Gurutva jyotish jan 2012

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Gurutva jyotish jan 2012

  1. 1. Font Help >> http://gurutvajyotish.blogspot.comगुरुत्व कार्ाालर् द्वारा प्रस्तुत मासिक ई-पत्रिका जनवरी- 2012 NON PROFIT PUBLICATION
  2. 2. FREE E CIRCULAR गुरुत्व ज्र्ोसतष पत्रिका जनवरी 2012िंपादक सिंतन जोशी गुरुत्व ज्र्ोसतष त्रवभागिंपका गुरुत्व कार्ाालर् 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIAफोन 91+9338213418, 91+9238328785, gurutva.karyalay@gmail.com,ईमेल gurutva_karyalay@yahoo.in, http://gk.yolasite.com/वेब http://www.gurutvakaryalay.blogspot.com/पत्रिका प्रस्तुसत सिंतन जोशी, स्वस्स्तक.ऎन.जोशीफोटो ग्राफफक्ि सिंतन जोशी, स्वस्स्तक आटाहमारे मुख्र् िहर्ोगी स्वस्स्तक.ऎन.जोशी (स्वस्स्तक िोफ्टे क इस्डिर्ा सल) ई- जडम पत्रिका E HOROSCOPE अत्र्ाधुसनक ज्र्ोसतष पद्धसत द्वारा Create By Advanced Astrology उत्कृ ष्ट भत्रवष्र्वाणी क िाथ े Excellent Prediction १००+ पेज मं प्रस्तुत 100+ Pages फहं दी/ English मं मूल्र् माि 750/- GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
  3. 3. अनुक्रम वात्रषाक रासशफल त्रवशेषमेष रासश वात्रषाक भत्रवष्र् फल 2012 18 तुला रासश वात्रषाक भत्रवष्र् फल 2012 55वृषभ रासश वात्रषाक भत्रवष्र् फल 2012 24 वृस्िक रासश वात्रषाक भत्रवष्र् फल 2012 61समथुन रासश वात्रषाक भत्रवष्र् फल 2012 30 धनु रासश वात्रषाक भत्रवष्र् फल 2012 67कक रासश वात्रषाक भत्रवष्र् फल 2012 ा 36 मकर रासश वात्रषाक भत्रवष्र् फल 2012 73सिंह रासश वात्रषाक भत्रवष्र् फल 2012 42 कभ रासश वात्रषाक भत्रवष्र् फल 2012 ुं 79कडर्ा रासश वात्रषाक भत्रवष्र् फल 2012 49 मीन रासश वात्रषाक भत्रवष्र् फल 2012 84 अडर् लेखमकर िंक्रांसत पवा 6 पररक्षा मं िफलता प्रासि हे तु 14िरस्वती जर्ंती (वंित पंिमी) 8 त्रवद्या प्रासि क सलए वास्तु क उपार् े े 15फहडद ु धमा मं िरस्वती उपािना का महत्व 9 त्रवद्या प्रासि हे तु िरस्वती कवि और र्ंि 16त्रवद्या प्रासि क त्रवलक्षण उपार्(टोटक) े े 11 वात्रषाक रासशफल िे िंबंसधत िूिना 17त्रवद्या प्रासि क त्रवलक्षन प्रर्ोग े 13 हमारे उत्पादमंि सिद्ध पडना गणेश 14 भाग्र् लक्ष्मी फदब्बी 60 मंिसिद्ध लक्ष्मी र्ंििूसि 92 शादी िंबंसधत िमस्र्ा 103मूंगा गणेश 21 द्वादश महा र्ंि 66 मंि सिद्ध दै वी र्ंि िूसि 92 पढा़ई िंबंसधत िमस्र्ा 103गणेश लक्ष्मी र्ंि 40 मंिसिद्ध स्फफटक श्री र्ंि 72 िवा कार्ा सित्रद्ध कवि 93 िवा रोगनाशक र्ंि/ 107मंि सिद्ध रूद्राक्ष 48 शसन तैसतिा 84 जैन धमाक त्रवसशष्ट र्ंि े 94 मंि सिद्ध कवि 109दस्क्षणावसता शंख 48 पुरुषाकार शसनर्ंि 90 अमोद्य महामृत्र्ुंजर् कवि 96 YANTRA 110मंि सिद्ध दलाभ िामग्री 54 ु नवरत्न जफित श्री र्ंि 91 राशी रत्न एवं उपरत्न 96 GEMS STONE 112घंटाकणा महावीर िवा सित्रद्ध महार्ंि 95 मंि सिद्ध िामग्री- 35, 60, 101, 102, 103 स्थार्ी और अडर् लेखिंपादकीर् 4 फदन-रात क िौघफिर्े े 105जनवरी 2012 मासिक पंिांग 97 फदन-रात फक होरा - िूर्ोदर् िे िूर्ाास्त तक 106जनवरी 2012 मासिक व्रत-पवा-त्र्ौहार 99 िूिना 113जनवरी 2012 -त्रवशेष र्ोग 104 हमारा उद्दे श्र् 115दै सनक शुभ एवं अशुभ िमर् ज्ञान तासलका 104
  4. 4. GURUTVA KARYALAY िंपादकीर् वक्रतुंि महाकार् िूर्कोफट िमप्रभ: ा सनत्रवाघ्नं करु मे दे व: िवाकार्ेषु िवादा ुत्रप्रर् आस्त्मर् बंधु/ बफहन जर् गुरुदे व भारतीर् िंस्कृ सत मं प्रत्र्ेक शुभकार्ा करने क पूवा भगवान श्री गणेश जी की पूजा की जाती हं । इिी नर्े वषा े2012 का शुभारं भ श्री गणेश जी का नाम स्मरण कर नर्े वषा फक शुरुआत करते हं । ‘‘श्री गणेशार् नमः” । भगवान श्री गणेश जी आपको और आपक पररवारको िमस्त भौसतक िुख िाधन एवं शांसत प्रदान करं । आपको ेअपने कार्ा क्षेि मं िमस्त प्रकार की सित्रद्धर्ां और उप्लबसधर्ां प्राि कर आप फदन प्रसतफदन प्रगसत की और अग्रस्तहं ऎिी शुभ कामना। वात्रषाक रासश फल 2012 का अंक आपक मागादशान हे तु उपलब्ध करवारहे हं । इि अंक मं ग्रहो फक स्स्थती एवं ेरासश क आधार पर ज्र्ोसतषी गणनाओं क अनुशार रासशफल दे ने का प्रर्ाक फकर्ा हं । े े पूरे वषा क दौरान प्रमुख ग्रहो ेकी गोिर स्स्थती का आपकी रासश पर प्रभाव ओ दशााने का प्रर्ाि फकर्ा हं । वात्रषाक रासशफल स्टीकता हे तु एवं आपकोपढने और िमझने मं आिानी हो इि उद्दे श्र् िे 15-15 फदनो की ग्रह स्स्थती का अवलोकन कर रासशफल प्रदान फकर्ागर्ा हं । रासशफल क िाथ े िंबंसधत रासश क स्वामी ग्रह िंबंसधत ग्रह शांसत क उपार्, रासश रत्न, रुद्राक्ष, व्रत-उपवाि, े ेदान और िरल उपार् फदए जा रहे हं । गुरुत्व ज्र्ोसतष पत्रिका को पिंद करने एवं उिे िराहने हे तु सिंतन जोशी एवं गुरुत्व कार्ाालर् पररवार की औरिे आपको अनेको अनेक शुभकामनाएं। पीछले वषा 2011 जनवरी अंक मं गुरुत्व कार्ाालर् द्वारा प्रकासशत गुरुत्व ज्र्ोसतष पत्रिका(फहडदी) को दे श-त्रवदे शो क पाठको फक बढती िंख्र्ा एवं िुत्रवधा क सलर्े इि वषा हम जल्द गुरुत्व े ेज्र्ोसतष पत्रिका का (English Edition) उपलब्ध करवाने हे तु प्रर्ाि रत हं उल्लेख फकर्ा गर्ा थालेफकन। कछ त्रवशेष तकसनकी िमस्र्ाएं एवं लेखं क प्रसतसलत्रप िंरक्षण (Copy Protection) क ु े ेअभाव मं English Edition का शुभारं भ नहीं हो पार्ा हं स्जिका हमं खेद हं । सिंतन जोशी
