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अध्याय ४
जिन्हें इस प्रकार का योगाजनि मय
शरीर प्राप्त हो गया है उिके लिए
फिर रोग, वृद्धावस्था या मृत्यु
िहीीं रहती।
४.१ योग का अथथ व महत्व
४.२ योग एक भारतीय ववरासत
४.३ योग के अींग
४.४ आसि, प्राणायाम, ध्याि और यौगगक
फियाओ का पररचय
४.५ आसि ...
 योग शब्द सींस्कृ त भाषा के शब्द “ यूि ”
जिसका अथथ िोड़िा या लमिािा है , से लिया
गया है
 योग आत्मा का परमात्मा से लमिि है...
१. शारीररक शुद्धता
२. रोगो से रोकथाम और उपचार
३. मािलसक तिाव कम करता है
४. मोटापा कम करता है
५. तिाव मुक्त करता है
६. शरीर...
१. शारीररक शुद्धता
 हमारे शरीर के आन्तररक अींगों को ववलभन्ि यौगगक
फियाओ से साफ़ फकया िा सकता है
 आयुवेद के अिुसार, हमारा ...
२. रोगो से रोकथाम और उपचार
 योग कई बीमाररयों का ि के वि रोकथाम करता है
अवपतु उिका उपचार भी करता है
 ववलभन्ि योगाभ्यास से...
३. मािलसक तिाव को कम करता है
 योग मािलसक तिाव को कम करिे में मदद करता है
 प्रत्याहार, धारणा और ध्याि महत्वपूणथ भूलमका अद...
४. मोटापा कम करता है
 मोटापा एक ववश्वव्यापी समस्या बिता िा रहा है
 मोटापे से फकसी भी व्यजक्त को कई और रोगों के
िगिे का ख...
५. ववश्राजन्त प्रदाि करता है
 आराम तथा ववश्राजन्त थकाि को तिकाििे के
लिए अतिवायथ हैं।
 शोध अध्ययिों से पता चिा है फक प्र...
६. शरीर की सही मुद्रा रखता है
 आधुतिक िीविशैिी के कारण, आिकि आसिीय
ववकृ तत बहुत आम हैं िो हमारी कायथदक्षता पर
िकारात्मक प...
७. आध्याजत्मक ववकास
 मिुष्य योगाभ्यास के द्वारा मि पर
तियींत्रण व आध्याजत्मक ऊँ चाईयों की
ओर बढ़ सकता है
 पद्मासि, लसद्धा...
८. िचीिापि बढाता है
 िचीिापि बहुत महत्वपूणथ है क्योंफक यह
शरीर को कु शिता से चिािे में मदद करता
है
 योगाभ्यास माींसपेलशय...
९. स्वास््य बेहतर करता है
 योग ि के वि हमारे स्वास््य को कायम रखता है
अवपतु उसको सुधारता भी है
 माींसपेलशया को सुद्रढ़ बि...
१०. िैततक और सामाजिक मूल्यों का स्तर
उठाता है
 योग वतथमाि िीवि में इींसाि के लिए बहुत
महत्वपूणथ है।
 अष्टाींग योग के पहि...
 प्रमाण टदखाते है फक योग का इततहास लसींधु घाटी सभ्यता
से सींबींगधत है ( ३३००- १३०० ईसा पूवथ )
 योग उपतिषदों, महाभारत और ...
यह प्रमाण के साथ कहा िा सकता है फक योग का इततहास
भारत के इततहास जितिा ही पुरािा है
योग प्राचीि काि से भारतीय सींस्कृ तत का...
१. पूवथ वैटदक काि ( ३३००- १३०० ईसा पूवथ )
लसन्धु घाटी में मोहििोदड़ो व हड़प्पा की खुदाई से
ज्ञात हुआ है फक उस काि में , फकसी...
२. वैटदक काि ( १७५०- ५०० ईसा पूवथ )
योग की कु छ अवधारणाओीं को, िो बाद में
ववकलसत की गयी थी वेदों में पाया िाता हैं.
शब्द...
३. उपतिषद काि
योग का असिी आधार उपतिषद में पाया िाता है.
प्राण व िाडी ऐसे महत्वपूणथ ववषय है जिि पर
उपतिषदो में चचाथ की गयी ...
४. महाकाव्य काि (१००० – ६०० ई. पू.)
 रामायण और महाभारत, इस अवगध के दौराि
ववलभन्ि प्रकार के योग मागो के अभ्यास की
िािकारी ...
५. सूत्र काि
 महवषथ पतींिलि िे 'योग सूत्र' िगभग 147 ईसा
पूवथ में कहा था.
 योगसूत्र चार भागो में ववभक्त है.
 महवषथ पतींि...
६. स्मृतत काि
 स्मृततयाीं िगभग १००० ई तक लिखी गयी थी.
 इस काि में , हम ववचारों, ववश्वासों और पूिा के
तौरतरीको में ववलभन्...
७. मध्ययुगीि काि
इस काि के दो पींथ – िाथ पींथ और भजक्त पींथ
बहुत प्रलसद्ध हैं.
िाथ पींथ में हठ योग ववकलसत फकया गया और
बह...
८. आधुतिक काि
 स्वामी वववेकािींद, योगािन्द, महवषथ रमण, श्री
अरत्रबींदो िे योग को भारत से बाहर फ़ै िािे में बहुत
महत्वपूणथ ...
८. आधुतिक काि
 न्यूयॉकथ में, सींयुक्त राष्र महासभा के ६९वे सत्र में २७-
०९-२०१४ को भारत के प्रधािमींत्री िे ववश्व में शाी...
यम नियमासि प्राणायाम प्रत्याहार धारणा
ध्याि समाधयोऽष्टावङ्गानि ॥२९॥
१. यम
१. अटहींसा: किसी भी जीववत िो िोई िुिसाि ि िरिा.
च िंता, ईष्याा, िफरत, क्रोध हहिंसि भाविाऐ हैं।
२. सत्य: हम वव ारों, ...
२. तियम
१. शौच: शौ िा अथा साफ़-सफाई या पववत्रता है। इसमें आिंतररि
व बाह्य सफाई शालमल है । योग िी शुद्चध कक्रया आिंतररि अिंग...
३. आसि
आसि शरीर की ववलभन्ि मुद्राये है। ये शरीर की
हर माींसपेशी , तींत्रत्रका और ग्रींगथयों को व्यायाम
करािे के लिए सटदयों...
योग के अींग: ४. प्राणायाम
श्वसि प्रणािी पर तियींत्रण प्राणायाम है. इसका अथथ
साँस िेिे व तिकििे पर उपयुक्त तियींत्रण करिा ह...
योग के अींग: ५. प्रत्याहार
योगी इजन्द्रयों को अपिे तियींत्रण में िािे का प्रयास करता
है। ऐसा करके वह अपिे अवगुणों को िष्ट ...
