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Integrated Pest
Management in onion and
Garlic
Dr Rohit Rana
Ph.D Entomology
 प्याज व लहसुन भारत में उगाई जाने वाली सब्जिय ों की प्रमुख फसलें हैं।
 अमेरीकन कैं सर अनुसोंधान सोंस्थान का ये मानना है कक प्याज और लहसुन में
ऐसे पौषक तत्व ह ते हैं ज कई तरीक से हमारे स्वास्थ के कलए लाभदायक ह ते
हैं।
 मौसम में आर्द्रता तथा तापमान का लगातार उतार चढ़ाव कीड़ ों एवों बीमाररय ों
क न्य ता देता है कजसके कारण फसल ों क सुरकित रखना बहुत मुब्जिल ह ता
है।
 प्याज और लहसुन की उत्पादकता क प्रभाकवत करने में मुख्यत: द प्रकार के
वाहय कारक ह ते हैं, अजैविक कारक (तापमान, धूप, वषार तथा वातावरण
कीआर्द्रता इत्याकद) एवों जैविक कारक (कीड़े, बीमाररयाों और खरपतवार)।
 जैकवक कारक ों में भी बीमाररयााँ मुख्य कारक है ज प्याज और लहसुन क
नुकसान करते हैं।
प्रस्तािना
प्याज एिं लहसुन में लगने िाले
प्रमुख कीट
विप्स
 किप्स प्याज एवों लहसुन का मुख्य कीट है, ज कवश्व भर
में पाया जाता है।
 ये आकार मे छ टे, 1-2 कम.मी. लोंबे क मल कीट ह ते
हैं। ये कीट सफ़े द-भूरे या हल्के पीले रोंग के एवों इनके
मुखाोंग रस चूसने वाले ह ते हैं।
 कििु व वयस्क द न ों ही पकिय ों क चीरकर तथा
खुरचकर रस पीते हैं।
 इसके अलावा फू ल ों में भी नुकसान ह ने की वजह से
बीज कम बनते हैं।
 किप्स से प्रभाकवत पौधे
की पकिय ों पर सफ़े द
धब्बे और धाररयााँ कदखाई
देती हैं।
 इस कीट का अकधक
प्रक प ह ने पर पकियााँ
कसकु ड़ जाती हैं और
पौधे की बढ़वार रुक
जाती हैं कजससे उपज में
कमी ह जाती है।
प्याज की मक्खी
 प्याज की मक्खी बहुत ही नाजुक, धूसर-भूरे रोंग की लगभग 5-7 से0 मी0 की ह ती है।
 इसमें पूणर रूपान्तरण पाया जाता है।
 यह कदखने में छ टी घर की मक्खी जैसी लगती है।
 पैर रकहत सूाँडी पतली एवों क्रीमी सफ़े द ह ती है।
 इस मक्खी की परस्पर (Back To Back) तीन पीकढ़यााँ हर साल ह ती है।
 सकदरय ों में इस मक्खी का प्युपा जमीन में रहता है ।
 प्याज की मक्खी का लावार अोंकु ररत पौध, कवकासिील जड़ ों एवों बीजपत्र क िकत
पहुाँचाते हैं।
 जब अोंड से लावार कनकलते हैं त वे जड़ क खाते हैं और पूरे जड़ तोंत्र क नष्ट कर
देते हैं।
 अोंडे से कनकली हुए छ टी सूाँडी पिी के ख ल मे रेंगती हुए कों द में प्रवेि कर जाती
है और जड़ तोंत्र क खाती है।
 कजससे भूकम के पास वाले तने का भाग सड़कर नष्ट ह जाने से पूरा पौधा सुख
जाता है।
 कभी कभी इस कीट द्वारा फसल में बहुत िकत ह ती है।
माईट
 यह भारतीय उपमहाद्वीप में प्याज और लहसुन का एक उभरता हुआ एवों महत्वपूणर
अष्टपदी है।
 इसके कििु प्राय: लाल रोंग के ह ते हैं और 4 ज ड़े पैर पाये जाते हैं।
 मादाएाँ लाल और आकृ कत कु छ कम या अकधक अोंडाकार ह ती हैं।
 यह अपना जीवन चक्र एक सप्ताह में पूरा करती है।
 जब मौसम गमर और सूखा ह ता है त प्रजनन करने के कलए सबसे अनुकू ल ह ता
है।
 कििु और वयस्क प्रारोंकभक अवस्था मे पिी के कनचले कहस्से पर खाते हैं और पकिय ों की
ऊपरी सतह छ टे कबन्दुओों से भर जाती है ज की इस कीट के खाने के कछर्द् ह ते हैं।
 ये कीट प्राय: पिी की गॉब और किराओों के पास भी खाते हैं। इन अष्टपदीय ों द्वारा उत्पाकदत
जाल/रेिम आमतौर पर कदखाई देता है।
 अकधक प्रक प ह ने पर पकिय ों का रोंग उड़ने लगता है पररणामस्वरूप वे फीकी पड़ जाती है
तथा कभी-कभी कगरने लगती है।
एकीकृ त कीट प्रबंधन
 खेत क साफ और खरपतवार मुक्त रखें।
 प्याज और लहसुन की कीट ग्रकसत पौध क खेत में न लगाए तथा लगातार एक ही वगर की
फसल खेत में लगाने से बचना चाकहए। ऐसी फसल कजस पर प्याज व लहसुन के कीट न
खाये – उन्हे फसल चक्र पद्धकत में अपनाएाँ ।
 यकद खेत के चार ों तरफ 2 पोंब्जक्त मक्का की या एक बाहरी पोंब्जक्त मक्का की और अोंदर की
