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महात्मा और उनका दर्शन: वर्तमान सन्दर्भ में प्रासंगिकता - Fakhir Abrar
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महात्मा और उनका दर्शन: वर्तमान सन्दर्भ में प्रासंगिकता - Fakhir Abrar

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A research paper on Gandhian philosophy

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महात्मा और उनका दर्शन: वर्तमान सन्दर्भ में प्रासंगिकता - Fakhir Abrar महात्मा और उनका दर्शन: वर्तमान सन्दर्भ में प्रासंगिकता - Fakhir Abrar Document Transcript

  • SOCRATES: Edition-I YEAR 2013(On-line & Open Access) महा मा और उनका दशन: वतमान स दभ म ISSN 2347-6869 ासं गकता फ़ा खर अबरार बाप,महाÂमा,राÕůीय िपता आिद संबोधनŌ सेहम भलीभांित पåरिचत है| यह सभी संबोधन हमारे ू े राÕůिपता महाÂमा गांधी जी क िलए है | महाÂमा गांधी का जÆम सन् २ अĉबर १८६९ मेभारत ू े े क (गुजरात) किठयावाड़ क पोरबंदर नामक Öथान मेहòआ था| गांधी जी नेÿारं िभक िश±ा े ू पोरबंदर मेली तथा हाई Öकल कì िश±ा राजकोट क Öकल मेÿाĮ कì | १८८७ मेगांधी जी ने ू समÐदास कॉले भाव नगर सेमैिůक कì परी±ा पास कì |उÆहŌनेअपनेिवīाथê जीवन मे®ीवन ज े िपत ृ भिĉ नमक नाटक पढ़ा तथा सÂय हरीशचंþ नमक नाटक दे ा |इन नाटको का उनक ख े जीवन पर गहरा ÿभाव पड़ा और वह सÂय क ÿबल समथªक बन गए | ª महाÂमा गांधी िसफ एक राजनीित² ही नहé थे बिÐक वह एक महान दाशªिनक , े े समाजसे क,िश±ा शाľी ,²ानी ,संघषªकारी ÓयिĉÂव क धनी Óयिĉ थे| उनक इÆही सब व ै कायō और गुणŌ को दे तेहòए रिवÆþ नाथ ट गोर नेउÆह¤ सबसेपहले‘महाÂमा’ कì उपािध दी ख ै थी | महाÂमा का अथª महान आÂमा होता है | सÂय ही कहा ट गोर जी नेऐसेकाम करना आम े पुŁष कì बात नहé है| एितहास गवाह है इस तरह क कायª महाÂमाओ नेही िकयेहै | महाÂमा े गांधी नेअपनेजीवन भर समाज क िलए संघषª िकया |अपनेदे क लोगो कì तमाम समÖयाओ श े ेवल का समाधान तलाशतेरहेऔर उनकì समÖयाओ को दर भी िकया |गांधी जी ने न क अपने ू CC-BY-NC-ND WWW.SOCRATESJOURNAL.COM (NOT TO BE PRESENTED IN PRINTED FORM) General Article Page 7
  • SOCRATES: Edition-I YEAR 2013(On-line & Open Access) ISSN 2347-6869 े े े दे क लोगो क िलए कायª िकयेबिÐक संसार क सभी लोगो क िलए कायª िकया | श े गांधी जी ने खा िक भारतीय जनता कì हालत बहòत ददªनाक है तब उÆहŌनेिनशचय िकया दे े िक वह अपना सारा जीवन भारत वािसतो क नाम कर दे ेऔर उÆहŌनेऐसा ही िकया| गांधी जी ग े नेदे ा कì भारतीयŌ कì आवाज़ उनक ही दे मेदबी हòई है और उनकì िज़Æदगी किठनाइयŌ से ख श े िघरी हòई है | गांधीजी नेभारतीयŌ कì जमीनी हकìक़त जाननेक िलए पूरेभारत का Ăमण िकया |कÔमीर सेकÆया कमारी तक जगह- जगह जन सभाए कì| भारतीयŌ कì समÖयाओ ं को सुना ु तथा उनको गहरेसेसमझा और अपनेभाषण सेलोग मे²ान कì वषाª कì | इससेपहलेिकसी ने े इस तरह आकर जनता क बीच उनकì समÖयाओ ं को न