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Gurutva jyotish jun 2011
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  • 1. Font Help >> http://gurutvajyotish.blogspot.comगु व कायालय ारा तुत मािसक ई-प का जून- 2011 शिनदे व का प रचय शिनदे व क कृ पा ाि शिन क विभ न मं े क सरल उपाय े शिन-साढ़े साती क शांित े शिनवार त उपाय सामु क शा म शिन रे खा का मह व शिन क विभ न पाय का े शिन ह से संबिधत रोग ं शिन दोष त का मह व NON PROFIT PUBLICATION
  • 2. FREE E CIRCULAR गु व योितष प का जून 2011संपादक िचंतन जोशी गु व योितष वभागसंपक गु व कायालय 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIAफोन 91+9338213418, 91+9238328785, gurutva.karyalay@gmail.com,ईमेल gurutva_karyalay@yahoo.in, http://gk.yolasite.com/वेब http://www.gurutvakaryalay.blogspot.com/प का तुित िचंतन जोशी, व तक.ऎन.जोशीफोटो ाफ स िचंतन जोशी, व तक आटहमारे मु य सहयोगी व तक.ऎन.जोशी ( व तक सो टे क इ डया िल) ई- ज म प का E HOROSCOPE अ याधुिनक योितष प ित ारा Create By Advanced Astrology उ कृ भ व यवाणी क साथ े Excellent Prediction १००+ पेज म तुत 100+ Pages हं द / English म मू य मा 750/- GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
  • 3. 3 जून 2011 वशेष लेखशिनदे व का प रचय 5 शिनदे व क कृ पा ाि क सरल उपाय े 28शिनवार त 11 शिन क विभ न मं े 30शिन दोष त का मह व 17 महाकाल शिन मृ युंजय तो 31शिन-साढ़े साती क शांित उपाय े 18 शनै र तवराज(भ व यपुराण) 35 ी शिन चालीसा 20 शनै र तो म ् ( ी ा डपुराण) 36सामु क शा म शिन रे खा का मह व 22 शिनव पंजरकवचम ् 36शिन क विभ न पाय का े 24 दशरथकृ त-शिन- तो 37शिन ह से संबंिधत रोग 27 शिन अ ो रशतनामाविल 41 अनु मसंपादक य 4 दन-रात क चौघ डये े 59राम र ा यं 42 दन-रात क होरा सूय दय से सूया त तक 60 व ा ाि हे तु सर वती कवच और यं 43 ह चलन जून -2011 61मं िस प ना गणेश 43 सव रोगनाशक यं /कवच 62मं िस साम ी 44 मं िस कवच 64मािसक रािश फल 47 YANTRA LIST 65रािश र 51 GEM STONE 67जून 2011 मािसक पंचांग 52 BOOK PHONE/ CHAT CONSULTATION 68जून -2011 मािसक त-पव- यौहार 54 सूचना 69मं िस साम ी 57 हमारा उ े य 71जून 2011 - वशेष योग 58दै िनक शुभ एवं अशुभ समय ान तािलका 58
  • 4. 4 जून 2011 संपादक य य आ मय बंधु/ ब हन जय गु दे व विभ न सं कृ ित म शिनदे व को अकपु , सौ र, भा क र, यम, आ क, छाया सुत, तर णतनय, कोण, नील,आिसत, फारसी व अरबी म जुदल, कदवान, हहल तथा अं ेजी म सैटन आ द नाम से जना जाता ह। शिन ु े ु हसौरमंडल म सूय क प र मा करने वाला छठा ह है । वेद-पुराण क अनुसार शिनदे व सूय दे व क दसर प ी दे वीछाया क पु े ू े है, और इसका वण यामल है । एक बारशिनदे व के याम वण दे खकर सूय ने उसे अपना पु मानने से इनकार कर दया। अपने ित पता क इस े यवहारको दे खकर शिन क भावनाओं को ठे स लगी जसक प रणाम व प वह अपने पता सूय से श ुभाव रखने लगे। े रामायण म उ लेखीत ह क जब लंकापित रावण क सभी े ाता व पु क यु म मृ यु हो रह थी तब रावणने अपने अमर व क िलए सौरमंडल क सभी े े ह को अपने दरबार म कदकर िलया। रावण क कडली म शिन ह एक ै ुंमा ऐसा ह था जसक व ाव था और योग क कारण रावण क िलए माकश क े े थित उ प न हो रह थी, जसेप रवितत करने क िलए रावण ने अपने दरबार म शिन को उलटा लटका दया व घोर यातनाएं दे ने लगा। ले कन ेरावण क एसा करने से शिन क यवहार म कोई बदलाव नह ं आया और वह क े े सहते रहे । पवन पु ी हनुमान वहां पहंु चे और शिन को रावण क कद से मु ै कराया। इसी उपकार क बदले शिनदे व ने ेहनुमानजी को वचब दया क जो भी आपक आराधना करे गा, म अपनी साढे साती, ढै या, दशा-महादशा से उसक सवदार ा क ं गा। इसी िलये ी हनुमानजी क भ े क िलए शुभ फलदायक होते ह शिनदे व े ी हनुमान ने शिन को क से मुकराकर उसक र ा कथी इसीिलए वह भी ी हनुमान क उपासना करने वाल क क े को दर कर उनक हत क ू ेर ा करता है । शिन से उ प न क क िनवारण हे तु े ी हनुमान को अिधक से अिधक स न कया जाए। इससे नकवल शिन से उ प न दोष का िनवारण होता है , ब क सूय व मंगल क साथ शिन क श ुता व योग क कारण े े ेउ प न सारे क भी दर हो जाते ह। ू शिन दे व ह येक जीव क आयु क कारक ह, आयु वृ े े करने वाले ह भी शिनदे व ह, आयुष योग म शिनका थान मह वपूण है क तु शुभ थित म होने पर शिन आयु वृ करते ह तो अशुभ थित म होने पर आयु काहरण कर लेते ह। शिनदे व ल बी बमार क भी े मुख कारक ह ह अतः जो य ल बे समय से बमार से पी डत ह। रोग,क , िनधनता आ द उनका पीछा नह ं छोड रहे हो उ ह शिनदे व क उपासना अव य करनी चा हये। शिनदे व के स न होने से य को िनरोगी काया व दःख द र ता से मु ु िमलती ह व दधायु क ािहोती ह। िचंतन जोशी
  • 5. 5 जून 2011 शिनदे व का प रचय  िचंतन जोशी, व तक.ऎन.जोशी. ेपद: ारं ग: कालात व: वायुजाित: शू कृ ित: तामिसकववरण: ीण और ल बा शर र, गहर पीली आँख, वात,बड़े दांत, अकम य, लंगड़ापन, मोटे बाल .धातु: नायुिनवास: मिलन जमीनसमय अविध: साल वाद: कसैलेमजबूत दशा: प मपेड़: पीपल, बांबीकपड़े : काले, नीले, बहु रं ग का वमौसम: िसिशर Sishiraपदाथ: धातु, शिन क छ ले ेशिन ह शिन ह क चार ओर कई उप ह छ ले ह। यह े शिन सौरम डल के एक सद य ह है । यह छ ले बहत ह पतले होते ह। हालां क यह छ ले चौड़ाई ुसूरज से छठे थान पर है और सौर मंडल म बृ ह पित म २५०,००० कलोमीटर है ले कन यह मोटाई म एकक बाद सबसे बड़ा े ह ह। इसक क ीय प र मण का े कलोमीटर से भी कम ह। इन छ ल क कण मु यत: ेपथ १४,२९,४०,००० कलोमीटर है । शिन ह क खोज बफ और बफ से ढ़क पथर ले पदाथ से बने ह। नये े ाचीन काल म ह हो गई थी। ले कन वै ािनक ी वै ािनक शोध क अनुशार शिन े ह क छ ले ४-५ अरब ेकोण से गैलीिलयो गैिलली ने सन ् १६१० म दरबीन क ू वष पहले बने ह जस समय सौर णाली अपनी िनमाणसहायता से इस ह को खोजा था। शिन ह क रचना अव था म ह थी। पहले ऐसा माना जाता था क ये७५% हाइ ोजन और २५% ह िलयम से हई है । जल, ु छ ले डायनासौर युग म अ त व म आए थे। अमे रकािमथेन,अमोिनया और प थर यहाँ बहत कम मा ा म पाए ु म वै ािनक ने म पाया क शिन ह क छ ले दस ेजाते ह। सौर म डल म चार ह को गैस दानव कहा करोड़ साल पहले बनने क बजाय उस समय अ त व म ेजाता है , य क इनम िमटट -प थर क बजाय आए जब सौर णाली अपनी शैशवाव था म थी। १९७०अिधकतर गैस है और इनका आकार बहत ह ु वशाल है । क दशक म वै ािनक यह मानने लगे थे क शिन े ह केशिन इनमे से एक है - बाक तीन बृ ह पित, छ ले काफ युवा ह और संभवत: यह कसी धूमकतु क े ेअ ण(युरेनस) और व ण (नॅ टयून) ह। बड़े चं मा से टकराने क कारण पैदा हए ह। कछ े ु ु
  • 6. 6 जून 2011वै ािनको क अनुशार शिन क छ ले हमेशा से थे ले कन े े अनुसार ह अ य ह संबंिधत य को शुभा-शुभ फलउनम लगातार बदलाव आता रहा और वे आने वाले कई दान करते ह। जड़-चेतन सभी पर ह का अनुकल या ूअरब साल तक अ त व म रहगे। ितकल ू भाव िन त पड़ता ह। आपक मागदशन हे तु े शिनदे व से संबंिधत कछ विश ु जानका रयां यहां तुतभारतीय शा ो क अनुशार शिनदे व का वणन े ह। वैदय कांित रमल, ू जानां वाणातसी पुरातन काल से लोग क अंदर शिनदे व क े े ित कसुम वण वभ ु शरत:। गलत धारणाएं, भय घर कये बैठा ह, शिनदे व नाम अ या प वण भुव ग छित त सवणािभ सुनते ह लोग भयभीत हो जाते ह। शिनदे व का पौरा णक सूया मज: अ यतीित मुिन वाद:॥ प रचय आपक जानकार हे तु तुत शिन र नीलम ह जससे शिनदे व से संबंधी याभावाथ:- शिन ह वैदयर ू अथवा विभ न ांितय के िनवारण मबाणफ़ल ू या अलसी के फ़ल ू जैसे आपको सहायता िमले।िनमल रं ग से जब कािशत होता है , व वध पुराण म शिनदे व केतो उस समय जा क िलये शुभ फ़ल े ादभाव व उनक ु े विश गुण कदे ता है यह अ य वण को काश दे ता अनेक चचा उ ल ध है ।है , तो उ च वण को समा करता है , पुराणो के अनुसार शिनदे व मह षऐसाऋ ष महा मा कहते ह। क यप क पु े सूय क संतान ह। सूय व क आ मा व सा ात काशिनदे व का व प: व प ह। शिनदे वक माता का नाम B.Sapphire छाया अथवा सुवणा ह। मनु साव ण, शनै र का शर र-का त (Special Qulaty) यमराज शिनदे व क भाई और यमुना ेइ नीलम ण क समान ह। शिनदे व क े े बहन ह।िसर पर वण मुकट गले म माला ु B.Sapphire - 5.25" Rs. 30000 B.Sapphire - 6.25" Rs. 37000 शा ो व णत ह क वंश कातथा शर र पर नीले रं ग क व े B.Sapphire - 7.25" Rs. 55000 B.Sapphire - 8.25" Rs. 73000 भाव संतान पर अव य पड़ता ह।सुशोिभत होते ह। शिनदे व का वण B.Sapphire - 9.25" Rs. 91000 शिनदे व का ज म क यप वंश म हवा ुकृ ण, वाहन गीध तथा लोहे का बना B.Sapphire- 10.25" Rs.108000 ** All Weight In Rati ह और शिनदे व सा ात व परथ है । * उपयो वजन और मू य से अिधक सूय दे व के पु ह अतः शिनदे व और कम वजन और मू य का नीलमसूयदे व क पु े ह शिनदे व उिचत मू य पर ाि हे तु संपक कर। अ तीय श व य व के वामी योितष क व ानो क अनुशार े े GURUTVA KARYALAY ह।यह संपूण संसार सौरमंडल के ह Call Us: शिनदे व आशुतोष भगवान िशव के 91 + 9338213418, ारा िनयं त ह और शिनदे व इन हो 91 + 9238328785, अन य भ ह।म से मु य िनयं क ह। शिनदे व को पोरा णक कथा के अनुशार ह के यायाधीश मंडल का धान यायाधीश कहा गया शंगवश सूय दे व ने अपनी प ी अथात शिनदे व क मांह। कछ ु व ानो का मत ह क शिनदे व क िनणय क े े छाया पर नाराज हो गये और उ ह शाप तक दे ने को
  • 7. 7 जून 2011तैयार हो गये। शिनदे व को सूय दे व का ऐसा यवहार पूव कृ त कम क फल भोग को भी अपने अनु प बनाने ेसहन न हआ। उनक मन म सूय से भी अिधक ु े म स म हो सकता ह।श शाली बनने क इ छा जागृ त हई। शिनदे व ने बना ु योितषीय व ेषण क अनुशार बताये गये उपाय ेकसी संकोच सूय से ह अपनी श ाि क उपाय पूछने े अपना कर ितकल प र थितय ू को अपने अनुकल ूलगे। बनाया जा सकता है । योितष व ा से मनु य अपने सूय दे व ने सुना क शिन उनसे भव य के वषय म जानकार ाअिधक श शाली होना चाहता है , शिन का उपर कर अपने क य ारा ितकल ूसुनते ह उ ह बड़ स नता हई। सब ु थितय को अपने अनुकल बनाने क ू ेसूय दे व ने शिन को काशी म जाकर कटे ला(एमेिथ ट) िलए मागदशन ा कर सकता ह।भगवान िशव का पािथविलंग बनाकर संपूण चराचर जगत ई रयपूजन व अिभषेक करने का आदे श श य क संक प से सृ जन हवा ह। े ुदया। शिनदे व काशी म आकर पािथव उसी ई रय श य क इ छानुसारिशविलंग बनाकर उपासना म िलन हो नव ह को व क सम त जड़- ेगये। िशवजी ने उनक उपासना से चेतन को िनयं त व अनुशािसत करने स न होकर वरदान मांगने को कहां। का काय दया गया है । मानव समेतशिन ने िशवजी से दो वरदान मांगे। सम त जीवो को िमलने वाले सुख-दख ुएक यह क म अपने पता से भी ह क शुभ-अशुभ े भावो ारा हअिधक श शाली बनूं और दसरा यह ू Amethyst दान कये जाते ह। ले कन हो केक पता से सात गुना दर पर सात ू Katela शुभ-अशुभ भाव म कसी य याउप ह से िघरा हआ मेरा मंडल हो। ु Amethyst- 5.25" Rs. 550 जीव वशेष से इन हो का कोई Amethyst- 6.25" Rs. 640िशवजी ने तथा तु कह उ ह वरदान दे Amethyst- 7.25" Rs. 730 प पात नह ं होता, यो क कसी भीदया। Amethyst- 8.25" Rs. 820 य या जीव को िमलने वाले सुख- Amethyst- 9.25" Rs. 910 योितषशा म अंत र , Amethyst - 10.25" Rs.1050 दख उस जीव ु ारा कये गय कम ह ** All Weight In Ratiवरान थान , मसान , बीहड़ वन, होते ह। * उपयो वजन और मू य से अिधक ांतर , दगम-घा टय , पवत , गुफाओं, ु और कम वजन और मू य का नीलम जीव वशेष क कम क कारक े ेखदान व जन शू य आकाश-पाताल उिचत मू य पर ाि हे तु संपक कर। ह शिनदे व होने क वजह से उनकक रह यपूण- थल आ द को शिनदे व े GURUTVA KARYALAY यमाण कम क संपादन म े मुख Call Us:के अिधकार े माना गया है । भूिमका होती है । जीव के ारा कये 91 + 9338213418,शिनदे व क अिधकार े े म कवल े 91 + 9238328785, गये कम से कसी कम का फल कबरह यमय व गु ान क उपरांत े और कस कार भोगना है , इसकाकम े म, सतत ् चे ा, म, सेवा -लाचार, वकलांग , िनधारण नव ह ारा ह होता ह।रोगी व वृ द क सहायता आ द भी आते ह। सभी जीव क शुभ-अशुभ कम े का फल दान शिनदे व कम क कारक े ह होने क वजह से करने म शिनदे व द डािधकार यायाधीश के प म कायमनु य को यमाण कम का अवलंबन लेकर अपने करते ह। यो क अशुभ कम क िलए द ड े दान करते
  • 8. 8 जून 2011समय शिन नह ं दे र करते है और नह ं प पात। द ड दे ते शिनदे व उ ह ं लोगो को अिधक क दान करतेसमय दया आ द भाव शिनदे व को छ नह ं पाते, इस ू ह जो लोग गलत काम म सल न होते ह। अ छे कमिलये लोग म शिन क नाम से भय क लहर दौड जाती े े करने वाल पर शिनदे व अित स न व उनक अनुकल े ूहै । इसी िलये शा म शिनदे व को ू र, क टल व पाप ु फल दान करते ह। ह सं ा द गई है । शिनदे व जतने कठोर ह उतने ह अतः शुभ कम करने से शिन क कृ पा ा होगीअंदर से कृ पालु व दयालु भी है । शिनदे व क कृ पा ाि और शिन कृ पा से ह जीवन का मूल उ े य पूण होगा।हे तु मनु यो को अपने कम को शा ो म उ ले खत ह क शिनदे व केसुधारना चा हए। शिन क र े और उपर दं ड से शिनदे व क गु े सा ात िशवजी यो क व ानो क मतानुशार े को भी ढाई दन क िलये छपना पडा े ु नीलम, नीिलमा, नीलम ण,पूव ज म क संिचत पु य और पाप का े था। शिनदे व क कोप क कारण पावती े े जामुिनया, नीला कटे ला, आ दफल जीव को वतमान जीवन म ह नंदन गणेशजी का िशर कट गया था।क अनुसार भोगने पडते ह। े शिन क र े और उपर ह। योितषी जानकार : हो के शुभ-अशुभ भाव अ छा र शिनवार को पु य शिन एक रािश म तीस मह ने रहते ह।महादशा, अंतदशा आ द क अनुशार े न म धारण करना शिन मकर और क भ रािश क ु े वामी ा होते ह। अतः हो क अिन े चा हये। इन र मे कसी ह तथा शिनक महादशा 19 वष कफल से बचाव क िलए उिचत उपाय े भी र को धारण करते ह होती है । शिन का भाव एक रािश पर कया जा सकता है ।हमारे ाचीन मनी षय ने शा ो म फ़ायदा िमल जाता है । ढ़ाई वष और साढ़े साती के प म साढे ़ सात वष अविध तक भोगनाशिनदे व क अनुकल व े ू ितकल ू भाव शिन क जड बू टयां पढ़ता ह।का बड़ सू मता से िनर ण करउसक व तृ त जानकार हम दान क ू ब छ बूट क जड या शमी शिनदे व क काले होने का रह य! ेह। जसे छ करा भी कहते है क यद कसी जातक क िलये े जड शिनवार को पु य न इस बारे म एक कथा चिलतशिनदे व अनुकल होते ह तो जातक को ू है , जब शिनदे व माता क गभ म थे, े म काले धागे म पु ष औरअपार धन-वैभव व ऐ या द क ाि तब िशव भ नी माता ने घोर तप या ी दोनो ह दा हने हाथ कहोती ह, य द ितकल हो, तो ू य क , धूप-गम क तपन म शिन का रं गको भीषण क का सामना करना भुजा म बा धने से शिन के काला हो गया। ले कन मां क इसी तप ेपड़ता है । ऐसी थित म य वशेष क भाव म कमी आना शु ु ने उ हे आपार श द और न हो मक संिचत धन, संपदा का नाश होता े हो जाता है । से एक ह बना दया।है । य क िनं दत कम रत हो जाता हउसे लोकिनंदा का पा बनना पड़ता ह। उसे पग-पग पर शिनदे व क गित धीमी होने का कारणदःख, क , रोग व अपमान का सामना करना पड़ता है । ु शिनदे व का अ य सभी ह से मंद होने काउ ह तरह-तरह क यातनाएं भी झेलनी पड़ जाती ह। कारण इनका लंगड़ाकर चलना है । वे लंगड़ाकर य
  • 9. 9 जून 2011चलते ह, इसक संबंध म सूय तं े म व णत कथा इस शिनदे व को ते ल य होने का कारण कार ह। शिन दे व पर तेल चढाया जाता ह, इस संबंध म एक बार सूय दे व का तेज सहन न कर पाने क आनंद रामायण म एक कथा का उ लेख िमलता ह। जबवजह से सं ा दे वी ने अपने शर र से अपने जैसी ह एक ी राम क सेना ने सागर सेतु बांध िलया, तब रा स ितमूित तैयार क और उसका नाम वणा रखा। उसे इसे हािन न पहंु चा सक, उसक िलए पवन सुत हनुमान ेआ ा द क तुम मेर अनुप थित म मेर सार संतान को उसक दे खभाल क ज मेदार सौपी गई। जबक दे खरे ख करते हए सूय दे व क सेवा करो और प ी ु हनुमान जी शाम क समय अपने इ दे व राम क े े यान मसुख भोगो। म न थे, तभी सूय पु शिन ने अपना काला क प चेहरा ु एसा आदे श दे कर सं ा अपने पता क घर चली े बनाकर ोधपूण कहा- हे वानर म दे वताओ म श शालीगई। वणा ने भी अपने आप को इस तरह ढ़ाला क शिन हँू । सुना ह, तुम बहत बलशाली हो। आँख खोलो ुसूय दे व भी यह रह य न जान सक। इस बीच सूय दे व े और मेरे साथ यु करो, म तुमसे यु करना चाहता हँू ।से वणा को पांच पु और दो पु यां हई। धीरे -धीरे ु इस पर हनुमान ने वन तापूव क कहा- इस समय म वणा अपने ब च पर अिधक और सं ा क संतान पर अपने भु को याद कर रहा हंू । आप मेर पूजा म व नकम यान दे ने लगी। एक दन सं ा क पु े शिन को मत डािलए। आप मेरे आदरणीय है । कृ पा करक आप ेतेज भूख लगी, तो उसने वणा से भोजन मांगा। तब यहा से चले जाइए। वणा ने कहा क अभी ठहरो, पहले म भगवानका भोग ् जब शिन दे व लड़ने पर उतर आए, तो हनुमान जीलगा लूं और तु हारे छोटे भाई-बहन को खला दं , फर ू ने अपनी पूंछ म लपेटना शु कर दया। फर उ हेतु ह भोजन दं गी। यह सुनकर शिन को ू ोध आ गया कसना ारं भ कर दया जोर लगाने पर भी शिन उसऔर उ ह ने माता को मारने क िलए अपना पैर उठाया, े बंधन से मु न होकर पीड़ा से याकल होने लगे। ुतो वणा ने शिन को ू ाप दया क तेरा पांव अभी टट हनुमान ने फर सेतु क प र मा कर शिन क घमंड को ेजाए। तोड़ने क िलए प थरो पर पूंछ को झटका दे -दे कर े माता का ाप सुनकर शिनदे व डरकर अपने पता पटकना शु कर दया। इससे शिन का शर र लहलुहान ुक पास गए और सारा े क सा कह सुनाया। सूय दे व हो गया, जससे उनक पीड़ा बढ़ती गई। तब शिन दे व नेतुर त समझ गए क कोई भी माता अपने पु को इस हनुमान जी से ाथना क क मुझे बधंन मु करतरह का शाप नह दे सकती। इसी िलए उनक साथ े द जए। म अपने अपराध क सजा पा चुका हँू , फरअपनी प ी नह कोई और ह। सूय दे व ने ोध म आकर मुझसे ऐसी गलती नह होगी।पूछा क बताओ तुम कौन हो, सूय का तेज दे खकर वणा इस पर हनुमान जी बोले-म तु हे तभी छोडू ं गा,घबरा गई और सार स चाई उ हे बता द । तब सूय दे व जब तुम मुझे वचन दोगे क ी राम क भ े को कभीन शिन को समझाया क वणा तुमार माता नह ह, परे शान नह करोगे। य द तुमने ऐसा कया, तो म तु हले कन मां समान ह। इसीिलए उनका दया शाप यथ तो कठोर दं ड दं गा। शिन ने िगड़िगड़ाकर कहा -म वचन दे ता ूनह होगा, पर तु यह इतना कठोर नह होगा क टांग हंू क कभी भूलकर भी आपक और े ी राम क भ े कपूर तरह से अलग हो जाए। हां, तुम आजीवन एक पाँव रािश पर नह आऊगा। आप मुझे छोड़ द। तभी हनुमान ँसे लंगडाकर चलोगे। जी ने शिनदे व को छोड़ दया। फर हनुमान जी से
  • 10. 10 जून 2011शिनदे व ने अपने घावो क पीड़ा िमटाने क िलए तेल े लोगे, वह न हो जायगा। ू यान टटने पर शिनदे व नेमांगा। हनुमान जी ने जो तेल दया, उसे घाव पर लगाते अपनी प ी को मनाया। प ी को भी अपनी भूल परह शिन दे व क पीड़ा िमट गई। उसी दन से शिनदे व को प ाताप हआ, क तु शाप क ु े तीकार क श उसम नतेल चढ़ाया जाता ह, जससे उनक पीडा शांत हो जाती ह थी, तभी से शिन दे वता अपना िसर नीचा करक रहने ेऔर वे स न हो जाते ह। लगे। य क यह नह ं चाहते थे क इनके ारा कसी का अिन हो।शिनदे व क ूर ी का कारण अतः कहा गया है , शिनदे व ुर ह नह ं ह, वो शिनदे व जी क म जो ू रता है , वह इनक यायकता है । य पाप करता रहता है, और जब उसप ी क शाप क कारण है । े े पुराण म इनक कथा इस य पर शिन क साढ़े साती आती है , तो उसक पापो का े कार आयी है - बचपन से ह शिन दे वता ीकृ ण के हसाब वयं शिनदे व करते है । जब य लोभ, वासना,परम भ थे। वे ीकृ ण क अनुराग म िनम न रहा े गु सा, मोह से भा वत होकर अ याय, अ याचार, दराचार, ूकरते थे। वय क होने पर इनके पता ने िच रथ क अनाचार, पापाचार, यिभचार का सहारा लेता है , जब सबसेक या से इनका ववाह कर दया। इनक प ी सती- िछप कर कोई पाप काय करता ह, तब समय आने परसा वी और परम तेज वनी थी। एक रात वह ऋतु- नान शिनदे व के ारा य को दं ड भी ा होता ह। जोकरक पु - े ाि क इ छा से इनक पास पहँु ची, पर यह े राजा का रं क बना दे ती ह, वह शिन क साढे -साित ह ीकृ ण के यान म िनम न थे। इ ह बा संसार क होती है । ले कन य द साढे -साती दशा क दौरान भी य ेसुधबुध ह नह ं थी। प ी ती ा करक थक गयी। उसका े स य को नह ं छोड़े ता, पुनः, दया और याय का सहाराऋतुकाल िन फल हो गया। इसिलये उसने ु होकर लेता ह, एसी अव था म सब बहत ह अ छे से ु यतीतशिनदे व को शाप दे दया क आज से जसे तुम दे ख हो जाता ह।  या आपक ब चे कसंगती क िशकार ह? े ु े  या आपक ब चे आपका कहना नह ं मान रहे ह? े  या आपक ब चे घर म अशांित पैदा कर रहे ह? े ु घर प रवार म शांित एवं ब चे को कसंगती से छडाने हे तु ब चे क नाम से गु ु े व कायालत ारा शा ो विध- वधान से मं िस ाण- ित त पूण चैत य यु वशीकरण कवच एवं एस.एन. ड बी बनवाले एवं उसे अपने घर म था पत कर अ प पूजा, विध- वधान से आप वशेष लाभ ा कर सकते ह। य द आप तो आप मं िस वशीकरण कवच एवं एस.एन. ड बी बनवाना चाहते ह, तो संपक इस कर सकते ह। GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
