आयुर्वेदिक बनौषधियां : हल्‍दी के औषधीय उपयोग

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हल्‍दी आयुर्वेद की एक महत्‍वपूर्ण औषधि है जिसके प्रयोग से तमाम प्रकार की बीमारियों का इलाज किया जा सकता है

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आयुर्वेदिक बनौषधियां : हल्‍दी के औषधीय उपयोग

  1. 1. आयुर्वेदिक बनौषधियां : हल्‍दी के औषधीय उपयोग डा 0 देशबन्‍धु बाजपेयी कनक पालीथेरेपी क्‍लीनिक एवं रिसर्च संस्‍थान 67-70, भूसाटोली रोड , बरतन बाजार , कानपुर 208001, उत्‍तर प्रदेश , भारत फैक्‍स : 91 512 2308092
  2. 2. हल्‍दी : Turmeric <ul><li>इस दृव्‍य को सभी भारतीय , भोज्‍य पदार्थ के रूप में प्रयोग करते हैं </li></ul><ul><li>आयुर्वेद में इसे औषधि के रूप में प्रयोग करते हैं </li></ul><ul><li>घरेलू उपचार में इसे प्रयोग करते हैं </li></ul><ul><li>बाहरी उपचार में इसे प्रयोग करते हैं </li></ul>सूखी हल्‍दी का चूर्ण
  3. 3. हल्‍दी के विभिन्‍न भाषाओं में नाम <ul><li>संस्‍कृत : हरिद्रा , कांचनीं , वरवर्णिनीं , पीता </li></ul><ul><li>बंगला : हलुद , हरिद्रा </li></ul><ul><li>मराठी : हलद </li></ul><ul><li>गुजराती : हलदर </li></ul><ul><li>कन्‍नड़ : अरसीन </li></ul><ul><li>तेलुगू : पासुपु </li></ul><ul><li>फारसी : जरदपोप </li></ul><ul><li>अरबी : डरूफुस्‍सुकुर </li></ul><ul><li>English : Turmeric </li></ul><ul><li>Latin : Curcuma Longa, Curcuma Domestica </li></ul>
  4. 4. हल्‍दी के प्रकार हल्‍दी दो प्रकार की होती है , एक लम्‍बी तथा दूसरी गोल लम्‍बी हल्‍दी गोल हल्‍दी
  5. 5. हल्‍दी परिचय :1 <ul><li>यह खेतों में बोई जाती है , लेकिन कई स्‍थानों में यह स्वयमेव उतपन्‍न हो जाती है </li></ul><ul><li>जमीन के नीचे कन्‍द के रूप में इसकी जड़ें होती है </li></ul><ul><li>ये कन्‍द रूपी जड़ें हरी अथवा ताजी अथवा कच्‍ची हल्‍दी होती है </li></ul>
  6. 6. हल्‍दी परिचय : 2 <ul><li>कच्‍ची हल्‍दी की सब्‍जी बनाकर खाते हैं </li></ul><ul><li>कच्‍ची हल्‍दी को सुखा लेते हैं या उबालकर सुखा लेते हैं , ऐसी हल्‍दी सूखने के बाद रंग परिवर्तन होकर पीला रंग ग्रहण कर लेती है </li></ul>
  7. 7. हल्‍दी के रासायनिक तत्‍व <ul><li>हल्‍दी में कई प्रकार के रासाय‍निक तत्‍व पाये जाते हैं </li></ul><ul><li>एक प्रकार का सुगंधित उडंनशील तैल 1 प्रतिशत </li></ul><ul><li>एक प्रकार का गोंद जैसा पदार्थ </li></ul><ul><li>एक प्रकार का पीले रंग का रंजक पदार्थ </li></ul><ul><li>एक प्रकार का गाढा तेल </li></ul>
  8. 8. कुछ आधुनिक तथ्‍य <ul><li>वैज्ञानिकों का कहना है कि हल्‍दी में लौह तत्‍व पाया गया है </li></ul><ul><li>इसमें विटामिन बी ग्रुप के कुछ तत्‍व पाये गये हैं </li></ul>