तो सुना था नाहé समझा था समÖयाओ े े े क समाधान कì बात तो दर कì है| गांधी जी नेऐसा करक उनक Ćदय मेअपना Öथान बना ू िलया और आज भी भारतीय दय म उनक अ मट छ व व यमान है | गांधी जी नेहमे ा अपनेअिहंसावादी िवचार ,सÂय ,असहयोग को ही अपना शľ बनाया | श ै े गांधी जी दे मेफले अÖपÔताª , नशा मुिĉ गरीबी क िखलाफ आÆदोलन चलातेरहेलोगो को श े सामािजक बुराइयो सेदूर करनेकì िश±ा दे ेतथा गरीबी दूर करनेक िलए हÖतकला का ²ान त े द े ÿाĮ करनेका ÿोÂसाहन दे े| जाित - वाद और उ¸च- नीच क भे भाव को मानवता क आधार त पर समझानेऔर अपनी आÂमा को पिवý रखनेक ²ान दे ेरहे | माहाÂमा गांधी संघषªकारी त े होनेक साथ साथ एक महान आदशªवादी दाशªिनक भी थे|उनका ईĵर और आÂमा पर अटल CC-BY-NC-ND WWW.SOCRATESJOURNAL.COM (NOT TO BE PRESENTED IN PRINTED FORM) General Article Page 8
  • SOCRATES: Edition-I YEAR 2013(On-line & Open Access) ISSN 2347-6869 े िवशवास था तथा आÂमा को परमाÂमा का अंश मानतेथे|उनक अनुसार िजस तरह सूयª कì े िकरण¤ अने है परÆतु उन सब का ąोý एक ही है उसी ÿकार संसार मेिविभनता होनेक बावजूद क े इसकì रचना करनेवाला परमाÂमा एक ही है | गांधी जी ईĵर को हर जगह मौजूद मानतेथेउनक अनुसार धािमªक िभÆनता का कोई Öथान नहé है वह सभी को सामान समझतेथे मानवता को | धमª सेअिधक महÂव दे ेथेमानवता तथा समाज Öवे ा को ही धमª का परम कतªÓय मानतेथे| त व “ईĵर न काबा मेहै न काशी मेहै वह घर घर मेÓयाĮ है वह हर िदल मेमौजूद है’’ े े े े गांधी जी क दाशªिनक िवचार उनक िसधाÆतो पर आधाåरत है |िजसेउनक जीवन दशªन क ÿमुख तÂव भी कहा जा सकता है | िजसमेसे मख ह - सÂय , अिहंसा ,िनभêकता ,सÂयाúह ु और सवōदय | े े सÂय क बारेमे गांधी जी का मानना था िक यह वोह माÅयम है िजसक सहारेइं सान ईĵर को ÿाĮ कर ले ा है| सÂय मनुÕय कì आंतåरक शिĉ है . गांधी जी का कहना था कì सÂय का त ेवल वाणी तक सीिमत न होकर उसेअपनेÓयवहार मेलाना चािहए | यिद Óयिĉ मन ÿयोग क ,कमª, वचन सेसÂय का पालन करता है तो उसेईĵर कì ÿािĮ होती है | गांधी जी का कहना था कì ‘भगवान् ही सÂय’ है िफर इसेउÆहŌने ‘सÂय ही भगवान् है’ मेबदल िदया | गांधी जी कहतेहै े , “म§ ३० साल सेिजस चीज़ क िलए लालाियत हóँ वो है ईĵरकì ÿािĮ, मो± और खुद कì पहचान CC-BY-NC-ND WWW.SOCRATESJOURNAL.COM (NOT TO BE PRESENTED IN PRINTED FORM) General Article Page 9
  • SOCRATES: Edition-I YEAR 2013(On-line & Open Access) ISSN 2347-6869 े | इस लàय को पानेक िलए ही मै जीवन Óयतीत करता हóँ और जो कछ भी मै बोलता ,िलखता हóँ ु े या िफर राजनीती मेजो कछ भी करता हóँ वह सब इन लàयŌ कì ÿािĮ क िलए ही है|” ु े ‘अिहंसा’ गांधी जी का मु´य िसĦांत था जो कì उनक जीवन और िवचारो मेसमाया हòआ े े े ý था | गांधी जी अिहंसा क िसĦांत क ÿवतªक तो नहé थेमगर वह इसेराजनीित क ±े मेÿयोग े े करनेवालेपहलेÓयिĉ थे| उनक अनुसार अिहंसा का अथª सभी जीवधाåरयŌ क ÿित ÿे और म े े सहयोग कì भावना सेहै | अिहंसा जीवधाåरयो