  5. 5. गुरुत्व कार्ाालर् पररवार की और िे आप िभी को HAPPY NEW YEAR 2012 हमारे िभी लेखक, पाठक, र्ोगदानकतााओ, अनुवादक,स्वर्ंिेवकं और शुभसिंतकं को ं नववषा2012 की हाफदाक शुभकामना….. ईश्वर हमेशा आपको और आपक पररवार को आशीवााद क रुप मं अ्छा स्वास्थ्र्, ढे र े े िारी खुशीर्ां और िुख-िमृत्रद्ध प्रदान करं । गुरुत्व ज्र्ोसतष मासिक ई-पत्रिका क िंपादन कार्ा हे तु गुरुत्व कार्ाालर् पररवार क िदस्र्ं ने उडनत े ेज्र्ोसत, अंक ज्र्ोसतष, वास्तु, र्ंि, मंि, तंि,रत्न इत्र्ाफद रहस्र्मर् आध्र्ास्त्मक त्रवषर् िे आपको पररसित करानेका लगातार प्रर्ाि फकर्ा हं । आपक िहर्ोग िे गुरुत्व ज्र्ोसतष पत्रिका को ओर भी बेहतर बनाने हे तु हम ेसनरं तर प्रर्ािरत हं । इि सलए अपनी प्रसतफक्रर्ा एवं िुझाव सनरं तर भेजते रहने का कष्ट करं । स्जििे हमारा मागादशान होतारहे ओर आपको बेहतर िे बेहतर पत्रिका प्राि होती रहे ।गुरुत्व कार्ाालर् पररवार क िदस्र्ं त्रपछले एक िाल मं पत्रिका क 12 अंको मं अनेको महत्वपूणा त्रवषर् िे े ेआपको पररसित कराने का िफल प्रर्ाि फकर्ा तो कछ प्रमुख त्रवषर्ो िे हम आपका मागादशान नहीं कर ुपाए। गुरुत्व कार्ाालर् पररवार की ओर िे वषा 2012 क 12 अंको मं हम आपका प्रार्ः िभी त्रवषर्ो मं भरपूर ेमागादशान कर पाए इि उद्दे श्र् िे पूणतः प्रर्ािरत हं । ा हमारे त्रप्रर् एवं आस्त्मर् बंधु/बहनो की सशकार्त हं की पत्रिका प्रसतमाह 1 ताररख को उपलब्धनहीं हो पाती। उन िभी त्रप्रर् एवं आस्त्मर् बंधु/बहनो िे हमारा अनुरोध हं की कृ प्र्ा अपना िहर्ोगबनाए रखे। आपकी इि िमस्र्ा को जल्द ही िुलझा फदर्ा जाएगा। इि दीशा मं हम सनरं तर प्रर्ािरत हं , की आपको पत्रिका प्रसतमाह 1 ताररख िे पूवा प्राि हो जाए। त्रवलंब कछ तकसनकी िमस्र्ा/िमर् ुक अभाव क कारण हो रहा हं । े ेGURUTVA KARYALAY
  6. 6. 6 जनवरी 2012 मकर िंक्रांसत पवा  सिंतन जोशीमकर िंक्रास्डत और दान का महत्व: मकर िंक्रांसत क फदन दान का त्रवशेष महत्व हं । त्रवद्वानो क मत िे मकर िंक्रांसत क फदन धासमाक िाफहत्र्-पुस्तक े े ेइत्र्ादी धमा स्थलं मं दान फकर्े जाते हं ।मकर िंक्रांसत क फदन सतल का दान े िंक्रांसत क फदन दान करने िे प्राि होने वाले पुण्र् का फल अडर् फदनं की तुलना मं बढ जाता हं । इि सलर्े मकर ेिंक्रांसत क फदन र्थािंभव फकिी गरीब को अडनदान, सतल एवं गुि का दान करना शुभदार्क माना गर्ा हं । सतल र्ा सतल िे बने ेलड्िू र्ा फफर सतल क अडर् खाद्ध पदाथा भी दान मं फदर्े जा िकते हं । ेमकर िंक्रास्डत पर स्नान मकर िंक्रांस्डत का धासमाक एवं आध्र्ास्त्मक महत्व माना जाता हं । माडर्ता हं फक इि फदन िूर्ा क उत्तरार्ाण मं प्रवेश ेकरने िे दे वलोक मं रात्रि िमाि होती हं और फदन की शुरूआत होती है । दे वलोक का द्वारा जो िूर्ा क दस्क्षणार्ण होने िे 6 महीने ेतक बंद होता हं मंकर िंक्रास्डत क फदन खुल जाता हं । इि फदन दान इत्र्ादी पुण्र् कमा फकर्े जाते हं उनका शुभ फल प्राि होता है । ेमकर िंक्रास्डत मं स्नान एवं दान का भी त्रवशेष महात्मर् शास्त्रों मं बतार्ा गर्ा है । भारतीर् धमा ग्रंथं मं स्नान का अथा शुद्धता एवं िास्त्वकता है । अत: स्नान को फकिी भी शुभ कमा करने िे पहले फकर्ाजाता है । मकर रासश मं िूर्ा क प्रवेश िे िूर्ा का ित्व एवं रज गुण बढ़ जाता है जो िूर्ा की तेज फकरणं िे हमारे शरीर मं प्रवेश ेकरता है । र्ह अलौफकक फकरणं हमारे शरीर को ओज, बल और स्वास्थ्र् प्रदान करे , अत: इन फकरणं को ग्रहण करने हे तु तन-मनकी शुत्रद्ध क सलए पुण्र्काल मं स्नान करने का त्रवधान बतार्ा गर्ा है । े भारतीर् धमा शास्त्रोो क अनुिार प्रात: िूर्ोदर् िे कछ घंटे पहले का िमर् पुण्र् काल माना जाता है । पुण्र् काल मं स्नान े ुकरना अत्र्ंत पुण्र् फलदार्ी माना गर्ा है । धमाशास्त्रों क मुतात्रबक शुभ िंर्ोगो पर जल मं दे वताओं एवं तीथं का वाि होता है । इि ेसलर्े इन अविरं मं नदी अथवा िरोवर मं स्नान करना शुभफलदार्क होता हं । मकर िंक्रांस्डत पर िूर्ोदर् िे पूवा स्नान दग्ध ुस्नान क िमान फल दे ता है अत: इन अविरं पर पूणा शुत्रद्ध हे तु पुण्र् काल मं स्नान करने की परम्परा र्ुगो िे िली आ रही है । े वास्तु दोष सनवारक र्ंि भवन छोटा होर्ा बिा र्फद भवन मं फकिी कारण िे सनमााण मं वास्तु दोष लगरहा हो, तो शास्त्रों मं उिक सनवारण हे तु वास्तु दे वता को प्रिडन एवं िडतुष्ट करने क सलए अनेक उपार् का उल्लेख समलता े े हं । उडहीं उपार्ो मं िे एक हं वास्तु र्ंि फक स्थापना स्जिे घर-दकान-ओफफि-फक्टरी मं स्थात्रपत ु ै करने िे िंबंसधत िमस्त परे शानीओं का शमन होकर वास्तु दोष का सनवारण होजाता हं एवं भवन मं िुख िमृत्रद्ध का आगमन होता हं । मूल्र् माि Rs : 550
