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GURUTVA JYOTISH APR-2011

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GURUTVA JYOTISH APR-2011

  1. 1. Font Help >> http://gurutvajyotish.blogspot.comगु व कायालय ारा तुत मािसक ई-प का अ ैल- 2011 चै नवरा त क लाभ े राम एवं हनुमान मं नवरा तकथा राम नाम क म हमा गु स शती ोधी संव स 2068 ी राम शलाका ावली NON PROFIT PUBLICATION
  2. 2. FREE E CIRCULAR गु व योितष प का अ ैल 2011संपादक िचंतन जोशी गु व योितष वभागसंपक गु व कायालय 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIAफोन 91+9338213418, 91+9238328785, gurutva.karyalay@gmail.com,ईमेल gurutva_karyalay@yahoo.in, http://gk.yolasite.com/वेब http://www.gurutvakaryalay.blogspot.com/प का तुित िचंतन जोशी, व तक.ऎन.जोशीफोटो ाफ स िचंतन जोशी, व तक आटहमारे मु य सहयोगी व तक.ऎन.जोशी ( व तक सो टे क इ डया िल) ॐ ी गणेशाय नमः गु व कायालय प रवार क और से आपको व म संवत 2068 नव वष क शुभकामना... िचंतन जोशी
  3. 3. 3 अ ैल 2011 वशेष लेखनव संव सर का प रचय 5 राम र ा यं 25नवरा म नवदगा आराधना का मह व ु 7 जब कबीरजी को िमली राम-राम मं द ा? 27चै नवरा त क लाभ े 8 जब भ क िलये वयं भगवान मरने को तैयार होते ह? े 28नवरा त 10 अंगद ने रावण क घमंडको चूर कया े 34राम नाम क म हमा सीता जी को ाप क फल से वनवास हवा? े 20 ु 41मं जप या ह? 23 ी राम क िस मं े 43 या ाप क कारण िमला राम अवतार? े 24 राम एवं हनुमान मं 57 अनु मसंपादक य 4 राम तुित 55गु स शती 11 जटायुकृत राम तो म ् 56दे वी आराधना से सुख ाि 14 महादे व कृ त राम तुित 56स त लोक दगा ु 15 मािसक रािश फल 62दगा आरती ु 15 रािश र 66नवरा तकथा 16 अ ैल 2011 मािसक पंचांग 67ध य तो यह ल मण है ? 26 धम पर ढ़ व ास 68 ी राम शलाका ावली 29 अ ैल -2011 मािसक त-पव- यौहार 69जब ीराम ने कय वजया एकादशी त? 31 अ ैल 2011 - वशेष योग 73 वयं भा ने क रामदतो क सहायता? ू 33 दै िनक शुभ एवं अशुभ समय ान तािलका 73रामर ा तो 46 दन-रात क चौघ डये े 74 ी राम दयम ् 47 दन-रात क होरा सूय दय से सूया त तक 75अथ ी राम तो 47 सव रोगनाशक यं /कवच 76रामा ो र शतनाम तो म ् 48 मं िस कवच 78राम सह नाम तो म ् 49 YANTRA LIST 79सीताराम तो म ् 53 GEM STONE 81रामा कम ् 53 BOOK PHONE/ CHAT CONSULTATION 82राम भुज ग तो 54 सूचना 83रामच तुित 55 हमारा उ े य 85
  4. 4. 4 अ ैल 2011 संपादक य य आ मय बंधु/ ब हन जय गु दे व ह द ु संसकृ ित क अनुशार नव वष हर साल चै े शु ल ितपदा से ारं भ होता ह। इस वष ह दू नव वष 4-अ ैल-2011 से ारं भ होगा जो ह द ू पंचांग क अनुशार नव वष व म संवत 2068 होगा जसे े ोिध संव सर क नाम से ेजाना जायेगा। इस दन से वसंतकालीन नवरा क शु आत होती ह। व ानो क मतानुशार चै े मास क कृ ण प े कसमाि क साथ भूलोक क प रवेश म एक वशेष प रवतन े े गोचर होने लगता ह जसक अनेक े तर और व पहोते ह। इस दौरान ऋतुओं क प रवतन क साथ नवरा े े का तौहार मनु य क जीवन म बा े और आंत रक प रवतन मएक वशेष संतुलन था पत करने म सहायक होता ह। जस तरह बा जगत म प रवतन होता है उसी कार मनु यक शर र म भी प रवतन होता है । े इस िलये नवरा उ सव को आयो जत करने का उ े य होता ह क मनु य क भीतर म उपयु े प रवतन करउसे बा प रवतन क अनुकल बनाकर उसे े ू वयं क और े कृ ित क बीच म संतुलन बनाये रखना ह। े नवरा क दौरान कए जाने वाली पूजा-अचना, े त इ या द से पयावरण क शु होती ह। उसीक साथ-साथ ेमनु य क शर र और भावना क भी शु े हो जाती ह। यो क त-उपवास शर र को शु करने का पारं प रक तर का हजो ाकृ ितक-िच क सा का भी एक मह वपूण त व है । अतः इस दौरान त-उपवास करना अ यािधक लाभ द मानागया ह। दे वी भागवत क आठव कध म दे वी उपासना का व तार से वणन है । दे वी का पूजन-अचन-उपासना-साधना इ या द े ंक