Gurutva Jyotish jun 2013

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Gurutva Jyotish jun 2013

  1. 1. NON PROFIT PUBLICATIONगुरुत्व कामाारम द्राया प्रस्तुत भाससक ई-ऩत्रिका जून- 2013Our Web Site: www.gurutvajyotish.com Font Help >> http://gurutvajyotish.blogspot.com
  2. 2. FREEE CIRCULARई- जन्भ ऩत्रिकागुरुत्व ज्मोसतष ऩत्रिकाजून 2013सॊऩादकअत्माधुसनक ज्मोसतष ऩद्धसत द्रायाउत्कृ ष्ट बत्रवष्मवाणी के साथ१००+ ऩेज भं प्रस्तुतसिॊतन जोशीसॊऩकागुरुत्व ज्मोसतष त्रवबागगुरुत्व कामाारम92/3. BANK COLONY,BRAHMESHWAR PATNA,BHUBNESWAR-751018,(ORISSA) INDIAपोनE HOROSCOPE91+9338213418,91+9238328785,ईभेरgurutva.karyalay@gmail.com,gurutva_karyalay@yahoo.in, Create By AdvancedAstrologyExcellent Prediction100+ Pages>> Order Now | Call Now | Email USवेफwww.gurutvakaryalay.comhttp://gk.yolasite.com/www.gurutvakaryalay.blogspot.com/ऩत्रिका प्रस्तुसतसिॊतन जोशी,स्वस्स्तक.ऎन.जोशीपोटो ग्राफपक्सफहॊदी/ English भं भूल्म भाि 750/-सिॊतन जोशी, स्वस्स्तक आटाहभाये भुख्म सहमोगी GURUTVA KARYALAYBHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIACall Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in,gurutva.karyalay@gmail.comस्वस्स्तक.ऎन.जोशी (स्वस्स्तकसोफ्टेक इस्न्डमा सर)
  3. 3. अनुक्रभबायतीम सॊस्कृ सत भं शॊख का भहत्व 7 साभुफिक शास्त्र भं शसन येखा का भहत्व 39दस्ऺणावता शॊख का धासभाक भहत्व 9 शसन के त्रवसबन्न ऩाम का पर 41दस्ऺणावता शॊख से जुड़े गूढ़ यहस्म 12 श्री शसन िारीसा 44शॊख नाद एक अद्भुत यहस्म 14 शसनग्रह से सॊफॊसधत योग 45हभाये जीवन भं शॊख का भहत्व 16 शसनदेव की कृ ऩा प्रासद्ऱ के सयर उऩाम 46सशवसरॊग ऩूजन भं शॊख सनषेद्ध क्मो? 19 शसन के त्रवसबन्न भॊि 48शॊख ऩूजन से वास्तुदोष सनवायण 20 भहाकार शसन भृत्मुॊजम स्तोि 49इष्ट आयाधना भं शॊख अभोघ परदामी हं। 21 ॥ शनैश्चयस्तवयाज्॥ 52शॊख अऩनामे योग, दु्ख, दरयिता, दुबााग्म बगामे 23 ॥ शनैश्चयस्तोिभ ् ॥ 53शसनदेव का ऩरयिम 24 ॥शसनवज्रऩॊजयकविभ ्॥ 53शसनवाय व्रत 30 दशयथकृ त-शसन-स्तोि 54शसन प्रदोष व्रत का भहत्व 36 शसन अष्टोत्तयशतनाभावसर् 58शसन-साढ़ेसाती के शाॊसत उऩाम 37 गुरु ऩुष्माभृत मोग 59हभाये उत्ऩादभॊि ससद्ध दुराब साभग्री एवॊ भारा 18 त्रवसबन्न देवता एवॊ काभना ऩूसता मॊि सूसि 69बाग्म रक्ष्भी फदब्फी 19 त्रवसबन्न देवी एवॊ रक्ष्भी मॊि सूसि 70भॊि ससद्ध ऩन्ना गणेश 20 याशी यत्न 71भॊि ससद्ध स्पफटक श्री मॊि 22 भॊि ससद्ध रूिाऺ 72भॊि ससद्ध भॊगर गणेश 35 श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि / कवि 73भॊि ससद्ध घोड़े की नार 38 याभ यऺा मॊि 74त्रवद्या प्रासद्ऱ हेतु सयस्वती कवि औय मॊि 40 जैन धभाके त्रवसशष्ट मॊि 75सवा कामा ससत्रद्ध कवि 60 घॊटाकणा भहावीय सवा ससत्रद्ध भहामॊि 76हभाये त्रवशेष मॊि 61 अभोद्य भहाभृत्मुॊजम कवि 77सवाससत्रद्धदामक भुफिका 62 याशी यत्न एवॊ उऩयत्न 77100 से असधक जैन मॊि 62 भॊि ससद्ध साभग्री 86-89द्रादश भहा मॊि 63 सवा योगनाशक मॊि/ 93ऩुरुषाकाय शसन मॊि एवॊ शसन तैसतसा मॊि 66 भॊि ससद्ध कवि 95नवयत्न जफड़त श्री मॊि 67 YANTRA LIST 96वाहन दुघाटना नाशक भारुसत मॊि 68 GEM STONE 98श्री हनुभान मॊि 68 PHONE/ CHAT CONSULTATION 99स्थामी औय अन्म रेखसॊऩादकीम 4 दैसनक शुब एवॊ अशुब सभम ऻान तासरका 89जून 2013 भाससक यासश पर 78 फदन-यात के िौघफडमे 90जून 2013 भाससक ऩॊिाॊग 82 फदन-यात फक होया - सूमोदम से सूमाास्त तक 91जून 2013 भाससक व्रत-ऩवा-त्मौहाय 84 ग्रह िरन जून 2013 92जून 2013-त्रवशेष मोग 89 हभाया उद्देश्म 102
  4. 4. त्रप्रम आस्त्भमफॊधु/ फफहनजम गुरुदेवशॊख की उत्ऩत्रत्त के त्रवषम भं शास्त्रं भं उल्रेख है फक सभुि भॊथन के सभम िौदह प्रकाय के यत्नं भं शॊख बीसनकरा।भुख्म रुऩ से शॊख की उत्ऩत्रत्त जर से ही होती है। जर ही जीवन का आधाय है मही कायण हं की सृत्रष्ट कीउत्ऩत्रत्त बी जर से हुई है। अत: जर से उत्ऩत्रत्त के कायण शॊख की भहत्वता सवाासधक यही हं। अनेकं देवी-देवता केएक हाथ भं शॊख शोबामभान होता हं। मही कायण हं कई की सफदमं से शॊख का उऩमोग त्रवसबन्न धासभाक अनुष्ठानं भंत्रवशेष रूऩ से फकमा जाता है।शॊख का इसतहास बायतीम सॊस्कृ सत भं असत प्रासिन एवॊ देवकारीन मुग से िरा आयहा है। त्रवऻानीक िष्टी कोण सेसभझे तो शॊख सभुि भं ऩाए जाने वारे एक प्रकाय के जीव घंघे का खोर होता है। मह खोर घंघे अऩनी सुयऺा केसरए फनाता है।त्रवद्रानो ने अऩने अनुबवं एवॊ अनुशॊधान से ऩामा हं की ऩौयास्णक कार से ही सभुिी जीवं का मह खोर अथाात शॊखभनुष्म के सरए त्रवसबन्न प्रकाय से उऩमोगी यहा हं। शॊख की आध्मास्त्भक उऩमोगीता के साथ ही इसके िूणा, बस्भआफद का औषसधम रुऩ भं बी त्रवशेष रुऩ से प्रमोग होता यहा हं।फहन्दू सॊस्कृ सत भं शॊख को अत्मॊत भहत्त्वऩूणा भाना जाता है। त्रवसबन्न धभाग्रॊथं भं शॊख की त्रवसबन्न उऩमोगीताओॊ कात्रवस्तृत वणान सभरता हं।ब्रह्मवैवता ऩुयाण भं उल्रेख सभल्ता है:शॊख िन्िाका दैवत्मभ्भध्म वरुणदैवतन्।ऩृष्ठे प्रजाऩसता त्रवद्यादग्रे गॊगा सयस्वतीभ्॥िैरोक्मे मासन तीथाात्रऩ वासुदेवस्म िाऻमा।शॊखे सतष्ठस्न्त त्रवप्रेन्ि तस्भा शॊख प्रऩुजमेत्।।दशानेन फह शॊखस्म की ऩुन्त्रवरमॊ मासतॊ ऩाऩसन फहभवद् बास्कयोदमे्।।अथाात: मह शॊख िॊि औय सूमा के सभान देव स्वरूऩ है। इसके भध्म बाग भं वरुण, ऩृष्ठ बाग भं ब्रह्मा औय अग्र बागभं गॊगा औय सयस्वती के साथ-साथ साये तीथं का वास है। मह कु फेय का बी स्वरूऩ हं अत् इसका ऩूजन अवश्मकयना िाफहए। इसके दशान भाि से सबी कष्ट दूय हो जाते हं। स्जस प्रकाय सूमा के आने ऩय फपा त्रऩघर जाती है। फपयस्ऩशा की तो फात ही व्मथा है। शॊख का स्वरूऩ कु फेय के सभान है, अत् मह ऩूजनीम है।शॊख से श्रीकृ ष्ण मा रक्ष्भी आफद देवी-देवता(शास्त्रं भं शॊख से सशवसरॊग ऩूजन वस्जात भाना गमा हं।) के त्रवग्रहऩय जर मा ऩॊिाभृत असबषेक कयने ऩय देवता शीघ्र प्रसन्न होते हं।जानकाय त्रवद्रानं का अनुबव हं की एक उत्तभ दोष यफहत शॊख जो भनुष्म के सरए सबी प्रकाय से ऩयभ्कल्माणकायी हं। मह भनुष्म को दैसनक जीवन भं इष्ट आयाधना, ऩूजा-अिाना आफद के सरए प्रेरयत कयता है।
