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Gurutva jyotish oct 2012
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Gurutva jyotish oct 2012

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GURUTVA JYOTISH Magazines Astrology, Numerology, Vastu, Gems Stone, Mantra, Yantra, Tantra, Kawach, Sharad Navratri, Navratri, second-Navratri, Navratri-2012, navratri-puja, navratra-story, …

GURUTVA JYOTISH Magazines Astrology, Numerology, Vastu, Gems Stone, Mantra, Yantra, Tantra, Kawach, Sharad Navratri, Navratri, second-Navratri, Navratri-2012, navratri-puja, navratra-story, third-navratri, fourth-navratri, navratri-festival, navratri-pooja, navratri puja-2012, Durga Pooja, durga pooja 201, Navratri Celebrations 16-Oct-2012,


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  • 1. Font Help >> http://gurutvajyotish.blogspot.comगुरुत्ल कामाारम द्राया प्रस्तुत भासवक ई-ऩत्रिका अक्टू फय- 2012 NON PROFIT PUBLICATION
  • 2. FREE E CIRCULARगुरुत्ल ज्मोसतऴ ऩत्रिका ई- जन्भ ऩत्रिकाअक्टू फय 2012 अत्माधुसनक ज्मोसतऴ ऩद्धसत द्रायावॊऩादकसिॊतन जोळीवॊऩकागुरुत्ल ज्मोसतऴ त्रलबाग उत्कृ द्श बत्रलष्मलाणी क वाथ ेगुरुत्ल कामाारम92/3. BANK COLONY,BRAHMESHWAR PATNA,BHUBNESWAR-751018, १००+ ऩेज भं प्रस्तुत(ORISSA) INDIAपोन91+9338213418,91+9238328785, E HOROSCOPEईभेरgurutva.karyalay@gmail.com,gurutva_karyalay@yahoo.in, Create By Advancedलेफwww.gurutvakaryalay.comhttp://gk.yolasite.com/ Astrologywww.gurutvakaryalay.blogspot.com/ऩत्रिका प्रस्तुसत Excellent Predictionसिॊतन जोळी, 100+ Pagesस्लस्स्तक.ऎन.जोळीपोटो ग्राफपक्व फशॊ दी/ English भं भूल्म भाि 750/-सिॊतन जोळी, स्लस्स्तक आटाशभाये भुख्म वशमोगी GURUTVA KARYALAYस्लस्स्तक.ऎन.जोळी (स्लस्स्तक BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785वोफ्टे क इस्न्डमा सर) Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
  • 3. फशन्द ु ऩयॊ ऩया भं दे ली को त्रलसबन्न रूऩं वे जाना औय ऩूजा जाता शं । ॐ जमॊती भॊगरा कारी बद्रकारी कऩासरनी। दगाा षभा सळला धािी स्लाशा स्लधा नभोऽस्तुते॥ | बालाथा: जमॊती, भॊगरा, कारी, बद्रकारी, कऩासरनी, ु दगाा, षभा, सळला धािी औय स्लधा क नाभं वे प्रसवद्ध जगदम्फा दे ली। आऩको भेया नभस्काय शं ।…4 ु े …4 नभो दे व्मै भशादे व्मै सळलामै वततॊ नभ:। नभ: प्रकृ त्मै बद्रामै सनमता: प्रणता: स्भताभ ्॥ अथाात: दे ली को नभस्काय शं , भशादे ली को नभस्काय शं । भशादे ली सळला को वलादा नभस्काय शं । प्रकृ सत एलॊ बद्रा को भेया प्रणाभ शं । शभ रोग सनमभऩूलक दे ली जगदम्फा को नभस्काय कयते शं । …6 ा नलयाि त्रलळेऴ भं ऩढे ़ त्रलळेऴ भं   नलयाि त्रलळेऴ  वला कामा सवत्रद्ध भाॊ दगाा की उऩावना क्मं की जाती शं ? ु 6 काभनाऩूसता शे तु नलाणा भॊि वाधना 28 प्रथभ ळैरऩुिी 7 ऩसत-ऩत्नी भं करश सनलायण शे तु 30 कलि …37 फद्रतीमॊ ब्रह्मिारयणी 8 कभायी ऩूजन वे वकर भनोयथ सवद्ध शोते शं । ु 31 तृतीमॊ िन्द्रघण्टा 9 भाॉ दगाा क िभत्कायी भन्ि ु े 46 ितुथा कष्भाण्डा ू 10 नलयाि भं राबदामक कन्मा ऩूजन 49 ऩॊिभ स्कदभाता ॊ 11 भाॊ क ियणं सनलाव कयते वभस्त शं तीथा े 54 ऴद्षभ ् कात्मामनी 12 ऩॊि दे लोऩावना भं उऩमुक्त एलॊ सनत्रऴद्ध ऩि ऩुष्ऩ 55गणेळ रक्ष्भी मॊि…19 वद्ऱभ कारयात्रि 13 शभाये उत्ऩाद  अद्शभ भशागौयी 14 बाग्म रक्ष्भी फदब्फी 18 नलभ ् सवत्रद्धदािी 15 दगाा फीवा मॊि ु 21 ळायदीम नलयाि व्रत वे वुख-वभृत्रद्ध दामक शं 16 भॊिसवद्ध स्पफटक श्री मॊि 29 नलयाि व्रत की वयर त्रलसध? 17 वला कामा सवत्रद्ध कलि 63नलयत्न जफित श्रीमॊि..69 दे ली कृ ऩा वे भनोलाॊस्छित कामो सवत्रद्ध 18 वलासवत्रद्धदामक भुफद्रका 64 वयर त्रलसध-त्रलधान वे ळायदीम नलयाि व्रत … 19 द्रादळ भशा मॊि 65 दगाा फीवा ु ळसन ऩीिा सनलायक आस्द्वन नलयात्रि घट स्थाऩना भुशूता 20 68 मॊि …21 नलयाि स्ऩेळर घट स्थाऩना त्रलसध 22 श्री शनुभान मॊि 70 नलाणा भॊि द्राया नलग्रश कद्श सनलायण 26 भॊिसवद्ध रक्ष्भी मॊिवूसि 71  स्थामी औय अन्म रेख  भॊि सवद्ध दै ली मॊि वूसि 71 वॊऩादकीम 4 भॊि सवद्ध रूद्राष 73 भासवक यासळ पर 79 श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि / कलि 74 यासळ यत्न…72 अक्टू फय 2102 भासवक ऩॊिाॊग 83 याभ यषा मॊि 75 अक्टू फय-2012 भासवक व्रत-ऩला-त्मौशाय 85 जैन धभाक त्रलसळद्श मॊि े 76 अक्टू फय 2102 -त्रलळेऴ मोग 91 घॊटाकणा भशालीय वला सवत्रद्ध भशामॊि 77 दै सनक ळुब एलॊ अळुब वभम सान तासरका 91 अभोद्य भशाभृत्मुॊजम कलि 78 फदन-यात क िौघफडमे े 92 याळी यत्न एलॊ उऩयत्न 78 भॊि सवद्ध रूद्राष …73 फदन-यात फक शोया - वूमोदम वे वूमाास्त तक 93 वला योगनाळक मॊि/ 95 ग्रश िरन अक्टू फय -2012 भॊि सवद्ध कलिअभोद्य भशाभृत्मुजम ॊ 94 97 वूिना 102 YANTRA LIST 98 कलि …78 शभाया उद्दे श्म 104 GEM STONE 100
  • 4. त्रप्रम आस्त्भम फॊध/ फफशन ु जम गुरुदे ल फशन्द ु ऩयॊ ऩया भं दे ली को त्रलसबन्न रूऩं वे जाना औय ऩूजा जाता शं । ॐ जमॊती भॊगरा कारी बद्रकारी कऩासरनी। दगाा षभा सळला धािी स्लाशा स्लधा नभोऽस्तुते॥ ुबालाथा: जमॊती, भॊगरा, कारी, बद्रकारी, कऩासरनी, दगाा, षभा, सळला धािी औय स्लधा क नाभं वे प्रसवद्ध जगदम्फा दे ली। आऩको भेया ु ेनभस्काय शं । नभो दे व्मै भशादे व्मै सळलामै वततॊ नभ:। नभ: प्रकृ त्मै बद्रामै सनमता: प्रणता: स्भताभ ्॥अथाात: दे ली को नभस्काय शं , भशादे ली को नभस्काय शं । भशादे ली सळला को वलादा नभस्काय शं । प्रकृ सत एलॊ बद्रा को भेया प्रणाभ शं । शभ रोगसनमभऩूलक दे ली जगदम्फा को नभस्काय कयते शं । ा ळास्त्रोक्त लणान शं की दे ली दगाा क उक्त भॊि का स्भयण कय प्राथाना कयने भाि वे दे ली प्रवन्न शोकय अऩने बक्तं की इछिा ऩूणा ु ेकयती शं । वभस्त दे ल गण स्जनकी स्तुसत प्राथना कयते शं । भाॉ दगाा अऩने बक्तो की यषा कय उन ऩय कृ ऩा द्रद्शी लऴााती शं औय उवको ुउन्नती क सळखय ऩय जाने का भागा प्रवस्त कयती शं । इव सरमे ईद्वय भं श्रद्धा त्रलद्वाय यखने लारे वबी भनुष्म को दे ली की ळयण ेभं जाकय दे ली वे सनभार रृदम वे प्राथाना कयनी िाफशमे।भाॊ जगदम्फा की कृ ऩा प्रासद्ऱ शे तु नलयािी त्रलळेऴ राब प्रदान कयने लारी शं । क्मोफक नलयाि को आद्य् ळत्रक्त की उऩावना का भशाऩलाभाना गमा शं । दे ली बागलत क आठलं स्कध भं दे ली उऩावना का त्रलस्ताय वे लणान फकमा गमा शै । े ॊभाकण्डे मऩुयाण क अॊतगात दे ली भाशात्म्म भं उल्रेख शं की स्लमॊ भाॊ जगदम्फा का लिन शं ... की ा े ळयत्कारे भशाऩूजा फिमतेमा िलात्रऴकी। तस्माॊभभैतन्भाशात्म्मॊश्रत्लाबत्रक्तवभस्न्लत:॥ ा ु वलााफाधात्रलसनभुक्तोधनधान्मवुतास्न्लत:। भनुष्मोभत्प्रवादे नबत्रलष्मसतन वॊळम:॥ ाअथाात् ळयद ऋतु क नलयािभं जफ भेयी लात्रऴाक भशाऩूजा शोती शं , उव कार भं जो भनुष्म भेये भाशात्म्म (दगाावद्ऱळती) को े ुबत्रक्तऩूलकवुनेगा, लश भनुष्म भेये प्रवाद वे वफ फाधाओॊ वे भुक्त शोकय धन-धान्म एलॊ ऩुि वे वम्ऩन्न शो जामेगा। ा भाॊ दगाा की कृ ऩा प्रासद्ऱ शे तु त्रलसबन्न ळास्त्र एलॊ ग्रॊथो भं त्रलसबन्न भॊिं का उल्रेख फकमा गमा शं । ऩाठको क भागादळान एलॊ ु ेजानकायी शे तु ऩत्रिका क इव अॊक भं कि त्रलळेऴ प्राबाली भॊिो का वॊकरन कयने का प्रमाव फकमा गमा शं । इव अॊक भं करळ े ुस्थाऩना वे वॊफसधत लणान बी फकमा गमा शं । स्जववे इछिक फॊधु/फशन त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय अऩने भनोयथो को सवद्ध कयने भं ॊ ुवभथा शं। गुरुत्ल कामाारम ऩरयलाय की ओय वे आऩ वबी को नलयाि की ळुबकाभनएॊ। आऩका जीलन वुखभम, भॊगरभम शो भाॊ बगलती आऩ वबी का कल्माण कयं । आद्य ळत्रक्त भाॊ जगदम्फा वे मशी प्राथना शं ।त्रलळेऴ वूिना: ऩीिरे कि भफशनो वे शभाये त्रप्रम एलॊ आस्त्भम फॊधु/फशनो को शभायी भासवक ई-ऩत्रिका प्रसतभाश 1 तारयख को उऩरब्ध नशीॊ शो ुऩाती इव का भुख्म कायण शं , शभाये त्रप्रम ऩाठको को असधक वे असधक सान लधाक जानकायीमाॊ उऩरब्ध कयाने क उद्दे श्म वे वॊफॊसधत त्रलऴमं ऩय ेनई-नई खोज, नमे प्रमोग एलॊ कि तकसनकी वुधाय ल ऩत्रिका को फेशतय फनाने क त्रलसबन्न प्रमावो क कायण वभम का अबाल शो यशा शं , इव ु े ेकायण इव नलयाि त्रलळेऴ अॊक भं वॊफॊसधत प्राम वबी रेखं का ऩुन् प्रकाळन फकमा गमा शं । सिॊतन जोळी
  • 5. 5 अक्टू फय 2012 ***** नलयाि त्रलळेऴाॊक वे वॊफॊसधत त्रलळेऴ वूिना***** ऩत्रिका भं प्रकासळत नलयाि त्रलळेऴ भं वम्फस्न्धत वबी जानकायीमाॊ गुरुत्ल कामाारम क असधकायं क वाथ शी े े आयस्षत शं । ऩौयास्णक ग्रॊथो ऩय अत्रलद्वाव यखने लारे व्मत्रक्त इव अॊक भं उऩरब्ध वबी त्रलऴम को भाि ऩठन वाभग्री वभझ वकते शं । धासभाक त्रलऴम आस्था एलॊ त्रलद्वाव ऩय आधारयत शोने क कायण इव अॊकभं लस्णात वबी जानकायीमा बायसतम े ग्रॊथो वे प्रेरयत शोकय सरखी गई शं । धभा वे वॊफॊसधत त्रलऴमो फक वत्मता अथला प्राभास्णकता ऩय फकवी बी प्रकाय फक स्जन्भेदायी कामाारम मा वॊऩादक फक नशीॊ शं । इव अॊक भं लस्णात वॊफॊसधत वबी रेख भं लस्णात भॊि, मॊि ल प्रमोग फक प्राभास्णकता एलॊ प्रबाल फक स्जन्भेदायी कामाारम मा वॊऩादक फक नशीॊ शं औय ना शीॊ प्राभास्णकता एलॊ प्रबाल फक स्जन्भेदायी क फाये भं जानकायी े दे ने शे तु कामाारम मा वॊऩादक फकवी बी प्रकाय वे फाध्म शं । धभा वे वॊफॊसधत रेखो भं ऩाठक का अऩना त्रलद्वाव शोना आलश्मक शं । फकवी बी व्मत्रक्त त्रलळेऴ को फकवी बी प्रकाय वे इन त्रलऴमो भं त्रलद्वाव कयने ना कयने का अॊसतभ सनणाम उनका स्लमॊ का शोगा। ळास्त्रोक्त त्रलऴमं वे वॊफॊसधत जानकायी ऩय ऩाठक द्राया फकवी बी प्रकाय फक आऩत्ती स्लीकामा नशीॊ शोगी। धभा वे वॊफॊसधत रेख प्राभास्णक ग्रॊथो, शभाये लऴो क अनुबल एल अनुळधान क आधाय ऩय फदमे गमे शं । े ॊ े शभ फकवी बी व्मत्रक्त त्रलळेऴ द्राया धभा वे वॊफॊसधत त्रलऴमं ऩय त्रलद्वाव फकए जाने ऩय उवक राब मा नुक्ळान की े स्जन्भेदायी नफशॊ रेते शं । मश स्जन्भेदायी धासभाक त्रलऴमो ऩय त्रलद्वाव कयने लारे मा उवका प्रमोग कयने लारे व्मत्रक्त फक स्लमॊ फक शोगी। क्मोफक इन त्रलऴमो भं नैसतक भानदॊ डं, वाभास्जक, कानूनी सनमभं क स्खराप कोई व्मत्रक्त मफद नीजी स्लाथा ऩूसता े शे तु मशाॊ लस्णात जानकायी की आधाय ऩय प्रमोग कताा शं अथला धासभाक त्रलऴमो क उऩमोग कयने भे िुफट े यखता शं मा उववे िुफट शोती शं तो इव कायण वे प्रसतकर अथला त्रलऩरयत ऩरयणाभ सभरने बी वॊबल शं । ू धासभाक त्रलऴमो वे वॊफॊसधत जानकायी को भानकय उववे प्राद्ऱ शोने लारे राब, शानी फक स्जन्भेदायी कामाारम मा वॊऩादक फक नशीॊ शं । शभाये द्राया ऩोस्ट फकमे गमे धासभाक त्रलऴमो ऩय आधारयत रेखं भं लस्णात जानकायी को शभने कई फाय स्लमॊ ऩय एलॊ अन्म शभाये फॊधुगण ने बी अऩने नीजी जीलन भं अनुबल फकमा शं । स्जस्वे शभ कई फाय धासभाक त्रलऴमो के आधाय ऩय वे त्रलळेऴ राब की प्रासद्ऱ शुई शं । असधक जानकायी शे तु आऩ कामाारम भं वॊऩक कय वकते शं । ा (वबी त्रललादो कसरमे कलर बुलनेद्वय न्मामारम शी भान्म शोगा। े े
  • 6. 6 अक्टू फय 2012 भाॊ दगाा की उऩावना क्मं की जाती शं ? ु  सिॊतन जोळी नभो दे व्मै भशादे व्मै सळलामै वततॊ नभ:। इव भॊि क जऩ वे भाॉ फक ळयणागती प्राद्ऱ शोती शं । े नभ: प्रकृ त्मै बद्रामै सनमता: प्रणता: स्भताभ ्॥ स्जस्वे भनुष्म क जन्भ-जन्भ क ऩाऩं का नाळ शोता शै । े ेअथाात: दे ली को नभस्काय शं , भशादे ली को नभस्काय शं । भाॊ जननी वृत्रद्श फक आफद, अॊत औय भध्म शं ।भशादे ली सळला को वलादा नभस्काय शं । प्रकृ सत एलॊ बद्रा को भेया दे ली वे प्राथाना कयं –प्रणाभ शं । शभ रोग सनमभऩूलक दे ली जगदम्फा को नभस्काय ा ळयणागत-दीनाता-ऩरयिाण-ऩयामणेकयते शं । वलास्मासतंशये दे त्रल नायामस्ण नभोऽस्तुते॥उऩयोक्त भॊि वे दे ली दगाा का स्भयण कय प्राथाना कयने भाि वे ु अथाात: ळयण भं आए शुए दीनं एलॊ ऩीस़्डतं की यषा भं वॊरग्नदे ली प्रवन्न शोकय अऩने बक्तं की इछिा ऩूणा कयती शं । वभस्त यशने लारी तथा वफ फक ऩीिा दय कयने लारी नायामणी दे ली ूदे ल गण स्जनकी स्तुसत प्राथना कयते शं । भाॉ दगाा अऩने बक्तो ु आऩको नभस्काय शै ।की यषा कय उन ऩय कृ ऩा द्रद्शी लऴााती शं औय उवको उन्नतीक सळखय ऩय जाने का भागा प्रवस्त कयती शं । इव सरमे े योगानळेऴानऩशॊ सव तुद्शा रूद्शा तु काभान वकरानबीद्शान ्।ईद्वय भं श्रद्धा त्रलद्वाय यखने लारे वबी भनुष्म को दे ली की त्लाभासश्रतानाॊ न त्रलऩन्नयाणाॊ त्लाभासश्रता शाश्रमताॊ प्रमास्न्त।ळयण भं जाकय दे ली वे सनभार रृदम वे प्राथाना कयनी िाफशमे। अथाात् दे ली आऩ प्रवन्न शोने ऩय वफ योगं को नद्श कय दे ती शो औय कत्रऩत शोने ऩय भनोलाॊसित वबी काभनाओॊ का नाळ ु दे ली प्रऩन्नासताशये प्रवीद प्रवीद भातजागतोsस्खरस्म। कय दे ती शो। जो रोग तुम्शायी ळयण भं जा िुक शै । उनको े ऩवीद त्रलद्वेतरय ऩाफश त्रलद्वॊ त्लभीद्ळयी दे ली ियाियस्म। त्रलऩत्रत्त आती शी नशीॊ। तुम्शायी ळयण भं गए शुए भनुष्म दवयं ूअथाात: ळयणागत फक ऩीिा दय कयने लारी दे ली आऩ शभ ऩय ू को ळयण दे ने लारे शो जाते शं ।प्रवन्न शं। वॊऩूणा जगत भाता प्रवन्न शं। त्रलद्वेद्वयी दे ली त्रलद्वफक यषा कयो। दे ली आऩ फश एक भाि ियािय जगत फक वलाफाधाप्रळभनॊ िेरोक्मस्मास्खरेद्वयी।असधद्वयी शो। एलभेल त्लमा कामाभस्मध्दै रयत्रलनाळनभ ्। अथाात् शे वलेद्वयी आऩ तीनं रोकं फक वभस्त फाधाओॊ को वलाभॊगर-भाॊगल्मे सळलेवलााथवासधक । ा े ळाॊत कयो औय शभाये वबी ळिुओॊ का नाळ कयती यशो। ळयण्मे िमम्फक गौरय नायामस्ण नभोऽस्तुते॥ े वृत्रद्शस्स्थसत त्रलनाळानाॊ ळत्रक्तबूते वनातसन। ळाॊसतकभास्ण वलाि तथा द:स्लप्रदळाने। ु गुणाश्रमे गुणभमे नायामस्ण नभोऽस्तुते॥ ग्रशऩीडावु िोग्रावु भशात्भमॊ ळणुमात्भभ।अथाात: शे दे ली नायामणी आऩ वफ प्रकाय का भॊगर प्रदान अथाात् वलाि ळाॊसत कभा भं, फुये स्लप्न फदखाई दे ने ऩय तथाकयने लारी भॊगरभमी शो। कल्माण दासमनी सळला शो। वफ ग्रश जसनत ऩीिा उऩस्स्थत शोने ऩय भाशात्म्म श्रलण कयनाऩुरूऴाथं को सवद्ध कयने लारी ळयणा गतलत्वरा तीन नेिं िाफशए। इववे वफ ऩीिाएॉ ळाॊत औय दय शो जाती शं । ूलारी गौयी शो, आऩको नभस्काय शं । आऩ वृत्रद्श का ऩारन औय मफश कायण शं वशस्त्रमुगं वे भाॊ बगलती जगतजननी दगाा ुवॊशाय कयने लारी ळत्रक्तबूता वनातनी दे ली, आऩ गुणं का की उऩावना प्रसत लऴा लवॊत, आस्द्वन एलॊ गुद्ऱ नलयािी भंआधाय तथा वलागुणभमी शो। नायामणी दे ली तुम्शं नभस्काय त्रलळेऴ रुऩ वे कयने का त्रलधान फशन्द ु धभा ग्रॊथो भं शं ।शै । ***
  • 7. 7 अक्टू फय 2012 प्रथभ ळैरऩुिी  सिॊतन जोळी नलयाि क प्रथभ फदन भाॊ क ळैरऩुिी स्लरूऩ का ऩूजन कयने का त्रलधान शं । ऩलातयाज (ळैरयाज) फशभारम क मशाॊ े े ेऩालाती रुऩ भं जन्भ रेने वे बगलती को ळैरऩुिी कशा जाता शं । बगलती नॊदी नाभ क लृऴब ऩय वलाय शं । े भाता ळैरऩुिी क दाफशने शाथ भं त्रिळूर औय फाएॊ शाथ भं कभर ऩुष्ऩ ेवुळोसबत शं । भाॊ ळैरऩुिी को ळास्रों भं तीनो रोक क वभस्त लन्म जील-जॊतुओॊ का यषक भाना गमा शं । इवी कायण वे लन्म ेजीलन जीने लारी वभ्मताओॊ भं वफवे ऩशरे ळैरऩुिी क भॊफदय की स्थाऩना की जाती शं स्जव वं उनका सनलाव स्थान ेएलॊ उनक आव-ऩाव क स्थान वुयस्षत यशे । े ेभूर भॊि:-लन्दे लाॊसितराबाम िन्दाधाकृतळेखयाभ ्। लृऴारूढाॊ ळूरधयाॊ ळैरऩुिीॊ मळस्स्लनीभ ्।।ध्मान भॊि:-लन्दे लाॊसितराबामािन्द्राघाकृतळेखयाभ ्। लृऴारूढाॊळूरधयाॊळैरऩुिीमळस्स्लनीभ ्।ऩूणेन्दसनबाॊगौयी भूराधाय स्स्थताॊप्रथभ दगाा त्रिनेिा। ु ुऩटाम्फयऩरयधानाॊयत्नफकयीठाॊनानारॊकायबूत्रऴता।प्रपल्र लॊदना ऩल्रलाधॊयाकातॊकऩोराॊतगकिाभ ्। ु ु ुकभनीमाॊरालण्माॊस्भेयभुखीषीणभध्माॊसनतम्फनीभ ्।स्तोि:-प्रथभ दगाा त्लॊफशबलवागय तायणीभ ्। धन ऐद्वमा दामनीॊळैरऩुिीप्रणभाम्शभ ्। ुियािये द्वयीत्लॊफशभशाभोश त्रलनासळन। बुत्रक्त भुत्रक्त दामनी,ळैरऩुिीप्रणभाम्मशभ ्।कलि:-ओभकाय: भेसळय: ऩातुभूराधाय सनलासवनी। शीॊकायऩातुरराटे फीजरूऩाभशे द्वयी। श्रीॊकायऩातुलदनेरज्जारूऩाभशे द्वयी। शुॊकायऩातुरृदमेतारयणी ळत्रक्त स्लघृत। पट्काय:ऩातुवलाागेवला सवत्रद्ध परप्रदा। भाॊ ळैरऩुिी का भॊि-ध्मान-कलि- का त्रलसध-त्रलधान वे ऩूजन कयने लारे व्मत्रक्त को वदा धन-धान्म वे वॊऩन्नयशता शं । अथाात उवे स्जलन भं धन एलॊ अन्म वुख वाधनो को कभी भशवुव नशीॊ शोतीॊ। नलयाि क प्रथभ फदन की उऩावना वे मोग वाधना को प्रायॊ ब कयने लारे मोगी अऩने भन वे भूराधाय िि को जाग्रत ेकय अऩनी उजाा ळत्रक्त को कफद्रत कयते शं , स्जववे उन्शं अनेक प्रकाय फक सवत्रद्धमाॊ एलॊ उऩरस्ब्धमाॊ प्राद्ऱ शोती शं । ं ***
  • 8. 8 अक्टू फय 2012 फद्रतीमॊ ब्रह्मिारयणी  सिॊतन जोळी नलयाि क दवये फदन भाॊ क ब्रह्मिारयणी स्लरूऩ का ऩूजन कयने का त्रलधान शं । क्मोफक ब्रह्म का अथा शं तऩ। भाॊ े ू ेब्रह्मिारयणी तऩ का आियण कयने लारी बगलती शं इवी कायण उन्शं ब्रह्मिारयणी कशा गमा। ळास्त्रो भं भाॊ ब्रह्मिारयणी को वभस्त त्रलद्याओॊ की साता भाना गमा शं । ळास्त्रो भं ब्रह्मिारयणी दे ली क स्लरूऩ का ेलणान ऩूणा ज्मोसतभाम एलॊ अत्मॊत फदव्म दळाामा गमा शं । भाॊ ब्रह्मिारयणी द्वेत लस्त्र ऩशने उनक दाफशने शाथ भं अद्शदर फक जऩ भारा एलॊ फामं शाथ भं कभॊडर वुळोसबत ेयशता शं । ळत्रक्त स्लरुऩा दे ली ने बगलान सळल को प्राद्ऱ कयने क सरए 1000 वार तक सवप पर खाकय तऩस्मा यत यशीॊ े ाऔय 3000 वार तक सळल फक तऩस्मा सवप ऩेिं वे सगयी ऩत्रत्तमाॊ खाकय फक, उनकी इवी कफठन तऩस्मा क कायण उन्शं ा ेब्रह्मिारयणी नाभ वे जाना गमा।भॊि:दधानाऩयऩद्माभ्माभषभाराककभण्डरभ ्। दे ली प्रवीदतु भसम ब्रह्मिारयण्मनुत्तभा।।ध्मान:-लन्दे लाॊसित राबामिन्द्राघाकृतळेखयाभ ्।जऩभाराकभण्डरुधयाॊब्रह्मिारयणी ळुबाभ ्।गौयलणाास्लासधद्षानस्स्थताॊफद्रतीम दगाा त्रिनेिाभ ्। ुधलर ऩरयधानाॊब्रह्मरूऩाॊऩुष्ऩारॊकायबूत्रऴताभ ्।ऩदभलॊदनाॊऩल्रलाधयाॊकातॊकऩोराॊऩीन ऩमोधयाभ ्।कभनीमाॊरालण्माॊस्भेयभुखीॊसनम्न नासबॊसनतम्फनीभ ्।।स्तोि:-तऩद्ळारयणीत्लॊफशताऩिमसनलायणीभ ्। ब्रह्मरूऩधयाब्रह्मिारयणीॊप्रणभाम्मशभ ्।।नलिग्रबेदनी त्लॊफशनलऐद्वमाप्रदामनीभ ्। धनदावुखदा ब्रह्मिारयणी प्रणभाम्मशभ ्॥ळॊकयत्रप्रमात्लॊफशबुत्रक्त-भुत्रक्त दासमनी ळाॊसतदाभानदाब्रह्मिारयणी प्रणभाम्मशभ ्।कलि:-त्रिऩुया भेशदमेऩातुरराटे ऩातुळॊकयबासभनी। अऩाणावदाऩातुनेिोअधयोिकऩोरो॥ ऩॊिदळीकण्ठे ऩातुभध्मदे ळेऩातुभाशे द्वयीऴोडळीवदाऩातुनाबोगृशोिऩादमो। अॊग प्रत्मॊग वतत ऩातुब्रह्मिारयणी॥भॊि-ध्मान-कलि- का त्रलसध-त्रलधान वे ऩूजन कयने लारे व्मत्रक्त को अनॊत पर फक प्रासद्ऱ शोती शं । व्मत्रक्त भं तऩ, त्माग,वदािाय, वॊमभ जैवे वद् गुणं फक लृत्रद्ध शोती शं । ***
  • 9. 9 अक्टू फय 2012 तृतीमॊ िन्द्रघण्टा  सिॊतन जोळी नलयाि क तीवये फदन भाॊ क िन्द्रघण्टा स्लरूऩ का ऩूजन कयने का त्रलधान शं । िन्द्रघण्टा का स्लरूऩ ळाॊसतदामक े ेऔय ऩयभ कल्माणकायी शं । िन्द्रघण्टा क भस्तक ऩय घण्टे क आकाय का अधािन्द्र ळोसबत यशता शं । इव सरमे भाॊ को े ेिन्द्रघण्टा दे ली कशा जाता शं । िन्द्रघण्टा क दे श का यॊ ग स्लणा क वभान िभकीरा शं औय दे त्रल उऩस्स्थसत भं िायं तयप े ेअद्भत तेज फदखाई दे ता शं । ु भाॊ तीन नेि एलॊ दव बुजाए शं , स्जवभं कभर, धनुऴ-फाण, खड्ग, कभॊडर, तरलाय, त्रिळूर औय गदा आफद अस्त्र-ळस्त्र, फाण आफद वुळोसबत यशते शं । भाॊ क कठ भं वपद ऩुष्ऩं फक भारा औय ळीऴा ऩय यत्नजस़्डत भुकट ळोबामभान शं । े ॊ े ुिन्द्रघण्टा का लाशन सवॊश शं , इनकी भुद्रा मुद्ध क सरए तैमाय यशने की शोती शं । इनक घण्टे वी बमानक प्रिॊड ध्लसन वे े ेअत्मािायी दै त्म, दानल, याषव ल दै ल बमसबत यशते शं ।भॊि:त्रऩण्डज प्रलयारूढ़ा िण्डकोऩास्त्रकमुता। प्रवादॊ तनुते भशमॊ िन्दघण्टे सत त्रलश्रुता।। ै ाध्मान:-लन्दे लाॊसित राबामिन्द्राघाकृतळेखयाभ ्।सवॊशारूढादळबुजाॊिन्द्रघण्टामळस्लनीभ ्॥किनाबाॊभस्णऩुय स्स्थताॊततीम दगाा त्रिनेिाभ ्। ॊ ृ ुखॊग गदा त्रिळूर िाऩशयॊ ऩदभकभण्डरु भारा लयाबीतकयाभ ्।ऩटाम्फयऩरयधाॊनाभृदशास्माॊनानारॊकायबूत्रऴताभ ्। ुभॊजीय, शाय, कमूय फकफकस्णयत्नकण्डरभस्ण्डताभ ्॥ े ॊ ुप्रपल्र लॊदना त्रफफाधायाकातॊकऩोराॊतग किाभ ्। ु ुॊ ुकभनीमाॊरालण्माॊषीणकफटसनतम्फनीभ ्॥ ॊस्त्रोत:-आऩदद्रारयणी स्लॊफशआघाळत्रक्त: ळुबा ऩयाभ ्। भस्णभाफदसवफदधदािीिन्द्रघण्टे प्रणबाम्मशभ ्॥ ुिन्द्रभुखीइद्शदािी इद्श भॊि स्लरूऩणीभ ्। धनदािीआनॊददािीिन्द्रघण्टे प्रणभाम्मशभ ्॥नानारूऩधारयणीइछिाभमीऐद्वमादामनीभ ्। वौबाग्मायोग्मदामनीिन्द्रघण्टे प्रणभाम्मशभ ्॥कलि:-यशस्मॊ श्रुणलक्ष्मासभळैलेळीकभरानने। श्री िन्द्रघण्टास्मकलिॊवलासवत्रद्ध दामकभ ्॥ त्रफना न्मावॊत्रफना त्रलसनमोगॊत्रफना ळाऩोद्धायत्रफना ुशोभॊ। स्नानॊळौिाफदकनास्स्तश्रद्धाभािेणसवत्रद्धदभ ्॥ कसळष्माभकफटरामलॊिकामसनन्दाकामि। न दातव्मॊन दातव्मॊऩदातव्मॊकदासितभ ्॥ ॊ ु ुभॊि-ध्मान-कलि- का त्रलसध-त्रलधान वे ऩूजन कयने वे व्मत्रक्त का भस्णऩुय िि जाग्रत शो जाता शं । उऩावना वे व्मत्रक्तको वबी ऩाऩं वे भुत्रक्त सभरती शं उवे वभस्त वाॊवारयक आसध-व्मासध वे भुत्रक्त सभरती शं । इवक उऩयाॊत व्मत्रक्त को ेसियामु, आयोग्म, वुखी औय वॊऩन्न शोनता प्राद्ऱ शोती शं । व्मत्रक्त क वाशव एल त्रलयता भं लृत्रद्ध शोती शं । व्मत्रक्त स्लय भं ेसभठाव आती शं उवक आकऴाण भं बी लृत्रद्ध शोती शं । िन्द्रघण्टा को सान की दे ली बी भाना गमा शै । े