प यात दान दे ने पर लोक और परलोक दोन सुख दे ने वाले होते ह। अतः नवरा ी क दौरान वशेष विध- वधान से दै वी े ेक पूजा-अचना आ द लाभ द होते ह। ज से मनु य दे वी क कृ पा िनरं टर ाि होती रह। ह द ू पंचांग क अनुशार चै े शु ल नवमी को रामनवमी के प म मनाया जाता ह। इसी दन मयादा पु षो म ी रामजी का ज म हवा था। रामनाम क म हमा अनोखी व अ ितय ह। ुशा कहते ह- च रतम ् रघुनाथ य शतको टम ् व तरम। ् एककम ् अ रम ् पू या महापातक नाशनम।। ै ्अथातः सौ करोड़ श द म भगवान राम क गुण गाये गये ह। उसका एक-एक अ र े ह या आ द महापाप का नाश करने मसमथ ह।आप सभी बंध/ब हनो को गु ु व कायालय क ओर से नव वष व म संवत 2068 क अनेको शुभकामनाएं। िचंतन जोशी
  5. 5. 5 अ ैल 2011 नव संव सर का प रचय  िचंतन जोशी नव वष चै शु ल ितपदा 4-अ ैल-2011 से शु होने वाले व म संवत 2068 क राजा चं व मं ी दे व गु े बृ ह पित ह गे। योितषीय गणना क आधार पर नव संव सर े क िलए ह क बीच वभाग का बंटवारा हो चुका ह। 2068 क े े े नव संव सर का नाम ोधी ह। इस संवत का वामी शिन है जो ाचार, दराचार, ू ाकृ ितक आपदा का ोतक है । स ा प क कारण आम लोग मंद क दौर से गुजर सकते ह। े े चं मा राजा है जो धन, धा य और वषा का तीक ह। गु मं ी है जो जनता और राजा म उ लास पैदा करे गा। बुध सेनापित ह जो राजकोष को खाली करासकता ह व त कर और चोर क अिधकता हो सकती ह। स ा प म अंतकलह रहता है तथा जा मंद क दौर से गुजरती है । े नव हो म चं व गु दोनो शुभ ह ह। इसिलएइनक मह वपूण थान पर रहने से सालभर लोग म धम व आ या म क ित आ था बढ़े गी। े े हो क थती क कारण 2068 वष ेबा रश अ छ होगी व फसल भी अ छ हो सकती ह। इस वष राजनीित व समाज सेवा के े म काय करने वाल को तनाव कासामना करना पड़ सकता ह। िश ा व धम े म काय करने वाले लोग का स मान बढ़े गा। कृ ष काय से जुडे लोगो को अ यािधक लाभ ा हो सकता ह परं तु कछ ु े ो म कटको क कोप और अ य ाकृ ितक ेआपदा क मार होने पर भार नु शान संभव ह। अपराध म बढ़ोतर होगी। उ र भारत व प मी े म ाकृ ितक कोप हो सकतेह। इस वष म हलाओं का भाव बढ़े गा। कृ ष काय, गौ व दध उ पादन म वृ ू हो सकती ह। धन-धा य क वृ होगी। ोधीसंव सर लोगो म ोध, लोभ, ाचार, ाकृ ितक आपदा का प रचायक है । संव सर का िनवास काली क घर मना गया ह जो पैदावार बढ़ाएगा। संव सर का वाहन मृ ग है । े ोधी नामक संव सर ोधऔर लोभ क भावना जगाएगा। ाचार क थित अिधक बनेगी। महं गाई बढ़े गी।संव सर का मं मंडल वामी : शिन मंगल रसेष,चं मा राजा, बुध दगश, मेघेष व फलेश, ुगु मं ी, शु धा येश वसूय श येश, शिन धनेश ह गे।
  6. 6. 6 अ ैल 2011संव सर ारं भ म ह थितयां4 अ ेल 2011 चै ितपदा से नव वष नव संव सर व मा द 2068 ारं भ हो रहा ह।सूय – मीन म 14 अ ेल तक , 14 अ ेल क बाद मेष रािश म, ेमंगल – 25 अ ेल 2011 से मीन म मंगल उदय ,बुध 17 अ ेल 2011 से मीन रािश म बुधोदय,गु 24 अ ेल 2011 से मीन रािश म गु उदय,शु वतमान म कभ रािश म 16 अ ेल 2011 से मीन रािश म, ुंशिन क या रािश म वतमान व गित शील – 13 जून से माग एवं 26 िसत बर को अ त व 30 अ टू बर को उदय तथा 15नव बर 2011 को रािश प रवतन कर तुला रािश म इसक बाद वष पय त तुला रािश म गोचर राहू – कतु – े े मश: धनु एवंिमथुन रािश म वतमान 6 जून 2011 से राहू – वृ चक रािश म एवं कतु वृ ष रािश म गोचर करग । ेरािशय पर भाव हो का भाव।मेष- धन लाभ क थती बन रह ह। तुला- ी सुख ा होगा वा य उ म रहे गा।वृ षभ-शार रक क संभव ह। वृ क- अिधक संघष क बाद सफलता ा होगी। ेिमथुन- वा य कमजोर हो सकता ह सावधानी बत। धनु- आक मक धनलाभ ा हो सकता ह।कक- माता, भूिम, भवन, वाहन क सुख म वृ े होगी। मकर- इस दौरान आपको सामा य लाभ ा ह गे।िसंह- पूव क परे शािनयां दर ह गी। ू कभ- कामकाज क अिधकता रह सकती ह। ुंक या- मानिसक तनाव, मानहािन संभव ह। मीन- दर थ या ा हो सकती ह, धनलाभ होगा। ूसभी कार क सुख-शांित एवं समृ े क िलए अपने पूजन े थान म शु घी का द पक जलाएं, इ से आने वाले वष भर सुख-समृ क ाि होती रहे गी। कसी धम थल पर पूजन कर पंचांग आद धािमक पु तव व ंथो का दान तथा उसक फल ु ितसुनने से गंगा नान क समान फल ा होता ह। े ई- ज म प का E HOROSCOPE अ याधुिनक योितष प ित ारा Create By Advanced Astrology उ कृ भ व यवाणी क साथ े Excellent Prediction १००+ पेज म तुत 100+ Pages हं द / English म मू य मा 750/- GURUTVA KARYALAY Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