  • 11. 11 जून 2011 शिनवार त  व तक.ऎन.जोशी. े त माहा यं एवं कथा विध शिन- ह क शांित व सभी कार क सुख क े ॐ कोण थाय नमः।इ छा रखने वाले ी-पु ष को शिनवार का त करना ॐ रौ ा मकाय नमः।चा हए। संपूण विध- वधान से शिनवार का त करने से ॐ शनै राय नमः।शिन से संबंिधत संपूण पीडा-दोष, रोग-शोक न हो जाते ॐ यमाय नमः।ह, और धन का लाभ होता ह। ती को वा य सुख ॐ ब वे नमः।तथा आयु व बु क वृ होती ह। ॐ कृ णाय नमः। शिनदे व के भाव म सभी कार क उ ोग, े ॐ मंदाय नमः।यवसाय, कल-कारखाने, धातु उ ोग, लौह व तु, तेल, ॐ प पलाय नमः।काले रं ग क व तु, काले जीव, जानवर, अकाल मृ यु, ॐ पंगलाय नमः।पुिलस भय, कारागार, रोग भय, गुरदे का रोग, जुआ, ॐ सौरये नमः।स टा, लॉटर , चोर भय तथा ू र काय आते ह। व ानो क अनुशार शिन से संबंिधत क े िनवारण उस वृ म सूत क सात धागे लपेटकर सात ेक िलए शिनवार का े त करना परम लाभ द होता ह। प र मा करे तथा वृ का पूजन करे । शिन पूजनशिनवार के त को जानकार य क सलाह से येक सूय दय से पूव तार क छांव म करना चा हए। शिनवारउ के ी-पु ष कर सकता ह। त-कथा को भ और ेमपूव क सुने। कथा कहने वाले शिनवार का त कसी भी शिनवार से आरं भ को द णा दे । ितल, जौ, उड़द, गुड़, लोहा, तेल, नीलेकया जा सकता ह। ले कन ावण मास क शिनवार से े व का दान करे । आरती और ाथना करके साद बांटे। त को ारं भ कया जाए तो वशेष लाभ द रहता ह। पहले शिनवार को उड़द का भात और दह , दसरे ू शिनवार को सूयोदय से पूव ती मनु य को शिनवार को खीर, तीसरे को खजला, चौथे शिनवार कोकसी प व नद -जलाशय आ द क जल म े नान कर, घी और पू रय का भोग लगावे। इस कार ततीसऋ ष- पतृ अपण करक, सुंदर कलश म जल भरकर लाये, े शिनवार तक इस त को करे । इस कार त करने सेउस कलश को शमी अथवा पीपल क पेड़ क नीचे सुंदर े े शिनदे व स न होते ह। इससे सव कार क क , अ र ेवेद बनावे, उसे गोबर से लीपे, लौह िनिमत शिन क आद यािधय का नाश होता है और अनेक कार के ितमा को पंचामृ त म नान कराकर काले चावल से सुख, साधन, धन, पु -पौ ा द क ाि होती ह। कामनाबनाए हए चौबीस दल क कमल पर ु े था पत करे । क पूित होने पर शिनवार के त का उ ापन कर। ततीसशिनदे व का काले रं ग क गंध, पु प, अ ांग, धूप, फल, े ू ा ण को भोजन करावे, त का वसजन करे । इसउ म कार क नैवे े आ द से पूजन करे । कार त का उ ापन करने से पूण फल क ाि होती उस क प यात शिन क इन दस नाम का े े ा ा है एवं सभी कार क कामनाओं क पूित होती ह।व भ -भाव से से उ चारण करे -
  • 12. 12 जून 2011कामना पूित होने पर य द यह त कया जाए, तो ा कतु हे तु कतु मं े े से कशा क सिमधा म, कृ ण जौ क ु ेव तु का नाश नह ं होता। घी व काले ितल से येक क िलए १०८ आहितया दे े ु योितष शा म शिन राहु और कतु क क े े और ा ण को भोजन करावे।िनवारण हे तु भी शिनवार के त का वधान ह। इस त इस कार शिनवार के त के भाव से शिन औरम शिन क लोहे क , राहु व कतु क शीशे क मूित े राहु-कतु जिनत क , सभी े कार क अ र े तथा आ द-बनवाएं। यािधय का सवथा नाश होता ह। कृ ण वण व , दो भुजा द ड और अ मालाधार , काले रं ग क आठ घोड़े वाले रथ म बैठे शिन का े संपूण ाण ित त 22 गेज शु यान करे । ट ल म िनिमत अखं डत कराल बदन, ख ग, चम और शूल से यु नीले िसंहासन पर वराजमान वर द राहु का धू वण, गदा द आयुध से यु , यान करे । गृ ासन पर पु षाकार शिन यं वराजमान वकटासन और वर द कतु का े यान करे । पु षाकार शिन यं ( ट ल म) को ती भावशाली इ ह व प म मुितय का िनमाण करावे अथवा बनाने हे तु शिन क कारक धातु शु ट ल(लोहे ) मगोलाकार मूित बनावे या बाजार से खर द ले। बनाया गया ह। जस के भाव से साधक को त काल काले रं ग क चावलोम से चौबीस दल का कमल े लाभ ा होता ह। य द ज म कडली म शिन ुंिनमाण करे । कमल क म य म शिन, द े ण भाग म ितकल ू होने पर य को अनेक काय मराहु और वाम भाग म कतु क े थापना करे । र चंदन असफलता ा होती है , कभी यवसाय म घटा,म कशर िमलाकर, गंध चावल म काजल िमलाकर, काले े नौकर म परे शानी, वाहन दघटना, गृ ह ु लेश आ दचावल, काकमाची, कागलहर क काले पु प, क तूर आ द े परे शानीयां बढ़ती जाती है ऐसी थितय मसे कृ ण धूप और ितल आ द क संयोग से कृ ण नैवे े ाण ित त ह पीड़ा िनवारक शिन यं क अपने(भोग) अपण करे और इस मं से ाथना एवं नम कार को यपार थान या घर म थापना करने से अनेककर- लाभ िमलते ह। य द शिन क ढै ़या या साढ़े साती का शनैश ्चर नम तु यं नम तेतवथ राहवे। समय हो तो इसे अव य पूजना चा हए। शिनयं के कतवेऽथ नम तु यं सवशांित े दो भव॥ पूजन मा से य को मृ यु, कज, कोटकश, जोडो े ॐ ऊ वकायं महाघोरं चंडा द य वमदनम। ् का दद, बात रोग तथा ल बे समय क सभी े कार के िसं हकायाः सुतं रौ ं तं राहंु णमा यहम॥ ् रोग से परे शान य क िलये शिन यं े अिधक ॐ पातालधूम संकाशं तारा ह वमदनम। ् लाभकार होगा। नौकर पेशा आ द क लोग े को रौम रौ ा मकं ू रं तं कतु े णमा यहम॥ ् पदौ नित भी शिन ारा ह िमलती है अतः यह यं अित उपयोगी यं है जसके ारा शी ह लाभ पायासात शिनवार का त करे । शिन हे तु शिन-मं से शिन जा सकता है । मू य: 1050 से 8200क सिमधा म, राहु हे तु राहु मं से पूवा क सिमधा म,
  • 13. 13 जून 2011 ी शिनवार त कथा हे युिध र! कशलपूव क तो हो? युिध र ने कहा- हे ु भो! आपक कृ पा है । आपसे कछ िछपा न हं है ! कृ पाकर ु पौरा णक कथा क अनुशार एक बार सम त े कोई ऐसा उपाय बतलाएं, जसक करने से यह े ह क ा णय का हत चाहने वाले मुिनगण नैिमषार य म न यापे। हम इससे छटकारा िमले। यह शिन ु ह बहत ुएक हए। उस समय ु यास जी क िश य सूतजी अपने े क दे ता है ।िश यो क साथ े ीह र का मरण करते हए वहां पर ु ीकृ ण बोले- राजन! आपने बहत ह सुंदर बात ुआए। सम त शा के ाता ी सूतजी को आयादे खकर महातेज वी शौनका द मुिनय ने उठकर ीसूतजी कोसूतजी बैठ गए। णाम कया। मुिनय ारा दए आसन पर ी संपूण ाण ित त 22 गेज शु टल म ी सूतजी से शौनक आ द मुिनय ने वनयपूव कपूछा- हे मुिन! इस किलकाल म ह र भ कस कार सेहोगी? सभी ाणी पाप करने म त पर ह गे, मनु य कआयु कम होगी। ह क , धन र हत और अनेक िनिमत अखं डतपीड़ायु मनु य ह गे। हे सूतजी! पु य अित प र म से शिन ा होता है , इस कारण किलयुग म कोई भी मनु यपु य न कर पायेगा। पु य क न े होने से मनु य क कृ ित पापमय होगी, इस कारण तु छ वचार करने वालेमनु य अपने अंश स हत न हो जाएंगे। हे सूतजी! जस तैितसा यंतरह थोड़े ह प र म, थोड़े धन से, थोड़े समय म पु य ा हो, ऐसा कोई उपाय हम लोग को बतलाइए। हेमहामुन, हमने यह भी सुना है े क शिन के कोप सेदे वता भी मु नह ं हो पाते । शिन क ूर नेभगवान ीगणेश जी का िसर उसक पता क हाथ कटवा े े शिन ह से संबंिधत पीडा केदया। शिन क क को दे ने वाली ह, इसिलए कोईऐसा त बताएं, जसे करने से शिनदे व स न हो। िनवारण हे तु वशेष लाभकार यं । सूतजी बोले- हे मुिन े तुम ध य हो। तु ह ं मू य: 550 से 8200वै णव म अ ग य हो, य क सब ा णय का हतचाहते हो। म आपसे उ म त को कहता हंू । यान दे कर GURUTVA KARYALAYसुन- इसक करने से भगवान शंकर े स न होते है और 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWARशिन ह क क े ा नह ं होते। PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 हे ऋ षयो! युिध र आ द पांडव जब वनवास म Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com,अनेक क भोग रहे थे, उस समय उनके य सखा gurutva_karyalay@yahoo.in, ीकृ ण उनक पास पहंु चे। युिध र ने े ीकृ ण का बहत ु Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/आदर कया और सुंदर आसन पर बैठाया। ीकृ ण बोले-
  • 14. 14 जून 2011पूछ है । आपसे एक उ म त कहता हंू , सुनो। जो ा णी ने राजकमार धमगु ु को अपने साथ ले िलयामनु य भ और ायु होकर शिनवार के दन और नगर को छोड़कर चल द ।भगवान शंकर का त करते ह, उ ह शिन क ह दशा गर ब ा णी दोन कमारो का बहत क ठनाई से ु ुमे कोई क नह ं होता। उनको िनधनता नह ं सताती िनवाह कर पाती थी। कभी कसी शहर म और कभीतथा इस लोक म अनेक कार क सुख को भोगकर अंत े कसी नगर म दोन कमार को िलए घूमती रहती थी। ुम िशवलोक क ाि होती है । युिध र बोले- हे भु! एक दन वह ा णी जब दोन कमार को िलए एक ुसबसे पहले यह त कसने कया था, कृ पा करक इसे े नगर से दसरे नगर जा रह थी क उसे माग म मह ष ुव तारपूव क कह तथा इसक विध भी बतलाएं। शां ड य क दशन हए। े ु ा णी ने दोन बालक क साथ े भगवान ीकृ ण बोले- राजन! शिनवार क दन, े मुिन क चरण मे े णाम कया और बोली- मह ष! मवशेषकर ावण मास म शिनवार के दन लौहिनिमत आज आपक दशन कर कृ ताथ हो गई। यह मेरे दोन े ितमा को पंचामृ त से नान कराकर, अनेक कार के कमार आपक शरण है , आप इनक र ा कर। मुिनवर! ुगंध, अ ांग, धूप, फल, उ म कार क नैवे े आ द से यह शुिच त मेरा पु है और यह धमगु राजपु है औरपूजन करे , शिन क दस नाम का उ चारण करे । ितल, े मेरा धमपु है । हम घोर दा र य म ह, आप हमारा उ ारजौ, उड़द, गुड़, लोहा, नीले व का दान करे । फर क जए। मुिन शां ड य ने ा णी क सब बात सुनी औरभगवान शंकर का विधपूव क पूजन कर आरती- ाथना बोले-दे वी! तु हारे ऊपर शिन का कोप है , अतः आपकरे - हे भोलेनाथ! म आपक शरण हंू , आप मेरे ऊपर शिनवार के दन त करक भोले शंकर क े आराधनाकृ पा कर। मेर र ा कर। कया करो, इससे तु हारा क याण होगा। हे युिध र! पहले शिनवार को उड़द का भात, ा णी और दोन कमार मुिन को ु णाम करदसरे को कवल खीर, तीसरे को खजला, चौथे को पू रय ू े िशव मं दर क िलए चल दए। दोन कमार ने े ु ा णीका भोग लगावे। त क समाि पर यथाश ा ण स हत मुिन क उपदे श क अनुसार शिनवार का े े त कयाभोजन करावे। इस कार करने से सभी अिन , क , तथा िशवजी का पूजन कया। दोन कमार को यह ु तआिध या दय का सवथा नाश होता है । शिन, राहु, कते े करते-करते चार मास यतीत हो गए। एक दन शुिच तसे ा होने वाले दोष दर होते ह और अनेक ू कार के नान करने क िलए गया। उसक साथ राजकमार नह ं े े ुसुख-साधन एवं पु -पौ ा द का सुख ा होता ह। था। क चड़ म उसे एक बहत बड़ा कलश दखाई दया। ु शुिच त ने उसको उठाया और दे खा तो उसम धन था।सबसे पूव जसने इस त को कया था, उसका इितहास शुिच त उस कलश को लेकर घर आया और मां सेभी सुनो- बोला- हे मां! िशवजी ने इस कलश के प म धन दया पूव काल म इस पृ वी पर एक राजा रा य करता है ।था। राजाने अपने श ुओं को अपने वश म कर िलया। माता ने आदे श दया- बेटा! तुम दोन इसको बांटदै व गित से राजा और राजकमार पर शिन क दशा आई। ु लो। मां का वचन सुनकर शुिच त बहत ह ु स न हआ ुराजा को उसक श ुओं ने मार े दया। राजकमार भी ु और धमगु से बोला- भैया! अपना ह सा ले लो। परं तुबेसहारा हो गया। राजगु को भी बै रय ने मार दया। िशवभ राजकमार धमगु ु ने कहा-मां! म हसा लेनाउसक वधवा ा णी तथा उसका पु शुिच त रह गया। नह ं चाहता, य क जो कोई अपने सुकृत से कछ भी ु
  • 15. 15 जून 2011पाता है , वह उसी का भाग है और उसे आप ह भोगना गंधव क या ने कहा- व वक नाम क गंधव क ेचा हये। िशवजी मुझ पर भी कभी कृ पा करगे। म पु ी हंू । मेरा नाम अंशुमित है । आपको आता दे ख धमगु ेम और भ क साथ शिन का े त आपसे बात करने क इ छा हई, इसी से म स खय को ुकरक पूजा करने लगा। इस े कार उसे एक वष यतीत अलग भेजकर अकली रह गई हंू । गंधव कहते ह क मेरे ेहो गया। बसंत ऋतु का आगमन हआ। राजकमार ु ु बराबर संगीत व ा म कोई िनपुण नह ं है । भगवानधमगु तथा ा ण पु शुिच त दोन ह वन म घूमने शंकर ने हम दोन पर कृ पा क है , इसिलए आपको यहांगए। दोन वन म घूमते-घूमते काफ दर िनकल गए। ू पर भेजा है । अब से लेकर मेरा-आपका ू ेम कभी न टटे ।उनको वहां सैकड़ गंधव क याएं खेलती हई िमलीं। ु ऐसा कहकर क या ने अपने गले का मोितय का हार ा ण कमार बोला- भैया! च र वान पु ष को चा हए क ु राजकमार क गले म डाल दया। ु ेवे य से बचकर रह। ये मनु य को शी ह मोह लेती राजकमार धमगु ु ने कहा- मेरे पास न राज है ,ह। वशेष प से चार को य से न तो संभाषण न धन। आप मेर भाया कसे बनगी? आपक ै े पता है ,करना चा हए, तथा न ह िमलना चा हए। परं तु गंधव आपने उनक आ ा भी नह ं ली। गंधव क या बोली- अबक याओं क ड़ा को दे खने क इ छा रखने वाला आप घर जाएं, ले कन परस ातःकाल यहां अव यराजकमार उनक पास अकला चला गया। ु े े पधार। राजकमार से ऐसा कहकर गंधव क या अपनी ु गंधव क याओं म से एक सुंदर उस राजकमार ु सहे िलय क पास चली गई। राजकमार धमगु े ु शुिच तपर मो हत हो गई और अपनी स खय से बोली- यहां से क पास चला आया और उसे सब समाचार कह सुनाया। ेथोड़ दर पर एक सुंदर वन है , उसम नाना ू कार के राजकमार धमगु ु तीसरे दन शुिच त को साथफल खले ह। तुम सब जाकर उन सुंदर फल को तोड़कर ू ू लेकर उसी वन म गया। उसने दे खा क वयं गंधवराजले आओ, तब तक म यह ं बैठ हंू । स खयां उस गंधव व वक उस क या को साथ लेकर उप थत ह।क या क आ ा पाकर चली गई और वह सुंदर गंधव गंधवराज ने दोन कमार का अिभवादन कया और दोन ु को सुंदर आसन पर बठाकर राजकमार ु से कहाक या राजकमार पर ु गड़ाकर बैठ गई। उसे अकला े राजकमार! म परस ु कलाश पर गौर ै शंकर क दशन ेदे खकर राजकमार भी उसक पास चला आया। ु े करने गया था। वहां क णा पी सुधा क सागर भोले े राजकमार को दे खकर गंधव क या उठ और बैठने ु शंकरजी महाराज ने मुझे अपने पास बुलाकर कहा-क िलए कमल-प े का आसन दया। राजकमार आसन ु गंधवराज! पृ वी पर धमगु नाम का राज राजकमार ुपर बैठ गया। गंधव क या ने पूछा- आप कौन है ? कस है ।दे श क रहने वाले ह तथा आपका आगमन कसे हआ है ? े ै ु उसक प रवार क लोग को श ुओं ने समा े े करराजकमार ने कहा- म ु वदभ दे श क राजा का पु े हंू , दया है । वह बालक गु क कहने से शिनवार का े तमेरा नाम धमगु है । मेरे माता- पता वगलोक िसधार करता है और सदा मेर सेवा म लगा रहता है । तुमचुक ह। श ुओं ने मेरा रा य छ न िलया है । म राजगु े उसक सहायता करो, जससे वह अपने श ुओं पर वजयक पत ्नी क साथ रहता हंू , वह मेर धम माता ह। े ा कर सक। े फर राजकमार ने उस गंधव क या से पूछा- आप ु गौर शंकर क आ ा को िशरोधाय कर म अपनेकौन है ? कसक पु ी ह और कस काय से यहां पर घर चला आया। वहां मेर पु ी अंशमित ने भी ऐसी ह ुआपका आगमन हआ है ? ु
  • 16. 16 जून 2011 ाथना क । िशवशंकर क आ ा तथा अंशुमित क मन े बनाया। इस कार शिनवार के त के भाव और िशवजीक बात जानकर म ह इसको इस वन म लाया हंू । क कृ पा से धमगु फर से वदभराज हआ। ु म इसे आपको स पता हंू । म आपक श ुओं को े ीकृ ण भगवान बोले- हे पांडुनंदन! आप भी यह त कर तो कछ समय बाद आपको रा य ु ा होगा औरपरा त कर आपको आपका रा य दला दं गा। ू सभी कार क सुख क े ाि होगी। आपक बुरे दन क े ऐसा कहकर गंधवराज ने अपनी क या का ववाह शी समाि होगी।राजकमार क साथ कर दया तथा अंशुमित क सहे ली क ु े युिध र ने शिनवार त क कथा सुनकर ीकृ णशाद ा ण कमार शुिच त क साथ कर द । उसने ु ेराजकमार क ु सहायता क िलए गंधव े क चतुरंिगणी भगवान क पूजा क और त आरं भ कया। इसी त केसेना भी द । भाव से महाभारत म पांडव ने ोण, भी म और कण धमगु क श ुओं ने जब यह समाचार सुना तो े जैसे महारिथय को परा त कया- सबसे बढ़कर उ हउ होने राजकमार का अधीनता ु वीकार कर ली और ीकृ ण जैसा यो य सारथी िमला तथा िछना हआ रा य ुरा य भी लौटा दया। धमगु िसंहासन पर बैठा। उसने ा कर वष तक उसका सुख भोगा और फर दे हअपने धम भाई शुिच त को मं ी िनयु कया। जस ा णी ने उसे पु क तरह पाला था, उसे राजमाता यागकर वग क ाि क। अमो महामृ युंजय कवच अमो महामृ युंजय कवच व उ ले खत अ य साम ीय को शा ो विध- वधान से व ान ा णो ारा सवा लाख महामृ युंजय मं जप एवं दशांश हवन ारा िनिमत कवच अ यंत भावशाली होता ह। अमो महामृ युंजय कवच अमो महामृ युंजय कवच बनवाने हे तु: अपना नाम, पता-माता का नाम, कवच गो , एक नया फोटो भेजे द णा मा : 10900 संपक कर: GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
  • 17. 17 जून 2011 शिन दोष त का मह व  िचंतन जोशी सनातन धम म दोष त का वशेष मह व मानाजाता ह। येक माह क शु ल और कृ ण दोन प े के शिन दोष क दन शिन क कारक व तुओं जैसे ेतेरहव दन अथात योदशी को दोष त कहाजाता ह। लोहा, तैल, काले ितल, काली उड़द, कोयला और क बल आ द इस दन कए जाने वाले त को दोष त कहा का दान करना शुभ फल द होता ह, और शिन-मं दर मजाता ह। दोष त क दन भगवान िशव और माता पावती े जाकर तैल का दया जलाता है तथा उपवास करता है ,क आराधना करने का वधान ह। शिनदे व उससे स न होकर उसक सारे दःख को दर कर दे ते े ु ू ह। व ानो क मतानुशार े दोष त से य कोसफलता, शा त दान करने वाला एवं उसक सम त व ानो क अनुशार शा े म व णत है क उ मइ छाओं क पूित करने वाला ह। संतान क कामना रखने वाले द प को शिन दोष त अव य करना चा हए। शा ो म शिन दोष त शी हएसी धािमक मा यता ह क दोष क दन भगवान िशव क े ेकसी भी प का दशन करने मा से य क सार संतान दे ने वाला माना गया ह।अ ानता का नाश कर दे ता ह और भ को िशव क कृ पा का संतान- ाि क हे तु शिन े दोष वाले दन सुबहभागी बनाता ह। नानाद करने क प ात पित-प ी को िमलकर िशव-पावती े जब शिनवार क दन े दोष त पड़ता ह, तो उसे और गणेश क का विध- वधान से पूजन-अचन करनाशिन दोष त क नाम से जाना जाता ह। शिनदे व नव ह म े चा हए और िशविलंग पर जलािभषेक करना चा हए। इसकेसे एक महा ह ह। शिनदे व क बारे म शा े म वणन है क प यात शिनदे व क कृ पा ा करने हे तु पीपल क वृ े कशिन का कोप अ य त भयंकर होता ह। भयंकर कोप शा त जड़ म जल चढ़ाना चा हए। साथ ह द प को पूरे दनकरने हे तु पुराण म उ लेख ह क शिन दोष त करने से उपवास करना चा हए। ऐसा करने से ज द ह संतान कशिन दे व का कोप वतः शा त हो जाता है । ाि होती है । जन लोग पर शिन क साढ़े साती और ढै या का शिन दोष त क दन साधक को सं या-काल म े भाव हो, उनक िलए शिन दोष त करना वशेष हतकार े भगवान का भजन-पूजन करना चा हए और िशविलंग कामाना गया है । जल और ब व क प य से अिभषेक करना चा हए। साथ ह पूण विध- वधान व िन ा से कया गया दोष त इस दन महामृ युंजय-मं क जाप का भी वधान है । इस ेशिनदे व क कृ पा ा करने का एक शा ो व आसान उपाय दन दोष त कथा का पाठ करना चा हए और पूजा क बाद ेहै । दोष त क भाव से शिन से संबंिधत पीडा दर होती ह, े ू भभूत को म तक पर लगाना चा हए। शा क अनुसार जो ेऔर शिनदे व का आशीवाद भी िमलता है जससे य क साधक इस तरह शिन दोष त का पालन करता है, उसकेसभी मनोकामनाएँ पूर होती जाती ह। सभी क समा हो जाते ह और स पूण इ छाएँ पूर होती ह।
  • 18. 18 जून 2011 शिन-साढ़े साती क शांित उपाय े  िचंतन जोशी “ॐ ऐं ं ीं शनै राय नमः” इस मं का जप कसी भी तरह का साबुन या तेल का योग नह ं ित दन १०८ बार करने से लाभ ा होता ह। कर। इस जल को शर र पर डालने से पूव साबुन ी िशविलंग पर ताँबे का सप (नाग) चढ़ाने से शिन आ द लगले व शु पाने से झाग को साफ करने के साढे साती का अशुभता म कमी आती ह। प यात औषिध िमले जल से नान कया जा सकता ह। आक क पौधे पर सात शिनवार तक लोहे क सात े क ल चढ़ाने से लाभ ा होता ह।  शिनवार क दन शिन से संबं दत व तुएं जेसे काले े उड़द, तेल, काले ितल, लोहे से बनी व तु, याम व कसी मं दर म काले रं ग क व तुएं एवं सात बादाम आ द का दान दे ने से शिन पीड़ा का शमन होता ह। सात शिनवार तक लगातार दान करने से शिन क साढे साती म शिन से संबंिधत क दर होते ह। एक सूखा ना रयल लेकर उसम चाक या ू कल से ू  छोटा सा गोल छे द बना ल। इस छे द म ना रयल म हनुमान क पूजा-अचना करने से हनुमानजी क आटे का बूरा, बादाम, काजू, कशिमश, प ता, अखरोट ितमा को िसंदर व तेल चढाने से लाभ ू ा होता ह। या छआरा िमलाकर ना रयल म भर। ना रयल को ु शिनवार का त करने से भी शिन क अशुभ े भवो पुनः ब द कर कसी पीपल क पास भूिम क अ दर े े म कमी आित ह। इस कार गाड़ द क ची टयां आसानी से तलाश ल, शिनवार को कसी हनुमान जी क ितमा को िसंदर, ू क तु अ य जानवर न पा सक। घर लौटकर हाथ-पैर चमेली का तेल, चांद क वक का चोला चढ़ाए। े धोकर घर म वेश कर। इस कार ८ शिनवार तक हनुमानजी को जनेऊ, लाल फल क माला, ल डु तथा ू यह या स प न करने से शिन पीडाका शमन होता पान अपण करने से साढ़े साती से संबंिधत क ो से ह। छटकारा िमलता ह। ु िशविलंग पर क चा दध चढाते हए “अमोघ िशव  ू ु स धान अथात सात कार क अ न का दान करने े कवच“ का पाठ करने से शिन पीडा शांत होती ह। से व शिनवार को ातः पीपल का पूजन कर पीपल  येक शिनवार को मछिलय को जौ क आटे से बनी े क मूल म जल अपण करने से भी वशेष लाभ े ा गोिलयाँ खाने को डालने से लाभ ा होता ह। होता ह।  ित दन शिन व पंजर कवच , दशरथ-कृ त-शिन- तो नान करते समय लाजव ती, ल ग, लोबान, चौलाई, अथवा शनै र तवराजः का िनयिमत पाठ करने से काला ितल, गौर, काली िमच, मंगरै ला, क थी, गौमू ु लाभ ा होता ह। आ द म से पांच या सात या उ से से अिधक व तु  भोजन करने से पूव परोसी गयी थाली म से एक जो भी ा हो उसका चूण बना कर को जल म ास िनकालकर काले क े को खलाएँ अथवा शिनवार ु िमलाकर द ण दशा क और मुख कर क खड़े े को शाम क समय उड़द क दाल क पकौडे व इमरती े े होकर नान कर। इस जल से नान करने क प ात ् े क े को खलाए। ु