योग के अींग: ६. धारणा
धारणा एक त्रबींदु या वस्तु पर ध्याि
कें टद्रत करिे का प्रयास है। यह सम्पूणथ
एकाग्रता की जस्थतत है। य...
७. ध्याि
 ध्याि सवथव्यापी ईश्वर में एकाग्रता जिससे स्वयीं
को इश्वरत्व में बदिा िा सके से सींदलभथत है ।
 यह मि के शान्त ह...
८. समागध
व्यजक्त की आत्मा का परमात्मा के साथ लमिि को
समागध कहा िाता है।
इस जस्तगथ में गचत्त की वृवत्तयों पुणथतः रुक िाती...
जस्थरसुखमासिम ् ॥४६॥( पातन्जलल योगसूत्र )
आसि वो मुद्रा है िो जस्थर और सुखदायक है
ये शरीर की हर मासपेशी, तींत्रत्रका और ...
आसिो का वगीकरण
ध्याि मुद्रायें आरामदेह मुद्रायें दोषतिवारक मुद्रायें
ध्याि िगािे की शजक्त
बढती है
थकाि हटाते है और
शारीररक...
ध्याि मुद्रायें आरामदेह मुद्रायें दोषतिवारक मुद्रायें
पद्मासि शशाींकासि शीषाथसि
प्राणायाम श्वास तियींत्रण का ववज्ञाि है।
शब्द “प्राणायाम” दो भागो से बिा है
प्राण और आयाम ।
प्राण का अथथ िीवि प्रदाि क...
पूरक रेचक कु म्भक
साँस िेिा साँस छोड़िा साँस िेिे या छोड़िे के बाद
अवधारणा
आींतररक
साँस िे िड़ो में िेिे
के बाद रोकिा
बाह्य
ि...
 सूयथभेदी प्राणायाम
 उज्ियी प्राणायाम
 शीतकारी प्राणायाम
 शीतिी प्राणायाम
 भजस्त्रका प्राणायाम
 प्िावविी प्राणायाम
...
ध्याि का अथथ
ध्याि मि की सींपूणथ एकाग्रता
की एक प्रफिया है.
महवषथ पतींिलि के अिुसार
ध्याि का अथथ एक त्रबन्दु पर
िगातार ...
ध्याि की पररभाषा
एक ववचार पर तिबाथध एकाग्रता ध्याि है --- पतींिलि
फकसी वस्तु पर मि कें टद्रत करिा ध्याि है। अगर मि
एक वस...
ध्याि के िाभ
यह मि को शाींत करता है ।
यह एकाग्रता की शजक्त ववकलसत करता है ।
यह मि को अशाींत करिे से रोकिे की
मािलसक शजक...
1. आसि शरीर िी सभी प्रणाललयों पर िाम िरते है
2. ये रीड िी हड्डी और जोड़ों िो ल ीला बिाते है ।
3. ये मााँशपेलशयो , ग्रिंचथयो...
8. ये रक्त ाप और िाडी दर िो भी िम िरते हैं ।
9. योगासि िे अभ्यास से फे फड़ों िी सिंिु ि और
ववस्तार िी क्षमता बढती है और इसि...
प्राणायाम िा अभ्यास स्वास््य िो बिाये रखिे में और
जीवि में प्रगनत िे ललये बहुत उपयोगी है. इसिे शारीररि
लाभ निम्ि है :
1. य...
7. यह िसरत िरिे िी सहहष्णुता बढाता है ।
8. यह फे फड़ों में हवा िे प्रवाह में सुधार और सााँस
आसािी से लेिे में मदद िरता है ।...
षटकमथ
आसि और प्राणायाम के अततररक्त, योग में , शरीर के आींतररक
अींगों व प्रणालियों के शुद्गधकरण के लिए कई और पद्धततया
प्रयु...
िेतत
िेती फिया को मुख्यत: श्वसि सींस्थाि के अवयवों की
सिाई के लिए प्रयुक्त फकया िाता है। इसे करिे से
प्राणायाम करिे में भी...
िेतत
१.सूत िेती : एि मोटा लेकिि िोमल धागा जजसिी लिंबाई बारह इिं हो
और जो िालसिा निद्र में आसािी से जा सिे लीजजए। इसे गुिगु...
धौती
धौतत फिया को मुख्यत: वपत्त दोष तिवारण के लिए करते है। इसके
ववलभन्ि प्रकार तिम्िलिखितखत है
१. वमि धौती २. बह्िीसार धौत...
धौती
वमि धौती : पााँ ि: ग्लास गुिगुिा पािी पी लें। इसिे बाद दोिों
हाथों िो जााँघ पर रखिर थोड़ा आगे िी ओर झुि िर खड़े हो
जाइए...
वजस्त
गुदा िे शोधि िी कक्रया िो वजस्त कक्रया िहते
है। आधुनिि एनिमा ही ऋवषयों िी प्रा ीि वजस्त
कक्रया है। घेरण्ड सहहता में ...
िौिी
यह पेट िे ललए महत्वपूणा व्यायाम है। इससे भूख बढ़ती
है। यिृ त, नतल्ली और पेट से सिंबिंचधत अिेि बीमाररयों
से मुजक्त लमलत...
िौिी
िौलल पेट िी मािंसपेलशयों िो मजबूत िरती है और
आिंतों व पेट िे नि ले अवयवों िी माललश िरती है। यह
रक्त ाप िो नियलमत िरती...
कपािभातत
इसके लिए पािथी िगाकर सीधे बैठें, आींखें बींदकर हाथों को ज्ञाि मुद्रा
में रख िें। साींस धीरे धीरे अन्दर िें और क्ष...
कपािभातत
सावधािी : यह अभ्यास सुबह खाली पेट शौ ाहद िे बाद खुले
वातावरण में िरें। हाई बीपी, हृदय रोग में इसिा अभ्यास योगा ाय...
त्राटक
जितिी देर तक आप त्रबिा पिक गगराए फकसी एक त्रबींदु,
फिस्टि बॉि, मोमबत्ती या घी के दीपक की ज्योतत पर
देख सकें देखते र...
त्राटक
सावधािी : १. त्राटि िे अभ्यास से आाँखों और मजस्तष्ि में
गरमी बढ़ती है, इसललए इस िे तुरिंत बाद िेती कक्रया िरिी
ाहहए।...
आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम
और प्रबींधि
योगाभ्यास से जीवि शैली िी बहुत सी बीमाररयों िी
रोिथाम और प्रबिंधि में मदद...
आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम
और प्रबींधि
 मोटापा :
मोटापा स्वयिं में िोई बीमारी िहीिं है लेकिि मधुमेह और
हदल िी बी...
आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम
और प्रबींधि
 मोटापा : मोटापा पता करिे की ववलभन्ि सामान्य
ववगधयाँ
 देख िर
 शरीर िा व...
आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम
और प्रबींधि
 मोटापा :
 योगासि जो मोटापे िो रोििे िे ललए अिुशिंलसत
है :
१. अधाहलासि २...
आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम
और प्रबींधि
 मधुमेह :
यह रोग रक्त में ग्लाइिोजि या ग्लूिोज िी
सामान्य सीमा से अचधि िी...
आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम
और प्रबींधि
 मधुमेह :
 हमारा जजगर और अन्तःस्त्रावी ग्रजन्थयािं, रक्तशिा रा
स्तर िे न...
आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम
और प्रबींधि
 मधुमेह : सामान्य लक्षण:
1. हर समय थिाि िी भाविा
2. बार-बार पेशाब िरिे िी...
आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम
और प्रबींधि
 मधुमेह : िु ि यौचगि आसि जजि िा अग्न्याशय
पर ववशेष प्रभाव पड़ता है जजस से ...
आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम
और प्रबींधि
 उच्च रक्तचाप :
अनियिंबत्रत उच् रक्त ाप हदल िी बीमाररयों िा
जोणखम बढाता ह...
आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम
और प्रबींधि
 उच्च रक्तचाप :
 योगासि उच् रक्त ाप िो नियिंबत्रत िरिे में
बहुत उपयोगी ह...
आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम
और प्रबींधि
 पीठ ददथ :
 पीठ ददा आधुनिि जीविशैली िा दुष्पररणाम है।
 यह मुख्य रूप से ...
आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम
और प्रबींधि
 पीठ ददथ :
 पीठ ददा िे रोिथाम और प्रबिंधि िे ललए
निम्िललणखत योगासि अिुशि...
आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम
और प्रबींधि
 दमा :
 दमा हवा िो फे फडो में लािे और लौटािे वाले
वायुमागा िो सिंक्रलमत ...
आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम
और प्रबींधि
 दमा :
 इस रोग में गोमुखासि और सूयथभेदी प्राणायाम अत्यन्त
िाभदायक है।
गो...
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अध्याय ४ योग

yoga lesson in Hindi for CBSE XI grade students of Physical Education

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अध्याय ४ योग

  1. 1. 1
  2. 2. अध्याय ४
  3. 3. जिन्हें इस प्रकार का योगाजनि मय शरीर प्राप्त हो गया है उिके लिए फिर रोग, वृद्धावस्था या मृत्यु िहीीं रहती।
  4. 4. ४.१ योग का अथथ व महत्व ४.२ योग एक भारतीय ववरासत ४.३ योग के अींग ४.४ आसि, प्राणायाम, ध्याि और यौगगक फियाओ का पररचय ४.५ आसि और प्राणायाम के शारीररक िाभ ४.६ आम िीविशैिी की बीमाररयों की रोकथाम व प्रबींधि : मोटापा, दमा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और पीठ ददथ
  5. 5.  योग शब्द सींस्कृ त भाषा के शब्द “ यूि ” जिसका अथथ िोड़िा या लमिािा है , से लिया गया है  योग आत्मा का परमात्मा से लमिि है  योग का अथथ मिुष्य के शारीररक, मािलसक, बौगधक और आध्याजत्मक अवस्थाओीं का एकीकरण भी है  योग एक व्यजक्त की चेतिा के ववकास का ववज्ञाि है
  6. 6. १. शारीररक शुद्धता २. रोगो से रोकथाम और उपचार ३. मािलसक तिाव कम करता है ४. मोटापा कम करता है ५. तिाव मुक्त करता है ६. शरीर की सही मुद्रा रखता है ७. आध्याजत्मक ववकास ८. िचीिापि बढाता है ९. स्वास््य बेहतर करता है १०.िैततक और सामाजिक मूल्यों का स्तर उठाता है
  7. 7. १. शारीररक शुद्धता  हमारे शरीर के आन्तररक अींगों को ववलभन्ि यौगगक फियाओ से साफ़ फकया िा सकता है  आयुवेद के अिुसार, हमारा शरीर वात, वपत्त और कि से बिा है. स्वस्थ रहिे के लिए, हमारे शरीर में वात, वपत्त और कि का सींतुिि होिा आवश्यक है  िेतत, धोती, वजस्त, त्रतक, िौिी, कपािभातत ऐसी यौगगक फियाएीं है िो हमारे शरीर के आन्तररक अींगों को साफ़ रखते हैं
  8. 8. २. रोगो से रोकथाम और उपचार  योग कई बीमाररयों का ि के वि रोकथाम करता है अवपतु उिका उपचार भी करता है  ववलभन्ि योगाभ्यास से शरीर की प्रततरक्षण क्षमता बढ़ती है  योगाभ्यास से ब्रोंकाइटटस, साइिुसाइटीस, पीठ ददथ, गटठया, दमा, उच्च रक्तचाप, तिाव, मूत्र ववकार आटद बीमाररयों को रोका व ठीक फकया िा सकता है
  9. 9. ३. मािलसक तिाव को कम करता है  योग मािलसक तिाव को कम करिे में मदद करता है  प्रत्याहार, धारणा और ध्याि महत्वपूणथ भूलमका अदा करते है  मकरासि, शवासि, शिभासि, भुिींगासि िैसे आसि तिाव और अवसाद हटािे के लिए िाभकारी है
  10. 10. ४. मोटापा कम करता है  मोटापा एक ववश्वव्यापी समस्या बिता िा रहा है  मोटापे से फकसी भी व्यजक्त को कई और रोगों के िगिे का खतरा बढ़ िाता है  शोध अध्ययिों से पता चिा है फक मािलसक तिाव और अवसाद मोटापे का कारण हो सकते है  प्राणायाम व यौगगकासि मािलसक तिाव को हटाते है , मोटापे को कम करते है और शरीर को सुींदर व मिबूत है
