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KG Gas: The Flame Of Truth (HINDI)
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KG Gas: The Flame Of Truth (HINDI)

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Documents aimed to assist you in navigating the various claims and counter claims on KG D6 in the context of India’s energy security

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  • 1. Page 1 of 17  के जी गैस : स य क मशाल
  • 2. Page 2 of 17  गैस मू य बढ़ाने से सबसे बड़ा लाभ सरकार वा म व वाले ओएनजीसी को होगा, आरआईएल को नह ं 1. देश म फलहाल रोज़ाना कर ब 80 एमएमएससीएमडी गैस क खपत होती है. 2. इसम कर ब 60 एमएमएससीएमडी या कु ल खपत का कर ब 75 फ सद ओएनजीसी और ओआईएल बेचते ह. शेष ब बाक अ य कं प नय वारा क जाती है. 3. हाल ह म ओएनजीसी ने अपने व त य म कहा है क गैस क मत म वृ से ओएनजीसी को त वष 16 हजार करोड़ पए अ धक मलगे. 4. आरआईएल वारा संचा लत के जीडी6 लॉक म वतमान म उ पादन के वल 13 एमएमएससीएमडी है. इस लॉक म आरआईएल का शेयर 60 फ सद है. इस तरह आरआईएल के उ पादन का ह सा के वल कर ब 8 एमएमएससीएमडी बनता है. 5. इस कार अगर ओएनजीसी को कर ब 55 एमएमएससीएमडी घरेलू गैस म उ पादन के बाद क मत बढ़ने पर 16 हजार करोड़ यादा मलगे तो के वल 8 एमएमएससीएमडी उ पादन करने वाले आरआरएल को कस ग णत से 54 हजार का बढ़ा हुआ लाभ मल सकता है? 6. गैस मू य को 8 डॉलर त एमएमबीट यू करने के बाद आरआईएल को तवष कर ब 2400 करोड़ का राज व मलेगा. इसम से भी आरआईएल को सरकार को टै स और रॉय ट देनी होती है. शेष रा श भी आरआईएल का लाभ नह ं है य क ईएंडपी से टर म अपने नवेश के कारण कं पनी को पूर रा श वसूल नह ं हो सक है. आरआईएल और इसके सहयो गय ने भारत म ईएंडपी से टर म कर ब 12.5 ब लयन डॉलर का नवेश कया है. 7. इस कार यह कहना क गैस मू य वृ से आरआईएल को त वष 54 हजार करोड़ का लाभ होगा, पूर तरह से नराधार है और यह मा दु चार है. ** एमएमएसडी – म लयन टडड यू बक मीटर त दन
  • 3. Page 3 of 17  क मत न बढ़ने से देश को एक लाख 20 हजार करोड़ का नुकसान होगा। िजसका फायदा सफ वदेशी कं प नय को मलेगा. 1. आज भारत के मूलभूत े म घरेलू गैस का उपभोग इस तरह कया जाता है: - उवरक – 31 एमएमएससीएमडी - बजल –24 एमएमएससीएमडी - कु ल – 55 एमएमएससीएमडी 2. एक बार जब घरेलू गैस का मू य 8 डॉलर त एमएमबीट यू (एनज यू नट) हो जाता है तो त एमएमबीट यू 4 डॉलर क वृ से मूलभूत े म धन लागत क बढ़ोतर इस तरह सामने आएगी: - उवरक – 31 एमएमएससीएमडीअथात त वष 9300 करोड़ पए - बजल – 24 एमएमएससीएमडीअथात त वष 7200 करोड़ पए - कु ल – 55 एमएमएससीएमडीअथात त वष 16500 करोड़ पए 3. पर असल म इन े म मांग 55 एमएमएससीएमडी से कह ं यादा है. ऐसा अनुमा नत है क वष 2015-16 म इन े क मांग 169 एमएमएससीएमडी होगी, जो क न न कार है: मांग (एमएमएससीएमडी) 2015-16 - उवरक 57 - बजल 112 - कु ल 169 4. ओएनजीसी के हाल के बयान के आधार पर कहा जा सकता है क के जी बे सन क उनक सबसे बड़ी खोज भी 8 डॉलर त एमएमबीट यू पर लाभकार नह ं होगी और महानद बे सन के कु छ फ स के लए तो 11 डॉलर त एमएमबीट यू भी शायद कम पड़गे. इस कार अब घरेलू गैस के मू य को नह ं बढ़ाया जाता है तो मौजूदा उ पादन म भी कोई वृ नह ं होगी और वतमान फ स म गरावट जार रहेगी.