पोंब्जक्त गेहों की लगा दी जाए त उससे किप्स वयस्क खेत में 80 % तक कम ह सकती है। ये
कीटनािी के प्रय ग क भी कम करने में मददगार है।
 किप्स रोंग के प्रकत बहुत सोंवेदनिील ह ते हैं, त नीला-धूसर कचपकचपा प्रपोंच इसके कनयोंत्रण
के कलए प्रय ग ककया जा सकता हैं।
 प्याज और लहसुन क ऐसी कमट्टी में न उगाएाँ कजसमें अकवघकटत काबरकनक पदाथर याकन कबना
सड़े हुये जैकवक अविेष ज्यादा मात्रा में ह ।
 पौधे से पौधे की उकचत दू री (10X15Cm) बनाकर प्याज एवों लहसुन की बुवाई करें।
 बाढ़ कसचाई या अकधक बाररि जमीन में माईट की जनसोंख्या के स्तर क कम करने में
मदद करती है।
 कीटनािीय ों का आवश्यकता अनुसार बुवाई के 30 कदन बाद और 10-15 कदन ों के अोंतराल
पर कछड़काव करें।
 पौध की जड़ क काबेण्डाकजम 0.1% +काबोसल्फान 0.025% घ ल में 2 घोंटे तक रखने
पर कवक जकनत र ग तथा किप्स के नुकसान से 30-40 कदन ों तक मुख्य: खेत में बचा जा
सकता है।
 किप्स की र कथाम के कलए डाईकमथ एट 30 % ई. सी. 300 कम. ली. प्रकत एकड़ की दर से
प्रय ग करे।
 माईट की र कथाम के कलए डाइक फाल 18.5 ई सी @ 1.3-2.7 ली./ हे.
रोग एिं उनका प्रबंधन
खेत में होने िाले रोग :
बैंगनी धब्बा रोग :
 गमर एवों आर्द्र मौसम इस र ग के कवकास के कलए
बहुत उपयुक्त ह ता है।
 यह र ग भूकम जकनत र ग है अत: फों गस कमट्टी में,
फसल के अविेष और खरपतवार की जड़ ों पर
कवककसत ह ती है।
 इस र ग के लिण पौधे की पकतय ों, तन ों एवों फू ल ों
के डोंठल पर सफ़े द रोंग के धब्बे कदखाई देते हैं ज
बाद में बैंगनी रोंग के ह जाते है।
 यह र ग पिी के चार तरफ फ़े ल जाता है और
पकियााँ कगरने लगती है कजससे प्याज और लहसुन में
कों द और बीज नही बन पाते है।
प्रबंधन
 अच्छी र गर धी ककस्म के बीज ों का प्रय ग करें।
 नत्रजन का प्रय ग उकचत मात्रा में ही करें।
 खेत में 2-3 साल का लोंबा फसल चक्र कबना प्याज वगीय फसल ों के साथ अपनाये।
 फफूों दनाकिय ों का सही समय पर और कववेकपूणर प्रय ग इस र ग से बचा सकता है।
 पौध र पाई के 40-45 कदन बाद कापर ऑक्सी क्लोराइड 50 % डब्लू पी या मैनकोजैब
65 % डब्लू पी + काबेन्डाजीम12 % डब्लू पी 300-400 ग्राम प्रकत एकड़ कक दर से प्रय ग
करें। कु छ अन्य कवकनािी भी इस र ग की र कथाम के कलए प्रय ग कर सकते हैं जैसे:
डाईफे नोकोनाजोल 25% ई.सी. (100 कम.ली. 100 लीटर पानी में), वकटाज़ीन 48%
ई.सी. (200 कमली. 200 लीटर पानी में), टेबुकोनाज़ोल 25.9% ई.सी.(0.63-0.75 कम.ली.
500 लीटर पानी में) इत्याकद।
आर्द्रगलन रोग (Damping off)
 लहसुन और प्याज की फसल का प्रमुख र ग है और पौधे में द अवस्था मे ह ता है।
 अोंकु रण से पहले (इस अवस्था में बीज और अोंकु र जमीन से कनकालने से पहले ही सड़ जाते
है)
 अोंकु रण के बाद (इस अवस्था में कवक पौधे के तने क सोंक्रकमत करता है कजससे पौध
कमज र पड़ जाती है और मर जाती है)।
 यह र ग खरीफ में लगभग 60-70 % तक नुकसान करता है।
प्रबंधन
 प्याज और लहसुन की पौध तैयार करने के कलए स्वस्थ एवों बीमारी रकहत बीज का ही
प्रय ग करें।
 पौध तैयार करने की जगह क हमेिा बदल-बदल कर ही प्रय ग करें हर बार एक ही
जगह पौध तैयार न करें।
 खरीफ के मौसम मे पौधिाला की क्याररयााँ जमीन की सतह से उपर बनानी चाकहए
कजससे की पानी इकट्ठा न ह ।
 कमट्टी सौरीकरण (Soil Solarization) : नसररी बेड क बुवाई से 30 कदन पूवर 250 गेज की
प कलथीन से ढक दें।
 टरैक डमार कवररडी 4-5 कक. ग्रा. प्रकत हक्टेर कक दर से इस र ग कक र कथाम/ कनवारण के
कलए प्रय ग कर सकते हैं।
 नसररी लगाने से पूवर कमट्टी की ऊपरी पतर क कथरम या के प्टान 5 ग्राम /मी2 की दर से भी
उपचाररत कर सकते हैं।
 बीज क कथरम या के प्टान 2 ग्राम /कक. ग्रा. बीज की दर से उपचररत करें।
झुलसा रोग
 यह र ग पिीय ों और बीज के डोंठल ों
पर पहले छ टे-छ टे सफे द और हल्के
पीले धब्ब ों के रूप में पाया जाता है।