  11. 11. ५. ववश्राजन्त प्रदाि करता है  आराम तथा ववश्राजन्त थकाि को तिकाििे के लिए अतिवायथ हैं।  शोध अध्ययिों से पता चिा है फक प्राणायाम व यौगगकासि शरीर और मजस्तष्क को ववश्राम देते है  पद्मासि, शवासि, मकरासि ऐसे कु छेक आसि है
  12. 12. ६. शरीर की सही मुद्रा रखता है  आधुतिक िीविशैिी के कारण, आिकि आसिीय ववकृ तत बहुत आम हैं िो हमारी कायथदक्षता पर िकारात्मक प्रभाव डािता है  तियम से योगासि करिे से, व्यजक्त ि के वि सही मुद्रा में रहता है अवपतु आसिीय ववकृ ततयों को ठीक भी कर सकता है  वज्रासि, सवाांगासि, मयूरासि, चिासि और भुिींगासि
  13. 13. ७. आध्याजत्मक ववकास  मिुष्य योगाभ्यास के द्वारा मि पर तियींत्रण व आध्याजत्मक ऊँ चाईयों की ओर बढ़ सकता है  पद्मासि, लसद्धासि ध्याि की शजक्त बढ़ाते है  प्राणायाम भी आध्याजत्मक ववकास के लिए उपयोगी है
  14. 14. ८. िचीिापि बढाता है  िचीिापि बहुत महत्वपूणथ है क्योंफक यह शरीर को कु शिता से चिािे में मदद करता है  योगाभ्यास माींसपेलशयों को अगधक िचीिा बिाता है और खेि-कू द सम्बन्धी व अन्य चोटों से बचाता है.  चिासि, धिुरासि, हिासि, भुिींगासि आटद आसि शरीर का िचीिापि बढािे में बहुत िाभकारी है
  15. 15. ९. स्वास््य बेहतर करता है  योग ि के वि हमारे स्वास््य को कायम रखता है अवपतु उसको सुधारता भी है  माींसपेलशया को सुद्रढ़ बिाता है  शरीर की ववलभन्ि प्रणालिया िैसे फक श्वसि, रक्त सींचार, तींत्रत्रका, मिोत्सगथ सींबींधी आटद अगधक कु शि हो िाती है पर समस्त स्वास््य में पररणामी सुधार होता है
  16. 16. १०. िैततक और सामाजिक मूल्यों का स्तर उठाता है  योग वतथमाि िीवि में इींसाि के लिए बहुत महत्वपूणथ है।  अष्टाींग योग के पहिे दो अींगों ( यम और तियम ) का अिुसरण करके इि मूल्यों का स्तर उठाया िा सकता है  एक व्यजक्त दैतिक योगाभ्यास से उत्तम स्वास््य पा सकता है और एक सींतुष्ट िीवि व्यतीत कर सकता है
  17. 17.  प्रमाण टदखाते है फक योग का इततहास लसींधु घाटी सभ्यता से सींबींगधत है ( ३३००- १३०० ईसा पूवथ )  योग उपतिषदों, महाभारत और रामायण में भी उल्िेखितखत है  महवषथ पतींिलि िे योग सूत्र १४७ ईसा पूवथ के आसपास लिखा
  18. 18. यह प्रमाण के साथ कहा िा सकता है फक योग का इततहास भारत के इततहास जितिा ही पुरािा है योग प्राचीि काि से भारतीय सींस्कृ तत का मुख्य अींग रहा है १. पूवथ वैटदक काि २. वैटदक काि ३. उपतिषद् काि ४. महाकाव्य काि ५. सूत्र काि ६. स्मृतत काि ७. मध्ययुगीि काि ८. आधुतिक काि
  19. 19. १. पूवथ वैटदक काि ( ३३००- १३०० ईसा पूवथ ) लसन्धु घाटी में मोहििोदड़ो व हड़प्पा की खुदाई से ज्ञात हुआ है फक उस काि में , फकसी ि फकसी रूप में योग का अभ्यास फकया िाता था
  20. 20. २. वैटदक काि ( १७५०- ५०० ईसा पूवथ ) योग की कु छ अवधारणाओीं को, िो बाद में ववकलसत की गयी थी वेदों में पाया िाता हैं. शब्द ‘योग’ व ‘योगी’ का वेदों में उल्िेख िहीीं है पर ऋनवेद में प्रयुक्त ‘युििते ’ मि पर तियींत्रण के रूप में योग से सम्बींगधत है
  21. 21. ३. उपतिषद काि योग का असिी आधार उपतिषद में पाया िाता है. प्राण व िाडी ऐसे महत्वपूणथ ववषय है जिि पर उपतिषदो में चचाथ की गयी है. ववलभन्ि योग प्रथाओीं और उिके शारीररक प्रभाव उपतिषद में उल्िेखितखत हैं।
  22. 22. ४. महाकाव्य काि (१००० – ६०० ई. पू.)  रामायण और महाभारत, इस अवगध के दौराि ववलभन्ि प्रकार के योग मागो के अभ्यास की िािकारी के महत्वपूणथ स्रोत हैं.  भगवद्गीता योग के तीि मागथ – ज्ञाि, भजक्त और कमथ की व्याख्या करती है.
  23. 23. ५. सूत्र काि  महवषथ पतींिलि िे 'योग सूत्र' िगभग 147 ईसा पूवथ में कहा था.  योगसूत्र चार भागो में ववभक्त है.  महवषथ पतींिलि िे अष्टाींग योग या योग के आठ अींगो को समझाया है.  बौद्ध धमथ और िैि धमथ से सींबींगधत ग्रींथों से भी ज्ञात होता है फक योग िोगों के िीवि का एक मुख्य टहस्सा था।
  24. 24. ६. स्मृतत काि  स्मृततयाीं िगभग १००० ई तक लिखी गयी थी.  इस काि में , हम ववचारों, ववश्वासों और पूिा के तौरतरीको में ववलभन्ि पररवतथि पाते है.  प्राणायाम और दूसरी शुद्गधकरि प्रफियाये कई धालमथक अिुष्ठािों में इस्तेमाि की िाती थी।
  25. 25. ७. मध्ययुगीि काि इस काि के दो पींथ – िाथ पींथ और भजक्त पींथ बहुत प्रलसद्ध हैं. िाथ पींथ में हठ योग ववकलसत फकया गया और बहुत िोकवप्रय हुआ। इस अवगध के सींन्यासी योगाभ्यास करते थे .
