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GURUTVA JYOTISH NOV-2012
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Diwali 2012, Diwali 2012 Date,diwali 2012 Date in india, diwali 2012 date in delhi, auspicious time For diwali 2012 date panchang, dhanteras 2012, Deepawali, Dipawali, Deepavali, Dipavali, Dhanteras 2012 Date, Dhanteras celebrations, Dhanteras, Dhantheran, Dhanterash, Dhantrayodashi, Dhanwantari Triodas, Dhanteras 2012, Dhanteras Puja, Dhanteras-Dhanteras Pooja Muhurt (Time), Deepavali, Diwali Katha in Hindi, Deepawali Ganesh pooja, Lakshmi Poojan, Kuber Poojan,11-November-2012, Dhanteras, Sunday, pooja, lakshmi poojan vidhi, Laxmi puja, Mantra siddha Lakshmi Ganesh Yantra, Shri Dhan Laxmi Yantra, Pran Pratishthit Subhlabh Yantras, abhimantrit, Lakshmi Ganesh Yantra, ganesh lakshmi mantra, Divine laxmi ganesh yantra, Shree Yantra In Copper, Silver, Pure Gold, Maha lakshmai Bisha Yantra, Dayak Siddha Bisa Yantra, Kanak Dhara, Vaibhav Lakshmi, Mahan Siddhi Dayak Shri Mahalakshmi Yantra In Odisha, Shri Shri Yantra in Orissa, Shree Jayeshtha Lakshmi Mantra Poojan Yantra, Dhanda Yantra, Sri Yantra, Yantra, Yantras, Crystal, Sphatik, Sfatik, yantras, Mantra Siddha Yantra For Good Wealth, Health, Happyness, Shri Jantra, Shree Chakra Yantra, Sampoorn Shree Yantra, Sampurn Lakshmi Yantra In Bhubaneswar, Laxmi Bisa Lakshmi Ganesh Yantra, Shree Lakshmi Yantra, Siddh Yantras, 24K Gold Plated Vedic Yantras, akhandit Ganesh lakshmi Yantra, Praan Pratishthit yantra, Kuber Yantra For Money, Kuber Yantra For Finance, Dhan Prapti Kuber Yantra, dhan labh Kuber Yantra, 24K Gold Plated Vedic, auspicious time For Lakshmi Pooja, Yantras, akhandit Kuber Yantra, Praan Pratishthit Kuber yantra, Kuber Jantra

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  • 1. Font Help >> http://gurutvajyotish.blogspot.comगुरुत्ल कामालरम द्राया प्रस्तुत भाप्तवक ई-ऩत्रत्रका नलम्फय- 2012 » स्पटिक श्रीमॊ त्र का ऩू ज न » ऩाॊ च मॊ त्र वे धन की कभी को कयदं … » वद्ऱ श्री का चभत्काय » धन प्राप्तद्ऱ शे तु वात द रलब रक्ष्भी वाधना ु » रक्ष्भी का प्तचस्थामी प्तनलाव तीन द रलब ... ु » रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु वात द रलब लस्तु एॊ ु NON PROFIT PUBLICATION
  • 2. FREE E CIRCULARगुरुत्ल ज्मोप्ततऴ ऩत्रत्रका ई- जन्भ ऩत्रत्रकानलम्फय 2012 अत्माधुप्तनक ज्मोप्ततऴ ऩद्धप्तत द्रायावॊऩादकप्तचॊतन जोळीवॊऩकलगुरुत्ल ज्मोप्ततऴ त्रलबाग उत्कृ द्श बत्रलष्मलाणी क वाथ ेगुरुत्ल कामालरम92/3. BANK COLONY,BRAHMESHWAR PATNA,BHUBNESWAR-751018, १००+ ऩेज भं प्रस्तुत(ORISSA) INDIAपोन91+9338213418,91+9238328785, E HOROSCOPEईभेरgurutva.karyalay@gmail.com,gurutva_karyalay@yahoo.in, Create By Advancedलेफwww.gurutvakaryalay.comhttp://gk.yolasite.com/ Astrologywww.gurutvakaryalay.blogspot.com/ऩत्रत्रका प्रस्तुप्तत Excellent Predictionप्तचॊतन जोळी, 100+ Pagesस्लस्स्तक.ऎन.जोळीपोिो ग्राटपक्व टशॊ दी/ English भं भूल्म भात्र 750/-प्तचॊतन जोळी, स्लस्स्तक आिलशभाये भुख्म वशमोगी GURUTVA KARYALAYस्लस्स्तक.ऎन.जोळी (स्लस्स्तक BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785वोफ्िे क इस्न्िमा प्तर) Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
  • 3. दीऩोत्वल अथालत दीऩालरी ऩलल को ऩुयातन कार वे शी बायतलऴल भं ज्मोप्ततऩलल क रुऩ भं भनामा जाता शं । फिे ़ - े फिे ़ भशानगयं वे रेकय छोिे वे छोिे गालं भं बी धनी वे रेकय गयीफ वे गयीफ व्मत्रि की चौखि बी इव ऩालन ऩलल क अलवय ऩय दीऩक की ऩॊत्रिमं क जगभगा उठती शं । दीऩालरी क टदन अभालस्मा …4 े े े …4 एवी ऩौयास्णक भान्मता शं टक धन तेयव क टदन धनलॊतयी नाभक दे लता अभृत करळ क वाथ े े वागय भॊथन वे उत्ऩन्न शुए थे। धनलॊतयी धन, स्लास्थम ल आमु क अप्तधऩप्तत दे लता शं । े धनलॊतयी को दे लं क लैध ल प्तचटकत्वक क रुऩ भं जाना जाता शं । …6 े े दीऩालरी त्रलळेऴ भं ऩढे ़  त्रलळेऴ भं   दीऩालरी त्रलळेऴ  वलल कामल प्तवत्रद्ध धन तेयव ळुब भुशूतल (11-नलम्फय-2012) 7 स्पटिक श्रीमॊत्र का ऩूजन 10 दीऩालरी ऩूजन भुशूत(13-नलम्फय-2012) ल 8 वद्ऱ श्री का चभत्काय 12 कलच …55 त्रलप्तबन्न रक्ष्भी भॊत्र 13 दीऩालरी भशत्ल.. वॊऩूणल रक्ष्भी ऩूजन 14 रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु कयं याप्तळ भॊत्र का जऩ 39 रक्ष्भी का प्तचस्थामी प्तनलाव तीन दरब... ु ल 30 वुख-स्भृत्रद्ध चाशते शं ऋण(कजल)कफरे औय कफदे 46 ऩाॊच मॊत्र वे धन की कभी को कयदं … 34 दीऩालरी भं रक्ष्भी-गणेळ आयाधना का भशत्ल 48 धन प्राप्तद्ऱ शे तु वात दरब रक्ष्भी वाधनाएॊ ु ल 36 दीऩालरी वे जुिी रक्ष्भी कथा 56 रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु वात दरब लस्तुएॊ ु ल 43गणेळ रक्ष्भी मॊत्र.113 धनतेयव टक अनोखी कथा 57  शभाये उत्ऩाद  जफ रक्ष्भीजी को प्तभरी वजा? 63 बाग्म रक्ष्भी टदब्फी 8 रक्ष्भीजी क स्लगल रोक जाने टक कथा े 65 दगाल फीवा मॊत्र ु 9 धनप्राप्तद्ऱ औय वुख वभृत्रद्ध क प्तरमे लास्तु प्तवद्धाॊत े 66 भॊत्रप्तवद्ध स्पटिक श्री मॊत्र 11 दे लउठनी एकादळी व्रत कथा 67 वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच 55नलयत्न जटित श्रीमॊत्र..93 दरयद्रता वे भुत्रि क ळीघ्र प्रबाली उऩाम े 69 वललप्तवत्रद्धदामक भुटद्रका 29 दीऩ जराने का धाप्तभलक भशत्ल क्मा शं ? 74 द्रादळ भशा मॊत्र 89 त्रलप्तबन्न रक्ष्भी धनत्रमोदळी ऩय मभ-दीऩदान अकारभृत्मु वे… ऩुरुऴाकाय ळप्तन मॊत्र एलॊ ळप्तन तैप्ततवा मॊत्र 92 77 मॊत्र …96 धनत्रमोदळी ऩय मभदीऩदान क्मं टकमा जाता शं ? 79 श्री शनुभान मॊत्र 94 रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क वयर उऩाम े 82 त्रलप्तबन्न दे लता एलॊ काभना ऩूप्ततल मॊत्र वूप्तच 95  स्थामी औय अन्म रेख  त्रलप्तबन्न दे ली एलॊ रक्ष्भी मॊत्र वूप्तच 96 वॊऩादकीम 4 भॊत्र प्तवद्ध रूद्राष 98 भाप्तवक याप्तळ पर 104 श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र / कलच 99 याप्तळ यत्न…97 नलम्फय 2102 भाप्तवक ऩॊचाॊग 108 याभ यषा मॊत्र 100 नलम्फय-2012 भाप्तवक व्रत-ऩलल-त्मौशाय 110 जैन धभलक त्रलप्तळद्श मॊत्र े 101 नलम्फय 2102 -त्रलळेऴ मोग 116 घॊिाकणल भशालीय वलल प्तवत्रद्ध भशामॊत्र 102 दै प्तनक ळुब एलॊ अळुब वभम सान ताप्तरका 116 अभोद्य भशाभृत्मुॊजम कलच 102 टदन-यात क चौघटिमे े 117 याळी यत्न एलॊ उऩयत्न 102 भॊत्र प्तवद्ध रूद्राष …98 टदन-यात टक शोया - वूमोदम वे वूमालस्त तक 118 वलल योगनाळक मॊत्र/ 120 ग्रश चरन नलम्फय -2012 119 भॊत्र प्तवद्ध कलचअभोद्य भशाभृत्मुजम ॊ 122 वूचना 127 YANTRA LIST 123 कलच …103 शभाया उद्दे श्म 129 GEM STONE 125
  • 4. त्रप्रम आस्त्भम फॊध/ फटशन ु जम गुरुदे ल दीऩोत्वल अथालत दीऩालरी ऩलल को ऩुयातन कार वे शी बायतलऴल भं ज्मोप्ततऩलल क रुऩ भं भनामा जाता ेशं । फिे -फिे ़ भशानगयं वे रेकय छोिे वे छोिे गालं भं बी धनी वे रेकय गयीफ वे गयीफ व्मत्रि की चौखि बी इव ऩालन ़ऩलल क अलवय ऩय दीऩक की ऩॊत्रिमं क जगभगा उठती शं । दीऩालरी क टदन अभालस्मा शोने क कायण इव टदन वकर े े े ेरोक भं चायं ओय अॊधकाय परा शोता शं , रेटकन भनुष्म को अॊधकाय ऩवॊद नशीॊ शं , इव प्तरए लशॉ उववे भुकाफरा कयने ैक उद्दे श्म वे अऩने घय-दकान आटद स्थानं ऩय दीऩं की ऩॊत्रिमं भं वजाकय अॊधेये को दय बगाने का वाथलक प्रमाव े ु ूकयता शं । क्मंकी, प्रकाळ का शभाये जीलन भं फशुत भशत्ल शं , इव भशत्ल वे शय व्मत्रि बरी बाप्तत ऩरयप्तचत शं । शभायी बायप्ततमवॊस्कृ प्तत क धाप्तभलक कामलक्रभ भं बी अस्ग्न का त्रलळेऴ भशत्ल शं । एलॊ अस्ग्न प्रकाळ का प्रप्ततक शं जो मस, शलन, त्रललाश, वॊस्काय ेजेवे अन्म धाप्तभलक कभलकाॊिो भं त्रफना अस्ग्न क त्रफना वॊऩन्न शोना अवॊबल वा प्रप्ततत शोता शं । इवी कायण बायप्ततम वभ्मताओॊ भं ेअस्ग्न को दे ल कशा गमा शं । अस्ग्न को दे लता भनकय उवका ऩूजन टकमा जाता शं । क्मोटक एवा भाना जाता शं , टक मटद अस्ग्नदे ल क्रोप्तधत शोजामे तो फिे -फिे भशरं ल ऊचे-ऊचे बलनं को धूरभं उिादे औय याख फनादे । ॊ ॊ इव प्तरमे प्रकाळ का ऩूजन कय उन्शं ळाॊत यखने का प्रमाव टकमा जाता शं । शभाये प्रभुख धभल ग्रॊथो भं एक ऋग्लेद का वललप्रथभ भॊत्र शी प्रकाळ वे ळुरू शोता शै ।भॊत्र: प्रकाळभीरे ऩुयोटशतॊ मसस्म दे लभृस्त्लजभ ्। शोतायॊ यत्नधातभभ ्॥बालाथल:- वललप्रथभ आयाधन टकए जाने लारे, मस को प्रकाप्तळत कयने लारे, ऋतुओॊ क अनुवाय मस वम्ऩाटदत कयने लारे, दे लताओॊ ेका आह्वान कयने लारे तथा धन प्रदान कयने लारं भं वललश्रद्ष अस्ग्न दे लता की भं स्तुप्तत कयता शूॊ। े अन्म ऩौयास्णक भान्मताओॊ क अनुळाय ऩुयातन कार भं दीऩालरी ऩलल को "रोकोत्वल" क रुऩ भं भनामा जाता े ेथा। रेटकन आज दीऩालरी ऩलल की भुख्मत् दो प्रभुख त्रलळेऴता दे खने को प्तभरती शं । एक शं , दीऩं की जगभगाशि वेअॊधकायको दय कयना औय दवयी शै , लैबल एलॊ वुख-वभृत्रद्ध की दे ली भाॉ भशारक्ष्भी क ऩूजन का आमोजन। ू ू े दीऩालरी क टदन दे ली रक्ष्भी, गणेळ, वयस्लती, कफेय आटद का ऩूजन कयने का त्रलधान शै । े ु क्मोटक दे ली रक्ष्भीकी उत्ऩत्ती दीऩालरी क टदन भानी जाती शं औय ळास्त्रोि लणल शं धन की दे ली रक्ष्भी शं औय धन क दे लता कफेय शं , े े ुस्जनक प्रवन्न शोने वे भनुष्म को धन, वभृत्रद्ध एलॊ ऐद्वमल प्राद्ऱ शोता शं । भाॊ रक्ष्भी चॊचर शं । अथालत रक्ष्भी जी लश एक े े ु ुजगश टिकती नशीॊ शै । टकव प्रकाय रक्ष्भी का आगभन आऩक घय भं शो औय स्जदॊ गी द्ख, दरयद्र, कद्शो वे छि कयखुप्तळमं वे बय जाए उववे जुिे यशस्मो को बायतीम ऋत्रऴ भुप्तनमं ने खोज प्तनकारा शं । मश बी एक प्रभुख कायण शं कीदीऩालरी का ऩलल भनामा जाता शं औय रक्ष्भीजी का ऩूजन अचलन टकमा जाता शं । अन्म धाप्तभलक भान्मता शं की श्राद्ध ऩष वे रेकय काप्ततलक भाव की अभालस्मा तक त्रऩतयं को ऩुन् अऩने रोकभं रोिना शोता शं । ऩरयलाय क रोग त्रऩतयं का आह्वान कयते शं , उनका ऩूजन कय दीऩं वे उनका ऩुन् लाऩव जाने लारा े
  • 5. अॊप्तधमाया भागल प्रकाप्तळत कयक उन्शं अगरे लऴल तक क प्तरए त्रलदाई दे ते शं । े ेदीऩालरी क वॊफॊध भं बत्रलष्मऩुयाण भं उल्रेख शं की े लस्त्र-ऩुष्ऩै् ळोप्तबतव्मा क्रम-त्रलक्रम-बूभम्।अथालत ्: आज क टदन धनऩप्तत कफेय का बी ऩूजन शोता शं । टशन्द ू धभलळास्त्रं क अनुवाय कफेय धनऩप्तत शं । े ु े ु एवा भानाजाता शं की आज क टदन शी दे ली रक्ष्भी का जन्भ शुला था। े आज क बौप्ततक मुग भं शय कामल धन क उऩय प्रत्मष मा अप्रत्मष रुऩवे प्तनबलय कयता शं इव प्तरमे प्रत्मेक े ेव्मत्रि टक मशी इच्छा शोती शं टक उवक ऩाव अऩाय धन दौरत एलॊ जीलन उऩमोगी वायी वुख वुत्रलधाए उप्रब्ध शो जो ेएक वभृद्ध व्मत्रि क ऩाव भं शोती शं , एलॊ उवकी वभृत्रद्ध एलॊ उन्नप्तत टदन प्रप्ततटदन फढती जाए। स्जन रोगो क ऩाव े ेऩमालद्ऱ धन-वॊऩत्रत्त शोती शं उन्शं इच्छा शोती शं उनकी धन-वॊऩत्रत्त टदन दोगुनी यात चौगुनी फढती यशं ओय स्जक ऩाव ेऩमालद्ऱ धन-वॊऩत्रत्त नशीॊ शं उवकी इच्छा शोती शं , की उवे कभ वे कभ इतनी धन वॊऩत्रत्त प्राद्ऱ शो जामे की उवका जीलनवुखभम शो। रेटकन कछ रोगो को धन, वॊऩत्रत्त एलॊ बौप्ततक वुख-वाधन अऩनी मोग्मता औय भेशनत क अनुळाय प्राद्ऱ शो ु ेजाता शं । रेटकन फशोत वे रोग एवे शोते शं स्जन्शं कटठन ऩरयश्रभ कयने औय प्तळस्षत शोने क उऩयाॊत बी त्रलळेऴ राब ेनशीॊ प्तभरता मा अऩने ऩरयश्रभ का उप्तचत भूल्म बी नशीॊ प्राद्ऱ शो ऩाता शं ।एवे रोगं क प्तरम एलॊ स्जन्शं वयरता वे धन की प्राप्तद्ऱ शं उनकी धन-वॊऩात्रत्त फढ़ती यशे औय भाॊ भशारक्ष्भी की कृ ऩा ेप्राप्तद्ऱ शे तु दीऩालरे त्रलळेऴ अॊक भं धन प्राप्तद्ऱ क वयर उऩामं क वाथ भं, रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु दरब ळीघ्र प्रबाली मॊत्र, े े ु लवाभग्रीमाॊ औय ळीघ्र प्रबाली वयर वाधनाओॊ का वॊकरन त्रलप्तबन्न ळास्त्र एलॊ ग्रॊथो भं लस्णलत उल्रेख क आधाय ऩय टकमा ेगमा शं । ऩाठको क भागलदळलन एलॊ जानकायी शे तु ऩत्रत्रका क इव अॊक भं कछ त्रलळेऴ प्राबाली भॊत्रो का वॊकरन कयने का े े ु ुप्रमाव टकमा गमा शं । स्जववे इच्छक फॊधु/फशन त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय अऩने भनोयथो को प्तवद्ध कयने भं वभथल शं।इव अॊक भं प्रकाप्तळत त्रलप्तबन्न उऩाम, मॊत्र-भॊत्र-तॊत्र, वाधना ल ऩूजा ऩद्धप्तत क त्रलऴम भं वाधक एलॊ ेत्रलद्रान ऩाठको वे अनुयोध शं , मटद दळालमे गए भॊत्र, स्तोत्र इत्मादी क वॊकरन, प्रभाण ऩढ़ने, वॊऩादन भं, ेटिजाईन भं, िाईऩीॊग भं, त्रप्रॊटिॊ ग भं, प्रकाळन भं कोई त्रुटि यश गई शो, तो उवे स्लमॊ वुधाय रं मा टकवी मोग्मगुरु मा त्रलद्रान वे वराश त्रलभळल कय रे । क्मोटक त्रलद्रान गुरुजनो एलॊ वाधको क प्तनजी अनुबल त्रलप्तबन्न अनुद्षा ेभं बेद शोने ऩय ऩूजन त्रलप्तध एलॊ जऩ त्रलप्तध भं प्तबन्नता वॊबल शं । आऩका जीलन वुखभम, भॊगरभम शो भाॊ रक्ष्भी की कृ ऩा आऩक ऩरयलाय ऩय े फनी यशे । भाॊ भशारक्ष्भी वे मशी प्राथना शं … प्तचॊतन जोळी
  • 6. 6 नलम्फय 2012 ***** दीऩालरी त्रलळेऴाॊक वे वॊफॊप्तधत त्रलळेऴ वूचना ***** ऩत्रत्रका भं प्रकाप्तळत दीऩालरी त्रलळेऴ भं वम्फस्न्धत वबी जानकायीमाॊ गुरुत्ल कामालरम क अप्तधकायं क वाथ े े शी आयस्षत शं । ऩौयास्णक ग्रॊथो ऩय अत्रलद्वाव यखने लारे व्मत्रि इव अॊक भं उऩरब्ध वबी त्रलऴम को भात्र ऩठन वाभग्री वभझ वकते शं । धाप्तभलक त्रलऴम आस्था एलॊ त्रलद्वाव ऩय आधारयत शोने क कायण इव अॊकभं लस्णलत वबी जानकायीमा े बायप्ततम ग्रॊथो वे प्रेरयत शोकय प्तरखी गई शं । धभल वे वॊफॊप्तधत त्रलऴमो टक वत्मता अथला प्राभास्णकता ऩय टकवी बी प्रकाय टक स्जन्भेदायी कामालरम मा वॊऩादक टक नशीॊ शं । इव अॊक भं लस्णलत वॊफॊप्तधत वबी रेख भं लस्णलत भॊत्र, मॊत्र ल प्रमोग टक प्राभास्णकता एलॊ प्रबाल टक स्जन्भेदायी कामालरम मा वॊऩादक टक नशीॊ शं औय ना शीॊ प्राभास्णकता एलॊ प्रबाल टक स्जन्भेदायी क फाये भं े जानकायी दे ने शे तु कामालरम मा वॊऩादक टकवी बी प्रकाय वे फाध्म शं । धभल वे वॊफॊप्तधत रेखो भं ऩाठक का अऩना त्रलद्वाव शोना आलश्मक शं । टकवी बी व्मत्रि त्रलळेऴ का टकवी बी प्रकाय वे इन त्रलऴमो भं त्रलद्वाव कयने ना कयने का अॊप्ततभ प्तनणलम उनका स्लमॊ का शोगा। ळास्त्रोि त्रलऴमं वे वॊफॊप्तधत जानकायी ऩय ऩाठक द्राया टकवी बी प्रकाय टक आऩत्ती स्लीकामल नशीॊ शोगी। धभल वे वॊफॊप्तधत रेख प्राभास्णक ग्रॊथो, शभाये लऴो क अनुबल एल अनुळधान क आधाय ऩय टदमे गमे शं । े ॊ े शभ टकवी बी व्मत्रि त्रलळेऴ द्राया धभल वे वॊफॊप्तधत त्रलऴमं ऩय त्रलद्वाव टकए जाने ऩय उवक राब मा नुक्ळान की े स्जन्भेदायी नटशॊ रेते शं । मश स्जन्भेदायी धाप्तभलक त्रलऴमो ऩय त्रलद्वाव कयने लारे मा उवका प्रमोग कयने लारे व्मत्रि टक स्लमॊ टक शोगी। क्मोटक इन त्रलऴमो भं नैप्ततक भानदॊ िं, वाभास्जक, कानूनी प्तनमभं क स्खराप कोई व्मत्रि मटद नीजी स्लाथल े ऩूप्ततल शे तु मशाॊ लस्णलत जानकायी क आधाय ऩय प्रमोग कताल शं अथला धाप्तभलक त्रलऴमो क उऩमोग कयने भे े े त्रुटि यखता शं मा उववे त्रुटि शोती शं तो इव कायण वे प्रप्ततकर अथला त्रलऩरयत ऩरयणाभ प्तभरने बी वॊबल शं । ू धाप्तभलक त्रलऴमो वे वॊफॊप्तधत जानकायी को भानकय उववे प्राद्ऱ शोने लारे राब, शानी टक स्जन्भेदायी कामालरम मा वॊऩादक टक नशीॊ शं । शभाये द्राया ऩोस्ि टकमे गमे धाप्तभलक त्रलऴमो ऩय आधारयत रेखं भं लस्णलत जानकायी को शभने कई फाय स्लमॊ ऩय एलॊ अन्म शभाये फॊधगण ने बी अऩने नीजी जीलन भं अनुबल टकमा शं । स्जस्वे शभ कई फाय धाप्तभलक ु त्रलऴमो क वे त्रलळेऴ राब की प्राप्तद्ऱ शुई शं । अप्तधक जानकायी शे तु आऩ कामालरम भं वॊऩक कय वकते शं । े ल (वबी त्रललादो कप्तरमे कलर बुलनेद्वय न्मामारम शी भान्म शोगा। े े
  • 7. 7 नलम्फय 2012 धन तेयव ळुब भुशूतल (11-नलम्फय-2012)  प्तचॊतन जोळी एवी ऩौयास्णक भान्मता शं टक धन तेयव क टदन धनलॊतयी नाभक दे लता अभृत करळ क वाथ वागय भॊथन वे े ेउत्ऩन्न शुए थे। धनलॊतयी धन, स्लास्थम ल आमु क अप्तधऩप्तत दे लता शं । धनलॊतयी को दे लं क लैध ल प्तचटकत्वक क रुऩ भं े े ेजाना जाता शं । धन तेयव क टदन चाॊदी क फतलन-प्तवक्क खयीदना त्रलळेऴ ळुब शोता शं । क्मोटक ळास्त्रं भं धनलॊतयी दे ल को चॊद्रभा क े े े ेवभान भाना गमा शं । धन तेयव क धनलॊतयी क ऩूजन वे भानप्तवक ळास्न्त, भन भं वॊतोऴ एल स्लबाल भं वौम्मता का बाल े ेआता शं । जो रोग अप्तधक वे अप्तधक धन एकत्र कयने टक काभना कयते शं उन्शं धनलॊतयी दे ल टक प्रप्ततटदन आयाधना कयनीचाटशए। धनतेयव ऩय ऩूजा कयने वे व्मत्रि भं वॊतोऴ, स्लास्थम, वुख ल धन टक त्रलळेऴ प्राप्तद्ऱ शोती शं । स्जन व्मत्रिमं क उत्तभ ेस्लास्थम भं कभी तथा वेशत खयाफ शोने टक आळॊकाएॊ फनी यशती शं उन्शं त्रलळेऴ रुऩ वे इव ळुब टदन भं ऩूजा आयाधनाकयनी चाटशए। धनतेयव भं खयीदायी ळुब भानी जाती शं । रक्ष्भी जी एलॊ गणेळ जी टक चाॊदी टक प्रप्ततभा-प्तवक्को को इव टदनखरयदना धन प्राप्तद्ऱ एलॊ आप्तथलक उन्नप्तत शे तु श्रेद्ष शोता शं । धनतेयव क टदन बगलान धनलन्तयी वभुद्र वे अभृत करळ रेकय ेप्रकि शुए थे, इवप्तरमे धनतेयव क टदन खाव तौय वे फतलनं टक खयीदायी टक जाती शं । इव टदन स्िीर क फतलन, चाॊदी क े े ेफतलन खयीदने वे प्राद्ऱ शोने लारे ळुब परो भं कई गुणा लृत्रद्ध शोने टक वॊबालना फढ़जाती शं ।धन तेयव ऩूजा भुशूतल प्रदोऴ कार 2 घण्िे एलॊ 24 प्तभनि का शोता शं । अऩने ळशय क वूमालस्त वभम अलप्तध वे रेकय अगरे 2 घण्िे 24 प्तभनि ेटक वभम अलप्तध को प्रदोऴ कार भाना जाता शं । अरग- अरग ळशयं भं प्रदोऴ कार क प्तनधालयण का आधाय वूमोस्त वभम ेक अनुळाय प्तनधालयीत कयना चाटशमे। धनतेयव क टदन प्रदोऴकार भं दीऩदान ल रक्ष्भी ऩूजन कयना ळुब यशता शै । े ेइव लऴल 11 नलम्फय, 2012 (धनतेयव) को बायतीम वभम अनुळाय नई टदल्री भं वॊध्मा वूमालस्त क फाद 05 फज कय 27 ेप्तभप्तनि वे आयम्ब शोकय यात क 07 फजकय 51 प्तभनि तक का वभम प्रदोऴ कार यशे गा। इव वभमा अलप्तध भं स्स्थय रग्न े(लृऴब) बी भुशुतल वभम भं शोने क कायण घय-ऩरयलाय भं स्थामी रक्ष्भी की प्राप्तद्ऱ शोती शै । े 11 नलम्फय, 2012 को प्रदोऴ कार भं बी स्स्थय रग्न (लृऴब याप्तळ) शो यशा शं , स्स्थय रग्न का वभम वफवे उतभभाना जाता शं । धन तेयव क टदन प्रदोऴ कार ल स्स्थय रग्न दोनं का वॊमोग वॊध्मा 05:40:47 फजे वे रेकय यात्री े07:36:14 फजे तक का वभम यशे गा। प्रदोऴ कार क दौयान वॊध्मा 05:29 फजे वे 07:08 फजे तक ळुब चौघटिमा शोने वे ेभुशुतल की ळुबता भं लृत्रद्ध शोती शं ।चौघाटिमा भुशूतल चर भुशूतल वुफश 08:02 वे 09:23 तक   ळुब भुशूतल दोऩशय 01.26 वे 02:47 तक  अभृत भुशूतल यात 07:08 वे 08:47 तक राब भुशूतल वुफश09:23 वे 10:44 तक  ळुब भुशूतल वॊध्मा 05:29 वे 07:08 तक  चर भुशूतल यात 08:47 वे 10:26 तकळुब भशूतल का वभम धन तेयव की ऩूजा क प्तरमे त्रलळेऴ ळुब यशे गा। राब भुशूतल ऩूजन कयने वे प्राद्ऱ शोने लारे राबं भं लृत्रद्ध ेशोती शं । ळुब कार भुशूतल टक ळुबता वे धन, स्लास्थम ल आमु भं लृत्रद्ध शोती शं । वफवे अप्तधक ळुब अभृत कार भं ऩूजा कयनेका शोता शं ।नोि: उऩयोि लस्णलत वूमालस्त का वभम प्तनयधायण नई टदल्री क अषाॊळ ये खाॊळ क अनुळाय आधुप्तनक ऩद्धप्तत वे टकमा गमा शं । इव े ेत्रलऴम भं त्रलप्तबन्न भत एलॊ वूमालस्त सात कयने का तयीका प्तबन्न शोने क कायण वूमालस्त वभम का प्तनयधायण प्तबन्न शो वकता शं । ेवूमालस्त वभम का प्तनयधायण स्थाप्तनम वूमालस्त क अनुळाय टश कयना उप्तचत शोगा। े
