ळद्ध अन्त्कयण का ननभायण ककमा जाता शै । कल्माण का दवया ु ु ू उऩाम शै अन्त्कयण वे वम्फन्ध-वलच्छे द कयने का। अन्त्कयण वे वम्फन्ध-वलच्छे द कयने भईऄ वपर शो गमे तो लेदान्त दळयन क वलोच्च आदळों का वाषात्काय शो वकता शै । ळद्ध अन्त्कयण े ु का ननभायण कयने भईऄ वपर शो गमे तो बक्ति-दळयन क भधय अभत का आस्लाद प्राद्ऱ शो जाता शै । े ु ृ ळद्ध अन्त्कयण का ननभायण ईद्वय-बक्ति भईऄ फडी वशाम कयता शै औय ईद्वय-तत्त्ल क वाषात्काय भईऄ ु े वशामक शोता शै । व्मक्ति अगय धामभयक शो तो अऩने मरए शी नशीॊ, ऩरयलाय औय वभाज क मरए बी उऩमोगी े शोता शै । न्जवक जीलन भईऄ धभय नशीॊ शै , उव ऩय अळाॊनत क फादर नघये यशते शैं। न्जवक जीलन भईऄ े े े धभय शै , उवक जीलन भईऄ वाधना, वशनळक्ति, वाशव क गुण ननखयते यशते शैं। रडकी धामभयक शै े े तो भाॉ-फाऩ को तवल्री यशती शै । ववुयारलारे उव ऩय वलद्वाव कयते शैं. व्मक्ति धामभयक शै तो वफ रोग उव ऩय वलद्वाव कयते शैं। इव प्रकाय धामभयकता, वच्चाई, ळीर आहद ऩयभाथय भईऄ तो वशामक शैं शी, शभाये व्मलशाय-जगत भईऄ बी उऩमोगी शै । ककवी व्मक्ति क ऩाव धन शो, लैबल शो, रेककन े ळीर औय वन्तोऴ न शो तो ककतना बी फडा व्मक्ति ळयाफ-कफाफ आहद भईऄ पव जाता शै । ॉ ......तो उत्तभ वे उत्तभ बूऴण शै ळीर। कपय ळॊकयाचामय जी आगे कशते शैं कक उत्तभ वे उत्तभ तीथय क्मा शै ? अऩना वलळुद्ध भन शी उत्तभ तीथय शै । गॊगा, मभुना, गोदालयी, नभयदा, काळी, भथया, ऩुष्कय आहद वफ तीथय तो शैं ु रेककन ले फाशय क तीथय शैं। वलळुद्ध शुआ भन जफ ऩयभात्भदे ल भईऄ डूफता शै तफ लश उत्तभ वे उत्तभ े तीथय भईऄ स्नान कयता शै । मश तीथय बी उवे उत्तभ तीथय भईऄ अथायत ् ऩयभात्भदे ल भईऄ डूफे शुए वॊत भशाऩुरूऴों क द्राया मभरता शै । तात्ऩमय मश शै कक उत्तभ वे उत्तभ तीथय अऩना वलळुद्ध भन शै । े वुनी शै एक कशानी् एक वऩता क दो फेटे थे। वऩता का स्लगयलाव शुआ। छोटे फेटे ने अऩने बाई वे कशा् "भैं े तीथायटन कयने जा यशा शूॉ। वऩता जी की वॊऩवत्त शभ आधी-आधी फाॉट रेलईऄ।" फडा बाई वशभत शोते शुए फोरा् "अच्छा बैमा ! तीथयमात्रा कयने जाता शै तो बरे जा। भेया मश तुम्फा बी वाथ भईऄ रेते जा। उवे वफ तीथों भईऄ घुभाना, वफ जगश स्नान कयाना, दे ल- दळयन कयाना। भेये फदरे भेया मश तुम्फा शी तीथायटन कय आएगा। तीथयमात्रा भईऄ जो खचय शोगा, आधा भैं दॉ गा।" ू