  9. 9. विश्‍लेषण में पाये गये तत्‍व - 1 <ul><li>हल्‍दी में पाये गये आवश्‍यक तत्‍व निम्‍न प्रकार हैं </li></ul><ul><li>जल 13.1 % ग्राम </li></ul><ul><li>प्रोटीन 6.3 % ग्राम </li></ul><ul><li>वसा 5.1 % ग्राम </li></ul><ul><li>खनिज पदार्थ 3.5 % ग्राम </li></ul><ul><li>रेशा 2.6 % ग्राम </li></ul><ul><li>कारबोहा‍‍इड्रेट 69.4 % ग्राम </li></ul>
  10. 10. विश्‍लेषण में पाये गये तत्‍व - 2 <ul><li>कैल्शियम 150 मिलीग्राम प्रतिशत </li></ul><ul><li>फासफोरस 282 मिलीग्राम प्रतिशत </li></ul><ul><li>लोहा 15 मिलीग्राम प्रतिशत </li></ul><ul><li>विटामिन ए 50 मिलीग्राम प्रतिशत </li></ul><ul><li>विटामिन बी 03 मिलीग्राम प्रतिशत </li></ul><ul><li>कैलोरियां प्रति 100 ग्राम में : 349 कैलोरी </li></ul>
  11. 11. हल्‍दी के गुण -1 <ul><li>आयुर्वेद में हल्‍दी के गुणों का वर्णन कई ग्रंथों में मिलता है </li></ul><ul><li>हल्‍दी स्‍वाद में चरपरी , कड़वी प्रभाव में रूखी और गर्म होती है </li></ul><ul><li>यह कफ तथा पित्‍त दोषों को दूर करती है </li></ul>
  12. 12. हल्‍दी के गुण -2 <ul><li>इसे त्‍वचा के रोग , वर्ण , प्रमेह , रक्‍त विकार , सूजन , पान्‍डु रोग और घावों के इलाज के लिये प्रयोग करते हैं </li></ul><ul><li>आधुनिक शोधों से पता चला है कि हल्‍दी तमाम प्रकार के रोगों को दूर करनें में सहायक है </li></ul>
  13. 13. हल्‍दी के बारे में आयुर्वेद विचार <ul><li>हल्‍दी तिक्‍त , कटु , उष्‍णवीर्य , रूक्ष , वर्ण्‍य , लेखन , कुष्‍टघ्‍न , विषघ्‍न , शोधन गुण युक्‍त है </li></ul><ul><li>इसके प्रयोग से कफ , पित्‍त , पीनस , अरूचि , कुष्‍ठ , कन्‍डू , विष , प्रमेह , व्रण , कृमि , पान्‍डु रोग , अपची आदि रोंग दूर होते हैं </li></ul>
  14. 14. हल्‍दी के बारे में आधुनिक विचार <ul><li>हल्‍दी के बारे में आधुनिक वैज्ञानिकों नें परीक्षण करके सिद्ध किया है कि यह कैंसर को बढ़नें से रोकती है </li></ul><ul><li>यह गठिया जैसे रोंगों की पीड़ा को दूर करती है </li></ul>
  15. 15. हल्‍दी की औषधीय मात्रा <ul><li>कच्‍ची हल्‍दी का रस : 1 से 3 चाय चम्‍मच तक </li></ul><ul><li>सूखी हल्‍दी का चूर्ण : 1 ग्राम से 4 ग्राम तक </li></ul><ul><li>यह वयस्‍क व्‍यक्ति के लिये निश्चित की गयी मात्रा है </li></ul><ul><li>किशोंरों के लिये 500 मिलीग्राम से 1 ग्राम तक </li></ul><ul><li>बच्‍चों के लिये 50 मिलीग्राम से 100 मिली ग्राम तक </li></ul>
  16. 16. हल्‍दी की मात्रा <ul><li>इसके कोई साइड इफेक्‍ट नहीं हैं और हल्‍दी पूर्ण रूप से सुरक्षित औषधि है </li></ul><ul><li>इसे आवश्‍यकतानुसार गुनगुनें पानीं , गरम चाय अथवा दूध के साथ दिन मे , तकलीफ के हिसाब से , एक बार से लेकर चार या पांच बार तक ले सकते हैं </li></ul>
