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Font Help >> http://gurutvajyotish.blogspot.comगुरुत्ल कामालरम द्राया प्रस्तुत भाप्तवक ई-ऩत्रत्रका                        ...
FREE        E CIRCULARगुरुत्ल ज्मोप्ततऴ ऩत्रत्रका                    ई- जन्भ ऩत्रत्रकानलम्फय 2012                         ...
दीऩोत्वल अथालत दीऩालरी ऩलल को ऩुयातन कार वे शी बायतलऴल भं ज्मोप्ततऩलल क रुऩ भं भनामा जाता शं । फिे ़ -                    ...
त्रप्रम आस्त्भम            फॊध/ फटशन               ु                          जम गुरुदे ल                  दीऩोत्वल अथालत ...
अॊप्तधमाया भागल प्रकाप्तळत कयक उन्शं अगरे लऴल तक क प्तरए त्रलदाई दे ते शं ।                              े                ...
6                                    नलम्फय 2012           *****         दीऩालरी त्रलळेऴाॊक वे वॊफॊप्तधत त्रलळेऴ वूचना ***...
7                                    नलम्फय 2012                                 धन तेयव ळुब भुशूतल (11-नलम्फय-2012)      ...
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9                                      नलम्फय 2012        स्जवभं त्रलळेऴ रूऩ वे श्री गणेळऩूजन, श्री भशारक्ष्भी ऩूजन, कफेय ...
10                                        नलम्फय 2012                                            स्पटिक श्रीमॊत्र का ऩूजन ...
11                                        नलम्फय 2012           ऩूजा भं जाने-अनजाने शुई गरती क प्तरए रक्ष्भीजी का स्भयण क...
12                                       नलम्फय 2012                                               वद्ऱ श्री का चभत्काय   ...
13                                    नलम्फय 2012                                                    त्रलप्तबन्न रक्ष्भी भ...
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  1. 1. Font Help >> http://gurutvajyotish.blogspot.comगुरुत्ल कामालरम द्राया प्रस्तुत भाप्तवक ई-ऩत्रत्रका नलम्फय- 2012 » स्पटिक श्रीमॊ त्र का ऩू ज न » ऩाॊ च मॊ त्र वे धन की कभी को कयदं … » वद्ऱ श्री का चभत्काय » धन प्राप्तद्ऱ शे तु वात द रलब रक्ष्भी वाधना ु » रक्ष्भी का प्तचस्थामी प्तनलाव तीन द रलब ... ु » रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु वात द रलब लस्तु एॊ ु NON PROFIT PUBLICATION
  2. 2. FREE E CIRCULARगुरुत्ल ज्मोप्ततऴ ऩत्रत्रका ई- जन्भ ऩत्रत्रकानलम्फय 2012 अत्माधुप्तनक ज्मोप्ततऴ ऩद्धप्तत द्रायावॊऩादकप्तचॊतन जोळीवॊऩकलगुरुत्ल ज्मोप्ततऴ त्रलबाग उत्कृ द्श बत्रलष्मलाणी क वाथ ेगुरुत्ल कामालरम92/3. BANK COLONY,BRAHMESHWAR PATNA,BHUBNESWAR-751018, १००+ ऩेज भं प्रस्तुत(ORISSA) INDIAपोन91+9338213418,91+9238328785, E HOROSCOPEईभेरgurutva.karyalay@gmail.com,gurutva_karyalay@yahoo.in, Create By Advancedलेफwww.gurutvakaryalay.comhttp://gk.yolasite.com/ Astrologywww.gurutvakaryalay.blogspot.com/ऩत्रत्रका प्रस्तुप्तत Excellent Predictionप्तचॊतन जोळी, 100+ Pagesस्लस्स्तक.ऎन.जोळीपोिो ग्राटपक्व टशॊ दी/ English भं भूल्म भात्र 750/-प्तचॊतन जोळी, स्लस्स्तक आिलशभाये भुख्म वशमोगी GURUTVA KARYALAYस्लस्स्तक.ऎन.जोळी (स्लस्स्तक BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785वोफ्िे क इस्न्िमा प्तर) Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
  3. 3. दीऩोत्वल अथालत दीऩालरी ऩलल को ऩुयातन कार वे शी बायतलऴल भं ज्मोप्ततऩलल क रुऩ भं भनामा जाता शं । फिे ़ - े फिे ़ भशानगयं वे रेकय छोिे वे छोिे गालं भं बी धनी वे रेकय गयीफ वे गयीफ व्मत्रि की चौखि बी इव ऩालन ऩलल क अलवय ऩय दीऩक की ऩॊत्रिमं क जगभगा उठती शं । दीऩालरी क टदन अभालस्मा …4 े े े …4 एवी ऩौयास्णक भान्मता शं टक धन तेयव क टदन धनलॊतयी नाभक दे लता अभृत करळ क वाथ े े वागय भॊथन वे उत्ऩन्न शुए थे। धनलॊतयी धन, स्लास्थम ल आमु क अप्तधऩप्तत दे लता शं । े धनलॊतयी को दे लं क लैध ल प्तचटकत्वक क रुऩ भं जाना जाता शं । …6 े े दीऩालरी त्रलळेऴ भं ऩढे ़  त्रलळेऴ भं   दीऩालरी त्रलळेऴ  वलल कामल प्तवत्रद्ध धन तेयव ळुब भुशूतल (11-नलम्फय-2012) 7 स्पटिक श्रीमॊत्र का ऩूजन 10 दीऩालरी ऩूजन भुशूत(13-नलम्फय-2012) ल 8 वद्ऱ श्री का चभत्काय 12 कलच …55 त्रलप्तबन्न रक्ष्भी भॊत्र 13 दीऩालरी भशत्ल.. वॊऩूणल रक्ष्भी ऩूजन 14 रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु कयं याप्तळ भॊत्र का जऩ 39 रक्ष्भी का प्तचस्थामी प्तनलाव तीन दरब... ु ल 30 वुख-स्भृत्रद्ध चाशते शं ऋण(कजल)कफरे औय कफदे 46 ऩाॊच मॊत्र वे धन की कभी को कयदं … 34 दीऩालरी भं रक्ष्भी-गणेळ आयाधना का भशत्ल 48 धन प्राप्तद्ऱ शे तु वात दरब रक्ष्भी वाधनाएॊ ु ल 36 दीऩालरी वे जुिी रक्ष्भी कथा 56 रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु वात दरब लस्तुएॊ ु ल 43गणेळ रक्ष्भी मॊत्र.113 धनतेयव टक अनोखी कथा 57  शभाये उत्ऩाद  जफ रक्ष्भीजी को प्तभरी वजा? 