  • 19. 19 जून 2011 शिनवार क दन काले कपड़े म जौ, ना रयल, लोहे क े शिन एवं शिन-भाया- तो का िन य तीन पाठ करने चौकोर शीट, काले ितल, क चे कोयले व काले चने को से ‘शिन- ह′ क पीड़ा िन य क दर होती है । ू पोटली म बांधकर बहते हए पानी म डालना लाभ द ु शिन-भाया- तो होता ह। यः पुरा रा य- ाय, नलाय ददो कल। काली गाय व काले क े को तेल से चुपड़ रोट , चने ु व ने शौ रः वयं, म ं सव-काम-फल- दम॥१॥ ् क दाल व गुड खलाना लाभ द रहता है । ोडं नीला जन- यं, नील-जीमूत-स नभम। ् वट वृ को दध म शहद व गुड़ को िमलाकर सींचने ू छाया-मात ड-स भूत,ं नम यािम शनै रम॥२॥ ् से लाभ होता ह। ॐ नमोऽक-पु ाय शनै राय, नीहार-वणा जन-नीलकाय। शिनवार, अमाव या आ द वशेष दन पर ‘शिन- मृ वा रह यं भु व मानुष वे, फल- दो मेभव सूय-पु ॥३॥ म दर’ म जाकर आक-पण (मदार क प ) एवं पु प े े नमोऽ तु ेत-राजाय, कृ ण-वणाय ते नमः। क माला मूित पर चढ़ाएँ। एक या आधा च मच तेल शनै राय ू राय, िस -बु दाियने॥४॥ भी चढ़ाने से लाभ होता है । य एिभनामिभः तौित, त य तु ो भवा यहम। ् मामकानां भयं त य, व ने व प न जायते॥५॥ लोहे म बना ाण- ित त शिनयं ा करले ल। गागय कौिशक या प, प लादो महामुिनः।िशविलंग का यथा श पूजन कर। हो सक, जलािभषेक े शनै र-कृ ता पीड़ा, न भवित कदाचन॥६॥कर। पाँच ेत पु प और एक ब व-प चढ़ाएँ। िशव- ोड तु पंगलो ब ुः, कृ णो रौ ोऽ तको यमः।म का जप कर, फर ाथना कर। यथा- ॐ ीशंकराय शौ रः शनै रो म दः, प लादे न संयुतः॥७॥नमः। ीकलास-पतये नमः। ै ीपावती-पतये नमः। एतािन शिन-नामािन, ात थाय यः पठे त। ् ी व न-हताय नमः। ीसुख-दा े नमः। ॐ शा त! त य शौरे ः कृ ता पीड़ा, न भवित कदाचन॥८॥शा त!! शा त!!! वजनी धामनी चैव, ककाली ं कलह- या। इस कार ाथना क िशविलंग क सामने एक े े कलह क टक चा प, अजा म हषी तुरगंमा॥९॥ना रयल और एक मु ठ गेहूँ रख। नम कार कर घर नामािन शिन-भायायाः, िन यं जपित यः पुमान। ्वापस आएँ। त य दःखा ु वन य त, सुख-सौभा यं व ते॥१०॥ . पढाई से संबंिधत सम या या आपक लडक-लडक क पढाई म अनाव यक े े प से बाधा- व न या कावटे हो रह ह? ब चो को अपने पूण प र म एवं मेहनत का उिचत फल नह ं िमल रहा? अपने लडक-लडक क कडली का व तृ त अ ययन अव य े ुं करवाले और उनक व ा अ ययन म आनेवाली े कावट एवं दोषो क कारण एवं उन दोष क िनवारण क उपायो क े े े े बार म व तार से जनकार ा कर। GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
  • 20. 20 जून 2011 ी शिन चालीसा दोह हर च नृ प ना र बकानी। आपहु भरे डोम घर पानी॥ तैसे नल पर दशा िसरानी। भूजी मीन कद गई पानी॥ ूजय गणेश िग रजा सुवन, मंगल करण कृ पाल। ी शंकर ह गहयो जब जाई। पावती को सती कराई॥द नन के दख ु दर ू क र,। क जै नाथ िनहाल॥ तिनक वलोकत ह क र र सा। नभ ठ ड गयो गौ रसुत सीसा॥जय जय ी शिनदे व भु, सुनहु वनय महाराज। पा डव पर भै दशा तु हार । बची ौपद होित उघार ॥करहु कृ पा हे रव तनय, राखहु जन क लाज॥ कौरव क भी गित मारयो। यु े महाभारत क र डारयो॥जयित जयित शिनदे व दयाला। करत यदा भ न ितपाला॥ र व कहं मुख महं ध र त काला। लेकर क द परयो पाताला॥ ूचा र भुजा, तनु याम वराजै। माथे रतन मुकट छ व छाजै॥ ु शेष दे व-ल ख वनती लाई। र व को मुख ते दयो छड़ई॥ ु वाहन भु क सात सुजाना। जग द ज गदभ मृग े वाना॥परम वशाल मनोहर भाला। टे ढ़ भृक ट ु वकराला। ज बुक िसंह आ द नखधार । सो फल ज योितष कहत पुकार ॥क डल ु वण चमाचम चमक। हये माल मु त म ण दमक॥ े े गज वाहन ल मी गृ ह आवै। हय ते सुख स प उपजाव॥कर म गदा शुल कठारा। पल ु वच कर आ र हं संहारा॥ गदभ हािन करै बहु न कर डारै । मृग दे क ण संहारै ॥पंगल, कृ ण , छाया, न दन। यम कोण थ, रौ , दःखभंजन॥ ु जब आव हं भु वान सवार । चोर आ द होय डर भार ॥सौर , म द, शिन दशनामा। भानु पु पूज हं सब कामा। तैस ह चा र चरण यह नामा। वण लौह चांजी अ तामा॥जा पर भु स न है जाह ं। रकहंु राव करै ं ण माह ं॥ लौह चरण पर जब भु आव। धन जन स प न करावै॥पवतहू तृण होई िनहारत। तृणहू को पवत क र डारत॥ समता ता रजत शुभकार । वण सव सुख मंगल कार ॥राज िमलत बन राम हं द हो। ककइहंु क मित ह र ली ह ॥ ै े जो यह शिन च र िनत गावै। कबहु न दशा िनकृ समावै॥बनहंू म मृग कपट दखाई। मातु जानक गई चतुराई॥ अदभुत नाथ दखाव लीला। करै श ु क निश बिल ढ ला॥ ेलखन हं श वकल क र डारा। मिचंगा दल म हाहाकारा॥ जो प डत सुयो य बुलवाई। विधवत शिन ह शांित कराई॥रावण क गित मित बौराई। रामच स बैर बढ़ाई॥ पीपल जल शिन दवस चढ़ावत। द प दान दे बहु सुख पावत॥दयो क ट क र कचन लंका। ब ज बजरं ग बीर क डांका॥ ं कहत रामसु दर भु दासा। शिन सुिमरत सुख होत काश॥नृ प व म पर तु ह पगु धारा। िच मयूर िनगिल गै हारा॥ दोहाहार नौलाखा ला यो चोर । हाथ पैर डरवायो तोर ॥ पाठ शिनचर देव को क वमल तैयार।भार दशा िनकृ दखायो। तेिल हं घर को हू चनवायो॥ करत पाठ चािलस दन हो भवसागर पार॥वनय राग द पक महं क ह । तब स न भु हवै सुख द ह ॥ शिन स ब धी यापार और नौकर शिन स ब धी दान पु यकाले रं ग क व तुय, लोहा से बनी व तुय, ऊन, तेल, गैस, पु य, अनुराधा और उ राभा पद न क समय म शिन ेकोयला, काबन से बनी व तुय, चमडा, मशीन क पा स, पीडा क िनवारण क िलए े े े वयं क वजन क बराबर या े ेपे ोल, प थर, ितल और रं ग का यापार शिन से जुडे दशांश वजन क काले चने, काले कपडे, जामुन क फ़ल, े ेजातक को फ़ायदा दे ने वाला होता है .चपरासी क नौकर , काले उडद, काली गाय, काले जूत, ितल, भस, लोहा, तेल, े ाइवर, समाज क याण क नौकर नगर पािलका वाले नीलम, कलथी, काले व नीले फ़ल, क तूर आ द दान क ु ूकाम, जज, वक ल, राजदत आ द वाले पद शिन क नौकर ू व तुओं का दान कया जाता है । य द इन न ो वमे आते ह। शिनवार का संयोग हो तो और भी उ मफल ा होते ह।
  • 21. 21 जून 2011 सव काय िस कवचजस य को लाख य और प र म करने क बादभी उसे मनोवांिछत सफलताये एवं कये गये काय ेम िस (लाभ) ा नह ं होती, उस य को सव काय िस कवच अव य धारण करना चा हये।कवच के मुख लाभ: सव काय िस कवच के ारा सुख समृ और नव ह क नकारा मक भाव को ेशांत कर धारण करता य क जीवन से सव कार क द:ख-दा र े े ु का नाश हो कर सुख-सौभा य एवंउ नित ाि होकर जीवन मे सिभ कार क शुभ काय िस े होते ह। जसे धारण करने से य यदयवसाय करता होतो कारोबार मे वृ होित ह और य द नौकर करता होतो उसमे उ नित होती ह।  सव काय िस कवच क साथ म सवजन वशीकरण कवच क िमले होने क वजह से धारण करता े े क बात का दसरे ू य ओ पर भाव बना रहता ह।  सव काय िस कवच क साथ म अ ल मी कवच क िमले होने क वजह से य े े पर मां महा सदा ल मी क कृ पा एवं आशीवाद बना रहता ह। ज से मां ल मी क अ े प (१)-आ द ल मी, (२)-धा य ल मी, (३)-धैर य ल मी, (४)-गज ल मी, (५)-संतान ल मी, (६)- वजय ल मी, (७)- व ा ल मी और (८)-धन ल मी इन सभी पो का अशीवाद ा होता ह।  सव काय िस कवच क साथ म तं े र ा कवच क िमले होने क वजह से तां क बाधाए दर े ू होती ह, साथ ह नकार मन श यो का कोइ क भाव धारण कता ु य पर नह ं होता। इस कवच के भाव से इषा- े ष रखने वाले य ओ ारा होने वाले द ु भावो से र ाहोती ह।  सव काय िस कवच क साथ म श ु वजय कवच क िमले होने क वजह से श ु से संबंिधत े े सम त परे शािनओ से ु वतः ह छटकारा िमल जाता ह। कवच के भाव से श ु धारण कता य का चाहकर कछ नह ु बगड सकते।अ य कवच क बारे मे अिधक जानकार क िलये कायालय म संपक करे : े ेकसी य वशेष को सव काय िस कवच दे ने नह दे ना का अंितम िनणय हमारे पास सुर त ह। GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
  • 22. 22 जून 2011 सामु क शा म शिन रे खा का मह व  िचंतन जोशी भारतीय सामु क शा भी योितष शा क तरह काय क ित अ यािधक सम पत होते ह जस कारण वह अपने ेकई रह यो से भरा हवा महासागर क तरह गहरा है । जसमे ु गृ ह थ जीवन क परवाह नह ं करते! ले कन उ नत शिन पवतहाथ का आकार, रे खा, नाखून, हथेली का रं ग एवं हथेली पर होने क कारण कभी-कभी य े अपने कत य क ित सजग े थत पवत को काफ मह व दया गया है । सामु क शा म और ज मेदार भी होता है । य समय क साथ साथ यादा ेमनु य क हथेली पर हो म मुख नव हो क िलए अलग े रह यवाद होते जाते ह।अलग थान िनधा रत कया गया ह। उन ह क िलए े जस य क हाथ म शिन पवत उभरहवा और े ुिनघा रत कये गये थान को ह पवत कहा गया ह। जानकारो भावशाली होता ह। वह य सफल रह यवाद वषयो केक माने तो हथेली पर थत पवत हमारे शर र क चु बक य े जानकार जेसे जादगर, इं जीिनयर शोध कता आ द होते ह। ूके होते ह जो संबंिधत ह से उजा ा कर म त क एवं य अपने जीवन म पूण िमत ययी होते ह। य अचलशर र क विभ न ह सो तक उस उजा को पहंु चाते ह। े स पित खर दने म यादा व ास रखते ह।इस अंक म हम आपका मगदशन कर रहे ह। संगीत, नृ य आ द कला म इनका झान कम रहता ह। ऐसे य थोडे शक िमजाज क होते ह। बचपन से ह इनक े ेशिन पवत व शिन रे खा दमाग म छोट -छोट बातो को लेकर स दे हशीलता होती ह इस हथेली पर म यमा अंगुली अथात सबसे बड वाली कारण य अपने प रजनो पर भी शक करने से नह ं चूकते।अंगुली (िमड ल फगर) क मूल म शिन का थान होता है जसे ं े कछ जानकारो क अनुशार अ यािधक ु े वकिसतशिन पवत कहा जाता ह। हथेली पर थत शिन पवत से य अथात उभरा शिन पवत य को आ मह या करने को े रतका वभाव, गृ ह थ जीवन और वा य को दशाता ह। हथेली करता ह। ज रत से यादा वकिसत शिन पवत वाले यपर थत शिन पवत य क साधरण-आसाधारण कृ ित के धृ तकाय करने वाले जैसे डाक, ठग, लुटेरे, आ द होता ह। ऐसे ूबार म सरलता से ात कया जा सकता है । य य क हथेली म शिन पवत साधारणत: पीलापन िलए हए होता ह। इनक हथेिलयां कछ पीलापन िलये होती ह। ु ुपूण वकिसत: शिन पवत शुभ ल ण यु हो तो मनु य, इं जीिनयर, जस य क हथेली म शिन पवत उभरा हवा अथात ु वै ािनक, जादगर, सा ह यकार, ू योितषी, कृ षक अथवापूण वकसीत हो एसे य बहत ह भा यशाली होते ह, इ ह ु रसायन शा ी होते ह।अपनी मेहनत का पूण लाभ ा होता है । य अपनी मेहनत शुभ शिन पवत वाले य ाय: अपने माता- पता कक बल पर े े थान को ा करते ह। एसे य अिधकतर इकलौती संतान या सभी संतानो म से अिधक य होते ह।अकले रहना पसंद करते दे खे गये ह। य े का वभाव थोडा वभाव से संतोषी और थोडे कजूस होते ह। ंिचड़िचड़ा होता ह। एसे य य द लेखन काय से जुडे हो, तो धािमक व एसे य अपने ल य को ा करने म स म होते ह। रह यवाद लेखन उनका य वषय होता है ।दन ित- दन सफलता ा करते जाते ह। एसे य अपने
  • 23. 23 जून 2011म याम वकिसत पवत: य द शिन पवत गु पवत क ओर झुका हआ हो तो ु शिन पवत क म यम वकिसत होने से य े अपने यह शुभफल ा होने क संकत ह। य े े को समाज म मान-जीवन म म यम सफलता व स मान ा कर पाता। स मान क ाि होती ह।अ वकिसत पवत: य द शिन पवत सूय पवत क ओर झुका हआ हो तो ु य द कसी य क हथेली म शिन पवत नह होता है यह य क आलसी, िनधन होने क ल ण होते ह। एसे य े ेतो उस य का जीवन उ े यह न व मह वह न होता ह। य द अपने भा य क भरोसे पर जी वत रहने वाले होते ह। इनम ेशिन पवत सामा य प से उभरा हआ हो तो य ु ज रत से ज रत से यादा हताशा और िनराशा क भाव होते ह। एसे े यादा भा य पर व ास करने वाला होता ह। उसे अपने य येक काय को नकारा मक ी से ह दे खते ह।अिधकतर काय म असफलता ा होती है । य द म यमा य द शिन पवत पर ज रत से यादा रे खाएं थत हअंगुली का िसरा नुक ला हो और शिन पवत वकिसत हो तो तो य डरपोक, कायर और बहत भोग य होता ह। ुय अ यािधक क पनािशल होता है । य द हथेली पर शिन पवत और बुध पवत दोन ह पूण य क हाथ-पैर ठं डे होते ह, दांत रोग भी होता ह। एसे े वकिसत हो, तो य एक सफल यापार होता ह। उसे अपनेय को दघटनाओं म अिधकतर पैर और नीचे क अंग म ु े जीवन म आिथक से कसी कार का कोई अभाव नह ंचोट लगती ह। उनका वा य अिधकतर िनबल होता ह। रहता। नवर ज ड़त ी यं शा वचन क अनुसार शु े सुवण या रजत म िनिमत ी यं क चार और य द नवर े जड़वा ने पर यह नवर ज ड़त ी यं कहलाता ह। सभी र ो को उसक िन े त थान पर जड़ कर लॉकट े के प म धारण करने से य को अनंत ए य एवं ल मी क ाि होती ह। य को एसा आभास होता ह जैसे मां ल मी उसक साथ ह। नव ह को े ी यं क साथ लगाने से े ह क अशुभ दशा का धारण करने वाले य पर भाव नह ं होता ह। गले म होने क कारण यं े पव रहता ह एवं नान करते समय इस यं पर पश कर जो जल बंद ु शर र को लगते ह, वह गंगा जल क समान प व े होता ह। इस िलये इसे सबसे तेज वी एवं फलदािय कहजाता ह। जैसे अमृ त से उ म कोई औषिध नह ं, उसी कार ल मी ाि क िलये े ी यं से उ म कोई यं संसार म नह ं ह एसा शा ो वचन ह। इस कार क नवर े ज ड़त ी यं गु व कायालय ारा शुभ मुहू त म ाण ित त करक बनावाए जाते ह। े GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
  • 24. 24 जून 2011 शिन क विभ न पाय का े  व तक.ऎन.जोशी. े भारतीय योितष शा क अनुशार े कसी भी 3. तांबे का पाया क अविध क फल े य क ज म रािश से शिन जस भी भाव म गोचर शिन क गोचर क तांबे का पाया क अविध य े को िमले-कर रहा होता है । उसक अनुसार शिन क पाया अथात े े जुले फल दान करने वाली होती ह। इस अविध म यपाद फल वचार कया जाता ह। य क ज म को जीवन क कई े े म सफलता ा होती ह। इस अविधक डली से शिन पाया क फल का व तार से अ ययन ु े म य को कछ ु े म असफलता का भी सामना करनाकया जाता ह। पड सकता ह। ज म रािश क अनुसार शिन पाया क शुभता या ेअशुभता का िनधारण िन न प से कया जाता ह। 4. लोहे का पाया क अविध क फल े जब शिन गोचर म कसी य क ज म रािश से शिन गोचर क लोहे का पाया क अविध म य को1, 6, 11 भाव म मण करते है , तो शिन क पाद वण क े े आिथक मामलो म हािन हो सकती है । नौकर , यवसायमाने जाते ह। उसी तरह जब शिन कसी य क ज म क िलये भी यह समय े ितकल रहने क ु अिधकरािश से 2, 5, 9 व भाव म गोचर करते है . तो शिन क पाद े संभावनाएं बनती ह। इस अविध म य को वा यरजत क माने जाते ह। जब शिन कसी य े क ज म सुख म कमी हो सकती है ।रािश से 3, 7, 10 व भाव म गोचर करते है , तो शिन क पाद ेता क माने जाते ह और जब शिन कसी य े क ज म ज म रािश से विभ न भाव म शिन क फल ेरािश से 4, 8, 12 व भाव म मण करते है , तो शिन के 1. थम भाव म शिन वण पाया वचार .पाद लोहे क माने जाते ह। े गोचर म जब शिन य क ज म रािश अथात थम भाव म थत हो तो इस अविध को शिन का सोने काशा ो वधान से शिन पाया क अविध म िमलने पाया कहा जाता ह। सोने क पाये म शिन े य केवाले सामा य फल वा य सुख को बढाता ह। परं तु य को संतान से1. सोने का पाया क अविध क फल े क हो सकता ह। य क ल बे समय से े क हए े ुसोने का पाया क अविध म य को कई कार क सुख- े काय पूरे होते है . य को नौकर व यवसायीक कायसाधन ा होने क संभावनाएं अिधक बनती ह। आिथक से लाभ ा होता ह। क तु िश ा े म बाधाएं बनी ी से धन व समृ क वृ ो क िलये भी यह समय य े रह सकती ह।क अनुकल होता ह। े ु 2. तीय भाव म शिन रजत पाया वचार .2. चांद का पाया क अविध क फल े . गोचर म जब शिन य क ज म रािश तीय़ भावरजत का पाया क अविध य को शुभ फल दे ने वाली म थत हो तो इस अविध को शिन का रजत का पायामानी गई ह। अविध म य को सब कार क भौितक कहा जाता ह। रजत क पाये म शिन य े को नौकर -सुख-सु वधाएं ा होती ह। यवसाय क काय म सफलता े ा होती ह। आिथक
  • 25. 25 जून 2011मामलो म सुधार होता ह। भूिम-भवन-वाहन इ या द से गोचर म जब शिन य क ज म रािश छठे भाव मलाभ ा होता ह। इस समयाविध म इ िम ो व थत हो तो इस अविध को शिन का वण का पायापा रवार क सद यो का सहयोग ा होता ह। य के कहा जाता ह। वण पाया म जातक को शुभ फलो कमान-स मान म वृ होती ह। ाि होती ह। नौकर - यवसाय क काय े म अिधक लाभ ा होते ह। य क मान-स मान म वृ े होती3. तृतीय भाव म शिन ता पाद पाया वचार . ह। एक से अिधक तो से धन लाभ कयोग बनते ह। ेगोचर म जब शिन य क ज म रािश तृ तीय भाव भूिम-भवन-वाहन क सुख म वृ े होती ह।म थत हो तो इस अविध को शिन का ता का पाया 7. स म भाव म शिन ता पाया वचारकहा जाता ह। ता पाया म शिन य को धिमक गोचर म जब शिन य क ज म रािश स म भाव मकाय म िच बढाता ह। य द पढाई कर रहे तो उ च थत हो तो इस अविध को शिन का ता का पायािश ा ाि क स भावनाये अिधक होती ह। नौकर म कहा जाता ह। ता पाया म य क भौितक सुख- ेउ नित व यापार म वृ हो सकती ह। अपने बल-बु साधनो म वृ होने क योग बनते ह। ले कन े यसे श ुओं को परा जत करने म सफलता ा हो को मानिसक तनाव बना रहता ह। जातक क जीवन ेसकती ह। दा प य जीवन तानवपूण हो सकता ह। साथी के वा य म िगरावट हो सकती ह।आक मक दघटनाएं भी हो सकती है. ु 8. अ म भाव म शिन लोहे पाया वचार4. चतुथ भाव म शिन लौहे पाया वचार . गोचर म जब शिन य क ज म रािश अ म भाव मगोचर म जब शिन य क ज म रािश चतुथ भाव म थत हो तो इस अविध को शिन का लौहे का पाया थत हो तो इस अविध को शिन का लौहे का पाया कहा जाता ह। लौह पाया म य क क े म बढोतरकहा जाता ह। लौह पाया म नौकर - यवसाय क काय े हो सकती ह। प रवा रक सद यो के बच म आपसीम अ यािधक बाधाएं और नु शान हो सकता ह। उसके तनाव व मतभेद बढने क अिधक संभावना होती ह।रोजगार का ोत एकािधक बार बदलता रहता ह। लौह आक मक घटनाओं क कारण े य क परे शािनयांपाया म मानिसक तनाव बढने क संभावनाएं अिधक बढ सकती ह। मान-स मान म कमी हो सकती ह। कजबनती ह। पा रवार म कलह क अिधकता होती ह। क कारण परे शानी संभव ह। ेय के मान-स मान क हािन हो सकती ह। 9. नवम भाव म शिन रजत पाया वचार5. पंचम भाव म शिन रजत पाया वचार . गोचर म जब शिन य क ज म रािश नवम भाव मगोचर म जब शिन य क ज म रािश पंचम भाव म थत हो तो इस अविध को शिन का रजत का पाया थत हो तो इस अविध को शिन का रजत का पाया कहा जाता ह। रजत पाया म य क आिथक थतीकहा जाता ह। रजत पाया म नौकर - म उ न यापार म सुधार होता है । एकािधक ोत से धन लाभ ातम वृ हो सकती ह। जातक क घर म मंगलकाय े होता ह। य क पुराने श ु भी परा त होते ह। ेस प न होते ह। इस अविध म अिधकतर शुभ फल 10. दशम भाव म शिन ता पाया वचारअिधक ा होते ह। अपने वरोिध व श ु को परा त गोचर म जब शिन य क ज म रािश दशम भाव मकरने म य सफल रहता ह। ले कन दां प य सुख थत हो तो इस अविध को शिन का ता का पायाम कमी हो सकती ह। कहा जाता ह। ता पाया म य को अ यािधक6. छठे भाव म शिन वण पाया वचार प र म क उपरांत सफलता े ा होती ह। ल बे समय
  • 26. 26 जून 2011से चली आरह योजनाएं भी पूण हो सकती ह। य 12. ादश भाव म शिन लौहे पाया वचारको इस अविध म अपने ल य के ित सचेत रहना गोचर म जब शिन य क ज म रािश ादश भावचा हए। कभी-कभी आल य क भाव े गित म बाधाएं म थत हो तो इस अविध को शिन का लौहे का पायाडाल सकते ह। कहा जाता ह। लौह पाया म य क अपने सगे- े11. एकादश भाव म शिन वण पाया वचार संबंिधय व इ िम ो से संब ध खराब हो सकते ह।गोचर म जब शिन य क ज म रािश एकादश भाव आव य ा से अिधक खच व कज से परे शानी संभव ह।म थत हो तो इस अविध को शिन का वण का अनाव यक कसी काय म झूठे आरोप लग सकते ह।पाया कहा जाता ह। वण पाया म य को सभी मानिसक अ थरता रह सकती ह। दर थ ू थानो क कार क भौितक सुख साधन े ा होते ह। काय े म या ा संभव ह।पूण सफलता ा होती ह। धन-सप म वृ होती ह।मान स मान व पद- ित ा म वृ होती ह। मं िस फ टक ी यं " ी यं " सबसे मह वपूण एवं श शाली यं है । " ी यं " को यं राज कहा जाता है यो क यह अ य त शुभ फ़लदयी यं है । जो न कवल दसरे य े ू ो से अिधक से अिधक लाभ दे ने मे समथ है एवं संसार क हर य े क िलए फायदे मंद सा बत होता है । पूण ाण- ित त एवं पूण चैत य यु े " ी यं " जस य क घर मे होता है उसक िलये " ी यं " अ य त फ़लदायी िस होता है उसक दशन मा से े े े अन-िगनत लाभ एवं सुख क ाि होित है । " ी यं " मे समाई अ ितय एवं अ यश मनु य क सम त शुभ इ छाओं को पूरा करने मे समथ होित है । ज से उसका जीवन से हताशा और िनराशा दर ू होकर वह मनु य असफ़लता से सफ़लता क और िनर तर गित करने लगता है एवं उसे जीवन मे सम त भौितक सुखो क ाि होित है । " ी यं " मनु य जीवन म उ प न होने वाली सम या-बाधा एवं नकारा मक उजा को दर कर सकार मक उजा का िनमाण करने मे समथ है । " ी यं " क ू थापन से घर या यापार क थान पर था पत करने से वा तु दोष य वा तु से स ब धत परे शािन मे युनता आित है े व सुख-समृ , शांित एवं ऐ य क ि होती है । गु व कायालय मे " ी यं " 12 ाम से 75 ाम तक क साइज मे उ ल ध है मू य:- ित ाम Rs. 8.20 से Rs.28.00 GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
