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F30 Mukundamala Part 4

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F30 Mukundamala Part 4

  1. 1. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <1> Sanskrit -21 F- 30 –मुक ु न्दमालास्तोत्रम् Part 4 30-10-2021 पीताम्बरं करविराजितशङ्खचक्रकौमोदकीसरससिं करुणासमुद्रम्| राधासहायमततसुन्दरमन्दहासं िातालयेशमतिशं हृदद भाियासम ||
  2. 2. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <2> श्रीिल्लभेतत िरदेतत दयापरेतत भक्तवियेतत भिलुण्ठिकोविदेतत । िाथेतत िागशयिेतत िगजन्ििासे- त्यालावपिं िततददिं (िततपदं) क ु रु मां मुक ु न्द ॥ १॥ ियतु ियतु देिो, देिकीिन्दिोऽयं ियतु ियतु कृ ष्णो ,िृजष्णिंशिदीपः । ियतु ियतु मेघ,श्यामलः कोमलाङ्गो ियतु ियतु पृथ्िी,भारिाशो मुक ु न्दः ॥ २॥ मुक ु न्द मूर्धिाा िणणपत्य याचे भिन्तमेकान्तसमयन्तमथाम् । अविस्मृततस्त्िच्चरणारविन्दे भिे भिे मेऽस्तु भित्िसादात् ॥ ३॥ िाहं िन्दे ,ति चरणयो,र्दािन्र्दिमर्दिन्र्दिहेतोः क ु म्भीपाक ं ,गुरुमवप हरे ,िारक ं िापिेतुम् । रम्या रामा, मृदुतिुलता, िन्दिे िावप रन्तुं भािे भािे ,हृदयभििे ,भाियेयं भिन्तम ् ॥ ४॥ Quick Recap-1-4
  3. 3. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <3> िास्था धमे ,ि िसुतिचये. िैि कामोपभोगे यर्द भाव्यं तर्द, भितु भगिन्पूिाकमाािुरूपम ् । एतत्िाथ्यं, मम बहुमतं, िन्मिन्मान्तरेऽवप त्ित्पादाम्भो,रुहयुगगता ,तिश्चला भजक्तरस्तु ॥ ५॥ ददवि िा भुवि िा ममास्तु िासो िरक े िा िरकान्तक िकामम ् । अिधीररतशारदारविन्दौ चरणौ ते मरणेऽवप चचन्तयासम ॥ ६॥ कृ ष्ण त्िदीयपदपङ्किपञ्िरान्तं अर्दयैि मे विशतु मािस रािहंसः । िाणियाणसमये कफिातवपत्ैः कण्ठािरोधिविधौ स्मरणं क ु तस्ते ॥ ७॥ ५-७
  4. 4. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <4> चचन्तयासम हररमेि सन्ततं मन्दहासमुददताििाम्बुिं िन्दगोपतियं परात्परं िारदाददमुतििृन्दिजन्दतम् ॥ ८॥ करचरणसरोिे, काजन्तमन्िेत्रमीिे श्रममुवि भुििी,चचव्याक ु लेऽगाधमागे । हररसरसस विगाह्या,पीय तेिो िलौघं भिमरुपररणखन्िः, क्लेशमर्दय त्यिासम ॥ ९॥ सरससिियिे सशङ्खचक्र े मुरसभदद मा विरमस्ि(विरमेह) चचत् रन्तुम् । var सुखतरमपरं ि िातु िािे var सुखकर हररचरणस्मरणामृतेि तुल्यम् ॥ १०॥॥ ८- १०
  5. 5. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <5> मा भीमान्दमिो विचचन्त्य बहुधा यामीजश्चरं यातिाः var माभैमान्दमिो िामी िः िभिजन्त पापररपिः स्िामी ििु श्रीधरः । आलस्यं व्यपिीय भजक्तसुलभं र्धयायस्ि िारायणं लोकस्य व्यसिापिोदिकरो दासस्य ककं ि क्षमः ॥ ११॥॥ भििलचधगतािां र्दिन्र्दििाताहतािां सुतदुदहतृकलत्रत्राणभाराददातािाम् । वििमविियतोये मज्ितामप्लिािां भितु शरणमेको विष्णुपोतो िराणाम ् ॥ १२॥ भििलचधमगाधं दुस्तरं तिस्तरेयं कथमहसमतत चेतो मा स्म गाः कातरत्िम ् । सरससिदृसश देिे तारकी भजक्तरेका var तािकी िरकसभदद तििण्णा तारतयष्यत्यिश्यम् ॥ १३॥॥ ११- १३
  6. 6. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <6> तृष्णातोये मदिपििोर्दधूतमोहोसमामाले दारािते तियसहिग्राहसङ्घाक ु ले च । संसाराख्ये महतत िलधौ मज्ितां िजस्त्रधामि् पादाम्भोिे िरद भितो भजक्तिािं ियच्छ ॥ १४॥॥ माद्राक्षं क्षीणपुण्यान्क्षणमवप भितो भजक्तहीिान्पदाब्िे माश्रौिं श्राव्यबन्धं ति चररतमपास्यान्यदाख्याििातम् । मास्मािं माधि त्िामवप भुििपते चेतसापह्िुिािाि् माभूिं त्ित्सपयाा व्यततकर रदहतो िन्मिन्मान्तरेऽवप ॥ १५॥ जिह्िे कीताय क े शिं मुरररपुं चेतो भि श्रीधरं पाणणर्दिन्र्दि समचायाच्युतकथाः श्रोत्रर्दिय त्िं शृणु । कृ ष्णं लोकय लोचिर्दिय हरेगाच्छाङ्तियुग्मालयं जिि िाण मुक ु न्दपादतुलसीं मूधाि् िमाधोक्षिम् ॥ १६॥॥ १४- १६