  5. 5. सुख-सभृत्रद्ध, धन-सॊऩत्रत्त, रयत्रद्ध-ससत्रद्ध एवॊ ऐश्वमा की प्रासद्ऱ के सरए हभाये धभा शास्त्रं भे दस्ऺणावता शॊख काअत्मासधक भहत्व फतामा गमा हं। दस्ऺणावता शॊख का भुख दामीॊ औय से खुरा होता हं।शास्त्रोक्त भान्मता हं की स्जस घय भं त्रवसध-त्रवधान से दस्ऺणावता शॊख का ऩूजन होता हं, उस घय भं धन, सुख,सभृत्रद्ध, मश-फकसता की वृत्रद्ध होती हं। उस घय भं रक्ष्भी स्स्थत होती हं।आज वैऻासनक अनुसॊधान से मह सात्रफत हो गमा हं की सनमसभत शॊखनाद कयने से उसके सकायात्भक प्रबाव सेवातावयण भं व्माद्ऱ हासनकायक सूक्ष्भ जीवाणुओॊ का नाश होता हं।जनकायं का भानना हं की शॊखनाद के दौयान वामुभॊडर भं कु छ त्रवशेष प्रकाय की तयॊगे उत्ऩन्न होती हं, जोब्रह्माॊड की कु छ अन्म तयॊगं के साथ सभरकय अल्ऩ ऺणं भं ही सभग्र ब्रह्माॊड की ऩरयक्रभा कय रेती हं। उनका भाननाहं की ब्रह्माण्ड की ऩरयक्रभा कयते हुवे जफ फकसी एक तयॊग को जफ दूसयी अनुकू र तयॊगं प्राद्ऱ होती हं तफ दोनं तयॊगंके सभनवम से भनुष्म को आत्भ फर-प्रेयणा देने वारी, योग, शोक आफद से यऺा कयने वारी, उसकी भनोकाभनाएॊ ऩूणाकयने वारी तयॊगे उठने रगती हं, औय भनुष्म अऩने कामा उद्देश्म भं शीघ्र सपरता प्राद्ऱ कय रेता हं।जानकायं का भानना हं की तयॊगे इतनी शूक्ष्भ होती हं की उसका प्रबाव हभं सयरता से िष्टी गोिय नहीॊ होऩाता! शॊखनाद के सनयॊतय प्रमोग से ही इन तयॊगं के प्रबावं को सभझा जा सकता हं।त्रवसबन्न शोध से मह ससद्ध हो िुका हं की वाद्यं व ध्वसनमं का छोटे-फड़े सबी जीवं ऩय फहोत ही गहया प्रबावऩड़ता हं। उसी प्रकाय शॊख ध्वसन के प्रबाव एवॊ भहत्वता को आजका आधुसनक त्रवऻान बी भान िुका हं।फहन्दू धभा के सबी भाॊगसरक कामं भं शॊख का त्रवशेष रुऩ से प्रमोग फकमा जाता है। दस्ऺणावतॉ शॊख को देवीरक्ष्भी का प्रतीक भाना जाता है, दस्ऺणावतॉ शॊख की ऩूजा देवी भहारक्ष्भी को प्रसन्न कयने वारी है। इससरए ऐसीभान्मता हं की स्जस स्थान ऩय सनमसभत रूऩ से शॊख की ऩूजा होती है उस स्थान ऩय कबी धन अबाव नहीॊ यहता।शॊख को त्रवसबन्न देवी-देवता का प्रतीक भानकय बी ऩूजा जाता है व शॊख के भाध्मभ से अबीष्ट कामं की ऩूसता कीजाती है।रक्ष्भी सॊफहता, बागवत ऩुयाण, त्रवश्वासभि सॊफहता, गोयऺा सॊफहता, कश्मऩ सॊफहता, शॊख सॊफहता, ऩुरस्त्म सॊफहता,भाकं डेम आफद धभा ग्रॊथं भं दस्ऺणावतॉ शॊख को आमुवाद्धक औय सभृत्रद्ध दामक होने का उल्रेख सभरता हं।8 जून 2013 को शसन जमॊती, शनैश्चयी अभावस्मा, शसन अभावस्मा का दुराब सॊमोग होने के कायण ऩाठकं के भागादशानहेतु शसनदेव से सॊफॊसधत ऩुयाने रेखं का ऩुन् प्रकाशन फकमा गमा हं।इस अॊक भं प्रकासशत शॊख से सॊफॊसधत जानकायीमं के त्रवषम भं साधक एवॊ त्रवद्रान ऩाठको से अनुयोध हं, मफद दशाामेगए शॊख के राब, प्रबाव इत्मादी के सॊकरन, प्रभाण ऩढ़ने, सॊऩादन भं, फडजाईन भं, टाईऩीॊग भं, त्रप्रॊफटॊग भं, प्रकाशनभं कोई िुफट यह गई हो, तो उसे स्वमॊ सुधाय रं मा फकसी मोग्म ज्मोसतषी, गुरु मा त्रवद्रान से सराह त्रवभशा कय रे ।क्मोफक त्रवद्रान ज्मोसतषी, गुरुजनो एवॊ साधको के सनजी अनुबव त्रवसबन्न कविो शॊख के प्रबावं का वणान कयने भं बेदहोने ऩय शॊख की, ऩूजन त्रवसध एवॊ उसके प्रबावं भं सबन्नता सॊबव हं।आऩका जीवन सुखभम, भॊगरभम हो शसनदेव की कृ ऩा आऩके ऩरयवाय ऩयफनी यहे। शसनदेव से मही प्राथना हं…सिॊतन जोशी
  6. 6. 6 जून 2013***** शॊख भहत्व त्रवशेषाॊक से सॊफॊसधत सूिना ***** ऩत्रिका भं प्रकासशत शॊख भहत्व त्रवशेषाॊक भं शॊख से सॊफॊसधत रेख गुरुत्व कामाारम के असधकायं के साथ हीआयस्ऺत हं। शॊख भहत्व त्रवशेषाॊक भं वस्णात रेखं को नास्स्तक/अत्रवश्वासु व्मत्रक्त भाि ऩठन साभग्री सभझ सकते हं। शॊख भहत्व का त्रवषम आध्मात्भ से सॊफॊसधत होने के कायण इसे बायसतम धभा शास्त्रं से प्रेरयत होकयप्रस्तुत फकमा हं। शॊख भहत्व त्रवशेषाॊक से सॊफॊसधत त्रवषमो फक सत्मता अथवा प्राभास्णकता ऩय फकसी बी प्रकाय कीस्जन्भेदायी कामाारम मा सॊऩादक फक नहीॊ हं। शॊख भहत्व से सॊफॊसधत सबी जानकायीकी प्राभास्णकता एवॊ प्रबाव की स्जन्भेदायी कामाारम मा सॊऩादककी नहीॊ हं औय ना हीॊ प्राभास्णकता एवॊ प्रबाव की स्जन्भेदायी के फाये भं जानकायी देने हेतु कामाारममा सॊऩादक फकसी बी प्रकाय से फाध्म हं। शॊख भहत्व त्रवशेषाॊक से सॊफॊसधत रेखो भं ऩाठक का अऩना त्रवश्वास होना आवश्मक हं। फकसी बीव्मत्रक्त त्रवशेष को फकसी बी प्रकाय से इन त्रवषमो भं त्रवश्वास कयने ना कयने का अॊसतभ सनणाम स्वमॊ काहोगा। शॊख भहत्व त्रवशेषाॊक से सॊफॊसधत फकसी बी प्रकाय की आऩत्ती स्वीकामा नहीॊ होगी। शॊख भहत्व त्रवशेषाॊक से सॊफॊसधत रेख हभाये वषो के अनुबव एवॊ अनुशॊधान के आधाय ऩय फदए गमे हं।हभ फकसी बी व्मत्रक्त त्रवशेष द्राया प्रमोग फकमे जाने वारे, भॊि- मॊि मा अन्म प्रमोग मा उऩामोकीस्जन्भेदायी नफहॊ रेते हं। मह स्जन्भेदायी भॊि-मॊि मा अन्म प्रमोग मा उऩामोको कयने वारे व्मत्रक्त फकस्वमॊ फक होगी। क्मोफक इन त्रवषमो भं नैसतक भानदॊडं, साभास्जक, कानूनी सनमभं के स्खराप कोई व्मत्रक्त मफद नीजीस्वाथा ऩूसता हेतु प्रमोग कताा हं अथवा प्रमोग के कयने भे िुफट होने ऩय प्रसतकू र ऩरयणाभ सॊबव हं। शॊख भहत्व त्रवशेषाॊक से सॊफॊसधत जानकायी को भाननने से प्राद्ऱ होने वारे राब, राब की हानी माहानी की स्जन्भेदायी कामाारम मा सॊऩादक की नहीॊ हं। हभाये द्राया ऩोस्ट फकमे गमे सबी शॊख भहत्व की जानकायी एवॊ भॊि-मॊि मा उऩाम हभने सैकडोफायस्वमॊ ऩय एवॊ अन्म हभाये फॊधुगण ऩय प्रमोग फकमे हं स्जस्से हभे हय प्रमोग मा कवि, भॊि-मॊि माउऩामो द्राया सनस्श्चत सपरता प्राद्ऱ हुई हं।असधक जानकायी हेतु आऩ कामाारम भं सॊऩका कय सकते हं।(सबी त्रववादो के सरमे के वर बुवनेश्वय न्मामारम ही भान्म होगा।)