क ÿित बुरी भावना को दर करती है तथा उनक ू ÿित ÿे और सहायक आिद भावना को जगाती है िजससे एक अ¸छे वातावरण का िनमाªण हो म जाता है जो सभी को सुख पहòचानेका कायª करता है | गांधी जी सÂय को साÅय और अिहंसा को े साधन मानतेथे उनक अनुसार सÂय कì ÿािĮ अिहंसा सेही संभव है | सÂय और अिहंसा का े े मागª कायरता का मागª नहé है तथा कायर Óयिĉ अिहंसा क मागª पर नहé चल सकता इसक िलए िनडरता तथा साहस कì आवÔयकता होती है|गांधी जी कहतेहै “जब म§ िनराश होता हó तब म§ याद करता हóँ िक हालाँिक इितहास सÂय का मागª होता है परÆतु ÿे इसेजीत ले ा है यहाँ म त े अÂयाचारी और हÂयारेभी हòए है और कछ समय क िलए वेअपराजय लगतेथेलेकन अंत मेउनका ि ु पतन ही होता है”| महा मा क कछ दलभ कथन ह े ु ु े “एक आँख क बदलेदूसरी आँख पूरेसंसार को अँधा बना दे ी” ग CC-BY-NC-ND WWW.SOCRATESJOURNAL.COM (NOT TO BE PRESENTED IN PRINTED FORM) General Article Page 10
  • SOCRATES: Edition-I YEAR 2013(On-line & Open Access) ISSN 2347-6869 े “मरनेक िलए मेेपास बहòत सेकारण है िकÆतु मेेपास िकसी को मरनेक कोई भी कारण नहé है” | र र े े े इस ÿकार क अिहंसा क िवचार रखनेवालेगांधी जी ÿे और दया क भÁडार थे| म ª इन िसĦाÆतो को लागु करनेमे, दिनया को िदखानेमे, गांधी जी नेतािकक सीमा पर लेजाने ु मेभी मुह नहé मोड़ा जब पुिलस और से ा भी अिहंसाÂमक बन गई थी |गांधी जी नेएक न अिहंसावादी राºय कì कÐपना कì थी |उनका कहना था , “ यह कहना गलत होगा कì अिहंसा ेवल Óयिĉगत तौर पर िकया जा सकता है और Óयिĉवािदता वालेदे इस का का अËयास क श पालन नहé कर सकते| शुĦ आराजकता का िनकटतम ŀिĶकोण अिहंसा पर आधाåरत लोकतंý े होगा इसी ÿकार समÿदाियकता क िलए कोई Öथान नहé होगा |इस समय भी पुिलस बल कì आवÔयकता हो सकती है िजनका कायª अिहंसा का अËयास करना तथा लोगो कì मदद करना े े होगा िजससेवोह अिहंसा क साथ उनक उपþव को ÿे सेसुलझा दे े| ऐसेिकसी भी दे या म ग श समह िजसनेअिहंसा को अपनी नीित बना िलया है उसका परमाणु बम भी कछ नहé िबगाड ु ू सकता |” े े ‘िनभêकता’ क िवषय मेगांधी जी कहतेहै जो इं सान सÂय और अिहंसा क िसĦांतŌ का पालन े नहé कर सकता है वह िनभêक नहé है अथाªत डरपोक है उसक मन मेडर भरा हòआ है गांधी जी ने िलखा है “िनभªयता का अथª है समÖत बाहरी भयो सेमुिĉ , जैसेबीमारी का भय ,शारीåरक चोट या मÂयु का भय, संपि° िवहीन होनेका भय , अपनेिÿयजन कì मÂयु का भय , ÿितķा खोने ृ ृ CC-BY-NC-ND WWW.SOCRATESJOURNAL.COM (NOT TO BE PRESENTED IN PRINTED FORM) General Article Page 11