  • 27. 27 जून 2011 शिन ह से संबंिधत रोग  व तक.ऎन.जोशी. े उ माद नाम का रोग शिन क दे न है । जब गांठ के प मे आमाशय से बाहर कडा होकर गुदा मागदमाग म सोचने वचारने क श का नाश हो जाता है । से जब बाहर िनकलता है तो लौह प ड क भांित गुदाजो य करता जा रहा है । उसे करता जाता है । उसे क छे द क मुलायम द वाल को फ़ाडता हआ िनकलता है । े ुयह पता नह है क वह जो कर रहा है । संसार क लोग े लगातार मल का इसी तरह से िनकलने पर पहले से पैदाके ित उसके या कत य ह। उसे पता नह होता। सभी हए घाव ठ क नह ु हो पाते ह। और इतना अिधकको एक लकड से हांकने वाली बात उसक जीवन म े सं मण हो जाता है , क कसी कार क ए ट बाय टकिमलती है । मानव वध करने म नह हचकना। शराब काम नह कर पाती है ।और मांस का लगातार योग करना। जहां भी रहना  ग ठया रोग शिन क ह दे न है । शीलन भरेआतंक मचाये रहना। जो भी सगे स ब धी ह। उनके थान का िनवास। चोर और डकती आ द करने वाले ै ित हमेशा िच ता दे ते रहना आ द उ माद नाम क रोग े लोग अिधकतर इसी तरह का थान चुनते है । िच ताओंक ल ण है । े क कारण एका त बंध जगह पर पडे रहना। अनैितक े प वात रोग का अथ है वायु वाले रोग। जो लोग से संबंध करना। शर र म जतने भी जोड ह। रज याबना कछ अ छा खाये पये फ़लते चले जाते है । शर र म ु ू वीय खिलत होने क समय वे भयंकर े प से उ े जत होवायु क पत हो जाती है । उठना बैठना दभर हो जाता है । ु ू जाते ह। धीरे -धीरे शर र का तेज ख म हो जाता है । औरशिन यह रोग दे कर जातक को एक जगह पटक दे ता है । जातक क जोड क अ दर सूजन पैदा होने क बाद जातक े े ेयह रोग लगातार स टा। जुआ। लाटर । घुडदौड और को उठने बैठने और रोज क काम को करने म भयंकर ेअ य तुरत पैसा बनाने वाले काम को करने वाले लोग परे शानी उठानी पडती है । इस रोग को दे कर शिन जातकमे अिधक दे खा जाता है । कसी भी इस तरह क काम े को अपने ारा कये गये अिधक वासना क द ु प रणाम ेकरते व य ल बी सांस खींचता है । उस ल बी सांस क सजा को भुगतवाता है .क अ दर जो हारने या जीतने क चाहत रखने पर ठं ड े  नायु रोग क कारण शर र क नश पूर तरह से ेवायु होती है वह शर र क अ दर ह े क जाती है । और अपना काम नह कर पाती ह। वह आंख क अ दर ेअंग क अ दर भरती रहती है । अनैितक काम करने े कमजोर महसूस करता है । िसर क पीडा। कसी भी बातवाल और अनाचार काम करने वाल के ित भी इस का वचार करते ह मूछा आजाना िमग । ह ट रया।तरह क ल ण दे खे गये है । े उ ेजना। भूत का खेलने लग जाना आ द इसी कारण से भग दर रोग गुदा मे घाव या न जाने वाले फ़ोडे ह पैदा होता है । अगर लगातार शिन क बीज मं े काके प म होता है । अिधक िच ता करने से यह रोग जाप जातक से करवाया जाय। उडद क दाल का योगअिधक मा ा म होता दे खा गया है । िच ता करने से जो करवाया जाय। रोट मे चने का योग कया जाय। लोहेभी खाया जाता है । वह आंत म जमा होता रहता है । क बतन म खाना खाया जाये। तो इस रोग से मु ेपचता नह है । और िच ता करने से उवासी लगातार िमल जाती है इन रोग क अलावा पेट क रोग। जंघाओं े ेछोडने से शर र म पानी क मा ा कम हो जाती है । मल क रोग। ट बी। कसर आ द रोग भी शिन क दे न है । े
  • 28. 28 जून 2011 शिनदे व क कृ पा ाि क सरल उपाय े  िचंतन जोशी, व तक.ऎन.जोशी. े शा ो म शिन दे व को वृ ाव था का वामी कहा  ी हनुमान जी या शिन मं दर म पीपल का पेड हो गया ह। जो य अपने माता पता व बुजुग का तो सं या क समय द पक जलाना शिन, हनुमान े स मान करता ह उस य पर शिन दे व बहत ु और भैरवजी क दशन अ यंत लाभकार है । े स न होते ह। जो य अपने माता- पता व  शिनवार का त करे तथा एक समय बना नमक बुजुग का अपमान उस य पर शिनदे व का कोप का भोजन ले। हो जाता ह व उस य से सुख-समृ दर चली ू  खाली पेट ना ते से पूव काली िमच चबाकर गुड या जाती ह। बताशे से खाए। िनधनो व असहाय जीवो क सहायता करने से  भोजन करते समय नमक कम होने पर काला नमक शिनदे व स न होते ह। असहाय य को काला तथा िमच कम होने पर काली िमच योग करे । छाता, चमड़े क जूते च पल भेट करने से शिन दे व े  भोजन क उपरांत ल ग खाए। े स न होते है ।  शिनवार मंगलवार को ोध न करे । शिन दे व को उड़द क ल डू बहत े ु य है । अत  भोजन करते समय म न रहे । शिनवार को ल डू का भोग लगा कर बाँटना लाभ द  येक शिनवार को सोते समय शर र व नाखून पर होता ह। तेल मसले। शिनवार क दन तेल से मािलश कर े नान करना  मांस, मछली, मद तथा नशीली चीजो का सेवन चा हए। बलकल न करे । ु लोहे क कोई व तु शिन मं दर म दान करनी  गुड़ व चने से बनी व तु भोग लगाकर अिधक से चा हए, ऐसी व तु दान करे जो मं दर मे काम अिधक लोगो को बाँटना चा हए। आसक। े  लोहे क बतन म तेल भरकर अपना चेहरा दे खकर े शिन से उ प न सम या क समाधान क िलए े े दान करदे । य द दान हे तु यो य पा न िमले तो भगवान िशवजी और हनुमान जी क पूजा एक साथ उसमे ब ी लगाकर उसे शिन मं दर म जला दे ना करना वशेष लाभ द होता ह। शिनदे व को शांत चा हए। करने क िलये शिन चालीसा, िशव चालीसा, हनुमान े  येक शिन अमाव या को अपने वजन का दशांश चालीसा, बजरं गबाण हनुमान बाहक का पाठ करना ु सरस क तेल का अिभषेक करना चा हए। े शुभदायक होता ह।  शिन मृ युंजय ोत दशरथ कृ त शिन ोत का ४० शिनर नीलम क साथ प ना भी धारण करने से े दन तक िनयिमत पाठ करे । लाभ होता ह।  घोड़े क नाल अथवा नाव क क ल से बना छ ला मछिलय को आटे से बनी गोिलयां खलाये। अिभमं त करक धारण करना शिन क अशुभ े े भाव हर शिनवार व मंगलवार को काले क े को मीठ ु को कम करता है । रोट या खलाये।  अपने िनवास थान व यवसायीक थान पर घोडे क नाल को U आकार मे अव य लगाये।
  • 29. 29 जून 2011 कपूर को ना रयल क तेल म डालकर िसर म े  16 शिनवार सूया क समय एक पानी वाला े लगाये, शिनवार क दन भोजन म उड़द क दाल े ना रयल, 5 बादाम, कछ द ु णा शिन मं दर म का अ यिधक सेवन करे , कम को सुधारे , िनवास चढ़ाये। शिन क शुभ फल े ाि हे तु द ण दशा म थान पर अँधेरा, सूनापन व खंडहर क थित न  िसराहना कर सोये। व प म दशा म मुख कर होने दे । सारे काय करे व अपने पूजन थान म शिन यं ित माह क अमाव या आने से पूव अपने घर व थापीत कर। यवसायीक थल क सफाई व धुलाई करे व तेल  येक शिनवार को रा म सोते समय आँख म का द पक जलाए। काजल या सुरमा लगाये व शिनवार को नीला या शिन मं दर म काले चने, क चा कोयला, काली काला कपडा अव य पहने। ह द , काले ितल, काला क बल, तेल आद शिन से  येक शिन अमाव या, शिन जयंती या शिनवार संबंिधत व तुओं का दान दे । को शिन मं दर अव य जाये। मं िस मंगल गणेश मूंगा गणेश को व ने र और िस वनायक क प म जाना जाता ह। इस िलये मूंगा गणेश पूजन क े े िलए अ यंत लाभकार ह। गणेश जो व न नाश एवं शी फल क ाि हे तु वशेष लाभदायी ह। मूंगा गणेश घर एवं यवसाय म पूजन हे तु था पत करने से गणेशजी का आशीवाद शी ा होता ह। यो क लाल रं ग और लाल मूंगे को प व माना गया ह। लाल मूंगा शार रक और मानिसक श य का वकास करने हे तु वशेष सहायक ह। हं सक वृ और गु से को िनयं त करने हे तु भी मूंगा गणेश क पूजा लाभ द ह। एसी लोकमा यता ह क मंगल गणेश को था पत करने से भगवान गणेश क कृ पा श चोर , लूट, आग, अक मात से वशेष सुर ा ा होती ह, ज से घर म या दकान म उ नती एवं ु सुर ा हे तु मूंगा गणेश था पत कया जासकता ह। ाण ित त मूंगा गणेश क थापना से भा योदय, शर र म खून क कमी, गभपात से बचाव, बुखार, चेचक, पागलपन, सूजन और घाव, यौन श म वृ , श ु वजय, तं मं क द ु े भा, भूत- ेत भय, वाहन दघटनाओं, हमला, चोर, तूफान, आग, ुबजली से बचाव होता ह। एवं ज म कडली म मंगल ह क पी ड़त होने पर िमलने वाले हािनकर भाव से मु ुं े िमलती ह।जो यउपरो लाभ ा करना चाहते ह उनक िलये मं िस मूंगा गणेश अ यिधक फायदे मंद ह। मूंगा गणेश क िनयिमत प से पूजा करने ेसे यह अ यिधक भावशाली होता ह एवं इसक शुभ भाव से सुख सौभा य क ाि होकर जीवन क सारे संकटो का वतः िनवारण े ेहोता ह। Rs.550 से Rs.8200 तक GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Visit Us:- http://www.gurutvakaryalay.blogspot.com/ , http://www.gurutvajyotish.blogspot.com/
  • 30. 30 जून 2011 शिन क विभ न मं े  िचंतन जोशीशम का अथ पाप नाशक दे वता के प म भी शिन ह पीडा िनवारक मं -कहा जाता है । श का अथ होता है िसउयपुतरे द दाहो व ाछ : िशव य :।क याणकार शांित दान करने वाला ह "शिन मं चार: स ना मा पीडा ह तु म शिन:॥श ते पापंम" अथात शिन ह हमारे पापो काशमन करता है । हमारे पापो का नाश करता है । क िनवारण शिन मं -इसिलए इसे शिन कहा गया है । नीला बर: शु धर: कर ट: ग त स ो धनु मान।शिन क उपासना क िलए िन न म से कसी एक े चतुभुर: सुयसुत: सा त: दा तु महमं अथवा एकािधक मं का ानुसार िनयिमत ंदो पगामी॥एक िन त सं या म जप करना चा हए। जप कासमय सं याकाल अ यािधक लाभदायक होता ह। सुख- िधदायक शिन मं - कोण थ : पंगलो ब : कृ णो रौ ांत को यम:।बीज मं - सौर : शनै ौ मंद पपलादे न सं तुत:॥ॐ ां ीं सः शनै राय नमः। सवबाधा िनवारण शिन गाय ी मं -दशा र शिन मं - ॐ भगभवाय व ाहे मृ युपुराय धीम ह त नोॐ शं शनै राय नमः। शिन: चोदयात:।वै दक मं -ॐ शं नो दे वीरिभ य आपो भव तु पीतये। शिन प ी नाम तुित-शं योरिभ व तु नः॥ ॐ शं शनैचारय नम:।पौरा णक मं - ध जनी धािमनी चैव ककाली कला ं या।नीलांजनसमाभासं र वपु ं यमा जम। ् कटक कलह चादय तुरंगी म हषी अजा॥ ंछायामात डस भूतं तं नमामी शनै रम॥ ् ॐ शं शनैचारय नम:।
  • 31. 31 जून 2011 महाकाल शिन मृ युंजय तोमहाकाल शिन मृ युंजय तो गले तु व यसे म दं बा ोमहा हं यसेत ् ।विनयोगः- द यसे महाकालं गु े कृ शतनुं यसेत ् ।।१२ॐ अ य ी महाकाल शिन मृ यु जय तो म य जा वो तूडुचरं य य पादयो तु शनै रम। ्प लाद ऋ षरनु ु छ दो महाकाल शिनदवता शं बीजं एवं यास विध कृ वा प ात ् काला मनः शनेः ।।१३मायसी श ः काल पु षायेित क लक मम अकाल ं यासं यानं व यािम तनौ यावा पठे नरः ।अपमृ यु िनवारणाथ पाठे विनयोगः। क पा दयुगभेदां करांग यास पणः ।।१४ ी गणेशाय नमः। काला मनो यसे गा े मृ यु जय ! नमोऽ तु ते ।ॐ महाकाल शिन मृ यु जायाय नमः। म व तरा ण सवा ण महाकाल व पणः ।।१५नीला शोभा चत द यमूितः ख गो द ड शरचापह तः। भावये ित यंगे महाकालाय ते नमः ।श भुम हाकालशिनः पुरा रजय यशेषासुरनाशकार ।।१ भावये भवा दान ् शीष काल जते नमः ।।१६मे पृ े समासीनं सामर ये थतं िशवम ् । नम ते िन यसे याय व यसेदयने ुवोः । ण य िशरसा गौर पृ छित म जग तम ् ।।२ सौरये च नम तेऽतु ग डयो व यसे तून ् ।।१७।।पाव युवाच।। ावणं भावयेद णोनमः कृ णिनभाय च ।भगवन ् ! दे वदे वेश ! भ ानु हकारक ! । महो ाय नमो भाद तथा वणयो यसेत ् ।।१८अ पमृ यु वनाशाय य वया पूव सूिचतम ् ।।३।। नमो वै दिनर याय ु चा नं व यसे मुखे ।तदे व वं महाबाहो ! लोकानां हतकारकम ् । नमो नीलमयूखाय ीवायां काितकं यसेत ् ।।१९तव मूित भेद य महाकाल य सा तम ् ।।४ मागशीष यसे -बा ोमहारौ ाय ते नमः ।शनेम ृ यु जय तो ं ूह मे ने ज मनः । ऊ लोक-िनवासाय पौषं तु दये यसेत ् ।।२०अकाल मृ युहरणमपमृ यु िनवारणम ् ।।५ नमः काल बोधाय माघं वै चोदरे यसेत ् ।शिनम भेदा ये तैयु ं य तवं शुभम ् । म दगाय नमो मे े यसे फा गुनं तथा ।।२१ ितनाम चथुय तं नमो तं मनुनायुतम ् ।।६ ऊव यसे चै मासं नमः िशवो भवाय च ।।। ीशंकर उवाच।। वैशाखं व यसे जा वोनमः संव काय च ।।२२िन ये यतमे गौ र सवलोक- हतेरते । जंघयोभावये ये ं भैरवाय नम तथा ।गु ा ु तमं द यं सवलोकोपकारकम ् ।।७ आषाढ़ं पा ो ैव शनये च नम तथा ।।२३शिनमृ यु जय तो ं व यािम तवऽधुना । कृ णप ं च ू राय नमः आपादम तके ।सवमंगलमांग यं सवश ु वमदनम ् ।।८ यसेदाशीषपादा ते शु लप ं हाय च ।।२४सवरोग शमनं सवाप िनवारणम ् । नयसे मूलं पादयो हाय शनये नमः ।शर रारो यकरणमायुव ृ करं नृ णाम् ।।९ नमः सव जते चैव तोयं सवागुलौ यसेत ् ।।२५यद भ ािस मे गौर गोपनीयं य तः । यसे -गु फ- ये व ं नमः शु कतराय च ।गो पतं सवत ेषु त णु व महे र ! ।।१० व णुभं भावये जंघोभये िश तमाय ते ।।२६ऋ ष यासं कर यासं दे ह यासं समाचरे त ् । जानु ये धिन ां च यसेत ् कृ ण चे नमः ।महो ं मू न व य य मुखे वैव वतं यसेत ् ।।११ ऊ ये वा णा यसे कालभृ ते नमः ।।२७
  • 32. 32 जून 2011पूव भा ं यसे मे े जटाजूटधराय च । िस ं त म णब धे च यसेत ् काला नये नमः ।पृ उ रभा ं च करालाय नम तथा ।।२८ यतीपातं करा ेषु यसे कालकृ ते नमः ।।४५रे वतीं च यसे नाभो नमो म दचराय च । वर यांसं द पा स धौ काला मने नमः ।गभदे शे यसे ं नमः यामतराय च ।।२९ प रघं भावये ामपा स धौ नमोऽ तु ते ।।४६नमो भोिग जे िन यं यमं तनयुगे यसेत ् । यसे ो स धौ च िशवं वै कालसा णे । येस कृ कां दये नम तैल याय च ।।३० त जानौ भावये स ं महादे हाय ते नमः ।।४७रो हणीं भावये ते नम ते ख गधार णे । सा यं यसे च त -गु फस धौ घोराय ते नमः ।मृ गं येसत ाम ह ते द डो लिसताय च ।।३१ यसे दं गुलीस धौ शुभं रौ ाय ते नमः ।।४८द ो व भावये ौ ं नमो वै बाणधा रणे । यसे ामा स धौ च शु लकाल वदे नमः ।पुनवसुमू व नमो वै चापधा रणे ।।३२ योगं च त जानो यसे स ोिगने नमः ।।४९ित यं यसे बाहौ नम ते हर म यवे । ऐ ं त -गु फस धौ च योगाऽधीशाय ते नमः ।साप यसे ामबाहौ चो चापाय ते नमः ।।३३ यसे दं गुलीस धौ नमो भ याय वैध ृ ितम ् ।।५०मघां वभावये क ठे नम ते भ मधा रणे । चम ण बवकरणं भावये वने नमः ।मुखे यसे -भग च नमः ू र हाय च ।।३४ बालवं भावये े संहारक ! नमोऽ तु ते ।।५१भावये नासायामयमाण योिगने । कौलवं भावयेद न नम ते सवभ णे ।भावये ामनासायां ह त धा रणे नमः ।।३५ तै लं भावये मिस आममांस याय ते ।।५२ वा ं यसे कण कृ सरा न याय ते । गरं यसे पायां च सव ासाय ते नमः । वातीं येस ामकण नमो बृ मयाय ते ।।३६ यसे णजं म जायां सवा तक ! नमोऽ तु ते ।।५३ वशाखां च द ने े नम ते ान ये । वय वभावये ं नमो म यू तेजसे । व क भं ु भावये छ षस धौ कालाय ते नमः ।।३७ िम ! पतृ वसुवार येतां प च च ।।५४ ीितयोगं ुवोः स धौ महाम दं ! नमोऽ तु ते । मुहू ता द पादनखेषु भावये नमः ।ने योः स धावायु म ोगं भी माय ते नमः ।।३८ खगेशाय च ख थाय खेचराय व पणे ।।५५सौभा यं भावये नासास धौ फलाशनाय च । पु हतशतमखे ू व वेधो- वधूं तथा ।शोभनं भावये कण स धौ प या मने नमः ।।३९ मुहू ता वामपादनखेषु भावये नमः ।।५६नमः कृ णयाितग डं हनुस धौ वभावयेत ् । स य ताय स याय िन यस याय ते नमः ।नमो िनमासदे हाय सुकमाणं िशरोधरे ।।४० िस े र ! नम तु यं योगे र ! नमोऽ तु ते ।।५७धृ ितं यसे वाहौ पृ े छायासुताय च । व न ं चरां ैव व णायमयोनकान ् ।त मूलस धौ शूलं च यसेदु ाय ते नमः ।।४१ मुहू ता द ह तनखेषु भावये नमः ।।५८त कपरे ू यसेदग डे िन यान दाय ते नमः । ल नोदयाय द घाय मािगणे द ये ।वृ ं त म णब धे च काल ाय नमो यसेत ् ।।४२ व ाय चाित ू राय नम ते वाम ये ।।५९ ुवं त गुली-मूलस धौ कृ णाय ते नमः । वामह तनखे व यवणशाय नमोऽ तु ते । याघातं भावये ामबाहपृ े ु कृ शाय च ।।४३ िग रशा हबु यपूषाजप ां भावयेत ् ।।६०हषणं त मूलस धौ भुतस ता पने नमः । रािशभो े रािशगाय रािश मणका रणे ।त कपरे ू यसे ं सान दाय नमोऽ तु ते ।।४४ रािशनाथाय राशीनां फलदा े नमोऽ तु ते ।।६१
  • 33. 33 जून 2011यमा न-च ा दितज वधातृ ं वभावयेत ् । काल पेण संसार भ य तं महा हम ् ।ऊ व-ह त-द नखे व यकालाय ते नमः ।।६२ मृ यु जयं महाकालं नम यािम शनै रम ् ।।७९तुलो च थाय सौ याय न क भगृ हाय ु च । दिनर यं ु थूलरोमं भीषणं द घ-लोचनम ् ।समीर व जीवां व णु ित म ुती नयसेत ् ।।६३ मृ यु जयं महाकालं नम यािम शनै रम ् ।।८०ऊ व-वामह त-नखे व य ह िनवा रणे । हाणां हभूतं च सव ह-िनवारणम ् ।तु ाय च व र ाय नमो राहसखाय ु च ।।६४ मृ यु जयं महाकालं नम यािम शनै रम ् ।।८१र ववारं ललाटे च यसे -भीम शे नमः । काल य वशगाः सव न कालः क यिच शः ।सोमवारं यसेदा ये नमो मृ त याय च ।।६५ त मा वां कालपु षं णतोऽ म शनै रम ् ।।८२भौमवारं यसे वा ते नमो - व पणे । कालदे व जग सव काल एव वलीयते ।मे ं यसे सौ यवारं नमो जीव- व पणे ।।६६ काल पं वयं श भुः काला मा हदे वता ।।८३वृ षणे गु वारं च नमो म - व पणे । च ड शो डा क या ा त डश उ यते ।भृ गुवारं मल ारे नमः लयका रणे ।।६७ व ुदाकिलतो न ां समा ढो रसािधपः ।।८४पादयोः शिनवारं च िनमासाय नमोऽ तु ते । च ड शः शुकसंयु ो ज या लिलतः पुनः ।घ टका यसे कशेषु े नम ते सू म पणे ।।६८ तज तामसी शोभी थरा मा व ुता युतः ।।८५काल प नम तेऽ तु सवपाप णाशकः !। नमोऽ तो मनु र येष शिनतु करः िशवे । पुर य वधाथाय श भुजाताय ते नमः ।।६९ आ तेऽ ो रशतं मनुमेनं जपे नरः ।।८६नमः कालशर राय कालनु नाय ते नमः । यः पठे णुया ा प या वा स पू य भ तः ।कालहे तो ! नम तु यं कालन दाय वै नमः ।।७० य मृ योभयं नैव शतवषाविध ये !।।८७अख डद डमानाय वना ताय वै नमः । वराः सव वन य त द - व फोटक छकाः ु ु ।कालदे वाय कालाय कालकालाय ते नमः ।।७१ दवा सौ रं मरे त ् रा ौ महाकालं यजन ् पठे त ।।८८िनमेषा दमहाक पकाल पं च भैरवम ् । ज म च यदा सौ रजपेदेत सह कम ् ।मृ यु जयं महाकालं नम यािम शनै रम ् ।।७२ वेधगे वामवेधे वा जपेद सह कम ् ।।८९दातारं सवभ यानां भ ानामभयंकरम ् । तीये ादशे म दे तनौ वा चा मेऽ प वा ।मृ यु जयं महाकालं नम यािम शनै रम ् ।।७३ त ाशौ भवे ावत ् पठे ाव नाविध ।।९०क ारं सवदःखानां ु दु ानां भयवधनम ् । चतुथ दशमे वाऽ प स मे नवप चमे ।मृ यु जयं महाकालं नम यािम शनै रम ् ।।७४ गोचरे ज मल नेशे दशा व तदशासु च ।।९१ह ारं हजातानां फलानामघका रणाम ् । गु लाघव ानेन पठे दावृ सं यया ।मृ यु जयं महाकालं नम यािम शनै रम ् ।।७५ शतमेकं यं वाथ शतयु मं कदाचन ।।९२सवषामेव भूतानां सुखदं शा तम ययम ् । आपद त य न य त पापािन च जयं भवेत ् ।मृ यु जयं महाकालं नम यािम शनै रम ् ।।७६ महाकालालये पीठे थवा जलस नधौ ।।९३कारणं सुखदःखानां ु भावाऽभाव- व पणम ् । पु य े ेऽ थमूले तैलक भा तो ु गृ हे ।मृ यु जयं महाकालं नम यािम शनै रम ् ।।७७ िनयमेनैकभ े न चयण मौिनना ।।९४अकाल-मृ यु-हरणऽमपमृ यु िनवारणम ् । ोत यं प ठत यं च साधकानां सुखावहम ् ।मृ यु जयं महाकालं नम यािम शनै रम ् ।।७८ परं व ययनं पु यं तो ं मृ यु जयािभधम ् ।।९५
  • 34. 34 जून 2011काल मेण किथतं यास म सम वतम ् । नाऽतः परतरं तो ं शिनतु करं महत ् । ातःकाले शुिचभू वा पूजायां च िनशामुखे ।।९६ शा तकं शी फलदं तो मेत मयो दतम ् ।।९९पठतां नैव द ु े यो या सपा दतो भयम ् । त मा सव य ेन यद छे दा मनो हतम ् ।ना नतो न जला ायोदशे दे शा तरे ऽथवा ।।९७ कथनीयं महादे व ! नैवाभ य क यिचत ् ।।१००नाऽकाले मरणं तेषां नाऽपमृ युभयं भवेत ् । ।। इित मात ड-भैरव-त े महाकाल-शिन-मृ यु जय-आयुव षशतं सा ं भव त िचरजी वनः ।।९८ तो ं स पूण म ् ।। कबेर यं ु कबेर यं ु क पूजन से े वण लाभ, र लाभ, पैत ृ क स प ी एवं गड़े हए धन से लाभ ाि ु क कामना करने वाले य क िलये कबेर यं अ य त सफलता दायक होता ह। एसा शा ो े ु वचन ह। कबेर ु यं क पूजन से एकािधक े ो से धन का ा होकर धन संचय होता ह। ता प पर सुवण पोलीस ता प पर रजत पोलीस ता प पर (Gold Plated) (Silver Plated) (Copper) साईज मू य साईज मू य साईज मू य 2” X 2” 640 2” X 2” 460 2” X 2” 370 3” X 3” 1250 3” X 3” 820 3” X 3” 550 4” X 4” 1850 4” X 4” 1250 4” X 4” 820 6” X 6” 2700 6” X 6” 2100 6” X 6” 1450 9” X 9” 4600 9” X 9” 3700 9” X 9” 2450 12” X12” 8200 12” X12” 6400 12” X12” 4600 GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
