Jai guru maharaj

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''Jai sachida Nand''
Shri Shri 108 Swami Bodha Nand Maharaj ki Jai
Nangali Maharaj ki Jai

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  • plzz i need the contact number of the ashram ,,,its v urgent :( i m not able to get it ,i have tried a lot.........
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  • can nyone help me how to contact mahraj ji
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Jai guru maharaj

  1. 1. Swami Hira PuriAashrum, NangalBihalan<br />
  2. 2. गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरःगुरु साक्षात पर-ब्रह्मा तत्स्मै श्री गुरवे नमः<br />दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे ना कोईजो सुख में सुमिरन करे तो दुःख कहा से होए <br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  3. 3. Overview of NangalBihalan<br />Area : 3 km<br />Tehsil : Mukerian<br />Languages : Punjabi, Hindi & English <br />District : Hoshiarpur<br />Population : Above 6,000 ( Males : 35,00: Females : 25,00)<br />Literacy : 85 %<br />Railway : Jalandhar to Pathankot<br />Transportation : by- Bus, local transport by car<br />Near cities : Dasuya and Mukerian<br />Arrivals of Aashrum: 10,000 on the day of fair<br />Area of Aashrum : 3acors <br />Location : on the bottom of village<br />Tourism tpyes : Religious, haritage.<br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  4. 4. History of this tourism attraction<br />This temple was made by Swami Hira Puri JiMaharaj. This temple shows the natural beauty.<br />There were so many huts of Mahatmas at the time of 1915-1920, in 1926 Swami HiraNandJi came here and made the building in 1940.<br />In present time the owner of this Aashrum is Swami BodhaNand. He came in this Aashrum in 1935 and served Guru Swami Hira NandJi.<br />And at the last time of Guru ji, Guru ji handed over the gadhi of this Aashrum to Swami BodhaNand.<br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  5. 5. 108 Shiri Swami BodhaNandjiMaharajBirth date of Swami ji is: 12-Dec-1908In present time he is aged above 100years.He believes in simple living and high thinking.He have approximately 40 acre land but he believe property is only for living in this world but actually we have to think where we should have to go after death. The death is true so that we have to get the knowledge of our soul because if we have knowledge of our soul than we can die by own choice and our works will go with us. <br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  6. 6. Continues……<br />We get human life by our goodwill so that we have to do that work which is liked by God. Firstly we have to set the aim and then do the work effectively which tell us how we can get our aim.<br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  7. 7. Photo Gallery of Fair<br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  8. 8. Continues….<br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  9. 9. Continues… <br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  10. 10. Continues….<br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  11. 11. Fairs of this Temple <br /> There are 17 fairs are organized in a year.<br />12 fairs of them of Sangrand, 1 is Bisakhi, 1 of them is ‘Bias Puja’ , 1 is Swami HiraNandJi’s last day of life, 1 of them is birth day of Swami HiraNandJi and last fair is from Swami Sunder PuriJiMaharaj.<br />The fair of 7 July is too famous it is about Bias Puja. In this assignment I am discussing the fair of 7 July.<br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  12. 12. Tourists arrivals of this Destination<br />Inbound tourists arrivals: 9,000 -9,650<br />International tourists are : 350<br />Daily visitors are : 500<br />Visitors of other big fairs : 12,000<br />Arrivals of day of Sangrand: 3,000<br />Arrivals on Bisakhi are : 6500-7500<br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  13. 13. Time Schedule of this Temple<br />Opening time : 3:45 AM<br />Aarti & kirtan time : 4:30-7:00AM<br />Guru ka langer : 24 hrs.<br />Tea time : 6-8 AM & 4-5PM<br />Aarti in eve : 7:10<br />Closing time : 9:15<br />Daily time of Satsang : Any time (It depends)<br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  14. 14. Time schedule of day of fair <br />Guru darshan : for the whole day.<br />Breakfast : 8:00-10:15<br />RathYatra : 11:00AM-12:00 PM<br />Satsang : 12:15-03:00<br />Note : Actually the satsang of other sants’s going on from 10:30 and Guru MahrajJi’sSatsang starts on 2:00PM to till 3:00pm.<br />Guru ka langer : 3:00 PM-7:00 PM<br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  15. 15. Some snaps of Satsang<br />‘Guru kimehmaGranthnajane<br />Granthkimehma Guru pahchane’<br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  16. 