  • 8. 8 नलम्फय 2012 दीऩालरी ऩूजन भुशूतल (13-नलम्फय-2012)  प्तचॊतन जोळी भाॊ रक्ष्भी टक कृ ऩा प्राद्ऱ कयने शे तु एलॊ उनका स्थामी प्तनलाव शो वक इव उद्दे श्म वे घय-दकान-व्मलवाप्तमक े ुकामालरम भं दीऩालरी क टदन रक्ष्भी ऩूजन शे तु टदन क वफवे ळुब भुशूतल को प्तरमा जाता शं । े े इव लऴल दीऩालरी का ऩलल भॊगरलाय, 13 नलम्फय, 201२ भं काप्ततलक भाव टक अभालस्मा वूमोदम कारीन नषत्रस्लाती ऩयन्तु प्रदोऴकार भं त्रलळाखा नषत्र का कार यशे गा, वौबाग्म मोग भं तथा चन्दभा का भ्रभण तुरा याप्तळ भंयशे गा। दीऩालरी क टदन अभालस्मा प्ततप्तथ, प्रदोऴ कार, ळुब रग्न ल चौघा़टिमा भुशूतल त्रलळेऴ का अत्माप्तधक भशत्ल शोता शं । े 13 नलम्फय 2012, भॊगरलाय क टदन वूमोदमी नषत्र स्लाती, रेटकन टदन 15:06:42 फजे फाद त्रलळाखा नषत्र ेयशे गा, इव टदन वूमोदमी मोग वौबाग्म यात 23:59:12 फजे फाद ळोबन मोग यशे गा। वूमोदमी कयण ळकप्तन वुफश ु07:14:12 फजे ऩद्ळमात चतुष्ऩाद क ऩद्ळमात नाग कयण यशे गा। वूमोदम वे वॊऩूणल टदन चन्द्रभा तुरा याप्तळ भं भ्रभण ेकये गा। प्रदोऴ कार 2 घण्िे एलॊ 24 प्तभनि का शोता शं । अऩने ळशय क वूमालस्त वभम अलप्तध वे रेकय अगरे 2 घण्िे े24 प्तभनि टक वभम अलप्तध को प्रदोऴ कार भाना जाता शं । अरग- अरग ळशयं भं प्रदोऴ कार क प्तनधालयण का आधाय ेवूमोस्त वभम क अनुळाय प्तनधालयीत कयना चाटशमे। े दीऩालरी प्रदोऴ कार भुशूतल अऩने ळशय क वूमालस्त वभम वे 2 घन्िे 24 प्तभनि तक का वभम ळुब भुशूतल वभम ेक प्तरमे प्रमोग टकमा जाता शं . इवे प्रदोऴ कार वभम कशा जाता शं । इव लऴल 13 नलम्फय 2012 (दीऩालरी) को ेबायतीम वभम अनुळाय नई टदल्री भं वूमालस्त वॊध्मा 05 फज कय 26 प्तभप्तनि ऩय शोगा। वॊध्मा 05 फज कय 26प्तभप्तनि वे आयम्ब शोकय यात क 07 फजकय 50 प्तभनि तक का वभम प्रदोऴ कार यशे गा। े 13 नलम्फय 2012 को प्रदोऴ कार भं बी स्स्थय रग्न (लृऴब याप्तळ) शो यशा शं , स्स्थय रग्न का वभम वफवेउतभ भाना जाता शं । टदऩालरी क टदन प्रदोऴ कार ल स्स्थय रग्न दोनं का वॊमोग वॊध्मा 17:32:56 फजे वे रेकय यात्री े19:28:21 फजे तक का वभम यशे गा। प्रदोऴ कार क दौयान वॊध्मा 07:02 फजे वे 08:36 फजे तक ळुब चौघटिमा शोने ेवे भुशुतल की ळुबता भं लृत्रद्ध शोती शं । बाग्म रक्ष्भी टदब्फी वुख-ळास्न्त-वभृत्रद्ध की प्राप्तद्ऱ क प्तरमे बाग्म रक्ष्भी टदब्फी :- स्जस्वे धन प्रप्तद्ऱ, त्रललाश मोग, े व्माऩाय लृत्रद्ध, लळीकयण, कोिल कचेयी क कामल, बूतप्रेत फाधा, भायण, वम्भोशन, तास्न्त्रक े फाधा, ळत्रु बम, चोय बम जेवी अनेक ऩये ळाप्तनमो वे यषा शोप्तत शै औय घय भे वुख वभृत्रद्ध टक प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै , बाग्म रक्ष्भी टदब्फी भे रघु श्री फ़र, शस्तजोिी (शाथा जोिी), प्तवमाय प्तवन्गी, त्रफस्ल्र नार, ळॊख, कारी-वफ़द-रार गुॊजा, इन्द्र जार, भाम जार, ऩातार तुभिी े जेवी अनेक दरब वाभग्री शोती शै । ु ल भूल्म:- Rs. 1250, 1900, 2800, 5500, 7300, 10900 भं उप्रब्द्ध गुरुत्ल कामालरम वॊऩक : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785 ल c
  • 9. 9 नलम्फय 2012 स्जवभं त्रलळेऴ रूऩ वे श्री गणेळऩूजन, श्री भशारक्ष्भी ऩूजन, कफेय ऩूजन, व्माऩारयक खातं का ऩूजन, दीऩदान एलॊ ुइव वभम क अॊतगलत अऩने वेलकं को उऩशाय दे ना ळुब यशता शं । े इव भुशूतल वभम भं अऩने ऩरयलाय क फिे वदस्मं एलॊ प्तभत्र लगल वे आळीलालद रेना एलॊ उन्शं प्तभठाईमाॊ, लस्त्र ल ेउऩशाय आटद दे ना बी ळुब यशता शं । त्रलद्रानो क भत वे इव भुशूतल भं ऩरयलाय क फिे वदस्मं एलॊ प्तभत्र लगल वे प्राद्ऱ शोने े ेलारा आळीलालद ळुब परप्रद प्तवद्ध शोता शं । इव भुशूतल वभम भं भॊटदय इत्माटद धभलस्थरो ऩय दान इत्माटद कयना बीत्रलळेऴ राब दामश एलॊ कल्माणकायी शोता शं ।दीऩालरी चौघटिमाॊ भुशूतलदीऩालरी चौघ़टिमा भुशूतल वभम को घय ल ऩरयलाय भं रक्ष्भी ऩूजन कयने क प्तरमे ळुब भाना जाता शं । श्रीभशारक्ष्भी ेऩूजन एलॊ दीऩालरी का भशाऩलल काप्ततलक कृ ष्ण अभालस्मा भं प्रदोऴ कार एलॊ यात्रत्र वभम भं स्स्थय रग्न वभम भं कयनाळुब शोता शै रक्ष्भी ऩूजन, दीऩ प्रजलस्ल्रत कयने क प्तरमे प्रदोऴकार भुशूतल वभम शी त्रलळेऴतमा ळुब भाना गमा शं । ेरक्ष्भी ऩूजा भुशूतल दीऩालारी क टदन े  चय भुशूतल टदन भं 09:24 वे 10:44 तक  राब भुशूतल वुफश भं 10:44 वे 12:05 तक  अभृत भुशूतल वुफश भं 12:05 वे 01:26 तक  ळुब भुशूतल दोऩशय भं 02:47 वे 04:07 तक  राब भुशूतल वॊध्मा भं 07:08 वे यात 08:47 तक  ळुब भुशूतल यात भं 10:26 वे यात 12:06 तकनोि: उऩयोि लस्णलत वूमालस्त का वभम प्तनयधायण नई टदल्री क अषाॊळ ये खाॊळ क अनुळाय आधुप्तनक ऩद्धप्तत वे टकमा े ेगमा शं । इव त्रलऴम भं त्रलप्तबन्न भत एलॊ वूमालस्त सात कयने का तयीका प्तबन्न शोने क कायण वूमालस्त वभम का ेप्तनयधायण प्तबन्न शो वकता शं । वूमालस्त वभम का प्तनयधायण स्थाप्तनम वूमालस्त क अनुळाय टश कयना उप्तचत शोगा। े दगाल फीवा मॊत्र ु ळास्त्रोि भत क अनुळाय दगाल फीवा मॊत्र दबालग्म को दय कय व्मत्रि क वोमे शुले बाग्म को जगाने लारा भाना गमा े ु ु ू े शं । दगाल फीवा मॊत्र द्राया व्मत्रि को जीलन भं धन वे वॊफॊप्तधत वॊस्माओॊ भं राब प्राद्ऱ शोता शं । जो व्मत्रि आप्तथलक ु वभस्मावे ऩये ळान शं, लश व्मत्रि मटद नलयात्रं भं प्राण प्रप्ततत्रद्षत टकमा गमा दगाल फीवा मॊत्र को स्थाप्तद्ऱ कय रेता ु शं , तो उवकी धन, योजगाय एलॊ व्मलवाम वे वॊफॊधी वबी वभस्मं का ळीघ्र शी अॊत शोने रगता शं । नलयात्र क टदनो भं े प्राण प्रप्ततत्रद्षत दगाल फीवा मॊत्र को अऩने घय-दकान-ओटपव-पक्ियी भं स्थात्रऩत कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता ु ु ै शं , व्मत्रि ळीघ्र शी अऩने व्माऩाय भं लृत्रद्ध एलॊ अऩनी आप्तथलक स्स्थती भं वुधाय शोता दे खंगे। वॊऩूणल प्राण प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल चैतन्म दगाल फीवा मॊत्र को ळुब भुशूतल भं अऩने घय-दकान-ओटपव भं स्थात्रऩत कयने वे त्रलळेऴ राब ु ु प्राद्ऱ शोता शं । भूल्म: Rs.730 वे Rs.10900 तक GURUTVA KARYALAY: Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785, Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
  • 10. 10 नलम्फय 2012 स्पटिक श्रीमॊत्र का ऩूजन  प्तचॊतन जोळी आज क बौप्ततक मुग भं अथल (धन) जीलन टक भुख्म आलश्मिाओॊ भं वे एक शै । धनाढ्म व्मत्रिओॊ जीलनळैरी को ेदे खकय प्रबात्रलत शोते शुले वाधायण व्मटक टक बी काभना शोती शं , टक उवक ऩाव बी इतना धन शो टक लश अऩने जीलन ेभं वभस्त बौप्ततक वुखो को बोग ने भं वभथल शं। एवी स्स्थभं भेशनत, ऩरयश्रभ वे कभाई कयक धन अस्जलत कयने क े ेफजाम कछ रोग अल्ऩ वभम भं ज्मादा कभाने टक भानप्तवकता क कायण कबी-कबी गरत तयीक अऩनाते शं । ु े ं स्जवक पर स्लरुऩ एवे रोग धन का लास्तत्रलक वुख बोगने वे लॊप्तचत यश जाते ेशं औय योग, तनाल, भानप्तवक अळाॊप्तत जेवी अन्म वभस्माओॊ वे ग्रस्त शो जाते शं । जशाॊ गरत तयीक वे कभामे शुले धन क कायण वभाज एवे रोगो को शीन बाल ं ेवे दे खते शं । जफटक भेशनत, ऩरयश्रभ वे काभामे शुले धन वे स्लमॊ का आत्भत्रलद्वावफढता शं एलॊ वभाज भं प्रप्ततद्षा औय भान वम्भान बी वयरता वे प्राद्ऱ शो जाता शं । जो व्मत्रि धाप्तभलक त्रलचाय धायाओॊ वे जुिे शो लश इद्वय भं त्रलद्वाय यखते शुले स्लमॊ टकभेशनत, ऩरयश्रभ क फर ऩय कभामे शुले धन को टश वच्चा वुख भानते शं । धभल भं आस्था ेएलॊ त्रलद्वाव यखने लारे व्मत्रि क प्तरमे भेशनत, ऩरयश्रभ कयने क उऩयाॊत अऩनी आप्तथलक े ेस्स्थभं उन्नप्तत एलॊ रक्ष्भी को स्स्थय कयने शे तु, श्री मॊत्र क ऩूजन का उऩाम अऩनाकय ेजीलन भं टकवी बी वुख वे लॊप्तचत नशीॊ यश वकते, उन्शं अऩने जीलन भं कबी धन काअबाल नशीॊ यशता। उनक वभस्त कामल वुचारु रुऩ वे चरते शं । रक्ष्भी कृ ऩा प्राप्तद्ऱ क े ेप्तरए श्रीमॊत्र का वयर ऩूजन त्रलधान स्जवे अऩना कय वाधायण व्मत्रि त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । इव भं जया बी वॊळम नशीॊ शं ।श्रीमॊत्र का ऩूजन यॊ क वे याजा फनाने लारा एलॊ व्मत्रि टक दरयद्रता को दय कयने लारा शं । ू  अऩने ऩूजा स्थान भं प्राण-प्रप्ततत्रद्षत श्रीमॊत्र को ऩूजन क प्तरमे स्थात्रऩत कयं । (प्राण-प्रप्ततत्रद्षत श्रीमॊत्र टकवी बी े मोग्म त्रलद्रान ब्राह्मण मा मोग्म जानकाय वे प्तवद्ध कयलारे)  श्री मॊत्र को प्रत्मेक ळुक्रलाय को दध, दशी, ळशद, घी औय ळक्कय (गुि) अथालत ऩॊचाभृत फनाकय स्नान कयामे। ु  स्नान क ऩद्ळमात उवे रार कऩिे वे ऩोछ दं । े  श्री मॊत्र को टकवी चाॊदी मा ताॊफे टक प्रेि भं स्थाऩीत कयं ।  श्री मॊत्र क नीचे 5 रुऩमे मा 10 रुऩमे का नोि यखदं । (5,10 रुऩमे का प्तवक्का नशीॊ) े  श्री मॊत्र स्थात्रऩत कयने लारी प्रेि भं श्रीमॊत्र ऩय स्पटिक टक भारा को चायं ओय घुभाते शुले स्थात्रऩत कयं ।  श्री मॊत्र क उऩय भौरी का िु किा 3-5 फाय घुभाते शुले अत्रऩत कयं । े ल  श्री मॊत्र क उऩय वुखा अद्श गॊध प्तछिक। े ं  मटद वॊबल शो तो रार ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं । (कभर, भॊदाय(जावूद) मा गुराफ शो तो उत्तभ) ल  धूऩ-दीऩ इत्मादी वे त्रलप्तधलत ऩूजन कयं ।  उऩयोि त्रलधन प्रप्तत ळुक्रलाय कयं एलॊ अन्म टदन कलर धूऩ-दीऩ कयं । े  टकवी एक रक्ष्भी भॊत्र का एक भारा भॊत्र जऩ कयं । श्रीवूि, अद्श रक्ष्भी स्तोत्र इत्मादी का ऩाठ कयं मटद ऩाठ कयने भं आऩ अवभथल शोतो फाजाय भं श्रीवूि, अद्श रक्ष्भी इत्मादी स्तोत्र टक कवेि वीिी प्तभरती शं उवका श्रलण कयं । े
  • 11. 11 नलम्फय 2012  ऩूजा भं जाने-अनजाने शुई गरती क प्तरए रक्ष्भीजी का स्भयण कयते शुले षभा भाॊगकय वुख, वौबाग्म औय वभृत्रद्ध े टक काभना कयं ।  प्रप्तत ळुक्रलाय उऩयोि ऩूजन कयने वे जीलन भं टकवी बी प्रकाय का आप्तथलक वॊकि नशीॊ आता।  मदी आप्तथलक वॊकि वे ऩये ळान शं तो श्री मॊत्र क ऩूजन वे वभस्त प्रकाय क आप्तथलक वॊकि धीये -धीये दय शो जाते शं । े े ूनोि: श्री मॊत्र क क नीचे यखा शुला नोि प्रप्तत एक-दो भाव भं एक फाय टकवी दे ली भॊदीय भं बेि कय दं । (राब प्राद्ऱ शोने ऩय फदरे) े े  प्रथन फाय यखा शुला नोि श्री मॊत्र क ऩूजन वे राब शोने क फाद शी फदरे। राब प्राद्ऱ शोना ळुरु शोने तक नोि को यखे यशं । े े  राब प्राद्ऱ शोना ळुरु शोने क ऩद्ळमात प्रप्तत भाश भं एक फाये प्रप्ततऩदा(एकभ) को ऩुयाना नोि फदर कय नमे नोि यखं। े  जेवे-जेवे राब प्राद्ऱ शोने रगे आऩ क अनुकर कामल शो ने रगे तो नोि टक यकभ फढाते यशं । अप्तधक राब प्राद्ऱ शोता शं । े ूउदाशण: मटद ऩशरे 5 रुऩमे का नोि यखा शं तो उस्वे राब शोने क ऩद्ळमात नोि फदरते शुले 10 रुऩमे का नोि यखे। 10 रुऩमे का ेनोि यखने वे राब शोने क ऩद्ळमात नोि फदरते शुले 20 रुऩमे का नोि यखे। इवी प्रकाय नोि को फदते यशं इस्वे अप्तधक राब प्राद्ऱ ेशोता शं ।अप्तधक राब प्राप्तद्ऱ शे तु वाभान्म प्तनमभ:ऩूजन क टदन ब्रह्मचमल का ऩारन कयं । ेऩूजन क टदन वुगॊप्तधत तेर, ऩयफ्मूभ, इत्र का प्रमोग कयने वे फचे। ेत्रफना प्माज-रशवून का ळाकाशायी बोजन ग्रशण कयं । ळुक्रलाय वपद प्तभद्षान बोजन भं ग्रशण कयं । े भॊत्र प्तवद्ध स्पटिक श्री मॊत्र "श्री मॊत्र" वफवे भशत्लऩूणल एलॊ ळत्रिळारी मॊत्र शै । "श्री मॊत्र" को मॊत्र याज कशा जाता शै क्मोटक मश अत्मन्त ळुब फ़रदमी मॊत्र शै । जो न कलर दवये मन्त्रो वे अप्तधक वे अप्तधक राब दे ने भे वभथल शै एलॊ वॊवाय क शय व्मत्रि क प्तरए पामदे भॊद वात्रफत शोता शै । ऩूणल े ू े े प्राण-प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल चैतन्म मुि "श्री मॊत्र" स्जव व्मत्रि क घय भे शोता शै उवक प्तरमे "श्री मॊत्र" अत्मन्त फ़रदामी प्तवद्ध शोता शै े े उवक दळलन भात्र वे अन-प्तगनत राब एलॊ वुख की प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै । "श्री मॊत्र" भे वभाई अटद्रतीम एलॊ अद्रश्म ळत्रि भनुष्म की े वभस्त ळुब इच्छाओॊ को ऩूया कयने भे वभथल शोप्तत शै । स्जस्वे उवका जीलन वे शताळा औय प्तनयाळा दय शोकय लश भनुष्म ू अवफ़रता वे वफ़रता टक औय प्तनयन्तय गप्तत कयने रगता शै एलॊ उवे जीलन भे वभस्त बौप्ततक वुखो टक प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै । "श्री मॊत्र" भनुष्म जीलन भं उत्ऩन्न शोने लारी वभस्मा-फाधा एलॊ नकायात्भक उजाल को दय कय वकायत्भक उजाल का प्तनभालण कयने भे वभथल ू शै । "श्री मॊत्र" की स्थाऩन वे घय मा व्माऩाय क स्थान ऩय स्थात्रऩत कयने वे लास्तु दोऴ म लास्तु वे वम्फस्न्धत ऩये ळाप्तन भे न्मुनता े आप्तत शै ल वुख-वभृत्रद्ध, ळाॊप्तत एलॊ ऐद्वमल टक प्रप्तद्ऱ शोती शै । गुरुत्ल कामालरम भे "श्री मॊत्र" 12 ग्राभ वे 2250 Gram (2.25Kg) तक टक वाइज भे उप्रब्ध शै . भूल्म:- प्रप्तत ग्राभ Rs. 10.50 वे Rs.28.00 GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
  • 12. 12 नलम्फय 2012 वद्ऱ श्री का चभत्काय  प्तचॊतन जोळी दीऩालरी क टदन फशी-खाते क ऩूजन क वभम फशी-खाते भं उऩयोि क्रभभं रार यॊ ग की करभ म ऩेन वे श्री े े ेप्तरखे। ऩशरे एक फाय श्री प्तरखे, टपय दो फाय श्री श्री प्तरखे, टपय तीन फाय श्री श्री श्री, इव प्रकाय क्रभ को फढाते जाएआखीय भं वात फाय श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री प्तरखे, वद्ऱश्री क नीचे ेअऩने ईद्श का नाभ प्तरखे मा ॐ श्रीॊ रक्ष्भी दै व्मे नभ् प्तरखे। टपय धुऩ- श्रीदीऩ, ऩुष्ऩ आटद वे उवका ऩूजन कयं । श्री श्री उि प्रमोग कयने वे आनेलारा नमा लऴल व्मलवाम भं आप्तथलकद्रत्रद्श वे वुख, वभृत्रद्ध रेकय आमेगा औय अत्माप्तधक राबदामक यशे गा। श्री श्री श्री स्जन रोगो क ऩाव रक्ष्भी (धन) स्स्थय नशीॊ यशता। रक्ष्भी आने े श्री श्री श्री श्रीवे ऩूलल जाने को तत्ऩय शोती शं । उन्शं अऩनी जेफ भं मा भनीऩवल भं एकस्पद कागज ऩय उऩयोि तयीक वे श्री प्तरख कय यखना चाटशए। वद्ऱ श्री े े श्री श्री श्री श्री श्रीप्तरखने वे रक्ष्भी रम्फे वभम तक स्स्थय यशने क मोग फनते शं लश नमे े श्री श्री श्री श्री श्री श्रीस्रोत वे धन राब क बी प्रफर मोग फनते शं । (अद्शगॊध की स्माशी ेफनाकय अनाय की करभ वे प्तरखना अप्तत उत्तभ यशता शं ।) श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री  उि तयीक वे वद्ऱ श्री को अऩनी अरभायी, गल्रा (कळ फोक्ळ) े ै ॐ श्रीॊ रक्ष्भी दै व्मे नभ् मा धन यखने क स्थान ऩय कभकभ मा अद्शगॊध वे अऩने दाशीने े ु ु शाथ की अनाप्तभका उॊ गरी वे प्तरखने ऩय बी मश अत्माप्तधक राबप्रद यशता शं ।  उि तयीक वे वद्ऱ श्री को चाॊटद मा वोने क ऩत्तय ऩय मॊत्र स्लरुऩ बी फनामा वकता शं । ताॊफे चाॊदी क ऩत्तय भं े े े फनाते वभम ध्मान यखे की ऩत्तय की वतश ऩय श्री उऩय की ओय उबयी शुई शो, नीचे की ओय खुदी शुई न शं।  वद्ऱ श्री की जगश ऩय अनेक रोग श्री मा रक्ष्भी भॊत्र का उच्चायण कयते शुए, अऩनी अरभायी, गल्रा (कळ ै फोक्ळ) आटद धन यखने क स्थान ऩय अनाभीका उॊ गरी वे वद्ऱ त्रफॊदी फनाते शं । कई दकानदाय मा व्मलवामीक े ु स्थानो ऩय बी उि तयीक वे वद्ऱ त्रफॊदी फनाते शं । वद्ऱ श्री वे भाॊ रक्ष्भीजी प्रवन्न शोती शं । क्मोकी श्री का वयर े अथल शं वुख वभृत्रद्ध-वॊऩन्नता। रक्ष्भी मॊत्रश्री मॊत्र (रक्ष्भी मॊत्र) भशारक्ष्भमै फीज मॊत्र लैबल रक्ष्भी मॊत्रश्री मॊत्र (भॊत्र यटशत) भशारक्ष्भी फीवा मॊत्र कनक धाया मॊत्रश्री मॊत्र (वॊऩूणल भॊत्र वटशत) रक्ष्भी दामक प्तवद्ध फीवा मॊत्र श्री श्री मॊत्र (रप्तरता भशात्रत्रऩुय वुन्दमैश्री मॊत्र (फीवा मॊत्र) रक्ष्भी दाता फीवा मॊत्र श्री भशारक्ष्भमं श्री भशामॊत्र)श्री मॊत्र श्री वूि मॊत्र रक्ष्भी फीवा मॊत्र अॊकात्भक फीवा मॊत्रश्री मॊत्र (कभल ऩृद्षीम) ु रक्ष्भी गणेळ मॊत्र ज्मेद्षा रक्ष्भी भॊत्र ऩूजन मॊत्रमॊत्र क त्रलऴम भं अप्तधक शे तु वॊऩक कयं । GURUTVA KARYALAY, Call us: 91+ 9338213418, 91+ 9238328785 े ल
  • 13. 13 नलम्फय 2012 त्रलप्तबन्न रक्ष्भी भॊत्र  प्तचॊतन जोळीभॊत्र : 1. ॐ श्री भशारक्ष्म्मै नभ्। (Om Shree Mahalakshmai Namah) 2. श्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ कभरे कभरारमे। (Shreem Hreem Shreem Kamale Kamalalaye) 3. श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ ऐॊ कभरलाप्तवन्मै स्लाशा । (Shreem Hreem Kleem Aim Kamalavasinyai Swaha) 4. ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै नभ्। (Hreem Shreem Kleem Mahalakshmai Namah) 5. ॐ श्रीॊ प्तश्रमै नभ्। (Om Shreem Shriyai Namah) 6. ॐ ह्री श्रीॊ क्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ क्रीॊ श्रीॊ भशारक्ष्भी भभ गृशे धनॊ ऩूयम ऩूयम प्तचॊतामै दयम दयम स्लाशा । ू ू (Om Hreem Shreem Kreem Shreem Kreem Kleem Shreem Mahalakshmi Mam Gruhe Dhanam Pooraya Pooraya Chintayai Dooraya Dooraya Swaha) 7. धन राब एलॊ वभृत्रद्ध भॊत्र ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ त्रत्रबुलन भशारक्ष्म्मै अस्भाॊक दारयद्र्म नाळम प्रचुय धन दे टश दे टश क्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ ॐ । (Om Shreem Hreem Kleem Tribhuvan Mahalakshmai Asmank Daridray Nashay Prachur Dhan Dehi Dehi Kleem Hreem Shreem Om) 8. अषम धन प्राप्तद्ऱ भॊत्र ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ ऐॊ वं ॐ ह्रीॊ क ए ई र ह्रीॊ श व क श र ह्रीॊ वकर ह्रीॊ वं ऐॊ क्रीॊ ह्रीॊ श्री ॐ । (Om Shreem Hreem Kleem Aim Soum Om Hreem Ka Ae Ee La Hreem Ha Sa Ka Ha La Hreem Sakal Hreem Soum Aim Kleem Hreem Shreem Om)कवे कयं भॊत्र जाऩ :- ैधनतेयव मा दीऩालरी क टदन वॊकल्ऩ रेकय प्रात्कार स्नान कयक ऩूलल मा उत्तय टदळा टक औय भुख े े कयक रक्ष्भी टक भूप्ततल ेमा प्तचत्र की ऩॊचोऩचाय मा दषोऩचाय मा ऴोड्ऴोऩचाय वे ऩूजा कयं । ळुद्ध-ऩत्रलत्र आवन ग्रशण कय स्पटिक टक भारा वे भॊत्र का जाऩ १,५,७,११ भारा जाऩ ऩूणल कय अऩने कामल उद्दे श्म टकऩूप्ततल शे तु भाॊ रक्ष्भी वे प्राथना कयं । अप्तधकस्म अप्तधक परभ ्। ॊजऩ स्जतना अप्तधक शो वके उतना अच्छा शै । मटद भॊत्र अप्तधक फाय जाऩ कय वकं तो श्रेद्ष।प्रप्ततटदन स्नान इत्माटदवे ळुद्ध शोकय उऩयोि टकवी एक रक्ष्भी भॊत्र का जाऩ 108 दाने टक भारा वे कभ वे कभ एकभारा जाऩ अलश्म कयना चाटशए।उऩयोि भॊत्र क त्रलप्तध-त्रलधान क अनुवाय जाऩ कयने वे भाॊ रक्ष्भी टक कृ ऩा वे व्मत्रि को धन की प्राप्तद्ऱ शोती शै औय े ेप्तनधलनता का प्तनलायण शोता शै ।