  7. 7. 7 जून 2013बायतीम सॊस्कृ सत भं शॊख का भहत्व स्वस्स्तक.ऎन.जोशीशॊख का इसतहास बायतीम सॊस्कृ सत भं असत प्रासिन एवॊदेवकारीन मुग से िरा आयहा है। त्रवऻानीक िष्टी कोणसे सभझे तो शॊख सभुि भं ऩाए जाने वारे एक प्रकाय केजीव घंघे का खोर होता है। मह खोर घंघे अऩनी सुयऺाके सरए फनाता है।जानकाय त्रवद्रानो ने अऩने अनुबवं एव्ॊ अनुशॊधानसे ऩामा हं की ऩौयास्णक कार से ही सभुिी जीवं का महखोर अथाात शॊख भनुष्म के सरए त्रवसबन्न प्रकाय सेउऩमोगी यहा हं। शॊख की आध्मास्त्भक उऩमोगीता केसाथ ही इसके िूणा, बस्भ आफद का औषसधम रुऩ भंबी त्रवशेष रुऩ से प्रमोग होता यहा हं।कु छ त्रवद्रानं का भानना हं कीबायत भं जगन्नाथऩुयी (उड़ीसा) को शॊखऺेि कहा जाता है, क्मंफकजगन्नाथऩुयी का बौगोसरक आकायशॊख के सभान सदृश्म है।शॊख का धासभाक भहत्व:फहन्दू सॊस्कृ सत भं शॊख को अत्मॊत भहत्त्वऩूणाभाना जाता है। त्रवसबन्न धभाग्रॊथं भं शॊख की त्रवसबन्नउऩमोगीताओॊ का त्रवस्तृत वणान सभरता हं।ब्रह्मवैवता ऩुयाण भं उल्रेख सभल्ता है:शॊख िन्िाका दैवत्मभ्भध्म वरुणदैवतन्।ऩृष्ठे प्रजाऩसता त्रवद्यादग्रे गॊगा सयस्वतीभ्॥िैरोक्मे मासन तीथाात्रऩ वासुदेवस्म िाऻमा।शॊखे सतष्ठस्न्त त्रवप्रेन्ि तस्भा शॊख प्रऩुजमेत्।।दशानेन फह शॊखस्म की ऩुन्त्रवरमॊ मासतॊ ऩाऩसन फहभवद् बास्कयोदमे्।।अथाात: मह शॊख िॊि औय सूमा के सभान देव स्वरूऩ है।इसके भध्म बाग भं वरुण, ऩृष्ठ बाग भं ब्रह्मा औय अग्रबाग भं गॊगा औय सयस्वती के साथ-साथ साये तीथं कावास है। मह कु फेय का बी स्वरूऩ हं अत् इसका ऩूजनअवश्म कयना िाफहए। इसके दशान भाि से सबी कष्ट दूयहो जाते हं। स्जस प्रकाय सूमा के आने ऩय फपा त्रऩघरजाती है। फपय स्ऩशा की तो फात ही व्मथा है। शॊख कास्वरूऩ कु फेय के सभान है, अत् मह ऩूजनीम है।शॊख से श्रीकृ ष्ण मा रक्ष्भी आफद देवी-देवता(शास्त्रंभं शॊख से सशवसरॊग ऩूजन वस्जात भाना गमा हं।) केत्रवग्रह ऩय जर मा ऩॊिाभृत असबषेक कयने ऩय देवताशीघ्र प्रसन्न होते हं।जानकाय त्रवद्रानं का अनुबव हं कीएक उत्तभ दोष यफहत शॊख जो भनुष्म केसरए सबी प्रकाय से ऩयभ् कल्माणकायीहं। मह भनुष्म को दैसनक जीवन भं इष्टआयाधना, ऩूजा-अिाना आफद के सरएप्रेरयत कयता है।शॊख को सनातन धभा का प्रतीकभाना गमा है, इस सरए फहन्दू धभा भं ऩूजास्थर ऩय शॊख यखने की ऩयॊऩया है त्रवशेष रुऩ सेप्रिसरत हं।फहन्दू धभा की भान्मताओॊ के अनुसाय शॊख माशॊख की भाॊगसरक आकृ सत वारे सिन्ह ऩूजास्थर भं होनेसे बवन के सबी प्रकाय के अरयष्टं एवॊ असनष्टं का स्वत्नाश हो जाता है औय उस बवन भं सनयॊतय सुख,सौबाग्म की वृत्रद्ध होती है। कु छ जानकाय त्रवद्रानं ने शॊखको सनसध का प्रतीक कहा है।धभाशास्त्र भं शॊख का अष्टससत्रद्ध एवॊ नवसनसध भंभहत्त्वऩूणा स्थान फतामा गमा है। धासभाक भान्मता केअनुसाय शॊख के स्ऩशा से साधायण जर बी गॊगाजर केसभान ऩत्रवि हो जाता हं, मही कायण हं की फहन्दू धभा भंत्रवसबन्न प्रकाय की धासभाक फक्रमाओॊ भं शॊख के जर का
  8. 8. 8 जून 2013प्रमोग त्रवशेष रुऩ से फकमा जाता है। फहन्दू भॊफदयं भं शॊखभं शुद्ध जर बयकय देवी-देवता की आयती की जाती है।आयती की सभासद्ऱ ऩय शॊख का जर उऩस्स्थत बक्तं ऩयसछड़का जाता हं।त्रवद्रानं का कथन हं की जो भनुष्म बगवान श्रीकृ ष्ण को शॊख भं जर, पू र औय अऺत यखकय उन्हंअध्मा देता है, उसे अनन्त ऩुण्म परं की प्रासद्ऱ होती है।शॊख भं जर बयकय इष्ट भॊिं का उच्िायण कयतेहुए बगवान श्री कृ ष्ण को स्नान कयाने से भनुष्म केसकर ऩाऩं का नाश होता है।कु छ त्रवद्रानं का कथन हं की अनेक ऩूजा,अनुष्ठान, मऻ आफद भं शॊख का प्रमोग असनवामा भानागमा हं, वह धासभाक कामा शॊख के त्रफना ऩूणा नहीॊ भानाजाता है।कु छ त्रवसशष्ट साधनाओॊ भं बी शॊखका त्रवशेष रुऩ से प्रमोग फकमा जाता हं।भान्मता हं की शॊख भनुष्म की इस्च्छतभनोकाभनाएॊ शीघ्र ऩूणा कयने भं सहामकहोते हं। कु छ जानकायं का तो महा तककथन हं की जो भनुष्म को सुख, सभृत्रद्ध सेमुक्त सुखभम जीवन व्मसतत कयना िाहतेहं उन्हं अऩने ऩूजा स्थान भं शॊख अवश्मस्थात्रऩत कयना िाफहए। त्रवसबन्न शास्त्रं भं शॊख कोत्रवजम, सुख, सभृत्रद्ध, ऐश्वमा, कीसता औय रक्ष्भी का प्रतीकफतामा गमा है।शॊख सत मुग से रेकय क्रभश् िेता मुग द्राऩयमुग औय कसर मुग भं बी रोगं को अऩनी औय आकत्रषातकयते यहे है, सत मुग से रेकय आज तक उसकीभहत्वता एवॊ उऩमोगीता अत्मॊत अद्भुत यही हं स्जस केकायण ही इसे देव, दानव औय भानव सबी ने शॊख कोअऩने राबाथा इस्तेभार कयते आमे हं। शॊख की भहत्वताइतनी असधक हं की इसका अनुभान इसी फात से रगासकते हं की शॊख भुख्मत् इष्ट आयाधना से रेकय मुद्धबूसभ तक अऩना त्रवशेष भहत्त्व औय स्थान यखता है।इष्ट आयाधना के दौयान शॊख की ध्वसन हभायेसबतय श्रद्धा वा आस्था का सॊिाय कयती हं औय मुद्ध केदौयान शॊख की ध्वसन मोद्धाओॊ के जोश भं वृत्रद्ध कयती हं।धभाशास्त्रं के जानकायं का कथन हं की मुद्ध भंप्रथभ फाय शॊख का उऩमोग देव-असुय के त्रफि के मुद्ध भंफकमा गमा था, फतामा जाता हं की इस मुद्ध भं सबीदेव-दानव अऩने-अऩने शॊखं के साथ मुद्ध बूसभ भं आएथे। उस मुद्ध के दौयान शॊखं फक ध्वसन के साथ मुद्धआयॊब होता औय ध्वसन के साथ ही मुद्ध ख़त्भ होता था।ऐसी शास्त्रोक्त भान्मता हं की देव-दानव के उस मुद्ध केफाद से ही प्राम् हय देवी-देवता अऩने साथ शॊख यखते है।