  • SOCRATES: Edition-I YEAR 2013(On-line & Open Access) ISSN 2347-6869 का भय,अनुिचत कायª करनेका भय इÂयािद | े ‘सÂयाúह’ शÊद का ÿयोग अिहंसाÂमक आÆदोलन क िलए िकया जाता है| गांधी जी कहतेहै, सÂय का ŀढ े अवलÌबन सÂयाúह से ताÂपयª िवरोध पर बल ÿयोग न करक Öवंय कĶ को े सहकर िवरोधी को सही मागª पैर लानेसेहै अथाªत सÂय कì िवजय सेहै | गांधी जी क अनुसार, सÂयाúह एक युिĉ थी िजसेवह सामािजक और राजनैितक दोषŌ को दर करनेमेÿयोग करते ू थे | े सÂयाúह क कई łप होतेहै जैसेअसहयोग ,Öवैि¸छक पलायन ,अनशन या उपवास ,हड़ताल ,धरना आिद| े ‘सवōदय’ सÌबÆधी िवचारो का गांधी जी क दशªन मेसवाªिधक महÂव है| गांधी जी को सवōदय े सÌबÆधी िवचारो कì ÿेणा रिÖकन कì पुÖतक “अÆट ू िथस लाÖट” नमक पुÖतक क अÅययन र सेहòई | गांधी जी कì अंतरआÂमा का रचनाÂमक ÿितिबÌब इस úÆथ मेथा | इसको अÅययन े े करनेक बाद उÆहŌनेअपनेिवचार संसार क सामनेरखे गांधी जी ने ůÖटीिशप का िसĦांत | ÿितपािदत िकया और ऐसेअथªशाľ का खंडन िकया जो मुनाफाखोरो को फ़ायदा पहòचाए | े े| उनक अनुसार हमको उतना ही úहण करना चािहए जो सब को िमल सक समानता कì बात करतेथेगांधी जी| ऐसा न हो िक कछ लोगो कì आमदनी अिधक हो और कछ गरीबी कì रे ा पर ख ु ु हो | भंगी, डा³टर ,वकìल मजदर सब को एक सा ही पåर®िमक िमलना चािहए| गांधी जी ू CC-BY-NC-ND WWW.SOCRATESJOURNAL.COM (NOT TO BE PRESENTED IN PRINTED FORM) General Article Page 12
  • SOCRATES: Edition-I YEAR 2013(On-line & Open Access) ISSN 2347-6869 े हÖतिशÐप कì कला को बढ़ावा दे ेथेऔर मशीनीकारण क िखलाफ थे | िजस भूिम पर िकसान त े मे नत करक फसल उगाता है उस फसल पर िकसान का उतना ही िहÖसा बनता िजतना कì ह ज़मीदार का | गांधी जी ľी और पुŁष दोनŌ को समान Öथान दे ेथे बाल िववाह का जोर-दार त | े े खंडन करतेहòए अंतरजातीय िववाह क समथªक थे| गांधी जी क अनुसार, सवōदयी वयवÖथा कì े लागु करनेक िलए यह आवÔयक है कì ÿÂये मानव मे आवÔयक सदगुण जैसेसÂय,अिहंसा क ,अभय ,āĺचयª ,अÖते ,अपåरúह, खानपान मेसंयम वैराµय और आÂमÂयाग ,शारीर ®म ,सÓदे ी य स े ,सभी धमō क िलए आदर, तथा अÖपशªता िनवारण होने चािहये| े गांधी जी एक ÿिसĦ दाशªिनक, राजनीित² एवं समाज सुधारक होनेक साथ-साथ एक े महान िश±ा शाľी भी थे| गांधी जी नेदे कì उÆनित क िलए समाज कì उÆनित पर अिधक श े महÂव िदया है िजसकì ÿािĮ मेिश±ा का ÿमुख Öथान है|उनकì बेसक िश±ा योजना उनक ि िश±ा दशªन का मूतª łप है| े े डॉ. एस एस पट ल नेकहा है “गांधी जी क िश±ा सÌबÆधी िवचारो सेयह ÖपĶ है िक वेपवª मे ू े िश±ा िसĦाÆत एवं वयवहार क ÿारं िभक िबंदु है |” गांधी जी का मनना था क जो िश±ा िवदे ी शासन मेभारतीयŌ पर थोपी गई वह दोष पूणª थी श | ³यŌ िक इस िश±ा से Óयिĉ शरीर सेतो भारतीय रहता था परÆतु िहदªय और मिÖतÕक से CC-BY-NC-ND WWW.SOCRATESJOURNAL.COM (NOT TO BE PRESENTED IN PRINTED FORM) General Article Page 13
  • SOCRATES: Edition-I YEAR 2013(On-line & Open Access) ISSN 2347-6869 िवदे ी हो जाता था | श गांधी जी कì माÆयता थी िक , “यिद स°ा पर हम आ भी जाएँ तब भी सामािजक और आिथªक े Öवराज तब तक नहé आ सकता जब तक िश±ा को राÕůीय आवÔयकताओ ं क अनुłप नहé बनाया जाता | अत: उÆहोनेबेसक िश±ा दशªन दे क सम± रखा | ि श े े ि गांधी जी क बेसक िश±ा सÌबÆधी िसĦाÆत िनÌन ह§| • ७ वषª से१४ वषª तक बालको को अिनवायª एवं िन:शुÐक िश±ा ÿदान कì जाए | • िश±ा का