  • 4. Page 4 of 17  5. अगर घरेलू गैस उपल ध नह ं होती है तो उवरक और बजल जैसे मूलभूत े को वैकि पक धन पर नभर रहना होगा. इसका सबसे स ता वक प एलएनजी ( वदेश से मंगाई गई तरल ाकृ तक गैस) होगा (ले कन अगर एलएनजी भी उपल ध नह ं होती है तो ने था जैसे और अ धक महंगे वक प का उपयोग करना पड़ेगा). गैस क मांग को पूरा करने के लए हम न न ल खत एलएनजी वदेश से मंगानी पड़ेगी. वष 2015-16 म मांग(एमएमएससीए मडीम) घरेलू आपू तएमएमएससी एमडी* एलएनजी आयात क ज रत(एमएमएस सीएमडी म) - उवरक 57 31 26 - बजल 112 24 88 - कु ल 169 55 114 (*ईएंडपी े म कोई नवेश न होने क सूरत म उ पादन गरावट को नजरअंदाज करते हुए) 6. आज देश म एलएनजी आयात का मू य 14 डॉलर से 19 डॉलर त एमएमबीट यू है. अगर 14 डॉलर को ह आयात का मू य मान लया जाए तो भी मूलभूत े म गैस क आपू त के लए आया तत एलएनजी क लागत 1 लाख 20 हजार करोड़ तवष होगी. 7. इस लए, ईएंडपी े म बाज़ार मू य आधा रत यव था के नह ं होने से देश म नवेश का सह माहौल नह ं बनेगा. देश म इससे सालाना 120,000 करोड़ पए का नुकसान होगा.
  • 5. Page 5 of 17  ऐसा आरोप लगाया जा रहा है क आरआईएल ने भावी मू य वृ से लाभ उठाने के लए जान-बूझकर उ पादन म कमी क . ऐसा करना तकनीक प से असंभव है. 1. मौजूदा फ ड म उ पादन रोकने के कसी भी यास से भा वत कु ओं म त काल दाब म असामा य उतार-चढ़ाव ह गे. 2. येक कु आं ऐसे उ च दबाव वाले ेशर कु कर क तरह है जहां तेल और गैस लाख वष से पक रहे ह. कसी एक कु एं म गैस को रोक तो अगले कु एं के दबाव म तुरंत बदलाव हो जाएगा. 3. साधारण श द म कह तो य द गैस सं ह त क जा रह है तो उ पादन करने वाले सभी  कुं ओं म दाब एक साथ कम नह ं कया जा सकता य क दाब म कमी इस बात का प ट संके त है क ेशर कु कर क शि त कम हो रह है. 4. के जी डी6 लॉक के डी1 और डी3 फ स म उ पादन म गरावट जलाशयी ज टलता और भौगो लक आ चय के कारण है और यह जमाखोर के कारण नह ं हुआ है य क ऐसा करना तकनीक प से असंभव है. 5. के जी डी6 लॉक के डी1 और डी3 फ ड से उपल ध गैस क मा ा को चेक करने के लए आरआईएल एक अंतररा य वशेष नयु त करने पर जोर दे रह है. इससे ि थ त प ट हो जाएगी. 