  7. 7. 7 जनवरी 2012 िरस्वती जर्ंती (वंित पंिमी)  सिंतन जोशी 28 जनवरी 2012 को फहडद ू पंिांग त्रवक्रमी िंवत ् 2068 माघ माि शुक्ल पक्ष की पंिमी को वंित पंिमी अथाात िरस्वती पूजा क फदन मां िरस्वती की े पूजा आरधना कर उनकी कृ पा प्राि करने हे तु वषा क िवा श्रेष्ठ फदनो मं िे एक हं । े त्रवद्वानो क मत िे वंित पंिमी का फदन त्रवसभडन शुभ कार्ो क शुभ आरं भ हे तु े े अत्र्ंत शुभ माना जाता हं । वंित पंिमी को िरस्वती जर्ंती, ऋत्रष पंिमी, श्री पंिमी इत्र्ादी नामो िे भी मनार्ा जाता हं । वंित पंिमी अथांत वंित ऋतु क आगमन का प्रथम फदन। त्रवद्वानो े क मत िे वंित ऋतु का मौिम मनुष्र् क जीवन मं िकारात्मक भाव, ऊजाा, े े आशा एवं त्रवश्वाि को जगाता हं । फहडद ू िंस्कृ सत मं वंित ऋतु का स्वागत त्रवद्या की दे वी िरस्वती की पूजा-अिाना क िाथ फकर्ा जाता हं । े इनके पूजन िे त्रवद्या एवं ज्ञान की प्रासि होती हं । वंित पंिमी क फदन िे भारत क कइ फहस्िो मे ब्िे को प्रथम अक्षर े े ज्ञान की शुरुवात की जाती है । एिी माडर्ता है की विंत पंिमी क फदन त्रवद्यांभ े करने िे ब्िे की की वाणी मं मां िरस्वती स्वर्ं वाि करती और ब्िे पर जीवन भर कृ पा वषााती हं । एवं ब्िं मं त्रवद्या एवं ज्ञान का त्रवकाि होता हं स्जस्िे ब्िं मे श्रेष्ठता, िदािार, तेजस्स्वता जेिे िद्द गुणं का आगमन होना प्रारं भ होता हं , और ब्िा उत्तम स्मरण शत्रि र्ुि त्रवद्वान होता हं । वंित पंिमी क फदन दे वी िरस्वती क अलवा े े भगवान त्रवष्णु, श्री कृ ष्ण, कामदे व व रसत की पूजा भी की जातीहं । माडर्ता हं फक भगवान श्रीकृ ष्ण विंत पंिमी क फदन प्रत्र्क्ष रूप िे प्रकट होते हं । इिी कारण िे ब्रज मं विंत ेपंिमी क फदन िे ही होली का उत्िव शुरू हो जाता है । विंत पंिमी क फदन दांपत्र् िुख की कामना िे कामदे व और े ेउनकी पत्नी रसत की पूजा की जाती है । कामदे व की पूजा कर इिी पुरुषाथा की प्रासि की होती है । वंित पंिमी क फदन नर्े व्र्विार् का शुभ आरं भ र्ा व्र्विार् हे तु नर्ी शाखा का शुभ आरं भ करना अत्र्ंत शुभ माना ेजाता हं । विंत पंिमी क फदन पूजा आरधना िे मां की कृ पा िे अध्र्ात्म ज्ञाना मं वृत्रद्ध होती हं । ेिरस्वती पूजन -:शास्त्रो क अनुशार वंित पंिमी क फदन त्रवद्या की दे वी िरस्वती का जडम हुआ था । वंित पंिमी क े े ेफदन ब्रह्माजी क मानि िे दे वी िरस्वती प्रकट हुई थी। े िरस्वती जी को बुत्रद्ध, ज्ञान, िंगीत और कला की दे वी माना जाता हं । पौरास्णक काल मं भी त्रवद्या प्रासि क सलए ेमाता-त्रपता अपने ब्िे को ऋत्रष-मुसनर्ं क आश्रम एवं गुरुकल मं भेजते थे। े ु
  8. 8. 8 जनवरी 2012विंत पंिमी क फदन िुबह स्नान इत्र्ादी क पिर्ात स्व्छ कपिे पहन कर िरस्वती की पूजा-अिाना की जाती है । े ेविंत पंिमी क फदन वैफदक मंि, िरस्विी कवि, स्तुसत आफद िे दे वी की प्राथाना करना लाभदार्क होता हं । ेविंत पंिमी क फदन िरस्वती की कृ पा प्राि हो इि सलर्े ब्िो की फकताबे एवं लेखनी (कलम) की पूजा की जाती है । ेविंत पंिमी क फदन बालकं को अक्षर ज्ञान एवं त्रवद्यारं भ भी कराने फक परं परा हं । े सनत्र् कमा िे सनवृत होकर श्वेत वस्त्रो धारण करक उत्तर-पूवा फदशा मं र्ा अपने पूजा स्थान मं िरस्वती का सिि- े मूसता अपने िम्मुख स्थापन करे । िवा प्रथम पूजा का प्रारं भ श्री गणेशजी की पूजा िे करे तत पश्र्ात ही मां िरस्वती की पूजा करं । मां िरस्वती को श्वेत रं ग अत्र्ंत त्रप्रर् है । इि सलर्े पूजा मं ज्र्ादा िे ज्र्ादा श्वेत रं ग की वस्तुओं का प्रर्ोग करं । पूजा मे िफद वस्त्रो, स्फफटक माला, िंदन, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप, नैवेद्य मे श्वेत समष्ठान आदी का प्रर्ोग करे स्जस्िे मां े की कृ पा शीघ्र प्राि हो मां िरस्वती क वैफदक अथवा बीज मंिो का र्थािंभव जाप करे । और िरस्वती स्तोि, िरस्वती अष्टोत्तरनामावली, े स्तोि एवं आरती कर क पूजा िंपडन करे । ेविंत पंिमी की कथा: एक फदन ब्रह्माजी िमस्त लोक का अवलोकन करते हुवे भूलोक आर्े। ब्रह्माजी ने भूलोक पर िमस्त प्राणी-जंतुओंको मौन, उदाि और फक्रर्ा फहन अवस्था मं दे खा। जीवलोक की र्ह दशा दे खकर ब्रह्माजी असधक सिंसतत होगएं औरिोिने लगे इन जीवो क कल्र्ाण क सलर्े क्र्ा उपार् फकर्ा जाएं? स्जस्िे िभी प्राणी एवं जीव आनंद और प्रिडन होकर े ेझुमने