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Maithili - Book of Baruch.pdf

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Book of Baruch, ancient text purportedly written by Baruch, secretary and friend of Jeremiah, the Old Testament prophet. The text is still extant in Greek and in several translations from Greek into Latin, Syriac, Coptic, Ethiopic, and other languages. The Book of Baruch is apocryphal to the Hebrew and Protestant canons but was incorporated in the Septuagint and was included in the Old Testament for Roman Catholics. The work is a compilation of several authors and is the only work among the apocrypha that was consciously modeled after the prophetic writings of the Old Testament.

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अध्याय 1
1 ई सभ ओहि पुस्तकक वचन अहि जे बरूक बेहबलोन मे
हलखने िलाि।
2 पााँचम वर्ष आ सातम हिन कल्दी सभ यरूशलेम क
ेाँ
पकह़ि कऽ आहि मे जरा िेलक।
3 बरूक यहूिाक राजा योआकीमक पुत्र यकोहनयाि आ
ओहि सभ लोकक कान मे एहि पुस्तकक वचन पढ़लहन।
4 क
ु लीन लोक आ राजाक पुत्र सभ, बुजुिष सभ आ सभ
लोकक सुनबा मे, नीचााँ साँ ऊ
ाँ च धरर, सुि निीक कात मे
बाबुल मे रिहनिार सभ लोकक सुनबा मे।
5 तखन ओ सभ प्रभुक समक्ष कानैत, उपवास करैत आ
प्रार्षना कयलहन।
6 ओ सभ प्रत् येकक सामर््ष यक अनुसार धनक संग्रि सेिो
बनौलहन।
7 ओ सभ ओकरा यरूशलेम मे सलोमक पुत्र चेल्कियासक
पुत्र योआहकम आ पुरोहित सभ आ यरूशलेम मे हुनका संि
भेटल सभ लोकक लि पठौलहन।
8 हसवान मासक िसम हिन जखन ओ प्रभुक घरक बतषन
सभ क
ेाँ मन् हिर साँ बािर हनकाहल कऽ यहूिा िेश मे वापस
करबाक लेल ग्रिण कयलहन, अर्ाषत चानीक बतषन सभ, जे
सेिेहसयास यौहसयासक पुत्र जािा राजा बनौने िलाि।
9 तकर बाि बेहबलोनक राजा नबूकोिोनोसोर यरूशलेम साँ
यकोहनया, राजक
ु मार सभ, बंिी सभ, पराक्रमी सभ आ
िेशक लोक सभ क
ेाँ यरूशलेम साँ लऽ कऽ बेहबलोन लऽ
िेलाि।
10 ओ सभ किलहर्न, “िेखू, िम सभ अिााँ सभ क
ेाँ
िोमबहल, पापबहल आ धूप कीनबाक लेल पाइ पठे ने िी आ
अिााँ सभ मन्ना तैयार कऽ कऽ अपन परमेश् वर परमेश्
वरक वेिी पर चढ़ाबऽ चािैत िी।
“
12 प्रभु िमरा सभ क
ेाँ सामर्थ्ष िेहर्न आ िमरा सभक आाँल्कख
क
ेाँ िल्लुक करताि, आ िम सभ बेहबलोनक राजा
नबूकोिोनोसोरक िाया मे आ हुनकर पुत्र बल्थासरक िाया
मे रिब आ िम सभ बहुत हिन धरर हुनका सभक सेवा करब
आ हुनका सभक नजरर मे अनुग्रि पाहब जायब .
13 िमरा सभक लेल सेिो अपन परमेश् वर परमेश् वर साँ
प्रार्षना करू। आ आइ धरर प्रभुक क्रोध आ हुनकर क्रोध
िमरा सभ साँ नहि भ’ िेल अहि।
“
15 अिााँ सभ किब जे, “धमष परमेश् वर परमेश् वर परमेश्
वरक अहि, मुिा िमरा सभक मुाँिक भ्रम, जेना आइ भऽ
रिल अहि, यहूिा आ यरूशलेमक हनवासी सभक लेल।”
16 िमरा सभक राजा सभ क
ेाँ , िमरा सभक मुल्कखया सभ क
ेाँ ,
िमरा सभक पुरोहित सभ क
ेाँ , िमरा सभक प्रवक
् ता सभ क
ेाँ
आ िमरा सभक पूवषज सभ क
ेाँ ।
17 िम सभ प्रभुक समक्ष पाप कयलहुाँ।
“
19 जाहि हिन परमेश् वर िमरा सभक पूवषज सभ क
ेाँ हमस्र
िेश साँ बािर अनने िलाि, तहिया साँ आइ धरर िम सभ
अपन परमेश् वर परमेश् वरक आज्ञा नहि मानलहुाँ आ
हुनकर आवाज नहि सुनबा मे लापरवाि िी।
20 एहि लेल िमरा सभ क
ेाँ ओ िुर्् टता आ श्राप जे प्रभु
अपन सेवक मूसा द्वारा ओहि समय मे हनयुक्त कयलहन,
जाहि समय मे ओ िमरा सभक पूवषज क
ेाँ हमस्र िेश साँ बािर
अनने िलाि, जाहि साँ िमरा सभ क
ेाँ एकटा एिन िेश िेल
जाय जे िूध आ मधु साँ बिैत अहि ई हिन िेखबाक अहि।
21 तैयो िम सभ अपन परमेश् वर परमेश् वरक आवाज
नहि सुनलहुाँ, जेना ओ िमरा सभ लि पठौलहन प्रवक
् ता
सभक समस्त वचनक अनुसार।
22 मुिा परमेश् वर परमेश् वरक आलोक मे अधलाि काज
करबाक लेल प्रत् येक मनुर्् य अपन िुर्् ट हृियक
कल्पनाक पालन करैत िल।
अध्याय 2
1 तेाँ परमेश् वर अपन वचन क
ेाँ पूरा कयलहन, जे ओ िमरा
सभक हवरुद्ध, इस्राएलक न् याय करयवला िमरा सभक
न्यायाधीश सभक हवरुद्ध, िमरा सभक राजा सभक, िमरा
सभक मुल्कखया सभक हवरुद्ध आ इस्राएल आ यहूिाक लोक
सभक हवरुद्ध कयलहन।
2 मूसाक धमष-हनयम मे हलखल बातक अनुसार जे यरूशलेम
मे भेल िल, से िमरा सभ पर एिन पैघ हवपहि आनय।
3 मनुख अपन बेटाक मांस आ अपन बेटीक मांस खाय।
4 ओ ओकरा सभ क
ेाँ अपना सभक चारूकातक सभ
राज्यक अधीन रिबाक लेल सौंहप िेलहन, जाहि साँ ओ सभ
चारूकातक समस्त लोकक बीच अपमान आ उजा़ि जकााँ
बनय, जतय प्रभु ओकरा सभ क
ेाँ हततर-हबतर कऽ िेने िहर्।
5 एहि तरिेाँ अपना सभ परमेश् वर परमेश् वरक हवरुद्ध पाप
कयलहुाँ आ हुनकर आवाजक आज्ञा नहि मानलहुाँ, ताहि
कारणेाँ अपना सभ क