  17. 17. हल्‍दी के बाहरी प्रयोग - 1 <ul><li>त्‍वचा के रोगों में हल्‍दी का बाहरी प्रयोग करते हैं </li></ul><ul><li>हल्‍दी का चूर्ण 1 ग्राम और आवश्‍कतानुसार दूध मिलाकर बनाया हुआ पेस्‍ट मुहासों , युवान पीडिका , सफेद दागों या काले दागों , रूखी त्‍वचा , काले रंग के त्‍वचा के धब्‍बे , खुजली , खारिश आदि तकलीफों में लगानें से आरोग्‍य प्राप्‍त होता है </li></ul><ul><li>घाव , कटे एवं पके हुये , पीब से भरे घावों में हल्‍दी का चूर्ण छिड़कनें से घाव शीघ्र भरते हैं </li></ul>
  18. 18. हल्‍दी के बाहरी प्रयोग -2 <ul><li>चाकू या धारदार अस्‍त्र से शरीर का कोई अंग कट जानें पर हल्‍दी का चूर्ण छिड़कनें से लाभ प्राप्‍त होता है </li></ul><ul><li>बवासीर के मस्‍सों का दर्द अथवा जलन ठीक करनें के लिये हल्‍दी का चूर्ण मस्‍सों पर छिड़कना चाहिये </li></ul>
  19. 19. हल्‍दी के बाहरी प्रयोग -3 <ul><li>चेहरे का सौंदर्य , त्‍वचा का सौंदर्य ‍निखारनें के लिये हल्‍दी का उबटन प्रयोग करना चाहिये </li></ul><ul><li>एलर्जी , शीतपित्‍ती , जलन का अनुभव , ददोरे आदि पड़ जानें की तकलीफ में हल्‍दी को पानी के साथ पेस्‍ट जैसा बनाकर लगानें से आराम मिलता है </li></ul>
  20. 20. हल्‍दी के बाहरी प्रयोग -4 <ul><li>फोड़ा फुन्‍सी पकानें के लिये हल्‍दी की पुल्टिस रखनें से फोड़ा फुंसी शीघ्र पक जाते हैं </li></ul><ul><li>शरीर के किसी भी स्‍थान की सूजन के साथ दर्द और जलन हो तो हल्‍दी के पेस्‍ट का बाहरी प्रयोग करनें से इन तकलीफों में आम मिल जाती है </li></ul>
  21. 21. आंतरिक प्रयोग - जुखाम , खांसी , बुखार <ul><li>सभी प्रकार के बुखार , जुखामों और खांसियों में हल्‍दी का चूर्ण 1 से 3 ग्राम तक गरम पानीं से दिन में दो बार , सुबह शाम , खानें से आरोग्‍य प्राप्‍त होता है </li></ul><ul><li>जुकाम , बुखार अथवा खांसी कैसी भी हो , नया हो अथवा पुराना , उक्‍त प्रकार से हल्‍दी का सेवन करनें से सभी अवश्‍य ठीक हो जाते हैं </li></ul>
  22. 22. आंतरिक प्रयोग - साइनुसाइटिस <ul><li>नाक से संबंधित सभी तरह की तकलीफों , पुराना जुकाम , पीनस , नाक का गोश्‍त बढ़ जानें , साइनुसाइटिस में हल्‍दी का चूर्ण 1 से 2 ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार खाने से आरोग्‍य प्राप्‍त होता है </li></ul><ul><li>उक्‍त तकलीफों से होनें वाले सिर दर्द , बुखार , बदन दर्द आदि लक्षण ठीक हो जाते हैं </li></ul>
  23. 23. आंतरिक प्रयोग - एलर्जी <ul><li>एलर्जी , शीतपित्‍ती या इसी तरह के लक्षणों और तकलीफों से परेशान रोगी हल्‍दी का चूर्ण , 1 से 2 ग्राम , सुबह और शाम , दिन में दो बार , आधा कप दूध और आधा कप पानी मिलाकर , इस प्रकार से पकाये दूध के साथ खानें से आरोग्‍य प्राप्‍त होता है </li></ul><ul><li>दूध में यदि चाहें तो थोड़ी शक्‍कर स्‍वाद के लिये मिला सकते हैं </li></ul>
  24. 24. इस्‍नोफीलिया <ul><li>इस्‍नोफीलिया में हल्‍दी का प्रयोग बहुत सटीक है </li></ul><ul><li>2 से 3 ग्राम हल्‍दी चूर्ण गुनगुनें पानीं से , दिन में तीन बार , खानें से इस रोग में आराम मिलती है </li></ul><ul><li>कुछ दिनों तक लगातार खानें से रोग समूल नष्‍ट हो जाते हैं </li></ul><ul><li>जैसे जैसे इसनोफीलिया का काउन्‍ट कम होता जाये , वैसे हल्‍दी की मात्रा अनुपात में घटाते जाना चाहिये </li></ul>