  15. 15. छोटा बाई फडे बाई का तुम्फा रे गमा। तीथों भईऄ घुभाते, ऩवलत्र स्थानों भईऄ नशराते, दे लदळयन कयाते शुए घय लाऩव रौटा तो फडे बाई ने अऩना तुम्फा लाऩव मरमा औय खचय का आधा हशस्वा चका हदमा। कपय तम्फे को छीरा औय बीतय वे थोडा चखा तो कडला शी कडला। ु ु लश छोटे बाई वे फोरा् "मश तुम्फा इतने तीथों भईऄ घूभा, वरयताओॊ भईऄ नशामा, दे लदळयन ककमे, कपय बी कडला शी यशा। अबी भधयता नशीॊ आई। मश तो फाशय वे शी नशामा। बीतय इवका स्नान नशीॊ शुआ। इवक ु े बीतय जो चीज यखईऄगे लश बी कडली शो जामेगी।" फडा बाई चतय था। तम्फे को ककड-मभट्टी-याख आहद डारकय खफ यगडा। कपय ऩानी वे ु ु ॊ ू अच्छी तयश धोमा तो उवकी कडलशाट दय शो गमी। अफ तम्फे भईऄ जो कछ यखे लश चीज लैवी शी ू ु ु ळद्ध फनी यशे । छोटा बाई वभझ गमा कक दे श को फाशय क तीथों भईऄ स्नान कयाना ठीक शै , अच्छा ु े शै रेककन अऩने बीतय ळद्धीकयण वे शी वच्चा तीथयत्ल भशवव शोता शै । ु ू भन एक तम्फा शै । ळीर, शरयनाभरूऩी ऩाऊडय, कानमक-लाचचक-भानमवक वत्कभयरूऩी ककड ु ॊ औय प्रब-प्रेभरूऩी ऩानी उवभईऄ डारकय उवे अच्छी तयश धो डारो। कपय वाषीबाल की ननगाश वे ु उवे वुखाओ। मश भनरूऩी तुम्फा जफ ठीक तयश वे धरकय कपय वूख जाता शै तफ वफ लस्तुएॉ ु उवभईऄ अभत जैवी यशती शैं। भनरूऩी तुम्फा जफ ऩवलत्र शो जाता शै तफ अभतभम जीलन का ृ ृ अनुबल कया दे ता शै । ....तो वफ तीथों भईऄ उत्तभ तीथय शै अऩना अन्तभुख भन, आत्भाकाय लवत्तलारा भन। अऩने य ृ भन क ऩवलत्र शोने ऩय तीथों भईऄ जाएॉगे तो भशाऩुण्म शोगा। भन ऩवलत्र नशीॊ तो तीथय भईऄ जाने का े ऩूया राब नशीॊ शोगा। ऩवलत्र भनलारा भनुष्म भशाऩुरूऴों क ऩाव जाते शी तत्त्लसान भईऄ ऩशुॉच वकता शै । अऩवलत्र े भनलारा ळॊकाळीर आदभी घणा वे मुि शोकय वत्वॊग भईऄ फहढमा-वे-फहढमा फात वुनेगा तो बी ृ उवको यॊ ग नशीॊ रगेगा। शभाया चचत्त न्जतना ऩवलत्र औय ननदोऴ शोता शै उतना शी शभईऄ तीथय का बी राब शोता शै । तीवयी फात् जगत भईऄ त्मागने मोनम क्मा शै ? कनक औय कान्ता। कनक भाने वुलणय अथायत ् धन औय कान्ता भाने स्त्री। त्मागी, वलयि वॊन्मावी क मरए मे दोनों चीजईऄ भूर वे औय े बाल वे त्माग दे ने मोनम शैं। गशस्थ इन दोनों को भूर वे नशीॊ त्माग वकता क्मोंकक इन दोनों क ृ े बफना गशस्थ जीलन हटकगा नशीॊ। अत् इनकी आवक्ति त्मागईऄ । 'कनक-कान्ता क बफना भैं जी नशीॊ ृ े े वकता' – ऐवी धायणा जो घुव गई शै उवका बीतय वे त्माग कयईऄ । लास्तल भईऄ , शभ वफ चीजों के बफना बी जी वकते शैं, ऩयन्तु अऩने चैतन्मस्लरूऩ आत्भदे ल क बफना नशीॊ जी वकते। े कनक औय कान्ता का आकऴयण जील को उन्ननत वे चगया दे ता शै । इव आकऴयण ने कई जऩी-तऩी-मोगी-त्माचगमों को चगयाकय यख हदमा शै । चगय जाना मश प्रभाद शै , रेककन चगयकय न उठना मश ऩाऩ शै ।