  • 10. 10 अक्टू फय 2012 ितुथा कष्भाण्डा ू  सिॊतन जोळी नलयाि क ितुथा फदन भाॊ क कष्भाण्डा स्लरूऩ का ऩूजन कयने का त्रलधान शं । अऩनी भॊद शॊ वी द्राया ब्रह्माण्ड को े े ूउत्ऩन्न फकमा था इवीक कायण इनका नाभ कष्भाण्डा दे ली यखा गमा। े ू ळास्त्रोक्त उल्रेख शं , फक जफ वृत्रद्श का अस्स्तत्ल नशीॊ था, तो िायं तयप सवप अॊधकाय फश था। उव वभम ाकष्भाण्डा दे ली ने अऩने भॊद वी शास्म वे ब्रह्माॊड फक उत्ऩत्रत्त फक। कष्भाण्डा दे ली वूयज क घेये भं सनलाव कयती शं । ू ू ेइवसरमे कष्भाण्डा दे ली क अॊदय इतनी ळत्रक्त शं , जो वूयज फक गयभी को वशन कय वक। कष्भाण्डा दे ली को जीलन फक ू े ं ूळत्रक्त प्रदान कयता भाना गमा शं । कष्भाण्डा दे ली का स्लरुऩ अऩने लाशन सवॊश ऩय वलाय शं , भाॊ अद्श बुजा लारी शं । उनक भस्तक ऩय यत्न जस़्डत ू ेभुकट वुळोसबत शं , स्जस्वे उनका स्लरूऩ अत्मॊम उज्जलर प्रसतत शोता शं । उनक शाथभं शाथं भं िभळ: कभण्डर, ु ेभारा, धनुऴ-फाण, कभर, ऩुष्ऩ, करळ, िि तथा गदा वुळोसबत यशती शं ।भॊि:वुयावम्ऩूणकरळॊ रूसधयाप्रुतभेल ि। दधाना शस्तऩद्माभ्माॊ कष्भाॊडा ळुबदास्तुभे।। ा ुध्मान:-लन्दे लाॊसित काभथेिन्द्राघाकृतळेखयाभ ्।सवॊशरूढाअद्शबुजा कष्भाण्डामळस्लनीभ ्॥ ुबास्लय बानु सनबाॊअनाशत स्स्थताॊितुथा दगाा त्रिनेिाभ ्। ुकभण्डरु िाऩ, फाण, ऩदभवुधाकरळिि गदा जऩलटीधयाभ ्॥ऩटाम्फयऩरयधानाॊकभनीमाकृ दशगस्मानानारॊकायबूत्रऴताभ ्। ुभॊजीय शाय कमूय फकफकणयत्नकण्डरभस्ण्डताभ ्। े ॊ ुप्रपल्र लदनाॊनारू सिककाॊकाॊत कऩोराॊतुॊग किाभ ्। ु ु ूकोराॊगीस्भेयभुखीॊषीणकफटसनम्ननासबसनतम्फनीभ ्॥स्त्रोत:-दगसतनासळनी त्लॊफशदारयद्राफदत्रलनासळनीभ ्। जमॊदाधनदाॊकष्भाण्डे प्रणभाम्मशभ ्॥ ु ा ूजगन्भाता जगतकिीजगदाधायरूऩणीभ ्। ियािये द्वयीकष्भाण्डे प्रणभाम्मशभ ्॥ ूिैरोक्मवुॊदयीत्लॊफशद:ख ळोक सनलारयणाभ ्। ऩयभानॊदभमीकष्भाण्डे प्रणभाम्मशभ ्॥ ु ूकलि:-शवयै भेसळय: ऩातुकष्भाण्डे बलनासळनीभ ्। शवरकयीॊनेिथ,शवयौद्ळरराटकभ ्॥ कौभायी ऩातुवलागािेलायाशीउत्तये तथा। ऩूले ूऩातुलैष्णली इन्द्राणी दस्षणेभभ। फदस्ग्दधवलािलकफीजॊवलादालतु॥ ै ूॊभॊि-ध्मान-कलि- का त्रलसध-त्रलधान वे ऩूजन कयने लारे व्मत्रक्त का अनाशत िि जाग्रत शो शं । भाॊ कष्भाण्डाका क ऩूजन ू ेवे वबी प्रकाय क योग, ळोक औय क्रेळ वे भुत्रक्त सभरती शं , उवे आमुष्म, मळ, फर औय फुत्रद्ध प्राद्ऱ शोती शं । े
  • 11. 11 अक्टू फय 2012 ऩॊिभ स्कदभाता ॊ  सिॊतन जोळी नलयाि के ऩाॊिलं फदन भाॊ क स्कदभाता स्लरूऩ का ऩूजन कयने का त्रलधान शं ।स्कदभाता े ॊ ॊ कभाय अथाात ् ुकासताकम फक भाता शोने क कायण, उन्शं स्कन्दभाता क नाभ वे जाना जाता शं । े े े सवॊश औय भमूय स्कदभाता क लाशन ॊ ेशं । दे ली स्कदभाता कभर क आवन ऩय ऩद्मावन फक भुद्रा भं त्रलयाजभान यशती शं , इवसरए उन्शं ऩद्मावन दे ली क नाभ वे ॊ े ेबी जाना जाता शं । स्कदभाता का स्लरुऩ िाय बुजा लारा शं । उनक दोनं शाथं भं कभरदर सरए शुए शं , उनकी दाफशनी ॊ ेतयप फक ऊऩय लारी बुजा भं ब्रह्मस्लरूऩ स्कन्द्र कभाय को अऩनी गोद भं सरमे शुए शं । औय स्कदभाता क दाफशने तयप ु ॊ ेफक नीिे लारी बुजा लयभुद्राभं शं । स्कदभाता मश स्लरुऩ ऩयभ कल्माणकायी भनागमा शं । ॊभॊि:सवॊशावानगता सनतमॊ ऩद्मासश्रतकयद्रमा। ळुबदास्तु वदा दे ली स्कन्दभाता मळस्स्लनी।।ध्मान:-लन्दे लाॊसित काभथेिन्द्राघाकृतळेखयाभ ्। सवॊशारूढाितुबजास्कन्धभातामळस्लनीभ ्॥ ुाधलरलणाात्रलळुद्ध ििस्स्थताॊऩिभ दगाा त्रिनेिाभ। अबम ऩदभमुग्भ कयाॊदस्षण ॊ ुउरूऩुिधयाभबजेभ ्॥ ऩटाम्फयऩरयधानाकृ दशसवमानानारॊकायबूत्रऴताभ ्। भॊजीय शाय कमूय ु ेफकफकस्णयत्नकण्डरधारयणीभ।। प्रबुल्रलॊदनाऩल्रलाधयाॊकाॊत कऩोराॊऩीन ऩमोधयाभ ्। ॊ ुकभनीमाॊरालण्माॊजारूत्रिलरीॊसनतम्फनीभ ्॥स्तोि:-नभासभ स्कन्धभातास्कन्धधारयणीभ ्। वभग्रतत्लवागयभऩायऩायगशयाभ ्॥सळप्रबाॊवभुल्लराॊस्पयछिळागळेखयाभ ्। रराटयत्नबास्कयाजगतप्रदीद्ऱबास्कयाभ ्॥ ुभशे न्द्रकश्मऩासिाताॊवनत्कभायवॊस्तुताभ ्। वुयावेयेन्द्रलस्न्दताॊमथाथासनभारादबुताभ ्॥ ुभुभषुसबत्रलासिस्न्तताॊत्रलळेऴतत्लभूसिताभ ्। नानारॊकायबूत्रऴताॊकृगेन्द्रलाशनाग्रताभ ्।। ुवुळद्धतत्लातोऴणाॊत्रिलेदभायबऴणाभ ्। वुधासभाककौऩकारयणीवुयेन्द्रलैरयघासतनीभ ्॥ ुळुबाॊऩष्ऩभासरनीवुलणाकल्ऩळास्खनीभ ्। तभोअन्कायमासभनीसळलस्लबालकासभनीभ ्॥ ुवशस्त्रवूमयास्जकाॊधनज्जमोग्रकारयकाभ ्। वुळद्धकार कन्दराॊवबडकृ न्दभज्जुराभ ्॥ ा ु ु ृप्रजासमनीप्रजालती नभासभभातयॊ वतीभ ्। स्लकभाधायणेगसतॊशरयप्रमछिऩालातीभ ्॥इनन्तळत्रक्तकास्न्तदाॊमळोथभुत्रक्तदाभ ्। ऩुन:ऩुनजागत्रद्धताॊनभाम्मशॊ वयासिाताभ॥ ुजमेद्वरयत्रिरािनेप्रवीददे त्रल ऩाफशभाभ ्॥कलि:-ऐॊ फीजासरॊकादे ली ऩदमुग्भधयाऩया। रृदमॊऩातुवा दे ली कासतकममुता॥ श्रीॊशीॊ शुॊ ऐॊ दे ली ऩूलस्माॊऩातुवलादा। वलााग भं वदा ाऩातुस्कन्धभाताऩुिप्रदा॥ लाणलाणाभृतेशुॊ पट् फीज वभस्न्लता। उत्तयस्मातथाग्नेिलारूणेनेितेअलतु॥ इन्द्राणी बैयलीिैलासवताॊगीिवॊशारयणी। वलादाऩातुभाॊ दे ली िान्मान्मावुफश फदषलै॥भॊि-ध्मान-कलि- का त्रलसध-त्रलधान वे ऩूजन कयने लारे व्मत्रक्त का त्रलळुद्ध िि जाग्रत शोता शं । व्मत्रक्त फक वभस्तइछिाओॊ की ऩूसता शोती शं एलॊ जीलन भं ऩयभ वुख एलॊ ळाॊसत प्राद्ऱ शोती शं ।
  • 12. 12 अक्टू फय 2012 ऴद्षभ ् कात्मामनी  सिॊतन जोळी नलयाि के िठं फदन भाॊ क कात्मामनी स्लरूऩ का ऩूजन कयने का त्रलधान शं । भशत्रऴा कात्मामन फक ऩुिी शोने क े ेकायण उन्शं कात्मामनी क नाभवे जाना जाता शं । कात्मामनी भाता का जन्भ आस्द्वन कृ ष्ण ितुदाळी को शुला था, जन्भ ेक ऩद्ळमाता भाॊ कात्मामनी ने ळुक्र वद्ऱभी, अद्शभी तथा नलभी तक तीन फदन तक कात्मामन ऋत्रऴ फक ऩूजा ग्रशण ेफकथी एलॊ त्रलजमा दळभी को भफशऴावुय का लध फकमा था। दे ली कात्मामनी का लणा स्लणा क वभान िभकीरा शं , इव कायण दे ली कात्मामनी का स्लरूऩ अत्मॊत शी बव्म ेएलॊ फदव्म प्रसतत शोता शं । कात्मामनी फक िाय बुजाएॊ शं । उनेक दाफशनी तयप का ऊऩय लारा शाथ अबम भुद्राभं शै , तथा ेनीिे लारा लयभुद्राभं, फाई तयप क ऊऩय लारे शाथ भं कभर ऩुष्ऩ वुळोसबत शं , नीिे लारे शाथभं तरलाय वुळोसबत यशती ेशं । कात्मामनी दे ली अऩने लाशन सवॊश त्रलयाजन शोती शं ।भॊि:िॊद्रशावोज्जलरकया ळाइरलयलाशना। कात्मामनी ळुबॊ दद्याद्दे ली दानलघासतनी।।ध्मान:-लन्दे लाॊसित भनोयथाथािन्द्राघाकृतळेखयाभ ्। सवॊशारूढितुबजाकात्मामनी मळस्लनीभ ्॥ ुास्लणालणााआसाििस्स्थताॊऴद्षम्दगाा त्रिनेिाभ। लयाबीतॊकयाॊऴगऩदधयाॊकात्मामनवुताॊबजासभ॥ ुऩटाम्फयऩरयधानाॊस्भेयभुखीॊनानारॊकायबूत्रऴताभ ्। भॊजीय शाय कमुयफकफकस्णयत्नकण्डरभस्ण्डताभ ्।। े ॊ ुप्रवन्नलॊदनाऩज्जलाधयाॊकातॊकऩोरातुगकिाभ ्। कभनीमाॊरालण्माॊत्रिलरीत्रलबूत्रऴतसनम्न नासबभ ्॥ ुस्तोि:-किनाबाॊ कयाबमॊऩदभधयाभुकटोज्लराॊ। स्भेयभुखीसळलऩत्नीकात्मामनवुतेनभोअस्तुते॥ ॊ ुऩटाम्फयऩरयधानाॊनानारॊकायबूत्रऴताॊ। सवॊशास्स्थताॊऩदभशस्ताॊकात्मामनवुतेनभोअस्तुते॥ऩयभदॊ दभमीदे त्रल ऩयब्रह्म ऩयभात्भा। ऩयभळत्रक्त,ऩयभबत्रक्त् कात्मामनवुतेनभोअस्तुते॥त्रलद्वकतॉ,त्रलद्वबतॉ,त्रलद्वशतॉ,त्रलद्वप्रीता। त्रलद्वासिताॊ,त्रलद्वातीताकात्मामनवुतेनभोअस्तुते॥काॊ फीजा, काॊ जऩानॊदकाॊ फीज जऩ तोत्रऴते। काॊ काॊ फीज जऩदावक्ताकाॊ काॊ वन्तुता॥काॊकायशत्रऴाणीकाॊ धनदाधनभावना। काॊ फीज जऩकारयणीकाॊ फीज तऩ भानवा॥काॊ कारयणी काॊ भूिऩूस्जताकाॊ फीज धारयणी। काॊ कीॊ कक क:ठ:ि:स्लाशारूऩणी॥ ूॊ ैकलि:-कात्मामनौभुख ऩातुकाॊ काॊ स्लाशास्लरूऩणी। रराटे त्रलजमा ऩातुऩातुभासरनी सनत्म वॊदयी॥ कल्माणी रृदमॊऩातुजमाबगभासरनी॥भॊि-ध्मान-कलि- का त्रलसध-त्रलधान वे ऩूजन कयने लारे व्मत्रक्त का आसा िि जाग्रत शोता शं । दे ली कात्मामनी केऩूजन वे योग, ळोक, बम वे भुत्रक्त सभरती शं । कात्मामनी दे ली को लैफदक मुग भं मे ऋत्रऴ-भुसनमं को कद्श दे ने लारे यष-दानल, ऩाऩी जील को अऩने तेज वे शी नद्श कय दे ने लारी भाना गमा शं ।
  • 13. 13 अक्टू फय 2012 वद्ऱभ कारयात्रि  सिॊतन जोळी नलयाि के वातलं फदन भाॊ क कारयात्रि स्लरूऩ का ऩूजन कयने का त्रलधान शं । कारयात्रि दे ली क ळयीय का यॊ ग े ेघने अॊधकाय फक तयश एकदभ कारा शं , सवय क फार पराकय यखने लारी शं । े ै कारयात्रि का स्लरुऩ तीन नेि लारा एलॊ गरे भं िभकने लारी भारा धायण कयने लारी शं । कारयात्रि फक आॊखंवे अस्ग्न की लऴाा शोती शै एलॊ नासवका क द्वाव भं अस्ग्न की बॊमकय ज्लाराएॊ सनकरती यशती शं । कारयात्रि क ऊऩय उठे े ेशुए दाफशने शाथ क लयभुद्रावे वबी भनुष्मो को लय प्रदान कयती शं । दाफशनी तयप का नीिे लारा शाथ अबमभुद्राभं शं । ेएक शाथ वे ळिुओॊ की गदा न ऩकडे शुए शं , दवये शाथ भं खड्ग-तरलाय ळस्त्र वे ळिु का नाळ कयने लारी कारयात्रि ूत्रलकट रूऩ भं अऩने लाशन गदा ब(गधे) त्रलयाजभान शं ।भॊि्एक लेधी जऩाकणाऩूया नग्ना खयास्स्थता। रम्फोद्षी कस्णकााकणी तैराभ्मक्तळयीरयणी।।लाभऩदोल्रवल्रोशरताकण्टक बूऴणा। लधानभूधध्लजा कृ ष्णा कारयात्रिबामॊकयी।। ाध्मान:-कयारलदनाॊ घोयाॊभक्तकळीॊितुबुताभ ्। कारयात्रिॊकयासरॊकाफदव्माॊत्रलद्युत्भारात्रलबूत्रऴताभ ्॥ ु े ाफदव्म रौशलज्रखड्ग लाभाघोध्लाकयाम्फुजाभ ्। अबमॊलयदाॊिैलदस्षणोध्र्लाघ:ऩास्णकाभ ्॥भशाभेघप्रबाॊश्माभाॊतथा िैऩगदाबारूढाॊ। घोयदॊ द्शाकायारास्माॊऩीनोन्नतऩमोधयाभ ्॥वुख प्रवन्न लदनास्भेयानवयोरूशाभ ्। एलॊ वॊसिमन्तमेत्कारयात्रिॊवलाकाभवभृत्रद्धधदाभ ्॥स्तोि:-शीॊ कारयात्रि श्रीॊकयारी िक्रीॊकल्माणी करालती।कारभाताकसरदऩाध्नीकभदीॊळकृ ऩस्न्लता॥काभफीजजऩान्दाकभफीजस्लरूत्रऩणी। कभसतघनीकरीनासतानसळनीकर कासभनी॥ ु ु ुक्रीॊशीॊ श्रीॊभॊिलणेनकारकण्टकघासतनी। कृ ऩाभमीकृ ऩाधायाकृ ऩाऩायाकृ ऩागभा॥कलि:-ॐ क्रीॊभं शदमॊऩातुऩादौश्रीॊकारयात्रि। रराटे वततॊऩातुदद्शग्रशसनलारयणी॥ यवनाॊऩातुकौभायी बैयली िषुणोभाभ ुशौऩृद्षेभशे ळानीकणोळॊकयबासभनी। लस्जातासनतुस्थानासबमासनिकलिेनफश। तासनवलाास्णभं दे ली वततॊऩातुस्तस्म्बनी॥भॊि-ध्मान-कलि- का त्रलसध-त्रलधान वे ऩूजन कयने लारे व्मत्रक्त का बानु िि जाग्रत शोता शं । कारयात्रि क ऩूजन वे ेअस्ग्न बम, आकाळ बम, बूत त्रऩळाि इत्मादी ळत्रक्तमाॊ कारयात्रि दे ली क स्भयण भाि वे शी बाग जाते शं , कारयात्रि का ेस्लरूऩ दे खने भं अत्मॊत बमानक शोते शुले बी वदै ल ळुब पर दे ने लारा शोता शं , इव सरमे कारयात्रि को ळुबॊकयी केनाभवे बी जाना जाता शं । कारयात्रि ळिु एलॊ दद्शं का वॊशाय कय ने लारी दे ली शं । ु
  • 14. 14 अक्टू फय 2012 अद्शभ भशागौयी  सिॊतन जोळी नलयाि क आठलं फदन भाॊ क भशागौयी स्लरूऩ का ऩूजन कयने का त्रलधान शं । भशागौयी स्लरूऩ उज्जलर, कोभर, े ेद्वेतलणाा तथा द्वेत लस्त्रधायी शं । भशागौयी भस्तक ऩय िन्द्र का भुकट धायण फकमे शुए शं । कास्न्तभस्ण क वभान कास्न्त ु ेलारी दे ली जो अऩनी िायं बुजाओॊ भं िभळ् ळॊख, िि, धनुऴ औय फाण धायण फकए शुए शं , उनक कानं भं यत्न ेजफडतकण्डर स्झरसभराते यशते शं । भशागौयीलृऴब क ऩीठ ऩय त्रलयाजभान शं । भशागौयी गामन एलॊ वॊगीत वे प्रवन्न शोने ु ेलारी भशागौयी भाना जाता शं ।भॊि:द्वेते लृऴे वभरूढ़ा द्वेताम्फयाधया ळुसि:। भशागौयी ळुबॊ दद्यान्भशादे लप्रभोददा।।ध्मान:-लन्दे लाॊसित काभाथेिन्द्राघाकृतळेखयाभ ्।सवॊशारूढाितुबुजाभशागौयीमळस्लीनीभ ्॥ ाऩुणेन्दसनबाॊगौयी वोभलिस्स्थताॊअद्शभ दगाा त्रिनेिभ। ु ुलयाबीसतकयाॊत्रिळूर ढभरूधयाॊभशागौयीॊबजेभ ्॥ऩटाम्फयऩरयधानाभृदशास्मानानारॊकायबूत्रऴताभ ्। ुभॊजीय, काय, कमूय, फकफकस्णयत्न कण्डर भस्ण्डताभ ्॥ े ॊ ुप्रपल्र लदनाॊऩल्रलाधयाॊकाॊत कऩोराॊिलोक्मभोशनीभ ्। ु ैकभनीमाॊरालण्माॊभणाराॊिॊदन गन्ध सरद्ऱाभ ्॥ ृस्तोि:-वलावॊकट शॊ िीत्लॊफशधन ऐद्वमा प्रदामनीभ ्।सानदाितुलदभमी,भशागौयीप्रणभाम्मशभ ्॥ ेवुख ळाॊसत दािी, धन धान्म प्रदामनीभ ्।डभरूलाघत्रप्रमा अघा भशागौयीप्रणभाम्मशभ ्॥िैरोक्मभॊगरात्लॊफशताऩिमप्रणभाम्मशभ ्।लयदािैतन्मभमीभशागौयीप्रणभाम्मशभ ्॥कलि:-ओॊकाय: ऩातुळीऴोभाॊ, शीॊ फीजॊभाॊ रृदमो। क्रीॊफीजॊवदाऩातुनबोगृशोिऩादमो॥ रराट कणो,शूॊ, फीजॊऩात भशागौयीभाॊ नेि घ्राणं।कऩोर सिफुकोपट् ऩातुस्लाशा भाॊ वलालदनो॥भॊि-ध्मान-कलि- का त्रलसध-त्रलधान वे ऩूजन कयने लारे व्मत्रक्त का वोभिि जाग्रत शोता शं । भशागौयी क ऩूजन वे व्मत्रक्त ेक वभस्त ऩाऩ धुर जाते शं । भशागौयी क ऩूजन कयने लारे वाधन क सरमे भाॊ अन्नऩूणाा क वभान, धन, लैबल औय े े े ेवुख-ळाॊसत प्रदान कयने लारी एलॊ वॊकट वे भुत्रक्त फदराने लारी दे ली भशागौयी शं ।
  • 15. 15 अक्टू फय 2012 नलभ ् सवत्रद्धदािी  सिॊतन जोळी नलयाि क नौलं फदन भाॊ क सवत्रद्धदािी स्लरूऩ का ऩूजन कयने का त्रलधान शं । े ेदे ली सवत्रद्धदािी का स्लरूऩ कभर आवन ऩय त्रलयास्जत, िाय बुजा लारा, दाफशनी तयप क नीिे लारे शाथ भं िि, ऊऩय ेलारे शाथ भं गदा, फाई तयप वे नीिे लारे शाथ भं ळॊख औय ऊऩय लारे शाथ भं कभर ऩुष्ऩ वुळोसबत यशते शं ।भॊि : सवद्धगॊधलामषाद्यैयवुयैययभयै यत्रऩ। वेव्मभाना वदा बूमात सवत्रद्धदा सवत्रद्धदासमनी।।ध्मान:-लन्दे लाॊसितभनयोयाथेिन्द्राघाकृतळेखयाभ ्।कभरस्स्थताितुबजासवत्रद्ध मळस्लनीभ ्॥ ुास्लणाालणाासनलााणििस्स्थतानलभ ् दगाा त्रिनेिाभ। ुळॊख, िि, गदा ऩदभधया सवत्रद्धदािीबजेभ ्॥ऩटाम्फयऩरयधानाॊवुशास्मानानारॊकायबूत्रऴताभ ्।भॊजीय, शाय कमूय, फकफकस्णयत्नकण्डरभस्ण्डताभ ्॥ े ॊ ुप्रपल्र लदनाऩल्रलाधयाकाॊत कऩोराऩीनऩमोधयाभ ्। ुकभनीमाॊरालण्माॊषीणकफटॊ सनम्ननासबॊसनतम्फनीभ ्॥स्तोि:-किनाबा ळॊखििगदाभधयाभुकटोज्लराॊ। स्भेयभुखीसळलऩत्नीसवत्रद्धदािीनभोअस्तुते॥ ॊ ुऩटाम्फयऩरयधानाॊनानारॊकायबूत्रऴताॊ। नसरनस्स्थताॊऩसरनाषीॊसवत्रद्धदािीनभोअस्तुते॥ऩयभानॊदभमीदे त्रल ऩयब्रह्म ऩयभात्भा। ऩयभळत्रक्त,ऩयभबत्रक्तसवत्रद्धदािीनभोअस्तुते॥त्रलद्वकतीॊत्रलद्वबतॉत्रलद्वशतीॊत्रलद्वप्रीता। त्रलद्वसिातात्रलद्वतीतासवत्रद्धदािीनभोअस्तुते॥बुत्रक्तभुत्रक्तकायणीबक्तकद्शसनलारयणी। बलवागय तारयणी सवत्रद्धदािीनभोअस्तुते।।धभााथकाभप्रदासमनीभशाभोश त्रलनासळनी। भोषदासमनीसवत्रद्धदािीसवत्रद्धदािीनभोअस्तुते॥कलि:-ओॊकाय: ऩातुळीऴोभाॊ, ऐॊ फीजॊभाॊ रृदमो। शीॊ फीजॊवदाऩातुनबोगृशोिऩादमो॥ रराट कणोश्रीॊफीजॊऩातुक्रीॊफीजॊभाॊ नेि घ्राणो।कऩोर सिफुकोशवौ:ऩातुजगत्प्रवूत्मैभाॊ वला लदनो॥भॊि-ध्मान-कलि- का त्रलसध-त्रलधान वे ऩूजन कयने लारे व्मत्रक्त का सनलााण िि जाग्रत शोता शं । सवत्रद्धदािी क ऩूजन वे ेव्मत्रक्त फक वभस्त काभनाओॊ फक ऩूसता शोकय उवे ऋत्रद्ध, सवत्रद्ध फक प्रासद्ऱ शोती शं । ऩूजन वे मळ, फर औय धन फक प्रासद्ऱकामो भं िरे आ यशे फाधा-त्रलध्न वभाद्ऱ शो जाते शं । व्मत्रक्त को मळ, फर औय धन फक प्रासद्ऱ शोकय उवे भाॊ फक कृ ऩा वेधभा, अथा, काभ औय भोष फक बी प्रासद्ऱ स्लत् शो जाती शं ।
  • 16. 16 अक्टू फय 2012 ळायदीम नलयाि व्रत वे वुख-वभृत्रद्ध दामक शं  सिॊतन जोळी नलयाि को ळत्रक्त की उऩावना का भशाऩला भाना गमा जो व्मत्रक्त दगाावद्ऱळतीक भूर वॊस्कृ त भं ऩाठ कयने भं ु ेशं । भाकण्डे मऩुयाण क अनुळाय दे ली भाशात्म्म भं स्लमॊ भाॊ ा े अवभथा शं तो उव व्मत्रक्त को वद्ऱद्ऴोकी दगाा को ऩढने वे ुजगदम्फा का लिन शं -। राब प्राद्ऱ शोता शं । क्मोफक वात द्ऴोकं लारे इव स्तोि भंळयत्कारे भशाऩूजा फिमतेमा िलात्रऴकी। ा श्रीदगाावद्ऱळती का वाय वभामा शुला शं । ुतस्माॊभभैतन्भाशात्म्मॊश्रत्लाबत्रक्तवभस्न्लत:॥ ु जो व्मत्रक्त वद्ऱद्ऴोकी दगाा का बी न कय वक लश कलर ु े े नलााण भॊि का असधकासधक जऩ कयं ।वलााफाधात्रलसनभुक्तोधनधान्मवुतास्न्लत:। ाभनुष्मोभत्प्रवादे नबत्रलष्मसतन वॊळम:॥ दे ली क ऩूजन क वभम इव भॊि का जऩ कये । े ेअथाात् ळयद ऋतु क नलयािभं े जमन्ती भङ्गराकारी बद्रकारीजफ भेयी लात्रऴाक भशाऩूजा शोती कऩासरनी।शं , उव कार भं जो भनुष्म भेये दगाा षभा सळला धािी स्लाशा ुभाशात्म्म (दगाावद्ऱळती) ु को स्लधानभोऽस्तुते॥बत्रक्तऩूलकवुनेगा, लश भनुष्म भेये ा दे ली वे प्राथाना कयं -प्रवाद वे वफ फाधाओॊ वे भुक्तशोकय धन-धान्म एलॊ ऩुि वेवम्ऩन्न शो जामेगा। त्रलधेफशदे त्रल कल्माणॊत्रलधेफशऩयभाॊ - सश्रमभ ्।रूऩॊदेफशजमॊदेफशमळोदे फशफद्र नलयाि भं दगाावद्ऱळती ु ऴोजफश॥को ऩढने मा वुनने वे दे लीअत्मन्त प्रवन्न शोती शं एवा अथाात् शे दे त्रल! आऩ भेयाळास्त्रोक्त लिन शं । वद्ऱळती का कल्माण कयो। भुझे श्रेद्ष वम्ऩत्रत्तऩाठ उवकी भूर बाऴा वॊस्कृ त भं प्रदान कयो। भुझे रूऩ दो, जम दो,कयने ऩय शी ऩूणा प्रबाली शोता शं । मळ दो औय भेये काभ-िोध इत्माफद ळिुओॊ का नाळ कयो। व्मत्रक्त कोश्रीदगाावद्ऱळती को बगलती दगाा ु ुका शी स्लरूऩ वभझना िाफशए। त्रलद्रानो क भतानुळाय वम्ऩूणा ेऩाठ कयने वे ऩूला श्रीदगाावद्ऱळती फक ऩुस्तक का इव भॊि वे ु नलयािव्रत का ऩारन कयने भं जो रोगं अवभथा शो लशऩॊिोऩिायऩूजन कयं - नलयाि क वात यािी,ऩाॊि यािी, दं यािी औय एक यािी े का व्रत कयक बी त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । नलयाि ेनभोदे व्मैभशादे व्मैसळलामैवततॊनभ:। भं नलदगाा की उऩावना कयने वे नलग्रशं का प्रकोऩ स्लत् ुनभ:प्रकृ त्मैबद्रामैसनमता:प्रणता:स्भताभ ्॥ ळाॊत शो जाता शं ।
  • 17. 17 अक्टू फय 2012 नलयाि व्रत की वयर त्रलसध?  स्लस्स्तक.ऎन.जोळी नल फदनं तक िरने लारे इव ऩला ऩय शभ व्रत यखकय भाॊ क नौ अरग-अरग रूऩ की ऩूजा की जाती शं । इव दौयान घय भं ेफकमा जाने लारा त्रलसधलत शलन बी स्लास््म क सरए अत्मॊत राबप्रद शं । शलन वे आस्त्भक ळाॊसत औय लातालयण फक ळुत्रद्ध क े ेअराला घय नकायात्भक ळत्रक्तमं का नाळ शो कय वकायात्भक ळत्रक्तमो का प्रलेळ शोता शं ।नलयाि व्रतनलयाि भं नल याि वे रेकय वात यािी,ऩाॊि यािी, दं यािी औय एक यािी व्रत कयने का बी त्रलधान शं ।नलयाि व्रत क धासभाक भशत्ल क अराला लैसासनक भशत्ल शं , जो स्लास््म की दृत्रद्श वे कापी राबदामक शोता शं । व्रत कयने वे े ेळयीय भं िुस्ती-पतॉ फनी यशती शं । योजाना कामा कयने लारे ऩािन तॊि को बी व्रत क फदन आयाभ सभरता शं । फछिे, फुजुग, ु े ाफीभाय, गबालती भफशरा को नलयाि व्रत का नशीॊ यखना िाफशए।नलयाि व्रत वे वॊफॊसधत उऩमोगी वुझाल  व्रत क दौयान असधक वभम भौन धायण कयं । े  व्रत क ळुरुआत भं बूख कापी रगती शं । ऐवे भं नीॊफू ऩानी त्रऩमा जा वकता शै । इववे बूख को सनमॊत्रित यखने भं भदद े सभरेगी।  जशा तक वॊबल शो सनजारा उऩलाव न यखं। इववे ळयीय भं ऩानी फक कभी शो जाती शं औय अऩसळद्श ऩदाथा ळयीय क फाशय े नशीॊ आ ऩाते। इववे ऩेट भं जरन, कब्ज, वॊिभण, ऩेळाफ भं जरन जैवी कई वभस्माएॊ ऩैदा शो वकती शं ।  एक वाथ खूफ वाया ऩानी ऩीने क फजाए फदन भं कई फाय नीॊफू ऩानी त्रऩएॊ। े  ज्मादातय रोगो को उऩलाव भं अक्वय कब्ज की सळकामत शो जाती शं । इवसरए व्रत ळुरू कयने क ऩशरे त्रिपरा, आॊलरा, े ऩारक का वूऩ मा कये रे क यव इत्माफद ऩदाथो का वेलन कयं । इववे ऩेट वाप यशता शै । े  व्रत क दौयान िाम, कापी का वेलन कापी फढ़ जाता शै । इव ऩय सनमॊिण यखं। ेव्रत क दौयान कौनवे खाद्य ऩदाथा ग्रशण कयं ? े  व्रत भं अन्न का वेलन लस्जात शं । स्जव कायण ळयीय भं ऊजाा की कभी शो जाती शं ।  अनाज फक जगश परं ल वस्ब्जमं का वेलन फकमा जा वकता शं । इववे ळयीय को जरुयी ऊजाा सभरती शं ।  वुफश क वभम आरू को फ्राई कयक खामा जा वकता शं । आरू भं काफोशाइड्रे ट प्रिुय भािा भं शोता शै । इव सरए आरू े े खाने वे ळयीय को ताकत सभरती शै ।  वुफश एक सगराव दध त्रऩरं। दोऩशय क वभम पर मा जूव रं। ळाभ को िाम ऩी वकते शं । ू े  कई रोग व्रत भं एक फाय शी बोजन कयते शं । ऐवे भं एक सनस्द्ळत अॊतयार ऩय पर खा वकते शं । यात क खाने भं सवॊघािे े क आटे वे फने ऩकलान खा वकते शं । े