  7. 7. 7 अ ैल 2011 नवरा म नवदगा आराधना का मह व ु  िचंतन जोशी नमो दे यै महादे यै िशवायै सततं नम:। इस मं क जप से माँ े क शरणागती ा होती ह। नम: कृ यै भ ायै िनयता: णता: मताम॥ ् ज से मनु य क ज म-ज म क पाप का नाश होता है । े ेअथात: दे वी को नम कार ह, महादे वी को नम कार ह। मां जननी सृ क आ द, अंत और म य ह।महादे वी िशवा को सवदा नम कार ह। कृ ित एवं भ ा को मेरा दे वी से ाथना कर – णाम ह। हम लोग िनयमपूव क दे वी जगद बा को नम कार शरणागत-द नात-प र ाण-परायणेकरते ह। सव याितहरे दे व नाराय ण नमोऽ तुत॥ ेउपरो मं से दे वी दगा का मरण कर ाथना करने मा से ु अथात: शरण म आए हए द न एवं पी ़डत क र ा म संल न ुदे वी स न होकर अपने भ क इ छा पूण करती ह। सम त रहने वाली तथा सब क पीड़ा दर करने वाली नारायणी दे वी ूदे व गण जनक तुित ाथना करते ह। माँ दगा अपने भ ो ु आपको नम कार है ।क र ा कर उन पर कृ पा ी वषाती ह और उसको उ नतीक िशखर पर जाने का माग े स त करती ह। इस िलये रोगानशेषानपहं िस तु ाई र म ा व ार रखने वाले सभी मनु य को दे वी क ा तु कामान सकलानभी ान। ्शरण म जाकर दे वी से िनमल दय से ाथना करनी चा हये। वामाि तानां न वप नराणां वामाि ता हा यतां या त। दे वी प नाितहरे सीद सीद मातजगतोs खल य। अथातः दे वी आप स न होने पर सब रोग को न कर दे ती पसीद व ेत र पा ह व ं वमी र दे वी चराचर य। हो और क पत होने पर मनोवांिछत सभी कामनाओं का नाश ुअथात: शरणागत क पीड़ा दर करने वाली दे वी आप हम पर ू कर दे ती हो। जो लोग तु हार शरण म जा चुक है । उनको े स न ह । संपूण जगत माता स न ह । व े र दे वी व वप आती ह नह ं। तु हार शरण म गए हए मनु य दसर ु ू क र ा करो। दे वी आप ह एक मा चराचर जगत क को शरण दे ने वाले हो जाते ह।अिध र हो। सवबाधा शमनं ेलो य या खले र । सवमंगल-मांग ये िशवेसवाथसािधक । े एवमेव वया कायम य दै र वनाशनम। ् शर ये य बक गौ र नाराय ण नमोऽ तुते॥ े अथातः हे सव र आप तीन लोक क सम त बाधाओं को सृ थित वनाशानां श भूते सनातिन। शांत करो और हमारे सभी श ुओं का नाश करती रहो। गुणा ये गुणमये नाराय ण नमोऽ तुते॥अथात: हे दे वी नारायणी आप सब कार का मंगल दान शांितकम ण सव तथा द: व दशने। ुकरने वाली मंगलमयी हो। क याण दाियनी िशवा हो। सब हपीडासु चो ासु महा मयं शणुया मम।पु षाथ को िस करने वाली शरणा गतव सला तीन ने अथातः सव शांित कम म, बुरे व न दखाई दे ने पर तथावाली गौर हो, आपको नम कार ह। आप सृ का पालन और ह जिनत पीड़ा उप थत होने पर माहा य वण करनासंहार करने वाली श भूता सनातनी दे वी, आप गुण का चा हए। इससे सब पीड़ाएँ शांत और दर हो जाती ह। ूआधार तथा सवगुणमयी हो। नारायणी दे वी तु ह नम कारहै । ***
  8. 8. 8 अ ैल 2011 चै नवरा त क लाभ े  िचंतन जोशी ह द ु संसकृ ित क अनुशार नववष का शुभारं भ चै मास क शु ल प े े क थम ितिथ से होता है ।इस दन से वसंतकालीन नवरा क शु आत होती ह।