6. सतह के 10,000 फ ट नीचे समु के गभ म कतनी गैस है यह कोई भी पूण नि चतता से नह ं बता सकता इस लए जलाशयी अचरज इस उ योग म आम बात है. इसके चलते अनुमा नत और वा त वक उ पादन म अंतर हो जाना कोई अनूठ बात नह ं है. भारत म और वदेश म भी इसके पया त उदाहरण ह: i. नीलम े (जहां 130,000 बैरल त दन का संभा वत उ पादन सोचा गया था वहां उ पादन ारंभ होने के बाद दो ह वष म 30,000 बैरल त दन पर आ गया था) ii. स म अ ध ह त इंपी रयल ऑइल (जहां 80,000 बैरल त दन संभा वत उ पादन के मुकाबले वतमान उ पादन के वल 15,000 बैरल त दन है) iii. के जी बे सन म ओएनजीसी तट य / गहरे पानी वाले नामांकन लॉक (जहां अपे त उ पादन 16 एमएमएससीएमडी था ले कन कभी भी 6-7 एमएमएससीएमडी से आगे नह ं जा पाया और अब 3 एमएमएससीएमडी से भी कम रह गया है
  • 6. Page 6 of 17  iv. कै बे बे सन म ल मी और गौर े जहां 2 से 3 वष के बाद ह उ पादन म जबरद त कमी आ गई है
  • 7. Page 7 of 17  भारत म गैस उ पादन क लागत 1 डॉलर त एमएमबीट यू कभी भी नह ं हो सकती 1. ओएनजीसी वतमान म गैस के वल भू म-आधा रत और उथले पानी वाले लॉक से ह उ पादन करता है. ओएनजीसी कोई भी उ पादन गहरे पानी म ि थत लॉक से नह ं हो रहा है. जानने वाल बात यह है क गहरे पानी वाले लॉक से गैस उ पादन मुि कल ह नह ं बि क बेहद मंहगा होता है. आरआईएल का गैस उ पादन जो के जी डी6 लॉक से होता है वो गहरे पानी म ि थत है. 2. ओएनजीसी के चेयरमैन ने हाल ह म कहा था क ओएनजीसी को इन भू म और उथले पानी वाले लॉक से उ पादन क लागत कर ब 4 डॉलर त एमएमबीट यू आती है. गैस के वतमान मू य जो क 4.2 डॉलर त एमएमबीट यू है उस पर ओएनजीसी को नह ं के बराबर लाभ होता है. 3. इसके अलावा, ओएनजीसी के चेयरमैन ने कहा है क वह के जी बे सन म अपने गहरे पानी वाले लॉक से 4.2 डॉलर त एमएमबीट यू के वतमान मू य पर कसी भी कार क गैस का उ पादन नह ं कर सकगे. के जी बे सन म ओएनजीसी क ‘व श ट’ गैस खोज 6.7 डॉलर त एमएमबीट यू पर ह यवहाय होगी. इसके अलावा महानद म क गई उसक कु छ खोज 11 डॉलर त एमएमबीट यू पर ह यवहाय ह गी. 4. यह सवमा य त य है क डीजीएच ने कई गैस खोज को अ वीकार कर दया है य क वे 4.2 डॉलर त एमएमबीट यू के वतमान गैस मू य पर यवहाय नह ं ह. 5. ओएनजीसी के उपरो त बयान से यह प ट है क गहरे पानी वाले लॉक से गैस के उ पादन क लागत 1 डॉलर त एमएमबीट यू कभी भी नह ं हो सकती. 6. कु छ न हत वाथ त व वारा यह कहा गया है क के जी डी6 लॉक से उ पादन क लागत 1 डॉलर त एमएमबीट यू से कम है, िजसम उ ह ने आरआईएल वारा डीजीएच को लखे गए प का उ लेख कया है; a. उ पादन क यह क थत लागत कु छ और नह ं बि क वेल हैड और वतरण थल के बीच क उ पादन प चात क लागत ह जो क 2009-10 म उस वष के लए 0.89 डॉलर त एमएमबीट यू अनुमा नत थीं.
