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Some Structural Aspects of Siri-Bhoovalaya

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This is the presentation by Er. Anil Kumar Jain at "Research Workshop on Siri-Bhoovalaya" during 13-14th September 2017 at KundKund Gyanpeeth, Indore, INDIA

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Some Structural Aspects of Siri-Bhoovalaya

  1. 1. सिरि भूवलय शोध काययशाला कु न्दकु न्द ज्ञानपीठ, इंदौि १३ - १४ सितम्बि २०१७ Research Workshop on Siri-Bhoovalaya 13-14 September 2017 at KundKund Gyanpeeth, Indore प्रस्तुतकतता इंजी. अनिल कु मतर जैि email: jain.anilk@gmail.com web-site: siri-bhoovalaya.org
  2. 2. इि प्रस्तुतत की ववषयावली 1. मेिे कायों का श्रेणीकिण 2. सिरि भूवलय चक्र िंिचना में भक्ततमर स्तोत्र तनबद्ध किने का प्रयोग 3. Scheme for decoding first Adhyaya of Shrutavatar 4. Paired Matrix representation of Chakra in Siri Bhoovalaya 5. सिरि भूवलय के चक्रों िे प्राकृ त गाथाओं को प्रकट किने का ििल प्रक्रम
  3. 3. Staging of Siri-Bhoovalaya on World Wide Platform General awareness platform for further exploration in the universe of Siri-Bhoovalaya 1. Web-site: siri-bhoovalaya.org 2. Talk at workshop on "Potentials of Siribhoovalaya for Linguists and Computer Application" at Central Institute of Indian Languages, 27th Sept. 2016, Mysuru. 3. Presentations on Slide-Share ( World's largest professional content sharing community.) 4. Publication of articles in forums of ‘Computers Scientists & Information Technologists’ of National repute
  4. 4. Derivation of Algorithms & Data Structures • Formation of Cryptographic schemes Transposition, Permutation & Substitution of Phonetic Characters • Algorithms for: – Chakra / Shreni Bandh – Navmaank Bandh – Shankh Bandh • Chakra Representation (Data Structure) for Computer processing • Digitised files for 85 Chakras (From Adhyaya 1 to 8) • Paired Matrix Approach (each of 27x27 elements) using Anka-Matrix & Pada-Sankhya-Matrix
  5. 5. Application of Basic Concepts 1. Encoding of Bhaktamar Stotra in Navamaank Bandh 2. Decoding of First Adhyaya of Shrutavatar i.e. Second Khand of Siri-Bhoovalaya 3. Deriving Prakrut Gathas directly from paired matrix Representation of Chakras
  6. 6. सिरि भूवलय चक्र िंिचना में भक्ततमर स्तोत्र तनबद्ध किने का प्रयोग इि शोध प्रबंध का उद्देश्य सिरि भूवलय ग्रन्थ की मूल िंिचना - 'चक्र' का अध्ययन औि ककिी अन्य ग्रन्थ अथवा कृ तत को सिरि भूवलय में प्रयुक्त बंध िे चक्रों में तनबद्ध किने का प्रयाि है। इि शोध प्रबंध की सिरि भूवलय की िंिचना को बेहति िमझने औि तत्िम्बन्धी शोध में उपयोगगता सिद्ध होगी।
  7. 7. नवमांक-बंध में प्रयुक्त कोष्ठठकाओं का क्रम
  8. 8. भक्तामि स्तोत्र के पदों का सिरि भूवलय के अंकों में परिवतयन
  9. 9. नवमांक-बंध में तनबद्ध प्रथम िब-मेट्रिक
  10. 10. Scheme for decoding first Adhyaya of Shrutavatar
  11. 11. Shankha Bandha as applied to sub-matrix
  12. 12. Result of Shankha Bandha on sub-matrix 5
  13. 13. Published Text of First Adhyaya of Shrutavatar