ेाँ नीचााँ खसा िेल िेल।
6 िमरा सभक परमेश् वर परमेश् वर परमेश् वरक
धाहमषकता अहि।
7 ई सभ हवपहि िमरा सभ पर आहब िेल अहि जे प्रभु िमरा
सभक हवरुद्ध सुनौलहन अहि
8 तैयो िम सभ प्रभुक समक्ष प्रार्षना नहि क
े ने िी जे िम सभ
प्रत्येक क
े ओ अपन िुर्् ट हृियक कल्पना सभ साँ मोह़ि
सकब।
9 तेाँ परमेश् वर िमरा सभ क
ेाँ अधलािक लेल िेखैत रिलाि
आ प्रभु िमरा सभ पर ई बात अनलहन।
10 तैयो िम सभ हुनकर बात नहि सुनलहुाँ जे प्रभुक आज्ञाक
अनुसार चलब जे ओ िमरा सभक सोझााँ राखने िहर्।
11 आब, िे इस्राएलक परमेश् वर, जे अपन प्रजा क
ेाँ हमस्र
िेश साँ पराक्रमी िार्, ऊ
ाँ च बााँहि आ चमत् कार आ चमत्
कार आ मिान सामर््ष य साँ हनकाहल कऽ अपना क
ेाँ नाम
पाहब लेलहुाँ। जेना आइ िेखा रिल अहि।
12 िे िमर परमेश् वर, िम सभ पाप क
े लहुाँ, अभल्कक्त क
े लहुाँ,
अिााँक सभ हवहध-हवधान मे अधमष कयल िेल।
13 अिााँक क्रोध िमरा सभ साँ िहट जाउ, हकएक ताँ िम सभ
ओहि जाहत सभक बीच हकिु ए िोटे बचल िी, जतऽ अिााँ
िमरा सभ क
ेाँ हिह़िया िेलहुाँ।
14 िे प्रभु, िमरा सभक प्रार्षना आ िमरा सभक हवनती सुनू,
आ अपना लेल िमरा सभ क
ेाँ बचाउ, आ िमरा सभ क
ेाँ जे
सभ िमरा सभ क
ेाँ लऽ िेल अहि, हुनका सभक नजरर मे
िमरा सभ क
ेाँ अनुग्रि हिअ।
15 एहि लेल सभ पृर्् वी क
ेाँ ई जाहन लेत जे अिााँ िमरा
सभक परमेश् वर परमेश् वर िी, हकएक ताँ इस्राएल आ
ओकर संतान अिााँक नाम साँ बजाओल िेल अहि।
16 िे प्रभु, अपन पहवत्र घर साँ नीचााँ िेखू आ िमरा सभ पर
हवचार करू।
17 आाँल्कख खोहल कऽ िेखू। कारण, जे मृतक कबर मे अहि,
जकर प्राण अपन शरीर साँ िहट िेल अहि, ओ प्रभु क
ेाँ ने
स्तुहत िेत आ ने धमष।
18 मुिा जे प्राणी बहुत परेशान अहि, जे झुहक कऽ कमजोर
भऽ जाइत अहि, आ आाँल्कख क्षीण अहि आ भूखल प्राणी, िे
प्रभु, अिााँक प्रशंसा आ धाहमषकता िेत।
19 तेाँ िे िमर परमेश् वर, िम सभ अपन पूवषज आ राजा
सभक धाहमषकताक लेल अिााँक समक्ष हवनम्र हवनती नहि
करैत िी।
20 अिााँ अपन क्रोध आ क्रोध िमरा सभ पर पठा िेलहुाँ,
जेना अिााँ अपन सेवक भहवष्यवक्ता सभक द्वारा किने िी।
21 प्रभु ई किैत िहर्, “बाबुलक राजाक सेवा करबाक लेल
अपन कान्ह झुकाउ।”
22 मुिा जाँ अिााँ सभ बाबुलक राजाक सेवा करबाक लेल
प्रभुक आवाज नहि सुनब।
23 िम यहूिाक शिर आ यरूशलेमक बािर साँ िाँसी-
खुशीक आवाज आ आनन्दक आवाज, वर आ कहनयााँक
आवाज क
ेाँ समाप्त कऽ िेब हनवासी।
24 मुिा िम सभ बाबुलक राजाक सेवा करबाक लेल
अिााँक आवाज नहि सुनय चािैत िलहुाँ, तेाँ अिााँ अपन
सेवक प्रवक
् ता सभक द्वारा किल िेल बात सभ क
ेाँ नीक
कऽ िेलहुाँ जे िमरा सभक राजा सभक िड्डी आ िमरा
सभक पूवषज सभक िड्डी सभ क
ेाँ नीक करबाक चािी अपन
जिि स बािर हनकालल जाय।
25 िेखू, ओ सभ हिनक िमी आ राहत मे ठंढा मे फ
े कल
जाइत िहर् आ अकाल, तलवार आ मिामारी साँ बहुत िुुः ख
मे मरर िेलाि।
26 जे घर अिााँक नाम साँ बजाओल िेल अहि, तकरा अिााँ
इस्राएलक वंश आ यहूिाक वंशजक िुर्् टताक कारणेाँ
उजाह़ि िेलहुाँ, जेना आइ िेखल जा रिल अहि।
27 िे िमर सभक परमेश् वर, अिााँ अपन सभ भलाई आ
अपन सभटा ियाक अनुसार िमरा सभक संि व्यविार
क
े लहुाँ।
28 जेना अिााँ अपन सेवक मूसाक द्वारा ओहि हिन किने
रिी जखन अिााँ हुनका इस्राएलक लोकक समक्ष धमष-हनयम
हलखबाक आज्ञा िेलहुाँ।
29 जाँ अिााँ सभ िमर आवाज नहि सुनब ताँ हनहित रूप साँ ई
बहुत पैघ भी़ि जाहत सभक बीच कम संख्या मे बिहल
जायत, जतय िम ओकरा सभ क
ेाँ हिह़िया िेब।
30 िम जनैत िलहुाँ जे ओ सभ िमर बात नहि सुनत,
हकएक ताँ ई कठोर ििषन बला लोक अहि।
31 ओ ई जाहन लेत जे िम हुनका सभक परमेश् वर प्रभु िी,
हकएक ताँ िम हुनका सभ क
ेाँ सुनबाक लेल मोन आ कान
िेबहन।
32 ओ सभ अपन बंिी िेश मे िमर स्तुहत करत आ िमर
नाम पर हवचार करत।
33 अपन कठोर िरिहन आ िुष्कमष साँ घुरर जाउ, हकएक ताँ
ओ सभ अपन पूवषज सभक बाट मोन पा़ित जे प्रभुक समक्ष
पाप क
े ने िलाि।
34 िम हुनका सभ क
ेाँ ओहि िेश मे फ
े र साँ आहन िेब, जकर
प्रहतज्ञा िम हुनका सभक पूवषज अब्रािम, इसिाक आ
याक
ू ब क
ेाँ शपर् ग्रिण कएने रिी, आ ओ सभ ओहि िेशक
माहलक बनताि.
35 िम हुनका सभक संि हुनका सभक परमेश् वर बनबाक
अनन्त वाचा करब, आ ओ सभ िमर प्रजा बनत।
अध्याय 3
1 िे सवषशल्कक्तमान प्रभु, इस्राएलक परमेश् वर, हवपहि मे
प़िल प्राणी अिााँ क
ेाँ पुकारैत अहि।
2 िे प्रभु, सुनू, िया करू। हकएक ताँ अिााँ ियालु िी, आ
िमरा सभ पर िया करू, हकएक ताँ िम सभ अिााँक समक्ष
पाप क
े लहुाँ।”
3 अिााँ अनन्त काल धरर हटक
ै त िी, आ िम सभ सवषर्ा नाश
भऽ जाइत िी।
4 िे सवषशल्कक्तमान प्रभु, िे इस्राएलक परमेश् वर, आब मृत
इस्राएली सभ आ ओकर संतान सभक प्रार्षना सुनु, जे
अिााँक सामने पाप कएने िहर् आ अिााँक परमेश् वरक
आवाज नहि सुनलहन .