असधकाॊश शॊख वाभावतॉ होते हं औय वाभावतॉशॊख फाज़ाय भं आसानी से उऩरब्ध हो जाते हं,दस्ऺणावतॉ शॊख को असत दुराब भाना जाताहं।वाभावतॉ शॊख को बगवान श्री त्रवष्णु कास्वरुऩ भान कय उसे ऩूजा जाता है औयदस्ऺणावतॉ शॊख को देवी भहारक्ष्भी कास्वरुऩ भान कय उसे ऩूजन फकमा जाताहै।त्रवद्रानं का कथन हं की स्जस घय भंदस्ऺणावतॉ शॊख होता हं उस घय भं सदादेवी भहारक्ष्भी का वास यहता है।कु छ तॊि त्रवद्याके जानकायं के कथन अनुसायदस्ऺणावतॉ शॊख का मफद ऩूणा त्रवसध-त्रवधान से ऩूजनफकमा जामे, औय दस्ऺणावतॉ शॊख को रार कऩड़े भंरऩेटकय अऩने घय के ऩूजन स्थान भं स्थात्रऩत कयने सेघय की त्रवसबन्न ऩयेशासनमाॊ दूय होती है।दस्ऺणावतॉ शॊख को अऩनी सतज़ोयी भे यखने सेघय भं सनयॊतय सुख-सभृत्रद्ध फढ़ती है। इसी सरए जानकायत्रवद्रान घय भं दस्ऺणावतॉ शॊख को स्थात्रऩत कयनाअत्मॊत शुब एवॊ भॊगरकायी भानते है।***
  9. 9. 9 जून 2013दस्ऺणावता शॊख का धासभाक भहत्व सिॊतन जोशी, स्वस्स्तक.ऎन.जोशीत्रवद्रानो ने 3 तोरे के शॊख को उत्तभ औय 25तोरे से फड़ा असत उत्तभ फतामा हं। ऩूजन हेतु उज्जवरवणा का शॊख असत उत्तभ होता हं।ऩौयास्णक भान्मताओॊ के अनुशाय शॊख की ऩयखऩानी भं नभक डार कय उस ऩानी भं शॊख को डार कयसात फदन यखने ऩय नकरी शॊख टूट जाता हं मा उसभंदयाये हो जाती हं, जफकी असरी शॊख अऩनीवास्तत्रवक स्स्थती भं यहता हं।शॊख मफद असरी होगा तो दोनंअॊगूठे के नाखून ऩय यखने से वहकु छ हदतक गोर धुभता हं।मफद शॊख असरी हो तो उसे कान केऩास यखने से उसभं से ॐकाय कीध्वसन सुनाई देती हं. मफद शॊख भंसछि हो तो ॐकाय की ध्वसन सुनाईनहीॊ देती। इस सरमे मह सबी ऩुयातनउऩामो को अऩना कय शॊख की जाॊि कयना औयअसरी शॊख प्राद्ऱ कयना आभ व्मत्रक्त के सरए दुस्साध्मकामा हं।त्रवशेष नोट:आजकर आधुसनक तकनीकी उऩकयणो की भदद सेकृ त्रिभ अथाात नकरी शॊख फनामे जाते हं। जो नभक वारेऩानी भं डारने ऩय नातो टूटते हं औय नाहीॊ उसभे दयायेऩड़ती हं, स्जस कायण ऩौयास्णक ऩद्धत्रत्त से असरी नकरीकी ऩहिान साधायण व्मत्रक्त की ऩहुॊि के फाहय हं।दोनं अॊगूठे के नाखून ऩय अन्म वस्तु मा नकरी शॊख बीधूभ सकते हं।ॐकाय की ध्वसन नकरी शॊखं भं से बी आसकती हं मफदउसभं कोई सछि नहो तो। ॐकाय की ध्वसन तो सछियहीत फकसी बी छोटे भुख वारे रॊफे ऩाि मा ग्रास से बीआसकती हं, मफद अऩनी हथेरी को कटोयी के सभानसछि यहीत अवस्था भं भोड़ कय कान के ऩास यखा जामेतो बी हभं ॐकाय की ध्वसन आसानी से सुनाई दे सकतीहं।इस सरए शॊख की ऩयख फकसी जानकाय से कयवानाउसित होगा मा फकसी त्रवश्वस्त व्मत्रक्त मा सॊस्था से हीप्राद्ऱ कयं।शॊख के राबकायी प्रमोग: शॊख भं जर बयकय भस्तक औयशयीय ऩय सछड़कने से ऩाऩं का ऺमहोता है। शॊख भं जर रेकय ऩूजन कयनेऩय देवी भहारक्ष्भी शीध्र प्रसन्न होतीहं, औय अऩनी कृ ऩा फनाएॊ यखती हं। कु छ जानकाय त्रवद्रानं का अनुबवयहा हं की शॊख भं दूध बयकय मफद वन्ध्मास्त्री को ऩीरामा जामे तो उसे बी सॊतान की प्रासद्ऱ होसकती हं। स्जस घय भं शॊख होता हं उस घय भं सनवास कतााओॊका सबी प्रकाय से भॊगर होता हं। उसके सबी योग,शोक का नाश होता हं उसके भान-सम्भान एवॊ ऩद-प्रसतष्ठा भं वृत्रद्ध होती हं।दस्ऺणावसता शॊख की ऩूजन त्रवसध:प्रात् स्नान आफद से सनवृत्त हो कय, स्वच्छ कऩड़े ऩहनकय, प्रथभ दूध से फपय शुद्ध जर से शॊख को स्नानकयामे। फपस स्वच्छ रार वस्त्र से उसे ऩोछे। फपय शॊखको सोने मा िाॊदी के ऩि से भढ़ना िाफहए (अथाात शॊखकी उऩयी सतह को सोने मा िाॊदी के ऩि का आवयणरगाकय ढ़क देना िाफहए), मफद सोने िाॊदी का ऩि
  10. 10. 10 जून 2013भॊि ससद्ध दुराब साभग्रीहत्था जोडी- Rs- 370 घोडे की नार- Rs.351 भामा जार- Rs- 251ससमाय ससॊगी- Rs- 370 दस्ऺणावतॉ शॊख- Rs- 550 इन्ि जार- Rs- 251त्रफल्री नार- Rs- 370 भोसत शॊख-Rs- 550 से 1450 धन वृत्रद्ध हकीक सेट Rs-251GURUTVA KARYALAYCall Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785,Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com >> Order Nowरगाना सॊबव न हो तो सोने मा िाॊदी की वयक (वयख,वका , वखा, ऩणा, ऩन्नी Foil आफद नाभं से जाना जाताहं) बी िढ़ा सकते हं। फपय शॊख का अष्ट िव्मं सेषोडशोऩिाय ऩूजन कयं।शॊख का ऩूजनसॊकल्ऩहाथ भं आिभनी भं रज रेकय नीिे देमे भॊि से सॊकल्ऩकयं (जहाॊ अभुक के स्थान ऩय सॊफॊसधत वषा, भास आफदका उच्िायण कयं।)ॐ अिाद्य अभुक वषे अभुक भासे अभुक ऩऺेअभुक सतथौ अभुख वायसे शुब नऺि कयण मोगरग्ने भभ ससद्धमथे फहयण्म गोदासा वाहना फहसभृत्रद्ध प्राप्त्मथे श्री दस्ऺणावतॉ शॊखस्म ऩूजनभ्अहॊ करयष्मे।अथाात: आजके अभुक वषा, अभुक भास, अभुक ऩऺ,अभुक सतसथ, अभुक वाय को भेये कामा की ससत्रद्ध के सरएसुवणा, गाम, दास, वाहन आफद सभृत्रद्ध की प्रासद्ऱ के सरएभं श्री दस्ऺणावतॉ शॊख जा ऩूजन कय यहा हूॊ।(उक्त भॊि उिायण कय शॊखका जर ऩािे भं छोड़ दे)ऩूजन भॊि:ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ श्रीधय कयस्थाप्ममोसनसध जातामश्रीदस्ऺणावता शॊखम ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ श्रीकयाम ऩूज्मामनभ्।उक्त भि का उच्िायण कयते हुवे शॊख को अष्ट िव्म वसुगॊसधत इि िढ़ाएॊ। िाॊदी के फयतन भं दूध भं िीनी,के सय, फादाभ, इरामिी सभरा कय नैवेद्य तैमाय कयं।सॊबव हो तो साथ भं पर बी यखं।कऩूय से आयती कयं।ध्मान भॊि:ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ श्रीधय कयस्थाप्म ऩमोसनसधजाताम रक्ष्भी सहोदयाम सिस्न्तभाथा सॊऩादकामश्री श्रीदस्ऺणावता शॊखाम श्री कयाम, ऩूज्माम क्रीॊश्रीॊ ह्रीॊ ॐ नभ् सवााबयण बूत्रषतामप्रशस्मान्गोऩान्गसॊमुताम कल्ऩवृऺाम स्स्थतामकाभधेनु सिन्ताभस्णनव सनसधरूऩाम ितुदाश यत्नऩरयवृत्ताम अष्टादश भहाससत्रद्ध सफहताम श्रीरक्ष्भीदेवता कृ ष्णदेव कयतर रसरताम श्रीशॊखभहासनधमे नभ्।ध्मान भॊि आवाहन अथाात ् स्तुसत भॊि है। इसके असतरयक्तफीज भॊि अथवा ऩाॊि जन्म गामिी शॊख भॊि का ग्मायहभारा जऩ कयना बी आवश्मक है।जऩ भॊि:ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ ब्रूॊ दस्ऺण शॊखसनधमे सभुिप्रबवाम नभ्।