63 बाग्म रक्ष्भी टदब्फी 8 रक्ष्भीजी क स्लगल रोक जाने टक कथा े 65 दगाल फीवा मॊत्र ु 9 धनप्राप्तद्ऱ औय वुख वभृत्रद्ध क प्तरमे लास्तु प्तवद्धाॊत े 66 भॊत्रप्तवद्ध स्पटिक श्री मॊत्र 11 दे लउठनी एकादळी व्रत कथा 67 वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच 55नलयत्न जटित श्रीमॊत्र..93 दरयद्रता वे भुत्रि क ळीघ्र प्रबाली उऩाम े 69 वललप्तवत्रद्धदामक भुटद्रका 29 दीऩ जराने का धाप्तभलक भशत्ल क्मा शं ? 74 द्रादळ भशा मॊत्र 89 त्रलप्तबन्न रक्ष्भी धनत्रमोदळी ऩय मभ-दीऩदान अकारभृत्मु वे… ऩुरुऴाकाय ळप्तन मॊत्र एलॊ ळप्तन तैप्ततवा मॊत्र 92 77 मॊत्र …96 धनत्रमोदळी ऩय मभदीऩदान क्मं टकमा जाता शं ? 79 श्री शनुभान मॊत्र 94 रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क वयर उऩाम े 82 त्रलप्तबन्न दे लता एलॊ काभना ऩूप्ततल मॊत्र वूप्तच 95  स्थामी औय अन्म रेख  त्रलप्तबन्न दे ली एलॊ रक्ष्भी मॊत्र वूप्तच 96 वॊऩादकीम 4 भॊत्र प्तवद्ध रूद्राष 98 भाप्तवक याप्तळ पर 104 श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र / कलच 99 याप्तळ यत्न…97 नलम्फय 2102 भाप्तवक ऩॊचाॊग 108 याभ यषा मॊत्र 100 नलम्फय-2012 भाप्तवक व्रत-ऩलल-त्मौशाय 110 जैन धभलक त्रलप्तळद्श मॊत्र े 101 नलम्फय 2102 -त्रलळेऴ मोग 116 घॊिाकणल भशालीय वलल प्तवत्रद्ध भशामॊत्र 102 दै प्तनक ळुब एलॊ अळुब वभम सान ताप्तरका 116 अभोद्य भशाभृत्मुॊजम कलच 102 टदन-यात क चौघटिमे े 117 याळी यत्न एलॊ उऩयत्न 102 भॊत्र प्तवद्ध रूद्राष …98 टदन-यात टक शोया - वूमोदम वे वूमालस्त तक 118 वलल योगनाळक मॊत्र/ 120 ग्रश चरन नलम्फय -2012 119 भॊत्र प्तवद्ध कलचअभोद्य भशाभृत्मुजम ॊ 122 वूचना 127 YANTRA LIST 123 कलच …103 शभाया उद्दे श्म 129 GEM STONE 125
  4. 4. त्रप्रम आस्त्भम फॊध/ फटशन ु जम गुरुदे ल दीऩोत्वल अथालत दीऩालरी ऩलल को ऩुयातन कार वे शी बायतलऴल भं ज्मोप्ततऩलल क रुऩ भं भनामा जाता ेशं । फिे -फिे ़ भशानगयं वे रेकय छोिे वे छोिे गालं भं बी धनी वे रेकय गयीफ वे गयीफ व्मत्रि की चौखि बी इव ऩालन ़ऩलल क अलवय ऩय दीऩक की ऩॊत्रिमं क जगभगा उठती शं । दीऩालरी क टदन अभालस्मा शोने क कायण इव टदन वकर े े े ेरोक भं चायं ओय अॊधकाय परा शोता शं , रेटकन भनुष्म को अॊधकाय ऩवॊद नशीॊ शं , इव प्तरए लशॉ उववे भुकाफरा कयने ैक उद्दे श्म वे अऩने घय-दकान आटद स्थानं ऩय दीऩं की ऩॊत्रिमं भं वजाकय अॊधेये को दय बगाने का वाथलक प्रमाव े ु ूकयता शं । क्मंकी, प्रकाळ का शभाये जीलन भं फशुत भशत्ल शं , इव भशत्ल वे शय व्मत्रि बरी बाप्तत ऩरयप्तचत शं । शभायी बायप्ततमवॊस्कृ प्तत क धाप्तभलक कामलक्रभ भं बी अस्ग्न का त्रलळेऴ भशत्ल शं । एलॊ अस्ग्न प्रकाळ का प्रप्ततक शं जो मस, शलन, त्रललाश, वॊस्काय ेजेवे अन्म धाप्तभलक कभलकाॊिो भं त्रफना अस्ग्न क त्रफना वॊऩन्न शोना अवॊबल वा प्रप्ततत शोता शं । इवी कायण बायप्ततम वभ्मताओॊ भं ेअस्ग्न को दे ल कशा गमा शं । अस्ग्न को दे लता भनकय उवका ऩूजन टकमा जाता शं । क्मोटक एवा भाना जाता शं , टक मटद अस्ग्नदे ल क्रोप्तधत शोजामे तो फिे -फिे भशरं ल ऊचे-ऊचे बलनं को धूरभं उिादे औय याख फनादे । ॊ ॊ इव प्तरमे प्रकाळ का ऩूजन कय उन्शं ळाॊत यखने का प्रमाव टकमा जाता शं । शभाये प्रभुख धभल ग्रॊथो भं एक ऋग्लेद का वललप्रथभ भॊत्र शी प्रकाळ वे ळुरू शोता शै ।भॊत्र: प्रकाळभीरे ऩुयोटशतॊ मसस्म दे लभृस्त्लजभ ्। शोतायॊ यत्नधातभभ ्॥बालाथल:- वललप्रथभ आयाधन टकए जाने लारे, मस को प्रकाप्तळत कयने लारे, ऋतुओॊ क अनुवाय मस वम्ऩाटदत कयने लारे, दे लताओॊ ेका आह्वान कयने लारे तथा धन प्रदान कयने लारं भं वललश्रद्ष अस्ग्न दे लता की भं स्तुप्तत कयता शूॊ। े अन्म ऩौयास्णक भान्मताओॊ क अनुळाय ऩुयातन कार भं दीऩालरी ऩलल को "रोकोत्वल" क रुऩ भं भनामा जाता े ेथा। रेटकन आज दीऩालरी ऩलल की भुख्मत् दो प्रभुख त्रलळेऴता दे खने को प्तभरती शं । एक शं , दीऩं की जगभगाशि वेअॊधकायको दय कयना औय दवयी शै , लैबल एलॊ वुख-वभृत्रद्ध की दे ली भाॉ भशारक्ष्भी क ऩूजन का आमोजन। ू ू े दीऩालरी क टदन दे ली रक्ष्भी, गणेळ, वयस्लती, कफेय आटद का ऩूजन कयने का त्रलधान शै । े ु क्मोटक दे ली रक्ष्भीकी उत्ऩत्ती दीऩालरी क टदन भानी जाती शं औय ळास्त्रोि लणल शं धन की दे ली रक्ष्भी शं औय धन क दे लता कफेय शं , े े ुस्जनक प्रवन्न