5 िमरा सभक पूवषज सभक अधमष सभ क
ेाँ नहि मोन पा़िू ,
बल् हक एखन एहि समय मे अपन सामर््ष य आ अपन नाम
पर हवचार करू।
6 अिााँ िमर सभक परमेश् वर प्रभु िी, आ िे प्रभु, िम सभ
अिााँक प्रशंसा करब।
7 एहि लेल अिााँ िमरा सभक हृिय मे अपन भय क
ेाँ एहि
लेल राल्कख िेलहुाँ जे िम सभ अिााँक नाम क
ेाँ पुकारब आ बंिी
मे अिााँक स्तुहत करी।
8 िेखू, िम सभ आइयो अपन बंिी मे िी, जतऽ अिााँ िमरा
सभ क
ेाँ हततर-हबतर कऽ िेलहुाँ, एकटा अपमान आ
अहभशाप आ भुितानक अधीन रिबाक लेल।
9 िे इस्राएल, जीवनक आज्ञा सुनू, बुल्कद्ध क
ेाँ बुझबाक लेल
कान करू।
“
11 की अिााँ चबर मे उतरय बला लोक सभक संि हिनल
िेल िी?
12 अिााँ बुल्कद्धक फव्वारा िोह़ि िेलहुाँ।
13 जाँ अिााँ परमेश् वरक बाट पर चलैत रहितहुाँ ताँ अनन् त
काल धरर शान्‍
त मे रहितहुाँ।
14 ई जाहन हलअ जे बुल्कद्ध कतय अहि, बल कतय अहि आ
बुल्कद्ध कतय अहि। जाहि साँ अिााँ ईिो जाहन सकब जे हिनक
लम्बाई कतय अहि आ जीवन कतय अहि, आाँल्कखक इजोत
आ शाल्कन्त कतय अहि।
15 ओकर स्र्ान क
े बुहझ िेल अहि? आहक ओकर खजाना
मे क
े आहब िेल अहि?
16 जाहत-जाहतक राजक
ु मार सभ कतऽ बहन िेल िहर् जे
पृर्् वी पर पशु सभ पर राज करैत िलाि।
17 जे सभ आकाशक हच़िै सभक संि शिल करैत िल, आ
चानी आ सोना जमा करयवला सभ, जाहि पर लोक भरोसा
करैत अहि आ अपन लाभक अंत नहि करैत िल?
18 जे चानीक काज करैत िल आ एतेक सावधान रिैत िल
आ हजनकर काज अनजान अहि।
19 ओ सभ हवलुप्त भऽ कबर मे उतरर िेल अहि आ ओकर
बिला मे िोसरो लोक ऊपर आहब िेल अहि।
20 युवक सभ इजोत िेल्कख पृर्् वी पर रिलाि, मुिा ज्ञानक
बाट नहि जनैत अहि।
21 आ ने ओकर बाट बुझलहन आ ने ओकरा पक़िलहन।
22 कनान मे ई बात नहि सुनल िेल अहि आ ने र्ेमन मे
िेखल िेल अहि।
23 पृर्् वी पर बुल्कद्धक खोज करय बला अिारेन्स, मेरन आ
र्ेमनक व्यापारी, िंतकर्ाक लेखक आ बुल्कद्धक खोज
करयवला। एहि मे साँ हकयो बुल्कद्धक बाट नहि जनने अहि,
आ ने ओकर बाट मोन पा़िने अहि।
24 िे इस्राएल, परमेश् वरक घर कतेक पैघ अहि! आ
ओकर सम्पहिक स्र्ान कतेक पैघ अहि!
25 पैघ, आ एकर कोनो अंत नहि। ऊ
ाँ च, आ अर्ाि।
26 शुरूए साँ प्रहसद्ध हिग्गज सभ िल जे एतेक पैघ कि आ
युद्ध मे एतेक हनपुण िल।
27 प्रभु हुनका सभ क
ेाँ नहि चुनलहन आ ने हुनका सभ क
ेाँ
ज्ञानक बाट िेलहन।
28 मुिा ओ सभ नष्ट भऽ िेलाि, हकएक ताँ हुनका सभ लि
कोनो बुल्कद्ध नहि िलहन आ ओ सभ अपन मूखषता साँ नाश
भऽ िेलाि।
29 क
े स् विष मे जा कऽ ओकरा लऽ कऽ मेघ साँ उतारलक?
30 समुद्रक ओहि पार जा कऽ ओकरा पाहब कऽ ओकरा
शुद्ध सोनाक बिला मे आनत?
31 ओकर बाट क
े ओ नहि जनैत अहि आ ने ओकर बाट क
े
बारे मे सोचैत अहि।
32 मुिा जे सभ हकिु जनैत अहि से ओकरा हचन्हैत अहि
आ ओकरा अपन बुल्कद्ध साँ पाहब लेलक।
33 जे इजोत पठबैत अहि आ ओ चहल जाइत अहि, से
ओकरा फ
े र साँ बजबैत अहि आ ओ डर साँ ओकर आज्ञा
मानैत अहि।
34 हुनका सभक चौकी मे तारा सभ चमक
ै त िल आ
आनल्कन्दत िोइत िल। आ एहि तरिेाँ ओ सभ िाँसी-खुशी साँ
ओकरा सभ क
ेाँ बनौहनिार क
ेाँ इजोत िेखौलहन।
35 ई िमर सभक परमेश् वर िहर्, आ हुनकर तुलना मे
िोसर क
े ओ नहि मानल जायत
36 ओ ज्ञानक समस्त बाट ताहक लेलक आ ओकरा अपन
सेवक याक
ू ब आ अपन हप्रय इस्राएल क
ेाँ िऽ िेलक।
37 तकर बाि ओ पृर्् वी पर अपना क
ेाँ िेखौलहन आ मनुर््
यक संि िप्प-सप्प कयलहन।
अध्याय 4
1 ई परमेश् वरक आज्ञाक पुस्तक आ धमष-हनयम जे अनन्त
काल धरर रित। मुिा जे िोह़ि िेत से मरर जायत।
2 िे याक
ू ब, अिााँ घुहम कऽ ओकरा पकह़ि हलअ।
3 अपन आिर िोसर क
ेाँ नहि हियौक आ ने कोनो परिेशी क
ेाँ
अपन लाभक वस्तु नहि हियौक।
4 िे इस्राएल, िम सभ धन्य िी, हकएक ताँ परमेश् वरक
प्रसन्नताक बात िमरा सभ क
ेाँ बुझाओल जाइत अहि।
5 िे िमर प्रजा, इस्राएलक स्मरण करऽ वला िौसला बढ़ू ।
6 अिााँ सभ अपन हवनाशक लेल नहि, मुिा अिााँ सभ
परमेश् वर क
ेाँ क्रोहधत करबाक कारणेाँ अिााँ सभ शत्रु सभक
िार् मे सौंपल िेलहुाँ।
7 हकएक ताँ अिााँ सभ परमेश् वरक बहलिान नहि बहल कऽ
िुर्् टात् मा सभक लेल बहलिान िऽ कऽ जे अिााँ सभ
बनौलहन।
8 अिााँ सभ अनन्त परमेश् वर क
ेाँ हबसरर िेलहुाँ जे अिााँ
सभक पालन-पोर्ण कयलहन। अिााँ सभ यरूशलेम क
ेाँ िुखी
कऽ िेलहुाँ जे अिााँ सभ क
ेाँ पोसने िल।”
9 परमेश् वरक क्रोध अिााँ सभ पर आहब रिल िेल्कख ओ
बजलीि, “िे हसयोनक आसपास रिहनिार सभ, सुनू।
10 िम अपन बेटा-बेटी सभक बंिी बना कऽ िेखलहुाँ जे
अनन्त काल हुनका सभ पर अनने िलाि।
11 िम िर्ष साँ हुनका सभक पोर्ण क
े लहुाँ। मुिा हुनका सभ
क
ेाँ कानैत-कानैत आ शोक करैत हविा क’ िेलहन।
“ हकएक ताँ ओ सभ परमेश् वरक व्यवस्र्ा साँ िहट िेलाि।
13 ओ सभ हुनकर हनयम-हनयम नहि जनैत िल आ ने
हुनकर आज्ञाक बाट पर चलैत िल आ ने हुनकर धाहमषकता
मे अनुशासनक बाट पर चलैत िल।
14 हसयोनक आसपास रिहनिार सभ आहब कऽ िमर बेटा-
बेटी सभक बंिी क
ेाँ मोन पा़िू , जे अनन्त काल हुनका सभ
पर अनने िहर्।
15 ओ हुनका सभ पर िू र साँ एकटा एिन जाहत अनने िहर्,
जे हनलषज्ज जाहत आ परिेशी भार्ाक अहि, जे ने बूढ़क
आिर करैत िल आ ने बच्चा पर िया करैत िल।
16 ई सभ हवधवाक हप्रय संतान सभ क
ेाँ लऽ िेल अहि आ
बेटीक हबना असिरे उजा़ि िोह़ि िेलक।
17 मुिा िम अिााँक की मिहि कऽ सक
ै त िी?
