साहित्य हिन के लिए
आपका स्वागत िै
Topic = मुंशी प्रेमचुंि के जीवन
मुंशी प्रेमचुंि के जीवन के ााेे
31 जिाई 1880 को जन्मे मुंशी प्रेमचुंि ने अपनी
आधननक हिन्िस्तानी साहित्य के लिए प्रलसद्ध एक...
मुंशी प्रेमचुंि के जीवन के ााेे
में
प्रेमचुंि का असिी नाम Dhanpat ेाय थी
श्रीवास्तव. उन्िोंने किा कक सासे ाडी में से एक था...
ाचपन औे प्राेुंलभक जीवन
प्रेमचुंि मुंशी Ajaib िाि, पोस्ट ऑकिस में एक लिवपक
को भाेत में वाेार्सी के ननकट एक गाुंव में 31
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Success As A Writer !
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एक िेखक के रूप में सििता!
यि के वि कल्पना किाननयाुं, परेयों की किाननयों औे धालमणक कायण के
शालमि जा प्रेमचुंि हिुंिी साहित्...
शैिी िेखन!
अपने िेखन की उल्िेखनीय ववशेषता वि उपन्यास में अपने
पािों का चचिर् ककया िै त्जसके साथ वास्तववकता थी.
अन्य समकािी...
प्रेमचुंि के उल्िेखनीय कायण!
प्रेमचुंि 300 से अचधक िघ किाननयाुं, उपन्यास औे ननाुंध,
पि औे नाटकों के कई सुंख्या लिखी. अपने ...
ााि का जीवन औे मौत!
प्रेमचुंि साहित्य में िोगों को लशक्षित केने के लिए एक सशक्त
माध्यम िै कक माना जाता िै औे यि उनके िेखन ...
TimeLine Of Munshi Premchand!
• 1880- Born On 31st July
• 1899 - He left His Village
• 1902 - He Became A Headmaster Of A ...
THANK YOU!
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The Life of Munshi Premchand in Hindi

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This Slide is About the Great Life of the Indian writer Munshi Premchand in Hindi as requested by many people. So it is for all those who need it in Hindi, Other can check out the English version
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The Life of Munshi Premchand in Hindi