  • 18. 18 अक्टू फय 2012 दे ली कृ ऩा वे भनोलाॊस्छित कामो सवत्रद्ध  स्लस्स्तक.ऎन.जोळीदे ली बागलत क आठलं स्कध भं दे ली उऩावना का त्रलस्ताय वे लणान शै । दे ली का ऩूजन-अिान-उऩावना-वाधना इत्माफद क े ॊ ेऩद्ळमात दान दे ने ऩय भनुष्म क सरमे रोक औय ऩयरोक दोनं वुख दे ने लारे शोते शं । े  प्रसतऩदा सतसथ क फदन दे ली का ऴोडळेऩिाय वे ऩूजन कयक नैलेद्य क रूऩ भं दे ली को गाम का घृत (घी) अऩाण कयना े े े िाफशए। भाॊ को ियणं िढ़ामे गमे घृत को ब्राम्शणं भं फाॊटने वे योगं वे भुत्रक्त सभरती शै ।  फद्रतीमा सतसथ क फदन दे ली को िीनी का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। िीनी का बोग रागाने वे व्मत्रक्त दीघाजीली े शोता शं ।  तृतीमा सतसथ क फदन दे ली को दध का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। दध का बोग रागाने वे व्मत्रक्त को दखं वे े ू ू ु भुत्रक्त सभरती शं ।  ितुथॉ सतसथ क फदन दे ली को भारऩुआ बोग रगाकय दान कयना िाफशए। भारऩुए का बोग रागाने वे व्मत्रक्त फक े त्रलऩत्रत्त का नाळ शोता शं ।  ऩॊिभी सतसथ क फदन दे ली को करे का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। करे का बोग रागाने वे व्मत्रक्त फक फुत्रद्ध, े े े त्रललेक का त्रलकाव शोता शं । व्मत्रक्त क ऩरयलायीकवुख वभृत्रद्ध भं लृत्रद्ध शोती शं । े  ऴद्षी सतसथ क फदन दे ली को भधु (ळशद, भशु, भध) का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। भधु का बोग रागाने वे े व्मत्रक्त को वुॊदय स्लरूऩ फक प्रासद्ऱ शोती शं ।  वद्ऱभी सतसथ क फदन दे ली को गुि का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। गुि का बोग रागाने वे व्मत्रक्त क वभस्त े े ळोक दय शोते शं । ू  अद्शभी सतसथ क फदन दे ली को श्रीपर (नारयमर) का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। गुि े का बोग रागाने वे व्मत्रक्त क वॊताऩ दय शोते शं । े ू  नलभी सतसथ क फदन दे ली को धान क राले का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। धान क राले का बोग रागाने वे े े े व्मत्रक्त क रोक औय ऩयरोक का वुख प्राद्ऱ शोता शं । े बाग्म रक्ष्भी फदब्फी वुख-ळास्न्त-वभृत्रद्ध की प्रासद्ऱ क सरमे बाग्म रक्ष्भी फदब्फी :- स्जस्वे धन प्रसद्ऱ, त्रललाश मोग, े व्माऩाय लृत्रद्ध, लळीकयण, कोटा किेयी क कामा, बूतप्रेत फाधा, भायण, वम्भोशन, तास्न्िक े फाधा, ळिु बम, िोय बम जेवी अनेक ऩये ळासनमो वे यषा शोसत शै औय घय भे वुख वभृत्रद्ध फक प्रासद्ऱ शोसत शै , बाग्म रक्ष्भी फदब्फी भे रघु श्री फ़र, शस्तजोडी (शाथा जोडी), सवमाय सवन्गी, त्रफस्ल्र नार, ळॊख, कारी-वफ़द-रार गुॊजा, इन्द्र जार, भाम जार, ऩातार तुभडी े जेवी अनेक दरब वाभग्री शोती शै । ु ा भूल्म:- Rs. 910 वे Rs. 8200 तक उप्रब्द्ध गुरुत्ल कामाारम वॊऩक : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785 ा c
  • 19. 19 अक्टू फय 2012 वयर त्रलसध-त्रलधान वे ळायदीम नलयाि व्रत उऩावना  सिॊतन जोळी आस्द्वन ळुक्र प्रसतऩदा, भॊगरलाय, 16 अक्टू फय को ळायदीम नलयाि आयॊ ब शो यशे शं । नलयाि भं भाॊ दगाा दे ली का आह्लान, ुस्थाऩना ल ऩूजन का वभम प्रात:कार शोता शं । इवीसरए फद्रस्लबाल कन्मा रग्न भं घट स्थाऩना का वभम वे वॊफॊसधत जानकायीइव अॊक भं उऩरब्ध शं । िय रग्न क िौघस़्डए अथला असबस्जत ेकार भं बी घट स्थाऩना की जा वकती शै । ळायदीम नलयाि दे ली गणेळ रक्ष्भी मॊिउऩावना क सरए असधक असत उत्तभ भाना गमा शै । े जो बक्त नलयाि क दौयान े दे त्रल का ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे ऩूजन कयना िाशं , उन्शं नलयाि क एक फदन ऩूला वबी ेऩूजन वाभग्री को एकत्रित कय रेना िाफशमे। स्जव स्थान ऩय भाॊ बगलती को स्थात्रऩत कयना शो लशाॊभॊडऩ फनाने क सरमे उव स्थान को वभतर फनारे, उव स्थान ेमा बूसभको सभट्टी मा गाम क गोफय वे रीऩकय बूसभ का ेळुत्रद्धकयण कय रं। त्रलद्रानो क भत अनुळाय प्रसतभा स्थात्रऩत कयने शे तु भॊडऩ े प्राण-प्रसतत्रद्षत गणेळ रक्ष्भी मॊि को अऩने घय-दकान- ुनौ शाथ रॊफा औय वात शाथ िौिा फनाने का ळास्त्रोक्त त्रलधान शै । ओफपव-पक्टयी भं ऩूजन स्थान, गल्रा मा अरभायी ैभॊडऩ फनाकय उवे त्रलसबन्न ळृॊगाय वाभग्री वे वुवस्ज्जत कयं । भं स्थात्रऩत कयने व्माऩाय भं त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोताभाॊ बगलती की प्रसतभा स्थात्रऩत कयने क सरए भॊडऩ क भध्मभ भं े े शं । मॊि क प्रबाल वे बाग्म भं उन्नसत, भान-प्रसतद्षा ेिाय शाथ रॊफी औय एक शाथ ऊिी लेदी फनारं। उव लेदी ऩय ये ळभी ॊ एलॊ व्माऩय भं लृत्रद्ध शोती शं एलॊ आसथाक स्स्थभं वुधायरार लस्त्र त्रफिारे। शोता शं । गणेळ रक्ष्भी मॊि को स्थात्रऩत कयने वेदे ली प्रसतभा शे तु भाॊ बगलती की प्रसतभा िाय बुजा लारी एलॊ सवॊश बगलान गणेळ औय दे ली रक्ष्भी का वॊमुक्त आळीलाादऩय वलायी फकमे शुए शो लैवी शी प्रसतभा स्थात्रऩत कयना उत्तभ शोता प्राद्ऱ शोता शं । Rs.550 वे Rs.8200 तकशं । इव क ऩीिे का आध्मास्त्भक सवद्धाॊत शोता शं की बक्त की ेिायं फदळाओॊ वे वुयषा शो वक औय उवे वभस्त प्रकाय क वुख-वभृत्रद्ध ल ळाॊसत प्राद्ऱ शो। े े करळ स्थाऩीत कयने शे तु भॊि उछिायण कयते शुए तीथा स्थरं क जर का आह्लान कय करळ की स्थाऩना कयनी ेिाफशमे।शलन लेदी त्रिकोण फनाएॊ औय उवऩय जुआये उगाएॊ। ऩूजन वाभग्री: िॊदन, अगरू, कऩूय, कभर, अळोक, वुगॊसधत ऩुष्ऩ।नलयाि व्रत:नलयाि का व्रत वबी लगा क बक्तो क सरए उत्तभ शोता शै । मफद कोई बक्त नौ फदन तक व्रत न यख वक तो दो-यािी क व्रत अलश्म े े ं ेकयने िाफशमे अथाात ऩशरा औय अॊसतभ नलयाि का व्रत कयना उऩमुक्त शोता शं ।वयर ऩूजन त्रलसध: वलाप्रथभ बक्त श्री गणेळजी का आह्लान कयने क फाद अऩनी करदे ली का ऩूजन कयना िाफशमे। उवक फाद भाता े ु ेबगलती का ऩूजन अऩने कर की ऩयॊ ऩया क अनुवाय कयना िाफशमे। ु ेनलयाि भं दगाा वद्ऱळती का ऩाठ ऩूणा ऩाठ कयना असत उत्तभ शोता शं । ु
  • 20. 20 अक्टू फय 2012 आस्द्वन नलयात्रि घट स्थाऩना भुशूत, त्रलसध-त्रलधान (16-अक्टू फय-2012) ा  स्लस्स्तक.ऎन.जोळी आस्द्वन ळुक्र प्रसतऩदा अथाात नलयािी का ऩशरा शे तु उत्तभ भाना जाता शं । शं । इव सरमे वूमोदम केफदन। इवी फदन वे शी आस्द्वनी नलयाि का प्रायॊ ब शोता ऩद्ळमात 06:45:28 फजे क फाद वे शी करळ (घट) की ेशं । जो अस्द्वन ळुक्र नलभी को वभाद्ऱ शोते शं , इन नौ स्थाऩना कयना ळुबदामक यशे गा।फदनं दे त्रल दगाा की त्रलळेऴ आयाधना कयने का त्रलधान ु इव लऴा प्रसतऩदा सतसथ दोऩशय 02:17:56 फजेशभाये ळास्त्रो भं फतामा गमा शं । ऩयॊ तु इव लऴा 2012 तक यशने क कायण धट स्थाऩना इव वभम वे ऩूला ेतृसतमा सतथी का षम शोने क कायण नलयाि नौ फदन की े कयना उत्तभ यशे गा। रेफकन ळास्त्रोक्त त्रलधान वे प्रसतऩदाजगश आठ फदनो क शंगे। े सतसथ वोभलाय 15 अक्टू फय-2012 को वॊध्मा 17:32:20 ऩायॊ ऩरयक ऩद्धसत क अनुळाव नलयात्रि क ऩशरे े ेफदन घट अथाात करळ की स्थाऩना कयने का त्रलधान शं । वे प्रायॊ ब शोकय भॊगरलाय 16-अक्टू फय-2012 को दोऩशयइव करळ भं ज्लाये (अथाात जौ औय गेशूॊ ) फोमा जाता शै । 02:17:56 फजे तक यशने वे प्रसतऩदा सतसथ वूमोदमघट स्थाऩनकी ळास्त्रोक्त त्रलसध इव प्रकाय शं । कासरन सतसथ शोने वे वॊऩूणा फदन प्रसतऩदा भाना जामेगा।घट स्थाऩना आस्द्वन प्रसतऩदा क फदन फक जाती े घट स्थाऩना क ळुब भुशुता वुफश 9.30 ेशं । वे 11 फजे, वुफश 11.30 वे दोऩशय 12.42 घट स्थाऩना शे तु सििा नषि को तक असबस्जत भुशुत, वुफश 10.59 फजे ालस्जात भाना गमा शं । (सििा नषि वे दोऩशय 1.05 फजे तक लृस्ष्िि16-अक्टू फय-2012 को प्रात् रग्न भुशुत, दोऩशय 2.52 वे ळाभ ा06:45:28 फजे तक यशे गा।) घट 4.23 तक कब रग्न भुशुता औय ॊुस्थाऩना भं सििा नषि को सनऴेध 7.28 फजे वे यात्रि 9.24 तक लृऴबभाना गमा शं । अत् घट स्थाऩना रग्न भुशुात यशे गा। कि ु जानकायइववे ऩद्ळमात कयना ळुब शोता शं । त्रलद्रानो का भत शं की नलयाि स्लमॊ घट स्थाऩना शे तु वफवे ळुब अऩने आऩ भं स्लमॊ सवद्ध भुशुता शोने केअसबस्जत भुशुता भाना गमा शं । जो 16- कायण इव सतसथ भं व्माद्ऱ वभस्त दोऴअक्टू फय-2012 को वुफश 11:30 वे दोऩशय 12:42 स्लत् नद्श शो जाते शं इव सरए घट स्थाऩना प्रसतऩदा केफजे क फीि शै । े फदन फकवी बी वभम कय वकते शं । त्रलद्रनो क भत वे इव लऴा ळुक्र प्रसतऩदा वे ळुरू े मफद ऎवे मोग फन यशे शो, तो घट स्थाऩनाशोने लारे ळायदीम नलयाि भं वूमोदमी नषि सििा यशे गा दोऩशय भं असबस्जत भुशूता मा अन्म ळुब भुशूता भं कयनाजो प्रात् 06:45:28 फजे वभाद्ऱ शो जामेगा औय उवके उत्तभ यशता शं ।ऩद्ळमात त्रलळाखा नषि यशे गा। त्रलळाखा नषि को ऩूजन
  • 21. 21 अक्टू फय 2012करळ स्थाऩना शे तु अन्म ळुब भुशूता प्रसतभाका ऴोडळोऩिायऩूलक ा ऩूजन कयं । इवके फाद राब भुशूता वुफश १०:30 वे 12 फजे तक श्रीदगाावद्ऱळती का वॊऩुट अथला वाधायण ऩाठ कयना ु अभृत भुशूता फदन 12.00 वे 01.30 फजे तक िाफशए। ऩाठ की ऩूणााशुसत क फदन दळाॊळ शलन अथला े ळुब भुशूता वुफश 03.00 वे 04.30 फजे तक दळाॊळ ऩाठ कयना िाफशए। असबस्जत भुशुता वुफश 11.30 वे दोऩशय 12.42 फजे तक घट स्थाऩना क वाथ दीऩक की स्थाऩना बी की े लृस्ष्िक रग्न वुफश 10.59 फजे वे दोऩशय 1.05 फजेतक जाती शै । ऩूजा क वभम घी का दीऩक जराएॊ तथा उवका े कब रग्न दोऩशय 2.52 वे ळाभ 4.23 फजे तक ुॊ गॊध, िालर, ल ऩुष्ऩ वे ऩूजन कयना िाफशए। लृऴब रग्न 7.28 फजे वे यात्रि 9.24 फजे तक ऩूजन क वभम इव भॊि का जऩ कयं - ेक भुशूता घट स्थाऩना का श्रेद्ष भुशूता यशं गे। े बो दीऩ ब्रह्मरूऩस्त्लॊ ह्यन्धकायसनलायक। घट स्थाऩना शे तु वलाप्रथभ स्नान इत्माफद के इभाॊ भमा कृ ताॊ ऩूजाॊ गृह्रॊस्तेज: प्रलधाम।।ऩद्ळमात गाम क गोफय वे ऩूजा स्थर का रेऩन कयना े नोट: उऩयोक्त लस्णात भुशूता को वूमोदम कासरन सतसथ मािाफशए। घट स्थाऩना शे तु ळुद्ध सभट्टी वे लेदी का सनभााण वभम का सनयधायण नई फदल्री क अषाॊळ ये खाॊळ क अनुळाय े ेकयना िाफशए, फपय उवभं जौ औय गेशूॊ फोएॊ तथा उव ऩय आधुसनक ऩद्धसत वे फकमा गमा शं । इव त्रलऴम भं त्रलसबन्न भतअऩनी इछिा क अनुवाय सभट्टी, ताॊफे, िाॊदी मा वोने का े एलॊ वूमोदम सात कयने का तयीका सबन्न शोने क कायण ेकरळ स्थात्रऩत कयना िाफशए। वूमोदम वभम का सनयधायण सबन्न शो वकता शं । वूमोदम मफद ऩूणा त्रलसध-त्रलधान वे घट स्थाऩना कयना शो वभम का सनयधायण स्थासनम वूमोदम क अनुळाय फश कयना ेतो ऩॊिाॊग ऩूजन (अथाात गणेळ-अॊत्रफका, लरुण, उसित शोगा।ऴोडळभातृका, वद्ऱघृतभातृका, नलग्रश आफद दे लं का इव सरए फकवी बी भुशूता का िमन कयने वे ऩूला फकवीऩूजन) तथा ऩुण्माशलािन (भॊिंछिाय) त्रलद्रान ब्राह्मण द्राया त्रलद्रान ल जानकाय वे इव त्रलऴम भं वराश त्रलभळा कयनाकयाएॊ अथला अभथाता शो, तो स्लमॊ कयं । उसित यशे गा। ऩद्ळमात दे ली की भूसता स्थात्रऩत कयं तथा दे ली दगाा फीवा मॊि ु ळास्त्रोक्त भत क अनुळाय दगाा फीवा मॊि दबााग्म को दय कय व्मत्रक्त क वोमे शुले बाग्म को जगाने लारा भाना गमा े ु ु ू े शं । दगाा फीवा मॊि द्राया व्मत्रक्त को जीलन भं धन वे वॊफॊसधत वॊस्माओॊ भं राब प्राद्ऱ शोता शं । जो व्मत्रक्त आसथाक ु वभस्मावे ऩये ळान शं, लश व्मत्रक्त मफद नलयािं भं प्राण प्रसतत्रद्षत फकमा गमा दगाा फीवा मॊि को स्थासद्ऱ कय रेता ु शं , तो उवकी धन, योजगाय एलॊ व्मलवाम वे वॊफॊधी वबी वभस्मं का ळीघ्र शी अॊत शोने रगता शं । नलयाि क फदनो भं े प्राण प्रसतत्रद्षत दगाा फीवा मॊि को अऩने घय-दकान-ओफपव-पक्टयी भं स्थात्रऩत कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता ु ु ै शं , व्मत्रक्त ळीघ्र शी अऩने व्माऩाय भं लृत्रद्ध एलॊ अऩनी आसथाक स्स्थती भं वुधाय शोता दे खंगे। वॊऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत एलॊ ऩूणा िैतन्म दगाा फीवा मॊि को ळुब भुशूता भं अऩने घय-दकान-ओफपव भं स्थात्रऩत कयने वे त्रलळेऴ राब ु ु प्राद्ऱ शोता शं । भूल्म: Rs.730 वे Rs.10900 तक GURUTVA KARYALAY: Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785, Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
  • 22. 22 अक्टू फय 2012 नलयाि स्ऩेळर घट स्थाऩना त्रलसध  स्लस्स्तक.ऎन.जोळी, त्रलजम ठाकय ुदगाा ऩूजन वाभग्री- ु तत ऩद्ळमात शाथ धोकय, ऩुन: आवन ळुत्रद्ध भॊि काकराला (भौरी, यषा वूि), योरी, सवॊदय, १ ू श्रीपर उछिायण कयं :-(नारयमर), अषत (त्रफना टू टे िालर), रार लस्त्र, वगॊसधत ॐ ऩृ्ली त्लमाधृता रोका दे त्रल त्मलॊ त्रलष्णुनाधृता।पर- भारा, 5 ऩान क ऩत्ते , 5 वुऩायी, रंग, करळ, करळ ू े त्लॊ ि धायमभाॊ दे त्रल ऩत्रलिॊ करु िावनभ ्॥ ुशे तु आभ क ऩल्रल, रकडी़ की िौकी, वसभधा, शलन कण्ड, े ु ळुत्रद्ध कयण औय आिभन क ऩद्ळमात िॊदन रगाना ेशलन वाभग्री, कभर गट्टे , ऩॊिाभृत ( दध, दशी, घी, ळशद, ू िाफशए।ळकया(िीनी) ), पर, सभठाई, ऊन का आवन, वाफूत शल्दी, ा अनासभका उॊ गरी वे श्रीखॊड िॊदन रगाते शुए इव भॊि काअगयफत्ती, इि, घी, दीऩक, आयती की थारी, कळा, यक्त िॊदन, ु उछिायण कयं :-द्ळेत िॊदन (श्रीखॊड िॊदन), जौ, सतर, वुलणा गणेळ ल दगाा ु िन्दनस्म भशत्ऩुण्मभ ् ऩत्रलिॊ ऩाऩनाळनभ,्की प्रसतभा 2 (वुलणा उप्रब्ध न शो तो ऩीतर, कई रोग आऩदाॊ शयते सनत्मभ ् रक्ष्भी सतद्षतु वलादा।सभट्टी की प्रसतभा वे ऩूजन कयते शं ।), आबूऴण ल श्रृगाय ॊवाभग्री, ऩॊिभेला, ऩॊिसभठाई, रूई इत्माफद, ऩॊिोऩिाय ऩूजन कयने क ऩद्ळमात वॊकल्ऩ कयना िाफशएॊ। े वॊकल्ऩ भं ऩुष्ऩ, पर, वुऩायी, ऩान, िाॊदी का सवक्का, श्रीपरदगाा ऩूजन वे ऩूला िौकी को ळुद्ध कयक श्रृगाय कयक ु े ॊ े (नारयमर), सभठाई, भेला, आफद वबी वाभग्री थोिी-थोिीिौकी वजारं। भािा भं रेकय वॊकल्ऩ भॊि का उछिायण कयं :-तत ऩद्ळमात रार कऩडे का आवन त्रफिाकय गणऩसत एलॊ ॥ वॊकल्ऩ लाक्म॥दगाा भाता की प्रसतभाक वम्भुख फैठ जाए। ु े शरय ॐ तत्वत l नभ् ऩयभात्भने श्री ऩुयाण ऩुरुऴोत्तभाम श्री भद बगलते भशा ऩुरुऴस्म त्रलष्णो यासामा प्रलता भानतत ऩद्ळमात आवन को इव भॊि वे ळुत्रद्ध कयण कयं : स्माद्य ब्राह्मणं फद्रतीम प्रशयाद्रे श्रीद्वेत्लायाश कारे लै लस्तल -भन्लन्तये अस्श्त्लस्श्तत्भे कल्मुगे कसर प्रथभ ियणे जम्फू ॐ अऩत्रलि : ऩत्रलिोला वलाालस्थाॊ गतोऽत्रऩला। द्रीऩे बयत खण्ड बायत लऴे आमाा लतांन्तगात दे ळैक ऩुण्म म: स्भये त ् ऩुण्डयीकाषॊ व फाह्याभ्मन्तय: ळुसि:॥ षेि ऴत्रद्श वम्लस्तायाणाॊ भध्मे अभुक नासभन वॊलत्वये अभुक अमने अभुक िुतौ .अभुक भावे अभुक ऩषेइन भॊिं का उछिायण कयते शुए अऩने ऊऩय तथा आवन .अभुक सतथौ अभुक नषिे ,अभुक मोग अभुक लावयेऩय 3-3 फाय कळा मा ऩुष्ऩाफद वे िीॊटं रगामं। ु अभुक यासळस्मे वूमे, बौभं, फुधे, गुयौ, ळुि, ळनौ, याशौ, े कतौ एलॊ गुण त्रलसळद्शामा सतथौ अभुक गोिोत्ऩन्ने अभुक ेतत ऩद्ळमात आिभन कयं : नास्म्न ळभाा (लभाा इत्माफद ) वकरऩाऩषमऩूलक वलाारयद्श ा ॊ ॐ कळलाम नभ: े ळाॊसतसनसभत्तॊ वलाभॊगरकाभनमा श्रुसतस्भृत्मोक्तपरप्राप्त्मथं ॐ नायामण नभ: भनेस्प्वत कामा सवद्धमथं श्री दगाा ऩूजनॊ ि अशॊ करयष्मे। ु ॐ भध्लामे नभ: तत्ऩूलाागॊत्लेन सनत्रलाघ्नताऩूलक ा कामा सवद्धमथं मथा ॐ गोत्रलन्दाम नभ् सभसरतोऩिाये गणऩसत ऩूजनॊ करयष्मे।
  • 23. 23 अक्टू फय 2012त्रलळेऴ वुझाल: उक्त वॊकल्ऩ लाक्म भं जशाॉ-जशाॉ अभुक तत ऩद्ळमात प्रकाय श्रीखॊड िॊदन फोरकय श्रीखॊड िॊदनळब्द आमा शै , लशाॉ िभळ: लताभान वॊलत्वय, अमन, रुतु, रगाएॊ,भॉव, ऩष, सतसथ, नषि, मोग, वूमााफद की याळी तथा तत ऩद्ळमात सवन्दय िढ़ाएॊ "इदॊ सवन्दयाबयणॊ रेऩनभ ् ॐ ू ूअऩने गोि, अऩनी याळी एलॊ अऩने नाभ का उछिायण श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ्,कयना िाफशए। तत ऩद्ळमात दलाा औय त्रलल्फऩि बी गणेळ जी को िढ़ाएॊ। ूगणऩसत ऩूजन:- ऩूजन क ऩद्ळमात गणेळ जी को बोग अत्रऩत कयं : े ा ॐबायतीम ळास्त्रोक्त ऩयॊ ऩया क अनुळाय फकवी बी ऩूजा भं े श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् इदॊ नानात्रलसध नैलेद्यासनवलाप्रथभ गणेळ जी की ऩूजा की जाती शं । वभऩामासभ, सभद्शान अत्रऩात कयने क सरए भॊि- ळकया े ाशाथ भं ऩुष्ऩ रेकय बगलान गणेळ का ध्मान कयं । खण्ड खाद्यासन दसध षीय घृतासन ि, आशायो बक्ष्म बोज्मॊगजाननम्बूतगणाफदवेत्रलतॊ कत्रऩत्थ जम्फू परिारुबषणभ ्। गृह्यताॊ गणनामक।उभावुतॊ ळोक त्रलनाळकायक नभासभ त्रलघ्नेद्वयऩादऩॊकजभ ्। ॊ प्रवाद अत्रऩत कयने क ऩद्ळमात आिभन कयामं, ा े इदॊतत ऩद्ळमात आलाशन कयं : आह्लान शे तु शाथ भं अषत आिभनीमॊ ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ्, तत ऩद्ळमातरेकय इव भॊि का उछिायण कयं :- ऩान वुऩायी िढ़ामं- ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् आगछि दे ल दे लेळ, गौयीऩुि त्रलनामक। ताम्फूरॊ वभऩामासभ, तत ऩद्ळमात पर रेकय गणऩसत ऩय तलऩूजा कयोभद्य, अिसतद्ष ऩयभेद्वय॥ िढ़ाएॊ ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् परॊ वभऩामासभ,ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् इशागछि इश सतद्ष तत ऩद्ळमात दस्षणा यखते शुले इव भॊि का उछिायण कयंउछिायण कयते शुए अषत को गणेळ जी ऩय िढा़ दं । ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् द्रव्म दस्षणाॊ वभऩामासभ, तत ऩद्ळमात त्रलऴभ वॊख्मा (1,3,5,7,9,11,21 आफद) भंसनम्न भॊिो का उछिायण कयते शुले वॊफॊसधत लस्तु श्री दीऩक जराकय सनयाजन अथाात आयसत कयं औय बगलानगणेळ जी को अत्रऩत कयं । ा की आयती गामं। तत ऩद्ळमात शाथ भं पर रेकय गणेळ ूशाथ भं पर रेकय ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् आवनॊ ू जी को अत्रऩात कयं , तत ऩद्ळमात तीन प्रदस्षणा कयं ।वभऩामासभ,तत ऩद्ळमात अघाा भं जर रेकय फोरं ॐ श्री सवत्रद्ध इवी प्रकाय वे अन्म वबी दे लताओॊ का ऩूजन कयं । गणेळत्रलनामकाम नभ् अघ्मं वभऩामासभ, क स्थान स्जव दे लता की ऩूजा कयनी शो ऩय उव दे लता ेतत ऩद्ळमात आिभनीम-स्नानीमॊ ॐ श्री सवत्रद्ध क नाभ का उछिायण कयं । ेत्रलनामकाम नभ् आिभनीमॊ वभऩामासभ,तत ऩद्ळमात लस्त्र रेकय ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् करळ ऩूजन:-लस्त्रॊ वभऩामासभ, घिे अथला रोटे ऩय कराला (भौसर) फाॊधकय करळ केतत ऩद्ळमात मसोऩलीत-ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् ऊऩय आभ का ऩल्रल यखं। करळ भं वुऩायी, अषत, भुद्रामसोऩलीतॊ वभऩामासभ, यखं, दलाा, नारयमर ऩय लस्त्र रऩेट कय करळ ऩय स्थात्रऩत ूतत ऩद्ळमात ऩुनयािभनीमभ ्, ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम कयं ,शाथ भं अषत औय ऩुष्ऩ रेकय लरूण दे लता का करळनभ् यक्त िॊदन रगाएॊ: इदभ यक्त िॊदनभ ् रेऩनभ ् ॐ श्री भं आलाशन कयं ।सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ्,
  • 24. 24 अक्टू फय 2012ॐ त्तत्लामासभ ब्रह्मणा लन्दभानस्तदाळास्ते तत ऩद्ळमात आिभन दं - ळुद्धोदकस्नानान्ते आिभनीमॊमजभानोशत्रलासब:। अशे डभानोलरुणेश फोध्मुरुळॊ वभानऽआमु: जरॊ वभऩामासभ।प्रभोऴी:। अस्स्भन करळे लरुणॊ वाॊगॊ वऩरयलायॊ वामुध तत ऩद्ळमात लस्त्र अत्रऩत कयं -- श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ा ुवळत्रक्तकभालाशमासभ, ॐ बूबल: स्ल: बो लरुण इशागछि ुा नभ:। लस्त्रॊ वभऩामासभ ॥ लस्त्रान्ते आिभनीमॊ जरॊइशसतद्ष। स्थाऩमासभ ऩूजमासभ। वभऩामासभ। तत ऩद्ळमात वौबाग्म वू़ि अत्रऩत कयं - श्रीजगदम्फामै ातत ऩद्ळमात स्जव प्रकाय गणेळ जी की ऩूजा की शै उवी दगाादेव्मै नभ:। वौबाग्म वूिॊ वभऩामासभ ॥ ुप्रकाय लरूण दे लता की त्रलसधलत ऩूजा कयं । तत ऩद्ळमात िन्दन अत्रऩत कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ा ुदगाा ऩूजन: ु नभ:। िन्दनॊ वभऩामासभ ॥दगाा ऩूजन शे तु वफवे ऩशरे भाता दगाा का ध्मान कयं : ु ु तत ऩद्ळमात शरयद्रािूणा अत्रऩत ा कयं - श्रीजगदम्फामै वला भॊगर भागॊल्मे सळले वलााथा वासधक । े दगाादेव्मै नभ:। शरयद्राॊ वभऩामासभ ॥ ु ळयण्मेिमस्म्फक गौयी नायामणी नभोस्तुते ॥ े तत ऩद्ळमात ककभ अत्रऩत कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ुॊ ु ा ु नभ:। ककभ वभऩामासभ ॥ ुॊ ुतत ऩद्ळमात आलाशन कयं : तत ऩद्ळमात सवन्दय अत्रऩात कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ू ु श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:। ु नभ:। सवन्दयॊ वभऩामासभ ॥ ू दगाादेलीभालाशमासभ॥ ु तत ऩद्ळमात कज्जर अत्रऩत कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ा ुतत ऩद्ळमात पर अत्रऩात कयते शुए उछिायण कयं । ू नभ:। कज्जरॊ वभऩामासभ ॥श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:। आवानाथे ऩुष्ऩास्ण वभऩामा ु तत ऩद्ळमात दलााकय अत्रऩात कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ू ुॊ ुसभ॥ नभ:। दलााकयासन वभऩामासभ ॥ ू ुॊतत ऩद्ळमात अघ्मा दं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:। ु तत ऩद्ळमात आबूऴण अत्रऩत कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ा ुशस्तमो: अघ्मं वभऩामासभ॥ नभ:। आबूऴणासन वभऩामासभ ॥तत ऩद्ळमात आिभन अत्रऩत कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ा ु तत ऩद्ळमात ऩुष्ऩभारा अत्रऩत ा कयं - श्रीजगदम्फामैनभ:। आिभनॊ वभऩामासभ॥ दगाादेव्मै नभ:। ऩुष्ऩभारा वभऩामासभ ॥ ुतत ऩद्ळमात स्नान कयाएॊ- श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:। ु तत ऩद्ळमात धूऩ रगाएॊ- श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:। ुस्नानाथं जरॊ वभऩामासभ॥ धूऩभाघ्राऩमासभ॥तत ऩद्ळमात स्नानाॊग आिभन- स्नानान्ते ऩुनयािभनीमॊ तत ऩद्ळमात दीऩ जराएॊ- श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:। ुजरॊ वभऩामासभ। दीऩॊ दळामासभ॥तत ऩद्ळमात ऩॊिाभृत स्नान कयाएॊ- श्रीजगदम्फामै तत ऩद्ळमात नैलेद्य अत्रऩत कयं - ा श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ुदगाादेव्मै नभ:। ऩॊिाभृतस्नानॊ वभऩामासभ॥ ु नभ:। नैलेद्यॊ सनलेदमासभ॥तत ऩद्ळमात गन्धोदक-स्नान कयाएॊ- श्रीजगदम्फामै तत ऩद्ळमात जर अत्रऩात कयं - नैलेद्यान्ते त्रिफायॊ आिभनीमदगाादेव्मै नभ:। गन्धोदकस्नानॊ वभऩामासभ॥ ु जरॊ वभऩामासभ।तत ऩद्ळमात ळुद्धोदक स्नान कयाएॊ- श्रीजगदम्फामै तत ऩद्ळमात पर अत्रऩत कयं - ा श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ुदगाादेव्मै नभ:। ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩामासभ॥ ु नभ:। परासन वभऩामासभ॥