लगे। मन मं इि त्रवषर् मं सिंतन मनन करते हुए उडहंने कमल पुष्पं पर जल सछिका तो, उि पुष्प मं िे दे वीिरस्वती प्रकट हुई। दे वी िफद वस्त्रो धारण फकए, गले मं कमलं की माला धारन फकर्े, हाथं मं वीणा एवं पुस्तक धारण ेफकए हुए थी। भगवान ब्रह्मा ने दे वी िे कहा, आप िमस्त प्रास्णर्ं क कठ मं सनवाि कर उडहं वाणी प्रदान करो। आज िे िभी को े ंजीव को िैतडर् एवं प्रिडन करना आपका काम होगा और त्रवश्व मं आप भगवती िरस्वती क नाम िे प्रसिद्ध होगी। ेआपक द्वारा इि लोक का कल्र्ाण फकर्े जाने क कारण त्रवद्वत िमाज आपका आदर एवं पूजा करे गा। े े वंित पंिमी क फदन ज्ञान और त्रवद्या की दे वी िरस्वती की पूजा-अिाना की जाती है । दे वी िरस्वती की आराधना िे ेत्रवद्या आती है , त्रवद्या िे त्रवनम्रता, त्रवनम्रता िे पािता, पािता िे धन और धन िे िुख प्राि होता है । ओनेक्ि जो व्र्त्रि पडना धारण करने मे अिमथा हो उडहं बुध ग्रह क उपरत्न ओनेक्ि को धारण करना िाफहए। े उ्ि सशक्षा प्रासि हे तु और स्मरण शत्रि क त्रवकाि हे तु ओनेक्ि रत्न की अंगूठी को दार्ं हाथ की िबिे छोटी े उं गली र्ा लॉकट बनवा कर गले मं धारण करं । ओनेक्ि रत्न धारण करने िे त्रवद्या-बुत्रद्ध की प्रासि हो होकर स्मरण े शत्रि का त्रवकाि होता हं ।
  9. 9. 9 जनवरी 2012 फहडद ु धमा मं िरस्वती उपािना का महत्व  स्वस्स्तक.ऎन.जोशी फहडद ू धमा क वैफदक िाफहत्र् मं मंि उपािना का महत्त्वपूणा स्थान हं । आज क आधुसनक र्ुग मं लगातार े ेिंशोसधत हो रहे वैज्ञासनक शोध िे र्ह सिद्ध हो िूका अनुभूत ित्र् की मडिं मं अद्भत शत्रि होती हं । ु लेफकन मंिकी िकारात्मक शत्रि जाग्रह हो इि सलए मंि क प्रर्ोग का उसित ज्ञान, मंि की े क्रमबद्धता और मंि का शुद्धउ्िारण असत आवश्र्क होता हं । जैिे भीि मं जाते हुए र्ा बैठे हुए व्र्त्रि मं िे स्जि व्र्त्रि क नाम का उ्िारण होता हं । उि व्र्त्रि का ेध्र्ान ही ध्वसन की और गसत करता हं । अडर् लोग उिी अवस्था मं िल रहे होते हं र्ा बैठे रहते हं अथवा त्रवशेषध्र्ान नहीं दे ते हं । उिी प्रकार िोएं हुए व्र्त्रिर्ं मं स्जि व्र्त्रि क नाम का उ्िारण होता हं कवल उिी व्र्त्रि की े ेसनंद्रा भंग होती हं अडर् लोग िोएं रहते हं र्ा त्रवशेष ध्र्ान नहीं दे ते। उिी प्रकार दे वी-दे वता क त्रवशेष मंि का शुद्ध ेउ्िारण कर सनस्ित दे वी-दे वता की शत्रि को जाग्रत फकर्ा जाता िकता हं । दे वी िरस्वती फहडद ू धमा क प्रमुख दे वी-दे वताओ मं एक हं, स्जिे मन, बुत्रद्ध, ज्ञान और कला, की असधष्टािी दे वी ेमाना जाता हं । दे वी का स्वरुप िडद्रमा क िमान श्वेत उज्जवल, श्वेतवस्त्रो धारी, श्वेत हं ि पर त्रवरास्जत, िार भुजाधारी, ेहाथ मं वीणा, पुस्तक, माला सलए हं और एक हाथ वरमुद्रा मं हं । मस्तक पर रत्न जफित मुगट शोभार्मान हं । दे वी िरस्वती क पूजन िे जातक को त्रवद्या, बुत्रद्ध व नाना प्रकार की कलाओं मं सिद्ध एवं िफलता प्राि होती हं । ेिरस्वती ब्रह्मा की मानि पुिी हं । शास्त्रोो मं दे वी िरस्वती को िरस्वती, महािरस्वती, नील िरस्वती कहा गर्ा हं । दे वी िरस्वती की स्तुसत ब्रह्मा,त्रवष्णु, महे श, दे वराज इडद्र और िमस्त दे वगण करते हं ।दे वी िरस्वती की कृ पा िे जि िे जि व्र्त्रि भी त्रवद्वान बनजाते हं । हमारे धमा शास्त्रोो मं इि क उदाहरण भरे पिे हं । स्जि मं िे एक उदाहरन कालीदाि जी का हं । दे वी िरस्वती ेका त्रवशेष उत्िव माघ माि क शुक्ल पक्ष की पंिमी को अथाात ् विडत पंिमी को मनार्ा जाता हं । े मंि सिद्ध रूद्राक्षएकमुखी रूद्राक्ष-Rs- 1250,2800 छह मुखी रूद्राक्ष-Rs- 55,100 ग्र्ारहमुखी रूद्राक्ष-Rs- 1250, 2750दो मुखी रूद्राक्ष-Rs- 100,151 िात मुखी रूद्राक्ष-Rs- 120,190, 460 बारह मुखी रूद्राक्ष-Rs- 1900, 2750तीन मुखी रूद्राक्ष-Rs- 100,151 आठ मुखी रूद्राक्ष-Rs- 820,1250 तेरह मुखी रूद्राक्ष-Rs- 4600, 6400िार मुखी रूद्राक्ष-Rs- 55,100 नौ मुखी रूद्राक्ष-Rs- 820,1250 िौदह मुखी रूद्राक्ष-Rs- 10500,12500पंि मुखी रूद्राक्ष-Rs- 28,55 दिमुखी रूद्राक्ष-Rs-1050,1250 गौरीषंकर रूद्राक्ष-Rs- 1450,1900 GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