  1. 1. साहित्य हिन के लिए आपका स्वागत िै
  2. 2. Topic = मुंशी प्रेमचुंि के जीवन
  3. 3. मुंशी प्रेमचुंि के जीवन के ााेे 31 जिाई 1880 को जन्मे मुंशी प्रेमचुंि ने अपनी आधननक हिन्िस्तानी साहित्य के लिए प्रलसद्ध एक भाेतीय िेखक थे. उन्िोंने किा कक भाेतीय उपमिाद्वीप के सासे मशिूे िेखकों में से एक िै, औे ाीसवीुं सिी के सासे मित्वपूर्ण हिुंिस्तानी िेखकों में से एक माना जाता िै.
  4. 4. मुंशी प्रेमचुंि के जीवन के ााेे में प्रेमचुंि का असिी नाम Dhanpat ेाय थी श्रीवास्तव. उन्िोंने किा कक सासे ाडी में से एक था आधननक हिुंिी साहित्य के साहित्त्यक आुंकडे. उनकी किाननयों ताजा सामात्जक चचत्रित उस समय की परेदृश्य. उन्िोंने किा कक उनके िेखन के साथ आधननक हिुंिी औे उिूण साहित्य में िे जाया जो एक प्रलसद्ध भाेतीय िेखक औे कवव थे.
  5. 5. ाचपन औे प्राेुंलभक जीवन प्रेमचुंि मुंशी Ajaib िाि, पोस्ट ऑकिस में एक लिवपक को भाेत में वाेार्सी के ननकट एक गाुंव में 31 जिाई 1880 को िआ था. वि अभी ाित छोटा था जा उसके माता वपता की मृत्य िो गई. प्रेमचुंि एक व्यवस्था की ाच्चे में एक िडकी से शािी की थी शािी के रूप में तो कस्टम िेककन उसके लिए ििणनाक सात्रात िई शािी थी औे वि 1899 में उसे छोड हिया. प्रेमचुंि 1906 में एक ाच्चे को ववधवा Shivrani िेवी से शािी केने के ााि कक.
  6. 6. जल्िी कै रेये यि वि पििी ााे गुंभीेता से लिखना शरू के हिया िै, जिाुं इिािाााि में था. प्रेमचुंि उिूण में एक फ्रीिाुंसे के रूप में उनकी साहित्त्यक कै रेये शरू ककया औे भाषा में कई िघ कथाएँ लिखा था. उनका पििा उपन्यास, Asrar ई Ma'abid पििी आवाज़ ए खल्क, एक उिूण साप्ताहिक में प्रकालशत की गई थी. इसके तेुंत ााि, वि एक उिूण पत्रिका ज़माना साथ जड गया. उन्िोंने यि भी सोज ए Vatan रूप में जाना गया जो उिूण में छोटी किाननयों का एक सुंग्रि लिखा िै. यि एक िेखक के रूप में अपने कै रेये आकाे िेना शरू ककया तो था कक औे वि कानपे की साहित्त्यक िननया की एक प्रनतत्ठित हिस्सा ान गया.
  7. 7. Success As A Writer ! His literary work inUrdugainedhim areputation of a journalist withsocial aim, rather thana mere entertainer. His early writings were largelyinfluenced by the nationwidemovement inwhichhe often expressed his support to the fightfor freedom. In 1910,his collection of Soz-e-Watanwas labeled as rebellious on accountof its message whichprovokedIndians tofightfor the nation. An agonizedBritish government confiscated the book andall copies of Soz-e- Watanwere burnt or destroyed. The prolific writer wrote more than 300stories, novels anda number ofplays.
  8. 8. एक िेखक के रूप में सििता! यि के वि कल्पना किाननयाुं, परेयों की किाननयों औे धालमणक कायण के शालमि जा प्रेमचुंि हिुंिी साहित्य में शरू यथाथणवाि के साथ श्रेय हिया जाता िै. उनकी ेचनाओुं को सुंकलित औे Maansarovar के रूप में प्रकालशत के ेिे िैं. 1921 में, प्रेमचुंि भाेतीय स्वतुंिता आुंिोिन औे गाुंधी के स्विेशी आुंिोिन को समथणन के रूप में अपनी नौकेी से इस्तीिा िे हिया. उन्िोंने किा कक एक वप्रुंहटुंग प्रेस में नौकेी िे िी औे प्रेस के मालिक ान गए. उस समय के िौेान वि भी खि को समथणन केने के लिए हिन्िी औे उिूण पत्रिकाओुं के सुंपािक के रूप में काम ककया. मिान िेखक औे उपन्यासकाे पैसा कमाने के लिए वविि ेिी िै औे गेीाी औे ववत्तीय सुंकट के ाीच सुंघषण का एक जीवन का नेतृत्व ककया.
  9. 9. शैिी िेखन! अपने िेखन की उल्िेखनीय ववशेषता वि उपन्यास में अपने पािों का चचिर् ककया िै त्जसके साथ वास्तववकता थी. अन्य समकािीन िेखकों के ववपेीत, वि कल्पना fictions, या एक िीेो पे आधारेत किाननयाुं लिख निीुं था. उनके उपन्यासों में मख्य रूप से ििेज, गेीाी, साुंप्रिानयकता, उपननवेशवाि औे भ्रठटाचाे औे जमीुंिाेी, जैसी सामात्जक ाेाइयों पे सुंिेश शालमि थे. उन्िोंने किा कक साहित्य में वास्तववकता िाने के लिए ाीसवीुं सिी के पििे िेखक थे.
  10. 10. प्रेमचुंि के उल्िेखनीय कायण! प्रेमचुंि 300 से अचधक िघ किाननयाुं, उपन्यास औे ननाुंध, पि औे नाटकों के कई सुंख्या लिखी. अपने कायों के कई अुंग्रेजी औे रूसी में अनवाि ककया गया िै औे कछ के रूप में अच्छी तेि से किल्मों में अपनाया गया िै. उनका पििा उपन्यास गोिान अपने यग के ाेितेीन उपन्यास में स्थान औे इस हिन तक तो ानी िई िै. उनकी अन्य उल्िेखनीय उपन्यासों Gaban, किन poos की चूिा, ईिगाि, औे ाडे घे की ाेटी िैं. अन्य bestselling उपन्यास शतेुंज के खखिाडी औे SevaSadan सत्यजीत ेे ने किल्म में अपनाया गया.
  11. 11. ााि का जीवन औे मौत! प्रेमचुंि साहित्य में िोगों को लशक्षित केने के लिए एक सशक्त माध्यम िै कक माना जाता िै औे यि उनके िेखन में पता चिा. उसके ााि के जीवन में उन्िोंने सामात्जक उद्िेश्य औे सामात्जक आिोचना के साथ fictions लिखना जाेी ेखा. अा एक श्रद्धेय िेखक औे ववचाेक, वि सम्मेिनों, साहित्य सेलमनाे की अध्यिता की औे ववशाि वािवािी प्राप्त ककया. उन्िोंने किा, िािाुंकक. वषण 1936 में भाेतीय प्रगनतशीि िेखक सुंघ के पििे अखखि भाेतीय सम्मेिन की अध्यिता की अपने ननजी जीवन में वि अभी भी जरुेतें पूेी केने के लिए सुंघषण के ेिा था. उन्िोंने यि भी स्वास््य समस्या से ववशेष रूप से 'पेट की समस्याओुं' का सामना केना पडा. कभी कहिनाई औे चनौनतयों के ाावजूि, प्रेमचुंि के िेखन का परेत्याग निीुं ककया था औे उनका अुंनतम उपन्यास Mangalsootra को पूेा केने में िग गए. वि 8 अक्टूाे 1936 पे इसे के ाीच में मृत्य िो गई के रूप में उपन्यास अभी भी अधूेा ेिता िै.
  12. 12. TimeLine Of Munshi Premchand! • 1880- Born On 31st July • 1899 - He left His Village • 1902 - He Became A Headmaster Of A school. • 1906 - He Married A Child Widow Shivrani devi. • 1910 - His Collection Soz-E-Watan was confiscated by the British government. • 1921- Premchand resigned from his job as his support to the Indian independence movement. • 1936- He chaired the first All-India conference of the Indian Progressive Writer’s Association. • 1936- Premchand died on 8 October 1936
  13. 13. THANK YOU! Doneby Varunkakkar

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