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Gurutva jyotish apr 2012
 

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    Gurutva jyotish apr 2012 Gurutva jyotish apr 2012 Document Transcript

    • Font Help >> http://gurutvajyotish.blogspot.comगुरुत्ि कायाालय द्वारा प्रस्िुि मातिक ई-पविका अप्रैल- 2012 हनुमान जयंति विशेष NON PROFIT PUBLICATION .
    • FREE E CIRCULAR गुरुत्ि ज्योतिष पविका अप्रैल 2012िंपादक तिंिन जोशी गुरुत्ि ज्योतिष विभागिंपका गुरुत्ि कायाालय 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIAफोन 91+9338213418, 91+9238328785, gurutva.karyalay@gmail.com,ईमेल gurutva_karyalay@yahoo.in, http://gk.yolasite.com/िेब http://www.gurutvakaryalay.blogspot.com/पविका प्रस्िुति तिंिन जोशी, स्िस्स्िक.ऎन.जोशीफोटो ग्राफफक्ि तिंिन जोशी, स्िस्स्िक आटाहमारे मुख्य िहयोगी स्िस्स्िक.ऎन.जोशी (स्िस्स्िक िोफ्टे क इस्डिया तल) ई- जडम पविका E HOROSCOPE अत्याधुतनक ज्योतिष पद्धति द्वारा Create By Advanced उत्कृ ष्ट भविष्यिाणी क िाथ े Astrology Excellent Prediction १००+ पेज मं प्रस्िुि 100+ Pages फहं दी/ English मं मूल्य माि 750/- GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
    • अनुक्रम हनुमान जयंति विशेष हनुमान िालीिा और बजरं ग बाण का िमत्कार 6 हनुमान जी को तिंदर क्यं अत्यातधक वप्रय हं ? ू 20 िरल उपायं िे कामना पूतिा 7 मंिजाप िे शास्त्रज्ञान 23 पंिमुखी हनुमान का पूजन उत्तम फलदायी हं 8 हनुमान मंि िे भय तनिारण 42 िरल वितध-विधान िे हनुमानजी की पूजा 9 जब हनुमान जी ने िोिा़ शतनदे ि का घमंि 43 हनुमानजी क पूजन िे कायातिवद्ध े 13 ििा तिवद्धदायक हनुमान मडि 44 हनुमान बाहुक क पाठ रोग ि कष्ट दर करिा हं ू 15 हनुमान आराधना क प्रमुख तनयम े 46 मंि एिं स्िोि विशेष हनुमान िालीिा 11 श्री आज्ज्नेय अष्टोत्तरशि नामाितलः 38 बजरं ग बाण 12 मडदात्मक मारुतिस्िोिम ् ं 39 जब हनुमानजी ने िूया को फल िमझा! 21 श्री हनुमि ् स्ििन 39 नटखट हनुमान बाललीला 22 िंकट मोिन हनुमानाष्टक 40 श्री एक मुखी हनुमि ् किि 24 हनुमत्पञ्रिन स्िोिम ् ् 40 श्री पच्िमुखी हनुमत्कििम ् 29 मारुतिस्िोिम ् 41 श्री िप्तमुखी हनुमि ् कििम ् 31 श्रीहनुमडनमस्कारः 41 एकादशमुखी हनुमान किि 34 हनुमान आरिी 42 लाङ्गूलास्त्र शिुज्जय हनुमि ् स्िोि 35 स्ियंप्रभा ने की रामदि हनुमान की िहायिा? ू 48 हमारे उत्पाद दस्िणाितिा शंख 14 श्री हनुमान यंि 43 मंि तिद्ध रूद्राि 51 पढा़ई िंबंतधि िमस्या 67 शतन पीड़ा तनिारक यंि 21 कनकधारा यंि 47 निरत्न जफड़ि श्री यंि 52 ििा रोगनाशक यंि/ 72 भाग्य लक्ष्मी फदब्बी 23 स्फफटक गणेश 48 ििा काया तिवद्ध किि 53 मंि तिद्ध किि 74मंगल यंि िे ऋणमुवि 27 मंि तिद्ध दै िी यंि िूति 49 जैन धमाक वितशष्ट यंि े 54 YANTRA 75मंितिद्ध स्फफटक श्रीयंि 32 मंितिद्ध लक्ष्मी यंििूति 49 अमोद्य महामृत्युजय किि ं 56 GEMS STONE 77 मंि तिद्ध मारुति यंि 37 रातश रत्न 50 राशी रत्न एिं उपरत्न 56 Book Consultation 78 द्वादश महा यंि 45 मंि तिद्ध दलभ िामग्री ु ा 51 शादी िंबंतधि िमस्या 22 घंटाकणा महािीर ििा तिवद्ध महायंि 55 मंि तिद्ध िामग्री- 65, 66, 67 स्थायी और अडय लेख िंपादकीय 4 दै तनक शुभ एिं अशुभ िमय ज्ञान िातलका 68 अप्रैल मातिक रातश फल 57 फदन-राि क िौघफिये े 69 अप्रैल 2012 मातिक पंिांग 61 फदन-राि फक होरा - िूयोदय िे िूयाास्ि िक 70 अप्रैल 2012 मातिक व्रि-पिा-त्यौहार 63 ग्रह िलन अप्रैल-2012 71 अप्रैल 2012 -विशेष योग 68 हमारा उदे श्य 81
    • GURUTVA KARYALAY िंपादकीयवप्रय आस्त्मय बंध/ बफहन ु जय गुरुदे ि इि कलयुग मं ििाातधक दे ििा क रुप मं श्री रामभि हनुमानजी की ही पूजा की जािी हं क्यंफक हनुमानजी ेको कलयुग का जीिंि अथााि िािाि दे ििा माना गया हं । कतलयुग मं शीघ्र प्रिडन होने िाले एिं प्रभािशाली दे ििामं हनुमान जी अपना विशेष स्थान रखिे है ।हनुमान जी क जडम क विषय मं पुराणं एिं शास्त्रो मं मिभेद हं , े े  स्कद पुराण क अनुिार हनुमानजी का जडम िैि माि की पूस्णामा क फदन हुआ था। इि तििा निियुि ं े े पूस्णामा क फदन िूया दे ि अपनी उच्ि राशी मेष मं स्स्थि थे अथााि मेष िंक्रांति मं उनका जडम हुिा हं । े  आनंद रामायण मे उल्लेख फकया गया हं की हनुमान जी का जडम िैि शुक्ल एकादशी को अथााि श्रीराम जी क जडम क दो फदन पश्चाि मघा निि मं हुआ हं । े े  िायु पुराण मे उल्लेख फकया गया हं की हनुमान जी का जडम अस्िन कृ ष्ण ििुदाशी को मंगलिार क फदन मेष े लग्न ि स्िाति निि मं हुआ हं ।  इि प्रकार वितभडन पुराणं क मिं मं तभडनिा हं , लेफकन विद्वानो का कथन हं की हनुमानजी का जीिन िृिांि े एिं वितभडन कथानुिार वििार करने िे िैि शुक्ल पूस्णामा को हनुमान जी का जडम होना ज्यादा उतिि प्रिीि होिा है , क्यंफक आस्िन माि क करीब क िमय मं क दौना िूया दे ि अपनी नीि रातश िूया मं स्स्थि होिे हं े े े और हनुमानजी की किली मं िूया नीि का हो नहीं िकिा! यफद िूया नीि का होिा िो, हनुमानजी इिने शवि ुं िंपडन एिं प्रभािशाली दे ििा नहीं बन पािे। श्री हनुमान जी इिने प्रिापी एिं बल-बुवद्ध िंपडन हं , िो उनकी किली मं िूया तनस्श्चि रुप िे उच्ि का होना िाफहए। उच्ि का िूया ही श्री हनुमानजी क िररि एिं काया शैली ुं े िे उतिि रुप िे मेल खािा हं ।  अडय एक मि िे भगिान श्रीराम क गभा प्रिेश क िमय ही श्री हनुमान जी का भी गभा प्रिेश हुआ था। े े इितलए िैि शुक्ला निमी क आि पाि क िमय मं ही हनुमान जी का जडम होना ज्यादा उपयुि लगिा है । े े इि तलये प्रतििषा िैि माि की पूस्णामा का पिा हनुमान जयंिी क रूप मं मनाया जािा है । े हनुमान क वपिा िुमेरू पिाि क राजा किरी थे िथा मािा अंजना थी। अप्िरा पुंस्जकस्थली (अंजनी नाम िे े े ेप्रतिद्ध) किरी नामक िानर की पत्नी थी। िह अत्यंि िुंदरी थी िथा आभूषणं िे िुिस्ज्जि होकर एक पिाि तशखर ेपर खड़ी थी। उनक िंदया पर मुग्ध होकर िायु दे ि ने उनका आतलंगन फकया। व्रिधाररणी अंजनी बहुि घबरा गयी ेफकिु िायु दे ि क िरदान िे उिकी कोख िे हनुमान ने जडम तलया ं े
    • हनुमान जी भगिान क परम भि हं । रामायण मं िबिे हनुमान जी की भूतमका महत्िपूणा व्यवियं मं िे एक हं । ेशास्त्रोि मि िे भगिान हनुमान जी भगिान तशिजी क 11िं रुद्र क अििार, हनुमान जी िबिे बलिान और बुवद्धमान ेमाने जािे हं । हनुमान जी को बजरं गबली क रूप मं जाना जािा है क्यंफक इनका शरीर एक िज्र की िरह था। हनुमान पिन-पुि ेक रूप मं भीजाने जािे हं , क्योकी िायु दे ि ने हनुमान जी को पालने मे महत्िपूणा भूतमका तनभाई थी। िाल्मीफक ेरामायण मं हनुमान जी को एक िानर िीर बिाया गया हं । पौराणीक ग्रंथो मं उल्लेख हं की एक बार इडद्र क िज्र िे ेहनुमानजी की ठु ड्िी (िंस्कृ ि मे हनु) टू ट गई थी। इितलये उनको हनुमान का नाम फदया गया। इिक अलािा ये ेअनेक नामं िे प्रतिद है जैिे बजरं ग बली, रामभि, मारुति, मारुि नंदन, अंजतन िुि, पुि िायु, पिनपुि, िंकटमोिन,किरीनडदन, महािीर, कपीश, बालाजी महाराज आफद अनेक नामो िे जाना जािा हं । े िैिे िो हनुमानजी की पूजा हे िु अनेको वितध-विधान प्रिलन मं हं लेफकन िाधारण व्यवि जो िंपूणा वितध-विधानिे हनुमानजी का पूजन नहीं कर िकिे िह व्यवि यफद हनुमान जी क पूजन का िरल वितध-विधान ज्ञाि करले िो ेिहँ तनस्श्चि रुप िे पूणा फल प्राप्त कर िकिे हं । इिी उदे श्य िे इि अंक मं पाठको क ज्ञान िृवद्ध क उदे श्य िे हनुमान े ेजी क पूजन की अति िरल शीघ्र फलप्रद वितध, मंि, स्िोि इत्याफद िे आपको पररतिि कराने का प्रयाि फकया हं । जो ेलोग िरल वितध िे मंि जप पूजन इत्याफद करने मं भी अिमथा हं िहँ लोग श्री हनुमान जी क मंि-स्िोि इत्याफद का ेश्रिण कर क भी पूणा श्रद्धा एिं वििाि रख कर तनस्श्चि ही लाभ प्राप्त कर िकिे हं , यहँ अनुभूि उपाय हं जो तनस्श्चि ेफल प्रदान करने मं िमथा हं इि मं जरा भी िंिय नहीं हं । आजक आधुतनक युग मं हर व्यवि अपने जीिन मे िभी भौतिक िुख िाधनो की प्रातप्त क तलये भौतिकिा की दौि े ेमे भागिे हुए फकिी न फकिी िमस्या िे ग्रस्ि है । एिं व्यवि उि िमस्या िे ग्रस्ि होकर जीिन मं हिाशा औरतनराशा मं बंध जािा है । व्यवि उि िमस्या िे अति िरलिा एिं िहजिा िे मुवि िो िाहिा है पर यह िब किे ेहोगा? उि की उतिि जानकारी क अभाि मं मुि हो नहीं पािे। और उिे अपने जीिन मं आगे गतिशील होने क तलए े ेमागा प्राप्त नहीं होिा। एिे मे िभी प्रकार क दख एिं कष्टं को दर करने क तलये अिुक और उत्तम उपाय है हनुमान े ु ू ेिालीिा और बजरं ग बाण का पाठ… हनुमान िालीिा और बजरं ग बाण क पाठ क माध्यम िे िाधारण व्यवि भी वबना फकिी विशेष पूजा अिाना िे े ेअपनी दै तनक फदनियाा िे थोिा िा िमय तनकाल ले िो उिकी िमस्ि परे शानी िे मुवि तमल जािी है । “यह नािोिुतन िुनाइ बाि है ना फकिी फकिाब मे तलखी बाि है , यह स्ियं हमारा तनजी एिं हमारे िाथ जुिे हजारो लोगो केअनुभि है ।” आप िभी क मागादशान या ज्ञानिधान क तलए हनुमान िालीिा और बजरं ग बाण क तनयतमि पाठ िे िे िंबंतधि े े ेउपयोगी जानकारी भी इि अंक मं िंकतलि की गई हं । िाधक एिं विद्वान पाठको िे अनुरोध हं , यफद दशााये गए मंि,स्िोि इत्यादी क िंकलन, प्रमाण पढ़ने, िंपादन मं, फिजाईन मं, टाईपींग मं, वप्रंफटं ग मं, प्रकाशन मं कोई िुफट रह गई हो, ेिो उिे स्ियं िुधार लं या फकिी योग्य गुरु या विद्वान िे िलाह विमशा कर ले.. तिंिन जोशी
    • 6 अप्रेल 2012 हनुमान िालीिा और बजरं ग बाण का िमत्कार  तिंिन जोशी आज हर व्यवि अपने जीिन मे िभी भौतिक “यह नािो िुतन िुनाइ बाि है ना फकिी फकिाबिुख िाधनो की प्रातप्त क तलये भौतिकिा की दौि मे े मे तलखी बाि है , यह स्ियं हमारा तनजी एिं हमारे िाथभागिे हुए फकिी न फकिी िमस्या िे ग्रस्ि है । एिं जुिे लोगो क अनुभि है ।” ेव्यवि उि िमस्या िे ग्रस्ि होकर जीिन मं हिाशा औरतनराशा मं बंध जािा है । उपयोगी जानकारी व्यवि उि िमस्या िे अति िरलिा एिं िहजिा हनुमान िालीिा और बजरं ग बाण क तनयतमि पाठ िे ेिे मुवि िो िाहिा है पर यह िब किे होगा? उि की े हनुमान जी की कृ पा प्राप्त करना िाहिे हं उनक तलए ेउतिि जानकारी क अभाि मं मुि हो नहीं पािे। और े प्रस्िुि हं कछ उपयोगी जानकारी .. ुउिे अपने जीिन मं आगे गतिशील होने क तलए मागा े  तनयतमि रोज िुभह स्नान आफदिे तनिृि होकर स्िच्छप्राप्त नहीं होिा। एिे मे िभी प्रकार क दख एिं कष्टं को े ु कपिे पहन कर ही पाठ का प्रारम्भ करे ।दर करने क तलये अिुक और उत्तम उपाय है हनुमान ू े  तनयतमि पाठ मं शुद्धिा एिं पविििा अतनिाया है ।िालीिा और बजरं ग बाण का पाठ…  हनुमान िालीिा और बजरं ग बाण क पाठ करिे िमय ेहनुमान िालीिा और बजरं ग बाण ही क्यु ? धूप-दीप अिश्य लगाये इस्िे िमत्कारी एिं शीघ्र प्रभाि क्योफक ििामान युग मं श्री हनुमानजी तशिजी के प्राप्त होिा है ।एक एिे अििार है जो अति शीघ्र प्रिडन होिे है जो  दीप िंभि न होिो किल ३ अगरबत्ती जलाकर ही पाठ े करे ।अपने भिो क िमस्ि दखो को हरने मे िमथा है । श्री े ु  कछ विद्वानो क मि िे वबना धूप िे हनुमान िालीिा और ु ेहनुमानजी का नाम स्मरण करने माि िे ही भिो के बजरं ग बाण क पाठ प्रभाि फहन होिा है । ेिारे िंकट दर हो जािे हं । क्योफक इनकी पूजा-अिाना ू  यफद िंभि हो िो प्रिाद किल शुद्ध घी का िढाए अडय था ेअति िरल है , इिी कारण श्री हनुमानजी जन िाधारण मे न िढाएअत्यंि लोकवप्रय है । इनक मंफदर दे श-विदे श ििि स्स्थि े  जहा िक िंभि हो हनुमान जी का तिर् तिि (फोटो) रखे। ाहं । अिः भिं को पहुंिने मं अत्यातधक कफठनाई भी नहीं  यफद घर मे अलग िे पूजा घर की व्यिस्था होआिी है । हनुमानजी को प्रिडन करना अति िरल है िो िास्िुशास्त्र क फहिाब िे मूतिा रखना शुभ होगा। नही े हनुमान िालीिा और बजरं ग बाण क पाठ क े े िो हनुमान जी का तिर् तिि (फोटो) रखे। ामाध्यम िे िाधारण व्यवि भी वबना फकिी विशेष पूजा  यफद मूतिा हो िो ज्यद बिी न हो एिं तमट्टी फक बनी नहीअिाना िे अपनी दै तनक फदनियाा िे थोिा िा िमय रखे।तनकाल ले िो उिकी िमस्ि परे शानी िे मुवि तमल  मूतिा रखना िाहे िो बेहिर है तिर् फकिी धािु या पत्थर ाजािी है । की बनी मूतिा रखे।
    • 7 अप्रेल 2012 हनुमान जी का फोटो/ मूतिा पर िुखा तिंदर लगाना ू  िमस्ि दे ि शवि या इिरीय शवि का प्रयोग किल शुभ े िाफहए। काया उदे श्य की पूतिा क तलये या जन कल्याण हे िु करे । े तनयतमि पाठ पूणा आस्था, श्रद्धा और िेिा भाि िे की  ज्यादािर दे खा गया है की १ िे अतधक बार पाठ करने के जानी िाफहए। उिमे फकिी भी िरह की िंका या िंदेह न उदे श्य िे िमय क अभाि मे जल्द िे जल्द पाठ कने मे े रखे। लोग गलि उच्िारण करिे है । जो अन उतिि है । तिर् दे ि शवि की आजमाइि क तलये यह पाठ न करे । ा े  िमय क अभाि हो िो ज्यादा पाठ करने फक अपेिा एक े या फकिी को हातन, नुक्िान या कष्ट दे ने क उदे श्य िे कोइ े ही पठ करे पर पूणा तनष्ठा और श्रद्धा िे करे । पूजा पाठ नकरे ।  पाठ िे ग्रहं का अशुभत्ि पूणा रूप िे शांि हो जािा है । एिा करने पर दे ि शवि या इिरीय शवि बुरा प्रभाि  यफद जीिन मे परे शानीयां और शिु घेरे हुए है एिं आगे िालिी है या अपना कोइ प्रभाग नफह फदखािी! एिा हमने कोइ रास्िा या उपाय नहीं िुझ रहा िो िरे नही तनयतमि प्रत्यि दे खा है । पाठ करे आपक िारे दख-परे शानीयां दर होजायेगी अपनी े ु ू एिा प्रयोग करने िालो िे हमार विनम्र अनुरोध है कृ प्या आस्था एिं वििाि बनाये रखे। यह पाठ नकरे । िरल उपायं िे कामना पूतिा  मनोकामना पूतिा क फकिी भी मंगलिार या शुभफदन का ियन कर हनुमानजी को प्रतिफदन पाँि े लाल फल अवपाि कर मनोकामना की प्राथाना करं । यफद प्रतिफदन िंभि न हो िो प्रत्येक ू मंगलिार को यह प्रयोग करं ।  कोटा किहरी अथााि मुकदमं मं विजय प्रातप्त क तलए मंगल िार क फदन हनुमानजी तिि या े े प्रतिमा क िमीप श्री हनुमा यंि को स्थावपि कर उिक िामने बजरं ग बाण क 51 पाठ करं । े े े  यफद धन स्स्थर नहीं रहिा हो, िो हनुमानजी क मंफदर मं िीन मंगलिार िक 7 बिाशे, 1 जनेऊ, े 1 पान अवपाि करं बरकि बढने लगेगी।  यफद दिा आफद िे रोग शांि न हो रहा हो िब शतनिार को िूयाास्ि क िमय हनुमानजी क े े मंफदर जाकर हनुमान जी को िाष्टांग दण्ििि ् प्रणाम करं उनक िरणं का तिंदर घर ले आयं। े ू घर लाकर इि मंि िे उि तिडदर को अतभमंविि करं - ू “मनोजिं मारुििुल्यिेगं, स्जिेस्डद्रयं बुवद्धमिां िररष्ठं। िािात्मजं िानरयूथमुख्यं श्रीरामदिं शरणं प्रपद्ये।।” ू अतभमंविि तिडदर का रोगी क मस्िक तिलक लगा दं , रोगी की हालिम शीघ्र िुधार होने ू ेलगेगा।  शतन-िाढ़े िािी क शांति क तलए श्री हनुमान की पूजा-अिाना िथा िेल युि तिंदर अपाण कर े े ू भविपूिक शतनिार का व्रि करना िाफहए। ा 
    • 8 अप्रेल 2012 पंिमुखी हनुमान का पूजन उत्तम फलदायी हं  तिंिन जोशी शास्त्रो विधान िे हनुमानजी का पूजन और हनुमानजी का उत्तर की ओर मुख शूकर का है ।िाधना वितभडन रुप िे फकये जा िकिे हं । इनकी आराधना करने िे अपार धन-िम्पवत्त,ऐिया, यश, हनुमानजी का एकमुखी, पंिमुखीऔर एकादश फदधाायु प्रदान करने िाल ि उत्तम स्िास््य दे ने मं िमथामुखीस्िरूप क िाथ हनुमानजी का बाल हनुमान, भि े हं । हनुमानजी का दस्िणमुखी स्िरूप भगिान नृतिंह काहनुमान, िीर हनुमान, दाि हनुमान, योगी हनुमान आफद है । जो भिं क भय, तिंिा, परे शानी को दर करिा हं । े ूप्रतिद्ध है । फकिु शास्त्रं मं श्री हनुमान क ऐिे िमत्काररक ं े श्री हनुमान का ऊधध्िमुख घोिे क िमान हं । ेस्िरूप और िररि की भवि का महत्ि बिाया गया है , हनुमानजी का यह स्िरुप ब्रह्मा जी की प्राथाना पर प्रकटस्जििे भि को बेजोड़ शवियां प्राप्त होिी है । श्री हनुमान हुआ था। माडयिा है फक हयग्रीिदै त्य का िंहार करने केका यह रूप है - पंिमुखी हनुमान। तलए िे अििररि हुए। कष्ट मं पिे भिं को िे शरण दे िे माडयिा क अनुशार पंिमुखीहनुमान का अििार े हं । ऐिे पांि मुंह िाले रुद्र कहलाने िाले हनुमान बिेभिं का कल्याण करने क तलए हुिा हं । हनुमान क पांि े े कृ पालु और दयालु हं ।मुख क्रमश:पूि, पस्श्चम, उत्तर, दस्िण और ऊधध्ि फदशा मं ा हनुमिमहाकाव्य मं पंिमुखीहनुमान क बारे मं एक कथा हं । ेप्रतिवष्ठि हं । एक बार पांि मुंह िाला एक भयानक रािि प्रकट हुआ। पंिमुखीहनुमानजी का अििार मागाशीषा कृ ष्णाष्टमी उिने िपस्या करक ब्रह्माजीिे िरदान पाया फक मेरे रूप ेको माना जािा हं । रुद्र क अििार हनुमान ऊजाा क े े जैिा ही कोई व्यवि मुझे मार िक। ऐिा िरदान प्राप्त ेप्रिीक माने जािे हं । इिकी आराधना िे बल, कीतिा, करक िह िमग्र लोक मं भयंकर उत्पाि मिाने लगा। ेआरोग्य और तनभीकिा बढिी है । ु िभी दे ििाओं ने भगिान िे इि कष्ट िे छटकारा तमलने रामायण क अनुिार श्री हनुमान का विराट स्िरूप े की प्राथाना की। िब प्रभु की आज्ञा पाकर हनुमानजी नेपांि मुख पांि फदशाओं मं हं । हर रूप एक मुख िाला, िानर, नरतिंह, गरुि, अि और शूकर का पंिमुख स्िरूपविनेिधारी यातन िीन आंखं और दो भुजाओं िाला है । धारण फकया। इि तलये एिी माडयिा है फकयह पांि मुख नरतिंह, गरुि, अि, िानर और िराह रूप पंिमुखीहनुमान की पूजा-अिाना िे िभी दे ििाओं कीहै । हनुमान क पांि मुख क्रमश:पूि, पस्श्चम, उत्तर, दस्िण े ा उपािना क िमान फल तमलिा है । हनुमान क पांिं े ेऔर ऊधध्ि फदशा मं प्रतिवष्ठि माने गएं हं । मुखं मं िीन-िीन िुंदर आंखं आध्यास्त्मक, आतधदै विक िथा पंिमुख हनुमान क पूिा की ओर का मुख िानर े ु आतधभौतिक िीनं िापं को छिाने िाली हं । ये मनुष्य केका हं । स्जिकी प्रभा करोिं िूयो क िेज िमान हं । पूिा े िभी विकारं को दर करने िाले माने जािे हं । भि को ूमुख िाले हनुमान का पूजन करने िे िमस्ि शिुओं का शिुओं का नाश करने िाले हनुमानजी का हमेशा स्मरणनाश हो जािा है । करना िाफहए। विद्वानो क मि िे पंिमुखी हनुमानजी की े पस्श्चम फदशा िाला मुख गरुि का हं । जो भविप्रद, उपािना िे जाने-अनजाने फकए गए िभी बुरे कमा एिंिंकट, विघ्न-बाधा तनिारक माने जािे हं । गरुि की िरह तिंिन क दोषं िे मुवि प्रदान करने िाला हं । पांि मुख ेहनुमानजी भी अजर-अमर माने जािे हं । िाले हनुमानजी की प्रतिमा धातमाक और िंि शास्त्रं मं भी बहुि ही िमत्काररक फलदायी मानी गई है ।
    • 9 अप्रेल 2012 िरल वितध-विधान िे हनुमानजी की पूजा  तिंिन जोशीइि कलयुग मं ििाातधक दे ििा क रुप मं श्री रामभि े इिक पश्चयाि िािल और फल हनुमानजी को अवपाि कर े ूहनुमानजी की ही पूजा की जािी हं क्यंफक हनुमानजी दं ।को कलयुग का जीिंि अथााि िािाि दे ििा माना गयाहं । धमा शास्त्रं क अनुिार हनुमानजी का जडम िैि माि े आिाह्न:की पूस्णामा क फदन हुआ था। इि तलये प्रतििषा िैि माि े हाथ मं फल लेकर इि मंि का उच्िारण करिे हुए श्री ूकी पूस्णामा का पिा हनुमान जयंिी क रूप मं मनाया े हनुमानजी का आिाह्न करं ।जािा है । िषा 2012 मं हनुमान जयंिी 6 अप्रैल, शुक्रिारको हं । उद्यत्कोट्यकिंकाशम ् जगत्प्रिोभकारकम ्। ा श्रीरामस्ड्घ्रध्यानतनष्ठम ् िुग्रीिप्रमुखातिािम ्॥िैिे िो हनुमानजी की पूजा हे िु अनेको वितध-विधान विडनाियडिम ् नादे न राििान ् मारुतिम ् भजेि ्॥प्रिलन मं हं पर यहा िाधारण व्यवि जो िंपूणा वितध-विधान िे हनुमानजी का पूजन नहीं कर िकिे िह ॐ हनुमिे नम: आिाहनाथे पुष्पास्ण िमपायातम॥व्यवि यफद इि वितध-विधान िे पूजन करे िो उडहं भी इिक पश्चयाि फलं को हनुमानजी को अवपाि कर दं । े ूपूणा फल प्राप्त हो िकिा हं । आिन:श्रीहनुमान पूजन वितध इि मंि िे हनुमानजी का आिन अवपाि करं । आिन हे िु कमल अथिा गुलाब का फल अवपाि करं । ूहनुमानजी का पूजन करिे िमय िबिे पहले ऊन केआिन पर पूिा फदशा की ओर मुख करक बैठ जाएं। े िप्तकांिनिणााभम ् मुिामस्णविरास्जिम ्।हनुमानजी की छोटी प्रतिमा अथिा तिि स्थावपि करं । अमलम ् कमलम ् फदव्यमािनम ् प्रतिगृह्यिाम ्॥इिक पश्चाि हाथ मं अिि (अथााि वबना टू टे िािल) े आिमनी:एिं फल लेकर इि मंि िे हनुमानजी का ू इिके पश्चयाि इन मंिं का उच्िारण करिे हुए हनुमानजी क िम्मुख भूतम पर अथिा फकिी बिान मं ेध्यान: िीन बार जल छोड़ं ।अिुतलिबलधामम ् हे मशैलाभदे हम ् ॐ हनुमिे नम:, पाद्यम ् िमपायातम॥दनुजिनकृ शानुम ् ज्ञातननामग्रगण्यम ्। अध्र्यम ् िमपायातम। आिमनीयम ् िमपायातम॥िकलगुणतनधानम ् िानराणामधीशम ्रघुपतिवप्रयभिम ् िािजािम ् नमातम॥ स्नान: इिक पश्चयाि हनुमानजी की मूतिा को गंगाजल अथिा ेॐ हनुमिे नम: ध्यानाथे पुष्पास्ण िमापयातम॥ शुद्ध जल िे स्नान करिाएं ित्पश्चाि पंिामृि (घी, शहद,
    • 10 अप्रेल 2012शक्कर, दध ि दही ) िे स्नान करिाएं। पुन: एक बार ू नैिेद्य (प्रिाद):शुद्ध जल िे स्नान करिाएं। इिक पश्चयाि कले क पत्ते पर या फकिी कटोरी मं पान े े े क पत्ते पर प्रिाद रखं और हनुमानजी को अवपाि कर दं ेिस्त्र: ित्पश्चाि ऋिुफल इत्याफद अवपाि करं । (प्रिाद मं िूरमा,इिक पश्चयाि अब इि मंि िे हनुमानजी को िस्त्र े बुंदी अथिा बेिन क लििू या गुड़ िढ़ाना उत्तम रहिा े है ।)अवपाि करं ि िस्त्र क तनतमत्त मौली भी िढ़ाएं- े इिके पश्चयाि मुखशुवद्ध हे िु लंग-इलाइिीयुि पान िढ़ाएं।शीििािोष्णिंिाणं लज्जाया रिणम ् परम ्।दे हालकरणम ् िस्त्रमि: शांति प्रयच्छ मे॥ दस्िणा: पूजा का पूणा फल प्राप्त करने क तलए इि मंि को बोलिे ेॐ हनुमिे नम:, िस्त्रोपिस्त्रं िमपायातम॥ हुए हनुमानजी को दस्िणा अवपाि करं -पुष्प: ॐ फहरण्यगभागभास्थम ् दे िबीजम ् विभाििं:।इिक पश्चयाि हनुमानजी को अष्ट गंध, तिंदर, ककम, े ू ुं ु अनडिपुण्यफलदमि: शांति प्रयच्छ मे॥िािल, फल ि हार अवपाि करं । ू ॐ हनुमिे नम:, पूजा िाफल्याथं द्रव्य दस्िणां िमपायातम॥धुप-फदप:इिक पश्चयाि इि मंि क िाथ हनुमानजी को धूप-दीप े े आरति:फदखाएं- इिक बाद एक थाली मं कपूर एिं घी का दीपक जलाकर े ािाज्यम ् ि ितिािंयुिम ् िफह्नना योस्जिम ् मया। हनुमानजी की आरिी करं ।दीपम ् गृहाण दे िेश िैलोक्यतितमरापहम ्॥ इि प्रकार क पूजन करने िे भी हनुमानजी अति प्रिडन े होिे हं । इि वितध-विधान िे फकये गये पूजन िे भीभक्त्या दीपम ् प्रयच्छातम दे िाय परमात्मने। भिगण हनुमाजी की पूणा कृ पा प्रप्त कर अपनीिाफह माम ् तनरयाद् घोराद् दीपज्योतिनामोस्िु िे॥ मनोकामना पूरी कर िकिे हं । इि मं लेि माि भीॐ हनुमिे नम:, दीपं दशायातम॥ िंिय नहीं हं । िाधक की हर मनोकामना पूरी करिे हं । मंि तिद्ध  हनुमान पूजन यंि  हनुमान यंि  िंकट मोिन यंि  मारुति यंियंि क विषय मं अतधक जानकारी हे िु िंपक करं । े ा GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
    • 11 अप्रेल 2012 || हनुमान िालीिा |||| दोहा || रघुपति कीडही बहुि बड़ाई। और मनोरथ जो कोई लािै।श्री गुरु िरन िरोज रज, िुम मम वप्रय भरिफह िम भाई॥ ॥१२॥ िोइ अतमि जीिन फल पािै॥ ॥२८॥तनज मनु मुकरु िुधारर। ु िहि बदन िुम्हरो जि गािं। िारं जुग परिाप िुम्हारा।बरनऊ रघुबर वबमल जिु, ँ अि कफह श्रीपति कठ लगािं॥ ॥१३॥ ं है परतिद्ध जगि उस्जयारा॥ ॥२९॥जो दायक फल िारर॥ ु िनकाफदक ब्रह्माफद मुनीिा। िाधु िंि क िुम रखिारे । ेबुवद्धहीन िनु जातनक, े नारद िारद िफहि अहीिा॥ ॥१४॥ अिुर तनकदन राम दलारे ॥ ॥३०॥ ं ुिुतमरं पिन-कमार। ु जम कबेर फदगपाल जहाँ िे। ु अष्ट तिवद्ध नौ तनतध क दािा। ेबल बुवद्ध वबद्या दे हु मोफहं , कवब कोवबद कफह िक कहाँ िे॥ ॥१५॥ े अि बर दीन जानकी मािा॥ ॥३१॥हरहु कलेि वबकार॥ िुम उपकार िुग्रीिफहं कीडहा। राम रिायन िुम्हरे पािा।|| िौपाई || राम तमलाय राज पद दीडहा॥ ॥१६॥ िदा रहो रघुपति क दािा॥ ॥३२॥ ेजय हनुमान ज्ञान गुन िागर। िुम्हरो मंि वबभीषन माना। िुम्हरे भजन राम को पािै।जय कपीि तिहुँ लोक उजागर॥ ॥१॥ लंकस्िर भए िब जग जाना॥ ॥१७॥ े जनम-जनम क दख वबिरािै॥ ॥३३॥ े ुरामदि अिुतलि बल धामा। ू जुग िहस्र जोजन पर भानू। अडिकाल रघुबर पुर जाई।अंजतन-पुि पिनिुि नामा॥ ॥२॥ लील्यो िाफह मधुर फल जानू॥ ॥१८॥ जहाँ जडम हरर-भि कहाई॥ ॥३४॥महाबीर वबक्रम बजरं गी। प्रभु मुफद्रका मेतल मुख माहीं। और दे ििा तित्त न धरई।कमति तनिार िुमति क िंगी॥ ॥३॥ ु े जलतध लाँतघ गये अिरज नाहीं॥ ॥१९॥ हनुमि िेइ िबा िुख करई॥ ॥३५॥किन बरन वबराज िुबेिा। ं दगम काज जगि क जेिे। ु ा े िंकट कटै तमटै िब पीरा।कानन किल कतिि किा॥ ॥४॥ ुं ुं े िुगम अनुग्रह िुम्हरे िेिे॥ ॥२०॥ जो िुतमरै हनुमि बलबीरा॥ ॥३६॥हाथ बज्र औ ध्िजा वबराजै। राम दआरे िुम रखिारे । ु जय जय जय हनुमान गोिाईं।काँधे मूँज जनेऊ िाजै।। ॥५॥ होि न आज्ञा वबनु पैिारे ॥ ॥२१॥ कृ पा करहु गुरुदे ि की नाईं॥ ॥३७॥िंकर िुिन किरीनंदन। े िब िुख लहै िुम्हारी िरना। जो िि बार पाठ कर कोई।िेज प्रिाप महा जग बडदन॥ ॥६॥ िुम रिक काहू को िर ना॥ ॥२२॥ ू छटफह बंफद महा िुख होई॥ ॥३८॥विद्यािान गुनी अति िािुर। आपन िेज िम्हारो आपै। जो यह पढ़ै हनुमान िालीिा।राम काज कररबे को आिुर॥ ॥७॥ िीनं लोक हाँक िं काँपै॥ ॥२३॥ होय तिवद्ध िाखी गौरीिा॥ ॥३९॥प्रभु िररि िुतनबे को रतिया। भूि वपिाि तनकट नफहं आिै। िुलिीदाि िदा हरर िेरा।राम लखन िीिा मन बतिया॥ ॥८॥ महाबीर जब नाम िुनािै॥ ॥२४॥ कीजै नाथ हृदय मँह िे रा॥ ॥४०॥िूक्ष्म रूप धरर तियफहं फदखािा। नािै रोग हरै िब पीरा। || दोहा ||वबकट रूप धरर लंक जरािा॥ ॥९॥ जपि तनरं िर हनुमि बीरा॥ ॥२५॥ पिनिनय िंकट हरन,भीम रूप धरर अिुर िँहारे । ु िंकट िं हनुमान छड़ािै। मंगल मूरतिरूप।रामिंद्र क काज िँिारे ॥ ॥१०॥ े मन क्रम बिन ध्यान जो लािै॥ ॥२६॥ राम लखन िीिा िफहि,लाय िजीिन लखन स्जयाये। िब पर राम िपस्िी राजा। हृदय बिहु िुर भूप॥श्रीरघुबीर हरवष उर लाये॥ ॥११॥ तिन क काज िकल िुम िाजा॥ ॥२७॥ े || इति श्री हनुमान िालीिा िम्पूणा ||