  26. 26. ८. आधुतिक काि  स्वामी वववेकािींद, योगािन्द, महवषथ रमण, श्री अरत्रबींदो िे योग को भारत से बाहर फ़ै िािे में बहुत महत्वपूणथ भूलमका तिभायी. योगाचायथ बी के एस अयींगर, बाबा रामदेव िे िाखों भारतीयों व ववदेलशयों को योग द्वारा स्वयीं को स्वस्थ और तिावमुक्त करिे की प्रेरणा दी है
  27. 27. ८. आधुतिक काि  न्यूयॉकथ में, सींयुक्त राष्र महासभा के ६९वे सत्र में २७- ०९-२०१४ को भारत के प्रधािमींत्री िे ववश्व में शाींतत और सद्भाव के लिए 'अींतरराष्रीय योग टदवस' मिािे की िरूरत का प्रस्ताव रखा  सींयुक्त राष्र द्वारा 21 िूि 'अींतरराष्रीय योग टदवस’ के रूप में घोवषत  प्रथम 'अींतराथष्रीय योग टदवस‘ 21 िूि, 2015 को मिाया गया।
  28. 28. यम नियमासि प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्याि समाधयोऽष्टावङ्गानि ॥२९॥
  29. 29. १. यम १. अटहींसा: किसी भी जीववत िो िोई िुिसाि ि िरिा. च िंता, ईष्याा, िफरत, क्रोध हहिंसि भाविाऐ हैं। २. सत्य: हम वव ारों, िथि और िामों में सच् ा होिे ाहहए। हमें िपटभरी बातो से दूर रहिा ाहहये ३. अस्तेय: ोरी ि िरिा. दूसरो िी वस्तुओिं, पैसे और वव ारों िो स्वयिं िे लाभ िे ललए उपयोग िरिे िा झुिाव ही ोरी है. इस से दूर रहिा ही अस्तेय है. ४. ब्रहमचयथ : स्वयिं िी ऊजाा सिंरक्षण. स्वयिं िी ऊजाा िा उपयोग आिन्द िे ललए िहीिं अवपतु स्वयिं व समाज िे लाभ िे ललए िरिा। ५. अपररग्रह : अपररग्रह िा अथा गैरअचधिार िी भाविा या अिवािंनित सिंग्रह ि िरिा है ।इसिा अथा जजसिी आवश्यिता िहीिं है उसिा त्याग िरिा है ।
  30. 30. २. तियम १. शौच: शौ िा अथा साफ़-सफाई या पववत्रता है। इसमें आिंतररि व बाह्य सफाई शालमल है । योग िी शुद्चध कक्रया आिंतररि अिंगों िो शुद्ध िरिे में सहायता िरती है। २. सींतोष: जीवि में सिंतुजष्ट िा भाव ३. तप: लक्ष्य प्राप्त िरिे िे ललए मुजश्िलों और ववषम पररजस्थनतयों िो सरलता से सहि िरिा ४. स्वाध्याय: स्वाध्याय िा अथा पववत्र ग्रन्थ जैसे गीता, वेद, गुरु ग्रन्थ साहहब , उपनिषद और योगदशाि िा अध्ययि है। स्वाध्याय िा अथा आत्म निरीक्षण भी है । ५. ईश्वर प्रखितणधाि: जीवि में सभी घटिाओिं िो ईश्वर िो समवपात िरिा, ईश्वर प्रणणधाि है । हमें अहिंिार , अलभमाि और मि िे अन्य दोषों िा उन्मूलि व ईश्वर िे प्रनत समपाण िरिा ाहहए ।
  31. 31. ३. आसि आसि शरीर की ववलभन्ि मुद्राये है। ये शरीर की हर माींसपेशी , तींत्रत्रका और ग्रींगथयों को व्यायाम करािे के लिए सटदयों से ववकलसत की गयी है।
  32. 32. योग के अींग: ४. प्राणायाम श्वसि प्रणािी पर तियींत्रण प्राणायाम है. इसका अथथ साँस िेिे व तिकििे पर उपयुक्त तियींत्रण करिा है. यह चयापचय गततववगध को ववतियलमत करिे में मदद करता है और टदि और िे िड़ों के प्रकायथ को बढ़ाता है. यह दीघाथयु भी प्रदाि करता है।
  33. 33. योग के अींग: ५. प्रत्याहार योगी इजन्द्रयों को अपिे तियींत्रण में िािे का प्रयास करता है। ऐसा करके वह अपिे अवगुणों को िष्ट करिे में और टदव्य गुणों को प्राप्त करिे में सििता प्राप्त करता है।
  34. 34. योग के अींग: ६. धारणा धारणा एक त्रबींदु या वस्तु पर ध्याि कें टद्रत करिे का प्रयास है। यह सम्पूणथ एकाग्रता की जस्थतत है। यह गुण प्राप्त करिे में वषों िग िाते है क्योंफक मि को तियींत्रत्रत करिा बहुत कटठि है ।
  35. 35. ७. ध्याि  ध्याि सवथव्यापी ईश्वर में एकाग्रता जिससे स्वयीं को इश्वरत्व में बदिा िा सके से सींदलभथत है ।  यह मि के शान्त होिे की जस्थतत है ।
  36. 36. ८. समागध व्यजक्त की आत्मा का परमात्मा के साथ लमिि को समागध कहा िाता है। इस जस्तगथ में गचत्त की वृवत्तयों पुणथतः रुक िाती है. दैववक आिींद का अिुभव.
  37. 37. जस्थरसुखमासिम ् ॥४६॥( पातन्जलल योगसूत्र ) आसि वो मुद्रा है िो जस्थर और सुखदायक है ये शरीर की हर मासपेशी, तींत्रत्रका और ग्रींगथयों को व्यायाम करािे के लिए सटदयों से ववकलसत की गयी है।
  38. 38. आसिो का वगीकरण ध्याि मुद्रायें आरामदेह मुद्रायें दोषतिवारक मुद्रायें ध्याि िगािे की शजक्त बढती है थकाि हटाते है और शारीररक व मािलसक तिावमुक्त करते है शरीर की ववलभन्ि गततववगधयों व प्रणालियों को तियलमत करते है पद्मासि लसद्धासि गौमुखासि वीरासि शवासि मकरासि शशाींकासि शीषाथसि सवांगासिा मत्यासि हिासि भुिींगासि चिासि
  39. 39. ध्याि मुद्रायें आरामदेह मुद्रायें दोषतिवारक मुद्रायें पद्मासि शशाींकासि शीषाथसि
  40. 40. प्राणायाम श्वास तियींत्रण का ववज्ञाि है। शब्द “प्राणायाम” दो भागो से बिा है प्राण और आयाम । प्राण का अथथ िीवि प्रदाि करिे वािा श्वाींस है आयाम का अथथ ववस्तार या सींयलमत करिा है । वविोम , अिुिोम और प्रततिोम साँस के िेिे और छोड़िे के तरीको से सम्बींगधत है ।
  41. 41. पूरक रेचक कु म्भक साँस िेिा साँस छोड़िा साँस िेिे या छोड़िे के बाद अवधारणा आींतररक साँस िे िड़ो में िेिे के बाद रोकिा बाह्य िे िड़ो से हवा बाहर तिकाििे के बाद साँस रोकिा
  42. 42.  सूयथभेदी प्राणायाम  उज्ियी प्राणायाम  शीतकारी प्राणायाम  शीतिी प्राणायाम  भजस्त्रका प्राणायाम  प्िावविी प्राणायाम  मूछाथ प्राणायाम