  • 35. 35 जून 2011 ॥ शनै र तवराजः॥ ी गणेशाय नमः || तु ो ः काम पः कामदो र वन दनः |नारद उवाच || हपीडाहरः शा तो न ेशो हे रः ||१४|| या वा गणपितं राजा धमराजो युिध रः | थरासनः थरगितमहाकायो महाबलः |धीरः शनै र येमं चकार तवमु मम ||१|| महा भो महाकालः काला मा कालकालकः ||१५||िशरो म भा क रः पातु भालं छायासुतोऽवतु | आ द यभयदाता च मृ युरा द यनंदनः |कोटरा ो शौ पातु िश खक ठिनभः ु ती ||२|| शतिभ ु दियता योदिशितिथ यः ||१६|| ाणं मे भीषणः पातु मुखं बिलमुखोऽवतु | ित या मा ितिथगणनो न गणनायकः | क धौ संवतकः पातु भुजौ मे भयदोऽवतु ||३|| ित या मक तिथगणोसौ रम दयं पातु नािभं शनै रोऽवतु | योगरािशमु हता मा ू कता दनपितः भुः ||१७|| हराजः क टं पातु सवतो र वन दनः ||४|| शमीपु प यः याम ैलो याभयदायकः |पादौ म दगितः पातु कृ णः पा व खलं वपुः | नीलवासाः यािस धुन ला जनचय छ वः ||१८||र ामेतां पठे न यं सौरे नामबलैयु ताम ् ||५|| सवरोगहरो दे वः िस ो दे वगण तुतः |सुखी पु ी िचरायु स भवे ना संशयः | अ ो रशतं ना नां सौरे छायासुत य यः ||१९||सौ रः शनै रः कृ णो नीलो पलिनभः शिनः ||६|| पठे न यं त य पीडा सम ता न यित ुवम ् |शु कोदरो वशाला ो दिनर यो ु वभीषणः | कृ वा पूजां पठे म य भ मा यः तवं सदा ||२०||िश खक ठिनभो नील छाया दयन दनः ||७|| वशेषतः शिन दने पीडा त य वन यित |काल ः कोटरा ः थूलरोमावलीमुखः | ज मल ने थितवा प गोचरे ू ररािशगे ||२१||दघ िनमासगा तु शु को घोरो भयानकः ||८|| दशासु च गते सौरे तदा तविममं पठे त ् |नीलांशुः ोधनो रौ ो द घ म ु ज टाधरः | पूजये ः शिनं भ या शमीपु पा ता बरै ः ||२२||म दो म दगितः खंजो तृ ः संवतको यमः ||९|| वधाय लोह ितमां नरो दःखा मु यते ु |अतृ ः हराजः कराली च सूय पु ो र वः शशी | वाधा याऽ य हाणां च यः पठे य न यित ||२३||कजो बुधो गु ः का यो भानुजः िसं हकासुतः ||१०|| ु भीतो भया मु येत ब ो मु येत ब धनात ् |कतुदवपितबाहः े ु कृ ता तो नैऋत तथा | रोगी रोगा मु येत नरः तविममं पठे त ् ||२४||शशी म कबेर ु ईशानः सुर आ मभूः ||११|| पु वा धनवान ् ीमान ् जायते ना संशयः ||२५||व णुहरो गणपितः कमारः ु काम ई रः | नारद उवाच ||कता हता पालियता रा यभुग ् रा यदायकः ||१२|| तवं िनश य पाथ य य ोऽभू छनै रः |रा येशो छायासुतः यामला गो धनहता धन दः | द वा रा े वरः कामं शिन ा तदधे तदा ||२६|| ू रकम वधाता च सवकमावरोधकः ||१३|| || इित ी भ व यपुराणे शनै र तवराजः स पूण ः |
  • 36. 36 जून 2011 ॥ शनै र तो म ् ॥ ॥शिनव पंजरकवचम ्॥॥ ीशनै र तो म ् ॥ ी गणेशाय नमः ||अ य ीशनै र तो य दशरथ ऋ षः । शनै रो दे वता । विनयोगः- ॐ अ य ीशनै र-कवच- तो -म य क यप ुप ् छ दः । । शनै र ी यथ जपे विनयोगः। ऋ षः, अनु ु प ् छ द, शनै रो दे वता, शीं श ः, शूं क लकम ्, शनै र- ी यथ जपे विनयोगः।। नीला बरोदशरथ उवाच – नीलवपुः कर ट गृ थत ासकरो धनु मान ् |कोणोऽ तको रौ यमोऽथ ब ुः कृ णः शिनः पंगलम दोसौ रः। चतुभु जः सूय सुतः स नः सदा मम या वरदः शा तः ||१||िन यं मृ तो यो हरते च पीडां त मै नमः ीर वन दनाय ॥१॥ ा उवाच ||सुरासुराः कपु षोरगे ं ा ग धव व ाधरप नगा । शृ णु वमृ षयः सव शिनपीडाहरं महत ् |पी य त सव वषम थतेन त मैइ नमः ीर वन दनाय ॥२॥ कवचं शिनराज य सौरे रदमनु मम ् ||२||नरा नरे ाः पशवो मृ गे ा व या ये क टपतंगभृ गाः । कवचं दे वतावासं व पंजरसं कम ् |पी य त सव वषम थतेन त मैइ नमः ीर वन दनाय॥३॥ शनै र ीितकरं सवसौभा यदायकम ् ||३||दे शा दगा ण वना ण य ु सेनािनवेशाः पुरप नािन । ॐ ीशनै रः पातु भालं मे सूय न दनः |पी य त सव वषम थतेन त मैइ नमः ीर वन दनाय॥४॥ ने े छाया मजः पातु पातु कण यमानुजः ||४||ितलैय वैमाषगुडा नदानैल हे न नीला बरदानतो वा । नासां वैव वतः पातु मुखं मे भा करः सदा | न धक ठ मे क ठं भुजौ पातु महाभुजः ||५|| ीणाित म ैिनजवसरे च त मै नमः ीर वन दनाय ॥५॥ क धौ पातु शिन ैव करौ पातु- शुभ दः | यागकले यमुनातटे च सर वतीपु यजले गुहायाम ् । ू व ः पातु यम ाता क ं ु पा विसत तथा ||६||यो योिगनां यानगतो प सू म त मैनमः ीर वन दनाय॥६॥ नािभं हपितः पातु म दः पातु क टं तथा |अ य दे शा वगृ हं व तद यवारे स नरः सुखी यत ् । ऊ ममा तकः पातु यमो जानुयुगं तथा ||७||गृ हा गतो योन पुनः याित त मैनमः ीर वन दनाय॥७॥ पदौ म दगितः पातु सवागं पातु प पलः | ा वयंभूभु वन य य ाता हर शो हरते पनाक । अंगोपांगािन सवा ण र ेन ् मे सूय न दनः ||८||एक धाअ ऋ ययजुः साममूित त मै इ येतत ् कवचं द यं पठे त ् सूय सुत य यः |नमः ीर वन दनाय ॥८॥ न त य जायते पीडा ीतो भवित सूय जः ||९||श य क यः ं यतः भते िन यं सुपु ैः पशुबा धवै । यय- ज म- तीय थो मृ यु थानगतोऽ प वा |पठे ु सौ यं भु व भोगयु ः ा नोित िनवाणपदं तद ते ॥९॥ कल थो गतो वाऽ प सु ीत तु सदा शिनः ||१०|| अ म थे सूय सुते यये ज म तीयगेकोण थः प गलो ब ुः कृ णो रौ ोऽ तको यमः । | कवचं पठते िन यं न पीडा जायते विचत ् ||११||सौ रः शनै रो म दः प पलादे न सं तुतः ॥१०॥ इ येत कवचं द यं सौरे य निमतं पुरा |एतािन दश नामाअिन ात थाय यः पठे त ् । ादशाऽ मज म थदोषा नाशयते सदा |शनै रकृ ता पीडा न कदािच व यित ॥११॥ ज मल न थतान ् दोषान ् सवा नाशयते भुः ||१२||॥ इित ी ा डपुराणे ीशनै र तो ं संपूण म ् ॥ || इित ी ा डपुराणे - नारदसंवादे शिनव पंजरकवचम ् स पूण म ् ||
  • 37. 37 जून 2011 दशरथकृ त-शिन- तोदशरथकृ त शिन तो याकलं ु च जग ृ वा पौर-जानपदा दकम।।४ ् विनयोगः- ॐ अ य ीशिन- तो -म य क यप ुव त सवलोका भयमेत समागतम। ्ऋ षः, ु प ् छ दः, सौ रदवता, शं बीजम ्, िनः श ः, दे शा नगर ामा भयभीतः समागताः।।५कृ णवणित क लकम ्, धमाथ-काम-मो ा मक-चतु वध- प छ यतोराजा विस मुखान ् जान। ्पु षाथ-िस यथ जपे विनयोगः। समाधानं कम ाऽ त ूह मे जस मः।।६कर- यासः- ाजाप ये तु न े त मन ् िभ नेकतः ु जाः।शनै राय अंगु ा यां नमः। म दगतये तजनी यां नमः। अयं योगो सा य -श ा दिभः सुरैः।।७अधो जाय म यमा यां नमः। कृ णांगाय अनािमका यां तदा स च य मनसा साहसं परमं ययौ।नमः। शु कोदराय किन का यां नमः। छाया मजाय समाधाय धनु द यं द यायुधसम वतम।।८ ्करतल-कर-पृ ा यां नमः। रथमा वेगेन गतो न म डलम। ् दया द- यासः- ल योजनं थानं च योप रसं थताम।।९ ्शनै राय दयाय नमः। म दगतये िशरसे वाहा। रो हणीपृ मासा थतो राजा महाबलः।अधो जाय िशखायै वष । कृ णांगाय कवचाय हम। ु ् रथेतुका चने द ये म णर वभू षते।।१०शु कोदराय ने - याय वौष । छाया मजाय अ ाय फ । हं सवनहयैयु े महाकतु े समु छते। द ब धनः- द यमानो महार ैः कर टमुकटो वलैः।।११ ु“ॐ भूभु वः वः” यराजत तदाकाशे तीये इव भा करः।पढ़ते हए ु चार दशाओं म चुटक बजाएं। आकणचापमाकृ य सह ं िनयो जतम।।१२ ् यानः- कृ का तं शिन ा वा दशतांच रो हणीम। ्नील ुितं शूलधरं कर टनं गृ थतं ासकरं धनुध रम। ् वा दशरथं चा ेत थौतु भृ कट मुखः।।१३ ुचतुभु जं सूय सुतं शा तं व दे सदाभी करं वरे यम।। ् संहारा ं शिन वा सुराऽसुरिनषूदनम। ्अथात ् नीलम क समान का तमान, हाथ म धनुष और े ह य च भयात ् सौ र रदं वचनम वीत।।१४ ्शूल धारण करने वाले, मुकटधार , िग ु पर वराजमान, भावाथ: ाचीन काल म रघुवंश म दशरथ नामक िसश ुओं को भयभीत करने वाले, चार भुजाधार , शा त, वर च वती राजा हए, जो सात ु प के वामी थे। उनकेको दे ने वाले, सदा भ क हतकारक, सूय-पु े को म रा यकाल म एक दन योित षय ने शिन को कृ का णाम करता हँू । क अ तम चरण म दे खकर राजा से कहा क अब यह ेरघुवंशेषु व यातो राजा दशरथः पुरा। शिन रो हणी का भेदन कर जायेगा। इसको ‘रो हणी-च वत स व ेयः स द पािधपोऽभवत।।१ ् शकट-भेदन’ कहते ह। यह योग दे वता और असुर दोनकृ का ते शिनं ा वा दै व ै ा पतो ह सः। ह क िलये भय द होता है तथा इसक प ात ् बारह वष े ेरो हणीं भेदिय वातु शिनया यित सा तं।।२ का घोर दःखदायी ु अकाल पड़ता है ।शकटं भे िम यु ं सुराऽसुरभयंकरम। ् योित षय क यह बात म य क साथ राजा ने े ासधा दं तु भ व यित सुदा णम।।३ ् सुनी, इसक साथ ह नगर और जनपद-वािसय को बहत े ुएत वा तु त ा यं म िभः सह पािथवः। याकल दे खा। उस समय नगर और ु ाम क िनवासी े
  • 38. 38 जून 2011भयभीत होकर राजा से इस वप से र ा क ाथना भावाथ: शिन कहने लगा- ‘ हे राजे ! तु हारे जैसाकरने लगे। अपने जाजन क याकलता को दे खकर ु पु षाथ मने कसी म नह ं दे खा, य क दे वता, असुर,राजा दशरथ विश ऋ ष तथा मुख ा ण से कहने मनु य, िस , व ाधर और सप जाित क जीव मेरे दे खने ेलगे- ‘हे ा ण ! इस सम या का कोई समाधान मुझे मा से ह भय- त हो जाते ह। हे राजे ! मबताइए।’।।१-६ तु हार तप या और पु षाथ से अ य त स न हँू ।इस पर विश जी कहने लगे- ‘ जापित क इस न े अतः हे रघुन दन ! जो तु हार इ छा हो वर मां लो, म(रो हणी) म य द शिन भेदन होता है तो जाजन सुखी तु ह दं गा।।१५-१६।। ूकसे रह सकते ह। इस योग क द ु ै े भाव से तो ा दशरथ उवाच-एवं इ ा दक दे वता भी र ा करने म असमथ ह।।७।। स नोय द मे सौरे ! एक ा तु वरः परः।।१७व ान क यह वचन सुनकर राजा को ऐसा े तीत हआ ु रो हणीं भेदिय वा तु न ग त यं कदाचन। ्क य द वे इस संकट क घड़ को न टाल सक तो े स रतः सागरा याव ाव च ाकमे दनी।।१८उ ह कायर कहा जाएगा। अतः राजा वचार करके यािचतं तु महासौरे ! नऽ यिम छा यहं ।साहस बटोरकर द य धनुष तथा द य आयुध से यु एवम तुशिन ो ं वरल वा तु शा तम।।१९ ्होकर रथ को ती गित से चलाते हए च ु मा से भी ा यैवं तु वरं राजा कृ तकृ योऽभव दा।तीन लाख योजन ऊपर न म डल म ले गए। पुनरे वाऽ वी ु ो वरं वरम ् सु त ! ।।२०म णय तथा र से सुशोिभत वण-िनिमत रथ म बैठे भावाथ: दशरथ ने कहा- हे सूय-पु शिन-दे व ! य दहए महाबली राजा ने रो हणी क पीछे आकर रथ को ु े आप मुझ पर स न ह तो म कवल एक ह वर मांगता ेरोक दया। हँू क जब तक न दयां, सागर, च मा, सूय और पृ वीसफद े घोड़ से यु और ऊची-ऊची ँ ँ वजाओं से इस संसार म है , तब तक आप रो हणी शकट भेदनसुशोिभत मुकट म जड़े हए बहमु य र ु ु ु से काशमान कदा प न कर। म कवल यह वर मांगता हँू और मेर ेराजा दशरथ उस समय आकाश म दसरे सूय क भांित ू कोई इ छा नह ं है ।’चमक रहे थे। शिन को कृ का न क प ात ् रो हनी े तब शिन ने ‘एवम तु’ कहकर वर दे दया। इस कारन म वेश का इ छक दे खकर राजा दशरथ बाण ु शिन से वर ा करक राजा अपने को ध य समझने ेयु धनुष कान तक खींचकर भृ क टयां तानकर शिन ु लगा। तब शिन ने कहा- ‘म पुमसे परम स न हँू , तुमके सामने डटकर खड़े हो गए। और भी वर मांग लो।।१७-२०अपने सामने दे व-असुर क संहारक अ े से युदशरथ को खड़ा दे खकर शिन थोड़ा डर गया और हं सते ाथयामास ा मा वरम यं शिनं तदा।हए ु राजा से कहने लगा।।८-१४ नभे यं न भे यं वया भा करन दन।।२१ ादशा दं तु दिभ ं ु न कत यं कदाचन।शिन उवाच- क ितरषामद या च ैलो ये तु भ व यित।।२२पौ षं तव राजे ! मया ं न क यिचत। ् एवं वरं तु स ा य रोमा स पािथवः।दे वासुरामनु याशऽच िस - व ाधरोरगाः।।१५ रथोप रधनुः था यभू वा चैव कृ ता जिलः।।२३मया वलो कताः सवभयं ग छ त त णात। ् या वा सर वती दे वीं गणनाथं वनायकम। ्तु ोऽहं तव राजे ! तपसापौ षेण च।।१६ राजा दशरथः तो ं सौरे रदमथाऽकरोत।।२४ ्वरं ूह दा यािम वे छया रघुन दनः !
  • 39. 39 जून 2011भावाथ: तब राजा ने स न होकर शिन से दसरा वर ू नम कार है । जनक बड़े-बड़े ने , पीठ म सटा हआ पेट े ुमांगा। तब शिन कहने लगे- ‘हे सूय वंिशयो क पु े तुम और भयानक आकार है , उन शनै र दे व को नम कारिनभय रहो, िनभय रहो। बारह वष तक तु हारे रा य म है ।।२६अकाल नह ं पड़े गा। तु हार यश-क ित तीन लोक म जनक शर र का ढांचा फला हआ है , जनक रोएं बहत े ै ु े ुफलेगी। ऐसा वर पाकर राजा ै स न होकर धनुष-बाण मोटे ह, जो ल बे-चौड़े क तु सूक शर र वाले ह तथा ेरथ म रखकर सर वती दे वी तथा गणपित का यान जनक दाढ़ काल प ह, उन शिनदे व को बार-बार णामकरक शिन क े तुित इस कार करने लगा।।२१-२४ है ।।२७ हे शने ! आपक ने े कोटर क समान गहरे ह, आपक ेदशरथकृ त शिन तो ओर दे खना क ठन है , आप घोर रौ , भीषण औरनम: कृ णाय नीलाय िशितक ठ िनभाय च। वकराल ह, आपको नम कार है ।।२८नम: काला न पाय कृ ता ताय च वै नम: ।।२५।। वलीमूख ! आप सब कछ भ ण करने वाले ह, आपको ुनमो िनमास दे हाय द घ म ु जटाय च । नम कार है । सूयन दन ! भा कर-पु ! अभय दे ने वालेनमो वशालने ाय शु कोदर भयाकृ ते।।२६ दे वता ! आपको णाम है ।।२९नम: पु कलगा ाय थूलरो णेऽथ वै नम:। नीचे क ओर रखने वाले शिनदे व ! आपकोनमो द घाय शु काय कालदं नमोऽ तु ते।।२७ नम कार है । संवतक ! आपको णाम है । म दगित सेनम ते कोटरा ाय दनर याय ु वै नम: । चलने वाले शनै र ! आपका तीक तलवार क समान ेनमो घोराय रौ ाय भीषणाय कपािलने।।२८ है , आपको पुनः-पुनः णाम है ।।३०नम ते सवभ ाय बलीमुख नमोऽ तु ते। आपने तप या से अपनी दे ह को द ध कर िलया है , आपसूय पु नम तेऽ तु भा करे ऽभयदाय च ।।२९ सदा योगा यास म त पर, भूख से आतुर और अतृअधो : े नम तेऽ तु संवतक नमोऽ तु ते। रहते ह। आपको सदा सवदा नम कार है ।।३१नमो म दगते तु यं िन ंशाय नमोऽ तुते ।।३० ानने ! आपको णाम है । का यपन दन सूय पुतपसा द ध-दे हाय िन यं योगरताय च । शिनदे व आपको नम कार है । आप स तु होने परनमो िन यं ुधाताय अतृ ाय च वै नम: ।।३१ रा य दे दे ते ह और होने पर उसे त ण हर लेते ानच ुन म तेऽ तु क यपा मज-सूनवे । ह।।३२तु ो ददािस वै रा यं ो हरिस त णात ् ।।३२ दे वता, असुर, मनु य, िस , व ाधर और नाग- ये सबदे वासुरमनु या िस - व ाधरोरगा:। आपक पड़ने पर समूल न हो जाते ह।।३३ वया वलो कता: सव नाशं या त समूलत:।।३३ दे व मुझ पर स न होइए। म वर पाने क यो य हँू और े साद कु मे सौरे ! वारदो भव भा करे । आपक शरण म आया हँू ।।३४एवं तुत तदा सौ र हराजो महाबल: ।।३४भावाथ: जनक शर र का वण कृ ण नील तथा भगवान ् े एवं तुत तदा सौ र हराजो महाबलः।शंकर क समान है, उन शिन दे व को नम कार है। जो े अ वी च शिनवा यं रोमा च पािथवः।।३५जगत ् क िलए काला न एवं कृ ता त े प ह, उन शनै र तु ोऽहं तव राजे ! तो ेणाऽनेन सु त।को बार-बार नम कार है ।।२५ एवं वरं दा यािम य े मनिस वतते।।३६जनका शर र ककाल जैसा मांस-ह न तथा ं जनक भावाथ: राजा दशरथ क इस े कार ाथना करने परदाढ़ -मूंछ और जटा बढ़ हई है , उन शिनदे व को ु ह क राजा महाबलवान ् सूय-पु े शनै र बोले- ‘उ म
  • 40. 40 जून 2011 त क पालक राजा दशरथ ! तु हार इस े तुित से म पूजिय वा जपे तो ं भू वा चैव कृ ता जिलः।अ य त स तु हँू । रघुन दन ! तुम इ छानुसार वर त य पीडां न चैवऽहं क र यािम कदाचन।।४९ ्मांगो, म अव य दं गा।।३५-३६ ू र ािम सततं त य पीडां चा य ह य च। अनेनैव कारे ण पीडामु ं जग वेत।।५० ्दशरथ उवाच- भावाथ: शिन ने कहा- ‘हे राजन ् ! य प ऐसा वर म स नो यद मे सौरे ! वरं दे ह ममे सतम। ् कसी को दे ता नह ं हँू , क तु स तु होने क कारण ेअ भृ ित- पंगा ! पीडा दे या न क यिचत।।३७ ् तुमको दे रहा हँू । तु हारे ारा कहे गये इस तो कोभावाथ: सादं कु मे सौरे ! वरोऽयं मे महे सतः। जो मनु य, दे व अथवा असुर, िस तथा व ान आ दराजा दशरथ बोले- ‘ भु ! आज से आप दे वता, असुर, पढ़गे, उ ह शिन बाधा नह ं होगी। जनक गोचर म ेमनु य, पशु, प ी तथा नाग- कसी भी ाणी को पीड़ा न महादशा या अ तदशा म अथवा ल न थान, तीय,द। बस यह मेरा य वर है ।।३७ चतुथ, अ म या ादश थान म शिन हो वे य यद पव होकर ातः, म या और सायंकाल क समय इस ेशिन उवाच- तो को यान दे कर पढ़गे, उनको िन त प से मअदे य तु वरौऽ माकं तु ोऽहं च ददािम ते।।३८ पी ड़त नह ं क ं गा।।३८-४१ वया ो ं च मे तो ं ये पठ य त मानवाः। हे राजन ! जनको मेर कृ पा ा करनी है , उ ह चा हएदे वऽसुर-मनु या िस व ाधरोरगा।।३९ क वे मेर एक लोहे क मीित बनाएं, जसक चारन तेषां बाधते पीडा म कृ ता वै कदाचन। भुजाएं हो और उनम धनुष, भाला और बाण धारण कएमृ यु थाने चतुथ वा ज म- यय- तीयगे।।४० हए हो।* इसक प ात ् दस हजार क ु े सं या म इसगोचरे ज मकाले वा दशा व तदशासु च। तो का जप कर, जप का दशांश हवन करे , जसकयः पठे - स यं वा शुिचभू वा समा हतः।।४१ साम ी काले ितल, शमी-प , घी, नील कमल, खीर, चीनीन त य जायते पीडा कृ ता वै ममिन तम। ् िमलाकर बनाई जाए। इसक प ात ् घी तथा दध से े ू ितमा लोहजां कृ वा मम राजन ् चतुभु जाम।।४२ ् िनिमत पदाथ से ा ण को भोजन कराएं। उपरोवरदां च धनुः-शूल-बाणां कतकरां शुभाम। ् शिन क ितमा को ितल क तेल या ितल क ढे र म े ेआयुतमेकज यं च त शांशेन होमतः।।४३ रखकर विध- वधान-पूव क म ारा पूजन कर, ककम ुं ुकृ णै तलैः शमीप ैध ृ वा ै न लपंकजैः। इ या द चढ़ाएं, नीली तथा काली तुलसी, शमी-प मुझेपायससंशकरायु ं घृ तिम ं च होमयेत्।।४४ स न करने क िलए अ पत कर। े ा णा भोजये वश या घृ त-पायसैः। काले रं ग क व , बैल, दध दे ने वाली गाय- बछड़े स हत े ूतैले वा तेलराशौ वा य व यथा विधः।।४५ दान म द। हे राजन ! जो म ो ारपूव क इस तो सेपूजनं चैव म ेण ककमा ं ुं ु च लेपयेत। ् मेर पूजा करता है , पूजा करक हाथ जोड़कर इस े तोनी या वा कृ णतुलसी शमीप ा दिभः शुभैः।।४६ का पाठ करता है , उसको म कसी कार क पीड़ा नह ंद ा मे ीतये य तु कृ णव ा दकं शुभम। ् होने दं गा। इतना ह नह ं, अ य ू ह क पीड़ा से भी मधेनुं वा वृ षभं चा प सव सां च पय वनीम।।४७ ् उसक र ा क ं गा। इस तरह अनेक कार से म जगतएवं वशेषपूजां च म ारे क ते ु नृ प ! को पीड़ा से मु करता हँू ।।।४२-५०म ो ार वशेषेण तो ेणऽनेन पूजयेत।।४८ ्
  • 41. 41 जून 2011शिन अ ो रशतनामाविलः ॐ वैरा यदाय नमः ॥ ॐ भ याय नमः ॥ ॐ वीराय नमः ॥ ॐ पावनाय नमः ॥ॐ शनै राय नमः ॥ ॐ वीतरोगभयाय नमः ॥ ॐ धनुम डलसं थाय नमः ॥ॐ शा ताय नमः ॥ ॐ वप पर परे शाय नमः ॥ ॐ धनदाय नमः ॥ॐ सवाभी दाियने नमः ॥ ॐ व व ाय नमः ॥ ॐ धनु मते नमः ॥ॐ शर याय नमः ॥ ॐ गृ नवाहाय नमः ॥ ॐ तनु काशदे हाय नमः ॥ॐ वरे याय नमः ॥ ॐ गूढाय नमः ॥ ॐ तामसाय नमः ||ॐ सवशाय नमः ॥ ॐ कमा गाय नमः ॥ ू ॐ अशेषजनव ाय नमः ॥ॐ सौ याय नमः ॥ ॐ क पणे नमः ॥ ु ॐ वशेशफलदाियने नमः ॥ॐ सुरव ाय नमः ॥ ॐ क सताय नमः ॥ ु ॐ वशीकृ तजनेशाय नमः ॥ॐ सुरलोक वहा रणे नमः ॥ ॐ गुणा याय नमः ॥ ॐ पशूनां पतये नमः ॥ॐ सुखासनोप व ाय नमः ॥ ॐ गोचराय नमः ॥ ॐ खेचराय नमः ॥ॐ सु दराय नमः ॥ ॐ अ व ामूलनाशाय नमः ॥ ॐ खगेशाय नमः ॥ॐ घनाय नमः ॥ ॐ व ा व ा व पणे नमः || ॐ घननीला बराय नमः ॥ॐ घन पाय नमः ॥ ॐ आयु यकारणाय नमः ॥ ॐ का ठ यमानसाय नमः ॥ॐ घनाभरणधा रणे नमः ॥ ॐ आपद ु नमः ॥ ॐ आयगण तु याय नमः ॥ॐ घनसार वलेपाय नमः ॥ ॐ व णुभ ाय नमः ॥ ॐ नील छ ाय नमः ॥ॐ ख ोताय नमः ॥ ॐ विशने नमः ॥ ॐ िन याय नमः ॥ॐ म दाय नमः ॥ ॐ व वधागमवे दने नमः ॥ ॐ िनगु णाय नमः ॥ॐ म दचे ाय नमः ॥ ॐ विध तु याय नमः ॥ ॐ गुणा मने नमः ॥ॐ महनीयगुणा मने नमः ॥ ॐ व ाय नमः ॥ ॐ िनरामयाय नमः ॥ॐ म यपावनपदाय नमः ॥ ॐ व पा ाय नमः ॥ ॐ िन ाय नमः ॥ॐ महे शाय नमः ॥ ॐ व र ाय नमः ॥ ॐ व दनीयाय नमः ॥ॐ छायापु ाय नमः ॥ ॐ ग र ाय नमः || ॐ धीराय नमः ॥ॐ शवाय नमः ॥ ॐ व ा कशधराय नमः ॥ ु ॐ द यदे हाय नमः ॥ॐ शततूणीरधा रणे नमः ॥ ॐ वरदाभयह ताय नमः ॥ ॐ द नाितहरणाय नमः ॥ॐ चर थर वभावाय नमः ॥ ॐ वामनाय नमः ॥ ॐ दै यनाशकराय नमः ॥ॐ अच चलाय नमः ॥ ॐ ये ाप ीसमेताय नमः ॥ ॐ आयजनग याय नमः ॥ॐ नीलवणाय नमः ॥ ॐ े ाय नमः ॥ ॐ ू राय नमः ॥ॐ िन याय नमः ॥ ॐ िमतभा षणे नमः ॥ ॐ ू रचे ाय नमः ॥ॐ नीला जनिनभाय नमः ॥ ॐ क ौघनाशक नमः ॥ ॐ काम ोधकराय नमः ॥ॐ नीला बर वभूशणाय नमः ॥ ॐ पु दाय नमः ॥ ॐ कल पु श ु वकारणाय नमः ॥ॐ िन लाय नमः ॥ ॐ तु याय नमः ॥ ॐ प रपो षतभ ाय नमः ॥ॐ वे ाय नमः ॥ ॐ तो ग याय नमः || ॐ परभीितहराय नमः ॥ॐ विध पाय नमः ॥ ॐ भ व याय नमः ॥ ॐ भ संघमनोऽभी फलदाय नमः ॥ॐ वरोधाधारभूमये नमः ॥ ॐ भानवे नमः ॥ ॥ इित शिन अ ो रशतनामाविलःॐ भेदा पद वभावाय नमः ॥ ॐभानुपु ाय नमः ॥ स पूण म् ॥ॐ व दे हाय नमः ॥
  • 42. 42 जून 2011 राम र ा यंराम र ा यं सभी भय, बाधाओं से मु व काय म सफलता ाि हे तु उ म यं ह। जसके योगसे धन लाभ होता ह व य का सवागी वकार होकर उसे सुख-समृ , मानस मान क ाि होतीह। राम र ा यं सभी कार क अशुभ े भाव को दर कर ू य को जीवन क सभी कार कक ठनाइय से र ा करता ह। व ानो क मत से जो े य भगवान राम क भ े ह या ीहनुमानजी क भ े ह उ ह अपने िनवास थान, यवसायीक थान पर राम र ा यं को अव य थापीत करना चा हये जससे आने वाले संकटो से र ा हो उनका जीवन सुखमय यतीत हो सकेएवं उनक सम त आ द भौितक व आ या मक मनोकामनाएं पूण हो सक। े ता प पर सुवण पोलीस ता प पर रजत पोलीस ता प पर (Gold Plated) (Silver Plated) (Copper) साईज मू य साईज मू य साईज मू य 2” X 2” 640 2” X 2” 460 2” X 2” 370 3” X 3” 1250 3” X 3” 820 3” X 3” 550 4” X 4” 1850 4” X 4” 1250 4” X 4” 820 6” X 6” 2700 6” X 6” 2100 6” X 6” 1450 9” X 9” 4600 9” X 9” 3700 9” X 9” 2450 12” X12” 8200 12” X12” 6400 12” X12” 4600 GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