    • 12 अप्रेल 2012 ॥ बजरं ग बाण ॥॥ दोहा ॥ ॐ हनु हनु हनु हनुमंि हठीले। पायँ परं, कर जोरर मनाई॥तनश्चय प्रेम प्रिीति िे, बैररफह मारु बज्र की कीले॥ ॐ िं िं िं िं िपल िलंिा।वबनय करं िनमान। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंिा॥ ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंि कपीिा।िेफह क कारज िकल शुभ, े ॐ हुं हुं हुं हनु अरर उर िीिा॥ ॐ हं हं हाँक दे ि कवप िंिल।तिद्ध करं हनुमान॥ जय अंजतन कमार बलिंिा । ु ॐ िं िं िहतम पराने खल-दल॥॥ िौपाई ॥ शंकरिुिन बीर हनुमंिा॥ अपने जन को िुरि उबारौ।जय हनुमंि िंि फहिकारी । िुतमरि होय आनंद हमारौ॥िुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥ बदन कराल काल-कल-घालक। ुजन क काज वबलंब न कीजै। े राम िहाय िदा प्रतिपालक॥ यह बजरं ग-बाण जेफह मारै ।आिुर दौरर महा िुख दीजै॥ भूि, प्रेि, वपिाि तनिािर । िाफह कहौ फफरर किन उबारै ॥ अतगन बेिाल काल मारी मर॥ पाठ करै बजरं ग-बाण की।जैिे कफद तिंधु मफहपारा । ू हनुमि रिा करै प्रान की॥िुरिा बदन पैफठ वबस्िारा॥ इडहं मारु, िोफह िपथ राम की।आगे जाय लंफकनी रोका । राखु नाथ मरजाद नाम की॥ यह बजरं ग बाण जो जापं।मारे हु लाि गई िुरलोका॥ ित्य होहु हरर िपथ पाइ क। ै िािं भूि-प्रेि िब कापं॥ राम दि धरु मारु धाइ क॥ ू ै धूप दे य जो जपै हमेिा।जाय वबभीषन को िुख दीडहा। िाक िन नफहं रहै कलेिा॥ ेिीिा तनरस्ख परमपद लीडहा॥ जय जय जय हनुमंि अगाधा।बाग उजारर तिंधु महँ बोरा । दख पािि जन कफह अपराधा॥ ु े ॥ दोहा ॥अति आिुर जमकािर िोरा॥ पूजा जप िप नेम अिारा। उर प्रिीति दृढ़, िरन ह्वै , ु नफहं जानि कछ दाि िुम्हारा॥ पाठ करै धरर ध्यान।अिय कमार मारर िंहारा । ु बाधा िब हर,लूम लपेफट लंक को जारा॥ बन उपबन मग तगरर गृह करं िब काम िफल हनुमान॥लाह िमान लंक जरर गई । माहीं। िुम्हरे बल हं िरपि नाहीं॥जय जय धुतन िुरपुर नभ भई॥ जनकिुिा हरर दाि कहािौ। कछ िंस्करणं मं उपरोि दोहा "उर ु िाकी िपथ वबलंब न लािौ॥ प्रिीति दृढ़, िरन ह्वै " क स्थान पर ेअब वबलंब कफह कारन स्िामी। े तनम्न प्रकार िे उल्लेस्खि फकयाकृ पा करहु उर अंिरयामी॥ जै जै जै धुतन होि अकािा। गया है ।जय जय लखन प्रान क दािा। े िुतमरि होय दिह दख नािा॥ ु ुआिुर ह्वै दख करहु तनपािा॥ ु िरन पकरर, कर जोरर मनािं। “प्रेम प्रिीतिफहं कवप भजै। यफह औिर अब कफह गोहरािं॥ े िदा धरं उर ध्यान।जै हनुमान जयति बल-िागर। िेफह क कारज िुरि ही, ेिुर-िमूह-िमरथ भट-नागर॥ उठु , उठु , िलु, िोफह राम दहाई। ु तिद्ध करं हनुमान॥
    • 13 अप्रेल 2012 हनुमानजी क पूजन िे कायातिवद्ध े  तिंिन जोशी, स्िस्स्िक.ऎन.जोशी फहडद ू धमा मं श्री हनुमानजी प्रमुख दे िी-दे ििाओ मं राम भि हनुमान स्िरुप: राम भवि मं मग्न हनुमानजीिे एक प्रमुख दे ि हं । शास्त्रोि मि क अनुशार हनुमानजी को े की उपािना करने िे जीिन क महत्ि पूणा कायो मं आ रहे ेरूद्र (तशि) अििार हं । हनुमानजी का पूजन युगो-युगो िे िंकटो एिं बाधाओं को दर करिी हं एिं अपने लक्ष्य को प्राप्त ूअनंि काल िे होिा आया हं । हनुमानजी को कतलयुग मं करने हे िु आिश्यक एकाग्रिा ि अटू ट लगन प्रदान करनेप्रत्यि दे ि मानागया हं । जो थोिे िे पूजन-अिान िे अपने िाली होिी है ।भि पर प्रिडन हो जािे हं और अपने भि की िभी प्रकार के िंजीिनी पहाड़ तलये हनुमान स्िरुप: िंजीिनी पहाड़दःख, कष्ट, िंकटो इत्यादी का नाश हो कर उिकी रिा करिे ु उठाये हुए हनुमानजी की उपािना करने िे व्यवि कोहं । प्राणभय, िंकट, रोग इत्यादी हे िु लाभप्रद मानी हनुमानजी का फदव्य िररि बल, गई हं । विद्वानो क मि िे स्जि प्रकार ेबुवद्ध कमा, िमपाण, भवि, तनष्ठा, किाव्य हनुमानजी ने लिमणजी क प्राण बिाये ेशील जैिे आदशा गुणो िे युि हं । अिः थे उिी प्रकार हनुमानजी अपने भिो केश्री हनुमानजी क पूजन िे व्यवि मं े प्राण की रिा करिे हं एिं अपने भिभवि, धमा, गुण, शुद्ध वििार, क बिे िे बिे िंकटो को िंस्जिनी ेमयाादा, बल , बुवद्ध, िाहि इत्यादी पहाड़ की िरह उठाने मं िमथा हं ।गुणो का भी विकाि हो जािा हं । ध्यान मग्न हनुमान स्िरुप: विद्वानो के मिानुशार हनुमानजी का ध्यान मग्न स्िरुपहनुमानजी क प्रति दढ आस्था और े व्यवि को िाधना मं िफलिा प्रदानअटू ट वििाि क िाथ पूणा भवि एिं े करने िाला, योग तिवद्ध या प्रदान करनेिमपाण की भािना िे हनुमानजी के िाला मानागया हं ।वितभडन स्िरूपका अपनी आिश्यकिाक अनुशार पूजन-अिान कर व्यवि े रामायणी हनुमान स्िरुप: रामायणीअपनी िमस्याओं िे मुि होकर जीिन मं हनुमानजी का स्िरुप विद्याथीयो क तलये ेिभी प्रकार क िुख प्राप्त कर िकिा हं । े विशेष लाभ प्रद होिा हं । स्जि प्रकार रामायण एक मनोकामना की पूतिा हे िु कौन िी हनुमान प्रतिमा आदशा ग्रंथ हं उिी प्रकार हनुमानजी क रामायणी स्िरुप का ेका पूजल करना लाभप्रद पूजन विद्या अध्यन िे जुिे लोगो क तलये लाभप्रद होिा हं । ेरहे गा। इि जानकारी िे आपको अिगि कराने का प्रयाि हनुमानजी का पिन पुि स्िरुप: हनुमानजी का पिनफकया जारहा हं ।हनुमानजी क प्रमुख स्िरुप इि प्रकार हं । े पुि स्िरुप क पूजन िे आकस्स्मक दघटना, िाहन इत्याफद े ु ा की िुरिा हे िु उत्तम माना गया हं । हनुमानजी क उि स्िरुप े का पूजन करने िे
    • 14 अप्रेल 2012िीरहनुमान स्िरुप: िीरहनुमान स्िरुप मं हनुमानजी दे ि प्रतिमा शुभ फलदायक ि मंगलमय, िकल िम्पवत्त प्राप्तयोद्धा मुद्रामं होिे हं । उनकी पूंछ उस्त्थि (उपर उफठउई) होिी हं । िकल िम्पवत्त की प्रातप्त होिी है ।रहिी है ि दाफहना हाथ मस्िककी ओर मुिा रहिा है । कभी- हनुमानजी का दस्िणमुखी स्िरुप: दस्िणमुखीकभी उनक पैरं क नीिे राििकी मूतिा भी होिी है । े े हनुमानजी की उपािना करने िे व्यवि को भय, िंकट,िीरहनुमान का पूजन भूिा-प्रेि, जाद-टोना इत्याफद आिुरी ू मानतिक तिंिा इत्यादी का नाश होिा हं । क्योफक शास्त्रो केशवियो िे प्राप्त होने िाले कष्टो को दर करने िाला हं । ू अनुशार दस्िण फदशा मं काल का तनिाि होिा हं । तशिजी काल को तनयंिण करने िाले दे ि हं हनुमानजी भगिान तशिराम िेिक हनुमान स्िरुप: हनुमानजी की श्री रामजी की क अििार हं अिः हनुमानजी की पूजा-अिाना करने िे लाभ ेिेिामं लीन हनुमानजी की उपािना करने िे व्यवि क तभिर े प्राप्त होिा हं । जाद-टोना, मंि-िंि इत्याफद प्रयोग दस्िणमुखी ूिेिा और िमपाण क भाि की िृवद्ध होिी हं । व्यवि क तभिर े े हनुमान की प्रतिमा क िमुख करना विशेष लाभप्रद होिा हं । ेधमा, कमा इत्याफद क प्रति िमपाण और िेिा की भािना े दस्िणमुखी हनुमान का तिि दस्िण मुखी भिन क मुख्य ेतनमााण करने हे िु ि व्यवि क तभिर िे क्रोघ, इषाा अहं कार ेइत्याफद भाि क नाश हे िु राम िेिक हनुमान स्िरुप उत्तम े द्वार पर लगाने िे िास्िु दोष दर होिे दे खे गये हं । जाद-टोना, ु ूमाना गया हं । मंि-िंि इत्याफद प्रयोग प्रमुखि: ऐिी मूतिाकेहनुमानजी का उत्तरामुखी स्िरुप: उत्तरामुखी हनुमानजी हनुमानजी का पूिमखी स्िरुप: पूिमुखी हनुमानजी का ा ु ाकी उपािना करने िे िभी प्रकार क िुख प्राप्त होकर जीिन े पूजन करने िे व्यवि क िमस्ि भय, शोक, शिुओं का नाश ेधन, िंपवत्त िे युि हो जािा हं । क्योफक शास्त्रो क अनुशार े हो जािा है ।उत्तर फदशा मं दे िी दे ििाओं का िाि होिा हं , अिः उत्तरमुखी दस्िणाितिा शंख आकार लंबाई मं फाईन िुपर फाईन स्पेशल आकार लंबाई मं फाईन िुपर फाईन स्पेशल 0.5" ईंि 180 230 280 4" to 4.5" ईंि 730 910 1050 1" to 1.5" ईंि 280 370 460 5" to 5.5" ईंि 1050 1250 1450 2" to 2.5" ईंि 370 460 640 6" to 6.5" ईंि 1250 1450 1900 3" to 3.5" ईंि 460 550 820 7" to 7.5" ईंि 1550 1850 2100 हमारे यहां बड़े आकार क फकमिी ि महं गे शंख जो आधा लीटर पानी और 1 लीटर पानी िमाने की िमिा िाले े होिे हं । आपक अनुरुध पर उपलब्ध कराएं जा िकिे हं । े  स्पेशल गुणित्ता िाला दस्िणाितिा शंख पूरी िरह िे िफद रं ग का होिा हं । े  िुपर फाईन गुणित्ता िाला दस्िणाितिा शंख फीक िफद रं ग का होिा हं । े े  फाईन गुणित्ता िाला दस्िणाितिा शंख दं रं ग का होिा हं । GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 923832878 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
    • 15 अप्रेल 2012 हनुमान बाहुक क पाठ रोग ि कष्ट दर करिा हं ू  तिंिन जोशी,हनुमान बाहुक की रिना िंि गोस्िामी िुलिीदािजी ने रिना दिनानन । कवपि कि करकि लंगूर, खल-दल- ेअपीन दाफहनी बाहु मं हुई अिह्य पीड़ा क तनिारण क े े बल-भानन ॥ कह िुलतिदाि बि जािु उर मारुििुितलए की थी। हनुमान बाहुक मं िुलिीदािजी ने मूरति विकट । िंिाप पाप िेफह पुरुष पफह िपनेहुँ नफहंहनुमानजी की मफहमा का तिंिन ि िुलिीदािजी के आिि तनकट ॥२॥ििाअगो मं हो रही पीड़ा की तनिृति की प्राथाना है । ं झूलनाहनुमान बाहुक तिद्ध िंि गोस्िामी िुलिीदािजी क द्वारा े पञ्िमुख-छःमुख भृगु मुख्य भट अिुर िुर, ििा िररविरतिि तिद्ध स्िोि है । िमर िमरत्थ िूरो । बांकरो बीर वबरुदै ि वबरुदािली, बेद ुहनुमान बाहुक का पाठ फकिी भी प्रकार की आतध–व्यातध बंदी बदि पैजपूरो ॥ जािु गुनगाथ रघुनाथ कह जािुबल,जेिी पीड़ा, भूि, पेि, वपशाि, जेिी उपातध िथा फकिी भी वबपुल जल भररि जग जलतध झूरो ।प्रकार क शिु द्वारा फकये हुए दष्ट तभिार कमा की तनिृति े ु दिन दल दमन को कौन िुलिीि है , पिन को पूि ुक तलए हनुमान बाहुक का तनयतमि पाठ िथा अनुष्ठान े रजपूि रुरो ॥३॥श्रेष्ठ उपाय हं । अनुष्ठान क िमय एकाहार अथिा फलाहार े घनािरीकरे । पूणा ब्रह्मिया आफद का पालन और भूतम शयन करं । भानुिं पढ़न हनुमान गए भानुमन, अनुमातन तििु कतल े हनुमानजी का पूजन और हनुमान बाहुक क पाठ े फकयो फर फारिो । पातछले पगतन गम गगन मगन मन, ेका अनुष्ठान 40 फदन िक करने िे अभीष्ट फल की तिवद्ध क्रम को न भ्रम कवप बालक वबहार िो ॥ कौिुक वबलोफकअथिा रोग, कष्ट इत्याफद का तनिारण हो जािा है । लोकपाल हररहर वितध, लोिनतन िकािंधी तित्ततन खबारनोट: जो व्यवि अनुष्ठान करने मं अिमथा हो िह िो। बल कधो बीर रि धीरज क, िाहि क, िुलिी िरीर ं ै ैप्रतिफदन हनुमान बाहुक का श्रद्धा अनुशार पाठ करक भी े धरे िबतन िार िो ॥४॥लाभ प्राप्त कर िकिे हं । भारि मं पारथ क रथ कथू कवपराज, गाज्यो िुतन े े हनुमान बाहुक करुराज दल हल बल भो । कह्यो द्रोन भीषम िमीर िुि ुछप्पय महाबीर, बीर-रि-बारर-तनतध जाको बल जल भो ॥ बानरतिंधु िरन, तिय-िोि हरन, रवब बाल बरन िनु । भुज िुभाय बाल कतल भूतम भानु लातग, फलँग फलाँग हूिं ेवबिाल, मूरति कराल कालहु को काल जनु ॥ गहन-दहन- घाफट नभ िल भो । नाई-नाई-माथ जोरर-जोरर हाथ जोधातनरदहन लंक तनःिंक, बंक-भुि । जािुधान-बलिान मान- जो हं , हनुमान दे खे जगजीिन को फल भो ॥५॥मद-दिन पिनिुि ॥ कह िुलतिदाि िेिि िुलभ िेिकफहि िडिि तनकट । गुन गनि, नमि, िुतमरि जपि गो-पद पयोतध करर, होतलका ज्यं लाई लंक, तनपटिमन िकल-िंकट-विकट ॥१॥ तनःिंक पर पुर गल बल भो । द्रोन िो पहार तलयो ख्याल ही उखारर कर, कदक ज्यं कवप खेल बेल किो फल भो ं ु ैस्िना-िैल-िंकाि कोफट-रवि िरुन िेज घन । उर वििाल ॥ िंकट िमाज अिमंजि भो राम राज, काज जुग पूगतनभुज दण्ि िण्ि नख-िज्रिन ॥ वपंग नयन, भृकटी कराल ु
    • 16 अप्रेल 2012को करिल पल भो । िाहिी िमत्थ िुलिी को नाई जा मोदक ददान भो । आरि की आरति तनिाररबे को तिहुँ ुकी बाँह, लोक पाल पालन को फफर तथर थल भो ॥६॥ पुर, िुलिी को िाहे ब हठीलो हनुमान भो ॥११॥कमठ की पीफठ जाक गोितन की गाड़ं मानो, नाप क े े िेिक स्योकाई जातन जानकीि मानै कातन, िानुकल ूभाजन भरर जल तनतध जल भो । जािुधान दािन परािन िूलपातन निै नाथ नाँक को । दे िी दे ि दानि दयािने ह्वैको दगा भयो, महा मीन बाि तितम िोमतन को थल भो ॥ ु जोरं हाथ, बापुरे बराक कहा और राजा राँक को ॥ जागिकम्भकरन रािन पयोद नाद ईधन को, िुलिी प्रिाप ु िोिि बैठे बागि वबनोद मोद, िाक जो अनथा िो िमथा ेजाको प्रबल अनल भो । भीषम कहि मेरे अनुमान एक आँक को । िब फदन रुरो परै पूरो जहाँ िहाँ िाफह,हनुमान, िाररखो विकाल न विलोक महाबल भो ॥७॥ जाक है भरोिो फहये हनुमान हाँक को ॥१२॥ ेदि राम राय को िपूि पूि पौनको िू, अंजनी को नडदन ू िानुग िगौरर िानुकल िूलपातन िाफह, लोकपाल िकल ूप्रिाप भूरर भानु िो । िीय-िोि-िमन, दररि दोष दमन, ु लखन राम जानकी । लोक परलोक को वबिोक िोिरन आये अिन लखन वप्रय प्राण िो ॥ दिमुख दिह ु तिलोक िाफह, िुलिी िमाइ कहा काहू बीर आनकी ॥दररद्र दररबे को भयो, प्रकट तिलोक ओक िुलिी तनधान किरी फकिोर बडदीछोर क नेिाजे िब, कीरति वबमल े ेिो । ज्ञान गुनिान बलिान िेिा िािधान, िाहे ब िुजान कवप करुनातनधान की । बालक ज्यं पातल हं कृ पालु मुतनउर आनु हनुमान िो ॥८॥ तिद्धिा को, जाक फहये हुलिति हाँक हनुमान की ॥१३॥ ेदिन दिन दल भुिन वबफदि बल, बेद जि गािि वबबुध ु करुनातनधान बलबुवद्ध क तनधान हौ, मफहमा तनधान ेबंदी छोर को । पाप िाप तितमर िुफहन तनघटन पटु , िेिक गुनज्ञान क तनधान हौ । बाम दे ि रुप भूप राम क िनेही, े ेिरोरुह िुखद भानु भोर को ॥ लोक परलोक िं वबिोक नाम, लेि दे ि अथा धमा काम तनरबान हौ ॥ आपने प्रभाििपने न िोक, िुलिी क फहये है भरोिो एक ओर को । े िीिाराम क िुभाि िील, लोक बेद वबतध क वबदष े े ूराम को दलारो दाि बामदे ि को तनिाि। नाम कतल ु हनुमान हौ । मन की बिन की करम की तिहूँ प्रकार,कामिरु किरी फकिोर को ॥९॥ े िुलिी तिहारो िुम िाहे ब िुजान हौ ॥१४॥महाबल िीम महा भीम महाबान इि, महाबीर वबफदि मन को अगम िन िुगम फकये कपीि, काज महाराज केबरायो रघुबीर को । कतलि कठोर िनु जोर परै रोर रन, ु िमाज िाज िाजे हं । दे िबंदी छोर रनरोर किरी फकिोर, ेकरुना कतलि मन धारतमक धीर को ॥ दजन को कालिो ु ा जुग जुग जग िेरे वबरद वबराजे हं । बीर बरजोर घफटकराल पाल िज्जन को, िुतमरे हरन हार िुलिी की पीर जोर िुलिी की ओर, िुतन िकिाने िाधु खल गन गाजे ुको । िीय-िुख-दायक दलारो रघुनायक को, िेिक िहायक ु हं । वबगरी िँिार अंजनी कमार कीजे मोफहं , जैिे होि ुहै िाहिी िमीर को ॥१०॥ आये हनुमान क तनिाजे हं ॥१५॥ ेरतिबे को वबतध जैिे, पातलबे को हरर हर, मीि माररबे को, ििैयाज्याईबे को िुधापान भो । धररबे को धरतन, िरतन िम जान तिरोमतन हो हनुमान िदा जन क मन बाि तिहारो ेदतलबे को, िोस्खबे कृ िानु पोवषबे को फहम भानु भो ॥ खल । ढ़ारो वबगारो मं काको कहा कफह कारन खीझि हं िो ेदःख दोवषबे को, जन पररिोवषबे को, माँतगबो मलीनिा को ु तिहारो ॥ िाहे ब िेिक नािे िो हािो फकयो िो िहां
    • 17 अप्रेल 2012िुलिी को न िारो । दोष िुनाये िं आगेहुँ को होतशयार उथपे थपनतथर थपे उथपनहार, किरी कमार बल आपनो े ुह्वं हं मन िो फहय हारो ॥१६॥ िंबाररये । राम क गुलामतन को काम िरु रामदि, मोिे दीन दबरे े ू ूिेरे थपै उथपै न महे ि, थपै तथर को कवप जे उर घाले । को िफकया तिहाररये ॥ िाहे ब िमथा िो िं िुलिी केिेरे तनबाजे गरीब तनबाज वबराजि बैररन क उर िाले ॥ े माथे पर, िोऊ अपराध वबनु बीर, बाँतध माररये । पोखरीिंकट िोि िबै िुलिी तलये नाम फटै मकरी क िे जाले े वबिाल बाँहु, बतल, बाररिर पीर, मकरी ज्यं पकरर क बदन े। बूढ भये बतल मेररफहं बार, फक हारर परे बहुिै नि पाले वबदाररये ॥२२॥॥१७॥ राम को िनेह, राम िाहि लखन तिय, राम की भगति,तिंधु िरे बड़े बीर दले खल, जारे हं लंक िे बंक मिािे । िोि िंकट तनिाररये । मुद मरकट रोग बाररतनतध हे ररिं रतन कहरर कहरर क वबदले अरर कजर छै ल छिािे ॥ े े े ुं हारे , जीि जामिंि को भरोिो िेरो भाररये ॥ कफदये कृ पाल ूिोिो िमत्थ िुिाहे ब िेई िहै िुलिी दख दोष दिा िे । ु िुलिी िुप्रेम पब्बयिं, िुथल िुबेल भालू बैफठ क वििाररये ैबानरबाज ! बढ़े खल खेिर, लीजि क्यं न लपेफट लिािे । महाबीर बाँकरे बराकी बाँह पीर क्यं न, लंफकनी ज्यं ु॥१८॥ लाि घाि ही मरोरर माररये ॥२३॥अच्छ विमदा न कानन भातन दिानन आनन भा न तनहारो लोक परलोकहुँ तिलोक न विलोफकयि, िोिे िमरथ िष। बाररदनाद अकपन कभकरन िे कञ्जर कहरर िारो ॥ ं ुं ु े िाररहूँ तनहाररये । कमा, काल, लोकपाल, अग जग जीिजाल,राम प्रिाप हुिािन, कच्छ, विपच्छ, िमीर िमीर दलारो । ु नाथ हाथ िब तनज मफहमा वबिाररये ॥ खाि दाि रािरो,पाप िे िाप िे िाप तिहूँ िं िदा िुलिी कह िो रखिारो तनिाि िेरो िािु उर, िुलिी िो, दे ि दखी दे स्खअि भाररये ु॥१९॥ ु । बाि िरुमूल बाँहूिूल कवपकच्छ बेतल, उपजी िकतल े कवप कतल ही उखाररये ॥२४॥ ेघनािरीजानि जहान हनुमान को तनिाज्यो जन, मन अनुमातन करम कराल कि भूतमपाल क भरोिे, बकी बक भतगनी ं ेबतल बोल न वबिाररये । िेिा जोग िुलिी कबहुँ कहा काहू िं कहा िरै गी । बड़ी वबकराल बाल घातिनी न जाििूक परी, िाहे ब िुभाि कवप िाफहबी िंभाररये ॥ अपराधी कफह, बाँहू बल बालक छबीले छोटे छरै गी ॥ आई है बनाईजातन कीजै िािति िहि भास्डि, मोदक मरै जो िाफह बेष आप ही वबिारर दे ख, पाप जाय िब को गुनी क पाले ेमाहुर न माररये । िाहिी िमीर क दलारे रघुबीर जू क, े ु े परै गी । पूिना वपिातिनी ज्यं कवप काडह िुलिी की, बाँहबाँह पीर महाबीर बेतग ही तनिाररये ॥२०॥ पीर महाबीर िेरे मारे मरै गी ॥२५॥बालक वबलोफक, बतल बारं िं आपनो फकयो, दीनबडधु दया भाल की फक काल की फक रोष की विदोष की है , बेदनकीडहीं तनरुपातध डयाररये । रािरो भरोिो िुलिी क, े वबषम पाप िाप छल छाँह की । करमन कट की फक जडि ूरािरोई बल, आि रािरीयै दाि रािरो वििाररये ॥ बड़ो मडि बूट की, पराफह जाफह पावपनी मलीन मन माँह की ॥वबकराल कतल काको न वबहाल फकयो, माथे पगु बतल को पैहफह िजाय, नि कहि बजाय िोफह, बाबरी न होफह बातनतनहारर िो तनबाररये । किरी फकिोर रनरोर बरजोर बीर, े जातन कवप नाँह की । आन हनुमान की दहाई बलिान ुबाँह पीर राहु मािु ज्यं पछारर माररये ॥२१॥ की, िपथ महाबीर की जो रहै पीर बाँह की ॥२६॥
    • 18 अप्रेल 2012तिंफहका िँहारर बल िुरिा िुधारर छल, लंफकनी पछारर दे िी दे ि दनुज मनुज मुतन तिद्ध नाग, छोटे बड़े जीि जेिेमारर बाफटका उजारी है । लंक परजारर मकरी वबदारर बार िेिन अिेि हं । पूिना वपिािी जािुधानी जािुधान बाग,बार, जािुधान धारर धूरर धानी करर िारी है ॥ िोरर राम दि की रजाई माथे मातन लेि हं ॥ घोर जडि मडि ूजमकािरर मंदोदरी कठोरर आनी, रािन की रानी मेघनाद कट कपट करोग जोग, हनुमान आन िुतन छाड़ि तनकि ू ु ेमहिारी है । भीर बाँह पीर की तनपट राखी महाबीर, कौन हं । क्रोध कीजे कमा को प्रबोध कीजे िुलिी को, िोधक िकोि िुलिी क िोि भारी है ॥२७॥ े े कीजे तिनको जो दोष दख दे ि हं ॥३२॥ ुिेरो बातल कतल बीर िुतन िहमि धीर, भूलि िरीर िुतध े िेरे बल बानर स्जिाये रन रािन िं, िेरे घाले जािुधानिक्र रवि राहु की । िेरी बाँह बिि वबिोक लोक पाल भये घर घर क । िेरे बल राम राज फकये िब िुर काज, ेिब, िेरो नाम लेि रहं आरति न काहु की ॥ िाम दाम िकल िमाज िाज िाजे रघुबर क ॥ िेरो गुनगान िुतन ेभेद वितध बेदहू लबेद तितध, हाथ कवपनाथ ही क िोटी े गीरबान पुलकि, िजल वबलोिन वबरं ति हररहर क । ेिोर िाहु की । आलि अनख पररहाि क तिखािन है , एिे ै िुलिी क माथे पर हाथ फरो कीि नाथ, दे स्खये न दाि े ेफदन रही पीर िुलिी क बाहु की ॥२८॥ े दखी िोिो कतनगर क ॥३३॥ ु ेटू कतन को घर घर िोलि कगाल बोतल, बाल ज्यं कृ पाल ँ पालो िेरे टू क को परे हू िूक मूफकये न, कर कौड़ी दको हं ू ूनि पाल पातल पोिो है । कीडही है िँभार िार अँजनी आपनी ओर हे ररये । भोरानाथ भोरे ही िरोष होि थोरेकमार बीर, आपनो वबिारर हं न मेरेहू भरोिो है ॥ इिनो ु दोष, पोवष िोवष थावप आपनो न अि िे ररये ॥ अँबु िू हंपरे खो िब भास्डि िमरथ आजु, कवपराज िांिी कहं को अँबु िूर, अँबु िू हं फिं भ िो न, बूस्झये वबलंब अिलंब मेरेतिलोक िोिो है । िािति िहि दाि कीजे पेस्ख पररहाि, िेररये। बालक वबकल जातन पाफह प्रेम पफहिातन, िुलिी कीिीरी को मरन खेल बालकतन कोिो है ॥२९॥ बाँह पर लामी लूम फररये ॥३४॥ ेआपने ही पाप िं विपाि िं फक िाप िं, बढ़ी है बाँह बेदन घेरर तलयो रोगतन, कजोगतन, कलोगतन ज्यं, बािर जलद ु ुकही न िफह जाति है । औषध अनेक जडि मडि घन घटा धुफक धाई है । बरिि बारर पीर जाररये जिािेटोटकाफद फकये, बाफद भये दे ििा मनाये अधीकाति है ॥ जि, रोष वबनु दोष धूम मूल मतलनाई है ॥ करुनातनधानकरिार, भरिार, हरिार, कमा काल, को है जगजाल जो न हनुमान महा बलिान, हे रर हँ ति हाँफक फफक फंजै िे उड़ाई ूंमानि इिाति है । िेरो िेरो िुलिी िू मेरो कह्यो राम दि, ू है । खाये हुिो िुलिी करोग राढ़ राकितन, किरी फकिोर ु ेढील िेरी बीर मोफह पीर िं वपराति है ॥३०॥ राखे बीर बररआई है ॥३५॥दि राम राय को, िपूि पूि िाय को, िमत्ि हाथ पाय ू ििैयाको िहाय अिहाय को । बाँकी वबरदािली वबफदि बेद राम गुलाम िु ही हनुमान गोिाँई िुिाँई िदा अनुकलो । ूगाइयि, रािन िो भट भयो मुफठका क धाय को ॥ एिे े पाल्यो हं बाल ज्यं आखर द ू वपिु मािु िं मंगल मोदबिे िाहे ब िमथा को तनिाजो आज, िीदि िुिेिक बिन िमूलो ॥ बाँह की बेदन बाँह पगार पुकारि आरि आनँदमन काय को । थोरी बाँह पीर की बड़ी गलातन िुलिी को, भूलो । श्री रघुबीर तनिाररये पीर रहं दरबार परो लफटकौन पाप कोप, लोप प्रकट प्रभाय को ॥३१॥ लूलो ॥३६॥
    • 19 अप्रेल 2012घनािरी अिन बिन हीन वबषम वबषाद लीन, दे स्ख दीन दबरो करै ूकाल की करालिा करम कफठनाई कीधौ, पाप क प्रभाि े न हाय हाय को । िुलिी अनाथ िो िनाथ रघुनाथकी िुभाय बाय बािरे । बेदन कभाँति िो िही न जाति ु फकयो, फदयो फल िील तिंधु आपने िुभाय को ॥ नीिराति फदन, िोई बाँह गही जो गही िमीर िाबरे ॥ लायो यफह बीि पति पाइ भरु हाईगो, वबहाइ प्रभु भजन बिनिरु िुलिी तिहारो िो तनहारर बारर, िींतिये मलीन भो मन काय को । िा िं िनु पेवषयि घोर बरिोर तमि, फफट ूियो है तिहुँ िािरे । भूितन की आपनी पराये की कृ पा फफट तनकिि लोन राम राय को ॥४१॥ ूतनधान, जातनयि िबही की रीति राम रािरे ॥३७॥ जीओ जग जानकी जीिन को कहाइ जन, मररबे कोपाँय पीर पेट पीर बाँह पीर मुंह पीर, जर जर िकल पीर बारानिी बारर िुर िरर को । िुलिी क दोहूँ हाथ मोदक ेमई है । दे ि भूि वपिर करम खल काल ग्रह, मोफह पर हं ऐिे ठाँऊ, जाक स्जये मुये िोि कररहं न लरर को ॥ मो ेदिरर दमानक िी दई है ॥ हं िो वबनु मोल क वबकानो े को झूँटो िाँिो लोग राम कौ कहि िब, मेरे मन मान हैबतल बारे हीिं, ओट राम नाम की ललाट तलस्ख लई है । न हर को न हरर को । भारी पीर दिह िरीर िं वबहाल ुकभज क फककर वबकल बूढ़े गोखुरतन, हाय राम राय ऐिी ुँ े ं होि, िोऊ रघुबीर वबनु िक दर करर को ॥४२॥ ै ूहाल कहूँ भई है ॥३८॥ िीिापति िाहे ब िहाय हनुमान तनि, फहि उपदे श कोबाहुक िुबाहु नीि लीिर मरीि तमतल, मुँह पीर किुजा े महे ि मानो गुरु क । मानि बिन काय िरन तिहारे ैकरोग जािुधान है । राम नाम जप जाग फकयो िहं ु पाँय, िुम्हरे भरोिे िुर मं न जाने िुर क ॥ ब्यातध भूि ैिानुराग, काल किे दि भूि कहा मेरे मान है ॥ िुतमरे ै ू जतनि उपातध काहु खल की, िमातध की जै िुलिी कोिहाय राम लखन आखर दौऊ, स्जनक िमूह िाक जागि े े जातन जन फर क । कवपनाथ रघुनाथ भोलानाथ भूिनाथ, ु ैजहान है । िुलिी िँभारर िािका िँहारर भारर भट, बेधे रोग तिंधु क्यं न िाररयि गाय खुर क ॥४३॥ ैबरगद िे बनाई बानिान है ॥३९॥ कहं हनुमान िं िुजान राम राय िं, कृ पातनधान िंकरबालपने िूधे मन राम िनमुख भयो, राम नाम लेि माँतग िं िािधान िुतनये । हरष विषाद राग रोष गुन दोष मई,खाि टू क टाक हं । परयो लोक रीति मं पुनीि प्रीति राम वबरिी वबरञ्िी िब दे स्खयि दतनये ॥ माया जीि काल क ु ेराय, मोह बि बैठो िोरर िरफक िराक हं ॥ खोटे खोटे करम क िुभाय क, करै या राम बेद कहं िाँिी मन गुतनये े ेआिरन आिरि अपनायो, अंजनी कमार िोध्यो रामपातन ु । िुम्ह िं कहा न होय हा हा िो बुझैये मोफहं , हं हूँ रहंपाक हं । िुलिी गुिाँई भयो भंिे फदन भूल गयो, िाको मौनही ियो िो जातन लुतनये ॥४४॥फल पािि तनदान पररपाक हं ॥४०॥ अिली 1 मुखी िे 14 मुखी रुद्रािगुरुत्ि कायाालय मं िंपूणा प्राणप्रतिवष्ठि एिं अिली 1 मुखी िे 14 मुखी िक क रुद्राि उपलब्ध हं । ज्योतिष काया िे जुिे़ ेबंध/बहन ि रत्न व्यििाय िे जुिे लोगो क तलये विशेष मूल्य पर रत्न, उपरत्न यंि, रुद्राि ि अडय दलभ िामग्रीयां एिं ु े ु ाअडय िुविधाएं उपलब्ध हं । रुद्राि क विषय मं अतधक जानकारी क तलए कायाालय मं िंपक करं । े े ाविशेष यंि : हमारं यहां िभी प्रकार के यंि िोने-िांफद-िाम्बे मं आपकी आिश्यिा के अनुशार फकिी भी भाषा/धमाक यंिो को आपकी आिश्यक फिजाईन क अनुशार २२ गेज शुद्ध िाम्बे मं अखंफिि बनाने की विशेष िुविधाएं उपलब्ध े ेहं । अतधक जानकारी क तलए कायाालय मं िंपक करं । े ा GURUTVA KARYALAY BHUBNESWAR-751018, (ORISSA), Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com .