  7. 7. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <7> तृष्णातोये मदिपििोर्दधूतमोहोसमामाले दारािते तियसहिग्राहसङ्घाक ु ले च । संसाराख्ये महतत िलधौ मज्ितां िजस्त्रधामि् पादाम्भोिे िरद भितो भजक्तिािं ियच्छ ॥ १४॥॥ Poll- 1 तृष्णातोये7 मदि-पिि- उर्दधूत-मोह-उसमा-माले 7 दारा-आिते 7 तिय-सहि-ग्राहसङ्घ-आक ु ले7 च । संसार-आख्ये7 महतत 7 िलधौ 7 मज्ितां ि: त्रत्रधामि् पादाम्भोिे 7 िरद भितो भजक्तिािं ियच्छ ॥ १४॥॥ १४
  8. 8. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <8> तृष्णातोये7 मदि-पिि- उर्दधूत-मोह-उसमा-माले 7 दारा-आिते तिय-सहि-ग्राहसङ्घ-आक ु ले7 च । संसार-आख्ये7 महतत 7 िलधौ 7 मज्ितां7 ि:(अस्माि्) त्रत्रधामि्8 पादाम्भोिे7 िरद8 भित:6 भजक्तिािं ियच्छ ॥ १४॥॥ हे त्रत्रधामि्8 िरद8 तृष्णातोये7 मदि-पिि- उर्दधूत-मोह-उसमा-माले 7 दारा-आिते तिय-सहि-ग्राहसङ्घ-आक ु ले7 च । संसार-आख्ये7 महतत 7 िलधौ 7 मज्ितां7 ि:(अस्माि्) भित:6 पादाम्भोिे7 (त्िं) भजक्तिािं ियच्छ
  9. 9. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <9> िाररिगाः Sea or ocean (15), Specific oceans (two listed) (१.१०.५१८) समुद्रोऽजब्धरक ू पारः पारािारः सररत्पततः mark अथ िाररिगाः (१.१०.५१९) उदन्िािुदचधः ससन्धुः सरस्िान्सागरोऽणािः (१.१०.५२०) रत्िाकरो िलतिचधयाादःपततरपाम्पततः (१.१०.५२१) तस्य िभेदाः क्षीरोदो लिणोदस्तथाऽपरे Water (27), watery (2) (१.१०.५२२) आपः स्त्री भूजम्ि िािाारर ससललं कमलं िलम् (१.१०.५२३) पयः कीलालममृतं िीििं भुििं ििम् (१.१०.५२४) कबन्धमुदक ं पाथः पुष्करं सिातोमुखम ् (१.१०.५२५) अम्भोऽणास्तोयपािीयिीरक्षीराम्बुशम्बरम् (१.१०.५२६) मेघपुष्पं घिरसजस्त्रिु र्दिे आप्यमम्मयम् Wave (4), Big wave (2), Whirlpool (1), Droplet (4) (१.१०.५२७) भङ्गस्तरङ्ग ऊसमािाा जस्त्रयां िीचचरथोसमािु (१.१०.५२८) महत्सूल्लोलकल्लोलौ स्यादाितोऽम्भसां भ्रमः (१.१०.५२९) पृिजन्तत्रबन्दुपृिताः पुमांसो वििुिः जस्त्रयाम् Circular motion in a water drain (4), Bank or shore (5) (१.१०.५३०) चक्राणण पुटभेदाः स्युभ्रामाश्च िलतिगामाः (१.१०.५३१) क ू लं रोधश्च तीरं च ितीरं च तटं त्रत्रिु
  10. 10. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <10> अस्त्युत्तरस्तययां दिशि िेवतय्मय दिमयलयो नयम नगयधिरयजः। पूवयापरौ तोयननिी वगयह्य स्स्तितः पृधिव्यय इव मयनिण्डः ॥ अन्वय उत्रस्यां ददसश देितात्मा दहमालयः िाम िगाचधरािः अजस्त, (यः) पूिाापरौ तोयतिधी िगाह्य पृचथव्याः मािदण्डः इि जस्थतः (अजस्त)। अस्स्तत = है। उत्रस्यां ददसश = उत्र ददशा में। देितात्मा = देिगण हैं आत्मा जिसकी। दहमालयः िाम = दहमालय िामका िगाचधरािः = पिातों का पूिाापरौ = पूिा और पजश्चम तोयतिधी = समुद्रों को। वगयह्य = अिगाहि करक े ; िविष्ट होकर। जस्थतः = जस्थत है। पृचथव्याः = पृथ्िी क े मािदण्डः इिे = मापिे क े दण्ड क े समाि
  11. 11. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <11> हे त्रत्रधामि्8 तृष्णातोये7 मदि-पिि- उर्दधूत-मोह-उसमा-माले 7 दारा-आिते तिय-सहि-ग्राहसङ्घ-आक ु ले7 च । संसार-आख्ये7 महतत 7 िलधौ 7 मज्ितां7 ि:(अस्माि्) िरद8 भित:6 पादाम्भोिे7 (त्िं) भजक्तिािं ियच्छ O Lord of the three worlds, we are drowning in the vast ocean of saṁsāra, which is filled with the waters of material hankering, with many waves of illusion whipped up by the winds of lust, with whirlpools of wives, and with float(bask) of crocodiles and other sea monsters who are our sons and brothers. O giver of all benedictions, please grant me a place on the boat of devotion that is Your lotus feet.