 बाद में यह धब्बे एक-दू सरे से कमलकर
बड़े भूरे रोंग के धब्ब ों में बदल जाते हैं
और अोंत में ये गहरे भूरे या काले रोंग के
ह जाते हैं।
 प्रभाकवत पिीयााँ धीरे-धीरे कसरे कक तरफ
से सुखना िुरू ह ती है और आधार की
तरफ बढ़कर पूरी सुख जाती है।
 इसमे सोंक्रमण पहले पुरानी पिीय ों पर
फै लता है। इस र ग से पौधे और कों द
का कवकास नही ह पाता है।
प्रबंधन
 खेत में अच्छी जल कनकासी इस र ग के प्रक प से बचा सकती है।
 खेत में 2-3 साल का लोंबा फसल चक्र कबना प्याज वगीय फसल ों के साथ
अपनाये।
 पौध की जड़ ों क काबेन्डाजीम के घ ल में डू बाकर र पाई करने से इस
बीमारी का प्रक प कम ह जाता है।
 कापर ऑक्सीक्ल राइड 50 % डब्लू पी या मैनक जैब या काबेन्डाजीम 2
ग्राम प्रकत लीटर पानी में 12-14 कदन ों के अोंतराल पर कछड़काव करें।
 फफूों दनिी का प्रय ग कचपकने वाला पदाथर (ब्जिकर) कमला कर ही प्रय ग
करें।
इररस पीला धब्बा रोग
 ये र ग किप्स के द्वारा रस चूसने पर
फै लता है।
 इस र ग की उग्रता की मात्रा खेत में किप्स
की सोंख्या के साथ समानुपाकतक हैं।
अथारत, अकधक किप्स ह ने पर अकधक र ग
कदखाई देता हैं।
 इस र ग के लिण पहले सुखी घास के रोंग
के समान, िुष्क, धूप में झुलसे हुए ककसी
तन्तु या हीरे के आकार के पकिय ों पर
कदखाई देते हैं।
 यह र ग पूरी फसल क नष्ट करने में
सिम हैं।
प्रबंधन
 इस र ग से प्रभाकवत पौधे क खेत से कनकालकर नष्ट कर दें कजससे कक
र ग खेत में न फै ले।
 खेत के चार तरफ मेड़ से खरपतवार क नष्ट कर दें।
 यह र ग किप्स कीट के द्वारा रस चूसने से फै लता हैं अत: डाईकमथ एट 30
% ई सी 300 कम ली प्रकत एकड़ का प्रय ग करे कजससे र ग फै लाने वाले
कीट क र का जा सके ।
प्याज का पीला बौना (येलो ड्िाफर ) रोग
 यह र ग लहसुन एवों प्याज का
मुख्य र ग हैं।
 ज कों द उत्पादन क भारी
नुकसान पहुोंचाता हैं।
 यह र ग माह के रस चूसने से
फै लता है।
 इसके प्रभाव से पौधे का रोंग
चमकदार पीला पड़ जाता हैं
और पौधे एवों कों द का कवकास
रुक जाता हैं।
प्रबंधन
 स्वस्थ बीज का ही प्रय ग करे।
 बीमारी से ग्रकसत पौधे क खेत से कनकालकर नष्ट कर देना चाकहए।
 र ग क फै लाने वाले कीट (माहु) की र कथाम के कलए नीम प्राकृ कतक
कीटनािक ों का प्रय ग करना चाकहए।
 माह की सोंख्या क खेत में कम करने के कलए पीले कचपकचपे प्रपोंच (yellow
sticky trap) का प्रय ग करे।
 ज्यादा सोंख्या ह ने पर कीटनािी डाईकमथ एट 30 % ई सी का 275 कम ली
/ एकड़ की दर से प्रय ग करे।
मृदुरोवमल आवसता रोग (Downy Mildew)
 यह र ग िुरुआत मे पकिय ों से
फै लता हैं और पूरा पौधा सोंक्रकमत ह
जाता हैं।
 इस र ग के लिण पिीय ों पर बैंगनी
रोंग की फफूों द के रूप में कदखते हैं
ज बाद में पीले –हरे रोंग के ह जाते
हैं
 इससे पिीयााँ एवों बीज के डोंठल
सुखकर नष्ट ह जाते हैं।
 लाल प्याज कु छ हद तक इस र ग
के प्रकत र धक हैं।
प्रबंधन
 ज लहसुन/प्याज के कों द बीज की फसल के कलए प्रय ग करे उन्हे
10-12 कदन ों तक धूप में रखे कजससे फफूों द खत्म ह जाए।
 खाद का प्रय ग सोंतुकलत मात्रा में करे और कनरोंतर सही समय पर
कसोंचाई करते रहे।
 इस र ग की र कथाम के कलए जीनेब 0.2 प्रकतित या के राथेन 0.1
प्रकतित घ ल इस फफूों द क कनयोंकत्रत करने के कलए अच्छा ह ता हैं ।
सफ़े द फफूं द रोग
 इस र ग के प्रक प ह ने पर पकिय ों के कसरे पीले पड़ने लगते हैं
और पकियााँ सुख जाती हैं।
 िल्क कों द तथा जड़ सड़ने लगती हैं और कों द मुलायम ह जाता
हैं।
 सफ़े द फू लमय या कपास के समान गहरे काले स्क्ल रेकिया के
साथ सोंक्रमण कों द पर देखाई देता हैं।
प्रबंधन
 बुवाई के समय टराइक डमार कवररडी का प्रय ग खेत मे करे।
 बीज क कथरम 2 ग्राम प्रकत ककग्रा बीज कक दर से उपचारीत कर के
ही ब ए।
 जमीन क काबेन्डाजीम, थाय कफनेट कमथाइल या बेन मील (0.1 %)