  • 43. 43 जून 2011 व ा ाि हे तु सर वती कवच और यं आज क आधुिनक युग म िश ा े ाि जीवन क मह वपूण आव यकताओं म से एक है । ह द ू धम म व ाकअिध ा ी दे वी सर वती को माना जाता ह। इस िलए दे वी सर वती क पूजा-अचना से कृ पा ा करने से बु कशा ु एवंती होती है । आज क सु वकिसत समाज म चार ओर बदलते प रवेश एवं आधुिनकता क दौड म नये-नये खोज एवं ेसंशोधन क आधारो पर ब चो क बौिधक े े तर पर अ छे वकास हे तु विभ न पर ा, ितयोिगता एवं ित पधाएंहोती रहती ह, जस म ब चे का बु मान होना अित आव यक हो जाता ह। अ यथा ब चा पर ा, ितयोिगता एवं ित पधा म पीछड जाता ह, जससे आजक पढे िलखे आधुिनक बु े से सुसंप न लोग ब चे को मूख अथवा बु ह नया अ पबु समझते ह। एसे ब चो को ह न भावना से दे खने लोगो को हमने दे खा ह, आपने भी कई सैकडो बारअव य दे खा होगा? ऐसे ब चो क बु को कशा ु एवं ती हो, ब चो क बौ क मता और मरण श का वकास हो इस िलएसर वती कवच अ यंत लाभदायक हो सकता ह। सर वती कवच को दे वी सर वती क परं म दलभ तेज वी मं ो ारा पूण मं िस े ू और पूण चैत ययु कया जाताह। ज से जो ब चे मं जप अथवा पूजा-अचना नह ं कर सकते वह वशेष लाभ ा कर सक और जो ब चे पूजा- ेअचना करते ह, उ ह दे वी सर वती क कृ पा शी ा हो इस िलये सर वती कवच अ यंत लाभदायक होता ह। सर वती कवच : मू य: 280 और 370 सर वती यं :मू य : 280 से 1450 तक मं िस प ना गणेश भगवान ी गणेश बु और िश ा क कारक े ह बुध क अिधपित दे वता ह। प ना गणेश बुध क े े सकारा मक भाव को बठाता ह एवं नकारा मक भाव को कम करता ह।. प न गणेश के भाव से यापार और धन म वृ म वृ होती ह। ब चो क पढाई हे तु भी वशेष फल द ह प ना गणेश इस के भाव से ब चे क बु कशा ू होकर उसक आ म व ास म भी वशेष े वृ होती ह। मानिसक अशांित को कम करने म मदद करता ह, य ारा अवशो षत हर व करण शांती दान करती ह, य क शार र क तं को िनयं त करती ह। जगर, फफड़े , े े े जीभ, म त क और तं का तं इ या द रोग म सहायक होते ह। क मती प थर मरगज क बने े होते ह। Rs.550 से Rs.8200 तक GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
  • 44. 44 जून 2011 फ टक गणेश फ टक ऊजा को क त करने म सहायता मानागया ह। इस के भाव से यह य को नकारा मक उजा से बचाता हएवं एक उ म गुणव ा वाले फ टक से बनी गणेश ितमा को और अिधक भावी और प व माना जाता ह। मू य Rs.550 से Rs.8200 तक तं र ाकवच को धारण करने से य क उपर कगई सम त तां क बाधाएं दर होती ह, उसी क साथ ह े ू ेधारण कता य पर कसी भी कार क नकार मन श यो का क भाव नह ं होता। इस कवच क ु े भाव से इषा- े ष रखने वाले सभी लोगो ारा होने वाले द ु भावो से र ाहोती ह। मू य मा : Rs.730 श ु वजय कवचश ु वजय कवच धारण करने से य को श ु से संबंिधत सम त परे शािनओ से वतः ह छटकारा िमल जाता ह। ुकवच के भाव से श ु धारण कता य का चाहकर कछ नह ु बगड सकते। मू य मा :Rs: 640 मं िस मूंगा गणेश मूंगा गणेश को व ने र और िस वनायक क प म जाना जाता ह। इस िलये मूंगा गणेश पूजन े क िलए अ यंत लाभकार ह। गणेश जो व न नाश एवं शी फल क ाि हे तु वशेष लाभदायी ह। े मूंगा गणेश घर एवं यवसाय म पूजन हे तु था पत करने से गणेशजी का आशीवाद शी ा होता ह। यो क लाल रं ग और लाल मूंगे को प व माना गया ह। लाल मूंगा शार रक और मानिसक श य का वकास करने हे तु वशेष सहायक ह। हं सक वृ और गु से को िनयं त करने हे तु भी मूंगा गणेश क पूजा लाभ द ह। एसी लोकमा यता ह क मंगल गणेश को था पत करने से भगवान गणेश क कृ पा श चोर , लूट, आग, अक मात से वशेष सुर ा ा होती ह, ज से घर म या दकान म उ नती एवं सुर ा हे तु मूंगा गणेश था पत कया जासकता ह। ु ाण ित त मूंगा गणेश क थापना से भा योदय, शर र म खून क कमी, गभपात से बचाव, बुखार,चेचक, पागलपन, सूजन और घाव, यौन श म वृ , श ु वजय, तं मं क द ु े भा, भूत- ेत भय, वाहन दघटनाओं, हमला, ुचोर, तूफान, आग, बजली से बचाव होता ह। एवं ज म कडली म मंगल ुं ह क पी ड़त होने पर िमलने वाले हािनकर भाव से ेमु िमलती ह।जो य उपरो लाभ ा करना चाहते ह उनक िलये मं िस मूंगा गणेश अ यिधक फायदे मंद ह। ेमूंगा गणेश क िनयिमत प से पूजा करने से यह अ यिधक भावशाली होता ह एवं इसक शुभ भाव से सुख सौभा य क ाि ेहोकर जीवन क सारे संकटो का वतः िनवारण होजाता ह। े Rs.550 से Rs.8200 तक
  • 45. 45 जून 2011 नवर ज ड़त ी यंशा वचन क अनुसार शु े सुवण या रजत म िनिमत ी यं क चार और य द नवर े जड़वा ने पर यह नवरज ड़त ी यं कहलाता ह। सभी र ो को उसक िन े त थान पर जड़ कर लॉकट क े े प म धारण करने से य कोअनंत ए य एवं ल मी क ाि होती ह। य को एसा आभास होता ह जैसे मां ल मी उसक साथ ह। नव ह को े ी यं क साथ लगाने से े ह क अशुभ दशा का धारण करने वाले य पर भाव नह ं होता ह। गले म होने केकारण यं पव रहता ह एवं नान करते समय इस यं पर पश कर जो जल बंद ु शर र को लगते ह, वह गंगाजल क समान प व े होता ह। इस िलये इसे सबसे तेज वी एवं फलदािय कहजाता ह। जैसे अमृ त से उ म कोईऔषिध नह , उसी ं कार ल मी ाि क िलये े ी यं से उ म कोई यं संसार म नह ं ह एसा शा ो वचन ह। इस कार क नवर े ज ड़त ी यं गु व कायालय ारा शुभ मुहू त म ाण ित त करक बनावाए जाते ह। े अ ल मी कवचअ ल मी कवच को धारण करने से य पर सदा मां महा ल मी क कृ पा एवं आशीवाद बना रहताह। ज से मां ल मी क अ े प (१)-आ द ल मी, (२)-धा य ल मी, (३)-धैर य ल मी, (४)-गजल मी, (५)-संतान ल मी, (६)- वजय ल मी, (७)- व ा ल मी और (८)-धन ल मी इन सभी पो का वतः अशीवाद ा होता ह। मू य मा : Rs-1050 मं िस यापार वृ कवच यापार वृ कवच यापार क शी े उ नित क िलए उ म ह। चाह कोई भी यापार हो अगर उसम लाभ क े े थान पर बार-बार हािन हो रह ह। कसी कार से यापार म बार-बार बांधा उ प न हो रह हो! तो संपूण ाण ित त मं िस पूणचैत य यु यापात वृ यं को यपार थान या घर म था पत करने से शी ह यापार वृ एवं िनत तर लाभ ाहोता ह। मू य मा : Rs.370 & 730 मंगल यं( कोण) मंगल यं को जमीन-जायदाद क ववादो को हल करने क काम म लाभ दे ता ह, इस क अित र े े े य कोऋण मु हे तु मंगल साधना से अित शी लाभ ा होता ह। ववाह आ द म मंगली जातक क क याण क िलए े ेमंगल यं क पूजा करने से वशेष लाभ ा होता ह। मू य मा Rs- 550 GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
  • 46. 46 जून 2011 गणेश ल मी यं ाण- ित त गणेश ल मी यं को अपने घर-दकान-ओ फस-फ टर म पूजन ु ै थान, ग ला या अलमार म था पतकरने यापार म वशेष लाभ ा होता ह। यं के भाव से भा य म उ नित, मान- ित ा एवं यापर म वृ होती हएवं आिथक थम सुधार होता ह। गणेश ल मी यं को था पत करने से भगवान गणेश और दे वी ल मी का संयुआशीवाद ा होता ह। Rs.550 से Rs.8200 तक मंगल यं से ऋण मुमंगल यं को जमीन-जायदाद क ववादो को हल करने क काम म लाभ दे ता ह, इस क अित र े े े य को ऋणमु हे तु मंगल साधना से अित शी लाभ ा होता ह। ववाह आ द म मंगली जातक क क याण क िलए मंगल े ेयं क पूजा करने से वशेष लाभ ा होता ह। ाण ित त मंगल यं क पूजन से भा योदय, शर र म खून क कमी, ेगभपात से बचाव, बुखार, चेचक, पागलपन, सूजन और घाव, यौन श म वृ , श ु वजय, तं मं क द ु े भा, भूत- ेत भय,वाहन दघटनाओं, हमला, चोर इ याद से बचाव होता ह। ु मू य मा Rs- 550 कबेर यं ुकबेर यं ु क पूजन से े वण लाभ, र लाभ, पैत ृ क स प ी एवं गड़े हए धन से लाभ ाि ु क कामना करने वाले य केिलये कबेर यं अ य त सफलता दायक होता ह। एसा शा ो ु वचन ह। कबेर यं ु क पूजन से एकािधक े ो से धन का ा होकर धन संचय होता ह। ता प पर सुवण पोलीस ता प पर रजत पोलीस ता प पर (Gold Plated) (Silver Plated) (Copper) साईज मू य साईज मू य साईज मू य 2” X 2” 640 2” X 2” 460 2” X 2” 370 3” X 3” 1250 3” X 3” 820 3” X 3” 550 4” X 4” 1850 4” X 4” 1250 4” X 4” 820 6” X 6” 2700 6” X 6” 2100 6” X 6” 1450 9” X 9” 4600 9” X 9” 3700 9” X 9” 2450 12” X12” 8200 12” X12” 6400 12” X12” 4600 GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
  • 47. 47 जून 2011 मािसक रािश फल  िचंतन जोशी मेष: 1 से 15 जून 2011: अपने यय पर िनय ण रखने का यास कर और ऋण लेने से बचे और पुराने ऋण का भुगतान करने का यास करे । फर भी आपको जो खम वाले काय से बचना चा हये। माता- पता का वा य आपको िचंितत कर सकता ह। जीवन साथी से सहयोग ा होगा। शुभ समाचार क ाि हो सकती ह। भूिम-भवन से संबंिधअ मामलो म िचंता रह सकती ह। 16 से 30 जून 2011: मह व पूणा काय को थगीत करना या कसी और को दे ना नु शान दे ह हो सकता ह। अपनी बौ क यो यता से आिथक लाभ करगे। कसी से वाद- ववाद करने से बचे। संतान का वा य िचंता का वषय हो सकता ह। वा यके ित सचेत रहने का यास करने से वा य सुख ा हो सकता ह। जीवन साथी क साथ यवहार कशल रह बे खा पन े ूनु शान कर सकता ह।वृ षभ: 1 से 15 जून 2011: नौकर - यवसाय म मह वपूण बदलाव हो सकते ह।भागीदार क काय से भी धन लाभ ा करने क इ छा जाग सकती ह। दर थ ू थानो से धन लाभ ा हो सकता ह। अ यािधक भाग-दौड क कारण े वा य भा वत हो सकता ह और आपको थोडे समय क िलये आराम करना पड सकता ह। ेअतः सावधान रहे । पूरानी प रवा रक सम याएं सुलझ सकती ह।16 से 30 जून 2011: इस अविध से पूव कये गय पूण प र म एवं मेहनत क काय का ेिन त लाभ ा होगे। ऋण संब धी काय का लेन-दे न शुभ फलदायी िस हो सकतेह। आपक मानिसक िचंता क कारण दां प य सुख म कमी हो सकती ह। आपक काय े ेम अनाव य व न बाधाएं आसकती ह, आपक काय कछ समय े ु क सकते ह। यासो से ेम संब ध म सुधार होगा। िमथुन: 1 से 15 जून 2011: नौकर - यवसाय म िनणय म वलंब के कारण मह पूण योजनाएं थिगत हो सकती ह। वाणी एवं ोध पर िनयं ण रखे अ यथा आपक बने े बनाये काय बगड सकते ह। माता क वा े यके ित िचंता बढ स ह। िम एवं र ते दार अिधक से अिधक समय यतीत करने क इ छा जागृ त हो सकती ह। अ ववा हत ह तो ववाह क योग बन रहे ह। े 16 से 30 जून 2011: इस अविध से पूव कये गय पूण प र म एवं मेहनत का फल िमलने क योग बनने लगगे। े ित पधा मक काय एवं पूं ज िनवेश क काय म हानी े होने क योग बन रह ह। अित र े सावधानी बत। कोट-कचहर क काय म सावधानी बत ेआपको वरोिध एवं श ु प से परे शानी हो सकती ह। जीवन साथी का वा य िचंता का वषय हो सकता ह।
  • 48. 48 जून 2011कक: 1 से 15 जून 2011: आ म व ास क बल पर अपनी आय म वृ े कर सकते ह। मु कल से मु कल काय का हलिनकालने म आप समथ हो सकते ह। चल-अचल संप या कसी घरे लू मामल मबदलाव हो सकता है । आपको मानिसक अ थरता का अनुभव हो सकता ह। आ मव ास से आगे बढते रहने का यास कर। वपर त िलंग क ित आपका अिधक आकषण ेरहे गा।16 से 30 जून 2011: आपक कय का बोझ भी बढ सकता ह। वरोिध एवं श ु प े सेपरे शानीहो सकती ह। आपक मानिसक अ थतार मह वपूण िनणय लेने म वलंब करसकती ह। हताशा और िनराशा वाले वचारो को यागदे । वा य क ित सचेत रहने का े यास करने से वा य सुख ा हो सकता ह। आप उजा व उ साह क कमी महसूस करइस िलये सकारा मक ी कोण रखे।िसंह:1 से 15 जून 2011: धन स ब धत वषय म अ यािधक यय होने क स भावना है । ऋण स ब धत लेना दे न म सावधनी रखे। आपक अधीन थ कमचार आपक आ ा का पालन करगे। अपने कम क े े सकारा मक और नकारा मक प पर वचार कर काय करना लाभदायक रहे गा। आप उजा व उ साह क कमी महसूस कर सकते ह इस िलये सकारा मक ी कोण रखे। 16 से 30 जून 2011: पूण प र म एवं महे नत से कये गये काय लाभ द रहे गे। आिथक े से बाधाओं क योग बने हए ह। रोग से लडने क श े ु आपम अिधक जागृ त हो सकती ह ज से आपका वा थय अनुकल बना रहे गा। श ु एवं वरोिध पर ु आपका दबदबा बना रहे गा। दर थ ू थानो से धन लाभ क संभावनाएं बन सकती है । प रवार जनो से असहयोग ा होता महसूस कर सकते ह।क या: 1 से 15 जून 2011: इस माह आप नया सौदा और नयी प रयोजना क शु आतकरना क ठन हो सकता है । पूव म कए गए कम से लाभ क ाि होगी। व र ो जनसे आिशवाद और मदद ा होने क स भावना ह। ान के े म आपको िस ा होगी। प रवार जनो क असहयोग से मानिसक अ थरता हो सकती ह। े यय परिनय ण रखने से लाभ ा होगा।16 से 30 जून 2011: धािमक और आ या मक काय म िच बढे गी। आिथक थतीकमजोर हो सकती ह। िनः वाथ वभाव से कगई अपनो क सेवा एवं मदद का आपको लाभ नह ं िमलेगा। इस अविधम क गई ाथना और पूजा से भ व य म लाभ िमलेगा। ऋण से स ब धत लेन-दे न म अित र सावधानी रखे। वा य उ म रहे गा खान-पान म सावधानी रखे।
  • 49. 49 जून 2011तुला: 1 से 15 जून 2011: यापा रक साझेदार और िम ो से लेन-दे न म सावधानी बत धन हानी हो सकती ह और र तो म द ू रया बन सकती ह। प रवार और र तेदार से संबंधो म सुधार होगा। आपके ारा कये गये धािमक और आ या मक काय िन त ह उ वल भ व य का संकत है । इस दौरान भूिम-भवन इ या द म पूं ज िनवेश े लाभदायक हो सकता ह। 16 से 30 जून 2011: नई प रयोजना से संबंिध िनणय लेना लाभ द हो सकता ह। वरोिध प को परा त कर धन लाभ ा कर सकते ह पर अनाव यक कलह मपडने से बचना अिधक लाभ द हो सकता ह। सां का रक सुख क ाि होगी। अपने बु और ववेक से अपने दोषोको दर करने का ू यास कर। जीवन साथी से सहयोग ा होगा। शुभ समाचार क ाि हो सकती ह।वृ क:1 से 15 जून 2011: यापा रक साझेदार और िम ो से लेन-दे न म सावधानी बत धनहानी हो सकती ह और र तो म द ू रया बन सकती ह। प रवार और र तेदार से संबंधोम सुधार होगा। आपके ारा कये गये धािमक और आ या मक काय िन त हउ वल भ व य का संकत है । इस दौरान भूिम-भवन इ या द म पूं ज िनवेश लाभदायक ेहो सकता ह।16 से 30 जून 2011: नई प रयोजना से संबंिध िनणय लेना लाभ द हो सकता ह।वरोिध प को परा त कर धन लाभ ा कर सकते ह पर अनाव यक कलह म पडनेसे बचना अिधक लाभ द हो सकता ह। सां का रक सुख क ाि होगी। अपने बु और ववेक से अपने दोषो को दर ूकरने का यास कर। जीवन साथी से सहयोग ा होगा। शुभ समाचार क ाि हो सकती ह।धनु: 1 से 15 जून 2011: आपके ारा मह व पूण काय हे तु कये गये यास सफल होग। गलत िनणयो क कारण आिथक प े कमजोर हो सकता ह। आपक भौितक सुख-साधनो े म वृ हो सकती ह। अनाव यक कसी से वाद- ववाद करने से बचे अ यथा आपको हार का सामना एवं अपमानी होना पड सकता ह। दा प य जीवन क सम याओं को दर ू करने का यास करे । 16 से 30 जून 2011: आपक मह वपूण योजनाएं सफल हो सकती ह। फालतू खच एवं अनाव यक कज क कारण आपक आिथक अिधक कमजोर हो सकती ह। पित-प ी ेदोनो म आपसी तालमेल से दांप य जीवन सुख म भी वृ होगी। अपनी मता से अिधक काय करे ने क वृ ित का याग कर। माता के वा य से संबंिधत िचंता हो सकती ह। आपका का वा य थोडा ितकल हो सकता है । ू
  • 50. 50 जून 2011मकर: 1 से 15 जून 2011: इस अविध म आपको उ म और अनुकल फल ू ा हो सकते है । उचािधकार आपक मह व को समझगे और आपक गुण े े क शंसा करगे। आपक पदो नित क संभावना बन रह है । िम और र तेदार क साथ शांित और े स ता महसूस होगी। भूिम- भवन-वाहन के य- व य से लाभ ा हो सकता ह। गु वरोिध- श ुओं क कारण आिथक हािन हो सकती है । े 16 से 30 जून 2011: आप क िलए आिथक े ी से लाभदायक रहे गा। इस समय आप मह वपूण िनणय ले सकते है और नयी प रयोजाना शु कर सकते ह। मह वपूणकाय म ल ग क िनगाह आपक उपर टक रहे गी। कसी काय म लापरवाह नु शान दे सकती ह। आप अपने अंदर ेआ मबल महसूस करगे। अनाच यक खच होने क कारण परे शानी हो सकती ह। ेकभ: ुं1 से 15 जून 2011: आप क िलए आिथक े ी से लाभदायक रहे गा। इस समय आपमह वपूण िनणय ले सकते है और नयी प रयोजाना शु कर सकते ह। श ु एवं वरोिधप क साथ म वाद- ववाद करने से बचे अ यथा आपको हार का सामना पड सकता ेह। या ा करते समय सावधान और सतक रहे । आपको मानिसक अ थरता का अनुभवहो सकता ह। अ यािधक यय से परे शानी हो सकती ह।16 से 30 जून 2011: इस अविध म आय क नये े ोत ा होने क योग बन रहे ह। ेअनाच यक खच होने क कारण परे शानी हो सकती ह। े भूिम-भवन इ याद म पूं जिनवेश लाभ द रहे गा। नौकर - यवसाय म उनाित होगी। इस दौरान यवसायीक या ाएं लाभदायक हो सकती ह। िम एवंर ते दार क साथ अ छा समय े यतीत कर सकते ह। वाहन इ याद चलाते समय एवं या ा क दौरान सावधान रह। ेमीन:1 से 15 जून 2011: आपक काय े े क क ठनाइयां कम होगी एवं आपको समय क साथ सुख-सु वधाएं े ा होगी। इस अविध म आपक िच एक से अिधक काय म हो सकती ह। सफलता आपक कदम े चूमेगी यह समय आपक िलये अिधक भा यशाली सा बत होगा। े ेम से संबंिधत मामलो म आपको सफलता और खुशीयां ा होगी। आपका मन स न रहे गा। 16 से 30 जून 2011: इस दौरान आपक भीतर अिधक आ म व ासी और साहसी हो सकते े ह। आपको मह वाकां ी होकर अपनी उ नित क बारे म वचार कर लेना चा हये। आपक े े कम का फल आपको शी ा होगा। आपको काय सावधानी एवं चतुराई से करना चा हये। लोग आपके य व क सराहना करगे ज से आपक पद- ित ा म वृ े होगी। यय आव यकता से अिधक हो सकता ह।
  • 51. 51 जून 2011 रािश र मूंगा ह रा प ना मोती माणेक प ना Red Coral Diamond Green Emerald Naturel Pearl Ruby Green Emerald (Special) (Special) (Old Berma) (Special) (Special) (Special) (Special)5.25" Rs. 1050 10 cent Rs. 4100 5.25" Rs. 9100 5.25" Rs. 910 2.25" Rs. 12500 5.25" Rs. 91006.25" Rs. 1250 20 cent Rs. 8200 6.25" Rs. 12500 6.25" Rs. 1250 3.25" Rs. 15500 6.25" Rs. 125007.25" Rs. 1450 30 cent Rs. 12500 7.25" Rs. 14500 7.25" Rs. 1450 4.25" Rs. 28000 7.25" Rs. 145008.25" Rs. 1800 40 cent Rs. 18500 8.25" Rs. 19000 8.25" Rs. 1900 5.25" Rs. 46000 8.25" Rs. 190009.25" Rs. 2100 50 cent Rs. 23500 9.25" Rs. 23000 9.25" Rs. 2300 6.25" Rs. 82000 9.25" Rs. 2300010.25" Rs. 2800 10.25" Rs. 28000 10.25" Rs. 2800 10.25" Rs. 28000 All Diamond are Full** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati White Colour. तुला रािश: वृ क रािश: धनु रािश: मकर रािश: कभ रािश: ुं मीन रािश: ह रा मूंगा पुखराज नीलम नीलम पुखराज Diamond Red Coral Y.Sapphire B.Sapphire B.Sapphire Y.Sapphire (Special) (Special) (Special) (Special) (Special) (Special)10 cent Rs. 4100 5.25" Rs. 1050 5.25" Rs. 30000 5.25" Rs. 30000 5.25" Rs. 30000 5.25" Rs. 3000020 cent Rs. 8200 6.25" Rs. 1250 6.25" Rs. 37000 6.25" Rs. 37000 6.25" Rs. 37000 6.25" Rs. 3700030 cent Rs. 12500 7.25" Rs. 1450 7.25" Rs. 55000 7.25" Rs. 55000 7.25" Rs. 55000 7.25" Rs. 5500040 cent Rs. 18500 8.25" Rs. 1800 8.25" Rs. 73000 8.25" Rs. 73000 8.25" Rs. 73000 8.25" Rs. 7300050 cent Rs. 23500 9.25" Rs. 2100 9.25" Rs. 91000 9.25" Rs. 91000 9.25" Rs. 91000 9.25" Rs. 91000 10.25" Rs. 2800 10.25" Rs.108000 10.25" Rs.108000 10.25" Rs.108000 10.25" Rs.108000All Diamond are Full ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati White Colour.* उपयो वजन और मू य से अिधक और कम वजन और मू य क र े एवं उपर भी हमारे यहा यापार मू य परउ ल ध ह। GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
  • 52. 52 जून 2011 जून 2011 मािसक पंचांग चंद वार माह प ितिथ समाि न समाि योग समाि करण समाि समाि रािश1 बुध ये कृ ण अमाव या 26:33:04 कृ ितका 13:10:34 सुकमा 25:19:57 चतु पद 14:08:42 वृ ष2 गु ये शु ल एकम 26:59:07 रो ह ण 14:30:59 धृ ित 24:43:11 क तु न 14:48:48 वृ ष 27:00:003 शु ये शु ल तीया 26:57:03 मृ गिशरा 15:22:22 शूल 23:42:59 बालव 15:00:48 िमथुन4 शिन ये शु ल तृ तीया 26:27:50 आ ा 15:49:23 गंड 22:22:12 तैितल 14:45:38 िमथुन5 रव ये शु ल चतुथ 25:34:15 पुनवसु 15:50:11 वृ 20:42:41 व णज 14:04:15 िमथुन 09:52:006 सोम ये शु ल पंचमी 24:18:12 पु य 15:28:31 ुव 18:42:34 बव 12:59:27 कक7 मंगल ये शु ल ष ी 22:41:32 अ ेषा 14:44:21 याघात 16:26:32 कौलव 11:32:10 कक 14:44:008 बुध ये शु ल स मी 20:45:13 मघा 13:40:32 हषण 13:52:43 गर 09:45:13 िसंह9 गु ये शु ल अ मी 18:32:59 पूवाफा गुनी 12:19:51 व 11:06:44 व 07:41:25 िसंह 17:57:0010 शु शु ल नवमी क या ये 16:07:38 उ राफा गुनी 10:46:04 िस 08:09:31 कौलव 16:07:3811 शिन शु ल दशमी क या ये ह त व रयान गर 20:07:00 13:33:52 09:01:04 25:50:45 13:33:5212 र व शु ल एकादशी तुला ये 10:57:19 िच ा 07:12:19 पर ह 22:39:31 व 10:57:1913 सोम शु ल ादशी- तुला 22:06:00 ये 08:19:52 वाती 05:24:33 िशव 19:31:07 बालव 08:19:52 योदशी14 मंगल शु ल चतुदशी वृ क ये 05:51:47 अनुराधा 26:13:21 िस 16:32:06 तैितल 05:51:4715 बुध शु ल पू णमा वृ क ये जे ा सा य व 25:06:00 25:44:22 25:04:59 13:47:11 14:37:4816 गु आषाढ़ कृ ण एकम 24:17:16 मूल 24:24:46 शुभ 11:21:58 बालव 12:57:35 धनु17 शु आषाढ़ कृ ण तीया 23:23:01 पूवाषाढ़ 24:16:27 शु ल 09:21:08 तैितल 11:46:27 धनु18 शिन आषाढ़ कृ ण तृ तीया उ राषाढ़ व णज धनु 06:20:00 23:07:13 24:44:43 07:48:28 11:10:5819 र व आषाढ़ कृ ण चतुथ 23:30:48 वण 25:51:26 इ 06:46:44 बव 11:13:56 मकर20 सोम आषाढ़ कृ ण पंचमी धिन ा वैध ृ ित कौलव मकर 14:39:00 24:31:55 27:35:40 06:15:59 11:57:14