    • 20 अप्रेल 2012 हनुमान जी को तिंदर क्यं अत्यातधक वप्रय हं ? ू  स्िस्स्िक.ऎन.जोशी हनुमान जी को तिंदर अत्यातधक वप्रय है । जो ू िीिा जी की बार िुनकर हनुमानजी िोिने लगेभि हनुमान जी को तिंदर भंट करिा है उि पर हनुमान ू फक, मािा िीिा क जरा िा तिंदर लगाने िे रामजी को े ूजी अिश्य प्रिडन होिे हं । दीधाायु प्राप्त होगी िो, मं भी अपने स्िामी की फदधाायु की कतलयुग मं हनुमान िािाि दे ि हं , जो थोिी िी कामना िे अपनी पूरे शरीर पर तिंदर लगाऊ िो मेरे ूभवि एिं आराधना िे अति शीघ्र प्रिडन होिे हं । शास्त्रंि स्िामी की आयु और अतधक हो जाएगी, रामजी अजरमि क अनुिार हनुमान जी भगिान श्री राम की आज्ञा े अमर हो जायेगे और उनकी कृ पा िदै ि मुझ पर बनीिे कलयुग मं धमा की रिा क तलए पृ्िी पर तनिाि े रहे गी। यह िंि कर श्रीराम का ध्यान करिे हुए हनुमानकरिे हं । हनुमान जी को श्रीराम जी िे िरदान प्राप्त है जी ने अपने पूरे शरीर पर तिंदर लगाना प्रारं भ कर ूफक कलयुग मं अडय दे ििाओं की अपेिा िह अतधक फदया। इिी घटना क कारण भगिान हनुमानजी को तिंदर े ूप्रभािशाली हंगे। यफह कारण हं की भारि दे श क प्रायः े िढ़ाने की प्रथा प्रारं भ हुई।हर छोटे -बिे शहर या गांि मं हनुमान जी क मंफदर े िरिं क िेल मं तिंदर तमलाकर हनुमान जी को े ूअिश्य पाये जािे हं । ज्योतिष क जानकारो की माने िो े लेप करने िे शतन और मंगल की पीड़ा िे मुवि तमलिीहनुमान जी क पूजन िे भिं को शतन और मंगल ग्रह े हं । िेल शतन और तिंदर मंगल की िस्िु हं । मंगल और ूक कष्टो िे मुवि तमलिी हं । े शतन दोनं ही ग्रह हनुमान जी की कृ पा क पाि हं इि े जो भि हनुमानजी को तिंदर अवपाि करिा है ू तलए इन दोनो ग्रहो की पीिा़ िे शांति तमलिी हं । (कछ ुउििे हनुमान जी प्रिडन होिे हं और िभी इच्छाएं पूणा विद्वानो का मि हं की िेल शतन की िस्िु हं अिःकरिे हं । िमेली, तिल का िेल या अडय िेल भी प्रयोग मं तलया हनुमानजी को तिंदर क्यं अवपाि फकया जािा है ू जा िकिा हं ।)इि िंबंध मं कथाएं प्रितलि हं , लेफकन प्रमुख कथा मािा ज्योतिष क अनुिार शतन की िाढ़े िािी और ेिीिा िे जुिी हं , जो इि प्रकार हं .. ढै य्या मं अशुभ प्रभाि िे रिा क तलए हनुमानजी को ेरािण िध क पश्चाि जब श्रीराम, लक्ष्मण, िीिा, हनुमान े तिंदर का िोला अिश्य िढाना िाफहए हं । ूएिं िेना अडय िफहि िभी अयोध्या िापि लौटे । श्रीराम कछ विद्वानो का मि हं की यफद कोई भि िप्ताह ुजी क राज्यातभषेक क पश्चाि एक फदन हनुमानजी ने े े मं किल दो फदन मंगलिार और शतनिार को ही ेदे खा फक मािा िीिा अपनी मांग मं तिंदर लगा रही हं । ू हनुमानजी का वितधिि पूजन कर लेिा हं , िो उिकेउडहं दे ख कर उत्िुकिा िे बजरं गबली ने मािा िीिा िे जीिन की वितभडन िमस्याएं स्िि: ही िमाप्त होने लगतिंदर लगाने का कारण पूछा। िब मािा िीिा ने बिाया ू जाएंगी। बजरं गबली को प्रिडन करने क िरल उपाय मं ेफक इि प्रकार तिंदर लगाने िे मेरे स्िामी दीधाायु हंगे ू श्रीराम मंि का जप, िुंदरकांि या हनुमान िातलिामऔर उडहं स्िस्थ जीिन की प्रातप्त होगी। बजरं गबाण का पाठ इत्याफद करना श्रेष्ठ है ।
    • 21 अप्रेल 2012 जब हनुमानजी ने िूया को फल िमझा!  श्रेया.ऐि.जोशीपौरास्णक ग्रंथो मं उल्लेख कथा क अनुशार हनुमान जी े को छोड़ राहु पर झपटे । राहु ने इडद्र को रिा क तलये ेअपनी बाल्यािस्था मं एक फदन इनकी मािा अंजतन पुकारा िो उडहंने हनुमानजी पर िज्रायुध िे प्रहार फकयाफल-फल लाने क तलये इडहं आश्रम मं छोड़कर िली ू े स्जििे िे एक पिाि पर तगरे और उनकी बायीं ठु ड्िी टू टगईं। जब बाल हनुमान को भूख लगी िो, उनहं ने उगिे गई। हनुमान की यह दशा दे खकर िायुदेि को क्रोधहुये िूया को फल िमझकर उिे पकड़ने आकाश मं उड़ने आया। उडहंने उिी िण अपनी गति रोक दी। स्जिलगे। उनकी िहायिा क तलये पिन भी बहुि िेजी िे े कारण िंिार का कोई भी प्राणी िाँि नहीं ले पाया औरिलने लगे। दिरी और भगिान िूया ने भी हनुमान जी ू िब पीड़ा िे िड़पने लगे। िब िारे िुर, अिुर, यि,को अबोध तशशु िमझकर अपने िेज और िपन िे जलने फकडनर आफद ब्रह्मा जी की शरण मं गये। ब्रह्मा उननहीं फदया। िबको लेकर िायुदेि क पाि गये। िे मूतछा ि हनुमान को ेशास्त्रकार ने तलखा हं की, स्जि िमय हनुमान जी िूया गोद मं तलये उदाि बैठे थे। जब ब्रह्माजी ने उडहं जीवििको पकड़ने क तलये लपक, उि िमय राहु िूया पर ग्रहण े े फकया िो िायुदेि ने अपनी गति का िंिार करक िभी ेलगाना िाहिा था। हनुमानजी ने िूया क ऊपरी भाग मं े प्रास्णयं की पीड़ा दर की। फफर ब्रह्माजी ने हनुमान को ूजब राहु का स्पशा फकया िो िह भयभीि होकर िहाँ िे िरदान दे िे हुए कहाँ फक कोई भी शस्त्र इिक अंग को ेभाग गया। राहु ने इडद्र क पाि जाकर तशकायि की े हानी नहीं कर िकिा। इडद्र ने कहा फक इिका शरीर िज्रदे िराज! आपने मुझे अपनी िुधा शाडि करने क िाधन े िे भी कठोर होगा। िूयदेि ने कहा फक िे उिे अपने िेज ाक रूप मं िूया और िडद्र फदये थे। आज अमािस्या क े े का शिांश (िौिा भाग) प्रदान करं गे िथा शास्त्र ममाज्ञफदन जब मं िूया को ग्रस्ि करने गया िब दे खा फक होने का भी आशीिााद फदया। िरुण ने कहा मेरे पाश औरदिरा राहु िूया को पकड़ने जा रहा है । ू जल िे यह बालक िदा िुरस्िि रहे गा। यमदे ि नेराहु की बाि िुनकर इडद्र घबरा गये और उिे िाथ लेकर अिध्य और नीरोग रहने का आशीिााद फदया। यिराजिूया की ओर िल पड़े । राहु को दे खकर हनुमानजी िूया कबेर, वििकमाा आफद दे िं ने भी अमोघ िरदान फदये। ु शतन पीड़ा तनिारक िंपूणा प्राणप्रतिवष्ठि 22 गेज शुद्ध स्टील मं तनतमाि अखंफिि पौरुषाकार शतन यंिपुरुषाकार शतन यंि (स्टील मं) को िीव्र प्रभािशाली बनाने हे िु शतन की कारक धािु शुद्ध स्टील(लोहे ) मं बनाया गया हं । स्जि केप्रभाि िे िाधक को ित्काल लाभ प्राप्त होिा हं । यफद जडम किली मं शतन प्रतिकल होने पर व्यवि को अनेक कायं मं ुं ूअिफलिा प्राप्त होिी है , कभी व्यििाय मं घटा, नौकरी मं परे शानी, िाहन दघटना, गृह क्लेश आफद परे शानीयां बढ़िी जािी है ु ाऐिी स्स्थतियं मं प्राणप्रतिवष्ठि ग्रह पीड़ा तनिारक शतन यंि की अपने को व्यपार स्थान या घर मं स्थापना करने िे अनेक लाभतमलिे हं । यफद शतन की ढै ़या या िाढ़े िािी का िमय हो िो इिे अिश्य पूजना िाफहए। शतनयंि क पूजन माि िे व्यवि को ेमृत्यु, कजा, कोटा कश, जोिो का ददा, बाि रोग िथा लम्बे िमय क िभी प्रकार क रोग िे परे शान व्यवि क तलये शतन यंि े े े ेअतधक लाभकारी होगा। नौकरी पेशा आफद क लोगं को पदौडनति भी शतन द्वारा ही तमलिी है अिः यह यंि अति उपयोगी यंि है ेस्जिक द्वारा शीघ्र ही लाभ पाया जा िकिा है । े मूल्य: 1250 िे 10900
    • 22 अप्रेल 2012 नटखट बालहनुमान  राकेश पंिाहनुमान जी अपनी बाल्यािस्था मं िंिल और नटखट एिी कृ पा करो की स्जििे उिकी नटखटिा मं पररििानस्िभाि क थे। िे अपनी शवि प्रमाण करने क तलए हाथी े े हो जाये।को उठाकर अपनी शवि का प्रदशान करिे। खेल-खेल मं किरी े जी की बाि िुनकर ऋवषयं ने िोिा फकबड़े -बड़े िृिं को भी जिमूल िे उखािकर फक दे िे अिूट ं हनुमानजी अपनी शवियं को भूल जाएं िो एिी हरकिंशवि उनमं विद्यमानथी और खेल-खेल मं एक पिाि िे बंद हो जायेगी और उनका फहि भी उिी मं िमाया हुआदिरे पिाि पर छलांग लगा दे िे थे एिा कोई पिािीय ू है । ऋवष जानिे थे क यह बालक का श्री राम क काया क े े ेतशखर नहीं था स्जि पर िे हनुमानजी ने छलांग न िंपादन हे िु जडम हुआ है । इि तलए महवषा भृगु औरलगाई हो। इि िरह हनुमान जी कई बार ऋवष-मुतनयं महवषा अंतगरा क िंश मं उत्पडन हुए ऋवष मुनीयं ने श्री ेक आश्रम मं पहुंि कर नादान हरकिं करिे, स्जििे े हनुमानजी को शाप फदया की िानरिीर आपको अपने बलऋवषमुनीओं की िपस्या एिं व्रि भंग हो जािे। िहँ ऋवष- और िेज का ध्यान नहीं रहे गा। जब कोई आपकी कीतिामुतनयं क कमिं ल, आिन इत्यादी िस्िुओं को िृि पर े और बल का स्मरण करायेगा िभी आप का बल बढ़े गा।टाँग दे िे इि प्रकार वितभडन हरकिो िे उडहं परे शान एिे शाप क कारण श्री हनुमानजी का बल एिं िेज कम ेकरिे थे। धीरे -धीरे आयु बढ़ने के िाथ-िाथ श्री हो गया और िह िौम्य स्िभाि क हो गये। इि िरह ेहनुमानजी की शरारिे और भी बढ़िी िली गई इि िजह अडय ऋवषभी प्रिडन हुए।िे उनक मािा-वपिा अतधक तिंतिि होगए और ऋवष क े े उिक बाद श्री हनुमानजी क उपनयन िंस्कार हुए। श्री े ेपाि पहुंिे और ऋवषयं को हनुमानजी की नटखि हनुमानजी ने िमय क िाथ भगिान श्री िूयनारायण को े ाशैिातनया कहँ िुनाई। हनुमानजी क वपिा किरीने ऋवष- े े गुरु बनाया। इि िरह श्री हनुमानजी की बाल्यािस्थामुतनयं िे कहा की हमं यह बालक कठोर िप क प्रभाि े बहुि ही वितशष्ट एिं अदभूि रही ।िे प्राप्त हुआ हं । आप उि पर अनुग्रह करो और उि पर ***** शादी िंबंतधि िमस्या क्या आपक लिक-लिकी फक आपकी शादी मं अनािश्यक रूप िे विलम्ब हो रहा हं या उनक िैिाफहक े े े जीिन मं खुतशयां कम होिी जारही हं और िमस्या अतधक बढिी जारही हं । एिी स्स्थिी होने पर अपने लिक-लिकी फक किली का अध्ययन अिश्य करिाले और उनक िैिाफहक िुख को कम करने े ंु े िाले दोषं क तनिारण क उपायो क बार मं विस्िार िे जनकारी प्राप्त करं । े े े GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
    • 23 अप्रेल 2012 मंिजाप िे शास्त्रज्ञान  स्िस्स्िक.ऎन.जोशी रामिल्लभशरणजी फकिी िंि क दशानगये।िंि ने पूछाः िूम्हं "क्या िाफहए?" े रामिल्लभशरणः "महाराज ! भगिान इिर की भवि और शास्त्रं का ज्ञान िाफहए।" रामिल्लभशरणजी ने ईमानदारी िे माँगा था। रामिल्लभशरजी का िच्िाई का जीिन था। कम बोलिे थे। उनक तभिर भगिान क तलए िड़प थी। े े िंि ने पूछाः "ठीक है । बि न?" रामिल्लभशरणः "जी, महाराज।" िंि ने हनुमानजी का मंि फदया। रामिल्लभशरजी एकाग्रतित्त होकर पूणा तनष्ठा ि ित्परिा िे मंि जप कर रहे थे। मंि जप करिे िमय हनुमानजी प्रकट हो गये। हनुमान जी ने पूछा: "क्या िाफहए?" "आपक दशान िो हो गये। शास्त्रं का ज्ञान िाफहए।" े हनुमानजीः "बि, इिनी िी बाि? जाओ, िीन फदन क अंदर िूम स्जिने भी ग्रडथ दे खोगे उन े िबका अथािफहि अतभप्राय िुम्हारे हृदय मं प्रकट हो जायेगा।" रामिल्लभशरजी काशी िले गये और काशी क वििविद्यालय आफद क ग्रंथ दे खे। िे बड़े भारी े े विद्वान हो गये। स्जडहंने रामिल्लभशरजी क िाथ िािाालाप फकया और शास्त्र-विषयक प्रश्नोत्तर े फकये हं िे ही लोग उडहं भलीप्रकार िे जानिे हं । दतनया क अच्छे -अच्छे विद्वान उनका लोहा ु े मानिे हं । रामिल्लभशरजी किल मंिजाप करिे-करिे अनुष्ठान मं िफल हुए। हनुमानजी क िािाि दशान े ेहो गये और िीन फदन क अंदर स्जिने शास्त्र दे खे उन शास्त्रं का अतभप्राय उनक हृदय मं प्रकट हो गया। े े भाग्य लक्ष्मी फदब्बी िुख-शास्डि-िमृवद्ध की प्रातप्त क तलये भाग्य लक्ष्मी फदब्बी :- स्जस्िे धन प्रतप्त, वििाह योग, े व्यापार िृवद्ध, िशीकरण, कोटा किेरी क काया, भूिप्रेि बाधा, मारण, िम्मोहन, िास्डिक े बाधा, शिु भय, िोर भय जेिी अनेक परे शातनयो िे रिा होति है और घर मे िुख िमृवद्ध फक प्रातप्त होति है , भाग्य लक्ष्मी फदब्बी मे लघु श्री र्ल, हस्िजोिी (हाथा जोिी), तियार तिडगी, वबस्ल्ल नाल, शंख, काली-िर्द-लाल गुंजा, इडद्र जाल, माय जाल, पािाल िुमिी े जेिी अनेक दलभ िामग्री होिी है । ु ा मूल्य:- Rs. 910 िे Rs. 8200 िक उप्लब्द्ध . गुरुत्ि कायाालय िंपक : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785 ा c
    • 24 अप्रेल 2012 श्री एक मुखी हनुमि ् किि॥अथ एकमुखी हनुमान ् कििम ् ॥ ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं फट् । घे घे घे ॐ तशितिवद्धं ॐ ह्रां ॐ ह्रीं॥श्रीरामदाि उिाि ॥ ॐ ह्रूं ॐ ह्रं ॐ ह्रं ॐ ह्र: स्िाहा । पर कृ ि यडि मडिएकदा िुखमािीनं शंकरं लोकशंकरम ् । पराहं कार भूि प्रेि वपशाि दृवष्ट ििा विघ्न दजन िेष्टा ु ाप्रपच्छ तगररजाकांिं कपूरधिलं तशिम ् ॥ ा कविद्या ििोग्रभयातन तनिारय तनिारय बडध बडध लुण्ठ ु॥पािात्युिाि ॥ लुण्ठ विलुञ्ि विलुञ्ि फकतल फकतल ििाकयडिास्ण दष्टिािं ु ुभगिन ् दे िदे िेश लोकनाथ जगत्प्रभो । ॐ हुं फट् स्िाहा ।शोकाकलानां लोकानां कन रिा भिेद् ध्रुिम ् ॥ ु े श्रद्धापूिक प्राथाना करने क उपरांि हाथ की अंजली मं ा ेिंग्रामे िंकटे घोरे भूि प्रेिाफदक भये । े जल लेकर वितनयोग करिे हुए जल को पृ्िी पर छोड़द:ख दािास्ग्न िंिप्त िेििां द:खभातगनाम ् ॥ ु ु दं । ित्पश्चाि ् िायुपुि का ध्यान करिे हुए िम्पूणा अंगं॥श्रीमहादे ि उिाि ॥ का डयाि करं । प्रत्येक अंग को ध्यान करिे हुए स्पशाश्रृणु दे वि प्रिक्ष्यातम लोकानां फहिकाम्यया । करं ।विभीषणाय रामेण प्रेम्णा दत्तं ि यत्पुरा ॥ वितनयोगः ॐ अस्य श्रीहनुमि ् किि स्िोि मडिस्यकििं कवप नाथस्य िायु पुिस्य धीमि: । श्रीरामिडद्र ऋवष:, श्रीहनुमान ् परमात्मा दे ििा, अनुष्टुप ्गुह्यं ित्ते प्रिक्ष्यातम विशेषाच्रणु िुंदरर ॥ छं द:, मारुिात्मज इति बीजम ्, ॐ अंजनीिूनुररति शवि:,उद्यदाफदत्य िंकाशमुदार भुज विक्रमम ् । लक्ष्मण प्राण दािेति कीलकम ् रामदिायेिी अस्त्रम ्, ूकदपा कोफट लािण्यं ििा विद्या विशारदम ् ॥ ं हनुमानदे ििा इति कििम ्, वपङ्गािोऽतमिविक्रम इतिश्रीराम हृदयानडदं भि कल्पमहीरुहम ् । मडि:, श्रीरामिडद्रप्रेरणया रामिडद्रप्रीत्यथं ममअभयं िरदं दोर्भ्यां कलये मारुिात्मजम ् ॥ िकलकामनातिद्धये जपे वितनयोग:।हनुमानञ्जनीिूनुिाायुपुिो महाबल: । करडयािः ॐ ह्रां अञ्जनी िुिाय अंगुष्ठार्भ्यां नम:। ॐ ह्रींरामेष्ट: फाल्गुनिख: वपङ्गािोऽतमिविक्रम: ॥ रुद्र मूत्तये िजानीर्भ्यां नम:। ॐ ह्रूं राम दिाय मध्यमार्भ्यां ा ूउदतधक्रमणश्चैि िीिाशोकविनाशन: । नम:। ॐ ह्रं िायु पुिाय अनातमकार्भ्यां नम:। ॐ अस्ग्नलक्ष्मणप्राणदािा ि दशग्रीिस्य दपाहा ॥ गभााय कतनवष्ठकार्भ्यां नम:। ॐ ह्र: ब्रह्मास्त्र तनिारणायएिं द्वादश नामातन कपीडद्रस्य महात्मन: । करिल कर पृष्ठार्भ्यां नम:।स्िल्पकाले प्रबोधे ि यािाकाले ि य: पठे ि ् ॥ हृदयाफदडयािः ॐ ह्रां अञ्जनीिुिाय हृदयाय नम:। ॐ ह्रींिस्य ििाभयं नास्स्ि रणे ि विजयी भिेि ् । रुद्रमूिये तशरिे स्िाहा। ॐ ह्रूं रामदिाय तशखायै िषट्। ा ूराजद्वारे गह्वरे ि भयं नास्स्ि कदािन ॥ ॐ ह्रं िायुपुिाय कििाय हुम ्। ॐ ह्रं अस्ग्नगभाायउल्लङ्घ्य तिडधो: ितललं िलीलं य: शोकिफह्नं नेिियाय िौषट्। ॐ ह्र: ब्रह्मास्त्रतनिारणाय अस्त्राय फट्।जनकात्मजाया: । ॥ध्यानम ् ॥आदाय िेनैि ददाह लङ्कां नमातम िं प्राञ्जतलराञ्जनेयम ् ध्यायेद् बाल फदिाकर द्युति तनभं दे िारर दपाापहं दे िेडद्र॥ प्रमुखं प्रशस्ि यशिं दे दीप्यमानं रुिा ।मंि ॐ नमो हनुमिे ििा ग्रहान ् भूि भविष्य द्विामानान ् िुग्रीिाफद िमस्ि िानर युिं िुव्यि ित्त्ि वप्रयं िंरिारुणिमीप स्थान ् ििा काल दष्ट बुद्धीनुच्िाटयोच्िाटय ु लोिनं पिनजं पीिाम्बरालंकृिम ् ॥परबलान ् िोभय िोभय मम ििा कायाास्ण िाधय िाधय
    • 25 अप्रेल 2012उद्यडमािाण्ि कोफट प्रकटरुतियुिं िारुिीरािनस्थं हनुमान ् पूिि: पािु दस्िणे पिनात्मज: । ामौञ्जीयज्ञोपिीिाभरणरुतितशखं शोतभिं किलाङ्कम ् । ुं पािु प्रिीच्यां रिोघ्नः पािु िागरपारगः ॥१॥भिानातमष्टदं िं प्रणिमुतनजनं िेदनादप्रमोदं ध्यायेद् दे िं उदीच्यामूध्िािः पािु किरीवप्रयनडदनः । ेविधेयं प्लिगकलपतिं गोष्पदी भूििातधाम ् ॥ ु अधस्िाद् विष्णुभिस्िु पािु मध्यं ि पाितनः ॥२॥िज्राङ्गं वपङ्गकशाढ्यं स्िणाकण्िल मस्ण्ििम ् । े ु अिाडिरफदशः पािु िीिाशोकविनाशकः ।तनगूढमुपिङ्गम्य पारािारपराक्रमम ् ॥ लङ्काविदाहक: पािु ििाापद्भर्भ्यो तनरडिरम ् ॥३॥स्फफटकाभं स्िणाकास्डिं फद्वभुजं ि कृ िाञ्जतलम ् । िुग्रीिितििः पािु मस्िक िायुनडदनः । ंकण्िलद्वयिंशोतभमुखाम्भोजं हररं भजे ॥ ु भालं पािु महािीरो भ्रुिोमाध्ये तनरडिरम ् ॥४॥िव्यहस्िे गदायुि िामहस्िे कमण्िलुम ् । ं नेिेच्छायापहारी ि पािु नः प्लिगेिरः ।उद्यदस्िणदोदा ण्िं हनुमडिं वितिडियेि ् ॥ कपोलौ कणामूले िु पािु श्रीरामफकङ्करः ॥५॥ध्यान क उपरांि श्रद्धापूिक 11 बार किि मंि का जाप करं । े ा नािाग्रमञ्जनीिूनुः पािु िक्िं हरीिरः ।किि मडिः ॐ नमो हनुमदाख्यरुद्राय ििा दष्ट जन मुख ु िािं रुद्रवप्रयः पािु स्जह्वां वपङ्गललोिनः ॥६॥स्िम्भनं करु करु ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ठं ठं ठं फट् स्िाहा । ु ु पािु दडिानु फालगुनेष्टस्श्चबुक दै त्यपादहृि ् । ंॐ नमो हनुमिे शोतभिाननाय यशोऽलंकृिाय पािु कण्ठं ि दै त्याररः स्कडधौ पािु िुरातिािः ॥७॥अञ्जनीगभािम्भूिाय रामलक्ष्मणानडदकाय भुजौ पािु महािेजाः करौ ि िरणायुधः ।कवपिैडयप्राकाराय पिािोत्पाटनाय िुग्रीििाह्यकरणाय नखाडनखायुधः पािु किौ पािु कपीिरः ॥८॥ ुपरोच्िाटनाय कमार ब्रह्मियागम्भीरशब्दोदय ॐ ह्रीं ु ििो मुद्रापहारी ि पािु पािे भुजायुधः ।ििादष्टग्रह तनिारणाय स्िाहा। ु लङ्कातनभञ्जनः पािु पृष्ठदे शे तनरडिरम ् ॥९॥ॐ नमो हनुमिे पाफह पाफह एफह एफह ििाग्रहभूिानां नातभं ि रामदिस्िु कफटं पात्ितनलात्मजः । ूशाफकनी िाफकनीनां विषमदष्टानां ििेषामाकषायाकषाय मदा य ु गुह्यं पािु महाप्राज्ञो तलङ्गं पािु तशिवप्रयः ॥९॥मदा य छे दय छे दय मृत्यून ् मारय मारय शोषय शोषय ऊरू ि जानुनी पािु लङ्काप्रािादभञ्जनः ।प्रज्िल प्रज्िल भूि मण्िल वपशाि मण्िल तनरिनाय भूि जङ्घे पािु कवपश्रेष्ठो गुल्फौ पािु महाबलः ॥१०॥ज्िर प्रेि ज्िर िािुतथाक ज्िर विष्णु ज्िर महे श ज्िरं अिलोद्धारकः पािु पादौ भास्करिस्डनभः ।तछस्डध तछस्डध तभस्डध तभस्डध अस्िशूल पिशूल अङ्गाडयतमिित्त्िाढयः पािु पादाङ्गुलीस्िथा ॥११॥तशरोऽर्भ्यडिरे शूल गुल्मशूल वपत्तशूल ब्रह्मराििकलच्छे दनं ु ििााङ्गातन महाशूरः पािु रोमास्ण िात्मविि ् ।करु प्रबलनागकलविषं तनविाषं करु करु झफटति झफटति । ु ु ु ु कमारः कडयकां पािु वपङ्गािः पािु िै पशून ् ॥१२॥ ुॐ ह्रां ह्रीं फट् ििा ग्रहतनिारणाय स्िाहा। िायुिूनुः िुिाडपािु मागं पािु महाबली ।ॐ नमो हनुमिे पिनपुिाय िैिानरमुखाय पापदृवष्ट द्रोणािलिुरस्थायी राजद्वारे ऽवप रि माम ् ॥१३॥िोरदृवष्ट हनुमदाज्ञास्फर ॐ स्िाहा। ु जानकीशोकभयहृत्कटु म्बं कवपिल्लभः । ुस्िगृहे द्वारे पट्टक तिष्ठ तिष्ठेति िि रोगभयं राजकलभयं े ु रिाहीनं िु यत्स्थानं रििां यमफकङ्करः ॥१४॥नास्स्ि िस्योच्िारणमािेण ििे ज्िरा नश्यस्डि। ॐ ह्रां ह्रीं हनुमत्कििं यस्िु पठे द् विद्वान ् विििणः ।ह्रूं फट् घे घे स्िाहा। ि एि पुरुषश्रेष्ठो भुवि मुवि ि विडदति ॥१५॥ ं ं॥किि ॥ विकालमेककालं िा पठे डमािियं नरः ।॥श्रीरामिडद्र उिाि ॥ ििाानररपून ् िणास्ज्जत्िा ि पुमान ् तश्रयमाप्नुयाि ् ॥१६॥ ृ
    • 26 अप्रेल 2012मध्यरािे जले स्स्थत्िा िप्तिारं पठे द्यफद । पद्मरागमस्णकण्िलस्त्िषा पाटलीकृ िकपोलमण्िलम ् । ुियाऽपस्मार कष्ठाफदिापिय तनिारणम ् ॥१७॥ ु फदव्यदे हकदलीिनाडिरे भाियातम पिमानडदनम ् ॥अित्थमूलेऽकिारे स्स्थत्िा पठति यः पुमान ् । ा यि यि रघुनाथकीिानम ् िि िि कृ िमस्िकाञ्जतलम ् ।अिलां तश्रयमाप्नोति िंग्रामे विजयं िथा ॥१८॥ िाष्पिाररपररपूणलोिनं मारुतिं नमि राििाडिकम ् ॥ ारामाग्रे हनुमदग्रे यः पठे च्ि नरः िदा । मनोजिं मारुििुल्यिेगं स्जिेस्डद्रयं बुवद्धमिां िररष्ठम ् ।तलस्खत्िा पूजयेद्यस्िु ििाि विजयी भिेि ् ॥१९॥ िािात्मजं िानरयूथमुख्यं श्रीरामदिं तशरिा नमातम ॥ ूयः करे धारयेस्डनत्यं ििााडकामानिाप्नुयाि ् ॥२०॥ वििादे युद्धकाले ि द्युिे राजकले रणे । ुबुवद्धबालं यशोिीयं तनभायत्िमरोगिा । दशिारं पठे द्रािौ तमिाहारो स्जिेस्डद्रयः ॥िुदाढयं िाक्स्फरत्िं ि हनुमत्स्मरणाद्भिेि ् ॥२१॥ ु विजयं लभिे लोक मानिेषु नरे षु ि । ेमारणं िैररणां िद्यः शरणं ििािम्पदाम ् । भुिे प्रेिे महादगऽरण्ये िागरिम्प्लिे ॥ ु ेशोकस्य हरणे दिं िडदे िं रणदारुणम ् ॥२२॥ तिंहव्याघ्रभये िोग्रे शरशस्त्रास्त्रपािने ।तलस्खत्िा पूजयेद्यस्िु ििाि विजयी भिेि ् । श्रृङ्खलाबडधने िैि कारागृहाफदयंिणे ॥यः करे धारयेस्डनत्यं ि पुमान ् तश्रयमाप्नुयाि ् ॥२३॥ कोपस्िम्भे िफह्न िक्र िेिे घोरे िुदारुणे । ेस्स्थत्िा िु बडधने यस्िु जपं कारयति फद्वजैः । शोक महारणे िैि ब्रह्मग्रह तनिारणे ॥ ेित्िणाडमुविमाप्नोति तनगिात्तु िथैि ि ॥२४॥ ििादा िु पठे स्डनत्यं जयमाप्नोति तनस्श्चिम ् ।॥ईिर उिाि ॥ भूजे िा ििने रि िौमे िा िालपिक ॥ े ेभाविडद ू िरणारविडदयुगलं कौपीनमौञ्जीधरं , काञ्िी विगंतधना िा मष्या िा वितलख्य धारयेडनरः ।श्रेस्णधरं दकलििनं यज्ञोपिीिास्जनम ् । ु ू पंििप्तविलोहै िाा गोवपिः ििािः शुभम ् ॥हस्िार्भ्यां धृिपुस्िक ि विलिद्धाराितलं कण्िलं ं ु करे कट्यां बाहुमूले कण्ठे तशरति धाररिम ् ।यश्चालंवबतशखं प्रिडनिदनं श्री िायुपुिं भजेि ् ॥ ििााडकामाडिाप्नोति ित्यं श्रीरामभावषिम ् ॥यो िारांतनतधमल्पपल्िलतमिोल्लंघ्य प्रिापास्डििो अपरास्जि नमस्िेऽस्िु नमस्िे रामपूस्जि ।िैदेहीघनशोकिापहरणो िैकण्ठभवि वप्रयः । ु प्रस्थानञ्ि कररष्यातम तिवद्धभाििु मे िदा ॥अिाद्यूस्जािराििेिरमहादपाापहारी रणे िोऽयं इत्युक्त्िा यो व्रजेद् ग्राम दे शं िीथााडिरं रणम ् ।िानरपुंगिोऽििु िदा योऽस्मान ् िमीरात्मजः ॥ आगतमष्यति शीघ्रं ि क्ज़ेमरुपो गृहं पुनः ॥िज्रांगं वपङ्गनेिं कनकमयलस्कण्िलाक्राडिगण्िं ु इति िदति विशेषाद्राघिे राििेडद्रः प्रमुफदििरतित्तोदं भोतलस्िंभिारप्रहरणिुिशीभूिरिोधीनाथम ् । रािणस्यानुजो फह ।उद्यल्लाङ्गूलिप्तप्रिलािलधरं भीममूतिं कपीडद्रं ध्यायडिं रघुिरपदपद्मं िंदयामाि भूयः कलिफहिकृ िाथाः शमादं ुरामिडद्रं भ्रमरदृढकरं ित्त्ििारं प्रिडनम ् ॥ मडयमानं ॥िज्राङ्गं वपङ्गनेिं कनकमयलित्कण्िलैः शोभनीयं ु िं िेदशास्त्रपररतनवष्ठिशुद्धबुवद्धं शमााम्बरं िुरमुनीडद्रनुिंििाापीठ्याफदनाथं करिलविधृिं पूणकम्भं दृढाङ्म ् । ा ु कपीडद्रम ् ।भिानातमष्टकारं विदधतिि िदा िुप्रिडनम ् हरीशं िैलोक्यं कृ ष्णत्ििं क नकवपङ्गजटाकलापं व्यािं नमातम तशरिािािुकामं िकलभुविगिं रामदिं नमातम ॥ ू तिलक मुनीनाम ् ॥ ंिामे करे िैरतभदं िहडिं शैलं परं श्रृङ्खलहारकण्ठम ् । य इदं प्रािरुत्थाय पठिे कििं िदा ।दधानमाच्छाद्य िुिणािणं भजेज्ज्िलकण्िलमाञ्जनेयम ् ॥ ु आयुरारोग्यिंिानैस्िेर्भ्यस्िस्य स्ििो भिेि ् ॥
    • 27 अप्रेल 2012एिं तगरीडद्रजे श्रीमद्धनुमत्कििं शुभम ् । प्रकार क गंध क तमश्रण िे बनी स्याही िे े ेत्ियापृष्टं मया प्रीत्या विस्िराफद्वतनिेफदिम ् ॥ तलखकर पूजन स्थल पर रख कर इिकी॥रामदाि उिाि ॥ पंिोपिार पूजा करने पर शिुओं नाश होिा हं ।एिं तशिमुखाच्ुत्िा पािािी कििं शुभम ् ।  रवििार क फदन पीपल क िृि क नीिे बैठकर े े ेहनुमिः िदा भिया पपाठं िडमनाः िदा ॥ एक मुखी हनुमि ् किि का पाठ करने िे धनएिं तशष्य त्ियाप्यि यथा पृष्टं िथा मया । िृवद्ध ि शिुओं का नाश होिा हं ।हनुमत्कििं िेदं ििाग्रे वितनिेफदिम ् ॥  एक मुखी हनुमि ् किि क पाठ िे िाधक क े ेइदं पूिं पफठत्िा िु रामस्य कििं ििः । मनोबल मं िृवद्ध होिी हं ।पठनीयं नरै भिया नैकमेि पठे त्कदा ॥ ा  एक मुखी हनुमि ् किि क पाठ िे भुि-प्रेिाफद ेहनुमत्कििं िाि श्रीरामकििं विना । बाधाओं का शमन होिा हं ।ये पठस्डि नराश्चाि पठनं िद्वथा भिेि ॥ ृ  रावि क िमय एक मुखी हनुमि ् किि का दि ेिस्मात्ििैः पठनीयं ििादा कििद्वयम ् । बार पाठ करने िे िाधक क मान-िम्मान एिं ेरामस्य िायुपुिस्य िद्भिश्च विशेषिः ॥ े प्रतिष्ठा मं िृवद्ध होिी हं अथााि िाधक का िभीउल्लंघ्य तिडधोः ितललं िलीलं यः शोकिफह्नं प्रकार िे मंगल होिा हं ।जनकात्मजायाः ।  विद्वानो क मि िे अद्धा रावि क िमय जल मं े ेआदाय िेनैि ददाह लंकां नमातम िं प्राञ्जतलराञ्जनेयम ्॥ खड़े होकर एक मुखी हनुमि ् किि का िाि बार॥इति श्री ब्रह्माण्ि पुराणे श्री नारद एिं श्री अगस्त्य मुतन पाठ करने िे िय, अपस्मार इत्यादी रोगं कािंिादे श्रीराम प्रोि एकमुखी हनुमत्कििं ॥ ं नाश होिा हं ।नोट:  एक मुखी हनुमि ् किि का पाठ प्रतिफदन  एक मुखी हनुमि ् किि को भोजपि क ऊपर, े वििंध्या करने िे तनरं िर लक्ष्मी की प्रातप्त होिी िाड़पि पर या लाल रं ग क रे शमी िस्त्र पर िीन े हं । मंि तिद्ध मूंगा गणेश मूंगा गणेश को विध्नेिर और तिवद्ध विनायक क रूप मं जाना जािा हं । इि क पूजन िे जीिन मं िुख े े िौभाग्य मं िृवद्ध होिी हं ।रि िंिार को िंिुतलि करिा हं । मस्स्िष्क को िीव्रिा प्रदान कर व्यवि को ििुर बनािा हं । बार-बार होने िाले गभापाि िे बिाि होिा हं । मूंगा गणेश िे बुखार, नपुंिकिा , िस्डनपाि और िेिक जेिे रोग मं लाभ प्राप्त होिा हं । मूल्य Rs: 550 िे Rs: 10900 िक मंगल यंि िे ऋण मुवि मंगल यंि को जमीन-जायदाद क वििादो को हल करने क काम मं लाभ दे िा हं , इि क अतिररि व्यवि को े े ेऋण मुवि हे िु मंगल िाधना िे अति शीध्र लाभ प्राप्त होिा हं । वििाह आफद मं मंगली जािकं क कल्याण क तलए े ेमंगल यंि की पूजा करने िे विशेष लाभ प्राप्त होिा हं । प्राण प्रतिवष्ठि मंगल यंि क पूजन िे भाग्योदय, शरीर मं खून की ेकमी, गभापाि िे बिाि, बुखार, िेिक, पागलपन, िूजन और घाि, यौन शवि मं िृवद्ध, शिु विजय, िंि मंि क दष्ट प्रभा, भूि-प्रेि े ुभय, िाहन दघटनाओं, हमला, िोरी इत्यादी िे बिाि होिा हं । ु ा मूल्य माि Rs- 730
    • 28 अप्रेल 2012 पविका िदस्यिा (Magazine Subscription) आप हमारे िाथ जुि िकिे हं । आप हमारी मातिक पविका आप हमारे िाथ वितभडन िामास्जक नेटिफकग िाइट क माध्यम िे भी जुि िकिे हं । ं े तनशुल्क प्राप्त करं । हमारे िाथ जुिने क तलए िंबंतधि तलंक पर स्क्लक करं । ेयफद आप गुरुत्ि ज्योतिष मातिक पविका अपने ई-मेल We Are Also @पिे पर प्राप्त करना िाहिे हं ! िो आपना ई-मेल पिा नीिे Google Groupदजा करं या इि तलंक पर स्क्लक करं Google PlusGURUTVA JYOTISH Groups yahoo क िाथ जुड़ं. े Yahoo Group Orkut CommunityIf You Like to Receive Our GURUTVA JYOTISHMonthly Magazine On Your E-mail, Enter Your E- Twittermail Below or Join GURUTVA JYOTISH Groups Facebookyahoo Wordpress Scribd Click to join gurutvajyotish उत्पाद िूिी हमारी िेिाएं आप हमारे िभी उत्पादो आप हमारी िभी भुगिान िेिाएं की जानकारी एिं िेिा की िूति एक िाथ दे ख शुल्क िूति की जानकारी दे ख िकिे हं और िाउनलोि िकिे और िाउनलोि कर कर िकिे हं । िकिे हं ।मूल्य िूति िाउनलोि करने क तलए कृ प्या इि तलंक पर े मूल्य िूति िाउनलोि करने क तलए कृ प्या इि तलंक पर ेस्क्लक करं । Link स्क्लक करं । LinkPlease click on the link to download Price List. Link Please click on the link to download Price List. Link