  12. 12. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <12> S S S S I I I I I S S I S S I तृष्णातोये ,मदिपििो,र्दधूतमोहोसमामाले दारािते ,तियसहि,ग्राहसङ्घाक ु ले च । म भ न त त संसाराख्ये ,महतत िलधौ, मज्ितां िजस्त्रधामि् पादाम्भोिे, िरद भितो .भजक्तिािं ियच्छ ॥ १४॥॥ म भ न त त मन्दाक्रान्ता िलचधिडगैम्भौितौ तार्दगुरु चेत्॥३.९७ छन्दस ् - 17-अत्यजष्ट य I S S र S I S त S S I भ S I I ज I S I स I I S न I I I म S S S गु गु गु गु गु गु
  13. 13. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <13> मा द्राक्षं क्षीणपुण्यान्क्षणमवप भितो भजक्तहीिान्पदाब्िे मा श्रौिं श्राव्यबन्धं (श्राव्यबर्दधं )ति चररतमपास्यान्यदाख्याििातम ् । मा स्मािं माधि त्िामवप भुििपते चेतसापह्िुिािाि ् मा भूिं त्ित्सपयाा व्यततकर रदहतो िन्मिन्मान्तरेऽवप ॥ १५॥ मा द्राक्षं क्षीण-पुण्याि ् क्षणम ्अवप भित:6 भजक्तहीिाि ् पदाब्िे मा श्रौिं श्राव्यबन्धं ति 6 चररतम ्अपास्य अन्यत्आख्याि- िातम ् । मा स्मािं माधि 8 त्िाम्अवप भुििपते 8 चेतसा अपह्िुिािाि् मा भूिं त्ित्सपयाा व्यततकर िन्मिन्मान्तरे अवप ॥ १५॥
  14. 14. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <14> मा द्राक्षं क्षीण-पुण्याि्2 क्षणम ्2 अवप भित:6 भजक्तहीिाि्2 पदाब्िे 7 मा श्रौिं श्राव्यबन्धं ति 6 चररतम्अपास्य अन्यत्आख्याि-िातम् । मा स्मािं माधि 8 त्िाम ्2 अवप भुििपते 8 चेतसा3 अपह्िुिािाि्2 मा भूिं त्ित्सपयाा व्यततकर रदहत: िन्मिन्मान्तरे अवप ॥ १५॥ हे माधि 8 भित:6 पदाब्िे 7 भजक्तहीिाि्2 क्षीण-पुण्याि्2 (अहं) मा द्राक्षं ति 6 श्राव्यबन्धं चररतम्अपास्य अन्यत्आख्याि-िातम् (अहं) ) मा श्रौिं हे भुििपते 8 त्िाम ्2 चेतसा3 अवप अपह्िुिािाि्2 (अहं) मा स्मािं िन्मिन्मान्तरे अवप त्ित्सपयाा व्यततकर रदहत: (अहं) मा भूिं
  15. 15. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <15> हे माधि 8 (अहं)भित:6 पदाब्िे 7 भजक्तहीिाि्2 क्षीण-पुण्याि्2 (मया) मा द्राक्षं (अहं) ति 6 श्राव्यबन्धं चररतम्अपास्य अन्यत्आख्याि-िातम् (मया) मा श्रौिं हे भुििपते 8 (अहं) त्िाम ्2 चेतसा3 अवप अपह्िुिािाि्2 मा स्मािं (अहं) िन्मिन्मान्तरे अवप त्ित्सपयाा व्यततकर रदहत: मा भूिं Oh Madhava! May I not see(behold) those who are not devoted to your Lotus-feet and bereft of all punya May I not listen to the topics other than those which is your deeds which are worth hearing Oh Lord of the Universe ! May I not remember those who avoid thinking of you May I not become a person who is devoid of an opportunity of your service ,in all my births
  16. 16. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <16> S S S S I S S I I I I I I S S I S S I S S माद्राक्षं क्षीणपुण्यान्क्षणमवप भितो भजक्तहीिान्पदाब्िे माश्रौिं श्राव्यबन्धं (श्राव्यबर्दधं) ति चररतमपास्यान्यदाख्याििातम ् । म र भ न य य य मास्मािं (मास्िाक्षं) माधि त्िामवप भुििपते चेतसापह्िुिािाि् माभूिं त्ित्सपयाापररकररदहतो िन्मिन्मान्तरेऽवप ॥ १५॥ 21- िकृ तत य I S S र S I S त S S I भ S I I ज I S I स I I S न I I I म S S S म्रभ्िैयाािां त्रयेण त्रत्रमुतियततयुता स्रग्धरा कीततातेयम् ॥ ३.१०४ ॥