  • 14. 14 नलम्फय 2012 दीऩालरी का भशत्ल औय वॊऩूणल ळास्त्रोि रक्ष्भी ऩूजन  स्लस्स्तक.ऎन.जोळी, ऩॊ.श्री बगलानदाव त्रत्रलेदी जी, वॊदीऩ ळभाल दीऩोत्वल अथालत दीऩालरी ऩलल को ऩुयातन कार एवा भानाजाता शं की आज क टदन शी दे ली ेवे शी बायतलऴल भं ज्मोप्ततऩलल क रुऩ भं भनामा जाता शं । े रक्ष्भी का जन्भ शुला था।फिे ़-फिे ़ भशानगयं वे रेकय छोिे वे छोिे गालं भं बीधनी वे रेकय गयीफ वे गयीफ व्मत्रि की चौखि बी इव ळास्त्रं भं दे ली भशारक्ष्भी टक उत्ऩत्रत्त वे वॊफॊप्तधतऩालन ऩलल क अलवय ऩय दीऩक की ऩॊत्रिमं क जगभगा े े त्रलप्तबन्न भत शंउठती शं । दीऩालरी क टदन अभालस्मा शोने क कायण इव े े त्रलप्तबन्न धभल ळास्त्रो भं रक्ष्भी टक उत्ऩत्रत्त केटदन वकर रोक भं चायं ओय अॊधकाय परा शोता शं , ै त्रलऴम भं अनेक कथाएॊ उल्रेस्खत शं । उन प्राचीन कथाओॊरेटकन भनुष्म को अॊधकाय ऩवॊद नशीॊ शं , इव प्तरए लशॉ भं वभुद्र भॊथन क दौयान भाॊ भशारक्ष्भी टक उत्ऩत्रत्त भानी ेउववे भुकाफरा कयने क उद्दे श्म वे अऩने घय-दकान आटद े ु जाती शं । त्रलप्तबन्न ग्रॊथो भं रक्ष्भी एलॊ वभुद्र भॊथन टकस्थानं ऩय दीऩं की ऩॊत्रिमं भं वजाकय अॊधेये को दय ू कथाओॊ भं अॊतय दे खने को प्तभरता शं । ऩयॊ तु भूरत् वफबगाने का वाथलक प्रमाव कयता शं । कथाओॊ भं अॊतय शोने क उऩयाॊत बी अप्तधकतय वभान शं । े ऩौयास्णक भान्मताओॊ क अनुळाय ऩुयातन कार भं े प्रजाऩत्म कल्ऩ क अनुळाय: ेदीऩालरी ऩलल को "रोकोत्वल" क रुऩ भं भनामा जाता े बगलान ब्रह्मा ने रुद्र रूऩ को शी स्लमॊबु भनु औयथा। रेटकन आज दीऩालरी ऩलल की भुख्मत् दो प्रभुख स्त्री रूऩ भं वतरूऩा को प्रकि टकमा औय उवक फाद ेत्रलळेऴता दे खने को प्तभरती शं । एक शं , दीऩं की त्रप्रमव्रत उत्तानऩाद, प्रवूप्तत औय आकप्तत नाभ टक वॊतानं ूजगभगाशि वे अॊधकायको दय कयना औय दवयी शै , लैबल ू ू को जन्भ टदमा। टपय आकप्तत का त्रललाश रुप्तच वे औय ूएलॊ वुख-वभृत्रद्ध की दे ली भाॉ भशारक्ष्भी क ऩूजन का े प्रवूप्तत का त्रललाश दष वे टकमा गमा। दष ने प्रवूप्तत वेआमोजन। 24 कन्माओॊ को जन्भ टदमा। इवक नाभ श्रद्धा, रक्ष्भी, े धाप्तभलक भान्मताओॊ क अनुळाय दीऩालरी क टदन े े ऩुत्रद्श, धुप्तत, तुत्रद्श, भेधा, टक्रमा, फुत्रद्ध, रज्जा, लऩु, ळास्न्त, ऋत्रद्ध,घय-दकान आटद स्थानं क अराला अन्म वाललजप्तनक ु े औय कीप्ततल इत्मादी शं ।स्थानं ऩय बी दीऩकं की ऩॊत्रिमाॉ यखने का त्रलधान शं । एवी भान्मता शं की श्राद्ध ऩष वे रेकय काप्ततलक त्रलष्णु ऩुयाण क अनुळाय: ेभाव की अभालस्मा तक त्रऩतयं को ऩुन् अऩने रोक भं एक फाय घूभते शुए दलालवा ने अऩरूऩा त्रलद्याधयी क ु ेरोिना शोता शं । ऩरयलाय क रोग त्रऩतयं का आह्वान कयते े ऩाव एक फशुत वुन्दय भारा दे खी। लश वुगस्न्धत भाराशं , उनका ऩूजन कय दीऩं वे उनका ऩुन् लाऩव जाने थी। ऋत्रऴ ने उव भारा को अऩने जिाओॊ ऩय धायणलारा अॊप्तधमाया भागल प्रकाप्तळत कयक उन्शं अगरे लऴल तक े कयने क प्तरए भाॊगा औय प्राद्ऱ कय प्तरमा। दलालवा ने वोचा े ुक प्तरए त्रलदाई दे ते शं । े टक मश भारा प्रेभ क कायण, उवे प्राद्ऱ कय ले काभातुय ेदीऩालरी क वॊफॊध भं बत्रलष्मऩुयाण भं उल्रेख शं की े शो उठे शं , ले अऩने काभ क आलेग को योकने क प्तरए े े लस्त्र-ऩुष्ऩै् ळोप्तबतव्मा क्रम-त्रलक्रम-बूभम्। इधय-उधय घूभते-घूभते स्लगल रोक ऩशुॊचे। लशाॊ उन्शंनेअथालत ्: आज क टदन धनऩप्तत कफेय का बी ऩूजन शोता े ु अऩने प्तवय वे भारा शिाकय इन्द्र को दे दी। इन्द्र ने उवशं । टशन्द ू धभलळास्त्रं क अनुवाय कफेय धनऩप्तत शं । े ु भारा को ऐयालत क गरे भं िार टदमा औय ऐयालत वे े
  • 15. 15 नलम्फय 2012लश भारा धयती ऩय प्तगय गई औय ऩैयं वे कचर गई। ु उन वफको एकत्र यखकय दे लताओॊ ने ऩुन: फिे लेगदलालवा ने जफ मश दे खा टक उवकी भारा की मश दगप्तत ु ु ल वे वभुद्र भॊथन आयम्ब टकमा। इव फाय क भॊथन वे यत्नं ेशुई तो लश क्रोप्तधत शुए औय उन्शंने इन्द्र को श्रीशीन शोने भं वफवे उत्तभ यत्न कौस्तुब प्रकि शुआ, जो वूमभण्िर क ल ेका ळाऩ टदमा। जफ इन्द्र ने मश वुना तो बमबीत शोकय वभान ऩयभ कास्न्तभान था। लश अऩने प्रकाळ वे तीनंऋत्रऴ क ऩाव आमे ऩय उनका ळाऩ रौि नशीॊ वकता था। े रोकं को प्रकाप्तळत कय यशा था। दे लताओॊ ने प्तचॊताभस्णइवी ळाऩ क कायण अवुयं ने इन्द्र औय दे लताओॊ को े को आगे यखकय कौस्तुब का दळलन टकमा औय उवेस्लगल वे फाशय प्तनकार टदमा। दे लता ब्रह्मा जी की ळयण भं बगलान त्रलष्णु की वेला भं बंि कय टदमा। तदनन्तय,गमे औय उनवे अऩने कद्श क त्रलऴम भं कशा। े प्तचन्ताभस्ण को भध्म भं यखकय दे लताओॊ औय दै त्मं ने ब्रह्मा जी दे लताओॊ को रेकय त्रलष्णु क ऩाव गमे े ऩुन: वभुद्र को भथना आयम्ब टकमा। ले वबी फर भंऔय उनवे वायी फात कशी तफ त्रलष्णु ने दे लताओॊ को फढ़े -चढ़े थे औय फाय-फाय गजलना कय यशे थे। अफ की फायदानल वे वुरश कयक वभुद्र भॊथन कयने की वराश दी े उवे भथे जाते शुए वभुद्र वे उच्चै:श्रला नाभक अद्व प्रकिऔय स्लमॊ बी वशामता का आद्वावन टदमा। उन्शंने शुआ। लश वभस्त अद्वजाप्तत भं एक अद्भत यत्न था। उवक ु ेफतामा टक वभुद्र भॊथन वे उन्शं रक्ष्भी औय अभृत ऩुन् फाद गज जाप्तत भं यत्न बूत ऐयालत प्रकि शुआ। उवकेप्राद्ऱ शोगा। अभृत ऩीकय ले अजय औय अभय शो जाएॊगे। वाथ द्वेतलणल क चौवठ शाथी औय थे। ऐयालत क चाय े ेदे लताओॊ ने बगलान त्रलष्णु की फात वुनकय वभुद्र भॊथन दाॉत फाशय प्तनकरे शुए थे औय भस्तक वे भद की धायाका आमोजन टकमा। उन्शंने अनेक औऴप्तधमाॊ एकत्रत्रत की फश यशी थी। इन वफको बी भध्म भं स्थात्रऩत कयक ले ेऔय वभुद्र भं िारी। टपय भॊथन टकमा गमा। वफ ऩुन: वभुद्र भथने रगे। उव वभम उव वभुद्र वे भॊथन क प्तरमे जाते शुए वभुद्र क चायं ओय फिे े े भटदया, बाॉग, काकिाप्तवॊगी, रशवुन, गाजय, अत्मप्तधकजोय की आलाज उठ यशी थी। इव फाय क भॊथन वे े उन्भादकायक धतूय तथा ऩुष्कय आटद फशुत-वी लस्तुएॉदे लकामं की प्तवत्रद्ध क प्तरमे वाषात ् वुयप्तब काभधेनु प्रकि े प्रकि शुईं। इन वफको बी वभुद्र क टकनाये एक स्थान ऩय ेशुईं। उन्शं कारे, द्वेत, ऩीरे, शये तथा रार यॊ ग की वैकिं यख टदमा गमा। तत्ऩद्ळात ले श्रेद्ष दे लता औय दानल ऩुन:गौएॉ घेये शुए थीॊ। उव वभम ऋत्रऴमं ने फिे शऴल भं बयकय ऩशरे की शी बाॉप्तत वभुद्र-भॊथन कयने रगे। अफ की फायदे लताओॊ औय दै त्मं वे काभधेनु क प्तरमे माचन की औय े वभुद्र वे वम्ऩूणल दळं टदळाओॊ भं टदव्म प्रकाळ व्माद्ऱ शोकशा आऩ वफ रोग प्तभरकय प्तबन्न-प्तबन्न गोत्रलारे गमा उव टदव्म प्रकाळ वे दे ली भशारक्ष्भी प्रकि शुईं।ब्राह्मणं को काभधेनु वटशत इन वम्ऩूणल गौओॊ का दान इवप्तरए रक्ष्भी को वभुद्र की ऩुत्री क रूऩ भं जाना जाता शै । ेअलश्म कयं । ऋत्रऴमं क माचना कयने ऩय दे लताओॊ औय े भशारक्ष्भी ने दे लता, दानल, भानल वम्ऩूणल प्रास्णमंदै त्मं ने बगलान ् ळॊकय की प्रवन्नता क प्तरमे ले वफ े की ओय दृत्रद्शऩात टकमा। भाता भशारक्ष्भी की कृ ऩा-दृत्रद्शगौएॉ दान कय दीॊ तथा मस कभं भं बरी-बाॉप्तत भन को ऩाकय वम्ऩूणल दे लता उवी वभम ऩुन् श्रीवम्ऩन्न शो गमे।रगाने लारे उन ऩयभ भॊगरभम भशात्भा ऋत्रऴमं ने उन ले तत्कार याज्माप्तधकायी क ळुब रषणं वे वम्ऩन्न ेगौओॊ का दान स्लीकाय टकमा। तत्ऩद्ळात वफ रोग फिे टदखामी दे ने रगे।जोळ भं आकय षीयवागय को भथने रगे। तफ वभुद्र वे रक्ष्भी की उत्ऩत्रत्तकल्ऩलृष, ऩारयजात, आभ का लृष औय वन्तान- मे चाय वृत्रद्श यचना क त्रलऴम भं सान प्राद्ऱ कयते शुले ेटदव्म लृष प्रकि शुए। बीष्भ ने ऩुरस्त्म ऋत्रऴ वे प्रद्ल टकमा ऋत्रऴ श्रेद्ष, रक्ष्भी की उत्ऩत्रत्त क त्रलऴम भं आऩ भुझे त्रलस्ताय वे फताइए। े
  • 16. 16 नलम्फय 2012क्मंटक इव त्रलऴम भं कथा अनेक शं । मश वुनकय कयं । कछ त्रलद्रानो का भत शं की प्तवॊदय वे मटद रक्ष्भीजी ु ूऩुरस्त्म ऋत्रऴ फोरे टक भशत्रऴल बृगु टक ऩत्नी ख्माप्तत के का फीज भॊत्र अॊटकत कयना अप्तत राबप्रद शोता शं ।गबल वे एक त्रत्ररोकवुन्दयी कन्मा उत्ऩन्न शुई। लश क्मोकी, प्राम् घयं एलॊ व्मलवामीक स्थानं ऩय ॐ, श्री,वभस्त ळुब रषणं वे वुळोप्तबत थी। इवप्तरए उवका स्लस्स्तक, ळुब-राब एलॊ रयत्रद्ध-प्तवत्रद्ध प्तरखा शुला वबी नेनाभ रक्ष्भी यखा गमा। दे खा शी शोगा! रक्ष्भी ऩूजन क वभम घय क वबी े े ऩौयास्णक कथा औय भान्मताओॊ के अनुळाय वदस्मं को वाथ प्तभरकय ऩूणल श्रद्धा वे दे ली भशारक्ष्भीरक्ष्भी, चन्द्रभा आटद वबी यत्न की उत्ऩत्रत्त वभुद्र भॊथन का ऩूजन कयना चाटशए।क दौयान शुई थी, रेटकन वभुद्र-भॊथन की प्तनस्द्ळत प्ततप्तथ े दे ली भशारक्ष्भी की ऩूजा चाशे आऩ स्लमॊ कययशे शो माका लणलन धभलळास्त्रं भं नशीॊ शं । इव प्तरमे एवी भान्मता टकवी त्रलद्रान ऩॊटित वे कयला यशे शो, ऩूजा ऩूणल त्रलप्तध-शं की बगलान श्रीयाभ ने आज शी क टदन याज्मायोशण े त्रलधान वे कयं । जल्दी-जल्दी ऩूजा खत्भ कयने का त्रलधानउत्वल भनामा था औय तफ वे वभग्र अमोध्मा नगयी ळास्त्रोि भत वे बी लस्जलत शं । क्मोकी कलर लऴल भं एक ेदीऩं क प्रकाळ वे जगभगा उठी। (बत्रलष्म ऩुयाण) े फाय शी वशी रेटकन ऩूणल त्रलप्तध-त्रलधान वे शी दे ली रक्ष्भी दीऩालरी क टदन घय क वबी वदस्मको प्रात् े े की ऩूजा कयनी चाटशए।जल्दी उठकय प्रपस्ल्रत ु भन वे घय, दकान ु आटद मटद आऩने ऩशरे वे कोई रक्ष्भी मॊत्र जैवे  श्री मॊत्रव्मलवामीक स्थानं की वाप-वपाई कयक उवे ळुद्ध जरवे े (रक्ष्भी मॊत्र)  श्री मॊत्र (भॊत्र यटशत) श्री मॊत्र (वॊऩूणलधो रेना चाटशए। व्मलवामीक स्थान ऩय नमे लस्त्र, गादी भॊत्र वटशत) श्री मॊत्र (फीवा मॊत्र) श्री मॊत्र श्रीआटद वे ऩुयाने कलय आटद शिाकय नमे रगादे (मटद नमे वूि मॊत्र श्री मॊत्र (कभल ऩृद्षीम) श्री रषभी कफेय ु ुरेने का वाभर्थमल न शो तो उवे आगे वे धो कय स्लच्छ धनाकऴलण मॊत्र आकस्स्भक धन प्राप्तद्ऱ मॊत्रकय वुखारे), व्मलवामे वे वॊफॊप्तधत नमे फशी-खाता आटद भशारक्ष्भमै फीज मॊत्र भशारक्ष्भी फीवा मॊत्रको स्थात्रऩत कयना चाटशमे। त्रलद्रानो क भतानुळाय कळ े ै रक्ष्भी दामक प्तवद्ध फीवा मॊत्र रक्ष्भी दाता फीवाफॉक्व, फशी-खाता, तुरा, रेखनी, आटद का ककभ वे ुॊ ु मॊत्र रक्ष्भी फीवा मॊत्र रक्ष्भी गणेळ मॊत्रस्लस्स्तक फनाकय ऩूजन कयना चाटशए उव ऩय शल्दी का कनक धाया मॊत्र लैबल रक्ष्भी मॊत्र (भशान प्तवत्रद्धघोर फनाकय छीॊिे रगाने चाटशमे। ळास्त्रोि त्रलधान वे दामक श्री भशारक्ष्भी मॊत्र) श्री श्री मॊत्र (रप्तरतारक्ष्भी ऩूजन कलर स्स्थय रग्न भं की वॊऩन्न कयना े भशात्रत्रऩुय वुन्दमै श्री भशारक्ष्भमं श्री भशामॊत्र)चाटशए। दीऩालरी क टदन भं प्राम् वाॊम कार भं ऩूजन े अॊकात्भक फीवा मॊत्र ज्मेद्षा रक्ष्भी भॊत्र ऩूजनशे तु स्स्थय रग्न भं लृऴब रग्न एलॊ यात्री कार भं प्तवॊश मॊत्र धनदा मॊत्र शो एलॊ मटद आऩक ऩाव कोई जैन ेरग्न शोता शं । इव प्तरए उि रग्नं भं शी भाॉ रक्ष्भी का मॊत्र शं जैवे श्री ऩद्मालती मॊत्र श्री ऩद्मालती फीवाऩूजन वलल श्रेद्ष भाना जाता शं । मॊत्र श्री ऩाद्वलऩद्मालती ह्रंकाय मॊत्र ऩद्मालती दीऩालरी क टदन प्रात् स्नानाटद प्तनत्म कभल वे े व्माऩाय लृत्रद्ध मॊत्र श्री मॊत्र श्री रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ औयप्तनलृत्त शोकय एक प्तभट्िी क ऩात्र भं प्तवॊदय को घी क े ू े व्माऩाय लधलक मॊत्र श्री रक्ष्भीकय मॊत्र रक्ष्भीवाथ प्तभराकय उवका रेऩ फनारे, टपय उववे अऩने ऩूजा प्राप्तद्ऱ मॊत्र शो तो आऩ उव मॊत्र को स्थात्रऩत कय उवकास्थान, घय क भुख्म द्राय मा व्मलवामीक स्थान ऩय ॐ, े धूऩ-दीऩ-नैलेद्य आटद वे ऩूजन कय वकते शं । मटद आऩकेश्रीॊ, श्री, स्लस्स्तक, ळुब-राब, रयत्रद्ध-प्तवत्रद्ध आटद अऩनी ऩाव कोई बी रक्ष्भी मॊत्र उऩल्फध नशीॊ शो, तो आऩश्रद्धा एलॊ त्रलद्वाव वे भाॊगप्तरक प्तचन्श मा ळब्दं को अॊटकत गुरुत्ल कामालरम द्राया प्राद्ऱ कय वकते शं । मटद आऩ
  • 17. 17 नलम्फय 2012लतलभान वभम भं भॊत्र प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत मॊत्र प्राद्ऱ कयने ऩत्रलत्र कयण:-भं अवभथल शो तो, आऩ वद्ऱश्री मॊत्र का प्तनभालण कयरं, दे ली ऩूजन शे तु ऩूजन शे तु ऩूलल मा उत्तय टदळा श्रेद्ष शोती शं । इवऔय जफ आऩका वाभर्थमल शो जामे तफ आऩ अऩनी प्तरए उत्तय मा ऩूलल दे ळा की औय भुख कयक वफवे ऩशरे शाथ ेआलश्मिा क अनुळाय रक्ष्भी मॊत्र प्राद्ऱ कय वकते शं । े भं जर रेकय आचभन, ऩत्रलत्रीधायण, भाजलन ल प्राणामाभ कयके ऩूजन वाभग्री एलॊ स्लमॊ क ऊऩय इव भॊत्र का उच्चायण कयते े शुले जर प्तछिक। ंत्रलळेऴ नोि: मटद आऩक ऩाव ऩशरे वे अप्तबभॊत्रत्रत मा प्राण- े ॐ अऩत्रलत्र् ऩत्रलत्रं ला वलाललस्थाॊ गतोऽत्रऩ ला। प्रप्ततत्रद्षत मॊत्र उऩरब्ध शो तो उवकी कलर धूऩ-दीऩ वे े म् स्भये त ् ऩुण्ियीकाषॊ व फाह्याभ्मन्तय् ळुप्तच्॥ शी ऩूजा कयं , उव मॊत्र की ऩुन् प्राण-प्रप्ततद्षा मा उवे अथालत ्: भनुष्म अऩत्रलत्र शो मा ऩत्रलत्र मानी लश चाशे टकवी बी अप्तबभॊत्रत्रत कयलाने की आलश्मिा नशीॊ शोती। दळा भं शो, जो कभर जैवे आॊखो लारे बगलान श्री त्रलष्णु का गुरुत्ल कामालरम द्राया उऩल्फध कयलामे गमे वबी मॊत्र स्भयण कयता शं लश फाशय औय बीतय वबी ओय वे ळुद्ध शो ऩूणत् ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलप्तळद्श तेजस्ली भॊत्रो ल जाता शं । आवन ळुत्रद्ध औय स्लस्स्त-ऩाठ कय कयते शुले शाथ भं जर- द्राया प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म मुि शोते शं , अषत आटद रेकय ऩूजन का वॊकल्ऩ कयं । शभाये मशाॊ वे उऩरब्ध कयलामे गमे मॊत्र ऩूणत् ल अखॊटित एलॊ ळुद्ध धातु भं प्तनप्तभलत शोते शं । वॊकल्ऩ:- रक्ष्भी ऩूजन क वभम प्राण-प्रप्ततत्रद्षत मॊत्रं को भाॉ े ॐ त्रलष्णु् भावोत्तभं भावे काप्ततलकभावे कृ ष्णऩषे रक्ष्भी की प्रप्ततभा मा प्तचत्र क वभीऩ स्थात्रऩत कय े ऩुण्मामाभभालास्मामाॊ प्ततथौ लावये ............(लाय का नाभ रे), उवका ऩूजन टकमा जा वकता शं । रेटकन मॊत्र की (अऩने गोत्र का उच्चायण कयं ) गोत्रोत्ऩन्न: (अऩने नाभ का अरगवे ऩूजा मा प्राण-प्रप्ततद्षा, भॊत्र जऩ इत्माटद नशीॊ उच्चायण क वाथ भं अशॊ रगामे) जोळीअशॊ (जैवे ळभालअशॊ , े कयना चाटशमे। लभालअशॊ , गुद्ऱाअशॊ इत्माटद) श्रुप्ततस्भृप्तत ऩुयाणोि परप्राप्तद्ऱ काभनामा सातासात काप्तमकलाप्तचक भानप्तवक वकरवबी ऩाठको क भागलदळलन शे तु श्री रक्ष्भी जी का े ऩाऩप्तनलृत्रत्त ऩूलक ल ॊ स्स्थयरक्ष्भीप्राद्ऱमे श्रीभशारक्ष्भीप्रीत्मथंवॊऩणल ऩूजन त्रलधान टदमा जा यशा शं । ू भशारक्ष्भीऩूजनॊ कफेयादीनाॊ ु च ऩूजनॊ करयष्मे। तदड्त्लेन गौयीगणऩत्माटदऩूजनॊ च करयष्मे।रक्ष्भी ऩूजा: अथालत ्: शे बगलान ् त्रलष्णु आज काप्ततलक भाव, कृ ष्ण ऩष की ऩुण्म अभालस्मा अभुख लाय (ऩूजन क टदन क लाय का नाभ े ेऩूजन वाभग्री: रं) को भं... (अऩना नाभ) भेये त्रऩता (अऩने त्रऩता का नाभयोरी, भौरी, रंग, ऩान, वुऩायी, धूऩ, कऩूय, अगयफत्ती, अषत ल रं) स्जनका भं ऩुत्र शूॊ अऩने ऩुण्मं क कायण जो सात-असात े(वाफुत चालर), गुि, धप्तनमा, ऋतुपर, जौ, गेशूॉ, िू फ, ऩुष्ऩ, राब को प्राद्ऱ कयने क प्तरए, स्स्थय रक्ष्भी प्राद्ऱ कयने क प्तरमे े ेऩुष्ऩभारा, चन्दन, प्तवन्दय, दीऩक, रूई, प्रवाद, नारयमर, ू भं मश रक्ष्भी ऩूजन कय यशा शूॉ ।वलोऴप्तध, ऩॊचयत्न, मसोऩलीत, ऩॊचाभृत, ळुद्ध जर, खीर, भजीठ,वपद लस्त्र, रार लस्त्र, परेर, रक्ष्भी जील एलॊ गणेळ जी का े ु उि वॊकल्ऩ को ऩढ़कय जर, अषत आटद को गणेळजी केप्तचत्र मा ऩाना, चौकी (फाजौि), करळ, घी, कभरऩुष्ऩ, वभीऩ छोि दे । टपय गणेळजी का ऩूजन कयं ।इरामची, भाप्तचव, दस्षणा शे तु नकदी, चॉॊदी क प्तवक्क, े े गणेळ ऩूजन वे ऩशरे नमी प्रप्ततभा को त्रलप्तधलत प्राण-प्रप्ततद्षाफशीखाता, करभ तथा दलात इत्माटद आलश्मक वाभग्रीमाॊ। कयं ।
  • 18. 18 नलम्फय 2012प्रप्ततद्षा:- मे बूता त्रलनकतालयस्ते नद्शन्तु प्तळलासमा।प्रप्ततद्षा शे तु फामं शाथ भं अषत रेकय इव भॊत्र का उचायण इव भॊत्र वे दळं टदळाओॊ भं त्रऩरा वयवं प्तछिक स्जवेव ेकयते शुए दाटशने शाथ वे उन अषतं को गणेळजी की प्रप्ततभा वभस्त बूत प्रेत फाधाओॊ का प्तनलायण शोता शैऩय चढा़ते जामे.. स्लस्ती लाचन:-ॐ भनो जूप्ततजुऴताभाज्मस्म फृशस्ऩप्ततमलसप्तभभॊ तनोत्लरयद्शॊ मस लवप्तभभॊ दधातु। स्लस्स्त न इन्द्रो लृद्धश्रला: स्लस्स्त न: ऩूऴा त्रलद्वलेदा:। त्रलद्वे दे लाव इश भादमन्ताभोम्प्रप्ततद्ष।। स्लस्स्तनस्ता यषो अरयद्शनेप्तभ: स्लस्स्त नो फृशस्ऩप्ततदधात॥ ल ॐ अस्मै प्राणा: प्रप्ततद्षन्तु अस्मै प्राणा: षयन्तु च। इव क फाद श्री गणेळ जी क भॊगर ऩाठ कयना चाटशए जो की े े अस्मै दे लत्लभचालमै भाभशे प्तत च कद्ळन।। इव प्रकाय शैउि त्रलप्तधवे प्रप्ततद्षा कय श्रीगणेळजी का ऴोिळोऩचाय ऩूजन कयं । गणेळ जी का भॊगर ऩाठ:-तत्ऩद्ळमात ऴोिवभातृका (वोरश दे त्रलमं का) नलग्रश ल करळऩूजन कयं । तत्ऩद्ळमात भुख्म ऩूजन क रुऩ भं दे ली बगलती भाॉ े वुभखद्ळैकदन्तद्ळ कत्रऩरो गजकणलक:। ुभशारक्ष्भी का ऩूजन कयं । रम्फोदयद्ळ त्रलकिो त्रलघ्रनाळो त्रलनामक:॥ऴोिळोऩचाय गणेळ ऩूजन धूम्रकतुगणाध्मषो बारचन्द्रो गजानन:। े ल द्राद्रळैताप्तन नाभाप्तन म: ऩठे च्छे णुमादत्रऩ॥ऩत्रलत्र कयण:- त्रलद्यायम्बे त्रललाशे च प्रलेळे प्तनगलभे तथा। वॊग्राभे वॊकिे चैल त्रलघ्रस्तस्म न जामते॥वफवे ऩशरे ऩूजन वाभग्री ल गणेळ प्रप्ततभा मा प्तचत्रका ऩत्रलत्र एकाग्रप्तचन शोकय गणेळ का ध्मान कयना चाटशएकयण कयं अऩत्रलत्र् ऩत्रलत्रो ला वलाललस्थाॊ गतो त्रऩ ला। श्री गणेळ का ध्मान कयं :- म् स्भये त ् ऩुण्ियीकाषॊ व फाह्याभ्मन्तय् ळुप्तच्॥ गजाननॊ बूतगणाटद वेत्रलतभ ् कत्रऩत्थ जम्फूपरइव भॊत्र वे ळयीय औय ऩूजन वाभग्री ऩय जर छीिं इवे अॊदयफाशय औय फशाय दोनं ळुद्ध शो जाता शै चारुबषणभ। उभावुतभ ् ळोक त्रलनाळ कायकभ ् नभाप्तभ त्रलघ्नेद्वय ् ऩाद ऩॊकजभ॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् गणेळॊ ्आचभन:- ध्मामाप्तभ भॊत्र का उच्चायण कयं । ॐ कळलाम नभ: ॐ नायामण नभ: े आह्वानॊ:- ॐ भध्लामे नभ: इव भॊत्र वे श्री गणेळ का आशलान कये मा भन शी भन भं श्री गणेळ शस्तो प्रषल्म शप्तळकळम नभ : ल े जी को ऩधायने क प्तरमे त्रलनप्तत कयं । शाथभं अषत रेकय आशलान ेआवान वुत्रद्ध:- कयं । आगच्छ बगलन्दे ल स्थाने चात्र स्स्थयो बल ॐ ऩृर्थली त्लमा धृता रोका दे त्रल त्ल त्रलद्गणुनाधृता्। मालत्ऩूजाॊ करयष्माप्तभ तालत्लॊ वस्न्नधौ बल।। त्ल च धायम भा दे त्रल ऩत्रलत्र करू च आवनभ॥ ु ् ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् गणेळॊ ध्मामाप्तभ भॊत्र का उच्चायण कयक अषते िारदं ..... ेयषा भॊत्र:- इव भॊत्र वे श्री गणेळ की भूप्ततल मा प्रप्ततभा ऩय शल्दी मा कभकभ वे यॊ गे चारल िारं। मटद प्रप्ततभा क प्रशरे वे प्राण- ु ु े अऩक्राभन्तु बूताप्तन त्रऩळाचा् वललतो टदळा। प्रप्ततद्षा शो गई शं तो आलश्मिा नशीॊ शं तफ कलर वुऩायी ऩय े वलेऴाभलयोधेन ब्रह्मकभल वभायबे। शी चारल िारं। अऩवऩलन्तु ते बूता् मे बूता् बूप्तभवॊस्स्थता्।
  • 19. 19 नलम्फय 2012स्भयण:- ऩाद्यॊ:- शाथभं ऩुष्ऩ रेकय श्री गणेळजी का स्भयण कयं । उष्णोदक प्तनभलरॊ च वलल वौगन्ध वॊमतभ ्। ॊ ु नभस्तस्भै गणेळाम वलल त्रलध्न त्रलनाप्तळने॥ ऩाद प्रषारनाथालम दत्तॊ ते प्रप्ततगृह्यताभ ्॥ कामालयॊबेऴु वलेऴु ऩूस्जतो म् वुयैयत्रऩ। ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् ऩाद्यॊ वभऩलमाप्तभ॥ वुभखद्ळैक दॊ तद्ळ कत्रऩरो गजकणलक्॥ ु अघ्मं:- रॊफोदयद्ळ त्रलकिो त्रलघ्ननाळो त्रलनामक्। आचभनीभं जर, पर, पर, चॊदन, अषत, दस्षणा इत्माटद शाथ भं ू धुम्रकतुय ् गणाध्मषो बारचॊद्रो गजानन॥ े यख कय प्तनम्न भॊत्र का उच्चायण कयं ... द्रादळैताप्तन नाभाप्तन म् ऩठे च्छणु मादऽत्रऩ॥ ृ अध्मल गृशाण दे लेळ गॊध ऩुष्ऩषतै् वश। त्रलद्यायॊ बे त्रललाशे च प्रलेळे प्तनगलभे तथा। करुणा करु भं दे ल गृशाणाध्मै् नभोस्तुते॥ ु वॊग्राभे वॊकिे चैल त्रलघ्नस्तस्म न जामते॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् अघ्मं वभऩलमाप्तभ भॊत्र का ळुक्राॊफय धयॊ दे लॊ ळप्तळलणं चतुबजभ ्। ुल उच्चायण कयक अध्मल की वाभग्रीमा अत्रऩलत कयदं । े प्रवन्न लदनॊ ध्मामेत ् वलल त्रलघ्नोऩळाॊतमे॥ आचभन:- जऩेद् गणऩप्तत स्तोत्रॊ ऴस्ड्बभालवे परॊ रबेत ्। वलल तीथल वभामुि वुगप्तध प्तनभलर जरभ ्। ॊ ॊ वॊलत्वये ण प्तवत्रद्धॊ च रबते नात्र वॊळम्॥ ॊ आचम्मताॊ भमा दत्तॊ गृशीत्ला ऩयभेद्वयॊ ॥ लक्रतुि भशाकाम वूमकोटि वभ प्रब। ॊ ल ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् आचभनॊ वभऩलमाप्तभ॥ प्तनत्रलघ्नॊ करु भे दे ल वलल कामेऴु वललदा॥ ल ु अप्तबस्प्वताथल प्तवद्धध्मथं ऩूस्जतो म् वुयावुयै्। स्नानॊ:- वलल त्रलघ्न शयस्तस्भै गणाप्तधऩतमे नभ्॥ गॊगा च मभुना ये ला तुगबद्रा वयस्लप्तत। ॊ त्रलघ्नेद्वयाम लयदाम वुयत्रप्रमाम रॊफोदयाम वकराम कालेयी वटशता नद्य् वद्य् स्नाथलभत्रऩता॥ ल जगस्त्धताम। नागाननाम श्रुप्ततमस त्रलबुत्रऴताम ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् स्नानॊ वभऩलमाप्तभ भॊत्र का गौयीवुताम गणनाथ नभो नभस्ते॥ उच्चायण कयते शुले स्नान कयामे। ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् गणेळॊ स्भयाप्तभ भॊत्र का उच्चायण कयक ऩुष्ऩ अत्रऩलत कयं े ऩॊचाभृत स्नान:- तत ऩद्ळमात ऩॊचाभृत वे क्रभळ् दध, दशी, घी, ळशद, ळक्कय वे ूऴोिळोऩचाय गणऩतीऩूजन:- स्नान कया कय ळुद्धजर मा गॊगाजर वे उि भॊत्र वे ऩुन् स्लच्छ अस्मै प्राण् प्रप्ततद्षन्तु अस्मै प्राणा् षयन्तु च। कयरे। तत ऩद्ळमात ळुद्ध लस्त्र वे ऩोछ कय प्रप्ततत्रद्षत कयं । अस्मै दे लतभचीमल भाभशे प्तत च कद्ळन॥ दध स्नान:- ूआवनॊ:-आवन वभत्रऩलत कयं । मटद ऩशरे वे लस्त्र त्रफछामा शुला शं तो उव काभधेनु वभुत्ऩनॊ वलेऴाॊ जीलन ऩयभ ्।स्थान ऩय शल्दी मा कभकभ वे यॊ गे अषत िारकय ऩुष्ऩ अत्रऩलत ु ु ऩालनॊ मस शे तद्ळ ऩम: स्नानाथलभत्रऩलतभ ्॥ ुकयं । इव क स्थान ऩय ऩम् स्नानभ ् वभऩलमाप्तभ गॊ गणेळाम नभ् का े यम्मॊ वुळोबनॊ टदव्मॊ वलल वौख्म कयॊ ळुबभ ्। उच्चायण कये तथा ऩम् क स्थान ऩय दध कशं , दशीॊ कशं , धृतभ ् े ू आवनॊ च भमादत्तॊ गृशाण ऩयभेद्वय॥ कशं , भधु कशं , ळकया कशं क स्नान कयामे। ल े ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् आवनॊ वभऩलमाप्तभ॥ ऩमवस्तु वभुद्भूतॊ भधुयाम्रॊ ळप्तळप्रबभ। ्मटद द्ऴोक ऩढने भं कटठनाई शो तो आवन वभऩालप्तभ श्री गॊ गणेळाम दध्मानीतॊ भमा दे ल स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ॥ ्नभ् का उच्चायण कयते शुले गणेळ जी क चयण धोमे। े नलनीतवभुत्ऩन्नॊ वललवतोऴकायकभ। ॊ ् घृतॊ तुभ्मॊ प्रदास्माप्तभ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ॥ ्