  25. 25. दमा और अस्‍थमा में <ul><li>इस रोग में हल्‍दी का चूर्ण 2 से 3 ग्राम तक अदरख के एक या दो चम्‍मच रस और शहद मिलाकर दिन में चार बार खानें से आरोग्‍य प्राप्‍त होता है </li></ul><ul><li>कुछ दिनों तक यह प्रयोग लगातार काना चाहिये </li></ul><ul><li>अगर रोगी एलापैथी की दवायें खा रहा है , तो भी यह प्रयोग कर सकते हैं </li></ul><ul><li>जैसे जैसे आराम मिलता जाय , एलापैथी दवाओं की मात्रा कम करते जांय </li></ul>
  26. 26. यकृत प्‍लीहा की बीमारियों में <ul><li>यकृत की बीमारियों में हल्‍दी का उपयोग आदि काल से किया जा रहा है </li></ul><ul><li>यकृत के सभी विकारों में , पीलिया , पान्‍डु रोग इत्‍यादि में हल्‍दी का चूर्ण 1 ग्राम , कुटकी का चूर्ण 500 मिलीग्राम मिलाकर दिन में तीन बार सादे पानीं के साथ खाना चाहिये </li></ul><ul><li>प्‍लीहा की सभी बीमारियों में उक्‍त चूर्ण मिश्रण खाना चाहिये </li></ul>
  27. 27. प्रमेह <ul><li>प्रमेह रोग से संबंधित सभी विकारों में हल्‍दी का उपयोग बहुत सटीक है </li></ul><ul><li>बहुमूत्र , गंदा पेशाब , पेशाब में जलन , पेशाब की कड़क , पेशाब में एल्‍बूमेंन जाना , पेशाब में रक्‍त , पीब के कण आदि आदि रोगों में हल्‍दी चूर्ण 1 ग्राम दिन में चार बार सादे पानीं से सेवन करें </li></ul><ul><li>अगर इन बीमारियों में कोई एलोपैथी की दवा खा रहे हों , तो उनके साथ हल्‍दी का उपयोग करें , शीघ्र लाभ होगा </li></ul>
  28. 28. मधुमेह <ul><li>हल्‍दी 2 ग्राम , जामुन की गुठली का चूर्ण 2 ग्राम , कुटकी 500 मिलीग्राम मिलाकर दिन में चार बार सादे पानीं से खायें </li></ul><ul><li>पथ्‍य , परहेज करें , कई हफ्तों तक औषधि प्रयोग करें </li></ul><ul><li>मधुमेह के साथ जिनको पैंक्रियाटाइटिस , यकृत प्‍लीहा विकार , गुर्दे के विकार , आंतों से संबंधित विकार हों , ये सभी तकलीफें दूर होंगी </li></ul>
  29. 29. शास्‍त्रोक्‍त प्रयोग <ul><li>हल्‍दी के शास्‍त्रोक्‍त प्रयोग बड़ी संख्‍या में आयुर्वेद के चिकित्‍सा ग्रंथों में मिलते हैं </li></ul><ul><li>इनमें से बहुत से प्रयोग तमाम प्रकार की बीमारियों के उपचार में इस्‍तेमाल किये जाते हैं </li></ul>
  30. 30. सलाह <ul><li>अगर आप कोंई एलोपैथी की दवा खा रहे हैं या होम्‍योपैथिक या कोई अन्‍य उपचार कर रहे हैं , तो भी , आप हल्‍दी का प्रयोग कर सकते हैं </li></ul><ul><li>हल्‍दी के प्रयोग करनें से , उपचार पर , कोई असर नहीं पड़ता है </li></ul><ul><li>हल्‍दी के प्रयोग से , किये जा रहे उपचार , अधिक प्रभावकारी हो जाते हैं </li></ul>
  31. 31. देंखें संदर्भ ग्रंथ <ul><li>हल्‍दी के गुणों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्‍त करनें के लिये निम्‍न ग्रंथों को देखना चाहिये </li></ul><ul><li>भाव प्रकाश निघन्‍टु </li></ul><ul><li>बनौषधि चन्‍द्रोदय </li></ul><ul><li>भारत भैषज्‍य रत्‍नाकर </li></ul><ul><li>Indian Materia Medica </li></ul>