से उपचररत करने से इस र ग का कनयोंकत्रत ह ता हैं।
खेत तथा गोदाम में होने िाले रोग :
आधार विगलन रोग
 इस र ग के िुरुआती लिण पकिय ों में पीलापन
पौधे की वृब्जद्ध में कमी और बाद में पिीयााँ सूखने
लगती हैं तथा नीचे की तरफ मुड़ जाती हैं।
 िुरुआती अवस्था में पौधे की जड़ गुलाबी पड़
जाती हैं और सूखने लगती हैं।
 फसल के अोंत में कों द सड़ना िुरू ह जाता हैं
और पौधा पूरी तरह मर जाता हैं।
 जुलाई से अगस्त के महीने में जब तापमान 35-
400C ह ता हैं त ये र ग भोंडारण में भी कदखाई
देता हैं।
प्रबंधन
 यह र ग भूकम जकनत र ग हैं त कनयोंकत्रत करना थ ड़ा मुब्जिल ह ता हैं।
कमकित खेती तथा फसल चक्र इस र ग क कम करता हैं।
 कमट्टी सौरीकरण (Soil Solarization) : नसररी बेड क बुवाई से 30 कदन
पूवर 250 गेज की कबना छे द वाले प कलथीन से ढक दें एवों प कलथीन के
ककनारे पर कमट्टी चढ़ा दें। यह नसररी के सूत्रकृ कम, कवक, भूकम के कीट
कनयोंत्रण के अकत उिम तरीका हैं। इस से फ स्फ रस की आपूकतर भी
आसानी से ह ती हैं।
 बीज क कथरम या के प्टान 2 ग्राम /कक ग्रा बीज की दर से उपचाररत करे।
नेक रॉट
 यह र ग कन्द की गदरन के चार और मुलायम िल्क के रूप में कदखाई देता हैं और कभी
कभी ज्यादा प्रक प ह ने पर घाव भी ह जाते हैं।
 एक कनकित ककनारा/ घेरा र ग ग्रकसत तथा र ग रकहत िल्क क अलग अलग बाोंटता हैं।
 सोंक्रकमत कन्द भूरे से धूसर रोंग का ह ता हैं।
 जब ये धूसर रोंग की फफूों द देखाई देने से पहले कन्द की ऊपरी िल्क हटा देनी चाकहए।
प्रबंधन
 र ग के फै लने का मुख्य: कारण कन्द का रसीला भाग ह ता हैं अत: पौधे का
ऊपरी भाग तब काटे जब व पूरी तरह सुख जाए।
 समान्यत: लाल रोंग की ककस्मे सफ़े द ककस्म ों के मुक़ाबले अकधक प्रकतर धी
ह ती हैं।
 खेत में मध्य जुलाई के बाद नत्रजन खाद न डालें।
 फसल कटाई कु छ कदन पहले कसचाई बोंद कर दे कजससे पौधे के जमीन से
ऊपर का भाग सुख जाए।
 कटाई से पहले उपर के भाग क अच्छी तरह सूखने दे।
 अनुकचत ढोंग से उपचाररत कन्द का भोंडारण न करे।
भूरी सड़न
 प्याज के बीच वाले कहस्से (िल्ककन्द)
मे गहरे भूरे रोंग का धब्बा इस र ग का
मुख्य लिण हैं।
 िल्क कों द गहरा भूरा ह कर सड़ने
लगता हैं।
 सड़न अोंदर से िुरू ह कर पूरे कों द मे
फ़े ल जाती हैं।
 कभी कभी पूरा कों द सडने लगता हैं
और भोंडारण मे बुरी गोंद फ़े ल जाती हैं।
प्रबंधन
 प्याज के र गी कों द ह भोंडारण से पहले छााँटकर बाहर कनकाल दें।
 प्याज की फसल में बुवाई से लेकर कटाई तक हल्की कसचाई करे।
 कों द की गदरन लगभग 25-30 से मी उपर से काटने पर जीवाब्जिक
सोंक्रामण कम ह ता हैं।
 फसल कटाई के एक महीने पहले आइस प्र पाइल कफ़नाइल काबारमैट
20 कम ली प्रकत लीटर की दर से खेत मे कछड़काव करे।
प्याज़ एिं लहसुन के उन्नत भंडारण विवध
वनम्नवलखखत कु छ विवधयााँ प्याज और लहसुन के लंबे भंडारण में सहायता करेगी :
 जब प्याज खेत में पूरी तरह सुख जाए त उसके बाद कु छ कदन ों तक भोंडारण से बाहर
सुरकित रखे कजससे प्याज में उपलब्ध अकधक मात्रा में नमी बाहर कनकाल जाए।
 प्याज तथा लहसुन क अोंधकार, ठों डे और अच्छी वायु सोंचार के साथ सुखी जगह भोंडारण
करना चाकहए तथा सीधी धूप लगने से बचाना चाकहए।
 प्याज क 40-600F तथा 65-70 प्रकतित आर्द्रता पर ही भोंडाररत करे।
 प्याज क प्लाब्जिक के ब रे में रखकर भोंडारण मे न रखे क्य ोंकक कम वायु सोंचार के
कारण इसकी भोंडारण आयु घट जाती हैं।
 कभी भी इनक आलू के साथ भोंडारण में न रखे क्य ोंकक आलू से नमी कनकलती हैं ज
प्याज क खराब कर सकती हैं।
 कटे हुए, चुटीले, और र गी कों द क भोंडार में नही रखना चाकहए तथा खराब कों द क
फें क दे।
Integrated pest management in onion and garlic

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Integrated pest management in onion and garlic