  11. 11. 11 जून 2013फीज भॊि:ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ ब्रूॊ दस्ऺणभुखाम शॊखसनधमेसभुिप्रबवाम नभ्।शॊख का शाफय भॊि:ॐ दस्ऺणावते शॊखाम भभ् गृह धनवषाा कु रु कु रुनभ्॥शॊख गामिी भॊि:ॐ ऩान्िजन्माम त्रवद्महे। ऩावभानाम धीभफह।तन्न शॊख् प्रिोदमात्।प्रसतफदन उक्त फकसी एक भॊि का शॊख के सम्भुख फैठकय1, 3, 5, 7, 11 भाराएॊ जऩ कयना िाफहए। जऩ कीसभासद्ऱ ऩय जर को आकाश की ओय सछड़के ।ऋत्रद्ध-ससत्रद्ध तथा सुख-सभृत्रद्ध की प्रासद्ऱ के सरए हेतु महप्रमोग अत्मॊत राब प्रद हं।दोष यफहत दस्ऺणावतॉ शॊख का उऩयोक्त त्रवसध से ऩूजनकयना अत्मॊत राबप्रद होता हं।शॊख का ऩूजन फदन के प्रथभ प्रहय भं कयने से याज्म ऩऺसे सम्भान की प्रासद्ऱ होती हं।शॊख का ऩूजन फदन के फद्रतीम प्रहय भं कयने से धन,सॊऩत्रत्त व रक्ष्भी की प्रासद्ऱ होती हं एवॊ फुत्रद्ध का त्रवकासहोता हं।शॊख का ऩूजन फदन के तृतीम प्रहय भं कयने से सभाज भंमश, कीसता एवॊ फुत्रद्ध की वृत्रद्ध होती हं।शॊख का ऩूजन फदन के ितुथा प्रहय भं कयने से सॊतान कीप्रासद्ऱ एवॊ वृत्रद्ध होती हं।त्रवशेष: फदन औय यािी के िाय-िाय प्रहय होते हं, कु रआठ प्रहय का एक फदन होता हं। अथाात एक प्रहय तीनघॊटे का होता है। सूमोदम के सभम से प्रथन प्रहय कीगणना कयनी िाफहए। सूमोदम सभम भं 3 घॊटे का सभमजोड़ने ऩय दूसया प्रहय प्रायॊब होगा ऐसे तीन-तीन घॊटेजोडकय क्रभश् तीसया औय िौथा प्रहय जान सकते हं।***भॊि ससद्ध त्रवशेष दैवी मॊि सूसिआद्य शत्रक्त दुगाा फीसा मॊि (अॊफाजी फीसा मॊि) सयस्वती मॊि खोफडमाय मॊिसद्ऱसती भहामॊि(सॊऩूणा फीज भॊि सफहत) नव दुगाा मॊि खोफडमाय फीसा मॊिभहान शत्रक्त दुगाा मॊि (अॊफाजी मॊि) कारी मॊि अन्नऩूणाा ऩूजा मॊिसॊकट भोसिनी कासरका ससत्रद्ध मॊि श्भशान कारी ऩूजन मॊि एकाॊऺी श्रीपर मॊििाभुॊडा फीसा मॊि ( नवग्रह मुक्त) दस्ऺण कारी ऩूजन मॊि त्रिशूर फीसा मॊिनवाणा फीसा मॊि फगरा भुखी मॊि याज याजेश्वयी वाॊछा कल्ऩरता मॊिनवाणा मॊि (िाभुॊडा मॊि) फगरा भुखी ऩूजन मॊि >> Order NowGURUTVA KARYALAY92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA,BHUBNESWAR-751018, (ORISSA), Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,Visit Us: www.gurutvakaryalay.com www.gurutvajyotish.com and gurutvakaryalay.blogspot.comwww.gurutvajyotish.blogspot.com
  12. 12. 12 जून 2013दस्ऺणावता शॊख से जुड़े गूढ़ यहस्म स्वस्स्तक.ऎन.जोशी, ऩॊ.श्री बगवानदास त्रिवेदी जी,सुख-सभृत्रद्ध, धन-सॊऩत्रत्त, रयत्रद्ध-ससत्रद्ध एवॊ ऐश्वमा कीप्रासद्ऱ के सरए हभाये धभा शास्त्रं भेभ दस्ऺणावता शॊख काअत्मासधक भहत्व फतामा गमा हं। दस्ऺणावता शॊख काभुख दामीॊ औय से खुरा होता हं।शास्त्रोक्त भान्मता हं की स्जस घय भं त्रवसध-त्रवधानसे दस्ऺणावता शॊख का ऩूजन होता हं, उस घय भं धन,सुख, सभृत्रद्ध, मश-फकसता की वृत्रद्ध होती हं। उस घय भंरक्ष्भी स्स्थत होती हं।असरी नकरी ऩहिान के सरए शॊख को ऩाॊि फदनऔय ऩाॊि यात तक ठॊडे ऩानी भं यखे, मफद नकरी शॊखहोगा तो टूट जामेगा। इस प्रकाय असरी नकरी की ऩयखकयके शॊख का ऩूजन भं प्रमोग कयं।दहीॊ मा देशी घी के सभान यॊग वारा शॊख उत्तभहोता हं, धूसभर मा धुएॊ जैसे यॊग वारे शॊख को शॊस्खणी(अथाात स्त्री जाती का शॊख) कहाॊ जाता हं।2.5 तोरा अथाात िीस ग्राभ से असधक वजन काशॊख ऩूजन हेतु उत्तभ सभझे औय 2 तोरा मा उस्से कभवजन के शॊख को साधायण सभझे। त्रवद्रानं का भत हं की स्जस घय भं दस्ऺणावता शॊखका ऩूजन होता हं उस घय भं सवादा भाॊगसरक कामासॊऩन्न होते हं, उस घय भं भाॊगसरक कामं के दौयानफकसी प्रकाय का त्रवघ्न-फाधाएॊ, त्रवरॊफ मा अशुब नहीॊहोता हं। शॊख के ऩीछे के फहस्से को सोने से जड़वाना उत्तभ होता हं। दस्ऺणावता शॊख को ऩूजा स्थान भं स्थात्रऩत कय केप्रसतफदन स्नानाफद के ऩश्चमात स्वच्छ वस्त्र धायण कयप्रसतफदन ऩूजन कयं। ऩूवा फदशा भं फहनेवारी नदी भं स्नान कय नदी केजर को दस्ऺणावता शॊख भं बय कय अऩने भस्तकऩय उस जर की धाय सगयाने से सबी प्रकाय के ऩाऩंका नाश होता हं। स्जस स्त्री को सॊतान नहीॊ हो यही हो, सॊतान जीत्रवतन यहती हो, भृत सॊतान का जन्भ हो यहा हो ऐसीस्त्री को दस्ऺणावता शॊख का ऩूजन कयके स्जस गामके फछ़डे जीत्रवत हो ऐसी गाम का दूध शॊख भं बयरं। 108 फाय भॊि फोर कय शॊख का दूध को प्रसाद केरुऩ भं सेवन कयं। मह प्रमोग दूध के फदरे घी (थोड़ागयभ कयरे) का इस्तेभार कय सकते हं, इस प्रमोगसे स्त्रीको सॊतान होने की सॊबावनाएॊ फढ़ सकती हं। जो रोग नदी मा तीथा तक नहीॊ जा सकते ऐसे रोगदस्ऺणावता शॊख भं नदी मा तीथा का जर के छीॊटेअऩने भस्तक ऩय सछडकने, तथा अऩने त्रऩतृओॊ कानाभ रेकय शॊख से तऩाण कयने से उसके सबी ऩाऩनष्ट हो जाते हं, तथा त्रऩतृओॊ का उद्धाय होता हं,उनको सद्दगसत प्राद्ऱ होती हं। त्रवद्रानं का कथन हं की दस्ऺणावता शॊख भं जर बयकय उससे बगवान त्रवष्णु का ऩूजन कयने से उसकेसात जन्भ के ऩाऩं का नाश होता हं। स्जसके घय भं दस्ऺणावता शॊख होता हं उसके आमुष्म,कीसता तथा धन की वृत्रद्ध होती हं। जो शॊख के जरको भस्तक ऩय सछड़कता हं उसके घयभं रक्ष्भी स्स्थयहोती हं। स्जस स्थान ऩय शॊखनाद होता हं वहाॊ रक्ष्भी कास्स्थय सनवास होता हं। जो दस्ऺणावता शॊख के जर से स्नान कयता हं उसेसबी तीथं के स्नान का पर सभरता हं। शास्त्रं भं शॊख को त्रवष्णु स्वरुऩ भाना गमा हं, शॊखभं बगवान त्रवष्णु का वास होता हं। इस सरए जहाॊदस्ऺणावता शॊख होता हं वहाॊ बगवान त्रवष्णु का वासहोता हं जहाॊ बगवान त्रवष्णु का वास होता हं वहाॉ भाॉरक्ष्भी सनवास कयती हं। स्जससे जहाॉ भाॉ रक्ष्भी