  32. 32. मेंरा अनुभव <ul><li>मेंरा व्‍यक्तिगत अनुभव , हल्‍दी के बारे में , बहुत अच्‍छा रहा है </li></ul><ul><li>मैं सभी रोगियों को , चाहे वे किसी भी रोग से पीडित हो , उनके फार्मूले में हल्‍दी का मिश्रण उचित अनुपात में करता हूं , इससे फार्मूले की गुणवत्‍ता और अधिक बढ़ जाती है </li></ul><ul><li>मैं सूखी हल्‍दी का चूर्ण प्रयोग करता हूं और चूर्ण को एक कप या आधा कप पानीं या दूध में घोलकर पीनें के लिये कहता हूं </li></ul>
  33. 33. डा 0 देश बंधु बाजपेयी <ul><li>जन्‍म 20 नवम्‍बर 1945 </li></ul><ul><li>40 सालों से अधिक एलोपैथी , आयुर्वेदिक , होम्‍योपैथिक चिकित्‍सा विधियों से प्रैक्टिस </li></ul><ul><li>एकूपंक्‍चर , मेग्‍नेट थेरेपी , फिजियोथेरेपी , योग , प्राकृतिक चिकित्‍सा , इलेक्‍ट्रोथेरेपी आदि द्वारा चिकित्‍सा कार्य करनें का अनुभव </li></ul><ul><li>आविष्‍कारक : इलेक्‍ट्रोत्रिदोषग्राफी , शंखद्राव आधारित औषधियां , पेंटास्‍केल आयुर्वेदिक औषधियां </li></ul><ul><li>असाध्‍य रोगों , कठिन रोंगों , पुरानीं बीमारियों के इलाज में एक्‍सपर्ट चिकित्‍सक </li></ul>
  34. 34. आयुर्वेदिक औषधियों का प्राप्ति स्‍थान <ul><li>अगर आपको आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों और तैयार की गयी औषधियों को प्राप्‍त करनें में कठिनाई आ रही हो , तो आप सभी तरह की आयुर्वेदिक औषधियों के लिये , निम्‍न स्‍थान से सम्‍पर्क करके , प्राप्‍त कर सकते हैं </li></ul><ul><li>[email_address] </li></ul>
  35. 35. निवेदन : <ul><li>समय समय पर इस स्‍लाइड शो में आवश्‍यकतानुसार परिवर्तन किये जाते हैं , अपडेट देखनें के लिये समयान्‍तर पर स्‍लाइड शो देखते रहें </li></ul><ul><li>इस स्‍लाइड शो के बारे में अपनें डाक्‍टर , मित्रों , संबंधियों को जानकारी देंनें का प्रयास करें </li></ul><ul><li>अपनें सुझाव इस स्‍लाइड शो के बारे में देते रहें </li></ul>
  36. 36. वीडियो प्रस्‍तुति <ul><li>निम्‍न वेब साइट पर आयुर्वेद से संबंधित वीडियो देखें </li></ul><ul><li>http://www. youtube.com/drdbbajpai </li></ul>
  37. 37. स्‍लाइड शो <ul><li>निम्‍न वेब साइट पर स्‍लाइड शो देखें , जो आयुर्वेद से संबंधित हैं </li></ul><ul><li>http ://www. slideshare.net/drdbbajpai </li></ul>
  38. 38. डा 0 देश बन्‍धु बाजपेयी द्वारा रचित निम्‍न वेब साइट देखें , जहां आयुर्वेद के संबंध में महत्‍वपूर्ण जानकारियां दी गयीं हैं <ul><li>http://etgind.wordpress.com </li></ul><ul><li>http://ayurscan.wordpress.com </li></ul><ul><li>http://ayurvedaintro.wordpress.com </li></ul><ul><li>http ://herbalsupply.wordpress.com </li></ul>

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