    • 29 अप्रेल 2012 श्री पच्िमुखी हनुमत्कििम ्॥अथ श्रीपच्िमुखी हनुमत्कििम ्॥ ॐ नमो भगििे पंििदनाय उत्तरमुखे आफद-िराहायश्री गणेशाय नमः। िकलिम्पिकराय स्िाहा ।ईिर उिाि: ॐ नमो भगििे पंििदनाय ऊध्िामुखे हयग्रीिायअथ ध्यानं प्रिक्ष्यातम श्रृणु ििााङ्ग-िुडदरी । यत्कृ िं िकलजनिशीकरणाय स्िाहा ।दे िदे िेतश ध्यानं हनुमिः परम ् ॥१॥ पच्ििक्ि महाभीमं ॥ अथ डयािध्यानाफदकम ् । दशांश िपाणं कयााि ् ॥ ुविपच्िनयनैयुिम ् । बाहुतभदा शतभयुि ििाकामाथा तिवद्धदम ् ा ा ं वितनयोगः- ॐ अस्य श्रीपच्िमुखी-हनुमि ्-किि-स्िोि-॥२॥ पूिं िु िानरं िक्ि कोफटिूयिमप्रणम ् । दं ष्ट्राकराल ा मंिस्य रामिडद्र ऋवषः, अनुष्टुप छं दः, मम िकलिदनं भ्रकटी कफटलेिणम ् ॥३॥ अस्यैि दस्िणं िक्िं ु ु भयविनाशाथे जपे वितनयोगः ।नारतिंहं महाद्भिम ् । अत्युग्र िेजिपुषं भीषणं भयनाशनम ् ु ॐ हं हनुमातनति बीजम ्, ॐ िायुदेििा इति शविः, ॐ॥४॥ पस्श्चमं गारुिं िक्िं िज्रिुण्िं महाबलम ् । अञ्जनीिूनुररति कीलकम ्, श्रीरामिडद्रप्रिादतिद्धयथंििानागप्रशमनं विषभुिाफदकृ िडिनम ् ॥५॥ हनुमत्किि मडि जपे वितनयोगः ।उत्तरं िौकर िक्िं कृ ष्णं दीप्तं नभोपमम ् । कर-डयािः- ॐ हं हनुमान ् अङ्गुष्ठार्भ्यां नमः, ॐपािालतिवद्धिेिालज्िररोगाफद कृ डिनम ् ॥६॥ ऊध्िं हयाननं िायुदेििा िजानीर्भ्यां नमः, ॐ अञ्जनी-िुिायघोरं दानिाडिकरं परम ् । खङ्ग विशूल खट्िाङ्गं मध्यमार्भ्यां नमः, ॐ रामदिाय अनातमकार्भ्यां नमः, ॐ ूपाशमंकशपिािम ् ॥७॥ मुवष्टद्रमगदातभस्डदपालज्ञानेनिंयुिम ् ु ु श्री हनुमिे कतनवष्ठकार्भ्यां नमः, ॐ रुद्र-मूिये करिल-कर- ा। एिाडयायुधजालातन धारयडिं यजामहे ॥८॥ पृष्ठार्भ्यां नमः ।प्रेिािनोपविष्टं ि ििााभरणभूवषिम ् । फदव्यमालाम्बरधरं हृदयाफद-डयािः- ॐ हं हनुमान ् हृदयाय नमः, ॐफदव्यगडधानुलेपनम ् ॥९॥ िायुदेििा तशरिे स्िाहा, ॐ अञ्जनी-िुिाय तशखायै िषट्,ििााश्चयामयं दे िं हनुमफद्वििोमुखम ् ॥१०॥ ॐ रामदिाय कििाय हुम ्, ॐ श्री हनुमिे नेि-ियाय ूपञ्िास्यमच्युिमनेक वितिििणं िक्र ं िुशङ्खविधृिं विषट्, ॐ रुद्र-मूिये अस्त्राय फट् । ाकवपराजियाम ् । पीिाम्बराफदमुकटै रुपशोतभिाङ्गं ु ध्यानम ्:वपङ्गािमाद्यमतनशं मनिा स्मरातम ॥११॥ मकटे शं ा श्रीरामिडद्र-दिाय आञ्जनेयाय िायु-िुिाय महा-बलाय ूमहोत्िाहं ििाशोक-विनाशनम ् । शिुं िंहर मां रि तश्रयं िीिा-दःख-तनिारणाय लङ्कोपदहनाय महाबल-प्रिण्िाय ुदापयमे हररम ् ॥१२॥ हररमकटमकटमडितममं पररतलख्यति ा ा फाल्गुन-िखाय कोलाहल-िकल-ब्रह्माण्ि-वििरुपायभूतमिले । यफद नश्यति शिु-कलं यफद मुञ्िति मुञ्िति ु िप्तिमुद्रनीरालस्ङ्घिाय वपङ्लनयनातमि-विक्रमाय िूय- ािामकरः ॥१३॥ वबम्ब-फल-िेिनाय दृवष्टतनरालङ्कृ िाय िञ्जीिनीनांॐ हररमकटमकटाय स्िाहा । नमो भगििे पच्ििदनाय ा ा तनरालङ्कृ िाय अङ्गद-लक्ष्मण-महाकवप-िैडय-प्राण-पूिकवपमुखे िकलशिुिंहारणाय स्िाहा । ा तनिााहकाय दशकण्ठविध्िंिनाय रामेष्टाय महाफाल्गुन-ॐ नमो भगििे पंििदनाय दस्िणमुखे करालिदनाय नर- िखाय िीिा-िमेि-श्रीरामिडद्र-िर-प्रिादकाय षट्तिंहाय िकल भूि प्रेि प्रमथनाय स्िाहा । प्रयोगागम पच्िमुखी हनुमन ् मडि जपे वितनयोगः ।ॐ नमो भगििे पंििदनाय पस्श्चममुखे गरुिाय ॐ ह्रीं हररमकटाय िं िं िं िं िं िषट् स्िाहा । ािकलविषहराय स्िाहा । ॐ ह्रीं हररमकटमकटाय फ फ फ फ फ फट् स्िाहा । ा ा ं ं ं ं ं
    • 30 अप्रेल 2012ॐ ह्रीं हररमकटमकटाय हुं हुं हुं हुं हुं िषट् स्िाहा । ा ा पच्ििारं पठे स्डनत्यं पञ्िाननिशीकरम ् ॥१७॥ॐ ह्रीं हररमकटमकटाय खं खं खं खं खं मारणाय स्िाहा । ा ा षड्िारं ि पठे स्डनत्यं ििािौभाग्यदायकम ् ।ॐ ह्रीं हररमकटमकटाय ठं ठं ठं ठं ठं स्िम्भनाय स्िाहा । ा ा िप्तिारं पठे स्डनत्यतमष्टकामाथातिवद्धदम ् ॥१८॥ॐ ह्रीं हररमकटमकटाय लुं लुं लुं लुं लुं ा ा अष्टिारं पठे स्डनत्यं ििािौभाग्यदायकम ् ।आकवषाििकलिम्पत्कराय स्िाहा । नििारं पठे स्डनत्यं राजभोगमिाप्नुयाि ् ॥१९॥ॐ ह्रीं ऊध्िामुखाय हयग्रीिाय रुं रुं रुं रुं रुं रुद्र-मूिये ा दशिारं ि प्रजपेिलोक्यज्ञानदशानम ् । ैपच्िमुखी हनुमडिाय िकलजन-तनरालङ्करणाय उच्िाटनं वििप्तनििारं ि राजभोगं ि िंबिेि ् ॥२०॥करु करु स्िाहा । ु ु फद्विप्तदशिारं िु िैलोक्यज्ञानदशानम ् ।ॐ ह्रीं ठं ठं ठं ठं ठं कमामूिये पच्िमुखीहनुमिे परयंि- ू ा एकादशं जवपत्िा िु ििातिवद्धकरं नृणाम ् ॥२१॥परिंि-परमंि-उच्िाटनाय स्िाहा । ॥ इति िुदशानिंफहिायां श्रीरामिडद्रिीिाप्रोिंॐ ह्रीं क खं गं घं ङं िं छं जं झं ञं टं ठं िं ढं णं िं थं दं ं श्रीपच्िमुखीहनुमत्कत्ििं िम्पूणम ् ॥ ाधं नं पं फ बं भं मं यं रं लं िं शं षं िं हं ळं िं स्िाहा । ं किि क लाभ ेइति फदग्बंध: ॥  एक बार पाठ करने िे ििा शिु का वििारण होिा हं ।ॐ ह्रीं पूिा-कवपमुखाय पंि-मुखी-हनुमिे टं टं टं टं टं  दो बार बार पाठ करने िे पुि-पौि क िुख मं िृवद्ध ेिकल-शिु-िंहारणाय स्िाहा ॥ होिी हं ।ॐ ह्रीं दस्िण-मुखे पंि-मुखी-हनुमिे करालिदनाय  िीन बार पाठ करने िे ििा प्रकार िे िपवत्त की प्रातप्तनरतिंहाय ॐ हां हां हां हां हां िकल भूि-प्रेि दमनाय स्िाहा॥ होिी हं ।ॐ ह्रीं पस्श्िममुखे िीर-गरुिाय पंिमुखीहनुमिे मं मं मं  िार बार पाठ करने िे ििा लोगो का िशीकरण होिामं मं िकलविषहरणाय स्िाहा ॥ हं ।ॐ ह्रीं उत्तरमुखे आफद-िराहाय लं लं लं लं लं तिंह-नील-  पांि बार पाठ करने िे ििा रोगं का तनिारण होिाकठ-मूिये पंिमुखी-हनुमिे अञ्जनीिुिाय िायुपुिाय ं ा हं ।महाबलाय रामेष्टाय फाल्गुन-िखाय  छह बार पाठ करने िे ििादेििाओं का िशीकरणिीिाशोकदःखतनिारणाय लक्ष्मणप्राणरिकाय ु होिा हं ।दशग्रीिहरणाय रामिंद्रपादकाय पच्िमुखीिीरहनुमिे नमः ॥ ु  िाि बार पाठ करने िे ििा कामाथा तिद्ध होिे हं ।भूि-प्रेि वपशाि ब्रह्मरािि शाफकनी िाफकनी अडिररि ग्रह  आठ बार पाठ करने िे ििा िौभागय की प्रातप्त होिीपरयंि परिंि परमंि ििाग्रहोच्िाटनाय िकलशिुिंहारणाय हं ।पच्िमुखीहनुमन ् िकलिशीकरणाय िकललोकोपकारणाय  नौ बार पाठ करने िे ििा प्रकार क ऐशिया की प्रातप्त ेपच्िमुखीहनुमान ् िरप्रिादकाय महाििारिाय जं जं जं जं होिी हं ।जं स्िाहा॥  दि बार पाठ करने िे िैलोक्य ज्ञान की प्रातप्त होिीएिं पफठत्िा य इदं कििं तनत्यं प्रपठे त्प्रयिो नरः । हं ।एकिारं पठे त्स्त्रोिं ििाशिुतनिारणम ् ॥१५॥  ग्यारह बार पाठ करने िे ििाप्रकार की तिवद्धया प्राप्तफद्विारं ि पठे स्डनत्यं पुिपौिप्रिद्धा नम ् । होिी हं ।वििारं िु पठे स्डनत्यं ििािम्पत्करं प्रभुम ् ॥१६॥  इि किि को िुनने िे दे िी लक्ष्मी प्रिडन होिी हं ।ििुिाारं पठे स्डनत्यं ििारोगतनिारणम ् ॥
    • 31 अप्रेल 2012 श्री िप्तमुखी हनुमि ् कििम ्॥ अथ श्री िप्तमुखी हनुमि ् कििम ् ॥ पशूडधनं ि धाडयं ि लक्ष्मी लक्ष्मीप्रदोऽििु । दारान ्(अथणाि रहस्योि) पुिांश्च कडयाश्च कटु म्बं वििपालकः ॥८॥ ुवितनयोगः ॐ अस्य श्रीिप्तमुस्खिीरहनुमत्किि स्िोि अनुरिस्थानमवप मे पायाद्वायुिुिः िदा ।मडिस्य नारद ऋवषः, अनुष्टुप छडदः, श्रीिप्तमुस्खकवपः िौरे र्भ्यो व्यालदं वष्ट्रर्भ्यः श्रृस्ङ्गर्भ्यो भूिरा्ििाि ् ॥९॥परमात्मा दे ििा, ह्रां बीजम ्, ह्रीं शविः, हूं कीलकम ्, मम दै त्येर्भ्योऽप्यथ यिेर्भ्यो ब्रह्मराििजाद्भयाि ् ।ििााभीष्टतिद्धयथे जपे वितनयोगः । दं ष्ट्राकरालिदनो हनुमाडमां िदाऽििु ॥१०॥करडयािः ॐ ह्रां अंगुष्ठार्भ्यां नमः, ॐ ह्रीं िजानीर्भ्यां परशस्त्रमंििंियंिास्ग्नजलविद्युिः । रुद्रांशःनमः, ॐ ह्रूं मध्यमार्भ्यां नमः, ॐ ह्रं अनातमकार्भ्यां नमः, शिुिंग्रामात्ििाािस्थािु ििाभि ् ॥११॥ ृॐ ह्रं कतनवष्ठकार्भ्यां नमः, ॐ ह्रः करिलकरपृष्ठार्भ्यां नमः। ॐ नमो भगििे िप्तिदनाय आद्यकवपमुखाय िीरहनुमिेहृदयाफदडयािः ॐ ह्रां हृदयाय नमः, ॐ ह्रीं तशरिे स्िाहा, ििाशिुिंहारणाय ठं ठं ठं ठं ठं ठं ठं ॐ नमः स्िाहाॐ ह्रूं तशखायै िषट्, ॐ ह्रै कििाय हुम ्, ॐ ह्रं नेि ियाय ॥१२॥िोषट्, ॐ ह्रः अस्त्राय फट् । ॐ नमो भगििे िप्तिदनाय फद्विीयनारतिंहास्यायध्यानः िंदे िानरतिंह िपाररपुिाराहिगोमानुषैयुि ा ं अत्युग्रिेजोिपुषे भीषणाय भयनाशनाय हं हं हं हं हं हं हंिप्तमुखः करै द्रा मतगररं िक्र गदां खेटकम ् । खट्िाङ्गं ै ु ं ॐ नमः स्िाहा ॥१३॥ ु ु ूहलमंकशं फस्णिुधाकम्भौ शराब्जाभयाञ्छलं िप्ततशखं ॐ नमो भगििे िप्तिदनाय िृिीयविनाशनायिक्िायदधानममरै ः िेव्यं कवपं कामदम ् ॥ िज्रदं ष्ट्राय महाबलाय ििारोगविनाशनाय मं मं मं मं मं मं॥ ब्रह्मोिाि ॥ मं ॐ नमः स्िाहा ॥१४॥िप्तशीष्णाः प्रिक्ष्यातम कििं ििातिवद्धदम ् । जवा हिा हनुमिो ॐ नमो भगििे िप्तिदनाय ििुथक्रोििुण्िाय ातनत्यं ििापापैः प्रमुच्यिे ॥१॥ िौतमविरिकायपुिाद्यतभिृवद्धकराय लं लं लं लं लं लं लं ॐिप्तस्िगापतिः पायास्च्छखां मे मारुिात्मजः । िप्तमूधाा नमः स्िाहा ॥१५॥तशरोऽव्याडमे िप्तातिाभाालदे शकम ् ॥२॥ ॐ नमो भगििे िप्तिदनाय पञ्िमाििदनाय रुद्रमूत्तये ाविःिप्तनेिो नेिेऽव्यात्िप्तस्िरगतिः श्रुिी । नािां ििािशीकरणाय ििातनगमस्िरुपाय रुं रुं रुं रुं रुं रुं रुं ॐिप्तपदाथोव्याडमुखं िप्तमुखोऽििु ॥३॥ नमः स्िाहा ॥१६॥िप्तस्जह्वस्िु रिनां रदाडिप्तहयोऽििु । िप्तच्छं दो हररः पािु ॐ नमो भगििे िप्तिदनाय षष्ठगोमुखाय िूयस्िरुपाय ाकण्ठं बाहूतगररस्स्थिः ॥४॥ ििारोगहराय मुविदािे ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ नमःकरौ ििुदाशकरो भूधरोऽव्याडममाङ्गुलीः । िप्तवषाध्यािो स्िाहा ॥१७॥हृदयमुदरं कस्ििागरः ॥५॥ ु ॐ नमो भगििे िप्तिदनाय िप्तममानुषमुखायिप्तद्वीपपतिस्श्चिं िप्तव्याहृतिरुपिान ् । कफटं मे रुद्राििाराय अञ्जनीिुिायिप्तिंस्थाथादायकः िस्क्थनी मम ॥६॥ िकलफदग्यशोविस्िारकायािज्रदे हाय िुग्रीििाह्यकरायिप्तग्रहस्िरुपी मे जानुनी जंघयोस्िथा । िप्तधाडयवप्रयः उदतधलङ्घनाय िीिाशुवद्धकराय लङ्कादहनायपादौ िप्तपािालधारकः ॥७॥ अनेकराििांिकाय रामानंददायकाय अनेकपिािोत्पाटकाय िेिुबंधकाय कवपिैडयनायकाय रािणािकाय
    • 32 अप्रेल 2012ब्रह्मियााश्रतमणे कौपीनब्रह्मिूिधारकाय रामहृदयाय ििा दष्ट ु य इदं कििं तनत्यं िप्तास्यस्य हनुमिः वििंध्यं जपिेग्रह तनिारणाय शाफकनी िाफकनी िेिाल ब्रह्मरािि भैरिग्रह तनत्यं ििाशिुविनाशनम ् ॥१९॥यिग्रह वपशािग्रह ब्रह्मग्रह िवियग्रह िैश्यग्रह पुिपौिप्रदं ििं िम्पद्राज्यप्रदं परम ् । ििारोगहरं िायुःशुद्रग्रहांत्यजग्रह म्लेच्छग्रह िपाग्रहोच्िाटकाय मम फकवत्तादं पुण्यिधानम ् ॥२०॥ििाकायािाधकाय ििाशिुिंहारकाय राजानंि िंश नीत्िा िैलोक्य विजयी भिेि ् । इदं फह परमंतिंहव्याघ्राफददष्टित्त्िाकषाकायै ु गोप्यं दे यं भवियुिाय ि ॥२१॥काफहकाफदविविधज्िरच्छे दकाय परयंिमंििंिनाशकाय न दे यं भविहीनाय दत्त्िा ि तनरयं व्रजेि ् ॥२२॥ििाव्यातधतनकृं िकाय िपााफदििास्थािर जङ्गम विष नामातनििााण्यपिगादातन रुपास्ण वििातन ि यस्य िस्डिस्िम्भनकराय ििाराजभयिोरभयास्ग्नभयप्रशमनाया । कमाास्ण दे िैरवप दघाटातन ि मारुतिं िप्तमुखं प्रपद्ये ुध्यास्त्मकातधदै विकातधभौतिकिापियतनिारणाय ॥२३॥ििाविद्याििािम्पत्ििापुरुषाथादायकायािाध्यकायािाधकाय ॥ इति अथिाणरहस्योि िप्तमुखी हनुमत्किि ॥ ंििािरप्रदाय ििााभीष्टकराय ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रं ह्रं ह्रः ॐनमः स्िाहा ॥१८॥ मंि तिद्ध स्फफटक श्री यंि "श्री यंि" िबिे महत्िपूणा एिं शविशाली यंि है । "श्री यंि" को यंि राज कहा जािा है क्योफक यह अत्यडि शुभ र्लदयी यंि है । जो न किल दिरे यडिो िे अतधक िे अतधक लाभ दे ने मे िमथा है एिं िंिार क हर व्यवि क तलए े ू े े फायदे मंद िावबि होिा है । पूणा प्राण-प्रतिवष्ठि एिं पूणा िैिडय युि "श्री यंि" स्जि व्यवि क घर मे होिा है उिक े े तलये "श्री यंि" अत्यडि र्लदायी तिद्ध होिा है उिक दशान माि िे अन-तगनि लाभ एिं िुख की प्रातप्त होति े है । "श्री यंि" मे िमाई अफद्रतिय एिं अद्रश्य शवि मनुष्य की िमस्ि शुभ इच्छाओं को पूरा करने मे िमथा होति है । स्जस्िे उिका जीिन िे हिाशा और तनराशा दर होकर िह मनुष्य अिर्लिा िे िर्लिा फक और तनरडिर गति ू करने लगिा है एिं उिे जीिन मे िमस्ि भौतिक िुखो फक प्रातप्त होति है । "श्री यंि" मनुष्य जीिन मं उत्पडन होने िाली िमस्या-बाधा एिं नकारात्मक उजाा को दर कर िकारत्मक उजाा का तनमााण करने मे िमथा है । "श्री यंि" की ू स्थापन िे घर या व्यापार क स्थान पर स्थावपि करने िे िास्िु दोष य िास्िु िे िम्बस्डधि परे शातन मे डयुनिा े आति है ि िुख-िमृवद्ध, शांति एिं ऐिया फक प्रतप्त होिी है । गुरुत्ि कायाालय मे "श्री यंि" 12 ग्राम िे 2250 Gram (2.25Kg) िक फक िाइज मे उप्लब्ध है . मूल्य:- प्रति ग्राम Rs. 9.10 िे Rs.28.00 GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
    • 33 अप्रेल 2012 GURUTVA JYOTISH Weekly E-Magazine Publishing In English Power By: GURUTVA KARYALAY Don’t Miss to Collect Your Copy Book Your Copy Now For More Information Email UsGURUTVA JYOTISH Weekly E-Magazine Fully Designed For PeopleConvenience who may interested in Astrology, Numerology, Gemstone,Yantra, Tantra, Mantra, Vastu ETC Spiritual Subjects.You can now Send Us Your articles For Publish In Our WeeklyMagazine For More Information Email UsContect: GURUTVA KARYALAY gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
    • 34 अप्रेल 2012 एकादशमुखी हनुमान किि॥ अथ श्री एकादशमुखी हनुमान कििम ् ॥॥ श्रीगणेशाय नम: ॥ ॐ रां बीजिाच्यो हृदयं पािु मे कवपनायक: । इति॥ लोपामुद्रोिाि ॥ करिलकरपृष्ठार्भ्यां नमः ॥११॥कम्भोद्भिदया तिडधो श्रुिं हनुमंि: परम ् । यंिमंिाफदक ु ं ॐ िं बीजकीतिाि: पािु बाहु मे िाञ्जनीिुि: ।ििं त्िडमुखोदीररिं मया ॥१॥ ॐ ह्रां बीजं राििेडद्रस्य दपाहा पािु िोदरम ् ॥१२॥दयां करु मतय प्राणनाथ िेफदिुमुत्िहे । कििं िायुपुिस्य ु िं बीजमयो मध्यं मे पािु लंकाविदाहाक: ।एकादशखात्मन: ॥२॥ ह्रीं बीजधरो गुह्यं मे पािु दे िेडद्रिस्डदि: ॥१३॥इत्येिं ििनं श्रुत्िा वप्रयाया: प्रश्रयास्डििम ् । िि प्रिक्रमे ुं रं बीजात्मा िदा पािु िोरू िातधालङ्घन: ।िि लोपामुद्रां प्रति प्रभु: ॥३॥ िुग्रीि ितिि: पािु जानुनी मे मनोजि: ॥१४॥॥ अगस्ि उिाि ॥ आपादमस्िक पािु रामदिो महाबल: । ं ुनमस्कृ त्िा रामदिं हनुमडिं महामतिम ् । ब्रह्मप्रोि िु ू ं पुिे िानरिक्िो मां िाग्नेय्यां िवियाडिकृ ि ् ॥१५॥कििं श्रृणु िुडदरर िादराि ् ॥४॥ दस्िणे नारतिंहस्िु नैऋत्यां गणनायक: ।िनडदनाय िुमहच्ििुराननभावषिम ् । कििं कामदं फदव्यं िारुण्यां फदतश मामव्यात्खिक्िो हररश्िर: ॥१६॥रिःकलतनबहा णम ् ॥५॥ ु िायव्यां भैरिमुख: कौबयां पािु मां िदा ।ििािंपत्प्रदं पुण्यं मत्याानां मधुरस्िरे । ॐ अस्य क्रोिास्य: पािु मां तनत्यमीशाडयां रुद्ररूपधृक् ॥१७॥श्रीकििस्यैकादशिक्िस्य धीमि: ॥६॥ रामस्िु पािु मां तनत्यं िौम्यरुपी महाभुज : ।हनुमत्कििमंिस्य िनडदन ऋवष: स्मृि: । प्रिडनात्मा एकादशमुखस्यैिफदव्यं िै कीतिािं मया ॥१८॥हनुमांश्ि दे िािाऽि प्रकीतिािः ॥७॥ रिोघ्नं कामदं िौम्यं ििािम्पफद्वधायकम ् ।छडदोऽनुष्टुप ् िमाख्यािं बीजं िायुिुिस्िथा । मुख्याि पुिदं धनदं िोग्रं शिुिम्पवत्तमदा नम ् ॥१९॥प्राण: शविश्च वितनयोग: प्रकतिाि: ॥८॥ स्िगाापिगादं फदव्यं तिस्डििाथाप्रदं शुभम ् ।ििाकामाथातिद्धयथा जप एिमुदीरयेि ् । एित्कििमज्ञात्िा मंितिवद्धना जायिे ॥२०॥स्े बीजं शविधृक् पािु तशरो मे पिनात्मज: । ं ु ित्िाररं शत्िहस्त्रास्ण पठे च्छद्वात्मना नर: ।इति अङ्गुष्ठार्भ्यां नमः । एकिारं पठे स्डनत्यं कििं तिवद्धदं महि ् ॥२१॥क्रं बीजात्मा नयनयोः पािु मां िानरे श्िर: ॥९॥ इति फद्विारं िा वििारं िा पठडनायुष्यमाप्नुयाि ् ।िजानीर्भ्यां नमः । क्रमादे कादशादे िमाििानकृ िात्िुधी: ॥२२॥ॐ िं बीजरुपी कणं मे िीिाशोकविनाशन: । इति िषााडिे दशानं िािाल्लभिे नाि िंशय: ।मध्यमार्भ्यां नमः । यं यं तिडियिे कामं िं िं प्राप्नोति पुरुष: ॥२३॥ॐ ग्लं बीजिाच्यो नािां मे लक्ष्मणप्राणदायक: । इति ब्रह्मोदीररिमेिवद्ध ििाग्रे कतथिं महि ् ।अनातमकार्भ्यां नमः ॥१०॥ इत्येिमुक्त्िा कििं महवषास्िूष्णीं बभूिेडदमखीं तनरीक्ष्य । ु ुॐ िं बीजाथाश्ि कण्ठं मे अियियकारक: । इति िंहृष्टतित्ताऽवप िदा िदीयपादौ ननामातिमुदा स्िभिु: ाकतनवष्ठकार्भ्यां नमः । ॥२४॥ ॥ इत्यगस्त्यिंफहिायामेकादशमुखहनुमत्कििं िंपूणम ् ॥ ा
    • 35 अप्रेल 2012 लाङ्गूलास्त्र शिुज्जय हनुमि ् स्िोिॐ हनुमडिमहािीर िायुिल्यपराक्रमम ् । ु ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्े ख्े ह्सस्त्रं ह्सस्ख्े ह्सिं ं ं ंमम कायााथमागच्छ प्रणमास्ण मुहुमुहुः ॥ ा ा लङ्काप्रािादभञ्जनाय अस्त्राय फट् ।वितनयोगः ॐ अस्य श्रीहनुमच्छिुञ्जयस्िोिमालामडिस्य ध्यानःश्रीरामिडद्र ऋवषः, नानाच्छडदांति श्री महािीरो हनुमान ् ध्यायेदि ् बालफदिाकर द्युितनभं दे िाररा दपाापहं दे िेडद्रप्रमुखदे ििा मारुिात्मज इति ह्सिं बीजम ्, अञ्जनीिूनुररति ह्सें प्रशस्ियशिं दे दीप्यमानं रुिा ।शविः, ॐ हा हा हा इति कीलकम ् श्री राम भवि इति ह्वां िुग्रीिाफदिमस्ििानरयुिं िुव्यि ित्त्ि वप्रयं िंरिारुणप्राणः, श्रीराम लक्ष्मणानडदकर इति ह्वां ह्वीं ह्वूं जीि, लोिनं पिनजं पीिाम्बरालंकृिम ् ॥ममाऽरातिपराजय तनतमत्त शिुञ्जय स्िोि मडि जपे उद्यडमािाण्ि कोफट प्रकटरुतियुिं िारुिीरािनस्थंवितनयोगः। मौञ्जीयज्ञोपिीिाभरणरुतितशखं शोतभिं किलाङ्कम ् । ुंकरडयािः भिानातमष्टदं िं प्रणिमुतनजनं िेदनादप्रमोदं ध्यायेद् दे िंॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्े ख्े ह्सस्त्रं ह्सस्ख्े ह्सिं हनुमिे ं ं ं विधेयं प्लिगकलपतिं गोष्पदी भूििातधाम ् ॥ ुअंगुष्ठार्भ्यां नमः । िज्राङ्गं वपङ्गकशाढ्यं स्िणाकण्िल मस्ण्ििम ् । े ुॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्े ख्े ह्सस्त्रं ह्सस्ख्े ह्सिं रामदिाय ं ं ं ू तनगूढमुपिङ्गम्य पारािारपराक्रमम ् ॥िजानीर्भ्यां नमः । स्फफटकाभं स्िणाकास्डिं फद्वभुजं ि कृ िाञ्जतलम ् ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्े ख्े ह्सस्त्रं ह्सस्ख्े ह्सिं लक्ष्मण ं ं ं कण्िलद्वयिंशोतभमुखाम्भोजं हररं भजे ॥ ुप्राणदािे मध्यमार्भ्यां नमः । िव्यहस्िे गदायुि िामहस्िे कमण्िलुम ् । ंॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्े ख्े ह्सस्त्रं ह्सस्ख्े ह्सिं ं ं ं उद्यदस्िणदोदा ण्िं हनुमडिं वितिडियेि ् ॥अञ्जनीिूनिे अनातमकार्भ्यां नमः । इि िरह िे श्रीहनुमानजी का ध्यान करक “अरे मल्ल ेॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्े ख्े ह्सस्त्रं ह्सस्ख्े ह्सिं िीिाशोक ं ं ं िटख” िथा “टोिर मल्ल िटख” का उच्िारण करकेविनाशाय कतनवष्ठकार्भ्यां नमः । हनुमानजी को ‘कवपमुद्रा’ प्रदतशाि करं ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्े ख्े ह्सस्त्रं ह्सस्ख्े ह्सिं ं ं ं ॥ माला मडि ॥लङ्काप्रािादभञ्जनाय करिलकरपृष्ठार्भ्यां नमः । “ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्े ख्े हस्ख्े ह्सिं नमो हनुमिे ं ं ंहृदयाफद डयािः िैलोक्याक्रमण पराक्रमण श्रीरामभि मम परस्य िॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्े ख्े ह्सस्त्रं ह्सस्ख्े ह्सिं हनुमिे ं ं ं ििाशिून ् ििुिणिम्भिान ् पुं स्त्री नपुंिकान ् भूि भविष्यद् ा ाहृदयाय नमः । ििामानान ् दरस्थ िमीपस्थान ् नाना नामघेयान ् नाना ूॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्े ख्े ह्सस्त्रं ह्सस्ख्े ह्सिं रामदिाय ं ं ं ू िंकर जातियान ् कलि पुि तमि भृत्य बडधु िुहृि ्तशरिे स्िाहा । िमेिान ् प्रभु शवि िमेिान ् धन धाडयाफद िम्पवत्त युिान ्ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्े ख्े ह्सस्त्रं ह्सस्ख्े ह्सिं लक्ष्मण ं ं ं राज्ञो राजपुि िरिकान ् मंिी ितिि िखीन ् आत्यस्डिप्राणदािे तशखायै िषट् । काडिणेन त्िरया एिफदनाितध नानोपायैमाारय मारयॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्े ख्े ह्सस्त्रं ह्सस्ख्े ह्सिं ं ं ं शस्त्रेण छे दय छे दय अस्ग्नना ज्िालय ज्िालय दाहयअञ्जनीिूनिे कििाय हुम ् । दाहय अियकमारिि ् पादिाक्रमणे तशलािले िोटय िोटय ुॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्े ख्े ह्सस्त्रं ह्सस्ख्े ह्सिं िीिाशोक ं ं ं घािय घािय बंधय बंधय भ्रामय भ्रामयविनाशाय नेि ियाय िोषट् । भयािुरास्डििंज्ञाडिद्यः करु करु भस्मीभूिानुद्धलय ु ु ू
    • 36 अप्रेल 2012भस्मीभूिानुद्धलय भिजनित्िल िीिाशोकापहारक ििाि ू लोलल्लांगूलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥८॥मामेनं ि रि रि महारुद्राििार हां हां हुं हुं भूि िंघैः ग्रस्िाऽशैजगि ् स्िास््य राििाम्भोतधमडदर ।िह भिय भिय क्रद्ध िेििा नखैविादारय नखैविादारय ु लोलल्लांगूलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥९॥दे शादस्मादच्िाटय वपशाििद् भ्रंशय भ्रंशय घे घे हूं फट् ु पुच्छ गुच्छ स्फरद्वीर जगद् दग्धाररपत्तन । ुस्िाहा ॥१॥ लोलल्लांगूलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥१०॥ॐ नमो भगििे हनुमिे महाबलपराक्रमाय महाविपवत्त जगडमनो दरुल्लंघ्य पारािार विलंघन ! । ुतनिारकाय भिजन मनःकल्पना कल्पद्रमाय दष्टजन ु ु लोलल्लांगूलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥११॥मनोरथ स्िम्भकाय प्रभञ्जन प्राणवप्रयाय स्िाहा ॥२॥ स्मृिमाि िमस्िेष्ट पूरक ! प्रणि वप्रय ! ।ध्यानः लोलल्लांगूलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥१२॥श्रीमडिं हनुमडिमात्तररपुतभद्भभत्तरुभ्रास्जिं ू ृ राविञ्िर िमूरातशकत्तानैकविकत्तान ! ।िल्गद्वालतधबद्धिैररतनियं िामीकराफद्रप्रभम ् । लोलल्लांगूलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥१३॥रोषाद्रिवपशङ्ग नेि नतलनं भ्रूमभङ्मङ्गस्फरि ् प्रोद्यच्िण्ि ु जानकी जानकीजातन प्रेम पाि ! परं िप ! ।मयूख मण्िल मुखं दःखापहं दःस्खनाम ् ॥१॥ ु ु लोलल्लांगूलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥१४॥कौपीनं कफटिूिमंज्यस्जनयुग्दे हं विदे हात्मजाप्राणाधीश भीमाफदक महािीर िीरिेशाििारक ! ।पदारविडद तनरिं स्िाडिं कृ िाडिं फद्वषाम ् । लोलल्लांगूलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥१५॥ध्यात्िैि िमराङ्गणस्स्थिमथानीय स्िहृत्पङ्कजे िैदेही विरह क्लाडि रामरोषैक विग्रह ! ।िंपूजनोिवितधना िंप्राथायेत्प्रातथािम ् ॥२॥ लोलल्लांगूलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥१६॥॥मूल पाठ॥ िज्राङ्नखदं ष्ट्रेश ! िस्ज्रिज्रािगुण्ठन ! ।हनुमडनञ्जनीिूनो ! महाबलपराक्रम ! । लोलल्लांगूलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥१७॥लोलल्लांगलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥१॥ ू अखिा गिा गंधिा पिािोद् भेदन स्िरः ! ।मकटातधप ! मािाण्ि मण्िल ग्राि कारक ! । ा लोलल्लांगूलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥१८॥लोलल्लांगलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥२॥ ू लक्ष्मण प्राण िंिाण िाि िीक्ष्ण कराडिय ! ।अििपणवपङ्गािस्ितिजाशुग्ियङ्र ! । लोलल्लांगूलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥१९॥लोलल्लांगलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥३॥ ू रामाफदविप्रयोगात्ता ! भरिाद्यावत्तानाशन ! ।रुद्राििार ! िंिार दःख भारापहारक ! । ु लोलल्लांगूलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥२०॥लोलल्लांगलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥४॥ ू द्रोणािल िमुत्िेप िमुस्त्िप्तारर िैभि ! ।श्रीराम िरणाम्भोज मधुपातयिमानि ! । लोलल्लांगूलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥२१॥लोलल्लांगलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥५॥ ू िीिाशीिााद िम्पडन ! िमस्िाियिािि ! ।बातलप्रथमक्राडि िुग्रीिोडमोिनप्रभो ! । लोलल्लांगूलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥२२॥लोलल्लांगलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥६॥ ू इत्येिमित्थिलोपविष्टः शिुजयं नाम पठे त्स्ियं यः । ंिीिा विरह िारीश मग्न िीिेश िारक ! । ि शीघ्रमेिास्ि िमस्िशिुः प्रमोदिे मारुिज प्रिादाि ्लोलल्लांगलपािेन ममाऽिरीन ् तनपािय ॥७॥ ू ॥२३॥रिोराज िापास्ग्न दह्यमान जगद्वन ! । ॥ इति शिुञ्जय हनुमत्स्त्रोिं ॥