  13. 13. 13 जून 2013सनवास कयती वहाॉ योग, दोष, दु्ख, दरयिता आफदघयभं यह नहीॊ सकतं। शॊख को रस्क्ष्भ प्रासद्ऱ का उत्तभ साधन भाना गमा हं। स्जस स्थान ऩय दस्ऺणावता शॊख होता हं वहाॊ बूत-प्रेतआफद सबी प्रकाय के उऩिवं से यऺा होती हं। शास्त्रं भं शॊख को सूमा िॊिभाॊ के सभान फदव्म गुणंसे मुक्त फतामा गमा हं। धासभाक भान्मता हं की तीनं रोक भं स्जतने तीथा हंवह सफ बगवान त्रवष्णु की आऻा से शॊख भं सनवासकयते हं। शॊख के दशान से ऩाऩं का नाश होता हं।शॊख ध्वसन एवॊ शॊख जर के त्रवशेष राब:आज तोऩ के गोरे मा फभ के शोय का जो असयहोता हं वहीॊ असय प्रािीन कार भं शॊख ध्वसन से होताथा। शॊख ध्वसन से शिुओॊ की सेना का भनोफर टूट जाता हं।मफद जॊगर भं जहाॊ शॊख ध्वसन होती हं वहाॊ सेशेय-फाध जैसे फहॊसक ऩशु आने की फहम्भत नहीॊ कयते।जहयी जीवजॊतु बी वहाॊ से दूय यहते हं।कु छ जानकायं का भानना हं की योग कायक शूक्ष्भजीवाणु मा त्रवषाणु हवा भं होते हं स्जसे वामयस कहते हं,जहाॊ प्रसतफदन प्रात् एवॊ सॊध्मा शॊख ध्वसन होती हं, वहाॊजीवाणु मा त्रवषाणु अथाात वामयस का उऩिव पै रता नहीॊ हं। दस्ऺणावतॉ शॊख को धन के बॊडाय भं यखने से धनकी वृत्रद्ध, अन्न-बॊडाय भं यखने से अन्न की वृत्रद्ध,वस्त्र के बॊडाय भं यखने से वस्त्र की वृत्रद्ध, अध्ममन वऩूजन कऺ भं यखने से ऻान की वृत्रद्ध, शमन कऺ भंयखने से सुख-शाॊसत की वृत्रद्ध होती हं। दस्ऺणावतॉ शॊख भं शुद्ध जर बयकय व्मत्रक्त, वस्तु,बूसभ-बवन आफद ऩय सछड़कने से दुबााग्म, असबशाऩ,असबिाय, ग्रहं की अशुबता इत्माफद सभाद्ऱ हो जाती हं। त्रवद्रानं कथन हं की ब्रह्म हत्मा, गो हत्मा जैसेभहाऩातकं से भुत्रक्त ऩाने के सरए दस्ऺणावतॉ शॊख केजर को सॊफॊसधत व्मत्रक्त ऩय सछड़कने से उसे ऩाऩं सेभुत्रक्त सभरती हं। दस्ऺणावतॉ शॊख का जर जादू-टोना, नज़य, काभण-टूभण जैसे असबिाय वारे कभं के दुष्प्रबावं को नष्टकयने भं सभथा हं।दस्ऺणावता शॊख के प्रकाय:शास्त्रं भं दस्ऺणावता शॊख के दं बेद फतामे हं: दस्ऺणावताऩुरुष शॊख औय दस्ऺणावता स्त्री शॊख।छोटे आकायं वारे कभ वजन के दस्ऺणावता शॊख को स्त्रीदस्ऺणावता शॊख कहाॊ जाता हं, धुॊधरे यॊग वारे शॊखं कोबी स्त्री दस्ऺणावता शॊख भाना जाता हं।वणा के अनुशाय दस्ऺणावता शॊख िाय प्रकाय के फतामे गमे हं।1- ब्राह्मण दस्ऺणावता शॊख:जो शॊख हये मा सपे द यॊग का हो, छू ने ऩय उसकी सतहकोभर भहसूस हो, शॊख वजन भं हल्का हो उस शॊख कोब्राह्मण दस्ऺणावता शॊख कहाॊ गमा हं।2- ऺत्रिम दस्ऺणावता शॊख:जो शॊख हल्का यक्त वणा हो, शॊख के अॊश को अरग कयनेवारी कु छ येखाएॊ फनी हो, शॊख की ध्वसन कका श हो उसशॊख को ऺत्रिम दस्ऺणावता शॊख कहाॊ गमा हं।3- वैश्म दस्ऺणावता शॊख:जो शॊख भोटा हो, शॊख के हय अॊश ऩय येखा हो तथा वहऩीरे यॊग की हो उस शॊख को वैश्म दस्ऺणावता शॊख कहाॊ गमा हं।4- शुि दस्ऺणावता शॊख:जो शॊख कठोय हो, शॊख का आकाय टेड़ा भेड़ा हो, वजनभं बायी हो, शॊख की ध्वसन कका श, यॊग थोडा कारा होउस शॊख को शुि दस्ऺणावता शॊख कहाॊ गमा हं।दस्ऺणावता शॊख के भुख्म तीन गुण भाने गमे हं।1- आकाय भं गोराकाय हो, 2- शॊख की सतह भुरामभहो तथा 3- सनभार होमफद ऐसा शॊख फकसी कायण से टूट जामे तो टूटे हुवेबाग को सोने की वयख मा सोने के ऩत्तय से उसे ढॊकदेना िाफहए।
  14. 14. 14 जून 2013शॊख नाद एक अद्भुत यहस्म स्वस्स्तक.ऎन.जोशी, फदऩक.ऐस.जोशीआज वैऻासनक अनुसॊधान से मह सात्रफत हो गमाहं की सनमसभत शॊखनाद कयने से उसके सकायात्भकप्रबाव से वातावयण भं व्माद्ऱ हासनकायक सूक्ष्भ जीवाणुओॊका नाश होता हं।जनकायं का भानना हं की शॊखनाद के दौयानवामुभॊडर भं कु छ त्रवशेष प्रकाय की तयॊगे उत्ऩन्न होती हं,जो ब्रह्माॊड की कु छ अन्म तयॊगं के साथ सभरकय अल्ऩऺणं भं ही सभग्र ब्रह्माॊड की ऩरयक्रभा कय रेती हं। उनकाभानना हं की ब्रह्माण्ड की ऩरयक्रभा कयते हुवे जफ फकसीएक तयॊग को जफ दूसयी अनुकू र तयॊगं प्राद्ऱ होती हं तफदोनं तयॊगं के सभनवम से भनुष्म को आत्भ फर-प्रेयणादेने वारी, योग, शोक आफद से यऺा कयने वारी, उसकीभनोकाभनाएॊ ऩूणा कयने वारी तयॊगे उठने रगती हं, औयभनुष्म अऩने कामा उद्देश्म भं शीघ्र सपरता प्राद्ऱ कय रेताहं।जानकायं का भानना हं की तयॊगे इतनी शूक्ष्भहोती हं की उसका प्रबाव हभं सयरता से िष्टी गोिय नहीॊहो ऩाता! शॊखनाद के सनयॊतय प्रमोग से ही इन तयॊगं केप्रबावं को सभझा जा सकता हं।त्रवसबन्न शोध से मह ससद्ध हो िुका हं की वाद्यं वध्वसनमं का छोटे-फड़े सबी जीवं ऩय फहोत ही गहयाप्रबाव ऩड़ता हं। उसी प्रकाय शॊख ध्वसन के प्रबाव एवॊभहत्वता को आजका आधुसनक त्रवऻान बी भान िुका हं।हभाये त्रवद्रान ऋत्रष-भुसनमं ने अऩने मोगफर एवॊअनुसॊधानो का सूक्ष्भ अध्ममन कय के हजायं वषा ऩूवा हीप्रकृ सत भं सछऩे गृढ़ यहस्मं को जान सरमा था, औयप्रकृ सत के गृढ़ यहस्मं के ऻान को हभाये ऋत्रष-भुसनमं नेत्रवसबन्न ग्रॊथं औय शास्त्रं के रुऩ सहेज कय भं प्रदानफकमा हं। शॊख ध्वसन एवॊ शॊख के त्रवसबन्न राब की शोधका श्रेम बी हभाये ऋत्रष-भुसनमं को ही जाता हं।त्रवद्रानं ने शॊख ध्वसन भं सभग्र ब्रह्माॊड को सनफहतभाना है। उनका भानना हं फक, अस्खर ब्रह्माॊड के सॊस्ऺद्ऱरूऩ को प्रकट कयने वारी मफद कोई शत्रक्त हं तो वह शॊखध्वसन है।ऩौयास्णक कार भं शॊखनाद के भाध्मभ से मुद्धायॊबकी घोषणा औय उत्साहवधान फकमा जाता था।आध्मास्त्भक कामं भं बी शॊख ध्वसन अऩना त्रवशेषभहत्व यखती हं।शास्त्रं भं उल्रेख हं की भहाबायत के मुद्ध भं शॊखका अत्मसधक उऩमोग हुवा था। मुद्ध के सभम के प्रभुखभहायसथमं के ऩास जो शॊख थे, उनका उल्रेख इस प्रकायफकमा गमा है-ऩाॊिजन्मॊ रृषीके शो देवदत्तॊ धनञ्जम।ऩौण्रॊ दध्भौ भहाशॊखॊ बीभकभाा वृकोदय॥अनन्तत्रवजमभ् याजा कु न्तीऩुिो मुसधत्रष्ठय।नकु र सहदेवश्च सुघोषभस्णऩुष्ऩकौ॥काश्मश्च ऩयभेष्वास सशखण्डी ि भहायथ।धृष्टद्युम्नो त्रवयाटश्च सात्मफकश्चाऩयास्जता्॥िुऩदो िौऩदेमाश्च सवाश ऩृसथवीऩते।सौबिश्च भहाफाहु् शॊखान्दध्भु् ऩृथक्ऩृथक्॥अथाात ्: श्रीकृ ष्ण बगवान ने ऩाॊिजन्म नाभक, अजुान नेदेवदत्त औय बीभसेन ने ऩंर शॊख फजामा। कुॊ ती ऩुि याजामुसधत्रष्ठय ने अनन्तत्रवजम शॊख, नकु र ने सुघोष एवॊसहदेव ने भस्णऩुष्ऩक नाभक शॊख का नाद फकमा। इसकेअरावा काशीयाज, सशखॊडी, धृष्टद्युम्न, याजा त्रवयाट,सात्मफक, याजा िुऩद, िौऩदी के ऩाॉिं ऩुिं औय असबभन्मुआफद सबी ने अरग-अरग शॊखं का नाद फकमा।