माÅयम माý भाषा हो| ¤ • बालक कì सÌपणª िश±ा का कþ कोई हÖत िशÐप हो| ू े े ेगी| • इस शैि±क योजना क फलÖवłप अÅयापक क पåर®िमक कì पूतê भी हो सक े • यह योजना भारतीय सÖकित क मूÐय दशªन – सÂय व अिहंसा पर आधाåरत है| ृ े • इस पĥित सेबालको मेÖवावलंबन व ®म करनेकì आदत पड़े ी| यह पĥित ®म क ग महÂव को Öवीकार करती है | े • इस पĥित सेसामािजक उÂथान क िलए आवÔयक सामािजक भावना का िवकास होगा | े े गांधी जी क िवचार िश±ा क िलए गहरेऔर सवªÓयापी थे|उनका उĥे य था कì गरीब लोग िश±ा Ô CC-BY-NC-ND WWW.SOCRATESJOURNAL.COM (NOT TO BE PRESENTED IN PRINTED FORM) General Article Page 14
  • SOCRATES: Edition-I YEAR 2013(On-line & Open Access) ISSN 2347-6869 ÿाĮ करेइसिलए गांधी जी नेिनशुÐक िश±ा कì बात कì | े े गांधी जी क अनुसार “स¸ची िश±ा वह है िजससेबालको क शरीर ,मिÖतÕक तथा अÅयािÂमक े िवकास हो” गांधी जी िश±ा क Ĭारा बेोज़गारी भी दर करना चाहतेथे|चाåरिýक एवं नैितक र ू िवकास को भी िश±ा का आधार बनाना मु´य उĥे य था | गांधी जी कì िश±ा दशªन का उĥे य Ô Ô े े सांÖकितक िवकास क साथ -साथ आÂमा का िवकास करक ईĵर कì ÿािĮ करना था | ृ वतªमान युग का व लेषण े े वतªमान युग बहòत ही दःख पूणª है | मानवता क नाम पर समाज क सºजन पुŁष समझेजाने ु े े े वालेलोग अपने‘मै’ क मन क भाव को ऊचाईयŌ पर दे ना चाहतेहै | इसक िलए वह कछ भी ँ ख ु े करनेको तैयार है | “मै” कì मयाªदा क िलए वह मानवता,संÖकित, धमª और समाज सब कì ृ े बिल दे ेको तैयार है | ऐसेÖवाथª क िलए मरनेवालेÓयिĉ अपनेजीवन को शांित एवं अिहंसा का न पुजारी बतातेहै | जबिक अिहंसा का अंश तो दूर वह इस वणªमाला को ही नहé जानतेिजनसे अिहंसा कì आकत बनाइ जाती है | ृ े पितªÖपधाª का दौर है हर Óयिĉ का Öवाथª दसरेसेआगेजाना चाहता है चाहेइसक िलए अपने ु े े ÿितयोिगयŌ क जीवन क साथ मौत का खे ही ³यू न खे ना पड़ जाय िकÆतु उनको जीत ल ल CC-BY-NC-ND WWW.SOCRATESJOURNAL.COM (NOT TO BE PRESENTED IN PRINTED FORM) General Article Page 15
  • SOCRATES: Edition-I YEAR 2013(On-line & Open Access) ISSN 2347-6869 चािहए | ऐसा तो उस युग मेभी नहé था जब एक राºय मेएक ही िसहासन और एक ही राजा हòआ े करता था| मयाªदा क िलए अपनी जान देिदया करतेथेलोग, जबिक आज कल जान ले ा जानते न है मयादा क परवाह कोई नह ं करता| łपयेकì हवस नेतो अँधा ही बना रखा है Łपया े आना चािहए कहां सेआए इससेकोई मतलब नहé, बस चलेतो भूखेकì भीख क पैसेभी हडप ल¤ | ª ÿितÖपधाª है तो िसफ बुरेकमō कì है बुरेकì है बुरेबननेकì है| आज ऐसी वि त दे खने को मलती है क, मि जद म नमाज पढ़ ल तो हम पु या मा हो गए | भगवान् को तो रोज़ ही चढ़ावा चढ़ाया करतेही है बस सारे पाप तो धुल गए और वैसेभी यिद सभी पुÁय करे ेतो पाप भी तो करनेवाला होना चािहए | समाज मेकोई ग और यिद वह मै ही हóँ तो उसमेबुरा ही ³या है ऐसेिवचार रखतेहै महाशय| िहंसा को तो वीरता कì िनशानी बना रखा है असËयता को जीवन का आचरण | तो कौन कह सकता