  • 25. 25 अक्टू फय 2012तत ऩद्ळमात ताम्फूर अत्रऩात कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ु भमा ऩॊिाळीतेयसधकभऩनीते तु लमसव ।नभ:। ताम्फूरॊ वभऩामासभ॥ इदानीॊ िेन्भातस्तल कृ ऩा नात्रऩ बत्रलतातत ऩद्ळमात दस्षणा दं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:। द ु सनयारम्फो रम्फोदय जनसन क मासभ ळयण ्॥5॥ ॊस्षणाॊ वभऩामासभ॥ द्वऩाको जल्ऩाको बलसत भधुऩाकोऩभसगयातत ऩद्ळमात आयती कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:। ु सनयातॊको यॊ को त्रलशयसत सियॊ कोफटकनक् । ैआयासताक वभऩामासभ॥ ॊ तलाऩणे कणे त्रलळसत भनुलणे परसभदॊऩूजन भं शुई िुफट क सनलायण शे तु षभा प्राथना कयं । े जन् को जानीते जनसन जऩनीमॊ जऩत्रलधौ ॥6॥षभा प्राथाना सिताबस्भारेऩो गयरभळनॊ फदक्ऩटधयो जटाधायी कण्ठे बुजगऩतशायी ऩळुऩसत् ।न भॊिॊ नोमॊिॊ तदत्रऩ ि न जाने स्तुसतभशो कऩारी बूतेळो बजसत जगदीळैकऩदलीॊन िाह्लानॊ ध्मानॊ तदत्रऩ ि न जाने स्तुसतकथा्। बलासन त्लत्ऩास्णग्रशणऩरयऩाटीपरसभदभ ् ॥7॥न जाने भुद्रास्ते तदत्रऩ ि न जाने त्रलरऩनॊ न भोषस्माकाॊषा बलत्रलबल लाॊिात्रऩिनभेऩयॊ जाने भातस्त्लदनुवयणॊ क्रेळशयणभ ्॥1॥ न त्रलसानाऩेषा ळसळभुस्ख वुखेछिात्रऩ न ऩुन् ।त्रलधेयसानेन द्रत्रलणत्रलयशे णारवतमा अतस्त्लाॊ वॊमािे जनसन जननॊ मातु भभ लैत्रलधेमाळक्मत्लात्तल ियणमोमाा छमुसतयबूत ् । भृडाणी रुद्राणी सळलसळल बलानीसत जऩत् ॥8॥तदे तत्षतव्मॊ जनसन वकरोद्धारयस्ण सळले नायासधतासव त्रलसधना त्रलत्रलधोऩिायै ्कऩुिो जामेत क्लसिदत्रऩ कभाता न बलसत ॥2॥ ु ु फक रूषसिॊतन ऩयै नकृतॊ लिोसब् । ॊ ाऩृसथव्माॊ ऩुिास्ते जनसन फशल् वस्न्त वयरा् श्माभे त्लभेल मफद फकिन भय्मनाथे ॊऩयॊ तेऴाॊ भध्मे त्रलयरतयरोऽशॊ तल वुत् । धत्वे कृ ऩाभुसितभम्फ ऩयॊ तलैल ॥9॥भदीमोऽमॊत्माग् वभुसितसभदॊ नो तल सळले आऩत्वु भग्न् स्भयणॊ त्लदीमॊ कयोसभ दगे करुणाणालेसळ । ुकऩुिो जामेत ् क्लसिदत्रऩ कभाता न बलसत ॥3॥ ु ु नैतछिठत्लॊ भभ बालमेथा् षुधातृऴाताा जननीॊ स्भयस्न्त॥10॥जगन्भातभाातस्तल ियणवेला न यसिता जगदॊ फ त्रलसििभि फक ऩरयऩूणा करुणास्स्त सिन्भसम । ॊन ला दत्तॊ दे त्रल द्रत्रलणभत्रऩ बूमस्तल भमा । अऩयाधऩयॊ ऩयालृतॊ नफश भातावभुऩेषते वुतभ ् ॥11 ॥तथात्रऩत्लॊ स्नेशॊ भसम सनरुऩभॊ मत्प्रकरुऴे ु भत्वभ् ऩातकी नास्स्तऩाऩघ्नी त्लत्वभा नफश ।कऩुिो जामेत क्लसिदऩ कभाता न बलसत ॥4॥ ु ु एलॊ सात्ला भशादे त्रलमथामोग्मॊ तथा करु ॥12॥ ुऩरयत्मक्तादे ला त्रलत्रलधत्रलसधवेलाकरतमा ु भॊि सवद्ध दरब वाभग्री ु ा शत्था जोडी- Rs- 370 घोडे की नार- Rs.351 भामा जार- Rs- 251 सवमाय सवॊगी- Rs- 370 दस्षणालतॉ ळॊख- Rs- 550 इन्द्र जार- Rs- 251 त्रफल्री नार- Rs- 370 भोसत ळॊख- Rs- 550 धन लृत्रद्ध शकीक वेट Rs-251 GURUTVA KARYALAY Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785, Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
  • 26. 26 अक्टू फय 2012 नलाणा भॊि द्राया नलग्रश कद्श सनलायण  सिॊतन जोळी दगाा ऩूजा ळत्रक्त उऩावना का भशाऩला शं । ळायदीम ुनलयाि क फदनो भं ग्रशं क दष्प्रबाल वे फिने क सरए े े ु ेभाॊ दगाा की ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शै । ुळत्रक्त एलॊ बत्रक्त क वाथ वाॊवारयक वुखं को दे ने क सरए े ेलताभान वभम भं मफद कोई दे लता शै । तो लश एक भािदे ली दगाा शी शं । वाभान्मतमा वभस्त दे ली-दे लता शी ऩूजा ुका अछिा ऩरयणाभ दे ते शं ।शभाये धभा ळास्त्रं क अनुळाय: े करौ िण्डी त्रलनामकौ’अथाात् कसरमुग भं दगाा एलॊ गणेळ फश ऩूणा एलॊ तत्कार ुपर दे ने लारे शं ।ताॊत्रिक ग्रन्थं क अनुळाय: े नौयत्निण्डीखेटाद्ळ जाता सनसधनाह्ढलाद्ऱोह्ढलगुण्ठ दे व्मा।अथाात् नौ यत्न, नौ ग्रशं फक ऩीिा वे भुत्रक्त, नौ सनसध फकप्रासद्ऱ, नौ दगाा क अनुद्षान वे वलाथा वम्बल शै । इवका ु ेतत्ऩमा शं फक नलदगाा नलग्रशं क सरए शी प्रलसतात शुईं शं । ु े अवुयं वे रेकय भनुष्मं भं फकवी बी प्रकायका वॊकट शोने ज्मोसतऴ फक द्रद्शी भं नलग्रश वॊफॊसधत ऩीिा एलॊ ऩयदै ली आऩदाओॊ वे भुत्रक्त प्राद्ऱ कयने का वयर वाधन दे ली वभस्त रोक भं भाॊ दगाा फक अयाधना कयने का प्रिरन ुफक आयाधना शं । मफद जन्भ कडरी भं िॊडार मोग, दरयद्र ुॊ िरा आयशा शं । क्मोफक भाॊ दगाा ने वबी दे ल-दानल- ुमोग, ग्रशण मोग, त्रलऴ मोग, कारवऩा एलॊ भाॊगसरक दोऴ, अवुय-भनुष्म वबी प्राणी भाि का उद्धाय फकमा शं ।एलॊ अन्मान्म मोग अथला दोऴ एवे शं , स्जस्वे व्मत्रक्त इवसरमे फकवी बी प्रकाय क जाद-टोना, योग, बम, े ूजीलन बय अथक ऩरयश्रभ कयने क उऩयाॊत बी द्ख े ु बूत, त्रऩळाछि, डाफकनी, ळाफकनी आफद वे भुत्रक्त फक प्रासद्ऱबोगता यशता शं । स्जवकी ळाॊसत वॊबलत् अन्म फकवी क सरमे भाॊ दगाा फक त्रलसध-त्रलधान वे ऩूजा-अिाना वलादा े ुऩूजा, अिाना, वाधना, यत्न एलॊ अन्म उऩामो वे वयरता वे परदामक यशीॊ शै ।नशीॊ शोती शं । अथला ऩूणा ग्रश ऩीडाए ळाॊत नशीॊ शो ऩाती दगाा दखं का नाळ कयने लारी शं । इवसरए ु ुशं । एवी स्स्थती भं आफद ळत्रक्त भाॊ बगलती दगाा क नल ु े नलयात्रि क फदनो भं जफ उनकी ऩूजा ऩूणा श्रद्धा औय ेरुऩो फक आयाधना वे व्मत्रक्त वयरता वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ त्रलद्वाव वे फक जाती शं , तो भाॊ दगाा फक प्रभुख नौ ुकय वकता शं । ळत्रक्तमाॉ जाग्रत शो जाती शं , स्जववे नलं ग्रशं को बगलान याभ ने बी इवक प्रबाल वे प्रबात्रलत े सनमॊत्रित कयती शं , स्जववे ग्रशं वे प्राद्ऱ शोने लारे असनद्शशोकय अऩनी दळ अथला आठ नशीॊ फस्ल्क नलधा बत्रक्त का प्रबाल वे यषा शोकय ग्रश जनीत ऩीडाएॊ ळाॊत शो जाती शं ।शी उऩदे ळ फदमा शै । अनाफद कार वे फक दे लता, दानल,
  • 27. 27 अक्टू फय 2012दगाा फक नल ळत्रक्त को जाग्रत कयने शे तु ळास्त्रं भं नलाणा ु 6. नलाणा भॊि का ऴद्ष फीज भॊि डा शं , डा वे िठे नलयािभॊि का जाऩ कयने का त्रलधान शं । को दगाा फक िठी ळत्रक्त कात्मामनी फक उऩावना फक ुनल का अथाात नौ एलॊ अणा का अथाात अषय शोता शं । जाती शं । स्जव भं ळुि ग्रश को सनमॊत्रित कयने लारी(नल+अणा= नलाणा) इवी कायण नलाणा नल अषयं लारा ळत्रक्त वभाई शुई शं ।प्रबाली भॊि शं । 7. नलाणा भॊि का वद्ऱभ फीज भॊि मै शं , मै वे वातलंनलाणा भॊि नलयाि को दगाा फक वद्ऱभ ळत्रक्त कारयात्रि फक ु ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुॊडामै त्रलछिे उऩावना फक जाती शं । स्जव भं ळसन ग्रश को सनमॊत्रितनल अषयं लारे इव अद्भत नलाणा भॊि क शय अषय भं ु े कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं ।दे ली दगाा फक एक-एक ळत्रक्त वभामी शुई शं , स्जव का ु 8. नलाणा भॊि का अद्शभ फीज भॊि त्रल शं , त्रल वे आठलंवॊफॊध एक-एक ग्रशं वे शं । नलयाि को दगाा फक अद्शभ ु ळत्रक्त भशागौयी फक1. नलाणा भॊि का प्रथभ फीज भॊि ऐॊ शं , ऐॊ वे प्रथभ उऩावना फक जाती शं । स्जव भं याशु ग्रश को सनमॊत्रित नलयाि को दगाा फक प्रथभ ळत्रक्त ळैर ऩुिी फक ु कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । उऩावना फक जाती शं । स्जव भं वूमा ग्रश को सनमॊत्रित 9. नलाणा भॊि का नलभ फीज भॊि िै शं , िै वे नलभं कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । नलयाि को दगाा फक नलभ ळत्रक्त सवत्रद्धदािी फक ु2. नलाणा भॊि का फद्रतीम फीज भॊि ह्रीॊ शं , ह्रीॊ वे दवये ू उऩावना फक जाती शं । स्जव भं कतु ग्रश को सनमॊत्रित े नलयाि को दगाा फक फद्रतीम ळत्रक्त ब्रह्मिारयणी फक ु कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । उऩावना फक जाती शं । स्जव भं िॊद्र ग्रश को सनमॊत्रित इव नलाणा भॊि दगाा फक नलो ळत्रक्तमाॉ व्मत्रक्त को धभा, अथा, ु कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । काभ औय भोष इन िाय फक प्रासद्ऱ भं बी वशामक सवद्ध3. नलाणा भॊि का तृतीम फीज भॊि क्रीॊ शं , क्रीॊ वे तीवये शोती शं । नलयाि को दगाा फक तृतीम ळत्रक्त िॊद्रघॊटा फक उऩावना ु जऩ त्रलधान फक जाती शं । स्जव भं भॊगर ग्रश को सनमॊत्रित कयने प्रसतफदन स्नान इत्माफदवे ळुद्ध शोकय नलाणा भॊि का जाऩ लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । 108 दाने फक भारा वे कभ वे कभ तीन भारा जाऩ4. नलाणा भॊि का ितुथा फीज भॊि िा शं , िा वे िौथे अलश्म कयना िाफशए। नलयाि को दगाा फक ितुथा ळत्रक्त कष्भाण्डा फक ु ू उऩावना फक जाती शं । स्जव भं फुध ग्रश को सनमॊत्रित दगाा वद्ऱळती क अनुळाय ु े कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । नलाणा भॊि क नौ अषयं भॊि क ऩशरे ॐ अषय जोिकय े े5. नलाणा भॊि का ऩॊिभ फीज भॊि भुॊ शं , भुॊ वे ऩाॉिले बी कय वकते शं ॐ रगाने वे बी मश नलाणा भॊि के नलयाि को दगाा फक ऩॊिभ ळत्रक्त स्कदभाता फक ु ॊ वभान फश परदामक सवद्ध शोता शं । इवभं रेव भाि बी उऩावना फक जाती शं । स्जव भं फृशस्ऩसत ग्रश को वॊदेश नशीॊ शं । अत् भाॊ बगलती दगाा फक कृ ऩा प्रासद्ऱ एलॊ ु सनमॊत्रित कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । नलग्रशो क दष्प्रबालो वे यषा प्रासद्ऱ शे तु नलाणा भॊि का े ु जाऩ ऩूणा सनद्षा एलॊ श्रद्धा वे कय वकते शं ।
  • 28. 28 अक्टू फय 2012 काभनाऩूसता शे तु नलाणा भॊि वाधना  सिॊतन जोळीनलाणा भन्ि वाधना कयक फैठना िाफशए। फायश राख भन्ि जऩने वे मश कामा ेत्रलसनमोग्- सवद्ध शोता शं ।ॐ अस्म श्री नलाणा भॊिस्म ब्रह्मा त्रलष्णु भशे द्वया ऋत्रऴ्, नलाणा भोशन भन्ि:गामत्र्मुस्ष्णगनुद्शुबश्िॊ दाॊसव, भशाकारी भशारक्ष्भी ॐ क्रीॊ क्रीॊ ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलछिे (अभुक) ॊभशावयस्लत्म् दे लता्, नॊदजा ळाकबयी बीभा् ळक्तम्, ुॊ क्रीॊ क्रीॊ भोशनभ ् करु करु क्रीॊ क्रीॊ स्लाशा। ु ुयक्तदॊ सतका दगाा भ्राभमो फीजासन, ह्रं कीरकभ ्, अस्ग्नलामु ु ***वूमाास्तत्लासन, कामा सनदे ळ जऩे त्रलसनमोग। नलाणा उछिाटन भन्ि:नलाणा भन्ि: नलाणा उछिाटन भन्ि क िौफीव राख जऩ कयने का े ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलछिे॥ त्रलधान शं । इवभं तीन कओॊ का जऩ ताम्रकरळ भं रेकय ुनलाणा बेद भन्ि: यखना िाफशए औय उवी जर वे सनत्म स्नान कयनाळास्त्रं भं नलाणा भन्ि को अऩने आऩ भं अत्मन्त सवद्ध िाफशए। इव प्रमोग को ऩूला फदळा की तयप भुशॊ कयकेएलॊ प्रबालमुक्त भाना गमा शं । नलाणा भन्ि को भन्ि औय जऩ कयना िाफशए। जऩ क सरए रार लस्त्र का आवन ेतन्ि दोनो भं वभान रुऩ वे प्रमोग फकमा जाता शं । त्रफिाना िाफशए ल वाधक को बी रार यॊ ग क लस्त्र धायण ेनलाणा भन्ि क ळीघ्र प्रबात्रल प्रमोग आऩक भागादळान शे तु े े कयने िाफशए। इव प्रमोग को फीव फदनो भं वॊऩन्न कयनेफदमे जायशे शं । का त्रलधान शं । िौफीव राख भन्ि जऩ कयने वे मश कामा सवद्ध शोता शं ।िेतालनी: नलाणा उछिाटन भन्ि:नलाणा भन्ि का प्रमोग असत वालधानी वे एलॊ मोग्म गुरु, ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलछिे (अभुक) पट् उछिाटनॊ ॊत्रलद्रान ब्राह्मण अथला जानकाय की वराश वे कयना करु करु स्लाशा। ु ुिाफशए। *** नलाणा लळीकयण भन्ि:नलाणा भोशन भन्ि: इव प्रमोग को फीव फदनो भं वॊऩन्न कयने का त्रलधान शं ।नलाणा भोशन भन्ि क फायश राख जऩ कयने का त्रलधान े नदी, ताराफ मा कएॊ क जर वे स्नान कयक वाधक को ु े ेशं । इव प्रमोग को कयने शे तु वात कओॊ मा नफदमं का ु दस्षण फदळा की तयप भुॊश कयक फैठना िाफशए। तथा ेजर ताम्रकरळ भं रेकय उवभं आभ क ऩत्ते डारकय े वपद आवन त्रफिाना िाफशए औय वपद लस्त्र धायण े ेसनत्म उवी ऩानी वे स्नान कयना िाफशए। रराट ऩय ऩीरे कयने िाफशए। फीव राख भन्ि जऩ कयने वे मश कामािन्दन का सतरक कयना िाफशए औय ळयीय ऩय ऩीरे यॊ ग सवद्ध शोता शं ।क लस्त्र शी धायण कयने िाफशए औय ऩीरे यॊ ग क आवन े े नलाणा लळीकयण भन्ि:का प्रमोग कयना िाफशए। वाधक को ऩस्द्ळभ की तयप भुॊश लऴट् ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलछिे (अभुक) लऴट् भे लश्मॊ ॊ करु करु स्लाशा। ु ु
  • 29. 29 अक्टू फय 2012नलाणा स्तॊबन भन्ि: नलाणा त्रलद्रे ऴण भन्ि:इव प्रमोग भं वाधक को ऩूला फदळा की तयप भुॊश कयके ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै (अभुक) त्रलद्रे ऴणॊ करु करु ॊ ु ुफैठना िाफशए। तथा बूये यॊ ग का आवन त्रफिाना िाफशए। स्लाशा।वोरश राख भन्ि जऩ कयने वे मश कामा सवद्ध शोता शं । नलाणा भशाभन्ि:नलाणा स्तॊबन भन्ि: इव भन्ि क उछिायण भाि वे दे ली भाॊ प्रवन्न शोती शं । ेॐ ठॊ ठॊ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलछिे (अभुक) ह्रीॊ लािॊ ॊ मश वॊऩूणा नलाणा भशाभॊि शं ।भुखॊ ऩदॊ स्तॊबम ह्रीॊ स्जह्लाॊ कीरम ह्रीॊ फुत्रद्धॊ त्रलनाळम नलाणा भशाभन्ि:त्रलनाळम ह्रीॊ ॐ ठॊ ठॊ स्लाशा। ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ भशादगे नलाषयी नलदगे नलास्त्भक ु ु े *** नलिॊडी भशाभामे भशाभोशे भशामोग सनद्रे जमे भधुकटब ैनलाणा त्रलद्रे ऴण भन्ि: त्रलद्रात्रलस्ण भफशऴावुय भफदा सन धूम्र रोिन वॊशॊिी िॊडभुॊडइव प्रमोग भं वाधक को उत्तय फदळा की तयप भुॊश कयके त्रलनासळनी यक्त फीजाॊतक सनळुॊब ध्लॊसवसन ळुॊब दऩास्घ्न ेफैठना िाफशए। तथा कारे यॊ ग का आवन त्रफिाना िाफशए। दे त्रल अद्शादळ फाशुक कऩार खट्लाॊग ळूर खड्ग खेटक ेइव प्रमोग को फीव फदन भं वॊऩन्न कयने का त्रलधान शं । धारयस्ण सिन्न भस्तक धारयस्ण रुसधय भाॊव बोस्जनीतेयश राख भन्ि जऩ कयने वे मश कामा सवद्ध शोता शं । वभस्त बूत प्रेताफद मोग ध्लॊसवसन ब्रह्मेन्द्राफद स्तुते दे त्रलवाधना क दौयान जर भं सतर डारकय स्नान कयना े भाॊ यष यष भभ ् ळिून ् नाळम ह्रीॊ पट् ह्रूॊ पट् ॐ ऐॊ ह्रीॊिाफशए। क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलछिे॥ भॊि सवद्ध स्पफटक श्री मॊि "श्री मॊि" वफवे भशत्लऩूणा एलॊ ळत्रक्तळारी मॊि शै । "श्री मॊि" को मॊि याज कशा जाता शै क्मोफक मश अत्मन्त ळुब फ़रदमी मॊि शै । जो न कलर दवये मन्िो वे असधक वे असधक राब दे ने भे वभथा शै एलॊ वॊवाय क शय व्मत्रक्त क सरए पामदे भॊद वात्रफत शोता शै । ऩूणा े ू े े प्राण-प्रसतत्रद्षत एलॊ ऩूणा िैतन्म मुक्त "श्री मॊि" स्जव व्मत्रक्त क घय भे शोता शै उवक सरमे "श्री मॊि" अत्मन्त फ़रदामी सवद्ध शोता शै े े उवक दळान भाि वे अन-सगनत राब एलॊ वुख की प्रासद्ऱ शोसत शै । "श्री मॊि" भे वभाई अफद्रसतम एलॊ अद्रश्म ळत्रक्त भनुष्म की े वभस्त ळुब इछिाओॊ को ऩूया कयने भे वभथा शोसत शै । स्जस्वे उवका जीलन वे शताळा औय सनयाळा दय शोकय लश भनुष्म ू अवफ़रता वे वफ़रता फक औय सनयन्तय गसत कयने रगता शै एलॊ उवे जीलन भे वभस्त बौसतक वुखो फक प्रासद्ऱ शोसत शै । "श्री मॊि" भनुष्म जीलन भं उत्ऩन्न शोने लारी वभस्मा-फाधा एलॊ नकायात्भक उजाा को दय कय वकायत्भक उजाा का सनभााण कयने भे वभथा ू शै । "श्री मॊि" की स्थाऩन वे घय मा व्माऩाय क स्थान ऩय स्थात्रऩत कयने वे लास्तु दोऴ म लास्तु वे वम्फस्न्धत ऩये ळासन भे न्मुनता े आसत शै ल वुख-वभृत्रद्ध, ळाॊसत एलॊ ऐद्वमा फक प्रसद्ऱ शोती शै । गुरुत्ल कामाारम भे "श्री मॊि" 12 ग्राभ वे 2250 Gram (2.25Kg) तक फक वाइज भे उप्रब्ध शै . भूल्म:- प्रसत ग्राभ Rs. 9.10 वे Rs.28.00 GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
  • 30. 30 अक्टू फय 2012 ऩसत-ऩत्नी भं करश सनलायण शे तु दगााद्शाषय भन्ि वाधना ु मफद ऩरयलायं भं वुख वुत्रलधा क वभस्त वाधान े  स्लस्स्तक.ऎन.जोळीशोते शुए बी िोटी-िोटी फातो भं ऩसत-ऩत्नी क त्रफि भे े ळास्त्रं भं दगााद्शाषय भन्ि को अत्मन्त ुकरश शोता यशता शं , तो सनम्न भॊि का जाऩ कयने वे गोऩनीम औय सवत्रद्धदामक भाना गमा शं । दगााद्शाषय भन्ि क फायं भं ळास्त्रोक्त लणान शं ु ेऩसत-ऩत्नी क त्रफिभं ळाॊसत का लातालयण फनेगा ेभॊि - वाषात ् सवत्रद्धप्रदो भॊिो दगाामा् कसरनाळन्। ुधॊ सधॊ धुभ धुजते ऩत्नी लाॊ लीॊ फूभ लास्ग्धद्वरय। ि िीॊ ा ॊि कासरका दे ली ळॊ ऴीभ ळूॊ भं ळुबभ करु॥ ॊू ु अद्शाषयो अद्श सवत्रद्धळो गोऩनीमो फदगॊफयै ्। ॐ अस्म श्री दगााद्शाषय भॊिस्म भशे द्वय ुमफद ऩत्नी मश प्रमोग कय यशी शं तो ऩत्नी की जगश ऋत्रऴ्, श्री दगााद्शाषयास्त्भका दे लता, दॊ ु ु फीजभ ्,ह्रीॊ ळत्रक्त, ॐ कीरकाम नभ् इसतऩसत ळब्द का उछिायण कये फदगफॊध्, धभााथा काभ भोषाथे जऩे त्रलसनमोग्।प्रमोग त्रलसध – ध्मान: दलाासनबाॊ त्रिनमनाॊ त्रलरवस्त्कयीटाॊ ू  प्रात् स्नान इत्मादी वे सनलृत्त शो कय क दगाा े ू ळॊखाब्जख्डग ळय खेटक िाऩान ्। मा भाॊ कारी दे ली क सिि ऩय रार ऩुष्ऩ बेटा े वॊतजानी ि दघतीॊ भफशऴावनस्थाॊ दगाा नलायकर ऩीठगताॊ बजेशभ ्। ु ु कय धूऩ-दीऩ जरा क सवद्ध स्पफटक भारा वे 21 े फदन तक 108 फाय जाऩ कये राबा प्राद्ऱ शोता शं । दगााद्शाषय भन्ि : ु  ळीध्र राब प्रासद्ऱ शे तु प्रमोग कयने वे ऩूला भाॊ के ॐ ह्रीॊ दॊ ु दगाामै नभ:॥ ु पर: भॊफदय भं अऩनी वभथाता क अनुळाय अथा मा े उक्त भन्ि क एक राख जऩ कयने वे मश े लस्त्र बेट कयं । भन्ि सवद्ध शोता शं । इव भन्ि भं अद्भत ु  राब प्रासद्ऱ क ऩद्ळमात भारा को जर प्रलाश कय दं । े ळत्रक्त शं । लाक् सवत्रद्ध, वॊतान प्रासद्ऱ, ळिु ऩय त्रलजम, ऋण-योग आफद ऩीडा़ वे भुत्रक्त प्राद्ऱ शोती शं औय व्मत्रक्त को जीलन भं वॊऩूणामफद आऩ इव प्रमोग त्रलसध कयने भं अवभथा शं ?, तो आऩ वुखं की प्रासद्ऱ शो इव क सरमे मश भन्ि ेशभवे वॊऩक कय अन्म उऩाम जान वकते शं । ा अिूक एलॊ सवत्रद्धदामक शं ।