  • 1. Integrated Pest Management in onion and Garlic Dr Rohit Rana Ph.D Entomology
  • 2.  प्याज व लहसुन भारत में उगाई जाने वाली सब्जिय ों की प्रमुख फसलें हैं।  अमेरीकन कैं सर अनुसोंधान सोंस्थान का ये मानना है कक प्याज और लहसुन में ऐसे पौषक तत्व ह ते हैं ज कई तरीक से हमारे स्वास्थ के कलए लाभदायक ह ते हैं।  मौसम में आर्द्रता तथा तापमान का लगातार उतार चढ़ाव कीड़ ों एवों बीमाररय ों क न्य ता देता है कजसके कारण फसल ों क सुरकित रखना बहुत मुब्जिल ह ता है।  प्याज और लहसुन की उत्पादकता क प्रभाकवत करने में मुख्यत: द प्रकार के वाहय कारक ह ते हैं, अजैविक कारक (तापमान, धूप, वषार तथा वातावरण कीआर्द्रता इत्याकद) एवों जैविक कारक (कीड़े, बीमाररयाों और खरपतवार)।  जैकवक कारक ों में भी बीमाररयााँ मुख्य कारक है ज प्याज और लहसुन क नुकसान करते हैं। प्रस्तािना
  • 3. प्याज एिं लहसुन में लगने िाले प्रमुख कीट विप्स  किप्स प्याज एवों लहसुन का मुख्य कीट है, ज कवश्व भर में पाया जाता है।  ये आकार मे छ टे, 1-2 कम.मी. लोंबे क मल कीट ह ते हैं। ये कीट सफ़े द-भूरे या हल्के पीले रोंग के एवों इनके मुखाोंग रस चूसने वाले ह ते हैं।  कििु व वयस्क द न ों ही पकिय ों क चीरकर तथा खुरचकर रस पीते हैं।  इसके अलावा फू ल ों में भी नुकसान ह ने की वजह से बीज कम बनते हैं।
  • 4.  किप्स से प्रभाकवत पौधे की पकिय ों पर सफ़े द धब्बे और धाररयााँ कदखाई देती हैं।  इस कीट का अकधक प्रक प ह ने पर पकियााँ कसकु ड़ जाती हैं और पौधे की बढ़वार रुक जाती हैं कजससे उपज में कमी ह जाती है।
  • 5. प्याज की मक्खी  प्याज की मक्खी बहुत ही नाजुक, धूसर-भूरे रोंग की लगभग 5-7 से0 मी0 की ह ती है।  इसमें पूणर रूपान्तरण पाया जाता है।  यह कदखने में छ टी घर की मक्खी जैसी लगती है।  पैर रकहत सूाँडी पतली एवों क्रीमी सफ़े द ह ती है।  इस मक्खी की परस्पर (Back To Back) तीन पीकढ़यााँ हर साल ह ती है।  सकदरय ों में इस मक्खी का प्युपा जमीन में रहता है ।
  • 6.  प्याज की मक्खी का लावार अोंकु ररत पौध, कवकासिील जड़ ों एवों बीजपत्र क िकत पहुाँचाते हैं।  जब अोंड से लावार कनकलते हैं त वे जड़ क खाते हैं और पूरे जड़ तोंत्र क नष्ट कर देते हैं।  अोंडे से कनकली हुए छ टी सूाँडी पिी के ख ल मे रेंगती हुए कों द में प्रवेि कर जाती है और जड़ तोंत्र क खाती है।  कजससे भूकम के पास वाले तने का भाग सड़कर नष्ट ह जाने से पूरा पौधा सुख जाता है।  कभी कभी इस कीट द्वारा फसल में बहुत िकत ह ती है।
  • 7. माईट  यह भारतीय उपमहाद्वीप में प्याज और लहसुन का एक उभरता हुआ एवों महत्वपूणर अष्टपदी है।  इसके कििु प्राय: लाल रोंग के ह ते हैं और 4 ज ड़े पैर पाये जाते हैं।  मादाएाँ लाल और आकृ कत कु छ कम या अकधक अोंडाकार ह ती हैं।  यह अपना जीवन चक्र एक सप्ताह में पूरा करती है।  जब मौसम गमर और सूखा ह ता है त प्रजनन करने के कलए सबसे अनुकू ल ह ता है।
  • 8.  कििु और वयस्क प्रारोंकभक अवस्था मे पिी के कनचले कहस्से पर खाते हैं और पकिय ों की ऊपरी सतह छ टे कबन्दुओों से भर जाती है ज की इस कीट के खाने के कछर्द् ह ते हैं।  ये कीट प्राय: पिी की गॉब और किराओों के पास भी खाते हैं। इन अष्टपदीय ों द्वारा उत्पाकदत जाल/रेिम आमतौर पर कदखाई देता है।  अकधक प्रक प ह ने पर पकिय ों का रोंग उड़ने लगता है पररणामस्वरूप वे फीकी पड़ जाती है तथा कभी-कभी कगरने लगती है।
  • 9. एकीकृ त कीट प्रबंधन  खेत क साफ और खरपतवार मुक्त रखें।  प्याज और लहसुन की कीट ग्रकसत पौध क खेत में न लगाए तथा लगातार एक ही वगर की फसल खेत में लगाने से बचना चाकहए। ऐसी फसल कजस पर प्याज व लहसुन के कीट न खाये – उन्हे फसल चक्र पद्धकत में अपनाएाँ ।  यकद खेत के चार ों तरफ 2 पोंब्जक्त मक्का की या एक बाहरी पोंब्जक्त मक्का की और अोंदर की पोंब्जक्त गेहों की लगा दी जाए त उससे किप्स वयस्क खेत में 80 % तक कम ह सकती है। ये कीटनािी के प्रय ग क भी कम करने में मददगार है।  किप्स रोंग के प्रकत बहुत सोंवेदनिील ह ते हैं, त नीला-धूसर कचपकचपा प्रपोंच इसके कनयोंत्रण के कलए प्रय ग ककया जा सकता हैं।