  10. 10. 10 जनवरी 2012 पत्रिका िदस्र्ता (Magazine Subscription) आप हमारे िाथ जुि िकते हं । आप हमारी मासिक पत्रिका आप हमारे िाथ त्रवसभडन िामास्जक नेटवफकग िाइट क माध्र्म िे भी जुि िकते हं । ं े सनशुल्क प्राि करं । हमारे िाथ जुिने क सलए िंबंसधत सलंक पर स्क्लक करं । ेर्फद आप गुरुत्व ज्र्ोसतष मासिक पत्रिका अपने ई-मेल We Are Also @पते पर प्राि करना िाहते हं ! तो आपना ई-मेल पता नीिे Google Groupदजा करं र्ा इि सलंक पर स्क्लक करं Google PlusGURUTVA JYOTISH Groups yahoo क िाथ जुिं. े Yahoo Group Orkut CommunityIf You Like to Receive Our GURUTVA JYOTISHMonthly Magazine On Your E-mail, Enter Your E- Twittermail Below or Join GURUTVA JYOTISH Groups Facebookyahoo Wordpress Scribd Click to join gurutvajyotish उत्पाद िूिी हमारी िेवाएं आप हमारे िभी उत्पादो आप हमारी िभी भुगतान िेवाएं की जानकारी एवं िेवा की िूसि एक िाथ दे ख शुल्क िूसि की जानकारी दे ख िकते हं और िाउनलोि िकते और िाउनलोि कर कर िकते हं । िकते हं ।मूल्र् िूसि िाउनलोि करने क सलए कृ प्र्ा इि सलंक पर े मूल्र् िूसि िाउनलोि करने क सलए कृ प्र्ा इि सलंक पर ेस्क्लक करं । Link स्क्लक करं । LinkPlease click on the link to download Price List. Link Please click on the link to download Price List. Link
  11. 11. 11 जनवरी 2012 त्रवद्या प्रासि क त्रवलक्षण उपार्(टोटक) े े  सिंतन जोशी पूवा की तरफ सिर करक िोने िे त्रवद्या की प्रासि होती है । े त्रवद्वानो क मत िे त्रवद्या प्रासि हे तु ४ मुखी एवं ६ मुखी रूद्राक्ष लाल धागे मे धारण करने िे व्र्त्रि की बुत्रद्ध तीव्र ओर े कशाग्र एवं त्रवद्या, ज्ञान, उत्तम वाणी की प्राि होकर जीवन मे रिनात्मकता आसत है ु पढाई मेज पर स्फफटक का श्री र्ंि स्थापीत करने िे स्मरण शत्रि तीव्रे होती हं एवं खराब त्रविार दर होकर उत्तम प्रकार ू की सिंताधारा उत्पडन होती हं , एवं मां िरस्वती और लक्ष्मी का आसशवााद िदै व बना रे हता हं । अपने पूजा स्थान पर िरस्वती र्ंि स्थापीत कर प्रसत फदन धूप- दीप करने िे मां िरस्वती का आसशवााद एवं कृ पा िदै व बनी रे हती हं । पढाई करते िमर् पूवा र्ा उत्तर फदशा की तरफ मुख कर कर पढाई करं । पढाई करते िमर् स्फद र्ा हलक रं ग क कपिो का िुनाव करे ताकी एकग्रता बनी रहं , गहरे रं ग र्ा भिकीले रं गो वाले े े े कपिे पहनने िे मानसिक अशांसत उतपडन होती हं , स्जस्िे एकग्रता भंग होती हं एवं पढाई मे मन नही लगता। पढाई की फकताब मं मौली का टु किा रखने िे ज्ञान एवं त्रवद्या मं लाभ प्राि होता हं । फकताब मं मोर क पंख रखने िे लाभ होता हं । े ज्ञान मुद्रा का प्रसत-फदन माि ५ समसनट प्रर्ोग करने िे स्मरण शत्रि की वृत्रद्ध होती हं । (मुद्रा क अडर् लाभ शीध्र े उपलब्ध कराने हे तु हम प्रर्ाि रत हं ।) पढाई करने वाली मेज(टे बल) पर शीशा नहीं रखना िहीर्े। शीशा रखने िे मानसिक अशांसत होती हं । पढाई मे मन नहीं लगता। पढाई क िमर् अपने पीछे खाली जगा न रखे अथाात ठोि दीवार की और पीठ कर क बेठे। खुली जगा पर नही बेठना े े िाफहर्े र्े इस्िे आत्म त्रवश्वाि की कमी रे हजाती है । खुली जगा वाले स्स्थती मं ब्िे ज्र्ादा िमर् तक पढाई करने के बावजुद उिे असधक र्ाद नही रे हपाता हं । अपनी बार्ीं (राईट हं ि) और पानी िे भरा ग्लाि रखं एवं इिे थोिा-थोिा पानी िमर् क अंतराल पर पीते रे हने िे स्मरण े शत्रि तेज़ होगी औए एकाग्रता मं वृत्रद्ध होती हं । मेज(टे बल) पर र्था िंभव कम िामग्री रखे उस्िे एकाग्रता बढती है । ज्र्दा िामग्री रखने िे नकारत्मक शत्रि (नेगेफटव एनजी) उतपडन होती हं स्जस्िे पढाई मे मन नहीं लगता। मेज(टे बल) को दीवार िे थोिा दर रखे िटाकर न रखं , इििे एकाग्रता भंग होती हं । ू रात को िोने िे पूवा िांदी क ग्लाि मे पानी भरकर रखले और िुबह खाली पेट पानी त्रपले एिा करने िे सशक्षा क क्षेि मे े े िफलता प्रासि होती हं । भोजन करते िमर् िांदी क बरतनो का उपर्ोग करने िे लाभ प्राि होता त्रवद्या प्रासि मं लाभ होता है । े ब्िो को िोमवार का व्रत कर सशव मंफदर मं जलासभषेक करने िे त्रवद्या और बुत्रद्ध की प्रासि होती हं । बुध फक होरा त्रवद्या-बुत्रद्ध अथाात पढाई क सलर्े उत्तम होती हं । े
  12. 12. 12 जनवरी 2012  त्रवद्वानो क मत िे काँिे क बतान मं भोजन करने िे बुत्रद्ध तीव्र होती हं । े े  अंजीर को बादाम एवं त्रपस्ता क िाथ खाने िे बुत्रद्ध बढ़ती हं । े  प्रसतफदन िूर्नमस्कार करने और िूर्ा को अघ्र्ा दे ने िे बुत्रद्ध त्रवलक्ष होती हं । ा  लोहे क बतान मं भोजन करने िे बुत्रद्ध का नाश होता हं । (पकाने िे बुत्रद्ध का नाश नहीं होता खाने िे होता हं ।) स्टे नलेि े स्टील क बतान मं भोजन करने िे बुत्रद्धनाश नहीं होती। े  अष्टमी को नाररर्ल का फल खाने िे बुत्रद्ध का नाश होता हं ।  स्मरण शत्रि को प्रबल करने क सलर्े हमेशा कपूर एवं फफटकरी अपने िाथ रखं। े  स्मरण शत्रि को प्रबल करने क सलर्े ब्राह्मी और शंखपुष्पी का िेवन त्रवशेषज्ञ िे परामशा लेकर करं । ेअडर् अिूक प्रभावशाली उपार्  बुधवार क फदन मंि सिद्ध पूणा प्राण प्रसतत्रष्ठत एवं पूणा िैतडर् र्ुि िरस्वती कवि को धारण करं । े  मंि सिद्ध पूणा प्राण प्रसतत्रष्ठत एवं पूणा िैतडर् र्ुि िार और छः मुखी रुद्राक्ष धारण करने िे भी स्मरण शत्रि बढती हं ।  शुद्ध पडने (Emrald) रत्न को असभमंिीत कर धारण करने िे लाभ होता हं ।  