  17. 17. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <17> जिह्िे कीताय क े शिं मुरररपुं चेतो भि श्रीधरं पाणणर्दिन्र्दि समचायाच्युतकथाः श्रोत्रर्दिय त्िं शृणु । कृ ष्णं लोकय लोचिर्दिय हरेगाच्छाङ्तियुग्मालयं जिि िाण मुक ु न्दपादतुलसीं मूधाि् िमाधोक्षिम् ॥ १६॥॥ जिह्िे8 कीताय क े शिं2 मुरररपुं2 चेत: 8 भि श्रीधरं2 पाणणर्दिन्र्दि8 समचाय अच्युतकथाः श्रोत्रर्दिय 8 त्िं1 शृणु । कृ ष्णं 2 लोकय लोचिर्दिय 8 हरे: गच्छ अङ्तियुग्मालयं जिि िाण 8 मुक ु न्दपादतुलसीं मूधाि्8 िम अधोक्षिम् ॥ १६॥॥ Poll- 2
  18. 18. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <18> जिह्िे8 कीताय क े शिं2 मुरररपुं2 चेत: 8 भि श्रीधरं2 पाणणर्दिन्र्दि8 समचाय अच्युतकथाः श्रोत्रर्दिय 8 त्िं1 शृणु । कृ ष्णं लोकय लोचिर्दिय 8 हरे: गच्छ अङ्तियुग्मालयं जिि िाण 8 मुक ु न्दपादतुलसीं मूधाि्8 िम अधोक्षिम् ॥ १६॥॥ हे जिह्िे8 (त्िं1) मुरररपुं2 क े शिं2 कीताय हे चेत: 8 (त्िं1) श्रीधरं2 भि हे पाणणर्दिन्र्दि8 (त्िं1) समचाय हे श्रोत्रर्दिय 8 त्िं1 अच्युतकथाः शृणु । हे लोचिर्दिय 8 (त्िं1) कृ ष्णं2 लोकय हे अङ्तियुग्म8 (त्िं1) हरे:6 आलयं 2 गच्छ हे िाण 8 (त्िं1) मुक ु न्दपादतुलसीं 2 जिि हे मूधाि्8 (त्िं1) अधोक्षिम्2 िम ॥ १६॥॥
  19. 19. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <19> हे जिह्िे8 (त्िं1) मुरररपुं2 क े शिं2 कीताय -Oh Tongue, You Chant the glory of The enemy of Mura . Krishna हे चेत: 8 (त्िं1) श्रीधरं2 भि -Oh Heart ,You serve Sridhara the consort of Lakshmi हे पाणणर्दिन्र्दि8 (त्िं1) समचाय -Oh pair of Hands, You worship the Lord हे श्रोत्रर्दिय 8 त्िं1 अच्युतकथाः शृणु ।- Oh Pair of ears,You listen to the stories of Achyuta हे लोचिर्दिय 8 (त्िं1) कृ ष्णं2 लोकय –Oh pair of eyes ,you look at Krishna हे अङ्तियुग्म8 (त्िं1) हरे:6 आलयं 2 गच्छ – Oh Pair of Legs, You go to the abode(temple) of Hari हे िाण 8 (त्िं1) मुक ु न्दपादतुलसीं 2 जिि- Oh Nose,You smell the Tulasi offered at the feet of Mukunda हे मूधाि्8 (त्िं1) अधोक्षिम ्2 िम ॥ १६॥॥ -Oh head, You bow down before Adokshaja
  20. 20. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <20> S S S I I S I S I I I S S S I S S I जिह्िे कीताय क े शिं मुरररपुं ,चेतो भि श्रीधरं पाणणर्दिन्र्दि समचायाच्युतकथाः ,श्रोत्रर्दिय त्िं शृणु । म स ज स त त कृ ष्णं लोकय लोचिर्दिय हरे,गाच्छाङ्तियुग्मालयं जिि िाण मुक ु न्दपादतुलसीं ,मूधाि् िमाधोक्षिम् ॥ १६॥॥ म स ज स त त सूयााश्िैमासिस्तताः सगुरिः, शादूालविक्रीडडतम्॥ ३.१०१ ॥ പന്ത്രണ്ടാൽ മസജം സതം തഗുരുവും ശാർദ്ദൂ ലവിന്ത്രീഡിതം -217 19- अततधृतत य I S S र S I S त S S I भ S I I ज I S I स I I S न I I I म S S S गु गु गु
  21. 21. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <21> हे (भो) लोकाः श्रुणुत िसूततमरणव्याधेजश्चककत्सासममां योगज्ाः समुदाहरजन्त मुियो यां याज्िल्क्यादयः । अन्तज्योततरमेयमेकममृतं कृ ष्णाख्यमापीयतां तत्पीतं (यजत्पतं)परमौिधं वितिुते तििााणमत्यजन्तकम् ॥ १७॥॥ हे मत्यााः परमं दहतं श्रुणुत िो िक्ष्यासम सङ्क्षेपतः संसाराणािमापदूसमाबहुलं सम्यक् िविश्य जस्थताः । िािाज्ािमपास्य चेतसस िमो िारायणायेत्यमुं मन्त्रं सिणिं िणामसदहतं िाितायर्धिं मुहुः ॥ १८॥ पृथ्िीरेणुरणुः पयांसस कणणकाः फल्गुस्फ ु सलङ्गोऽिल - स्तेिो तिःश्िसिं मरुत् तिुतरं रन्रं सुसूक्ष्मं िभः । क्षुद्रा रुद्रवपतामहिभृतयः कीटाः समस्ताः सुरा दृष्टे यत्र स तािको विियते ᳚ भूमािधूतािचधः ॥ १९॥॥ का १२॥ १७-१९