  16. 16. अन्त्कयण की अलस्थाएॉ फदरती यशती शैं। जो अन्त्कयण की अलस्थाओॊ वे ऩाय गमे शैं उन भशाऩुरूऴों की फात ननयारी शै , रेककन अन्त्कयण क दामये भईऄ जीने लारे शभ रोगों को ळीर े औय सान का अनत आदय कयक वालधान शोकय यशना चाहशए। े ऩुरूऴ वाधक क मरए स्त्री का आकऴयण छोडना आलश्मक शै औय भहशरा वाधक क मरए े े ऩुरूऴ का आकऴयण छोडना आलश्मक शै । जफ तक दे श क वलकायी आकऴयणों भईऄ चचत्त डूफता यशे गा, े तफ तक न वॊवाय भईऄ यव मभरेगा औय न तत्त्लसान भईऄ यव मभरेगा। फाह्य आकऴयण का यव न्जतना कभ शोता जामेगा उतना आन्तरयक यव ळरू शोता जामेगा। न्जतना आन्तरयक यव फढे गा ु उतना फाह्य आकऴयण नशीॊ यशे गा। तफ तभ वॊवाय भईऄ हदखोगे, व्माऩाय-धन्धा-योजगाय कयने लारे ु हदखोगे, वन्तान को जन्भ दे ने लारे हदखोगे , दवयों की नजयों भईऄ तभाभ कक्रमा-कराऩ कयते शुए ू हदखोगे रेककन लास्तल भईऄ तभ कशाॉ शो मश तम्शी जानोगे अथला कोई औय ब्रह्मलेत्ता जानईऄ गे। ु ु अऩने वलऴम भईऄ सान शोता शै औय दवये क वलऴम भईऄ अनभान शोता शै । अनभान वे बरे ू े ु ु कोई फया कश दे रेककन तम्शाये हदर भईऄ द्ख नशीॊ शोगा। तम्शईऄ कोई बरा कश दे रेककन बीतय वे ु ु ु ु बरा नशीॊ शो तो दवयों का बरा कशना बी तुम्शईऄ तवल्री नशीॊ दे गा। कोई तुम्शईऄ बरा कश दे ू इववे इतना बरा नशीॊ शोता न्जतना तुम्शाया भन न्स्थय शोने वे तुम्शाया बरा शोता शै । कोई तुम्शईऄ फुया कय दे इववे इतना फुया नशीॊ शोता न्जतना तुम्शाया भन अन्स्थय, वलकायी शोने वे तुम्शाया फुया शोता शै । अऩनी आत्भननद्षा औय अऩना स्लरूऩ शी कल्माण का धाभ शै । दे श को वजाना, उवे ठीक यखना, दे श की भत्मु वे बमबीत शोना, ननन्दा वे बमबीत शोना, प्रळॊवा क मरए रारानमत ृ े शोना, मे वफ कल्माण वे लॊचचत कयने लारी फातईऄ शैं। इनभईऄ उरझे शुए रोग ऩये ळान यशते शैं। षभा, ळौच, न्जतेन्न्द्रमता मे वफ वदगुण ळीर क अन्तगयत आते शैं, दै ली वॊऩवत्त क े े अॊतगयत आते शैं। ईद्वय प्रानद्ऱ की तीव्र इच्छा वे आधी वाधना शो जाती शै , तभाभ दोऴ दय शोने ू रगते शैं। जगत क बोग ऩाने की इच्छाभात्र वे आधी वाधना नद्श शो जाती शै , अन्त्कयण े भमरन शोने रगता शै । 'श्रीमोगलामळद्ष भशायाभामण' भईऄ मरखा शै ् "इव जील की इच्छा न्जतनी-न्जतनी फढती शै उतना-उतना लश छोटा शो जाता शै । न्जतनी इच्छा औय तष्णाओॊ का त्माग कयता शै उतना लश ृ भशान ् शो जाता शै ।" वॊवाय क वुख ऩाने की इच्छा दोऴ रे आती शै औय आत्भवुख ऩाने की इच्छा वदगुण रे े आती शै । ऐवा कोई दगुण नशीॊ जो वॊवाय क बोग की इच्छा वे ऩैदा न शो। व्मक्ति फुवद्धभान शो, ु य े रेककन बोग की इच्छा उवभईऄ दगुण रे आमेगी। चाशे ककतना बी फुद्धू शो, रेककन ईद्वय प्रानद्ऱ की ु य इच्छा उवभईऄ वदगुण रे आएगी। फशुत बोचगमों क फीच वाधक जाता शै तो फशुतों क वॊकल्ऩ, द्वावोच्छलाव वाधक को नीचे े े रे आते शैं। उवका ऩुयाना अभ्माव कपय उवे वालधान कय दे ता शै । अत् मोगाभ्मावी वाधकों को चाहशए कक ले बोचगमों क वॊऩक वे अऩने को फचाते यशईऄ , आदय वे ळीर का ऩारन कयते यशईऄ । े य

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