  43. 43. ध्याि का अथथ ध्याि मि की सींपूणथ एकाग्रता की एक प्रफिया है. महवषथ पतींिलि के अिुसार ध्याि का अथथ एक त्रबन्दु पर िगातार एकाग्रता है । ध्याि कोई अभ्यास िहीीं बजल्क मि की एक जस्तगथ है
  44. 44. ध्याि की पररभाषा एक ववचार पर तिबाथध एकाग्रता ध्याि है --- पतींिलि फकसी वस्तु पर मि कें टद्रत करिा ध्याि है। अगर मि एक वस्तु पर कें टद्रत हो सकता है तो यह फकसी भी वस्तु पर कें टद्रत कर सकता है --- स्वामी वववेकािींद
  45. 45. ध्याि के िाभ यह मि को शाींत करता है । यह एकाग्रता की शजक्त ववकलसत करता है । यह मि को अशाींत करिे से रोकिे की मािलसक शजक्त देता है । यह आत्म ज्ञाि की तरि िे िाता है । यह आपसी ववश्वास और समझ की िीींव रखिे की ओर अग्रसर करता है। यह स्वयीं के कल्याण – शारीररक , मािलसक और अध्याजत्मक की बहािी की ओर अग्रसर करता है ।
  46. 46. 1. आसि शरीर िी सभी प्रणाललयों पर िाम िरते है 2. ये रीड िी हड्डी और जोड़ों िो ल ीला बिाते है । 3. ये मााँशपेलशयो , ग्रिंचथयों और आिंतररि अिंगों िो सुद्र्ढ िरते है 4. ये मााँशपेलशयो िा ल ीलापि बढ़ाते है । 5. ये पुरािी बबमाररयों िो ठीि िरिे में मदद िरतें हैं। 6. ये शरीर िी प्रनतरक्षा क्षमता और उजाा स्तर में वृचध िरतें हैं । 7. ये वजि िो सामान्य और िीिंद िो बेहतर िरतें हैं।
  47. 47. 8. ये रक्त ाप और िाडी दर िो भी िम िरते हैं । 9. योगासि िे अभ्यास से फे फड़ों िी सिंिु ि और ववस्तार िी क्षमता बढती है और इसिे पररणाम से रक्त िी शुद्चध होती है । 10. ये हड्डीयों िे घित्व िो बढ़ािे में मद्द िरतें हैं। 11. योगासि िा अभ्यास प्रनतरक्षा प्रणाली िो भी अचधि प्रभावी बिा देता है ।
  48. 48. प्राणायाम िा अभ्यास स्वास््य िो बिाये रखिे में और जीवि में प्रगनत िे ललये बहुत उपयोगी है. इसिे शारीररि लाभ निम्ि है : 1. यह तिंबत्रिा तन्त्र िो आराम और पूरी शरीर प्रणाली िो मजबूत बिाता है । 2. यह अिंत: स्रावी प्रणाली में सामिंजस्य लाता है । 3. यह ताित और शजक्त िो बढाता है । 4. यह ऑक्सीजि िी खपत िो िम िरता है । 5. यह मााँशपेलशयो में तिाव िम िरता है । 6. यह सााँस िी दर िो घटा िर सामान्य बिाता है ।
  49. 49. 7. यह िसरत िरिे िी सहहष्णुता बढाता है । 8. यह फे फड़ों में हवा िे प्रवाह में सुधार और सााँस आसािी से लेिे में मदद िरता है । 9. यह हमारे फे फड़ों िो मजबूत िरता है । 10.यह हमारे शरीर से अपलशष्ट उत्पादों िो हटािे में सुधार लाता है । 11.यह गहठया और एलजी जैसी पुरािी बीमाररयों िे ईलाज में मदद िरता है । 12.यह उच् व निम्ि रक्त ाप से पीड़ड़त व्यजक्तयों िो लाभ देता है ।
  50. 50. षटकमथ आसि और प्राणायाम के अततररक्त, योग में , शरीर के आींतररक अींगों व प्रणालियों के शुद्गधकरण के लिए कई और पद्धततया प्रयुक्त की िाती है। िेतत, धौती, िौिी, वजस्त, त्रतक, कपािभातत मुख्य छः यौगगक फियाँए हैं इन्हें षटकमथ भी कहा िाता है
  51. 51. िेतत िेती फिया को मुख्यत: श्वसि सींस्थाि के अवयवों की सिाई के लिए प्रयुक्त फकया िाता है। इसे करिे से प्राणायाम करिे में भी आसािी होती है। इसे तीि तरह से फकया िाता है:- १. सूत िेती २. िि िेती ३. कपाि िेती। सूत िेती िििेती
  52. 52. िेतत १.सूत िेती : एि मोटा लेकिि िोमल धागा जजसिी लिंबाई बारह इिं हो और जो िालसिा निद्र में आसािी से जा सिे लीजजए। इसे गुिगुिे पािी में लभगो लें । एि िोर िालसिा निद्र में डालिर मुाँह से बाहर नििालें। कफर मुाँह और िाि िे डोरे िो पिड़िर धीरे-धीरे दो या ार बार ऊपर-िी े खीिं िा ाहहए। इसी प्रिार दूसरे िाि िे िेद से िरे। २.िि िेती : जल एि बताि से एि िथुिा में डाला जाता है जो दुसरे िथुिा से जो कि पहले िथुिा से िी ा है से धीरे-धीरे बाहर नििल आता है। ३.कपाि िेती : मुाँह से पािी पी िर धीरे-धीरे िाि से नििालें। सावधािी : सूत िो िाि में डालिे से पहले गरम पािी में उबाल लें जजससे किसी प्रिार िे जीवाणु िहीिं रहते। प्रारम्भ में िेती कक्रया योगा ाया िे मागादशाि में िरें। इसे िरिे िे बाद िपालभाती िर लेिा ाहहए। िाभ : इस कक्रया िे अभ्यास से िालसिा मागा िी सफाई होती ही है साथ ही िाि, िाि, दााँत, गले आहद िे िोई रोग िहीिं हो पाते और आाँख िी दृजष्ट भी तेज होती है। सदी, जुिाम और खााँसी िी लशिायत िहीिं रहती।
  53. 53. धौती धौतत फिया को मुख्यत: वपत्त दोष तिवारण के लिए करते है। इसके ववलभन्ि प्रकार तिम्िलिखितखत है १. वमि धौती २. बह्िीसार धौती ३. वातसार धौती ४. वस्त्र धौती धौती फिया बार बार िुकाम होिा, टाींलसि ,पेट में गैस, एलसडडटी, थाइरॉयड, गिे की एििी, श्वास सम्बन्धी समस्या आटद को दूर करती है। वस्त्र धौती
  54. 54. धौती वमि धौती : पााँ ि: ग्लास गुिगुिा पािी पी लें। इसिे बाद दोिों हाथों िो जााँघ पर रखिर थोड़ा आगे िी ओर झुि िर खड़े हो जाइए।उड्डीयाि बिंध लगािर िौली कक्रया िरें। वपया हुआ जल िो वमि िे माध्यम से पूरा बाहर नििाल दें। वस्त्र धौती: इस कक्रया में, मलमल िपडे िी 4” ौडी और 22 फीट लम्बी पट्टी मुाँह िे द्वारा पेट में ले जािर कफर उड्डीयाि बिंध लगािर िौली कक्रया िरें। इसिे पश् ात धीरे-धीरे सावधािी पूवाि पट्टी बाहर नििाले। सावधातियाीं: इस कक्रया में िपड़े िो निगलिा िहठि होता है। इसललए इस कक्रया िो धीरे-धीरे िरें।िपड़ा निगलते समय सावधािी रखें, क्योंकि नििालते समय िभी-िभी िपड़ा अटि जाता है, परन्तु घबराएिं िहीिं िपड़े िो पुि: अन्दर निगलें और कफर बाहर नििालें।