18 जे ई हवपहि अिााँ सभ पर अनलक से अिााँ सभ क
ेाँ शत्रु
सभक िार् साँ बचाओत।
19 िे िमर सन्तान सभ, जाउ, जाउ, हकएक ताँ िम उजा़ि
भऽ िेल िी।
20 िम शाल्कन्तक वस्त्र उतारर कऽ अपन प्रार्षनाक बोरा
पहिरने िी।
21 िे िमर सन्तान सभ, िौसला राखू, प्रभु साँ पुकारू, ओ
अिााँ सभ क
ेाँ शत्रु सभक सामर््ष य आ िार् साँ मुक्त करताि।
22 िमर आशा अनन्त काल मे अहि जे ओ अिााँ सभ क
ेाँ
उद्धार करत। आ िमरा पहवत्र परमेश् वरक हिस साँ आनन्द
आयल अहि, कारण जे िया िमरा सभक अनन्त
उद्धारकताष साँ जल्कल्दये अिााँ सभ पर आओत।
23 िम अिााँ सभ क
ेाँ शोक आ कानैत-कानैत बािर पठौने
रिी, मुिा परमेश् वर अिााँ सभ क
ेाँ अनन्त काल धरर िर्ष आ
िर्षक संि िमरा फ
े र साँ िऽ िेताि।
24 जेना एखन हसयोनक प़िोसी सभ अिााँ सभक बंिी क
ेाँ
िेल्कख लेने अहि, तहिना ओ सभ जल्कल्दये अिााँक उद्धारक
िमरा सभक परमेश् वर हिस साँ िेल्कख लेत जे अिााँ सभ पर
बहुत महिमा आ अनन्त कालक चमकक संि आओत।
25 िमर बच्चा सभ, परमेश् वरक हिस साँ जे क्रोध अिााँ सभ
पर आयल अहि, से धैयषपूवषक सहू, हकएक ताँ अिााँक शत्रु
अिााँ सभ क
ेाँ सताबैत अहि। मुिा जल्कल्दये अिााँ ओकर
हवनाश िेखब आ ओकर िरिहन पर पैर राखब।”
26 िमर सुक
ु मार लोक सभ उर्ल-पुर्ल पर चहल िेल अहि,
आ शत्रु सभक पक़िल झुंड जकााँ लऽ िेल अहि।
27 िे िमर सन्तान सभ, सान्वना रहू, आ परमेश् वर साँ
पुकारू, हकएक ताँ अिााँ सभ क
ेाँ ओहि बातक स्मरण कयल
जायत जे अिााँ सभ पर ई सभ बात अनने िहर्।
28 हकएक ताँ जहिना अिााँ सभ परमेश् वर साँ भटबाक
हवचार िल, तेना घुरर कऽ हुनका िस िुना बेसी ताकब।
29 हकएक ताँ जे क
े ओ अिााँ सभ पर ई हवपहि अनने अहि,
से अिााँ सभक उद्धारक संि अनन्त आनन्द आनत।
30 िे यरूशलेम, नीक मोन राखू, हकएक ताँ जे अिााँ क
ेाँ ई
नाम िेलहन, से अिााँ क
ेाँ सान्वना िेत।
31 ओ सभ ियनीय िहर् जे अिााँ क
ेाँ कष्ट िेलहन आ अिााँक
पतन पर आनल्कन्दत भेलाि।
32 ओ शिर ियनीय अहि जकर सेवा तोिर सन्तान सभ
क
े ने िल।
33 हकएक ताँ जहिना ओ अिााँक हवनाश पर आनल्कन्दत
भेलीि आ अिााँक पतन पर प्रसन्न भेलीि।
34 हकएक ताँ िम ओकर ब़िका भी़िक आनन्द क
ेाँ िू र कऽ
िेब आ ओकर घमंड शोक मे बिहल जायत।
35 कारण, अनन्त काल साँ आहि ओकरा पर आहब जायत,
जकरा सिन करबाक लेल तरसैत अहि। ओ बहुत काल
धरर शैतान सभक हनवास रितीि।
36 िे यरूशलेम, अपन चारू कात पूब हिस िेखू, आ िेखू
जे परमेश् वरक हिस साँ अिााँ क
ेाँ जे आनन्द अबैत अहि।
37 िेखू, अिााँक पुत्र सभ अबैत अहि, जकरा अिााँ हविा
कएने िी, ओ सभ पहवत्र परमेश् वरक वचन द्वारा पूरब साँ
पहिम हिस जमा भ’ कऽ परमेश् वरक महिमा मे
आनल्कन्दत भऽ अबैत अहि।
अध्याय 5
1 िे यरूशलेम, शोक आ क्लेशक वस्त्र उतारू, आ परमेश्
वरक हिस साँ जे महिमा अबैत अहि, ओकर सुन्दरता सिाक
लेल पहिरू।
2 परमेश् वरक धाहमषकताक िोबर वस्त्र अपना चारू कात
फ
े हक हियौक। आ अनन्तक महिमाक मुक
ु ट अपन मार् पर
लिा हियौक।
3 परमेश् वर स् विषक नीचााँक सभ िेश मे अिााँक तेज
िेखाओत।
4 हकएक ताँ अिााँक नाम परमेश् वर द्वारा सिाक लेल
धाहमषकताक शाल्कन्त आ परमेश् वरक आराधनाक महिमा
किल जायत।
5 िे यरूशलेम उहठ कऽ ऊ
ाँ च ठाढ़ भऽ पूब हिस िेखू, आ
िेखू, पहवत्र परमेश् वरक वचन द्वारा पहिम साँ पूब हिस
अिााँक संतान सभ जमा भऽ िेल अहि आ परमेश् वरक
स्मरण मे आनल्कन्दत भऽ िेल अहि।
6 ओ सभ पैिले अिााँ साँ हविा भऽ िेलाि आ अपन शत्रु सभ
साँ िू र भऽ िेलाि।
7 परमेश् वर ई हनयुक
् त कयलहन अहि जे िरेक ऊ
ाँ च
पिा़िी आ नम्हर-नम्हर हकनार सभ क
ेाँ नीचााँ फ
े हक िेल जाय
आ घाटी सभ क
ेाँ भरर िेल जाय, जाहि साँ इस्राएल परमेश्
वरक महिमा मे सुरहक्षत भऽ जाय।
8 परमेश् वरक आज्ञाक कारणेाँ जंिल आ िरेक सुिल्कित
िाि सेिो इस्राएल पर िाएत।
9 परमेश् वर इस्राएल क
ेाँ अपन महिमाक इजोत मे आनल्कन्दत
भऽ कऽ नेतृव करताि, जाहि िया आ धाहमषकता हुनका
हिस साँ भेटैत अहि।

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Maithili - Book of Baruch.pdf