  • 20. 20 नलम्फय 2012 तरु ऩुष्ऩ वभुत्ऩन्नॊ वुस्लादु भधुयॊ भधु । भमा प्तनलेटदता बक्त्मा गृशाण ऩयभेद्वरय॥ तेज् ऩुत्रद्शकयॊ टदव्मॊ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ॥ ् ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् अषतान ् वभऩलमाप्तभ॥ इषुवायवभुद्भूताॊ ळकयाॊ ऩुत्रद्शदाॊ ळुबाभ। ल ् ऩुष्ऩ:- भराऩशारयकाॊ टदव्मॊ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ॥ ् ततऩद्ळमात ऩुष्ऩ भारा आटद चढामे। ऩमो दप्तध धृत चैल भधु च ळकयामुतभ ्। ल भाल्मादीप्तन वुगन्धीप्तन भारत्मादीप्तन लै प्रबो। ऩॊचाभृत भमानीतॊ वनानाथल प्रप्ततघृशमताभ॥ भमा नीताप्तन ऩुष्ऩास्ण गृशाण ऩयभेद्वय॥लस्त्रॊ:- ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् ऩुष्ऩास्ण वभऩलमाप्तभ॥ऩॊचाभृत स्नान क फाद स्लच्छ कय क लस्त्र ऩशनामे मा वभत्रऩत े े ल दलाल:- ूकयं । ततऩद्ळमात दलाल चढामे। ू वलल बूऴाटदक वौम्मे रोकरज्जा प्तनलायणे । े दलाल कयान्वश रयतान भृतन्भॊगर प्रदान। ु भमोऩऩाटदते तुभ्मॊ लाववी प्रप्ततगृशीताभ ् ॥ आनी ताॊस्तल ऩूजाथल गृशाण ऩयभेद्वय॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् लस्त्रोऩलस्त्रे वभऩलमाप्तभ॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् दलांकयान वभऩलमाप्तभ॥ ू ु आबूऴण:-मसोऩलीत:- ततऩद्ळमात आबूऴण चढामे।ततऩद्ळमात प्तनम्न भॊत्र वे मसोऩलीत ऩशनामे अरॊकायान्भशाटदव्मान्नानायतन त्रलप्तनप्तभतान। ल नलप्तभस्तॊतप्तबमुि त्रत्रगुणॊ दे लताभमॊ। ु गृशाण दे ल-दे लेळ प्रवीद ऩयभेद्वय॥ वऩफीतॊ भमा दत्तॊ गृशाण ऩयभेद्वयभ ्॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् आबूऴण वभऩलमाप्तभ॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् मसोऩत्रलतॊ वभऩलमाप्तभ॥ इत्र:-चॊदन:- ततऩद्ळमात इत्र अथालत ् वुगप्तधत तेर चढामे। ॊ चम्ऩकाळो लकरॊ भारती भोगयाटदप्तब्। ुततऩद्ळमात रार चॊदन चढामे। लाप्तवतॊ स्स्नग्ध तावेरु तैरॊ चारु प्रगृशमातभ ्॥ श्रीखण्ि चन्दन टदव्मॊ कळयाटद वुभनीशयभ ्। े ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् तैरभ ् वभऩलमाप्तभ॥ त्रलरेऩनॊ वुश्रद्ष चन्दनॊ प्रप्ततगृशमतभ ्॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् ककभॊ वभऩलमाप्तभ॥ ुॊ ु धूऩ:-ककभ:- ुॊ ुॊ ततऩद्ळमात धूऩ आटद जरामे।ततऩद्ळमात ककभ अलीय-गुरार चढामे। ुॊ ुॊ लनस्ऩप्तत यवोद्भूतो गॊधाढ्मो गॊध उत्तभ्। ककभ काभना टदव्मॊ काभना काभ वॊबलभ ्। ुॊ ुॊ आध्नम वलल दे लानाॊ धूऩोमॊ प्रप्ततगृह्यताभ ्॥ ककभ नाप्तचतो दे ल गृशाण ऩयभेद्वयभ ्॥ ुॊ ुॊ ल ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् धूऩॊ वभऩलमाप्तभ॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् ककभॊ वभऩलमाप्तभ॥ ुॊ ु दीऩ:-प्तवॊदय:- ू ततऩद्ळमात दीऩ आटद जरामे।ततऩद्ळमात प्तवॊदय चढामे। ू आज्मेन लप्ततना मुि लटिना च प्रमोस्जतभ ् भमा। ल ॊ प्तवॊदयॊ ळोबनॊ यि वौबाग्मॊ वुखलधलनभ ्। ू ॊ दीऩॊ गृशाण दे लेळ त्रेरोक्म प्ततप्तभयाऩश॥। ळुबदॊ काभदॊ चैल प्तवॊदयॊ प्रप्ततगृशमताभ। ू ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् दीऩॊ दळलमाप्तभ॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् प्तवॊदयॊ वभऩलमाप्तभ॥ ू नैलेद्य:-अषत:- ततऩद्ळमात नैलेद्य अत्रऩत कयं । लततऩद्ळमात शल्दी मा ककभ वे यॊ गे अषत चढामे। ुॊ ुॊ ळकया खॊिखाद्याप्तन दप्तधषीय घृताप्तन च। ल अषताद्ळ वुयश्रेद्ष ककभािा् वुळोप्तबता्। ुॊ ु आशायॊ बक्ष्मॊ बोज्मॊ च गृशाण गणनामक।
  • 21. 21 नलम्फय 2012 ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् नैलेद्यॊ प्तनलेदमाप्तभ॥ आयती:- नीयाजन-आयती प्रगि कय उवभं चॊदन-ऩुष्ऩ रगामेततऩद्ळमात नैलेद्य ऩय जर प्तछिक। े कऩुय प्रज्लप्तरत कयं । गॊ गणऩतमे नभ् चॊद्राटदत्मौ च धयस्ण त्रलद्युदस्ग्न त्लभेल च। त्लभेल वलल ज्मोप्ततत्रऴ आतॉक्मॊ प्रप्ततगृह्यताभ ्॥ततऩद्ळमात इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुले ऩाॊच फाय बोजन कऩुय ऩूयेण भनोशये ण वुलणल ऩात्रान्तय वॊस्स्थतेन। लकयामे..... ॐ प्राणाम नभ्। ॐ अऩानाम नभ्। ॐ व्मानाम नभ्। प्रटदद्ऱबावा वशगतेन नीयाजनॊ ते ऩरयत कयोप्तभ। ॐ उदानाम नभ्। ॐ वभानाम नभ्। ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् नीयाजनॊ वभऩलमाप्तभ।ततऩद्ळमात इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुले जर अत्रऩलत कयं । ॥श्री गणेळ आयप्तत॥भध्मे ऩानीमॊ वभऩलमाप्तभ। जम गणेळ जम गणेळ जम गणेळ दे लाटपय वे उि भॊत्र का ऩाॊच फाय उच्चायण कयते शुले ऩाॊच फाय बोजन जम गणेळ जम गणेळ जम गणेळ दे ला.कयामे.... भाता जाकी ऩायलती त्रऩता भशादे ला॥ जम गणेळ.....ततऩद्ळमात इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुले तीन फाय जर अत्रऩलत एकदन्त दमालन्त चायबुजाधायीकयं .... भाथे ऩय प्ततरक वोशे भूवे की वलायी॥ जम गणेळ..... ॐ गणेळाम नभ् उत्तय ऩोऴणॊ वभऩलमाप्तभ। ऩान चढ़े पर चढ़े औय चढ़े भेला ॐ गणेळाम नभ् शस्त प्रषारनॊ वभऩलमाप्तभ। ॐ गणेळाम नभ् भुख प्रषारनॊ वभऩलमाप्तभ। रड्िु अन का बोग रगे वन्त कयं वेला॥ जम गणेळ..... अॊधे को आॉख दे त कोटढ़न को कामाशाथ वे बोजन की गॊध दय कयने शे तु चॊदनमुि ऩानी अत्रऩलत कयं । ू फाॉझन को ऩुत्र दे त प्तनधलन को भामा॥ जम गणेळ.....ॐ गणेळाम नभ् कयोद्रतलनाथे गॊधॊ वभऩलमाप्तभ. वूय श्माभ ळयण आए वपर कीजे वेलाभुख ळुत्रद्ध शे तु ऩान-वुऩायी इरामची औय रलॊग अत्रऩत कयं । ल जम गणेळ जम गणेळ जम गणेळ दे ला॥ जम गणेळ..... एरारलंग वॊमि ऩुगीपरॊ वभस्न्लतभ,् ु ॊ ताॊफरॊ च भमा दत्तॊ गृशाण गणनामक. ु आयती क चायो औय जर घुभामे टपय गणेळजी को आयती टदखामे े ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् भुखलावॊ वभऩलमाप्तभ। खुद आयती रेकय शाथ धोरे।दस्षणा:- टपय दोनो शाथकी अॊजप्तरभं ऩुष्ऩ रेकय ऩुष्ऩाॊजप्तर दं ।ततऩद्ळमात दस्षणा अत्रऩत कयं । ल नाना वुगधी ऩुष्ऩास्ण ऋतुकारोद्भलाप्तन च। ॊ टशयण्म गबल गबलस्थॊ शे भफीजॊ त्रलबालवो। ऩुष्ऩाॊजप्तर प्रदानेन प्रवीद गणनामक। अनॊत ऩूण्म परदभत् ळाॊप्ततॊ प्रमच्छ भे॥। ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् ऩुष्ऩाॊजप्तर वभऩलमाप्तभ। ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् दस्षणाॊ वभऩलमाप्तभ। प्राथलना: त्रलघ्नेद्वयाम लयदाम वुयत्रप्रमाम रॊफोदयाम वकरामप्रदस्षणा:- जगत्रद्धताम। नागाननाम श्रुप्ततमस त्रलबुत्रऴताम गौयीवुताम गणनाथततऩद्ळमात प्रदस्षणा कयं । नभो नभस्ते। बिाप्ततनाळन ऩयाम गणेद्वयाम वलेद्वयाम ळुबदाम ल माप्तन काप्तन च ऩाऩाप्तन जन्भान्तय कृ ताप्तन च। वुयेद्वयाम। त्रलद्याधयाम त्रलकिाम च लाभनाम बत्रि प्रवन्न लयदाम ताप्तन वलालस्ण नश्मन्तु प्रदस्षणा ऩदे ऩदे । नभो नभस्ते। ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् प्रदस्षणाॊ कयोप्तभ।
  • 22. 22 नलम्फय 2012नभस्काय: ऩुष्ऩ औय अषत वे कयं । अन्म कोद्षकं भं भॊत्र उच्चारयत कयते रॊफोदय नभस्तुभ्मॊ वतत भोदक त्रप्रम। शुए आह्वान कयं । प्तनत्रलघ्नॊ करु भे दे ल वलल कामेऴु वललदा। ल ु भातृकाओॊ का आह्वान एलॊ स्थाऩना भॊत्र :- ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् नभस्कायान ् वभऩलमाप्तभ। इव भॊत्रं भं ऴोिळभातृकाओॊ का आह्वान कयं ..त्रलळेऴ अध्मल: ॐ गणऩतमे नभ्। गणऩप्ततभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥आचभनी भं जर, चालर, पर, पर, चॊदन दस्षणा आटद अध्मल भं ू ॐ गौमै नभ्। गौयीभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥१॥रे ॐ ऩद्मामै नभ्। ॐ ऩद्मालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥२॥ यष यष गणाध्मष यष त्रेरोक्म यषक। ॐ ळच्मै नभ्। ळचीभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ॥३॥ बिनाभ बमॊकताल त्राता बलबलाणललात ्॥ ॐ भेधामै नभ्। भेधाभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥४॥ परेन पप्तरतॊ तोमॊ परेन पप्तरतॊ धनभ ्। ॐ वात्रलत्र्मै नभ्। वात्रलत्रीभालाशमाप्तभ स्थाऩमाप्तभ ॥५॥ परास्मघ्मं प्रदानेन ऩूणाल वन्तु भनोयथा्॥ ॐ त्रलजमामै नभ्। त्रलजमाभालाशमाभ, स्थाऩमाप्तभ ॥६॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् त्रलळेऴाघ्मं वभऩलमाप्तभ।षभाऩन: ॐ जमामै नभ्। जमाभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥७॥ आह्वानॊ न जानाप्तभ न जानाप्तभ त्रलवजलनभ ्। ॐ दे लवेनामै नभ्। दे लवेनाभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥८॥ ऩूजाॊ चैल न जानाप्तभ षभस्ल गणनामक॥ ॐ स्लधामै नभ्। स्लधाभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥९॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् षभाऩनॊ वभऩलमाप्तभ॥ ॐ स्लाशामै नभ्। स्लाशाभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥१०॥ अनमा ऩूज्मा प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळ् त्रप्रमताभ ्॥ ॐ भातृभ्मोनभ्। भातृ् आलाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥११॥ ॐ रोकभातृभ्मो नभ्। रोकभातृ् आलाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ॥१२॥ऴोिळभातृका ऩूजन ॐ धृत्मै नभ्। धृप्ततभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥१३॥ऴोिळभातृकाओॊ की स्थाऩना शे तु पळल ऩय वोरश कोद्शकं का ॐ ऩुष्ट्मै नभ्। ऩुत्रद्शभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥१४॥चौकोय भॊिर फनामे।ऩस्द्ळभ टदळा वे ऩूलल टदळा की ओय क्रभळ् भातृकाओॊ की ॐ तुष्ट्मै नभ्। तुत्रद्शभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ॥१५॥स्थाऩना कयं । प्रत्मेक कोद्षक भं यि अषत, जौ मा गेशूॉ यखं। ॐ आत्भन् करदे लतामै नभ्। आत्भन् करदे ताभालाशमाप्तभ, ु ुऩशरे कोद्षक भं गौयी का आह्वान कये । रेटकन गौयी क आह्वान े स्थाऩमाप्तभ ॥१६॥वे ऩशरे बगलान गणेळ का आह्वान कयं । गणेळ का आह्वान इव भॊत्र द्राया ऴोिळभातृकाओॊ का आह्वान, स्थाऩना कयं - ॐ भनोजूप्ततजुऴताभाज्मस्मफृशस्ऩप्ततमलसप्तभभन्तनी ल ऩूलल त्लरयद्शॊमसठल वप्तभभॊदधातु॥ त्रलद्वेदेलाव इश आत्भन् करदे लता ु रोकभातय् दे लवेना भेधा भादमन्ताभोऽम्प्रप्ततद्ष॥ 16 12 8 4 अषत छोिते शुए भातृका-भॊिर की प्रप्ततद्षा कयं । उ तुत्रद्श् भातय् जमा ळची द “ॐ गणेळवटशतगौमालटदऴोिळभातृकाभ्मो नभ्” त्त 15 11 7 3 स्ष इव भॊत्र वे ऩॊचोऩचाय ऩूजन कयं । नैलेद्य भं गुि तथा घी ऩुत्रद्श् स्लाशा त्रलजमा ऩद्मा य ण का नेलद्य रगामे । ै 14 10 6 2 प्राथलना :- धृप्तत् स्लधा वात्रलत्री गणेळ-गौयी ॐ गणेळ वटशतगौमालटद ऴोिळभातृकाभ्मो नभ्। 13 9 5 1 अनमा ऩूजमा गणेळवटशत गौमालटदऴोिळभातय् प्रीमन्ताभ,् ऩस्द्ळभ न भभ ।
  • 23. 23 नलम्फय 2012इव भॊत्र क वाथ अषत अत्रऩत कयने क फाद नभस्काय कयं े ल े प्राथलना :-औय टपय इव भॊत्र का उच्चायण कयं - गौयी ऩद्मा ळची भेधा वात्रलत्री त्रलजमा जमा । जऩाकवुभवॊकाळॊ काश्मऩेमॊ भशद्युप्ततभ ्। ु दे लवेना स्लधा स्लाशा भातयो रोकभातय् ॥ तभोऽरयॊ वललऩाऩघ्नॊ प्रणतोऽस्स्भ टदलाकयभ ् ॥१॥ धृप्तत् ऩुत्रद्शस्तथा तुत्रद्शयात्भन् करदे लता । ु दप्तध ळॊख तुऴायाबॊ षीयोदाणलल वॊबलभ ्। गणेळेनाप्तधका ह्येता लृद्धौ ऩूज्माद्ळ ऴोिळ् ॥ नभाप्तभ ळप्तळनॊ वोभॊ ळम्बो् भुकि बूऴणभ ्॥२॥ ु धयणी गबल वॊबतॊ त्रलद्युत्कास्न्तवभप्रबभ ्। ूभातृकाऩूजन क ऩद्ळमात नलग्रश ऩूजन कयं । े कभायॊ ळत्रि शस्तॊ च भॊगरॊ प्रणभाम्मशभ ्॥३॥ ु त्रप्रमॊगकप्तरकाश्माभॊ रूऩेणाप्रप्ततभॊ फुधभ ्। ुनलग्रश ऩूजन वौम्मॊ वौम्मगुणोऩेतॊ तॊ फुधॊ प्रणभाम्मशभ ्॥४॥ नलग्रश-ऩूजन क प्तरए नलग्रश फीवा मन्त्र अथला े दे लानाॊ च ऋऴीणाॊ च गुरुॊ काञ्चन वॊप्तनबभ ्।नलग्रश भॊिर की स्थाऩना रार लस्त्र ऩय अषत क ऊऩय कयं । े फुत्रद्धबूतॊ त्रत्ररोकळॊ तॊ नभाप्तभ फृशस्ऩप्ततभ ्॥५॥ ेऩशरे ग्रशं का आह्वान कयक उनकी स्थाऩना की जाती शै । फाएॉ े टशभ कन्द भृणाराबॊ दै त्मानाॊ ऩयभॊ गुरुभ ्। ुशाथ भं अषत रेकय इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुए दाएॉ शाथ वलल ळास्त्र प्रलिायॊ बागललॊ प्रणभाम्मशभ ्॥६॥वे अषत अत्रऩलत कयते शुए ग्रशं का आह्वान कयं । नीराॊजन वभाबावॊ यत्रलऩुत्रॊ मभाग्रजभ ्।प्राथलना एलॊ स्थाऩना भॊत्र : छामाभातलण्िवॊबतॊ तॊ नभाप्तभ ळनैद्ळयभ ्॥७॥ ू ॐ ब्रह्मा भुयारयस्स्त्रऩुयान्तकायी बानु् ळळी बूप्तभवतो फुधश्च । अधलकामॊ भशालीमं चन्द्राटदत्म त्रलभदल नभ ्। गुरुश्च ळुक्र् ळप्तन याशुकतल् वलेग्रशा् ळाॊप्ततकया बलन्तु ॥ े प्तवॊटशका गबल वॊबतॊ तॊ याशुॊ प्रणभाम्मशभ ्॥८॥ ू वूम् ळौमलभथेन्दरुच्चऩदलीभ ् वन्भॊगरभ ् भॊगर्। ल ु ऩराळ ऩुष्ऩ वॊकाळॊ तायका ग्रश भस्तकभ ्। वद्बत्रद्धभ ् च फुधो गुरुद्ळ गुरुताभ ् ळुक्र वुखभ ् ळॊ ळप्तन् । ु यौद्रॊ यौद्रात्भक घोयॊ तॊ कतुॊ प्रणभाम्मशभ ्॥९॥ ॊ े याशुफालशुफरॊ कयोतु वततभ ् कतु् करस्मोन्नप्ततभ ् े ु इप्तत व्माव भुखोद् गीतॊ म् ऩठे त ् वुवभाटशत्। प्तनत्मभ ् प्रीप्ततकया बलन्तु भभ ते वलेऽनकरा ग्रशा् ॥ ू टदला ला मटद ला यात्रौ त्रलघ्न ळास्न्त् बत्रलष्मप्तत॥१०॥आह्वान : नय नायी नृऩाणाॊ च बलेद् द्स्लप्न नाळनभ ्। ुइव भॊत्र वे नलग्रशं का आह्वान कयक उनका ऩूजन कयं : े ऐद्वमं अतुरॊ तेऴाभ ् आयोग्मॊ ऩुत्रद्श लधलनभ ्॥११॥ अस्स्भन नलग्रशभॊिरे आलाटशता् वूमालटदनलग्रशा दे ला् गृश नषत्रजा् ऩीिा स्तस्कयास्ग्न वभुद्भला्। वुप्रप्ततत्रद्षता लयदा बलन्तु । ता् वलाल् प्रळभॊ मास्न्त व्मावो ब्रू ते न वॊळम्॥१२॥प्रप्ततद्षा :- ॥ इप्तत श्रीव्माव त्रलयप्तचतॊ नलग्रशस्तोत्रॊ वॊऩणभ ् ॥ ू लशाथ भं अषत रेकय इव भॊत्र वे का उच्चायण कय उवे नलग्रश करळ ऩूजन(लरुण ऩूजन )भॊिर भं प्रप्ततद्षा क प्तरए अत्रऩलत कयं । े ॐ भनो जूप्ततजुऴताभाज्मस्म फृशस्ऩप्ततमलसप्तभभॊ ततनोत्लरयद्शॊ ल करळ स्थात्रऩत कयने शे तु रकिी की चौकी ऩय अद्शदर मसॊ वप्तभभॊ दधातु। कभर फनाकय उव ऩय धान्म(गेशूॉ) त्रफछा दं । करळ (करळ त्रलद्वे दे लाव इश भादमन्ताभोऽम्प्रप्ततद्ष ॥ शे तु प्तभट्िी अथला ताॊफे का रोिा रं) ऩय योरी वे स्लास्स्तकऩूजन:- का प्तचन्श फनाकय रोिे ऩय तीन धागे लारी भौरी (नािाछिी़, कराला, ऩॊचयॊ गी धागा ) रऩेिं ल धान्म ऩय करळ यखकय जरतत्ऩद्ळात इव भॊत्र क वाथ नलग्रशं का ऩॊचोऩचाय ऩूजन कयं - े वे बय दं एलॊ उवभं चॊदन, दफ, ऩाॉच ऩत्ते (फयगद, गूरय, ू “गॊधऩुष्ऩधूऩदीऩनैलद्याटदनी वभऩलमाभी” े कशकय गॊध, ऩुष्ऩ, ऩीऩर, आभ, ऩाकि अथला ऩान क ऩत्ते), कळा एलॊ गौळारा े ु धूऩ, दीऩ, नैलेद्य अत्रऩलत कयं । आटद की प्तभट्िी, वुऩायी, ऩॊचयत्न (मथाळत्रि) ल द्रव्म छोि दं । नारयमर ऩय रार कऩिा रऩेिकय, चालर वे बये एक ऩूणल ऩात्र
  • 24. 24 नलम्फय 2012को करळ ऩय स्थात्रऩत कय उव ऩय नारयमर यख दं । शाथ त्रलद्वे दे लाव इश भादमन्ताभोम्प्रप्ततद्ष।।जोिकय करळ भं लरुण दे लता का आह्वान कयं :- ॐ अस्मै प्राणा: प्रप्ततद्षन्तु अस्मै प्राणा: षयन्तु च।स्थाऩना :- अस्मै दे लत्लभचालमै भाभशे प्तत च कद्ळन।।करळ भं जर बयकय प्तनम्न भॊत्र का उच्चायण कयं :- इत्माटद ळास्त्रोि भॊत्रं का उचायण कय प्राण-प्रप्ततद्षा कयं । ध्मान:- ॐ लरुणस्मोत्तम्बनभप्तव लरुणस्म स्कम्बवजलनी स्थो लरुणस्म।ऋतवदन्मप्तव लरुणस्म ऋतवदन्भप्तव लरुणस्म ऋतवदनभा वीद॥ तत्ऩद्ळमात शाथ भं ऩुष्म रेकय इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुले रक्ष्भी दे ली का ध्मान कयं ..आह्वान :- मा वा ऩद्मावनस्था त्रलऩुरकटितिी ऩद्मऩत्रामताषी,ततऩद्ळमात वुऩायी औय ऩॊच यत्न आटद जर करळ भं िार दं । इवके गम्बीयालतलनाप्तबस्तनबयनप्तभता ळुभ्रलस्त्रोत्तयीमा ।फाद करळ ऩय चालर का ऩात्र यखकय रार लस्त्र वे रऩेिा नारयमर मा रक्ष्भीटदल व्मरूऩैभस्णगणखप्तचतै् स्नात्रऩता शे भकम्बै् ल ुयखना दे । अफ लरुण दे लता का स्भयण कयते शुए आह्वान कयं - वा प्तनत्मॊ ऩद्मशस्ता भभ लवतु गृशे वललभाॊगल्ममुिा ॥ ॐ बूबल् स्ल् बो लरुण इशागच्छ, इशप्ततद्ष, स्थाऩमाप्तभ ऩूजमाप्तभ च। ुल ॐ टशयण्मलणां शरयणॉ वुलणलयजतस्त्रजाभ ् ।ध्मान ल प्राथलना :- चन्द्राॊ टशयण्भमी रक्ष्भीॊ जातलेदो भ आ लश ॥ततऩद्ळमात करळ ऩय वफ दे लताओॊ का ध्मान कयं एलॊ चॊदन, ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। ध्मानाथे ऩुष्ऩास्ण वभऩलमाप्तभ ।अषत, धूऩ, दीऩ, नैलेद्य अत्रऩलत कय ऩूजन कयं । इव भॊत्र का (ध्मान क प्तरए शाथ भं प्तरमे शुले ऩुष्ऩ दे ली को अत्रऩलत कयं ।) ेउच्चायण कयं :- आह्वान:- करळस्म भुखे त्रलष्णु् कठे रुद्र् वभाप्तश्रत् । भूरे त्लस्म स्थतो ॊ तत्ऩद्ळमात शाथ भं ऩुष्म रेकय इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुले ब्रह्मा भध्मे भातृगणा् स्भृता् ॥ कषौ तु वागया् वले, वद्ऱद्रीऩा ु रक्ष्भी दे ली का आह्वान कयं .. लवुधया् । अजुनी गोभती चैल चॊद्रबागा वयस्लती ॥ ॊ ल वललरोकस्म जननीॊ वललवौख्मप्रदाप्तमनीभ ् ।वललदेलभमीभीळाॊ कालेयी कृ ष्णलेणी च गॊगा चैल भशानदी । ताद्ऱी गोदालयी चैल दे लीभालाशमाम्मशभ ् ॥ ॐ ताॊ भ आ लश जातलेदोभाशे न्द्री नभलदा तथा ॥ नदाद्ळ त्रलत्रलधा जाता नद्य् वलालस्तथाऩया् । रक्ष्भीभनऩगाप्तभनीभ। मस्माॊ टशयण्मॊ त्रलन्दे मॊ गाभद्वॊ ऩुरुऴानशभ ्॥ ् ऩृप्तथव्माॊ मान तीथालप्तन करळस्ताप्तन ताप्तन लै् ॥ वले वभुद्रा् ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। भशारक्ष्भीभालाशमाप्तभ, आलाशनाथे वरयतस्तीथमालप्तन जरदा नदा् । आमान्तु भभ काभस्म ऩुष्ऩास्ण वभऩलमाप्तभ । दरयतषमकायका् ॥ ॐ अऩाॊ ऩतमे लरुणाम नभ् । ॐ ु (आह्वान क प्तरए शाथ भं प्तरमे शुले ऩुष्ऩ दे ली को अत्रऩलत कयं ।) े लरुणाद्यालाटशत दे लताभ्मो नभ्।वभऩलण :- आवन :-"कृ तेन अनेन ऩूजनेन करळे लरुणाद्यालाटशतदे लता् प्रीमन्ताॊ न तत्ऩद्ळमात शाथ भं कभर ऩुष्म मा अन्म रेकय इव भॊत्र काभभ।" उच्चायण कयं .. तद्ऱकाॊचनलणालबॊ भुिाभस्णत्रलयास्जतभ ् ।रक्ष्भी ऩूजन अभरॊ कभरॊ टदव्मभावनॊ प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ऩूजन वे ऩूलल नमी रक्ष्भी प्रप्ततभा तथा द्रव्मरक्ष्भी की ॐ अद्वऩूलां यथभध्माॊ शस्स्तनादप्रभोटदनीभ ् ।प्राणप्रप्ततद्षा कयं :- प्तश्रमॊ दे लीभुऩह्वमे श्रीभाल दे ली जुऴताभ ् ॥प्रप्ततद्षा शे तु फामं शाथ भं अषत रेकय इव भॊत्र का उचायण ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। आवनॊ वभऩलमाप्तभ ।कयते शुए दाटशने शाथ वे उन अषतं को रक्ष्भीजी की प्रप्ततभा (आवन क प्तरए शाथ भं प्तरमे शुले ऩुष्ऩ दे ली को अत्रऩलत कयं ।) ेऩय चढा़ते जामे.. ऩाद्य :- ॐ भनो जूप्ततजुऴताभाज्मस्म फृशस्ऩप्ततमलसप्तभभॊ ल तत्ऩद्ळमात चन्दन ऩुष्ऩाटद मुि जर रेकय इव भॊत्र का तनोत्लरयद्शॊ मस वप्तभभॊ दधातु। उच्चायण कयं ..