शोने वे भनुष्म को धन, वभृत्रद्ध एलॊ ऐद्वमल प्राद्ऱ शोता शं । भाॊ रक्ष्भी चॊचर शं । अथालत रक्ष्भी जी लश एक े े ु ुजगश टिकती नशीॊ शै । टकव प्रकाय रक्ष्भी का आगभन आऩक घय भं शो औय स्जदॊ गी द्ख, दरयद्र, कद्शो वे छि कयखुप्तळमं वे बय जाए उववे जुिे यशस्मो को बायतीम ऋत्रऴ भुप्तनमं ने खोज प्तनकारा शं । मश बी एक प्रभुख कायण शं कीदीऩालरी का ऩलल भनामा जाता शं औय रक्ष्भीजी का ऩूजन अचलन टकमा जाता शं । अन्म धाप्तभलक भान्मता शं की श्राद्ध ऩष वे रेकय काप्ततलक भाव की अभालस्मा तक त्रऩतयं को ऩुन् अऩने रोकभं रोिना शोता शं । ऩरयलाय क रोग त्रऩतयं का आह्वान कयते शं , उनका ऩूजन कय दीऩं वे उनका ऩुन् लाऩव जाने लारा े
  5. 5. अॊप्तधमाया भागल प्रकाप्तळत कयक उन्शं अगरे लऴल तक क प्तरए त्रलदाई दे ते शं । े ेदीऩालरी क वॊफॊध भं बत्रलष्मऩुयाण भं उल्रेख शं की े लस्त्र-ऩुष्ऩै् ळोप्तबतव्मा क्रम-त्रलक्रम-बूभम्।अथालत ्: आज क टदन धनऩप्तत कफेय का बी ऩूजन शोता शं । टशन्द ू धभलळास्त्रं क अनुवाय कफेय धनऩप्तत शं । े ु े ु एवा भानाजाता शं की आज क टदन शी दे ली रक्ष्भी का जन्भ शुला था। े आज क बौप्ततक मुग भं शय कामल धन क उऩय प्रत्मष मा अप्रत्मष रुऩवे प्तनबलय कयता शं इव प्तरमे प्रत्मेक े ेव्मत्रि टक मशी इच्छा शोती शं टक उवक ऩाव अऩाय धन दौरत एलॊ जीलन उऩमोगी वायी वुख वुत्रलधाए उप्रब्ध शो जो ेएक वभृद्ध व्मत्रि क ऩाव भं शोती शं , एलॊ उवकी वभृत्रद्ध एलॊ उन्नप्तत टदन प्रप्ततटदन फढती जाए। स्जन रोगो क ऩाव े ेऩमालद्ऱ धन-वॊऩत्रत्त शोती शं उन्शं इच्छा शोती शं उनकी धन-वॊऩत्रत्त टदन दोगुनी यात चौगुनी फढती यशं ओय स्जक ऩाव ेऩमालद्ऱ धन-वॊऩत्रत्त नशीॊ शं उवकी इच्छा शोती शं , की उवे कभ वे कभ इतनी धन वॊऩत्रत्त प्राद्ऱ शो जामे की उवका जीलनवुखभम शो। रेटकन कछ रोगो को धन, वॊऩत्रत्त एलॊ बौप्ततक वुख-वाधन अऩनी मोग्मता औय भेशनत क अनुळाय प्राद्ऱ शो ु ेजाता शं । रेटकन फशोत वे रोग एवे शोते शं स्जन्शं कटठन ऩरयश्रभ कयने औय प्तळस्षत शोने क उऩयाॊत बी त्रलळेऴ राब ेनशीॊ प्तभरता मा अऩने ऩरयश्रभ का उप्तचत भूल्म बी नशीॊ प्राद्ऱ शो ऩाता शं ।एवे रोगं क प्तरम एलॊ स्जन्शं वयरता वे धन की प्राप्तद्ऱ शं उनकी धन-वॊऩात्रत्त फढ़ती यशे औय भाॊ भशारक्ष्भी की कृ ऩा ेप्राप्तद्ऱ शे तु दीऩालरे त्रलळेऴ अॊक भं धन प्राप्तद्ऱ क वयर उऩामं क वाथ भं, रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु दरब ळीघ्र प्रबाली मॊत्र, े े ु लवाभग्रीमाॊ औय ळीघ्र प्रबाली वयर वाधनाओॊ का वॊकरन त्रलप्तबन्न ळास्त्र एलॊ ग्रॊथो भं लस्णलत उल्रेख क आधाय ऩय टकमा ेगमा शं । ऩाठको क भागलदळलन एलॊ जानकायी शे तु ऩत्रत्रका क इव अॊक भं कछ त्रलळेऴ प्राबाली भॊत्रो का वॊकरन कयने का े े ु ुप्रमाव टकमा गमा शं । स्जववे इच्छक फॊधु/फशन त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय अऩने भनोयथो को प्तवद्ध कयने भं वभथल शं।इव अॊक भं प्रकाप्तळत त्रलप्तबन्न उऩाम, मॊत्र-भॊत्र-तॊत्र, वाधना ल ऩूजा ऩद्धप्तत क त्रलऴम भं वाधक एलॊ ेत्रलद्रान ऩाठको वे अनुयोध शं , मटद दळालमे गए भॊत्र, स्तोत्र इत्मादी क वॊकरन, प्रभाण ऩढ़ने, वॊऩादन भं, ेटिजाईन भं, िाईऩीॊग भं, त्रप्रॊटिॊ ग भं, प्रकाळन भं कोई त्रुटि यश गई शो, तो उवे स्लमॊ वुधाय रं मा टकवी मोग्मगुरु मा त्रलद्रान वे वराश त्रलभळल कय रे । क्मोटक त्रलद्रान गुरुजनो एलॊ वाधको क प्तनजी अनुबल त्रलप्तबन्न अनुद्षा ेभं बेद शोने ऩय ऩूजन त्रलप्तध एलॊ जऩ त्रलप्तध भं प्तबन्नता वॊबल शं । आऩका जीलन वुखभम, भॊगरभम शो भाॊ रक्ष्भी की कृ ऩा आऩक ऩरयलाय ऩय े फनी यशे । भाॊ भशारक्ष्भी वे मशी प्राथना शं … प्तचॊतन जोळी
  6. 6. 6 नलम्फय 2012 ***** दीऩालरी त्रलळेऴाॊक वे वॊफॊप्तधत त्रलळेऴ वूचना ***** ऩत्रत्रका भं प्रकाप्तळत दीऩालरी त्रलळेऴ भं वम्फस्न्धत वबी जानकायीमाॊ गुरुत्ल कामालरम क अप्तधकायं क वाथ े े शी आयस्षत शं । ऩौयास्णक ग्रॊथो ऩय अत्रलद्वाव यखने लारे व्मत्रि इव अॊक भं उऩरब्ध वबी त्रलऴम को भात्र ऩठन वाभग्री वभझ वकते शं । धाप्तभलक त्रलऴम आस्था एलॊ त्रलद्वाव ऩय आधारयत शोने क कायण इव अॊकभं लस्णलत वबी जानकायीमा े बायप्ततम ग्रॊथो वे प्रेरयत शोकय प्तरखी गई शं । धभल वे वॊफॊप्तधत त्रलऴमो टक वत्मता अथला प्राभास्णकता ऩय टकवी बी प्रकाय टक स्जन्भेदायी कामालरम मा वॊऩादक टक नशीॊ शं । इव अॊक भं लस्णलत वॊफॊप्तधत वबी रेख भं लस्णलत भॊत्र, मॊत्र ल प्रमोग टक प्राभास्णकता एलॊ प्रबाल टक स्जन्भेदायी कामालरम मा वॊऩादक टक नशीॊ शं औय ना शीॊ प्राभास्णकता एलॊ प्रबाल टक स्जन्भेदायी क फाये भं े जानकायी दे ने शे तु कामालरम मा वॊऩादक टकवी बी प्रकाय वे फाध्म शं । धभल वे वॊफॊप्तधत रेखो भं ऩाठक का अऩना त्रलद्वाव शोना