  • 2. अध्याय 1 1 ई सभ ओहि पुस्तकक वचन अहि जे बरूक बेहबलोन मे हलखने िलाि। 2 पााँचम वर्ष आ सातम हिन कल्दी सभ यरूशलेम क ेाँ पकह़ि कऽ आहि मे जरा िेलक। 3 बरूक यहूिाक राजा योआकीमक पुत्र यकोहनयाि आ ओहि सभ लोकक कान मे एहि पुस्तकक वचन पढ़लहन। 4 क ु लीन लोक आ राजाक पुत्र सभ, बुजुिष सभ आ सभ लोकक सुनबा मे, नीचााँ साँ ऊ ाँ च धरर, सुि निीक कात मे बाबुल मे रिहनिार सभ लोकक सुनबा मे। 5 तखन ओ सभ प्रभुक समक्ष कानैत, उपवास करैत आ प्रार्षना कयलहन। 6 ओ सभ प्रत् येकक सामर््ष यक अनुसार धनक संग्रि सेिो बनौलहन। 7 ओ सभ ओकरा यरूशलेम मे सलोमक पुत्र चेल्कियासक पुत्र योआहकम आ पुरोहित सभ आ यरूशलेम मे हुनका संि भेटल सभ लोकक लि पठौलहन। 8 हसवान मासक िसम हिन जखन ओ प्रभुक घरक बतषन सभ क ेाँ मन् हिर साँ बािर हनकाहल कऽ यहूिा िेश मे वापस करबाक लेल ग्रिण कयलहन, अर्ाषत चानीक बतषन सभ, जे सेिेहसयास यौहसयासक पुत्र जािा राजा बनौने िलाि। 9 तकर बाि बेहबलोनक राजा नबूकोिोनोसोर यरूशलेम साँ यकोहनया, राजक ु मार सभ, बंिी सभ, पराक्रमी सभ आ िेशक लोक सभ क ेाँ यरूशलेम साँ लऽ कऽ बेहबलोन लऽ िेलाि। 10 ओ सभ किलहर्न, “िेखू, िम सभ अिााँ सभ क ेाँ िोमबहल, पापबहल आ धूप कीनबाक लेल पाइ पठे ने िी आ अिााँ सभ मन्ना तैयार कऽ कऽ अपन परमेश् वर परमेश् वरक वेिी पर चढ़ाबऽ चािैत िी। “ 12 प्रभु िमरा सभ क ेाँ सामर्थ्ष िेहर्न आ िमरा सभक आाँल्कख क ेाँ िल्लुक करताि, आ िम सभ बेहबलोनक राजा नबूकोिोनोसोरक िाया मे आ हुनकर पुत्र बल्थासरक िाया मे रिब आ िम सभ बहुत हिन धरर हुनका सभक सेवा करब आ हुनका सभक नजरर मे अनुग्रि पाहब जायब . 13 िमरा सभक लेल सेिो अपन परमेश् वर परमेश् वर साँ प्रार्षना करू। आ आइ धरर प्रभुक क्रोध आ हुनकर क्रोध िमरा सभ साँ नहि भ’ िेल अहि। “ 15 अिााँ सभ किब जे, “धमष परमेश् वर परमेश् वर परमेश् वरक अहि, मुिा िमरा सभक मुाँिक भ्रम, जेना आइ भऽ रिल अहि, यहूिा आ यरूशलेमक हनवासी सभक लेल।” 16 िमरा सभक राजा सभ क ेाँ , िमरा सभक मुल्कखया सभ क ेाँ , िमरा सभक पुरोहित सभ क ेाँ , िमरा सभक प्रवक ् ता सभ क ेाँ आ िमरा सभक पूवषज सभ क ेाँ । 17 िम सभ प्रभुक समक्ष पाप कयलहुाँ। “ 19 जाहि हिन परमेश् वर िमरा सभक पूवषज सभ क ेाँ हमस्र िेश साँ बािर अनने िलाि, तहिया साँ आइ धरर िम सभ अपन परमेश् वर परमेश् वरक आज्ञा नहि मानलहुाँ आ हुनकर आवाज नहि सुनबा मे लापरवाि िी। 20 एहि लेल िमरा सभ क ेाँ ओ िुर्् टता आ श्राप जे प्रभु अपन सेवक मूसा द्वारा ओहि समय मे हनयुक्त कयलहन, जाहि समय मे ओ िमरा सभक पूवषज क ेाँ हमस्र िेश साँ बािर अनने िलाि, जाहि साँ िमरा सभ क ेाँ एकटा एिन िेश िेल जाय जे िूध आ मधु साँ बिैत अहि ई हिन िेखबाक अहि। 21 तैयो िम सभ अपन परमेश् वर परमेश् वरक आवाज नहि सुनलहुाँ, जेना ओ िमरा सभ लि पठौलहन प्रवक ् ता सभक समस्त वचनक अनुसार। 22 मुिा परमेश् वर परमेश् वरक आलोक मे अधलाि काज करबाक लेल प्रत् येक मनुर्् य अपन िुर्् ट हृियक कल्पनाक पालन करैत िल। अध्याय 2 1 तेाँ परमेश् वर अपन वचन क ेाँ पूरा कयलहन, जे ओ िमरा सभक हवरुद्ध, इस्राएलक न् याय करयवला िमरा सभक न्यायाधीश सभक हवरुद्ध, िमरा सभक राजा सभक, िमरा सभक मुल्कखया सभक हवरुद्ध आ इस्राएल आ यहूिाक लोक सभक हवरुद्ध कयलहन। 2 मूसाक धमष-हनयम मे हलखल बातक अनुसार जे यरूशलेम मे भेल िल, से िमरा सभ पर एिन पैघ हवपहि आनय। 3 मनुख अपन बेटाक मांस आ अपन बेटीक मांस खाय। 4 ओ ओकरा सभ क ेाँ अपना सभक चारूकातक सभ राज्यक अधीन रिबाक लेल सौंहप िेलहन, जाहि साँ ओ सभ चारूकातक समस्त लोकक बीच अपमान आ उजा़ि जकााँ बनय, जतय प्रभु ओकरा सभ क ेाँ हततर-हबतर कऽ िेने िहर्। 5 एहि तरिेाँ अपना सभ परमेश् वर परमेश् वरक हवरुद्ध पाप कयलहुाँ आ हुनकर आवाजक आज्ञा नहि मानलहुाँ, ताहि कारणेाँ अपना सभ क ेाँ नीचााँ खसा िेल िेल। 6 िमरा सभक परमेश् वर परमेश् वर परमेश् वरक धाहमषकता अहि। 7 ई सभ हवपहि िमरा सभ पर आहब िेल अहि जे प्रभु िमरा सभक हवरुद्ध सुनौलहन अहि 8 तैयो िम सभ प्रभुक समक्ष प्रार्षना नहि क े ने िी जे िम सभ प्रत्येक क े ओ अपन िुर्् ट हृियक कल्पना सभ साँ मोह़ि सकब। 9 तेाँ परमेश् वर िमरा सभ क ेाँ अधलािक लेल िेखैत रिलाि आ प्रभु िमरा सभ पर ई बात अनलहन। 10 तैयो िम सभ हुनकर बात नहि सुनलहुाँ जे प्रभुक आज्ञाक अनुसार चलब जे ओ िमरा सभक सोझााँ राखने िहर्। 11 आब, िे इस्राएलक परमेश् वर, जे अपन प्रजा क ेाँ हमस्र िेश साँ पराक्रमी िार्, ऊ ाँ च बााँहि आ चमत् कार आ चमत् कार आ मिान सामर््ष य साँ हनकाहल कऽ अपना क ेाँ नाम पाहब लेलहुाँ। जेना आइ िेखा रिल अहि। 12 िे िमर परमेश् वर, िम सभ पाप क े लहुाँ, अभल्कक्त क े लहुाँ, अिााँक सभ हवहध-हवधान मे अधमष कयल िेल।