  • 53. 53 जून 201121 मंगल कृ ण ष ी कभ ुं आषाढ़ 26:07:44 शतिभषा 29:52:44 वषकभ ुं 06:14:18 गर 13:16:1022 बुध आषाढ़ कृ ण स मी शतिभषा ीित व कभ ुं 25:53:00 28:10:46 05:52:57 06:37:57 15:07:0123 गु आषाढ़ कृ ण अ मी 30:28:48 पूवाभा पद 08:34:26 आयु मान 07:21:18 बालव 17:18:29 मीन24 शु आषाढ़ कृ ण अ मी 06:29:03 उ राभा पद 11:29:03 सौभा य 08:15:56 कौलव 06:29:03 मीन25 शिन आषाढ़ कृ ण नवमी रे वित शोभन गर मीन 14:23:00 08:49:00 14:22:45 09:09:38 08:49:0026 र व आषाढ़ कृ ण दशमी 10:59:36 अ नी 17:04:17 अितगंड 09:57:44 व 10:59:36 मेष27 सोम आषाढ़ कृ ण एकादशी भरणी सुकमा बालव मेष 25:52:00 12:46:47 19:22:24 10:28:02 12:46:4728 मंगल कृ ण वृ ष आषाढ़ ादशी 14:04:54 कृ ितका 21:09:36 धृ ित 10:34:54 तैितल 14:04:5429 बुध आषाढ़ कृ ण योदशी 14:47:26 रो ह ण 22:22:07 शूल 10:15:33 व णज 14:47:26 वृ ष30 गु आषाढ़ कृ ण चतुदशी 14:53:24 मृ गिशरा 22:59:02 गंड 09:26:13 शकिन ु 14:53:24 वृ ष मं िस फ टक ी यं " ी यं " सबसे मह वपूण एवं श शाली यं है । " ी यं " को यं राज कहा जाता है यो क यह अ य त शुभ फ़लदयी यं है । जो न कवल दसरे य े ू ो से अिधक से अिधक लाभ दे ने मे समथ है एवं संसार क हर य े क िलए फायदे मंद सा बत होता े है । पूण ाण- ित त एवं पूण चैत य यु " ी यं " जस य क घर मे होता है उसक िलये " ी यं " अ य त फ़लदायी े े िस होता है उसक दशन मा से अन-िगनत लाभ एवं सुख क े ाि होित है । " ी यं " मे समाई अ ितय एवं अ यश मनु य क सम त शुभ इ छाओं को पूरा करने मे समथ होित है । ज से उसका जीवन से हताशा और िनराशा दर होकर वह ू मनु य असफ़लता से सफ़लता क और िनर तर गित करने लगता है एवं उसे जीवन मे सम त भौितक सुखो क ाि होित है । " ी यं " मनु य जीवन म उ प न होने वाली सम या-बाधा एवं नकारा मक उजा को दर कर सकार मक उजा का ू िनमाण करने मे समथ है । " ी यं " क थापन से घर या यापार क थान पर था पत करने से वा तु दोष य वा तु से े स ब धत परे शािन मे युनता आित है व सुख-समृ , शांित एवं ऐ य क ि होती है । गु व कायालय मे " ी यं " 12 ाम से 75 ाम तक क साइज मे उ ल ध है मू य:- ित ाम Rs. 8.20 से Rs.28.00 GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
  • 54. 54 जून 2011 जून-2011 मािसक त-पव- यौहारद वार माह प ितिथ समाि मुख त- योहार शिन जयंती, वटसा व ी अमाव या (बरगदाह अमावस) त, नान-दान- ा हे तु उ म ये ी1 बुध ये कृ ण अमाव या 26:33:04 अमाव या, भावुका अमावस, क र दन, खंड ास सूय हण, भाई नौरोजी मृ ित दवस 10 दन हे तु गंगा दशहरा- नान ारं भ2 गु ये शु ल एकम 26:59:07 (दशा मेध घाट, वाराणसी), करवीर त, नवीन च -दशन, नवतपा समा , यितपात3 शु ये शु ल तीया 26:57:03 महापात दन 2.40 से शेषरा 5.04 बजे तक र भा तृ तीया त, लवण तृ तीया, महाराणा ताप4 शिन ये शु ल तृ तीया 26:27:50 जयंती, छ साल जयंती वरद वनायक चतुथ त (चं.उ.रा.9.58), उमा5 रव ये शु ल चतुथ 25:34:15 चतुथ , व पयावरण दवस, पु य न (3.19), गोलवलकर द, पु य न (3.5 समा ), ु त पंचमी, महादे व-6 सोम ये शु ल पंचमी 24:18:12 ववाह (उड़ सा), अर य ष ी, वं यवािसनी महापूजा, क द7 मंगल ये शु ल ष ी 22:41:32 (कमार) ष ी ु त, जमाई ष ी (बंगाल), शीतला ष ी (उड़ सा),सा टे ऊराम पु यितिथ ँ8 बुध ये शु ल स मी 20:45:13 बड़पूजा (िभ ड), ीदगा मी ु त, ीअ नपूणा मी त, धूमावती9 गु ये शु ल अ मी 18:32:59 महा व ा जयंती, ये ा मी, ीमहे श नवमी (माहे र समाज), दान10 शु ये शु ल नवमी 16:07:38 दवस गंगा दशमी-गंगा दशहरा का मु य नान,11 शिन ये शु ल दशमी 13:33:52 ह र ार म मेला, सेतुब ध रामे र ित ा दवस, ु बटकभैरव जयंती, आचाय ीराम शमा क
  • 55. 55 जून 2011 पु यितिथ िनजला एकादशी त, भीमसेनी एकादशी, ी12 रव ये शु ल एकादशी 10:57:19 काशी व नाथ कलशया ा (वाराणसी), मणी ववाह (उड़ सा), गाय ी जयंती (मता तर से), च पक ादशी, व म ादशी, यामबाबा ादशी-13 सोम ये शु ल 08:19:52 ादशी, मेला खाटू याम, सोम- दोष त, योदशी वटसा व ी तारं भ, ऊधम िसंह शह द दवस छ पित िशवाजी रा यािभषेक दवस, िशवराज14 मंगल ये शु ल चतुदशी 05:51:47 शक संवत ् 338 ारं भ, च पक चतुदशी नान-दान- त हे तु उ म ये ी पू णमा, वटसा व ी पू णमा, दे व- नान पू णमा (बंगाल, उड़ सा), ब व रा ारं भ, सरयू जयंती, संत कबीर जयंती, ख ास च हण रा 11.53 से15 बुध ये शु ल पू णमा 25:44:22 3.33 बजे तक, हण का सूतक दोपहर 2.53 बजे से, िमथुन-सं ा त सायं 4.26 बजे, सं ा त का पु यकाल सायं 4.26 बजे से सूया त तक, राजस सं ा त (उड़ सा),16 गु आषाढ़ कृ ण एकम 24:17:16 -17 शु आषाढ़ कृ ण तीया 23:23:01 - महारानी ल मीबाई बिलदान दवस18 शिन आषाढ़ कृ ण तृ तीया 23:07:1319 रव आषाढ़ कृ ण चतुथ 23:30:48 संक ी ीगणेश चतुथ त, (चं.उ.रा.9.35) को कला पंचमी, नाग पूजा, सौराठ ससौला20 सोम आषाढ़ कृ ण पंचमी 24:31:55 वैवा हक सभा ारं भ सूय सायन कक म रा 10.48 बजे, सौर वषा21 मंगल आषाढ़ कृ ण ष ी 26:07:44 ऋतु ारं भ22 बुध आषाढ़ कृ ण स मी 28:10:46 कामा या दे वी क अ बुवाची वृ काला मी त, शीतला मी - बसौड़ा,23 गु आषाढ़ कृ ण अ मी 30:28:48 भलभला मी, बोहरा मी, डा. यामा साद मुखज मृ ित दवस,
  • 56. 56 जून 201124 शु आषाढ़ कृ ण अ मी 06:29:03 - कामा या दे वी क अ बुवाची िनवृ (असम)25 शिन आषाढ़ कृ ण नवमी 08:49:0026 रव आषाढ़ कृ ण दशमी 10:59:36 - योिगनी एकादशी त, दे वरहा बाबा समािध27 सोम आषाढ़ कृ ण एकादशी 12:46:47 दवस, मधुमेह जागृ ित दवस भौम- दोष त, यितपात महापात रा 10.4428 मंगल आषाढ़ कृ ण ादशी 14:04:54 बजे से मािसक िशवरा त, यितपात महापात रा29 बुध आषाढ़ कृ ण योदशी 14:47:26 11.21 बजे तक, सौराठ ससौला वैवा हक सभा समा ,30 गु आषाढ़ कृ ण चतुदशी 14:53:24 ा क अमाव या, मं िस यं गु व कायालय ारा विभ न कार क यं े कोपर ता प , िसलवर (चांद ) ओर गो ड (सोने) मे विभ न कार क सम या क अनुसार बनवा क मं िस पूण ाण ित त एवं चैत य यु े े कये जाते है . जसे साधारण (जो पूजा-पाठ नह जानते या नह कसकते) य बना कसी पूजा अचना- विध वधान वशेष लाभ ा कर सकते है . जस मे िचन यं ो स हत हमारे वष क अनुसंधान ारा बनाए े गये यं भी समा हत है . इसक अलवा आपक आव यकता अनुशार यं बनवाए जाते है . गु े व कायालय ारा उपल ध कराये गये सभी यं अखं डत एवं २२ गेज शु कोपर(ता प )- 99.99 टच शु िसलवर (चांद ) एवं 22 करे ट गो ड (सोने) मे बनवाए जाते है . यं क वषय मे अिधक जानकार क िलये हे तु े े े स पक करे GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ ववाह संबंिधत सम या
  • 57. 57 जून 2011 या आपक लडक-लडक े े क आपक शाद म अनाव यक प से वल ब हो रहा ह या उनक वैवा हक जीवन म खुिशयां कम ेहोती जारह ह और सम या अिधक बढती जारह ह। एसी थती होने पर अपने लडक-लडक े क कडली का अ ययन ुंअव य करवाले और उनक वैवा हक सुख को कम करने वाले दोष क िनवारण क उपायो क बार म व तार से जनकार े े े े ाकर। िश ा से संबंिधत सम या या आपक लडक-लडक क पढाई म अनाव यक प से बाधा- व न या े े कावटे हो रह ह? ब चो को अपने पूण प र मएवं मेहनत का उिचत फल नह ं िमल रहा? अपने लडक-लडक क कडली का व तृ त अ ययन अव य करवाले और े ुंउनक व ा अ ययन म आनेवाली े कावट एवं दोषो क कारण एवं उन दोष क िनवारण क उपायो क बार म व तार से े े े ेजनकार ा कर। या आप कसी सम या से त ह?आपक पास अपनी सम याओं से छटकारा पाने हे तु पूजा-अचना, साधना, मं े ु जाप इ या द करने का समय नह ं ह?अब आप अपनी सम याओं से बीना कसी वशेष पूजा-अचना, विध- वधान क आपको अपने काय म सफलता े ाकर सक एवं आपको अपने जीवन क सम त सुखो को े े ा करने का माग ा हो सक इस िलये गु े व कायालत ारा हमारा उ े य शा ो विध- वधान से विश तेज वी मं ो ारा िस ाण- ित त पूण चैत य यु विभ न कार केय - कवच एवं शुभ फलदायी ह र एवं उपर आपक घर तक पहोचाने का है । े योितष संबंिधत वशेष परामश योित व ान, अंक योितष, वा तु एवं आ या मक ान स संबंिधत वषय म हमारे 30 वष से अिधक वष केअनुभव क साथ े योितस से जुडे नये-नये संशोधन क आधार पर आप अपनी हर सम या क सरल समाधान े े ा करसकते ह। GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com ओने स जो य प ना धारण करने मे असमथ हो उ ह बुध ह क उपर े ओने स को धारण करना चा हए। उ च िश ा ाि हे तु और मरण श क वकास हे तु ओने स र े क अंगूठ को दाय हाथ क सबसे छोट उं गली या लॉकट बनवा कर गले म धारण कर। ओने स र े धारण करने से व ा-बु क ाि हो होकर मरण श का वकास होता ह।
  • 58. 58 जून 2011 जून 2011 - वशेष योग काय िस योग दनांक योग अविध दनांक योग अविध 1 सूय दय से दन-रात 19 जून को रा 12.44 से सूय दय तक 5 दोपहर 3.50 से रातभर 24 दोपहर 11.28 से रातभर 6 सूय दय से दोपहर 3.27 तक 26 सूय दय से सायं 5.04 तक 7 सूय दय से दोपहर 2.43 तक 28 सूय दय से रा 9.08 तक 14 रा 3.41 से सूय दय तक 29 स पूण दन-रात अमृ त योग 7 सूय दय से दन 2.43 तक 24 दन 11.28 से रातभर पु कर योग (तीनगुना फल) 13 ात: 5.22 से ात: 5.27 तक 28 सूय दय से दन 2.04 तक र व-पु यामृ त योग 5 दन 3.50 से रातभरयोग फल :काय िस योग मे कये गये शुभ काय मे िन त सफलता ा होती ह, एसा शा ो वचन ह। पु कर योग म कये गये शुभ काय का लाभ तीन गुना होता ह। एसा शा ो वचन ह दै िनक शुभ एवं अशुभ समय ान तािलका गुिलक काल यम काल राहु काल (शुभ) (अशुभ) (अशुभ) वार समय अविध समय अविध समय अविध र ववार 03:00 से 04:30 12:00 से 01:30 04:30 से 06:00 सोमवार 01:30 से 03:00 10:30 से 12:00 07:30 से 09:00 मंगलवार 12:00 से 01:30 09:00 से 10:30 03:00 से 04:30 बुधवार 10:30 से 12:00 07:30 से 09:00 12:00 से 01:30 गु वार 09:00 से 10:30 06:00 से 07:30 01:30 से 03:00 शु वार 07:30 से 09:00 03:00 से 04:30 10:30 से 12:00 शिनवार 06:00 से 07:30 01:30 से 03:00 09:00 से 10:30
  • 59. 59 जून 2011 दन क चौघ डये े समय र ववार सोमवार मंगलवार बुधवार गु वार शु वार शिनवार 06:00 से 07:30 उ ेग अमृ त रोग लाभ शुभ चल काल 07:30 से 09:00 चल काल उ ेग अमृ त रोग लाभ शुभ 09:00 से 10:30 लाभ शुभ चल काल उ ेग अमृ त रोग 10:30 से 12:00 अमृ त रोग लाभ शुभ चल काल उ ेग 12:00 से 01:30 काल उ ेग अमृ त रोग लाभ शुभ चल 01:30 से 03:00 शुभ चल काल उ ेग अमृ त रोग लाभ 03:00 से 04:30 रोग लाभ शुभ चल काल उ ेग अमृ त 04:30 से 06:00 उ ेग अमृ त रोग लाभ शुभ चल काल रात क चौघ डये े समय र ववार सोमवार मंगलवार बुधवार गु वार शु वार शिनवार 06:00 से 07:30 शुभ चल काल उ ेग अमृ त रोग लाभ 07:30 से 09:00 अमृ त रोग लाभ शुभ चल काल उ ेग 09:00 से 10:30 चल काल उ ेग अमृ त रोग लाभ शुभ 10:30 से 12:00 रोग लाभ शुभ चल काल उ ेग अमृ त 12:00 से 01:30 काल उ ेग अमृ त रोग लाभ शुभ चल 01:30 से 03:00 लाभ शुभ चल काल उ ेग अमृ त रोग 03:00 से 04:30 उ ेग अमृ त रोग लाभ शुभ चल काल 04:30 से 06:00 शुभ चल काल उ ेग अमृ त रोग लाभ शा ो मत क अनुशार य द कसी भी काय का ारं भ शुभ मुहू त या शुभ समय पर कया जाये तो काय म सफलता े ा होने क संभावना यादा बल हो जाती ह। इस िलये दै िनक शुभ समय चौघ ड़या दे खकर ा कया जा सकता ह।नोट: ायः दन और रा क चौघ ड़ये क िगनती े मशः सूय दय और सूया त से क जाती ह। येक चौघ ड़ये क अविध 1घंटा 30 िमिनट अथात डे ढ़ घंटा होती ह। समय क अनुसार चौघ ड़ये को शुभाशुभ तीन भाग म बांटा जाता ह, जो े मशः शुभ,म यम और अशुभ ह। चौघ डये के वामी ह * हर काय क िलये शुभ/अमृ त/लाभ का ेशुभ चौघ डया म यम चौघ डया अशुभ चौघ ड़या चौघ ड़या उ म माना जाता ह।चौघ डया वामी ह चौघ डया वामी ह चौघ डया वामी हशुभ गु चर शु उ ेग सूय * हर काय क िलये चल/काल/रोग/उ े ग ेअमृ त चं मा काल शिन का चौघ ड़या उिचत नह ं माना जाता।लाभ बुध रोग मंगल
  • 60. 60 जून 2011 दन क होरा - सूय दय से सूया त तक वार 1.घं 2.घं 3.घं 4.घं 5.घं 6.घं 7.घं 8.घं 9.घं 10.घं 11.घं 12.घं र ववार सूय शु बुध चं शिन गु मंगल सूय शु बुध चं शिन सोमवार चं शिन गु मंगल सूय शु बुध चं शिन गु मंगल सूय मंगलवार मंगल सूय शु बुध चं शिन गु मंगल सूय शु बुध चं बुधवार बुध चं शिन गु मंगल सूय शु बुध चं शिन गु मंगल गु वार गु मंगल सूय शु बुध चं शिन गु मंगल सूय शु बुध शु वार शु बुध चं शिन गु मंगल सूय शु बुध चं शिन गु शिनवार शिन गु मंगल सूय शु बुध चं शिन गु मंगल सूय शु रात क होरा – सूया त से सूय दय तक र ववार गु मंगल सूय शु बुध चं शिन गु मंगल सूय शु बुध सोमवार शु बुध चं शिन गु मंगल सूय शु बुध चं शिन गु मंगलवार शिन गु मंगल सूय शु बुध चं शिन गु मंगल सूय शु बुधवार सूय शु बुध चं शिन गु मंगल सूय शु बुध चं शिन गु वार चं शिन गु मंगल सूय शु बुध चं शिन गु मंगल सूय शु वार मंगल सूय शु बुध चं शिन गु मंगल सूय शु बुध चं शिनवार बुध चं शिन गु मंगल सूय शु बुध चं शिन गु मंगलहोरा मुहू त को काय िस क िलए पूण फलदायक एवं अचूक माना जाता ह, दन-रात क २४ घंट म शुभ-अशुभ समय े ेको समय से पूव ात कर अपने काय िस क िलए े योग करना चा हये।व ानो क मत से इ छत काय िस े क िलए े ह से संबंिधत होरा का चुनाव करने से वशेष लाभ ा होता ह।  सूय क होरा सरकार काय क िलये उ म होती ह। े  चं मा क होरा सभी काय क िलये उ म होती ह। े  मंगल क होरा कोट-कचेर क काय क िलये उ म होती ह। े े  बुध क होरा व ा-बु अथात पढाई क िलये उ म होती ह। े  गु क होरा धािमक काय एवं ववाह क िलये उ म होती ह। े  शु क होरा या ा क िलये उ म होती ह। े  शिन क होरा धन- य संबंिधत काय क िलये उ म होती ह। े
  • 61. 61 जून 2011 ह चलन जून -2011द Sun Mon Ma Me Jup Ven Sat Rah Ket Ua Nep Plu1 01:16:10 01:06:00 00:21:23 01:02:21 00:05:14 00:25:30 05:16:32 07:29:24 01:29:24 11:09:56 10:06:54 08:12:502 01:17:07 01:18:34 00:22:07 01:04:18 00:05:26 00:26:43 05:16:31 07:29:23 01:29:23 11:09:58 10:06:54 08:12:493 01:18:05 02:01:20 00:22:51 01:06:18 00:05:39 00:27:56 05:16:30 07:29:22 01:29:22 11:09:59 10:06:54 08:12:474 01:19:02 02:14:20 00:23:35 01:08:20 00:05:51 00:29:09 05:16:29 07:29:23 01:29:23 11:10:01 10:06:54 08:12:465 01:20:00 02:27:34 00:24:19 01:10:23 00:06:03 01:00:22 05:16:28 07:29:23 01:29:23 11:10:03 10:06:54 08:12:456 01:20:57 03:11:01 00:25:03 01:12:29 00:06:16 01:01:35 05:16:27 07:29:24 01:29:24 11:10:04 10:06:54 08:12:437 01:21:55 03:24:41 00:25:46 01:14:36 00:06:28 01:02:48 05:16:27 07:29:25 01:29:25 11:10:06 10:06:54 08:12:428 01:22:52 04:08:33 00:26:30 01:16:44 00:06:40 01:04:01 05:16:26 07:29:25 01:29:25 11:10:07 10:06:53 08:12:419 01:23:49 04:22:38 00:27:14 01:18:54 00:06:52 01:05:14 05:16:26 07:29:26 01:29:26 11:10:09 10:06:53 08:12:3910 01:24:47 05:06:52 00:27:57 01:21:04 00:07:04 01:06:27 05:16:25 07:29:25 01:29:25 11:10:10 10:06:53 08:12:3811 01:25:44 05:21:13 00:28:41 01:23:16 00:07:16 01:07:41 05:16:25 07:29:25 01:29:25 11:10:12 10:06:53 08:12:3612 01:26:41 06:05:38 00:29:24 01:25:28 00:07:28 01:08:54 05:16:25 07:29:25 01:29:25 11:10:13 10:06:53 08:12:3513 01:27:39 06:20:04 01:00:08 01:27:40 00:07:39 01:10:07 05:16:25 07:29:25 01:29:25 11:10:14 10:06:52 08:12:3314 01:28:36 07:04:24 01:00:51 01:29:52 00:07:51 01:11:20 05:16:25 07:29:25 01:29:25 11:10:16 10:06:52 08:12:3215 01:29:33 07:18:35 01:01:34 02:02:03 00:08:02 01:12:33 05:16:25 07:29:25 01:29:25 11:10:17 10:06:52 08:12:3016 02:00:31 08:02:32 01:02:18 02:04:14 00:08:14 01:13:46 05:16:25 07:29:25 01:29:25 11:10:18 10:06:51 08:12:2917 02:01:28 08:16:12 01:03:01 02:06:24 00:08:25 01:14:59 05:16:26 07:29:24 01:29:24 11:10:19 10:06:51 08:12:2718 02:02:25 08:29:32 01:03:44 02:08:34 00:08:36 01:16:12 05:16:26 07:29:24 01:29:24 11:10:20 10:06:50 08:12:2619 02:03:22 09:12:33 01:04:27 02:10:41 00:08:48 01:17:26 05:16:27 07:29:24 01:29:24 11:10:21 10:06:50 08:12:2420 02:04:20 09:25:14 01:05:10 02:12:48 00:08:59 01:18:39 05:16:27 07:29:23 01:29:23 11:10:22 10:06:49 08:12:2321 02:05:17 10:07:38 01:05:53 02:14:53 00:09:10 01:19:52 05:16:28 07:29:23 01:29:23 11:10:23 10:06:49 08:12:2122 02:06:14 10:19:48 01:06:36 02:16:56 00:09:20 01:21:05 05:16:29 07:29:22 01:29:22 11:10:24 10:06:48 08:12:2023 02:07:11 11:01:48 01:07:19 02:18:57 00:09:31 01:22:18 05:16:30 07:29:22 01:29:22 11:10:25 10:06:48 08:12:1824 02:08:09 11:13:42 01:08:02 02:20:56 00:09:42 01:23:32 05:16:31 07:29:22 01:29:22 11:10:26 10:06:47 08:12:1725 02:09:06 11:25:35 01:08:44 02:22:53 00:09:53 01:24:45 05:16:32 07:29:22 01:29:22 11:10:27 10:06:46 08:12:1526 02:10:03 00:07:32 01:09:27 02:24:48 00:10:03 01:25:58 05:16:33 07:29:23 01:29:23 11:10:27 10:06:46 08:12:1427 02:11:00 00:19:36 01:10:10 02:26:41 00:10:13 01:27:11 05:16:34 07:29:24 01:29:24 11:10:28 10:06:45 08:12:1228 02:11:58 01:01:52 01:10:52 02:28:32 00:10:24 01:28:25 05:16:36 07:29:25 01:29:25 11:10:29 10:06:44 08:12:1129 02:12:55 01:14:22 01:11:35 03:00:21 00:10:34 01:29:38 05:16:37 07:29:26 01:29:26 11:10:29 10:06:43 08:12:0930 02:13:52 01:27:10 01:12:17 03:02:08 00:10:44 02:00:51 05:16:39 07:29:26 01:29:26 11:10:30 10:06:43 08:12:08
  • 62. 62 जून 2011 सव रोगनाशक यं /कवच मनु य अपने जीवन क विभ न समय पर कसी ना कसी सा य या असा य रोग से े त होता ह।उिचत उपचार से यादातर सा य रोगो से तो मु िमल जाती ह, ले कन कभी-कभी सा य रोग होकर भी असा याहोजाते ह, या कोइ असा य रोग से िसत होजाते ह। हजारो लाखो पये खच करने पर भी अिधक लाभ ा नह ं होपाता। डॉ टर ारा दजाने वाली दवाईया अ प समय क िलये कारगर सा बत होती ह, एिस े थती म लाभा ाि केिलये य एक डॉ टर से दसरे डॉ टर क च कर लगाने को बा य हो जाता ह। ू े भारतीय ऋषीयोने अपने योग साधना के ताप से रोग शांित हे तु विभ न आयुवर औषधो क अित र े यं ,मं एवं तं उ लेख अपने ंथो म कर मानव जीवन को लाभ दान करने का साथक यास हजारो वष पूव कया था।बु जीवो क मत से जो य े जीवनभर अपनी दनचया पर िनयम, संयम रख कर आहार हण करता ह, एसे यको विभ न रोग से िसत होने क संभावना कम होती ह। ले कन आज क बदलते युग म एसे य े भी भयंकर रोगसे त होते दख जाते ह। यो क सम संसार काल क अधीन ह। एवं मृ यु िन े त ह जसे वधाता क अलावा ेऔर कोई टाल नह ं सकता, ले कन रोग होने क थती म य रोग दर करने का ू यास तो अव य कर सकता ह।इस िलये यं मं एवं तं क कशल जानकार से यो य मागदशन लेकर य े ु रोगो से मु पाने का या उसके भावोको कम करने का यास भी अव य कर सकता ह। योितष व ा क कशल जानकर भी काल पु षक गणना कर अनेक रोगो क अनेको रह य को उजागर कर े ु ेसकते ह। योितष शा क मा यम से रोग क मूलको पकडने मे सहयोग िमलता ह, जहा आधुिनक िच क सा शा े ेअ म होजाता ह वहा योितष शा ारा रोग क मूल(जड़) को पकड कर उसका िनदान करना लाभदायक एवं ेउपायोगी िस होता ह। हर य म लाल रं गक कोिशकाए पाइ जाती ह, जसका िनयमीत वकास म ब तर क से होता रहता ह। ेजब इन कोिशकाओ के म म प रवतन होता है या वखं डन होता ह तब य क शर र म े वा य संबंधी वकारोउ प न होते ह। एवं इन कोिशकाओ का संबंध नव हो क साथ होता ह। ज से रोगो क होने क कारणा े े े य केज मांग से दशा-महादशा एवं हो क गोचर म थती से ा होता ह। सव रोग िनवारण कवच एवं महामृ युंजय यं क मा यम से े य क ज मांग म े थत कमजोर एवं पी डत हो क अशुभ े भाव को कम करने का काय सरलता पूव क कया जासकता ह। जेसे हर य को ांड क उजा एवंपृ वी का गु वाकषण बल भावीत कता ह ठक उसी कार कवच एवं यं क मा यम से े ांड क उजा केसकारा मक भाव से य को सकारा मक उजा ा होती ह ज से रोग के भाव को कम कर रोग मु करने हे तुसहायता िमलती ह। रोग िनवारण हे तु महामृ युंजय मं एवं यं का बडा मह व ह। ज से ह द ू सं कृ ित का ायः हर यमहामृ युंजय मं से प रिचत ह।