  • 10.  प्याज और लहसुन क ऐसी कमट्टी में न उगाएाँ कजसमें अकवघकटत काबरकनक पदाथर याकन कबना सड़े हुये जैकवक अविेष ज्यादा मात्रा में ह ।  पौधे से पौधे की उकचत दू री (10X15Cm) बनाकर प्याज एवों लहसुन की बुवाई करें।  बाढ़ कसचाई या अकधक बाररि जमीन में माईट की जनसोंख्या के स्तर क कम करने में मदद करती है।  कीटनािीय ों का आवश्यकता अनुसार बुवाई के 30 कदन बाद और 10-15 कदन ों के अोंतराल पर कछड़काव करें।  पौध की जड़ क काबेण्डाकजम 0.1% +काबोसल्फान 0.025% घ ल में 2 घोंटे तक रखने पर कवक जकनत र ग तथा किप्स के नुकसान से 30-40 कदन ों तक मुख्य: खेत में बचा जा सकता है।  किप्स की र कथाम के कलए डाईकमथ एट 30 % ई. सी. 300 कम. ली. प्रकत एकड़ की दर से प्रय ग करे।  माईट की र कथाम के कलए डाइक फाल 18.5 ई सी @ 1.3-2.7 ली./ हे.
  • 11. रोग एिं उनका प्रबंधन खेत में होने िाले रोग : बैंगनी धब्बा रोग :  गमर एवों आर्द्र मौसम इस र ग के कवकास के कलए बहुत उपयुक्त ह ता है।  यह र ग भूकम जकनत र ग है अत: फों गस कमट्टी में, फसल के अविेष और खरपतवार की जड़ ों पर कवककसत ह ती है।  इस र ग के लिण पौधे की पकतय ों, तन ों एवों फू ल ों के डोंठल पर सफ़े द रोंग के धब्बे कदखाई देते हैं ज बाद में बैंगनी रोंग के ह जाते है।  यह र ग पिी के चार तरफ फ़े ल जाता है और पकियााँ कगरने लगती है कजससे प्याज और लहसुन में कों द और बीज नही बन पाते है।
  • 12. प्रबंधन  अच्छी र गर धी ककस्म के बीज ों का प्रय ग करें।  नत्रजन का प्रय ग उकचत मात्रा में ही करें।  खेत में 2-3 साल का लोंबा फसल चक्र कबना प्याज वगीय फसल ों के साथ अपनाये।  फफूों दनाकिय ों का सही समय पर और कववेकपूणर प्रय ग इस र ग से बचा सकता है।  पौध र पाई के 40-45 कदन बाद कापर ऑक्सी क्लोराइड 50 % डब्लू पी या मैनकोजैब 65 % डब्लू पी + काबेन्डाजीम12 % डब्लू पी 300-400 ग्राम प्रकत एकड़ कक दर से प्रय ग करें। कु छ अन्य कवकनािी भी इस र ग की र कथाम के कलए प्रय ग कर सकते हैं जैसे: डाईफे नोकोनाजोल 25% ई.सी. (100 कम.ली. 100 लीटर पानी में), वकटाज़ीन 48% ई.सी. (200 कमली. 200 लीटर पानी में), टेबुकोनाज़ोल 25.9% ई.सी.(0.63-0.75 कम.ली. 500 लीटर पानी में) इत्याकद।
  • 13. आर्द्रगलन रोग (Damping off)  लहसुन और प्याज की फसल का प्रमुख र ग है और पौधे में द अवस्था मे ह ता है।  अोंकु रण से पहले (इस अवस्था में बीज और अोंकु र जमीन से कनकालने से पहले ही सड़ जाते है)  अोंकु रण के बाद (इस अवस्था में कवक पौधे के तने क सोंक्रकमत करता है कजससे पौध कमज र पड़ जाती है और मर जाती है)।  यह र ग खरीफ में लगभग 60-70 % तक नुकसान करता है।
  • 14. प्रबंधन  प्याज और लहसुन की पौध तैयार करने के कलए स्वस्थ एवों बीमारी रकहत बीज का ही प्रय ग करें।  पौध तैयार करने की जगह क हमेिा बदल-बदल कर ही प्रय ग करें हर बार एक ही जगह पौध तैयार न करें।  खरीफ के मौसम मे पौधिाला की क्याररयााँ जमीन की सतह से उपर बनानी चाकहए कजससे की पानी इकट्ठा न ह ।  कमट्टी सौरीकरण (Soil Solarization) : नसररी बेड क बुवाई से 30 कदन पूवर 250 गेज की प कलथीन से ढक दें।  टरैक डमार कवररडी 4-5 कक. ग्रा. प्रकत हक्टेर कक दर से इस र ग कक र कथाम/ कनवारण के कलए प्रय ग कर सकते हैं।  नसररी लगाने से पूवर कमट्टी की ऊपरी पतर क कथरम या के प्टान 5 ग्राम /मी2 की दर से भी उपचाररत कर सकते हैं।  बीज क कथरम या के प्टान 2 ग्राम /कक. ग्रा. बीज की दर से उपचररत करें।