है िक ऐसेलोग गलत मागª पर है | समाज मेआने ो बुराइया िवकिसत हो चुकì है और क े लोग उसेअपनी नजरो मेÖथान देचुक है , उनको सामािजक मा यता ा त हो चक है | ु े करेभी तो ³या करेजीवन है अनमोल जीनेक िलए कछ भी कर सकतेहै परं तु सÂय सबसे दर ु ू होता जा रहा है | आज जीवन का उ े य मो CC-BY-NC-ND WWW.SOCRATESJOURNAL.COM (NOT TO BE PRESENTED IN PRINTED FORM) नह ं धन हो गया है | और इस General Article Page 16
  • SOCRATES: Edition-I YEAR 2013(On-line & Open Access) ISSN 2347-6869 धन क लए स य क आहु त भी दे नी पड़े तो कोई संकोच नह ं | ³या होता है सÂय , े ऐसा तो कभी सुना ही नहé | े असÂय लोगो क िलए चालाकì का महामÆý बना हòअ है सीधेलोग तो बे कफ कì ®े ी मेआतेहै व ू ण ै े ृ | चोरी ,डकती ,लट मार आिद तो असËय लोगो क कÂय ह§ परÆतु अफ़सोस तो इस बात का है िक ू हमारेसमाज का जो पढ़ा िलखा वगª है जो खुद को सËय कहता है और िजसे सभी सËय कहतेहै , वĉ आनेपर असËयŌ सेभी पितत आचरण करता है | सËयता और िश±ा कì अवधारणा कही दे नेकì नहé िमल रहा है | चोर तो चोरी करेगा ही उसका काम ही है यह परÆतु वह Óयिĉ जो ख Öनातक कì िडúी िलए सरकारी दÉतर मेबैठा है और समाजसे ा का झठा ढ Ōग करता रहता है व ू ै वोह चोरी करेतो कसा महसूस होगा | ĂĶाचायª तो ऐसा समाज मेबैठा है जैसेकोई राजा अपने े िसहासन पर बैठता है |अपनी ®े ता को सािबत करनेक िलए हजारो कì सं´या मेबे ु सूर ķ क े लोगो कì जानो को मज़ाक बना कर उनक जीवन सेखे खे ा जाता है ³या इसी समाज कì ल ल कÐपना महाÂमा गांधी नेकì थी ? िजससेÆयाय िमलना चािहए वही अÆयाय का पुजारी बना बैठा है िजससेसहायता चािहए वही लोगो को असहाय बनाए पडा है लोगो को रोजगार दे ेवाला वाला अिधकारी समाज को बेोजगार न र ै बना रहा है यह कसा समाज है | िश±ा दे ेवाला खद अ श न ु CC-BY-NC-ND WWW.SOCRATESJOURNAL.COM (NOT TO BE PRESENTED IN PRINTED FORM) त है और दसर को भी ू General Article Page 17
  • SOCRATES: Edition-I YEAR 2013(On-line & Open Access) ISSN 2347-6869 अिशि±त कर रहा है | इसका यह मतलब नहé कì कोई कायª नहé हो रहा है बिÐक कायª सभी हो े रहेहै परÆतु सही तरीक सेनहé हो रहे है | समाज अशांत है | भय मेिज़Æदगी गुज़ार रहा है | दे ी व सामान ľी कì मयाªदा कì धिºजयां उड़ाई जा रही है | बलाÂकार ,िहंसा ,असÂय ,ĂĶाचार.अÂयाचार ,आशांित सभी का बोल-बाला है | कछ लोग समाज मेऐसेभी है जो अपनी मयाªदा को समझतेहòए अपनेसामािजक कतªÓयो को ु िनभातेहै और समाज म¤ एक अ¸छा सा वातावरण बनाए रहतेहै परÆतु ऐसेलोगो कì स´या बहòत कम है | े े आजक इस युग कì समÖयाओ ं सेसभी पीिड़त है और ऐसेसमय मेमहाÂमा गांधी जी क िवचार ै याद आतेहै और गाँधी का जीवन दशªन आज सवाªिधक ÿासंिगक भी है | समाज मेफली िहंसा कì े आग को बुझानेक िलए मनुÕय को अपनेअÆदर कì आग को बुझाना होगा | गांधी जी अिहंसा का मु´य कारण øोध को बतातेहै | “ øोध एक ÿचंड अिµन है, जो मनुÕय इस पर वश कर ले ा वह इस अिµन को बुझा दे ा और जो ग ग मनुÕय इस अिµन पर वश नही कर पता इसकì आग मेजल जाता है’’| øोध एक ऐसी ºवाला है िजसकì वजह सेथोडी सी बात ही बड़ी समÖया मेबदल जाती है | गांधी जी कहतेहै यिद मानुष øोध पर अपना काबू कर ले ा तो बडी सी बडी मुसीबत को हसते हòए सह ग CC-BY-NC-ND WWW.SOCRATESJOURNAL.COM (NOT TO BE PRESENTED IN PRINTED FORM) General Article Page 18