  • 3. 13 अिााँक क्रोध िमरा सभ साँ िहट जाउ, हकएक ताँ िम सभ ओहि जाहत सभक बीच हकिु ए िोटे बचल िी, जतऽ अिााँ िमरा सभ क ेाँ हिह़िया िेलहुाँ। 14 िे प्रभु, िमरा सभक प्रार्षना आ िमरा सभक हवनती सुनू, आ अपना लेल िमरा सभ क ेाँ बचाउ, आ िमरा सभ क ेाँ जे सभ िमरा सभ क ेाँ लऽ िेल अहि, हुनका सभक नजरर मे िमरा सभ क ेाँ अनुग्रि हिअ। 15 एहि लेल सभ पृर्् वी क ेाँ ई जाहन लेत जे अिााँ िमरा सभक परमेश् वर परमेश् वर िी, हकएक ताँ इस्राएल आ ओकर संतान अिााँक नाम साँ बजाओल िेल अहि। 16 िे प्रभु, अपन पहवत्र घर साँ नीचााँ िेखू आ िमरा सभ पर हवचार करू। 17 आाँल्कख खोहल कऽ िेखू। कारण, जे मृतक कबर मे अहि, जकर प्राण अपन शरीर साँ िहट िेल अहि, ओ प्रभु क ेाँ ने स्तुहत िेत आ ने धमष। 18 मुिा जे प्राणी बहुत परेशान अहि, जे झुहक कऽ कमजोर भऽ जाइत अहि, आ आाँल्कख क्षीण अहि आ भूखल प्राणी, िे प्रभु, अिााँक प्रशंसा आ धाहमषकता िेत। 19 तेाँ िे िमर परमेश् वर, िम सभ अपन पूवषज आ राजा सभक धाहमषकताक लेल अिााँक समक्ष हवनम्र हवनती नहि करैत िी। 20 अिााँ अपन क्रोध आ क्रोध िमरा सभ पर पठा िेलहुाँ, जेना अिााँ अपन सेवक भहवष्यवक्ता सभक द्वारा किने िी। 21 प्रभु ई किैत िहर्, “बाबुलक राजाक सेवा करबाक लेल अपन कान्ह झुकाउ।” 22 मुिा जाँ अिााँ सभ बाबुलक राजाक सेवा करबाक लेल प्रभुक आवाज नहि सुनब। 23 िम यहूिाक शिर आ यरूशलेमक बािर साँ िाँसी- खुशीक आवाज आ आनन्दक आवाज, वर आ कहनयााँक आवाज क ेाँ समाप्त कऽ िेब हनवासी। 24 मुिा िम सभ बाबुलक राजाक सेवा करबाक लेल अिााँक आवाज नहि सुनय चािैत िलहुाँ, तेाँ अिााँ अपन सेवक प्रवक ् ता सभक द्वारा किल िेल बात सभ क ेाँ नीक कऽ िेलहुाँ जे िमरा सभक राजा सभक िड्डी आ िमरा सभक पूवषज सभक िड्डी सभ क ेाँ नीक करबाक चािी अपन जिि स बािर हनकालल जाय। 25 िेखू, ओ सभ हिनक िमी आ राहत मे ठंढा मे फ े कल जाइत िहर् आ अकाल, तलवार आ मिामारी साँ बहुत िुुः ख मे मरर िेलाि। 26 जे घर अिााँक नाम साँ बजाओल िेल अहि, तकरा अिााँ इस्राएलक वंश आ यहूिाक वंशजक िुर्् टताक कारणेाँ उजाह़ि िेलहुाँ, जेना आइ िेखल जा रिल अहि। 27 िे िमर सभक परमेश् वर, अिााँ अपन सभ भलाई आ अपन सभटा ियाक अनुसार िमरा सभक संि व्यविार क े लहुाँ। 28 जेना अिााँ अपन सेवक मूसाक द्वारा ओहि हिन किने रिी जखन अिााँ हुनका इस्राएलक लोकक समक्ष धमष-हनयम हलखबाक आज्ञा िेलहुाँ। 29 जाँ अिााँ सभ िमर आवाज नहि सुनब ताँ हनहित रूप साँ ई बहुत पैघ भी़ि जाहत सभक बीच कम संख्या मे बिहल जायत, जतय िम ओकरा सभ क ेाँ हिह़िया िेब। 30 िम जनैत िलहुाँ जे ओ सभ िमर बात नहि सुनत, हकएक ताँ ई कठोर ििषन बला लोक अहि। 31 ओ ई जाहन लेत जे िम हुनका सभक परमेश् वर प्रभु िी, हकएक ताँ िम हुनका सभ क ेाँ सुनबाक लेल मोन आ कान िेबहन। 32 ओ सभ अपन बंिी िेश मे िमर स्तुहत करत आ िमर नाम पर हवचार करत। 33 अपन कठोर िरिहन आ िुष्कमष साँ घुरर जाउ, हकएक ताँ ओ सभ अपन पूवषज सभक बाट मोन पा़ित जे प्रभुक समक्ष पाप क े ने िलाि। 34 िम हुनका सभ क ेाँ ओहि िेश मे फ े र साँ आहन िेब, जकर प्रहतज्ञा िम हुनका सभक पूवषज अब्रािम, इसिाक आ याक ू ब क ेाँ शपर् ग्रिण कएने रिी, आ ओ सभ ओहि िेशक माहलक बनताि. 35 िम हुनका सभक संि हुनका सभक परमेश् वर बनबाक अनन्त वाचा करब, आ ओ सभ िमर प्रजा बनत। अध्याय 3 1 िे सवषशल्कक्तमान प्रभु, इस्राएलक परमेश् वर, हवपहि मे प़िल प्राणी अिााँ क ेाँ पुकारैत अहि। 2 िे प्रभु, सुनू, िया करू। हकएक ताँ अिााँ ियालु िी, आ िमरा सभ पर िया करू, हकएक ताँ िम सभ अिााँक समक्ष पाप क े लहुाँ।” 3 अिााँ अनन्त काल धरर हटक ै त िी, आ िम सभ सवषर्ा नाश भऽ जाइत िी। 4 िे सवषशल्कक्तमान प्रभु, िे इस्राएलक परमेश् वर, आब मृत इस्राएली सभ आ ओकर संतान सभक प्रार्षना सुनु, जे अिााँक सामने पाप कएने िहर् आ अिााँक परमेश् वरक आवाज नहि सुनलहन . 5 िमरा सभक पूवषज सभक अधमष सभ क ेाँ नहि मोन पा़िू , बल् हक एखन एहि समय मे अपन सामर््ष य आ अपन नाम पर हवचार करू। 6 अिााँ िमर सभक परमेश् वर प्रभु िी, आ िे प्रभु, िम सभ अिााँक प्रशंसा करब। 7 एहि लेल अिााँ िमरा सभक हृिय मे अपन भय क ेाँ एहि लेल राल्कख िेलहुाँ जे िम सभ अिााँक नाम क ेाँ पुकारब आ बंिी मे अिााँक स्तुहत करी। 8 िेखू, िम सभ आइयो अपन बंिी मे िी, जतऽ अिााँ िमरा सभ क ेाँ हततर-हबतर कऽ िेलहुाँ, एकटा अपमान आ अहभशाप आ भुितानक अधीन रिबाक लेल। 9 िे इस्राएल, जीवनक आज्ञा सुनू, बुल्कद्ध क ेाँ बुझबाक लेल कान करू। “ 11 की अिााँ चबर मे उतरय बला लोक सभक संि हिनल िेल िी? 12 अिााँ बुल्कद्धक फव्वारा िोह़ि िेलहुाँ।