आलश्मक शं । टकवी बी व्मत्रि त्रलळेऴ का टकवी बी प्रकाय वे इन त्रलऴमो भं त्रलद्वाव कयने ना कयने का अॊप्ततभ प्तनणलम उनका स्लमॊ का शोगा। ळास्त्रोि त्रलऴमं वे वॊफॊप्तधत जानकायी ऩय ऩाठक द्राया टकवी बी प्रकाय टक आऩत्ती स्लीकामल नशीॊ शोगी। धभल वे वॊफॊप्तधत रेख प्राभास्णक ग्रॊथो, शभाये लऴो क अनुबल एल अनुळधान क आधाय ऩय टदमे गमे शं । े ॊ े शभ टकवी बी व्मत्रि त्रलळेऴ द्राया धभल वे वॊफॊप्तधत त्रलऴमं ऩय त्रलद्वाव टकए जाने ऩय उवक राब मा नुक्ळान की े स्जन्भेदायी नटशॊ रेते शं । मश स्जन्भेदायी धाप्तभलक त्रलऴमो ऩय त्रलद्वाव कयने लारे मा उवका प्रमोग कयने लारे व्मत्रि टक स्लमॊ टक शोगी। क्मोटक इन त्रलऴमो भं नैप्ततक भानदॊ िं, वाभास्जक, कानूनी प्तनमभं क स्खराप कोई व्मत्रि मटद नीजी स्लाथल े ऩूप्ततल शे तु मशाॊ लस्णलत जानकायी क आधाय ऩय प्रमोग कताल शं अथला धाप्तभलक त्रलऴमो क उऩमोग कयने भे े े त्रुटि यखता शं मा उववे त्रुटि शोती शं तो इव कायण वे प्रप्ततकर अथला त्रलऩरयत ऩरयणाभ प्तभरने बी वॊबल शं । ू धाप्तभलक त्रलऴमो वे वॊफॊप्तधत जानकायी को भानकय उववे प्राद्ऱ शोने लारे राब, शानी टक स्जन्भेदायी कामालरम मा वॊऩादक टक नशीॊ शं । शभाये द्राया ऩोस्ि टकमे गमे धाप्तभलक त्रलऴमो ऩय आधारयत रेखं भं लस्णलत जानकायी को शभने कई फाय स्लमॊ ऩय एलॊ अन्म शभाये फॊधगण ने बी अऩने नीजी जीलन भं अनुबल टकमा शं । स्जस्वे शभ कई फाय धाप्तभलक ु त्रलऴमो क वे त्रलळेऴ राब की प्राप्तद्ऱ शुई शं । अप्तधक जानकायी शे तु आऩ कामालरम भं वॊऩक कय वकते शं । े ल (वबी त्रललादो कप्तरमे कलर बुलनेद्वय न्मामारम शी भान्म शोगा। े े
  7. 7. 7 नलम्फय 2012 धन तेयव ळुब भुशूतल (11-नलम्फय-2012)  प्तचॊतन जोळी एवी ऩौयास्णक भान्मता शं टक धन तेयव क टदन धनलॊतयी नाभक दे लता अभृत करळ क वाथ वागय भॊथन वे े ेउत्ऩन्न शुए थे। धनलॊतयी धन, स्लास्थम ल आमु क अप्तधऩप्तत दे लता शं । धनलॊतयी को दे लं क लैध ल प्तचटकत्वक क रुऩ भं े े ेजाना जाता शं । धन तेयव क टदन चाॊदी क फतलन-प्तवक्क खयीदना त्रलळेऴ ळुब शोता शं । क्मोटक ळास्त्रं भं धनलॊतयी दे ल को चॊद्रभा क े े े ेवभान भाना गमा शं । धन तेयव क धनलॊतयी क ऩूजन वे भानप्तवक ळास्न्त, भन भं वॊतोऴ एल स्लबाल भं वौम्मता का बाल े ेआता शं । जो रोग अप्तधक वे अप्तधक धन एकत्र कयने टक काभना कयते शं उन्शं धनलॊतयी दे ल टक प्रप्ततटदन आयाधना कयनीचाटशए। धनतेयव ऩय ऩूजा कयने वे व्मत्रि भं वॊतोऴ, स्लास्थम, वुख ल धन टक त्रलळेऴ प्राप्तद्ऱ शोती शं । स्जन व्मत्रिमं क उत्तभ ेस्लास्थम भं कभी तथा वेशत खयाफ शोने टक आळॊकाएॊ फनी यशती शं उन्शं त्रलळेऴ रुऩ वे इव ळुब टदन भं ऩूजा आयाधनाकयनी चाटशए। धनतेयव भं खयीदायी ळुब भानी जाती शं । रक्ष्भी जी एलॊ गणेळ जी टक चाॊदी टक प्रप्ततभा-प्तवक्को को इव टदनखरयदना धन प्राप्तद्ऱ एलॊ आप्तथलक उन्नप्तत शे तु श्रेद्ष शोता शं । धनतेयव क टदन बगलान धनलन्तयी वभुद्र वे अभृत करळ रेकय ेप्रकि शुए थे, इवप्तरमे धनतेयव क टदन खाव तौय वे फतलनं टक खयीदायी टक जाती शं । इव टदन स्िीर क फतलन, चाॊदी क े े ेफतलन खयीदने वे प्राद्ऱ शोने लारे ळुब परो भं कई गुणा लृत्रद्ध शोने टक वॊबालना फढ़जाती शं ।धन तेयव ऩूजा भुशूतल प्रदोऴ कार 2 घण्िे एलॊ 24 प्तभनि का शोता शं । अऩने ळशय क वूमालस्त वभम अलप्तध वे रेकय अगरे 2 घण्िे 24 प्तभनि ेटक वभम अलप्तध को प्रदोऴ कार भाना जाता शं । अरग- अरग ळशयं भं प्रदोऴ कार क प्तनधालयण का आधाय वूमोस्त वभम ेक अनुळाय प्तनधालयीत कयना चाटशमे। धनतेयव क टदन प्रदोऴकार भं दीऩदान ल रक्ष्भी ऩूजन कयना ळुब यशता शै । े ेइव लऴल 11 नलम्फय, 2012 (धनतेयव) को बायतीम वभम अनुळाय नई टदल्री भं वॊध्मा वूमालस्त क फाद 05 फज कय 27 ेप्तभप्तनि वे आयम्ब शोकय यात क 07 फजकय 51 प्तभनि तक का वभम प्रदोऴ कार यशे गा। इव वभमा अलप्तध भं स्स्थय रग्न े(लृऴब) बी भुशुतल वभम भं शोने क कायण घय-ऩरयलाय भं स्थामी रक्ष्भी की प्राप्तद्ऱ शोती शै । े 11 नलम्फय, 2012 को प्रदोऴ कार भं बी स्स्थय रग्न (लृऴब याप्तळ) शो यशा शं , स्स्थय रग्न का वभम वफवे उतभभाना जाता शं । धन तेयव क टदन प्रदोऴ कार ल स्स्थय रग्न दोनं का वॊमोग वॊध्मा 05:40:47 फजे वे रेकय यात्री े07:36:14 फजे तक का वभम यशे गा। प्रदोऴ कार क दौयान वॊध्मा 05:29 फजे वे 07:08 फजे तक ळुब चौघटिमा शोने वे ेभुशुतल की ळुबता भं लृत्रद्ध शोती शं ।चौघाटिमा भुशूतल चर भुशूतल वुफश 08:02 वे 09:23 तक   ळुब भुशूतल दोऩशय 01.26 वे 02:47 तक  अभृत भुशूतल यात 07:08 वे 08:47 तक राब भुशूतल वुफश09:23 वे 10:44 तक  ळुब भुशूतल वॊध्मा 05:29 वे 07:08 तक  चर भुशूतल यात 08:47 वे 10:26 तकळुब भशूतल का वभम धन तेयव की ऩूजा क प्तरमे त्रलळेऴ ळुब यशे गा। राब भुशूतल ऩूजन कयने वे प्राद्ऱ शोने लारे राबं भं लृत्रद्ध ेशोती शं । ळुब कार भुशूतल टक ळुबता वे धन, स्लास्थम ल आमु भं लृत्रद्ध शोती शं । वफवे अप्तधक ळुब अभृत कार भं ऩूजा कयनेका शोता शं ।नोि: उऩयोि लस्णलत वूमालस्त का वभम प्तनयधायण नई टदल्री क अषाॊळ ये खाॊळ क अनुळाय आधुप्तनक ऩद्धप्तत वे टकमा गमा शं । इव े ेत्रलऴम भं त्रलप्तबन्न भत एलॊ वूमालस्त सात कयने का तयीका प्तबन्न शोने क कायण वूमालस्त वभम का प्तनयधायण प्तबन्न शो वकता शं । ेवूमालस्त वभम का प्तनयधायण स्थाप्तनम वूमालस्त क अनुळाय टश कयना उप्तचत शोगा। े