  • 8. Page 8 of 17  b. इस आंकड़े का अनुमान नकालना इस लए आव यक था य क रॉय ट का भुगतान वेल हैड मू य पर कया जाना था िजसे 4.2 डॉलर त एमएमबीट यू के वीकृ त मू य म से वेल हैड प चात ् क लागत (0.89 डॉलर त एमएमबीट यू) को घटाकर नकाला जाना था. c. वेल हैड और वतरण थल के बीच क उ पादन प चात ् लागत उ पादन क कु ल लागत का एक घटक मा है. उ पादन लागत क गणना के लए वेल हैड और वतरण थल के बीच क उ पादन लागत (जो उस समय 0.89 डॉलर त एमएमबीट यू अनुमा नत क गई थी) के अलावा,  खोज,  मू य नधारण,  वकास,  उ पादन एवं रखरखाव म कए जाने वाले तमाम खच को भी साथ म जोड़ना होगा. उदाहरण के लए; कु एं खोदने क लागत, वक-ओवर खच स हत उ पादन खच और अ वेषण आ द. d. इसके अलावा, आरआईएल और उसके भागीदार ने व तीय वष 2014 तक गैर के जी डी6  लॉक पर लगभग 4 ब लयन डॉलर खच कए ह िजसम छोड़े गए लॉक ( वफल अ वेषण) पर 1.9 ब लयन डॉलर खच कए ह और अ य एनईएलपी लॉक पर 1.8 ब लयन डॉलर अ त र त खच होने का अनुमान है, जहां अभी भी तलाभ नि चत नह ं है.
  • 9. Page 9 of 17  जैसा क आरोप है, गैस मू य बढ़ोतर से महंगाई नह ं बढ़ेगी. गैस मू य म वृ को सनसनीखेज बनाने और देश क अथ यव था और अ य े पर इसके भाव को न हत वाथ त व ने बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बताया है. उनका कहना है क गैस क क मत बढ़ने से उवरक , बजल , खा य पदाथ और कु कं ग गैस क क मत बढ़गी िजसका आम आदमी पर बुरा असर पड़ेगा. गैस मू य वृ का इन े पर असर मामूल होगा और इसे नीचे व ले षत कया गया है: 1. उवरक े – a. यह तक दया गया है क गैस मू य म बढ़ोतर होने से खा या न क क मत बढ़ेगी य क उवरक क बढ़ोतर के फल व प कसान खा या न मू य बढ़ाएंगे. b. हाल के वष म देश म उवरक क क मत म वृ आयात बढ़ने और इसक घरेलू उ पादन लागत म बढ़ोतर होने के कारण हो रह है. c. इसके बावजूद सरकार ने कसान के लए उवरक क क मत नह ं बढ़ाई ह और इस वृ को सि सडी से पूरा कर दया गया है. d. वतमान म उवरक े कर ब 31 एमएमएससीएमडी गैस का उपयोग करता है. गैस मू य म वृ के कारण सरकार को 9300 करोड़ क सि सडी देनी होगी, िजसका भुगतान ओएनजीसी/ओआईएल से मलने वाल अ त र त आय तथा टै स और रॉय ट से पूरा कया जा सकता है. इससे उवरक के दाम बढ़ाने क ज रत नह ं पड़ेगी. e. हाल ह म ओएनजीसी ने कहा है क अ ैल म जब गैस क मत बढ़गी तो इससे त वष 16 हजार करोड़ क बढ़ हुई आय होगी. f. इसके अलावा, सरकार को अ य उ पादक और टै स तथा रॉय ट से अ त र त आय होगी. g. अथात कु ल मलाकर सरकार का राज व बढ़ेगा. इस कार सरकार बढ़ते राज व से सि सडी म बढ़ोतर को आसानी से पूरा कर सकती है.
  • 10. Page 10 of 17  2. बजल े – a. देश म गैस आधा रत बजल उ पादन कु ल बजल उ पादन का 5.8 फ सद से भी कम है. शेष बजल उ पादन कोयले, पन बजल या परमाणु संयं से होता है. इस लए यह बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहा गया है क गैस मू य क बढ़ोतर से बजल क दर म बहुत अ धक बढ़ोतर होगी. 3. एलपीजी – a. देश म खपत होने वाल एलपीजी का मा 12% ह ऐसा है जो गैस से बनाया जाता है. शेष एलपीजी का उ पादन रफाइनर ज़ म क चे तेल से होता है. इसके अलावा यह आयात क जाती है. b. आरआईएल के के जीडी6 लॉक से एलपीजी का उ पादन नह ं कया जा सकता है य क एलपीजी का उ पादन करने के लए ज र सी3, सी4 ै शन इस कु एं से नकलने वाल गैस म मौजूद नह ं ह िजससे एलपीजी का उ पादन कया जा सके . आरआईएल पर इस मामले म इस तरह के आरोप के वल एक दु चार ह. c. गैस आधा रत एलपीजी का उ पादन मु य प से ओएनजीसी करती है. चूं क ओएनजीसी अपनी गैस से ह एलपीजी का उ पादन करती है, इस लए इसक एलपीजी उ पादन क लागत नह ं बढ़ेगी. 4. सीएनजी/ खा य मू य – a. यह तक दया गया है क गैस क क मत बढ़ने से महंगाई बढ़ेगी य क व तुओं क ढुलाई क लागत बढ़ जाएगी. b. इ तेमाल कए जाने वाले सभी वाहन म से सफ 3% ह सीएनजी से चलते ह. c. वा तव म खा य और अ य ज र सामान को ले जाने वाला कोई भी क सीएनजी पर नह ं चलता है. d. उ लेखनीय है क सरकार ने हाल ह म सभी सट गैस वतरण कं प नय क घरेलू गैस आपू त म बढ़ोतर क है. द ल म आईजीएल, मुंबई म एमजीएल, अहमदाबाद आ द म गुजरात गैस क सीएनजी क मांग को पूरा करने के लए सरकार ने उ ह घरेलू गैस उपल ध कराई है.