  • 31. 31 अक्टू फय 2012 कभायी ऩूजन वे वकर भनोयथ सवद्ध शोते शं । ु  सिॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी कभायी-ऩूजा वे भाॉ बगलती असत प्रवन्न शोती शं ु  अधभ कल्ऩ: एक, दो, तीन औय िाय लऴा कीऔय वाधक क वकर भनोयथ सवद्ध कयती शं । े कन्मा क ऩूजन वे अधभ कल्ऩ शोता शं । े त्रलद्रानो क भत वे कभायी ऩूजा भं फकवी बी प्रकाय े ुका जासत बेद नशीॊ भाना जाता शै । ळास्त्रोक्त भत वे त्रलद्रानो क भत वे नलयाि भं कभारय कन्माओॊ क े ु ेब्राह्मण, षत्रिम, लैश्म ल ळुद्र इन िायं लणं की कभारयमं ु ऩूजन का अत्मासधक भशत्त्ल शै ।की ऩूजा फकमा जावकता शं । िायं लणं की कभारयमं की ु क्मोफक ळास्त्रोक्त त्रलधान वे कभारय कन्माएॊ भाॉ का ुऩूजा वे वाधक को सबन्न-सबन्न पर की प्रासद्ऱ शोती शं । प्रत्मष स्लरुऩ शोती शं । इव सरए कभारय कन्माओॊ का ुभेरु तन्ि भं उल्रेस्खत शै फक ऩूजन दे ली भाॉ क वभान कयना कल्माण कायी शोता शै । े  ब्राह्मण कभायी: क ऩूजन वे वाधक को वला इद्श ु े प्रसतऩदा वे नलभी तक कभारय कन्माओॊ को दगाा स्लरुऩ ु ु परो की प्रासद्ऱ शोती शं । भानकय ऩूजन कयना अत्मासधक कल्माण कायी शोता शं ।  षत्रिम कभायी: क ऩूजन वे वाधक को मळ की ु े मफद कोई वाधक प्रसतफदन कभायी ऩूजन नशीॊ कय वकता ु प्रासद्ऱ शोती शं । शो, तो उनको अद्शभी मा नलभी को कभायी ऩूजन अलश्म ु  लैश्म कभायी: क ऩूजन वे वाधक को धन की ु े कयना िाफशए। प्रासद्ऱ शोती शं । कभायी-ऩूजा भं बगलान श्री गणेळ औय फटु क क ु े  ळूद्र कभायी: क ऩूजन वे वाधक की वॊतान को ु े वाथ वात, ऩाॉि, तीन मा एक कभायी की ऩूजा कयनी ु राब शोता शै । िाफशए। गणेळ औय फटु क की ऩूजा क सरए िोटे रिकं ेस्कन्द-ऩुयाण भं उल्रेस्खत शै फक त्रलऩत्रत्त-कार भं को रेना िाफशए। आवन त्रफिाकय ऩशरे गणेळ, फपयअन्त्मजा-कभायी का ऩूजन कयना िाफशए। ु फटु क, उवक फाद कभायी ऩूजन कयना िाफशए। े ु सळल कभायी-ऩूजा भं शे म औय काभ-फुत्रद्ध असनद्श- ु गणेळजी की ऩूजा क सरए ‘ॐ गॊ गणेळाम नभ्’ ेकायक शोती शै । अत् वालधान शोकय कभायी-पजा कयनी ु ु भन्ि वे ऩाद्य, अघ्मा, गन्ध, दीऩ, लस्त्र-नैलेद्य आफद वेिाफशए। माभर तन्ि भं उल्रेस्खत शै फक दो लऴा वे ऊऩय ऩूजा कये । फटु क की ऩूजा क सरए ‘ॐ लॊ लटु काम नभ्’ ेकी कभायी का ऩूजन धभा लैधासनक शं , क्मंफक एक-लऴा ु भन्ि वे ऩाद्य, अघ्मा, गन्ध, दीऩ, लस्त्र-नैलेद्य आफद वेवे कभ की कभायी की गन्ध, ऩुष्ऩ, लस्त्र औय नैलेद्य क ु े ऩूजा कये ।प्रसत रुसि नशीॊ शोती। कभायी ऩूजन क सरए ऩशरे दोनं शाथं भं ऩुष्ऩ ु े अन्म धभा ग्रन्थं भं एक लऴा वे ऴोडळ (वोरश) रेकय प्राथाना कये ।लऴा तक की कन्मा कं सबन्न-सबन्न दे ली कशी गई शं । मथा-भन्िाषय-भमीॊ रक्ष्भीॊ, भातृणाॊ रुऩ-धारयणीॊ।लाडलानरीम तन्ि: भं कभायी ऩूजन ु शे तु उल्रेस्खत शै फक नल-दगाास्त्भकाॊ वाषात ्, कन्माभालाशमाम्भशॊ ॥ ु  उत्तभ कल्ऩ: वात, आठ औय नौ लऴा की कन्मा के जगत ्-ऩूज्मे जगद्-लन्द्ये, वला-ळत्रक्त-स्लरुत्रऩस्ण। ऩूजन वे उत्तभ कल्ऩ शोता शं । ऩूजाॊ गृशाण कौभारय जगन्भातनाभोऽस्तु ते॥  भध्मभ कल्ऩ: ऩाॉि, ि् औय दव लऴा की कन्मा उक्त प्राथाना कयक शाथ भं सरए ऩुष्ऩं को कभायी े ु क ऩूजन वे भध्मभ कल्ऩ शोता शं । े क ियणं ऩय यखकय प्रणाभ कये । े
  • 32. 32 अक्टू फय 2012 तत ऩद्ळमात ॐ कभामै नभ् भन्ि वे ऩाद्य, ु गॊ गणऩतमे नभ् ताम्फूरॊ वभऩामासभ।अघ्मा, गन्ध, दीऩ, लस्त्र-नैलेद्य आफद वे त्रलसधलत ऩूजन गॊ गणऩतमे नभ् दस्षणाॊ वभऩामासभ।कये । बगलान श्रीगणेळ का ऩूजन कयने क ऩद्ळात ् लटु क का े तत ऩद्ळमात वफ कन्माओॊ को ऩुष्ऩ भारा ऩूजन कयं ।ऩशनाकय बोजन कयाए। जफ ले बरी प्रकाय वॊतुद्श शोजाएॉ, तफ उनका शाथ भुॉश धुराकय उनक शाथ भं दस्षणा े लटु क ऩूजन कयं :प्रदान कयं औय उन्शं प्रणाभ कयं । ॐ लॊ लटु काम नभ् भन्ि वे बगलान लटु क का ऩूजन कये ।त्रलसधलत कभायी ऩूजन ु मथा-कभायी ऩूजन एक सवद्ध प्रमोग शै । वबी प्रकाय की ु ॐ लॊ लटु काम नभ् ऩादमो् ऩाद्यॊ वभऩामासभ।काभनाओॊ की ऩूणता इव ऩूजन द्राया वम्बल शै । ा ॐ लॊ लटु काम नभ् सळयसव अघ्मं वभऩामासभ।ऩूजन शे तु वला प्रथभ वॊकल्ऩ कये । ॐ लॊ लटु काम नभ् गन्धाषतॊ वभऩामासभ।मथा: ॐ लॊ लटु काम नभ् ऩुष्ऩॊ वभऩामासभ।ॐ तत ् वत ्। अद्यैतस्म ब्रह्मणोऽफि फद्रतीम प्रशयाधे, श्री ॐ लॊ लटु काम नभ् धूऩॊ घ्राऩमासभ।द्वेत-लायाश-कल्ऩे, जम्फु-द्रीऩे, बयत-खण्डे , अभुक- ॐ लॊ लटु काम नभ् दीऩॊ दळामासभ। ॐ लॊ लटु काम नभ् नैलेद्यॊ वभऩामासभ।प्रदे ळान्तगाते, अभुक ऩुण्म-षेिे, कसरमुगे, कसर-प्रथभ- ॐ लॊ लटु काम नभ् आिभनीमॊ वभऩामासभ।ियणे, अभुक-नाभ-वम्लत्वये , अभुक-भावे, अभुक-ऩषे, ॐ लॊ लटु काम नभ् ताम्फूरॊ वभऩामासभ।अभुक-सतथौ, अभुक-लावये , अभुक-गोिोत्ऩन्नो, अभुक- ॐ लॊ लटु काम नभ् दस्षणाॊ वभऩामासभ।नाभ-ळभााऽशॊ (लभााऽशॊ , दावोऽशॊ ला), वलााऩत ् ळास्न्त-ऩूलक ा लटु क का ऩूजन कयने क ऩद्ळमात कभायी ऩूजन कयं । े ुभभाबीद्श-सवद्धमे, गणेळ-लटु काफद-वफशताॊ कभायी-ऩूजाॊ ु कभायी ऩूजन: ुकरयष्मे।तत ऩद्ळमात कभायी क ऩैय धोकय उवे श्रद्धा ऩूलक अऩने वम्भुख ु े ागणेळ ऩूजन कयं : आवन ऩय फैठाए। फपय दोनं शाथ जोिकय बत्रक्त ऩूलक ा ध्मान कये ।गॊ गणऩतमे नभ् भन्ि वे बगलान ् गणेळ का ऩूजन कये । मथा-मथा: फार-रुऩाॊ ि िैरोक्म-वुन्दयीॊ लय-लस्णानीभ ्।गॊ गणऩतमे नभ् ऩादमो् ऩाद्यॊ वभऩामासभ।गॊ गणऩतमे नभ् सळयसव अघ्मं वभऩामासभ। नानारॊकाय-नम्राॊगीॊ, बद्र-त्रलद्या-प्रकासळनीभ ्।। िारु-शास्माॊगॊ गणऩतमे नभ् गन्धाषतॊ वभऩामासभ। भशाऽऽनन्द-रृदमाॊ सिन्तमे ळुबाभ ्।।गॊ गणऩतमे नभ् ऩुष्ऩॊ वभऩामासभ। अथाात ्: फार-स्लरुऩलारी, त्रिरोक-वुन्दयी, श्रेद्ष लणालारी,गॊ गणऩतमे नभ् धूऩॊ घ्राऩमासभ। त्रलत्रलध प्रकाय क आबूऴणं वे वुवस्ज्जत शोने वे त्रलनम्र ेगॊ गणऩतमे नभ् दीऩॊ दळामासभ। ळयीयलारी, कल्माण-कारयणी त्रलद्या को प्रकट कयनेलारी,गॊ गणऩतमे नभ् नैलेद्यॊ वभऩामासभ। वुन्दय शॉ वी शॉ वनेलारी, ऩयभानन्द वे मुक्त रृदमलारीगॊ गणऩतमे नभ् आिभनीमॊ वभऩामासभ। कल्माणकारयणी कभायी दे ली का भं ध्मान कयता शूॉ। ु
  • 33. 33 अक्टू फय 2012ध्मान कयने क फाद इव भन्ि को श्रद्धाऩूलक ऩढ़कय े ा लनदगाा ु ि भातङ्गी भतङ्गभुसनऩूस्जता ॥७॥आलाशन कये - ब्राह्मी भाशे द्वयी िैन्द्री कौभायी लैष्णली तथा । ॐ भन्िाषय भमीॊ रक्ष्भीॊ, भातृणाॊ रुऩ-धारयणीभ ्। िाभुण्डा िैल लायाशी रक्ष्भीद्ळ ऩुरुऴाकृ सत् ॥८॥ नल-दगाास्त्भकाॊ वाषात,् कन्माभालाशमाम्मशभ ्॥ ु त्रलभरोत्कत्रऴणी ा साना फिमा सनत्मा ि फुत्रद्धदा । फशुरा फशुरप्रेभा वलालाशन लाशना ॥९॥अथाात ्: भन्िाषयं वे वॊमुक्ता, रक्ष्भी-स्लरुऩा, भातृकाओॊ का सनळुम्बळुम्बशननी भफशऴावुयभफदा नी ।रुऩ धायण कयने लारी, वाषात ् नल-दगाा-स्लरुऩा कन्मा दे ली ु भधुकटबशन्िी ै ि िण्डभुण्डत्रलनासळनी ॥१०॥का भं आलाशन कयता शूॉ। वलाावुयत्रलनाळा ि वलादानलघासतनी ।आलाशन कयने क फाद, वम्भुख उऩस्स्थत कभायी का ऩाद्य, े ु वलाळास्त्रभमी वत्मा वलाास्त्रधारयणी तथा ॥११॥अघ्मा, गन्धाषत ्, ऩुष्ऩ, धूऩ, दीऩ, नैलेद्य, आिभन, ताम्फूर एलॊ अनेकळस्त्रशस्ता ि अनेकास्त्रस्म धारयणी ।दस्षणा आफद उऩिायं वे ऩूजन कये । कभायी ु िैककन्मा ि कळोयी ै मुलती मसत् ॥१२॥कभायी का ऩूजन कयने क फाद सनम्न भन्ि ऩढ़ते शुए प्रणाभ ु े अप्रौढा िैल प्रौढा ि लृद्धभाता फरप्रदा ।कये - भशोदयी भुक्तकळी े घोयरूऩा भशाफरा ॥१३॥ जगद्-लन्द्ये, जगत ्-ऩूज्मे, वला-ळत्रक्त-स्लरुत्रऩस्ण। अस्ग्नज्लारा यौद्रभुखी कारयात्रिस्तऩस्स्लनी । ऩूजाॊ गृशाण कौभारय जगन्भातनाभोऽस्तु ते॥ नायामणी बद्रकारी त्रलष्णुभामा जरोदयी ॥१४॥अथाात ्: शे त्रलद्व-लन्द्ये, वॊवाय-ऩूज्मे, वला-ळत्रक्त-स्लरुऩे सळलदती ू कयारी ि अनन्ता ऩयभेद्वयी ।कौभारय दे त्रल, भेयी ऩूजा स्लीकय करयए। शे जगदम्फ, कात्मामनी ि वात्रलिी प्रत्मषा ब्रह्मलाफदनी ॥१५॥आऩको नभस्काय। कभायी-ऩूजा क फाद श्रीदगाा अद्शोत्तय ु े ु म इदॊ प्रऩठे स्न्नत्मॊ दगाानाभळताद्शकभ ् ु ।ळतनाभ स्तोि का ऩाठ कये । नावाध्मॊ त्रलद्यते दे त्रल त्रिऴु रोकऴु े ऩालासत ॥१६॥ ॥दगााद्शोत्तयळतनाभस्तोिॊ (त्रलद्ववायतन्ि )॥ ु धनॊ धान्मॊ वुतॊ जामाॊ शमॊ शस्स्तनभेल ि ।ईद्वय उलाि: ितुलगं ा तथा िान्ते रबेन्भुत्रक्त ॊ ि ळाद्वतीभ ् ॥१७॥ कभायीॊ ु ऩूजसमत्ला तु ध्मात्ला दे लीॊ वुयेद्वयीभ ् ।ळतनाभ प्रलक्ष्मासभ ळृणुष्ल कभरानने । ऩूजमेत ् ऩयमा बक्त्मा ऩठे न्नाभळताद्शकभ ् ॥१८॥मस्म प्रवादभािेण दगाा ु प्रीता बलेत ् वती ॥१॥ तस्म सवत्रद्धबालेद् दे त्रल वलै् वुयलयै यत्रऩ ।ॐ वती वाध्ली बलप्रीता बलानी बलभोिनी । याजानो दावताॊ मास्न्त याज्मसश्रमभलाप्नुमात ् ॥१९॥आमाा दगाा ु जमा िाद्या त्रिनेिा ळूरधारयणी ॥२॥ गोयोिनारक्तककङ्कभेल ु ु सवन्धूयकऩूयभधुिमेण ा ।त्रऩनाकधारयणी सििा िण्डघण्टा भशातऩा् । त्रलसरख्ममन्िॊ त्रलसधनात्रलसधसो बलेत्वदाधायमतेऩुयारय्॥२०॥भनो फुत्रद्धयशॊ काया सित्तरूऩा सिता सिसत् ॥३॥ बौभालास्मासनळाभग्रे िन्द्रे ळतसबऴाॊ गते ।वलाभन्िभमी वत्ता वत्मानन्द स्लरूत्रऩणी । त्रलसरख्म प्रऩठे त ् स्तोिॊ व बलेत ् वॊऩदाॊ ऩदभ ् ॥२१॥अनन्ता बात्रलनी बाव्मा बव्माबव्मा वदागसत् ॥४॥ ॥इसत श्री त्रलद्ववायतन्िे दगााद्शोत्तयळतनाभस्तोिॊ वभाद्ऱभ ्॥ ुळाम्बली दे लभाता ि सिन्ता यत्नत्रप्रमा वदा ।वलात्रलद्या दषकन्मा दषमसत्रलनासळनी ॥५॥ त्रलळेऴ्- उऩमुक्त त्रलसध वे ‘कभायी ऩूजा’ भाव भं एक फाय ा ुअऩणाानेकलणाा ि ऩाटरा ऩाटरालती । कयना त्रलळेऴ राबदामक शोता शं । कभारयमाॉ त्रलऴभ-वॊख्मक ुऩट्टाम्फय ऩयीधाना करभञ्जीययस्ञ्जनी ॥६॥ 1, 3, 5, 7.... शोनी िाफशए।अभेमत्रलिभा िया ु वुन्दयी वुयवुन्दयी ।
  • 34. 34 अक्टू फय 2012 ॥दगाा िारीवा॥ ुनभो नभो दगे वुख कयनी। ु भफशभा असभत नजात फखानी॥१४॥ ध्माले तुम्शं जो नय भन राई।नभो नभो दगे द्ख शयनी ॥१॥ ु ु भातॊगी अरु धूभालसत भाता। ु जन्भ-भयण ताकौ िफट जाई॥२८॥सनयॊ काय शै ज्मोसत तुम्शायी। बुलनेद्वयी फगरा वुख दाता॥१५॥ जोगी वुय भुसन कशत ऩुकायी।सतशूॉ रोक परी उस्जमायी ॥२॥ ै मोगन शो त्रफन ळत्रक्त तुम्शायी॥२९॥ श्री बैयल ताया जग तारयणी।ळसळ रराट भुख भशात्रलळारा। ळॊकय आिायज तऩ कीनो। सिन्नबारबल द्खसनलारयणी॥१६॥ ुनेि रार बृकफट त्रलकयारा ॥३॥ ु काभअरु िोधजीसत वफ रीनो॥३०॥ कशरय लाशन वोश बलानी। ेरूऩ भातु को असधक वुशाले। राॊगुय लीय िरत अगलानी॥१७॥ सनसळफदन ध्मान धयो ळॊकय को।दयळकयत जन असत वुखऩाले ॥४॥ कय भं खप्ऩय खड्ग त्रलयाजै। काशुकार नफशॊ वुसभयो तुभको॥३१॥तुभ वॊवाय ळत्रक्त रै कीना। जाको दे ख कार डय बाजै॥१८॥ ळत्रक्त रूऩ का भयभ न ऩामो।ऩारन शे तु अन्न धन दीना ॥५॥ वोशै अस्त्र औय त्रिळूरा। ळत्रक्त गई तफ भन ऩसितामो॥३२॥अन्नऩूणाा शुई जग ऩारा। जाते उठत ळिु फशम ळूरा॥१९॥ ळयणागत शुई कीसता फखानी।तुभ शी आफद वुन्दयी फारा ॥६॥ नगयकोट भं तुम्शीॊ त्रलयाजत। जम जम जम जगदम्फबलानी॥३३॥प्ररमकार वफ नाळन शायी। सतशुॉरोक भं डॊ का फाजत॥२०॥ बई प्रवन्न आफद जगदम्फा।तुभ गौयी सळलळॊकय प्मायी ॥७॥ दई ळत्रक्त नफशॊ कीन त्रलरम्फा॥३४॥ ळुम्ब सनळुम्ब दानल तुभ भाये ।सळल मोगी तुम्शये गुण गालं। भोको भातु कद्श असत घेयो। यक्तफीज ळॊखन वॊशाये ॥२१॥ब्रह्मा त्रलष्णु तुम्शं सनत ध्मालं ॥८॥ तुभ त्रफन कौन शयै द्ख भेयो॥३५॥ ु भफशऴावुय नृऩ असत असबभानी।रूऩ वयस्लती को तुभ धाया। आळा तृष्णा सनऩट वतालं। जेफश अघ बाय भशी अकरानी॥२२॥ ुदे वुफुत्रद्ध ऋत्रऴ भुसनन उफाया ॥९॥ भोश भदाफदक वफ त्रफनळालं॥३६॥ रूऩ कयार कासरका धाया।धयमो रूऩ नयसवॊश को अम्फा। ळिु नाळ कीजै भशायानी। वेन वफशत तुभ सतफश वॊशाया॥२३॥ऩयगट बई पािकय खम्फा ॥१०॥ वुसभयं इकसित तुम्शं बलानी॥३७॥ ऩयी गाढ़ वन्तन ऩय जफ जफ। कयो कृ ऩा शे भातु दमारा।यषा करय प्रह्ऱाद फिामो। बईवशाम भातु तुभ तफ तफ॥२४॥ ऋत्रद्ध-सवत्रद्ध दै कयशु सनशारा।३८॥फशयण्माष को स्लगा ऩठामो॥११॥ अभयऩुयी अरु फावल रोका। जफ रसग स्जऊ दमा पर ऩाऊ। ॉ ॉरक्ष्भी रूऩ धयो जग भाशीॊ। तफ भफशभा वफ यशं अळोका॥२५॥ तुम्शयो मळ भं वदा वुनाऊ॥३९॥ ॉश्री नायामण अॊग वभाशीॊ॥१२॥ ज्लारा भं शै ज्मोसत तुम्शायी। श्री दगाा िारीवा जो कोई गालै। ुषीयसवन्धु भं कयत त्रलरावा। तुम्शं वदा ऩूजं नय-नायी॥२६॥ वफ वुख बोग ऩयभऩद ऩालै॥४०॥दमासवन्धु दीजै भन आवा॥१३॥ प्रेभ बत्रक्त वे जो मळ गालं। दोशा: दे लीदाव ळयण सनज जानी।फशॊ गराज भं तुम्शीॊ बलानी। द्ख दारयद्र सनकट नफशॊ आलं॥२७॥ ु कयशु कृ ऩा जगदम्फ बलानी॥
  • 35. 35 अक्टू फय 2012 श्रीकृ ष्ण कृ त दे ली स्तुसत नलयाि भं श्रद्धा औय प्रेभऩूलक भशाळत्रक्त बगलती दे ली की ऩूजा-उऩावना कयने वे मश सनगुण स्लरूऩा दे ली ऩृ्ली क वभस्त ा ा ेजीलं ऩय दमा कयक स्लमॊ शी वगुणबाल को प्राद्ऱ शोकय ब्रह्मा, त्रलष्णु औय भशे ळ रूऩ वे उत्ऩत्रत्त, ऩारन औय वॊशाय कामा कयती शं । ेश्रीकृ ष्ण उलाित्लभेल वलाजननी भूरप्रकृ सतयीद्वयी। त्लभेलाद्या वृत्रद्शत्रलधौ स्लेछिमा त्रिगुणास्त्भका॥१॥कामााथे वगुणा त्लॊ ि लस्तुतो सनगुणा स्लमभ ्। ऩयब्रह्मास्लरूऩा त्लॊ वत्मा सनत्मा वनातनी॥२॥ ातेज्स्लरूऩा ऩयभा बक्तानुग्रशत्रलग्रशा। वलास्लरूऩा वलेळा वलााधाया ऩयात्ऩय॥३॥वलाफीजस्लरूऩा ि वलाऩूज्मा सनयाश्रमा। वलासा वलातोबद्रा वलाभॊगरभॊगरा॥४॥अथाात् आऩ त्रलद्वजननी भूर प्रकृ सत ईद्वयी शो, आऩ वृत्रद्श की उत्ऩत्रत्त क वभम आद्याळत्रक्त क रूऩ भं त्रलयाजभान यशती शो औय े ेस्लेछिा वे त्रिगुणास्त्भका फन जाती शो।मद्यत्रऩ लस्तुत् आऩ स्लमॊ सनगुण शो तथात्रऩ प्रमोजनलळ वगुण शो जाती शो। आऩ ऩयब्रह्म स्लरूऩ, वत्म, सनत्म एलॊ वनातनी शो। ाऩयभ तेजस्लरूऩ औय बक्तं ऩय अनुग्रश कयने आऩ ळयीय धायण कयती शं। आऩ वलास्लरूऩा, वलेद्वयी, वलााधाय एलॊ ऩयात्ऩय शो। आऩवलााफीजस्लरूऩ, वलाऩूज्मा एलॊ आश्रमयफशत शो। आऩ वलास, वलाप्रकाय वे भॊगर कयने लारी एलॊ वला भॊगरं फक बी भॊगर शो। ऋग्लेदोक्त दे ली वूक्तभ ्अशसभत्मद्शिास्म वूक्त स्म लागाम्बृणी ऋत्रऴ: वस्छित्वुखात्भक: वलागत: ऩयभात्भा दे लता,फद्रतीमामा ऋिो जगती, सळद्शानाॊ त्रिद्शु ऩ ् िन्द:, दे लीभाशात्म्म ऩाठे त्रलसनमोग्।ध्मानभ ्सवॊशस्था ळसळळेखया भयकतप्रख्मैद्ळतुसबाबजै: ळङ्खॊ ििधनु:ळयाॊद्ळ दधती नेिस्स्त्रसब: ळोसबता। ुा ैआभुक्ताङ्गदशायकङ्कणयणत्काञ्िीयणन्नूऩुया दगाा दगसतशारयणी बलतु नो यत्नोल्रवत्कण्डरा॥ ु ु ा ुदे लीवूक्तभ ्अशॊ रुद्रे सबलावुसबद्ळयाम्मशभाफदत्मैरुत त्रलद्वदे लै्। अशॊ सभिालरुणोबा त्रफबम्माशसभन्द्राग्नी अशभसश्र ्लनोबा॥१॥अशॊ वोभभाशनवॊ त्रफबम्माशॊ त्लद्शायभुत ऩूऴणॊ बगभ ्। अशॊ दधासभ द्रत्रलणॊ शत्रलष्भते वुप्राव्मे मजभानाम वुन्लते॥२॥अशॊ याद्सी वॊगभनी लवूनाॊ सिफकतुऴी प्रथभा मस्समानाभ ्। ताॊ भा दे ला व्मदधु: ऩुरुिा बूरयस्थािाॊ बूय्र्मालेळमन्तीभ ्॥३॥भमावो अन्नभत्रत्त मोत्रलऩश्मसत म: प्रास्णसत मईश्रृणोत्मुक्त भ ्। अभन्तलो भाॊ तउऩ स्षमस्न्त श्रुसधश्रुत श्रत्रद्धलॊ ते लदासभ॥४॥अशभेल स्लमसभदॊ लदासभ जुद्शॊ दे लेसबरुत भानुऴेसब्। मॊ काभमे तॊ तभुग्रॊ कृ णोसभ तॊ ब्रह्माणॊ तभृत्रऴॊ तॊ वुभेधाभ ्॥५॥अशॊ रुद्राम धनुया तनोसभ ब्रह्मफद्रऴे ळयले शन्तला उ। अशॊ जनाम वभदॊ कृ णोम्मशॊ द्यालाऩृसथलीआत्रललेळ॥६॥अशॊ वुले त्रऩतयभस्म भूधन्भभ मोसनयप्स्लन्त: वभुद्रे। ततो त्रल सतद्षे बुलनानु त्रलद्वोताभूॊ द्याॊ लष्भाणोऩ स्ऩळसभ॥७॥ ा अशभेल लात इल प्रलाम्मायबभाणा बुलनासन त्रलद्वा। ऩयो फदला ऩय एना ऩृसथव्मैतालती भफशना वॊफबूल॥८॥
  • 36. 36 अक्टू फय 2012 वप्तश्र्लरोकी दगाा ु दगाा आयती ुदे त्रल त्लॊ बक्तवुरबे वलाकामात्रलधासमनी। जम अम्फे गौयी भैमा जम श्माभा गौयी।करौ फश कामासवद्धमथाभुऩामॊ ब्रूफश मित्॥ तुभको सनवफदन ध्मालत शरय ब्रम्शा सळलयी॥१॥दे ल उलाि: भाॊग सवॊदय त्रलयाजत टीको भृगभदको। ूश्रृणु दे ल प्रलक्ष्मासभ करौ वलेद्शवाधनभ। ् उज्जलर वे दोऊ नैना िन्द्रलदन नीको॥२॥भमा तलैल स्नेशेनाप्मम्फास्तुसत् प्रकाश्मते॥ कनक वभान करेलय यक्ताम्फय याजे।त्रलसनमोग् यक्त ऩुष्ऩ गर भारा कण्ठन ऩय वाजे॥३॥ॐ अस्म श्री दगाावद्ऱद्ऴोकीस्तोिभन्िस्म ु कशरय लाशन याजत खड्ग खप्ऩय धायी। ेनायामण ऋत्रऴ् अनुद्शऩिन्द्, ् वुय नय भुसन जन वेलत सतनक द्ख शायी॥४॥ े ुश्रीभह्मकारी भशारक्ष्भी भशावयस्लत्मो दे लता्,श्रीदगााप्रीत्मथं वद्ऱद्ऴोकीदगााऩाठे त्रलसनमोग्। ु ु कानन कडर ळोसबत नावाग्रे भोती। ुॊॐ सासननाभत्रऩ िेताॊसव दे ली बगलती फशवा। कोफटक िॊद्र फदलाकय याजत वभ ज्मोसत॥५॥फरादाकृ ष्म भोशाम भशाभामा प्रमछिसत॥ ळुॊब सनळॊबु त्रलदाये भफशऴावुयधाती। धूम्रत्रलरोिन नैना सनळफदन भदभाती॥६॥दगे स्भृता शयसव बीसतभळेऴजन्तो् ुस्लस्थै् स्भृता भसतभतील ळुबाॊ ददासव। िण्ड भुण्ड वॊशाये ळोस्णत फीज शये । भधु कटब दोउ भाये वुय बमशीन कये ॥७॥ ैदारयद्रमद्खबमशारयस्ण त्लदन्मा ु ब्रम्शाणी रुद्राणी तुभ कभरायानी।वलोऩकायकयणाम वदाद्रा सित्ता॥ आगभ सनगभ फखानी तुभ सळल ऩटयानी॥८॥वलाभॊगरभॊगल्मे सळले वलााथवासधक। ा ेळयण्मे त्र्मम्फक गौरय नायामस्ण नभोऽस्तुते॥ े िौवॊठ मोसगनी गालत नृत्म कयत बैरुॉ।ळयणागतदीनाताऩरयिाणऩयामणे। फाजत तार भृदॊगा अरु डभरुॉ ॥९॥वलास्मासताशये दे त्रल नायामस्ण नभोऽस्तुते॥ तुभ शी जग की भाता तुभ शी शो बयता।वलास्लरूऩे वलेळे वलाळत्रक्तवभस्न्लते। बक्तन की द्खशताा वुख वम्ऩत्रत्त कताा॥१०॥ ुबमेभ्मस्त्राफश नो दे त्रल दगे दे त्रल नभोऽस्तुते॥ ु बुजा िाय असत ळोसबत लय भुद्रा धायी। भनलाॊस्छित पर ऩाले वेलत नय नायी॥११॥योगानळोऴानऩशॊ सव तुद्शा रूद्शा तु काभान ् वकरानबीद्शान। ्त्लाभासश्रतानाॊ न त्रलऩन्नयाणाॊ त्लाभासश्रता ह्माश्रमताॊ प्रमास्न्त॥ किन थार त्रलयाजत अगय कऩुय फात्ती। ॊ श्री भार कतु भं याजत कोफट यतन ज्मोती॥१२॥ ेवलााफाधाप्रळभनॊ िैरोक्मस्मास्खरेश्र्ललरय।एलभेल त्लमा कामाभस्मद्रै रयत्रलनाळनभ॥ ् भाॉ अम्फे जी की आयती जो कोई नय गामे। कशत सळलानॊद स्लाभी वुख वॊऩत्रत्त ऩामे॥१३॥॥ इसत श्रीवद्ऱद्ऴोकी दगाा वॊऩूणभ ् ॥ ु ा
  • 37. 37 अक्टू फय 2012 ॥ सवद्धकस्जकास्तोिभ ् ॥ ुॊसळल उलाि ऐॊकायी वृत्रद्शरूऩामै ह्रीॊकायी प्रसतऩासरका।ळृणु दे त्रल प्रलक्ष्मासभ कस्जकास्तोिभुत्तभभ। ुॊ ् क्रीॊकायी काभरूत्रऩण्मै फीजरूऩे नभोऽस्तु ते॥३॥मेन भन्िप्रबालेण िण्डीजाऩ् ळुबो बलेत॥१॥ ् िाभुण्डा िण्डघाती ि मैकायी लयदासमनी॥४॥न कलिॊ नागारास्तोिॊ कीरक न यशस्मकभ। ॊ ् त्रलछिे िाबमदा सनत्मॊ नभस्ते भॊिरूत्रऩस्ण।न वूक्त नात्रऩ ध्मानॊ ि न न्मावो न ि लािानभ॥२॥ ॊ ् धाॊ धीॊ धूॊ धूजटे् ऩत्नी लाॊ लीॊ लूॊ लागधीद्वयी॥५॥ ाकस्जकाऩाठभािेण दगााऩाठपरॊ रबेत। ुॊ ु ् िाॊ िीॊ ि कासरका दे त्रल ळाॊ ळीॊ ळूॊ भे ळुबॊ करु॥६॥ ूॊ ुअसत गुह्यतयॊ दे त्रल दे लानाभत्रऩ दरबभ॥३॥ ु ा ् शुॊ शुॊ शुॊकायरूत्रऩण्मै जॊ जॊ जॊ जम्बनाफदनी।गोऩनीमॊ प्रमत्नेन स्लमोसनरयल ऩालासत। भ्राॊ भ्रीॊ भ्रूॊ बैयली बद्रे बलान्मै ते नभो नभ्भायणॊ भोशनॊ लश्मॊ स्तम्बनोछिाटनाफदकभ। ् अॊ क िॊ टॊ तॊ ऩॊ मॊ ळॊ लीॊ दॊ ु ऐॊ लीॊ शॊ षॊ॥७॥ ॊऩाठभािेण वॊसवद्धमेत ् कस्जकास्तोिभुत्तभभ॥४॥ ुॊ ् सधजाग्रॊ सधजाग्रॊ िोटम िोटम दीद्ऱॊ करु करु स्लाशा॥ ु ुअथ भॊि ऩाॊ ऩीॊ ऩूॊ ऩालाती ऩूणाा खाॊ खीॊ खूॊ खेियी तथा ॥८॥ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलछिे। ॐ ग्रं शुॊ क्रीॊ जूॊ व् वाॊ वीॊ वूॊ वद्ऱळती दे व्मा भॊिसवत्रद्धॊ करुष्ल भे॥ ुज्लारम ज्लारम ज्लर ज्लर प्रज्लर प्रज्लर ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ इदॊ तु कस्जकास्तोिॊ भॊिजागसताशेतले। ुॊिाभुण्डामै त्रलछिे ज्लर शॊ वॊ रॊ षॊ पट् स्लाशा अबक्त नैल दातव्मॊ गोत्रऩतॊ यष ऩालासत॥ ेइसत भॊि् मस्तु कस्जकमा दे त्रल शीनाॊ वद्ऱळतीॊ ऩठे त। ुॊ ्नभस्ते रुद्ररूत्रऩण्मै नभस्ते भधुभफदासन। न तस्म जामते सवत्रद्धययण्मे योदनॊ मथा॥नभ् कटबशारयण्मै नभस्ते भफशऴाफदा सन॥१॥ ै । इसत श्री कस्जकास्तोिभ ् वॊऩणभ ् । ुॊ ू ानभस्ते ळुम्बशन्त्र्मै ि सनळुम्बावुयघासतसन।जाग्रतॊ फश भशादे त्रल जऩॊ सवद्धॊ करुष्ल भे॥२॥ ु दगााद्शकभ ् ुदगे ऩये सळ ळुबदे सळ ऩयात्ऩये सळ। ु ऩूज्मे भशालृऴबलाफशसन भॊगरेसळ। भोषेऽस्स्थये त्रिऩुयवुन्दरयऩाटरेसळ।लन्द्ये भशे ळदसमतेकरुणाणालसळ। े ऩद्मे फदगम्फरय भशे द्वरय काननेसळ। भाशे द्वरय त्रिनमने प्रफरे भखेसळ।स्तुत्मे स्लधे वकरताऩशये वुयेसळ। यम्मेधये वकरदे लनुते गमेसळ। तृष्णे तयॊ सगस्ण फरे गसतदे ध्रुलेसळ।कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥१॥ ु कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩा रसरतेऽस्खरेसळ॥४॥ ु कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥७॥ ुफदव्मे नुते श्रुसतळतैत्रलाभरे बलेसळ। श्रद्धे वुयाऽवुयनुते वकरे जरेसळ। त्रलद्वम्बये वकरदे त्रलफदते जमेसळ।कन्दऩादायळतमुन्दरय भाधलेसळ। गॊगे सगयीळदसमते गणनामकसळ। े त्रलन्ध्मस्स्थते ळसळभुस्ख षणदे दमेसळ।भेधे सगयीळतनमे सनमते सळलेसळ। दषे स्भळानसनरमे वुयनामकसळ। े भात् वयोजनमने यसवक स्भये सळ। ेकृ ष्णस्तुते करु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥२॥ ु कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥५॥ ु कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥८॥ ुयावेद्वरय प्रणतताऩशये करेसळ। ु ताये कृ ऩाद्रा नमने भधुकटबेसळ। ै दगााद्शक ऩठसत म् प्रमत् प्रबाते ु ॊधभात्रप्रमे बमशये लयदाग्रगेसळ। त्रलद्येद्वये द्वरय मभे सनखराषये सळ। वलााथदॊ शरयशयाफदनुताॊ लये ण्माभ। ा ्लाग्दे लते त्रलसधनुते कभरावनेसळ। ऊजे ितु्स्तसन वनातसन भुक्तकसळ। े दगां वुऩज्म भफशताॊ त्रलत्रलधोऩिायै ् ु ूकृ ष्णस्तुतेकरु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥३॥ ु कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩाॊ रसरतऽस्खरेसळ॥६॥ ु प्राप्नोसत लाॊसितपरॊ न सियान्भनुष्म्॥९॥ ॥ इसत श्री दगााद्शक वम्ऩूणभ ् ॥ ु ॊ ा