व ानो क मतानुशार चै े मास क कृ ण प े क समाि क साथ भूलोक क प रवेश म एक वशेष प रवतन े े गोचरहोने लगता ह जसक अनेक े तर और व प होते ह। इस दौरान ऋतुओं क प रवतन क साथ नवरा े े का तौहार मनु य क जीवन म बा े और आंत रक प रवतन मएक वशेष संतुलन था पत करने म सहायक होता ह। जस तरह बा जगत म प रवतन होता है उसी कार मनु यक शर र म भी प रवतन होता है । इस िलये नवरा े उ सव को आयो जत करने का उ े य होता ह क मनु य क भीतर ेम उपयु प रवतन कर उसे बा प रवतन क अनुकल बनाकर उसे े ू वयं क और े कृ ित क बीच म संतुलन बनाये ेरखना ह। नवरा क दौरान कए जाने वाली पूजा-अचना, े त इ या द से पयावरण क शु होती ह। उसीक साथ-साथ ेमनु य क शर र और भावना क भी शु े हो जाती ह। यो क त-उपवास शर र को शु करने का पारं प रक तर का हजो ाकृ ितक-िच क सा का भी एक मह वपूण त व है । यह कारण ह क व के ायः सभी मुख धम म त कामह व ह। इसी िलए ह द ू सं कृ ित म युगो-युगो से नवरा क दौरान े त करने का वधान ह। योक त क मा यम ेसे थम मनु य का शर र शु होता ह, शर र शु होतो मन एवं भावनाएं शु होती ह। शर र क शु क बना मन व ेभाव क शु संभव नह ं ह। चै नवरा क दौरान सभी े कार के त-उपवास शर र और मन क शु म सहायकहोते ह। नवरा म कये गये त-उपवास का सीधा असर हमारे अ छे वा य और रोगमु क िलये भी सहायक होता ेह। बड़ धूम-धाम से कया गया नवरा का आयोजन हम सुखानुभूित एवं आनंदानुभूित दान करता ह। मनु य क िलए आनंद क अव था सबसे अ छ अव था ह। जब य े आनंद क अव था म होता ह तो उसकेशर र म तनाव उ प न करने वाले सू म कोष समा हो जाते ह और जो सू म कोष उ स जत होते ह वे हमारे शर रक िलए अ यंत लाभदायक होते ह। जो हम नई े यािधय से बचाने क साथ ह रोग होने क दशा म शी े रोगमु दान करने म भी सहायक होते ह। नवरा म दगास शती को पढने या सुनने से दे वी अ य त स न होती ह एसा शा ो ु वचन ह। स शती का पाठउसक मूल भाषा सं कृ त म करने पर ह पूण भावी होता ह। य को ीदगास शती को भगवती दगा का ह ु ु व प समझना चा हए। पाठ करने से पूव ीदगास शती क पु तक ुका इस मं से पंचोपचारपूजन कर- नमोदे यैमहादे यैिशवायैसततंनम:। नम: कृ यैभ ायैिनयता: णता: मताम॥ ्जो य दगास शतीक मूल सं कृ त म पाठ करने म असमथ ह तो उस ु े य को स ोक दगा को पढने से लाभ ु ाहोता ह। यो क सात ोक वाले इस तो म ीदगास शती का सार समाया हवा ह। ु ु
  9. 9. 9 अ ैल 2011जो य स ोक दगा का भी न कर सक वह कवल नवाण मं का अिधकािधक जप कर। ु े ेदे वी क पूजन क समय इस मं े े का जप करे । जय ती म गलाकाली भ काली कपािलनी। दगा ु मा िशवा धा ी वाहा वधानमोऽ तुते॥दे वी से ाथना कर- वधे हदे व क याणं वधे हपरमांि यम। पंदे हजयंदे हयशोदे ह षोज ह॥ ्अथातः हे दे व! आप मेरा क याण करो। मुझे े स प दान करो। मुझे प दो, जय दो, यश दो और मेरे काम- ोध इ या दश ुओं का नाश करो। व ानो क अनुशार स पूण नवरा े त क पालन म जो लोग असमथ हो वह नवरा े क सात रा ी,पांच रा ी, द रा ी और ेएक रा ी का त भी करक लाभ े ा कर सकते ह। नवरा म नवदगा क उपासना करने से नव ह का कोप शांत होता ह। ु मं िस मंगल गणेश मूंगा गणेश को व ने र और िस वनायक क प म जाना जाता ह। इस िलये मूंगा गणेश पूजन क े े िलए अ यंत लाभकार ह। गणेश जो व न नाश एवं शी फल क ाि हे तु वशेष लाभदायी ह। मूंगा गणेश घर एवं यवसाय म पूजन हे तु था पत करने से गणेशजी का आशीवाद शी ा होता ह। यो क लाल रं ग और लाल मूंगे को प व माना गया ह। लाल मूंगा शार रक और मानिसक श य का वकास करने हे तु वशेष सहायक ह। हं सक वृ और गु से को िनयं त करने हे तु भी मूंगा गणेश क पूजा लाभ द ह। एसी लोकमा यता ह क मंगल गणेश को था पत करने से भगवान गणेश क कृ पा श चोर , लूट, आग, अक मात से वशेष सुर ा ा होती ह, ज से घर म या दकान म उ नती एवं ु सुर ा हे तु मूंगा गणेश था पत कया जासकता ह। ाण ित त मूंगा गणेश क थापना से भा योदय, शर र म खून क कमी, गभपात से बचाव, बुखार, चेचक, पागलपन, सूजन और घाव, यौन श म वृ , श ु वजय, तं मं क द ु े भा, भूत- ेत भय, वाहन दघटनाओं, हमला, चोर, तूफान, आग, ु बजली से बचाव होता ह। एवं ज म कडली म मंगल ह क पी ड़त होने पर िमलने वाले हािनकर भाव से मु ुं े िमलती ह।जो यउपरो लाभ ा करना चाहते ह उनक िलये मं िस मूंगा गणेश अ यिधक फायदे मंद ह। मूंगा गणेश क िनयिमत प से पूजा करने ेसे यह अ यिधक भावशाली होता ह एवं इसक शुभ भाव से सुख सौभा य क ाि होकर जीवन क सारे संकटो का वतः िनवारण े ेहोता ह। Rs.550 से Rs.8200 तक GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Visit Us:- http://www.gurutvakaryalay.blogspot.com/ , http://www.gurutvajyotish.blogspot.com/
