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आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्‍त
 

आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्‍त

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आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्‍तों को उनकी शरीर में उपस्थित को माप कर बताता है । ...

आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्‍तों को उनकी शरीर में उपस्थित को माप कर बताता है । यह रिपोर्ट रोगी की प्रकृति यानी वात, पित्‍त या कफ या इनमें से दो या इनमें से तीनों के सम्मिलित गुणों को शरीर में उपस्थिति को निदान ज्ञान करके बताती है । प्रकृति जब दूषित हो जाती है तो यही तीनो गुण शरीर के अन्‍दर दोष युक्‍त या विषम या अव्‍यवस्थित होकर शरीर को रोगी या बीमार बनाते हैं , ऐसी स्थिति में इन्‍हें दोष अथवा त्रिदोष कहते हैं । यह आयुर्वेद की इटियोलाजी कही जा सकती हैं ।

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    आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्‍त आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्‍त Presentation Transcript

    • आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्‍त डा 0 देशबन्‍धु बाजपेयी कनक पालीथेरेपी क्‍लीनिक एवं रिसर्च सेंटर 67-70, भूसाटोली रोड , बर्तन बाजार , कानपुर -208001 उत्‍तर प्रदेश , भारत फोन 0512-2367773 फैक्‍स 0512 2308092
    • प्रकृति
      • वात प्रकृति
      • पित्‍त प्रकृति
      • कफ प्रकृति
      • वात एवं पित्‍त प्रकृति
      • वात एवं कफ प्रकृति
      • पित्‍त एवं कफ प्रकृति
      • वात और पित्‍त और कफ तीनों की सम्मिलित प्रकृति
    • त्रिदोष
      • वात दोष
      • पित्‍त दोष
      • कफ दोष
      • वात और पित्‍त , दो दोष
      • वात और कफ , दो दोष
      • पित्‍त और कफ , दो दोष
      • वात , पित्‍त और कफ , तीन दोष
      • यह सभी आधुनिक चिकित्‍सा विज्ञान के “एटियोलाजी” के समकक्ष समझे जाते हैं
    • त्रिदोष भेद : वात
      • वात दोष के पांच भेद हैं
      • 1- प्राण वात
      • 2- अपान वात
      • 3- समान वात
      • 4- उदान वात
      • 5- व्‍यान वात
      • यह सभी आधुनिक चिकित्‍सा विज्ञान के “पैथो - फिजियोलाजी” के समकक्ष समझे जाते है
    • त्रिदोष भेद : पित्‍त
      • साधक पित्‍त
      • पाचक पित्‍त
      • रंजक पित्‍त
      • भ्राजक पित्‍त
      • लोचक पित्‍त
      • यह सभी पित्‍त दोष के पांच भेद हैं । आधुनिक चिकित्‍सा विज्ञान के दृष्टिकोण से ये सब “पैथो - फिजियोलाजी” के समकक्ष समझे जाते हैं ।
    • त्रिदोष भेद : कफ
      • अवलम्‍बन कफ
      • रसन कफ
      • श्‍लेष्‍मन कफ
      • स्‍नेहन कफ
      • क्‍लेदन कफ
      • यह पांच कफ के भेद आधुनिक चिकित्‍सा विज्ञान की “पैथो - फिजियोलाजी” के समकक्ष समझे जाते हैं
    • सप्‍त धातु
      • रस धातु
      • रक्‍त धातु
      • मांस धातु
      • मेद धातु
      • अस्थि धातु
      • मज्‍जा धातु
      • शुक्र धातु
      • यह सभी आधुनिक चिकित्‍सा विज्ञान के दृष्टिकोण से “पै‍थोलाजी” के समकक्ष समझे जाते हैं ।
    • मल
      • यह कई प्रकार के होते हैं , जिनमें तीन प्रमुख हैं ।
      • 1- पुरीष
      • 2- मूत्र
      • 3- स्‍वेद ( पसीना )
      • आधुनिक चिकित्‍सा विज्ञान के दृष्टिकोण से ये सब कैटाबालिक प्रोडक्‍ट समझे जाते हैं ।
    • अग्नि
      • मन्‍दाग्नि
      • समानाग्नि
      • विषमाग्नि
      • तीक्ष्‍णाग्नि
      • ये सब डायजेस्टिव फायर के समकक्ष समझी जाती हैं ।
    • ओज
      • ओज
      • सम्‍पूर्ण ओज
      • यह आधुनिक चिकित्‍सा विज्ञान के दृष्टिकोण से वाइटेलिटी , वीगर , वाइटल फोर्स के समकक्ष समझी जाती है ।
    • ‍ सिद्धान्‍त ज्ञात करनें के उपाय
      • प्रकृति परीक्षा
      • पंच विधि निदान
      • अष्‍ट विधि परीक्षा