  8. 8. 8 नलम्फय 2012 दीऩालरी ऩूजन भुशूतल (13-नलम्फय-2012)  प्तचॊतन जोळी भाॊ रक्ष्भी टक कृ ऩा प्राद्ऱ कयने शे तु एलॊ उनका स्थामी प्तनलाव शो वक इव उद्दे श्म वे घय-दकान-व्मलवाप्तमक े ुकामालरम भं दीऩालरी क टदन रक्ष्भी ऩूजन शे तु टदन क वफवे ळुब भुशूतल को प्तरमा जाता शं । े े इव लऴल दीऩालरी का ऩलल भॊगरलाय, 13 नलम्फय, 201२ भं काप्ततलक भाव टक अभालस्मा वूमोदम कारीन नषत्रस्लाती ऩयन्तु प्रदोऴकार भं त्रलळाखा नषत्र का कार यशे गा, वौबाग्म मोग भं तथा चन्दभा का भ्रभण तुरा याप्तळ भंयशे गा। दीऩालरी क टदन अभालस्मा प्ततप्तथ, प्रदोऴ कार, ळुब रग्न ल चौघा़टिमा भुशूतल त्रलळेऴ का अत्माप्तधक भशत्ल शोता शं । े 13 नलम्फय 2012, भॊगरलाय क टदन वूमोदमी नषत्र स्लाती, रेटकन टदन 15:06:42 फजे फाद त्रलळाखा नषत्र ेयशे गा, इव टदन वूमोदमी मोग वौबाग्म यात 23:59:12 फजे फाद ळोबन मोग यशे गा। वूमोदमी कयण ळकप्तन वुफश ु07:14:12 फजे ऩद्ळमात चतुष्ऩाद क ऩद्ळमात नाग कयण यशे गा। वूमोदम वे वॊऩूणल टदन चन्द्रभा तुरा याप्तळ भं भ्रभण ेकये गा। प्रदोऴ कार 2 घण्िे एलॊ 24 प्तभनि का शोता शं । अऩने ळशय क वूमालस्त वभम अलप्तध वे रेकय अगरे 2 घण्िे े24 प्तभनि टक वभम अलप्तध को प्रदोऴ कार भाना जाता शं । अरग- अरग ळशयं भं प्रदोऴ कार क प्तनधालयण का आधाय ेवूमोस्त वभम क अनुळाय प्तनधालयीत कयना चाटशमे। े दीऩालरी प्रदोऴ कार भुशूतल अऩने ळशय क वूमालस्त वभम वे 2 घन्िे 24 प्तभनि तक का वभम ळुब भुशूतल वभम ेक प्तरमे प्रमोग टकमा जाता शं . इवे प्रदोऴ कार वभम कशा जाता शं । इव लऴल 13 नलम्फय 2012 (दीऩालरी) को ेबायतीम वभम अनुळाय नई टदल्री भं वूमालस्त वॊध्मा 05 फज कय 26 प्तभप्तनि ऩय शोगा। वॊध्मा 05 फज कय 26प्तभप्तनि वे आयम्ब शोकय यात क 07 फजकय 50 प्तभनि तक का वभम प्रदोऴ कार यशे गा। े 13 नलम्फय 2012 को प्रदोऴ कार भं बी स्स्थय रग्न (लृऴब याप्तळ) शो यशा शं , स्स्थय रग्न का वभम वफवेउतभ भाना जाता शं । टदऩालरी क टदन प्रदोऴ कार ल स्स्थय रग्न दोनं का वॊमोग वॊध्मा 17:32:56 फजे वे रेकय यात्री े19:28:21 फजे तक का वभम यशे गा। प्रदोऴ कार क दौयान वॊध्मा 07:02 फजे वे 08:36 फजे तक ळुब चौघटिमा शोने ेवे भुशुतल की ळुबता भं लृत्रद्ध शोती शं । बाग्म रक्ष्भी टदब्फी वुख-ळास्न्त-वभृत्रद्ध की प्राप्तद्ऱ क प्तरमे बाग्म रक्ष्भी टदब्फी :- स्जस्वे धन प्रप्तद्ऱ, त्रललाश मोग, े व्माऩाय लृत्रद्ध, लळीकयण, कोिल कचेयी क कामल, बूतप्रेत फाधा, भायण, वम्भोशन, तास्न्त्रक े फाधा, ळत्रु बम, चोय बम जेवी अनेक ऩये ळाप्तनमो वे यषा शोप्तत शै औय घय भे वुख वभृत्रद्ध टक प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै , बाग्म रक्ष्भी टदब्फी भे रघु श्री फ़र, शस्तजोिी (शाथा जोिी), प्तवमाय प्तवन्गी, त्रफस्ल्र नार, ळॊख, कारी-वफ़द-रार गुॊजा, इन्द्र जार, भाम जार, ऩातार तुभिी े जेवी अनेक दरब वाभग्री शोती शै । ु ल भूल्म:- Rs. 1250, 1900, 2800, 5500, 7300, 10900 भं उप्रब्द्ध गुरुत्ल कामालरम वॊऩक : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785 ल c
  9. 9. 9 नलम्फय 2012 स्जवभं त्रलळेऴ रूऩ वे श्री गणेळऩूजन, श्री भशारक्ष्भी ऩूजन, कफेय ऩूजन, व्माऩारयक खातं का ऩूजन, दीऩदान एलॊ ुइव वभम क अॊतगलत अऩने वेलकं को उऩशाय दे ना ळुब यशता शं । े इव भुशूतल वभम भं अऩने ऩरयलाय क फिे वदस्मं एलॊ प्तभत्र लगल वे आळीलालद रेना एलॊ उन्शं प्तभठाईमाॊ, लस्त्र ल ेउऩशाय आटद दे ना बी ळुब यशता शं । त्रलद्रानो क भत वे इव भुशूतल भं ऩरयलाय क फिे वदस्मं एलॊ प्तभत्र लगल वे प्राद्ऱ शोने े ेलारा आळीलालद ळुब परप्रद प्तवद्ध शोता शं । इव भुशूतल वभम भं भॊटदय इत्माटद धभलस्थरो ऩय दान इत्माटद कयना बीत्रलळेऴ राब दामश एलॊ कल्माणकायी शोता शं ।