  • 38. 38 अक्टू फय 2012 ॥ बलान्मद्शकभ ् ॥न तातो न भाता न फन्धुना दाता ककभॉ कवॊगी कफुत्रद्ध कदाव् ु ु ु ुन ऩुिो न ऩुिी न बृत्मो न बताा। करािायशीन् कदािायरीन्। ुन जामा न त्रलद्या न लृत्रत्तभाभैल कदृत्रद्श् कलाक्मप्रफॊध् वदाऽश ु ुगसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥१॥ गसतस्त्ल गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥५॥बलाब्धालऩाये भशाद्खबीरु् ु प्रजेळॊ यभेळॊ भशे ळॊ वुयेळॊऩऩात प्रकाभी प्ररोबी प्रभत्त्। फदनेळॊ सनळीथेद्वयॊ ला कदासित। ्कवॊवाय-ऩाळ-प्रफद्ध् वदाऽशॊ ु न जानासभ िाऽन्मत ् वदाऽशॊ ळयण्मेगसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥२॥ गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥६॥न जानासभ दानॊ न ि ध्मान-मोगॊ त्रललादे त्रलऴादे प्रभादे प्रलावेन जानासभ तॊि न ि स्तोि-भन्िभ। ् जरे िाऽनरे ऩलाते ळिुभध्मे।न जानासभ ऩूजाॊ न ि न्मावमोगॊ अयण्मे ळयण्मे वदा भाॊ प्रऩाफशगसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥३॥ गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥७॥न जानासभ ऩुण्मॊ न जानासन तीथं अनाथो दरयद्रो जया-योगमुक्तोन जानासभ भुत्रक्त रमॊ ला कदासित। ॊ ् भशाषीणदीन् वदा जाड्मलक्ि्।न जानासभ बत्रक्त व्रतॊ लाऽत्रऩ भात- त्रलऩत्तौ प्रत्रलद्श् प्रणद्श् वदाऽशॊगासतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥४॥ गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥८॥ ॥ इसत श्रीबलान्मद्शक वॊऩूणभ ् ॥ ॊ ा षभा-प्राथाना अऩयाधवशस्त्रास्ण फिमन्तेऽशसनाळॊ भमा। दावोऽमसभसत भाॊ भत्ला षभस्ल ऩयभेद्वरय॥१॥ आलाशनॊ न जानासभ न जानासभ त्रलवजानभ ्। ऩूजाॊ िैल न जानासभ षम्मताॊ ऩयभेद्वरय॥२॥ भन्िशीनॊ फिमाशीनॊ बत्रक्तशीनॊ वुयेद्वरय। मत्ऩूस्जतॊ भमा दे त्रल ऩरयऩूणा तदस्तु भे॥३॥ अऩयाधळतॊ कृ त्ला जगदम्फेसत िोछिये त ्। माॊ गसतॊ वभलाऩनेसत न ताॊ ब्रह्मादम: वुया्॥४॥ वाऩयाधोऽस्स्भ ळयणॊ प्राद्ऱस्त्लाॊ जगदस्म्फक। इदानीभनुकम्प्मोऽशॊ मथेछिसव तथा करु॥५॥ े ु असानाफद्रस्भृतेभ्ररान्त्मा मन्न्मूनभसधक कृ तभ ्। तत्वला षम्मताॊ दे त्रल प्रवीद ऩयभेद्वरय॥६॥ ॊ काभेद्वरय जगन्भात: वस्छिदानन्दत्रलग्रशे । गृशाणािाासभभाॊ प्रीत्मा प्रवीद ऩयभेद्वरय॥७॥ गुह्यासतगुह्यगोप्िी त्लॊ गृशाणास्भत्कृ तॊ जऩभ ्। सवत्रद्धबालतु भे दे त्रल त्लत्प्रवादात्वुयेद्वरय॥८॥
  • 39. 39 अक्टू फय 2012 दगााद्शोत्तय ळतनाभ स्तोिभ ् ुळतनाभ प्रलक्ष्मासभ ळृणुष्ल कभरानने। अनेकळस्त्रशस्ता ि अनेकास्त्रस्म धारयणी।मस्म प्रवादभािेण दगाा प्रीता बलेत ् वती॥१॥ ु कभायी िैककन्मा ि कळोयी मुलती मसत्॥१२॥ ु ैवती वाध्ली बलप्रीता बलानी बलभोिनी। अप्रौढा िैल प्रौढा ि लृद्धभाता फरप्रदा।आमाा दगाा जमा िाद्या त्रिनेिा ळूरधारयणी॥२॥ ु भशोदयी भुक्त कळी घोयरूऩा भशाफरा॥१३॥ ेत्रऩनाकधारयणी सििा िण्डघण्टा भशातऩा्। अस्ग्नज्लारा यौद्रभुखी कारयात्रिस्तऩस्स्लनी।भनो फुत्रद्धयशॊ काया सित्तरूऩा सिता सिसत्॥३॥ नायामणी बद्रकारी त्रलष्णुभामा जरोदयी॥१४॥वलाभन्िभमी वत्ता वत्मानन्दस्लरूत्रऩणी। सळलदती कयारी ि अनन्ता ऩयभेद्वयी। ूअनन्ता बात्रलनी बाव्मा बव्माबव्मा वदागसत्॥४॥ कात्मामनी ि वात्रलिी प्रत्मषा ब्रह्मलाफदनी॥१५॥ळाम्बली दे लभाता ि सिन्ता यत्नत्रप्रमा वदा। म इदॊ प्रऩठे स्न्नत्मॊ दगाानाभळताद्शकभ ्। ुवलात्रलद्या दषकन्मा दषमसत्रलनासळनी॥५॥ नावाध्मॊ त्रलद्यते दे त्रल त्रिऴु रोकऴु ऩालासत॥१६॥ ेअऩणाानेकलणाा ि ऩाटरा ऩाटरालती। धनॊ धान्मॊ वुतॊ जामाॊ शमॊ शस्स्तनभेल ि।ऩट्टाम्फयऩयीधाना करभञ्जीययस्ञ्जनी॥६॥ ितुलगा तथा िान्ते रबेन्भुत्रक्त ि ळाद्वतीभ ्॥१७॥ ा ॊअभेमत्रलिभा िया वुन्दयी वुयवुन्दयी। ू कभायीॊ ऩूजसमत्ला तु ध्मात्ला दे लीॊ वुयेद्वयीभ ्। ुलनदगाा ि भातङ्गी भतङ्गभुसनऩूस्जता॥७॥ ु ऩूजमेत ् ऩयमा बक्त्मा ऩठे न्नाभळताद्शकभ ्॥१८॥ब्राह्मी भाशे द्वयी िैन्द्री कौभायी लैष्णली तथा। तस्म सवत्रद्धबालेद् दे त्रल वलै: वुयलयै यत्रऩ।िाभुण्डा िैल लायाशी रक्ष्भीद्ळ ऩुरुऴाकृ सत्॥८॥ याजानो दावताॊ मास्न्त याज्मसश्रमभलाऩनुमात ्॥१९॥त्रलभरोत्कत्रऴणी साना फिमा सनत्मा ि फुत्रद्धदा। ा गोयोिनारक्त ककङ्कभेन सवन्दयकऩूयभधुिमेण। ु ु ू ाफशुरा फशुरप्रेभा वलालाशनलाशना॥९॥ त्रलसरख्म मन्िॊ त्रलसधना त्रलसधसो बलेत ् वदा धायमतेसनळुम्बळुम्बशननी भफशऴावुयभफदा नी। ऩुयारय्॥२०॥भधुकटबशन्िी ि िण्डभुण्डत्रलनासळनी॥१०॥ ै बौभालास्मासनळाभग्रे िन्द्रे ळतसबऴाॊ गते।वलाावुयत्रलनाळा ि वलादानलघासतनी। त्रलसरख्म प्रऩठे त ् स्तोिॊ व बलेत ् वम्ऩदाॊ ऩदभ ्॥२१॥वलाळास्त्रभमी वत्मा वलाास्त्रधारयणी तथा॥११॥ ळादी वॊफॊसधत वभस्मा क्मा आऩक रडक-रडकी फक आऩकी ळादी भं अनालश्मक रूऩ वे त्रलरम्फ शो यशा शं मा उनक लैलाफशक जीलन भं खुसळमाॊ कभ े े े शोती जायशी शं औय वभस्मा असधक फढती जायशी शं । एवी स्स्थती शोने ऩय अऩने रडक-रडकी फक कडरी का े ुॊ अध्ममन अलश्म कयलारे औय उनक लैलाफशक वुख को कभ कयने लारे दोऴं क सनलायण क उऩामो क फाय भं त्रलस्ताय वे े े े े जनकायी प्राद्ऱ कयं । GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
  • 40. 40 अक्टू फय 2012 त्रलद्वॊबयी स्तुसत त्रलद्वॊबयी स्तुसत भूर रुऩवे गुजयाती भं लल्रब बट्ट द्राया सरखी गई शं । स्लस्स्तक.ऎन.जोळीत्रलद्वॊबयी अस्खर त्रलद्वतणी जनेता। ये ये बलानी फशु बूर थई ज भायी।त्रलद्या धयी लदनभाॊ लवजो त्रलधाता॥ आ स्जॊदगी थई भने असतळे अकायी॥दफुत्रद्ध दय कयी वद्दफुत्रद्ध आऩो। ु ा ु दोऴो प्रजासऱ वधऱा तल िाऩ िाऩो।भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥१॥ ु भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥७॥ ुबूरो ऩफड बलयने बटक बलानी। ुॊ खारी न कोइ स्थऱ िे त्रलण आऩ धायो।वुझे नफश रगीय कोइ फदळा जलानी॥ ब्रह्माॊडभाॊ अणु-अणु भशीॊ लाव तायो॥बावे बमॊकय लऱी भनना उताऩो। ळत्रक्त न भाऩ गणला अगस्णत भाऩो।भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥२॥ ु भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥८॥ ुआ यॊ कने उगयला नथी कोइ आयो। ऩाऩो प्रऩॊि कयला फधी यीते ऩूयो। ुजन्भाॊध ि जननी शु ग्रशी शाथ तायो॥ खोटो खयो बगलती ऩण शुॊ तभायो॥ना ळुॊ वुणो बगलती सळळुना त्रलराऩो। जाडमाॊधकाय कयी दय वुफुत्रद्ध स्थाऩो। ूभाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥३॥ ु भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥९॥ ुभा कभा जन्भ कथनी कयताॊ त्रलिारु। ळीखे वुणे यसवक िॊ द ज एक सित्ते।आ वृत्रद्शभाॊ तुज त्रलना नथी कोइ भारु॥ तेना थकी त्रित्रलध ताऩ टऱे खसिते॥कोने कशुॊ कठण काऱ तणो फऱाऩो। फुत्रद्ध त्रलळेऴ जगदॊ फ तणा प्रताऩो।भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥४॥ ु भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥१०॥ ुशुॊ काभ िोध भध भोश थकी बये रो। श्री वदगुरु ळयनभाॊ यशीने मजुॊ िॊु ।आडॊ फये असत धणो भद्थी िकरो॥ े ु यात्रि फदने बगलती तुजने बजुॊ ि॥दोऴो फधा दय कयी भाप ऩाऩो। ू वदबक्त वेलक तणा ऩरयताऩ िाऩो।भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥५॥ ु भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥११॥ ुना ळास्त्रना श्रलणनु ऩम्ऩान ऩीधु। अॊतय त्रलऴे असधक उसभा थताॊ बलानी।ना भॊि क स्तुसत कथा नथी काइ कीधु॥ े गाऊ स्तुसत तल फऱे नभीने भृडानी॥श्रद्धा धयी नथी कमाा तल नाभ जाऩो। वॊवायना वकऱ योग वभूऱ काऩो।भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥६॥ ु भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥१२॥ ु
  • 41. 41 अक्टू फय 2012 भफशऴावुयभफदा सनस्तोिभ ्||बगलतीऩद्यऩुष्ऩाॊजसरस्तोि भफशऴावुयभफदा सनस्तोिभ ् || लासवसन शावयते सळखरय सळयोभस्ण तुङ्ग फशभारम ळृॊग श्री त्रिऩुयवुन्दमै नभ् || सनजारम भध्मगते | भधु भधुये भधु कटब गॊस्जसन कटब ै ैबगलती बगलत्ऩदऩङ्कजॊ भ्रभयबूतवुयावुयवेत्रलतभ ् | बॊस्जसन यावयते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सनवुजनभानवशॊ वऩरयस्तुतॊ कभरमाऽभरमा सनबृतॊ बजे ||१|| यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||३||||९|| असम ळतखण्डते उबे असबलन्दे ऽशॊ त्रलघ्नेळकरदै लते | नयनागाननस्त्लेको ु त्रलखस्ण्डत रुण्ड त्रलतुस्ण्डत ळुण्ड गजासधऩते रयऩु गज गण्डनयसवॊश नभोऽस्तुते ||२|| शरयगुरुऩदऩद्मॊ ळुद्धऩद्येऽनुयागाद् त्रलदायण िण्ड ऩयािभ ळुण्ड भृगासधऩते | सनज बुज दण्डत्रलगतऩयभबागे वस्न्नधामादये ण | तदनुिरय कयोसभ प्रीतमे सनऩासतत खण्ड त्रलऩासतत भुण्ड बटासधऩते जम जम शेबत्रक्तबाजाॊ बगलसत ऩदऩद्मे ऩद्यऩुष्ऩाञ्जसरॊ ते ||३|| कनैते े भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||४||||१०|| असमयसिता् कतो न सनफशता् ळुम्बादमो दभदा् कनैते तल ु ु ा े यण दभद ळिु लधोफदत दधय सनजाय ळत्रक्तबृते ितुय त्रलिाय ु ा ु ाऩासरता इसत फश तत ् प्रद्ले फकभािक्ष्भशे | ब्रह्माद्या अत्रऩ धुयीण भशासळल दतकृ त ू प्रभथासधऩते | दरयत ु दयीश ुळॊफकता् स्लत्रलऴमे मस्मा् प्रवादालसध प्रीता वा दयाळम ु दभसत ु ा दानलदत ू कृ ताॊतभते जम जम शेभफशऴावुयप्रभसथनीछ्द्यादलद्यासन भे ||४|| ऩातु श्रीस्तु भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||५||||११|| असमितुबुजा फकभु ितुफााशोभाशौजान्बुजान ् धत्तेऽद्शादळधा फश ा ळयणागत लैरय लधूलय लीय लयाबम दामकये त्रिबुलनकायणगुणान्कामे गुणायम्बका् | वत्मॊ भस्तक ळूर त्रलयोसध सळयोसध कृ ताभर ळूरकये | दसभदसभ ु ुफदक्ऩसतदस्न्तवॊख्मबुजबृछिम्बु् स्लय्म्बू् स्लमॊ ताभय दॊ दसबनाद भशो भुखयीकृ त सतग्भकये जम जम शे ु ुधाभैकप्रसतऩत्तमे फकभथला ऩातुॊ दळाद्शौ फदळ् ||५|| भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||६||||१२|| असमप्रीत्माऽद्शादळवॊसभतेऴु मुगऩद्द्रीऩेऴु दातुॊ लयान ् िातुॊ ला सनज शुॉकृसत भाि सनयाकृ त धूम्र त्रलरोिन धूम्र ळते वभयबमतो त्रफबत्रऴा बगलत्मद्शादळैतान ् बुजान ् | मद्राऽद्शादळधा त्रलळोत्रऴत ळोस्णत फीज वभुद्भल ळोस्णत फीज रते | सळलबुजाॊस्तु त्रफबृत् कारी वयस्लत्मुबे भीसरत्लैकसभशानमो् सळल ळुॊब सनळुॊब भशाशल तत्रऩात बूत त्रऩळाियते जम जमप्रथसमतुॊ वा त्लॊ यभे यषभाभ ् ||६|| असम सगरयनॊफदसन शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||७||||१३||नॊफदतभेफदसन त्रलद्वत्रलनोफदसन नॊदनुते सगरयलय त्रलॊध्म धनुयनु वॊग यणषणवॊग ऩरयस्पय दॊ ग नटत्कटक कनक ु ेसळयोसधसनलासवसन त्रलष्णुत्रलरासवसन स्जष्णुनुते | बगलसत शे त्रऩळॊग ऩृऴत्क सनऴॊग यवद्भट ळृॊग शतालटु क | कृ त ेसळसतकण्ठकटु ॊ त्रफसन बूरय कटु ॊ त्रफसन बूरय कृ ते जम जम शे ु ु ितुयङ्ग फरस्षसत यङ्ग घटद्बशुयङ्ग यटद्बटु क जम जम शे ेभफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||१||||७|| भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||१४||वुयलयलत्रऴास्ण दधयधत्रऴास्ण ु ा दभखभत्रऴास्ण ु ुा शऴायते वुयररनाततथेसमतथेसमतथासबनमोत्तयनृत्मयतेत्रिबुलनऩोत्रऴस्ण ळॊकयतोत्रऴस्ण फकस्ल्फऴभोत्रऴस्ण घोऴयते | शावत्रलरावशुरावभसम प्रणताताजनेऽसभतप्रेभबये |दनुज सनयोत्रऴस्ण फदसतवुत योत्रऴस्ण दभद ु ा ळोत्रऴस्ण सधसभफकटसधक्कटसधकटसधसभध्लसनघोयभृदॊगसननादयते जमसवन्धुवुते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुतेळैरवुते ||२||||८|| असम जगदॊ फ भदॊ फ कदॊ फ लनत्रप्रम ||८||||१५|| जम जम जप्म जमेजम ळब्द ऩयस्तुसत
  • 42. 42 अक्टू फय 2012तत्ऩय त्रलद्वनुते झण झण स्झस्ञ्जसभ स्झॊकृत नूऩुय सवॊस्जत वशस्रोकयै कनुते कृ त वुयतायक वङ्गयतायक वङ्गयतायकभोफशत बूतऩते | नफटत नटाधा नटीनट नामक नाफटत वूनुवुते | वुयथ वभासध वभानवभासध वभासधवभासधनाट्म वुगानयते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन वुजातयते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सनयम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||९||||१६|| असम वुभन् वुभन् ळैरवुते ||१६||||२३|| ऩदकभरॊ करुणासनरमे लरयलस्मसतवुभन् वुभन् वुभनोशय काॊसतमुते सश्रत यजनी यजनी मोऽनुफदनॊ व सळले असम कभरे कभरासनरमेयजनी यजनी यजनीकय लक्िलृते | वुनमन त्रलभ्रभय भ्रभय कभरासनरम् व कथॊ न बलेत ् | तल ऩदभेलभ्रभय भ्रभय भ्रभयासधऩते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन ऩयॊ ऩदसभत्मनुळीरमतो भभ फक न सळले जम जम शे ॊयम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||१०||||१७|| वफशत भशाशल भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||१७||||२४||भल्रभ तस्ल्रक भस्ल्रत यल्रक भल्रयते त्रलयसित कनकरवत्कर सवन्धु जरैयनु सवस्ञ्िनुते गुण यङ्गबुलॊलस्ल्रक ऩस्ल्रक भस्ल्रक स्झस्ल्रक सबस्ल्रक लगा लृते | बजसत व फक न ळिीकि कब तटी ऩरययॊ ब वुखानुबलभ ् ॊ ु ॊुसवतकृ त पस्ल्रवभुल्र ु सवतारुण तल्रज ऩल्रल | तल ियणॊ ळयणॊ कयलास्ण नताभयलास्ण सनलासव सळलॊवल्रसरते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुतेळैरवुते ||११||||१८|| अत्रलयर गण्ड गरन्भद भेदय भत्त ु ||१८||||२५|| तल त्रलभरेन्दकरॊ लदनेन्दभरॊ वकरॊ ननु ु ु ुभतङ्गज याजऩते त्रिबुलन बूऴण बूत करासनसध रूऩ करमते ू फकभु ऩुरुशूत ऩुयीन्दभुखी ु वुभुखीसबयवौऩमोसनसध याजवुते | असम वुद तीजन रारवभानव भोशन त्रलभुखीफिमते | भभ तु भतॊ सळलनाभधने बलती कृ ऩमाभन्भथ याजवुते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन फकभुत फिमते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सनयम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||१२||||१९|| कभर दराभर कोभर ळैरवुते ||१९||||२६|| असम भसम दीनदमारुतमा कृ ऩमैलकाॊसत कराकसरताभर बाररते वकर त्रलराव त्लमा बत्रलतव्मभुभे असम जगतो जननी कृ ऩमासव मथासवकरासनरमिभ कसर िरत्कर शॊ व करे | असरकर े ु ु तथाऽनुसभतासवयते | मदसितभि ु बलत्मुयरयवङ्कर कलरम भण्डर भौसरसभरद्भकरासर करे जम जम ु ु ु ु करुतादरुताऩभऩाकरुते ु ु ु जम जम शे भफशऴावुयभफदा सनशे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||१३||||२०|| यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||२०||||२७|| स्तुसतसभतस्स्तसभत्कय भुयरी यल लीस्जत कस्जत रस्ज्जत कोफकर भञ्जुभते ू वुवभासधना सनमभतोऽमभतोऽनुफदनॊ ऩठे त ् | ऩयभमासभसरत ऩुसरन्द भनोशय गुस्ञ्जत यॊ स्जतळैर सनकञ्जगते | ु यभमात्रऩ सनऴेव्मते ऩरयजनोऽरयजनोऽत्रऩ ि तॊ बजेत ्सनजगुण बूत भशाळफयीगण वद्गण वॊबत कसरतरे जम ु ृ े ||२८|| यभमसत फकर कऴास्तेऴु सित्तॊ नयाणाभलयजलयजम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते मस्भाद्राभकृ ष्ण् कलीनाभ ् | अकृ त वुकृसतगम्मॊ||१४||||२१|| कफटतट ऩीत दकर त्रलसिि भमूखसतयस्कृ त ु ू यम्मऩद्दै कशम्मं स्तलनभलनशे तुॊ प्रीतमे त्रलद्वभातु् ||२९||िॊद्र रुिे प्रणत वुयावुय भौसरभस्णस्पय दॊ ळुर वन्नख िॊद्र ु इन्दयम्मो भुशुत्रफान्दयम्मो भुशुत्रफान्दयम्मो मत् वोऽनलद्य् ु ु ुरुिे | स्जत कनकािर भौसरऩदोस्जात सनबाय कजय ुॊ स्भृत् | श्रीऩते् वूनूना कारयतो मोऽधुना त्रलद्वभातु् ऩदेकबकिे ुॊ ु जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ऩद्यऩुष्ऩाञ्जसर् ||३०||ळैरवुते ||१५||||२२|| त्रलस्जत वशस्रोकयै क वशस्रोकयै क || इसत श्रीबगलतीऩद्यऩुष्ऩाञ्जसरस्तोिभ ् ||
  • 43. 43 अक्टू फय 2012 गुद्ऱ वद्ऱळती.  स्लस्स्तक.ऎन.जोळी, आरोक ळभाा वॊऩूणा श्री दगाा वद्ऱळती क भॊिो का ऩाठ कयने वे ु े जाग्रतॊ फश भशा-दे त्रल जऩ-सवत्रद्धॊ करुष्ल भे॥ ुवाधक को जो पर प्राद्ऱ शोता शै , लैवा शी कल्माणकायी ऐॊ-कायी वृत्रद्शरूऩामै ह्रीॊकायी प्रसत-ऩासरका॥पर प्रदान कयने लारा गुद्ऱ वद्ऱळती क भॊिो का ऩाठ शं । े क्रीॊ-कायी काभरूत्रऩण्मै फीजरूऩा नभोऽस्तु ते। गुद्ऱ वद्ऱळती भं असधकतय भॊि फीजं क शोने वे े िाभुण्डा िण्ड-घाती ि मं-कायी लय-दासमनी॥मश वाधकं क सरए अभोघ पर प्रदान कयने भं वभथा शं । े त्रलछिे नोऽबमदा सनत्मॊ नभस्ते भॊिरूत्रऩस्ण॥गुद्ऱ वद्ऱळती क ऩाठ का िभ इव प्रकाय शं । े धाॊ धीॊ धूॊ धूजटेऩात्नी लाॊ लीॊ लागेद्वयी तथा। ा प्रायम्ब भं कस्ञ्जका ु स्तोि उवके फाद गुद्ऱ िाॊ िीॊ श्रीॊ भे ळुबॊ करु, ऐॊ ॐ ऐॊ यष वलादा।। ुवद्ऱळती उवक ऩद्ळमात स्तलन का ऩाठ कये । े ॐ ॐ ॐ-काय-रुऩामै, ज्राॊ-ज्राॊ ज्रम्बार-नाफदनी। कस्ञ्जका-स्तोि ु िाॊ िीॊ ि कासरका दे त्रल, ळाॊ ळीॊ ळूॊ भे ळुबॊ करु॥ ूॊ ुऩूल-ऩीफठका-ईद्वय उलाि: ा ह्रूॊ ह्रूॊ ह्रूॊ-कायरूत्रऩण्मै ज्रॊ ज्रॊ ज्रम्बार-नाफदनी।श्रृणु दे त्रल, प्रलक्ष्मासभ कस्ञ्जका-भन्िभुत्तभभ ्। ु भ्राॊ भ्रीॊ भ्रूॊ बैयली बद्रे बलासन ते नभो नभ्॥7॥मेन भन्िप्रबालेन िण्डीजाऩॊ ळुबभ ् बलेत ्॥१॥ भन्ि:न लभा नागारा-स्तोिॊ कीरकॊ न यशस्मकभ ्। अॊ क िॊ टॊ तॊ ऩॊ मॊ ळॊ त्रफन्दयात्रलबाल, आत्रलबाल, शॊ वॊ रॊ षॊ ॊ ुन वूक्तभ ् नात्रऩ ध्मानभ ् ि न न्मावभ ् ि न िािानभ ्॥२॥ भसम जाग्रम-जाग्रम, िोटम-िोटम दीद्ऱॊ करु करु स्लाशा॥ ु ुकस्ञ्जका-ऩाठ-भािेण ु दगाा-ऩाठ-परॊ ु रबेत ्। ऩाॊ ऩीॊ ऩूॊ ऩालाती ऩूणाा, खाॊ खीॊ खूॊ खेियी तथा॥असत गुह्यतभभ ् दे त्रल दे लानाभत्रऩ दराबभ ्॥३॥ ु म्राॊ म्रीॊ म्रूॊ दीव्मती ऩूणाा, कस्ञ्जकामै नभो नभ्॥ ुगोऩनीमभ ् प्रमत्नेन स्ल-मोसन-लछि ऩालासत। वाॊ वीॊ वद्ऱळती-सवत्रद्धॊ , करुष्ल ु जऩ-भाित्॥भायणभ ् भोशनभ ् लश्मभ ् स्तम्बनोछिाटनाफदकभ ्। इदॊ तु कस्ञ्जका-स्तोिॊ ु भॊि-जार-ग्रशाॊ त्रप्रमे।ऩाठ-भािेण वॊसवत्रद्ध् कस्ञ्जकाभन्िभुत्तभभ ्॥४॥ ु अबक्त े ि न दातव्मॊ, गोऩमेत ् वलादा श्रृणु॥अथ भन्ि: कस्जका-त्रलफशतॊ ुॊ दे त्रल मस्तु वद्ऱळतीॊ ऩठे त ्।ॐ द्ऴं दॉ ु क्रीॊ क्रं जुॊ व् ज्लरमोज्ज्लर ज्लर प्रज्लर- न तस्म जामते सवत्रद्धॊ , अयण्मे रुदनॊ मथा॥प्रज्लर प्रफर-प्रफर शॊ वॊ रॊ षॊ पट् स्लाशा ॥इसत श्रीरुद्रमाभरे गौयीतॊिे सळलऩालातीवॊलादेइसत भन्ि: कस्जकास्तोिॊ वॊऩूणभ ्॥ ुॊ ाइव कस्ञ्जका भन्ि का दव फाय जऩ कयना िाफशए। इवी ुप्रकाय स्तल-ऩाठ क अन्त भं ऩुन् इव भन्ि का दव फाय जऩ े गुद्ऱ-वद्ऱळतीकय कस्ञ्जका स्तोि का ऩाठ कयना िाफशए। ु ॐ ब्रीॊ-ब्रीॊ-ब्रीॊ लेणु-शस्ते, स्तुत-वुय-फटु कशां गणेळस्म भाता। ैकस्ञ्जका स्तोि भूर-ऩाठ ु स्लानन्दे नन्द-रुऩे, अनशत-सनयते, भुत्रक्तदे भुत्रक्त-भागे॥नभस्ते रुद्र-रूऩामै, नभस्ते भधु-भफदा सन। शॊ व् वोशॊ त्रलळारे, लरम-गसत-शवे, सवद्ध-दे ली वभस्ता।नभस्ते कटबायी ि, नभस्ते भफशऴावसन॥ ै शीॊ-शीॊ-शीॊ सवद्ध-रोक, कि-रुसि-त्रलऩुरे, लीय-बद्रे नभस्ते॥१॥ ेनभस्ते ळुम्बशॊ िेसत, सनळुम्बावुय-घासतसन।
  • 44. 44 अक्टू फय 2012ॐ शीॊकायोछिायमन्ती, भभ शयसत बमॊ, िण्ड-भुण्डौ प्रिण्डे । ॐ शुॉ शुॉ शुॊकाय-नादे , त्रलऴभलळ-कये , मष-लैतार-नाथे।खाॊ-खाॊ-खाॊ खड्ग-ऩाणे, ध्रक-ध्रक ध्रफकते, उग्र-रुऩे स्लरुऩे॥ वु-सवद्धमथे वु-सवद्धै ्, ठठ-ठठ-ठठठ्, वला-बषे प्रिण्डे ॥शुॉ-शुॉ शुॉकाॊय-नादे , गगन-बुत्रल-तरे, व्मात्रऩनी व्मोभ-रुऩे। जूॊ व् वं ळास्न्त-कभेऽभृत-भृत-शये , सन्वभेवॊ वभुद्रे।शॊ -शॊ शॊ काय-नादे , वुय-गण-नसभते, िण्ड-रुऩे नभस्ते॥२॥ दे त्रल, त्लॊ वाधकानाॊ, बल-बल लयदे , बद्र-कारी नभस्ते॥८॥ ब्रह्माणी लैष्णली त्लॊ, त्लभसव फशुिया, त्लॊ लयाश-स्लरुऩा।ऐॊ रोक कीतामन्ती, भभ शयतु बमॊ, याषवान ् शन्मभाने। े त्लॊ ऐन्द्री त्लॊ कफेयी, त्लभसव ि जननी, त्लॊ कभायी भशे न्द्री॥ ु ुघ्राॊ-घ्राॊ-घ्राॊ घोय-रुऩे, घघ-घघ-घफटते, घघाये घोय-याले॥ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊकाय-बूते, त्रलतर-तर-तरे, बू-तरे स्लगा-भागे।सनभांवे काक-जॊघे, घसवत-नख-नखा, धूम्र-नेिे त्रि-नेिे। ऩातारे ळैर-श्रृगे, शरय-शय-बुलने, सवद्ध-िण्डी नभस्ते॥९॥ ॊशस्ताब्जे ळूर-भुण्डे , कर-कर ककरे, सवद्ध-शस्ते नभस्ते॥३॥ ु ु ु शॊ रॊ षॊ ळौस्ण्ड-रुऩे, ळसभत बल-बमे, वला-त्रलघ्नान्त-त्रलघ्ने।ॐ िीॊ-िीॊ-िीॊ ऐॊ कभायी, कश-कश-भस्खरे, कोफकरेनानुयागे। ु ु ु गाॊ गीॊ गूॊ गं ऴडॊ गे, गगन-गसत-गते, सवत्रद्धदे सवद्ध-वाध्मे॥भुद्रा-वॊस-त्रि-ये खा, करु-करु वततॊ, श्री भशा-भारय गुह्ये॥ ु ु लॊ ि भुद्रा फशभाॊळोप्राशवसत-लदने, त्र्मषये ॊ ह्वं सननादे ।तेजाॊगे सवत्रद्ध-नाथे, भन-ऩलन-िरे, नैल आसा-सनधाने। शाॊ शूॊ गाॊ गीॊ गणेळी, गज-भुख-जननी, त्लाॊ भशे ळीॊ नभासभ॥१०॥ऐॊकाये यात्रि-भध्मे, स्लत्रऩत-ऩळु-जने, ति कान्ते नभस्ते॥४॥ स्तलनॐ व्राॊ-व्रीॊ-व्रूॊ व्रं कत्रलत्ले, दशन-ऩुय-गते रुस्क्भ-रुऩेण िि। े मा दे ली खड्ग-शस्ता, वकर-जन-ऩदा, व्मात्रऩनी त्रलळऽल-दगाा। ुत्रि्-ळक्तमा, मुक्त-लणााफदक, कय-नसभते, दाफदलॊ ऩूल-लणे॥ ा श्माभाॊगी ळुक्र-ऩाळास्ब्द जगण-गस्णता, ब्रह्म-दे शाधा-लावा॥ह्रीॊ-स्थाने काभ-याजे, ज्लर-ज्लर ज्लसरते, कोसळसन कोळ-ऩिे। सानानाॊ वाधमन्ती, सतसभय-त्रलयफशता, सान-फदव्म-प्रफोधा।स्लछिन्दे कद्श-नाळे, वुय-लय-लऩुऴे, गुह्य-भुण्डे नभस्ते॥५॥ वा दे ली, फदव्म-भूसताप्रदशतु दरयतॊ, भुण्ड-िण्डे प्रिण्डे ॥१॥ ा ुॐ घ्राॊ-घ्रीॊ-घ्रूॊ घोय-तुण्डे , घघ-घघ घघघे घघायान्माफ्घ्र-घोऴे।ह्रीॊ िीॊ द्रॊ ू द्रोञ्ि-िि, यय-यय-यसभते, वला-साने प्रधाने॥ े ॐ शाॊ शीॊ शूॊ लभा-मुक्त, ळल-गभन-गसतबॉऴणे बीभ-लक्िे। ेद्रीॊ तीथेऴु ि ज्मेद्षे, जुग-जुग जजुगे म्रीॊ ऩदे कार-भुण्डे । िाॊ िीॊ ि िोध-भूसतात्रलाकृत-स्तन-भुखे, यौद्र-दॊ द्सा-कयारे॥ ूॊवलांगे यक्त-धाया-भथन-कय-लये , लज्र-दण्डे नभस्ते॥६॥ क क ककार-धायी भ्रभसद्ऱ, जगफददॊ बषमन्ती ग्रवन्ती- ॊ ॊ ॊ शुॊकायोछिायमन्ती प्रदशतु दरयतॊ, भुण्ड-िण्डे ु प्रिण्डे ॥२॥ॐ िाॊ िीॊ ि लाभ-नसभते, गगन गड-गडे गुह्य-मोसन-स्लरुऩे। ूॊ ॐ ह्राॊ ह्रीॊ शूॊ रुद्र-रुऩे, त्रिबुलन-नसभते, ऩाळ-शस्ते त्रि-नेिे।लज्राॊगे, लज्र-शस्ते, वुय-ऩसत-लयदे , भत्त-भातॊग-रुढे ॥ याॊ यीॊ रुॊ यॊ गे फकरे फकसरत यला, ळूर-शस्ते प्रिण्डे ॥स्लस्तेजे, ळुद्ध-दे शे, रर-रर-रसरते, िे फदते ऩाळ-जारे। राॊ रीॊ रूॊ रम्फ-स्जह्ले शवसत, कश-कशा ळुद्ध-घोयाट्ट-शावै्।फकण्डल्माकाय-रुऩे, लृऴ लृऴब-ध्लजे, ऐस्न्द्र भातनाभस्ते॥७॥ ककारी कार-यात्रि् प्रदशतु दरयतॊ, भुण्ड-िण्डे प्रिण्डे ॥३॥ ॊ ु