  10. 10. 10 अ ैल 2011 नवरा त  व तक.ऎन.जोशी नव दन तक चलने वाले इस पव पर हम त रखकर मां क नौ अलग-अलग प क पूजा कजाती ह। इस दौरान घर म ेकया जाने वाला विधवत हवन भी वा य क िलए अ यंत लाभ द ह। हवन से आ मक शांित और वातावरण क शु े केअलावा घर नकारा मक श य का नाश हो कर सकारा मक श यो का वेश होता ह।नवरा तनवरा म नव रा से लेकर सात रा ी,पांच रा ी, द रा ी और एक रा ी त करने का भी वधान ह।नवरा त क धािमक मह व क अलावा वै ािनक मह व ह, जो वा े े यक से काफ लाभदायक होता ह। त करने सेशर र म चु ती-फत बनी रहती ह। रोजाना काय करने वाले पाचन तं को भी ु त क दन आराम िमलता ह। ब चे, बुजुग, ेबीमार, गभवती म हला को नवरा त का नह ं रखना चा हए।नवरा त से संबंिधत उपयोगी सुझाव  त क दौरान अिधक समय मौन धारण कर। े  त क शु आत म भूख काफ लगती ह। ऐसे म नींबू पानी पया जा सकता है । इससे भूख को िनयं त रखने म मदद े िमलेगी।  जहा तक संभव हो िनजला उपवास न रख। इससे शर र म पानी क कमी हो जाती ह और अपिश पदाथ शर र क बाहर े नह ं आ पाते। इससे पेट म जलन, क ज, सं मण, पेशाब म जलन जैसी कई सम याएं पैदा हो सकती ह।  एक साथ खूब सारा पानी पीने क बजाए दन म कई बार नींबू पानी पएं। े  यादातर लोगो को उपवास म अ सर क ज क िशकायत हो जाती ह। इसिलए त शु करने क पहले े फला, आंवला, पालक का सूप या करे ले क रस इ या द पदाथ का सेवन कर। इससे पेट साफ रहता है । े  त क दौरान चाय, काफ का सेवन काफ बढ़ जाता है । इस पर िनयं ण रख। े त क दौरान कौनसे खा े पदाथ हण कर?  त म अ न का सेवन व जत ह। जस कारण शर र म ऊजा क कमी हो जाती ह।  अनाज क जगह फल व स जय का सेवन कया जा सकता ह। इससे शर र को ज र ऊजा िमलती ह।  सुबह क समय आलू को े ाई करक खाया जा सकता ह। आलू म काब हाइ े ट चुर मा ा म होता है । इस िलए आलू े खाने से शर र को ताकत िमलती है ।  सुबह एक िगलास दध पल। दोपहर क समय फल या जूस ल। शाम को चाय पी सकते ह। ू े  कई लोग त म एक बार ह भोजन करते ह। ऐसे म एक िन त अंतराल पर फल खा सकते ह। रात क खाने म िसंघाड़े े क आटे से बने पकवान खा सकते ह। े
  11. 11. 11 अ ैल 2011 गु स शती  व तक.ऎन.जोशी, आलोक शमा संपूण ी दगा स शती क मं ो का पाठ करने से ु े नम ते शु भहं ेित, िनशु भासुर-घाितिन।साधक को जो फल ा होता है , वैसा ह क याणकार जा तं ह महा-दे व जप-िस ं कु व मे॥फल दान करने वाला गु स शती क मं ो का पाठ ह। े ऐं-कार सृ पायै ंकार ित-पािलका॥ गु स शती म अिधकतर मं बीज क होने से े लीं-कार काम प यै बीज पा नमोऽ तु ते।यह साधक क िलए अमोघ फल े दान करने म समथ चामु डा च ड-घाती च य-कार वर-दाियनी॥ह। व चे नोऽभयदा िन यं नम ते मं प ण॥गु स शती क पाठ का े म इस कार ह। धां धीं धूं धूज टे प ी वां वीं वागे र तथा। ार भ म क जका ु तो उसके बाद गु ां ं ीं मे शुभं क , ऐं ु ॐ ऐं र सवदा।।स शती उसक प यात े तवन का पाठ करे । ॐ ॐ ॐ-कार- पायै, ां- ां भाल-ना दनी। ां ं ूं कािलका दे व, शां शीं शूं मे शुभं क ॥ ु क जका- तो ु ूं ूं ूं -कार प यै ं ं भाल-ना दनी।पूव-पी ठका-ई र उवाच: ां ीं ूं भैरवी भ े भवािन ते नमो नमः॥7॥ ृ णु दे व, व यािम क जका-म ु मु मम। ् म :येन म भावेन च ड जापं शुभम ् भवेत॥१॥ ् अं क चं टं तं पं यं शं ब दरा वभव, आ वभव, हं सं लं ं ु ंन वम नागला- तो ं क लकं न रह यकम। ् मिय जा य-जा य, ोटय- ोटय द ं कु कु वाहा॥न सू म ् ना प यानम ् च न यासम ् च न चाचनम॥२॥ ् पां पीं पूं पावती पूणा, खां खीं खूं खेचर तथा॥