Sangya

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हिन्दी व्याकरण

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Sangya

  1. 1. संज ा के बारे मे िहदी िवभाग, िसलवर िहलस
  2. 2. स्लाइड सूचिच 2 संज ा और उसके पकार 1 विकवाचक संज ा 2 जाितवाचक संज ा 3 भाववाचक संज ा 4
  3. 3. संज ा और उसके के पकार 3  िकसी व्यक्ति, क, स्थान, वस्तु आदिदि तथा नाम के गुण, धर्मर, स्वभाव का बोधर् कराने वाले शब्दि संजा कहलाते हैं।  ि, ववेकानंदि, मनुष्य, कक्षा, गेहूँ, ि, मठास आदिदि।  संजा के पकार- संजा के तीन भेदि हैं1. व्यक्ति, कवाचक संजा। (Pro p e r no un) 2. जाि, तवाचक संजा। (Co m m o n no un) 3. भाववाचक संजा I (Abstract noun)
  4. 4. व्यक्ति, कवाचक संज ा 4 व्यक्ति, कवाचक संज ा ि, जस संजा शब्दि से िकसी ि, वशेष, व्यक्ति, क, पाणी, वस्तु अथवा स्थान का बोधर् हो उसे व्यक्ति, कवाचक संजा कहते हैं। जैसे- ि, ववेकानंदि, महात्मा गाँधर्ी, ि, हमालय, रामायण आदिदि।
  5. 5. जाितवाचक संज ा 5 जाितवाचक संज ा िजस संजा शब्द से उसकी संपूर्ण र्ण जाित का बोध हो उसे जाितवाचक संजा कहते हैं। जैसे-मनुष्य,गाय,पशु, नारी आदिद।
  6. 6. भाववाचक संज ा 6 भाववाचक संज ा िजस संजा शब्द से पदाथों की अवस्था, गुण -दोष, धमर्ण आदिद का बोध हो उसे भाववाचक संजा कहते हैं। जैसे- बचपन,रसीला,दया,वीरता आदिद।

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