  • 11. Page 11 of 17  e. यह मानते हुए क 4 डॉलर के आधार मू य पर य द ड यूशन, प रवहन और अ य यय पर 3.5 डॉलर और जोड़ दए जाते ह तब द ल जैसे शहर म कु ल लागत 7.5 डॉलर त एमएमबीट यू (23 पए त कलो ाम) होती है, जब क आज सीएनजी 12 डॉलर त एमएमबीट यू (35 पए त कलो ाम) बेची जा रह है. इस लए खुदरा उपभो ता के लए मू य बढ़ाए बना ह बढ़ हुई लागत को वहन करना संभव है.
  • 12. Page 12 of 17  जब सभी क चा तेल उ पादक ( नजी े स हत) को बाज़़ार मू य मलता है तो गैस उ पादक को बाज़़ार मू य देने से मना य कया जा रहा है? 1. भारत क अथ यव था वतमान म तेल आधा रत है, य क खपत होने वाले हाइ ोकाबन म से 75% ह सा तेल का है जब क गैस का ह सा के वल 25% है. 2. भारत ऊजा के मामले म आ म नभर नह ं है और वह अ धकांशत:, वशेषकर हाइ ोकाबन े म आयात पर नभर है. जहां तेल म आ म नभरता लगभग 23% है, वह ं गैस म यह वतमान म लगभग 60% है. 3. भारत क आ म नभरता बढ़ाने के लए, सरकार ने ईएंडपी े म तभा गता के लए नजी े को आमं त कया था. इसके लए सरकार वारा नजी े को ी- एनईएलपी के मा यम से खोजे गए े तथा एनईएलपी के मा यम से अ वेषण लॉक क नीलामी का ताव दया गया था. 4. भारत वतमान म गैस क तुलना म तेल का उ पादन अ धक करता है. जब क देश म तेल का वतमान उ पादन लगभग 38 एमएमट ओई है, ाकृ तक गैस का उ पादन लगभग 30 एमएमट ओई (उ पादक क आंत रक खपत को शा मल कर) है. 5. तेल और गैस के दोन ह मामल म नजी े का और सावज नक े का उ पादन लगभग समान है. दोन ह मामल म यह कर ब 25 फ सद है. तेल और गैस क क मत का असर सरकार क सि सडी पर पड़ता है. वा तव म सरकार डीज़ल, एलपीजी, के रो सन और पे ोल पर सि सडी देती है, जब क ये सभी तेल से पैदा कए जाते ह. गैस के मामले म सरकार के वल उवरक पैदा करने वाल गैस को ह सि सडी देती है. वा तव म गैस से संबं धत सि सडी तेल के मुकाबले 1/5 ह सा ह होती है. 6. दोन का ह उ पादन नजी े वारा सरकार के साथ मलकर समान पीएससी के अंतगत कया जाता है. 7. तेल और गैस दोन ह रा य संसाधन ह.