  22. 22. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <22> हे (भो) लोकाः श्रुणुत िसूततमरणव्याधेजश्चककत्सासममां योगज्ाः समुदाहरजन्त मुियो यां याज्िल्क्यादयः । अन्तज्योततरमेयमेकममृतं कृ ष्णाख्यमापीयतां तत्पीतं परमौिधं वितिुते तििााणमत्यजन्तकम् ॥ १७॥॥ हे (भो) लोकाः8 श्रुणुत िसूतत-मरण-व्याधे: चचककत्साम् इमां योगज्ाः समुदाहरजन्त मुिय: यां याज्िल्क्यादयः । अन्तज्योतत: अमेयम् एकम ् अमृतं कृ ष्णाख्यम ्अपीयतां तत्पीतं (यजत्पतं) परमौिधं वितिुते तििााणम ् अत्यजन्तकम् ॥ १७॥॥ १७
  23. 23. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <23> हे (भो) लोकाः8 श्रुणुत िसूतत-मरण-व्याधे:6 चचककत्साम्2 इमां2 योगज्ाः1 समुदाहरजन्त मुिय:1 यां 2 याज्िल्क्यादयः 1 । अन्तज्योतत: अमेयम् एकम ् अमृतं कृ ष्णाख्यम ्अपीयतां तत् पीतं परमौिधं वितिुते तििााणम ् अत्यजन्तकम् ॥ १७॥॥ हे (भो) लोकाः8 (यूयम्1 ) इमां2 िसूतत-मरण-व्याधे:6 चचककत्साम्2 श्रुणुत यां 2 याज्िल्क्यादयः 1 योगज्ाः1 मुिय:1 समुदाहरजन्त अन्तज्योतत: अमेयम् एकम ् अमृतं कृ ष्णाख्यम ्अपीयतां तत्परमौिधं पीतं अत्यजन्तकम्तििााणम ्वितिुते १७
  24. 24. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <24> हे (भो) लोकाः8 (यूयम्1 ) इमां2 िसूतत-मरण-व्याधे:6 चचककत्साम्2 श्रुणुत यां 2 याज्िल्क्यादयः 1 योगज्ाः1 मुिय:1 समुदाहरजन्त अन्तज्योतत: अमेयम् एकम ् अमृतं कृ ष्णाख्यम ्अपीयतां तत्परमौिधं पीतं अत्यजन्तकम्तििााणम ्वितिुते O people, You listen to this treatment for the disease of birth and death,which was recommended by the Munis and Yogis like Yājñavalkya and others Drink this eternal inner light which is not measurable and the only elixir named Krishna. This supreme medicine, when drunk bestows complete and final liberation. १७
  25. 25. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <25> S S S I I S I S I I I S S S I S S I हे लोकाः श्रुणुत िसूततमरणव्याधेजश्चककत्सासममां म स ज स त त योगज्ाः समुदाहरजन्त मुियो यां याज्िल्क्यादयः । अन्तज्योततरमेयमेकममृतं कृ ष्णाख्यमापीयतां तत्पीतं परमौिधं वितिुते तििााणमत्यजन्तकम् ॥ १७॥॥ म स ज स त त सूयााश्िैमासिस्तताः सगुरिः, शादूालविक्रीडडतम ्॥ ३.१०१ ॥ പന്ത്രണ്ടാൽ മസജം സതം തഗുരുവും ശാർദ്ദൂ ലവിന്ത്രീഡിതം -217 गु य I S S र S I S त S S I भ S I I ज I S I स I I S न I I I म S S S 19-अततधृतत गु गु १७
  26. 26. Mr Nanda Mohan Shenoy CDPSE, CISA ,CAIIB <26> 19-अततधृतत Home Work

Editor's Notes

  • https://sanskritdocuments.org/doc_vishhnu/mukundamAlA.html?lang=sa
  •  tṛṣṇā - thirst; toye - whose water; madana - of Cupid; pavana - by the winds; uddhūta - stirred up; moha - illusion; ūrmi - of waves; māle - rows; dāra - wife; āvarte - whose whirlpool; tanaya - sons; sahaja - and brothers; grāha - of crocodile; saṅgha - with hordes; ākule - crowded; ca - and; saṁsāra-ākhye - called saṁsāra; mahati - vast; jaladhau - in the ocean; majjatām - who are drowning; naḥ - to us; tri-dhāman - O Lord of the three worlds; pāda - to the feet; ambhoje - lotuslike; vara-da - O giver of benedictions; bhavataḥ - of Your good self; bhakti - of devotion; nāvam - the boat; prayaccha - please bestow.