दीऩालरी चौघटिमाॊ भुशूतलदीऩालरी चौघ़टिमा भुशूतल वभम को घय ल ऩरयलाय भं रक्ष्भी ऩूजन कयने क प्तरमे ळुब भाना जाता शं । श्रीभशारक्ष्भी ेऩूजन एलॊ दीऩालरी का भशाऩलल काप्ततलक कृ ष्ण अभालस्मा भं प्रदोऴ कार एलॊ यात्रत्र वभम भं स्स्थय रग्न वभम भं कयनाळुब शोता शै रक्ष्भी ऩूजन, दीऩ प्रजलस्ल्रत कयने क प्तरमे प्रदोऴकार भुशूतल वभम शी त्रलळेऴतमा ळुब भाना गमा शं । ेरक्ष्भी ऩूजा भुशूतल दीऩालारी क टदन े  चय भुशूतल टदन भं 09:24 वे 10:44 तक  राब भुशूतल वुफश भं 10:44 वे 12:05 तक  अभृत भुशूतल वुफश भं 12:05 वे 01:26 तक  ळुब भुशूतल दोऩशय भं 02:47 वे 04:07 तक  राब भुशूतल वॊध्मा भं 07:08 वे यात 08:47 तक  ळुब भुशूतल यात भं 10:26 वे यात 12:06 तकनोि: उऩयोि लस्णलत वूमालस्त का वभम प्तनयधायण नई टदल्री क अषाॊळ ये खाॊळ क अनुळाय आधुप्तनक ऩद्धप्तत वे टकमा े ेगमा शं । इव त्रलऴम भं त्रलप्तबन्न भत एलॊ वूमालस्त सात कयने का तयीका प्तबन्न शोने क कायण वूमालस्त वभम का ेप्तनयधायण प्तबन्न शो वकता शं । वूमालस्त वभम का प्तनयधायण स्थाप्तनम वूमालस्त क अनुळाय टश कयना उप्तचत शोगा। े दगाल फीवा मॊत्र ु ळास्त्रोि भत क अनुळाय दगाल फीवा मॊत्र दबालग्म को दय कय व्मत्रि क वोमे शुले बाग्म को जगाने लारा भाना गमा े ु ु ू े शं । दगाल फीवा मॊत्र द्राया व्मत्रि को जीलन भं धन वे वॊफॊप्तधत वॊस्माओॊ भं राब प्राद्ऱ शोता शं । जो व्मत्रि आप्तथलक ु वभस्मावे ऩये ळान शं, लश व्मत्रि मटद नलयात्रं भं प्राण प्रप्ततत्रद्षत टकमा गमा दगाल फीवा मॊत्र को स्थाप्तद्ऱ कय रेता ु शं , तो उवकी धन, योजगाय एलॊ व्मलवाम वे वॊफॊधी वबी वभस्मं का ळीघ्र शी अॊत शोने रगता शं । नलयात्र क टदनो भं े प्राण प्रप्ततत्रद्षत दगाल फीवा मॊत्र को अऩने घय-दकान-ओटपव-पक्ियी भं स्थात्रऩत कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता ु ु ै शं , व्मत्रि ळीघ्र शी अऩने व्माऩाय भं लृत्रद्ध एलॊ अऩनी आप्तथलक स्स्थती भं वुधाय शोता दे खंगे। वॊऩूणल प्राण प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल चैतन्म दगाल फीवा मॊत्र को ळुब भुशूतल भं अऩने घय-दकान-ओटपव भं स्थात्रऩत कयने वे त्रलळेऴ राब ु ु प्राद्ऱ शोता शं । भूल्म: Rs.730 वे Rs.10900 तक GURUTVA KARYALAY: Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785, Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
  10. 10. 10 नलम्फय 2012 स्पटिक श्रीमॊत्र का ऩूजन  प्तचॊतन जोळी आज क बौप्ततक मुग भं अथल (धन) जीलन टक भुख्म आलश्मिाओॊ भं वे एक शै । धनाढ्म व्मत्रिओॊ जीलनळैरी को ेदे खकय प्रबात्रलत शोते शुले वाधायण व्मटक टक बी काभना शोती शं , टक उवक ऩाव बी इतना धन शो टक लश अऩने जीलन ेभं वभस्त बौप्ततक वुखो को बोग ने भं वभथल शं। एवी स्स्थभं भेशनत, ऩरयश्रभ वे कभाई कयक धन अस्जलत कयने क े ेफजाम कछ रोग अल्ऩ वभम भं ज्मादा कभाने टक भानप्तवकता क कायण कबी-कबी गरत तयीक अऩनाते शं । ु े ं स्जवक पर स्लरुऩ एवे रोग धन का लास्तत्रलक वुख बोगने वे लॊप्तचत यश जाते ेशं औय योग, तनाल, भानप्तवक अळाॊप्तत जेवी अन्म वभस्माओॊ वे ग्रस्त शो जाते शं । जशाॊ गरत तयीक वे कभामे शुले धन क कायण वभाज एवे रोगो को शीन बाल ं ेवे दे खते शं । जफटक भेशनत, ऩरयश्रभ वे काभामे शुले धन वे स्लमॊ का आत्भत्रलद्वावफढता शं एलॊ वभाज भं प्रप्ततद्षा औय भान वम्भान बी वयरता वे प्राद्ऱ शो जाता शं । जो व्मत्रि धाप्तभलक त्रलचाय धायाओॊ वे जुिे शो लश इद्वय भं त्रलद्वाय यखते शुले स्लमॊ टकभेशनत, ऩरयश्रभ क फर ऩय कभामे शुले धन को टश वच्चा वुख भानते शं । धभल भं आस्था ेएलॊ त्रलद्वाव यखने लारे व्मत्रि क प्तरमे भेशनत, ऩरयश्रभ कयने क उऩयाॊत अऩनी आप्तथलक े ेस्स्थभं उन्नप्तत एलॊ रक्ष्भी को स्स्थय कयने शे तु, श्री मॊत्र क ऩूजन का उऩाम अऩनाकय ेजीलन भं टकवी बी वुख वे लॊप्तचत नशीॊ यश वकते, उन्शं अऩने जीलन भं कबी धन काअबाल नशीॊ यशता। उनक वभस्त कामल वुचारु रुऩ वे चरते शं । रक्ष्भी कृ ऩा प्राप्तद्ऱ क े ेप्तरए श्रीमॊत्र का वयर ऩूजन त्रलधान स्जवे अऩना कय वाधायण व्मत्रि त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । इव भं जया बी वॊळम नशीॊ शं ।श्रीमॊत्र का ऩूजन यॊ क वे याजा फनाने लारा एलॊ व्मत्रि टक दरयद्रता को दय कयने लारा शं । ू  अऩने ऩूजा स्थान भं प्राण-प्रप्ततत्रद्षत श्रीमॊत्र को ऩूजन क प्तरमे स्थात्रऩत कयं । (प्राण-प्रप्ततत्रद्षत श्रीमॊत्र टकवी बी े मोग्म त्रलद्रान ब्राह्मण मा मोग्म जानकाय वे प्तवद्ध कयलारे)  श्री मॊत्र को प्रत्मेक ळुक्रलाय को दध, दशी, ळशद, घी औय ळक्कय (गुि) अथालत ऩॊचाभृत फनाकय स्नान कयामे। ु  स्नान क ऩद्ळमात उवे रार कऩिे वे ऩोछ दं । े  श्री मॊत्र को टकवी चाॊदी मा ताॊफे टक प्रेि भं स्थाऩीत कयं ।  श्री मॊत्र क नीचे 5 रुऩमे मा 10 रुऩमे का नोि यखदं । (5,10 रुऩमे का प्तवक्का नशीॊ) े  श्री मॊत्र स्थात्रऩत कयने लारी प्रेि भं श्रीमॊत्र ऩय स्पटिक टक भारा को चायं ओय घुभाते शुले स्थात्रऩत कयं ।  श्री मॊत्र क उऩय भौरी का िु किा 3-5 फाय घुभाते शुले अत्रऩत कयं । े ल  श्री मॊत्र क उऩय वुखा अद्श गॊध प्तछिक। े ं  मटद वॊबल शो तो रार ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं । (कभर, भॊदाय(जावूद) मा गुराफ शो तो उत्तभ) ल  धूऩ-दीऩ इत्मादी वे त्रलप्तधलत ऩूजन कयं ।  उऩयोि त्रलधन प्रप्तत ळुक्रलाय कयं एलॊ अन्म टदन कलर धूऩ-दीऩ कयं । े  टकवी एक रक्ष्भी भॊत्र का एक भारा भॊत्र जऩ कयं । श्रीवूि, अद्श रक्ष्भी स्तोत्र इत्मादी का ऩाठ कयं मटद ऩाठ कयने भं आऩ अवभथल शोतो फाजाय भं श्रीवूि, अद्श रक्ष्भी इत्मादी स्तोत्र टक कवेि वीिी प्तभरती शं उवका श्रलण कयं । े