  • 4. 13 जाँ अिााँ परमेश् वरक बाट पर चलैत रहितहुाँ ताँ अनन् त काल धरर शान्‍ त मे रहितहुाँ। 14 ई जाहन हलअ जे बुल्कद्ध कतय अहि, बल कतय अहि आ बुल्कद्ध कतय अहि। जाहि साँ अिााँ ईिो जाहन सकब जे हिनक लम्बाई कतय अहि आ जीवन कतय अहि, आाँल्कखक इजोत आ शाल्कन्त कतय अहि। 15 ओकर स्र्ान क े बुहझ िेल अहि? आहक ओकर खजाना मे क े आहब िेल अहि? 16 जाहत-जाहतक राजक ु मार सभ कतऽ बहन िेल िहर् जे पृर्् वी पर पशु सभ पर राज करैत िलाि। 17 जे सभ आकाशक हच़िै सभक संि शिल करैत िल, आ चानी आ सोना जमा करयवला सभ, जाहि पर लोक भरोसा करैत अहि आ अपन लाभक अंत नहि करैत िल? 18 जे चानीक काज करैत िल आ एतेक सावधान रिैत िल आ हजनकर काज अनजान अहि। 19 ओ सभ हवलुप्त भऽ कबर मे उतरर िेल अहि आ ओकर बिला मे िोसरो लोक ऊपर आहब िेल अहि। 20 युवक सभ इजोत िेल्कख पृर्् वी पर रिलाि, मुिा ज्ञानक बाट नहि जनैत अहि। 21 आ ने ओकर बाट बुझलहन आ ने ओकरा पक़िलहन। 22 कनान मे ई बात नहि सुनल िेल अहि आ ने र्ेमन मे िेखल िेल अहि। 23 पृर्् वी पर बुल्कद्धक खोज करय बला अिारेन्स, मेरन आ र्ेमनक व्यापारी, िंतकर्ाक लेखक आ बुल्कद्धक खोज करयवला। एहि मे साँ हकयो बुल्कद्धक बाट नहि जनने अहि, आ ने ओकर बाट मोन पा़िने अहि। 24 िे इस्राएल, परमेश् वरक घर कतेक पैघ अहि! आ ओकर सम्पहिक स्र्ान कतेक पैघ अहि! 25 पैघ, आ एकर कोनो अंत नहि। ऊ ाँ च, आ अर्ाि। 26 शुरूए साँ प्रहसद्ध हिग्गज सभ िल जे एतेक पैघ कि आ युद्ध मे एतेक हनपुण िल। 27 प्रभु हुनका सभ क ेाँ नहि चुनलहन आ ने हुनका सभ क ेाँ ज्ञानक बाट िेलहन। 28 मुिा ओ सभ नष्ट भऽ िेलाि, हकएक ताँ हुनका सभ लि कोनो बुल्कद्ध नहि िलहन आ ओ सभ अपन मूखषता साँ नाश भऽ िेलाि। 29 क े स् विष मे जा कऽ ओकरा लऽ कऽ मेघ साँ उतारलक? 30 समुद्रक ओहि पार जा कऽ ओकरा पाहब कऽ ओकरा शुद्ध सोनाक बिला मे आनत? 31 ओकर बाट क े ओ नहि जनैत अहि आ ने ओकर बाट क े बारे मे सोचैत अहि। 32 मुिा जे सभ हकिु जनैत अहि से ओकरा हचन्हैत अहि आ ओकरा अपन बुल्कद्ध साँ पाहब लेलक। 33 जे इजोत पठबैत अहि आ ओ चहल जाइत अहि, से ओकरा फ े र साँ बजबैत अहि आ ओ डर साँ ओकर आज्ञा मानैत अहि। 34 हुनका सभक चौकी मे तारा सभ चमक ै त िल आ आनल्कन्दत िोइत िल। आ एहि तरिेाँ ओ सभ िाँसी-खुशी साँ ओकरा सभ क ेाँ बनौहनिार क ेाँ इजोत िेखौलहन। 35 ई िमर सभक परमेश् वर िहर्, आ हुनकर तुलना मे िोसर क े ओ नहि मानल जायत 36 ओ ज्ञानक समस्त बाट ताहक लेलक आ ओकरा अपन सेवक याक ू ब आ अपन हप्रय इस्राएल क ेाँ िऽ िेलक। 37 तकर बाि ओ पृर्् वी पर अपना क ेाँ िेखौलहन आ मनुर्् यक संि िप्प-सप्प कयलहन। अध्याय 4 1 ई परमेश् वरक आज्ञाक पुस्तक आ धमष-हनयम जे अनन्त काल धरर रित। मुिा जे िोह़ि िेत से मरर जायत। 2 िे याक ू ब, अिााँ घुहम कऽ ओकरा पकह़ि हलअ। 3 अपन आिर िोसर क ेाँ नहि हियौक आ ने कोनो परिेशी क ेाँ अपन लाभक वस्तु नहि हियौक। 4 िे इस्राएल, िम सभ धन्य िी, हकएक ताँ परमेश् वरक प्रसन्नताक बात िमरा सभ क ेाँ बुझाओल जाइत अहि। 5 िे िमर प्रजा, इस्राएलक स्मरण करऽ वला िौसला बढ़ू । 6 अिााँ सभ अपन हवनाशक लेल नहि, मुिा अिााँ सभ परमेश् वर क ेाँ क्रोहधत करबाक कारणेाँ अिााँ सभ शत्रु सभक िार् मे सौंपल िेलहुाँ। 7 हकएक ताँ अिााँ सभ परमेश् वरक बहलिान नहि बहल कऽ िुर्् टात् मा सभक लेल बहलिान िऽ कऽ जे अिााँ सभ बनौलहन। 8 अिााँ सभ अनन्त परमेश् वर क ेाँ हबसरर िेलहुाँ जे अिााँ सभक पालन-पोर्ण कयलहन। अिााँ सभ यरूशलेम क ेाँ िुखी कऽ िेलहुाँ जे अिााँ सभ क ेाँ पोसने िल।” 9 परमेश् वरक क्रोध अिााँ सभ पर आहब रिल िेल्कख ओ बजलीि, “िे हसयोनक आसपास रिहनिार सभ, सुनू। 10 िम अपन बेटा-बेटी सभक बंिी बना कऽ िेखलहुाँ जे अनन्त काल हुनका सभ पर अनने िलाि। 11 िम िर्ष साँ हुनका सभक पोर्ण क े लहुाँ। मुिा हुनका सभ क ेाँ कानैत-कानैत आ शोक करैत हविा क’ िेलहन। “ हकएक ताँ ओ सभ परमेश् वरक व्यवस्र्ा साँ िहट िेलाि। 13 ओ सभ हुनकर हनयम-हनयम नहि जनैत िल आ ने हुनकर आज्ञाक बाट पर चलैत िल आ ने हुनकर धाहमषकता मे अनुशासनक बाट पर चलैत िल। 14 हसयोनक आसपास रिहनिार सभ आहब कऽ िमर बेटा- बेटी सभक बंिी क ेाँ मोन पा़िू , जे अनन्त काल हुनका सभ पर अनने िहर्। 15 ओ हुनका सभ पर िू र साँ एकटा एिन जाहत अनने िहर्, जे हनलषज्ज जाहत आ परिेशी भार्ाक अहि, जे ने बूढ़क आिर करैत िल आ ने बच्चा पर िया करैत िल। 16 ई सभ हवधवाक हप्रय संतान सभ क ेाँ लऽ िेल अहि आ बेटीक हबना असिरे उजा़ि िोह़ि िेलक। 17 मुिा िम अिााँक की मिहि कऽ सक ै त िी? 18 जे ई हवपहि अिााँ सभ पर अनलक से अिााँ सभ क ेाँ शत्रु सभक िार् साँ बचाओत। 19 िे िमर सन्तान सभ, जाउ, जाउ, हकएक ताँ िम उजा़ि भऽ िेल िी।