  • 13. Page 13 of 17  8. तो फर, ऐसा य है क देश म के यन, बीजी, ओएनजीसी, ओआईएल जैसे सभी तेल उ पादक को उनके उ पादन के लए अंतररा य आयात समता से जुड़े हुए तेल मू य ा त होते ह जो क वतमान म 18+ डॉलर त एमएमबीट यू से भी अ धक ह. वह ं सभी तरह के सवाल के वल गैस मू य के संबंध म ह उठाए जा रहे ह. यान देने वाल बात यह है क गैस के मू य सरकार वारा ऐसे फ़ॉमूला के आधार पर एकतरफा तय कए गए ह िजनसे घरेलू गैस उ पादक को एलएनजी क आयात समता के 50% से भी कम मलेगा. 9. यह प ट है क ये सार बात महज दु चार ह.
  • 14. Page 14 of 17  एनट पीसी को 2.34 डॉलर त एमएमबीट यू पर गैस देने का कोई अनुबंध नह ं हुआ था 1. वष 2003 म, आरआईएल ने एनट पीसी वारा आयोिजत टडर या म एनट पीसी को 2.34 डॉलर त एमएमबीट यू क बोल लगाई थी. 2. आरआईएल ने उसी समय एनट पीसी को बाज़ार मू य क बोल लगाई थी. वष 2003 म तेल क मत 25 डॉलर त बैरल थीं (इस लए 2.34 डॉलर त एमएमबीट यू जो क उस समय के तेल मू य का लगभग 9% था) और एलएनजी के मू य लगभग 3.5 डॉलर त एमएमबीट यू थे. इस लए बोल उस समय क बाज़ार ि थ तय पर आधा रत थी और यह फ ड क यावहा रकता या आ थक ि थ त पर आधा रत नह ं थी. 3. एनट पीसी के साथ कोई भी अनुबंध नह ं था के वल बोल लगाई गई थी. वा तव म, एनट पीसी ने आरआईएल वारा 2.34 डॉलर पर ह ता रत उस अनुबंध को वीकार नह ं कया िजसके अंतगत आरआईएल उस मू य पर आपू त करने के लए तब थी, इसके बजाय एनट पीसी कोट चल गई. 4. 2007 म सरकार वारा 4.2 डॉलर क मू य वीकृ त बाज़ार मू य क खोज पर आधा रत थी. उस समय भी तेल का मू य लगभग 60 डॉलर त बैरल (इस लए 4.2 डॉलर त एमएमबीट यू, उस समय तेल मू य का 8% था) था और भारत म एलएनजी के मू य 4 से 5 डॉलर त एमएमबीट यू (इस लए 4.2 डॉलर त एमएमबीट यू उस समय एलएनजी मू य का 80 से 100% था)
  • 15. Page 15 of 17  गैस क मत म बढ़ोतर के बावजूद, घरेलू ाकृ तक गैस देश म सबसे स ती बनी रहेगी त डॉलर एमएमबीट यू म व भ न धन क दर. धन डॉलर/ त एमएमबीट यू आधा रत 1 सि सडाइ ड एलपीजी 12 पए 450 त स लंडर 2 गैर-सि सडाइ ड एलपीजी 33 पए 1134 त स लंडर 3 सीएनजी (नई द ल ) 12 पए 35 त क ा 4 सीएनजी (मुंबई) 13 पए 39 त क ा 5 नै था 24 पए 66000 त टन 6 डीजल (सि सडाइ ड) मुंबई 20 पए 63 त ल टर 7 डीजल (सि सडाइ ड) द ल 18 पए 55 त ल टर 8 यूल आइल 17 पए 44000 त टन 9 के रो सन (सि सडाइ ड) 4.5 पए 15 त ल टर 10 पॉट एलएनजी 19 डॉलर 19 त एमएमबीट यू 11 घरेलू ाकृ तक गैस 8  
  • 16. Page 16 of 17  सरकार ने और अ धक नवेश यय क अनुम त देकर आरआईएल को 1.2 लाख करोड़ (20 ब लयन डॉलर) का भार लाभ पहुंचाया है. कै ग ने द पणी क है क इस बात के माण ह क आरआईएल अपने पूंजी यय म गो ड ले टंग कर रह है : 1. नवेश लागत म वृ हुई य क रज स और व तुओं, माल और सेवाओं क क मत म 2003 से 2006 के दौरान अंतररा य तर पर 200 से 300 फ सद क बढ़ोतर हुई थी. 2. वष 2003 से 2008 के दौरान कै ग ऑ डट म एक बार भी गो ड ले टंग श द का कह ं उपयोग नह ं कया गया है. इसने इसे अ त र त यय क मा ा नह ं बताई वरन इसने के वल खर द याओं पर ट प णयां क ह. पीएसी ने कै ग से कहा क यह क थत अ त र त यय क मा ा बताए, िजस पर क कै ग ने आ व त कया था क यह आगे के वष के आॉ डट के दौरान ऐसा करेगा. वष 2008 से आगे के वष का ऑ डट फलहाल चल रहा है. 3. यहां लागत और लाभ म फक करना ज़ र है. अगर कसी ने लागत को फज तर के से नह ं दखाया गया है तो वे अ या शत लाभ कै से मानी जा सकती है. कसी ने भी आरआईएल पर एक बार भी ऐसा आरोप नह ं लगाया है. एक फॉर सक ऑ डट से इस बात क पहले ह पुि ट क गई है क सभी यय वा तव म कए गए थे और इन सभी खच का भुगतान असंबं धत तीसरे प को कया गया था.