  11. 11. 11 नलम्फय 2012  ऩूजा भं जाने-अनजाने शुई गरती क प्तरए रक्ष्भीजी का स्भयण कयते शुले षभा भाॊगकय वुख, वौबाग्म औय वभृत्रद्ध े टक काभना कयं ।  प्रप्तत ळुक्रलाय उऩयोि ऩूजन कयने वे जीलन भं टकवी बी प्रकाय का आप्तथलक वॊकि नशीॊ आता।  मदी आप्तथलक वॊकि वे ऩये ळान शं तो श्री मॊत्र क ऩूजन वे वभस्त प्रकाय क आप्तथलक वॊकि धीये -धीये दय शो जाते शं । े े ूनोि: श्री मॊत्र क क नीचे यखा शुला नोि प्रप्तत एक-दो भाव भं एक फाय टकवी दे ली भॊदीय भं बेि कय दं । (राब प्राद्ऱ शोने ऩय फदरे) े े  प्रथन फाय यखा शुला नोि श्री मॊत्र क ऩूजन वे राब शोने क फाद शी फदरे। राब प्राद्ऱ शोना ळुरु शोने तक नोि को यखे यशं । े े  राब प्राद्ऱ शोना ळुरु शोने क ऩद्ळमात प्रप्तत भाश भं एक फाये प्रप्ततऩदा(एकभ) को ऩुयाना नोि फदर कय नमे नोि यखं। े  जेवे-जेवे राब प्राद्ऱ शोने रगे आऩ क अनुकर कामल शो ने रगे तो नोि टक यकभ फढाते यशं । अप्तधक राब प्राद्ऱ शोता शं । े ूउदाशण: मटद ऩशरे 5 रुऩमे का नोि यखा शं तो उस्वे राब शोने क ऩद्ळमात नोि फदरते शुले 10 रुऩमे का नोि यखे। 10 रुऩमे का ेनोि यखने वे राब शोने क ऩद्ळमात नोि फदरते शुले 20 रुऩमे का नोि यखे। इवी प्रकाय नोि को फदते यशं इस्वे अप्तधक राब प्राद्ऱ ेशोता शं ।अप्तधक राब प्राप्तद्ऱ शे तु वाभान्म प्तनमभ:ऩूजन क टदन ब्रह्मचमल का ऩारन कयं । ेऩूजन क टदन वुगॊप्तधत तेर, ऩयफ्मूभ, इत्र का प्रमोग कयने वे फचे। ेत्रफना प्माज-रशवून का ळाकाशायी बोजन ग्रशण कयं । ळुक्रलाय वपद प्तभद्षान बोजन भं ग्रशण कयं । े भॊत्र प्तवद्ध स्पटिक श्री मॊत्र "श्री मॊत्र" वफवे भशत्लऩूणल एलॊ ळत्रिळारी मॊत्र शै । "श्री मॊत्र" को मॊत्र याज कशा जाता शै क्मोटक मश अत्मन्त ळुब फ़रदमी मॊत्र शै । जो न कलर दवये मन्त्रो वे अप्तधक वे अप्तधक राब दे ने भे वभथल शै एलॊ वॊवाय क शय व्मत्रि क प्तरए पामदे भॊद वात्रफत शोता शै । ऩूणल े ू े े प्राण-प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल चैतन्म मुि "श्री मॊत्र" स्जव व्मत्रि क घय भे शोता शै उवक प्तरमे "श्री मॊत्र" अत्मन्त फ़रदामी प्तवद्ध शोता शै े े उवक दळलन भात्र वे अन-प्तगनत राब एलॊ वुख की प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै । "श्री मॊत्र" भे वभाई अटद्रतीम एलॊ अद्रश्म ळत्रि भनुष्म की े वभस्त ळुब इच्छाओॊ को ऩूया कयने भे वभथल शोप्तत शै । स्जस्वे उवका जीलन वे शताळा औय प्तनयाळा दय शोकय लश भनुष्म ू अवफ़रता वे वफ़रता टक औय प्तनयन्तय गप्तत कयने रगता शै एलॊ उवे जीलन भे वभस्त बौप्ततक वुखो टक प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै । "श्री मॊत्र" भनुष्म जीलन भं उत्ऩन्न शोने लारी वभस्मा-फाधा एलॊ नकायात्भक उजाल को दय कय वकायत्भक उजाल का प्तनभालण कयने भे वभथल ू शै । "श्री मॊत्र" की स्थाऩन वे घय मा व्माऩाय क स्थान ऩय स्थात्रऩत कयने वे लास्तु दोऴ म लास्तु वे वम्फस्न्धत ऩये ळाप्तन भे न्मुनता े आप्तत शै ल वुख-वभृत्रद्ध, ळाॊप्तत एलॊ ऐद्वमल टक प्रप्तद्ऱ शोती शै । गुरुत्ल कामालरम भे "श्री मॊत्र" 12 ग्राभ वे 2250 Gram (2.25Kg) तक टक वाइज भे उप्रब्ध शै . भूल्म:- प्रप्तत ग्राभ Rs. 10.50 वे Rs.28.00 GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
  12. 12. 12 नलम्फय 2012 वद्ऱ श्री का चभत्काय  प्तचॊतन जोळी दीऩालरी क टदन फशी-खाते क ऩूजन क वभम फशी-खाते भं उऩयोि क्रभभं रार यॊ ग की करभ म ऩेन वे श्री े े ेप्तरखे। ऩशरे एक फाय श्री प्तरखे, टपय दो फाय श्री श्री प्तरखे, टपय तीन फाय श्री श्री श्री, इव प्रकाय क्रभ को फढाते जाएआखीय भं वात फाय श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री प्तरखे, वद्ऱश्री क नीचे ेअऩने ईद्श का नाभ प्तरखे मा ॐ श्रीॊ रक्ष्भी दै व्मे नभ् प्तरखे। टपय धुऩ- श्रीदीऩ, ऩुष्ऩ आटद वे उवका ऩूजन कयं । श्री श्री उि प्रमोग कयने वे आनेलारा नमा लऴल व्मलवाम भं आप्तथलकद्रत्रद्श वे वुख, वभृत्रद्ध रेकय आमेगा औय अत्माप्तधक राबदामक यशे गा। श्री श्री श्री स्जन रोगो क ऩाव रक्ष्भी (धन) स्स्थय नशीॊ यशता। रक्ष्भी आने े श्री श्री श्री श्रीवे ऩूलल जाने को तत्ऩय शोती शं । उन्शं