  • 5. 20 िम शाल्कन्तक वस्त्र उतारर कऽ अपन प्रार्षनाक बोरा पहिरने िी। 21 िे िमर सन्तान सभ, िौसला राखू, प्रभु साँ पुकारू, ओ अिााँ सभ क ेाँ शत्रु सभक सामर््ष य आ िार् साँ मुक्त करताि। 22 िमर आशा अनन्त काल मे अहि जे ओ अिााँ सभ क ेाँ उद्धार करत। आ िमरा पहवत्र परमेश् वरक हिस साँ आनन्द आयल अहि, कारण जे िया िमरा सभक अनन्त उद्धारकताष साँ जल्कल्दये अिााँ सभ पर आओत। 23 िम अिााँ सभ क ेाँ शोक आ कानैत-कानैत बािर पठौने रिी, मुिा परमेश् वर अिााँ सभ क ेाँ अनन्त काल धरर िर्ष आ िर्षक संि िमरा फ े र साँ िऽ िेताि। 24 जेना एखन हसयोनक प़िोसी सभ अिााँ सभक बंिी क ेाँ िेल्कख लेने अहि, तहिना ओ सभ जल्कल्दये अिााँक उद्धारक िमरा सभक परमेश् वर हिस साँ िेल्कख लेत जे अिााँ सभ पर बहुत महिमा आ अनन्त कालक चमकक संि आओत। 25 िमर बच्चा सभ, परमेश् वरक हिस साँ जे क्रोध अिााँ सभ पर आयल अहि, से धैयषपूवषक सहू, हकएक ताँ अिााँक शत्रु अिााँ सभ क ेाँ सताबैत अहि। मुिा जल्कल्दये अिााँ ओकर हवनाश िेखब आ ओकर िरिहन पर पैर राखब।” 26 िमर सुक ु मार लोक सभ उर्ल-पुर्ल पर चहल िेल अहि, आ शत्रु सभक पक़िल झुंड जकााँ लऽ िेल अहि। 27 िे िमर सन्तान सभ, सान्वना रहू, आ परमेश् वर साँ पुकारू, हकएक ताँ अिााँ सभ क ेाँ ओहि बातक स्मरण कयल जायत जे अिााँ सभ पर ई सभ बात अनने िहर्। 28 हकएक ताँ जहिना अिााँ सभ परमेश् वर साँ भटबाक हवचार िल, तेना घुरर कऽ हुनका िस िुना बेसी ताकब। 29 हकएक ताँ जे क े ओ अिााँ सभ पर ई हवपहि अनने अहि, से अिााँ सभक उद्धारक संि अनन्त आनन्द आनत। 30 िे यरूशलेम, नीक मोन राखू, हकएक ताँ जे अिााँ क ेाँ ई नाम िेलहन, से अिााँ क ेाँ सान्वना िेत। 31 ओ सभ ियनीय िहर् जे अिााँ क ेाँ कष्ट िेलहन आ अिााँक पतन पर आनल्कन्दत भेलाि। 32 ओ शिर ियनीय अहि जकर सेवा तोिर सन्तान सभ क े ने िल। 33 हकएक ताँ जहिना ओ अिााँक हवनाश पर आनल्कन्दत भेलीि आ अिााँक पतन पर प्रसन्न भेलीि। 34 हकएक ताँ िम ओकर ब़िका भी़िक आनन्द क ेाँ िू र कऽ िेब आ ओकर घमंड शोक मे बिहल जायत। 35 कारण, अनन्त काल साँ आहि ओकरा पर आहब जायत, जकरा सिन करबाक लेल तरसैत अहि। ओ बहुत काल धरर शैतान सभक हनवास रितीि। 36 िे यरूशलेम, अपन चारू कात पूब हिस िेखू, आ िेखू जे परमेश् वरक हिस साँ अिााँ क ेाँ जे आनन्द अबैत अहि। 37 िेखू, अिााँक पुत्र सभ अबैत अहि, जकरा अिााँ हविा कएने िी, ओ सभ पहवत्र परमेश् वरक वचन द्वारा पूरब साँ पहिम हिस जमा भ’ कऽ परमेश् वरक महिमा मे आनल्कन्दत भऽ अबैत अहि। अध्याय 5 1 िे यरूशलेम, शोक आ क्लेशक वस्त्र उतारू, आ परमेश् वरक हिस साँ जे महिमा अबैत अहि, ओकर सुन्दरता सिाक लेल पहिरू। 2 परमेश् वरक धाहमषकताक िोबर वस्त्र अपना चारू कात फ े हक हियौक। आ अनन्तक महिमाक मुक ु ट अपन मार् पर लिा हियौक। 3 परमेश् वर स् विषक नीचााँक सभ िेश मे अिााँक तेज िेखाओत। 4 हकएक ताँ अिााँक नाम परमेश् वर द्वारा सिाक लेल धाहमषकताक शाल्कन्त आ परमेश् वरक आराधनाक महिमा किल जायत। 5 िे यरूशलेम उहठ कऽ ऊ ाँ च ठाढ़ भऽ पूब हिस िेखू, आ िेखू, पहवत्र परमेश् वरक वचन द्वारा पहिम साँ पूब हिस अिााँक संतान सभ जमा भऽ िेल अहि आ परमेश् वरक स्मरण मे आनल्कन्दत भऽ िेल अहि। 6 ओ सभ पैिले अिााँ साँ हविा भऽ िेलाि आ अपन शत्रु सभ साँ िू र भऽ िेलाि। 7 परमेश् वर ई हनयुक ् त कयलहन अहि जे िरेक ऊ ाँ च पिा़िी आ नम्हर-नम्हर हकनार सभ क ेाँ नीचााँ फ े हक िेल जाय आ घाटी सभ क ेाँ भरर िेल जाय, जाहि साँ इस्राएल परमेश् वरक महिमा मे सुरहक्षत भऽ जाय। 8 परमेश् वरक आज्ञाक कारणेाँ जंिल आ िरेक सुिल्कित िाि सेिो इस्राएल पर िाएत। 9 परमेश् वर इस्राएल क ेाँ अपन महिमाक इजोत मे आनल्कन्दत भऽ कऽ नेतृव करताि, जाहि िया आ धाहमषकता हुनका हिस साँ भेटैत अहि।