  55. 55. वजस्त गुदा िे शोधि िी कक्रया िो वजस्त कक्रया िहते है। आधुनिि एनिमा ही ऋवषयों िी प्रा ीि वजस्त कक्रया है। घेरण्ड सहहता में शुष्ि वजस्त व जल वजस्त िा वणाि है। इस कक्रया में, बड़ी आिंत िो साफ़ िरिे िे ललए, मलद्वार से जल या हवा अन्दर खीिं िे िी िोलशश िी जाती है। िाभ: १. वात, वपत, िफ इि तीिो िा नियिंत्रण | २. पा ि कक्रया में वृद्चध | ३. शारीररि पीड़ा िहीिं होगी | ४. िोई रोग िहीिं होगा |
  56. 56. िौिी यह पेट िे ललए महत्वपूणा व्यायाम है। इससे भूख बढ़ती है। यिृ त, नतल्ली और पेट से सिंबिंचधत अिेि बीमाररयों से मुजक्त लमलती है। १. उड्डडयाि बींध : मुाँह से बल पूवाि हवा नििालिर िाभी िो अिंदर खी ें यह उड्डीयािबिंध है। २. वामििौिी : जब उड्ड़डयािबिंध पूरी तरह लग जाय तो मााँसपेलशयों िो पेट िे बी में िोड़े। पेट िी मााँसपेलशयााँ एि लम्बी िली िी तरह हदखाई पड़ेगी। इन्हें बाएाँ ले जाएाँ। ३. दक्षक्षण िौिी : इसिे पश् ात इसे दाहहिी ओर ले जाएाँ। ४. मध्यमा िौिी : इसे मध्य में रखें और तेजी से दाहहिे से बाएाँ और बाएाँ से दाहहिी ओर ले जािर मााँसपेलशयों िा मिंथि िरें।
  57. 57. िौिी िौलल पेट िी मािंसपेलशयों िो मजबूत िरती है और आिंतों व पेट िे नि ले अवयवों िी माललश िरती है। यह रक्त ाप िो नियलमत िरती है और मधुमेह िे णखलाफ सुरक्षात्मि परहेजी प्रभाव रखती है। यह अम्ल शूल और मा रोगों (मुहािंसों) िो दूर िरिे में सहायि है। मध्यमा िौिी
  58. 58. कपािभातत इसके लिए पािथी िगाकर सीधे बैठें, आींखें बींदकर हाथों को ज्ञाि मुद्रा में रख िें। साींस धीरे धीरे अन्दर िें और क्षण भर के लिये साींस रोक कर, इसे तेज़ी और बिपूवथक बाहर िें। यह प्रफिया बार-बार इसी प्रकार तब तक करते िाएीं िब तक थकाि ि िगे। फिर पूरी साींस बाहर तिकाि दें और साींस को सामान्य करके आराम से बैठ िाएीं। कपािभातत साँस तेिी और बिपूवथक बाहर तिकािे साँस धीरे धीरे अन्दर िें ज्ञाि मुद्रा
  59. 59. कपािभातत सावधािी : यह अभ्यास सुबह खाली पेट शौ ाहद िे बाद खुले वातावरण में िरें। हाई बीपी, हृदय रोग में इसिा अभ्यास योगा ाया िे मागादशाि में िरें। हनिाया, अल्सर व पेट िा ऑपरेशि हुआ हो तो इसिा अभ्यास ि िरें। िाभ : - इससे मोटापा, डायबटीज, िब्ज़, गैस, भूख िा लगिा और अप जैसे पेट िे रोग ठीि होते हैं। - बाल झड़िे से ब ाता है। - हृदय, फे फड़े, थायरॉयड व मजस्तष्ि िो बल लमलता है। - खूि में ऑक्सीजि िी मात्रा बढ़िर रक्त शुद्ध होिे लगता है। - महहलाओिं में मालसि धमा िी अनियलमतता िो ठीि िर गभााशय व ओवरी िो बल लमलता है। - हामोंस सिंतुललत रहते हैं। - शरीर िा व़ि सिंतुललत रखिे में भी मदद िरती है।
  60. 60. त्राटक जितिी देर तक आप त्रबिा पिक गगराए फकसी एक त्रबींदु, फिस्टि बॉि, मोमबत्ती या घी के दीपक की ज्योतत पर देख सकें देखते रटहए। इसके बाद आँखें बींद कर िें। कु छ समय तक इसका अभ्यास करें। इससे आप की एकाग्रता बढ़ेगी।
  61. 61. त्राटक सावधािी : १. त्राटि िे अभ्यास से आाँखों और मजस्तष्ि में गरमी बढ़ती है, इसललए इस िे तुरिंत बाद िेती कक्रया िरिी ाहहए। २. आाँखों में किसी भी प्रिार िी तिलीफ हो तो यह कक्रया िा िरें। ३. अचधि देर ति एि-सा िरिे पर आाँखों से आाँसू नििलिे लगते हैं। ऐसा जब हो, तब आाँखें झपिािर अभ्यास िोड़ दें। िाभ : १. आाँखों िे ललए तो त्राटि लाभदायि है ही साथ ही यह एिाग्रता िो बढ़ाता है। २. इसिा नियलमत अभ्यास िर मािलसि शािंनत और निलभािता बढ़ती है। ३. इससे आाँख िे सभी रोग िू ट जाते हैं। ४. मि िा वव लि खत्म हो जाता है।
  62. 62. आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम और प्रबींधि योगाभ्यास से जीवि शैली िी बहुत सी बीमाररयों िी रोिथाम और प्रबिंधि में मदद हो सिती है । िु ि रोग या समस्याएाँ जजििा योग से रोिथाम और प्रबिंधि किया जा सिता है निम्िललणखत हैं :  मोटापा  मधुमेह  उच् रक्त ाप  पीठ ददा  दमा
  63. 63. आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम और प्रबींधि  मोटापा : मोटापा स्वयिं में िोई बीमारी िहीिं है लेकिि मधुमेह और हदल िी बीमाररयों जैसी िई गिंभीर बीमाररयों िा एि प्रमुख िारण है ।  इि बीमाररयों िे िई िारण है लेकिि इस तरह िी समस्याएाँ, ज्यादातर आिंतररि अिंगों िे आस पास वसा िे जमाव िे िारण होती है ।  इस आिंतररि वसा िा जमाव जो कि वसा िा सिं य िहा जाता है , नियलमत व्यायाम और योग िे माध्यम से रोिा जा सिता है ।
  64. 64. आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम और प्रबींधि  मोटापा : मोटापा पता करिे की ववलभन्ि सामान्य ववगधयाँ  देख िर  शरीर िा वजि ऊाँ ाई िे अिुपात से अचधि (ऊाँ ाई व वजि ाटा िे अिुसार ).  शरीर वसा % िी गणिा िी जाती है. यहद शरीर वसा % जरुरत से ज्यादा है तो व्यजक्त िो मोटा मािा जाता है  इि तीि ववचधयों में से, ऊाँ ाई व वजि ाटा आसािी से उपलब्जध होिे िे िारण, अचधि पसिंद किया जाता है