  •  tṛṣṇā - thirst; toye - whose water; madana - of Cupid; pavana - by the winds; uddhūta - stirred up; moha - illusion; ūrmi - of waves; māle - rows; dāra - wife; āvarte - whose whirlpool; tanaya - sons; sahaja - and brothers; grāha - of sharks; saṅgha - with hordes; ākule - crowded; ca - and; saṁsāra-ākhye - called saṁsāra; mahati - vast; jaladhau - in the ocean; majjatām - who are drowning; naḥ - to us; tri-dhāman - O Lord of the three worlds; pāda - to the feet; ambhoje - lotuslike; vara-da - O giver of benedictions; bhavataḥ - of Your good self; bhakti - of devotion; nāvam - the boat; prayaccha - please bestow.
    http://sanskritabhyas.in/%E0%A4%AE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9C%E0%A4%A4%E0%A5%8D-Shabd-Roop
  • https://sanskritdocuments.org/doc_z_misc_major_works/amarfin1.html
  •  विना वेङ्कटेशं न नाथो न नाथः सदा वेङ्कटेशं स्मरामि स्मरामि । हरे वेङ्कटेश प्रसीद प्रसीद प्रियं वेङ्कटेश प्रयच्छ प्रयच्छ ॥
    अहं दूरदस्ते पदां भोजयुग्म प्रणामेच्छया गत्य सेवां करोमि । सकृत्सेवया नित्य सेवाफलं त्वं प्रयच्छ पयच्छ प्रभो वेङ्कटेश ॥
    http://sanskritabhyas.in/%E0%A4%AE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9C%E0%A4%A4%E0%A5%8D-Shabd-Roop
  •  mā drākṣam - may I not look at; kṣīṇa - depleted; puṇyān - whose credit of piety; kṣaṇam - a moment; api - even; bhavataḥ - Your; bhakti - devotion; hīnān - devoid of; pada-abje - for the lotus feet; mā śrauṣam - may I not hear; śrāvya - worth hearing; bandham - compositions about which; tava - Your; caritam - pastimes; apāsya - putting aside; anyat - other; ākhyāna - of narrations; jātam - topics; mā śmārṣam - may I not remember; mādhava - O Mādhava; tvām - Your; api - indeed; bhuvana - of the world; pate - O master; cetasā - mentally; apahnuvānān - those who avoid; mā bhūvam - may I not become; tvat - Your; saparyā - for the personal service; vyatikara - the opportunity; rahitaḥ - devoid of; janma-janma-antare - in repeated rebirths; api - even.
  •  mā drākṣam - may I not look at; kṣīṇa - depleted; puṇyān - whose credit of piety; kṣaṇam - a moment; api - even; bhavataḥ - Your; bhakti - devotion; hīnān - devoid of; pada-abje - for the lotus feet; mā śrauṣam - may I not hear; śrāvya - worth hearing; bandham - compositions about which; tava - Your; caritam - pastimes; apāsya - putting aside; anyat - other; ākhyāna - of narrations; jātam - topics; mā śmārṣam - may I not remember; mādhava - O Mādhava; tvām - Your; api - indeed; bhuvana - of the world; pate - O master; cetasā - mentally; apahnuvānān - those who avoid; mā bhūvam - may I not become; tvat - Your; saparyā - for the personal service; vyatikara - the opportunity; rahitaḥ - devoid of; janma-janma-antare - in repeated rebirths; api - even.
  •  mā drākṣam - may I not look at; kṣīṇa - depleted; puṇyān - whose credit of piety; kṣaṇam - a moment; api - even; bhavataḥ - Your; bhakti - devotion; hīnān - devoid of; pada-abje - for the lotus feet; mā śrauṣam - may I not hear; śrāvya - worth hearing; bandham - compositions about which; tava - Your; caritam - pastimes; apāsya - putting aside; anyat - other; ākhyāna - of narrations; jātam - topics; mā śmārṣam - may I not remember; mādhava - O Mādhava; tvām - Your; api - indeed; bhuvana - of the world; pate - O master; cetasā - mentally; apahnuvānān - those who avoid; mā bhūvam - may I not become; tvat - Your; saparyā - for the personal service; vyatikara - the opportunity; rahitaḥ - devoid of; janma-janma-antare - in repeated rebirths; api - even.
  •  jihve - O tongue; kīrtaya - chant the praise; keśavam - of Lord Keśava; mura-ripum - the enemy of Mura; cetaḥ - O mind; bhaja - worship; śrī-dharam - the Lord of Śrī, the goddess of fortune; pāṇi-dvandva - O two hands; samarcaya - serve; acyuta-kathāḥ - topics of Lord Acyuta; śrotra-dvaya - O two ears; tvam - you; śṛṇu - just hear; kṛṣṇam - at Kṛṣṇa; lokaya - look; locana-dvaya - O two eyes; hareḥ - of Lord Hari; gaccha - go to; aṅghri-yugma - O two feet; ālayam - to the residence; jighra - smell; ghrāṇa - O nose; mukunda - of Lord Mukunda; pāda - at the feet; tulasīm - the tulasī flowers; mūrdhan - O head; nama - bow down; adhokṣajam - to Lord Adhokṣaja.