अपनी पूजन स्थान मं र्ा पढाई करने वाले स्थान र्ा रुम मं मंि सिद्ध पूणा प्राण प्रसतत्रष्ठत एवं पूणा िैतडर् र्ुि िरस्वती र्ंि स्थापीत करने िे लाभ प्राि होता हं ।  हरे मरगि र्ा हकीक की माला िे मंि जाप करने िे एवं एक माला िरस्वती दे वी क सिि र्ा र्ंि पर लगाने े िे लाभ होता हं ।  परीक्षा मं उत्तीणा होने हे तु लाल रं ग की कलम (पैन) लं तथा उिमं फकिी भी रं ग की स्र्ाही हो तथा कलम (पैन) की कप ै िुनहरी रं ग की हो तो शुभ फल प्राि होते हं ।  मन फक एकाग्रता हे तु प्रसतफदन प्राणार्ाम करं । त्रवद्यारं भ करने िे पूर भी प्राणार्ाम करना लाभ प्रद होता हं । प्राणार्ाम िे शरीर मं शत्रि का िंिार होता हं और स्फसता उत्पडन होती हं । ूिोने िे पूवा िरस्वती मंि का जप करे एवं िोते िमर् भी िरस्वती मंि का जप करते रहं ।पररक्षा क सलर्े प्रस्थान करे ने िे पूवा गणेश जी क सनम्न मंि का ध्र्ानपूवक जप करक घर िे बाहर सनकले करं । े े ा े ॐ वक्रतुंि महाकार् िूर्ा कोफट िमप्रभः। सनत्रवाघ्नम ्करु मे दे व िवा कार्ेषु िवादा॥ ुप्रश्न पि पर पर कछ भी सलखने िे पूवा उपर छोटे अक्षरो मं "ॐ ऎं" सलखे र्दी पररक्षा पि पर पैन-पैनसिक िे सलखना ुिंभव न हो तो, अपनी दाफहने हाथकी(Right Hand) अनासमका (Index Finger) अंगूली को पररक्षा पि पर खाली "ॐऎं" सलखते हुवे घुमादं । फफर हर पडने पर सलखने िे पूवा "ॐ ऎं" सलखना भी लाभप्रद होता हं ।उपरोि प्रर्ोग क करने िे अवश्र् लाभ प्राि होता हं । लेफकन िाथ ही उसित पररश्रम भी आवश्र्क हं । े कोई भी मंि-र्ंि-तंि त्रबना पररश्रम क आपको फकिी कार्ा मं िफलता नहीं फदला िकता। े
  13. 13. 13 जनवरी 2012 त्रवद्या प्रासि क त्रवलक्षन प्रर्ोग े  सिंतन जोशी कई ब्िं को घंटो-घंटो पढाई करने क उपरांत भी स्मरण नहीं रहता। पररक्षा मं उत्तर दे ते िमर् उिने पढा ेहुआ भूल जाते हं । एिी स्स्थती मं ब्िे क िाथ माता त्रपता भी परे शान रहते हं फक इतना पढने क उपरांत ब्िे को े ेर्ाद नफह रह पाता? इिका कारण कार्ा हं ? और उपार् क्र्ा हं ? र्फद ब्िा पढाई नही करता तो अलग बात होजाती हं ,परं तु पढने क पिर्ार भी र्ाद नहीं रहे तो इि मे ब्िा करे तो क्र्ा करं ? र्ह िबिे बिीं िमस्र्ा हो जाती हं । े एिी स्स्थती मं त्रवद्या प्रासि हे तु एवं स्मरण शत्रि बढाने हे तु जो ब्िे +10 िे उपर क क्लाि मं पढते हं उनक े ेसलर्े हं ।प्रर्ोग 1:रािी 8-9 बजे भोजन कर 30-45 समसनट पिर्ात बार्ीं (Left) करवट लेकर ढाई घंटे क सलर्े िोजार्े, पुनः दाई (Right) ेकरवट लेकर ढाई घंटे क सलर्े िोजार्े, तत पिर्ात उठकर हाथ मुह धोकर िीधे बैठ कर पढाई शुरु कर दं , एिा ेसनर्समत करने िे अत्रवश्विसनर् लाभ प्राि होता हं । र्ह एक अनुभूत प्रर्ोग हंप्रर्ोग 2:रािी 8-9 बजे भोजन कर 30-45 समसनट पिर्ात िोजाए, रािी को 2 बजे र्ा 2.30 बजे उठकर हाथ मुह धोकर िीधे बैठकर पढाई शुरु करदं इस्िे अपने आप पढाई मं मन लगने लगेगा।प्रर्ोग 3:र्फद ब्िो का मन अभ्र्ाि मं लगता न हो, तो शुक्ल पक्ष क प्रथम रत्रववार जो ईमली क 22 पत्ते लेकर, उिमे िे 11 े ेपत्ते िूर्देव को "ॐ िूर्ाार् नमः" मंि का जप करते हुएं अपाण करं । बाकी बिे पान को आवश्र्क पुस्तक मं रखदं । ाइि प्रर्ोग िे अभ्र्ाि मं मन लगने लगता हं एवं उ्ि सशक्षण की और मन एकाग्र होता हं ।प्रर्ोग करने िे लाभ:  वतामान िमर् मं ब्िे फदन िे लेकर रािी 2-3-4 बजे तक पढाई करते रहते हं , और िुबह 5-6-7 बजं उठ कर फिर िे पढाई करना शुरु करदे ते हं स्जस्िे पर्ााि नींद न समलने क कारण ब्िं को पढाई बोझ लगने लगती हं । े एवं स्जतना िाहे पढले ब्िा पररणाम अनूकल नहीं समलपाता। ु  इिका कारण अती िरल हं । फदन भर फक थकावट क कारण, अपने दै सनक कार्ा िे त्रवपररत बेठकर पढाई करने े क कारण एवं पर्ााि नींद नहीं समलने क कारण पढाइ क िमर् मन नहीं लग पाता। घर मं अडर् िदस्र्ो क े े े े आवागमन क कारण ब्िं पढाई मं एकाग्रता नहीं होने क कारण भी एक ही त्रवषर् को बार-बार लगातार पढते े े रहना पिता हं इि मे िमर् फक खपत असधक होती हं , स्जस्िे ब्िे तनाव िा महिूि करते हं ।  कछ ब्िे िुबह जल्द उठ कर पढाई करतं हं एिी स्स्थती मं िुबह 5-6 बजे पढाई क सलर्े बेठने पर कछ िमर् ु े ु क सलर्े एकाग्रता रह पाती हं पिर्ात घर वालो क जागने पर एकाग्रता कम होने लगती हं । े े  इि सलर्े रािी 8-9 बजे िोकर 2- 2.30 बजे उठने पर पढाई करने हे तु असधक िमर् समलजाता हं एवं वातावरण मं शांसत होने क कारण एकाग्रता लंबे िमर् तक बनी रहती हं । े