  • 25. 25 नलम्फय 2012 गॊगाटदतीथलवम्बूतॊ गन्धऩुष्ऩाटदप्तबमुतभ ् । ल (गाम क कच्चे दध वे स्नान कयामे, ऩुन् ळुद्ध जर वे स्नान कयामे।) े ू ऩाद्यॊ ददाम्मशॊ दे त्रल गृशाणाळु नभोऽस्तुते ॥ॐ काॊ वोस्स्भताॊ टशयण्मप्राकायाभाद्रां ज्लरन्तीॊ तृद्ऱाॊ तऩलमन्तीभ। ् दप्तधस्नान :- ऩद्मेस्स्थताॊ ऩद्मलणां ताप्तभशोऩह्वमे प्तश्रमभ ् ॥ ऩमवस्तु वभुद्भूतॊ भधुयाम्रॊ ळप्तळप्रबभ ् । दध्मानीतॊ भमा दे त्रल ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। ऩादमो् ऩाद्यॊ वभऩलमाप्तभ । स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ॐ दप्तधक्राव्णो अकारयऴॊ स्जष्णोयद्वस्म (ऩाद्य शे तु शाथ भं प्तरमे शुले चन्दन ऩुष्ऩटदमुि जर अत्रऩलत कयं ।) लास्जन् वुयप्तब नो भुखा कयत्प्र ण आमूत्रऴ तारयऴत ् । ॐअघ्मल :- भशारक्ष्म्मै नभ्। दप्तधस्नानॊ वभऩलमाप्तभ। दप्तधस्नानान्तेतत्ऩद्ळमात अद्शगन्धप्तभप्तश्रत जर रेकय इव भॊत्र का उच्चायण ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ ।कयं .. (दशी वे स्नान कयामं, टपय ळुद्ध जर वे स्नान कयामं।) अद्शगन्धवभामुि स्लणलऩात्रप्रऩूरयतभ ् । ॊ अघ्मं गृशाण भद्दतॊ भशारस्क्ष्भ नभोऽस्तु ते ॥ घृत स्नान :-ॐ चन्द्राॊ प्रबावाॊ मळवा ज्लरन्तीॊ प्तश्रमॊ रोक दे लजुद्शाभुदायाभ ् । े नलनीतवभुत्ऩन्नॊ वललवतोऴकायकभ ् । घृतॊ तुभ्मॊ प्रदास्माप्तभ ॊ ताॊ ऩद्मनीभीॊ ळयणॊ प्रऩद्येऽअरक्ष्भीभे नश्मताॊ त्लाॊ लृणे ॥ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ॐ घृतॊ घृतऩालन् त्रऩफत लवाॊ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। शस्तमोयघ्मं वभऩलमाप्तभ । लवाऩालन् त्रऩफतान्तरयषस्म शत्रलयप्तव स्लाशा । टदळ् प्रटदळ (अद्शगॊध प्तभप्तश्रत जर को दे ली क शाथं ऩय वभत्रऩलत कयं ।) े आटदळो त्रलटदळ उटद्दळो टदग्भ्म् स्लाशा ॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। घृतस्नानॊ वभऩलमाप्तभ । घृतस्नानान्ते ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ।आचभन :- (घृत [घी] स्नान कयामं, टपय ळुद्ध जर वे स्नान कयामं।)तत्ऩद्ळमात आचभन क प्तरए जर रेकय इव भॊत्र का उच्चायण ेकयं .. भधु स्नान :- वललरोकस्म मा ळत्रिब्रह्मत्रलष्ण्लाटदप्तब् स्तुता । तरुऩुष्ऩवभुद्भूतॊ वुस्लादु भधुयॊ भधु । तेज् ऩुत्रद्शकयॊ टदव्मॊ ददाम्माचभनभ ् तस्मै भशारक्ष्म्मै भनोशयभ ् ॥ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ॐ भधुलाता ऋतामते भधु षयस्न्तॐ आटदत्मलणे तऩवोऽप्तध जातो लनस्ऩप्ततस्तल लृषोऽथत्रफल्ल् । प्तवन्धल्। भाध्लीनल् वन्त्लोऴधी् ॥ भधु निभुतोऴवोतस्म पराप्तन तऩवा नुदन्तु भामा अन्तया माद्ळ फाह्या अरक्ष्भी्॥ भधुभत्ऩाप्तथलॎ घूॊ यज्। भधु द्यौयस्तु न् त्रऩता॥ भधुभान्नं ल ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। आचभनीमॊ जरॊ वभऩलमाप्तभ । लनस्ऩप्ततभेधुभाॉऽअस्तु वूम्। भाध्लीगाललो बलॊतु न् ॥ ॐ ल (आचभन क प्तरए प्तरमे शुले जर को चढ़ामे।) े भशारक्ष्म्मै नभ्। भधुस्नानॊ वभऩलमाप्तभ। भधुस्नानन्तेस्नान:- ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ ।तत्ऩद्ळमात स्नान क प्तरए जर रेकय इव भॊत्रका उच्चायण कयं .. े (ळशद स्नान कयामं, टपय ळुद्ध जर वे स्नान कयामं।)भन्दाटकन्मा् वभानीतैशेशभाम्बोरुशलाप्तवतै्। स्नानॊ करुष्ल दे लेप्तळ ुवप्तररैद्ळ वुगस्न्धप्तब्॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। स्नानॊ वभऩलमाप्तभ। ळकया स्नान :- ल (स्नानीम जर अत्रऩलत कयं ।) इषुवायवभुद्भूता ळकया ऩुत्रद्शकारयका । ल स्नानान्ते आचभनीमॊ जरॊ वभऩलमाप्तभ । भराऩशारयका टदव्मा स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥स्नानक फाद ॐ भशारक्ष्म्मै नभ् फोरकय आचभन शे तु जर दं । े ॐ अऩा घूॊ यवभुद्रमवॎ वूमे वन्त घूॊ वभाटशतभ ् ।दग्ध स्नान : ु अऩा घूॊ यवस्म मो यवस्तॊ लो गृह्राम्मुत्तभभुऩमाभगृशीतोऽवीन्द्राम काभधेनवभुत्ऩन्नॊ वलेऴाॊ जीलनॊ ऩयभ ् । ऩालनॊ मसशे तद्ळ ऩम् ु ु त्ला जुद्शॊ गृह्राम्मेऴ ते मोप्तनरयन्द्राम त्ला जुद्शतभभ ् ॥ स्नानाथलभत्रऩलतभ ् ॥ ॐ ऩम् ऩृप्तथव्माॊ ऩम औऴधीऴु ऩमो ॐ भशारक्ष्म्मै नभ् । ळकयास्नानॊ वभऩलमाप्तभ, ळकया ल ल टदव्मन्तरयषे ऩमो धा् । ऩमस्लती् प्रटदळ् वन्तु भह्यभ ् ॥ स्नानान्ते ऩुन् ळुद्धोदक स्नानॊ वभऩलमाप्तभ । ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्, ऩम् स्नानॊ वभऩलमाप्तभ । (ळक्कय वे स्नान कयामं, टपय ळुद्ध जर वे स्नान कयामं।) ऩम् स्नानान्ते ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ ।
  • 26. 26 नलम्फय 2012ऩॊचाभृत स्नान :- लस्त्र :-दध, दशी, घी, ळकय एलॊ ळशद प्तभराकय ऩॊचाभृत फनाएॉ ल ू टदव्माम्फयॊ नूतनॊ टश षौभॊ त्लप्ततभनोशयभ ् ।प्तनम्न भॊत्र वे स्नान कयाएॉ। दीमभानॊ भमा दे त्रल गृशाण जगदस्म्फक ॥ े ऩमो दप्तध घृतॊ चैल भधुळकयमास्न्लतभ ् । ल ॐ उऩैतु भाॊ दे लवख् कीप्ततद्ळ भस्णना वश । ल ऩॊचाभृतॊ भमानीतॊ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ प्रादबतोऽस्स्भ याद्सेऽस्स्भन ् कीप्ततभत्रद्धॊ ददातु भे ॥ ु ूल ल ृ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। ऩॊचाभृतस्नानॊ वभऩलमाप्तभ, ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। लस्त्रॊ वभऩलमाप्तभ, ऩॊचाभृतस्नानान्ते ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ । आचभनीमॊ जरॊ च वभऩलमाप्तभ । (ऩॊचाभृत स्नान कयामं, टपय ळुद्ध जर वे स्नान कयामं।) (लस्त्र अत्रऩलत कयं , आचभनीम जर अत्रऩलत कयं ।)गन्धोदक स्नान :- उऩलस्त्र :- भरमाचरवम्बूतॊ चन्दनागरुवम्बलभ ् । कचुकीभुऩलस्त्रॊ च नानायत्नै् वभस्न्लतभ ् । ॊ चन्दनॊ दे लदे लेप्तळ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ गृशाण त्लॊ भमा दत्तॊ भॊगरे जगदीद्वरय ॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। गन्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ । ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। उऩलस्त्रॊ वभऩलमाप्तभ, (गॊध (चॊदन) मुि जर वे स्नान कयाएॉ।) आचभनीमॊ जरॊ च वभऩलमाप्तभ ।त्रलळेऴ:- (कचुकी,अॉप्तगमा आटद उऩलस्त्र चढ़ाएॉ,आचभन क प्तरए जर दं ।) ॊ े भधुऩक :- लगन्धोदक स्नान के ऩद्ळमात श्रीवूि, ऩुरुऴ वूि अथलावशस्रनाभ आटद वे ऩुष्ऩाचलन मा जर अप्तबऴेक कयक टपय े काॊस्म काॊस्मेन त्रऩटशतो दप्तधभध्लाज्मवॊमत् । भधुऩको भमानीत् ुळुद्धोदक स्नान कयामे मटद ऩुष्ऩाचलन मा जर अप्तबऴेक नशीॊ ऩूजाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। भधुऩकंकयना शो तो वीधे ळुद्धोदक स्नान कयामे।) वभऩलमाप्तभ, आचभनीमॊ जरॊ च वभऩलमाप्तभ ।अप्तबऴेक शे तु ळुद्ध जर मा दग्ध वे श्रीवूि क ऩाठ क वभम े े (काॊस्म ऩत्र भं स्स्थत भधुऩक (अथालत वोने चाॊदी क प्तवक्क ल े े ुअखण्ि जरधाया वे स्नान अथालत अप्तबऴक कयामे। अखण्ि इत्माटद) अत्रऩलत कयं )जरधाया शे तु धातु की प्रप्ततभा मा द्रव्मरक्ष्भी श्रेद्ष यशती शं । मसोऩलीत :-अखण्ि जरधाया अप्तबऴेक अरग ऩात्र भं कयना चाटशए। श्रीगणेळ, श्रीनायामण आटद दे लता को स्थात्रऩत टकमा शो तो* प्तभट्िी की प्रप्ततभा शो तो अखण्ि जरधाया वे प्रप्ततभा मसोऩत्रलत चढ़ाए, अन्मथा वीधे आबूऴण वे ऩूजन कयंषप्ततग्रस्त शो वकती शं । श्री वूि इव अॊक भं उऩरब्ध कयामा ॐ तस्भादअकला अजामॊत मे क चोबमादत् । गालोश मस्सये ू ेगमा शं । तस्भात्तस्भाज्जाता अजालम् ॥ ॐ मसोऩलीतॊ ऩयभॊ ऩत्रलत्रॊळुद्धोदक स्नान : प्रजाऩतमेत्वशजॊ ऩुयस्तात ् ॥ आमुष्मभग्र्मॊ प्रप्ततभुञ्च ळुभ्रॊ भन्दाटकन्मास्तु मद्रारय वललऩाऩशयॊ ळुबभ ् । मसोऩलीतॊ फरभस्तुतज् । ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्, ॐ श्रीगणेळाम े तटददॊ कस्ल्ऩतॊ तुभ्मॊ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ नभ्, ॐ बगलते लावुदेलाम नभ् । मसोऩलीतॊ वभऩलमाप्तभ । ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ । (श्रीगणेळ, श्रीनायामण आटद दे लता कोमसोऩत्रलत चढ़ामे,(ळुद्धोदक स्नान क प्तरए गॊगाजर अथला ळुद्ध जर वे दे ली को े आचभन क प्तरए जर दं ।) ेस्नान कयामे। तदनॊतय प्रप्ततभा का अॊग-प्रोषण(ऩंछना) कयके आबूऴण :-उवे मथास्थान आवान ऩय स्थात्रऩत कयं ।) यत्नककणलैदमभिाशायाटदकाप्तन च । ॊ ू ल ु वुप्रवन्नेन भनवा दत्ताप्तन स्लीकरुष्ल बो् ॥ ुआचभन :- ॐ षुस्त्ऩऩावाभराॊ ज्मेद्षाभ-अरक्ष्भीॊ नाळमाम्मशभ ् । ्तत्ऩद्ळात ॐ भशारक्ष्म्मै नभ् कशकय आचभनी वे जर अबूप्ततभवभृत्रद्धॊ च वलां प्तनणुद भे गृशात ् ॥ लअत्रऩलत कयं । ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। नानात्रलधाप्तन किरकिकादीप्तन ुॊ आबूऴणाप्तन वभऩलमाप्तभ । (आबूऴण वभत्रऩलत कयं ।)
  • 27. 27 नलम्फय 2012गन्ध :- ॐ भनव् काभभाकप्ततॊ लाच् वत्मभळीभटश । ऩळूनाॊ ू श्रीखण्िॊ चन्दनॊ टदव्मॊ गन्धाढ्मॊ वुभनोशयभ ् । रूऩभन्नस्म भप्तम श्री् श्रमताॊ मळ् ॥ त्रलरेऩनॊ वुयश्रेद्षे चन्दनॊ प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। ऩुष्ऩॊ ऩुष्ऩभाराॊ च वभऩलमाप्तभ । ॐ गन्धद्रायाॊ दयाधऴांप्तनत्म ऩुद्शाॊ कयीत्रऴणीभ ् । ु (उि भॊत्र का उचायण कय दे ली रक्ष्भी जी को ऩुष्ऩं वे ल ऩुष्ऩ ईद्वयीॊ वललबतानाॊ ताप्तभशोऩ ह्वमे प्तश्रमभ ् ॥ ू भाराओॊ वे अरॊकृत कयं । रक्ष्भीजी का ऩूजन कभर क ऩुष्ऩ े ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। गन्धॊ वभऩलमाप्तभ । वे श्रेद्ष भाना जाता शं ।) (अनाप्तभका अॊगरी वे कवय प्तभप्तश्रत चन्दन अत्रऩलत कयं ।) ु े दलाल :- ूयि चन्दन :- त्रलष्ण्लाटदवललदेलानाॊ त्रप्रमाॊ वललवळोबनाभ ् । ु यिचन्दनवस्म्भश्रॊ ऩारयजातवभुद्भलभ ् । षीयवागय वम्बूते दलां स्लीकरू वललदा ॥ ू ु भमा दत्तॊ भशारस्क्ष्भ चन्दनॊ प्रप्ततगृह्यताभ ॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। दलांकयान ् वभऩलमाप्तभ । ू ु ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। यिचन्दनॊ वभऩलमाप्तभ । (दलांकय (अथालत ् दफ क अॊकय) अत्रऩलत कयं ।) ू ु ू े ु (अनाप्तभका अॊगरी वे यि चॊदन चढ़ाएॉ।) ु अॊग ऩूजा :-प्तवन्दय :- ू तदनॊतय भशारक्ष्भीजी क त्रलप्तबन्न अॊगं का ककभ एलॊ अषत े ुॊ ु प्तवन्दयॊ यिलणं च प्तवन्दयप्ततरकत्रप्रमे । ू ू प्तभप्तश्रत ऩुष्ऩं वे दे ली का एक-एक नाभ रेते शुले अॊगऩूजन कयं बक्त्मा दत्तॊ भमा दे त्रल प्तवन्दयॊ प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ू ॐ चऩरामै नभ्, ऩादौ ऩूजमाप्तभ। (ऩैयं ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩलत कयं )ॐ प्तवन्धोरयल प्राध्लने ळूघनावो लात प्रप्तभम् ऩतमस्न्त मह्वा् । ॐ चॊचरामै नभ्, जानुनी ऩूजमाप्तभ। (जानु प्रदे ळ ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं ) लघृतस्म धाया अरुऴो न लाजी काद्षा प्तबन्दन्नूप्तभप्तब् त्रऩन्लभान्॥ ल ॐ कभरामै नभ्,कटिॊ ऩूजमाप्तभ। (कभय ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं ) ल ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। प्तवन्दयॊ वभऩलमाप्तभ । ू ॐ कात्मामन्मै नभ्,नाप्तबॊ ऩूजमाप्तभ। (नाप्तब ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩलत कयं ) (दे ली रक्ष्भी को प्तवन्दय चढ़ाएॉ।) ू ॐ जगन्भात्रे नभ्, जठयॊ ऩूजमाप्तभ। (जठय ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं ) लककभ :- ुॊ ु ॐ त्रलद्वलल्रबामै नभ्, लष्स्थरभ ् ऩूजमाप्तभ । (लषस्थर ऩय ककभॊ काभदॊ टदव्मॊ ककभॊ काभरूत्रऩणभ ् । ुॊ ु ुॊ ु ऩुष्ऩ अत्रऩलत कयं ) अखण्िकाभवौबाग्मॊ ककभॊ प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ुॊ ु ॐ कभरलाप्तवन्मै नभ्,शस्तौ ऩूजमाप्तभ। (शाथ ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं ) ल ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्, ककभॊ वभऩलमाप्तभ । ुॊ ु ॐ ऩद्माननामै नभ्, भुखॊ ऩूजमाप्तभ। (भुख ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं ) ल (ककभ अत्रऩलत कयं ।) ुॊ ु ॐ कभरऩत्राक्ष्मै नभ्, नेत्रत्रमॊ ऩूजमाप्तभ।(तीनं नेत्र ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं ) लऩुष्ऩवाय :- ॐ प्तश्रमै नभ्, प्तळय् ऩूजमाप्तभ । (प्तवय ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩलत कयं ) तैराप्तन च वुगन्धीप्तन द्रव्मास्ण त्रलत्रलधाप्तन च । ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्, वलांङ्गॊ ऩूजमाप्तभ । (दे ली क वभस्त अॊग े भमा दत्ताप्तन रेऩाथं गृशाण ऩयभेद्वरय ॥ क ऩूजन शे तु ऩुष्ऩ अत्रऩलत कयं ) े ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। वुगस्न्धततैरॊ ऩुष्ऩवायॊ च वभऩलमाप्तभ । अद्शप्तवत्रद्धऩूजन :- (ऩुष्ऩवाय भं वुगस्न्धत तेर ल इत्र अत्रऩलत कयं ।) इवक ऩद्ळात दस्षणालतल अथालत ् घिी की टदळा भं आठं ेअषत :- टदळाओॊ भं लस्णलत आठं प्तवत्रद्धमं का ऩूजन ककभ एलॊ अषत ुॊ ु वे दे ली भशारक्ष्भी का ऩूजन कयं - अषताद्ळ वुयश्रेद्षे ककभािा् वुळोप्तबता् । ुॊ ु 1 ॐ अस्णम्ने नभ् (ऩूलल टदळा भं), 2 ॐ भटशम्ने नभ् भमा प्तनलेटदता बक्त्मा गृशाण ऩयभेद्वरय ॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। अषतान ् वभऩलमाप्तभ । (आग्नेम कोण भं), 3 ॐ गरयम्णे नभ् (दस्षण टदळा भं), 4 (ककभ वे यॊ गे शुए अषत अत्रऩलत कयं ।) ुॊ ु ॐ रप्तघम्ने नभ् (नैऋत्म कोण भं), 5 ॐ प्राप्त्मै नभ् (ऩस्द्ळभ टदळा भं), 6 ॐ प्रकाम्मै नभ् (लामव्म कोण भं), 7ऩुष्ऩ एलॊ ऩुष्ऩभारा :- ॐ ईप्तळतामै नभ् (उत्तय टदळा भं), 8 ॐ लप्तळतामै नभ्(ईळान भाल्मादीप्तन वुगन्धीप्तन भारत्मादीप्तन लै प्रबो । कोण भं) | भमानीताप्तन ऩुष्ऩास्ण ऩूजाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥
  • 28. 28 नलम्फय 2012अद्शरक्ष्भी ऩूजन :- ळीतरॊ प्तनभलरॊ तोमॊ कऩूयेण वुलाप्तवतभ ् । लइवक ऩद्ळात दस्षणालतल अथालत ् घिी की टदळा भं आठं े आचम्मताॊ जरॊ ह्येतत ् प्रवीद ऩयभेद्वरय ॥टदळाओॊ भं लस्णलत आठं अद्श रस्क्ष्भमं का ऩूजन कयं । ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। आचभनीमॊ जरॊ वभऩलमाप्तभ । (1) ॐ आद्यरक्ष्म्मै नभ् (2) ॐ त्रलद्यारक्ष्म्मै नभ् (3) (आचभन क प्तरए जर दं ।) े ॐ वौबाग्मरक्ष्म्मै नभ् (4) ॐ अभृतरक्ष्म्मै नभ् ऋतुपर :- (5) ॐ काभरक्ष्म्मै नभ् (6) ॐ वत्मरक्ष्म्मै नभ् परेन पप्तरतॊ वलं त्रैरोक्मॊ वचयाचयभ ् । (7) ॐ बोगरक्ष्म्मै नभ् (8) ॐ मोगरक्ष्म्मै नभ् तस्भात ् परप्रदानेन ऩूणाल् वन्तु भनोयथा् ॥धूऩ :- ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। अखण्िऋतुपरॊ वभऩलमाप्तभ, आचभनीमॊ लनस्ऩप्ततयवोद्भूतो गन्धाढ्म् वुभनोशय् । जरॊ च वभऩलमाप्तभ । आघ्रेम् वललदेलानाॊ धूऩोऽमॊ प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ (ऋतुपर अत्रऩलत कयं तथा आचभन क प्तरए जर दं ।) े ॐ कद्दल भेन प्रजा बूता भप्तम वॊबल कदल भ। प्तश्रमॊ लावम भं करे भातयॊ ऩद्मभाप्तरनीभ ् ॥ ु ताम्फूर एलॊ ऩूगीपर :- ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। धूऩभाघ्राऩमाप्तभ । ऩूगीपरॊ भशटद्दव्मॊ नागलल्रीदरैमतभ ् । ुल (दोनं शाथं वे रक्ष्भीजीको धूऩ आघ्रात्रऩत कयं ।) एराचूणालटदवॊमि ताम्फूरॊ प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ु ॊदीऩ :- ॐ आद्रां म् करयणीॊ मत्रद्शॊ वुलणां शे भभाप्तरनीभ ् । काऩालवलप्ततवमि घृतमुि भनोशयभ ् । ल ॊ ु ॊ ॊ वूमां टशयण्भमीॊ रक्ष्भीॊ जातलेदो भ आ लश ॥ तभोनाळकयॊ दीऩॊ गृशाण ऩयभेद्वरय ॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। भुखलावाथे ताम्फूरॊ वभऩलमाप्तभ । ॐ आऩ् वृजन्तु स्स्नग्धाप्तन प्तचक्रीत लव भे गृशे। (रलॊग, इरामची ल ऩूगीपर(वुऩायी) यखकय ताम्फूर(ऩान) प्तन च दे लीॊ भातयॊ प्तश्रमॊ लावम भे करे ॥ ु अत्रऩलत कयं ।) ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। दीऩॊ दळलमाप्तभ । दस्षणा :- (रक्ष्भीजीको दीऩक टदखाकय शाथ धो रं।) टशयण्मगबलगबलस्थॊ शे भफीजॊ त्रलबालवो् ।नैलेद्य (वार की धानी वटशत ऩॊचप्तभद्षान्न ल वूखे भेले) : अनन्तऩुण्मपरद्धभत् ळास्न्त प्रमच्छ भे ॥ नैलेद्यॊ गृह्यताॊदेत्रल बक्ष्मबोज्मवभस्न्लतभ ् । ॐ ताॊ भ आ लश जातलेदो रक्ष्भीभनऩगाप्तभनीभ ् । ऴड्यवैयस्न्लतॊ टदव्मॊ रस्क्ष्भ दे त्रल नभोऽस्तु ते ॥ मस्माॊ टशयण्मॊ प्रबूतॊ गालो दास्मोऽद्वान ् त्रलन्दे मॊ ऩुरुऴानशभ ् ॥ ॐ आद्रां ऩुष्करयणीॊ ऩुत्रद्शॊ त्रऩगराॊ ऩद्मभाप्तरनीभ ् ॥ ॊ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। दस्षणाॊ वभऩलमाप्तभ । चन्द्राॊ टशयण्भमीॊ रक्ष्भीॊ जातलेदो भ आ लश ॥ (अऩनी श्रद्धा अनुवाय रक्ष्भीजी को दस्षणा चढ़ामे।) ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। नैलेद्यॊ प्तनलेदमाप्तभ, नीयाजन (आयती) :- भध्मे ऩानीमभ,् उत्तयाऩोऽळनाथलभ ् शस्तप्रषारनाथं चषुदं वललरोकानाॊ प्ततप्तभयस्म प्तनलायणभ ् । भुखप्रषारनाथं च जरॊ वभऩलमाप्तभ । आप्ततक्म कस्ल्ऩतॊ बक्त्मा गृशाण ऩयभेद्वरय ॥ ल ( रक्ष्भीजी को नैलद्य प्तनलेटदत कय ऩानीम जर एलॊ े ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। नीयाजनॊ वभऩलमाप्तभ । शस्तप्रषारन क प्तरए जर अत्रऩलत कयं ।) े (आयती कयं तथा जर छोिं ल शाथ धोरे।)कयोद्रतलन :- प्रदस्षणा :- ॐ भशारक्ष्म्मै नभ् मश कशकय कयोद्रतलन क प्तरए शाथं भं े माप्तन काप्तन च ऩाऩाप्तन जन्भान्तयकृ ताप्तन च । चन्दन उऩरेत्रऩत कयं । ताप्तन वलालस्ण नश्मन्तु प्रदस्षणाॊऩदे ऩदे ॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। प्रदस्षणाॊ वभऩलमाप्तभ ।आचभन :- (प्रदस्षणा कयं ।)
  • 29. 29 नलम्फय 2012प्राथलना :- ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। प्राथलनाऩूलक नभस्कायान ् वभऩलमाप्तभ । ल ॊशाथ जोिकय प्राथना कयं : (दे ली को प्राथलना कयते शुए नभस्काय कयं ।) वुयवुयंद्राटदटकयीिभौत्रिकमुिभ वदा मत्तल ऩादऩॊकजभ ् । ै ल ॊ वभऩलण :- ऩयालयॊ ऩातु लयॊ वुभगरभ ् नभाप्तभ बक्त्मास्खरकाभप्तवद्धमे ॥ ॊ ऩूजन क अॊतभं "कृ तेनानेन ऩूजनेन बगलती भशारक्ष्भी दे ली े बलाप्तन त्लॊ भशारक्ष्भी् वललकाभप्रदाप्तमनी । प्रीमताभ ् न भभ।" इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुले वभस्त वुऩस्जता प्रवन्ना स्मान्भशारस्क्ष्भ ! नभोऽस्तु ते ॥ ू ऩूजन कभल दे ली भशारक्ष्भी को वभत्रऩलत कयते शुले शाथ भं जर नभस्ते वललदेलानाॊ लयदावी शरयत्रप्रमे । रेकय छोि दं । मा गप्ततस्त्लत्प्रऩन्नानॊ वा भे बूमात ् त्लदचलनात ् ॥ वललप्तवत्रद्धदामक भुटद्रकाइव भुटद्रका भं भूॊगे को ळुब भुशूतल भं त्रत्रधातु (वुलणल+यजत+ताॊफं) भं जिला कय उवे ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलप्तळद्शतेजस्ली भॊत्रो द्राया वललप्तवत्रद्धदामक फनाने शे तु प्राण-प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल चैतन्म मुि टकमा जाता शं । इव भुटद्रका को टकवी बीलगल क व्मत्रि शाथ की टकवी बी उॊ गरी भं धायण कय वकते शं । मशॊ भुटद्रका कबी टकवी बी स्स्थती भं अऩत्रलत्र नशीॊ ेशोती। इव प्तरए कबी भुटद्रका को उतायने की आलश्मिा नशीॊ शं । इवे धायण कयने वे व्मत्रि की वभस्माओॊ का वभाधानशोने रगता शं । धायणकताल को जीलन भं वपरता प्राप्तद्ऱ एलॊ उन्नप्तत क नमे भागल प्रवस्त शोते यशते शं औय जीलन भं ेवबी प्रकाय की प्तवत्रद्धमाॊ बी ळीध्र प्राद्ऱ शोती शं । भूल्म भात्र- 6400/-(नोि: इव भुटद्रका को धायण कयने वे भॊगर ग्रश का कोई फुया प्रबाल वाधक ऩय नशीॊ शोता शं ।)वललप्तवत्रद्धदामक भुटद्रका क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी क प्तरमे शे तु वम्ऩक कयं । े े ल ऩप्तत-ऩत्नी भं करश प्तनलायण शे तुमटद ऩरयलायं भं वुख-वुत्रलधा क वभस्त वाधान शोते शुए बी छोिी-छोिी फातो भं ऩप्तत-ऩत्नी क त्रफच भे करश शोता यशता शं , े ेतो घय क स्जतने वदस्म शो उन वफक नाभ वे गुरुत्ल कामालरत द्राया ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे भॊत्र प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत े ेऩूणल चैतन्म मुि लळीकयण कलच एलॊ गृश करश नाळक टिब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भं त्रफना टकवी ऩूजा, त्रलप्तध-त्रलधान वे आऩ त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । मटद आऩ भॊत्र प्तवद्ध ऩप्तत लळीकयण मा ऩत्नी लळीकयण एलॊ गृश करशनाळक टिब्फी फनलाना चाशते शं , तो वॊऩक आऩ कय वकते शं । ल 100 वे अप्तधक जैन मॊत्र शभाये मशाॊ जैन धभल क वबी प्रभुख, दरब एलॊ ळीघ्र प्रबालळारी मॊत्र ताम्र ऩत्र,प्तवरलय (चाॊदी) ओय गोल्ि (वोने) भे उऩरब्ध शं । े ु लशभाये मशाॊ वबी प्रकाय क मॊत्र कोऩय ताम्र ऩत्र, प्तवरलय (चाॊदी) ओय गोल्ि (वोने) भे फनलाए जाते शै । इवक अराला आऩकी े ेआलश्मकता अनुळाय आऩक द्राया प्राद्ऱ (प्तचत्र, मॊत्र, टिज़ाईन) क अनुरुऩ मॊत्र बी फनलाए जाते शै . गुरुत्ल कामालरम द्राया े ेउऩरब्ध कयामे गमे वबी मॊत्र अखॊटित एलॊ 22 गेज ळुद्ध कोऩय(ताम्र ऩत्र)- 99.99 िच ळुद्ध प्तवरलय (चाॊदी) एलॊ 22 कये ि ेगोल्ि (वोने) भे फनलाए जाते शै । मॊत्र क त्रलऴम भे अप्तधक जानकायी क प्तरमे शे तु वम्ऩक कयं । े े ल GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785, Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
  • 30. 30 नलम्फय 2012 शोगा रक्ष्भी का प्तचस्थामी प्तनलाव तीन दरब वाभग्रीमं वे ु ल  प्तचॊतन जोळीशत्था जोिी्  शत्थाजोिी का त्रलळेऴ प्रमोग ताॊत्रत्रको द्धाया तॊत्र टक्रमाओॊ भं टकमा जाता शै , शत्थाजोिी ळीध्र प्रबाली एलॊ शत्था जोिी प्रकृ प्तत की अनभोर दे नं भं वे एक चभत्कायी लस्तु शोने की कायण शी त्रलप्तबन्न तॊत्र ळास्त्रशं , शत्था जोिी अप्तत दरलब लस्तु भानी जाप्तत शं क्मोकी ु भं शत्थाजोिी क अनेक उऩमोग फतामे गमे शै । ेमश आवानी वे प्राद्ऱ नशीॊ शोती, शत्था जोिी एक त्रलरुऩा  त्रलद्रानं का कथन शं की स्जव भनुष्म क ऩाव अवरी ेनाभक ऩौधे की टकवी-टकवी जि भं ऩामी जाता शं , वबी प्तवद्ध शत्थाजोिी शोती शै , उवका बाग्म टदन दोगुनी-जिं भं नशीॊ ऩामी जाती। शत्थाजोिी का आकाय शभाये यात चौगुनी तेजी वे चभकता दे खने प्तभरता शं !दोनं शाथं क वभान शोता शं , शत्थाजोिी भं दोनो शाथ े  एवी भान्मता शं की स्जव व्मत्रि क ऩाव शत्थाजोिी ेनीॊचे वे आऩव भं जुिे़ शुले प्रप्ततत शं कई-कई शत्थाजोिी शोती शं उवक स्खराप टकमे गमे वबी झुठे आयोऩ, ेका उऩयी बाग बी आऩवे भं जुिा शोता शै , औय उवके ऴिमॊत्र, िोने-िोिक, ताॊत्रत्रक कभल इत्माटद प्तनष्पर शो ेउऩयी बाग भं ऩाॊच-ऩाॊच अॊगुरीमं क वभान आकृ प्ततमा े जाते शं , फिे ़ वे फिे ़ ळत्रु का प्रबाल उवक वभष स्षण ेटदखाई दे ती शं इव कायण इवे शत्थाजोिी क नाभ वे े शो जाता शं औय फिे ़ वे फिे ़ ताॊत्रत्रकं की तॊत्र टकमा मेजाना जाता शं । प्तनष्पर शो जाते शं । कछ जानकायं का तो मशाॊ तक ु स्जव प्रकाय शत्था जोिी दे खने भं अन्म दरब ु ल कशना शं मटद कछ त्रलळेऴ भॊत्रं वे प्तवद्ध टक गई ुप्तचज-लस्तुओॊ की तुरनाभं अद्भत एलॊ फेजोि प्रप्ततत शोती ु शत्थाजोिी को मटद व्मत्रि अऩने ऩाव यखता शं तोशं ठीक उवी प्रकाय एक प्राभास्णक एलॊ अप्तबभॊत्रत्रत मा उवका फिे ़ वे फिा ळत्रु बी उवक आगे नतभस्त्क शो ेप्राण-प्रप्ततत्रद्षत शत्था जोिी क आद्ळमलजनक प्रबालं की े जाता शं ।तुरना टकवी औय प्तचज-लस्तुओॊ वे नशीॊ शो वकती शं ।  मटद टकवी व्मत्रि क उऩय उवक त्रलयोप्तध मा ळत्रुओॊ ने े ेइवीप्तरमे तो कई वदीॊमं वे भॊत्र, तॊत्र आटद त्रलद्या भं झुठे आयोऩ रगाकय कोिल -कचशयी, भुकदभं इत्माटद भंशत्थाजोिी अऩना एक भशत्लऩूणल स्थान यखती शै । पवा टदमा शो तो शत्थाजोिी क प्रबाल वे उवे भुकदभे ॊ े शत्थाजोिी त्रलप्तबन्न ताॊत्रत्रक प्रमोगं भं काभ आती भं त्रलजम की प्राप्तद्ऱ शोती शं औय उवक ळत्रु लळीबूत ेशं , जानकाय त्रलद्रानं का कथन शं की एक प्तवद्ध शत्थाजोिी शो जाते शं ।को कलर अऩने वाथ यखने भात्र वे शी छोिे -फिे ़ अनेक े  शत्थाजोिी को ऩाव यखने वे याजकीम अथालत वयकायीवॊकिं का स्लत् शी प्तनलायण शो जाता शं । शत्था जोिी कामो वे जुिे़ छोिे -फिे ़ वबी अप्तधकायी व्मिी केको अऩने ऩाव यखने वे आकस्स्भक दघिना आटद का ु ल लळीबूत शो जाते शं । मटद कोई वयकायी अप्तधकायीबम नशीॊ वताता। एवा भाना जाता शं की स्जव भनुष्म त्रफना टकवी कायण आऩको अनामाव शी अऩने ऩद लक ऩाव भं शत्था जोिी शोती शं उवक उऩय कोई िोने - े े वत्ता का पामदा उठाकय आऩको ऩये ळान कय यशा शोिोिक, ताॊत्रत्रक प्रमोग आटद का प्रबाल नशीॊ शोता शं ! े मा कद्श दे यशे शो, तो इव भं जयाबीॊ वॊदेश नशीॊ शं टक जानकायं क भतानुवाय शत्थाजोिी का प्राप्तद्ऱ स्थान े शत्थाजोिी आऩक प्तरमे याभफाण औऴप्तध क रुऩ भं े े भुख्मत् बायत, ऩाटकस्तान, ईयान, इयाक, फ्राॊव, जभलनी, वात्रफत शो वकती शं ! क्मोटक शत्थाजोिी एक अनुबूत एप्तळमाई भशाद्रीऩ क प्तनकितभ षेत्रं भं ऩाई जाती शै । े एलॊ टदव्म लस्तु शं ।