अऩनी जेफ भं मा भनीऩवल भं एकस्पद कागज ऩय उऩयोि तयीक वे श्री प्तरख कय यखना चाटशए। वद्ऱ श्री े े श्री श्री श्री श्री श्रीप्तरखने वे रक्ष्भी रम्फे वभम तक स्स्थय यशने क मोग फनते शं लश नमे े श्री श्री श्री श्री श्री श्रीस्रोत वे धन राब क बी प्रफर मोग फनते शं । (अद्शगॊध की स्माशी ेफनाकय अनाय की करभ वे प्तरखना अप्तत उत्तभ यशता शं ।) श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री  उि तयीक वे वद्ऱ श्री को अऩनी अरभायी, गल्रा (कळ फोक्ळ) े ै ॐ श्रीॊ रक्ष्भी दै व्मे नभ् मा धन यखने क स्थान ऩय कभकभ मा अद्शगॊध वे अऩने दाशीने े ु ु शाथ की अनाप्तभका उॊ गरी वे प्तरखने ऩय बी मश अत्माप्तधक राबप्रद यशता शं ।  उि तयीक वे वद्ऱ श्री को चाॊटद मा वोने क ऩत्तय ऩय मॊत्र स्लरुऩ बी फनामा वकता शं । ताॊफे चाॊदी क ऩत्तय भं े े े फनाते वभम ध्मान यखे की ऩत्तय की वतश ऩय श्री उऩय की ओय उबयी शुई शो, नीचे की ओय खुदी शुई न शं।  वद्ऱ श्री की जगश ऩय अनेक रोग श्री मा रक्ष्भी भॊत्र का उच्चायण कयते शुए, अऩनी अरभायी, गल्रा (कळ ै फोक्ळ) आटद धन यखने क स्थान ऩय अनाभीका उॊ गरी वे वद्ऱ त्रफॊदी फनाते शं । कई दकानदाय मा व्मलवामीक े ु स्थानो ऩय बी उि तयीक वे वद्ऱ त्रफॊदी फनाते शं । वद्ऱ श्री वे भाॊ रक्ष्भीजी प्रवन्न शोती शं । क्मोकी श्री का वयर े अथल शं वुख वभृत्रद्ध-वॊऩन्नता। रक्ष्भी मॊत्रश्री मॊत्र (रक्ष्भी मॊत्र) भशारक्ष्भमै फीज मॊत्र लैबल रक्ष्भी मॊत्रश्री मॊत्र (भॊत्र यटशत) भशारक्ष्भी फीवा मॊत्र कनक धाया मॊत्रश्री मॊत्र (वॊऩूणल भॊत्र वटशत) रक्ष्भी दामक प्तवद्ध फीवा मॊत्र श्री श्री मॊत्र (रप्तरता भशात्रत्रऩुय वुन्दमैश्री मॊत्र (फीवा मॊत्र) रक्ष्भी दाता फीवा मॊत्र श्री भशारक्ष्भमं श्री भशामॊत्र)श्री मॊत्र श्री वूि मॊत्र रक्ष्भी फीवा मॊत्र अॊकात्भक फीवा मॊत्रश्री मॊत्र (कभल ऩृद्षीम) ु रक्ष्भी गणेळ मॊत्र ज्मेद्षा रक्ष्भी भॊत्र ऩूजन मॊत्रमॊत्र क त्रलऴम भं अप्तधक शे तु वॊऩक कयं । GURUTVA KARYALAY, Call us: 91+ 9338213418, 91+ 9238328785 े ल
  13. 13. 13 नलम्फय 2012 त्रलप्तबन्न रक्ष्भी भॊत्र  प्तचॊतन जोळीभॊत्र : 1. ॐ श्री भशारक्ष्म्मै नभ्। (Om Shree Mahalakshmai Namah) 2. श्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ कभरे कभरारमे। (Shreem Hreem Shreem Kamale Kamalalaye) 3. श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ ऐॊ कभरलाप्तवन्मै स्लाशा । (Shreem Hreem Kleem Aim Kamalavasinyai Swaha) 4. ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै नभ्। (Hreem Shreem Kleem Mahalakshmai Namah) 5. ॐ श्रीॊ प्तश्रमै नभ्। (Om Shreem Shriyai Namah) 6. ॐ ह्री श्रीॊ क्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ क्रीॊ श्रीॊ भशारक्ष्भी भभ गृशे धनॊ ऩूयम ऩूयम प्तचॊतामै दयम दयम स्लाशा । ू ू (Om Hreem Shreem Kreem Shreem Kreem Kleem Shreem Mahalakshmi Mam Gruhe Dhanam Pooraya Pooraya Chintayai Dooraya Dooraya Swaha) 7. धन राब एलॊ वभृत्रद्ध भॊत्र ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ त्रत्रबुलन भशारक्ष्म्मै अस्भाॊक दारयद्र्म नाळम प्रचुय धन दे टश दे टश क्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ ॐ । (Om Shreem Hreem Kleem Tribhuvan Mahalakshmai Asmank Daridray Nashay Prachur Dhan Dehi Dehi Kleem Hreem Shreem Om) 8. अषम धन प्राप्तद्ऱ भॊत्र ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ ऐॊ वं ॐ ह्रीॊ क ए ई र ह्रीॊ श व क श र ह्रीॊ वकर ह्रीॊ वं ऐॊ क्रीॊ ह्रीॊ श्री ॐ । (Om Shreem Hreem Kleem Aim Soum Om Hreem Ka Ae Ee La Hreem Ha Sa Ka Ha La Hreem Sakal Hreem Soum Aim Kleem Hreem Shreem Om)कवे कयं भॊत्र जाऩ :- ैधनतेयव मा दीऩालरी क टदन वॊकल्ऩ रेकय प्रात्कार स्नान कयक ऩूलल मा उत्तय टदळा टक औय भुख े े कयक रक्ष्भी टक भूप्ततल ेमा प्तचत्र की ऩॊचोऩचाय मा दषोऩचाय मा ऴोड्ऴोऩचाय वे ऩूजा कयं । ळुद्ध-ऩत्रलत्र आवन ग्रशण कय स्पटिक टक भारा वे भॊत्र का जाऩ १,५,७,११ भारा जाऩ ऩूणल कय अऩने कामल उद्दे श्म टकऩूप्ततल शे तु भाॊ रक्ष्भी वे प्राथना कयं । अप्तधकस्म अप्तधक परभ ्। ॊजऩ स्जतना अप्तधक शो वके उतना अच्छा शै । मटद भॊत्र अप्तधक फाय जाऩ कय वकं तो श्रेद्ष।प्रप्ततटदन स्नान इत्माटदवे ळुद्ध शोकय उऩयोि टकवी एक रक्ष्भी भॊत्र का जाऩ 108 दाने टक भारा वे कभ वे कभ एकभारा जाऩ अलश्म कयना चाटशए।उऩयोि भॊत्र क त्रलप्तध-त्रलधान क अनुवाय जाऩ कयने वे भाॊ रक्ष्भी टक कृ ऩा वे व्मत्रि को धन की प्राप्तद्ऱ शोती शै औय े ेप्तनधलनता का प्तनलायण शोता शै ।

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