  65. 65. आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम और प्रबींधि  मोटापा :  योगासि जो मोटापे िो रोििे िे ललए अिुशिंलसत है : १. अधाहलासि २. द्वव क्रीिासि ३. धिुरासि ४. भुजिंगासि ५. अधािौिासि ६. उत्तािासि ७. मयूरासि धिुरासिमयूरासि
  66. 66. आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम और प्रबींधि  मधुमेह : यह रोग रक्त में ग्लाइिोजि या ग्लूिोज िी सामान्य सीमा से अचधि िी उपजस्तथी िा सिंिे त देता है ।  रक्त में ग्लूिोज िा स्तर , रक्त शिा रा स्तर भी िहा जाता है ।  सामान्य रक्त शिा रा िा स्तर 80 mgm/100 cc (उपवास) से 120 mgm/100 cc (भोजिोपरान्त ) ति बदलता है क्योंकि ीिी िी बड़ी मात्रा रक्त प्रवाह में लगातार प्रवेश िर रही है और वहािं से हटायी भी जा रही है ।
  67. 67. आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम और प्रबींधि  मधुमेह :  हमारा जजगर और अन्तःस्त्रावी ग्रजन्थयािं, रक्तशिा रा स्तर िे नियमि में एि महत्वपूणा भूलमिा निभाते हैं ।  अग्न्याशय हमारे शरीर में शिा रा िे स्तर िो नियिंबत्रत िरिे में एि महत्वपूणा भूलमिा निभाता है।  यह इन्सुललि स्राववत िरता जो हमारे शरीर में शिा रा िो जलािे में मदद िरता है।  इस ग्रिंचथ िे द्वारा इन्सुललि स्राव िी िमी , मधुमेह िा मुख्य िारण है।  मधुमेह हदल िा दौरा , गुदे िी ववफलता , दृजष्ट िी हानि और तिंबत्रिा क्षनत िर सिता है।
  68. 68. आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम और प्रबींधि  मधुमेह : सामान्य लक्षण: 1. हर समय थिाि िी भाविा 2. बार-बार पेशाब िरिे िी जरूरत 3. हाथ और पैर में सिंवेदि शुन्यता होिा 4. दृजष्ट िा धुिंधलापि 5. अत्यचधि वजि बढ़िा या वजि घटिा 6. घाव िा ठीि ि होिा मधुमेह प्रकार-१ मधुमेह प्रकार-२ अग्न्याशय द्वारा इन्शुललि ि बिािा इिंसुललि िी पयााप्त मात्रा िा उत्पादि ि होिा दुलाभ प्रिार िा मधुमेह उत्पाहदत इिंसुललि िा शरीर में ठीि से उपयोग ि होिा दैनिि इिंसुललि इिंजेक्शि उप ार िे ललए आवश्यि है साधारण मधुमेह
  69. 69. आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम और प्रबींधि  मधुमेह : िु ि यौचगि आसि जजि िा अग्न्याशय पर ववशेष प्रभाव पड़ता है जजस से मधुमेह िे इलाज में मदद लमलती है, निम्िललणखत हैं:  शलभासि  धिुरासि  भुजिंगासि  सवाांगासि  मयूरासि  शीषाासि शीषाथसिसवाांगासि
  70. 70. आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम और प्रबींधि  उच्च रक्तचाप : अनियिंबत्रत उच् रक्त ाप हदल िी बीमाररयों िा जोणखम बढाता है।  उच् रक्त ाप, मुख्य रूप से आधुनिि समय िी तेज और व्यस्त जीवि शैली िे िारण होता है।  इसे आम तौर से, व्यजक्त िे िोलेस्रोल स्तर िे साथ जोड़ा जाता है।  धूम्रपाि, मधुमेह और मोटापा भी उच् रक्त ाप िे साथ जुड़े है।
  71. 71. आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम और प्रबींधि  उच्च रक्तचाप :  योगासि उच् रक्त ाप िो नियिंबत्रत िरिे में बहुत उपयोगी है।  उच् रक्त ाप िो नियिंबत्रत िरिे िे ललये निम्ि आसि अिुशिंलसत है: १. पद्मासि २. हलासि 3. शवासि 4. पश् ीमोतािासि 5. लसद्धासि 6. वीरासि शवासि हिासि
  72. 72. आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम और प्रबींधि  पीठ ददथ :  पीठ ददा आधुनिि जीविशैली िा दुष्पररणाम है।  यह मुख्य रूप से , आसीि जीवि, टीवी, ििं प्यूटर, i-pad आहद िे सामिे लम्बे समय बैठिे िे िारण होता है।  लम्बे समय ति िार और स्िू टर लािे िा पररणाम भी पीठ ददा हो सिता है।  पीठ ददा अक्सर गलत मुद्रा में बैठिे िी आदत िे िारण भी हो सिता है।  पीठ ददा, िु ि शारीररि जहटलताओिं िा पररणाम भी हो सिता है।
  73. 73. आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम और प्रबींधि  पीठ ददथ :  पीठ ददा िे रोिथाम और प्रबिंधि िे ललए निम्िललणखत योगासि अिुशिंलसत है: १. भुजिंगासि २. शलभासि ३. ववपरीत िौिासि ४. धिुरासि ५. मिरासि ६. क्रासि ७. सेतुबिंधासाि शिभासि चिासि
  74. 74. आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम और प्रबींधि  दमा :  दमा हवा िो फे फडो में लािे और लौटािे वाले वायुमागा िो सिंक्रलमत िरिे वाली बीमारी है।  दमा से पीड़ड़त , आमतौर पर घरघराहट, सीिे में जिड़ि, सािंस लेिे में िहठिाई, खािंसी और वायुमागा िी सुजि जैसे लक्षण अिुभव िरते है।  दमा िो रोििे िे ललए, दमा िे हमले िे निम्िललणखत िारिो से ब िा ाहहये: १. धूम्रपाि / निजष्क्रय धूम्रपाि व प्रदूवषत हवा। २. एलजी िरिे वाले पशु जजसमे पालतू पशु भी शालमल है से अरक्षक्षतता। ३. िालीि और घर में रहिे वाली धूल से अरक्षक्षतता।
  75. 75. आम िीवि शैिी की बीमाररयों की रोकथाम और प्रबींधि  दमा :  इस रोग में गोमुखासि और सूयथभेदी प्राणायाम अत्यन्त िाभदायक है। गोमुखासि

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