  • 31. 31 नलम्फय 2012 प्तवद्ध की शुई शाथाजोिी को चाॊदी मा स्िीर की टिब्फी प्तवॊमाय प्तवॊगी् भं रंग, इरामची ल प्तवन्दय क वाथ शी टिब्फी को ू े प्तवॊमाय प्तवॊगी को प्तवमाय प्तवॊघी, गीदिप्तवॊगी बी फॊध कय क यखना चाटशए। दै प्तनक ऩूजन क वभम उव े े कशते शं । जम्फुक अथालत लन्म-ऩळु प्तवमाय क प्तवय ऩय े टिब्फी को खोरकय, धूऩ-दीऩ टदखाकय उवे फॊधकय दे ना एक प्रकाय की गाॊठ शोती शं उवे शी प्तवॊमाय प्तवॊगी कशा चाटशए। जाता शै । शाराॊकी मश गाॊठ शय प्तवमाय क प्तवय ऩय नशीॊ े शाथाजोिी घय भं शोने वे ऩप्तत-ऩत्नी भं आऩवी प्रेभ शोती टकवी-टकवी प्तवमाय क प्तवय ऩय शी ऩाई जाती शं । े फढ़ता शं ल दाॊऩत्म वुख भं लृत्रद्ध शोती शं । जीलन के मश फादाभी यॊ ग की भुरामभ फारं वे ढॊ की शोती शं , इवके प्रत्मेक षेत्र भं वपरता शे तु शाथाजोिी अचूक उऩाम फीच भं एक छोिा वा वीॊग उऩय की औय उठा शुला शोता प्तवद्ध शो वकती शै । स्जव घय भं ऩूणल त्रलप्तध-त्रलधान वे शं । कछ जानकायं का कथन शं की लन्म-जाप्तत क रोग ु े अप्तबभॊत्रत्रत मा प्तवद्ध की गई शाथाजोिी का ऩूजन शोता इव तयश क प्तवमाय को खोजते शं उवे ढू ॊ ढकय उवे भायकय े शै , उव घय क वदस्म वबी प्रकाय की ऩये ळानीमं वे े प्तवमाय प्तवॊगी प्राद्ऱ कयते शं , रेटकन कछ लन्म-जाप्तत क ु े वुयस्षत यशते शं , ऩरयलाय की आप्तथलक स्स्थती टदन रोग कलर भये शुले प्तवमाय क प्तवय वे शी प्तवॊगी प्तनकारते े े प्रप्ततटदन उन्नत शोती जाती शं औय व्मत्रि श्री शै । रेटकन कछ रोगं का भानना शं की जीत्रलत प्तवमाय क ु े वम्ऩन्न फना यशता शै । प्तवय वे प्तवमाय प्तवॊगी प्तनकार रेते शं औय कछ अॊतयार ु प्तवद्ध शाथाजोिी को कोई बी व्मत्रि चाशं लश स्त्री शो क फाद उवक प्तवय ऩय ऩय ऩुन् प्तवमाय प्तवॊगी प्तनकर े े मा ऩुरूऴ चाशे टकवी धभल मा लणल का शो लश वयरता आती शं , इन दोनं भत भं त्रलयोधाबाव दे खने को प्तभरता वे ऩूजन कय वकते शं । शाथाजोिी का ऩूजन कयने शं । लारे व्मत्रिमं का व्मत्रित्ल एलॊ प्रबाल अन्म व्मत्रि रेटकन प्तवॊमाय प्तवॊगी त्रलळेऴ रुऩ वे ऩळु तॊत्र ळास्त्र की अऩेषा प्तनस्द्ळत रुऩ वे अत्माप्तधक प्रबालळारी भं फशुउऩमोगी लस्तु भानी जाती शं । क्मोकी प्तवमायप्तवॊगी शोता शं । शाथाजोिी क त्रलळेऴ प्रमोगं वे ऩूजन कताल े की गाठं को तॊत्र ळास्त्र भं अदबुत ळत्रिळारी एलॊ ु व्मत्रि भं त्रलरषण वम्भोशन ळत्रि जाग्रत शो वकती प्रबालळारी भाना जाता शै । शं !  एक अप्तबभॊत्रत्रत मा प्तवद्ध टक शुई प्तवमाय प्तवॊगी वे प्तवद्ध शाथाजोिी व्मत्रि को बूत-प्रेत, भायण-उच्चािन, वम्भोशन, लळीकयण, धन-वॊऩत्रत्त की प्राप्तद्ऱ एलॊ लृत्रद्ध काभण-िू भण इत्माटद उऩद्रलं वे यषा शोती शं । व्मत्रि कयने लारी त्रलरषण ळत्रि शोती शं । की धन-वॊऩत्रत्त भं प्तनस्द्ळत रुऩ वे लृत्रद्ध शोने रगती शं ।  मटद मश टकवी प्रकाय वे मश दरब लस्तु प्राद्ऱ शो ु ल शत्थाजोिी का त्रलप्तधलत ऩूजन कयने वे लाणी क दोऴ े जामे तो उवे टकवी जानकाय मा त्रलद्रान वे प्तवद्ध औय योग नद्श शोते शं । शत्थाजोिी को प्ततजोयी भं यखने कयलारे। प्तवमाय प्तवॊगी प्तवद्र शोने ऩय इवे चाॊदी मा वे व्मलवाम स्लत् फढने रगता शं । स्िीर की टिब्फी भं प्तवॊदय बयकय यखदे । प्तवमाय प्तवॊगी ू कछ त्रलद्रानं का तो मशाॊ तक कथन शं की शाथाजोिी ु क त्रलऴम भं त्रलद्रानो का भत शं की स्जव भनुष्म क े े क प्तनमप्तभत ऩूजन एलॊ दळलन वे व्मत्रि का वोमा े ऩाय भं प्तवमाय प्तवॊगी शोती शै उवे बत्रलष्म भं घटित बाग्म जाग जाता शं , औय उवक त्रफगिे ़ कामल जल्द शी े शोने लारी दघिना अथला ळुब घिनाओॊ की ऩूलल ु ल फनने रगते शै । इवकी ळत्रि को फढ़ाने क प्तरए े वूचना स्लप्न भं प्राद्ऱ शोती शै । रेटकन अनुबल भं शाथाजोिी क वाथ भं प्तवमायप्तवॊगी औय त्रफल्रीनार को े आमा शं की मश बत्रलष्म वूचन स्लप्न वबी को नशीॊ एक वाथ यखना चाटशए। आते शं टकवी-टकवी व्मत्रि को शी आते शं ।
  • 32. 32 नलम्फय 2012 स्जव घय भं प्तवमाय प्तवॊगी का ऩूजन शोता शं उव घय प्रकाय वे लश दोऴऩूणल शो तो अवरी शोने क फालजुद े भं भं वदं ल दे ली भशारक्ष्भी का लाव यशता शं , वभाज उवक फार नशीॊ फढ़ते। अत् प्तवमायप्तवॊगी का चमन े भं उवक भान-वम्भान भं लृत्रद्ध शोती शं उवका नाभ े ऩूणल वालधानी क वाथ कयं । े औय मळ चयं टदळाओॊ भं गूॊजता शं । शस्तजोिी के  प्तवमायप्तवॊगी क फार कबी कािने नशीॊ चाटशमे नाशीॊ े वभान शी प्तवमाय प्तवॊगी वे बी व्मत्रि क छोिे -फिे ़ े उववे टकवी प्रकाय की छे ि-छाि कयनी चाटशए। वकर त्रलघ्न एलॊ वॊकिं का नाळ शोता शं , एलॊ व्मत्रि प्तवमायप्तवॊगी क फार कािने, जरने षप्ततग्रस्त शोने वे े क उऩय शोने लारे बूत-प्रेत, जाद-िोना आदी प्रबालं वे े ू उवका ळुब प्रबाल वभाद्ऱ शोने रगता शं । यषा शोती शं औय लाद-त्रललाद इत्माटद भं त्रलजमश्री की त्रफल्री की नार प्राप्तद्ऱ शोती शं । त्रफल्री जफ फच्चे को जन्भ दे ती शं , तो फच्चं के कछ त्रलद्रानो का कथन शं की प्तवमाय प्तवॊगी क ऩूजन ु े वाथ-वाथ एक स्झल्री जेवा तयर ऩदाथल फाशय प्तनकरता एलॊ दळलन भात्र वे व्मत्रि को जीलन भं रक्ष्भी की शं , स्जवे लश फच्चे दे ने क फाद तुयॊत खा जाती शं । कछ े ु अऩाय कृ ऩा शो शोती। व्मत्रि क घय भं धनलऴाल शोने े जानकाय रोग मा लन्म-जाती क रोग इव त्रफल्री की े वभान व्मलवाम-नौकयी इत्माटद वे आप्तथलक राब की नार को त्रफल्री क खने वे ऩशरे शी लशाॊ वे शिा रेते शं । े प्राप्तद्ऱ शोती शं । प्तवमाय प्तवॊगी को व्मलामीक स्थान ऩय टपव उवे धूऩ भं वुखा कय उवे त्रलळेऴ प्रमोजनो वे घी यखने भात्र वे शी फॊध व्मलवाम क ऩुन् ळुरु शोने क े े एलॊ प्तवॊदय द्राया रेऩन टकमा जाता शं । त्रफल्री की इव ू मोग फनने रगते शं , भौजुदा व्मलवामे भं टदन स्झल्री को नार कशा जाता शं । जो त्रलळेऴ ताॊत्रत्रक प्रमोगं प्रप्ततटदन उन्नत्रत्त शोती यशती शं । अथालत रक्ष्भी फढ़ने भं फशुउऩमोगी प्तवद्ध शोती शं । क वाथ-वाथ स्थाई रक्ष्भी का प्तनलाव शोता शं । े प्तवमाय प्तवॊगी वे आकस्स्भक दघिना औय अवाध्म ु ल भॊत्र प्तवद्ध दरब वाभग्री ु ल योग वे बी वुयषा शोती शै । ऩरयलाय भं योग-ळोक का नाळ शोता शं , वबी वदस्मं को वतामु की प्राप्तद्ऱ शोती शत्था जोिी- Rs- 370, 550, 730, 1250, 1450 शं औय ऩायीलारयक जीलन वुखभम फना यशता शै । प्तवमाय प्तवॊगी- Rs- 370, 550, 730, 1250, 1450 क्मोटक प्तवमाय प्तवॊगी ळयीय क वुयषा कलच का काभ े त्रफल्री नार- Rs- 370, 550, 730, 1250, 1450 कयती शै । व्मत्रि को जाने-अॊजाने वकर बमं वे ळीघ्र कारी शल्दी:- 370, 550, 750, 1250, 1450, भुत्रि प्तभरती शै । प्तवमाय प्तवॊगी क त्रलळेऴ प्रमोगं वे े दस्षणालतॉ ळॊख- Rs- 550, 750, 1250, 1900 कभागल ऩय गमे ऩयस्त्री-ऩयऩुरुऴ क जार भं पवे टकवी ु े ॊ बी उम्र क स्त्री-ऩुरुऴ को वुधाया जा वकता शं । े भोप्तत ळॊख- Rs- 550, 750, 1250, 1900 प्तवमाय प्तवॊगी को प्तवॊदय भं यखना चाटशए, प्तवमायप्तवॊगी ू भामा जार- Rs- 251, 551, 751 को प्तवॊदय भं यखने वे उवक फार धीये -धीये फढ़ते शं । ू े इन्द्र जार- Rs- 251, 551, 751 एवी रोक भान्मता शं टक जैवे प्तवमायप्तवॊगी क फार े धन लृत्रद्ध शकीक वेि Rs-251(कारी शल्दी क वाथ Rs-550) े फढ़ते शं लैवे ऩरयलाय भं वुख-वभृत्रद्ध फढ़ने रगती शं । घोिे की नार- Rs.351, 551, 751 शय प्तवमायप्तवॊगी क फार फढ़ते शं , मशी उवकी ऩशचान े GURUTVA KARYALAY शं , नकरी मा फनालिी प्तवमायप्तवॊगी क फार नशीॊ फढ़ते। े Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785, मटद प्तवमायप्तवॊगी कशीॊ वी िू िी-पिी शो मा टकवी ू Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
  • 33. 33 नलम्फय 2012त्रलळेऴ उऩाम: ऩूजा-ऩाठ मा टकवी त्रलळेऴ त्रलप्तध-त्रलधान की आलश्मिा नशीॊ शोती शं । टदन भं एक फाय शी कलर े भॊत्र प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत शत्था जोिी, प्तवमाय प्तवॊगी औय धूऩ-अगयफत्रत्त कयने की आलश्मिा शं । त्रफल्री की नार मटद टकवी भनुष्म को वौबाग्म वे प्राद्ऱ शो जामे तो उवे टकवी चाॊदी मा स्िीर की टिब्फी *** त्रलळेऴ भॊतव्म: त्रलद्रानं क अनुबल भं आमा शं की े भे प्तवॊदय बयकय यख दं । ू मटद शाथाजोिी को आऩ अऩने ऩयीप्तचत टकवी त्रलद्रान, टपव उवे अऩने घय-दकान-व्मलवामीक स्थान इत्माटद ु ज्मोप्ततऴी मा टकवी अऩने प्तभत्र-रयश्तेदायकं टदखाना शो तो क ऩूजा स्थान, प्ततजोयी मा कव फोक्वॎ इत्माटद भं यख े ै शाथाजोिी को अऩने ऩूजा स्थान भं यखने वे ऩूलल मा दं । प्रप्ततटदन उवे धूऩ-अगयफत्रत्त टदखा कय टिब्फी को उवका ऩूजन कयने वे ऩशरे टदखारं , ऩूजन क ऩद्ळमात े फॊध कय दं । उि त्रलप्तध वे ऩूजन कयने ऩय व्मत्रि को नशीॊ टदखानी चाटशए उवे टकवी गोऩनीम स्थान ऩय प्तनयॊ तय वुख-वौबाग्म की प्राप्तद्ऱ शोती एलॊ भाॉ यखदे ना चाटशए, जशाॊ वे लश टकवी ऩरयप्तचत-अऩरयप्तचत मा भशारक्ष्भी का प्तनलाव शोता शं । मश एक अनुबूत छोिे फच्चे इत्माटद क शाथ भं न रगे। अप्तबभॊत्रत्रत मा े प्रमोग शं , इव प्रमोग वे शभं स्लमॊ एलॊ शभाये वाथ जुिे अऩने ऩूजा स्थान भं यखी शुई शाथाजोिी को जो आऩको अनेको फॊधु-फशनं को इव उऩाम वे त्रलळेऴ राब की पा़मदा कय यशी शो एवी शाथाजोिी को घयक अराला े प्राप्तद्ऱ शोती आमी शं । क्मोटक इव उऩाम भं दरब ु ल अन्म टकवी फशाय क व्मत्रि को नशीॊ टदखानी चाटशए, े वाभग्रीमं को एक फाय अप्तबभॊत्रत्रत मा प्राण-प्रप्ततत्रद्षत अन्मथा उवक ळुब प्रबाल भं कभीॊ आने रगती शं । े शो जाने ऩय व्मत्रि को टकवी प्रकाय क भॊत्र जाऩ, े  क्मा आऩक फच्चे कवॊगती क प्तळकाय शं ? े ु े  क्मा आऩक फच्चे आऩका कशना नशीॊ भान यशे शं ? े  क्मा आऩक फच्चे घय भं अळाॊप्तत ऩैदा कय यशे शं ? े ु ुघय ऩरयलाय भं ळाॊप्तत एलॊ फच्चे को कवॊगती वे छिाने शे तु फच्चे क नाभ वे गुरुत्ल कामालरत ेद्राया ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे भॊत्र प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म मुि लळीकयण कलच एलॊएव.एन.टिब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भं स्थात्रऩत कय अल्ऩ ऩूजा, त्रलप्तध-त्रलधान वे आऩत्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । मटद आऩ तो आऩ भॊत्र प्तवद्ध लळीकयण कलच एलॊ एव.एन.टिब्फीफनलाना चाशते शं , तो वॊऩक इव कय वकते शं । ल GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA), Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com
  • 34. 34 नलम्फय 2012 ऩाॊच मॊत्र जो अफ दरयद्रता औय धन की कभी को कयदं गे अरत्रलदा  श्रेमा.ऐव.जोळी दे लता कफेय जी का वफवे प्रबालळारी मॊत्र भाना जाता शं ुश्री मॊत्र इव मॊत्र क ऩूजन वे अषम धन कोऴ की प्राप्तद्ऱ शोती शं े "श्री मॊत्र" वफवे भशत्लऩूणल एलॊ ळत्रिळारी मॊत्र औय भनुष्म क प्तरए नलीन आम क स्रोत फनते शं । े ेशै । श्री मॊत्र की भटशभा वे वामद शी कोई व्मत्रि असात प्रप्ततटदन रक्ष्भीकफेय धन आकऴलण मॊत्र का ऩूजन एलॊ ुशोगा क्मोटक "श्री मॊत्र" को मॊत्र याज कशा जाता शै दळलन कयने वे व्मत्रि को जीलन भं धन औय ऐद्वमल कीक्मोटक मश अत्मन्त ळुब फ़रदमी मॊत्र शै । श्री मॊत्र कबी बी कभी नशीॊ शोती शै । त्रलद्रानं ने अऩने अनुबलंधनप्राप्तद्ऱ शे तु न कलर दवये मन्त्रो वे अप्तधक वे अप्तधक े ू भं ऩामा शं की जो भनुष्म अऩने गृशस्थ जीलन भं धन,राब दे ने भे वभथल शै एलॊ वॊवाय क शय व्मत्रि क प्तरए े े लैबल, ऐद्वमल, वुख-वभृत्रद्ध, व्माऩाय भं वपरता, त्रलदे ळपामदे भॊद वात्रफत शोता शै । ऩूणल प्राण-प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल राब, याजनीप्तत भं वपरता, नौकयी भं ऩदौस्न्न्त आटदचैतन्म मुि "श्री मॊत्र" स्जव व्मत्रि क घय भे शोता शै े की काभना यखता शं तो उवक प्तरए श्री रक्ष्भीकफेय धन े ुउवक प्तरमे "श्री मॊत्र" अत्मन्त फ़रदामी प्तवद्ध शोता शै े आकऴलण मॊत्र वललश्रऴ मॊत्र शं । भनुष्म को रक्ष्भीकफेय धन े ुउवक दळलन भात्र वे अन-प्तगनत राब एलॊ वुख की प्राप्तद्ऱ े आकऴलण मॊत्र क ऩूजन वे जीलन क वबी षेत्र भं वुख- े ेशोप्तत शै । वभृत्रद्ध एलॊ वौबाग्म की प्राद्ऱ शोने रगती शै । "श्री मॊत्र" भे वभाई अटद्रतीम एलॊ अद्रश्म ळत्रि मटद टकवी व्मत्रि को व्माऩाय भं मटद व्माऩाय भंभनुष्म की वभस्त ळुब इच्छाओॊ को ऩूया कयने भे ऩूणल ऩरयश्रभ एलॊ रगने वे कामल कयने ऩय बी अप्तधकवभथल शोप्तत शै । स्जस्वे उवका जीलन वे शताळा औय राब की प्राप्तद्ऱ नशीॊ शो यशी शो, व्माऩाय भॊदा चर यशाप्तनयाळा दय शोकय लश भनुष्म अवफ़रता वे वफ़रता टक ू शो मा फाय-फाय राब क स्थान ऩय शाप्तन शो यशी शो तो ेऔय प्तनयन्तय गप्तत कयने रगता शै एलॊ उवे जीलन भे उवे रक्ष्भीकफेय धन आकऴलण मॊत्र को अलश्म अऩने ुवभस्त बौप्ततक वुखो टक प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै । व्मलवामीक स्थान ऩय स्थात्रऩत कयना चाटशए। स्जववे "श्री मॊत्र" भनुष्म जीलन भं उत्ऩन्न शोने लारी व्माऩाय भं फाय-फाय शोने लारे घािे मा नुकवान वे ळीघ्रवभस्मा-फाधा एलॊ नकायात्भक उजाल को दय ू कय शी राब प्राद्ऱ शोने क मोग फनने रगते शं । । ेवकायत्भक उजाल का प्तनभालण कयने भे वभथल शै । "श्रीमॊत्र" की स्थाऩन वे घय मा व्माऩाय क स्थान ऩय े गणेळ रक्ष्भी मॊत्रस्थात्रऩत कयने वे लास्तु दोऴ म लास्तु वे वम्फस्न्धत प्राण-प्रप्ततत्रद्षत गणेळ रक्ष्भी मॊत्र को अऩने घय-ऩये ळाप्तन भे न्मुनता आप्तत शै ल वुख-वभृत्रद्ध, ळाॊप्तत एलॊ दकान-ओटपव-पक्ियी ु ै भं ऩूजन स्थान, गल्रा माऐद्वमल टक प्रप्तद्ऱ शोती शै । स्पटिक का श्री मॊत्र वललश्रद्ष े अरभायी भं स्थात्रऩत कयने व्माऩाय भं त्रलळेऴ राब प्राद्ऱभाना जाता शं । शोता शं । मॊत्र क प्रबाल वे बाग्म भं उन्नप्तत, भान- े प्रप्ततद्षा एलॊ व्माऩय भं लृत्रद्ध शोती शं एलॊ आप्तथलक स्स्थभंरक्ष्भीकफेय धन आकऴलण मॊत्र ु वुधाय शोता शं । गणेळ रक्ष्भी मॊत्र को स्थात्रऩत कयने वे श्रीमॊत्र को वभस्त प्रकाय क श्रीमॊत्रं भं वललश्रद्ष े े बगलान गणेळ औय दे ली रक्ष्भी का वॊमुि आळीलालदभाना गमा शै औय कफेय मॊत्र को दे लताओॊ भं धन क ु े प्राद्ऱ शोता शं । श्री गणेळ रक्ष्भी मॊत्र क प्तनमप्तभत ऩूजन े
  • 35. 35 नलम्फय 2012एलॊ दळलन वे व्मत्रि क वकर त्रलध्नं एलॊ द्ख े ु कफेय मॊत्र धन अप्तधऩप्तत धनेळ कफेय का मॊत्र शै , ु ुदरयद्रताका नाळ शोता शं । स्जव प्रकाय बगलान गणेळ के इव प्तरमे कफेय मॊत्र क प्रबाल वे मषयाज कफेय प्रवन्न ु े ुनाभ स्भयण औय दळलन भात्र वे व्मत्रि क वकर त्रलघ्नं, े शोकय अतुर वम्ऩत्रत्त का लयदान दे ते शं ।वॊकि, आटद फाधाओॊ का स्लत् शी नाळ शोता शं , उवी धभल ळास्त्रं भं लस्णलत शं रॊकाप्तधऩप्तत यालण नेप्रकाय दे ली रक्ष्भी क स्भयण औय दळलन भात्र वे व्मत्रि े बगलान भशादे ल वे कफेय मॊत्र प्राद्ऱ कय उवका त्रलप्तध- ुका दबालग्म वौबाग्म भं फदर जाता शं उवक वभस्त ु े त्रलधान वे ऩूजन टकमा था, मशी कायण शं की यालण नंदख् दरयद्रता का स्लत् शी नाळ शोता शं । गणेळ रक्ष्भी ु दे लाप्तधयाज कफेय को प्रळन्न कय प्तरमा था स्जवक ु ेमॊत्र क ऩूजन वे ऩरयलाय भं वुख-ळाॊप्तत एलॊ वभृत्रद्ध का े कायण शी उवका याज्म ऩूणल रुऩ वे वभृद्ध औयआगभन शोने रगता शं मटश कायण शं गणेळ रक्ष्भी मॊत्र लैबलळारी था। कफेय मॊत्र क प्रताऩ वे शी यालणने ऩूयी ु ेकी भटशभा अऩयॊ ऩाय शं । रॊका वोने की फनाई थी। इव प्तरए धन-वॊऩत्रत्तकी काभना कयने लारे भनुष्म को कफेय मॊत्र का ऩूजन ुकनकधाया मॊत्र अलश्म कयना चाटशए। रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु उयोि मॊत्र क अराला अन्म मॊत्र े आज क बौप्ततक मुग भं शय व्मत्रि अप्ततळीघ्र े बी त्रलळेऴ प्रबालळारी शोते शं । स्जव मॊत्रं का मशाॊवभृद्ध फनना चाशता शं । कनकधाया मॊत्र टक ऩूजा अचलना वभालेळ नशीॊ टकमा गमा शं अत् उवकी भशत्लता काकयने वे व्मत्रि क जन्भं जन्भ क ऋण औय दरयद्रता े े कभ शोना मा लश कभ प्रबाली शं एवा त्रफल्कर नशीॊ शं , ुवे ळीघ्र भुत्रि प्तभरती शं । मॊत्र क प्रबाल वे व्माऩाय भं े कलर मशाॊ वभम क अबाल भं एलॊ ऩाठको क ळीघ्र े े ेउन्नप्तत शोती शं , फेयोजगाय को योजगाय प्राप्तद्ऱ शोती शं । भागलदळलन शे तु कलर अनुबूत मॊत्रं का वभालेळ टकमा ेकनकधाया मॊत्र अत्मॊत दरब मॊत्रो भं वे एक मॊत्र शं ु ल गमा शं ।स्जवे भाॊ रक्ष्भी टक प्राप्तद्ऱ शे तु अचूक प्रबाला ळारी भाना त्रलळेऴ वुझाल:गमा शं । कनकधाया मॊत्र को त्रलद्रानो ने स्लमॊप्तवद्ध तथा रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु गुरुत्ल कामलरम भं उऩरब्ध भॊत्र प्तवद्धवबी प्रकाय क ऐद्वमल प्रदान कयने भं वभथल भाना शं । े प्राण-प्रप्ततत्रद्षत आकस्स्भक धन प्राप्तद्ऱ मॊत्र, वशस्त्राषी रक्ष्भी आफद्ध मॊत्र, अद्श रक्ष्भी मॊत्र, धनदा मॊत्र इत्मादीकफेय मॊत्र ु त्रलळेऴ मॊत्र एलॊ जैन मॊत्रं भं श्री ऩद्मालती मॊत्र, श्री आज क दौय भं शय व्मत्रि की चाशता टक उवक े े रक्ष्भीकय मॊत्र इत्माटद बी अत्माप्तधक प्रबालळारी शंऩाव अऩाय धन-वॊऩत्रत्त शो। उवक ऩाय दप्तनमा का शय े ु स्जवका अद्भत प्रबाल एलॊ त्रलळेऴताओॊ क फाये भं भैने ु ेऐळो-आयाभ भौजुद शो, उवे कबी टकवी चीज की कभी “ऩयॊ भ ऩूज्म गुरुदे ल श्री नलप्तनत बाई जोळीजी” वे सातन शो। एवे रोगो क प्तरमे कफेय मॊत्र एक प्रकाय वे े ु टकमा शं एलॊ स्लमॊ अऩने जीलन भं अनुबल टकमा शं ।चभत्कायी मॊत्र शै कफेय मॊत्र। कफेय मॊत्र क ऩूजन वे ु ु े मटद आऩ धन प्राप्तद्ऱ शे तु मा अन्म टकवी मॊत्र वेस्लणल राब, यत्न राब, ऩैतक वम्ऩत्ती एलॊ गिे शुए धन ृ वॊफॊप्तधत जानकायी प्राद्ऱ कयना चाशते शो मा आऩकेवे राब प्राप्तद्ऱ टक काभना कयने लारे व्मत्रि क प्तरमे े बीतय मॊत्रं क त्रलऴम भं टकवी प्रकाय टक कोई स्जसावा ेकफेय मॊत्र अत्मन्त वपरता दामक शोता शं । एवा ु शो तो आऩ प्तनवॊकोच गुरुत्ल कामालरम भं वॊऩक कय लळास्त्रोि लचन शं । कफेय मॊत्र क ऩूजन वे एकाप्तधक स्त्रोत्र ु े अग्रीभ वभम रेकय “गुरुदे ल श्री नलप्तनत बाई जोळीजी”वे धन का प्राद्ऱ शोकय धन वॊचम शोता शं । वे वीधे वॊऩक मा पोन ऩय फात कय वकते शं । ल
  • 36. 36 नलम्फय 2012 धन प्राप्तद्ऱ शे तु वात दरब रक्ष्भी वाधनाएॊ ु ल  प्तचॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी, ऩॊ.श्री बगलानदाव त्रत्रलेदी जी,धन रक्ष्भी वाधनावाधना शे तु वाभग्री:-भारा: कभरगट्िे की मा स्पटिक कीटदळा: उत्तयआवन: ऩीरालस्त्र: ऩीराप्रवाद: दध वे फने प्रवाद का बोग रगामे ूभॊत्र:– ॐ श्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ श्रीॊ रक्ष्भी आगच्छ आगच्छ भभभॊदे प्ततद्ष प्ततद्ष स्लाशा || Om Shreem Shreem Kleem Shreem Lakshmi Aagachchha Aagachchha Mamamande Tishtha Tishtha Swahaत्रलप्तध:–  मश वाधना टकवी बी ळुक्रलाय को ळुरू टक जा वकती शं , उि भॊत्र का 11 भारा जऩ 43 टदन तक कयने वे भॊत्र प्तवद्ध शोता शै , रेटकन मटद अषम तृतीमा, धन तेयव औय दीऩालरी आदी ळुब भुशूतल शोत तो इवे 21 टदन कयक प्तवद्ध कय वकते शं । े  वाधना शे तु वॊध्मा 7 फजे वे यात 10 फजे तक का वभम श्रेद्ष शोता शं । मटद वभम क अनुकरता नशो तो अऩनी वुत्रलधानुवाय वभम चून े ू वकते शं ।  ऩूजन क वभम ळुद्ध घी का टदऩक जरामे जो वाधना ऩूणल शोने तक जरता यशे औय वुगॊप्तधत अगयलती जरामे े यखे।  दे ली रक्ष्भी जी को बोग भं खीय मा घय भं फनी प्तभठाई का बोग रगामे।  श्री गणेळ जी औय अऩने गुरुदे ल का स्भयण कय वाधना भं वपरता की काभना कयते शुले वाधना कयं ।  वाधना की वभाप्तद्ऱ लारे टदन भॊत्र का 11 भारा अथालत(1188) फाय शलन कयं , शलन भं घी की आशुती दे । मटद टकवी कायण वे आशुप्तत दे ने भं अवभथल शो तो आशुप्तत की वॊख्मा वे दोगुना भॊत्रजाऩ वम्प्ऩन कय वकते शं ।  इव रक्ष्भी वाधना क प्रबाल वे व्मत्रि क ऩाव टकवी ना टकवी भाध्मभ वे धन आने रगता शं । मश वॊबल नशीॊ े े की इव वाधना क फाद बी व्मत्रि प्तनधलन यशं । े
  • 37. 37 नलम्फय 2012आप्तथलक राब एलॊ कामलप्तवत्रद्ध शे तु रक्ष्भी भॊत्र वाधनावाधना शे तु वाभग्री:भारा: स्पटिक कीटदळा: उत्तय मा ऩूललआवन: ऩीरालस्त्र: वफ़द ेप्रवाद: परभॊत्र: ॐ ऐॊ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ शॊ वौ जगत्प्रवूत्मै नभ्। Om Aim Hreem Shreem Kleem Ham Sou Jagatprasootyai Namahत्रलप्तध:  प्रात्कार स्नानइत्माटद वे प्तनलृत्त शोकय स्लच्छ लस्त्र धायण कय ऩीरे आवन ऩय फैठ जामे। रक्ष्भीजी क प्तचत्र मा भूप्ततल को एक रकिी क े े चौकी ऩय यखदे ।  रक्ष्भीजी को धूऩ-दीऩ इत्माटद वे त्रलप्तधलत ऩूजन कयं , वाधन कार भं धूऩ-दीऩ चारु यखं। ऩीरे मा स्लेत पर रक्ष्भीजी को अत्रऩलत कयं । ू मटद वॊबल शो तो एक पर बी रक्ष्भीजी को अत्रऩलत कयं ।  टपय उऩयोि भॊत्र की 10 मा 20 भारा जाऩ कयं । भॊत्र की प्तवत्रद्ध शे तु कर 25000 जाऩ कयं । ु  भॊत्र जाऩ ऩूणल शोने क ऩद्ळमात प्रप्ततटदन 1 भारा जऩ जये । इव वाधना को कयने वे वाधक को धनराब शोता शं े औय इस्च्छत कामल भं वपरता प्राद्ऱ शोप्तत शं ( मटद अनुकरता शोतो प्रप्ततटदन 1000, 3000 मा 5000 जाऩ बी कय ू वकते शं ।  जाऩ स्जतना अप्तधक शोगा उतना अप्तधक राब प्तभरेगा। भॊत्र प्तवत्रद्ध 25000 जाऩ ऩूणल शोने क ऩद्ळमात प्रप्ततटदन े प्तनमभ वे एक प्तनस्द्ळत भात्रा भं शी जाऩ कयं , जऩ वॊख्मा को कभ मा अप्तधक कयने ऩय प्रप्ततकर ऩरयणाभ वॊबल ू शं ।  ग्रशण कार, दीऩालरी, शोरी, अक्ष्मतृप्ततमा आटद अफूझ भुशूतल भुशूतल ऩय अप्तधक पर प्राप्तद्ऱ शे तु एलॊ भॊत्र क प्रबाल े को फढ़ाने शे तु अप्तधक भात्रा भं जऩ टकमा जा वकता शं , क्मोटक, प्रप्ततटदन टकमे जायशे भॊत्र जऩ टक अऩेषा इन अलवयं ऩय प्रप्ततकर ऩरयणाभं की वॊबालना नशीॊ शोती इव प्तरमे इन अलवयं ऩय जऩ अप्तधक वॊख्मा भं टकमे जा ू वकते शं ।
