कर्म प्रधान सफल विजयी जीिन अथिमिेद 7.50Action for Success AV 7.50कभम प्रधान सपर विजमी जीिन-अथिम 7.501. मथा िऺभशननविमश्िाहा...
फरों को द्िाया सभस्ि अन्तनों का बांडाय बया जािा है . उस क ऩश्चाि सफ अन्तनों क भध्म भें स्थावऩि सभस्ि                      ...
गोकृवष आधारयि साभाजजक व्मिस्था से ऩमामियण औय सभाज क ककसी ऺेत्र औय सभुदाम का शोषण न होने                                   ...
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कर्म प्रधान सफल विजयी जीवन अथर्ववेद

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कर्म प्रधान सफल विजयी जीवन अथर्ववेद

  1. 1. कर्म प्रधान सफल विजयी जीिन अथिमिेद 7.50Action for Success AV 7.50कभम प्रधान सपर विजमी जीिन-अथिम 7.501. मथा िऺभशननविमश्िाहा हन्त्मप्रनि | ृएिाहभद्म ककििानऺैिध्मासभप्र || अथिम 7.50 .1 मAs lightening in the sky destroys trees by striking them, in same manner destroy all the means ofmaking a living without hard work by gambling .जजस प्रकाय आकाश से गगयिी बफजरी फड़े िऺों को नष्ट कयिी है , उसी बाांनि बफना श्रभ कये जए क खेर जैसे ृ ु ेजो अथोऩाजमन कयने क साधन हैं उन्तहे नष्ट कयो. े2. िुयाणाभिुयाणाां विशाभिजषीणाभ | ुमसभैिु विश्ििो बगो अन्तिहमस्िां कृिां भभ || अथिम 7.50.2There are three types of persons. िुय – Fast impatient workers those who in unnecessary hasteonly spoil their work. अिय – Those that are sloth and lazy to engage in hard work. अिजष- Those ु ुमwho due to excess of greed want to gain wealth by any means fair or foul, gambling, betting,hoarding , smuggling, adulteration, cheating. Such persons only bring misery to society. Fruits ofsuccess should be the share of those who perform hard labor.िय, अिय औय अिजष िीन प्रकाय क बाग्म हीन रोग होिे हैं . िय िे जो धैमम न होने क कायण हय कामम भें ु ु ुम े ु ेविपर यहिे हैं, अिय िे जो शशगथरिा औय सुस्िी क कायण ककसी कामम भें सपरिा नहीां ऩािे औय अिजुष िे ु े मजो फयाइमों क साधनों से सपरिा प्राप्ि कयना चाहिे हैं . मह िीनों प्रकाय क रोग सभाज कक अिननि औय ु े ेदबामग्म का कायण फनिे हैं. किर स्म ऩरुषाथम से ही सभाज औय याऻ का सौबाग्म फनिा है . ु े ु3. ईड़े अजग्नां स्िािसांु नभोशबरयह ऩसक्िो वि चम्कृिां न: |यथैरयि प्र बये िाजमनि: प्रदक्षऺणां भरुिाां स्िोभभध्माभ || अथिम 7.50.3 ृBy concentrating all my energies and positive motivations for actions by following in the path ofDevtas- of living a blessed lifestyle , address the tasks on hand with all your ability to gather thefruits of your efforts like the driver who controls all the power of a vehicular mechanism. And thuscollect all the food grains and bring them home. Then seek help of the भरुि गण themicroorganisms present in the harvested food to continuously perform their work for maturingthese food products for our use. This mantra is easily appreciated in context of skills such as winemaking, making curds by enhancing enzyme actions in food. Entire skills, knowledge and energy isdevoted to grapes growing, harvesting and collecting it .Then the microorganisms present in theharvest work ceaselessly for maturing of the wine as final product.( Reference to MARUTS in this mantra is a very significant concept here and Rig Ved 5.52 to 5.61mantras of Rishi Shyawashwa Atreya Devta Marut has to be considered in proper understanding ofthe term प्रदक्षऺणां भरुिाां स्िोभभध्माभ. ृप्रबु की कृऩा से अऩनी आ्भा भें स्थावऩि दे ि्ि गणों से प्रेरयि सभस्ि इजन्तिमो को अऩनी अजजमि ऊजाम क ु ेफर को सांग्रहीि कय क अऩने ननधामरयि कभम ऩय ऐसे मक्ि होिा हूां जैसे एक यथ का ननमांत्रण कय क सम्ऩूणम े ु े