  • 15. झुलसा रोग  यह र ग पिीय ों और बीज के डोंठल ों पर पहले छ टे-छ टे सफे द और हल्के पीले धब्ब ों के रूप में पाया जाता है।  बाद में यह धब्बे एक-दू सरे से कमलकर बड़े भूरे रोंग के धब्ब ों में बदल जाते हैं और अोंत में ये गहरे भूरे या काले रोंग के ह जाते हैं।  प्रभाकवत पिीयााँ धीरे-धीरे कसरे कक तरफ से सुखना िुरू ह ती है और आधार की तरफ बढ़कर पूरी सुख जाती है।  इसमे सोंक्रमण पहले पुरानी पिीय ों पर फै लता है। इस र ग से पौधे और कों द का कवकास नही ह पाता है।
  • 16. प्रबंधन  खेत में अच्छी जल कनकासी इस र ग के प्रक प से बचा सकती है।  खेत में 2-3 साल का लोंबा फसल चक्र कबना प्याज वगीय फसल ों के साथ अपनाये।  पौध की जड़ ों क काबेन्डाजीम के घ ल में डू बाकर र पाई करने से इस बीमारी का प्रक प कम ह जाता है।  कापर ऑक्सीक्ल राइड 50 % डब्लू पी या मैनक जैब या काबेन्डाजीम 2 ग्राम प्रकत लीटर पानी में 12-14 कदन ों के अोंतराल पर कछड़काव करें।  फफूों दनिी का प्रय ग कचपकने वाला पदाथर (ब्जिकर) कमला कर ही प्रय ग करें।
  • 17. इररस पीला धब्बा रोग  ये र ग किप्स के द्वारा रस चूसने पर फै लता है।  इस र ग की उग्रता की मात्रा खेत में किप्स की सोंख्या के साथ समानुपाकतक हैं। अथारत, अकधक किप्स ह ने पर अकधक र ग कदखाई देता हैं।  इस र ग के लिण पहले सुखी घास के रोंग के समान, िुष्क, धूप में झुलसे हुए ककसी तन्तु या हीरे के आकार के पकिय ों पर कदखाई देते हैं।  यह र ग पूरी फसल क नष्ट करने में सिम हैं।
  • 18. प्रबंधन  इस र ग से प्रभाकवत पौधे क खेत से कनकालकर नष्ट कर दें कजससे कक र ग खेत में न फै ले।  खेत के चार तरफ मेड़ से खरपतवार क नष्ट कर दें।  यह र ग किप्स कीट के द्वारा रस चूसने से फै लता हैं अत: डाईकमथ एट 30 % ई सी 300 कम ली प्रकत एकड़ का प्रय ग करे कजससे र ग फै लाने वाले कीट क र का जा सके ।
  • 19. प्याज का पीला बौना (येलो ड्िाफर ) रोग  यह र ग लहसुन एवों प्याज का मुख्य र ग हैं।  ज कों द उत्पादन क भारी नुकसान पहुोंचाता हैं।  यह र ग माह के रस चूसने से फै लता है।  इसके प्रभाव से पौधे का रोंग चमकदार पीला पड़ जाता हैं और पौधे एवों कों द का कवकास रुक जाता हैं।
  • 20. प्रबंधन  स्वस्थ बीज का ही प्रय ग करे।  बीमारी से ग्रकसत पौधे क खेत से कनकालकर नष्ट कर देना चाकहए।  र ग क फै लाने वाले कीट (माहु) की र कथाम के कलए नीम प्राकृ कतक कीटनािक ों का प्रय ग करना चाकहए।  माह की सोंख्या क खेत में कम करने के कलए पीले कचपकचपे प्रपोंच (yellow sticky trap) का प्रय ग करे।  ज्यादा सोंख्या ह ने पर कीटनािी डाईकमथ एट 30 % ई सी का 275 कम ली / एकड़ की दर से प्रय ग करे।
  • 21. मृदुरोवमल आवसता रोग (Downy Mildew)  यह र ग िुरुआत मे पकिय ों से फै लता हैं और पूरा पौधा सोंक्रकमत ह जाता हैं।  इस र ग के लिण पिीय ों पर बैंगनी रोंग की फफूों द के रूप में कदखते हैं ज बाद में पीले –हरे रोंग के ह जाते हैं  इससे पिीयााँ एवों बीज के डोंठल सुखकर नष्ट ह जाते हैं।  लाल प्याज कु छ हद तक इस र ग के प्रकत र धक हैं।
  • 22. प्रबंधन  ज लहसुन/प्याज के कों द बीज की फसल के कलए प्रय ग करे उन्हे 10-12 कदन ों तक धूप में रखे कजससे फफूों द खत्म ह जाए।  खाद का प्रय ग सोंतुकलत मात्रा में करे और कनरोंतर सही समय पर कसोंचाई करते रहे।  इस र ग की र कथाम के कलए जीनेब 0.2 प्रकतित या के राथेन 0.1 प्रकतित घ ल इस फफूों द क कनयोंकत्रत करने के कलए अच्छा ह ता हैं ।
  • 23. सफ़े द फफूं द रोग  इस र ग के प्रक प ह ने पर पकिय ों के कसरे पीले पड़ने लगते हैं और पकियााँ सुख जाती हैं।  िल्क कों द तथा जड़ सड़ने लगती हैं और कों द मुलायम ह जाता हैं।  सफ़े द फू लमय या कपास के समान गहरे काले स्क्ल रेकिया के साथ सोंक्रमण कों द पर देखाई देता हैं। प्रबंधन  बुवाई के समय टराइक डमार कवररडी का प्रय ग खेत मे करे।  बीज क कथरम 2 ग्राम प्रकत ककग्रा बीज कक दर से उपचारीत कर के ही ब ए।  जमीन क काबेन्डाजीम, थाय कफनेट कमथाइल या बेन मील (0.1 %) से उपचररत करने से इस र ग का कनयोंकत्रत ह ता हैं।