  • 38. 38 नलम्फय 2012अनुबत भशारक्ष्भी भॊत्र वाधना ूवाधना शे तु वाभग्री:भारा: कभर गट्िे की मा स्पटिक कीटदळा: उत्तय मा ऩूललआवन: ऩीरालस्त्र: वफ़द ेप्रवाद: पर मा प्तभश्रीभॊत्र: ॐ श्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ कभरे कभरारमे प्रवीद प्रवीद श्रीॊ ह्रीॊ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्।Om Shreem Hreem ShreeM Kamale Kamalalaye Praseeda Praseeda Shreem Hreem Om Mahalakshmyai Namahत्रलप्तध:काप्ततलक ळुक्र प्रप्ततऩदा वे (मा ग्रशण कार, दीऩालरी, शोरी, अक्ष्मतृप्ततमा आटदटकवी ळुब भुशूत) वे भॊत्र जाऩ ळुरु कयं । औय एक भाव भं वला राख भॊत्र लजाऩ ऩूणल कयं । टपय उऩयोि भॊत्र की प्रप्ततटदन 1 भारा जऩ कयं । इव वाधनावे अत्माप्तधक धन राब शोने क मोग फनने रगते शं । रक्ष्भीजी को धूऩ -दीऩ ेइत्माटद वे त्रलप्तधलत ऩूजन कयं , वाधन क वभम भं धूऩ-दीऩ चारु यखं। ेवुगॊप्तधत पर रक्ष्भीजी को अत्रऩत कयं । मटद वॊबल शो तो एक पर मा प्तभश्री ू लबी रक्ष्भीजी को अत्रऩत कयं । भॊत्र जाऩ ऩूणल शोने वे ऩशरे शी वाधक को लआप्तथलक राब प्तभरना ळुरु शो जाता शं , इव भं जया बी वॊदेश नशीॊ शं । भॊत्र प्तवद्ध भूॊगा गणेळ भूॊगा गणेळ को त्रलध्नेद्वय औय प्तवत्रद्ध त्रलनामक क रूऩ भं जाना जाता शं । इव क ऩूजन वे जीलन भं वुख े े वौबाग्म भं लृत्रद्ध शोती शं ।यि वॊचाय को वॊतुप्तरत कयता शं । भस्स्तष्क को तीव्रता प्रदान कय व्मत्रि को चतुय फनाता शं । फाय-फाय शोने लारे गबलऩात वे फचाल शोता शं । भूॊगा गणेळ वे फुखाय, नऩुॊवकता , वस्न्नऩात औय चेचक जेवे योग भं राब प्राद्ऱ शोता शं । भूल्म Rs: 550 वे Rs: 8200 तक भॊगर मॊत्र वे ऋण भुत्रि भॊगर मॊत्र को जभीन-जामदाद क त्रललादो को शर कयने क काभ भं राब दे ता शं , इव क अप्ततरयि व्मत्रि को े े ेऋण भुत्रि शे तु भॊगर वाधना वे अप्तत ळीध्र राब प्राद्ऱ शोता शं । त्रललाश आटद भं भॊगरी जातकं क कल्माण क प्तरए े ेभॊगर मॊत्र की ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । प्राण प्रप्ततत्रद्षत भॊगर मॊत्र क ऩूजन वे बाग्मोदम, ळयीय भं खून की ेकभी, गबलऩात वे फचाल, फुखाय, चेचक, ऩागरऩन, वूजन औय घाल, मौन ळत्रि भं लृत्रद्ध, ळत्रु त्रलजम, तॊत्र भॊत्र क दद्श प्रबा, बूत-प्रेत े ुबम, लाशन दघिनाओॊ, शभरा, चोयी इत्मादी वे फचाल शोता शं । ु ल भूल्म भात्र Rs- 730
  • 39. 39 नलम्फय 2012ळीघ्र परदामी रक्ष्भी भॊत्र वाधनावाधना शे तु वाभग्री:भारा: स्पटिक कीटदळा: उत्तय मा ऩूललआवन: ऩीरालस्त्र: वफ़द ेभॊत्र: ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्भी भशारक्ष्भीॊ वलल काभ प्रदे वलल वौबाग्मदाप्तमनी अप्तबभॊत्र प्रमच्छ वलल वललगते वुरुऩे वललदजम त्रलभोप्तचनी ह्रीॊ व् स्लाशा। ु ल Om Hreem Shreem Lakshmi Mahalakshmim Sarv Kam Prade Sarv Soubhagyadaayinee Abhimantra Prayachchha Sarv Sarvagate Surupe Sarvdurjaya Vimochini Hreem Sah Swahaत्रलप्तध:प्रप्ततटदन प्तनमप्तभत वभम ऩय भॊत्र जऩ कयं । रकिी की चौकी ऩय रक्ष्भीजी का प्तचत्र स्थात्रऩत कय उवका धूऩ-दीऩइत्माटद वे त्रलप्तधलत ऩूजन कयं , वाधन क वभम भं धूऩ-दीऩ चारु यखं। वुगॊप्तधत पर रक्ष्भीजी को अत्रऩत कयं । 20 टदन े ू लभं एक राख जाऩ ऩूणल कयं । जाऩ ऩूणल शोने क ऩद्ळमात प्रप्ततटदन 1 भारा जाऩ कयं । इव वाधना वे वाधन की आप्तथलक ेस्स्थप्तत भं वुधाय शोने रगता शं , औय उवे भाॉ रक्ष्भी की कृ ऩा वे वुख-वॊऩत्रत्त औय लैबल की प्राप्तद्ऱ शोती शं । रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु कयं याप्तळ भॊत्र का जऩभेऴ : ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्भीनायामण नभ्।लृऴब : ॐ गौऩारामै उत्तय ध्लजाम नभ्।प्तभथुन : ॐ क्रीॊ कृ ष्णामै नभ्।कक : ॐ टशयण्मगबालमै अव्मि रूत्रऩणे नभ्। लप्तवॊश : ॐ क्रीॊ ब्रह्मणे जगदाधायामै नभ्।कन्मा : ॐ नभो प्रीॊ ऩीताम्फयामै नभ्।तुरा : ॐ तत्ल प्तनयॊ जनाम तायक याभामै नभ्।लृस्द्ळक : ॐ नायामणाम वुयप्तवॊशामै नभ्।धनु : ॐ श्रीॊ दे लकीकृ ष्णाम ऊध्ललऴॊतामै नभ्।भकय : ॐ श्रीॊ लत्वरामै नभ्।कब : श्रीॊ उऩेन्द्रामै अच्मुताम नभ्। ुॊभीन : ॐ क्रीॊ उद्‍ ताम उद्धारयणे नभ्। धृयाप्तळ भॊत्र क जाऩ कयने वे वबी प्रकाय क कामल भं ळीघ्र वपरता प्राद्ऱ शोती शं । याप्तळ भॊत्र क जाऩ वे व्मत्रि शय े े ेप्रकाय क वॊकि वे वुयस्षत यशता शं । व्मत्रि आप्तथलक रूऩ वे ऩूणल वॊऩन्न शो जाता शं । े
  • 40. 40 नलम्फय 2012प्तचॊता भस्ण रक्ष्भी वाधनावाधना शे तु वाभग्री:भारा: स्पटिक कीटदळा: ऩस्द्ळभआवन: ऩीरालस्त्र: वफ़द ेप्रवाद: दध वे फने प्रवाद का बोग रगामे ूभॊत्र: ॐ ह्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ रक्ष्भी भभ ग्रशभ ् धनऩूय प्तचता दय दय वलाशा ! ॊ ू ू Om Hreem Shreem Shreem, Shreem, Shreem Shreem Shreem Shreem Lakshmi Mam Graham Dhanpur Chinta Door Door Swahaत्रलप्तध:  श्री गणेळ जी औय अऩने गुरुदे ल का स्भयण कय वाधना भं वपरता की काभना कयते शुले वाधना कयं । ग्रशण कार, दीऩालरी, शोरी, अक्ष्मतृप्ततमा आटद अफूझ भुशूतल भं दे ली रक्ष्भी का धूऩ-टदऩ आटद वे ऩूजन कय इव भॊत्र को 108 फाय जऩ कयक प्तवद्ध कय रे। े  टपय जफ कोई भशत्लऩूणल व्मलवामीक कामल कयना शो तो तफ उि भॊत्र का ऩुन् 108 फाय जऩ कयक कामल स्थर े ऩय जाने वे व्माऩाय आटद भशत्लऩूणल कामं भं फढो़तयी एलॊ अत्माप्तधक राब की प्राप्तद्ऱ शोती शं ।  रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क एकाप्तधक स्तोत्र फनने रगंगे औय मटद कोई फेयोजगाय शो व्मत्रि को आभदनी का कोई वाधन े नजय नशीॊ आ यशा शो तो बी इव भॊत्र को प्तवद्ध कय वकता शं औय प्तवद्ध कयने क ऩद्ळमात 11 टदन 108 फाय े जऩ कयने वे व्मत्रि को उत्तभ योजगाय की प्राप्तद्ऱ क मोग फनने रगते शै । े  मटद ऩरयलाय भं कोई न कोई कभी यशती शं मा घय की प्रगप्तत मा उन्नप्तत क भागल प्रवस्त नशीॊ शो ऩायशे शो मा े अत्माप्तधक कजल वय ऩय चढ़ गमा शो तो बी इव भॊत्र को प्तवद्ध कय वकते शं ।  मटद अफूझ भुशूतल क आने वे ऩशरे इव भॊत्र को प्तवद्ध कयने की आलश्मिा मा इच्छा शो तो इव भॊत्र का जाऩ े 11 टदन तक 108 लाय शय योज जऩने वे बी भॊत्र प्तवद्ध शोता शै । यत्न एलॊ उऩयत्न शभाये मशाॊ वबी प्रकाय क यत्न एलॊ उऩयत्न व्माऩायी भूल्म ऩय उऩरब्ध शं । ज्मोप्ततऴ कामल वे जुिे़ फधु/फशन ल यत्न े व्मलवाम वे जुिे रोगो क प्तरमे त्रलळेऴ भूल्म ऩय यत्न ल अन्म वाभग्रीमा ल अन्म वुत्रलधाएॊ उऩरब्ध शं । े गुरुत्ल कामालरम वॊऩक : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785. ल
  • 41. 41 नलम्फय 2012ऋत्रद्ध-प्तवत्रद्ध प्रद ऩद्मालती वाधनावाधना शे तु वाभग्री: कवय, ेमॊत्र: भॊत्रप्तवद्ध प्राणप्रप्ततत्रद्षत श्री मॊत्रभारा: कभर गट्िे की मा स्पटिक कीटदळा: उत्तयआवन: वफ़द ेलस्त्र: वफ़द ेभॊत्र: ॐ ऩद्मालती ऩद्मनेत्रे रक्ष्भीदाप्तमनी वलल कामल प्तवत्रद्ध करय करय ॐ ह्रीॊ श्रीॊ ऩद्मालत्मै नभ्। Om Padmavati Padmanetre Lakshmidayinee Sarv Karya Siddhi Kari Kari Om Hreem Shreem Padmavatyai Namahत्रलप्तध:टकवी बी फुधलाय वे भॊत्र जाऩ प्रायॊ ब कयं । रकिी की चौकी ऩय वपद लस्त ेत्रफछा कय उव ऩय भॊत्रप्तवद्ध प्राणप्रप्ततत्रद्षत श्री मॊत्र को स्थात्रऩत कयं । मॊत्र को ळुद्धजर वे स्नान कयाक, उवऩय कवय रगामे, उवका धूऩ-दीऩ इत्माटद वे त्रलप्तधलत े ेऩूजन कयं , वाधन क वभम भं धूऩ-दीऩ चारु यखं। ेउि भॊत्र का 5 मा 11 टदनं भं वला राख जऩ कयने वे भॊत्र प्तवद्ध शो जाता शं ।भॊत्र जाऩ ऩूणल शोने ऩय कलायी कन्माओॊ को बोजन कयामे , मथा ळत्रि वाभर्थमल ुॊक अनुळाय बेि भं लस्त्र इत्माटद दं । टपय उव मॊत्र को अगरे टदन अऩने ेव्मलवामेक प्रप्ततद्षान मा प्ततजोयी, कळ फोक्व मा ऩूजा स्थान भं स्थात्रऩत कयदे इववे व्मलवामे भेभ त्रलत्रद्ध शोती शं , वभाज ैभं चायं औय वाधन का मध कीप्ततल चयं औय परने रगती शं । वाधन टदन प्रप्तत-टदन वभृद्ध शोता जाता शं । जफ तक ैमॊत्र वाधन क ऩाव यशे गा तफ-तफ उवे जीलन भं टकवी प्तचज की कभी नशीॊ शोगी। े ळादी वॊफॊप्तधत वभस्मा क्मा आऩक रिक-रिकी टक आऩकी ळादी भं अनालश्मक रूऩ वे त्रलरम्फ शो यशा शं मा उनक लैलाटशक े े े जीलन भं खुप्तळमाॊ कभ शोती जायशी शं औय वभस्मा अप्तधक फढती जायशी शं । एवी स्स्थती शोने ऩय अऩने रिक-रिकी टक किरी का अध्ममन अलश्म कयलारे औय उनक लैलाटशक वुख को कभ कयने े ॊु े लारे दोऴं क प्तनलायण क उऩामो क फाय भं त्रलस्ताय वे जनकायी प्राद्ऱ कयं । े े े GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
  • 42. 42 नलम्फय 2012रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु घॊिाकणल भशात्रलय वाधनावाधना शे तु वाभग्री: कवय, चॊदन, लावकऩ, गुराफ पूर े ेमॊत्र: श्री घॊिाकणल भशात्रलय मॊत्र अथला घॊिाकणल भशात्रलय ऩताका मॊत्र(मटद मॊत्रकी वाभर्थमलता न शो तो घॊिाकणल भशात्रलय जी का प्तचत्र स्थात्रऩत कयरं।)भारा: भूॊगे कीटदळा: उत्तयआवन: ऩीरालस्त्र: रार ऩीताॊफयभॊत्र: ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ ठॊ ॐ घण्िाकणल भशालीय रक्ष्भी ऩूयम ऩूयम वुख वौबाग्म करु करु स्लाशा। ु ु Om Hreem Shreem Kleem Thah Om Ghantakarna Mahaveer Lakshmi Pooray Pooray Sukha Soubhagya Kuru Kuru Swahaत्रलप्तध:मश वाधना मटद दीऩालरी भं धन त्रमोदळी वे आयॊ ब की जामे तो श्रेद्ष शं मटदअन्म कार भं ळुरु कयनी ऩिे ़तो टकवी बी गुरुलाय वे इवे आयॊ ब कय वकते शं ।धन त्रमोदळी (धनतेयव) क टदन उि भॊत्र की 40 भारा, रुऩ चतुदलळी (अथालत ेनयकशया चतुदलळी, नयका चौदव, कारी चतुदलळी, काऱीचौदव,) को 42, दीऩालरी केटदन 43, भारा जाऩ कयं । मटद अन्म टदन वे आयॊ ब कय यशे शो तो गुरुलाय को40, ळुक्र लाय को 42 औय ळप्तनलाय को 43 भारा भॊत्र जऩ कयं ।रकिी की चौकी ऩय वपद लस्त त्रफछा कय उव ऩय भॊत्रप्तवद्ध प्राणप्रप्ततत्रद्षत श्री घॊिाकणल भशात्रलय मॊत्र मा प्तचत्र को ेस्थात्रऩत कयं । ळुद्ध चॊदन औय कवय का वुखा प्तभश्रण े (लावकऩ) प्तछिक, मटद मश द्रव्म अप्राद्ऱ शो तो अद्शगॊध े ेप्तछिक(नोि:द्रव्म कलर वुखा प्तछिक श्री घॊिाकणल भशात्रलय क ऩूजन भं जर प्तभप्तश्रत घोर का प्रमोग न कयं ।), उवका े े े ेधूऩ-दीऩ (ळुद्ध चॊदन धूऩ का प्रमोग श्रेद्ष)इत्माटद वे त्रलप्तधलत ऩूजन कयं , वाधन क वभम भं धूऩ-दीऩ चारू यखं। ेवुगॊप्तधत दे ळी रार गुराफ पर क प्राद्ऱ शो जामे तो रगामे अन्मथा ऩीरा, वपद, गुराफी यॊ ग का गुराफ बी रागा वकते शं । ू े ेटपय श्री घॊिाकणल भशात्रलय क उऩयोि भॊत्र का ऩूणल श्रद्ध एलॊ प्तनद्षा वे जाऩ कयं । वाधना ऩूणल शोने ऩय श्री घॊिाकणल ेभशात्रलय प्रवन्न शोते शं ळीध्र शी वाधक को रक्ष्भी की प्राप्तद्ऱ क मोग फनने रगते शं । वाधना वॊऩन्न शोने ऩय प्रप्ततटदन ेउि भॊत्र टक 1 भारा जऩ कयं ।त्रलळेऴ नोि: श्री घॊिाकणल भशात्रलय का ऩूजन कयने लारे वाधको शे तु भावॊ -भटदया, कवॊग इत्माटद प्तनऴेध शं । अत् भाॊव- ुभछरी, ळयाफ इत्माटद का वेलन कयने लारे व्मत्रि कृ प्मा मश प्रमोग न कयं । अन्मथा श्री घॊिाकणल भशात्रलय क प्रकोऩ वे ेवाधना का प्रप्ततकर ऩरयणाभ वॊबल शं । श्री घॊिाकणल भशात्रलय इव कप्तरमुग भं ळीघ्र प्रवन्न शोने लारे वाषात दे ल शं , इव ूभे जयाबी वॊदेश नशीॊ शं । इव वाधना क ऩद्ळमात भावॊ -भटदया, ऩयस्त्री-ऩुरुऴ इत्माटदका वेलन कयने ऩय वाधन द्राया प्तवद्ध ेटकमा गमा भॊत्र प्रबाल शीन शो जाता शं ।
  • 43. 43 नलम्फय 2012 रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु वात दरब लस्तुएॊ ु ल  प्तचॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळीयि गुॊजा शोने ऩय उवे उताय कय अऩने ऩूजा वथान भं यखदं । गुॊजा एक दरब लनस्ऩप्तत का फीज शं । तॊत्र ळास्त्र ु ल  टकवी भशत्लऩूणल कामल उद्दे श्म की ऩूप्ततल शे तु भॊत्र प्तवद्धभं मश एक दरब एलॊ अत्मन्त प्रबालळारी लस्तु भानी ु ल यि गुॊजा क इक्कीव दानं को अऩने वाथ रेकय घय ेजाती शै । गुॊजा प्राम् वपदे , रार ल कारं यगॊ क फीज े वे फाशय प्तनकरे, कामल उद्दे श्म ऩूणल शोने ऩय उवे फशतेस्लरुऩ भं ऩामी जाती शं । त्रलप्तबन्न तॊत्र टक्रमाओॊ भं गुॊजा जर भं प्रलाटशत कय दं ।फीज क वाथ-वाथ गुॊजा क जि का बी त्रलळेऴ रुऩ वे े ेप्रमोग टकमा जाता शं । नाग कळय े गुॊजा फीजं का प्रमोग त्रलप्तबन्न कामल उद्दे श्म की नाग कवय अप्तत ऩत्रलत्र एलॊ उरलब लनस्ऩप्ततमं भं ेऩूप्ततल शे तु टकमा जाता शं । रार गुॊजा का प्रमोग त्रलळेऴ रुऩ वे एक भानी जाती शं । इवे नागकद्वय क नाभ वे बी े ेवे रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क प्तरमे टकमा जाता शं । रार गुॊजा ऩय े जाना जाता शं । धाप्तभलक भान्मताओॊ भं नाग कळय का ेएक कारे यॊ ग का छोिा त्रफॊद ू शोता शं । एवा भाना जाता शं स्थान प्रभुख लस्तुओॊ अग्रस्त शं । तॊत्र गॊथं भं नाग कळय ेकी यि गुॊजा वे घय भं वुख-वभृत्रद्ध की लृत्रद्ध तो शोती शी क त्रलप्तबन्न प्रमोगं का लणलन प्तभरता शं । धनप्राप्तद्ऱ एलॊ ेशं वाथ शी वाथ भं भाॊ भशारक्ष्भी की कृ ऩा बी घय ऩय वुख-वभृत्रद्ध शे तु बी नाग कळय का उऩमोग टकमा जाता शं । ेफनी यशती शं ।  चाॊदी (मटद उऩल्फध नशं को अन्म धातु ) की एक दीऩालरी क टदन यि गुॊजा क इक्कीव मा ग्मायश े े छोिी वी टिब्फी भं नागकळय को ळशद क वाथ े े दानं को गॊगा जर वे ऩत्रलत्र कयक ऩूजा स्थान े प्तभराकय ढ़क्कन रगाकय उवे फॊद कयदं । दीऩालरी की यखदे ना चाटशए। ऩूजा क ऩद्ळमात गुॊजा क दानं को े े यात्रत्र भं उवे ऩूजन क फाद भं प्ततजोयी भं यखदे । े अऩनी प्ततजोयी, कळफोक्व, गल्रे भं रार कऩिे भं ै अगरी दीलारी को उव टिब्फी को खोर कय नागकळय े फाॊधकय वे टदनं टदन ऩरयलाय की आप्तथलक वभृत्रद्ध औय ळशद को फदर दं । एकफाय टिब्फी यखदे ने क फाद े फढ़ती शं । उवे खोरे नशीॊ उवे फॊध शी यशने दे । भॊत्र द्राया प्तवद्ध यि गुॊजा क इक्कीव मा ग्मायश दानं े  धन-वभृत्रद्ध की प्राप्तद्ऱ शे तु एक नत्रलन ऩीरे लस्त्र भं को अऩने व्मलवाम मा ओटपव भं योकि यखने के नागकळय, वाफुत शल्दी, वुऩायी, एक ताॊफे का प्तवक्का, े वाथ भं यखने वे धन की कबी कभी नशीॊ शोती औय एक ऩाॊच मा दव का प्तवक्का, अषत को एक वाथ कय कळ फोक्व कबी खारी नशीॊ यशता, रक्ष्भी जी का ै क उवको कऩिे ़ भं फाॊध दं । टपव उवे धूऩ-दीऩ वे े आप्तळलालद फना यशता शं । ऩूजन कयक अऩनी प्ततजोयी भं यखकय प्रप्ततटदन ऩूजन े मटद भॊत्र प्तवद्ध टक शुई यि गुॊजा की भारा को कोई क वभम उवे धूऩ दं तो धनराब शोने रगेगा। े व्मत्रि गरे भं धायण कताल शं तो लश वललजन लळीकय  दीऩालरी की यात मा अन्म टकवी ळुब भुशूतल भं क वभान प्रबालळारी शोती शं । यि गुॊजा की भारा े नागकळय औय ऩाॊच प्तवक्कं को रेकय उवे ऩूजा स्थान े को कलर प्रमोग क वभम मा टकवी भशत्ल ऩूणल कामल े े ऩय यखदे टपय ऩूजन की वभाप्तद्ऱ क फाद उवे एक े मा व्मत्रि वे प्तभरते वभम शी धायण कयं , अनालश्म ऩीरे कऩिे ़ भं फाॊध कय अऩने व्मलवामीक प्रप्ततद्षान के
  • 44. 44 नलम्फय 2012 गल्रे, प्ततजोयी आटद धन यखने लारे स्थान ऩय यख त्रलद्रानं क भतानुळाय प्तवद्ध गोभप्तत चक्र वे त्रलप्तबन्न े दं । इव प्रमोग वे व्मत्रि को कबी धन की कभी नशीॊ भनोकाभनाएॊ वयरता वे ऩूणल की जावकती शं । यशे गी।  दीऩालरी की यात को ऩाॊच भॊत्र प्तवद्ध गोभप्तत चक्र को धन प्राप्तद्ऱ क प्तरए क प्तरए वोभलाय मुि ऩूस्णलभा क े े े स्थात्रऩत कयक उवका वाषात रक्ष्भी रुऩ भं ऩूजन े टदन प्तळलभॊटदय भं प्तळलप्तरॊग का कच्चे, दघ, दशी, ळशद ू कयने वे उवका त्रलप्तधलत ऩूजन कयने वे व्मत्रि को चीनी औय घी अथालत ऩॊचाभृत वे अप्तबऴेक कयं । टपय जीलन भं प्तनयॊ तय धन की प्राप्तद्ऱ शोती यशती शं । प्तळलप्तरग का गॊगाजर वे अप्तबऴेक कयं । तत्ऩद्ळमात  दीऩालरी क टदन 11 गोभती चक्र औय 11 ऩीरी े ऩाॊच त्रफल्लऩत्रं के वाथ भं ऩाॊच नागकळय े को कोटिमं दोनं को को एक ऩीरे कऩिे ऩय यख यखकय प्तळलप्तरॊग ऩय अत्रऩत कयं । मश टक्रमा प्रप्ततटदन अरगी ल कय ऩूजन कयं । टपय "ऐॊ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ" भॊत्र का ऩाॊच ऩूस्णलभा तक प्तनमप्तभत रुऩ वे कयं । अॊप्ततक टदन चढा़ए भारा कयक उवे कऩिे ़ भं फाॊधकय अऩने प्ततजोयी भं े गमे नागकळय एलॊ त्रफल्लऩत्रं भं वे एक त्रफल्लऩत्र एलॊ े स्थात्रऩत कयने वे धन राब की प्राप्तद्ऱ शोती शं । थोिा़ नागकळय घय लाऩव रे आमे उवे अऩनी प्ततजोयी े भं यखदं । इव प्रमोग वे अत्माप्तधक धनराब की प्राप्तद्ऱ ऩीरी कौटिमाॊ शोती शं । ऩौयास्णक कार वे शी कौटिमं को वौबाग्म कायक भानी जाती शं । दे ळ एलॊ त्रलदे ळ की त्रलप्तबन्न वभ्मताओॊगोभप्तत चक्र एलॊ प्राॊतो भं कौटिमं क त्रलप्तबन्न छोि-फिे प्रमोग शोते े गोभप्तत चक्र वभुद्र वे प्राद्ऱ शोने लारी दरब ु ल आमे शं । ऩूयातन कार भं जन प्तवक्को का चरन नशीॊ थालस्तुओॊ भं वे एक शं । क्मोटक मश आवानी वे प्राद्ऱ नशीॊ तफ रोग कौटिमं का नगद्दी क रुऩ भं प्रमोग कयते थे। ेशोता मश एक वपद यॊ गका गोराकाय टदखने भं वीऩ वे े रोग कौटिमं का आदान-प्रदान कयक प्तचज-चस्तु खरयदते ेप्तभरता-जुरता प्रप्ततत शोता शं । शाराॊकी कई गोभप्तत चक्र औय फेचते शं ।ऩूणत् वपद नशीॊ शोती उवक उऩय गेशुलं औय कारे यॊ ग ल े े धाप्तभलक भान्मता क अनुळाय वभुद्र वे प्राद्ऱ शोने ेकी ऩरती धायीमा शोती शं , जफ मश धायीमा घीव मा उवे लारे वबी लस्तुमे प्राम् रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु ऩूजन भं प्रमुिऩोप्तरव टकमा जाता शं तफ मश वपद यॊ ग का नजय आने े शोती शं । कौटिमाॊ बी वभुद्र वे प्राद्ऱ शोता शं औय ऩीरीरगता शं । इव क उऩय चक्र जैवे आकृ प्ततमा कृ दयप्तत औय े कौटिमाॊ रक्ष्भी की अप्तत त्रप्रम लस्तु शोने वे रक्ष्भी ऩूजनऩय ऩाई जाती शं इव प्तरए इवे गोभप्तत चक्र कशते शं । भं इवका त्रलळेऴ भशत्ल शं । धाप्तभलक भान्मता क अनुळाय वभुद्र वे प्राद्ऱ शोने े  दीऩालरी की यात भं 11 ऩीरी कौटिमं ऩूजा स्थानलारे वबी लस्तुमे प्राम् रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु ऩूजन भं प्रमुि भं यखदं ऩूजन की वभाप्तद्ऱ ऩय उवे अऩने प्ततजोयीशोती शं । गोभप्तत चक्र बी वभुद्र वे प्राद्ऱ शोता शं औय भं गशने इत्माटद क वाथ भं यखदं तो ऩरयलाय भं ेरक्ष्भी की त्रप्रम लस्तु शोने वे रक्ष्भी ऩूजन भं इवका गशने-जेलयात की लृत्रद्ध शोने रगती शं । अगरे लऴलत्रलळेऴ भशत्ल शं । ऩुन् दीऩालरी ऩूजन के वभम कौटिमं को ऩुयातन कार वे शी गोभप्तत चक्र को रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ फदरदे ।क अरागा अन्म तॊत्र प्रमोगो एलॊ काभना ऩूप्ततल शे तु बी े  दीऩालरी की यात भं 11 ऩीरी कौटिमं को अऩनेइवका त्रलळेऴ रुऩ वे प्रमोग टकमा जाता शं । क्मोटक घय मा व्मलवामीक स्थान भं प्ततजोयी भं यखने वे व्माऩाय औय धन की भं लृत्रद्ध शोती शं ।
  • 45. 45 नलम्फय 2012शकीक  स्जव बी घय भं रघु श्रीपर शोता शं लशाॊ वुख- वॊऩन्नता औय लैबल का लाव शोता शं । शकीक एक प्रकाय का उऩयत्न शं , स्जवका उऩमोग  मटद रघु श्रीपर को व्मलवामीक स्थान ऩय यखने वेत्रलप्तबन्न तॊत्र प्रमोग एलॊ धनप्राप्तद्ऱ शे तु त्रलळेऴ रुऩ वे टकमा व्माऩाय भं टदन प्रप्तत टदन उन्नप्तत शोती यशती शं ।जाता शं । मश एक अत्मॊत प्रबालळारी ऩत्थय भाना जाता शं ।  त्रलद्रानो का कथन शं की मटद टकवी व्मत्रि कोशकीक क प्रबालं क त्रलऴम कछ जानकाय त्रलद्रानो का े े ु वौबाग्म वे 11 रघु श्रीपर प्राद्ऱ शो जामे तो उवकेअनुबल शं की शकीक को मटद कोई व्मत्रि धायण नशीॊ जन्भं-जन्भ की दरयद्रता का अॊत शो जाता शं औयकयक कलर अऩने वाथ यखता शं तो बी लश अऩना े े मटद टकवी व्मत्रि क धय भं 1 रघु श्रीपर का ऩूजन ेचभत्कायी प्रबाल टदखा शी दे ता शं । शोता शं लशाॊ वे दख्, दरयद्रता कोवो दय यशती शं । ु ू दीऩालरी क टदन ऩूजान क वभम 21 शकीक को े े स्थाऩीत कयदे ऩूजन क ऩद्ळमात उवे दीऩालरी क े े कारी शल्दी टदन शी जभीन भं गाढ़दे ने वे व्मत्रि को प्तनयॊ तय धन स्जव प्रकाय वे शल्दी ऩीरे यॊ गी को शोती शं । उवी राब शोता यशता शं । प्रकाय एक दरब जाती की कारे यॊ गकी शल्दी बी ऩाई ु ल भनोकाभना ऩूप्ततल शे तु ग्मायश शकीक ऩत्थय को अऩने जाती शं । कारी शल्दी को कृ ष्ण शरयद्रा क नाभ वे जाना े ऩूजा स्थान ऩय यख कय अरगरे टदन उवे भॊटदय भं जाता शं । कारी शल्दी की वुगॊध कऩूय वे प्तभरती-जुरती चढाने वे भनोकाभना ळीघ्र ऩूणल शोती शं । शोती शं । कारी शल्दी को भुख्मत् तॊत्र टक्रमाओॊ एलॊ दीऩालरी क टदन शकीक भारा वे रक्ष्भी भॊत्र का एक े रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु एक दरलब औऴप्तध भानते शं । ु भारा जऩ कयक। भारा को धायण कयने वे दे ली े  स्जव बलन भं भॊत्र प्तवद्ध कारी शल्दी का ऩूजन कयने रक्ष्भी की शभंळा कृ ऩाद्रत्रद्श फनी यशती शं । भॊत्र: "ॐ वे बलन भं धन-वौबाग्म की स्लत् लृत्रद्ध शोने रगती शं । ह्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ रक्ष्भी लावुदेलाम नभ्।"  दीऩालरी क टदन मा अन्म टकवी ळुब भुशूतल भं कारी े रक्ष्भी जी क प्तचत्र को 27 शकीक ऩत्थय क उऩय े े शल्दी को धूऩ-दीऩ आटद वे ऩूजन कय क अऩनी े स्थात्रऩत कयने वे व्मत्रि को प्तनस्द्ळत रुऩ वे आप्तथलक प्ततजोयी मा धन यखने लारे स्थान ऩय यखने वे धन राब प्राद्ऱ शोता शं । का कबी अबाल नशीॊ यशता शं । रघु श्रीपर भॊत्र प्तवद्ध दरब वाभग्री ु ल रघु श्रीपर एक प्रकाय का छोिे स्लरुऩ का यि गुॊजा : 11 नॊग-Rs-111, 21 नॊग Rs-181नारयमर शोता शं । स्जवक ऊऩय नारयमर क वभान शी े े गोभप्तत चक्र: 11 नॊग-Rs-111, 21 नॊग Rs-181जिाएॊ शोती शं जो कयीफ एक ईच स्जतना फिा़ शोता शं । ऩीरी कौटिमाॊ: 11 नॊग-Rs-111, 21 नॊग Rs-181रघु श्रीपर को नारयमर का रघुरुऩ भाना जाता शं । रघु शकीक: 11 नॊग-Rs-111, 21 नॊग Rs-181श्रीपर का प्रमोग त्रलळेऴ रुऩ वे रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु टकमाजाता शं । क्मोटक रघु श्रीपर भाॊ भशारक्ष्भी का मश त्रप्रम रघु श्रीपर: 1 नॊग-Rs-111, 11 नॊग-Rs-1111पर भानाजाता शं औय एवी भान्मता शं की स्जवक ऩाव े नाग कळय: 11 ग्राभ, Rs-111 ेरघु श्रीपर शोता शं दे ली रक्ष्भी प्तनस्द्ळत रुऩ वे उव ऩय कारी शल्दी:- 370, 550, 750, 1250, 1450,कृ ऩा कयती शं । रघु श्रीपर क ऩूजन वे भाॊ रक्ष्भी स्खॊची े GURUTVA KARYALAY Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785,चरी आती शं । Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com .