  15. 15. 15 जून 2013भाना जाता हं की मोद्धाओॊ द्राया मुद्ध बूसभ भंअद्भुत शौमा औय शत्रक्त के प्रदशान का आधाय शॊखनाद हीहं। मही कायण हं की ऩुयातन कार भं मोद्धाओॊ द्राया मुद्धभं शॊखनाद प्रमोग फकमा जाता था। बगवान श्रीकृ ष्ण काऩाॊिजन्म नाभक शॊख तो एकदभ अद्भुत औय अफद्रतीमहोने के कायण हीॊ भहाबायत भं त्रवजम का प्रतीक फनगमा।रृदम को झॊकृ त कयने, ऩुन् कॊ त्रऩत कयने वआनस्न्दत कयने भं शॊख ध्वसन का प्रबाव अद्भुत यहा हं।आज बी जफ फकसी धासभाक कामा मा भाॊगसरककामा के दौयान जफ शॊखनाद होता हं तो वहाॊ ऩयउऩस्स्थत रोगं का तन-भन आनस्न्दत हो जाता हं।शॊखनाद के त्रवसबन्न प्रबावं का उल्रेख हभं अनेक शास्त्रएवॊ ग्रॊथं भं सभरता है। कु छ कृ त्रषकामा से जुड़े रोगं नं अऩने खेतं भंशॊखनाद द्राया अऩनी पसर के उत्ऩादन भं वृत्रद्ध कयकेशॊख ध्वसन के भाध्मभ से सपरता प्राद्ऱ की हं। त्रवद्रानं का अनुबव हं की पसरं को ऩानी देते सभमशुब भुहूता भं 108 शॊखोदक (108 शॊखं का जर)सभरा कय पसर भं देने से पसर के उत्ऩादन भंवृत्रद्ध होती हं, अनाज के बॊडाय गृह भं कीड़ं-भकोड़ेआफद जीवं से फिाने के सरए प्रसत भॊगरवाय कोशॊखनाद कयना राबप्रद भाना हं। शॊखं का जर फनाने हेतु शॊख भं 12 से 24 घॊटे जरबयकय यखा जाता हं। त्रवसबन्न ग्रॊथं एवॊ शास्त्रं भं उल्रेख सभरते हं कीशॊख ध्वसन के प्रबाव से भनुष्म ही नहीॊ वयन ऩशु-ऩस्ऺमं को बी सम्भोफहत फकमा जा सकता हं। तॊि शास्त्रं भं उल्रेख हं की दोष यफहत शॊखनाद कीध्वसन तयॊग भनुष्म की कुॊ डसरनी एवॊ रुििक्र ऩयप्रबाव डारती हं व शयीय की सुषुद्ऱ शत्रक्त जाग्रत होनेरगती हं। शास्त्रकायं ने शॊख ध्वसन के अद्भुत प्रबावं का वणाकयते हुवे फतामा हं की शॊखनाद के प्रबाव से फसधयतादूय होना सॊबव हं। शॊखजर के सनमसभत सेवन से भूकता औय हकराऩनदूय हो सकता हं। मफद गबावसत स्त्री शॊखजर का सनमसभत सेवन कयं तोहोने वारी सॊतान स्वस्थ एवॊ सुॊदय होती हं। सनमसभत शॊख ध्वसन का श्रवण कयने से रृदमअवयोध, रृदम धात (फदर का दौया) नहीॊ होता। शॊख पूॉ कने से व्मत्रक्त के पे पड़े शत्रक्तशारी होते हं,क्मंफक शॊख पूॉ कने ऩय ऩहरे हवा पे पड़ं भं जभाहोती हं, फपय उसे भुॉह बयकय शॊख भं पूॉ कते हं। इसफक्रमा से आॉत, श्वास नरी पे पड़े एक साथ काभ कयते हं। शॊखनाद सनयॊतय कयने ऩय दभा, खाॉसी, मकृ त आफदयोग जड़ से नष्ट हो जाते हं। शॊखजर के सनमसभत सेवन से शीत त्रऩत्त, श्वेत प्रदय,यक्त की अल्ऩता आफद योग दूय हो जाते हं।***
  16. 16. 16 जून 2013हभाये जीवन भं शॊख का भहत्व स्वस्स्तक.ऎन.जोशी, श्रेमा.ऐस.जोशीशॊख की उत्ऩत्रत्त के त्रवषम भं शास्त्रं भं उल्रेख हैफक सभुि भॊथन के सभम िौदह प्रकाय के यत्नं भं शॊखबी सनकरा।भुख्म रुऩ से शॊख की उत्ऩत्रत्त जर से ही होती है।जर ही जीवन का आधाय है मही कायण हं की सृत्रष्ट कीउत्ऩत्रत्त बी जर से हुई है। अत: जर से उत्ऩत्रत्त केकायण शॊख की भहत्वता सवाासधक यही हं। अनेकं देवी-देवता के एक हाथ भं शॊख शोबामभान होता हं। महीकायण हं कई की सफदमं से शॊख का उऩमोग त्रवसबन्नधासभाक अनुष्ठानं भं त्रवशेष रूऩ से फकमा जाता है।शॊख के प्रभुख बेदशॊख के प्रकायवैसे तो प्राकृ सतक शॊख त्रवसबन्न प्रकाय के ऩामे जाते हं।इस सरए शॊख की त्रवसबन्नता एवॊ त्रवशेषता के अनुशाय हीइनकी ऩूजन-ऩद्धसत भं बी सबन्नता ऩाई जाती है।शॊख के प्रकाय उसकी आकृ सत (अथाात उदय) के आधायऩय भाने जाते हं।त्रवद्रानं ने शॊख के प्रभुख तीन प्रकाय फतामे हं1-दस्ऺणावृत्रत्त शॊख2-भध्मावृत्रत्त शॊख तथा3-वाभावृत्रत्त शॊख।दस्ऺणावृत्रत्त शॊख: स्जस शॊख का भुख दाफहने हाथ ऩयऩड़ता हं उसे दस्ऺणावृत्रत्त शॊख कहा जाता है।भध्मावृत्रत्त शॊख: स्जस शॊख का भुॉह फीि भं खुरता है,उसे भध्मावृत्रत्त शॊख कहा जाता है।वाभावृत्रत्त शॊख: स्जस शॊख का भुख फाएॊ हाथ ऩय ऩड़ता हंउसे वाभावृत्रत्त शॊख कहा जाता है।दस्ऺणावृसत शॊख औय भध्मावृत्रत्त शॊख दुराब भानेगम हं क्मोकी मह आसानी से उऩरब्ध नहीॊ होते हं।मह दोनं शॊख अऩनी दुराबता एवॊ िभत्कारयकगुणं के कायण ही अन्म शॊख की अऩेऺा असधकभूल्मवान होते हं।तीन शॊखं के अरावा अन्म शॊखं प्रभुख शॊखरक्ष्भी शॊख, गोभुखी शॊख, काभधेनु शॊख, त्रवष्णुशॊख, देव शॊख, िक्र शॊख, ऩंर शॊख, सुघोष शॊख,गरुड़ शॊख, भस्णऩुष्ऩक शॊख, याऺस शॊख, शसनशॊख, याहु शॊख, के तु शॊख, शेषनाग शॊख, कच्छऩशॊख आफद प्रकाय के होते हं।फहन्दु शास्त्रं भं 33 कयोड़ देवी-देवता का उल्रेखसभरता हं। इन सबी देवी-देवताओॊ के अऩने अरग शॊखभाने गमे हं, देव-असुय सॊग्राभ भं सभुि से स्जन 14 यत्नंकी प्रासद्ऱ हुई थी उसभं त्रवसबन्न तयह के शॊख बी सनकरे,स्जसभं से कई शॊखं का उऩमोग के वर ऩूजन के सरएहोते है।अबीतक प्राद्ऱ जानकायी के आधाय ऩय मह ऻातहुवा हं की त्रवश्व का सफसे फड़ा शॊख के यर याज्म भंगुरुवमूय के श्रीकृ ष्ण भॊफदय भं सुशोसबत है, इस शॊख कीरॊफाई अॊदाज से आधा भीटय है तथा वजन दो फकरोग्राभफतामा जाता है।