  • 63. 63 जून 2011कवच क लाभ : े  एसा शा ो वचन ह जस घर म महामृ युंजय यं था पत होता ह वहा िनवास कता हो नाना कार क आिध- यािध-उपािध से र ा होती ह।  पूण ाण ित त एवं पूण चैत य यु सव रोग िनवारण कवच कसी भी उ एवं जाित धम क लोग चाहे े ी हो या पु ष धारण कर सकते ह।  ज मांगम अनेक कारक खराब योगो और खराब े हो क ितकलता से रोग उतप न होते ह। ू  कछ रोग सं मण से होते ह एवं कछ रोग खान-पान क अिनयिमतता और अशु तासे उ प न होते ह। कवच ु ु एवं यं ारा एसे अनेक कार क खराब योगो को न े कर, वा य लाभ और शार रक र ण ा करने हे तु सव रोगनाशक कवच एवं यं सव उपयोगी होता ह।  आज क भौितकता वाद आधुिनक युगमे अनेक एसे रोग होते ह, जसका उपचार ओपरे शन और दवासे भी े क ठन हो जाता ह। कछ रोग एसे होते ह जसे बताने म लोग हच कचाते ह शरम अनुभव करते ह एसे रोगो ु को रोकने हे तु एवं उसक उपचार हे तु सव रोगनाशक कवच एवं यं े लाभादािय िस होता ह।  येक य क जेसे-जेसे आयु बढती ह वैसे-वसै उसक शर र क ऊजा होती जाती ह। जसक साथ अनेक े े कार क वकार पैदा होने लगते ह एसी े थती म उपचार हे तु सवरोगनाशक कवच एवं यं फल द होता ह।  जस घर म पता-पु , माता-पु , माता-पु ी, या दो भाई एक ह न मे ज म लेते ह, तब उसक माता क िलये े अिधक क दायक थती होती ह। उपचार हे तु महामृ युंजय यं फल द होता ह।  जस य का ज म प रिध योगमे होता ह उ हे होने वाले मृ यु तु य क एवं होने वाले रोग, िचंता म उपचार हे तु सव रोगनाशक कवच एवं यं शुभ फल द होता ह।नोट:- पूण ाण ित त एवं पूण चैत य यु सव रोग िनवारण कवच एवं यं क बारे म अिधक जानकार हे तु हम ेसे संपक कर। Declaration Notice  We do not accept liability for any out of date or incorrect information.  We will not be liable for your any indirect consequential loss, loss of profit,  If you will cancel your order for any article we can not any amount will be refunded or Exchange.  We are keepers of secrets. We honour our clients rights to privacy and will release no information about our any other clients transactions with us.  Our ability lies in having learned to read the subtle spiritual energy, Yantra, mantra and promptings of the natural and spiritual world.  Our skill lies in communicating clearly and honestly with each client.  Our all kawach, yantra and any other article are prepared on the Principle of Positiv energy, our Article dose not produce any bad energy. Our Goal  Here Our goal has The classical Method-Legislation with Proved by specific with fiery chants prestigious full consciousness (Puarn Praan Pratisthit) Give miraculous powers & Good effect All types of Yantra, Kavach, Rudraksh, preciouse and semi preciouse Gems stone deliver on your door step.
  • 64. 64 जून 2011 मं िस कवचमं िस कवच को वशेष योजन म उपयोग क िलए और शी े भाव शाली बनाने क िलए तेज वी मं ो ारा ेशुभ महत म शुभ दन को तैयार कये जाते है . अलग-अलग कवच तैयार करने किलए अलग-अलग तरह क ू े ेमं ो का योग कया जाता है .  य चुने मं िस कवच?  उपयोग म आसान कोई ितब ध नह ं  कोई वशेष िनित-िनयम नह ं  कोई बुरा भाव नह ं  कवच क बारे म अिधक जानकार हे तु े कवच सूिचसव काय िस कवच - 3700/- ऋण मु कवच - 730/- वरोध नाशक कवचा- 550/-सवजन वशीकरण कवच - 1050/-* नव ह शांित कवच- 730/- वशीकरण कवच- 550/-* (2-3 य क िलए) ेअ ल मी कवच - 1050/- तं र ा कवच- 730/- प ी वशीकरण कवच - 460/-*आक मक धन ाि कवच-910/- श ु वजय कवच - 640/- * नज़र र ा कवच - 460/-भूिम लाभ कवच - 910/- पद उ नित कवच- 640/- यापर वृ कवच - 370/-संतान ाि कवच - 910/- धन ाि कवच- 640/- पित वशीकरण कवच - 370/-*काय िस कवच - 910/- ववाह बाधा िनवारण कवच- 640/- दभा य नाशक कवच - 370/- ुकाम दे व कवच - 820/- म त क पृ वधक कवच- 640/- सर वती कवक - 370/- क ा+ 10 क िलए ेजगत मोहन कवच -730/-* कामना पूित कवच- 550/- सर वती कवक- 280/- क ा 10 तक क िलए े पे - यापार वृ कवच - 730/- व न बाधा िनवारण कवच- 550/- वशीकरण कवच - 280/-* 1 य क िलए े*कवच मा शुभ काय या उ े य क िलये े GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION) (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
  • 65. 65 जून 2011 YANTRA LIST EFFECTS Our Splecial Yantra 1 12 – YANTRA SET For all Family Troubles 2 VYAPAR VRUDDHI YANTRA For Business Development 3 BHOOMI LABHA YANTRA For Farming Benefits 4 TANTRA RAKSHA YANTRA For Protection Evil Sprite 5 AAKASMIK DHAN PRAPTI YANTRA For Unexpected Wealth Benefits 6 PADOUNNATI YANTRA For Getting Promotion 7 RATNE SHWARI YANTRA For Benefits of Gems & Jewellery 8 BHUMI PRAPTI YANTRA For Land Obtained 9 GRUH PRAPTI YANTRA For Ready Made House10 KAILASH DHAN RAKSHA YANTRA - Shastrokt Yantra11 AADHYA SHAKTI AMBAJEE(DURGA) YANTRA Blessing of Durga12 BAGALA MUKHI YANTRA (PITTAL) Win over Enemies13 BAGALA MUKHI POOJAN YANTRA (PITTAL) Blessing of Bagala Mukhi14 BHAGYA VARDHAK YANTRA For Good Luck15 BHAY NASHAK YANTRA For Fear Ending16 CHAMUNDA BISHA YANTRA (Navgraha Yukta) Blessing of Chamunda & Navgraha17 CHHINNAMASTA POOJAN YANTRA Blessing of Chhinnamasta18 DARIDRA VINASHAK YANTRA For Poverty Ending19 DHANDA POOJAN YANTRA For Good Wealth20 DHANDA YAKSHANI YANTRA For Good Wealth21 GANESH YANTRA (Sampurna Beej Mantra) Blessing of Lord Ganesh22 GARBHA STAMBHAN YANTRA For Pregnancy Protection23 GAYATRI BISHA YANTRA Blessing of Gayatri24 HANUMAN YANTRA Blessing of Lord Hanuman25 JWAR NIVARAN YANTRA For Fewer Ending JYOTISH TANTRA GYAN VIGYAN PRAD SHIDDHA BISHA26 YANTRA For Astrology & Spritual Knowlage27 KALI YANTRA Blessing of Kali28 KALPVRUKSHA YANTRA For Fullfill your all Ambition29 KALSARP YANTRA (NAGPASH YANTRA) Destroyed negative effect of Kalsarp Yoga30 KANAK DHARA YANTRA Blessing of Maha Lakshami31 KARTVIRYAJUN POOJAN YANTRA -32 KARYA SHIDDHI YANTRA For Successes in work33  SARVA KARYA SHIDDHI YANTRA For Successes in all work34 KRISHNA BISHA YANTRA Blessing of Lord Krishna35 KUBER YANTRA Blessing of Kuber (Good wealth)36 LAGNA BADHA NIVARAN YANTRA For Obstaele Of marriage37 LAKSHAMI GANESH YANTRA Blessing of Lakshami & Ganesh38 MAHA MRUTYUNJAY YANTRA For Good Health39 MAHA MRUTYUNJAY POOJAN YANTRA Blessing of Shiva40 MANGAL YANTRA ( TRIKON 21 BEEJ MANTRA) For Fullfill your all Ambition41 MANO VANCHHIT KANYA PRAPTI YANTRA For Marriage with choice able Girl42 NAVDURGA YANTRA Blessing of Durga
  • 66. 66 जून 2011 YANTRA LIST EFFECTS43 NAVGRAHA SHANTI YANTRA For good effect of 9 Planets44 NAVGRAHA YUKTA BISHA YANTRA For good effect of 9 Planets45  SURYA YANTRA Good effect of Sun46  CHANDRA YANTRA Good effect of Moon47  MANGAL YANTRA Good effect of Mars48  BUDHA YANTRA Good effect of Mercury49  GURU YANTRA (BRUHASPATI YANTRA) Good effect of Jyupiter50  SUKRA YANTRA Good effect of Venus51  SHANI YANTRA (COPER & STEEL) Good effect of Saturn52  RAHU YANTRA Good effect of Rahu53  KETU YANTRA Good effect of Ketu54 PITRU DOSH NIVARAN YANTRA For Ancestor Fault Ending55 PRASAW KASHT NIVARAN YANTRA For Pregnancy Pain Ending56 RAJ RAJESHWARI VANCHA KALPLATA YANTRA For Benefits of State & Central Gov57 RAM YANTRA Blessing of Ram58 RIDDHI SHIDDHI DATA YANTRA Blessing of Riddhi-Siddhi59 ROG-KASHT DARIDRATA NASHAK YANTRA For Disease- Pain- Poverty Ending60 SANKAT MOCHAN YANTRA For Trouble Ending61 SANTAN GOPAL YANTRA Blessing Lorg Krishana For child acquisition62 SANTAN PRAPTI YANTRA For child acquisition63 SARASWATI YANTRA Blessing of Sawaswati (For Study & Education)64 SHIV YANTRA Blessing of Shiv Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & 65 SHREE YANTRA (SAMPURNA BEEJ MANTRA) Peace 66 SHREE YANTRA SHREE SUKTA YANTRA Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth 67 SWAPNA BHAY NIVARAN YANTRA For Bad Dreams Ending 68 VAHAN DURGHATNA NASHAK YANTRA For Vehicle Accident Ending VAIBHAV LAKSHMI YANTRA (MAHA SHIDDHI DAYAK SHREE Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & All 69 MAHALAKSHAMI YANTRA) Successes 70 VASTU YANTRA For Bulding Defect Ending 71 VIDHYA YASH VIBHUTI RAJ SAMMAN PRAD BISHA YANTRA For Education- Fame- state Award Winning 72 VISHNU BISHA YANTRA Blessing of Lord Vishnu (Narayan) 73 VASI KARAN YANTRA Attraction For office Purpose 74  MOHINI VASI KARAN YANTRA Attraction For Female 75  PATI VASI KARAN YANTRA Attraction For Husband 76  PATNI VASI KARAN YANTRA Attraction For Wife 77  VIVAH VASHI KARAN YANTRA Attraction For Marriage PurposeYantra Available @:- Rs- 190, 280, 370, 460, 550, 640, 730, 820, 910, 1250, 1850, 2300, 2800 and Above….. GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 09338213418, 09238328785 Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- chintan_n_joshi@yahoo.co.in, gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION) GURUTVA KARYALAY
  • 67. 67 जून 2011 NAME OF GEM STONE GENERAL MEDIUM FINE FINE SUPER FINE SPECIAL Emerald (प ना) 100.00 500.00 1200.00 1900.00 2800.00 & above Yellow Sapphire (पुखराज) 370.00 900.00 1500.00 2800.00 4600.00 & above Blue Sapphire (नीलम) 370.00 900.00 1500.00 2800.00 4600.00 & above White Sapphire (सफ़द पुखराज) े 370.00 900.00 1500.00 2400.00 4600.00 & above Bangkok Black Blue(बकोक नीलम) 80.00 150.00 200.00 500.00 1000.00 & above Ruby (मा णक) 55.00 190.00 370.00 730.00 1900.00 & above Ruby Berma (बमा मा णक) 2800.00 3700.00 4500.00 10000.00 21000.00 & above Speenal (नरम मा णक/लालड ) 300.00 600.00 1200.00 2100.00 3200.00 & above Pearl (मोित) 30.00 60.00 90.00 120.00 280.00 & above Red Coral (4 jrh rd) (लाल मूंगा) 55.00 75.00 90.00 120.00 180.00 & above Red Coral (4 jrh ls mij) (लाल मूंगा) 90.00 120.00 140.00 180.00 280.00 & above White Coral (सफ़द मूंगा) े 15.00 24.00 33.00 42.00 51.00 & above Cat’s Eye (लहसुिनया) 18.00 27.00 60.00 90.00 120.00 & above Cat’s Eye Orissa (उ डसा लहसुिनया) 210.00 410.00 640.00 1800.00 2800.00 & above Gomed (गोमेद) 15.00 27.00 60.00 90.00 120.00 & above Gomed CLN (िसलोनी गोमेद) 300.00 410.00 640.00 1800.00 2800.00 & above Zarakan (जरकन) 150.00 230.00 330.00 410.00 550.00 & above Aquamarine (बे ज) 190.00 280.00 370.00 550.00 730.00 & above Lolite (नीली) 50.00 120.00 230.00 390.00 500.00 & above Turquoise ( फ़रोजा) 15.00 20.00 30.00 45.00 55.00 & above Golden Topaz (सुनहला) 15.00 20.00 30.00 45.00 55.00 & above Real Topaz (उ डसा पुखराज/टोपज) 60.00 90.00 120.00 280.00 460.00 & above Blue Topaz (नीला टोपज) 60.00 90.00 120.00 280.00 460.00 & above White Topaz (सफ़द टोपज) े 50.00 90.00 120.00 240.00 410.00& above Amethyst (कटे ला) 15.00 20.00 30.00 45.00 55.00 & above Opal (उपल) 30.00 45.00 90.00 120.00 190.00 & above Garnet (गारनेट) 30.00 45.00 90.00 120.00 190.00 & above Tourmaline (तुमलीन) 120.00 140.00 190.00 300.00 730.00 & above Star Ruby (सुय का त म ण) 45.00 75.00 90.00 120.00 190.00 & above Black Star (काला टार) 10.00 20.00 30.00 40.00 50.00 & above Green Onyx (ओने स) 09.00 12.00 15.00 19.00 25.00 & above Real Onyx (ओने स) 60.00 90.00 120.00 190.00 280.00 & above Lapis (लाजवत) 15.00 25.00 30.00 45.00 55.00 & above Moon Stone (च का त म ण) 12.00 21.00 30.00 45.00 100.00 & above Rock Crystal ( फ़ टक) 09.00 12.00 15.00 30.00 45.00 & above Kidney Stone (दाना फ़रं गी) 09.00 11.00 15.00 19.00 21.00 & above Tiger Eye (टाइगर टोन) 03.00 05.00 10.00 15.00 21.00 & above Jade (मरगच) 12.00 19.00 23.00 27.00 45.00 & above Sun Stone (सन िसतारा) 12.00 19.00 23.00 27.00 45.00 & above Diamond (ह रा) 50.00 100.00 200.00 370.00 460.00 & above (.05 to .20 Cent ) (Per Cent ) (Per Cent ) (PerCent ) (Per Cent) (Per Cent )Note : Bangkok (Black) Blue for Shani, not good in looking but mor effective, Blue Topaz not Sapphire This Color of Sky Blue, For Venus *** Super fine & Special Quality Not Available Easily. We can try only after getting order fortunately one or two pieces may be available if possible you can tack corres pondence about
  • 68. 68 जून 2011 BOOK PHONE/ CHAT CONSULTATION We are mostly engaged in spreading the ancient knowledge of Astrology, Numerology, Vastu and SpiritualScience in the modern context, across the world. Our research and experiments on the basic principals of various ancient sciences for the use of common man.exhaustive guide lines exhibited in the original Sanskrit textsBOOK APPOINTMENT PHONE/ CHAT CONSULTATION Please book an appointment with Our expert Astrologers for an internet chart . We would require your birthdetails and basic area of questions so that our expert can be ready and give you rapid replied. You can indicate thearea of question in the special comments box. In case you want more than one person reading, then please mentionin the special comment box . We shall confirm before we set the appointment. Please choose from : PHONE/ CHAT CONSULTATION Consultation 30 Min.: RS. 1250/-* Consultation 45 Min.: RS. 1900/-* Consultation 60 Min.: RS. 2500/-**While booking the appointment in AddvanceHow Does it work Phone/Chat ConsultationThis is a unique service of GURUATVA KARYALAY where we offer you the option of having a personalizeddiscussion with our expert astrologers. There is no limit on the number of question although time is ofconsideration.Once you request for the consultation, with a suggestion as to your convenient time we get back with aconfirmation whether the time is available for consultation or not.  We send you a Phone Number at the designated time of the appointment  We send you a Chat URL / ID to visit at the designated time of the appointment  You would need to refer your Booking number before the chat is initiated  Please remember it takes about 1-2 minutes before the chat process is initiated.  Once the chat is initiated you can commence asking your questions and clarifications  We recommend 25 minutes when you need to consult for one persona Only and usually the time is sufficient for 3-5 questions depending on the timing questions that are put.  For more than these questions or one birth charts we would recommend 60/45 minutes Phone/chat is recommended  Our expert is assisted by our technician and so chatting & typing is not a bottle neckIn special cases we dont have the time available about your Specific Questions We will taken some time forproperly Analysis your birth chart and we get back with an alternate or ask you for an alternate.All the time mentioned is Indian Standard Time which is + 5.30 hr ahead of G.M.T.Many clients prefer the chat so that many questions that come up during a personal discussion can beanswered right away.BOOKING FOR PHONE/ CHAT CONSULTATION PLEASE CONTECT GURUTVA KARYALAY Call Us:- 91+9338213418, 91+9238328785. Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com, chintan_n_joshi@yahoo.co.in,
  • 69. 69 जून 2011 सूचना प का म कािशत सभी लेख प का क अिधकार क साथ ह आर े े त ह। लेख कािशत होना का मतलब यह कतई नह ं क कायालय या संपादक भी इन वचारो से सहमत ह । ना तक/ अ व ासु य मा पठन साम ी समझ सकते ह। प का म कािशत कसी भी नाम, थान या घटना का उ लेख यहां कसी भी य वशेष या कसी भी थान या घटना से कोई संबंध नह ं ह। कािशत लेख योितष, अंक योितष, वा तु, मं , यं , तं , आ या मक ान पर आधा रत होने क कारण े य द कसी क लेख, कसी भी नाम, थान या घटना का कसी क वा त वक जीवन से मेल होता ह तो यह मा े े एक संयोग ह। कािशत सभी लेख भारितय आ या मक शा से े रत होकर िलये जाते ह। इस कारण इन वषयो क स यता अथवा ामा णकता पर कसी भी कार क ज मेदार कायालय या संपादक क नह ं ह। अ य लेखको ारा दान कये गये लेख/ योग क ामा णकता एवं भाव क ज मेदार कायालय या संपादक क नह ं ह। और नाह ं लेखक क पते ठकाने क बारे म जानकार दे ने हे तु कायालय या संपादक कसी भी े े कार से बा य ह। योितष, अंक योितष, वा तु, मं , यं , तं , आ या मक ान पर आधा रत लेखो म पाठक का अपना व ास होना आव यक ह। कसी भी य वशेष को कसी भी कार से इन वषयो म व ास करने ना करने का अंितम िनणय वयं का होगा। पाठक ारा कसी भी कार क आप ी वीकाय नह ं होगी। हमारे ारा पो ट कये गये सभी लेख हमारे वष क अनुभव एवं अनुशंधान क आधार पर िलखे होते ह। हम कसी भी य े े वशेष ारा योग कये जाने वाले मं - यं या अ य योग या उपायोक ज मेदार न हं लेते ह। यह ज मेदार मं -यं या अ य योग या उपायोको करने वाले य क वयं क होगी। यो क इन वषयो म नैितक मानदं ड , सामा जक , कानूनी िनयम क खलाफ कोई े य य द नीजी वाथ पूित हे तु योग कता ह अथवा योग क करने मे ु ट होने पर ितकल प रणाम संभव ह। े ू हमारे ारा पो ट कये गये सभी मं -यं या उपाय हमने सैकडोबार वयं पर एवं अ य हमारे बंधुगण पर योग कये ह ज से हमे हर योग या मं -यं या उपायो ारा िन त सफलता ा हई ह। ु पाठक क मांग पर एक ह लेखका पूनः काशन करने का अिधकार रखता ह। पाठक को एक लेख क पूनः े काशन से लाभ ा हो सकता ह। अिधक जानकार हे तु आप कायालय म संपक कर सकते ह। (सभी ववादो किलये कवल भुवने र यायालय ह मा य होगा।) े े
  • 70. 70 जून 2011 FREE E CIRCULAR गु व योितष प का जून -2011संपादकिचंतन जोशीसंपकगु व योितष वभागगु व कायालय92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)INDIAफोन91+9338213418, 91+9238328785ईमेलgurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,वेबhttp://gk.yolasite.com/http://www.gurutvakaryalay.blogspot.com/
  • 71. 71 जून 2011 हमारा उ े य य आ मय बंध/ ब हन ु जय गु दे व जहाँ आधुिनक व ान समा हो जाता है । वहां आ या मक ान ारं भ हो जाता है , भौितकता का आवरण ओढे यजीवन म हताशा और िनराशा म बंध जाता है , और उसे अपने जीवन म गितशील होने क िलए माग ा नह ं हो पाता यो क ेभावनाए ह भवसागर है , जसमे मनु य क सफलता और असफलता िन हत है । उसे पाने और समजने का साथक यास ह े करसफलता है । सफलता को ा करना आप का भा य ह नह ं अिधकार है । ईसी िलये हमार शुभ कामना सदै व आप क साथ है । आप ेअपने काय-उ े य एवं अनुकलता हे तु यं , ू हर एवं उपर और दलभ मं श ु से पूण ाण- ित त िचज व तु का हमशा योग करे जो १००% फलदायक हो। ईसी िलये हमारा उ े य यह ं हे क शा ो विध- वधान से विश तेज वी मं ो ारा िस ाण- ित त पूण चैत य यु सभी कार क य े - कवच एवं शुभ फलदायी ह र एवं उपर आपक घर तक पहोचाने का है । े सूय क करणे उस घर म वेश करापाती है । जीस घर क खड़क दरवाजे खुले ह । े GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION) (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
  • 72. 72 जून 2011JUN2011

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