  • 45. 45 अक्टू फय 2012ॐ घ्राॊ घ्रीॊ घ्रूॊ घोय-रुऩे घघ-घघ-घफटते घघायायाल घोये । नृत्मन्ती ताण्डलैऴा थथ-थइ त्रलबलैसनाभरा भन्ि-भारा॥ ासनभाॉवे ळुष्क-जॊघे त्रऩफसत नय-लवा धूम्र-धूम्रामभाने॥ रुषौ कषौ लशन्ती, खय-खरयता यला िासिासन प्रेत-भारा। ुॐ द्राॊ द्रीॊ द्रॊ ू द्रालमन्ती, वकर-बुत्रल-तरे, मष-गन्धला-नागान ्। उछिैस्तैद्ळाट्टशावै, शश शसवत यला, िभा-भुण्डा प्रिण्डे ॥९॥षाॊ षीॊ षूॊ षोबमन्ती प्रदशतु दरयतॊ िण्ड-भुण्डे प्रिण्डे ॥४॥ ु ॐ त्लॊ ब्राह्मी त्लॊ ि यौद्री व ि सळस्ख-गभना त्लॊ ि दे ली कभायी। ुॐ भ्राॊ भ्रीॊ भ्रूॊ बद्र-कारी, शरय-शय-नसभते, रुद्र-भूते त्रलकणे। त्लॊ ििी िि-शावा घुय-घुरयत यला, त्लॊ लयाश-स्लरुऩा॥िन्द्राफदत्मौ ि कणौ, ळसळ-भुकट-सळयो लेत्रद्षताॊ कतु-भाराभ ्॥ ु े यौद्रे त्लॊ िभा-भुण्डा वकर-बुत्रल-तरे वॊस्स्थते स्लगा-भागे।स्त्रक् -वला-िोयगेन्द्रा ळसळ-कयण-सनबा तायका् शाय-कण्ठे । ऩातारे ळैर-श्रृगे शरय-शय-नसभते दे त्रल िण्डी नभस्ते॥१०॥ ॊवा दे ली फदव्म-भूसता्, प्रदशतु दरयतॊ िण्ड-भुण्डे प्रिण्डे ॥५॥ ु यष त्लॊ भुण्ड-धायी सगरय-गुश-त्रललये सनझाये ऩलाते ला।ॐ खॊ-खॊ-खॊ खड्ग-शस्ते, लय-कनक-सनबे वूम-कास्न्त-स्लतेजा। ा वॊग्राभे ळिु-भध्मे त्रलळ त्रलऴभ-त्रलऴे वॊकटे कस्त्वते ला॥ ुत्रलद्युज्ज्लारालरीनाॊ, बल-सनसळत भशा-कत्रिका दस्षणेन॥ ा व्माघ्रे िौये ि वऩेऽप्मुदसध-बुत्रल-तरे लफि-भध्मे ि दग। ु ेलाभे शस्ते कऩारॊ, लय-त्रलभर-वुया-ऩूरयतॊ धायमन्ती। यषेत ् वा फदव्म-भूसता् प्रदशतु दरयतॊ भुण्ड-िण्डे प्रिण्डे ॥११॥ ुवा दे ली फदव्म-भूसता् प्रदशतु दरयतॊ िण्ड-भुण्डे प्रिण्डे ॥६॥ ु इत्मेलॊ फीज-भन्िै् स्तलनभसत-सळलॊ ऩातक-व्मासध-नाळनभ ्।ॐ शुॉ शुॉ पट् कार-यािीॊ ऩुय-वुय-भथनीॊ धूम्र-भायी कभायी। ु प्रत्मषॊ फदव्म-रुऩॊ ग्रश-गण-भथनॊ भदा नॊ ळाफकनीनाभ ्॥ह्राॊ ह्रीॊ ह्रूॊ शस्न्त दद्शान ् कसरत फकर-फकरा ळब्द अट्टाट्टशावे॥ ु इत्मेलॊ लेद-लेद्यॊ वकर-बम-शयॊ भन्ि-ळत्रक्तद्ळ सनत्मभ ्।शा-शा बूत-प्रबूते, फकर-फकसरत-भुखा, कीरमन्ती ग्रवन्ती। भॊिाणाॊ स्तोिक म् ऩठसत व रबते प्रासथाताॊ भन्ि-सवत्रद्धभ ्॥१२॥ ॊशुॊकायोछिायमन्ती प्रदशतु दरयतॊ िण्ड-भुण्डे ु प्रिण्डे ॥७॥ िॊ-िॊ-िॊ िन्द्र-शावा ििभ िभ-िभा िातुयी सित्त-कळी। ेॐ ह्रीॊ श्रीॊ िीॊ कऩारीॊ ऩरयजन-वफशता िस्ण्ड िाभुण्डा-सनत्मे। मॊ-मॊ-मॊ मोग-भामा जनसन जग-फशता मोसगनी मोग-रुऩा॥यॊ -यॊ यॊ काय-ळब्दे ळसळ-कय-धलरे कार-कटे ू दयन्ते॥ ु डॊ -डॊ -डॊ डाफकनीनाॊ डभरुक-वफशता दोर फशण्डोर फडम्बा।शुॉ शुॉ शुॊकाय-कारय वुय-गण-नसभते, कार-कायी त्रलकायी। यॊ -यॊ -यॊ यक्त-लस्त्रा वयसवज-नमना ऩातु भाॊ दे त्रल दगाा॥१३॥ ुत्र्मैरोक्मॊ लश्म-कायी, प्रदशतु दरयतॊ िण्ड-भुण्डे प्रिण्डे ॥८॥ ुलन्दे दण्ड-प्रिण्डा डभरु-फडसभ-फडभा, घण्ट टॊ काय-नादे । *** गुरुत्ल कामाारम द्राया यत्न एलॊ रुद्राष ऩयाभळा भाि RS:- 450
  • 46. 46 अक्टू फय 2012 भाॉ दगाा क िभत्कायी भन्ि ु े  सिॊतन जोळी ब्रह्माजी ने भनुष्मं फक यषा शे तु भाकण्डे म ऩुयाण ा वॊरग्न यशनेलारी तथा वफकी ऩीडा दय कयनेलारी ूभं कि ऩयभगोऩनीम वाधन-कल्माणकायी दे ली कलि एलॊ ु नायामणी दे ली! तुम्शं नभस्काय शै ।ऩयभ ऩत्रलि उऩामो का उल्रेख फकमा शं , स्जस्वे वाधायण ऩाऩ नाळ शे तु:वे वाधायण व्मत्रक्त स्जवे भाॉ दगाा ऩूजा अिाना क फाये भं ु े फशनस्स्त दै त्मतेजाॊसव स्लनेनाऩूमा मा जगत ्।कि बी जानकायी नशीॊ शोने ऩय बी त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय ुवकते शं । वा घण्टा ऩातु नो दे त्रल ऩाऩेभ्मोऽन: वुतासनल॥ अथाात्- दे त्रल! जो अऩनी ध्लसन वे वम्ऩूणा जगत ् कोभाॉ दगाा क इन भॊिो का जाऩ प्रसत फदन बी कय वकते ु े व्माद्ऱ कयक दै त्मं क तेज नद्श फकमे दे ता शै , लश तुम्शाया े ेशं । ऩय नलयाि भं जाऩ कयने वे ळीघ्र प्रबाल दे खा गमा शं । घण्टा शभरोगं की ऩाऩं वे उवी प्रकाय यषा कये , जैवेवला प्रकाय फक फाधा भुत्रक्त शे तु: भाता अऩने ऩुिं की फुये कभो वे यषा कयती शै ।वलााफाधात्रलसनभुक्तो धनधान्मवुतास्न्लत्। ा त्रलऩत्रत्तनाळ औय ळुब की प्रासद्ऱ शे तु:भनुष्मो भत्प्रवादे न बत्रलष्मसत न वॊळम्॥ कयोतु वा न: ळुबशे तुयीद्वयी ळुबासन बद्राण्मसबशन्तु िाऩद्।अथाात्- भनुष्म भेये प्रवाद वे वफ फाधाओॊ वे भुक्त तथा अथाात्- लश कल्माण की वाधनबूता ईद्वयी शभायाधन, धान्म एलॊ ऩुि वे वम्ऩन्न शोगा- इवभं जया बी कल्माण औय भङ्गर कये तथा वायी आऩत्रत्तमं का नाळवॊदेश नशीॊ शै । कय डारे।फकवी बी प्रकाय क वॊकट मा फाधा फक आळॊका शोने ऩय ेइव भॊि का प्रमोग कयं । उक्त भॊि का श्रद्धा वे जाऩ कयने बम नाळ शे तु:वे व्मत्रक्त वबी प्रकाय की फाधा वे भुक्त शोकय धन-धान्म वलास्लरूऩे वलेळे वलाळत्रक्त वभस्न्लते। बमेभ्माफश नो दे त्रलएलॊ ऩुि की प्रासद्ऱ शोती शं । दगे ु दे त्रल नभोऽस्तु ते॥ एतत्ते लदनॊ वौम्मॊ रोिनिमबूत्रऴतभ ्। ऩातु न: वलाबीसतभ्म: कात्मामसनफाधा ळास्न्त शे तु: नभोऽस्तु ते॥ ज्लाराकयारभत्मुग्रभळेऴावुयवूदनभ ्। त्रिळूरॊवलााफाधाप्रळभनॊ िैरोक्मस्मास्खरेद्वरय। ऩातु नो बीतेबद्रकासर नभोऽस्तु ते॥ ाएलभेल त्लमा कामाभस्भद्रै रयत्रलनाळनभ ्॥ अथाात्- वलास्लरूऩा, वलेद्वयी तथा वफ प्रकाय की ळत्रक्त मंअथाात्- वलेद्वरय! तुभ इवी प्रकाय तीनं रोकं की वभस्त वे वम्ऩन्न फदव्मरूऩा दगे दे त्रल! वफ बमं वे शभायी यषा ुफाधाओॊ को ळान्त कयो औय शभाये ळिुओॊ का नाळ कयती कयो; तुम्शं नभस्काय शै । कात्मामनी! मश तीन रोिनं वेयशो। त्रलबूत्रऴत तुम्शाया वौम्म भुख वफ प्रकाय क बमं वे शभायी ेत्रलऩत्रत्त नाळ शे त: ु यषा कये । तुम्शं नभस्काय शै । बद्रकारी! ज्लाराओॊ केळयणागतदीनाताऩरयिाणऩयामणे। कायण त्रलकयार प्रतीत शोनेलारा, अत्मन्त बमॊकय औयवलास्मासताशये दे त्रल नायामस्ण नभोऽस्तु ते॥ वभस्त अवुयं का वॊशाय कयनेलारा तुम्शाया त्रिळूर बम वेअथाात्- ळयण भं आमे शुए दीनं एलॊ ऩीफडतं की यषा भं शभं फिामे। तुम्शं नभस्काय शै ।
  • 47. 47 अक्टू फय 2012वला प्रकाय क कल्माण शे तु: े त्रलद्या प्रासद्ऱ एलॊ भातृबाल शे तु:वलाभङ्गरभङ्गल्मे सळले वलााथवासधक। ा े त्रलद्या: वभस्तास्तल दे त्रल बेदा: स्स्त्रम: वभस्ता:ळयण्मे त्र्मम्फक गौरय नायामस्ण नभोऽस्तु ते॥ े वकरा जगत्वु।अथाात्- नायामणी! आऩ वफ प्रकाय का भङ्गर प्रदान त्लमैकमा ऩूरयतभम्फमैतत ् का ते स्तुसत:कयनेलारी भङ्गरभमी शो। कल्माणदासमनी सळला शो। वफ स्तव्मऩया ऩयोत्रक्त्॥ऩुरुऴाथो को सवद्ध कयनेलारी, ळयणागतलत्वरा, तीन अथाात्- दे त्रल! त्रलद्वफक वम्ऩूणा त्रलद्याएॉ तुम्शाये शी सबन्न-नेिंलारी एलॊ गौयी शो। आऩको नभस्काय शं । सबन्न स्लरूऩ शं । जगत ् भं स्जतनी स्स्त्रमाॉ शं , ले वफ व्मत्रक्त द:ख, दरयद्रता औय बम वे ऩये ळान शो ु तुम्शायी शी भूसतामाॉ शं । जगदम्फ! एकभाि तुभने शी इविाशकय बी मा ऩयीश्रभ क उऩयाॊत बी वपरता प्राद्ऱ नशीॊ े त्रलद्व को व्माद्ऱ कय यखा शै । तुम्शायी स्तुसत क्मा शोशोयशी शं तो उऩयोक्त भॊि का प्रमोग कयं । वकती शै ? तुभ तो स्तलन कयने मोग्म ऩदाथो वे ऩये शो।वुरषणा ऩत्नी की प्रासद्ऱ शे तु: वभस्त प्रकाय फक त्रलद्याओॊ की प्रासद्ऱ शे तु औय वभस्तऩत्नीॊ भनोयभाॊ दे फश भनोलृत्तानुवारयणीभ ्। स्स्त्रमं भं भातृबाल की प्रासद्ऱ क सरमे इव भॊिका ऩाठ कयं । ेतारयणीॊ दगवॊवायवागयस्म करोद्भलाभ ्॥ ु ा ु प्रवन्नता की प्रासद्ऱ शे तु:अथाात्- भन की इछिा क अनुवाय िरनेलारी भनोशय े प्रणतानाॊ प्रवीद त्लॊ दे त्रल त्रलद्वासताशारयस्ण।ऩत्नी प्रदान कयो, जो दगाभ वॊवायवागय वे तायनेलारी तथा ु िैरोक्मलासवनाभीडमे रोकानाॊ लयदा बल॥उत्तभ कर भं उत्ऩन्न शुई शो। ु अथाात्- त्रलद्व की ऩीडा दय कयनेलारी दे त्रल! शभ तुम्शाये ूळत्रक्त प्रासद्ऱ शे तु: ियणं ऩय ऩडे शुए शं , शभऩय प्रवन्न शोओ।वृत्रद्शस्स्थसतत्रलनाळानाॊ ळत्रक्त बूते वनातसन। त्रिरोकसनलासवमं की ऩूजनीम ऩयभेद्वरय! वफ रोगं कोगुणाश्रमे गुणभमे नायामस्ण नभोऽस्तु ते॥ लयदान दो।अथाात्- तुभ वृत्रद्श, ऩारन औय वॊशाय कयने लारी ळत्रक्त आयोग्म औय वौबाग्म की प्रासद्ऱ शे तु:बूता, वनातनी दे ली, गुणं का आधाय तथा वलागुणभमी शो। दे फश वौबाग्मभायोग्मॊ दे फश भे ऩयभॊ वुखभ ्।नायामस्ण! तुम्शं नभस्काय शै । रूऩॊ दे फश जमॊ दे फश मळो दे फश फद्रऴो जफश॥यषा प्रासद्ऱ शे तु: अथाात्- भुझे वौबाग्म औय आयोग्म दो। ऩयभ वुख दो,ळूरेन ऩाफश नो दे त्रल ऩाफश खड्गेन िास्म्फक। े रूऩ दो, जम दो, मळ दो औय काभ-िोध आफद भेये ळिुओॊघण्टास्लनेन न: ऩाफश िाऩज्मासन:स्लनेन ि॥ का नाळ कयो।अथाात्- दे त्रल! आऩ ळूर वे शभायी यषा कयं । अस्म्फक! े भशाभायी नाळ शे तु:आऩ खड्ग वे बी शभायी यषा कयं तथा घण्टा की ध्लसन जमन्ती भङ्गरा कारी बद्रकारी कऩासरनी।औय धनुऴ की टॊ काय वे बी शभरोगं की यषा कयं । दगाा षभा सळला धािी स्लाशा स्लधा नभोऽस्तु ते॥ ु दे श को वुयस्षत यखने शे तु एलॊ उवे फकवी बी अथाात्- जमन्ती, भङ्गरा, कारी, बद्रकारी, कऩासरनी, दगाा, ुप्रकाय फक िोट मा शानी मा फकवी बी प्रकाय क अस्त्र-वस्त्र े षभा, सळला, धािी, स्लाशा औय स्लधा- इन नाभं वे प्रसवद्धवे वुयस्षत यखने शे तु इव भॊि का श्रद्धा वे सनमभ ऩूलक ा जगदस्म्फक! तुम्शं भेया नभस्काय शो। ेजाऩ कयं ।
  • 48. 48 अक्टू फय 2012योग नाळ शे तु: वदा शभं ळिुओॊ क बम वे फिाओ। वम्ऩूणा जगत ् का ेयोगानळेऴानऩशॊ सव तुद्शा रुद्शा तु काभान ् वकरानबीद्शान ्। ऩाऩ नद्श कय दो औय उत्ऩात एलॊ ऩाऩं क परस्लरूऩ ेत्लाभासश्रतानाॊ न त्रलऩन्नयाणाॊ त्लाभासश्रता ह्याश्रमताॊ प्राद्ऱ शोनेलारे भशाभायी आफद फडे -फडे उऩद्रलं को ळीघ्र दय ूप्रमास्न्त॥ कयो।अथाात्- दे त्रल! तुभशाये प्रवन्न शोने ऩय वफ योगं को नद्श त्रलद्व क अळुब तथा बम का त्रलनाळ कयने शे तु: ेकय दे ती शो औय कत्रऩत शोने ऩय भनोलासित वबी ु मस्मा: प्रबालभतुरॊ बगलाननन्तो ब्रह्मा शयद्ळ न फश लक्त ुकाभनाओॊ का नाळ कय दे ती शो। जो रोग तुम्शायी ळयण भरॊ फरॊ ि। वा िस्ण्डकास्खरजगत्ऩरयऩारनाम नाळामभं जा िुक शं , उन ऩय त्रलऩत्रत्त तो आती शी नशीॊ। तुम्शायी ेळयणभं गमे शुए भनुष्म दवयंको ळयण दे नेलारे शो जाते शं । िाळुबबमस्म भसतॊ कयोतु॥ ू अथाात्- स्जनक अनुऩभ प्रबाल औय फर का लणान कयने ेत्रलद्व की यषा शे तु: भं बगलान ् ळेऴनाग, ब्रह्माजी तथा भशादे लजी बी वभथा नशीॊमा श्री: स्लमॊ वुकृसतनाॊ बलनेष्लरक्ष्भी: ऩाऩात्भनाॊ शं , ले बगलती िस्ण्डका वम्ऩूणा जगत ् का ऩारन एलॊ अळुबकृ तसधमाॊ रृदमेऴु फुत्रद्ध:। श्रद्धा वताॊ करजनप्रबलस्म रज्जा ु बम का नाळ कयने का त्रलिाय कयं ।ताॊ त्लाॊ नता: स्भ ऩरयऩारम दे त्रल त्रलद्वभ ्॥ वाभूफशक कल्माण शे तु:अथाात्- जो ऩुण्मात्भाओॊ क घयं भं स्लमॊ शी रक्ष्भीरूऩ े दे व्मा ममा ततसभदॊ जगदात्भळक्त्मा सनश्ळेऴदे लगणळत्रक्तवे, ऩात्रऩमं क मशाॉ दरयद्रतारूऩ वे, ळुद्ध अन्त:कयणलारे े वभूशभूत्र्मा। ताभस्म्फकाभस्खरदे लभशत्रऴऩूज्माॊ बक्त्मा नता: ाऩुरुऴं क रृदम भं फुत्रद्धरूऩ वे, वत्ऩुरुऴं भं श्रद्धारूऩ वे तथा े स्भ त्रलदधातु ळुबासन वा न:॥करीन भनुष्म भं रज्जारूऩ वे सनलाव कयती शं , उन आऩ ु अथाात्- वम्ऩूणा दे लताओॊ की ळत्रक्त का वभुदाम शीबगलती दगाा को शभ नभस्काय कयते शं । दे त्रल! आऩ ु स्जनका स्लरूऩ शै तथा स्जन दे ली ने अऩनी ळत्रक्त वेवम्ऩूणा त्रलद्व का ऩारन कीस्जमे। वम्ऩूणा जगत ् को व्माद्ऱ कय यखा शै , वभस्त दे लताओॊत्रलद्वव्माऩी त्रलऩत्रत्तमं क नाळ शे तु: े औय भशत्रऴामं की ऩूजनीमा उन जगदम्फा को शभ बत्रक्तदे त्रल प्रऩन्नासताशये प्रवीद प्रवीद भातजागतोऽस्खरस्म। ऩूलक नभस्काय कयते शं । ले शभरोगं का कल्माण कयं । ाप्रवीद त्रलद्वेद्वरय ऩाफश त्रलद्वॊ त्लभीद्वयी दे त्रल ियाियस्म॥ कवे कयं भॊि जाऩ :- ैअथाात्- ळयणागत की ऩीडा दय कयनेलारी दे त्रल! शभऩय ूप्रवन्न शोओ। वम्ऩूणा जगत ् की भाता! प्रवन्न शोओ। नलयात्रि क प्रसतऩदा क फदन वॊकल्ऩ रेकय प्रात्कार स्नान े े कयक ऩूला मा उत्तय फदळा फक औय भुख े कयक दगाा फक भूसता मा े ुत्रलद्वेद्वरय! त्रलद्व की यषा कयो। दे त्रल! तुम्शीॊ ियािय जगत ् सिि की ऩॊिोऩिाय मा दषोऩिाय मा ऴोड्ऴोऩिाय वे ऩूजा कयं ।की अधीद्वयी शो। ळुद्ध-ऩत्रलि आवन ग्रशण कय रुद्राष, स्पफटक, तुरवी मात्रलद्व क ऩाऩ-ताऩ सनलायण शे तु: े िॊदन फक भारा वे भॊि का जाऩ 1, 5, 7, 11 भारा जाऩ ऩूणा कयदे त्रल प्रवीद ऩरयऩारम नोऽरयबीतेसनात्मॊ मथावुयलधादधुनैल अऩने कामा उद्दे श्म फक ऩूसता शे तु भाॊ वे प्राथना कयं । वॊऩणा ूवद्य:। ऩाऩासन वलाजगताॊ प्रळभॊ नमाळु उत्ऩातऩाकजसनताॊद्ळ नलयात्रि भं जाऩ कयने वे भनोलाॊस्छित काभना अलश्म ऩूयी शोती शं ।भशोऩवगाान ्॥ उऩयोक्त भॊि क त्रलसध-त्रलधान क अनुवाय जाऩ कयने वे े ेअथाात्- दे त्रल! प्रवन्न शोओ। जैवे इव वभम अवुयं का भाॊ फक कृ ऩा वे व्मत्रक्त को ऩाऩ औय कद्शं वे िटकाया सभरता शं ुलध कयक तुभने ळीघ्र शी शभायी यषा की शै , उवी प्रकाय े औय भोष प्रासद्ऱ का भोष प्रासद्ऱ का भागा वुगभ प्रसतत शोता शं ।
  • 49. 49 अक्टू फय 2012 नलयाि भं राबदामक कन्मा ऩूजन  सिॊतन जोळी नलयाि भं कभारयका ु ऩूजन-व्रत-अनुद्षान को अथाात् जो वत्ल, यज, तभ तीनं गुणं क तीन रूऩ धायण ेअसनलामा अॊग भाना जाता शं । नलयािभं कलायी कन्माओॊ ुॊ कयती शं , स्जनक अनेक रूऩ शं एलॊ जो तीनं कारं भं व्माद्ऱ ेका त्रलसध-त्रलधान वे ऩूजन कय उनको बोजन कयाक लस्त्र- े शं , उन बगलती त्रिभूसता फक भं ऩूजा कयता शूॉ।दस्षणा आफद बेट दे कय वॊतुद्श कयना िाफशए। कभारयका ुऩूजन शे तु कन्मा दो वे दव लऴा तक शी शोनी िाफशए। िाय लऴा की कन्मा को कल्माणी भाना जाता शं । कल्माणी क ऩूजन वे व्मत्रक्त को त्रलजम, त्रलद्या, वत्ता एलॊ ेदो लऴा की कन्मा को कभायी भाना जाता शं । ु वुख फक प्रासद्ऱ शोकय व्मत्रक्त फक वभस्त काभनाए ऩूणाकभायी ऩूजन वे व्मत्रक्त क द:ख-दरयद्रता का ळभन शोता ु े ु शोती शं ।शं । कल्माणी क ऩूजन का भॊि- ेकभायी क ऩूजन का भॊि- ु े कल्माणकारयणीसनत्मॊबक्तानाॊऩस्जतासनळभ ्। ूकभायस्मितत्त्लासनमा वृजत्मत्रऩरीरमा। ु ऩूजमासभिताॊबक्त्माकल्माणीम्वलाकाभदाभ ्॥कादीनत्रऩिदे लाॊस्ताॊकभायीॊऩूजमाम्मशभ ्॥ ु अथाात् सनयॊ तय वुऩूस्जतशोने ऩय बक्तं का कल्माण कयनाअथाात् जो कभाय कासताकम फक जननी एलॊ ब्रह्माफद दे लताओॊ ु े स्जवका स्लबाल शी शै , वफ भनोयथ ऩूणा कयने लारी उनकी रीराऩूलक यिना कयती शं , उन कभायी दे ली फक भं ऩूजा ा ु बगलती कल्माणी की भं ऩूजा कयता शूॊ।कयता शूॊ। ऩाॊि लऴा की कन्मा को योफशणी भाना जाता शं ।तीन लऴा की कन्मा को त्रिभूसता भाना जाता शं । योफशणी क ऩूजन वे व्मत्रक्त को उत्तभ स्लास््म फक द्ऱासद्ऱ ेत्रिभूसता क ऩूजन वे व्मत्रक्त को धभा, अथा, काभ फक प्रासद्ऱ े शोकय उवक वभस्त योग का त्रलनाळ शोता शं । ेशोती शं । इवी क वाथ घय भं धन-धान्म भं लृत्रद्ध शोता शं , े योफशणी क ऩूजन का भॊि- ेतथा ऩुि-ऩौिं का राब प्राद्ऱ शोता शं । योशमन्तीिफीजासनप्राग्जन्भवॊसितासनलै।त्रिभूसता क ऩूजन का भॊि- े मा दे ली वलाबूतानाॊयोफशणीम्ऩूजमाम्मशभ ्॥वत्त्लाफदसबस्स्त्रभूसतामाातैफशा नानास्लरूत्रऩणी। अथाात् जो वफ प्रास्णमं क वॊसित फीजं का योशण कयती शं , ेत्रिकारव्मात्रऩनीळत्रक्तस्स्त्रभूसताऩूजमाम्मशभ ्॥ उन बगलती योफशणी फक भं उऩावना कयता शूॊ। ज्मोसतऴ वॊफॊसधत त्रलळेऴ ऩयाभळा ज्मोसत त्रलसान, अॊक ज्मोसतऴ, लास्तु एलॊ आध्मास्त्भक सान वं वॊफॊसधत त्रलऴमं भं शभाये 32 लऴो वे असधक लऴा के अनुबलं क वाथ ज्मोसतव वे जुडे नमे-नमे वॊळोधन क आधाय ऩय आऩ अऩनी शय वभस्मा क वयर वभाधान प्राद्ऱ े े े कय वकते शं । गुरुत्ल कामाारम वॊऩक : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785 ा
  • 50. 50 अक्टू फय 2012ि:लऴा की कन्मा को कासरका भाना जाता शं । अथाात् लेद स्जनक प्राकट्म क त्रलऴम भं कायण का अबाल े ेकासरका क ऩूजन वे व्मत्रक्त क त्रलयोसध तथा ळिु का े े फतराते शं तथा वफको वुखी फनाना स्जनका स्लाबात्रलक गुणळभन शो कय उवऩय त्रलजम प्राद्ऱ शोती शं । शै , उन बगलती ळाम्बलीकी भं ऩूजा कयता शूॊ।कासरका क ऩूजन का भॊि- े नौ लऴा की कन्मा को दगाा भाना जाता शं । ुकारी कारमतेवलाब्रह्माण्डॊ वियाियभ ्। दगाा क ऩूजन वे व्मत्रक्त क दद्श वे दद्श व्मत्रक्त का दभन ु े े ु ुकल्ऩान्तवभमेमा ताॊकासरकाम्ऩूजमाम्मशभ॥ शोता शं । व्मत्रक्त क कफठन वे कफठन कामा बी वयरता वे ेअथाात् कल्ऩ क अन्त भं जो िय-अिय वम्ऩूणा ब्रह्माण्ड को े सवत्रद्ध शोते शं ।अऩने अॊदय त्रलरीन कय रेती शं , उन बगलती कासरका फक दगाा क ऩूजन का भॊि- ु ेभं ऩूजा कयता शूॊ। दगाात्िामसतबक्तमा वदा दगाासतानासळनी। ु ॊ ुवात लऴा की कन्मा को िस्ण्डका भाना जाता शं । दज्र्ञेमावलादेलानाॊताॊदगााऩूजमाम्मशभ ्॥ ु ुिस्ण्डका क ऩूजन वे व्मत्रक्त को धन-वम्ऩत्रत्त की प्रासद्ऱ े अथाात् जो बक्त को वदा वॊकट वे फिाती शं , द:ख दय कयना ु ूशोती शं । स्जनका स्लबाल शं तथा दे लता रोग बी स्जन्शं जानने भं अवभथा शं , उन बगलती दगाा की भं ऩूजा कयता शूॊ। ुिस्ण्डका क ऩूजन का भॊि- ेिस्ण्डकाॊिण्डरूऩाॊििण्ड-भुण्ड त्रलनासळनीभ ्। दव लऴा की कन्मा को वुबद्रा भाना जाता शं ।ताॊिण्डऩाऩशरयणीॊिस्ण्डकाॊऩूजमाम्मशभ ्॥ वुबद्रा क ऩूजन वे व्मत्रक्त को वभस्त रोक भं वुख प्राद्ऱ ेअथाात् जो िण्ड-भुण्ड का वॊशाय कयने लारी शं तथा स्जनकी शोता शं ।कृ ऩा वे घोय ऩाऩ बी तत्कार नद्श शो जाता शै , उन बगलती वुबद्रा क ऩूजन का भॊि- ेिस्ण्डका फक भं ऩूजा कयता शूॊ। वुबद्रास्ण िबक्तानाॊकरुतेऩूस्जतावदा। ु अबद्रनासळनीॊदेलीॊवुबद्राॊऩूजमाम्मशभ ्॥आठ लऴा की कन्मा को ळाम्बली भाना जाता शं । अथाात् जो वुऩूस्जत शोने ऩय बक्तं का कल्माण कयने भं वदाळाम्बली क ऩूजन वे व्मत्रक्त फक सनधानता दय शोती शं , े ू वॊरग्न यशती शं , उन अळुबत्रलनासळनीबगलती वुबद्रा की भंलाद-त्रललाद भं त्रलजम प्राद्ऱ शोता शं । ऩूजा कयता शूॊ।ळाम्बली क ऩूजन का भॊि- ेअकायणात्वभुत्ऩत्रत्तमान्भमै:ऩरयकीसताता। नलयािकी अद्शभी अथला नलभी क फदन कभारयका-ऩूजन े ुमस्मास्ताॊवुखदाॊदेलीॊळाम्बलीॊऩूजमाम्मशभ ्॥ कयने ऩय त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । भॊि सवद्ध दरब वाभग्री ु ा शत्था जोडी- Rs- 370 घोडे की नार- Rs.351 भामा जार- Rs- 251 सवमाय सवॊगी- Rs- 370 दस्षणालतॉ ळॊख- Rs- 550 इन्द्र जार- Rs- 251 त्रफल्री नार- Rs- 370 भोसत ळॊख- Rs- 550 धन लृत्रद्ध शकीक वेट Rs-251