  • 17. Page 17 of 17  आरोप है क कु छ मं य को पे ो लयम मं ी के पद से इस लए हटाया गया य क वे आरआईएल के प म नह ं थे. अब आरआईएल को लाभ पहुंचाने के लए गैस क क मत म बढ़ोतर क गई है: 1. यह आरोप लगाया जाता है क ी म णशंकर अ यर को पे ो लयम मं ी के पद से हटाया गया था य क उ ह ने नवेश क लागत बढ़ाने क अनुम त नह ं द थी. यह सफ दु चार है य क ी म णशंकर अ यर ने जनवर 2006 म मं ालय छोड़ा था जब क संशो धत वकास योजना को पहल बार 10 माह बाद अ टूबर 2006 म पेश कया गया था. 2. यह आरोप लगाया जाता है क ी जयपाल रे डी को हटाया गया था य क वे आरआईएल को गैस क अ धक क मत देने के प म नह ं थे. यह बात त यगत प से गलत है. ी मोइल नह ं वरन ी जयपाल रे डी ने 31 मई 2012 म डॉ. रंगराजन स म त क नयुि त का अनुरोध कया था. स म तय क सफा रश पर सीसीईए ने संशो धत गैस मू य को अनुम त द थी. क मत का संशोधन अ ैल 2014 म कया जाना है. 3. एक आरोप यह भी है क कां ेस के नेतृ व वाल यूपीए सरकार ने रलायंस इंड ज ल. को लाभ पहुंचाते हुए गैस क क मत 8.4 डॉलर कर द ं य क इसक नगाह 2014 के आम चुनाव पर है और भाजपा ने भी चु पी साध रखी है य क इसे भी चुनाव के लए कं प नय से पैसा मलने क उ मीद है. यह आरोप भी लगाया जाता है क गैस क मत को चुनाव को यान म रखते हुए संशो धत कया गया है. 4. वा त वक त य यह है क गैस क मू य संशोधन या से चुनाव का कोई लेना-देना नह ं है. क मत म संशोधन चुनाव के कारण नह ं वरन भावी मू य फ़ॉमूले के कारण है, जो क के वल 1 अ ैल, 2014 तक ह भावी है. एनईएलपी ने ताव क वीकृ त शत के अनु प इस शत पर अंतररा य बो लयां आमं त क थीं क कां े टस को अपनी गैस बाज़ार मू य पर नकटवत थान पर बेचने क अनुम त होगी. दोन ह ताव शत एवं पीएससी 1997 म ग ठत कए गए थे, जब क न तो कां ेस और न ह भाजपा स ता म थी. त य यह भी है क एफ़आईआर के एक शकायतकता तब मं मंडल य स चव थे, िज ह ने शत को अपनी वीकृ त द थी, िज ह अब याि वत कया जा रहा है. वे अब इस फै सले पर कै से सवाल खड़े कर रहे ह, जब क एक मं मंडल य स चव होने के नाते वे इस फै सले का खुद एक ह सा थे.