क जका-पाठ-मा ेण ु दगा-पाठ-फलं ु लभेत। ् लां लीं लूं द यती पूणा, क जकायै नमो नमः॥ ुअित गु तमम ् दे व दे वानाम प दलभम॥३॥ ु ् सां सीं स शती-िस ं , कु व जप-मा तः॥गोपनीयम ् य ेन व-योिन-व च पावित। इदं तु क जका- तो ं ु मं -जाल- हां ये।मारणम ् मोहनम ् व यम ् त भनो चाटना दकम। ् अभ े च न दात यं, गोपयेत ् सवदा ृ णु॥पाठ-मा ेण संिस ः क जकाम ु मु मम॥४॥ ् क जका- व हतं ुं दे व य तु स शतीं पठे त। ्अथ म न त य जायते िस ं , अर ये दनं यथा॥ॐ दँ ु लीं ल जुं सः वलयो वल वल वल- ॥इित ी यामले गौर तं े िशवपावतीसंवादे क जका तो ं ुं वल बल- बल हं सं लं ं फ वाहा संपूण म॥ ्इित मइस क जका म ु का दस बार जप करना चा हए। इसी गु -स शती कार तव-पाठ क अ त म पुनः इस म े का दस बार ॐ ु ै ीं- ीं- ीं वेणु-ह ते, तुत-सुर-बटकहा गणेश य माता।जप कर क जका ु तो का पाठ करना चा हए। वान दे न द- पे, अनहत-िनरते, मु दे मु -माग॥क जका ु तो मूल-पाठ हं सः सोहं वशाले, वलय-गित-हसे, िस -दे वी सम ता।नम ते - पायै, नम ते मधु-म दिन। ह -ह -ह ं िस -लोक, कच- िच- वपुल, वीर-भ े नम ते॥१॥ ं ं े ेनम ते कटभार ै च, नम ते म हषासिन॥
  12. 12. 12 अ ैल 2011ॐ ह ंकारो चारय ती, मम हरित भयं, च ड-मु डौ च डे । ाणी वै णवी वं, वमिस बहचरा, ु वं वराह- व पा।खां-खां-खां ख ग-पाणे, क- क कते, उ - पे व पे॥ वं ऐ वं कबेर , वमिस च जननी, वं कमार महे ु ु ॥हँु -हँु हँु कांर-नादे , गगन-भु व-तले, या पनी योम- पे। ऐं ं लींकार-भूत, वतल-तल-तले, भू-तले े वग-माग।हं -हं हं कार-नादे , सुर-गण-निमते, च ड- पे नम ते॥२॥ पाताले शैल- ृ ं गे, ह र-हर-भुवने, िस -च ड नम ते॥९॥ऐं लोक क तय ती, मम हरतु भयं, रा सान ् ह यमाने। े हं लं ं शौ ड- पे, शिमत भव-भये, सव- व ना त- व ने। ां- ां- ां घोर- पे, घघ-घघ-घ टते, घघरे घोर-रावे॥ गां गीं गूं ग षडं ग, गगन-गित-गते, िस दे िस -सा ये॥ ेिनमासे काक-जंघ, घिसत-नख-नखा, धू -ने े े -ने े। वं ं मु ा हमांशो हसित-वदने, य रे स िननादे ।ह ता जे शूल-मु डे , कल-कल ककले, िस -ह ते नम ते॥३॥ ु ु ु हां हंू गां गीं गणेशी, गज-मुख-जननी, वां महे शीं नमािम॥१०॥ॐ - ं ं- ं ऐं कमार , कह-कह-म खले, को कलेनानुरागे। ु ु ु तवनमु ा-सं - -रे खा, क -क ु ु सततं, ी महा-मा र गु े॥ या दे वी ख ग-ह ता, सकल-जन-पदा, या पनी वशऽव-दगा। ुतेजांगे िस -नाथे, मन-पवन-चले, नैव आ ा-िनधाने। यामांगी शु ल-पाशा द जगण-ग णता, -दे हाध-वासा॥ऐंकारे रा -म ये, व पत-पशु-जने, त का ते नम ते॥४॥ ानानां साधय ती, ितिमर- वर हता, ान- द य- बोधा। सा दे वी, द य-मूित दहतु द ु रतं, मु ड-च डे च डे ॥१॥ॐ ां- ीं- ूं क व वे, दहन-पुर-गते म- पेण च े । ः-श या, यु -वणा दक, कर-निमते, दा दवं पूव-वण॥ ॐ हां ह ं हंू वम-यु े , शव-गमन-गितभ षणे भीम-व े। - थाने काम-राजे, वल- वल विलते, कोिशिन कोश-प े। ं ां ं ूं ोध-मूित वकृ त- तन-मुख, रौ -दं ा-कराले॥ े क क ककाल-धार ं ं ं मि , जग ददं भ य ती स ती- व छ दे क -नाशे, सुर-वर-वपुषे, गु -मु डे नम ते॥५॥ हंु कारो चारय ती दहतु द ु रतं, मु ड-च डे च डे ॥२॥ॐ ां- ीं- ूं घोर-तु डे , घघ-घघ घघघे घघरा या -घोषे। ॐ ां ं हंू - पे, भुवन-निमते, पाश-ह ते -ने े। ं ं ंू ो च-च े , रर-रर-रिमते, सव- ाने धाने॥ रां र ं ं रं गे कले किलत रवा, शूल-ह ते च डे ॥ ं तीथषु च ये े, जुग-जुग जजुगे लीं पदे काल-मु डे । लां लीं लूं ल ब- ज े हसित, कह-कहा शु -घोरा ट-हासैः।सवागे र -धारा-मथन-कर-वरे , व -द डे नम ते॥६॥ ककाली काल-रा ः ं दहतु द ु रतं, मु ड-च डे च डे ॥३॥ॐ ां ं ूं वाम-निमते, गगन गड-गडे गु -योिन- व पे। ॐ ां ीं ूं घोर- पे घघ-घघ-घ टते घघराराव घोरे ।व ांग, े व -ह ते, सुर-पित-वरदे , म -मातंग- ढे ॥ िनमाँसे शु क-जंघे पबित नर-वसा धू -धू ायमाने॥ व तेज, शु -दे हे, लल-लल-लिलते, छे दते े पाश-जाले। ॐ ां ं ंू ावय ती, सकल-भु व-तले, य -ग धव-नागान। ् क ड याकार- पे, वृ ष वृ षभ- वजे, ऐ मातनम ते॥७॥ ां ीं ूं ोभय ती दहतु द ु रतं च ड-मु डे च डे ॥४॥ॐ हँु हँु हंु कार-नादे , वषमवश-करे , य -वैताल-नाथे। ॐ ां ीं ूं भ -काली, ह र-हर-निमते, -मूत वकण।सु-िस यथ सु-िस ै ः, ठठ-ठठ-ठठठः, सव-भ े च डे ॥ च ा द यौ च कण , शिश-मुकट-िशरो वे तां कतु-मालाम॥ ु े ् क् -सव-चोरगे ा शिश-करण-िनभा तारकाः हार-क ठे ।जूं सः स शा त-कमऽमृ त-मृ त-हरे , िनःसमेसं समु े । सा दे वी द य-मूितः, दहतु द ु रतं च ड-मु डे च डे ॥५॥दे व, वं साधकानां, भव-भव वरदे , भ -काली नम ते॥८॥