  •  jihve - O tongue; kīrtaya - chant the praise; keśavam - of Lord Keśava; mura-ripum - the enemy of Mura; cetaḥ - O mind; bhaja - worship; śrī-dharam - the Lord of Śrī, the goddess of fortune; pāṇi-dvandva - O two hands; samarcaya - serve; acyuta-kathāḥ - topics of Lord Acyuta; śrotra-dvaya - O two ears; tvam - you; śṛṇu - just hear; kṛṣṇam - at Kṛṣṇa; lokaya - look; locana-dvaya - O two eyes; hareḥ - of Lord Hari; gaccha - go to; aṅghri-yugma - O two feet; ālayam - to the residence; jighra - smell; ghrāṇa - O nose; mukunda - of Lord Mukunda; pāda - at the feet; tulasīm - the tulasī flowers; mūrdhan - O head; nama - bow down; adhokṣajam - to Lord Adhokṣaja.
  •  jihve - O tongue; kīrtaya - chant the praise; keśavam - of Lord Keśava; mura-ripum - the enemy of Mura; cetaḥ - O mind; bhaja - worship; śrī-dharam - the Lord of Śrī, the goddess of fortune; pāṇi-dvandva - O two hands; samarcaya - serve; acyuta-kathāḥ - topics of Lord Acyuta; śrotra-dvaya - O two ears; tvam - you; śṛṇu - just hear; kṛṣṇam - at Kṛṣṇa; lokaya - look; locana-dvaya - O two eyes; hareḥ - of Lord Hari; gaccha - go to; aṅghri-yugma - O two feet; ālayam - to the residence; jighra - smell; ghrāṇa - O nose; mukunda - of Lord Mukunda; pāda - at the feet; tulasīm - the tulasī flowers; mūrdhan - O head; nama - bow down; adhokṣajam - to Lord Adhokṣaja.
  •  he lokāḥ - O people of the world; śṛṇuta - just hear; prasūti - of birth; maraṇa - and death; vyādheḥ - for the disease; cikitsām - about the treatment; imām - this; yoga-jñāḥ - experts in knowledge of mystic yoga; samudāharanti - recommend; munayaḥ - sagacious; yām - which; yājñavalkya-ādayaḥ - such as Yājñavalkya; antaḥ - inner; jyotiḥ - light; ameyam - immeasurable; ekam - only; amṛtam - immortal; kṛṣṇa-ākhyam - the name of Kṛṣṇa; āpīyatām - just drink; tat - it; pītam - being drunk; parama - supreme; auṣadham - medicine; vitanute - bestows; nirvāṇam - liberation; ātyantikam - absolute.
  •  he lokāḥ - O people of the world; śṛṇuta - just hear; prasūti - of birth; maraṇa - and death; vyādheḥ - for the disease; cikitsām - about the treatment; imām - this; yoga-jñāḥ - experts in knowledge of mystic yoga; samudāharanti - recommend; munayaḥ - sagacious; yām - which; yājñavalkya-ādayaḥ - such as Yājñavalkya; antaḥ - inner; jyotiḥ - light; ameyam - immeasurable; ekam - only; amṛtam - immortal; kṛṣṇa-ākhyam - the name of Kṛṣṇa; āpīyatām - just drink; tat - it; pītam - being drunk; parama - supreme; auṣadham - medicine; vitanute - bestows; nirvāṇam - liberation; ātyantikam - absolute.
  •  he lokāḥ - O people of the world; śṛṇuta - just hear; prasūti - of birth; maraṇa - and death; vyādheḥ - for the disease; cikitsām - about the treatment; imām - this; yoga-jñāḥ - experts in knowledge of mystic yoga; samudāharanti - recommend; munayaḥ - sagacious; yām - which; yājñavalkya-ādayaḥ - such as Yājñavalkya; antaḥ - inner; jyotiḥ - light; ameyam - immeasurable; ekam - only; amṛtam - immortal; kṛṣṇa-ākhyam - the name of Kṛṣṇa; āpīyatām - just drink; tat - it; pītam - being drunk; parama - supreme; auṣadham - medicine; vitanute - bestows; nirvāṇam - liberation; ātyantikam - absolute.
  •  he lokāḥ - O people of the world; śṛṇuta - just hear; prasūti - of birth; maraṇa - and death; vyādheḥ - for the disease; cikitsām - about the treatment; imām - this; yoga-jñāḥ - experts in knowledge of mystic yoga; samudāharanti - recommend; munayaḥ - sagacious; yām - which; yājñavalkya-ādayaḥ - such as Yājñavalkya; antaḥ - inner; jyotiḥ - light; ameyam - immeasurable; ekam - only; amṛtam - immortal; kṛṣṇa-ākhyam - the name of Kṛṣṇa; āpīyatām - just drink; tat - it; pītam - being drunk; parama - supreme; auṣadham - medicine; vitanute - bestows; nirvāṇam - liberation; ātyantikam - absolute.
  • pṛthvī - the earth; reṇuḥ - a piece of dust; aṇuḥ - atomic; payāṁsi - the waters (of the oceans); kaṇikāḥ - drops; phalguḥ - tiny; sphuliṅgaḥ - a spark; laghuḥ - insignificant; tejaḥ - the totality of elemental fire; niḥ-śvasanam - a sigh; marut - the wind; tanu-taram - very faint; randhram - a hole; su - very; sūkṣmam - small; nabhaḥ - the ethereal sky; kṣūdrāḥ - petty; rudra - Lord Śiva; pitāmaha - Lord Brahmā; prabhṛtayaḥ - and the like; kīṭāḥ - insects; samastāḥ - all; surāḥ - the demigods; dṛṣṭe - having been seen; yatra - where; saḥ - He; tārakaḥ - the deliverer; vijayate - is victorious; śrī - divine; pāda - from the feet; dhūlī - of dust; kaṇaḥ - a particle.