  • 51. 51 अक्टू फय 2012 ॥दगाा िारीवा॥ ुनभो नभो दगे वुख कयनी। ु श्री बैयल ताया जग तारयणी। सनसळफदन ध्मान धयो ळॊकय को।नभो नभो दगे द्ख शयनी ॥१॥ ु ु सिन्नबारबल द्खसनलारयणी॥१६॥ ु काशुकार नफशॊ वुसभयो तुभको॥३१॥सनयॊ काय शै ज्मोसत तुम्शायी। कशरय लाशन वोश बलानी। े ळत्रक्त रूऩ का भयभ न ऩामो।सतशूॉ रोक परी उस्जमायी ॥२॥ ै राॊगुय लीय िरत अगलानी॥१७॥ ळत्रक्त गई तफ भन ऩसितामो॥३२॥ळसळ रराट भुख भशात्रलळारा। कय भं खप्ऩय खड्ग त्रलयाजै। ळयणागत शुई कीसता फखानी।नेि रार बृकफट त्रलकयारा ॥३॥ ु जाको दे ख कार डय बाजै॥१८॥ जम जम जम जगदम्फबलानी॥३३॥रूऩ भातु को असधक वुशाले। वोशै अस्त्र औय त्रिळूरा। बई प्रवन्न आफद जगदम्फा।दयळकयत जन असत वुखऩाले ॥४॥ जाते उठत ळिु फशम ळूरा॥१९॥ दई ळत्रक्त नफशॊ कीन त्रलरम्फा॥३४॥तुभ वॊवाय ळत्रक्त रै कीना। नगयकोट भं तुम्शीॊ त्रलयाजत। भोको भातु कद्श असत घेयो।ऩारन शे तु अन्न धन दीना ॥५॥ सतशुॉरोक भं डॊ का फाजत॥२०॥ तुभ त्रफन कौन शयै द्ख भेयो॥३५॥ ुअन्नऩूणाा शुई जग ऩारा। ळुम्ब सनळुम्ब दानल तुभ भाये । आळा तृष्णा सनऩट वतालं।तुभ शी आफद वुन्दयी फारा ॥६॥ यक्तफीज ळॊखन वॊशाये ॥२१॥ भोश भदाफदक वफ त्रफनळालं॥३६॥प्ररमकार वफ नाळन शायी। भफशऴावुय नृऩ असत असबभानी। ळिु नाळ कीजै भशायानी।तुभ गौयी सळलळॊकय प्मायी ॥७॥ जेफश अघ बाय भशी अकरानी॥२२॥ ु वुसभयं इकसित तुम्शं बलानी॥३७॥सळल मोगी तुम्शये गुण गालं। रूऩ कयार कासरका धाया। कयो कृ ऩा शे भातु दमारा।ब्रह्मा त्रलष्णु तुम्शं सनत ध्मालं ॥८॥ वेन वफशत तुभ सतफश वॊशाया॥२३॥ ऋत्रद्ध-सवत्रद्ध दै कयशु सनशारा।३८॥रूऩ वयस्लती को तुभ धाया। ऩयी गाढ़ वन्तन ऩय जफ जफ। जफ रसग स्जऊ दमा पर ऩाऊ। ॉ ॉदे वुफुत्रद्ध ऋत्रऴ भुसनन उफाया ॥९॥ बईवशाम भातु तुभ तफ तफ॥२४॥ तुम्शयो मळ भं वदा वुनाऊ॥३९॥ ॉधयमो रूऩ नयसवॊश को अम्फा। अभयऩुयी अरु फावल रोका। श्री दगाा िारीवा जो कोई गालै। ुऩयगट बई पािकय खम्फा ॥१०॥ तफ भफशभा वफ यशं अळोका॥२५॥ वफ वुख बोग ऩयभऩद ऩालै॥४०॥यषा करय प्रह्ऱाद फिामो। ज्लारा भं शै ज्मोसत तुम्शायी। दोशा: दे लीदाव ळयण सनज जानी।फशयण्माष को स्लगा ऩठामो॥११॥ तुम्शं वदा ऩूजं नय-नायी॥२६॥ कयशु कृ ऩा जगदम्फ बलानी॥रक्ष्भी रूऩ धयो जग भाशीॊ। प्रेभ बत्रक्त वे जो मळ गालं।श्री नायामण अॊग वभाशीॊ॥१२॥ द्ख दारयद्र सनकट नफशॊ आलं॥२७॥ ु बूसभराब मॊिषीयसवन्धु भं कयत त्रलरावा। ध्माले तुम्शं जो नय भन राई। बूसभ वे वॊफॊसधत फिमाकराऩदमासवन्धु दीजै भन आवा॥१३॥ ु जन्भ-भयण ताकौ िफट जाई॥२८॥ द्राया धन राब शोता शं । बूसभफशॊ गराज भं तुम्शीॊ बलानी। जोगी वुय भुसन कशत ऩुकायी। वे वॊफॊसधत लाद-त्रललाद भंभफशभा असभत नजात फखानी॥१४॥ मोगन शो त्रफन ळत्रक्त तुम्शायी॥२९॥ वपरता प्राद्ऱ शोती शं ।भातॊगी अरु धूभालसत भाता। ळॊकय आिायज तऩ कीनो।बुलनेद्वयी फगरा वुख दाता॥१५॥ काभअरु िोधजीसत वफ रीनो॥३०॥ भूल्म भाि: Rs-730
  • 52. 52 अक्टू फय 2012 ळाऩ त्रलभोिन भॊि  स्लस्स्तक.ऎन.जोळीिस्ण्डका ळाऩ त्रलभोिन भॊििस्ण्डका ळाऩ त्रलभोिन भॊि क ऩाठ को कयने वे दे ली की ऩूजा भं की गमी फकवी बी प्रकाय िुफट (बूर) वे सभरा श्राऩ ेखत्भ शो जाता शै ।ळाऩ-त्रलभोिन वॊकल्ऩऊॉ अस्म श्रीिस्ण्डकामा ब्रह्मलसवद्षत्रलद्वासभिळाऩत्रलभोिन भन्िस्म लसवद्षनायदवॊलादवाभलेदासधऩसतब्रह्माण ऋऴम:वलैद्वमाकारयणी श्रीदगाा दे लता िरयििमॊ फीजॊ ह्रीॊ ळत्रक्त: त्रिगुणात्भस्लरूऩिस्ण्डकाळाऩत्रलभुक्तो भभ वॊकस्ल्ऩतकामासवद्धमथे जऩे ुत्रलसनमोग:।ळाऩत्रलभोिन भॊिॐ (ह्रीॊ) यीॊ ये त:स्लरूत्रऩण्मै भधुकटबभफदा न्मै ब्रह्मलसवद्षत्रलद्वासभिळाऩाद त्रलभुक्ताबल॥१॥ ैॐ यॊ यक्तस्लरूत्रऩण्मै भफशऴावुयभफदा न्मै,ब्रह्मलसवद्षत्रलद्वासभिळाऩाद त्रलभुक्ताबल॥२॥ॐ षुॊ षुधास्लरूत्रऩण्मै दे ललस्न्दतामै ब्रह्मलसवद्षत्रलद्वासभिळाऩाद त्रलभुक्ताबल॥३॥ॐ िाॊ िामास्लरूत्रऩण्मै दतवॊलाफदन्मै ब्रह्मलसवद्षत्रलद्वासभिळाऩाद त्रलभुक्ताबल॥४॥ ूॐ ळॊ ळत्रक्तस्लरूत्रऩण्मै धूम्ररोिनघासतन्मै ब्रह्मलसवद्षत्रलद्वासभिळाऩाद त्रलभुक्ताबल॥५॥ॐ तॊ तृऴास्लरूत्रऩण्मै िण्डभुण्डलधकारयण्मै ब्रह्मलसवद्षत्रलद्वासभिळाऩाद त्रलभुक्ताबल॥६॥ॐ षाॊ षास्न्तस्लरूत्रऩण्मै यक्तफीजलधकारयण्मै ब्रह्मलसवद्षत्रलद्वासभिळाऩाद त्रलभुक्ताबल॥७॥ॐ जाॊ जासतरूत्रऩण्मै सनळुम्बलधकारयण्मै ब्रह्मलसवद्षत्रलद्वासभिळाऩाद त्रलभुक्ताबल॥८॥ॐ रॊ रज्जास्लरूत्रऩण्मै ळुम्बलधकारयण्मै ब्रह्मलसवद्षत्रलद्वासभिळाऩाद त्रलभुक्ताबल॥९॥ॐ ळाॊ ळास्न्तस्लरूत्रऩण्मै दे लस्तुत्मै ब्रह्मलसवद्षत्रलद्वासभिळाऩाद त्रलभुक्ताबल॥१०॥ॐ श्रॊ श्रद्धास्लरूत्रऩण्मै वकरफ़रदात्र्मै ब्रह्मलसवद्षत्रलद्वासभिळाऩाद त्रलभुक्ताबल॥११॥ॐ श्रीॊ फुत्रद्धस्लरूत्रऩण्मै भफशऴावुयवैन्मनासळन्मै ब्रह्मलसवद्षत्रलद्वासभिळाऩाद त्रलभुक्ताबल॥१२॥ॐ काॊ कास्न्तस्लरूत्रऩण्मै याजलयप्रदामै ब्रह्मलसवद्षत्रलद्वासभिळाऩाद त्रलभुक्ताबल॥१३॥ॐ भाॉ भातृस्लरूत्रऩण्मै अनगारभफशभावफशतामै ब्रह्मलसवद्षत्रलद्वासभिळाऩाद त्रलभुक्ताबल॥१४॥ॐ ह्रीॊ श्रीॊ दॊ ु दगाामै वॊ वलैद्वमाकारयण्मै ब्रह्मलसवद्षत्रलद्वासभिळाऩाद त्रलभुक्ताबल॥१५॥ ुॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ नभ: सळलामै अबेद्यकलिस्लरूत्रऩण्मै ब्रह्मलसवद्षत्रलद्वासभिळाऩाद त्रलभुक्ताबल॥१६॥ॐ िीॊ काल्मै कासर ह्रीॊ फ़ट स्लाशामै ऋग्लेदस्लरूत्रऩण्मै ब्रह्मलसवद्षत्रलद्वासभिळाऩाद त्रलभुक्ताबल॥१७॥ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ भशाकारीभशारक्ष्भीभशावयस्लतीस्लरूत्रऩण्मै त्रिगुणास्त्भकामै दगाादेव्मै नभ:॥१८॥ ुइत्मेलॊ फश भशाभन्िान ऩफठत्ला ऩयभेद्वय, िण्डीऩाठॊ फदला यािौ कमाादेल न वॊळम:॥१९॥ ुएलॊ भन्िॊ न जानासत िण्डीऩाठॊ कयोसत म:, आत्भानॊ िैल दातायॊ षीणॊ कमाान्न वॊळम:॥२०॥ ु(श्रीदगााभाऩाणाभस्तु) ु
  • 53. 53 अक्टू फय 2012 श्रीकृ ष्ण कृ त दे ली स्तुसत नलयाि भं श्रद्धा औय प्रेभऩूलक भशाळत्रक्त बगलती दे ली की ऩूजा-उऩावना कयने वे मश सनगुण स्लरूऩा दे ली ऩृ्ली क वभस्त ा ा ेजीलं ऩय दमा कयक स्लमॊ शी वगुणबाल को प्राद्ऱ शोकय ब्रह्मा, त्रलष्णु औय भशे ळ रूऩ वे उत्ऩत्रत्त, ऩारन औय वॊशाय कामा कयती शं । ेश्रीकृ ष्ण उलाित्लभेल वलाजननी भूरप्रकृ सतयीद्वयी।त्लभेलाद्या वृत्रद्शत्रलधौ स्लेछिमा त्रिगुणास्त्भका॥१॥कामााथे वगुणा त्लॊ ि लस्तुतो सनगुणा स्लमभ ्। ाऩयब्रह्मास्लरूऩा त्लॊ वत्मा सनत्मा वनातनी॥२॥तेज्स्लरूऩा ऩयभा बक्तानुग्रशत्रलग्रशा।वलास्लरूऩा वलेळा वलााधाया ऩयात्ऩय॥३॥वलाफीजस्लरूऩा ि वलाऩूज्मा सनयाश्रमा।वलासा वलातोबद्रा वलाभॊगरभॊगरा॥४॥अथाात् आऩ त्रलद्वजननी भूर प्रकृ सत ईद्वयी शो, आऩ वृत्रद्श की उत्ऩत्रत्त क वभम आद्याळत्रक्त क रूऩ भं त्रलयाजभान यशती शो औय े ेस्लेछिा वे त्रिगुणास्त्भका फन जाती शो।मद्यत्रऩ लस्तुत् आऩ स्लमॊ सनगुण शो तथात्रऩ प्रमोजनलळ वगुण शो जाती शो। आऩ ऩयब्रह्म स्लरूऩ, वत्म, सनत्म एलॊ वनातनी शो। ाऩयभ तेजस्लरूऩ औय बक्तं ऩय अनुग्रश कयने आऩ ळयीय धायण कयती शं। आऩ वलास्लरूऩा, वलेद्वयी, वलााधाय एलॊ ऩयात्ऩय शो। आऩवलााफीजस्लरूऩ, वलाऩूज्मा एलॊ आश्रमयफशत शो। आऩ वलास, वलाप्रकाय वे भॊगर कयने लारी एलॊ वला भॊगरं फक बी भॊगर शो। ऩसत-ऩत्नी भं करश सनलायण शे तु मफद ऩरयलायं भं वुख-वुत्रलधा क वभस्त वाधान शोते शुए बी िोटी-िोटी फातो भं ऩसत-ऩत्नी क त्रफि भे े े करश शोता यशता शं , तो घय क स्जतने वदस्म शो उन वफक नाभ वे गुरुत्ल कामाारत द्राया े े ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे भॊि सवद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतन्म मुक्त लळीकयण कलि एलॊ गृश करश नाळक फडब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भं त्रफना फकवी ऩूजा, त्रलसध-त्रलधान वे आऩ त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । मफद आऩ भॊि सवद्ध ऩसत लळीकयण मा ऩत्नी लळीकयण एलॊ गृश करश नाळक फडब्फी फनलाना िाशते शं , तो वॊऩक आऩ कय वकते शं । ा GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
  • 54. 54 अक्टू फय 2012 भाॊ क ियणं सनलाव कयते वभस्त शं तीथा े  सिॊतन जोळी त्माग औय सन:स्लाथा प्रेभ फक प्रसत भूसता जन्भदे ने लारी भाॊ अऩनी वॊतान को नौ भफशने गबा भं उवका ळतऩथ ब्राह्मण क लिन ेऩोऴण कय, अवशनीम प्रवल कद्श वशकय उवे जन्भ दे ती भातृभान त्रऩतृभानािामालान ् ऩुरुऴो लेदशं । भाॊ क इव त्माग औय सन:स्लाथा प्रेभ का फदरा े अथाात् स्जवक ऩाव भाता, त्रऩता औय गुरु जेवे तीन उत्तभ ेिाशकय बी कोई नशीॊ िुका वकता। सळषक शं लशीॊ भनुष्म वशी अथा भं भानल फनता शं । वभस्त व्मत्रक्त फक प्रथन गुरु भाॊ शोती शं । क्मोफक वॊवाय भं भातृभान लश शोता शै , स्जवकी भाताभाॊ वे व्मत्रक्त को जीलन क आदळा औय वॊस्काय आफद े गबााधान वे रेकय जफ तक गबा क ळेऴ त्रलसध-त्रलधान ऩूये न शो ेसान प्राद्ऱ शोता शं । शभाये धभा ळास्त्रो भं उल्रेख सभरता शं जाएॊ, तफ तक वॊमभीत औय वुळीर व्मलशाय कये । क्मोफकफक उऩाध्माओॊ वे दव गुना श्रेद्ष आिामा शोते शं , एलॊ भातृ गबा भं वॊस्कारयत शोने का वफवे फिा आदळा उदाशयणआिामा वे वौ गुना श्रेद्ष त्रऩता औय त्रऩता वे शजाय गुना भशाबायत भं असबभन्मु का दे खने को सभरता शं , स्जवनेश्रेद्ष भाता शोती शै । क्मोफक भाॊ क ळयीय भं वबी दे लताओॊ े अऩनी भाॊ वे गबा भं शी ििव्मूश तोिने का उऩाम वीख सरमाऔय वबी तीथं का लाव शोता शै । इवी सरए त्रलद्व फक था।वलाश्रद्ष बायतीम वॊस्कृ सत भं कलर भाॊ को बगलान क े े े इवी भाॊ फक भभता औय सन:स्लाथा प्रेभ को ऩानेवभान भाना गमा शं । इव सरमे भाॊ ऩूज्म, स्तुसत मोग्म औय क सरमे भनुष्म फश नशीॊ दे लता बी तयवते शं । इव सरमे ेआह्लान कयने मोग्म शोती शं । फाय-फाय अलताय रेकय अऩनी रीराएॊ त्रफखेयने क सरमे े भशाबायत भं बी उल्रेख सभरता शं फक जफ मष ने ऩृ्ली ऩय जन्भ रेते शं । इस्वे सात शोता शं फक भाॊ केमुसधत्रद्षय वे वलार फकमा फक बूसभ वे बी बायी कौन शं ? तो ियणं भं शी वबी तीथा का ऩुण्म प्राद्ऱ शो जाता शै ।मुसधत्रद्षय ने उत्तय फदमा इव सरमे फछिा वफवे ऩशरे जो फोर नीकरते शं ,भाता गुरुतया बूभे:। लश भाॊ ळब्द शोता शं , एक फाय भं शी झटक वे फछिे क े ेअथाात् भाॊ इव बूसभ वे बी कशीॊ असधक बायी शोती शं । भुॊश वे भाॊ सनकर जाता शै मासन भाॊ का उछिायण बीआफद ळॊकयािामा का कथन शं वफवे आवान। अन्म वबी वब्दो भं उवे थोडी कफठनाईकऩुिो जामेत मद्यत्रऩ कभाता न बलसत। ु ु शोती शं स्जव कायण लश उन ळब्दो का उछियाण धीये -धीयेअथाात् ऩुि तो कऩुि शो वकता शै , ऩय भाता कबी कभाता नशीॊ ु ु सवखता शं । वफवे फडा उदाशयण शं , जो आऩने आमे फदनशो वकती। दे खा वुना औय आजभाम शोगा, व्मत्रक्त जफ ऩये ळानी भं शोता शं , कद्श झेर यशा शोता शं , मा आकस्स्भक वॊकटबगलान श्री याभका लिन शं । आने, फकवी आघात वे ळयीय ऩय िोट रग जामे तो ऩयजननी जन्भबूसभद्ळ स्लगाादत्रऩ गयीमवी। वफवे ऩेशरे भाॊ को माद कयता शं । इव सरमे भाॊ को कद्शअथाात् जननी औय जन्भबूसभ स्लगा वे बी फढ़कय शोते शं । दे ने लारी वॊतान को दै त्रल आऩदा, द्ख, कद्श बोगना ु ऩडता शं । अऩने भाॊ का सनयादय न कयं औय उनकी वेलातैत्रत्तयीमोऩसनऴद् भं उल्रेख फकमा गमा शं । अलश्म कयं ।भातृ दे लो बल:
  • 55. 55 अक्टू फय 2012 ऩॊि दे लोऩावना भं उऩमुक्त एलॊ सनत्रऴद्ध ऩि ऩुष्ऩ  सिॊतन जोळीदे ल-ऩूजाभं उऩमुक्त औय सनत्रऴद्ध ऩि ऩुष्ऩ वे दे ली क सरमे उऩमुक्त ऩि-ऩुष्ऩ का िमन ेवम्फस्न्धत ळास्त्रोक्त भत त्रलद्रानं के भतानुळाय जो ऩि-ऩुष्ऩ बगलान ऩञ्िदे ल ऩूजाभं बगलान गणेळ, गौयी, त्रलष्णु, वूमा सळलजी को त्रप्रम शं मा जो सळलजी को अऩाण फकमे जातेऔय बगलान सळलकी ऩूजा की जाती शं । ऩाठकं के शं ले वबी ऩि-ऩुष्ऩ दे ली बगलती को बी त्रप्रम शं ।भागादळान शे तु इन दे ली-दे लताओॊक ऩूजन भं ळास्त्रंक्त े दे ली बगलती को अऩाभागा असधक त्रप्रम शं , इवत्रलधान वे उऩमुक्त औय सनत्रऴद्ध ऩि-ऩुष्ऩ आफदका उल्रेख सरए असधकतय दे ली ऩूजन भं अऩाभागा त्रलळेऴ रुऩ वेफकमा जा यशा शं िढा़मा जाता शं । इव क अराला त्रलद्रानो का कथन शं की जो ऩि- ेगणेळजी क सरमे उऩमुक्त ऩि-ऩुष्ऩ का िमन े ऩुष्ऩ ळास्त्रोक्त त्रलधान वे बगलान सळल की ऩूजा भं सनऴेध त्रलद्रानं के भतानुळाय ळास्त्रंक्त त्रलधान वे शं उवे बी दे ली ऩूजन भं िढ़ामे जा वकते शं ।गणेळजीको तुरवी िोिकय वबी ऩि-ऩुष्ऩ त्रप्रम शं । अत् दे ली बगलती को वबी प्रकाय क रार पर िढा़एॊ े ूतुरवी िोडकय वबी उऩमुक्त ऩि-ऩुष्ऩ गणेळजी को अऩाण जा वकते शं क्मोफक रार यॊ ग क वबी पर बगलतीको े ूफकमे जा वकते शं । त्रप्रम शं तथा वुगस्न्धत वभस्त द्वेत पर बी बगलतीको ू गणऩसतको दलाा ू असधक त्रप्रम शं । इव सरए असधक त्रप्रम शं ।गणेळजी क ऩूजन भं वपद मा शयी दलाा अलश्म िढ़ानी े े ू दे ली बगलती क ऩूजन भं िभेरी, भदाय, कवय, े ेिाफशमे । दलाा की ू तीन मा ऩाॉि ऩत्ती शोनी िाफशए। फेरा, द्वेत औय रार पर, द्वेत कभर, ऩराळ, तगय, ूगणेळजी को तुरवी कबी न िढ़ामे । अळोक, िॊऩा, भौरसवयी, कद, रोध, कनेय, आक, ळीळभ ुॊ औय अऩयास्जत ( अथाात ळॊखऩुष्ऩी) आफदका उऩमोग न तुरस्मा गणासधऩभ ् फकमा जा वकता शं । (ऩद्मऩुयाण) कि जानकायं का कथन शं की दे ली बगलती क ु ेबालाथा: तुरवी वे गणेळजी की ऩूजा कबी नशीॊ कयनी ऩूजन भं आक औय भदाय मश दो परं को सनऴेध शं । ूिाफशमे। मशीॊ कायण शं की उक्त दोनं पर को त्रलसबन्न भत क ू े कायण दे ली दगाा क ऩूजन भे उऩमोग बी फकम जाते शं ु े गणेळ तुरवी ऩि दगाा नैल तु दलाामा ु ू औय सनत्रऴद्ध बी भाने जाते शं । (कासताक भाशात्म्म) मफद फकवी कायण लळ जफ अन्म उऩमुक्त पर न ूबालाथा: गणेळजी की तुरवी ऩि वे एलॊ दगााजी की दलाा ु ू सभरे तफ इन दोनंका उऩमोग फकमा जा वकता शं ।ऩूजा नशीॊ कयनी िाफशमे। दे ली दगाा को िोिकय दे त्रलमं ऩय इन दोनं को ु गणेळजी की ऩूजा भं भन्दाय क रार पर िढ़ाने े ू नशीॊ िढा़ना िाफशए। रेफकन दे ली दगाा ऩय िढ़ामा जा ुवे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । रार ऩुष्ऩ क असतरयक्त ऩूजा े वकता शं । क्मंफक कि जानकायं का भत शं की दगााकी ु ुभं द्वेत,ऩीरे पर बी िढ़ाए जाते ू ऩूजाभं इन दोनंका त्रलधान ळास्त्रोक्त शं ।* गणऩसतको नैलेद्यभं रड्डू (भोदक) असधक त्रप्रम शं ।
  • 56. 56 अक्टू फय 2012 ळभी, अळोक, कस्णाकाय (कसनमाय मा अभरताव),  शजाय गूभावे फढ़कय एक सिसििा (अऩाभागो) परको ूगूभा, दोऩशरयमा, अगस्त्म, भदन, सवन्दलाय, ळल्रकी, ु िढ़ानेवे सभर जाता शं ।भाधल आफद रताऍ, कळकी भॊजरयमॉॊ, त्रफल्लऩि, कलिा, ु े  शजाय सिसििो (अऩाभागो) वे फढ़कय एक कळक ु ेकदम्फ, बटकटै मा, कभर मे पर दे ली बगलती को त्रप्रम ू परको िढ़ानेवे सभर जाता शं । ूशं ।  शजाय कळ-ऩुष्ऩंवे फढ़कय एक ळभीका ऩत्ता िढ़ानेवे ु आक औय भदायकी तयश दलाा, सतरक, भारती, ू सभर जाता शं ।तुरवी, बॊगयै मा औय तभार उऩमुक्त एलॊ प्रसतत्रऴद्ध शं  शजाय ळभीक ऩत्तंवे फढ़कय एक नीरकभरक परको े े ूअथाात मे ळास्त्रंवे त्रलफशत बी शं औय सनत्रऴद्ध बी शं । िढ़ानेवे सभर जाता शं ।* त्रलफशत-प्रसतसळद्धक वम्फन्धक तत्त्लवागयवॊफशताक भं े े  शजाय नीरकभरंवे फढ़कय एक धतूया िढ़ानेवे सभरउल्रेख शं फक जफ ळास्त्रंवे त्रलफशत पर न सभर ऩामं तो ू जाता शं ।त्रलफशत-प्रसतत्रऴद्ध परंवे ऩूजा फक जा वकती शं । ू  शजाय धतूयंवे फढ़कय एक ळभीक परको िढ़ानेवे े ू सभर जाता शं ।सळल ऩूजनक सरमे उऩमुक्त ऩि-ऩुष्ऩ का िमन े ** ऩौयास्णक भान्मता शं की वभस्त परंकी जासतमंभं ू बगलान सळल क ऩूजन भं पर िढ़ानेका त्रलळेऴ े ू वफवे फढ़कय नीरकभर शोता शं ।भशत्त्ल शं । धासभाक भान्मताओॊ क अनुळाय कशाॊ जाता शं भ ेकी तऩ्, ळीर, वलागुणवम्ऩन्न लेदभं सनष्णात फकवी व्मावभुसन ने कनेयकी श्रेणीभं िभेरी, भौरसवयी,ब्राह्मणको वौ वुलणा दान कयने वे जो पर प्राद्ऱ शोता शं , ऩाटरा, भदाय, द्वेतकभर, ळभीके पर ू औय फिीलश पर बगलान सळलसरॊग ऩय वौ पर िढ़ा दे नेवे प्राद्ऱ ू बटकटै माको यखा शं औय धतूयेकी श्रेणीभं नागिम्ऩा औयशो जाता शं । ऩुॊनागको यखा शं । ळास्त्रंने बगलान सळलकी ऩूजाभं भौरसवयी (फक-बगलान सळल क ऩूजन भं कतकी एलॊ कलिे का सनऴेध े े े फकर) क परको शी असधक भशत्त्ल फदमा शं । ु े ूभाना गमा शं । बत्रलष्मऩुयाण भं बगलान सळल क ऩूजन भं िढ़ाने ेधभा-ळास्त्रो भं सळल ऩूजन भं त्रलळेऴ परोक िढ़ानेवे ु े मोग्म अन्म स्जन परंक का उल्रेख फकमा शं लश इव ू ेसभरनेलारे परका अनुिभ फतरामा गमा शं जो इव प्रकाय शं ..प्रकाय शं .. कयलीय (अथाात कनेय), भौरसवयी, धतूया, ऩाढय, दव वुलणा भुद्रा क फयाफय वुलणा दान कयने का पर े फिी कटे यी, कयै मा, काव, भन्दाय, अऩयास्जता, ळभीका ु एक आकक परको िढ़ानेवे सभर जाता शं । े ू पर, कब्जक, ळॊखऩुष्ऩी, सिसििा, कभर, िभेरी, िम्ऩा, ू ु शजाय आकक परंको िढ़ाने का पर एक कनेय क े ू े नागिम्ऩा, खव, तगय, नागकवय, फकफकयात (कटवयै मा), े ॊ परको िढ़ानेवे सभर जाता शं । ू गूभा, ळीळभ, गूरय, जमन्ती, फेरा, ऩराळ, फेरऩत्ता, शजाय कनेयक परंको िढ़ाने का पर एक त्रफल्लऩिको े ू कवुम्ब-ऩुष्ऩ, कङ्कभ अथाात ् कवय, नीरकभर औय रार ु ु ु े िढ़ानेवे सभर जाता शं । कभर । जर-थर भं उत्ऩन्न स्जतने वुगस्न्धत पर शं , ू शजाय त्रफल्लऩिंको िढ़ाने का पर एक गूभापर ू वबी बगलान ळॊकयको त्रप्रम शं । (द्रोण-ऩुष्ऩ) को िढ़ानेवे सभर जाता शं ।
  • 57. 57 अक्टू फय 2012सळल अिााभं सनत्रऴद्ध ऩि-ऩुष्ऩ का उल्रेख इव प्रकाय कदम्फ ऩुष्म क त्रलऴम भं दे लीऩुयाण भं लस्णात ळास्त्रोक्त ेफकमा गमा शं .. भत:- कदम्फ, वायशीन पर मा कठू भय, कलिा, सळयीऴ, ू े कदम्फैद्ळम्ऩकये लॊ नबस्मे वलाकाभदा। ैसतस्न्तणी, कोद्ष, कथ, गाजय, फशे िा, कऩाव, गॊबायी, ै अथाात: बाद्रऩदभावभं कदम्फ औय िम्ऩा क पर वे े ूऩिकटक, वेभर, अनाय, धल, कतकी, लवॊत ऋतुभं ॊ े सळलकी ऩूजा कयनेवे वबी इछिाए ऩूयी शोती शं ।स्खरनेलारा कद-त्रलळेऴ, कद, जूशी, भदन्ती, सळयीऴ वजा ॊ ुॊऔय दोऩशरयमाक पर बगलान सळल को नशीॊ िढ़ाने े ू उक्त ळास्त्रोक्त लिन क ऩद्ळमात वबी स्स्थतीमा ेिाफशमे । स्ऩद्श शं दोनं लिनंभं कोई त्रलयोध नशीॊ यश जाता की लीयसभिोदमभं बगलान सळल क ऩूजन भं िढ़ाने े बाद्रऩदभावभं त्रलसध उऩमुक्त शो जाती शं औयमोग्म अन्म स्जन परंक का उल्रेख फकमा शं लश ू े बाद्रऩदभाववे सबन्न भावंभं सनऴेध शो जाता शं ।कदम्फ, फकर औय कन्दऩय शं । ु ुत्रलळेऴ नोट: इन ऩुष्ऩंक त्रलऴम भं ळास्त्रं क अध्ममन भं े े फकर(भौरसवयी) वे वॊफॊसधत अन्म ळास्त्रंक्त भत:- ुकशीॊ उऩमुक्त औय कशीॊ सनऴेध सभरता शं । उऩयोक्त भत फकर-वम्फन्धी त्रलसध सनऴेधभं फकमा गमा शं । ु अत् ऩाठकं क भागादळान शे तु त्रलळेऴ ळास्त्रोक्त भत े आिाये न्दभं फक का अथा फकर फकमा गमा शं औय फकर ु ु ुद्राया सनष्कऴा प्रस्तुत फकमा जा यशा शं । का अथा शं भौरसवयी फकमा गमा शं । फकऩुष्ऩेण िैकन ळैलभिान्भुत्तभभ ्। ेकदम्फ ऩुष्म क त्रलऴम भं ळास्त्रोक्त भत:- े अथाात: फकर ऩुष्ऩ सळलऩूजन भं उऩमुक्त शं । ु कदम्फकवुभै् ळम्बुभुन्भतै् वलासवत्रद्धबाक् । ुअथाात: कदम्फ औय धतूयेक परंवे सळल ऩूजा कयनेवे े ू फकर(भौरसवयी) वे वॊफॊसधत अन्म ळास्त्रंक्त भत:- ुवभस्त सवत्रद्धमाॊ प्राद्ऱ शोती शं । फकरैनाािमेद् दे लभ ्। ु ा अथाात: फकर ऩुष्ऩ सळलऩूजन भं लस्जात शं । ुकदम्फ ऩुष्म क त्रलऴम भं अन्म ळास्त्रोक्त भत:- े ऩशरे लिनभं भौरसवयीका सळलऩूजनभं उऩमुक्त फतामा अत्मन्तप्रसतत्रऴद्धासन कवुभासन सळलािाने । ु गमा शं औय दवये लिनभं सनऴेध । ू कदम्फॊ पल्गुऩुष्ऩॊ ि कतक ि सळयीऴकभ ् ॥ े ॊ इन लिनं भं बी त्रलयोध प्रतीत शोता शं । इवकाअथाात: कदम्फ तथा पल्गु (गन्ध आफद वे शीन) क पर े ू ऩरयशाय कारत्रलळेऴ वे स्लत् शो जाता शं , क्मंफक त्रलद्रानंसळलक ऩूजनभं त्रलळेऴ रुऩ वे सनत्रऴद्ध शं । े का भत शं की ळास्त्रं भं भौरसवयी िढ़ानेका त्रलधानत्रलळेऴ भॊतव्म: इव तयश एक लिनवे कदम्फका वामॊकार फदमा गमा शं -सळलऩूजनभं उऩमुक्त शोने का उल्रेख सभरता शं औय दवये ू वामािे फकरॊ ळुबभ। ु ्लिनवे सनऴेध सभरता शं , जो वाभान्म रुऩ वे ऩयस्ऩय अथाात: ऩूजन भं फकर ऩुष्ऩ का प्रमोग वाॊम कार भं ुत्रलरुद्ध प्रतीत शोता शं । उऩमुक्त शं ।उक्त त्रलरुद्ध भतं क ऩरयशाय उल्रेख लीयसभिोदमभं इव ेप्रकाय सभरता शं । वॊफॊसधत ळास्त्र भं कदम्फ पर क त्रलऴम ू े त्रलळेऴ भॊतव्म: इव तयश उक्त लिन वे स्ऩद्श शो जाता शंभं जो त्रलधान फकमा गमा शं , लश कलर बाद्रऩदभाव मा े की फकर ऩुष्म वामॊकारभं त्रलसध िरयताथा शो जाती शं ुभाव त्रलळेऴ क सरए फकमा गमा शं । े औय सबन्न वभमभं सनऴेध िरयताथा शो जाता शं ।
  • 58. 58 अक्टू फय 2012कन्द परक सरमे लीयसभिोदमभं उल्रेख शं : ु ू े  शजाय खैयक परंको िढ़ाने का पर एक ळभी क े ू े कन्दऩुष्ऩस्म सनऴेधेऽत्रऩ भाघे सनऴेधाबाल् । ु परको िढ़ानेवे सभर जाता शं । ूअथाात: भाघ भशीने भं बगलान सळल ऩय कन्द िढ़ामा जा ु  शजाय ळभीक परंको िढ़ाने का पर एक वपद े ू ेवकता शं , ळेऴ भशीनंभं सनऴेध शं । कनेयक परको िढ़ानेवे सभर जाता शं । े ू  शजाय वपद कनेय परंको िढ़ाने का पर अऩेषा एक े ूत्रलष्णु ऩूजनभं उऩमुक्त ऩि-ऩुष्ऩ का िमन कळक परको िढ़ानेवे सभर जाता शं । ु े ू यत्न-भस्ण, स्लणा सनसभात परं की अऩेषा बगलान ू  शजाय कळक परंको िढ़ाने का पर एक लनलेराक ु े ू ेत्रलष्णुको तुरवीदर असधक त्रप्रम शं । परको िढ़ानेवे सभर जाता शं । ू बगलान त्रलष्णुको कौस्तुब भस्ण वे बी तुरवी  शजाय लनलेराक परंको िढ़ाने का पर एक िम्ऩाक े ू ेअसधक त्रप्रम शं । बगलान त्रलष्णुको श्माभ तुरवी त्रप्रम शं परको िढ़ानेवे सभर जाता शं । ूशी रेफकन गौयी तुरवी असधक त्रप्रम शं ।  शजाय िम्ऩाक परंको िढ़ाने का पर एक अळोक क े ू े स्लमॊ बगलान त्रलष्णु का लिन शं की तुरवीदर न परको िढ़ानेवे सभर जाता शं । ूक त्रफना कनेय, फेरा, िम्ऩा, कभर औय भ