  13. 13. 13 अ ैल 2011ॐ खं-खं-खं ख ग-ह ते, वर-कनक-िनभे सूय-का त- वतेजा। ॐ वं ा वं च रौ स च िश ख-गमना वं च दे वी कमार । ु व ु वालावलीनां, भव-िनिशत महा-क का द णेन॥ वं च च -हासा घुर-घु रत रवा, वं वराह- व पा॥वामे ह ते कपालं, वर- वमल-सुरा-पू रतं धारय ती। रौ े वं चम-मु डा सकल-भु व-तले सं थते वग-माग।सा दे वी द य-मूितः दहतु द ु रतं च ड-मु डे च डे ॥६॥ पाताले शैल- ृ ं गे ह र-हर-निमते दे व च ड नम ते॥१०॥ॐ हँु हँु फ काल-रा ीं पुर-सुर-मथनीं धू -मार कमार । ु र वं मु ड-धार िग र-गुह- ववरे िनझरे पवते वा। ां ं ूं ह त द ु ान ् किलत कल- कला श द अ टा टहासे॥ सं ामे श -म ये ु वश वषम- वषे संकटे क सते वा॥ ुहा-हा भूत- भूत, कल- किलत-मुखा, क लय ती े स ती। या े चौरे च सपऽ युदिध-भु व-तले व -म ये च दग। ुहंु कारो चारय ती दहतु द ु रतं च ड-मु डे च डे ॥७॥ र ेत ् सा द य-मूितः दहतु द ु रतं मु ड-च डे च डे ॥११॥ॐ ं ीं ं कपालीं प रजन-स हता च ड चामु डा-िन ये। इ येवं बीज-म ैः तवनमित-िशवं पातक- यािध-नाशनम। ्रं -रं रं कार-श दे शिश-कर-धवले काल-कटे ू दर ते॥ ु य ं द य- पं ह-गण-मथनं मदनं शा कनीनाम॥ ्हँु हँु हंु कार-का र सुर-गण-निमते, काल-कार वकार । इ येवं वेद-वे ं सकल-भय-हरं म -श िन यम। ् यैलो यं व य-कार , दहतु द ु रतं च ड-मु डे च डे ॥८॥ मं ाणां तो क यः पठित स लभते ािथतां म ं -िस म॥१२॥ ्व दे द ड- च डा डम - डिम- डमा, घ ट टं कार-नादे । चं-चं-चं च -हासा चचम चम-चमा चातुर िच -कशी। ेनृ य ती ता डवैषा थथ-थइ वभवैिनमला म -माला॥ यं-यं-यं योग-माया जनिन जग- हता योिगनी योग- पा॥ ौ क ौ वह ती, खर-ख रता रवा चािचिन ु ेत-माला। डं -डं -डं डा कनीनां डम क-स हता दोल ह डोल ड भा।उ चै तै ा टहासै, हह हिसत रवा, चम-मु डा च डे ॥९॥ रं -रं -रं र -व ा सरिसज-नयना पातु मां दे व दगा॥१३॥ ु मं िस फ टक ी यं " ी यं " सबसे मह वपूण एवं श शाली यं है । " ी यं " को यं राज कहा जाता है यो क यह अ य त शुभ फ़लदयी यं है । जो न कवल दसरे य े ू ो से अिधक से अिधक लाभ दे ने मे समथ है एवं संसार क हर य े क िलए फायदे मंद सा बत होता े है । पूण ाण- ित त एवं पूण चैत य यु " ी यं " जस य क घर मे होता है उसक िलये " ी यं " अ य त फ़लदायी े े िस होता है उसक दशन मा से अन-िगनत लाभ एवं सुख क े ाि होित है । " ी यं " मे समाई अ ितय एवं अ यश मनु य क सम त शुभ इ छाओं को पूरा करने मे समथ होित है । ज से उसका जीवन से हताशा और िनराशा दर होकर वह ू मनु य असफ़लता से सफ़लता क और िनर तर गित करने लगता है एवं उसे जीवन मे सम त भौितक सुखो क ाि होित है । " ी यं " मनु य जीवन म उ प न होने वाली सम या-बाधा एवं नकारा मक उजा को दर कर सकार मक उजा का ू िनमाण करने मे समथ है । " ी यं " क थापन से घर या यापार क थान पर था पत करने से वा तु दोष य वा तु से े स ब धत परे शािन मे युनता आित है व सुख-समृ , शांित एवं ऐ य क ि होती है । गु व कायालय मे " ी यं " 12 ाम से 75 ाम तक क साइज मे उ ल ध है मू य:- ित ाम Rs. 8.20 से Rs.28.00 GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