  • he martyāḥ - O mortals; paramam - supreme; hitam - benefit; śṛṇuta - just hear about; vaḥ - to you; vakṣyāmi - I will tell; saṅkṣepataḥ - in summary; saṁsāra - of the cycle of material existence; arṇavam - the ocean; āpat - of misfortunes; ūrmi - with the waves; bahulam - crowded; samyak - fully; praviśya - having entered; sthitāḥ - situated within; nānā - various; jñānam - knowledge; apāsya - rejecting; cetasi - within your heart; namaḥ - obeisances; nārāyaṇāya - to Lord Nārāyaṇa; iti - thus; amum - this; mantram - chant; sa-praṇavam - together with the syllable om; praṇāma - bowing down; sahitam - also with; prāvartayadhvam - please practice; muhuḥ - continuously.
  • he martyāḥ - O mortals; paramam - supreme; hitam - benefit; śṛṇuta - just hear about; vaḥ - to you; vakṣyāmi - I will tell; saṅkṣepataḥ - in summary; saṁsāra - of the cycle of material existence; arṇavam - the ocean; āpat - of misfortunes; ūrmi - with the waves; bahulam - crowded; samyak - fully; praviśya - having entered; sthitāḥ - situated within; nānā - various; jñānam - knowledge; apāsya - rejecting; cetasi - within your heart; namaḥ - obeisances; nārāyaṇāya - to Lord Nārāyaṇa; iti - thus; amum - this; mantram - chant; sa-praṇavam - together with the syllable om; praṇāma - bowing down; sahitam - also with; prāvartayadhvam - please practice; muhuḥ - continuously.
  • he martyāḥ - O mortals; paramam - supreme; hitam - benefit; śṛṇuta - just hear about; vaḥ - to you; vakṣyāmi - I will tell; saṅkṣepataḥ - in summary; saṁsāra - of the cycle of material existence; arṇavam - the ocean; āpat - of misfortunes; ūrmi - with the waves; bahulam - crowded; samyak - fully; praviśya - having entered; sthitāḥ - situated within; nānā - various; jñānam - knowledge; apāsya - rejecting; cetasi - within your heart; namaḥ - obeisances; nārāyaṇāya - to Lord Nārāyaṇa; iti - thus; amum - this; mantram - chant; sa-praṇavam - together with the syllable om; praṇāma - bowing down; sahitam - also with; prāvartayadhvam - please practice; muhuḥ - continuously.
  • he martyāḥ - O mortals; paramam - supreme; hitam - benefit; śṛṇuta - just hear about; vaḥ - to you; vakṣyāmi - I will tell; saṅkṣepataḥ - in summary; saṁsāra - of the cycle of material existence; arṇavam - the ocean; āpat - of misfortunes; ūrmi - with the waves; bahulam - crowded; samyak - fully; praviśya - having entered; sthitāḥ - situated within; nānā - various; jñānam - knowledge; apāsya - rejecting; cetasi - within your heart; namaḥ - obeisances; nārāyaṇāya - to Lord Nārāyaṇa; iti - thus; amum - this; mantram - chant; sa-praṇavam - together with the syllable om; praṇāma - bowing down; sahitam - also with; prāvartayadhvam - please practice; muhuḥ - continuously.
  • pṛthvī - the earth; reṇuḥ - a piece of dust; aṇuḥ - atomic; payāṁsi - the waters (of the oceans); kaṇikāḥ - drops; phalguḥ - tiny; sphuliṅgaḥ - a spark; laghuḥ - insignificant; tejaḥ - the totality of elemental fire; niḥ-śvasanam - a sigh; marut - the wind; tanu-taram - very faint; randhram - a hole; su - very; sūkṣmam - small; nabhaḥ - the ethereal sky; kṣūdrāḥ - petty; rudra - Lord Śiva; pitāmaha - Lord Brahmā; prabhṛtayaḥ - and the like; kīṭāḥ - insects; samastāḥ - all; surāḥ - the demigods; dṛṣṭe - having been seen; yatra - where; saḥ - He; tārakaḥ - the deliverer; vijayate - is victorious; śrī - divine; pāda - from the feet; dhūlī - of dust; kaṇaḥ - a particle.
  • pṛthvī - the earth; reṇuḥ - a piece of dust; aṇuḥ - atomic; payāṁsi - the waters (of the oceans); kaṇikāḥ - drops; phalguḥ - tiny; sphuliṅgaḥ - a spark; laghuḥ - insignificant; tejaḥ - the totality of elemental fire; niḥ-śvasanam - a sigh; marut - the wind; tanu-taram - very faint; randhram - a hole; su - very; sūkṣmam - small; nabhaḥ - the ethereal sky; kṣūdrāḥ - petty; rudra - Lord Śiva; pitāmaha - Lord Brahmā; prabhṛtayaḥ - and the like; kīṭāḥ - insects; samastāḥ - all; surāḥ - the demigods; dṛṣṭe - having been seen; yatra - where; saḥ - He; tārakaḥ - the deliverer; vijayate - is victorious; śrī - divine; pāda - from the feet; dhūlī - of dust; kaṇaḥ - a particle.

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