16. Continues..<br />Vadebaghymanush tan pava<br />Sur durlabhsabhgranthangava<br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  17. 17. Satsang<br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  18. 18. गुरु की आवश्यकता क्यों<br />हर मनुष्य के भीतर ज्ञान का भण्डार छुपा है अर्थात उसमे गुरुत्व विधमान है परन्तु उसके उद्घाटन के लिए गुरु की आवश्यकता है। किसी भी दिशा में ज्ञान प्राप्त करने के लिए उस विषय के गुरु की जरुरत होती है। मनुष्य को डाक्टर बनना हो तो डाक्टर की, वकील बनना हो तो वकील की, विद्वान् बनना हो तो विद्वान् की और चोर बनना हो तो चोर की शरण जाकर उस विषय का ज्ञान लेना पड़ता है। तो फिर सच्चे सुख का जो अमिट खजाना है, उस सच्चिदानंद परमात्मा का ज्ञान क्या ऐसे ही मिल जायेगा।<br />परमात्मा का साक्षात्कार करने के लिए किसी देहधारी पूर्ण गुरु की आवश्यकता क्यों होती है, इसे समझने के लिए पहले इस बात को भलीभांति मन में बैठा लेना जरुरी है कि पूर्ण संत या सच्चे सद्गुरु परमात्मा के ही व्यक्त रूप होते है। सच्चे गुरु और परमात्मा के बीच कोई अंतर नहीं होता। अहंकार ही मनुष्य और परमात्मा के बीच एकमात्र आवरण है। सच्चे संत इस आवरण को पुर्णतः दूर कर परमात्मा से उसी प्रकार एकाकार हो जाते है, जैसे नदी समुन्द्र में मिलकर एकाकार हो जाती है।<br />मनुष्य भौतिक सीमाओं के कारन प्रभु के अभौतिक रूप का दर्शन कर्मे में सर्वदा असमर्थ है। परमात्मा तक उसकी पहुच तभी हो सकती है जब स्वयं परमात्मा मनुष्य का रूप धारण कर मनुष्य से उसके भौतिक स्तर तक आकर मिले। दयालु परमात्मा मनुष्य के उद्धार के लिए ठीक यही रास्ता अपनाते है। वे मानवीय रूप धारण कर संसार में आते है और परमात्मा के इसी मानवीय रूप को गुरु नाम दिया गया है। अर्थात गुरु मनुश्येरूप में परमात्मा ही है। अपने मानवीय रूप के माध्यम से वे जीवो को जागते है और उन्हें सही मार्ग दिखलाकर दीक्षा व कृपा के सहारे अपने से मिलते है। दीक्षा ही परमात्मप्राप्ति का साधन है।<br />सर्वानुग्राहक परमेश्वर ही आचार्य शरीर में स्थित होकर दीक्षा से जीव को परम शिव-तत्व की प्राप्ति करते है।<br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  19. 19. जय श्री सच्चिदानंद जीआत्मा और परमात्मा<br />सभी महात्माओ का एक ही सन्देश है, एक ही उपदेश है, चाहे वे किसी भी जाति, धर्म, देश या समय में क्यों ना आये हों। संसार में कभी कोई महात्मा जाति या धर्म बनाने के लिए नहीं आता, न महात्मा हमारे हाथो में डंडे या तरवार देने के लिए आते है। वे तो सिर्फ हमसे परमात्मा की भक्ति करवाकर, हमें देह के बन्धनों से आजाद करके वापुस जाकर उस परमात्मा के साथ मिलाने के लिए आते है। परन्तु आमतोर पर हम दुनिया के जीव, ऐसे मालिक के भक्तो और प्यारो के जाने के बाद बहर्मुखी हो जाते है, कर्मकांड में फस जाते है, उनके बताये हुए पवित्र और ऊँचे उपदेश को छोटे छोटे दायरों में बंद करके जाति, धर्म और राष्ट्रों का रूप दे देते है और एक दुसरे से लड़ना-झगड़ना शरू कर देते है। हम ऐसा क्यों करते है? कभी अपने पेट की खातिर करते है, कभी अपनी इज्ज़त या मान-बड़ाई के लिए करते है। जिन महात्माओ का उपदेश सम्पूर्ण संसार के लिए होता है, उसे हम छोटी-छोटी सीमाओं में बंद कर देते है। मालिक के उन भक्तो और प्यारो के साथ हम उससे अधिक और क्या अन्याय कर सकते है। अगर पक्षपात-रहित होकर हम किसी भी महात्मा की वाणी का अध्ययन करे तो हम पाएंगे कि प्रत्येक महात्मा का एक ही अनुभव है, एक ही सन्देश और उपदेश है। गुरु नानक साहिब उपदेश देते है कि हरेक को उस परमात्मा कि तलाश है, हम सब दुनिया के जीव वापस जाकर उससे मिलना चाहते है। हमारी आत्मा उस परमात्मा कि अंश है, हम उस सतनाम रूपी समुन्द्र कि बूंद है।<br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  20. 20. दुखी क्यों<br />सत्संगी को कभी अप्रसन्न या दुखी नहीं होना चाहिए। जो कुछ मालिक ने प्रदान किया है उसके लिए धन्यवाद करे और जीवन में जो कुछ आये उसका साहसपूर्वक सामना करे। आपको अपनी जिम्मेदारियां अच्छी तरह मालूम है, इसलिए लोगो के प्रति अपनी लेना-देना प्रसन्नतापूर्वक पूरा करे। जीवन के प्रति हमेशा निराशापूर्वक नजरिया रखना अच्छा नहीं है बल्कि आपको चाहिए कि अपने भाग्य को सराहे कि आपमे आत्म सुधार कि इतनी तीव्र इच्छा है और परमात्मा का धन्यवाद करें कि उसने आपको आत्म-साक्षात्कार के मार्ग पर लगा दिया है जो अंत में आपका परमात्मा से मिलाप कराएगा।<br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  21. 21. This message is dedicated to all devotees.<br />At present it is not easy task to find the 'Real Guru' but 'Swami BodhaNandPuriJiMaharaj' is the 'Puran Guru' in this era. He has been read a no. of religious books, he adopt the real sense of the books and the people from inbound/outbound come to him for requesting for answering the questions which are fixed in their mind from long-2 time. He have a great 'Spiritual' knowledge. So that we should joint heads togather and think where we should go. There are two aspects of life one is good and another one is bad. A guru is needed to take the spiritual aspirant by the hand and lead him or her along the spiritual path, so that if we join the company of 'Real Guru' then we can get the moksha easily.<br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />
  22. 22. Jai SachidaNand<br />जय श्री सच्चिदानंद जी<br />

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