  • SOCRATES: Edition-I YEAR 2013(On-line & Open Access) ISSN 2347-6869 सकता है और समÖया का समाधान भी िनकाल सकता है| ै े संसार मेफली अशांित को दर करनेका यिद कोई तरीका है तो वह ÿे है | िहंसा क माÅयम से म ू िकसी भी मनुÕय या िकसी भी संगठन को सही मागª नहé िदखाया जा सकता | िहंसा िहंसा को बढ़ाती है नािक कम करती है | मनुÕय को अपनी इ¸छाओ को याद करते समय दसरेमनुÕय कì ु े े इ¸छाओ क बारेमेभी सोचना चािहए जैसा अपनेिलए सोचेवैसा ही दसरेक िलए भी करे| ु इस िवषय मेगांधी जी कहतेहै : े “िजस मनुÕय नेअपनी इ¸छाओ को Âयाग िदया | मै और मेेक मन क भाव को दर कर िदया र े ू शािÆत उसी को ÿाĮ होती है’’| े समाज म¤ शािÆत क िलए बहòत महÂवपणª बात गांधी जी नेबताई है , “मै और मेेमन का भाव र ू यही वह कारण है जो संसार मेअशािÆत और िहंसा को बढ़ावा देरहा है| जब मन ही शांत न होगा े े तो संकÐप और िवचार कहां सेशािÆत क आय¤गे| अपनेÖवाथª क िलए जीना छोड़ना होगा शािÆत े कì ÿािĮ क िलए ÿे भाव अपनाना पडता है |”“यिद संसार मेमनुÕय को अपनी ओर खीचने म वाला कोई चुÌबक है तो वह ÿे है’’| म गांधी जी नेसारे संसार को इस ÿे पथ पर चल कर िदखा िदया | ÿे भाव सेही गांधी जी सभी म म े क Ćदय पर अपना ÿभाव छोड़ दे ेथेजो Óयिĉ एक बार उनसेिमलता था उनकì बातो मेमगन त CC-BY-NC-ND WWW.SOCRATESJOURNAL.COM (NOT TO BE PRESENTED IN PRINTED FORM) General Article Page 19
  • SOCRATES: Edition-I YEAR 2013(On-line & Open Access) ISSN 2347-6869 े हो जाता था| ऐसा ÿे भाव था उनकì वाणी मेऔर उनक आचरण मे| म े गांधी जी कहतेथे“पाप तब ही नहé होता जब आप क आचरण मेआ जाए तब उसकì िगनती पाप कì ®े ी मेहोती है बिÐक पाप जब ŀिĶ मेआ गया िवचार मेआ गया बस हो गया’’ | ण े गांधी जी क अनुसार पाप करनेका िवचार आना ही पाप है इस ÿकार कì सोच ही संसार मे े शािÆत ला सकती है | आज संसार मेिहंसा को दबानेक िलए िहंसा का ÿयोग िकया जाता है जो कì एक महा अनथª सेकम नहé है इितहास गवाह है कोई भी िहंसा या िकसी भी झगडेको िहंसा से ेवल कछ समय क िलए ही िहंसा को रोका ज सकता है परÆतु अिहंसा का े िनयंिýत करनेसे क ु मागª ऐसा मागª है िजसम¤ बड़ी सेबड़ी िहंसा को हमे ा क िलए समाĮ कर िदया है | श े े े गांधी जी क िवचार आज भी संसार क िलए उतनेही उपयोगी है िजतनेकल थे| आज भी यिद हम े े दे ेिजन िजन दे ो मेिहंसा को रोकनेक िलए या िकसी को रोकनेक िलए िहंसा क सहारा िलया ख श गया, ³या वहां आज शांित है ? इराक – अफगािनÖतान - ल बया – म – पा क तान – सोमा लया आ द अनेक दे श हंसा क आग म रोज़ जलते ह लाखो बे नाह मारे गु जातेह§ | इतनेवषō बाद भी िहंसा पर हंसा से कोई भी िनयंýण नहé िकया जा सका |यिद यही े कायª अिहंसाÂमक ढ ं ग सेिकया जाता ÿे ÿयोग कर क िकया जाता ,सÂय कì राह मे³या जाता म आÂमा कì शिĉ और समानता कì ŀिĶ से³या जाता तो आवÔय कामयाबी िमलती अनिगनत CC-BY-NC-ND WWW.SOCRATESJOURNAL.COM (NOT TO BE PRESENTED IN PRINTED FORM) General Article Page 20