  • 24. खेत तथा गोदाम में होने िाले रोग : आधार विगलन रोग  इस र ग के िुरुआती लिण पकिय ों में पीलापन पौधे की वृब्जद्ध में कमी और बाद में पिीयााँ सूखने लगती हैं तथा नीचे की तरफ मुड़ जाती हैं।  िुरुआती अवस्था में पौधे की जड़ गुलाबी पड़ जाती हैं और सूखने लगती हैं।  फसल के अोंत में कों द सड़ना िुरू ह जाता हैं और पौधा पूरी तरह मर जाता हैं।  जुलाई से अगस्त के महीने में जब तापमान 35- 400C ह ता हैं त ये र ग भोंडारण में भी कदखाई देता हैं।
  • 25. प्रबंधन  यह र ग भूकम जकनत र ग हैं त कनयोंकत्रत करना थ ड़ा मुब्जिल ह ता हैं। कमकित खेती तथा फसल चक्र इस र ग क कम करता हैं।  कमट्टी सौरीकरण (Soil Solarization) : नसररी बेड क बुवाई से 30 कदन पूवर 250 गेज की कबना छे द वाले प कलथीन से ढक दें एवों प कलथीन के ककनारे पर कमट्टी चढ़ा दें। यह नसररी के सूत्रकृ कम, कवक, भूकम के कीट कनयोंत्रण के अकत उिम तरीका हैं। इस से फ स्फ रस की आपूकतर भी आसानी से ह ती हैं।  बीज क कथरम या के प्टान 2 ग्राम /कक ग्रा बीज की दर से उपचाररत करे।
  • 26. नेक रॉट  यह र ग कन्द की गदरन के चार और मुलायम िल्क के रूप में कदखाई देता हैं और कभी कभी ज्यादा प्रक प ह ने पर घाव भी ह जाते हैं।  एक कनकित ककनारा/ घेरा र ग ग्रकसत तथा र ग रकहत िल्क क अलग अलग बाोंटता हैं।  सोंक्रकमत कन्द भूरे से धूसर रोंग का ह ता हैं।  जब ये धूसर रोंग की फफूों द देखाई देने से पहले कन्द की ऊपरी िल्क हटा देनी चाकहए।
  • 27. प्रबंधन  र ग के फै लने का मुख्य: कारण कन्द का रसीला भाग ह ता हैं अत: पौधे का ऊपरी भाग तब काटे जब व पूरी तरह सुख जाए।  समान्यत: लाल रोंग की ककस्मे सफ़े द ककस्म ों के मुक़ाबले अकधक प्रकतर धी ह ती हैं।  खेत में मध्य जुलाई के बाद नत्रजन खाद न डालें।  फसल कटाई कु छ कदन पहले कसचाई बोंद कर दे कजससे पौधे के जमीन से ऊपर का भाग सुख जाए।  कटाई से पहले उपर के भाग क अच्छी तरह सूखने दे।  अनुकचत ढोंग से उपचाररत कन्द का भोंडारण न करे।
  • 28. भूरी सड़न  प्याज के बीच वाले कहस्से (िल्ककन्द) मे गहरे भूरे रोंग का धब्बा इस र ग का मुख्य लिण हैं।  िल्क कों द गहरा भूरा ह कर सड़ने लगता हैं।  सड़न अोंदर से िुरू ह कर पूरे कों द मे फ़े ल जाती हैं।  कभी कभी पूरा कों द सडने लगता हैं और भोंडारण मे बुरी गोंद फ़े ल जाती हैं।
  • 29. प्रबंधन  प्याज के र गी कों द ह भोंडारण से पहले छााँटकर बाहर कनकाल दें।  प्याज की फसल में बुवाई से लेकर कटाई तक हल्की कसचाई करे।  कों द की गदरन लगभग 25-30 से मी उपर से काटने पर जीवाब्जिक सोंक्रामण कम ह ता हैं।  फसल कटाई के एक महीने पहले आइस प्र पाइल कफ़नाइल काबारमैट 20 कम ली प्रकत लीटर की दर से खेत मे कछड़काव करे।
  • 30. प्याज़ एिं लहसुन के उन्नत भंडारण विवध वनम्नवलखखत कु छ विवधयााँ प्याज और लहसुन के लंबे भंडारण में सहायता करेगी :  जब प्याज खेत में पूरी तरह सुख जाए त उसके बाद कु छ कदन ों तक भोंडारण से बाहर सुरकित रखे कजससे प्याज में उपलब्ध अकधक मात्रा में नमी बाहर कनकाल जाए।  प्याज तथा लहसुन क अोंधकार, ठों डे और अच्छी वायु सोंचार के साथ सुखी जगह भोंडारण करना चाकहए तथा सीधी धूप लगने से बचाना चाकहए।  प्याज क 40-600F तथा 65-70 प्रकतित आर्द्रता पर ही भोंडाररत करे।  प्याज क प्लाब्जिक के ब रे में रखकर भोंडारण मे न रखे क्य ोंकक कम वायु सोंचार के कारण इसकी भोंडारण आयु घट जाती हैं।  कभी भी इनक आलू के साथ भोंडारण में न रखे क्य ोंकक आलू से नमी कनकलती हैं ज प्याज क खराब कर सकती हैं।  कटे हुए, चुटीले, और र गी कों द क भोंडार में नही रखना चाकहए तथा खराब कों द क फें क दे।