  2. 2. फरों को द्िाया सभस्ि अन्तनों का बांडाय बया जािा है . उस क ऩश्चाि सफ अन्तनों क भध्म भें स्थावऩि सभस्ि े ेभरुिगण ननयां िय कामम कयिे हुए उस अन्तन को उऩमोगी फनािे हैं .4. िमां जमेभ ्िमा मुजा ििभस्भाकभांशभुदिा बये बये | ृअसभभ्मशभन्तिां ियीम: सगां कृगध प्र शत्रणाां भघिन्तिष््मा रूज || अथिम 7.50.4 ु ू ृBy following the correct path in all actions one is blessed by divine powers to have the confidenceto overcome all obstacles.ऩयभेश्िय से सन्तमुक्ि हो कय ही प्र्मेक स्कामम भें फाधाओां ऩय विजम प्राप्ि कयने क शरए आ्भफर प्राप्ि ेहोिा है .5. अजैषां ्िा सांशरखखिभजैषभि सांरुधभ | ुअविां िको मथा भथदे िा भथ्नाशभ िे कृिभ || अथिम 7.50.5 ृMust destroy all worldly and criminal attitudes embedded in temperament that act asimpediments in the path of progress.उन्तननि क भागम भें रुकािट डारने िारे याजशसक औय िाभशसक ( काभ क्रोध) जो भेये रृदम ऩटर ऩय अांककि ेहैं उन को भैं उसी प्रकाय कचर दां ू जैसे एक बेड़ड़मा अऩने शशकाय को भथ डारिा है . ु6. उि प्रहाभनिदीिा जमनि कृिशभि श्िघ्नी वि गचनोनिकारे |मो दे िकाभो न धनां रुणावि सशभ्िां याम: सजनि स्िधाशब : || अथिम 7.50.6 ृThose motivated with personal greed play with high stakes in pursuit of hoarding immense riches.They attain great heights to ultimately fall from high pinnacle. (Do we not see the reflection ofwestern economies bubble burst phenomenon in this Vedic wisdom?)(अधभेणैधिे िािि ििो बिाखण ऩश्मनि | िि: सऩ्नान जमनि सभरस्िु विनश्मनि || भनुस्भनि4.174|| ू ृरोब क कायण न्तमाम-अन्तमाम-उगचि अनुगचि सबी भागों से धनाजमन को िह बि दे खिा है . अऩने सफ ेप्रनिद्िांददमों ऩय अन्तमाम से छर से विजम ऩा कय खफ ऊचा उठ कय इस प्रकाय गगयिा है कक उस का सभर ू ां ूविनाश हो जािा है .)7. गोशबष्टये भाभनिां दयेिाां मिेनऺुधां ऩरुहूि विश्िे | ु ुिमां यजसु प्रथभा धनान्तमरयष्टासो िजनीबजममेभ || अथिम 7.50.7 ृअभनि- ऻानकामम कौशर क अबाि से उ्ऩन्तन दरयििा क प्रबाि को गोऩशु इ्मादद क ऩारन की व्मिस्था से े े ेदय कयो. ू(इस विषम ऩय छाांदोग्म उऩननषद भें स्मकाभ जाफार औय ऋवष गौिभ हरयिभि का प्रसांग इसी सांदबम की ुऩजष्ट कयिा है . स्मकाभ जाफार को गोऩारन ही सम्ऩूणम शशऺा का भाध्मभ फनामा गमा था. 400 गौिों को ु1000 हो जाने ऩय शशऺा ऩणम भानी गै थी. शशऺा की अिगध सभम सीभा ऩय ननधामरयि नहीां की जािी थी.की ूगइ थी जैसा आज कर शशऺा ऩिनि भें चरन है . ( 400 गौओां को 1000 होने भें रगबग 6 िषम रगिे है .सम्बि है कक 6 िषम की शशऺा क ऩाठ्मक्रभ को आधुननक शशऺा ऩिनि भें बी post graduate शशऺा का ेऩाठ्मक्रभ यखा जािा है .)आधननक विचायधाया भें UNO द्िाया साधन विहीन दरयि सभाजक उ्थानक शरए ऩशऩारन को ही सफ से ु े े ुभह्िऩणम मोजना भाना जािा है ) ूइस प्रकाय गौओां द्िाया जैविक अन्तन बी सम्बि होगा जजस क द्िाया सभाज की ऺुधा से छटकाया शभरेगा. े ु
  3. 3. गोकृवष आधारयि साभाजजक व्मिस्था से ऩमामियण औय सभाज क ककसी ऺेत्र औय सभुदाम का शोषण न होने ेसे अदहांसा ऩय आधारयि सयाऻ की व्मिस्था स्थावऩि होगी. ु8. कृिां भे दक्षऺणां हस्िे जमो भे सव्म आदहि: |गोजजद् बमासभश्िजजिनांजमो दहय्मजजि || अथिम 7.50.8 ूHard work on one hand ensures success in every task undertaken. This ensures self discipline andpositive mental attitudes in life. That ultimately leads to peace and happiness.दादहने हाथ से ऩरुषाथम कयने ऩय सपरिा/ विजम फाएां हाथ का खेर फन जािा है . गोजजि ऻानेंदिमों औय ुअश्िजजि कभेंदिमों ऩय विजम ऩा कय धनांजम ऻान धन औय दहय्मजजि दहियभणीम आ्भऻान को प्राप्िकयने िारा फनिा है .9. अऺा: परििी द्मुिां द्ि गाां ऺीरयणीशभि |सां भा कृिस्म धायमा धनु: स्नाव्नेि नह्मि || अथिम 7.50.9My efforts in life should be transparent actions that are not in shrouded in darkness but are in fullview as in day light. Such actions are meant to provide a life with bounties like a milk giving cow.Wisdom provided by intellectual knowledge and strength provided by skillful actions are like thetwo ends of a bow that is kept taut to shoot the arrows to seek their targets in life.भेये ऩुरुषाथम ददन क उजारे जैसे भें सफ जन को दशमनीम हों . औय भेये प्रम्न जीिन भें सफ उऩरजधधमाां दध े ूदे ने िारी गौ क सभान प्रदान कयें . ऩरुषाथम भें भेये भजस्िष्क औय रृदम, जीिन भें धनष कभान क दो शसयों क े ु ु े ेसभान हों जजन को खीांच कय ऩय ही डोयी से रक्ष्म प्राप्ि कयने क शरए िीय चराए जािे हैं . े

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