  • SOCRATES: Edition-I YEAR 2013(On-line & Open Access) ISSN 2347-6869 े लोग िहंसा को Âयाग कर सÂय और अिहंसा क मागª पर चल रहेहोतेसमाज मेशांित और मानवता का सूयª जगमगा रहा होता | े भारतीय समाज कì बात कर¤ तो मनुÕय जीवन जÆम क बाद जब िश±ा ÿािĮ िक िदशा म¤ आगे बढ़ता है तब उसका सामना एक दोषपणª िश±ा ÓयवÖथा सेहोता है | एक ऐसी ÓयवÖथा जो मनुÕय ू े को ÿिशि±त करती है िशि±त नहé करती | िवīाथê ÿारं भ सेही डॉ³टर ,इंिजिनयर आिद बननेक िलए ÿिशि±त िकयेजातेह§ | ऐसी ÓयवÖथा िवīािथªओ ं को खुल कर सोचने या समझनेनहé दे ी त े बिÐक िजस तरह कÈयट र म¤ सॉÉटवे र अपलोड करतेह§ वैसेही , ÿिश±ण उनक अÆदर अपलोड ं ू य िकया जाता है | यही कारण है िक भारत म¤ दाशªिनक , िसĦाÆतकारŌ और मौिलक िवचारŌ कì कमी ÿतीत होने लगी है | बेसक िश±ा मनुÕय का मौिलक अिधकार है और यिद यही दोषपणª होगी तो मनुÕय का भिवÕय भी ि ू े े दोषपणª ही होगा | अतः महाÂमा गाँधी क दशªन क अनुłप बेसक िश±ा म¤ सुधार आवÔयक ह§ | ि ू ेवल गाँधी क एक नाम , एक Óयिĉ , एक महाÂमा नहé ह§ | गाँधी एक िवचार ह§ | एक ऐसा िवचार जो े िक ÿे , शांित , सौहाīª , सवªधमª समभाव, और आिÂमक उÆनि° क िलए आवÔयक है | गाँधी जी ने म अपने जीवन म¤ कोई दैवीय कायª नहé िकया बिÐक उÆहŌने Õय को दे Âव का मागª िदखाया | एक मनु व शांत , ÿगितशील और सौहाīाªपणª समाज िकसी भी िवकास कì अिनवायª आवÔयकताएं ह§ और ू े गाँधी जी क जीवन दशªन को अपने जीवन म¤ ढ ालकर इन आवÔयकताओ ं कì पूतê कì जा सकती है े ेवल | एक ऐसेसमाज का िनमाªण संभव है िजसम¤ सबका कÐयाण संभव हो सक , आवÔयकता क CC-BY-NC-ND WWW.SOCRATESJOURNAL.COM (NOT TO BE PRESENTED IN PRINTED FORM) General Article Page 21
  • SOCRATES: Edition-I YEAR 2013(On-line & Open Access) ISSN 2347-6869 अपने Ćदय म¤ बसे महाÂमा को पुनजêिवत करने है | कì * http://www.socratesjournal.com/p/author-index_10.html संदभª सूची 1. डॉ.अŁणा गुĮा ,डॉ.उमा टंडन ,उदीयमान भारतीय समाज मे िश±क , २००५ ÿथम,आलोक ÿकाशन, ,लखनऊ े 2. एन आर सकसेना ,एजुकशन इन इमिज« ग इंिडयन सोसाइटी , २०१०, आर लाल Êबूक िडपो,मे रठ े 3. ÿो. मेहता एवं खÆना ,राजनैितक िव²ान, २०१२ ,एस.बी.िप.डी. पिÊलकशन हाउस , आगरा ै 4. कोई भला कसे भूले गा जलीय वाला बाग़ को ,ÿिभ शा±ी, २००9 5. महाÂमा गांधी ,भारतं कमारÈपा ,फॉर पेिसिफÖट , १९४९, नव जीवन ÿकाशन हाउस ,अहमदाबाद ु े 6. महाÂमा गांधी ,सÂय क साथ मेरे ÿयोग,ÿभात ÿकाशन CC-BY-NC-ND WWW.SOCRATESJOURNAL.COM (NOT TO BE PRESENTED IN PRINTED FORM) General Article Page 22