  14. 14. Paired Matrix representation of Chakra in Siri Bhoovalaya 1. Representation of one Chakra by a pair of matrices (each of [27x27] elements) named as Anka matrix and Pada-Sankhya matrix. 2. Anka matrix is identical to Chakra matrix in a single matrix representation of a Chakra. 3. Pada-Sankhya matrix is additional matrix with specific elements containing integer numbers to indicate punctuation with Pada-Sankhya, rest of the elements of this matrix are set to number zero or null value. 4. This approach of representing a Chakra with a pair of matrices as described in this paper is a simple and efficient solution in an elegant manner to incorporate punctuation of decoded verses into Pada / Chhanda with respective sequence number thereof.
  15. 15. Part of first Chakra of Siri-Bhoovalaya
  16. 16. Pada-Sankhya Matrix for first Chakra of Siri-Bhoovalaya
  17. 17. RESULT OF TRAVERSING A-MATRIX AND P-MATRIX PAIR
  18. 18. VERSES FROM FIRST CHAKRA OF SIRI BHOOVALAYA AS PUBLISHED
  19. 19. सिरि भूवलय के चक्रों िे प्राकृ त गाथाओं को प्रकट किने का ििल प्रक्रम 1. इि का उद्देश्य सिरि भूवलय के चक्रों िे प्राकृ त गाथाओं को अतनबद्ध किने हेतु एक ििल एवं अपिोक्ष ववगध का वणयन है - ष्ििे िहिता िे कम््यूटिीकृ त ककया िा िकता है। 2. इि ववगध को सिरि भूवलय के िभी चक्रों पि प्रयुक्त ककया िा िकता है। 3. आधुतनक कम््यूटि आधारित इि ववगध की सिरि भूवलय की िंिचना को बेहति िमझने औि तत्िम्बन्धी शोध में उपयोगगता सिद्ध होगी।
  20. 20. प्राकृ त गाथाओं को प्रकट किने की ववगध १. अध्याय के प्रथम चक्र के बन्धानुिाि अंकाक्षि मैट्रिक्ि की प्रथम कोष्ठठका के अक्षि को िंगृहीत किें - यह प्राकृ त गाथा का प्रथम अक्षि है। २. तनधायरित बन्धानुिाि चक्र की अंकाक्षि मैट्रिक्ि की कोष्ठठकाओं में उत्तिोत्ति क्रम िे बढ़ते िायें औि उिी के िमानान्ति पद िंख्या मैट्रिक्ि की कोष्ठठकाओं में बढ़ते हुए पद िमाष््त तनर्णयत किें। अगि पद-िंख्या मैट्रिक्ि की कोष्ठठका में शून्य के अलावा कोई अन्य अंक है तो इिे वतयमान पद की िमाष््त तनर्णयत किें औि अंक की िंख्या इि पद की क्रम िंख्या है। ३. क्रम िे पदों के बीच आने वाले अंकाक्षिों की िंख्या को एक काउंटि में गणना के सलए िखें। इििे एक पद में कु ल अंकाक्षिों की िंख्या तनर्णयत हो िके गी। मुख्य पदों में पाद पदों की तुलना में कम अंकाक्षि होते हैं। प्राकृ त गाथाओं के सलए मुख्य पदों के प्रथमाक्षि ही प्रा्त किने हैं।
  21. 21. प्राकृ त गाथाओं को प्रकट किने की ववगध ४ पद-िंख्या मैट्रिक्ि में पद िमाष््त प्रा्त होने के पश्चात अंकाक्षि मैट्रिक्ि की अगली कोष्ठठका के अंक को िंगृहीत किें, अगि यह अंक व्यंिन (अथायत अंक २८ िे ६० के बीच ) है तो क्रम िे बढ़ते हुए अगले स्वि अंकाक्षि (अथायत अंक १ िे २७ के बीच ) आने तक िंग्रह किें । इिे िंयुक्त गाथा का अगला अक्षि प्रा्त होगा। ५. प्राकृ त गाथाओं के सलए मुख्य पद के प्रथमाक्षिों का ही िंग्रह किें। पाद पदों के प्रथमाक्षिों को िंग्रह नहीं किते हुए बन्धानुिाि कोष्ठठकाओं में पािगमन किें। पाद पदों के प्रथमाक्षिों का अन्य भाषाओं के काव्यों को प्रकट किने के सलए होता है। ६. चिण िंख्या २ िे ५ तक की ववगध िे अध्याय के िभी चक्रों िे क्रम िे प्राकृ त के अक्षिों की श्रृंखला को िंयुक्त कि गाथा प्रा्त की िा िकती है।
  22. 22. Feedback & Suggestions उपष्स्थत ववद्वतिनों द्वािा िमीक्षा एवं िुझाव धन्यवाद

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