  14. 14. 14 जनवरी 2012 पररक्षा मं िफलता प्रासि हे तु  सिंतन जोशी रोज िुभह स्नान आफदिे सनवृत होकर स्व्छ कपिे पहन कर अपने इष्ट के िम्मुख ३ अगरबत्ती जलाकर अपनी मनोकामना हे तु उनिे प्राथना करे । उिक बाद ही पढाई आरं भ करं । े कोई भी एक िरस्वती मंि क ३,५ समसनट जाप कर क अपनी पढाई शुरु े े करं । िरस्वती मूल मंि - ॐ ऎं िरस्वत्र्ै ऎ ं नमः। िरस्वती मंि - ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महािरस्वती दे व्र्ै नमः। मंि सिद्ध पडना गणेश िरस्वती गार्िी मंि - भगवान श्री गणेश बुत्रद्ध और सशक्षा के१ - ॐ िरस्वत्र्ै त्रवधमहे , ब्रह्मपुिर्ै धीमफह । तडनो दे वी प्रिोदर्ात। कारक ग्रह बुध क असधपसत दे वता े२ - ॐ वाग दे व्र्ै त्रवधमहे काम राज्र्ा धीमफह । तडनो िरस्वती: प्रिोदर्ात। हं । पडना गणेश बुध क िकारात्मक े अडर् िभी जानकारी आपको पूवा क ईमेल मं उपल्बध करादी गई हं । े प्रभाव को बठाता हं एवं नकारात्मक पररक्षा (Exam) क फदन पररक्षा हे तु जाने िे पूवा भी इष्ट क िम्मुख ३ े े प्रभाव को कम करता हं ।. पडन अगरबत्ती जलाकर अपनी मनोकामना हे तु उनिे प्राथना करे । गणेश क प्रभाव िे व्र्ापार और धन े मं वृत्रद्ध मं वृत्रद्ध होती हं । ब्िो फक पररक्षा (Exam) क सलर्े जाने िे पूवा दहीं+सिनी(समश्री) अथवा गुि खाकर े पढाई हे तु भी त्रवशेष फल प्रद हं सनकले। पडना गणेश इि क प्रभाव िे ब्िे े पररक्षा क फदन कपिे पहनते िमर् शटा हो र्ा पंट अपना दाहीना (Right) े फक बुत्रद्ध कशाग्र ू होकर उिके हाथ एवं दाफहना (Right) पैर शटा पेडट मं पेहले िाले। आत्मत्रवश्वाि मं भी त्रवशेष वृत्रद्ध होती जुते एवं मोजे पहनते िमर् भी पहले जुते र्ा मोजे दाफहना (Right) पैर मं हं । मानसिक अशांसत को कम करने मं पहने। मदद करता हं , व्र्त्रि द्वारा अवशोत्रषत हरी त्रवफकरण शांती प्रदान करती हं , त्रवद्वानो क अनुशार कमरे िे बाहर सनकलते िमर् दाफहना (Right) पैर पहले े व्र्त्रि क शारीर क तंि को सनर्ंत्रित े े बाहर सनकाले। परीक्षा कक्ष मं भी पहले दाफहना (Right) पैर बढ़ा कर प्रवेश करती हं । स्जगर, फफिे , जीभ, े करं । मस्स्तष्क और तंत्रिका तंि इत्र्ाफद रोग स्वर शास्त्रो क अनुिार परीक्षा मं जाते िमर् आपका जो स्वर िल रहा हो, उिी क े े मं िहार्क होते हं । कीमती पत्थर अनुरूप पैर पहले बाहर सनकालं। परीक्षा कक्ष मं भी स्वर क अनुरूप ही पैर बढ़ा कर े मरगज क बने होते हं । े प्रवेश करं । परीक्षा हे तु जाते िमर् प्रात: आधा फकलो दध मंफदर मं दे ने िे परीक्षा मं िफलता ू Rs.550 िे Rs.8200 तक समलती है । परीक्षा पि का उत्तर सलखने िे पूवा गणेश जी का स्मरण करते हुए 11 बार “गं गणपतर्े नम:” मंि का जाप करं । ऐिा करने िे परीक्षा मं िफलता अवश्र् समलती है । नोट: स्वर िलना अथाात: नाक क स्जि सछद्र िे श्वाि िल रहा हो उिे स्वर िलना कहते हं । े
  15. 15. 15 जनवरी 2012 त्रवद्या प्रासि क सलए वास्तु क उपार् े े  सिंतन जोशीत्रवद्या अध्र्र्न करते िमर् आने वाले त्रवघ्न-बाधा दर कर उत्तम त्रवद्या प्राि करने हे तु वास्तु िे िंबंसधत उपार्ं िे ूआपका मगादशान कर रहे है ।पढाई करते िमर् पूवा र्ा उत्तर फदशा की तरफ मुख कर कर पढाई करं । त्रवद्वानो क मत िे पूवा मं मुख करक पढाई े ेकरने िे िूर्ा की िकारात्मक ऊजाा प्राि होती हं एवं उत्तर मं मुख करक पढाई करने िे मन की एकाग्रता मं वृत्रद्ध होती हं । ेब्िो का अध्र्र्न कक्ष ईशान कोण मं असधक लाभ दार्क माना गर्ा हं । र्फद ईशान कोण मं अध्र्र्न कक्ष की िुत्रवधानतो तो पूवा मं बनाना लाभ दार्क होता हं ।पढाई मेज पर स्फफटक का श्री र्ंि स्थापीत करने िे स्मरण शत्रि तीव्रे होती हं एवं खराब त्रविार दर होकर उत्तम प्रकार ूकी सिंताधारा उत्पडन होती हं , एवं मां िरस्वती और लक्ष्मी का आसशवााद िदै व बना रे हता हं ।पढाई मेज पर स्फफटक ग्लोब (फक्रस्टल ग्लोब) रखना भी लाभ दार्क होता हं । ग्लोब को रोज घुमाने िे ब्िे क मन मं ेजीवन मं स्स्थर नहीं रहकर आगे बढ़ने की प्रेरणा उत्पडन होती रहती है , जो उिे जीवन मं आगे बढने का मागा प्रदानकरती हं ।दरवाजे की ओर पीठ करक पढाई करने िे स्मरण शत्रि कमजोर होती हं । ेिीिी, बीम एवं िेल्फ क नीिे बैठकर अध्र्र्न करने िे अनावश्र्क सिंता एवं तनाव बढता हं । ेअध्र्र्न कक्ष वार्व्र् कोण मं होने िे पढाई मं एकाग्रता नहीं रहती एवं जल्दी र्ाद नहीं रहता। र्फद र्ाद रह जार्े तोवार्ु फक भांसत अस्स्थरता रहती हं ।अध्र्र्न कक्ष मं टे लीफोन, टीवी, मोबाईल, अक्वेररर्म, आईना, र्ा अडर् गसतशील रहने वाली वस्तुए, उ्ि खपत वाले ंत्रवद्युत उपकरण नहीं रखने िाफहए। इन वस्तुओं क कारण एकाग्रता मं कमी आती हं । ेअध्र्र्न कक्ष मं कप्र्ूटर को दस्क्षण-पूवा मं रखना िाफहए। अडर्था दस्क्षण र्ा पस्िम क मध्र् मं भी रखा जा िकता हं । ं ेअध्र्र्न कक्ष मं हमेशा दस्क्षण र्ा पस्िम की ओर सिर रखकर िोना िाफहए।ब्िो क त्रवद्याध्र्र्न हे तु ईशाडर् मं अडर् कमरो िे नीिा कमरा रखे। ेअध्र्र्न कक्ष की दीवारं का रं ग हल्का रखना लाभदार्क होता हं ।पढाई करने क पिर्ात फकताबं खुली नहीं रखनी िाफहए। एिा माना जाता हं फक खुली फकताबं नकारात्मक ऊजाा उत्पडन ेकरती हं । फकताबं हमेशा िुव्र्वस्स्थत रखे। र्फद थोिे िमर् क सलर्े फकताब रखकर कहीं जाना पिे तो फिवाईिर क तौर े ेपर मोर पंख र्ा मौली अथवा लाल रं ग की ररबन रख कर उिे बंध करक जार्े। ेर्फद अध्र्र्न कक्ष मं स्नान गृह र्ा शौिालर् हो, तो उिका दरवाजा हमेशा बंद रखं। खुले दरवाजे िे नकारात्मक ऊजाासनकलती हं ।एक िे असधक ब्िे घर मं हो, तो अध्र्र्न कक्ष मं पररवार फक िामूफहक फोटो लगाएं। स्जस्िे ब्िं मं आपि मंसमलजुल कर कार्ा करने की भावना उत्पडन हं एवं उनक त्रबि मं लिाई-झगिे नहीं होते। ेवास्तु क इन उपार्ं को अपना कर त्रवद्याभ्र्ाि मं आने वाली बाधाओं िे िरलता िे मुत्रि प्राि की जा िकती है । े
