आयुर्वेद धनवन्‍तरि

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हिन्‍दू देवता भगवान धनवन्‍तरि, जिनको स्‍मरण, ध्‍यान, पूजा, अर्चना करनें से आरोग्‍य और स्‍वास्‍थय की प्राप्ति होती है, इन्‍हे पूजनें से बीमारियां और असाध्‍य, कष्‍ट साध्‍य रोगों से छुटकारा मिलता है, ऐसी मान्‍यता है Hindu God of Health Dhanavatry, the originator of Ayurveda

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  • हिन्‍दुओं में आरोग्‍य ओर श्स्‍वास्‍थ्‍य को प्रदान करनें वाले देवता भगवान विष्‍णु के अवतार भगवान धनवन्‍तरि देव का बहुत महत्‍व है
  • आयुर्वेद धनवन्‍तरि

    1. 1. आयुर्वेद : आरोग्‍य के देवता भगवान धनवंतरि प्रस्‍तुतकर्ता : डा 0 देशबंधु बाजपेयी कनक पालीथेरेपी क्‍लीनिक एवं रिसर्च सेंटर 67-70, भूसाटोली रोड , बरतन बाजार , कानपुर 208001, यू 0 पी 0, इंडिया फैक्‍स - 91 512 2308092
    2. 2. आयुर्वेद के देवता : भगवान धनवंतरि <ul><li>पौराणिक गाथाओं में वर्णन मिलता है कि समुद्र मंथन में भगवान धनवंतरि समुद्र से अमृत कलश लेकर धन तेरस के दिन प्रकट हुये , जिनके चार भुजायें थीं </li></ul>
    3. 3. भगवान धनवन्‍तरि स्‍वरूप <ul><li>एक हाथ में शंख , एक हाथ में चक्र , एक हाथ में जलूका और एक हाथ में अमृत कलश धारण किये हुये थे </li></ul>
    4. 4. भगवान विष्‍णु के अवतार <ul><li>भगवान धनवंतरि को भगवान विष्‍णु का अवतार मानते हैं </li></ul>
    5. 5. धनवंतरि स्‍वरूप नमामि धनवन्‍तरिमादि देवम् , सुरासुरैर वंदितपाद पद्मम् । लोके जरा रूग्‍भय मृत्‍युनाशम् , दातारिमीशम् विवधौषधीनाम् ।। शंखं चक्रमुपर्यधश्‍च कारर्योदिव्‍यौषधम् दक्षिणे । वामेनान्‍यकरेण सम्‍भृतसुधाकुम्‍भं जलौकावलिम् ।।
    6. 6. जन्‍म दिन : <ul><li>प्रत्‍येक वर्ष दीपावली के दो दिन पहले धन तेरस के दिन सभी आयुर्वेदिक चिकित्‍सक भगवान धनवंतरि जी का जन्‍म दिन मनाते हैं </li></ul><ul><li>इन्‍हें महालक्ष्‍मी जी का बडा भाई माना जाता है </li></ul>
    7. 7. हिन्‍दू पुराणों मे धनव‍न्‍तरि देव <ul><li>श्री मद् भागवत , महाभारत , अग्नि पुराण और वायु पुराण में भगवान धनवन्‍तरि का उल्‍लेख प्राप्‍त होता है </li></ul>
    8. 8. सुश्रुत संहिता <ul><li>आयुर्वेद को शल्‍य चिकित्‍सा का ज्ञान देनें वाले महर्षि सुश्रुत का मानना है कि शल्‍य चिकित्‍सा ‍ ‍ ‍विधान का आदि से लेकर अन्‍त तक का ज्ञान होंनें के कारण से “धनवन्‍तरि” नाम कहा गया है </li></ul>
    9. 9. अन्‍य उल्‍लेख : <ul><li>हरिवंश पुराण , वायु पुराण और ब्रम्‍हान्‍ड पुराण के अनुसार काशी नरेश दिवोदास , धनवन्‍तरि के परपौत्र थे </li></ul>
    10. 10. वंश परम्‍परा -1 <ul><li>द्वितीय द्वापर युग में धन्‍व नाम के एक राजा हुये थे । इनके कोई सन्‍तान न थी । </li></ul><ul><li>इन्‍होंनें भगवान धनवन्‍तरि की आराधना पुत्र प्राप्‍त करनें की इच्‍छा से की </li></ul><ul><li>राजा को पुत्र रत्‍न की प्राप्ति हुयी </li></ul><ul><li>पुत्र का नाम धनवन्‍तरि रखा गया </li></ul>
    11. 11. वंश परम्‍परा -2 <ul><li>यह धनवन्‍तरि आयुर्वेद और आयुर्वेद के आठों अंगों के ज्ञाता थे </li></ul><ul><li>इनके एक पुत्र हुआ जिसका नाम केतुमान रखा गया </li></ul><ul><li>केतुमान के पुत्र का नाम भीमरथ था </li></ul><ul><li>भीमरथ के पुत्र का नाम दिवीदास था </li></ul>
    12. 12. वंश परम्‍परा -3 <ul><li>दिवीदास कालान्‍तर में काशी के राजा हुये जिन्‍हें काशी नरेश कहा जाता है </li></ul><ul><li>दिवीदास आयुर्वेद के महान ज्ञाता थे </li></ul><ul><li>सुश्रुत को दिवीदास नें आयुर्वेद का ज्ञान कराया </li></ul><ul><li>महर्षि सुश्रुत नें सुश्रुत संहिता की रचना की </li></ul><ul><li>सुश्रुत संहिता , शल्‍य चिकित्‍सा विधि का ज्ञान करानें वाली सबसे प्राचीन ज्ञान श्रोत है </li></ul>