  • 46. 46 नलम्फय 2012 वुख-स्भृत्रद्ध क प्तरमे जाने ऋण(कजल) कफ रे औय कफ दे े  प्तचॊतन जोळी आज क आधुप्तनक मुग भं ऋण अप्तभय-भध्मभ- े अथालत् धन क रेनदे न शे तु भॊगरलाय औय फुधलाय ब़िे ेगयील शय लगल टक शं । आज ज्मादातय व्मत्रि कजल के भशत्ल ऩूणल शं । भॊगरलाय को उधाय रेना अळुब शोता शंभक्कि जार भं उरझा शुआ शं । आज कोई व्मत्रि धन तथा फुधलाय को उधाय दे ना अळुब शोता शं ।उधाय दे कय योते शुले प्तभरता शं तो कोई धन रेकय ऩछता कजल रेने टक आलश्मकता प़ि जामे तो भॊगरलायते शुले आवानी वे प्तभरता शं । 10-20 को कबी कजल नशीॊ रेना चाटशमे।लऴल ऩशरे टकवी वे कजाल रेने क प्तरए े भॊगर मॊत्र भॊगरलाय को प्तरमे उधाय को चुकाने भंरयस्तेदय-प्तभत्र-वाशुकाय को ढे यं प्तभन्नतं ब़िी कटठनाई आती शं । कजल दे ने टककयनी शोती थीॊ ऩय अफ वभम फदर वे ऋण भुत्रि आलश्मकता प़ि जामे तो फुधलाय कोगमा शं गरी-गरी उधाय दे ने क प्तरमे े भॊगर मॊत्र को जभीन- कजल नशीॊ दे ना चाटशमे फुधलाय कोफंक लारे रोन/क्रटिि कािल दे ते टपयते े जामदाद के त्रललादो को शर टदमे गमे कजल को प्राद्ऱ कयने भंयशते शं । कयने क काभ भं राब दे ता शं , े कटठनाई आती शं । बयतीम ज्मोप्ततऴ भं कजल के इव क अप्ततरयि व्मत्रि को ऋण े मश ज्मोप्ततऴ का एक वयररेन-दे न वे वॊफॊधी इन वभस्माओॊ वे भुत्रि शे तु भॊगर वाधना वे अप्तत प्तनमभ शं जो वयरता वे माद यखा जादय यशने क उऩाम फतरामे शं । ज्मोप्ततऴ ू े ळीध्र राब प्राद्ऱ शोता शं । त्रललाश वकता शं औय दै प्तनक जीलन भं उऩमोगक त्रलळेऴ प्तनमभो को अऩना कय जीलन े आटद भं भॊगरी जातकं के टकमा जा वकता शं ।भं कजल वे वॊफॊप्तधत वभस्माओॊ को कल्माण क प्तरए भॊगर मॊत्र की े ज्मोप्ततऴ भत वे भॊगरलाय ऋणअऩने अनुकर फनामा जा वकता शं , ू चुकाने क प्तरए श्रेद्ष शं । फुधलाय धन े ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱव्मलवाम वे जुिे रोगो को व्मलवाम वे वॊचम(वेत्रलॊग) क वलल श्रेद्ष टदन शं । े शोता शं ।वॊफॊप्तधत रेनदे न तो योज कयने ऩिते फुधलाय को फंक भं धन जभा कयना, प्राण प्रप्ततत्रद्षत भॊगर मॊत्रशं । एवे रोग मटद ज्मोप्ततऴ क प्तवद्धाॊतो े टफ़क्व टिऩोजीि इत्माटद शे तु श्रेद्ष शं । क ऩूजन वे बाग्मोदम, ळयीय भं ेको अऩना ने धन वे वॊफॊप्तधतत रेन- मटद कजल रेने टक जरूयत शोतो खून की कभी, गबलऩात वे फचाल,दे न अच्छा शोता शं । भॊगरलाय, वूमल वॊक्राॊप्तत का टदन, लृत्रद्ध फुखाय, चेचक, ऩागरऩन, वूजन रेनदे न क फिे े बुगतान शे तु मोग, स्जव यत्रललाय को शस्त नषत्र शो, औय घाल, मौन ळत्रि भं लृत्रद्ध, ळत्रुवभम अलप्तध को ध्मान भं यखते शुले इन वॊमोग ऩय चाशे टकतनी शी ब़िी त्रलजम, तॊत्र भॊत्र क दद्श प्रबा, बूत- े ुअप्तग्रभ एलॊ ऩद्ळमात बुगतान टकमा जरूयत शो इन टदनं भं ऋण कबी नशीॊ प्रेत बम, लाशन दघिनाओॊ, शभरा, ु लजामे तो त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । रेना चाटशमे, ऋण रेना अगरे टदन चोयी इत्मादी वे फचाल शोता शं । ऩय िार दं ।रेन-दे न शे तु भुख्म प्तनमभ शं । भूल्म भात्र Rs- 730 मटद कजल दे ने टक जरूयत शोतो फुधलाय, कृ त्रत्तका, योटशणी, आद्राल, आद्ऴेऴा,ऋणे बौभे न ग्रशीमात, न दे मभ ् फुधलावये । उत्तयापाल्गुनी, उत्तयाऴाढ़ा, उत्तयाबाद्रऩद नषत्रं भं, बद्रा,ऋणच्छे दनभ ् बौभे कमालत,् वॊचमे वोभ नॊदने॥ ु व्मप्ततऩात औय अभालस्मा क वॊमोग ऩय टदमा गमा धन े
  • 47. 47 नलम्फय 2012कबी लाऩव प्राद्ऱ नशीॊ शोता मा धन प्राद्ऱ कयने भं इन प्तनमभं को अऩनाकय वाधायण व्मत्रि बी अवाधायणअत्माप्तधक कटठनाईमा आती शं । , धन प्राप्तद्ऱ शे तु कोिल - राब प्राद्ऱ कय वकता शं ।कळ, झग़िे इत्माटदक उऩयाॊत बी धान प्राद्ऱ नशीॊ शोता। े े मटद धन का कशीॊ प्तनलेळ (जभीन-जामदाद,शभने अऩने अनुबलो भं इव वॊमोग ऩय धन रेने औय ळेयभाकि, इन्स्मोयं व, वोना, चाॊटद, त्रलदे ळी भुद्रा, इत्मादी) ेधन दे ने लारे दोनो को ऩये ळानीमाॊ झेरते दे खा गमा शं । भं कयना शो तो भॊगरलाय औय फुधलाय क अप्ततरयि अन्म ेइव वॊमोग ऩय धन रेने लारे का धन टिकता नशीॊ एलॊ लायं का चुनाल कयं । इवक अप्ततरयि ऩुनललवु-स्लाप्तत- ेउस्की आप्तथलक स्स्थती धन चुकाने रामक नशीॊ यशजाती। भृगप्तळया-ये लती-प्तचत्रा-अनुयाधा-त्रलळाखा-ऩुष्म-श्रलण-धप्तनद्षा-उवे कजल चुकाने शे तु औय कजल रेने टक नौफत आन ऩिती ळतप्तबऴा औय अस्द्वनी नषत्रं भं टकमा गमा प्तनलेळ ळुबशं । इन प्तवद्धाॊतं को अऩना कय जीलन भं अऩनाने वे यशता शं । प्तनलेळ चय (भेऴ-कक-तुरा-भकय) रग्नो भं लफशुत छोिे -ब़िे त्रललादं वे आवानी वे फचा जा वकता शं । कयना उत्तभ शोता शं । प्तनलेळ कयने वे ऩूलल मश दे ख रे टक क्मोटक आज क वभम भं त्रलऴभ ऩरयस्स्थप्ततमं भं े रग्न वे 8लं बाल भं कोई ग्रश न शो, इव वभम भं टकमाबी स्जवका रेनदे न अच्छा शोता शं , उवका वभाज भं गमा ऩूॊस्ज प्तनलेळ धन को फढ़ाता शं ।अच्छा प्रबाल फन जाता शं । भॊत्र प्तवद्ध भॊगर गणेळ भूॊगा गणेळ को त्रलध्नेद्वय औय प्तवत्रद्ध त्रलनामक क रूऩ भं जाना जाता शं । इव प्तरमे भूॊगा गणेळ ऩूजन क े े प्तरए अत्मॊत राबकायी शं । गणेळ जो त्रलध्न नाळ एलॊ ळीघ्र पर टक प्राप्तद्ऱ शे तु त्रलळेऴ राबदामी शं । भूॊगा गणेळ घय एलॊ व्मलवाम भं ऩूजन शे तु स्थात्रऩत कयने वे गणेळजी का आळीलालद ळीघ्र प्राद्ऱ शोता शं । क्मोटक रार यॊ ग औय रार भूॊगे को ऩत्रलत्र भाना गमा शं । रार भूॊगा ळायीरयक औय भानप्तवक ळत्रिमं का त्रलकाव कयने शे तु त्रलळेऴ वशामक शं । टशॊ वक प्रलृत्रत्त औय गुस्वे को प्तनमॊत्रत्रत कयने शे तु बी भूॊगा गणेळ टक ऩूजा राब प्रद शं । एवी रोकभान्मता शं टक भॊगर गणेळ को स्थात्रऩत कयने वे बगलान गणेळ टक कृ ऩा ळत्रि चोयी, रूि, आग, अकस्भात वे त्रलळेऴ वुयषा प्राद्ऱ शोती शं , स्जस्वे घय भं मा दकान भं उन्नती एलॊ वुयषा शे तु भूॊगा गणेळ स्थात्रऩत टकमा जावकता शं । ु प्राण प्रप्ततत्रद्षत भूॊगा गणेळ टक स्थाऩना वे बाग्मोदम, ळयीय भं खून की कभी, गबलऩात वे फचाल, फुखाय,चेचक, ऩागरऩन, वूजन औय घाल, मौन ळत्रि भं लृत्रद्ध, ळत्रु त्रलजम, तॊत्र भॊत्र क दद्श प्रबा, बूत-प्रेत बम, लाशन दघिनाओॊ, शभरा, े ु ु लचोय, तूपान, आग, त्रफजरी वे फचाल शोता शं । एलॊ जन्भ किरी भं भॊगर ग्रश क ऩीटित शोने ऩय प्तभरने लारे शाप्तनकय प्रबालं वे ुॊ ेभुत्रि प्तभरती शं ।जो व्मत्रि उऩयोि राब प्राद्ऱ कयना चाशते शं उनक प्तरमे भॊत्र प्तवद्ध भूॊगा गणेळ अत्मप्तधक पामदे भॊद शं । ेभूॊगा गणेळ टक प्तनमप्तभत रूऩ वे ऩूजा कयने वे मश अत्मप्तधक प्रबालळारी शोता शं एलॊ इवक ळुब प्रबाल वे वुख वौबाग्म टक प्राप्तद्ऱ ेशोकय जीलन क वाये वॊकिो का स्लत् प्तनलायण शोजाता शं । े Rs.550 वे Rs.8200 तक GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
  • 48. 48 नलम्फय 2012 दीऩालरी भं रक्ष्भी-गणेळ आयाधना का भशत्ल  प्तचॊतन जोळी बायतीम धाप्तभलक एलॊ वॊस्कृ प्ततक भान्मता के बालाथल: „वुयश्रेद्ष! भंने वफवे ऩशरे तुम्शायी ऩूजा टक शै ,अनुळाय रक्ष्भीजी क वाथ श्री त्रलष्णु टक ऩूजा शोनी े अत् लत्व! तुभ वललऩूज्म तथा मोगीन्द्र शो जाओ।‟चाटशए। टकन्तुॊ दीऩालरी ऩूजन भं भाॊ रक्ष्भी क वाथ े ब्रह्मलैलतल ऩुयाण भं शी एक अन्म प्रवॊगान्तगलत भातागणेळजी टक ऩूजा क्मं टक जाती शं । ऩाललती ने गणेळ भटशभा का फखान कयते शुए ऩयळुयाभ वे धन टक दे ली रक्ष्भी शं जो धन, वभृत्रद्ध एलॊ ऐद्वमल कशा –प्रदान कयती शं । रेटकन त्रफना फुत्रद्ध क धन, वभृत्रद्ध एलॊ े त्लटद्रधॊ रषकोटिॊ च शन्तुॊ ळिो गणेद्वय्।ऐद्वमल व्मथल शं । इवक ऩीछे भुख्म कायण शं की बगलान श्री ेगणेळ वभस्त त्रलघ्नं को िारने लारे शं , दमा एलॊ कृ ऩा के स्जतेस्न्द्रमाणाॊ प्रलयो नटश शस्न्त च भस्षकाभ ्।।भशावागय शं , एलॊ तीनो रोक क कल्माण शे तु बगलान गणऩप्तत े तेजवा कृ ष्णतुल्मोऽमॊ कृ ष्णाॊद्ळ गणेद्वय्।वफ प्रकाय वे मोग्म शं । वभस्त त्रलघ्न फाधाओॊ को दय कयने ू दे लाद्ळान्मे कृ ष्णकरा् ऩूजास्म ऩुयतस्तत्।।लारे गणेळ त्रलनामक शं । अत् फुत्रद्ध टक (ब्रह्मलैलतलऩु., गणऩप्ततख., 44। 26-प्राप्तद्ऱ क प्तरमे फुत्रद्ध औय त्रललेक े 27)क अप्तधऩप्तत दे लता गणेळ ेका ऩूजन कयने का बालाथल: स्जतेस्न्द्रमत्रलधान शं । गणेळजी ऩुरूऴं भं श्रेद्ष गणेळवभस्त प्तवत्रद्धमं को तुभभं जैवे राखं-दे ने लारे दे लता कयोिं जन्तुओॊ कोभाना गमा शै । भाय िारने कीक्मोटक वभस्त ळत्रि शै ; ऩयन्तुप्तवत्रद्धमाॉ बगलान गणेळ तुभने भक्खी ऩय बीभं लाव कयती शं । इव प्तरमे शाथ नशीॊ उठामा।रक्ष्भी जी क वाथ भं श्री े श्रीकृ ष्ण क अॊळ वे उत्ऩन्न ेगणेळ जी टक आयाधना आलश्मक शं । शुआ लश गणेळ तेज भं श्रीकृ ष्ण केब्रह्मलैलतलऩुयाण भं उल्रेख शं शी वभान शै । अन्म दे लता श्रीकृ ष्ण की कराएॉ शं ।बगलान ् त्रलष्णु ने स्लमॊ गणेळ जी को लयदान टदमा टक इवीवे इवकी अग्रऩूजा शोती शै । वलालग्रे तल ऩूजा च भमा दत्ता वुयोत्तभ। प्तरॊगऩुयाण क अनुवाय (105। 15-27) े वललऩूज्मद्ळ मोगीन्द्रो बल लत्वेत्मुलाच तभ ्।। प्तळल ने अऩने ऩुत्र को आळीलालद टदमा टक जो तुम्शायी ऩूजा टकमे त्रफना ऩूजा ऩाठ, अनुद्षान इत्माटद ळुब कभं (गणऩप्ततखॊ. 13। 2) का अनुद्षान कये गा, उवका भॊगर बी अभॊगर भं ऩरयणत शो जामेगा। जो रोग पर की काभना वे ब्रह्मा, त्रलष्णु,
  • 49. 49 नलम्फय 2012इन्द्र अथला अन्म दे लताओॊ की बी ऩूजा कयं गे, टकन्तु क वाथ वाथ भं भेयी ऩुत्री क वभान त्रप्रम रयस्ध्ध औय प्तवस्ध्ध जो े ेतुम्शायी ऩूजा नशीॊ कयं गे, उन्शं तुभ त्रलघ्नं द्राया फाधा क ब्रह्मा जी टक ऩुत्रत्रमाॉ शं , उनवे गणेळजी का त्रललाश कयने का ेऩशुॉचाओगे। लचन दे ती शूॉ । मटद वम्ऩूणल त्रत्ररोकं भं जो व्मत्रि, श्री गणेळ जी टक ऩूजा नशीॊ कये गा लयन उनकी प्तनॊदा कये गा भं उनवेइव वबी कायण वे भाॊ रक्ष्भी क वाथ भं गणेळजी का े कोवं दय यशूॉगी । जफ बी भेयी ऩूजा शोगी उवक वाथ टशॊ ू ेऩूजन कयने का त्रलधान शं । रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क फाद भं उवे स्स्थय े गणेळ टक बी ऩूजा अलश्म शोगी।कयने शे तु फुत्रद्ध टक आलश्मकता शोती शं ।रक्ष्भी क वाथ गणेळ क ऩूजन वे े े अन्म कथा:वॊफॊध भं अनेकं कथाएॊ प्रचप्तरत शं । प्राप्तचन कार भं एक वॊन्मावीकछ रोकत्रप्रम कथाएॊ मशा प्रस्तुत शं । ु ने दे ली रक्ष्भी को किी तऩस्मा द्रायाळास्त्रोि कथा: प्रवन्न कय क वभस्त वुख वुत्रलधा वे े त्रलष्णु धाभ भं बगलान त्रलष्णु एलॊ जीलन व्मतीत कयने का लयदान भाॊगा।भाता रक्ष्भी त्रलयाजभान शोकय आऩव भं रक्ष्भी तथास्तु कश कय अॊतध्मालन शोलातालराऩ कय यशे थे, फात-फात भं अशॊ गमीॊ। लयदान प्राप्तद्ऱ क फाद वॊन्मावी ेक कायण रक्ष्भी जी फोर उठे टक भं े भॊत्र प्तवद्ध ऩन्ना गणेळ लशाॊ क याजदयफाय भं जाकय याजा क े ेवबी रोक भं वफ वे अप्तधक ऩूजनीम एलॊ ऩाव ऩशुॊच कय एक झिक भं याजभुकि े ुवफवे श्रेद्ष शुॊ। रक्ष्भी जी को इव प्रकाय बगलान श्री गणेळ फुत्रद्ध औय प्तळषा के को नीचे प्तगया टदमा। वॊन्मावी का मश कायक ग्रश फुध क अप्तधऩप्तत दे लता ेअऩनी अशॊ वे स्लमॊ टक प्रळॊवा कयते कामल दे ख कय याजा का चेशया गुस्वे वे शं । ऩन्ना गणेळ फुध क वकायात्भक ेदे ख बगलान त्रलष्णु जी को अच्छा नशीॊ रार शो उठा। उवी षण याजा ने दे खा प्रबाल को फठाता शं एलॊ नकायात्भकरगा। उनका अशॊ दय कयने क प्तरए उन्शंने ू े ू टक याजभुकि वे एक त्रफच्छ फाशय ु प्रबाल को कभ कयता शं ।. ऩन्नकशा तुभ वलल वॊऩन शोते शुए बी आज तक प्तनकर यशा शं । मश दे ख याजा क भन े गणेळ क प्रबाल वे व्माऩाय औय धन ेभाॉ का वुख प्राद्ऱ नशीॊ कय ऩाई। इव फात भं लृत्रद्ध भं लृत्रद्ध शोती शं । फच्चो टक भं वॊन्मावी क प्रप्तत श्रद्धा बाल जाग ेको वुन कय रक्ष्भीजी को फशुत द्खी ु ऩढाई शे तु बी त्रलळेऴ पर प्रद शं गमा, याजाने वॊन्मावी को अऩना भॊत्रीशोगई औय लो अऩनी ऩीिा वुनाॊने के ऩन्ना गणेळ इव क प्रबाल वे फच्चे े फनने क प्तरए आग्रश टकमा। वॊन्मावी ेप्तरमे भाता ऩाललती क ऩाव गमीॊ औय उनवे े टक फुत्रद्ध कळाग्र ू शोकय उवके तो मशी चाशते थे। वॊन्मावी ने तुयॊतत्रलनती टक लो अऩने ऩुत्र काप्ततलकम े आत्भत्रलद्वाव भं बी त्रलळेऴ लृत्रद्ध शोती याजा का प्रस्ताल स्लीकाय कय प्तरमा।औय गणेळजी भं वे टकवे एक ऩुत्र को उनशं शं । भानप्तवक अळाॊप्तत को कभ कयने भं वॊन्मावी क ऩयाभळल वे याज कामल ेदत्तक ऩुत्र क रूऩ भं प्रदान कय दं । े भदद कयता शं , व्मत्रि द्राया अलळोत्रऴत वुचारु रुऩ वे चरने रगा। शयी त्रलटकयण ळाॊती प्रदान कयती शं ,रक्ष्भीजी टक ऩीिा दे ख कय ऩाललतीजी व्मत्रि क ळायीय क तॊत्र को प्तनमॊत्रत्रत े े एक टदन वॊन्मावी नेने गणेळ जी को रक्ष्भीजी को दत्तक ऩुत्र के कयती शं । स्जगय, पपिे , जीब, े याजदयफाय भं उऩस्स्थत वफको फाशयरूऩ भं दे ने का स्लीकाय कय प्तरमा। भस्स्तष्क औय तॊत्रत्रका तॊत्र इत्माटद योग प्तनकर जाने को कशा। वॊन्मावी ऩयऩाललतीजी वे गणेळ जी को ऩुत्र क रूऩ े भं वशामक शोते शं । कीभती ऩत्थय त्रलद्वाव यखते शुए याजा एलॊ अन्म वफऩाकय रक्ष्भीजी नं शत्रऴलत शोते शुले कशाॊ भयगज क फने शोते शं । े दयफायी लशाॊ वे प्तनकर कय एक भैदानभं अऩनी वबी प्तवत्रद्धमाॊ, वुख अऩने Rs.550 वे Rs.8200 तक भं ऩशुॊच गमे औय तफ याजभशर टकऩुत्र गणेळ जी को प्रदान कयती शूॉ। इव
  • 50. 50 नलम्फय 2012दीलायं ढश गमीॊ। मश द्रश्म दे ख कय याजा टक आस्था कटदमं टक बाॊप्तत कछ टदन गुजायने ऩय वॊन्मावी ै ुवॊन्मावी ऩय ऐवी जभी, टक वभस्त याजकामल उव वॊन्मावी का घभॊि उतय गमा। वॊन्मावीने ऩुन् दे ली रक्ष्भी टकक आदे ळ ऩय शोने रगा। वभम क वाथ वॊन्मावी को े े आयाधना ळुरू कय दी। रक्ष्भी ने स्लप्न भं उवे दळलन दे तेस्लमॊ ऩय घभॊि शोने रगा। याजभशर क बीतय बगलान े शुए फतामा, टक तुम्शायी एवी