  16. 16. 16 जनवरी 2012 त्रवद्या प्रासि हे तु िरस्वती कवि और र्ंि आज के आधुसनक र्ुग मं सशक्षा प्रासि जीवन की महत्वपूणा आवश्र्कताओं मं िे एक है । फहडद ू धमा मं त्रवद्या की असधष्ठािी दे वी िरस्वती को माना जाता हं । इि सलए दे वी िरस्वती की पूजा-अिाना िे कृ पा प्राि करने िे बुत्रद्ध कशाग्र एवं तीव्र होती है । ु आज क िुत्रवकसित िमाज मं िारं ओर बदलते पररवेश एवं े आधुसनकता की दौि मं नर्े-नर्े खोज एवं िंशोधन क आधारो पर े ब्िो क बौसधक स्तर पर अ्छे त्रवकाि हे तु त्रवसभडन परीक्षा, े प्रसतर्ोसगता एवं प्रसतस्पधााएं होती रहती हं , स्जि मं ब्िे का बुत्रद्धमान होना असत आवश्र्क हो जाता हं । अडर्था ब्िा परीक्षा, प्रसतर्ोसगता एवं प्रसतस्पधाा मं पीछि जाता हं , स्जििे आजक पढे सलखे आधुसनक बुत्रद्ध िे िुिंपडन लोग ब्िे को मूखा े अथवा बुत्रद्धहीन र्ा अल्पबुत्रद्ध िमझते हं । एिे ब्िो को हीन भावना िे दे खने लोगो को हमने दे खा हं , आपने भी कई िैकिो बार अवश्र् दे खा होगा? ऐिे ब्िो की बुत्रद्ध को कशाग्र एवं तीव्र हो, ब्िो की बौत्रद्धक ु क्षमता और स्मरण शत्रि का त्रवकाि हो इि सलए िरस्वती कवि अत्र्ंत लाभदार्क हो िकता हं । िरस्वती कवि को दे वी िरस्वती क परं म दलाभ तेजस्वी े ू मंिो द्वारा पूणा मंिसिद्ध और पूणा िैतडर्र्ुि फकर्ा जाता हं । स्जस्िे जो ब्िे मंि जप अथवा पूजा-अिाना नहीं कर िकते वह त्रवशेष लाभ प्राि कर िक और जो ब्िे पूजा-अिाना करते हं , उडहं दे वी िरस्वती े की कृ पा शीघ्र प्राि हो इि सलर्े िरस्वती कवि अत्र्ंत लाभदार्क होता हं ।िरस्वती कवि : मूल्र्: 550 और 460 िरस्वती र्ंि :मूल्र् : 370 िे 1450 तक GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
  17. 17. 17 जनवरी 2012 ***** वात्रषक रासशफल िे िंबंसधत िूिना***** ा पत्रिका मं प्रकासशत वात्रषक रासशफल गुरुत्व कार्ाालर् क असधकारं क िाथ ही आरस्क्षत हं । ा े े वात्रषक रासशफल नास्स्तक/अत्रवश्वािु व्र्त्रि माि पठन िामग्री िमझ िकते हं । ा वात्रषक रासशफल ज्र्ोसतष िे िंबंसधत होने क कारण भारसतर् ज्र्ोसतष शास्त्रों िे प्रेररत होकर ा े गणना करक फदर्े गर्े हं । े वात्रषक रासशफल िे िंबंसधत त्रवषर्ो फक ित्र्ता अथवा प्रामास्णकता पर फकिी भी प्रकार की ा स्जडमेदारी कार्ाालर् र्ा िंपादक फक नहीं हं । वात्रषक रासशफल िे िंबंसधत गणनाओं की प्रामास्णकता एवं प्रभाव की स्जडमेदारी कार्ाालर् र्ा ा िंपादक की नहीं हं और ना हीं प्रामास्णकता एवं प्रभाव की स्जडमेदारी बारे मं जानकारी दे ने हे तु कार्ाालर् र्ा िंपादक फकिी भी प्रकार िे बाध्र् हं । वात्रषक रासशफल िे िंबंसधत लेखो मं पाठक का अपना त्रवश्वाि होना आवश्र्क हं । फकिी भी ा व्र्त्रि त्रवशेष को फकिी भी प्रकार िे इन त्रवषर्ो मं त्रवश्वाि करने ना करने का अंसतम सनणार् स्वर्ं का होगा। वात्रषक रासशफल िे िंबंसधत फकिी भी प्रकार की आपत्ती स्वीकार्ा नहीं होगी। ा वात्रषक रासशफल िे िंबंसधत लेख हमारे वषो क अनुभव एवं अनुशंधान क आधार पर गणना कर फदए ा े े गर्े हं । हम फकिी भी व्र्त्रि त्रवशेष द्वारा प्रर्ोग फकर्े जाने वाले मंि- र्ंि र्ा अडर् प्रर्ोग र्ा उपार्ोकी स्जडमेदारी नफहं लेते हं । र्ह स्जडमेदारी मंि-र्ंि र्ा अडर् प्रर्ोग र्ा उपार्ोको करने वाले व्र्त्रि फक स्वर्ं फक होगी। क्र्ोफक इन त्रवषर्ो मं नैसतक मानदं िं , िामास्जक , कानूनी सनर्मं क स्खलाफ कोई व्र्त्रि े र्फद नीजी स्वाथा पूसता हे तु प्रर्ोग कताा हं अथवा प्रर्ोग क करने मे िुफट होने पर प्रसतकल पररणाम े ू िंभव हं । वात्रषक रासशफल िे िंबंसधत जानकारी को माननने िे प्राि होने वाले लाभ, लाभ की हानी र्ा ा हानी की स्जडमेदारी कार्ाालर् र्ा िंपादक की नहीं हं । हमारे द्वारा पोस्ट फकर्े गर्े िभी मंि-र्ंि र्ा उपार् हमने िैकिोबार स्वर्ं पर एवं अडर् हमारे बंधुगण पर प्रर्ोग फकर्े हं स्जस्िे हमे हर प्रर्ोग र्ा मंि-र्ंि र्ा उपार्ो द्वारा सनस्ित िफलता प्राि हुई हं । असधक जानकारी हे तु आप कार्ाालर् मं िंपक कर िकते हं । ा (िभी त्रववादो कसलर्े कवल भुवनेश्वर डर्ार्ालर् ही माडर् होगा।) े े

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