    • 37 अप्रेल 2012 मंि तिद्ध िाहन दघटना नाशक मारुति यंि ु ा पौरास्णक ग्रंथो मं उल्लेख हं की महाभारि क युद्ध क िमय अजुन क रथ क अग्रभाग पर मारुति ध्िज एिं े े ा े ेमारुति यडि लगा हुआ था। इिी यंि क प्रभाि क कारण िंपूणा युद्ध क दौरान हज़ारं-लाखं प्रकार क आग्नेय अस्त्र- े े े ेशस्त्रं का प्रहार होने क बाद भी अजुन का रथ जरा भी ितिग्रस्ि नहीं हुआ। भगिान श्री कृ ष्ण मारुति यंि क इि े ा ेअद्भि रहस्य को जानिे थे फक स्जि रथ या िाहन की रिा स्ियं श्री मारुति नंदन करिे हं, िह दघटनाग्रस्ि किे हो ु ु ा ैिकिा हं । िह रथ या िाहन िो िायुिेग िे, तनबाातधि रुप िे अपने लक्ष्य पर विजय पिका लहरािा हुआ पहुंिेगा।इिी तलये श्री कृ ष्ण नं अजुन क रथ पर श्री मारुति यंि को अंफकि करिाया था। ा े स्जन लोगं क स्कटर, कार, बि, ट्रक इत्याफद िाहन बार-बार दघटना ग्रस्ि हो रहे हो!, अनािश्यक िाहन को े ू ु ानुिान हो रहा हं! उडहं हानी एिं दघटना िे रिा क उदे श्य िे अपने िाहन पर मंि तिद्ध श्री मारुति यंि अिश्य ु ा ेलगाना िाफहए। जो लोग ट्राडस्पोफटं ग (पररिहन) क व्यििाय िे जुिे हं उनको श्रीमारुति यंि को अपने िाहन मं अिश्य ेस्थावपि करना िाफहए, क्योफक, इिी व्यििाय िे जुिे िैकिं लोगं का अनुभि रहा हं की श्री मारुति यंि को स्थावपिकरने िे उनक िाहन अतधक फदन िक अनािश्यक खिो िे एिं दघटनाओं िे िुरस्िि रहे हं । हमारा स्ियंका एिं अडय े ु ाविद्वानो का अनुभि रहा हं , की स्जन लोगं ने श्री मारुति यंि अपने िाहन पर लगाया हं , उन लोगं क िाहन बिी िे ेबिी दघटनाओं िे िुरस्िि रहिे हं । उनक िाहनो को कोई विशेष नुक्शान इत्याफद नहीं होिा हं और नाहीं अनािश्यक ु ा ेरुप िे उिमं खराबी आति हं ।िास्िु प्रयोग मं मारुति यंि: यह मारुति नंदन श्री हनुमान जी का यंि है । यफद कोई जमीन वबक नहीं रही हो, या उिपर कोई िाद-वििाद हो, िो इच्छा क अनुरूप िहँ जमीन उतिि मूल्य पर वबक जाये इि तलये इि मारुति यंि का ेप्रयोग फकया जा िकिा हं । इि मारुति यंि क प्रयोग िे जमीन शीघ्र वबक जाएगी या वििादमुि हो जाएगी। इि तलये ेयह यंि दोहरी शवि िे युि है ।मारुति यंि क विषय मं अतधक जानकारी क तलये गुरुत्ि कायाालय मं िंपक करं । मूल्य Rs- 255 िे 10900 िक े े ा मंि तिद्ध यंिगुरुत्ि कायाालय द्वारा वितभडन प्रकार क यंि कोपर िाम्र पि, तिलिर (िांदी) ओर गोल्ि (िोने) मे वितभडन प्रकार की िमस्या क े ेअनुिार बनिा क मंि तिद्ध पूणा प्राणप्रतिवष्ठि एिं िैिडय युि फकये जािे है . स्जिे िाधारण (जो पूजा-पाठ नही जानिे या नही ेकिकिे) व्यवि वबना फकिी पूजा अिाना-वितध विधान विशेष लाभ प्राप्त कर िकिे है . स्जि मे प्रतिन यंिो िफहि हमारे िषो केअनुिंधान द्वारा बनाए गये यंि भी िमाफहि है . इिक अलिा आपकी आिश्यकिा अनुशार यंि बनिाए जािे है . गुरुत्ि कायाालय ेद्वारा उपलब्ध कराये गये िभी यंि अखंफिि एिं २२ गेज शुद्ध कोपर (िाम्र पि)- 99.99 टि शुद्ध तिलिर (िांदी) एिं 22 करे ट ेगोल्ि (िोने) मे बनिाए जािे है . यंि क विषय मे अतधक जानकारी क तलये हे िु िम्पक करे े े ा GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
    • 38 अप्रेल 2012 ॥ श्री आज्ज्नेय अष्टोत्तरशि नामाितलः ॥ॐ मनोजिं मारुििुल्य िेगं,स्जिेस्डद्रयं ॐ गडधिा विद्याय नमः । ॐ वपडगाळािाय नमः ।बुवद्धमिां िररष्ठम ् । िािात्मजं िानरयूध ॐ ित्िञाय नमः । ॐ िातधा मैनाक पूस्जिाय नमः ।मुख्यं,श्री रामदिं तशरिा नमातम ॥ ू ॐ महाबल पराक्रमाय नमः । ॐ कबळीकृ ि मािााडि मडिलाय नमः ।ॐ आञ्जनेयाय नमः । ॐ काराग्रह विमोक्िे नमः । ॐ विस्जिेस्डद्रयाय नमः ।ॐ महािीराय नमः । ॐ शृडखला बडधमोिकाय नमः । ॐ रामिुग्रीि िडधािे नमः ।ॐ हनूमिे नमः । ॐ िागरोत्तारकाय नमः । ॐ मफहरािण मधानाय नमः ।ॐ मारुिात्मजाय नमः । ॐ प्राज्ञाय नमः । ॐ स्फफटकाभाय नमः ।ॐ ित्िज्ञानप्रदाय नमः । ॐ रामदिाय नमः । ू ॐ िागधीशाय नमः ।ॐ िीिादे विमुद्राप्रदायकाय नमः । ॐ प्रिापििे नमः । ॐ निव्याकृ िपस्ण्ििाय नमः ।ॐ अशोकिनकाच्छे िे नमः । ॐ िानराय नमः । ॐ ििुबााहिे नमः ।ॐ ििामायाविभंजनाय नमः । ॐ किरीिुिाय नमः । े ॐ दीनबडधुराय नमः ।ॐ ििाबडधविमोक्िे नमः । ॐ िीिाशोक तनिारकाय नमः । ॐ मायात्मने नमः ।ॐ रिोविध्िंिकारकाय नमः । ॐ अडजनागभा िंभूिाय नमः । ॐ भिित्िलाय नमः ।ॐ परविद्या पररहाराय नमः । ॐ बालाकिद्रशाननाय नमः । ा ॐ िंजीिननगायाथाा नमः ।ॐ पर शौया विनाशकाय नमः । ॐ विभीषण वप्रयकराय नमः । ॐ िुिये नमः ।ॐ परमडि तनराकिे नमः । ॐ दशग्रीि कलाडिकाय नमः । ु ॐ िास्ग्मने नमः ।ॐ परयडि प्रभेदकाय नमः । ॐ लक्ष्मणप्राणदािे नमः । ॐ दृढव्रिाय नमः ।ॐ ििाग्रह विनातशने नमः । ॐ िज्र कायाय नमः । ॐ कालनेतम प्रमथनाय नमः ।ॐ भीमिेन िहायकृ थे नमः । ॐ महाद्युथये नमः । ॐ हररमकट मकटाय नमः । ा ाॐ ििादखः हराय नमः । ु ॐ तिरं जीविने नमः । ॐ दाडिाय नमः ।ॐ ििालोकिाररणे नमः । ॐ राम भिाय नमः । ॐ शाडिाय नमः ।ॐ मनोजिाय नमः । ॐ दै त्य काया विघािकाय नमः । ॐ प्रिडनात्मने नमः ।ॐ पाररजाि द्रमूलस्थाय नमः । ु ॐ अिहडिे नमः । ॐ शिकडटमुदापहिे नमः ।ॐ ििा मडि स्िरूपाय नमः । ॐ काञ्िनाभाय नमः । ॐ योतगने नमः ।ॐ ििा िडि स्िरूवपणे नमः । ॐ पञ्ििक्िाय नमः । ॐ रामकथा लोलाय नमः ।ॐ ििायडिात्मकाय नमः । ॐ महा िपिे नमः । ॐ िीिाडिेशण पफठिाय नमः ।ॐ कपीिराय नमः । ॐ लस्डकनी भञ्जनाय नमः । ॐ िज्रद्रनुष्टाय नमः ।ॐ महाकायाय नमः । ॐ श्रीमिे नमः । ॐ िज्रनखाय नमः ।ॐ ििारोगहराय नमः । ॐ तिंफहका प्राण भडजनाय नमः । ॐ रुद्र िीया िमुद्भिाय नमः ।ॐ प्रभिे नमः । ॐ गडधमादन शैलस्थाय नमः । ॐ इडद्रस्जत्प्रफहिामोघब्रह्मास्त्र वितनिारकायॐ बल तिवद्धकराय नमः । ॐ लंकापुर विदायकाय नमः । नमः ।ॐ ििाविद्या िम्पवत्तप्रदायकाय नमः । ॐ िुग्रीि ितििाय नमः । ॐ पाथा ध्िजाग्रिंिातिने नमः ।ॐ कवपिेनानायकाय नमः । ॐ धीराय नमः । ॐ शरपंजरभेधकाय नमः ।ॐ भविष्य्ििुराननाय नमः । ॐ शूराय नमः । ॐ दशबाहिे नमः ।ॐ कमार ब्रह्मिाररणे नमः । ु ॐ दै त्यकलाडिकाय नमः । ु ॐ लोकपूज्याय नमः ।ॐ रत्नकडिलाय नमः । ु ॐ िुिािालातिािाय नमः । ॐ जाम्बित्प्रीतििधानाय नमः ।ॐ दीतप्तमिे नमः । ॐ िेजिे नमः । ॐ िीिािमेि श्रीरामपाद िेिदरडधराय नमः । ुॐ िडिलद्वालिडनद्धाय नमः । ॐ रामिूिामस्णप्रदायकाय नमः । ॥ इति श्री आञ्जनेय अष्टोत्तरशि नामाितलॐ लम्बमानतशखोज्िलाय नमः । ॐ कामरूवपणे नमः । िंपूणम ् ॥ ा
    • 39 अप्रेल 2012 मडदात्मक मारुतिस्िोिम ् ं || श्री हनुमि ् स्ििन || प्रनिउँ पिनकमार खल बन पािक ग्यानघन। ु नमो िायुपुिाय भीमरूपाय धीमिे। जािु ह्रदय आगार बिफहं राम िर िाप धर॥१॥ नमस्िे रामदिाय कामरूपाय श्रीमिे॥ ू मोह शोकविनाशाय िीिाशोकविनातशने। अिुतलिबलधामं हे मशैलाभदे हं। भगनशोकिनायास्िु दग्धलङ्काय िास्ग्मने॥ दनुजिनकृ शानुं ज्ञातननामग्रगण्यम ्॥२॥ गतितनस्जाििािाय लक्ष्मणप्राणदाय ि। िकलगुणतनधानं िानराणामधीशं। िनौकिां िररष्ठाय ितशने िनिातिने॥ रघुपतिवप्रयभि िािजािं नमातम॥३॥ ं ित्त्िज्ञानिुधातिडधुतनमगनय महीयिे। गोष्पदीकृ ििारीशं मशकीकृ िराििम ्। आञ्जनेयाय शूराय िुग्रीिितििाय िे॥ रामायणमहामालारत्नं िडदे ऽतनलात्मजम ्॥४॥ जडममृत्युभयघनय ििाकष्टहराय ि। नेफदष्ठाय प्रेिभूिवपशािभयहाररणे॥ अञ्जनानडदनं िीरं जानकीशोकनाशनम ्। कपीशमिहडिारं िडदे लङ्काभयङ्करम ्॥५॥ यािनानाशनायास्िु नमो मकटरूवपणे। ा यिराििशादा लिपािस्श्चकभीहृिे॥ ू ृ महाव्याकरणाम्भोतधमडथमानिमडदरम ्। महाबलाय िीराय तिरं जीविन उद्धिे। कियडिं रामकीत्याा हनुमडिमुपास्महे ॥६॥ हाररणे िज्रदे हाय िोल्लस्ङ्घिमहाब्धये॥ उल्लङ्घ्य तिडधोः ितललं िलीलं यः शोकिफह्नं बतलनामग्रगण्याय नमो न: पाफह मारुिे। जनकात्मजायाः। लाभदोऽति त्िमेिाशु हनुमन ् राििाडिक॥ आदाय िेनैि ददाह लङ्कां नमातम िं यशो जयं ि मे दे फह शिून ् नाशय नाशय। प्राञ्जतलराञ्जनेयम ्॥७॥ स्िातश्रिानामभयदं य एिं स्िौति मारुतिम ्। मनोजिं मारुििुल्यिेगं स्जिेस्डद्रयं बुवद्धमिां िररष्ठम ्। हातन: किो भिेत्तस्य ििाि विजयी भिेि ्॥ ु िािात्मजं िानरयूथमुख्यं श्रीरामदिं शरणं प्रपद्ये॥८॥ ू आञ्जनेयमतिपाटलाननं काञ्िनाफद्रकमनीयविग्रहम ्।इि स्िोिका प्रतिफदन पाठ करने िे मृत्यु , यि, पाररजाििरुमूलिातिनं भाियातम पिमाननडदनम ्॥९॥रािि, तिंह, िपा, वबच्छ भूि, प्रेि और वपशाि ूइत्याफद भयका नाश होकर उिकी िमस्ि पीड़ा यि-यि रघुनाथकीिानं िि-िि कृ िमस्िकाञ्जतलम ्।का तनराकरण होिा हं । उिे िमस्ि कायो मे बाष्पिाररपररपूणलोिनं मारुतिं नमि राििाडिकम ्॥१०॥ ाविजय प्राप्त होिी हं
    • 40 अप्रेल 2012 || िंकट मोिन हनुमानाष्टक ||बाल िमय रवब भस्ि तलयो िब िीनहुँ लोक भयो अँतधयारो। आतन िजीिन हाथ दई िब लतछमन क िुम प्रान उबारो। ेिाफह िं िाि भयो जग को यह िंकट काहु िं जाि न टारो। को नफहं जानि है जग मं कवप िंकटमोिन नाम तिहारो॥५॥दे िन आतन करी वबनिी िब छाँफड़ फदयो रवब कष्ट तनिारो। रािन जुद्ध अजान फकयो िब नाग फक फाँि िबै तिर िारो।को नफहं जानि है जग मं कवप िंकटमोिन नाम तिहारो॥१॥ श्रीरघुनाथ िमेि िबै दल मोह भयो यह िंकट भारो।बातल की िाि कपीि बिै तगरर जाि महाप्रभु पंथ तनहारो। आतन खगेि िबै हनुमान जु बंधन काफट िुिाि तनिारो।िंफक महा मुतन िाप फदयो िब िाफहय कौन वबिार वबिारो। को नफहं जानि है जग मं कवप िंकटमोिन नाम तिहारो॥६॥क फद्वज रूप तलिाय महाप्रभु िो िुम दाि क िोक तनिारो। ै े बंधु िमेि जबै अफहरािन लै रघुनाथ पिाल तिधारो।को नफहं जानि है जग मं कवप िंकटमोिन नाम तिहारो॥२॥ दे वबफहं पूस्ज भली वबतध िं बतल दे उ िबै तमतल मंि वबिारो।अंगद क िँग लेन गये तिय खोज कपीि यह बैन उिारो। े जाय िहाय भयो िब ही अफहरािन िैडय िमेि िँहारो।जीिि ना बतिहौ हम िो जु वबना िुतध लाए इहाँ पगु धारो। को नफहं जानि है जग मं कवप िंकटमोिन नाम तिहारो॥७॥हे रर थक िट तिंधु िबै िब लाय तिया-िुतध प्रान उबारो। े काज फकयो बड़ दे िन क िुम बीर महाप्रभु दे स्ख वबिारो। ेको नफहं जानि है जग मं कवप िंकटमोिन नाम तिहारो॥३॥ कौन िो िंकट मोर गरीब को जो िुमिं नफहं जाि है टारो।रािन िाि दई तिय को िब रािति िं कफह िोक तनिारो। बेतग हरो हनुमान महाप्रभु जो कछ िंकट होय हमारो। ुिाफह िमय हनुमान महाप्रभु जाय महा रजनीिर मारो। को नफहं जानि है जग मं कवप िंकटमोिन नाम तिहारो॥८॥िाहि िीय अिोक िं आतग िु दै प्रभु मुफद्रका िोक तनिारो। || दोहा ||को नफहं जानि है जग मं कवप िंकटमोिन नाम तिहारो॥४॥ लाल दे ह लाली लिे अरू धरर लाल लँगर। बज्र दे ह दानि दलन ूबान लग्यो उर लतछमन क िब प्रान िजे िुि रािन मारो। े जय जय जय कवप िूर॥लै गृह बैद्य िुषेन िमेि िबै तगरर द्रोन िु बीर उपारो। || इति िंकटमोिन हनुमानाष्टक िम्पूणा || हनुमत्पञ्रत्न स्िोिम ् िानरतनकराध्यिं दानिकलकमुदरविकरिदृिम ्। ु ु िीिास्खलविषयेच्छं जािानडदाश्रुपुलकमत्यच्छम ्। दीनजनािनदीिं पािनिप:पाकपुञ्जमद्रािम ्॥ िीिापतिदिाद्यं िािात्मजमद्य भािये हृद्यम ्॥ ू एिि ् पिनिुिस्य स्िोिं य: पठति पञ्िरत्नाख्यम ्। िरुणारुणमुखकमलं करुणारिपूरपूररिापाङ्गम ्। तिरतमह तनस्खलान ् भोगान ् भुक्त्िा श्रीरामभविभाग ् िंजीिनमाशािे मञ्जुलमफहमानमञ्जनाभाग्यम ्॥ भिति॥ शम्बरिैररशरातिगमम्बुजदलविपुललोिनोदारम ्। ॥श्रीमद् आफद शंकरािाया श्रीहनुमत्पञ्िर स्िोिम ् कम्बुगलमतनलफदष्टं विम्बज्ितलिोष्ठमेकमिलम्बे॥ िम्पूणम ्॥ ा दरीकृ ििीिातिा: प्रकटीकृ िरामिैभिस्फतिा:। ू ू हनुमानजी क इि पञ्िरत्न स्िोि का जो तनयतमि पाठ े दाररिदशमुखकीतिा: पुरिो मम भािु हनुमिो मूतिा:॥ करिा हं , िह इि लोक मं तिर-काल िक िमस्ि भोगं को भोगकर श्रीराम-भवि का भागी बनिा हं । 
    • 41 अप्रेल 2012 ॥ मारुतिस्िोिम ् ॥भीमरूपी महारुद्रा िज्र हनुमान मारुिी । आस्णला मागुिीं नेला आला गेला मनोगिी ।िनारी अडजनीिूिा रामदिा प्रभंजना ॥१॥ ू मनािी टाफकलं मागं गिीिी िूळणा निे ॥१०॥महाबळी प्राणदािा िकळां उठिी बळं । अणूपािोतन ब्रह्मांिाएिढा होि जाििे ।िौख्यकारी दःखहारी (शोकहिाा)(धूि)दि िैष्णि गायका ॥२॥ ु ा ू ियािी िुळणा कोठं मेरु- मांदार धाकटे ॥११॥ ुदीननाथा हरीरूपा िुंदरा जगदं िरा । ब्रह्मांिाभंििे िेढे िज्रपुच्छं करू शक । ं ेपािालदे ििाहं िा भव्यतिंदरलेपना ॥३॥ ू ियािी िुळणा किी ब्रह्मांिीं पाहिां निे ॥१२॥ ंलोकनाथा जगडनाथा प्राणनाथा पुरािना । आरि दे स्खले िोळां ग्रातिलं िूयमंिळा । ापुण्यिंिा पुण्यशीला पािना पररिोषका ॥४॥ िाढिां िाढिां िाढे भेफदलं शूडयमंिळा ॥१३॥ध्िजांगं उिली बाहो आिेशं लोटला पुढं । धनधाडय पशुिवद्ध पुिपौि िमग्रही (िमस्िही)। ृकाळास्ग्न काळरुद्रास्ग्न दे खिां कांपिी भयं ॥५॥ पाििी रूपविद्याफद स्िोिपाठं करूतनयां ॥१४॥ब्रह्मांिं माइलीं नेणं आंिाळे दं िपंगिी । भूिप्रेििमंधाफद रोगव्यातध िमस्िही ।नेिाग्नी िातलल्या ज्िाळा भ्रुकटी िाफठल्या बळं ॥६॥ ु नाििी िुटिी तिंिा आनंदे भीमदशानं ॥१५॥पुच्छ िं मुरफिलं माथां फकरीटी किलं बरीं । ुं हे धरा पंधराश्लोकी लाभली शोभली भली (बरी)िुिणा कफट कांिोटी घंटा फकफकस्ण नागरा ॥७॥ ं दृढदे हो तनःिंदेहो िंख्या िंद्रकला गुणं ॥१६॥ठकारे पिािा ऐिा नेटका ििपािळू । रामदािीं अग्रगण्यू कवपकळाति मंिणू । ुिपळांग पाहिां मोठं महाविद्युल्लिेपरी ॥८॥ रामरूपी अडिरात्मा दशाने दोष नाििी ॥१७॥कोफटच्या कोफट उड्िाणं झंपािे उत्तरे किे । ॥इति श्री रामदािकृ िं िंकटतनरिनं नाम श्री मारुतिस्िोिम ्मंदाद्रीिारखा द्रोणू क्रोधं उत्पाफटला बळं ॥९॥ िंपूणम ् ॥ ा ॥श्रीहनुमडनमस्कारः ॥गोष्पदी- कृ ि- िारीशं मशकी- कृ ि- राििम ् । मनोजिं मारुि- िुल्य- िेगंरामायण- महामाला- रत्नं िडदे ऽतनलात्मजम ् ॥१॥ स्जिेस्डद्रयं बुवद्धमिां िररष्ठम ् । िािात्मजं िानर- यूथ- मुख्यंअञ्जना- नडदनं- िीरं जानकी- शोक- नाशनम ् । श्रीराम- दिं तशरिा नमातम ॥५॥ ूकपीशमि- हडिारं िडदे लङ्का- भयङ्करम ् ॥२॥ आञ्जनेयमतिपाटलाननंमहा- व्याकरणाम्भोतध- मडथ- मानि- मडदरम ् । काञ्िनाफद्र- कमनीय- विग्रहम ् ।कियडिं राम- कीत्याा हनुमडिमुपास्महे ॥३॥ पाररजाि- िरु- मृल- िातिनं भाियातम पिमान- नडदनम ् ॥६॥उल्लङ्घ्य तिडधोः ितललं िलीलंयः शोक- िफह्नं जनकात्मजायाः । यि यि रघुनाथ- कीिानंआदाय िेनैि ददाह लङ्कां िि िि कृ ि- मस्िकाञ्जतलम ् ।नमातम िं प्राञ्जतलराञ्जनेयम ् ॥४॥ बाष्प- िारर- पररपूण- लोिनं ा मारुतिनामि राििाडिकम ् ॥७॥
    • 42 अप्रेल 2012 हनुमान मंि िे भय तनिारण  स्िस्स्िक.ऎन.जोशीजो लोगो को फकिी अज्ञाि भय िे परे शान रहिे हो। हर िमय फकिी ना फकिी िरह क िर क कारण मानतिक रहिा े ेहो, िो भय क तनिारण क तलये िंपूणा प्राण प्रतिवष्ठि हनुमान यंि क िम्मुख हनुमान मंि का वितध-विधान िे जप े े ेकरना लाभप्रद होिा हं ।अनजाने भय क तनिारण हे िु इि मंि का 7 फदनो िक प्रतिफदन तनस्श्चि िमय पर रुद्राि की माला िे एक माल जप ेकरना लाभप्रद होिा हं ।मंि: अंजनीगा िंभि कपीडद्रितििोत्तम। ू राम वप्रय नमस्िुर्भ्यं हनुमिे रि ििादा॥िमस्या क िमाधान क पश्चाि हनुमान यंि को बहिे जल मं वििस्जाि कर दे या फकिी हनुमान मंफदर मं अवपाि कर े ेदं । || हनुमान आरिी || आरिी कीजै हनुमान लला की। दष्टदलन रघुनाथ कला की॥१॥ ु जाक बल िे तगररिर काँप। रोग-दोष जाक तनकट न झाँप॥२॥ े ै े ै अंजतन पुि महा बलदाई। िंिन क प्रभु िदा िहाई॥३॥ े दे बीरा रघुनाथ पठाये। लंका जारर िीय िुतध लाये॥४॥ लंका िो कोट िमुद्र िी खाई। जाि पिनिुि बार न लाई॥५॥ लंका जारर अिुर िँहारे । तियारामजी क काज िँिारे ॥ ६॥ े लक्ष्मण मूतछा ि पड़े िकारे । आतन िजीिन प्रान उबारे ॥७॥ पैफठ पिाल िोरर जम-कारे । अफहरािन की भुजा उखारे ॥८॥ बायं भुजा अिुर दल मारे । दफहने भुजा िंिजन िारे ॥९॥ िुर नर मुतन आरिी उिारे । जै जै जै हनुमान उिारे ॥१०॥ किन थार कपूर लौ छाई। आरति करि अंजना माई॥११॥ ं जो हनुमान जी की आरिी गािै। बति बैकण्ठ परमपद पािै॥ १२॥ ु || इति श्री हनुमान िालीिा िम्पूणा ||
    • 43 अप्रेल 2012 जब हनुमान जी ने िोिा़ शतनदे ि का घमंि!  तिंिन जोशी, स्िस्स्िक.ऎन.जोशी शतन दे ि पर िेल िढाया जािा हं , इि िंबंध मं आनंद रामायण मं एक कथा का उल्लेख तमलिा हं । जब श्रीराम की िेना ने िागर िेिु बांध तलया, िब रािि इिे हातन न पहुंिा िक, उिक तलए पिन िुि हनुमान को उिकी ं ेदे खभाल की स्जम्मेदारी िौपी गई। जब हनुमान जी शाम क िमय अपने इष्टदे ि राम क ध्यान मं मग्न थे, िभी िूया े ेपुि शतन ने अपना काला करूप िेहरा बनाकर क्रोधपूणा कहा- हे िानर मं दे ििाओ मं शविशाली शतन हूँ। िुना हं , िुम ुबहुि बलशाली हो। आँखं खोलो और मेरे िाथ युद्ध करो, मं िुमिे युद्ध करना िाहिा हूँ। इि पर हनुमान नेविनम्रिापूिक कहा- इि िमय मं अपने प्रभु को याद कर रहा हूं। आप मेरी पूजा मं विध्न मि िातलए। आप मेरे ाआदरणीय है । कृ पा करक आप यहा िे िले जाइए। े जब शतन दे ि लड़ने पर उिर आए, िो हनुमान जी ने अपनी पूंछ मं लपेटना शुरू कर फदया। फफर उडहे किनाप्रारं भ कर फदया जोर लगाने पर भी शतन उि बंधन िे मुि न होकर पीड़ा िे व्याकल होने लगे। हनुमान ने फफर िेिु ुकी पररक्रमा कर शतन क घमंि को िोड़ने क तलए पत्थरो पर पूंछ को झटका दे -दे कर पटकना शुरू कर फदया। इििे े ेशतन का शरीर लहुलहान हो गया, स्जििे उनकी पीड़ा बढ़िी गई। िब शतन दे ि ने हनुमान जी िे प्राथाना की फक मुझे ुबधंन मुि कर दीस्जए। मं अपने अपराध की िजा पा िुका हूँ, फफर मुझिे ऐिी गलिी नही होगी।इि पर हनुमान जी बोले-मं िुम्हे िभी छोिू ं गा, जब िुम मुझे ििन दोगे फक श्री राम क भि को कभी परे शान नही ेकरोगे। यफद िुमने ऐिा फकया, िो मं िुम्हं कठोर दं ि दं गा। शतन ने तगड़तगड़ाकर कहा -मं ििन दे िा हूं फक कभी ूभूलकर भी आपक और श्री राम क भि की रातश पर नही आऊगा। आप मुझे छोड़ दं । िभी हनुमान जी ने शतनदे ि को े े ँछोड़ फदया। फफर हनुमान जी िे शतनदे ि ने अपने घािो की पीड़ा तमटाने क तलए िेल मांगा। हनुमान जी ने जो िेल ेफदया, उिे घाि पर लगािे ही शतन दे ि की पीड़ा तमट गई। उिी फदन िे शतनदे ि को िेल िढ़ाया जािा हं , स्जििे उनकीपीिा शांि हो जािी हं और िे प्रिडन हो जािे हं । श्री हनुमान यंिशास्त्रं मं उल्लेख हं की श्री हनुमान जी को भगिान िूयदेि ने ब्रह्मा जी क आदे श पर हनुमान जी को अपने िेज का ा ेिौिाँ भाग प्रदान करिे हुए आशीिााद प्रदान फकया था, फक मं हनुमान को िभी शास्त्र का पूणा ज्ञान दँ गा। स्जििे यह ूिीनोलोक मं ििा श्रेष्ठ ििा हंगे िथा शास्त्र विद्या मं इडहं महारि हातिल होगी और इनक िमन बलशाली और कोई ेनहीं होगा। जानकारो ने मिानुशार हनुमान यंि की आराधना िे पुरुषं की वितभडन बीमाररयं दर होिी हं , इि यंि मं ूअद्भि शवि िमाफहि होने क कारण व्यवि की स्िप्न दोष, धािु रोग, रि दोष, िीया दोष, मूछाा, नपुंिकिा इत्याफद अनेक ु ेप्रकार क दोषो को दर करने मं अत्यडि लाभकारी हं । अथााि यह यंि पौरुष को पुष्ट करिा हं । श्री हनुमान यंि व्यवि े ूको िंकट, िाद-वििाद, भूि-प्रेि, द्यूि फक्रया, विषभय, िोर भय, राज्य भय, मारण, िम्मोहन स्िंभन इत्याफद िे िंकटो िेरिा करिा हं और तिवद्ध प्रदान करने मं ििम हं ।श्री हनुमान यंि क विषय मं अतधक जानकारी क तलये गुरुत्ि कायाालय मं िंपक करं । मूल्य Rs- 730 िे 10900 िक े े ाGURUTVA KARYALAY, Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785
    • 44 अप्रेल 2012 ििा तिवद्धदायक हनुमान मडि  विजय ठाकुर श्री राम भि हनुमान जी क इि मंि क प्रयोग िे िाधक को िभी प्रकार क शुभ कायं को तनस्श्चि िफलिा प्राप्त होिी हं । े े ेविद्विानो क मिानुशार मंि को तिद्ध करने क तलए फकिी हनुमान जी क मस्डदर मं या फकिी एकांि स्थान का ियन करक, े े े ेहनुमान जी क विग्रह का पंिोपिार पूजन करं और शुद्ध घी का दीप जला कर बेिन क लड्िू का भोग लगा कर इि मंि का जप े ेकरं ।हनुमान मंि:ॐ नमो हनुमिे ििाग्रहान भूि भविष्यद्-ििामानान दरस्थ िमीपस्यान तछं तध तछं तध तभंतध तभंतध ििाकाल दष्ट ू ुबुद्धानुच्िाट्योच्िाट्य परबलान ् िोभय िोभय मम ििाकायाास्ण िाधय िाधय । ॐ नमो हनुमिे ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं फट्। दे फह ॐ तशितिवद्ध ॐ । ह्रां ॐ ह्रीं ॐ ह्रूं ॐ ह्रः स्िाहा।नोट: काया तिद्ध ले उि मंि का ग्यारह फदन िक प्रतिफदन एक माला जप करं जप पूणा होने पर इिी मंि िे वितधिि दशमांशहिन करं ।विद्वानो का कथन हं की उि प्रयोग िे िाधक क िभी अतभष्ट कायं की तिवद्ध होिी हं । उिक कायं मं आने िाली वितभडन े ेपरे शानीया स्ििः दर होने लगिी हं । ूश्री महािीर मंि:हनुमान जी क ध्यान मंि का उप करक महािीर मंि का 22 हजार जप करने का विधान हं । जप पूणा होने पर कले और आम क े े े ेफलं िे वितधिि हिन करं । हिन पूणा होने पर 22 ब्रह्मिाररयं को भोजन कराना िाफहए । इि िाधना िे भगिान महािीरप्रिडन होिे हं और आधक को तिवद्ध प्रदान करिे हं ।ध्यान मंि: रामेष्टतमिम ् जगदे किीरम ् प्लिंगराजेडद्रकृ ि प्रणामम ् । िुमेरु शटडगागमतिडियामाद्यम ् हृफद स्मेरहम ् हनुमडिमीड्यम ् ।।महािीर मंि: ॐ ह्रं हस्े ख्े हस्त्रं हस्ख्फ हिं हनुमिे नमः। ं ं ं ििा कामना पूरक हनुमान माला मडि:ििा कामना पूरक हनुमान माला मडि को शुभ मुहूिा मं कमकम अथिा गोरोिन िे भोजपि पर तलख कर विधान क िाथ पूजन ु ु ेकरक यडि अथााि िाविज मं रख कर धारण करने िे नज़र टोना-टोटका भूि-प्रेि आफद बाधाएं शांि हो जािी हं । इि मंि का ेजप िथा हिन करने िे भी शांति प्राप्त होिी हं ।
    • 45 अप्रेल 2012हनुमान जी की मूतिा या तिि क िम्मुख इि मंि क 51 पाठ करं , इि मंि को भोजपि पर तलखकर पाि मं रखने िे िाधक को े ेिभी शुभ कायं मं िफलिा तमलिी हं ।माला मंि:ॐ िज्र-काय िज्र िुण्ि कवपल वपंगल ऊध्िा-कश महािीर िुरि मुख िफिस्ज्जह्व महा-रौद्र दं ष्ट्रोत्कट कह कह करातलने महा दृढ़ ेप्रहाररन लडकिर िधाय महा िेिु बंध महा शैल प्रिाह गगने िर एह्येफहं भगिडमहा बल पराक्रम भैरिाज्ञापय एह्येफह महारौद्र दीघा ेपुच्छे न िेष्टय िैररणम ् भडजय भडजय हुँ फट् ।।उदर व्यातधनाशक हनुमन मंि:मंि: ॐ यो यो हनुमडि फलफतलि धग्धतगि आयुराषः परुिाह ।उि मडि क प्रतिफदन 11 बार पाठ करने िे, जफटल पेट क रोग भी शांि हो जािे हं । े ेश्री हनुमद् मंिइि मंि का प्रतिफदन एक माल (108 बार) जप करने िे तिवद्ध प्राप्त होिी है -श्री हनुमद् मंि:ॐ एं ह्रीं हनुमिे रामदिाय लंका विध्िंिनपायांनीगभािंभूिाय शाफकनी िाफकनी विध्िंिनाय फकतल फकतल बुिुकरे ण विभीषणाय ूहनुमद्दे िाय ॐ ह्रीं श्रीं ह्रं ह्रां फट् स्िाहा। द्वादश  यंि महा ु ा े े  यंि को अति प्रातिन एिं दलभ यंिो क िंकलन िे हमारे िषो क अनुिंधान द्वारा बनाया गया हं ।  परम दलभ िशीकरण यंि, ु ा  िहस्त्रािी लक्ष्मी आबद्ध यंि   भाग्योदय यंि  आकस्स्मक धन प्रातप्त यंि  मनोिांतछि काया तिवद्ध यंि  पूणा पौरुष प्रातप्त कामदेि यंि   राज्य बाधा तनिृवत्त यंि  रोग तनिृवत्त यंि   गृहस्थ िुख यंि  िाधना तिवद्ध यंि   शीघ्र वििाह िंपडन गौरी अनंग यंि  शिु दमन यंि   उपरोि िभी यंिो को द्वादश महा यंि क रुप मं शास्त्रोि वितध-विधान िे मंि तिद्ध पूणा प्राणप्रतिवष्ठि एिं िैिडय युि फकये े  जािे हं । स्जिे स्थापीि कर वबना फकिी पूजा अिाना-वितध विधान विशेष लाभ प्राप्त कर िकिे हं । GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785  Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
    • 46 अप्रेल 2012 हनुमान आराधना क प्रमुख तनयम े  पं. श्री भगिानदाि वििेदी जी, िंफदप शमाा हनुमान जी शीघ्र प्रिडन होने िाले दे ििा हं , जो अति की विदे शं मं भी कोई कमी नहीं हं । हनुमान जी केिरलिा िे अल्प पूजन िे ही प्रिडन हो जािे हं । यािा मंफदर तनकटिम िभी जगय स्स्थि होने क काराण ेक दौरान हनुमान जी क नाम माि िे िमस्ि िंकटो का े े हनुमान जी िक पहूँि ने मं उनक भिं को अतधक ेतनिारण हो जािा हं । कफठनाई भी नहीं आिी है । इि तलये िो हनुमान िालीिा मं आिा हं की "िंकट  मनुष्य का िबिे बड़ा शिु उिका भय होिा हं , ु िं हनुमान छड़ािै। मन क्रम बिन ध्यान जो लािै॥ " हनुमान जी की आराधना करने िाले भिो को िंिार हनुमान जी क ध्यान मनन माि िे े क िकल भयो िे मुवि तमलिी हं । े “परस्त्री-परपुरुष मं िंकटो का तनिारण हो जािा हं ।  हनुमान जी की आराधना शुद्धिा आिि, िािना या स्िाथा बजरं ग बाण मं भी आिा हं , की एिं पविििा िे करना अतनिाया हं । पूतिा करने िाले पर कभी "उर प्रिीति दृढ़, िरन ह्वै , पाठ करै  हनुमान जी को प्रिाद मं शुद्ध घी इष्ट कृ पा नहीं होिी। िरन की बनी तमठाई िढानी िाफहए। धरर ध्यान। बाधा िब हर, करं िब उि व्यवि क पूिा काल क े े  यफद घर मं हनुमान प्रतिमा काम िफल हनुमान॥" हनुमान जी अस्जाि पूण्य का भी नाश स्थावपि की हं िो उिे तिल क िेल मं े क स्मरण माि िे ही िाधक की े हो जािा हं । इि बाि का तमल हुए तिंदर का लेपन करना िाफहए ू अनेक परे शानीयां एिं िंकटो का प्रत्यि उदाहरण रािण हं , और यफद घर मं मूतिा नहीं हं िो फकिी तनिारण हो जािा हं , इि मं जरा स्जिे िभी तिवद्धया प्राप्त मंफदर मं िेल और तिंदर को हनुमाजी ू भी िंशय नहीं हं । होिे हुिे भी परस्त्री की पर िढाने क तलए भेट कर िकिे हं । े जो िाधक पूणा वितध-विधान िे कामना क कारण उिकी े  परस्त्री-परपुरुष मं आिि, िािना हनुमान जी की आराधना कर कृ पा िमस्ि तिवद्धयां नष्ट हो या स्िाथा पूतिा करने िाले पर कभी इष्ट प्राप्त करना िाहिे हं उनक तलए े कृ पा नहीं होिी। िरन उि व्यवि क पूिा े गई।” प्रस्िुि हं कछ उपयोगी िुझाि.. ु काल क अस्जाि पूण्य का भी नाश हो े ििामान युग मं हनुमान जी की आराधना ित्काल जािा हं । इि तलए हनुमान जी की कृ पा प्रातप्त की फल दे ने िाली हं । इच्छा रखने िाले को परस्त्री- पर पुरुष की कामना या इिी तलये हनुमान जी जन-जन क दे ि माने जािे हं । े िंगति का त्याग कर क अपनी पत्नी या पति क प्रति े े इि बाि का यहीं प्रमाण हं की भारि क हर छोटे बिे े िफादार रहना िाफहए। इि बाि का प्रत्यि उदाहरण शहर-गाँि मं हनुमान जी का मंफदर अिश्य दे खने को रािण हं , स्जिे िभी तिवद्धया प्राप्त होिे हुिे भी परस्त्री तमल जािा हं । भारि मं ही क्यं विदे शं मं भी की कामना क कारण उिकी िमस्ि तिवद्धयां नष्ट हो े हनुमान जी क मंफदर पाये जािे हं , और उनक भिो े े गई।