  14. 14. 14 अ ैल 2011 दे वी आराधना से सुख ाि  व तक.ऎन.जोशीदे वी भागवत क आठव े कध म दे वी उपासना का व तार से वणन है । दे वी का पूजन-अचन-उपासना-साधना इ या द क ं ेप यात दान दे ने पर लोक और परलोक दोन सुख दे ने वाले होते ह।  ितपदा ितिथ क दन दे वी का षोडशेपचार से पूजन करक नैवे े े क प म दे वी को गाय का घृ त (घी) अपण करना चा हए। मां को े चरण चढ़ाये गये घृ त को ा हण म बांटने से रोग से मु िमलती है ।  तीया ितिथ के दन दे वी को चीनी का भोग लगाकर दान करना चा हए। चीनी का भोग लागाने से य द घजीवी होता ह।  तृ तीया ितिथ क दन दे वी को दध का भोग लगाकर दान करना े ू चा हए। दध का भोग लागाने से ू य को दख से मु ु िमलती ह।  चतुथ ितिथ क दन दे वी को मालपुआ भोग लगाकर दान करना े चा हए। मालपुए का भोग लागाने से य क वप का नाश होता ह।  पंचमी ितिथ क दन दे वी को कले का भोग लगाकर दान करना चा हए। कले का भोग लागाने से े े े य क बु , ववेक का वकास होता ह। य क प रवार कसुख समृ े म वृ होती ह।  ष ी ितिथ क दन दे वी को मधु (शहद, महु, मध) का भोग लगाकर दान करना चा हए। मधु का भोग लागाने से े य को सुंदर व प क ाि होती ह।  स मी ितिथ क दन दे वी को गुड़ का भोग लगाकर दान करना चा हए। गुड़ का भोग लागाने से य े क सम त े शोक दर होते ह। ू  अ मी ितिथ क दन दे वी को े ीफल (ना रयल) का भोग लगाकर दान करना चा हए। गुड़ का भोग लागाने से य क संताप दर होते ह। े ू  नवमी ितिथ क दन दे वी को धान क लावे का भोग लगाकर दान करना चा हए। धान क लावे का भोग लागाने से े े े य क लोक और परलोक का सुख े ा होता ह। शाद संबंिधत सम या या आपक लडक-लडक े े क आपक शाद म अनाव यक प से वल ब हो रहा ह या उनक वैवा हक जीवन म खुिशयां कम े होती जारह ह और सम या अिधक बढती जारह ह। एसी थती होने पर अपने लडक-लडक े क कडली का अ ययन ुं अव य करवाले और उनक वैवा हक सुख को कम करने वाले दोष क िनवारण क उपायो क बार म व तार से जनकार े े े े ा कर।
  15. 15. 15 अ ैल 2011 स त लोक दगा ु दगा आरती ुदे व वं भ सुलभे सवकाय वधाियनी।कलौ ह कायिस यथमुपायं ू ह य तः॥ जय अ बे गौर मैया जय यामा गौर । तुमको िनस दन यावत ह र हा िशवर ॥१॥दे व उवाच: ृ णु दे व व यािम कलौ सव साधनम्। मांग िसंदर वराजत ट को मृ गमदको। ूमया तवैव नेहेना य बा तुितः का यते॥ उ जवल से दोऊ नैना च वदन नीको॥२॥विनयोगः कनक समान कलेवर र ा बर राजे।ॐ अ य ी दगास ु ोक तो म य र पु प गल माला क ठन पर साजे॥३॥नारायण ऋ षः अनु पछ दः, ् कह र वाहन राजत ख ग ख पर धार । े ीम काली महाल मी महासर व यो दे वताः, सुर नर मुिन जन सेवत ितनक दःख हार ॥४॥ े ु ीदगा ी यथ स ु ोक दगापाठे विनयोगः। ु कानन कडल शोिभत नासा े मोती। ुंॐ ािननाम प चेतांिस दे वी भगवती हसा। को टक चं दवाकर राजत सम योित॥५॥बलादाकृ य मोहाय महामाया य छित॥ शुंभ िनशंभु वदारे म हषासुरधाती।दग ु मृता हरिस भीितमशेषज तोः धू वलोचन नैना िनश दन मदमाती॥६॥ व थैः मृ ता मितमतीव शुभां ददािस। च ड मु ड संहारे शो णत बीज हरे ।दा र यदःखभयहा र ण वद या ु मधु कटभ दोउ मारे सुर भयह न करे ॥७॥ ैसव पकारकरणाय सदा िच ा॥ हाणी ाणी तुम कमलारानी।सवमंगलमंग ये िशवे सवाथसािधक। े आगम िनगम बखानी तुम िशव पटरानी॥८॥शर ये य बक गौ र नाराय ण नमोऽ तुते॥ े चौसंठ योिगनी गावत नृ य करत भै ँ ।शरणागतद नातप र ाणपरायणे। बाजत ताल मृ दंगा अ डम ँ ॥९॥सव याितहरे दे व नाराय ण नमोऽ तुते॥ तुम ह जग क माता तुम ह हो भरता।सव व पे सवशे सवश सम वते। भ न क दःखहता सुख स प कता॥१०॥ ुभये य ा ह नो दे व दग दे व नमोऽ तुते॥ ु भुजा चार अित शोिभत वर मु ा धार ।रोगानशोषानपहं िस तु ा ा तु कामान ् सकलानभी ान। ् मनवां छत फल पावे सेवत नर नार ॥११॥ वामाि तानां न वप नराणां वामाि ता ा यतां या त॥ कचन थाल वराजत अगर कपुर बा ी। ं ी माल कतु म राजत को ट रतन े योती॥१२॥सवाबाधा शमनं ैलो य या खले व र।एवमेव वया कायम य ै र वनाशनम॥ ् माँ अ बे जी क आरती जो कोई नर गाये।॥ इित ीस ोक दगा संपूण म ् ॥ ु कहत िशवानंद वामी सुख संप पाये॥१३॥

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