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    1. 1. बी र ब ल की खि च ड़ी
    2. 2. सुनो ! सुनो .! सुनो ! बादशाह सलामत का ऐलान सुनो !
    3. 3. इस कड़ाके की सर्दी में जो कोई भी जमुना के ठंडे पानी में रात भर खड़ा रहेगा उसे इनाम दिया जाएगा।
    4. 5. जहाँपनाह ! एक ग़रीब आदमी का दावा है कि वो रात भर दरिया - ए - जमुना के पानी में खड़ा रहा ।
    5. 6. वो हमसे क्या चाहता है ?
    6. 7. हुज़ूर ! वो कहता है कि शाही ऐलान के मुताबिक उसे इनाम दिया जाए ।
    7. 8. उसके आस पास आग तो नहीं जल रही थी ?
    8. 9. नहीं हुज़ूर ! अलबत्ता कोसों दूर एक दिया टिमटिमा रहा था ।
    9. 10. ये उसी दिये की गर्मी सेंकता रहा होगा। इसीलिए इसे इनाम नहीं मिल सकता ।इसे वापस भेज दो।
    10. 11. जो हुकुम जहाँपनाह !
    11. 12. बीरबल !
    12. 13. जी , जहाँपनाह !
    13. 14. तुम्हारे हाथ की खिचड़ी खाए हमें एक ज़माना हो गया।हमें तुम्हारी खिचडी बहुत पसंद है।
    14. 15. अब कब खिलवाओगे ?
    15. 16. इसमें कौनसी बड़ी बात है महाबली ! आज ही खा लीजिए।
    16. 17. उँहुँ ! आज नहीं , कल तुम हमारे साथ शिकार पर चल रहे हो।वहीं खाएँगे ।
    17. 18. चलिए यही सही महाबली !
    18. 20. अरे ! तुम्हारी उस खिचड़ी का क्या हुआ बीरबल ?
    19. 21. खिचड़ी मैंने चढ़ा दी है हुज़ूर ! बस कुछ ही देर में तैय्यार हुई जाती है।
    20. 22. ये तो तुम कई बार कह चुके हो।
    21. 23. बस , थोडा सब्र महाबली !
    22. 24. नहीं , बीरबल ! अब सब्र नहीं होता।
    23. 25. अहह ! शिकार में भूख कुछ ज़्यादा ही लगती है ।
    24. 26. और तुम हो कि बातों से पेट भर रहे हो ।
    25. 27. बस एक आँच की कसर बाकी है महाबली !
    26. 28. चलो , तुम्हारे खेमे में चल कर देखते हैं कि खिचड़ी में कितनी कसर बाकी है ?
    27. 30. ये क्या बीरबल ! ये ऊपर बाँसों पर हाँडी कैसे लगी है ?
    28. 31. इसमें तो आपके लिए खिचड़ी पक रही है ।
    29. 32. खिचडी पक रही है !
    30. 33. तभी तो हम कहें कि खिचड़ी पकने में इतना वक़्त क्यों लग रहा है ?
    31. 34. बीरबल हमें भूख लगी है और तुम्हें मज़ाक सूझ रहा है !
    32. 35. जैसे गरीब जमना नदी में खडे होकर कोसों दूर टिमटिमाते दिए से सेंक ले सकता है | वैसे --
    33. 36. हँ हँ हँ ! हम तुम्हारा इशारा समझ गए।उस गरीब आदमी को ज़रूर इनाम मिलना चाहिए ।
    34. 37. लेकिन हम तुम्हारी अकलमंदी के भी क़ायल हुए।
    35. 38. जिस होशियारी से तुमने हमें हमारी गलती का अहसास दिलाया है—वाक़ई ! तुम्हारी खिचडी मज़ेदार है बीरबल !

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