    • 47 अप्रेल 2012 हनुमान जी को लाल, पीले बड़े फल अवपाि करने ू  जानकारो क मि िे हनुमाजी क मडि जप क तलए े े े िाफहए जैिे कमल, गंदे, िूयमुखी क फल अवपाि ा े ू िास्त्िक काया क तलए रुद्राि का प्रयोग उत्तम होिा हं े करने पर हनुमान जी शीघ्र प्रिडन होिे हं । हनुमान और पराक्रमी कायं या िामिी कायं क तलए मूंगे की े जी को आंकड़े (आंक) क फल भी वप्रय हं , इि तलए े ू माला उत्तम फलदायक होिी हं । कई जगह हनुमानजी को आंकड़े (आंक) क फल े ू  हनुमान जी की आराधना पूणा आस्था, श्रद्धा और िेिा अवपाि फकये जािे हं । भाि िे करनी िाफहए। पूजन मं नैिेद्य क रुप मं हनुमानजी को प्रािः मं गुड़, े  हनुमान जी का फदन मंगलिार है । इि फदन की जाने नाररयल का गोला और लिू का प्रिाद अपाण करना िाली विशेष पूजा-अिाना, व्रि-उपिाि या िाधना भी िाफहए, दोपहर क िमय मं गुड़, घी और गेहूं की े विशेष फलप्रद होिी हं । रोटी का िूरमा का प्रिाद अवपाि करना िाफहए। रावि  मंगलिार क अलािा शतनिार को भी हनुमान पूजा का े मं आम, अमरूद, कला आफद फलं का प्रिाद अवपाि े विधान शास्त्रं मं तमलिा हं । करने िाफहए।  हनुमान जी क पूजन िे ग्रहं का अशुभ प्रभाि कम े हनुमान जी की फकिी िाधना विशेष या व्रि-उपिाि हो जािा हं । क दौरान ब्रह्मिया का अिश्य पालन करना िाफहए। े  इितलए हनुमान िाधना करने िाले िाधकं मं िूया हनुमान जी को नैिेद्य मै अवपाि फकया गया प्रिाद ित्ि अथााि आत्मवििाि, ओज, िेजस्स्ििा आफद भि को ग्रहण करना िाफहए। विशेष रूप िे आ जािे हं । यह िेज ही िाधकं को मंि जप करिे िमय हनुमान जी की प्रतिमा या तिि िामाडय व्यवियं िे अलग करिा है । क िमि उनक नेिं की ओर दे खिे हुए मंिं क जप े े े  हनुमान आराधना क कछ विशेष तनयमं का पालन े ु करना अत्यंि लाभदायक होिा हं । कर क विशेष लाभ प्राप्त हो िकिे हं । े कनकधारा यंिआज क युग मं हर व्यवि अतिशीघ्र िमृद्ध बनना िाहिा हं । धन प्रातप्त हे िु प्राण-प्रतिवष्ठि कनकधारा यंि क िामने े ेबैठकर कनकधारा स्िोि का पाठ करने िे विशेष लाभ प्राप्त होिा हं । इि कनकधारा यंि फक पूजा अिाना करने िे ऋणऔर दररद्रिा िे शीघ्र मुवि तमलिी हं । व्यापार मं उडनति होिी हं , बेरोजगार को रोजगार प्रातप्त होिी हं । श्री आफदशंकरािाया द्वारा कनकधारा स्िोि फक रिना कछ इि प्रकार फक हं , स्जिक श्रिण एिं पठन करने िे आि-पाि क ु े ेिायुमंिल मं विशेष अलौफकक फदव्य उजाा उत्पडन होिी हं । फठक उिी प्रकार िे कनकधारा यंि अत्यंि दलभ यंिो मं िे ु ाएक यंि हं स्जिे मां लक्ष्मी फक प्रातप्त हे िु अिूक प्रभािा शाली माना गया हं । कनकधारा यंि को विद्वानो ने स्ियंतिद्धिथा िभी प्रकार क ऐिया प्रदान करने मं िमथा माना हं । जगद्गरु शंकरािाया ने दररद्र ब्राह्मण क घर कनकधारा स्िोि क े ु े ेपाठ िे स्िणा िषाा कराने का उल्लेख ग्रंथ शंकर फदस्ग्िजय मं तमलिा हं ।कनकधारा मंि:- ॐ िं श्रीं िं ऐं ह्रीं-श्रीं क्लीं कनक धारयै स्िाहा मूल्य: Rs.730 िे Rs.10900 िक गुरुत्ि कायाालय िंपक : ा 91+ 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
    • 48 अप्रेल 2012 स्ियंप्रभा ने की रामदि हनुमान की िहायिा? ू  स्िस्स्िक.ऎन.जोशी माँ िीिा की खोज करिे-करिे हनुमान, जाम्बंि, अंगद आफद स्ियंप्रभा क आश्रम मं पहुँिे। उडहं जोरं की भूख ेऔर प्याि लगी थी। उडहं दे खकर स्ियंप्रभा ने पूछा फकः क्या िुम हनुमान हो? श्रीरामजी क दि हो? िीिा जी की े ूखोज मं तनकले हो?" हनुमानजी ने कहाः "हाँ, माँ! हम िीिा मािा की खोज मं इधर िक आये हं ।" फफर स्ियंप्रभा ने अंगद की ओर दे खकर कहाः िुम िीिा जी को खोज िो रहे हो, फकडिु आँखं बंद करक खोज ेरहे हो या आँखं खोलकर?" अंगद बोलाः हम क्या आँखं बडद करक खोजिे हंगे? हम िो आँखं खोलकर ही मािा िीिा की खोज कर रहे ेहं । स्ियंप्रभा बोलीः िीिाजी को खोजना है िो आँखं खोलकर नहीं बंद करक खोजना होगा। िीिा जी अथााि ् ेभगिान की अधांतगनी, िीिाजी यानी ब्रह्मविद्या, आत्मविद्या। ब्रह्मविद्या को खोजना है िो आँखं खोलकर नहीं आँखं बंदकरक ही खोजना पड़े गा। आँखं खोलकर खोजोगे िो िीिाजी नहीं तमलंगीं। िुम आँखं बडद करक ही िीिाजी (ब्रह्मविद्या) े ेको पा िकिे हो। ठहरो मं िुम्हे बिािी हूँ फक िीिा जी अभी कहाँ हं । ध्यान करक स्ियंप्रभा ने बिायाः िीिाजी यहाँ कहीं भी नहीं, िरन ् िागर पार लंका मं हं । अशोकिाफटका मं बैठी ेहं और राितियं िे तघरी हं । उनमं विजटा नामक राििी हं िो रािण की िेविका, फकडिु िीिाजी की भि बन गयी है ।िीिाजी िहीं रहिी हं ।" रामदि िानर िोिने लगे फक भगिान राम ने िो एक महीने क अंदर िीिा मािा का पिा लगाने क तलए कहा ू े ेथा। अभी िीन िप्ताह िे ज़्यादा िमय िो यहीं हो गया हं । िापि क्या मुह लेकर जाएँ? िागर िट िक पहुँििे-पहुँििे ँकई फदन लग जाएँगे। अब क्या करं ? उनक मन की बाि जानकर स्ियंप्रभा ने कहाः तिडिा मि करो। अपनी आँखं बंद करो। मं योगबल िे एक िण ेमं िुम्हं िहाँ पहुँिा दे िी हूँ। हनुमान, अंगद और अडय िानर अपनी आँखं बडद करिे हं और स्ियंप्रभा अपनी योगशवि िे उडहं िागर-िटपर कछ ही पल मं पहुँिा दे िी हं । ु इि तलये श्रीरामिररिमानि मं उल्लेख हं । ठाड़े िकल तिंधु क िीरा। े स्फफटक गणेश स्फफटक ऊजाा को कफद्रि करने मं िहायिा मानागया हं । इि क प्रभाि िे यह व्यवि को ं े नकारात्मक उजाा िे बिािा हं एिं एक उत्तम गुणित्ता िाले स्फफटक िे बनी गणेश प्रतिमा को और अतधक प्रभािी और पविि माना जािा हं । RS-550 िे RS-8200 िक
    • 49 अप्रेल 2012 मंि तिद्ध विशेष दै िी यंि िूतिआद्य शवि दगाा बीिा यंि (अंबाजी बीिा यंि) ु िरस्ििी यंिमहान शवि दगाा यंि (अंबाजी यंि) ु िप्तििी महायंि(िंपूणा बीज मंि िफहि)नि दगाा यंि ु काली यंिनिाणा यंि (िामुंिा यंि) श्मशान काली पूजन यंिनिाणा बीिा यंि दस्िण काली पूजन यंििामुंिा बीिा यंि ( निग्रह युि) िंकट मोतिनी कातलका तिवद्ध यंिविशूल बीिा यंि खोफियार यंिबगला मुखी यंि खोफियार बीिा यंिबगला मुखी पूजन यंि अडनपूणाा पूजा यंिराज राजेिरी िांछा कल्पलिा यंि एकांिी श्रीफल यंि मंि तिद्ध विशेष लक्ष्मी यंि िूतिश्री यंि (लक्ष्मी यंि) महालक्ष्मयै बीज यंिश्री यंि (मंि रफहि) महालक्ष्मी बीिा यंिश्री यंि (िंपूणा मंि िफहि) लक्ष्मी दायक तिद्ध बीिा यंिश्री यंि (बीिा यंि) लक्ष्मी दािा बीिा यंिश्री यंि श्री िूि यंि लक्ष्मी गणेश यंिश्री यंि (कमा पृष्ठीय) ु ज्येष्ठा लक्ष्मी मंि पूजन यंिलक्ष्मी बीिा यंि कनक धारा यंिश्री श्री यंि (श्रीश्री लतलिा महाविपुर िुडदयै श्री महालक्ष्मयं श्री महायंि) िैभि लक्ष्मी यंि (महान तिवद्ध दायक श्री महालक्ष्मी यंि)अंकात्मक बीिा यंि िाम्र पि पर िुिणा पोलीि िाम्र पि पर रजि पोलीि िाम्र पि पर (Gold Plated) (Silver Plated) (Copper) िाईज मूल्य िाईज मूल्य िाईज मूल्य 1” X 1” 460 1” X 1” 370 1” X 1” 255 2” X 2” 820 2” X 2” 640 2” X 2” 460 3” X 3” 1650 3” X 3” 1090 3” X 3” 730 4” X 4” 2350 4” X 4” 1650 4” X 4” 1090 6” X 6” 3600 6” X 6” 2800 6” X 6” 1900 9” X 9” 6400 9” X 9” 5100 9” X 9” 3250 12” X12” 10800 12” X12” 8200 12” X12” 6400यंि क विषय मं अतधक जानकारी हे िु िंपक करं । े ा GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
    • 50 अप्रेल 2012 रातश रत्न मूंगा हीरा पडना मोिी माणेक पडना Red Coral Diamond Green Emerald Naturel Pearl Ruby Green Emerald (Special) (Special) (Old Berma) (Special) (Special) (Special) (Special)5.25" Rs. 1050 10 cent Rs. 4100 5.25" Rs. 9100 5.25" Rs. 910 2.25" Rs. 12500 5.25" Rs. 91006.25" Rs. 1250 20 cent Rs. 8200 6.25" Rs. 12500 6.25" Rs. 1250 3.25" Rs. 15500 6.25" Rs. 125007.25" Rs. 1450 30 cent Rs. 12500 7.25" Rs. 14500 7.25" Rs. 1450 4.25" Rs. 28000 7.25" Rs. 145008.25" Rs. 1800 40 cent Rs. 18500 8.25" Rs. 19000 8.25" Rs. 1900 5.25" Rs. 46000 8.25" Rs. 190009.25" Rs. 2100 50 cent Rs. 23500 9.25" Rs. 23000 9.25" Rs. 2300 6.25" Rs. 82000 9.25" Rs. 2300010.25" Rs. 2800 10.25" Rs. 28000 10.25" Rs. 2800 10.25" Rs. 28000 All Diamond are Full** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati White Colour. िुला रातश: िृस्श्चक रातश: धनु रातश: मकर रातश: कभ रातश: ुं मीन रातश: हीरा मूंगा पुखराज नीलम नीलम पुखराज Diamond Red Coral Y.Sapphire B.Sapphire B.Sapphire Y.Sapphire (Special) (Special) (Special) (Special) (Special) (Special)10 cent Rs. 4100 5.25" Rs. 1050 5.25" Rs. 30000 5.25" Rs. 30000 5.25" Rs. 30000 5.25" Rs. 3000020 cent Rs. 8200 6.25" Rs. 1250 6.25" Rs. 37000 6.25" Rs. 37000 6.25" Rs. 37000 6.25" Rs. 3700030 cent Rs. 12500 7.25" Rs. 1450 7.25" Rs. 55000 7.25" Rs. 55000 7.25" Rs. 55000 7.25" Rs. 5500040 cent Rs. 18500 8.25" Rs. 1800 8.25" Rs. 73000 8.25" Rs. 73000 8.25" Rs. 73000 8.25" Rs. 7300050 cent Rs. 23500 9.25" Rs. 2100 9.25" Rs. 91000 9.25" Rs. 91000 9.25" Rs. 91000 9.25" Rs. 91000 10.25" Rs. 2800 10.25" Rs.108000 10.25" Rs.108000 10.25" Rs.108000 10.25" Rs.108000All Diamond are Full ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati White Colour.* उपयोि िजन और मूल्य िे अतधक और कम िजन और मूल्य क रत्न एिं उपरत्न भी हमारे यहा व्यापारी मूल्य पर ेउप्लब्ध हं । GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
    • 51 अप्रेल 2012 मंि तिद्ध रूद्राि Rate In Rate In Rudraksh List Rudraksh List Indian Rupee Indian Rupeeएकमुखी रूद्राि (इडिोनेतशया) 2800, 5500 आठ मुखी रूद्राि (नेपाल) 820,1250एकमुखी रूद्राि (नेपाल) 750,1050, 1250, आठ मुखी रूद्राि (इडिोनेतशया) 1900दो मुखी रूद्राि (हररद्रार, रामेिर) 30,50,75 नौ मुखी रूद्राि (नेपाल) 910,1250दो मुखी रूद्राि (नेपाल) 50,100, नौ मुखी रूद्राि (इडिोनेतशया) 2050दो मुखी रूद्राि (इडिोनेतशया) 450,1250 दि मुखी रूद्राि (नेपाल) 1050,1250िीन मुखी रूद्राि (हररद्रार, रामेिर) 30,50,75, दि मुखी रूद्राि (इडिोनेतशया) 2100िीन मुखी रूद्राि (नेपाल) 50,100, ग्यारह मुखी रूद्राि (नेपाल) 1250,िीन मुखी रूद्राि (इडिोनेतशया) 450,1250, ग्यारह मुखी रूद्राि (इडिोनेतशया) 2750,िार मुखी रूद्राि (हररद्रार, रामेिर) 25,55,75, बारह मुखी रूद्राि (नेपाल) 1900,िार मुखी रूद्राि (नेपाल) 50,100, बारह मुखी रूद्राि (इडिोनेतशया) 2750,पंि मुखी रूद्राि (नेपाल) 25,55, िेरह मुखी रूद्राि (नेपाल) 3500, 4500,पंि मुखी रूद्राि (इडिोनेतशया) 225, 550, िेरह मुखी रूद्राि (इडिोनेतशया) 6400,छह मुखी रूद्राि (हररद्रार, रामेिर) 25,55,75, िौदह मुखी रूद्राि (नेपाल) 10500छह मुखी रूद्राि (नेपाल) 50,100, िौदह मुखी रूद्राि (इडिोनेतशया) 14500िाि मुखी रूद्राि (हररद्रार, रामेिर) 75, 155, गौरीशंकर रूद्राि 1450िाि मुखी रूद्राि (नेपाल) 225, 450, गणेश रुद्राि (नेपाल) 550िाि मुखी रूद्राि (इडिोनेतशया) 1250 गणेश रूद्राि (इडिोनेतशया) 750 रुद्राि क विषय मं अतधक जानकारी हे िु िंपक करं । े ा GURUTVA KARYALAY, 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA), Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, मंि तिद्ध दलभ िामग्री ु ा हत्था जोिी- Rs- 370 घोिे की नाल- Rs.351 माया जाल- Rs- 251 तियार तिंगी- Rs- 370 दस्िणाििी शंख- Rs- 550 इडद्र जाल- Rs- 251 वबल्ली नाल- Rs- 370 मोति शंख- Rs- 550 धन िृवद्ध हकीक िेट Rs-251 GURUTVA KARYALAY Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785, Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
    • 52 अप्रेल 2012 निरत्न जफड़ि श्री यंि शास्त्र ििन क अनुिार शुद्ध िुिणा या े रजि मं तनतमाि श्री यंि क िारं और यफद े निरत्न जड़िा ने पर यह निरत्न जफड़ि श्री यंि कहलािा हं । िभी रत्नो को उिके तनस्श्चि स्थान पर जड़ कर लॉकट क रूप े े मं धारण करने िे व्यवि को अनंि एिया एिं लक्ष्मी की प्रातप्त होिी हं । व्यवि को एिा आभाि होिा हं जैिे मां लक्ष्मी उिके िाथ हं । निग्रह को श्री यंि क िाथ े . लगाने िे ग्रहं की अशुभ दशा का . धारणकरने िाले व्यवि पर प्रभाि नहीं होिा हं ।गले मं होने क कारण यंि पविि रहिा हं एिं स्नान करिे िमय इि यंि पर स्पशा कर जो ेजल वबंद ु शरीर को लगिे हं , िह गंगा जल क िमान पविि होिा हं । इि तलये इिे िबिे ेिेजस्िी एिं फलदातय कहजािा हं । जैिे अमृि िे उत्तम कोई औषतध नहीं, उिी प्रकार लक्ष्मीप्रातप्त क तलये श्री यंि िे उत्तम कोई यंि िंिार मं नहीं हं एिा शास्त्रोि ििन हं । इि प्रकार ेक निरत्न जफड़ि श्री यंि गुरूत्ि कायाालय द्वारा शुभ मुहूिा मं प्राण प्रतिवष्ठि करक बनािाए े ेजािे हं ।अतधक जानकारी हे िु िंपक करं । ा GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
    • 53 अप्रेल 2012 ििा काया तिवद्ध कििस्जि व्यवि को लाख प्रयत्न और पररश्रम करने क बादभी उिे मनोिांतछि िफलिाये एिं फकये गये काया ेमं तिवद्ध (लाभ) प्राप्त नहीं होिी, उि व्यवि को ििा काया तिवद्ध किि अिश्य धारण करना िाफहये।किि क प्रमुख लाभ: ििा काया तिवद्ध किि क द्वारा िुख िमृवद्ध और नि ग्रहं क नकारात्मक प्रभाि को े े ेशांि कर धारण करिा व्यवि क जीिन िे ििा प्रकार क द:ख-दाररद्र का नाश हो कर िुख-िौभाग्य एिं े े ुउडनति प्रातप्त होकर जीिन मे ितभ प्रकार क शुभ काया तिद्ध होिे हं । स्जिे धारण करने िे व्यवि यफद ेव्यििाय करिा होिो कारोबार मे िृवद्ध होति हं और यफद नौकरी करिा होिो उिमे उडनति होिी हं ।  ििा काया तिवद्ध किि क िाथ मं ििाजन िशीकरण किि क तमले होने की िजह िे धारण करिा े े की बाि का दिरे व्यविओ पर प्रभाि बना रहिा हं । ू  ििा काया तिवद्ध किि क िाथ मं अष्ट लक्ष्मी किि क तमले होने की िजह िे व्यवि पर मां महा े े िदा लक्ष्मी की कृ पा एिं आशीिााद बना रहिा हं । स्जस्िे मां लक्ष्मी क अष्ट रुप (१)-आफद े लक्ष्मी, (२)-धाडय लक्ष्मी, (३)-धैरीय लक्ष्मी, (४)-गज लक्ष्मी, (५)-िंिान लक्ष्मी, (६)-विजय लक्ष्मी, (७)-विद्या लक्ष्मी और (८)-धन लक्ष्मी इन िभी रुपो का अशीिााद प्राप्त होिा हं ।  ििा काया तिवद्ध किि क िाथ मं िंि रिा किि क तमले होने की िजह िे िांविक बाधाए दर े े ू होिी हं , िाथ ही नकारत्मन शवियो का कोइ कप्रभाि धारण किाा व्यवि पर नहीं होिा। इि ु किि क प्रभाि िे इषाा-द्वे ष रखने िाले व्यविओ द्वारा होने िाले दष्ट प्रभािो िे रिाहोिी हं । े ु  ििा काया तिवद्ध किि क िाथ मं शिु विजय किि क तमले होने की िजह िे शिु िे िंबंतधि े े िमस्ि परे शातनओ िे स्ििः ही छटकारा तमल जािा हं । किि क प्रभाि िे शिु धारण किाा ु े व्यवि का िाहकर कछ नही वबगि िकिे। ुअडय किि क बारे मे अतधक जानकारी क तलये कायाालय मं िंपक करे : े े ाफकिी व्यवि विशेष को ििा काया तिवद्ध किि दे ने नही दे ना का अंतिम तनणाय हमारे पाि िुरस्िि हं । GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
    • 54 अप्रेल 2012 जैन धमाक वितशष्ट यंिो की िूिी ेश्री िौबीि िीथंकरका महान प्रभाविि िमत्कारी यंि श्री एकािी नाररयेर यंिश्री िोबीि िीथंकर यंि ििािो भद्र यंिकल्पिृि यंि ििा िंपवत्तकर यंितिंिामणी पािानाथ यंि ििाकाया-ििा मनोकामना तिवद्धअ यंि (१३० ििािोभद्र यंि)तिंिामणी यंि (पंिफठया यंि) ऋवष मंिल यंितिंिामणी िक्र यंि जगदिल्लभ कर यंिश्री िक्रिरी यंि े ऋवद्ध तिवद्ध मनोकामना मान िम्मान प्रातप्त यंिश्री घंटाकणा महािीर यंि ऋवद्ध तिवद्ध िमृवद्ध दायक श्री महालक्ष्मी यंिश्री घंटाकणा महािीर ििा तिवद्ध महायंि विषम विष तनग्रह कर यंि(अनुभि तिद्ध िंपणा श्री घंटाकणा महािीर पिका यंि) ूश्री पद्माििी यंि िुद्रो पद्रि तननााशन यंिश्री पद्माििी बीिा यंि बृहच्िक्र यंिश्री पािापद्माििी ह्रंकार यंि िंध्या शब्दापह यंिपद्माििी व्यापार िृवद्ध यंि मृिित्िा दोष तनिारण यंिश्री धरणेडद्र पद्माििी यंि कांक िंध्यादोष तनिारण यंिश्री पािानाथ ध्यान यंि बालग्रह पीिा तनिारण यंिश्री पािानाथ प्रभुका यंि लधुदेि कल यंि ुभिामर यंि (गाथा नंबर १ िे ४४ िक) निगाथात्मक उििग्गहरं स्िोिका वितशष्ट यंिमस्णभद्र यंि उििग्गहरं यंिश्री यंि श्री पंि मंगल महाश्रृि स्कध यंि ंश्री लक्ष्मी प्रातप्त और व्यापार िधाक यंि ह्रींकार मय बीज मंिश्री लक्ष्मीकर यंि िधामान विद्या पट्ट यंिलक्ष्मी प्रातप्त यंि विद्या यंिमहाविजय यंि िौभाग्यकर यंिविजयराज यंि िाफकनी, शाफकनी, भय तनिारक यंिविजय पिका यंि भूिाफद तनग्रह कर यंिविजय यंि ज्िर तनग्रह कर यंितिद्धिक्र महायंि शाफकनी तनग्रह कर यंिदस्िण मुखाय शंख यंि आपवत्त तनिारण यंिदस्िण मुखाय यंि शिुमख स्िंभन यंि ुयंि क विषय मं अतधक जानकारी हे िु िंपक करं । े ा GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
    • 55 अप्रेल 2012 घंटाकणा महािीर ििा तिवद्ध महायंि को स्थापीि करने िे िाधक की ििा मनोकामनाएं पूणा होिी हं । ििा प्रकार क रोग भूि-प्रेि आफद उपद्रि िे रिण होिा हं । े जहरीले और फहं िक प्राणीं िे िंबतधि भय दर होिे हं । ं ू अस्ग्न भय, िोरभय आफद दर होिे हं । ू दष्ट ि अिुरी शवियं िे उत्पडन होने िाले भय ु िे यंि क प्रभाि िे दर हो जािे हं । े ू यंि क पूजन िे िाधक को धन, िुख, िमृवद्ध, े ऎिया, िंिवत्त-िंपवत्त आफद की प्रातप्त होिी हं । िाधक की िभी प्रकार की िास्त्िक इच्छाओं की पूतिा होिी हं । यफद फकिी पररिार या पररिार क िदस्यो पर े िशीकरण, मारण, उच्िाटन इत्याफद जाद-टोने िाले ू प्रयोग फकये गयं होिो इि यंि क प्रभाि िे स्ििः नष्ट े हो जािे हं और भविष्य मं यफद कोई प्रयोग करिा हं िो रिण होिा हं । कछ जानकारो क श्री घंटाकणा महािीर पिका ु े यंि िे जुिे अद्भद्भि अनुभि रहे हं । यफद घर मं श्री ु घंटाकणा महािीर पिका यंि स्थावपि फकया हं और यफद कोई इषाा, लोभ, मोह या शिुिािश यफद अनुतिि कमाकरक फकिी भी उदे श्य िे िाधक को परे शान करने का प्रयाि करिा हं िो यंि क प्रभाि िे िंपणा े े ूपररिार का रिण िो होिा ही हं , कभी-कभी शिु क द्वारा फकया गया अनुतिि कमा शिु पर ही उपर ेउलट िार होिे दे खा हं । मूल्य:- Rs. 1650 िे Rs. 10900 िक उप्लब्द्ध िंपक करं । GURUTVA KARYALAY ा Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
    • 56 अप्रेल 2012 अमोद्य महामृत्युंजय कििअमोद्य् महामृत्युंजय किि ि उल्लेस्खि अडय िामग्रीयं को शास्त्रोि वितध-विधान िे विद्वानब्राह्मणो द्वारा ििा लाख महामृत्युजय मंि जप एिं दशांश हिन द्वारा तनतमाि किि अत्यंि ंप्रभािशाली होिा हं । अमोद्य् महामृत्युंजय किि अमोद्य् महामृत्युंजय किि बनिाने हे िु: अपना नाम, वपिा-मािा का नाम, किि गोि, एक नया फोटो भेजे दस्िणा माि: 10900 राशी रत्न एिं उपरत्न विशेष यंि हमारं यहां िभी प्रकार क यंि िोने-िांफद- े िाम्बे मं आपकी आिश्यिा क अनुशार े फकिी भी भाषा/धमा क यंिो को आपकी े आिश्यक फिजाईन क अनुशार २२ गेज े शुद्ध िाम्बे मं अखंफिि बनाने की विशेष िभी िाईज एिं मूल्य ि क्िातलफट के िुविधाएं उपलब्ध हं । अिली निरत्न एिं उपरत्न भी उपलब्ध हं ।हमारे यहां िभी प्रकार क रत्न एिं उपरत्न व्यापारी मूल्य पर उपलब्ध हं । ज्योतिष काया िे जुिे़ ेबधु/बहन ि रत्न व्यििाय िे जुिे लोगो क तलये विशेष मूल्य पर रत्न ि अडय िामग्रीया ि अडय ेिुविधाएं उपलब्ध हं । GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
    • 57 अप्रेल 2012 मातिक रातश फल  तिंिन जोशीमेष: 1 िे 15 अप्रैल 2012 : आपकी मानतिक अस्स्थिार महत्िपूणा तनणाय लेने मं विलंब कर िकिी हं स्जििे धन हानी िंभि हं । नौकरी-व्यििाय मं अत्यातधक पररश्रम एिं मेहनि क उपरांि बहुि े मुस्श्कल िे धन लाभ प्राप्त कर िकिे हं । अपनी बुवद्धमिा िे पररिार की िुख -शास्डि बनाये रखने का प्रयाि करं । आप उजाा ि उिाह की कमी महिूि करं इि तलये िकारात्मक दष्टी कोण रखे। 16 िे 30 अप्रैल 2012 : जोस्खम भरे काया करने िे बिे क्योफक आपकी लापरिाही आपको लंबे िमय का नुक्शान कर िकिी हं । अपने रुक हुए कायो को कशलिा िे पूरा े ु करने का प्रयाि करे । अपने खाने-पीने का विशेष ध्यान रखे अडयथा आपका का स्िास््यनरम हो िकिा है । पररिार और तमिं का िहयोग प्राप्त होगा। िकारात्मक दवष्ट कोण अपना कर काया करने का रिैयाअपनाये रखना उत्तम रहे गा।िृषभ: 1 िे 15 अप्रैल 2012 : पूिा काल िे रुक हुिे काया क पूणा होने िे आपको े ेआकस्स्मक धन लाभ प्राप्त हो िकिा हं । भूतम- भिन-िाहन िे िंबंतधि कायं िे लाभ प्राप्तहो िकिा हं । नौकरी-व्यििाय मं आपफकओ महत्िपूणा पद की प्रातप्त हो िकिी हं । इष्टतमिो िे लाभ प्राप्त होगा। प्रेम प्रिंगो मं भी िफलिा क योग बन रहे हं । पररिार क े ेफकिी िदस्य का स्िास््य कमजोर हो िकिा हं ।16 िे 30 अप्रैल 2012 : उच्ि अतधकारी एिं िहकमी क काया परे शानीयं िंभि हं । ेिािधान रहं । आतथाक मामलं मं िमय उिार-िढ़ाि िाला हो िकिा हं । पररिार कामाहौल िनािपूणा हो िकिा हं । बिे ़-बुजुगो िे उतिि व्यिहार बनाए रखं अडयथा ररश्िेवबगड़ िकिे हं । पाररिाररक मिभेदो को दर करने हे िु अतधक िे अतधक िमय अपने पररिार क िाथ वबिाये। ू ेतमथुन: 1 िे 15 अप्रैल 2012 : आपको एकातधक स्त्रोि िे धनलाभ प्राप्त हो िकिा हं । प्रायः आपक िभी काया िुिारु े रुप िे पूणा हंगे। आपकी काया शैली अत्यातधक िफक्रय हो जाएगी। भूतम- भिन-िाहन क क्रय-विक्रय िे लाभ प्राप्त हो िकिा हं । िंिान पि क प्रति विशेष तिंिा रह िकिी े े हं । प्रतियोतगिा क कायो मं बुवद्धमानी ि ििुरिा िे शीघ्र लाभ और िफलिा प्राप्त करं गे। े 16 िे 30 अप्रैल 2012 : आपको आकस्स्मक धन की प्रातप्त हो िकिी हं । भूतम-भिन- िाहन की प्राप्ती हो िकिी हं । ऋण क लेन-दे ने िे बिने का प्रयाि करं अडयथा धन े की पुनः प्रातप्त-भुगिान मं विलंब हो िकिा हं । फकिी िे िाद-वििाद करने िे बिे अडयथा कोटा -किहरी क िक्करं मं उलझना पि िकिा हं । अवििाह है िो वििाह होने े क योग बन रहे हं । प्रकृ ति मं बदलाि िे आपका स्िास््य नरम रह िकिा है । े
    • 58 अप्रेल 2012कक: 1 िे 15 अप्रैल 2012 : अपको नौकरी-व्यििाय िे जुिे कायो मं कड़ी मेहनि िे महत्िपूणा उपलस्ब्धयां प्राप्त हो ािकिी हं । पाररिाररक ररश्िं को बनाए रखने का विशेष प्रयाि करना पड़ िकिा हं ।आपक अतधनस्थ कमािारी ि िहकतमा आपक मनोनुकल काया नहीं करने िे आपकी े े ूतिंिाएं बढ िकिी हं । आप अपने प्रयािो क बल पर उन कायो को अिश्य पूणा कर ेिकिे हं ।16 िे 30 अप्रैल 2012 : आपको व्यििायीक कायो िे आतथाक लाभ प्राप्त हो िकिे हं ।अपने तमिं पर अंधावििाि रखने क कारण आपको फकिी प्रकार की िमस्याओं का ेिामना करना पड़ िकिा हं । अपने कायोिेि मं विशेष िािधानी रखं फकिी िे िंबंधखराब होने क योग बन रहे हं । विपरीि तलंग क प्रति आपका अतधक आकषाण आपकी मानतिक शांति छीन िकिा हं । े ेतिंह: 1 िे 15 अप्रैल 2012 : पैिक िंपवत्त या भूतम-भिन िे िंबंतधि कायो िे आपको विशेष धनलाभ प्राप्त होगा। ृ थोिे िमय क तलए उच्िातधकारी एिं िहकमीयं का विरोध िहना पड़ िकिा हं । े व्यििायीक कायो मं प्रतिस्पतधायं क कारण बाधाएं उत्पडन हो िकिी हं । नए कायो े को थोिे िमय क तलए स्थतगि करना उतिि रहे गा। दांपत्य जीिन मं थोिा िनाि े िंभि हं । 16 िे 30 अप्रैल 2012 : फकये गये पूंस्ज तनिेश द्वारा आकस्स्मक धन प्रातप्त क योग बन े रहे है । आपको महत्िपूणा काया एिं योजनाओं को पूणा करने हे िु ऋण लेना पि िकिा हं जो आपक तलए लाभदाय तिद्ध हो िकिा हं । कायािेि की िमस्याकं दर करने मं े ूआप पूणा रुप िे िमथा हंगे हं । िाणी पर तनयंिण रखं अडयथा पाररिाररक ररश्िं मं खट्टाि आिकिी हं ।कडया: 1 िे 15 अप्रैल 2012: जोस्खम भरे काया करने िे बिे। अपने महत्िपूणा कायोको कशलिा िे पूरा करने का प्रयाि करं । व्यय पर तनयडिण रखने िे लाभ प्राप्त होगा। ुपररिार क िदस्यं िे छोटी-छोटी बािं मं वििाद हो िकिे हं । ऋण दे ने िे बिं ेअडयथा धन की पुनः प्रातप्त मं विलंब हो िकिा हं । आिश्यकिा िे अतधक िंघषाकरना पि िकिा है । नये लोगो िे तमििा लाभप्रद हो िकिी हं ।16 िे 30 अप्रैल 2012 : नौकरी व्यििाय मं महत्िपूणा कायो मं िफलिा की पुनः प्रातप्तिे आपका आत्मवििाि बढे गा। भूतम- भिन-िाहन क क्रय-विक्रय िे लाभ प्राप्त हो िकिा हं । जीिन िाथी िे िाद-वििाद ेकरने िे बिे। आपक स्िास््य मं तगरािट हो िकिी हं । अल्प प्रयािो िे ही पारीिाररक जीिन मं िुधार होने लगेगा। ेमानतिक तिडिाओं मं कमी आयेगी।
    • 59 अप्रेल 2012िुला: 1 िे 15 अप्रैल 2012 : आपकी काया शैली अतधक िफक्रय हो जाएगी। आपक रुक हुए महत्िपूणा काया पूरे हो े ेिकिे हं । धन िंबंधी पूरानी िमस्याओं का िमाधान िंभि हं । अवििाह है िो वििाह होने क योग बन रहे हं । िाणी े पर तनयंिण रखे अपने वप्रय पाि िे ररश्िे वबगड़ िकिे हं । व्यय पर तनयडिण रखने िे लाभ प्राप्त होगा। िाहन िे िािधान रहे आकस्स्मक दघटना हो िकिी हं । ु ा 16 िे 30 अप्रैल 2012 : नौकरी, व्यापार, पूंजी तनिेश इत्याफद िे आकस्स्मक रुप िे धन प्रातप्त हो िकिी हं । प्रतियोतगिा क कायो मं बुवद्धमानी ि ििुरिा िे शीघ्र लाभ और े िफलिा प्राप्त करं गे। मनोनुकल जीिन िाथी फक प्रातप्त हे िु िमय उत्तम िावबि हो ू िकिा हं । शिुओं पर आपका प्रभाि रहे गा। आपक विरोधी एिं शिु पि परास्ि हंगे। ेविपरीि तलंग क प्रति आपका अतधक आकषाण रहे गा। ेिृस्श्चक: 1 िे 15 अप्रैल 2012 : नौकरी-व्यििाय मं उडनति क योग बन रहे हं । ेआकस्स्मक धन प्रातप्त क योग बनेगं स्जस्िे आतथाक स्स्थिी प्रबल होगी। आपक े ेिामास्जक मान-िम्मान और पद-प्रतिष्ठा मं िृवद्ध होगी। प्रेम िंबंतधि मामलो मंिफलिा प्राप्त होने क अच्छे योग हं । स्िास््य िुख मं िृवद्ध होगी फफर भी खाने- पीने का ेविशेष ध्यान रखना फहिकारी रहे गा।16 िे 30 अप्रैल 2012 : नौकरी-व्यििाय मं बदलाि का वििार कर िकिे है । धनलाभ केउत्तम योग बन रहे हं िाथ ही अनािश्यक खिा भी बढ़ िकिा हं । दांपत्य िुख मं िृवद्धहोगी। पररिार क िदस्यं का स्िास््य आपको तिंतिि कर िकिा हं । अवििाह है िो वििाह होने क योग बन रहे हं । े ेजीिन िाथी क िाथ व्यिहार अच्छा रखे अडयथा िमस्याओं का िामना कर िकिे हं । े धनु: 1 िे 15 अप्रैल 2012 : अपने कायािेि िे आप विशेष धनलाभ प्राप्त करने मं िफल रहं गे। यफद आप नौकरी मं हं िो पदौडनति हो िकिी हं । यफद आप अवििाफहि हं िो वििाह क बंधन मं जल्द ही बंध िकिे हं । कोटा -किहरी क कायो मं अतिररि े े िािधानी बरिे। पररिार क फकिी िदस्य का स्िास््य कमजोर हो िकिा हं । जीिन े िाथी क पूणा िहयोग िे दांपत्य जीिन मं मधुरिा आएगी। े 16 िे 30 अप्रैल 2012 : पूंस्ज तनिेश िे िंबंतधि कायो मं विशेष िफलिा प्राप्त कर िकिे हं । आपको लंबे िमय िे रुका हुिा भुगिान प्राप्त हो िकिा हं । भूतम-भिन केक्रय विक्रय िे धन लाभ होगा। अपनी अतधक खिा करने फक प्रिृवत्त पर तनयंिण करने का प्रयाि करं । पररिार मंखुतशयो का माहोल रहे गा और पररिार मं फकिी नये िदस्य फक िृवद्ध होने क योग बन रहे है । े