  17. 17. 17 जून 2013त्रवत्रवध आकाय प्रकाय वारे शॊख को शुब एवॊभाॊगसरक भानकय रोग उसका ऩूजन कयते हं उसे अऩनेऩास यखते हं। जो त्रवशेष आकृ सत वारे शॊख होते हं, स्जसेसभृत्रद्ध औय सपरता का प्रतीक भान कय उसे त्रवशेषसाधना भं प्रमोग फकमा जाता है।सॊस्कृ त भं शॊखके त्रवत्रवध नाभं का उल्रेखसभरता है।शॊख, सभुिज, कॊ फु, सुनाद, ऩावनध्वसन, कॊ फु,कॊ फोज, अब्ज, त्रियेख, जरज, अणोबव, भहानाद,भुखय, दीघानाद, फहुनाद, हरयत्रप्रम, सुयिय,जरोद्भव, त्रवष्णुत्रप्रम, धवर, स्त्रीत्रवबूषण, अणावबवआफद।शॊखं के प्रकाय के फाये भं शास्त्र भं उल्रेख फकमागमा हैफद्रधासदस्ऺणावसतावााभावत्रत्तस्तुाबेदत:दस्ऺणावताशॊकयवस्तु ऩुण्ममोगादवाप्मतेमद्गृहे सतष्ठसत सोवै रक्ष्म्माबाजनॊ बवेत्अथाात ्: शॊख दो प्रकाय के होते हं दस्ऺणावतॉ एवॊवाभावतॉ। दस्ऺणावतॉ शॊख ऩुण्म के ही मोग से प्राद्ऱहोता है। मह शॊख स्जस घय भं स्थात्रऩत होता है, वहाॊरक्ष्भी की वृत्रद्ध होती है। इसका प्रमोग अघ्मा आफद देनेके सरए त्रवशेषत: होता है। वाभवतॉ शॊख का ऩेट फाईंओय खुरा होता है। इसके फजाने के सरए एक सछि होताहै। इसकी ध्वसन से योगोत्ऩादक कीटाणु फरफहन ऩड़ जाते हं।श्रेष्ठ शॊख के रऺण के त्रवषम भं शास्त्रं भं उल्रेखफकमा गमा हैशॊखस्तुत्रवभर: श्रेष्ठश्चन्िकाॊसतसभप्रब:अशुद्धोगुणदोषैवशुद्धस्तु सुगुणप्रद:अथाात ्: सनभार व िन्िभा की काॊसत के सभानवारा शॊखश्रेष्ठ होता है जफफक अशुद्ध अथाात ् भग्न शॊख गुणदामकनहीॊ होता। गुणंवारा शॊख ही प्रमोग भं राना िाफहए।प्राम् शॊख का प्रमोग ऩूजा-ऩाठ भं त्रवशेष रुऩ से फकमाजाता है। जानकाय त्रवद्रानं का कथन हं की ऩूजन कोप्रायॊब भं शॊखभुिा से शॊख की प्राथाना कयनी िाफहए।त्वॊ ऩुया सागयोत्ऩन्नो त्रवष्णुना त्रवधृत: कये।नसभत: सवादेवैश्म ऩाञ्िजन्म नभो स्तुते।। वैऻासन अनुशॊधान के अनुसाय शॊख ध्वसन सेवातावयण से अशुत्रद्ध दूय होती हं औय वातावय शुद्धहोता हं। शॊख ध्वसन के ध्वसन ऺेि तक त्रवसबन्न प्रकाय केहासनकायक कीटाणुओॊ का नाश हो जाता है। आमुवेद के जानकायं के अनुसाय शॊखोदक व बस्भ सेऩेट की फीभारय, ऩीसरमा, मकृ त, ऩथयी आफद योगठीक फकमा जा सकता हं। ऩौयास्णक भान्मता है फक छोटे फच्िं छोटा शॊखफाॉधने से तथा शॊख भं जर बयकय उसे असबभॊत्रितकयके फच्िे को त्रऩराने से वाणी दोष नहीॊ होता, मफदहै तो वह दूय होने रगता है। ऩुयाणं भं उल्रेख सभरता है फक फसधय, भूक एवॊ श्वासयोगी मफद शॊख फजामं तो सूनने व फोरने की शत्रक्तऩा सकते हं। आधुसनक अनुसॊधान के अनुसाय शॊख फजाने से हभायेपे पड़ं का व्मामाभ हो जाता है, श्वास सॊफॊधी योगं सेरडऩे वारी शत्रक्त भजफूत हो जाती है। ऩूजन केसभम शॊख के जर को सबी ऩय सछड़कने से जर केप्रबाव से कीटाणुओॊ नाश होता है। शॊख का जर स्वास््म औय हभायी हस्डडमं, दाॊतंकेसरए फहुत राबदामक होता है। अनुसॊधान से ऩता िरा हं की शॊख भं कै स्ल्शमभ,पास्पोयस औय गॊधक के गुण सभाफहत होते हं जोउसभं जर बयकय यखने ऩय जर भं आते हं।
  18. 18. 18 जून 2013 जानकायं का भानना है फक शॊख के प्रबाव से सूमा कीहासनकायक फकयणं का अवयोधक होता हं। इस सरएफहन्दू सॊस्कृ सत भं सुफह औय शाभ ऩूजा के सभम शॊखध्वसन का त्रवधान फतामा गमा हं। वैऻासनक अनुसॊधान से मह ऩरयणाभ साभने आमा हंकी शॊख की ध्वसन जहाॊ तक जाती है, वहाॊ तक व्माद्ऱफीभारय उत्ऩन्न कयने औय फढ़ाने वारे कीटाणु नष्ट होजाते हं। इससे हभाये आसऩास का वातावयण शुद्ध होजाता है। शॊख भं जो राबदामक घटक कै स्ल्शमभ, पास्पोयसऔय गॊधक भौजूद होते हं। उसके कायण जरसुवाससत औय कीटाणु यफहत हो जाता है। इसीसरए तोहभाये शास्त्रं भं शॊख जर को भहाऔषसध भाना जाताहै। शॊखनाद से आसऩास की नकायात्भक ऊजाा का नाशहोकय सकायात्भक ऊजाा का सॊिाय होता है। शॊख नाद से स्भयण शत्रक्त की वृत्रद्ध होती है।भॊि ससद्ध दुराब साभग्री भॊि ससद्ध भाराहत्था जोडी- Rs- 370, 550, 730, 1250, 1450 स्पफटक भारा- Rs- 190, 280, 460, 730, DC 1050, 1250ससमाय ससॊगी- Rs- 370, 550, 730, 1250, 1450 सपे द िॊदन भारा - Rs- 280, 460, 640त्रफल्री नार- Rs- 370, 550, 730, 1250, 1450 यक्त (रार) िॊदन - Rs- 100, 190, 280कारी हल्दी:- 370, 550, 750, 1250, 1450, भोती भारा- Rs- 280, 460, 730, 1250, 1450 & Aboveदस्ऺणावतॉ शॊख- Rs- 550, 750, 1250, 1900 त्रवधुत भारा - Rs- 100, 190भोसत शॊख- Rs- 550, 750, 1250, 1900 ऩुि जीवा भारा - Rs- 280, 460भामा जार- Rs- 251, 551, 751 कभर गट्टे की भारा - Rs- 210, 280इन्ि जार- Rs- 251, 551, 751 हल्दी भारा - Rs- 150, 280धन वृत्रद्ध हकीक सेट Rs-251(कारी हल्दी के साथ Rs-550) तुरसी भारा - Rs- 100, 190, 280, 370घोडे की नार- Rs.351, 551, 751 नवयत्न भारा- Rs- 1050, 1900, 2800, 3700 & Aboveऩीरी कौफड़माॊ: 11 नॊग-Rs-111, 21 नॊग Rs-181 नवयॊगी हकीक भारा Rs- 190 280, 460, 730हकीक: 11 नॊग-Rs-111, 21 नॊग Rs-181 हकीक भारा (सात यॊग) Rs- 190 280, 460, 730रघु श्रीपर: 1 नॊग-Rs-111, 11 नॊग-Rs-1111 भूॊगे की भारा Rs- 190, 280, Real -1050, 1900 & Aboveनाग के शय: 11 ग्राभ, Rs-111 ऩायद भारा Rs- 730, 1050, 1900, 2800 & Aboveकारी हल्दी:- 370, 550, 750, 1250, 1450, वैजमॊती भारा Rs- 100,190गोभती िक्र Small & Medium 11 नॊग-75, 101, 151, 201, रुिाऺ भारा: 100, 190, 280, 460, 730, 1050, 1450गोभती िक्र Very Rare Big Size : 1 नॊग- 51 से 550(असत दुराब फड़े आकाय भं 5 ग्राभ से 11 ग्राभ भं उऩरब्ध)भूल्म भं अॊतय छोटे से फड़े आकाय के कायण हं।>> Order NowGURUTVA KARYALAYBHUBNESWAR-751018, (ORISSA),Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785,Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.comVisit Us: www.gurutvakaryalay.com www.gurutvajyotish.com and gurutvakaryalay.blogspot.com

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