      • दस विधि परीक्षा
      • मूत्र परीक्षण
      • मल परीक्षण
      • नाड़ी परीक्षण
      • इनके अलावा अन्‍य उपाय हैं , लेकिन यह सब चिकित्‍सक के ज्ञान और अनुभव पर आधारित है ।
    • नाड़ी परीक्षण
      • दोंनों हाथ की रेडियल पल्‍स को चिकित्‍सक अपनें हाथ की पहली , दूसरी और तीसरी उंगली के अग्र भाग से नाड़ी पर दबाव डालकर , स्‍पन्‍दन अनुभव करता है , फिर अपनें मस्तिष्‍क से विवेक , अनुभव , अनुमान और अन्‍तर दृष्टि से विचार करके स्‍पष्‍ट करता है कि त्रिदोष की शरीर में क्‍या स्‍थिति है ।
      • वात , पित्‍त और कफ के अलावा नाड़ी परीक्षण से अन्‍य दूसरे मौलिक विषय नहीं ज्ञात किये जा सकते हैं
    • इलेक्‍ट्रोत्रिदोषाग्राफी ( ई 0 टी 0 जी 0)
      • यह परीक्षण नई आविष्‍कार की गयी इलेक्‍ट्रोत्रिदोषाग्राफी मशीन द्वारा किया जाता है
      • आयुर्वेद के सभी मौलिक सिद्धान्‍तों को ज्ञात करती है
      • शरीर के रोगों का निदान करती है
      • सस्‍ती , सरल तकनीक , घर , दवाखाना , अस्‍पताल कहीं भी , किसी भी स्‍थान पर परीक्षण संभव
      • साक्ष्‍य आधारित , छपी हुयी रिपोर्ट के रूप में प्रस्‍तुति और सबके समझनें योग्‍य
      • आयुर्वेद के 5000 पांच हजार वर्षों के इतिहास मे वर्तमान समय की पहली त्रिदोषादि सिद्धान्‍त और रोग निदान ज्ञान करनें की हाई - टेक्‍नोलांजी
    • इलेक्‍ट्रोत्रिदोषग्राफी मशीन डा 0 देशबन्‍धु बाजपेयी द्वारा आविष्‍कार की गयी इलेक्‍ट्रोत्रिदोषग्राफ मशीन
    • ई 0 टी 0 जी 0 के उपयोग -1
      • चूंकि यह तकनीक सम्‍पूर्ण शरीर का परीक्षण करती है अत : शरीर में कहां रोग है , पता लग जाता है । अधिकांशत : दूसरे परीक्षणों से शरीर की बीमारी पकड़ में नहीं आती
      • आयुर्वेद चिकित्‍सा कार्य में शरीर में व्‍याप्‍त सभी रोगों का एक साथ इलाज करते हैं , इस तकनीक से चिकित्‍सक को यह पता लग जाता है कि शरीर के कौन कौन से अंग बीमार है
      • त्रिदोष , धातु , मल इत्‍यादि का ज्ञान हो जानें से औषधियों का चयन सुगम और अचूक होता है , जिससे रोगी को जल्‍दी स्‍वास्‍थ्‍य लाभ होता है
    • ई 0 टी 0 जी 0 के उपयोग -2
      • रोगी के स्‍वास्‍थ्‍य की रेगुलर मानीटरिंग के लिये ताकि स्‍वास्‍थ्‍य में आये परिवर्तनों का आंकलन किया जा सके
      • इस तकनीक का आधार लेकर विद्यार्थी अपनें अध्‍ययन काल में चिकित्‍सा के विषयों को अधिक हृदयंगम कर सकेंगें क्‍योंकि चिकित्‍सा विज्ञान के लगभग सभी विषयों का समावेश है , इससे अध्‍ययन की गुणवत्‍ता में अधिक सुधार होगा
    • ई 0 टी 0 जी 0 के उपयोग -3
      • ई 0 टी 0 जी 0 से प्राप्‍त डाटा से निष्‍कर्ष को लेकर विश्‍वास के साथ रोगी की चिकित्‍सा करनें से चिकित्‍सा में भटकाव की स्‍थिति कभी नहीं होती है , चिकित्‍सा कार्य हमेंशा फलदायी होते हैं
      • सम्‍पूर्ण शरीर की चिकित्‍सा होंनें से रोगी को एक ‍ ‍विशेषज्ञ से दूसरे विशेषज्ञ के पास जानें की जरूरत नहीं होती
      • शरीर मे व्‍याप्‍त बीमारियों की एक साथ चिकित्‍सा करनें से पूर्ण आरोग्‍य प्राप्‍त होता है
    • आवश्‍यक सूचना
      • इस पावर पाइन्‍ट दिग्‍दर्शन में समय समय के अन्‍तराल में आवश्‍यकतानुसार परिर्वतन किये जाते हैं और वर्तमान में हुये परिवर्तनों की सूचनायें शामिल की जाती है
      • सभी पाठकों को परिवर्तनों की सूचना इस प्रदर्शन के प्रथम पृष्‍ठ पर अंकित कर दी जायेगी
    • अन्‍य वेब साइट
      • आयुर्वेद प्रेमी निम्‍न वेब साइट देखें
      • http://etgind.wordpress.com
      • http://ayurvedaintro.wordpress.com
      • http://ayurscan.wordpress.com
      • http://www.youtube.com
      • http://www.slideshare.net
    • धन्‍यवाद
      • कृपया इस आधुनिक तकनीक के बारे में अपनें डाक्‍टर , चिकित्‍सक बन्‍धुओं , आयुर्वेद के प्रेमी सज्‍जनों , मित्र , मित्र मंडली , सत्‍संग मंडली में चर्चा करें , जानकारी से अवगत करायें
      ‍ रिकार्डेड ट्रेसिंग्‍स दिखाते हुये डा 0 देश बन्‍धु बाजपेयी