    • 60 अप्रेल 2012मकर: 1 िे 15 अप्रैल 2012 : आपक उच्िातधकारी एिं िहकमीयं िे िंबंध प्रतिकूल होने क िंकि हं । अिः व्यिहर े े े कशल रहे । अपने कायािेि मं आत्मवििाि क बल पर अपनी आय मं िृवद्ध कर िकिे ू े हं । अपनी अतधक खिा करने फक प्रिृवत्त पर तनयंिण करने का प्रयाि करं । प्रेम िंबंतधि मामलो मं भी िफलिा प्राप्त कर िकिे है । दांपत्य जीिन िुखमय रहे गा। 16 िे 30 अप्रैल 2012 : नौकरी-व्यििाय क महत्िपूणा जोस्खम भरे काया करने िे बिे। े कोटा -किहरी क कायो मं अतिररि िािधानी बरिे। अपने विरोधी एिं शिु पि िे े िािधान रहं आप पर झूठे आरोप लग िकिे है । धातमाक यािा या दरस्थ स्थानो की यािा ू होने क योग हं । पररिार क फकिी िदस्य का स्िास््य कमजोर हो िकिा हं । े े जीिनिाथी क िाथ िंबंधं मं मधुरिा आएगी। ेकभ: 1 िे 15 अप्रैल 2012 : यफद आप नौकरी मं हं िो अपने काया का अच्छा ंुप्रदशान करने मं िमथा हंगे। आय िे व्यय अतधक होने क योग बन रहे हं इि तलए ेव्यय पर तनयडिण रखने का प्रयाि करं । उत्तम िाहन िुख क अच्छे िंकि हं । यफद आप े ेअवििाफहि हं िो वििाह क बंधन मं जल्द ही बंध िकिे हं । जीिनिाथी िे पूणा िुख ेकी प्रातप्त होगी।16 िे 30 अप्रैल 2012 : फकये गये पूंस्ज तनिेश द्वारा आकस्स्मक धन प्रातप्त क योग बन ेरहे है । भूतम- भिन-िाहन क क्रय-विक्रय िे लाभ प्राप्त हो िकिा हं । शिुओं पर आपका ेप्रभाि रहे गा। प्रेम िंबंतधि मामलं मं कोई परे शानी हो िकिी हं । िंयम मं रहने का प्रयाि करं । आपक भौतिक िुख ेिाधनो मं िृवद्ध होगी। प्रकृ ति मं बदलाि िे आपका स्िास््य नरम रह िकिा है ।मीन: 1 िे 15 अप्रैल 2012: आपक महत्िपूणा कायो मं अनािश्य विलंब होिा नजर आएगा जो िमय क िाथ खत्म े े हो जाएगा। अपने िंतिि धन िे पूंस्ज तनिेश कर लाभ प्राप्त कर िकिे है । व्यििाय िे िंबंतधि का कायं िे जुिे लोगो की प्रतिवद्ध का िेजी िे विस्िार होगा। अपने खाने-पीने का विशेष ध्यान रखे अडयथा आपका का स्िास््य नरम हो िकिा है । जीिन िाथी का पूणा िहयोग प्राप्त होगा। 16 िे 30 अप्रैल 2012 : अपने कायािेि मं आत्म वििाि िे आगे बढिे रहने का प्रयाि करं । व्यििातयक यािा लाभदायक तिद्ध होगी। अत्यातधक भागदौड़ क कारण आपको उजाा े ि उिाह की कमी महिूि हो िकिी हं । अपने उच्िातधकारी एिं िहकमािारी िे छोटी-छोटी बािं मं वििाद हो िकिे हं । महत्िपूणा एिं घरे लू मामलो मं िुनौिीओं का िामना करना पि िकिा हं । धातमाककायो मं रुति बढे गी।
    • 61 अप्रेल 2012 अप्रैल 2012 मातिक पंिांग िंद्रफद िार माह पि तितथ िमातप्त निि िमातप्त योग िमातप्त करण िमातप्त िमातप्त रातश1 रवि िैि शुक्ल निमी 14:08:15 पुनिािु 09:12:56 अतिगंि 07:16:41 कौलि 14:08:15 कका -2 िोम िैि शुक्ल दशमी 13:41:47 पुष्य 09:35:14 धृति 28:06:10 गर 13:41:47 कका -3 मंगल िैि शुक्ल एकादशी 12:22:50 अश्लेषा 09:06:54 शूल 25:31:16 विवष्ट 12:22:50 कका 09:07:004 द्वादशी- बुध िैि शुक्ल 10:17:57 मघा 07:51:42 गंि 22:21:42 बालि 10:17:57 तिंह - ियोदशी5 ियोदशी/ गुरु िैि शुक्ल 07:34:37 उत्तराफाल्गुनी 27:31:49 िृवद्ध 18:44:56 िैतिल 07:34:37 तिंह 11:23:00 ििुदाशी6 शुक्र िैि शुक्ल पूस्णामा 24:48:30 हस्ि 24:46:37 ध्रुि 14:48:30 विवष्ट 14:37:15 कडया -7 शतन िैशाख कृ ष्ण एकम 21:08:56 तििा 21:54:52 व्याघाि 10:40:49 बालि 10:59:34 कडया 11:21:008 रवि िैशाख कृ ष्ण फद्विीया 17:30:19 स्िािी 19:05:01 हषाण 06:30:19 िैतिल 07:18:08 िुला -9 िोम िैशाख कृ ष्ण िृिीया 14:04:50 विशाखा 16:26:24 तिवद्ध 22:35:46 विवष्ट 14:04:50 िुला 11:04:0010 मंगल िैशाख कृ ष्ण ििुथी 10:59:03 अनुराधा 14:11:14 व्यतिपाि 19:03:44 बालि 10:59:03 िृस्श्चक -11 बुध िैशाख कृ ष्ण पंिमी 08:21:23 जेष्ठा 12:24:12 िररयान 15:57:01 िैतिल 08:21:23 िृस्श्चक 12:24:0012 गुरु िैशाख कृ ष्ण षष्ठी 06:17:30 मूल 11:11:52 पररग्रह 13:19:22 िस्णज 06:17:30 धनु -13 शुक्र िैशाख कृ ष्ण अष्टमी 28:00:29 पूिााषाढ़ 10:36:06 तशि 11:11:44 बालि 16:20:10 धनु 16:33:0014 शतन िैशाख कृ ष्ण निमी 27:48:10 उत्तराषाढ़ 10:37:51 तिवद्ध 09:34:06 िैतिल 15:50:02 मकर - दशमी15 रवि िैशाख कृ ष्ण /एकाद 28:12:25 श्रिण 11:16:10 िाध्य 08:27:25 िस्णज 15:55:32 मकर 23:48:00 शी
    • 62 अप्रेल 201216 िोम िैशाख कृ ष्ण एकादशी 29:07:37 धतनष्ठा 12:28:15 शुभ 07:46:03 बि 16:35:45 कभ ुं -17 मंगल िैशाख कृ ष्ण द्वादशी 30:30:57 शितभषा 14:10:20 शुक्ल 07:30:01 कौलि 17:45:57 कभ ुं -18 बुध िैशाख कृ ष्ण द्वादशी 06:30:52 पूिााभाद्रपद 16:16:48 ब्रह्म 07:35:33 िैतिल 06:30:52 कभ ुं 09:43:0019 गुरु िैशाख कृ ष्ण ियोदशी 08:18:36 उत्तराभाद्रपद 18:45:47 इडद्र 07:58:55 िस्णज 08:18:36 मीन -20 शुक्र िैशाख कृ ष्ण ििुदाशी 10:26:02 रे िति 21:31:40 िैधति ृ 08:38:13 शकतन ु 10:26:02 मीन 21:32:0021 अमाि शतन िैशाख कृ ष्ण 12:48:29 अस्िनी 24:31:36 विषकभ ुं 09:28:48 नाग 12:48:29 मेष - स्या22 रवि िैशाख शुक्ल एकम 15:23:08 भरणी 27:39:04 प्रीति 10:28:45 बि 15:23:08 मेष -23 िोम िैशाख शुक्ल फद्विीया 18:00:36 कृ तिका 30:47:28 आयुष्मान 11:32:28 कौलि 18:00:36 मेष 10:26:0024 मंगल िैशाख शुक्ल िृिीया 20:37:09 कृ तिका 06:48:24 िौभाग्य 12:37:09 िैतिल 07:20:16 िृष -25 बुध िैशाख शुक्ल ििुथी 22:59:39 रोफहस्ण 09:50:16 शोभन 13:34:20 िस्णज 09:51:12 िृष 23:16:0026 गुरु िैशाख शुक्ल पंिमी 25:02:28 मृगतशरा 12:36:13 अतिगंि 14:17:28 बि 12:04:21 तमथुन -27 शुक्र िैशाख शुक्ल षष्ठी 26:31:33 आद्रा 14:55:56 िुकमाा 14:39:03 कौलि 13:51:15 तमथुन -28 शतन िैशाख शुक्ल िप्तमी 27:20:21 पुनिािु 16:40:02 धृति 14:33:28 गर 15:01:36 तमथुन 10:18:0029 रवि िैशाख शुक्ल अष्टमी 27:23:13 पुष्य 17:41:58 शूल 13:53:13 विवष्ट 15:26:58 कका -30 िोम िैशाख शुक्ल निमी 26:37:21 अश्लेषा 17:57:59 गंि 12:36:25 बालि 15:06:25 कका -क्या आप फकिी िमस्या िे ग्रस्ि हं ? आपक पाि अपनी िमस्याओं िे छटकारा पाने हे िु पूजा-अिाना, िाधना, े ुमंि जाप इत्याफद करने का िमय नहीं हं ? अब आप अपनी िमस्याओं िे बीना फकिी विशेष पूजा-अिाना, वितध-विधानक आपको अपने काया मं िफलिा प्राप्त कर िक एिं आपको अपने जीिन क िमस्ि िुखो को प्राप्त करने का मागा े े ेप्राप्त हो िक इि तलये गुरुत्ि कायाालि द्वारा हमारा उदे श्य शास्त्रोि वितध-विधान िे वितशष्ट िेजस्िी मंिो द्वारा तिद्ध प्राण- ेप्रतिवष्ठि पूणा िैिडय युि वितभडन प्रकार क यडि- किि एिं शुभ फलदायी ग्रह रत्न एिं उपरत्न आपक घर िक पहोिाने का हं । े े
    • 63 अप्रेल 2012 अप्रैल-2012 मातिक व्रि-पिा-त्यौहारफद िार माह पि तितथ िमातप्त प्रमुख व्रि-त्योहार श्री दगाानिमी, महानिमी, राम जडमोत्िि, रामनिमी व्रि, श्री िारा ु महाविद्या जयंिी, निराि व्रि पूणा, भगििी उमा (तशिा) जयंिी1 रवि िैि शुक्ल निमी 14:08:15 (जम्मू.क), स्िामी नारायण जयंिी (अिरधाम), जिारे वििजान फदन 2:07 बजे पश्चयाि,2 िोम िैि शुक्ल दशमी 13:41:47 िैिी विजयादशमी, अपरास्जिा पूजा, दशहरा, धमाराज दशमी,3 मंगल िैि शुक्ल एकादशी 12:22:50 कामदा एकादशी व्रि, तिपाि महापाि रावि 9.45 िे राि 2.38 बजे िक द्वादशी- श्रीविष्णु दमनक द्वादशी, श्यामबाबा द्वादशी, अनंग ियोदशी, प्रदोष व्रि,4 बुध िैि शुक्ल 10:17:57 ियोदशी मिांिर िे श्रीमहािीर जयंिी (जैन), ियोदशी श्रीमहािीर जयंिी, तशिदमनक ििुदाशी, श्रीहाटकिर जयंिी, श्रीनृतिंह े5 गुरु िैि शुक्ल 07:34:37 /ििुदाशी दोलोत्िि, व्रि-स्नान-दान हे िु उत्तम िैिी पूस्णामा, श्री हनुमान जयंिी, ििादेि-6 शुक्र िैि शुक्ल पूस्णामा 24:48:30 दमनकोत्िि, छिपति तशिाजी की पुण्यतितथ, िैशाख स्नान तनयम प्रारं भ,7 शतन िैशाख कृ ष्ण एकम 21:08:56 कच्छपाििार जयंिी,8 रवि िैशाख कृ ष्ण फद्विीया 17:30:19 आशा फद्विीया व्रि (आिो दज), ू9 िोम िैशाख कृ ष्ण िृिीया 14:04:50 िंकष्टी श्रीगणेशििुथी व्रि (िं.उ.रा.9:26) ििी अनुिूया जयंिी, िैशाख मंगलिार को श्रीमंगलनाथ दशान-यािा10 मंगल िैशाख कृ ष्ण ििुथी 10:59:03 (उज्जैन)11 बुध िैशाख कृ ष्ण पंिमी 08:21:23 श्रीपंिमी,12 गुरु िैशाख कृ ष्ण षष्ठी 06:17:30 कोफकलाषष्ठी, शीिलाष्टमी, कालाष्टमी व्रि, मेष-िंक्रास्डि िंध्या 7:19 बजे, िंक्रास्डि स्नान-दान का पुण्यकाल मध्याह्न िे िूयाास्ि िक, मीन (खर) माि13 शुक्र िैशाख कृ ष्ण अष्टमी 28:00:29 िमाप्त, शकरा िप्तमी, िड़क पूजा, कल्पिाि प्रारं भ, जतलयांिाला बाग ा फदिि, आयाभट्ट जयंिी, िैशाखी उत्िि,14 शतन िैशाख कृ ष्ण निमी 27:48:10 बंगाली नििषा 1419 शुरू, जूड़शीिल, नििषा विषु (करल), वबहाग वबहु े
    • 64 अप्रेल 2012 (अिम), िा. अम्बेिकर जयंिी, दशमी िंफिका निमी व्रि((प्रािीन मि), िैधति महापाि फदन 1.57 िे िायं ृ15 रवि िैशाख कृ ष्ण 28:12:25 /एकादशी 7.24 बजे िक, िरूतथनी एकादशी व्रि (स्मािा), श्रीिल्लभािाया महाप्रभु जयंिी, श्रीिल्लभ16 िोम िैशाख कृ ष्ण एकादशी 29:07:37 िम्िि ् 535 प्रारं भ, पंिकोशी-पंिेशातन यािा प्रारं भ (उज्जैन)17 मंगल िैशाख कृ ष्ण द्वादशी 30:30:57 िरूतथनी एकादशी व्रि (िैष्णि), िा.राधाकृ ष्णन स्मृति फदिि,18 बुध िैशाख कृ ष्ण द्वादशी 06:30:52 प्रदोष व्रि, िात्याटोपे स्मृति फदिि, मातिक तशिरावि व्रि, तशि ििुदाशी, िूया िायन िृष रातश मं रावि 9:4319 गुरु िैशाख कृ ष्ण ियोदशी 08:18:36 बजे, िौर ग्रीष्म ऋिु प्रारं भ,20 शुक्र िैशाख कृ ष्ण ििुदाशी 10:26:02 श्राद्ध की अमािस्या स्नान-दान हे िु उत्तम िैशाखी अमािस्या, शनैश्चरी अमािस्या, पंिकोिी-21 शतन िैशाख कृ ष्ण अमािस्या 12:48:29 पंिेशातन यािा पूणा िथा अष्टाविंशतििीथा यािा (उज्जैन), शुकदे ि मुतन जयंिी, ििुआई अमािि,22 रवि िैशाख शुक्ल एकम 15:23:08 निीन िंद्र-दशान, महवषा पाराशर जयंिी, दे िदामोदर तितथ,23 िोम िैशाख शुक्ल फद्विीया 18:00:36 परशुराम जयंिी(प्रािीन मि), अिय िृिीया, िंदनयािा (िैष्णि), िेिायुगाफद तितथ, परशुराम जयंिी,24 मंगल िैशाख शुक्ल िृिीया 20:37:09 मािंगी महाविद्या जयंिी, श्रीबांकवबहारी े िरण-दशान, विलोिन-दशान (काशी),25 बुध िैशाख शुक्ल ििुथी 22:59:39 िरदविनायक ििुथी व्रि (िं.उ.रा.9:57), बगलामुखी जयंिी (दतिया), आद्य शंकरािाया जयंिी, आद्य शंकर िम्िि ् 2519 प्रारं भ, िूरदाि जयंिी26 गुरु िैशाख शुक्ल पंिमी 25:02:28 (534 िीं), िोमनाथ प्रतिष्ठा फदिि,27 शुक्र िैशाख शुक्ल षष्ठी 26:31:33 स्कडदषष्ठी व्रि, िंदन छठ, श्रीरामानुजािाया जयंिी, श्रीगंगा िप्तमी, गंगा जयंिी, मध्याह्न मं गंगा-पूजा, विजया िप्तमी, पुष्य28 शतन िैशाख शुक्ल िप्तमी 27:20:21 निि (फदन 11:58 िे) श्रीदगााष्टमी व्रि, श्रीअडनपूणााष्टमी व्रि, बगलामुखी महाविद्या जयंिी, ु29 रवि िैशाख शुक्ल अष्टमी 27:23:13 व्यतिपाि महापाि प्राि: 4.14 िे 10.38 बजे िक,30 िोम िैशाख शुक्ल निमी 26:37:21 िीिानिमी व्रि, श्रीजानकी जयंिी महोत्िि,
    • 65 अप्रेल 2012 गणेश लक्ष्मी यंिप्राण-प्रतिवष्ठि गणेश लक्ष्मी यंि को अपने घर-दकान-ओफफि-फक्टरी मं पूजन स्थान, गल्ला या अलमारी मं स्थावपि ु ैकरने व्यापार मं विशेष लाभ प्राप्त होिा हं । यंि क प्रभाि िे भाग्य मं उडनति, मान-प्रतिष्ठा एिं े व्यापर मं िृवद्ध होिीहं एिं आतथाक स्स्थमं िुधार होिा हं । गणेश लक्ष्मी यंि को स्थावपि करने िे भगिान गणेश और दे िी लक्ष्मी कािंयुि आशीिााद प्राप्त होिा हं । Rs.730 िे Rs.10900 िक मंगल यंि िे ऋण मुविमंगल यंि को जमीन-जायदाद क वििादो को हल करने क काम मं लाभ दे िा हं , इि क अतिररि व्यवि को ऋण े े ेमुवि हे िु मंगल िाधना िे अति शीध्र लाभ प्राप्त होिा हं । वििाह आफद मं मंगली जािकं क कल्याण क तलए मंगल े ेयंि की पूजा करने िे विशेष लाभ प्राप्त होिा हं । प्राण प्रतिवष्ठि मंगल यंि क पूजन िे भाग्योदय, शरीर मं खून की ेकमी, गभापाि िे बिाि, बुखार, िेिक, पागलपन, िूजन और घाि, यौन शवि मं िृवद्ध, शिु विजय, िंि मंि क दष्ट प्रभा, े ुभूि-प्रेि भय, िाहन दघटनाओं, हमला, िोरी इत्यादी िे बिाि होिा हं । ु ा मूल्य माि Rs- 730 कबेर यंि ुकबेर यंि क पूजन िे स्िणा लाभ, रत्न लाभ, पैिक िम्पत्ती एिं गड़े हुए धन िे लाभ प्रातप्त फक कामना करने िाले ु े ृव्यवि क तलये कबेर यंि अत्यडि िफलिा दायक होिा हं । एिा शास्त्रोि ििन हं । कबेर यंि क पूजन िे एकातधक े ु ु ेस्त्रोि िे धन का प्राप्त होकर धन िंिय होिा हं । िाम्र पि पर िुिणा पोलीि िाम्र पि पर रजि पोलीि िाम्र पि पर (Gold Plated) (Silver Plated) (Copper) िाईज मूल्य िाईज मूल्य िाईज मूल्य 1” X 1” 460 1” X 1” 370 1” X 1” 255 2” X 2” 820 2” X 2” 640 2” X 2” 460 3” X 3” 1650 3” X 3” 1090 3” X 3” 730 4” X 4” 2350 4” X 4” 1650 4” X 4” 1090 6” X 6” 3600 6” X 6” 2800 6” X 6” 1900 9” X 9” 6400 9” X 9” 5100 9” X 9” 3250 12” X12” 10800 12” X12” 8200 12” X12” 6400 GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
    • 66 अप्रेल 2012 निरत्न जफड़ि श्री यंिशास्त्र ििन क अनुिार शुद्ध िुिणा या रजि मं तनतमाि श्री यंि क िारं और यफद निरत्न जड़िा ने पर यह निरत्न े ेजफड़ि श्री यंि कहलािा हं । िभी रत्नो को उिक तनस्श्चि स्थान पर जड़ कर लॉकट क रूप मं धारण करने िे व्यवि को े े ेअनंि एिया एिं लक्ष्मी की प्रातप्त होिी हं । व्यवि को एिा आभाि होिा हं जैिे मां लक्ष्मी उिक िाथ हं । निग्रह को ेश्री यंि क िाथ लगाने िे ग्रहं की अशुभ दशा का धारण करने िाले व्यवि पर प्रभाि नहीं होिा हं । गले मं होने क े ेकारण यंि पविि रहिा हं एिं स्नान करिे िमय इि यंि पर स्पशा कर जो जल वबंद ु शरीर को लगिे हं , िह गंगाजल क िमान पविि होिा हं । इि तलये इिे िबिे िेजस्िी एिं फलदातय कहजािा हं । जैिे अमृि िे उत्तम कोई ेऔषतध नहीं, उिी प्रकार लक्ष्मी प्रातप्त क तलये श्री यंि िे उत्तम कोई यंि िंिार मं नहीं हं एिा शास्त्रोि ििन हं । इि ेप्रकार क निरत्न जफड़ि श्री यंि गुरूत्ि कायाालय द्वारा शुभ मुहूिा मं प्राण प्रतिवष्ठि करक बनािाए जािे हं । े े अष्ट लक्ष्मी कििअष्ट लक्ष्मी किि को धारण करने िे व्यवि पर िदा मां महा लक्ष्मी की कृ पा एिं आशीिााद बनारहिा हं । स्जस्िे मां लक्ष्मी क अष्ट रुप (१)-आफद लक्ष्मी, (२)-धाडय लक्ष्मी, (३)-धैरीय लक्ष्मी, (४)- ेगज लक्ष्मी, (५)-िंिान लक्ष्मी, (६)-विजय लक्ष्मी, (७)-विद्या लक्ष्मी और (८)-धन लक्ष्मी इन िभीरुपो का स्ििः अशीिााद प्राप्त होिा हं । मूल्य माि: Rs-1250 मंि तिद्ध व्यापार िृवद्ध कििव्यापार िृवद्ध किि व्यापार क शीघ्र उडनति क तलए उत्तम हं । िाहं कोई भी व्यापार हो अगर उिमं लाभ क स्थान पर े े ेबार-बार हातन हो रही हं । फकिी प्रकार िे व्यापार मं बार-बार बांधा उत्पडन हो रही हो! िो िंपूणा प्राण प्रतिवष्ठि मंितिद्ध पूणा िैिडय युि व्यापाि िृवद्ध यंि को व्यपार स्थान या घर मं स्थावपि करने िे शीघ्र ही व्यापार िृवद्ध एिंतनिडिर लाभ प्राप्त होिा हं । मूल्य माि: Rs.730 & 1050 मंगल यंि(विकोण) मंगल यंि को जमीन-जायदाद क वििादो को हल करने क काम मं लाभ दे िा हं , इि क अतिररि व्यवि को े े ेऋण मुवि हे िु मंगल िाधना िे अति शीध्र लाभ प्राप्त होिा हं । वििाह आफद मं मंगली जािकं क कल्याण क तलए े ेमंगल यंि की पूजा करने िे विशेष लाभ प्राप्त होिा हं । मूल्य माि Rs- 7300 GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
    • 67 अप्रेल 2012 वििाह िंबंतधि िमस्याक्या आपक लिक-लिकी फक आपकी शादी मं अनािश्यक रूप िे विलम्ब हो रहा हं या उनक िैिाफहक जीिन मं खुतशयां कम े े ेहोिी जारही हं और िमस्या अतधक बढिी जारही हं । एिी स्स्थिी होने पर अपने लिक-लिकी फक किली का अध्ययन े ुंअिश्य करिाले और उनक िैिाफहक िुख को कम करने िाले दोषं क तनिारण क उपायो क बार मं विस्िार िे जनकारी प्राप्त े े े ेकरं । तशिा िे िंबंतधि िमस्याक्या आपक लिक-लिकी की पढाई मं अनािश्यक रूप िे बाधा-विघ्न या रुकािटे हो रही हं ? बच्िो को अपने पूणा पररश्रम े ेएिं मेहनि का उतिि फल नहीं तमल रहा? अपने लिक-लिकी की किली का विस्िृि अध्ययन अिश्य करिाले और े ुंउनक विद्या अध्ययन मं आनेिाली रुकािट एिं दोषो क कारण एिं उन दोषं क तनिारण क उपायो क बार मं विस्िार िे े े े े ेजनकारी प्राप्त करं । क्या आप फकिी िमस्या िे ग्रस्ि हं ? ुआपक पाि अपनी िमस्याओं िे छटकारा पाने हे िु पूजा-अिाना, िाधना, मंि जाप इत्याफद करने का िमय नहीं हं ? ेअब आप अपनी िमस्याओं िे बीना फकिी विशेष पूजा-अिाना, वितध-विधान क आपको अपने काया मं िफलिा प्राप्त ेकर िक एिं आपको अपने जीिन क िमस्ि िुखो को प्राप्त करने का मागा प्राप्त हो िक इि तलये गुरुत्ि कायाालि े े ेद्वारा हमारा उदे श्य शास्त्रोि वितध-विधान िे वितशष्ट िेजस्िी मंिो द्वारा तिद्ध प्राण-प्रतिवष्ठि पूणा िैिडय युि वितभडन प्रकार केयडि- किि एिं शुभ फलदायी ग्रह रत्न एिं उपरत्न आपक घर िक पहोिाने का हं । े ज्योतिष िंबंतधि विशेष परामशाज्योति विज्ञान, अंक ज्योतिष, िास्िु एिं आध्यास्त्मक ज्ञान िं िंबंतधि विषयं मं हमारे 30 िषो िे अतधक िषा केअनुभिं क िाथ ज्योतिि िे जुिे नये-नये िंशोधन क आधार पर आप अपनी हर िमस्या क िरल िमाधान प्राप्त कर े े ेिकिे हं । GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com ओनेक्ि जो व्यवि पडना धारण करने मे अिमथा हो उडहं बुध ग्रह क उपरत्न ओनेक्ि को धारण करना िाफहए। े उच्ि तशिा प्रातप्त हे िु और स्मरण शवि क विकाि हे िु ओनेक्ि रत्न की अंगूठी को दायं हाथ की िबिे छोटी े उं गली या लॉकट बनिा कर गले मं धारण करं । ओनेक्ि रत्न धारण करने िे विद्या-बुवद्ध की प्रातप्त हो होकर स्मरण े अप्रैल शवि का विकाि होिा हं ।
    • 68 अप्रेल 2012 अप्रैल 2012 -विशेष योग काया तिवद्ध योग 1 प्राि: 9:13 िे 2 अप्रैल प्राि: 9:34 िक 19 िायं 6:45 िे 21 अप्रैल को िूयोदय िक 3 िूयोदय िे प्राि: 9:07 िक 24 िूयोदय िे प्राि: 6:47 िक 7 रावि 9:54 िे रािभर 25 िम्पूणा फदन-राि 9 िायं 4:26 िे रािभर 27 फदन 2:55 िे रािभर 14 प्राि: 10:38 िे फदन-राि 29 िूयोदय िे िायं 5:41 िक अमृि योग 20 िूयोदय िे रावि 9:32 िक फद्वपुष्कर (दोगुना फल) योग 7 रावि 9:08 िे 9:54 िक विपुष्कर (िीन गुना फल) योग 17 फदन 2:09 िे 18 अप्रैल को िूयोदय िक 28 िूयोदय िे िायं 4:39 िक 22/23 रावि 3:39 िे िूयोदय िक रवि-पुष्यामृि योग 1 प्राि: 9:13 िे फदन-राि 29 िूयोदय िे िायं 5:41 िकयोग फल :  काया तिवद्ध योग मे फकये गये शुभ काया मे तनस्श्चि िफलिा प्राप्त होिी हं , एिा शास्त्रोि ििन हं ।  फद्वपुष्कर योग मं फकये गये शुभ कायो का लाभ दोगुना होिा हं । एिा शास्त्रोि ििन हं ।  विपुष्कर योग मं फकये गये शुभ कायो का लाभ िीन गुना होिा हं । एिा शास्त्रोि ििन हं ।  रवि पुष्यामृि योग एिं अमृि योग शुभ काया हे िु उत्तम माना जािा हं । दै तनक शुभ एिं अशुभ िमय ज्ञान िातलका गुतलक काल यम काल राहु काल (शुभ) (अशुभ) (अशुभ) िार िमय अितध िमय अितध िमय अितध रवििार 03:00 िे 04:30 12:00 िे 01:30 04:30 िे 06:00 िोमिार 01:30 िे 03:00 10:30 िे 12:00 07:30 िे 09:00 मंगलिार 12:00 िे 01:30 09:00 िे 10:30 03:00 िे 04:30 बुधिार 10:30 िे 12:00 07:30 िे 09:00 12:00 िे 01:30 गुरुिार 09:00 िे 10:30 06:00 िे 07:30 01:30 िे 03:00 शुक्रिार 07:30 िे 09:00 03:00 िे 04:30 10:30 िे 12:00 शतनिार 06:00 िे 07:30 01:30 िे 03:00 09:00 िे 10:30
    • 69 अप्रेल 2012 फदन क िौघफिये े िमय रवििार िोमिार मंगलिार बुधिार गुरुिार शुक्रिार शतनिार 06:00 िे 07:30 उद्वे ग अमृि रोग लाभ शुभ िल काल 07:30 िे 09:00 िल काल उद्वे ग अमृि रोग लाभ शुभ 09:00 िे 10:30 लाभ शुभ िल काल उद्वे ग अमृि रोग 10:30 िे 12:00 अमृि रोग लाभ शुभ िल काल उद्वे ग 12:00 िे 01:30 काल उद्वे ग अमृि रोग लाभ शुभ िल 01:30 िे 03:00 शुभ िल काल उद्वे ग अमृि रोग लाभ 03:00 िे 04:30 रोग लाभ शुभ िल काल उद्वे ग अमृि 04:30 िे 06:00 उद्वे ग अमृि रोग लाभ शुभ िल काल राि क िौघफिये े िमय रवििार िोमिार मंगलिार बुधिार गुरुिार शुक्रिार शतनिार 06:00 िे 07:30 शुभ िल काल उद्वे ग अमृि रोग लाभ 07:30 िे 09:00 अमृि रोग लाभ शुभ िल काल उद्वे ग 09:00 िे 10:30 िल काल उद्वे ग अमृि रोग लाभ शुभ 10:30 िे 12:00 रोग लाभ शुभ िल काल उद्वे ग अमृि 12:00 िे 01:30 काल उद्वे ग अमृि रोग लाभ शुभ िल 01:30 िे 03:00 लाभ शुभ िल काल उद्वे ग अमृि रोग 03:00 िे 04:30 उद्वे ग अमृि रोग लाभ शुभ िल काल 04:30 िे 06:00 शुभ िल काल उद्वे ग अमृि रोग लाभ शास्त्रोि मि क अनुशार यफद फकिी भी काया का प्रारं भ शुभ मुहूिा या शुभ िमय पर फकया जाये िो काया मं िफलिा ेप्राप्त होने फक िंभािना ज्यादा प्रबल हो जािी हं । इि तलये दै तनक शुभ िमय िौघफड़या दे खकर प्राप्त फकया जा िकिा हं ।नोट: प्रायः फदन और रावि क िौघफड़ये फक तगनिी क्रमशः िूयोदय और िूयाास्ि िे फक जािी हं । प्रत्येक िौघफड़ये फक अितध 1 ेघंटा 30 तमतनट अथााि िे ढ़ घंटा होिी हं । िमय क अनुिार िौघफड़ये को शुभाशुभ िीन भागं मं बांटा जािा हं , जो क्रमशः शुभ, ेमध्यम और अशुभ हं । िौघफिये क स्िामी ग्रह े * हर काया क तलये शुभ/अमृि/लाभ का ेशुभ िौघफिया मध्यम िौघफिया अशुभ िौघफड़या िौघफड़या उत्तम माना जािा हं ।िौघफिया स्िामी ग्रह िौघफिया स्िामी ग्रह िौघफिया स्िामी ग्रहशुभ गुरु िर शुक्र उद्बे ग िूया * हर काया क तलये िल/काल/रोग/उद्वे ग ेअमृि िंद्रमा काल शतन का िौघफड़या उतिि नहीं माना जािा।लाभ बुध रोग मंगल
    • 70 अप्रेल 2012 फदन फक होरा - िूयोदय िे िूयाास्ि िक िार 1.घं 2.घं 3.घं 4.घं 5.घं 6.घं 7.घं 8.घं 9.घं 10.घं 11.घं 12.घं रवििार िूया शुक्र बुध िंद्र शतन गुरु मंगल िूया शुक्र बुध िंद्र शतन िोमिार िंद्र शतन गुरु मंगल िूया शुक्र बुध िंद्र शतन गुरु मंगल िूया मंगलिार मंगल िूया शुक्र बुध िंद्र शतन गुरु मंगल िूया शुक्र बुध िंद्र बुधिार बुध िंद्र शतन गुरु मंगल िूया शुक्र बुध िंद्र शतन गुरु मंगल गुरुिार गुरु मंगल िूया शुक्र बुध िंद्र शतन गुरु मंगल िूया शुक्र बुध शुक्रिार शुक्र बुध िंद्र शतन गुरु मंगल िूया शुक्र बुध िंद्र शतन गुरु शतनिार शतन गुरु मंगल िूया शुक्र बुध िंद्र शतन गुरु मंगल िूया शुक्र राि फक होरा – िूयाास्ि िे िूयोदय िक रवििार गुरु मंगल िूया शुक्र बुध िंद्र शतन गुरु मंगल िूया शुक्र बुध िोमिार शुक्र बुध िंद्र शतन गुरु मंगल िूया शुक्र बुध िंद्र शतन गुरु मंगलिार शतन गुरु मंगल िूया शुक्र बुध िंद्र शतन गुरु मंगल िूया शुक्र बुधिार िूया शुक्र बुध िंद्र शतन गुरु मंगल िूया शुक्र बुध िंद्र शतन गुरुिार िंद्र शतन गुरु मंगल िूया शुक्र बुध िंद्र शतन गुरु मंगल िूया शुक्रिार मंगल िूया शुक्र बुध िंद्र शतन गुरु मंगल िूया शुक्र बुध िंद्र शतनिार बुध िंद्र शतन गुरु मंगल िूया शुक्र बुध िंद्र शतन गुरु मंगलहोरा मुहूिा को काया तिवद्ध क तलए पूणा फलदायक एिं अिूक माना जािा हं , फदन-राि क २४ घंटं मं शुभ-अशुभ िमय े ेको िमय िे पूिा ज्ञाि कर अपने काया तिवद्ध क तलए प्रयोग करना िाफहये। ेविद्वानो क मि िे इस्च्छि काया तिवद्ध क तलए ग्रह िे िंबंतधि होरा का िुनाि करने िे विशेष लाभ े ेप्राप्त होिा हं ।  िूया फक होरा िरकारी कायो क तलये उत्तम होिी हं । े  िंद्रमा फक होरा िभी कायं क तलये उत्तम होिी हं । े  मंगल फक होरा कोटा -किेरी क कायं क तलये उत्तम होिी हं । े े  बुध फक होरा विद्या-बुवद्ध अथााि पढाई क तलये उत्तम होिी हं । े  गुरु फक होरा धातमाक काया एिं वििाह क तलये उत्तम होिी हं । े  शुक्र फक होरा यािा क तलये उत्तम होिी हं । े  शतन फक होरा धन-द्रव्य िंबंतधि काया क तलये उत्तम होिी हं । े
    • 71 अप्रेल 2012 ग्रह िलन अप्रैल-2012Day Sun Mon Ma Me Jup Ven Sat ah Ket Ua Nep Plu1 11:17:38 03:01:20 04:10:44 11:00:21 00:19:16 01:03:29 06:03:15 07:12:38 01:12:38 11:10:53 10:08:02 08:15:302 11:18:37 03:14:24 04:10:35 11:00:05 00:19:30 01:04:26 06:03:11 07:12:35 01:12:35 11:10:56 10:08:04 08:15:303 11:19:36 03:27:55 04:10:26 10:29:54 00:19:43 01:05:22 06:03:06 07:12:30 01:12:30 11:11:00 10:08:05 08:15:304 11:20:35 04:11:55 04:10:18 10:29:49 00:19:56 01:06:18 06:03:02 07:12:23 01:12:23 11:11:03 10:08:07 08:15:315 11:21:34 04:26:23 04:10:10 10:29:49 00:20:10 01:07:13 06:02:57 07:12:15 01:12:15 11:11:07 10:08:09 08:15:316 11:22:33 05:11:14 04:10:04 10:29:55 00:20:23 01:08:07 06:02:53 07:12:07 01:12:07 11:11:10 10:08:11 08:15:317 11:23:32 05:26:18 04:09:58 11:00:06 00:20:36 01:09:01 06:02:48 07:12:00 01:12:00 11:11:13 10:08:13 08:15:318 11:24:31 06:11:27 04:09:53 11:00:22 00:20:50 01:09:54 06:02:44 07:11:55 01:11:55 11:11:17 10:08:14 08:15:319 11:25:30 06:26:31 04:09:48 11:00:43 00:21:04 01:10:46 06:02:39 07:11:52 01:11:52 11:11:20 10:08:16 08:15:3110 11:26:29 07:11:22 04:09:45 11:01:09 00:21:17 01:11:38 06:02:35 07:11:51 01:11:51 11:11:23 10:08:18 08:15:3111 11:27:28 07:25:53 04:09:42 11:01:39 00:21:31 01:12:29 06:02:30 07:11:52 01:11:52 11:11:27 10:08:19 08:15:3112 11:28:27 08:10:02 04:09:40 11:02:13 00:21:44 01:13:19 06:02:26 07:11:53 01:11:53 11:11:30 10:08:21 08:15:3113 11:29:26 08:23:47 04:09:39 11:02:51 00:21:58 01:14:09 06:02:21 07:11:54 01:11:54 11:11:33 10:08:23 08:15:3114 00:00:24 09:07:11 04:09:38 11:03:33 00:22:12 01:14:57 06:02:16 07:11:54 01:11:54 11:11:37 10:08:24 08:15:3115 00:01:23 09:20:14 04:09:39 11:04:19 00:22:26 01:15:45 06:02:12 07:11:52 01:11:52 11:11:40 10:08:26 08:15:3116 00:02:22 10:03:00 04:09:40 11:05:08 00:22:39 01:16:32 06:02:07 07:11:49 01:11:49 11:11:43 10:08:27 08:15:3117 00:03:21 10:15:32 04:09:41 11:06:00 00:22:53 01:17:18 06:02:03 07:11:44 01:11:44 11:11:46 10:08:29 08:15:3118 00:04:19 10:27:51 04:09:44 11:06:56 00:23:07 01:18:04 06:01:58 07:11:38 01:11:38 11:11:50 10:08:30 08:15:3019 00:05:18 11:10:00 04:09:47 11:07:54 00:23:21 01:18:48 06:01:53 07:11:31 01:11:31 11:11:53 10:08:32 08:15:3020 00:06:17 11:22:02 04:09:51 11:08:56 00:23:35 01:19:31 06:01:49 07:11:24 01:11:24 11:11:56 10:08:33 08:15:3021 00:07:15 00:03:56 04:09:55 11:10:00 00:23:49 01:20:14 06:01:44 07:11:19 01:11:19 11:11:59 10:08:34 08:15:3022 00:08:14 00:15:47 04:10:00 11:11:06 00:24:03 01:20:55 06:01:40 07:11:15 01:11:15 11:12:02 10:08:36 08:15:2923 00:09:12 00:27:34 04:10:06 11:12:15 00:24:17 01:21:35 06:01:35 07:11:12 01:11:12 11:12:06 10:08:37 08:15:2924 00:10:11 01:09:21 04:10:13 11:13:27 00:24:31 01:22:14 06:01:31 07:11:11 01:11:11 11:12:09 10:08:39 08:15:2925 00:11:09 01:21:11 04:10:20 11:14:41 00:24:45 01:22:52 06:01:26 07:11:11 01:11:11 11:12:12 10:08:40 08:15:2826 00:12:08 02:03:06 04:10:28 11:15:57 00:24:59 01:23:29 06:01:22 07:11:13 01:11:13 11:12:15 10:08:41 08:15:2827 00:13:06 02:15:11 04:10:36 11:17:16 00:25:13 01:24:04 06:01:17 07:11:15 01:11:15 11:12:18 10:08:42 08:15:2728 00:14:04 02:27:30 04:10:45 11:18:36 00:25:27 01:24:38 06:01:13 07:11:16 01:11:16 11:12:21 10:08:44 08:15:2729 00:15:03 03:10:07 04:10:55 11:19:59 00:25:41 01:25:11 06:01:08 07:11:17 01:11:17 11:12:24 10:08:45 08:15:2630 00:16:01 03:23:06 04:11:05 11:21:23 00:25:56 01:25:42 06:01:04 07:11:17 01:11:17 11:12:27 10:08:46 08:15:26