    13. 13. काशी वर्णन : <ul><li>काशी का वर्णन भारतीय प्राचीन धर्म ग्रन्‍थों में प्राप्‍त होता है </li></ul><ul><li>यह गंगा नदी के तट पर स्‍थित है </li></ul><ul><li>हिन्‍दू देवता बाबा विश्‍वनाथ भगवान शंकर की एक पीठ यहां स्थित है </li></ul><ul><li>काशी को बनारस नाम से कालान्‍तर में पुकारा जानें लगा </li></ul><ul><li>भारत को स्‍वतंत्रता प्राप्‍त करनें के पश्‍चात् बनारस का नाम बदलकर वाराणसी कर दिया गया </li></ul>
    14. 14. काशी नरेश : <ul><li>वाराणसी में अस्‍सी घाट के सामनें गंगा नदी के दूसरे पार “काशी नरेश” का किला है </li></ul><ul><li>काशी नरेश के वंशज यहां निवास करते हैं </li></ul><ul><li>वाराणसी की जनता द्वारा आयोजित धार्मिक आयोजनों के समय काशी नरेश की उपस्थिति होती है </li></ul>
    15. 15. धनवन्‍तरि महिमा : <ul><li>आरोग्‍य प्रदान करनें वाले देवता भगवान धनवन्‍तरि का ध्‍यान करनें , पूजा अर्चना करनें से रोगी व्‍यक्ति रोग मुक्‍त होते हैं </li></ul>
    16. 16. आयुर्वेदिक चिकित्‍सकों की मान्‍यता <ul><li>आयुर्वेदिक चिकित्‍सकों की मान्‍यता है कि धनवन्‍तरि देव की पूजा अर्चना करनें से औषधियां सिद्ध होती हैं , निदान ज्ञान में निपुणता प्राप्‍त होती है , चिकित्‍सा कार्य में सफलता प्राप्‍त होती है , चिकित्‍सक के हाथों रोगी आरोग्‍य होते हैं </li></ul>
    17. 17. असाध्‍य रोंगों से छुटकारा <ul><li>ऐसी मान्‍यता है कि कठिन और असाध्‍य रोगी धनवन्‍तरि देव का ध्‍यान करनें से आरोग्‍य की प्राप्ति करते हैं </li></ul>
    18. 18. डा 0 देश बंधु बाजपेयी <ul><li>जन्‍म 20 नवम्‍बर 1945 </li></ul><ul><li>40 सालों से अधिक एलोपैथी , आयुर्वेदिक , होम्‍योपैथिक चिकित्‍सा विधियों से प्रैक्टिस </li></ul><ul><li>एकूपंक्‍चर , मेग्‍नेट थेरेपी , फिजियोथेरेपी , योग , प्राकृतिक चिकित्‍सा , इलेक्‍ट्रे थेरेपी आदि द्वारा चिकित्‍सा कार्य करनें का अनुभव </li></ul><ul><li>आविष्‍कारक : इलेक्‍ट्रोत्रिदोषग्राफी , शंखद्राव आधारित औषधियां , पेंटास्‍केल आयुर्वेदिक औषधियां </li></ul><ul><li>असाध्‍य रोगों , कठिन रोंगों , पुरानीं बीमारियों के इलाज में एक्‍सपर्ट चिकित्‍सक </li></ul>
    19. 19. निवेदन : <ul><li>समय समय पर इस स्‍लाइड शो में आवश्‍यकतानुसार परिवर्तन किये जाते हैं , अपडेट देखनें के लिये समयान्‍तर पर स्‍लाइड शो देखते रहें </li></ul><ul><li>इस स्‍लाइड शो के बारे में अपनें मित्रों , संबंधियों को जानकारी देंनें का प्रयास करें </li></ul><ul><li>अपनें सुझाव इस स्‍लाइड शो के बारे में देते रहें </li></ul>
    20. 20. वीडियो प्रस्‍तुति <ul><li>निम्‍न वेब साइट पर आयुर्वेद से संबंधित वीडियो देखें </li></ul><ul><li>http://www.youtube.com/drdbbajpai </li></ul>
    21. 21. स्‍लाइड शो <ul><li>निम्‍न वेब साइट पर स्‍लाइड शो देखें जो आयुर्व्रद से संबंधित हैं </li></ul><ul><li>http://slideshare.net/drdbbajpai </li></ul>
    22. 22. यह स्‍लाइड शो निम्‍न वेब साइट पर देखें , इन वेबसाइटों में आयुर्वेद के संबंध में महत्‍वपूर्ण जानकारियां दी गयीं हैं <ul><li>http://etgind.wordpress.com </li></ul><ul><li>http://ayurscan.wordpress.com </li></ul><ul><li>http://ayurvedaintro.wordpress.com </li></ul><ul><li>http://www.slideshare.net/drdbbajpai </li></ul><ul><li>http ://www.youtube.com/drdbbajpai </li></ul>

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