    • 72 अप्रेल 2012 ििा रोगनाशक यंि/कििमनुष्य अपने जीिन क वितभडन िमय पर फकिी ना फकिी िाध्य या अिाध्य रोग िे ग्रस्ि होिा हं । ेउतिि उपिार िे ज्यादािर िाध्य रोगो िे िो मुवि तमल जािी हं , लेफकन कभी-कभी िाध्य रोग होकर भी अिाध्याहोजािे हं , या कोइ अिाध्य रोग िे ग्रतिि होजािे हं । हजारो लाखो रुपये खिा करने पर भी अतधक लाभ प्राप्त नहीं होपािा। िॉक्टर द्वारा फदजाने िाली दिाईया अल्प िमय क तलये कारगर िावबि होिी हं , एति स्स्थिी मं लाभा प्रातप्त क े ेतलये व्यवि एक िॉक्टर िे दिरे िॉक्टर क िक्कर लगाने को बाध्य हो जािा हं । ू े भारिीय ऋषीयोने अपने योग िाधना क प्रिाप िे रोग शांति हे िु वितभडन आयुिर औषधो क अतिररि यंि, े े ेमंि एिं िंि उल्लेख अपने ग्रंथो मं कर मानि जीिन को लाभ प्रदान करने का िाथाक प्रयाि हजारो िषा पूिा फकया था।बुवद्धजीिो क मि िे जो व्यवि जीिनभर अपनी फदनियाा पर तनयम, िंयम रख कर आहार ग्रहण करिा हं , एिे व्यवि ेको वितभडन रोग िे ग्रतिि होने की िंभािना कम होिी हं । लेफकन आज क बदलिे युग मं एिे व्यवि भी भयंकर रोग ेिे ग्रस्ि होिे फदख जािे हं । क्योफक िमग्र िंिार काल क अधीन हं । एिं मृत्यु तनस्श्चि हं स्जिे विधािा क अलािा े ेऔर कोई टाल नहीं िकिा, लेफकन रोग होने फक स्स्थिी मं व्यवि रोग दर करने का प्रयाि िो अिश्य कर िकिा हं । ूइि तलये यंि मंि एिं िंि क कशल जानकार िे योग्य मागादशान लेकर व्यवि रोगो िे मुवि पाने का या उिक प्रभािो े ु ेको कम करने का प्रयाि भी अिश्य कर िकिा हं । ज्योतिष विद्या क कशल जानकर भी काल पुरुषकी गणना कर अनेक रोगो क अनेको रहस्य को उजागर कर े ु ेिकिे हं । ज्योतिष शास्त्र क माध्यम िे रोग क मूलको पकिने मे िहयोग तमलिा हं , जहा आधुतनक तिफकत्िा शास्त्र े ेअिम होजािा हं िहा ज्योतिष शास्त्र द्वारा रोग क मूल(जड़) को पकि कर उिका तनदान करना लाभदायक एिं ेउपायोगी तिद्ध होिा हं । हर व्यवि मं लाल रं गकी कोतशकाए पाइ जािी हं , स्जिका तनयमीि विकाि क्रम बद्ध िरीक िे होिा रहिा हं । ेजब इन कोतशकाओ क क्रम मं पररििान होिा हं या विखंफिन होिा हं िब व्यवि क शरीर मं स्िास््य िंबंधी विकारो े ेउत्पडन होिे हं । एिं इन कोतशकाओ का िंबंध नि ग्रहो क िाथ होिा हं । स्जस्िे रोगो क होने क कारणा व्यविक े े े ेजडमांग िे दशा-महादशा एिं ग्रहो फक गोिर मं स्स्थिी िे प्राप्त होिा हं । ििा रोग तनिारण किि एिं महामृत्युंजय यंि क माध्यम िे व्यवि क जडमांग मं स्स्थि कमजोर एिं पीफिि े ेग्रहो क अशुभ प्रभाि को कम करने का काया िरलिा पूिक फकया जािकिा हं । जेिे हर व्यवि को ब्रह्मांि फक उजाा एिं े ापृ्िी का गुरुत्िाकषाण बल प्रभािीि किाा हं फठक उिी प्रकार किि एिं यंि क माध्यम िे ब्रह्मांि फक उजाा क े ेिकारात्मक प्रभाि िे व्यवि को िकारात्मक उजाा प्राप्त होिी हं स्जस्िे रोग क प्रभाि को कम कर रोग मुि करने हे िु ेिहायिा तमलिी हं । रोग तनिारण हे िु महामृत्युंजय मंि एिं यंि का बिा महत्ि हं । स्जस्िे फहडद ू िंस्कृ ति का प्रायः हर व्यविमहामृत्युंजय मंि िे पररतिि हं ।
    • 73 अप्रेल 2012किि क लाभ : े  एिा शास्त्रोि ििन हं स्जि घर मं महामृत्युंजय यंि स्थावपि होिा हं िहा तनिाि किाा हो नाना प्रकार फक आतध-व्यातध-उपातध िे रिा होिी हं ।  पूणा प्राण प्रतिवष्ठि एिं पूणा िैिडय युि ििा रोग तनिारण किि फकिी भी उम्र एिं जाति धमा क लोग िाहे े स्त्री हो या पुरुष धारण कर िकिे हं ।  जडमांगमं अनेक प्रकारक खराब योगो और खराब ग्रहो फक प्रतिकलिा िे रोग उिपडन होिे हं । े ू  कछ रोग िंक्रमण िे होिे हं एिं कछ रोग खान-पान फक अतनयतमििा और अशुद्धिािे उत्पडन होिे हं । किि ु ु एिं यंि द्वारा एिे अनेक प्रकार क खराब योगो को नष्ट कर, स्िास््य लाभ और शारीररक रिण प्राप्त करने हे िु े ििा रोगनाशक किि एिं यंि ििा उपयोगी होिा हं ।  आज क भौतिकिा िादी आधुतनक युगमे अनेक एिे रोग होिे हं , स्जिका उपिार ओपरे शन और दिािे भी े कफठन हो जािा हं । कछ रोग एिे होिे हं स्जिे बिाने मं लोग फहिफकिािे हं शरम अनुभि करिे हं एिे रोगो ु को रोकने हे िु एिं उिक उपिार हे िु ििा रोगनाशक किि एिं यंि लाभादातय तिद्ध होिा हं । े  प्रत्येक व्यवि फक जेिे-जेिे आयु बढिी हं िैिे-ििै उिक शरीर फक ऊजाा होिी जािी हं । स्जिक िाथ अनेक े े प्रकार क विकार पैदा होने लगिे हं एिी स्स्थिी मं उपिार हे िु ििारोगनाशक किि एिं यंि फलप्रद होिा हं । े  स्जि घर मं वपिा-पुि, मािा-पुि, मािा-पुिी, या दो भाई एक फह नििमे जडम लेिे हं , िब उिकी मािा क तलये े अतधक कष्टदायक स्स्थिी होिी हं । उपिार हे िु महामृत्युंजय यंि फलप्रद होिा हं ।  स्जि व्यवि का जडम पररतध योगमे होिा हं उडहे होने िाले मृत्यु िुल्य कष्ट एिं होने िाले रोग, तिंिा मं उपिार हे िु ििा रोगनाशक किि एिं यंि शुभ फलप्रद होिा हं ।नोट:- पूणा प्राण प्रतिवष्ठि एिं पूणा िैिडय युि ििा रोग तनिारण किि एिं यंि क बारे मं अतधक जानकारी हे िु हम ेिे िंपक करं । ा Declaration Notice  We do not accept liability for any out of date or incorrect information.  We will not be liable for your any indirect consequential loss, loss of profit,  If you will cancel your order for any article we can not any amount will be refunded or Exchange.  We are keepers of secrets. We honour our clients rights to privacy and will release no information about our any other clients transactions with us.  Our ability lies in having learned to read the subtle spiritual energy, Yantra, mantra and promptings of the natural and spiritual world.  Our skill lies in communicating clearly and honestly with each client.  Our all kawach, yantra and any other article are prepared on the Principle of Positiv energy, our Article dose not produce any bad energy. Our Goal  Here Our goal has The classical Method-Legislation with Proved by specific with fiery chants prestigious full consciousness (Puarn Praan Pratisthit) Give miraculous powers & Good effect All types of Yantra, Kavach, Rudraksh, preciouse and semi preciouse Gems stone deliver on your door step.
    • 74 अप्रेल 2012 मंि तिद्ध कििमंि तिद्ध किि को विशेष प्रयोजन मं उपयोग क तलए और शीघ्र प्रभाि शाली बनाने क तलए िेजस्िी मंिो द्वारा े ेशुभ महूिा मं शुभ फदन को िैयार फकये जािे हं . अलग-अलग किि िैयार करने कतलए अलग-अलग िरह क े ेमंिो का प्रयोग फकया जािा हं .  क्यं िुने मंि तिद्ध किि?  उपयोग मं आिान कोई प्रतिबडध नहीं  कोई विशेष तनति-तनयम नहीं  कोई बुरा प्रभाि नहीं  किि क बारे मं अतधक जानकारी हे िु े मंि तिद्ध किि िूतिििा काया तिवद्ध 4600/- ऋण मुवि 910/- विघ्न बाधा तनिारण 550/-ििा जन िशीकरण 1450/- धन प्रातप्त 820/- नज़र रिा 550/-अष्ट लक्ष्मी 1250/- िंि रिा 730/- दभााग्य नाशक ु 460/-िंिान प्रातप्त 1250/- शिु विजय 730/- * िशीकरण (२-३ व्यविक तलए) े 1050/-स्पे- व्यापर िृवद्ध 1050/- वििाह बाधा तनिारण 730/- * पत्नी िशीकरण 640/-काया तिवद्ध 1050/- व्यापर िृवद्ध 730/-- * पति िशीकरण 640/-आकस्स्मक धन प्रातप्त 1050/- ििा रोग तनिारण 730/- िरस्ििी (किा +10 क तलए) े 550/-निग्रह शांति 910/- मस्स्िष्क पृवष्ट िधाक 640/- िरस्ििी (किा 10 िकक तलए) े 460/-भूतम लाभ 910/- कामना पूतिा 640/- * िशीकरण ( 1 व्यवि क तलए) े 640/-काम दे ि 910/- विरोध नाशक 640/- रोजगार प्रातप्त 370/-पदं उडनति 910/- रोजगार िृवद्ध 550/-*किि माि शुभ काया या उदे श्य क तलये े GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION) (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
    • 75 अप्रेल 2012 YANTRA LIST EFFECTS Our Splecial Yantra 1 12 – YANTRA SET For all Family Troubles 2 VYAPAR VRUDDHI YANTRA For Business Development 3 BHOOMI LABHA YANTRA For Farming Benefits 4 TANTRA RAKSHA YANTRA For Protection Evil Sprite 5 AAKASMIK DHAN PRAPTI YANTRA For Unexpected Wealth Benefits 6 PADOUNNATI YANTRA For Getting Promotion 7 RATNE SHWARI YANTRA For Benefits of Gems & Jewellery 8 BHUMI PRAPTI YANTRA For Land Obtained 9 GRUH PRAPTI YANTRA For Ready Made House10 KAILASH DHAN RAKSHA YANTRA - Shastrokt Yantra11 AADHYA SHAKTI AMBAJEE(DURGA) YANTRA Blessing of Durga12 BAGALA MUKHI YANTRA (PITTAL) Win over Enemies13 BAGALA MUKHI POOJAN YANTRA (PITTAL) Blessing of Bagala Mukhi14 BHAGYA VARDHAK YANTRA For Good Luck15 BHAY NASHAK YANTRA For Fear Ending16 CHAMUNDA BISHA YANTRA (Navgraha Yukta) Blessing of Chamunda & Navgraha17 CHHINNAMASTA POOJAN YANTRA Blessing of Chhinnamasta18 DARIDRA VINASHAK YANTRA For Poverty Ending19 DHANDA POOJAN YANTRA For Good Wealth20 DHANDA YAKSHANI YANTRA For Good Wealth21 GANESH YANTRA (Sampurna Beej Mantra) Blessing of Lord Ganesh22 GARBHA STAMBHAN YANTRA For Pregnancy Protection23 GAYATRI BISHA YANTRA Blessing of Gayatri24 HANUMAN YANTRA Blessing of Lord Hanuman25 JWAR NIVARAN YANTRA For Fewer Ending JYOTISH TANTRA GYAN VIGYAN PRAD SHIDDHA BISHA26 YANTRA For Astrology & Spritual Knowlage27 KALI YANTRA Blessing of Kali28 KALPVRUKSHA YANTRA For Fullfill your all Ambition29 KALSARP YANTRA (NAGPASH YANTRA) Destroyed negative effect of Kalsarp Yoga30 KANAK DHARA YANTRA Blessing of Maha Lakshami31 KARTVIRYAJUN POOJAN YANTRA -32 KARYA SHIDDHI YANTRA For Successes in work33  SARVA KARYA SHIDDHI YANTRA For Successes in all work34 KRISHNA BISHA YANTRA Blessing of Lord Krishna35 KUBER YANTRA Blessing of Kuber (Good wealth)36 LAGNA BADHA NIVARAN YANTRA For Obstaele Of marriage37 LAKSHAMI GANESH YANTRA Blessing of Lakshami & Ganesh38 MAHA MRUTYUNJAY YANTRA For Good Health39 MAHA MRUTYUNJAY POOJAN YANTRA Blessing of Shiva40 MANGAL YANTRA ( TRIKON 21 BEEJ MANTRA) For Fullfill your all Ambition41 MANO VANCHHIT KANYA PRAPTI YANTRA For Marriage with choice able Girl42 NAVDURGA YANTRA Blessing of Durga
    • 76 अप्रेल 2012 YANTRA LIST EFFECTS43 NAVGRAHA SHANTI YANTRA For good effect of 9 Planets44 NAVGRAHA YUKTA BISHA YANTRA For good effect of 9 Planets45  SURYA YANTRA Good effect of Sun46  CHANDRA YANTRA Good effect of Moon47  MANGAL YANTRA Good effect of Mars48  BUDHA YANTRA Good effect of Mercury49  GURU YANTRA (BRUHASPATI YANTRA) Good effect of Jyupiter50  SUKRA YANTRA Good effect of Venus51  SHANI YANTRA (COPER & STEEL) Good effect of Saturn52  RAHU YANTRA Good effect of Rahu53  KETU YANTRA Good effect of Ketu54 PITRU DOSH NIVARAN YANTRA For Ancestor Fault Ending55 PRASAW KASHT NIVARAN YANTRA For Pregnancy Pain Ending56 RAJ RAJESHWARI VANCHA KALPLATA YANTRA For Benefits of State & Central Gov57 RAM YANTRA Blessing of Ram58 RIDDHI SHIDDHI DATA YANTRA Blessing of Riddhi-Siddhi59 ROG-KASHT DARIDRATA NASHAK YANTRA For Disease- Pain- Poverty Ending60 SANKAT MOCHAN YANTRA For Trouble Ending61 SANTAN GOPAL YANTRA Blessing Lorg Krishana For child acquisition62 SANTAN PRAPTI YANTRA For child acquisition63 SARASWATI YANTRA Blessing of Sawaswati (For Study & Education)64 SHIV YANTRA Blessing of Shiv Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & 65 SHREE YANTRA (SAMPURNA BEEJ MANTRA) Peace 66 SHREE YANTRA SHREE SUKTA YANTRA Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth 67 SWAPNA BHAY NIVARAN YANTRA For Bad Dreams Ending 68 VAHAN DURGHATNA NASHAK YANTRA For Vehicle Accident Ending VAIBHAV LAKSHMI YANTRA (MAHA SHIDDHI DAYAK SHREE Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & All 69 MAHALAKSHAMI YANTRA) Successes 70 VASTU YANTRA For Bulding Defect Ending 71 VIDHYA YASH VIBHUTI RAJ SAMMAN PRAD BISHA YANTRA For Education- Fame- state Award Winning 72 VISHNU BISHA YANTRA Blessing of Lord Vishnu (Narayan) 73 VASI KARAN YANTRA Attraction For office Purpose 74  MOHINI VASI KARAN YANTRA Attraction For Female 75  PATI VASI KARAN YANTRA Attraction For Husband 76  PATNI VASI KARAN YANTRA Attraction For Wife 77  VIVAH VASHI KARAN YANTRA Attraction For Marriage PurposeYantra Available @:- Rs- 255, 370, 460, 550, 640, 730, 820, 910, 1250, 1850, 2300, 2800 and Above….. GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 09338213418, 09238328785 Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- chintan_n_joshi@yahoo.co.in, gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
    • 77 अप्रेल 2012 GURUTVA KARYALAY NAME OF GEM STONE GENERAL MEDIUM FINE FINE SUPER FINE SPECIAL Emerald (पडना) 200.00 500.00 1200.00 1900.00 2800.00 & above Yellow Sapphire (पुखराज) 550.00 1200.00 1900.00 2800.00 4600.00 & above Blue Sapphire (नीलम) 550.00 1200.00 1900.00 2800.00 4600.00 & above White Sapphire (िर्द पुखराज) े 550.00 1200.00 1900.00 2800.00 4600.00 & above Bangkok Black Blue(बंकोक नीलम) 100.00 150.00 200.00 500.00 1000.00 & above Ruby (मास्णक) 100.00 190.00 370.00 730.00 1900.00 & above Ruby Berma (बमाा मास्णक) 5500.00 6400.00 8200.00 10000.00 21000.00 & above Speenal (नरम मास्णक/लालिी) 300.00 600.00 1200.00 2100.00 3200.00 & above Pearl (मोति) 30.00 60.00 90.00 120.00 280.00 & above Red Coral (4 jrh rd) (लाल मूंगा) 75.00 90.00 12.00 180.00 280.00 & above Red Coral (4 jrh ls mij) (लाल मूंगा) 120.00 150.00 190.00 280.00 550.00 & above White Coral (िर्द मूंगा) े 20.00 28.00 42.00 51.00 90.00 & above Cat’s Eye (लहिुतनया) 25.00 45.00 90.00 120.00 190.00 & above Cat’s Eye Orissa (उफििा लहिुतनया) 460.00 640.00 1050.00 2800.00 5500.00 & above Gomed (गोमेद) 15.00 27.00 60.00 90.00 120.00 & above Gomed CLN (तिलोनी गोमेद) 300.00 410.00 640.00 1800.00 2800.00 & above Zarakan (जरकन) 350.00 450.00 550.00 640.00 910.00 & above Aquamarine (बेरुज) 210.00 320.00 410.00 550.00 730.00 & above Lolite (नीली) 50.00 120.00 230.00 390.00 500.00 & above Turquoise (फर्रोजा) 15.00 30.00 45.00 60.00 90.00 & above Golden Topaz (िुनहला) 15.00 30.00 45.00 60.00 90.00 & above Real Topaz (उफििा पुखराज/टोपज) 60.00 120.00 280.00 460.00 640.00 & above Blue Topaz (नीला टोपज) 60.00 90.00 120.00 280.00 460.00 & above White Topaz (िर्द टोपज) े 60.00 90.00 120.00 240.00 410.00& above Amethyst (कटे ला) 20.00 30.00 45.00 60.00 120.00 & above Opal (उपल) 30.00 45.00 90.00 120.00 190.00 & above Garnet (गारनेट) 30.00 45.00 90.00 120.00 190.00 & above Tourmaline (िुमलीन) ा 120.00 140.00 190.00 300.00 730.00 & above Star Ruby (िुयकाडि मस्ण) ा 45.00 75.00 90.00 120.00 190.00 & above Black Star (काला स्टार) 15.00 30.00 45.00 60.00 100.00 & above Green Onyx (ओनेक्ि) 09.00 12.00 15.00 19.00 25.00 & above Real Onyx (ओनेक्ि) 60.00 90.00 120.00 190.00 280.00 & above Lapis (लाजिाि) 15.00 25.00 30.00 45.00 55.00 & above Moon Stone (िडद्रकाडि मस्ण) 12.00 21.00 30.00 45.00 100.00 & above Rock Crystal (स्र्फटक) 09.00 12.00 15.00 30.00 45.00 & above Kidney Stone (दाना फर्रं गी) 09.00 11.00 15.00 19.00 21.00 & above Tiger Eye (टाइगर स्टोन) 03.00 05.00 10.00 15.00 21.00 & above Jade (मरगि) 12.00 19.00 23.00 27.00 45.00 & above Sun Stone (िन तििारा) 12.00 19.00 23.00 27.00 45.00 & above 50.00 100.00 200.00 370.00 460.00 & above Diamond (हीरा) (Per Cent ) (Per Cent ) (PerCent ) (Per Cent) (Per Cent ) (.05 to .20 Cent )Note : Bangkok (Black) Blue for Shani, not good in looking but mor effective, Blue Topaz not Sapphire This Color of Sky Blue, For Venus
    • 78 अप्रेल 2012 BOOK PHONE/ CHAT CONSULTATION We are mostly engaged in spreading the ancient knowledge of Astrology, Numerology, Vastu and SpiritualScience in the modern context, across the world. Our research and experiments on the basic principals of various ancient sciences for the use of common man.exhaustive guide lines exhibited in the original Sanskrit textsBOOK APPOINTMENT PHONE/ CHAT CONSULTATION Please book an appointment with Our expert Astrologers for an internet chart . We would require your birthdetails and basic area of questions so that our expert can be ready and give you rapid replied. You can indicate thearea of question in the special comments box. In case you want more than one person reading, then please mentionin the special comment box . We shall confirm before we set the appointment. Please choose from : PHONE/ CHAT CONSULTATION Consultation 30 Min.: RS. 1250/-* Consultation 45 Min.: RS. 1900/-* Consultation 60 Min.: RS. 2500/-**While booking the appointment in AddvanceHow Does it work Phone/Chat ConsultationThis is a unique service of GURUATVA KARYALAY where we offer you the option of having a personalizeddiscussion with our expert astrologers. There is no limit on the number of question although time is ofconsideration.Once you request for the consultation, with a suggestion as to your convenient time we get back with aconfirmation whether the time is available for consultation or not.  We send you a Phone Number at the designated time of the appointment  We send you a Chat URL / ID to visit at the designated time of the appointment  You would need to refer your Booking number before the chat is initiated  Please remember it takes about 1-2 minutes before the chat process is initiated.  Once the chat is initiated you can commence asking your questions and clarifications  We recommend 25 minutes when you need to consult for one persona Only and usually the time is sufficient for 3-5 questions depending on the timing questions that are put.  For more than these questions or one birth charts we would recommend 60/45 minutes Phone/chat is recommended  Our expert is assisted by our technician and so chatting & typing is not a bottle neckIn special cases we dont have the time available about your Specific Questions We will taken some time forproperly Analysis your birth chart and we get back with an alternate or ask you for an alternate.All the time mentioned is Indian Standard Time which is + 5.30 hr ahead of G.M.T.Many clients prefer the chat so that many questions that come up during a personal discussion can beanswered right away.BOOKING FOR PHONE/ CHAT CONSULTATION PLEASE CONTECT GURUTVA KARYALAY Call Us:- 91+9338213418, 91+9238328785. Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com, chintan_n_joshi@yahoo.co.in,
    • 79 अप्रेल 2012 िूिना पविका मं प्रकातशि िभी लेख पविका क अतधकारं क िाथ ही आरस्िि हं । े े लेख प्रकातशि होना का मिलब यह किई नहीं फक कायाालय या िंपादक भी इन वििारो िे िहमि हं। नास्स्िक/ अवििािु व्यवि माि पठन िामग्री िमझ िकिे हं । पविका मं प्रकातशि फकिी भी नाम, स्थान या घटना का उल्लेख यहां फकिी भी व्यवि विशेष या फकिी भी स्थान या घटना िे कोई िंबंध नहीं हं । प्रकातशि लेख ज्योतिष, अंक ज्योतिष, िास्िु, मंि, यंि, िंि, आध्यास्त्मक ज्ञान पर आधाररि होने क कारण े यफद फकिी क लेख, फकिी भी नाम, स्थान या घटना का फकिी क िास्िविक जीिन िे मेल होिा हं िो यह माि े े एक िंयोग हं । प्रकातशि िभी लेख भारतिय आध्यास्त्मक शास्त्रं िे प्रेररि होकर तलये जािे हं । इि कारण इन विषयो फक ित्यिा अथिा प्रामास्णकिा पर फकिी भी प्रकार फक स्जडमेदारी कायाालय या िंपादक फक नहीं हं । अडय लेखको द्वारा प्रदान फकये गये लेख/प्रयोग फक प्रामास्णकिा एिं प्रभाि फक स्जडमेदारी कायाालय या िंपादक फक नहीं हं । और नाहीं लेखक क पिे फठकाने क बारे मं जानकारी दे ने हे िु कायाालय या िंपादक फकिी भी े े प्रकार िे बाध्य हं । ज्योतिष, अंक ज्योतिष, िास्िु, मंि, यंि, िंि, आध्यास्त्मक ज्ञान पर आधाररि लेखो मं पाठक का अपना वििाि होना आिश्यक हं । फकिी भी व्यवि विशेष को फकिी भी प्रकार िे इन विषयो मं वििाि करने ना करने का अंतिम तनणाय स्ियं का होगा। पाठक द्वारा फकिी भी प्रकार फक आपत्ती स्िीकाया नहीं होगी। हमारे द्वारा पोस्ट फकये गये िभी लेख हमारे िषो क अनुभि एिं अनुशंधान क आधार पर तलखे होिे हं । हम फकिी भी व्यवि े े विशेष द्वारा प्रयोग फकये जाने िाले मंि- यंि या अडय प्रयोग या उपायोकी स्जडमेदारी नफहं लेिे हं । यह स्जडमेदारी मंि-यंि या अडय प्रयोग या उपायोको करने िाले व्यवि फक स्ियं फक होगी। क्योफक इन विषयो मं नैतिक मानदं िं , िामास्जक , कानूनी तनयमं क स्खलाफ कोई व्यवि यफद नीजी स्िाथा पूतिा हे िु प्रयोग किाा हं अथिा े प्रयोग क करने मे िुफट होने पर प्रतिकल पररणाम िंभि हं । े ू हमारे द्वारा पोस्ट फकये गये िभी मंि-यंि या उपाय हमने िैकिोबार स्ियं पर एिं अडय हमारे बंधगण पर प्रयोग फकये हं ु स्जस्िे हमे हर प्रयोग या मंि-यंि या उपायो द्वारा तनस्श्चि िफलिा प्राप्त हुई हं । पाठकं फक मांग पर एक फह लेखका पूनः प्रकाशन करने का अतधकार रखिा हं । पाठकं को एक लेख क पूनः े प्रकाशन िे लाभ प्राप्त हो िकिा हं । अतधक जानकारी हे िु आप कायाालय मं िंपक कर िकिे हं । ा (िभी वििादो कतलये किल भुिनेिर डयायालय ही माडय होगा।) े े
    • 80 अप्रेल 2012 FREE E CIRCULAR गुरुत्ि ज्योतिष पविका अप्रैल -2012िंपादकतिंिन जोशीिंपकागुरुत्ि ज्योतिष विभागगुरुत्ि कायाालय92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)INDIAफोन91+9338213418, 91+9238328785ईमेलgurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,िेबhttp://gk.yolasite.com/http://www.gurutvakaryalay.blogspot.com/
    • 81 अप्रेल 2012 हमारा उदे श्यवप्रय आस्त्मय बंध/ बफहन ु जय गुरुदे ि जहाँ आधुतनक विज्ञान िमाप्त हो जािा हं । िहां आध्यास्त्मक ज्ञान प्रारं भ हो जािा हं , भौतिकिा का आिरण ओढे व्यविजीिन मं हिाशा और तनराशा मं बंध जािा हं , और उिे अपने जीिन मं गतिशील होने क तलए मागा प्राप्त नहीं हो पािा क्योफक ेभािनाए फह भििागर हं , स्जिमे मनुष्य की िफलिा और अिफलिा तनफहि हं । उिे पाने और िमजने का िाथाक प्रयाि ही श्रेष्ठकरिफलिा हं । िफलिा को प्राप्त करना आप का भाग्य ही नहीं अतधकार हं । ईिी तलये हमारी शुभ कामना िदै ि आप क िाथ हं । आप ेअपने काया-उदे श्य एिं अनुकलिा हे िु यंि, ग्रह रत्न एिं उपरत्न और दलभ मंि शवि िे पूणा प्राण-प्रतिवष्ठि तिज िस्िु का हमंशा ू ु ाप्रयोग करे जो १००% फलदायक हो। ईिी तलये हमारा उदे श्य यहीं हे की शास्त्रोि वितध-विधान िे वितशष्ट िेजस्िी मंिो द्वारा तिद्धप्राण-प्रतिवष्ठि पूणा िैिडय युि िभी प्रकार क यडि- किि एिं शुभ फलदायी ग्रह रत्न एिं उपरत्न आपक घर िक पहोिाने का हं । े े िूया की फकरणे उि घर मं प्रिेश करापािी हं । जीि घर क स्खड़की दरिाजे खुले हं। े GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION) (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
    • 82 अप्रेल 2012APR2012